TavPrasad Savaiye (Deenan Kee),
ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਸ੍ਵੱਯੇ (ਦੀਨਨ ਕੀ),
त्वप्रसादि स्वये (दीनन की)


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Gurbani LangMeanings
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ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

ikOankaar satigur prasaadh ||

ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

पातिसाही १० ॥

paatisaahee 10 ||

ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਸ੍ਵੱਯੇ ॥

त्व प्रसादि ॥ स्वय्ये ॥

tavai prasaadh || savai'ye ||


ਦੀਨਨ ਕੀ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲ ਕਰੈ ਨਿਤ ਸੰਤ ਉਬਾਰਿ ਗਨੀਮਨ ਗਾਰੈ ॥

दीनन की प्रतिपाल करै नित संत उबारि गनीमन गारै ॥

dheenan kee pratipaal karai nit sa(n)t ubaar ganeeman gaarai ||

ਪੱਛ ਪਸੂ ਨਗ ਨਾਗ ਨਰਾਧਪ ਸਰਬ ਸਮੈ ਸਭ ਕੋ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰੈ ॥

पच्छ पसू नग नाग नराधप सरब समै सभ को प्रतिपारै ॥

pa'chh pasoo nag naag naraadhap sarab samai sabh ko pratipaarai ||

ਪੋਖਤ ਹੈ ਜਲ ਮੈ ਥਲ ਮੈ ਪਲ ਮੈ ਕਲਿ ਕੇ ਨਹੀਂ ਕਰਮ ਬਿਚਾਰੈ ॥

पोखत है जल मै थल मै पल मै कलि के नहीं करम बिचारै ॥

pokhat hai jal mai thal mai pal mai kal ke nahee(n) karam bichaarai ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਦਇਆ ਨਿਧਿ ਦੋਖਨ ਦੇਖਤ ਹੈ ਪਰੁ ਦੇਤ ਨ ਹਾਰੈ ॥੧॥੨੪੩॥

दीन दइआल दइआ निधि दोखन देखत है परु देत न हारै ॥१॥२४३॥

dheen dhiaal dhiaa nidh dhokhan dhekhat hai par dhet na haarai ||1||243||


ਦਾਹਤ ਹੈ ਦੁਖ ਦੋਖਨ ਕੌ ਦਲ ਦੁੱਜਨ ਕੇ ਪਲ ਮੈ ਦਲ ਡਾਰੈ ॥

दाहत है दुख दोखन कौ दल दुज्जन के पल मै दल डारै ॥

dhaahat hai dhukh dhokhan kau dhal dhu'jan ke pal mai dhal ddaarai ||

ਖੰਡ ਅਖੰਡ ਪ੍ਰਚੰਡ ਪਹਾਰਨ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰੇਮ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤ ਸੰਭਾਰੈ ॥

खंड अखंड प्रचंड पहारन पूरन प्रेम की प्रीत संभारै ॥

kha(n)dd akha(n)dd pracha(n)dd pahaaran pooran prem kee preet sa(n)bhaarai ||

ਪਾਰ ਨ ਪਾਇ ਸਕੈ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਅਭੇਦ ਉਚਾਰੈ ॥

पार न पाइ सकै पदमा पति बेद कतेब अभेद उचारै ॥

paar na pai sakai padhamaa pat bedh kateb abhedh uchaarai ||

ਰੋਜੀ ਹੀ ਰਾਜ ਬਿਲੋਕਤ ਰਾਜਕ ਰੋਖ ਰੂਹਾਨ ਕੀ ਰੋਜੀ ਨ ਟਾਰੈ ॥੨॥੨੪੪॥

रोजी ही राज बिलोकत राजक रोख रूहान की रोजी न टारै ॥२॥२४४॥

rojee hee raaj bilokat raajak rokh roohaan kee rojee na Taarai ||2||244||


ਕੀਟ ਪਤੰਗ ਕੁਰੰਗ ਭੁਜੰਗਮ ਭੂਤ ਭਵਿੱਖ ਭਵਾਨ ਬਨਾਏ ॥

कीट पतंग कुरंग भुजंगम भूत भविक्ख भवान बनाए ॥

keeT pata(n)g kura(n)g bhuja(n)gam bhoot bhavi'kh bhavaan banaae ||

ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਖਪੇ ਅਹੰਮੇਵ ਨ ਭੇਵ ਲਖਿਓ ਭ੍ਰਮ ਸਿਉ ਭਰਮਾਏ ॥

