Pt 2 - सोलहे, Part 2 - Solhe (Mahalla 1 3 4 5) Path in Hindi Gurbani online


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मारू महला १ ॥
सुंन कला अपर्मपरि धारी ॥ आपि निरालमु अपर अपारी ॥ आपे कुदरति करि करि देखै सुंनहु सुंनु उपाइदा ॥१॥ पउणु पाणी सुंनै ते साजे ॥ स्रिसटि उपाइ काइआ गड़ राजे ॥ अगनि पाणी जीउ जोति तुमारी सुंने कला रहाइदा ॥२॥ सुंनहु ब्रहमा बिसनु महेसु उपाए ॥ सुंने वरते जुग सबाए ॥ इसु पद वीचारे सो जनु पूरा तिसु मिलीऐ भरमु चुकाइदा ॥३॥ सुंनहु सपत सरोवर थापे ॥ जिनि साजे वीचारे आपे ॥ तितु सत सरि मनूआ गुरमुखि नावै फिरि बाहुड़ि जोनि न पाइदा ॥४॥ सुंनहु चंदु सूरजु गैणारे ॥ तिस की जोति त्रिभवण सारे ॥ सुंने अलख अपार निरालमु सुंने ताड़ी लाइदा ॥५॥ सुंनहु धरति अकासु उपाए ॥ बिनु थमा राखे सचु कल पाए ॥ त्रिभवण साजि मेखुली माइआ आपि उपाइ खपाइदा ॥६॥ सुंनहु खाणी सुंनहु बाणी ॥ सुंनहु उपजी सुंनि समाणी ॥ उतभुजु चलतु कीआ सिरि करतै बिसमादु सबदि देखाइदा ॥७॥ सुंनहु राति दिनसु दुइ कीए ॥ ओपति खपति सुखा दुख दीए ॥ सुख दुख ही ते अमरु अतीता गुरमुखि निज घरु पाइदा ॥८॥ साम वेदु रिगु जुजरु अथरबणु ॥ ब्रहमे मुखि माइआ है त्रै गुण ॥ ता की कीमति कहि न सकै को तिउ बोले जिउ बोलाइदा ॥९॥ सुंनहु सपत पाताल उपाए ॥ सुंनहु भवण रखे लिव लाए ॥ आपे कारणु कीआ अपर्मपरि सभु तेरो कीआ कमाइदा ॥१०॥ रज तम सत कल तेरी छाइआ ॥ जनम मरण हउमै दुखु पाइआ ॥ जिस नो क्रिपा करे हरि गुरमुखि गुणि चउथै मुकति कराइदा ॥११॥ सुंनहु उपजे दस अवतारा ॥ स्रिसटि उपाइ कीआ पासारा ॥ देव दानव गण गंधरब साजे सभि लिखिआ करम कमाइदा ॥१२॥ गुरमुखि समझै रोगु न होई ॥ इह गुर की पउड़ी जाणै जनु कोई ॥ जुगह जुगंतरि मुकति पराइण सो मुकति भइआ पति पाइदा ॥१३॥ पंच ततु सुंनहु परगासा ॥ देह संजोगी करम अभिआसा ॥ बुरा भला दुइ मसतकि लीखे पापु पुंनु बीजाइदा ॥१४॥ ऊतम सतिगुर पुरख निराले ॥ सबदि रते हरि रसि मतवाले ॥ रिधि बुधि सिधि गिआनु गुरू ते पाईऐ पूरै भागि मिलाइदा ॥१५॥ इसु मन माइआ कउ नेहु घनेरा ॥ कोई बूझहु गिआनी करहु निबेरा ॥ आसा मनसा हउमै सहसा नरु लोभी कूड़ु कमाइदा ॥१६॥ सतिगुर ते पाए वीचारा ॥ सुंन समाधि सचे घर बारा ॥ नानक निरमल नादु सबद धुनि सचु रामै नामि समाइदा ॥१७॥५॥१७॥

मारू महला १ ॥
जह देखा तह दीन दइआला ॥ आइ न जाई प्रभु किरपाला ॥ जीआ अंदरि जुगति समाई रहिओ निरालमु राइआ ॥१॥ जगु तिस की छाइआ जिसु बापु न माइआ ॥ ना तिसु भैण न भराउ कमाइआ ॥ ना तिसु ओपति खपति कुल जाती ओहु अजरावरु मनि भाइआ ॥२॥ तू अकाल पुरखु नाही सिरि काला ॥ तू पुरखु अलेख अगम निराला ॥ सत संतोखि सबदि अति सीतलु सहज भाइ लिव लाइआ ॥३॥ त्रै वरताइ चउथै घरि वासा ॥ काल बिकाल कीए इक ग्रासा ॥ निरमल जोति सरब जगजीवनु गुरि अनहद सबदि दिखाइआ ॥४॥ ऊतम जन संत भले हरि पिआरे ॥ हरि रस माते पारि उतारे ॥ नानक रेण संत जन संगति हरि गुर परसादी पाइआ ॥५॥ तू अंतरजामी जीअ सभि तेरे ॥ तू दाता हम सेवक तेरे ॥ अम्रित नामु क्रिपा करि दीजै गुरि गिआन रतनु दीपाइआ ॥६॥ पंच ततु मिलि इहु तनु कीआ ॥ आतम राम पाए सुखु थीआ ॥ करम करतूति अम्रित फलु लागा हरि नाम रतनु मनि पाइआ ॥७॥ ना तिसु भूख पिआस मनु मानिआ ॥ सरब निरंजनु घटि घटि जानिआ ॥ अम्रित रसि राता केवल बैरागी गुरमति भाइ सुभाइआ ॥८॥ अधिआतम करम करे दिनु राती ॥ निरमल जोति निरंतरि जाती ॥ सबदु रसालु रसन रसि रसना बेणु रसालु वजाइआ ॥९॥ बेणु रसाल वजावै सोई ॥ जा की त्रिभवण सोझी होई ॥ नानक बूझहु इह बिधि गुरमति हरि राम नामि लिव लाइआ ॥१०॥ ऐसे जन विरले संसारे ॥ गुर सबदु वीचारहि रहहि निरारे ॥ आपि तरहि संगति कुल तारहि तिन सफल जनमु जगि आइआ ॥११॥ घरु दरु मंदरु जाणै सोई ॥ जिसु पूरे गुर ते सोझी होई ॥ काइआ गड़ महल महली प्रभु साचा सचु साचा तखतु रचाइआ ॥१२॥ चतुर दस हाट दीवे दुइ साखी ॥ सेवक पंच नाही बिखु चाखी ॥ अंतरि वसतु अनूप निरमोलक गुरि मिलिऐ हरि धनु पाइआ ॥१३॥ तखति बहै तखतै की लाइक ॥ पंच समाए गुरमति पाइक ॥ आदि जुगादी है भी होसी सहसा भरमु चुकाइआ ॥१४॥ तखति सलामु होवै दिनु राती ॥ इहु साचु वडाई गुरमति लिव जाती ॥ नानक रामु जपहु तरु तारी हरि अंति सखाई पाइआ ॥१५॥१॥१८॥

मारू महला १ ॥
हरि धनु संचहु रे जन भाई ॥ सतिगुर सेवि रहहु सरणाई ॥ तसकरु चोरु न लागै ता कउ धुनि उपजै सबदि जगाइआ ॥१॥ तू एकंकारु निरालमु राजा ॥ तू आपि सवारहि जन के काजा ॥ अमरु अडोलु अपारु अमोलकु हरि असथिर थानि सुहाइआ ॥२॥ देही नगरी ऊतम थाना ॥ पंच लोक वसहि परधाना ॥ ऊपरि एकंकारु निरालमु सुंन समाधि लगाइआ ॥३॥ देही नगरी नउ दरवाजे ॥ सिरि सिरि करणैहारै साजे ॥ दसवै पुरखु अतीतु निराला आपे अलखु लखाइआ ॥४॥ पुरखु अलेखु सचे दीवाना ॥ हुकमि चलाए सचु नीसाना ॥ नानक खोजि लहहु घरु अपना हरि आतम राम नामु पाइआ ॥५॥ सरब निरंजन पुरखु सुजाना ॥ अदलु करे गुर गिआन समाना ॥ कामु क्रोधु लै गरदनि मारे हउमै लोभु चुकाइआ ॥६॥ सचै थानि वसै निरंकारा ॥ आपि पछाणै सबदु वीचारा ॥ सचै महलि निवासु निरंतरि आवण जाणु चुकाइआ ॥७॥ ना मनु चलै न पउणु उडावै ॥ जोगी सबदु अनाहदु वावै ॥ पंच सबद झुणकारु निरालमु प्रभि आपे वाइ सुणाइआ ॥८॥ भउ बैरागा सहजि समाता ॥ हउमै तिआगी अनहदि राता ॥ अंजनु सारि निरंजनु जाणै सरब निरंजनु राइआ ॥९॥ दुख भै भंजनु प्रभु अबिनासी ॥ रोग कटे काटी जम फासी ॥ नानक हरि प्रभु सो भउ भंजनु गुरि मिलिऐ हरि प्रभु पाइआ ॥१०॥ कालै कवलु निरंजनु जाणै ॥ बूझै करमु सु सबदु पछाणै ॥ आपे जाणै आपि पछाणै सभु तिस का चोजु सबाइआ ॥११॥ आपे साहु आपे वणजारा ॥ आपे परखे परखणहारा ॥ आपे कसि कसवटी लाए आपे कीमति पाइआ ॥१२॥ आपि दइआलि दइआ प्रभि धारी ॥ घटि घटि रवि रहिआ बनवारी ॥ पुरखु अतीतु वसै निहकेवलु गुर पुरखै पुरखु मिलाइआ ॥१३॥ प्रभु दाना बीना गरबु गवाए ॥ दूजा मेटै एकु दिखाए ॥ आसा माहि निरालमु जोनी अकुल निरंजनु गाइआ ॥१४॥ हउमै मेटि सबदि सुखु होई ॥ आपु वीचारे गिआनी सोई ॥ नानक हरि जसु हरि गुण लाहा सतसंगति सचु फलु पाइआ ॥१५॥२॥१९॥

मारू महला १ ॥