देव अदेव खपे अहंमेव न भेव लखिओ भ्रम सिउ भरमाए ॥

dhev adhev khape aha(n)mev na bhev lakhio bhram siau bharamaae ||

ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕਤੇਬ ਕੁਰਾਨ ਹਸੇਬ ਥਕੇ ਕਰ ਹਾਥ ਨ ਆਏ ॥

बेद पुरान कतेब कुरान हसेब थके कर हाथ न आए ॥

bedh puraan kateb kuraan haseb thake kar haath na aae ||

ਪੂਰਨ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਭਾਉ ਬਿਨਾ ਪਤਿ ਸਿਉ ਕਿਨ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਪਾਏ ॥੩॥੨੪੫॥

पूरन प्रेम प्रभाउ बिना पति सिउ किन स्री पदमा पति पाए ॥३॥२४५॥

pooran prem prabhaau binaa pat siau kin sree padhamaa pat paae ||3||245||


ਆਦਿ ਅਨੰਤ ਅਗਾਧ ਅਦ੍ਵੈਖ ਸੁ ਭੂਤ ਭਵਿੱਖ ਭਵਾਨ ਅਭੈ ਹੈ ॥

आदि अनंत अगाध अद्वैख सु भूत भविक्ख भवान अभै है ॥

aadh ana(n)t agaadh adhavaikh su bhoot bhavi'kh bhavaan abhai hai ||

ਅੰਤਿ ਬਿਹੀਨ ਅਨਾਤਮ ਆਪ ਅਦਾਗ ਅਦੋਖ ਅਛਿੱਦ੍ਰ ਅਛੈ ਹੈ ॥

अंति बिहीन अनातम आप अदाग अदोख अछिद्द्र अछै है ॥

a(n)t biheen anaatam aap adhaag adhokh achhi'dhr achhai hai ||

ਲੋਗਨ ਕੇ ਕਰਤਾ ਹਰਤਾ ਜਲ ਮੈ ਥਲ ਮੈ ਭਰਤਾ ਪ੍ਰਭ ਵੈ ਹੈ ॥

लोगन के करता हरता जल मै थल मै भरता प्रभ वै है ॥

logan ke karataa harataa jal mai thal mai bharataa prabh vai hai ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਦਇਆ ਕਰ ਸ੍ਰੀ ਪਤਿ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਏਹੈ ॥੪॥੨੪੬॥

दीन दइआल दइआ कर स्री पति सुँदर स्री पदमा पति एहै ॥४॥२४६॥

dheen dhiaal dhiaa kar sree pat su(n)dhar sree padhamaa pat ehai ||4||246||


ਕਾਮ ਨ ਕ੍ਰੋਧ ਨ ਲੋਭ ਨ ਮੋਹ ਨ ਰੋਗ ਨ ਸੋਗ ਨ ਭੋਗ ਨ ਭੈ ਹੈ ॥

काम न क्रोध न लोभ न मोह न रोग न सोग न भोग न भै है ॥

kaam na krodh na lobh na moh na rog na sog na bhog na bhai hai ||

ਦੇਹ ਬਿਹੀਨ ਸਨੇਹ ਸਭੋ ਤਨ ਨੇਹ ਬਿਰਕਤ ਅਗੇਹ ਅਛੈ ਹੈ ॥

देह बिहीन सनेह सभो तन नेह बिरकत अगेह अछै है ॥

dheh biheen saneh sabho tan neh birakat ageh achhai hai ||

ਜਾਨ ਕੋ ਦੇਤ ਅਜਾਨ ਕੋ ਦੇਤ ਜਮੀਨ ਕੋ ਦੇਤ ਜਮਾਨ ਕੋ ਦੈ ਹੈ ॥

जान को देत अजान को देत जमीन को देत जमान को दै है ॥

jaan ko dhet ajaan ko dhet jameen ko dhet jamaan ko dhai hai ||

ਕਾਹੇ ਕੋ ਡੋਲਤ ਹੈ ਤੁਮਰੀ ਸੁਧ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਲੈਹੈ ॥੫॥੨੪੭॥