सचु कहहु सचै घरि रहणा ॥ जीवत मरहु भवजलु जगु तरणा ॥ गुरु बोहिथु गुरु बेड़ी तुलहा मन हरि जपि पारि लंघाइआ ॥१॥ हउमै ममता लोभ बिनासनु ॥ नउ दर मुकते दसवै आसनु ॥ ऊपरि परै परै अपर्मपरु जिनि आपे आपु उपाइआ ॥२॥ गुरमति लेवहु हरि लिव तरीऐ ॥ अकलु गाइ जम ते किआ डरीऐ ॥ जत जत देखउ तत तत तुम ही अवरु न दुतीआ गाइआ ॥३॥ सचु हरि नामु सचु है सरणा ॥ सचु गुर सबदु जितै लगि तरणा ॥ अकथु कथै देखै अपर्मपरु फुनि गरभि न जोनी जाइआ ॥४॥ सच बिनु सतु संतोखु न पावै ॥ बिनु गुर मुकति न आवै जावै ॥ मूल मंत्रु हरि नामु रसाइणु कहु नानक पूरा पाइआ ॥५॥ सच बिनु भवजलु जाइ न तरिआ ॥ एहु समुंदु अथाहु महा बिखु भरिआ ॥ रहै अतीतु गुरमति ले ऊपरि हरि निरभउ कै घरि पाइआ ॥६॥ झूठी जग हित की चतुराई ॥ बिलम न लागै आवै जाई ॥ नामु विसारि चलहि अभिमानी उपजै बिनसि खपाइआ ॥७॥ उपजहि बिनसहि बंधन बंधे ॥ हउमै माइआ के गलि फंधे ॥ जिसु राम नामु नाही मति गुरमति सो जम पुरि बंधि चलाइआ ॥८॥ गुर बिनु मोख मुकति किउ पाईऐ ॥ बिनु गुर राम नामु किउ धिआईऐ ॥ गुरमति लेहु तरहु भव दुतरु मुकति भए सुखु पाइआ ॥९॥ गुरमति क्रिसनि गोवरधन धारे ॥ गुरमति साइरि पाहण तारे ॥ गुरमति लेहु परम पदु पाईऐ नानक गुरि भरमु चुकाइआ ॥१०॥ गुरमति लेहु तरहु सचु तारी ॥ आतम चीनहु रिदै मुरारी ॥ जम के फाहे काटहि हरि जपि अकुल निरंजनु पाइआ ॥११॥ गुरमति पंच सखे गुर भाई ॥ गुरमति अगनि निवारि समाई ॥ मनि मुखि नामु जपहु जगजीवन रिद अंतरि अलखु लखाइआ ॥१२॥ गुरमुखि बूझै सबदि पतीजै ॥ उसतति निंदा किस की कीजै ॥ चीनहु आपु जपहु जगदीसरु हरि जगंनाथु मनि भाइआ ॥१३॥ जो ब्रहमंडि खंडि सो जाणहु ॥ गुरमुखि बूझहु सबदि पछाणहु ॥ घटि घटि भोगे भोगणहारा रहै अतीतु सबाइआ ॥१४॥ गुरमति बोलहु हरि जसु सूचा ॥ गुरमति आखी देखहु ऊचा ॥ स्रवणी नामु सुणै हरि बाणी नानक हरि रंगि रंगाइआ ॥१५॥३॥२०॥

मारू महला १ ॥
कामु क्रोधु परहरु पर निंदा ॥ लबु लोभु तजि होहु निचिंदा ॥ भ्रम का संगलु तोड़ि निराला हरि अंतरि हरि रसु पाइआ ॥१॥ निसि दामनि जिउ चमकि चंदाइणु देखै ॥ अहिनिसि जोति निरंतरि पेखै ॥ आनंद रूपु अनूपु सरूपा गुरि पूरै देखाइआ ॥२॥ सतिगुर मिलहु आपे प्रभु तारे ॥ ससि घरि सूरु दीपकु गैणारे ॥ देखि अदिसटु रहहु लिव लागी सभु त्रिभवणि ब्रहमु सबाइआ ॥३॥ अम्रित रसु पाए त्रिसना भउ जाए ॥ अनभउ पदु पावै आपु गवाए ॥ ऊची पदवी ऊचो ऊचा निरमल सबदु कमाइआ ॥४॥ अद्रिसट अगोचरु नामु अपारा ॥ अति रसु मीठा नामु पिआरा ॥ नानक कउ जुगि जुगि हरि जसु दीजै हरि जपीऐ अंतु न पाइआ ॥५॥ अंतरि नामु परापति हीरा ॥ हरि जपते मनु मन ते धीरा ॥ दुघट घट भउ भंजनु पाईऐ बाहुड़ि जनमि न जाइआ ॥६॥ भगति हेति गुर सबदि तरंगा ॥ हरि जसु नामु पदारथु मंगा ॥ हरि भावै गुर मेलि मिलाए हरि तारे जगतु सबाइआ ॥७॥ जिनि जपु जपिओ सतिगुर मति वा के ॥ जमकंकर कालु सेवक पग ता के ॥ ऊतम संगति गति मिति ऊतम जगु भउजलु पारि तराइआ ॥८॥ इहु भवजलु जगतु सबदि गुर तरीऐ ॥ अंतर की दुबिधा अंतरि जरीऐ ॥ पंच बाण ले जम कउ मारै गगनंतरि धणखु चड़ाइआ ॥९॥ साकत नरि सबद सुरति किउ पाईऐ ॥ सबद सुरति बिनु आईऐ जाईऐ ॥ नानक गुरमुखि मुकति पराइणु हरि पूरै भागि मिलाइआ ॥१०॥ निरभउ सतिगुरु है रखवाला ॥ भगति परापति गुर गोपाला ॥ धुनि अनंद अनाहदु वाजै गुर सबदि निरंजनु पाइआ ॥