काहे को डोलत है तुमरी सुध सुँदर स्री पदमा पति लैहै ॥५॥२४७॥

kaahe ko ddolat hai tumaree sudh su(n)dhar sree padhamaa pat laihai ||5||247||


ਰੋਗਨ ਤੇ ਅਰ ਸੋਗਨ ਤੇ ਜਲ ਜੋਗਨ ਤੇ ਬਹੁ ਭਾਂਤਿ ਬਚਾਵੈ ॥

रोगन ते अर सोगन ते जल जोगन ते बहु भाँति बचावै ॥

rogan te ar sogan te jal jogan te bahu bhaa(n)t bachaavai ||

ਸੱਤ੍ਰ ਅਨੇਕ ਚਲਾਵਤ ਘਾਵ ਤਊ ਤਨ ਏਕੁ ਨ ਲਾਗਨ ਪਾਵੈ ॥

सत्त्र अनेक चलावत घाव तऊ तन एकु न लागन पावै ॥

sa'tr anek chalaavat ghaav tuoo tan ek na laagan paavai ||

ਰਾਖਤ ਹੈ ਅਪਨੋ ਕਰੁ ਦੈ ਕਰ ਪਾਪ ਸੰਬੂਹ ਨ ਭੇਟਨ ਪਾਵੈ ॥

राखत है अपनो करु दै कर पाप संबूह न भेटन पावै ॥

raakhat hai apano kar dhai kar paap sa(n)booh na bheTan paavai ||

ਔਰ ਕੀ ਬਾਤ ਕਹਾ ਕਹ ਤੋ ਸੌਂ ਸੁ ਪੇਟ ਹੀ ਕੇ ਪਟ ਬੀਚ ਬਚਾਵੈ ॥੬॥੨੪੮॥

और की बात कहा कह तो सौं सु पेट ही के पट बीच बचावै ॥६॥२४८॥

aauar kee baat kahaa keh to saua(n) su peT hee ke paT beech bachaavai ||6||248||


ਜੱਛ ਭੁਜੰਗ ਸੁ ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਅਭੇਵ ਤੁਮੈ ਸਭ ਹੀ ਕਰਿ ਧਿਆਵੈਂ ॥

जच्छ भुजंग सु दानव देव अभेव तुमै सभ ही करि धिआवैं ॥

ja'chh bhuja(n)g su dhaanav dhev abhev tumai sabh hee kar dhiaavai(n) ||

ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲ ਰਸਾਤਲ ਜੱਛ ਭੁਜੰਗ ਸਭੈ ਸਿਰ ਨਿਆਵੈਂ ॥

भूमि अकास पताल रसातल जच्छ भुजंग सभै सिर निआवैं ॥

bhoom akaas pataal rasaatal ja'chh bhuja(n)g sabhai sir niaavai(n) ||

ਪਾਇ ਸਕੈ ਨਹੀ ਪਾਰ ਪ੍ਰਭਾ ਹੂ ਕੋ ਨੇਤ ਹੀ ਨੇਤਹ ਬੇਦ ਬਤਾਵੈਂ ॥

पाइ सकै नही पार प्रभा हू को नेत ही नेतह बेद बतावैं ॥

pai sakai nahee paar prabhaa hoo ko net hee neteh bedh bataavai(n) ||

ਖੋਜ ਥਕੇ ਸਭ ਹੀ ਖੁਜੀਆ ਸੁਰ ਹਾਰ ਪਰੇ ਹਰਿ ਹਾਥ ਨ ਆਵੈ ॥੭॥੨੪੯॥

खोज थके सभ ही खुजीआ सुर हार परे हरि हाथ न आवै ॥७॥२४९॥

khoj thake sabh hee khujeeaa sur haar pare har haath na aavai ||7||249||


ਨਾਰਦ ਸੇ ਚਤੁਰਾਨਨ ਸੇ ਰੁਮਨਾ ਰਿਖ ਸੇ ਸਭ ਹੂੰ ਮਿਲਿ ਗਾਇਓ ॥

नारद से चतुरानन से रुमना रिख से सभ हूँ मिलि गाइओ ॥

naaradh se chaturaanan se rumanaa rikh se sabh hoo(n) mil gaio ||

ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਨ ਭੇਦ ਲਖਿਓ ਸਭ ਹਾਰ ਪਰੇ ਹਰਿ ਹਾਥਿ ਨ ਆਇਓ ॥