११॥ निरभउ सो सिरि नाही लेखा ॥ आपि अलेखु कुदरति है देखा ॥ आपि अतीतु अजोनी स्मभउ नानक गुरमति सो पाइआ ॥१२॥ अंतर की गति सतिगुरु जाणै ॥ सो निरभउ गुर सबदि पछाणै ॥ अंतरु देखि निरंतरि बूझै अनत न मनु डोलाइआ ॥१३॥ निरभउ सो अभ अंतरि वसिआ ॥ अहिनिसि नामि निरंजन रसिआ ॥ नानक हरि जसु संगति पाईऐ हरि सहजे सहजि मिलाइआ ॥१४॥ अंतरि बाहरि सो प्रभु जाणै ॥ रहै अलिपतु चलते घरि आणै ॥ ऊपरि आदि सरब तिहु लोई सचु नानक अम्रित रसु पाइआ ॥१५॥४॥२१॥

मारू महला १ ॥
कुदरति करनैहार अपारा ॥ कीते का नाही किहु चारा ॥ जीअ उपाइ रिजकु दे आपे सिरि सिरि हुकमु चलाइआ ॥१॥ हुकमु चलाइ रहिआ भरपूरे ॥ किसु नेड़ै किसु आखां दूरे ॥ गुपत प्रगट हरि घटि घटि देखहु वरतै ताकु सबाइआ ॥२॥ जिस कउ मेले सुरति समाए ॥ गुर सबदी हरि नामु धिआए ॥ आनद रूप अनूप अगोचर गुर मिलिऐ भरमु जाइआ ॥३॥ मन तन धन ते नामु पिआरा ॥ अंति सखाई चलणवारा ॥ मोह पसार नही संगि बेली बिनु हरि गुर किनि सुखु पाइआ ॥४॥ जिस कउ नदरि करे गुरु पूरा ॥ सबदि मिलाए गुरमति सूरा ॥ नानक गुर के चरन सरेवहु जिनि भूला मारगि पाइआ ॥५॥ संत जनां हरि धनु जसु पिआरा ॥ गुरमति पाइआ नामु तुमारा ॥ जाचिकु सेव करे दरि हरि कै हरि दरगह जसु गाइआ ॥६॥ सतिगुरु मिलै त महलि बुलाए ॥ साची दरगह गति पति पाए ॥ साकत ठउर नाही हरि मंदर जनम मरै दुखु पाइआ ॥७॥ सेवहु सतिगुर समुंदु अथाहा ॥ पावहु नामु रतनु धनु लाहा ॥ बिखिआ मलु जाइ अम्रित सरि नावहु गुर सर संतोखु पाइआ ॥८॥ सतिगुर सेवहु संक न कीजै ॥ आसा माहि निरासु रहीजै ॥ संसा दूख बिनासनु सेवहु फिरि बाहुड़ि रोगु न लाइआ ॥९॥ साचे भावै तिसु वडीआए ॥ कउनु सु दूजा तिसु समझाए ॥ हरि गुर मूरति एका वरतै नानक हरि गुर भाइआ ॥१०॥ वाचहि पुसतक वेद पुरानां ॥ इक बहि सुनहि सुनावहि कानां ॥ अजगर कपटु कहहु किउ खुल्है बिनु सतिगुर ततु न पाइआ ॥११॥ करहि बिभूति लगावहि भसमै ॥ अंतरि क्रोधु चंडालु सु हउमै ॥ पाखंड कीने जोगु न पाईऐ बिनु सतिगुर अलखु न पाइआ ॥१२॥ तीरथ वरत नेम करहि उदिआना ॥ जतु सतु संजमु कथहि गिआना ॥ राम नाम बिनु किउ सुखु पाईऐ बिनु सतिगुर भरमु न जाइआ ॥१३॥ निउली करम भुइअंगम भाठी ॥ रेचक कु्मभक पूरक मन हाठी ॥ पाखंड धरमु प्रीति नही हरि सउ गुर सबद महा रसु पाइआ ॥१४॥ कुदरति देखि रहे मनु मानिआ ॥ गुर सबदी सभु ब्रहमु पछानिआ ॥ नानक आतम रामु सबाइआ गुर सतिगुर अलखु लखाइआ ॥१५॥५॥२२॥

मारू सोलहे महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

हुकमी सहजे स्रिसटि उपाई ॥ करि करि वेखै अपणी वडिआई ॥ आपे करे कराए आपे हुकमे रहिआ समाई हे ॥१॥ माइआ मोहु जगतु गुबारा ॥ गुरमुखि बूझै को वीचारा ॥ आपे नदरि करे सो पाए आपे मेलि मिलाई हे ॥२॥ आपे मेले दे वडिआई ॥ गुर परसादी कीमति पाई ॥ मनमुखि बहुतु फिरै बिललादी दूजै भाइ खुआई हे ॥३॥ हउमै माइआ विचे पाई ॥ मनमुख भूले पति गवाई ॥ गुरमुखि होवै सो नाइ राचै साचै रहिआ समाई हे ॥४॥ गुर ते गिआनु नाम रतनु पाइआ ॥ मनसा मारि मन माहि समाइआ ॥ आपे खेल करे सभि करता आपे देइ बुझाई हे ॥५॥ सतिगुरु सेवे आपु गवाए ॥ मिलि प्रीतम सबदि सुखु पाए ॥ अंतरि पिआरु भगती राता सहजि मते बणि आई हे ॥६॥ दूख निवारणु गुर ते जाता ॥ आपि मिलिआ जगजीवनु दाता ॥ जिस नो लाए सोई बूझै भउ भरमु सरीरहु जाई हे ॥७॥ आपे गुरमुखि आपे देवै ॥ सचै सबदि सतिगुरु सेवै ॥ जरा जमु तिसु जोहि न साकै साचे सिउ बणि आई हे ॥८॥ त्रिसना अगनि जलै संसारा ॥ जलि जलि खपै बहुतु विकारा ॥ मनमुखु ठउर न पाए कबहू सतिगुर बूझ बुझाई हे ॥९॥ सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥ साचै नामि सदा लिव लागी ॥ अंतरि नामु रविआ निहकेवलु त्रिसना सबदि बुझाई हे ॥१०॥ सचा सबदु सची है बाणी ॥ गुरमुखि विरलै किनै पछाणी ॥ सचै सबदि रते बैरागी आवणु जाणु रहाई हे ॥११॥ सबदु बुझै सो मैलु चुकाए ॥ निरमल नामु वसै मनि आए ॥ सतिगुरु अपणा सद ही सेवहि हउमै विचहु जाई हे ॥१२॥ गुर ते बूझै ता दरु सूझै ॥ नाम विहूणा कथि कथि लूझै ॥ सतिगुर सेवे की वडिआई त्रिसना भूख गवाई हे ॥१३॥ आपे आपि मिलै ता बूझै ॥ गिआन विहूणा किछू न सूझै ॥ गुर की दाति सदा मन अंतरि बाणी सबदि वजाई हे ॥१४॥ जो धुरि लिखिआ सु करम कमाइआ ॥ कोइ न मेटै धुरि फुरमाइआ ॥ सतसंगति महि तिन ही वासा जिन कउ धुरि लिखि पाई हे ॥१५॥ अपणी नदरि करे सो पाए ॥ सचै सबदि ताड़ी चितु लाए ॥ नानक दासु कहै बेनंती भीखिआ नामु दरि पाई हे ॥१६॥१॥

मारू महला ३ ॥
एको एकु वरतै सभु सोई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥ एको रवि रहिआ सभ अंतरि तिसु बिनु अवरु न कोई हे ॥१॥ लख चउरासीह जीअ उपाए ॥ गिआनी धिआनी आखि सुणाए ॥ सभना रिजकु समाहे आपे कीमति होर न होई हे ॥२॥ माइआ मोहु अंधु अंधारा ॥ हउमै मेरा पसरिआ पासारा ॥ अनदिनु जलत रहै दिनु राती गुर बिनु सांति न होई हे ॥३॥ आपे जोड़ि विछोड़े आपे ॥ आपे थापि उथापे आपे ॥ सचा हुकमु सचा पासारा होरनि हुकमु न होई हे ॥४॥ आपे लाइ लए सो लागै ॥ गुर परसादी जम का भउ भागै ॥ अंतरि सबदु सदा सुखदाता गुरमुखि बूझै कोई हे ॥५॥ आपे मेले मेलि मिलाए ॥ पुरबि लिखिआ सो मेटणा न जाए ॥ अनदिनु भगति करे दिनु राती गुरमुखि सेवा होई हे ॥६॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु जाता ॥ आपे आइ मिलिआ सभना का दाता ॥ हउमै मारि त्रिसना अगनि निवारी सबदु चीनि सुखु होई हे ॥७॥ काइआ कुट्मबु मोहु न बूझै ॥ गुरमुखि होवै त आखी सूझै ॥ अनदिनु नामु रवै दिनु राती मिलि प्रीतम सुखु होई हे ॥८॥ मनमुख धातु दूजै है लागा ॥ जनमत की न मूओ आभागा ॥ आवत जात बिरथा जनमु गवाइआ बिनु गुर मुकति न होई हे ॥९॥ काइआ कुसुध हउमै मलु लाई ॥ जे सउ धोवहि ता मैलु न जाई ॥ सबदि धोपै ता हछी होवै फिरि मैली मूलि न होई हे ॥१०॥ पंच दूत काइआ संघारहि ॥ मरि मरि जमहि सबदु न वीचारहि ॥ अंतरि माइआ मोह गुबारा जिउ सुपनै सुधि न होई हे ॥११॥ इकि पंचा मारि सबदि है लागे ॥ सतिगुरु आइ मिलिआ वडभागे ॥ अंतरि साचु रवहि रंगि राते सहजि समावै सोई हे ॥१२॥ गुर की चाल गुरू ते जापै ॥ पूरा सेवकु सबदि सिञापै ॥ सदा सबदु रवै घट अंतरि रसना रसु चाखै सचु सोई हे ॥१३॥ हउमै मारे सबदि निवारे ॥ हरि का नामु रखै उरि धारे ॥ एकसु बिनु हउ होरु न जाणा सहजे होइ सु होई हे ॥१४॥ बिनु सतिगुर सहजु किनै नही पाइआ ॥ गुरमुखि बूझै सचि समाइआ ॥ सचा सेवि सबदि सच राते हउमै सबदे खोई हे ॥१५॥ आपे गुणदाता बीचारी ॥ गुरमुखि देवहि पकी सारी ॥ नानक नामि समावहि साचै साचे ते पति होई हे ॥१६॥२॥