बेद कतेब न भेद लखिओ सभ हार परे हरि हाथि न आइओ ॥

bedh kateb na bhedh lakhio sabh haar pare har haath na aaio ||

ਪਾਇ ਸਕੈ ਨਹੀ ਪਾਰ ਉਮਾਪਤਿ ਸਿੱਧ ਸਨਾਥ ਸਨੰਤਨ ਧਿਆਇਓ ॥

पाइ सकै नही पार उमापति सिद्ध सनाथ सनंतन धिआइओ ॥

pai sakai nahee paar umaapat si'dh sanaath sana(n)tan dhiaaio ||

ਧਿਆਨ ਧਰੋ ਤਿਹ ਕੋ ਮਨ ਮੈਂ ਜਿਹ ਕੋ ਅਮਿਤੋਜਿ ਸਭੈ ਜਗੁ ਛਾਇਓ ॥੮॥੨੫੦॥

धिआन धरो तिह को मन मैं जिह को अमितोजि सभै जगु छाइओ ॥८॥२५०॥

dhiaan dharo teh ko man mai(n) jeh ko amitoj sabhai jag chhaio ||8||250||


ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕਤੇਬ ਕੁਰਾਨ ਅਭੇਦ ਨ੍ਰਿਪਾਨ ਸਭੈ ਪਚ ਹਾਰੇ ॥

बेद पुरान कतेब कुरान अभेद नृपान सभै पच हारे ॥

bedh puraan kateb kuraan abhedh nirapaan sabhai pach haare ||

ਭੇਦ ਨ ਪਾਇ ਸਕਿਓ ਅਨਭੇਦ ਕੋ ਖੇਦਤ ਹੈ ਅਨਛੇਦ ਪੁਕਾਰੇ ॥

भेद न पाइ सकिओ अनभेद को खेदत है अनछेद पुकारे ॥

bhedh na pai sakio anabhedh ko khedhat hai anachhedh pukaare ||

ਰਾਗ ਨ ਰੂਪ ਨ ਰੇਖ ਨ ਰੰਗ ਨ ਸਾਕ ਨ ਸੋਗ ਨ ਸੰਗਿ ਤਿਹਾਰੇ ॥

राग न रूप न रेख न रंग न साक न सोग न संगि तिहारे ॥

raag na roop na rekh na ra(n)g na saak na sog na sa(n)g tihaare ||

ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧ ਅਭੇਖ ਅਦ੍ਵੈਖ ਜਪਿਓ ਤਿਨ ਹੀ ਕੁਲ ਤਾਰੇ ॥੯॥੨੫੧॥

आदि अनादि अगाध अभेख अद्वैख जपिओ तिन ही कुल तारे ॥९॥२५१॥

aadh anaadh agaadh abhekh adhavaikh japio tin hee kul taare ||9||251||


ਤੀਰਥ ਕੋਟ ਕੀਏ ਇਸਨਾਨ ਦੀਏ ਬਹੁ ਦਾਨ ਮਹਾ ਬ੍ਰਤ ਧਾਰੇ ॥

तीरथ कोट कीए इसनान दीए बहु दान महा ब्रत धारे ॥

teerath koT ke'ee isanaan dhe'ee bahu dhaan mahaa brat dhaare ||

ਦੇਸ ਫਿਰਿਓ ਕਰ ਭੇਸ ਤਪੋਧਨ ਕੇਸ ਧਰੇ ਨ ਮਿਲੇ ਹਰਿ ਪਿਆਰੇ ॥

देस फिरिओ कर भेस तपोधन केस धरे न मिले हरि पिआरे ॥

dhes firio kar bhes tapodhan kes dhare na mile har piaare ||

ਆਸਨ ਕੋਟ ਕਰੇ ਅਸਟਾਂਗ ਧਰੇ ਬਹੁ ਨਿਆਸ ਕਰੇ ਮੁਖ ਕਾਰੇ ॥

आसन कोट करे असटाँग धरे बहु निआस करे मुख कारे ॥

aasan koT kare asaTaa(n)g dhare bahu niaas kare mukh kaare ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਅਕਾਲ ਭਜੇ ਬਿਨੁ ਅੰਤ ਕੋ ਅੰਤ ਕੇ ਧਾਮ ਸਿਧਾਰੇ ॥੧੦॥੨੫੨॥

दीन दइआल अकाल भजे बिनु अंत को अंत के धाम सिधारे ॥१०॥२५२॥

dheen dhiaal akaal bhaje bin a(n)t ko a(n)t ke dhaam sidhaare ||10||252||



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