मारू महला ३ ॥
जगजीवनु साचा एको दाता ॥ गुर सेवा ते सबदि पछाता ॥ एको अमरु एका पतिसाही जुगु जुगु सिरि कार बणाई हे ॥१॥ सो जनु निरमलु जिनि आपु पछाता ॥ आपे आइ मिलिआ सुखदाता ॥ रसना सबदि रती गुण गावै दरि साचै पति पाई हे ॥२॥ गुरमुखि नामि मिलै वडिआई ॥ मनमुखि निंदकि पति गवाई ॥ नामि रते परम हंस बैरागी निज घरि ताड़ी लाई हे ॥३॥ सबदि मरै सोई जनु पूरा ॥ सतिगुरु आखि सुणाए सूरा ॥ काइआ अंदरि अम्रित सरु साचा मनु पीवै भाइ सुभाई हे ॥४॥ पड़ि पंडितु अवरा समझाए ॥ घर जलते की खबरि न पाए ॥ बिनु सतिगुर सेवे नामु न पाईऐ पड़ि थाके सांति न आई हे ॥५॥ इकि भसम लगाइ फिरहि भेखधारी ॥ बिनु सबदै हउमै किनि मारी ॥ अनदिनु जलत रहहि दिनु राती भरमि भेखि भरमाई हे ॥६॥ इकि ग्रिह कुट्मब महि सदा उदासी ॥ सबदि मुए हरि नामि निवासी ॥ अनदिनु सदा रहहि रंगि राते भै भाइ भगति चितु लाई हे ॥७॥ मनमुखु निंदा करि करि विगुता ॥ अंतरि लोभु भउकै जिसु कुता ॥ जमकालु तिसु कदे न छोडै अंति गइआ पछुताई हे ॥८॥ सचै सबदि सची पति होई ॥ बिनु नावै मुकति न पावै कोई ॥ बिनु सतिगुर को नाउ न पाए प्रभि ऐसी बणत बणाई हे ॥९॥ इकि सिध साधिक बहुतु वीचारी ॥ इकि अहिनिसि नामि रते निरंकारी ॥ जिस नो आपि मिलाए सो बूझै भगति भाइ भउ जाई हे ॥१०॥ इसनानु दानु करहि नही बूझहि ॥ इकि मनूआ मारि मनै सिउ लूझहि ॥ साचै सबदि रते इक रंगी साचै सबदि मिलाई हे ॥११॥ आपे सिरजे दे वडिआई ॥ आपे भाणै देइ मिलाई ॥ आपे नदरि करे मनि वसिआ मेरै प्रभि इउ फुरमाई हे ॥१२॥ सतिगुरु सेवहि से जन साचे ॥ मनमुख सेवि न जाणनि काचे ॥ आपे करता करि करि वेखै जिउ भावै तिउ लाई हे ॥१३॥ जुगि जुगि साचा एको दाता ॥ पूरै भागि गुर सबदु पछाता ॥ सबदि मिले से विछुड़े नाही नदरी सहजि मिलाई हे ॥१४॥ हउमै माइआ मैलु कमाइआ ॥ मरि मरि जमहि दूजा भाइआ ॥ बिनु सतिगुर सेवे मुकति न होई मनि देखहु लिव लाई हे ॥१५॥ जो तिसु भावै सोई करसी ॥ आपहु होआ ना किछु होसी ॥ नानक नामु मिलै वडिआई दरि साचै पति पाई हे ॥१६॥३॥

मारू महला ३ ॥
जो आइआ सो सभु को जासी ॥ दूजै भाइ बाधा जम फासी ॥ सतिगुरि राखे से जन उबरे साचे साचि समाई हे ॥१॥ आपे करता करि करि वेखै ॥ जिस नो नदरि करे सोई जनु लेखै ॥ गुरमुखि गिआनु तिसु सभु किछु सूझै अगिआनी अंधु कमाई हे ॥२॥ मनमुख सहसा बूझ न पाई ॥ मरि मरि जमै जनमु गवाई ॥ गुरमुखि नामि रते सुखु पाइआ सहजे साचि समाई हे ॥३॥ धंधै धावत मनु भइआ मनूरा ॥ फिरि होवै कंचनु भेटै गुरु पूरा ॥ आपे बखसि लए सुखु पाए पूरै सबदि मिलाई हे ॥४॥ दुरमति झूठी बुरी बुरिआरि ॥ अउगणिआरी अउगणिआरि ॥ कची मति फीका मुखि बोलै दुरमति नामु न पाई हे ॥५॥ अउगणिआरी कंत न भावै ॥ मन की जूठी जूठु कमावै ॥ पिर का साउ न जाणै मूरखि बिनु गुर बूझ न पाई हे ॥६॥ दुरमति खोटी खोटु कमावै ॥ सीगारु करे पिर खसम न भावै ॥ गुणवंती सदा पिरु रावै सतिगुरि मेलि मिलाई हे ॥७॥ आपे हुकमु करे सभु वेखै ॥ इकना बखसि लए धुरि लेखै ॥ अनदिनु नामि रते सचु पाइआ आपे मेलि मिलाई हे ॥८॥ हउमै धातु मोह रसि लाई ॥ गुरमुखि लिव साची सहजि समाई ॥ आपे मेलै आपे करि वेखै बिनु सतिगुर बूझ न पाई हे ॥९॥ इकि सबदु वीचारि सदा जन जागे ॥ इकि माइआ मोहि सोइ रहे अभागे ॥ आपे करे कराए आपे होरु करणा किछू न जाई हे ॥१०॥ कालु मारि गुर सबदि निवारे ॥ हरि का नामु रखै उर धारे ॥ सतिगुर सेवा ते सुखु पाइआ हरि कै नामि समाई हे ॥११॥ दूजै भाइ फिरै देवानी ॥ माइआ मोहि दुख माहि समानी ॥ बहुते भेख करै नह पाए बिनु सतिगुर सुखु न पाई हे ॥१२॥ किस नो कहीऐ जा आपि कराए ॥ जितु भावै तितु राहि चलाए ॥ आपे मिहरवानु सुखदाता जिउ भावै तिवै चलाई हे ॥१३॥ आपे करता आपे भुगता ॥ आपे संजमु आपे जुगता ॥ आपे निरमलु मिहरवानु मधुसूदनु जिस दा हुकमु न मेटिआ जाई हे ॥१४॥ से वडभागी जिनी एको जाता ॥ घटि घटि वसि रहिआ जगजीवनु दाता ॥ इक थै गुपतु परगटु है आपे गुरमुखि भ्रमु भउ जाई हे ॥१५॥ गुरमुखि हरि जीउ एको जाता ॥ अंतरि नामु सबदि पछाता ॥ जिसु तू देहि सोई जनु पाए नानक नामि वडाई हे ॥१६॥४॥

मारू महला ३ ॥
सचु सालाही गहिर ग्मभीरै ॥ सभु जगु है तिस ही कै चीरै ॥ सभि घट भोगवै सदा दिनु राती आपे सूख निवासी हे ॥१॥ सचा साहिबु सची नाई ॥ गुर परसादी मंनि वसाई ॥ आपे आइ वसिआ घट अंतरि तूटी जम की फासी हे ॥२॥ किसु सेवी तै किसु सालाही ॥ सतिगुरु सेवी सबदि सालाही ॥ सचै सबदि सदा मति ऊतम अंतरि कमलु प्रगासी हे ॥३॥ देही काची कागद मिकदारा ॥ बूंद पवै बिनसै ढहत न लागै बारा ॥ कंचन काइआ गुरमुखि बूझै जिसु अंतरि नामु निवासी हे ॥४॥ सचा चउका सुरति की कारा ॥ हरि नामु भोजनु सचु आधारा ॥ सदा त्रिपति पवित्रु है पावनु जितु घटि हरि नामु निवासी हे ॥५॥ हउ तिन बलिहारी जो साचै लागे ॥ हरि गुण गावहि अनदिनु जागे ॥ साचा सूखु सदा तिन अंतरि रसना हरि रसि रासी हे ॥६॥ हरि नामु चेता अवरु न पूजा ॥ एको सेवी अवरु न दूजा ॥ पूरै गुरि सभु सचु दिखाइआ सचै नामि निवासी हे ॥७॥ भ्रमि भ्रमि जोनी फिरि फिरि आइआ ॥ आपि भूला जा खसमि भुलाइआ ॥ हरि जीउ मिलै ता गुरमुखि बूझै चीनै सबदु अबिनासी हे ॥८॥ कामि क्रोधि भरे हम अपराधी ॥ किआ मुहु लै बोलह ना हम गुण न सेवा साधी ॥ डुबदे पाथर मेलि लैहु तुम आपे साचु नामु अबिनासी हे ॥९॥ ना कोई करे न करणै जोगा ॥ आपे करहि करावहि सु होइगा ॥ आपे बखसि लैहि सुखु पाए सद ही नामि निवासी हे ॥१०॥ इहु तनु धरती सबदु बीजि अपारा ॥ हरि साचे सेती वणजु वापारा ॥ सचु धनु जमिआ तोटि न आवै अंतरि नामु निवासी हे ॥११॥ हरि जीउ अवगणिआरे नो गुणु कीजै ॥ आपे बखसि लैहि नामु दीजै ॥ गुरमुखि होवै सो पति पाए इकतु नामि निवासी हे ॥१२॥ अंतरि हरि धनु समझ न होई ॥ गुर परसादी बूझै कोई ॥ गुरमुखि होवै सो धनु पाए सद ही नामि निवासी हे ॥१३॥ अनल वाउ भरमि भुलाई ॥ माइआ मोहि सुधि न काई ॥ मनमुख अंधे किछू न सूझै गुरमति नामु प्रगासी हे ॥१४॥ मनमुख हउमै माइआ सूते ॥ अपणा घरु न समालहि अंति विगूते ॥ पर निंदा करहि बहु चिंता जालै दुखे दुखि निवासी हे ॥१५॥ आपे करतै कार कराई ॥ आपे गुरमुखि देइ बुझाई ॥ नानक नामि रते मनु निरमलु नामे नामि निवासी हे ॥१६॥५॥

मारू महला ३ ॥
एको सेवी सदा थिरु साचा ॥ दूजै लागा सभु जगु काचा ॥ गुरमती सदा सचु सालाही साचे ही साचि पतीजै हे ॥१॥ तेरे गुण बहुते मै एकु न जाता ॥ आपे लाइ लए जगजीवनु दाता ॥ आपे बखसे दे वडिआई गुरमति इहु मनु भीजै हे ॥२॥ माइआ लहरि सबदि निवारी ॥ इहु मनु निरमलु हउमै मारी ॥ सहजे गुण गावै रंगि राता रसना रामु रवीजै हे ॥३॥ मेरी मेरी करत विहाणी ॥ मनमुखि न बूझै फिरै इआणी ॥ जमकालु घड़ी मुहतु निहाले अनदिनु आरजा छीजै हे ॥४॥ अंतरि लोभु करै नही बूझै ॥ सिर ऊपरि जमकालु न सूझै ॥ ऐथै कमाणा सु अगै आइआ अंतकालि किआ कीजै हे ॥५॥ जो सचि लागे तिन साची सोइ ॥ दूजै लागे मनमुखि रोइ ॥ दुहा सिरिआ का खसमु है आपे आपे गुण महि भीजै हे ॥६॥ गुर कै सबदि सदा जनु सोहै ॥ नाम रसाइणि इहु मनु मोहै ॥ माइआ मोह मैलु पतंगु न लागै गुरमती हरि नामि भीजै हे ॥७॥ सभना विचि वरतै इकु सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ हउमै मारि सदा सुखु पाइआ नाइ साचै अम्रितु पीजै हे ॥८॥ किलबिख दूख निवारणहारा ॥ गुरमुखि सेविआ सबदि वीचारा ॥ सभु किछु आपे आपि वरतै गुरमुखि तनु मनु भीजै हे ॥९॥ माइआ अगनि जलै संसारे ॥ गुरमुखि निवारै सबदि वीचारे ॥ अंतरि सांति सदा सुखु पाइआ गुरमती नामु लीजै हे ॥१०॥ इंद्र इंद्रासणि बैठे जम का भउ पावहि ॥ जमु न छोडै बहु करम कमावहि ॥ सतिगुरु भेटै ता मुकति पाईऐ हरि हरि रसना पीजै हे ॥११॥ मनमुखि अंतरि भगति न होई ॥ गुरमुखि भगति सांति सुखु होई ॥ पवित्र पावन सदा है बाणी गुरमति अंतरु भीजै हे ॥१२॥ ब्रहमा बिसनु महेसु वीचारी ॥ त्रै गुण बधक मुकति निरारी ॥ गुरमुखि गिआनु एको है जाता अनदिनु नामु रवीजै हे ॥१३॥ बेद पड़हि हरि नामु न बूझहि ॥ माइआ कारणि पड़ि पड़ि लूझहि ॥ अंतरि मैलु अगिआनी अंधा किउ करि दुतरु तरीजै हे ॥१४॥ बेद बाद सभि आखि वखाणहि ॥ न अंतरु भीजै न सबदु पछाणहि ॥ पुंनु पापु सभु बेदि द्रिड़ाइआ गुरमुखि अम्रितु पीजै हे ॥१५॥ आपे साचा एको सोई ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोई ॥ नानक नामि रते मनु साचा सचो सचु रवीजै हे ॥१६॥६॥

मारू महला ३ ॥
सचै सचा तखतु रचाइआ ॥ निज घरि वसिआ तिथै मोहु न माइआ ॥ सद ही साचु वसिआ घट अंतरि गुरमुखि करणी सारी हे ॥१॥ सचा सउदा सचु वापारा ॥ न तिथै भरमु न दूजा पसारा ॥ सचा धनु खटिआ कदे तोटि न आवै बूझै को वीचारी हे ॥२॥ सचै लाए से जन लागे ॥ अंतरि सबदु मसतकि वडभागे ॥ सचै सबदि सदा गुण गावहि सबदि रते वीचारी हे ॥३॥ सचो सचा सचु सालाही ॥ एको वेखा दूजा नाही ॥ गुरमति ऊचो ऊची पउड़ी गिआनि रतनि हउमै मारी हे ॥४॥ माइआ मोहु सबदि जलाइआ ॥ सचु मनि वसिआ जा तुधु भाइआ ॥ सचे की सभ सची करणी हउमै तिखा निवारी हे ॥५॥ माइआ मोहु सभु आपे कीना ॥ गुरमुखि विरलै किन ही चीना ॥ गुरमुखि होवै सु सचु कमावै साची करणी सारी हे ॥६॥ कार कमाई जो मेरे प्रभ भाई ॥ हउमै त्रिसना सबदि बुझाई ॥ गुरमति सद ही अंतरु सीतलु हउमै मारि निवारी हे ॥७॥ सचि लगे तिन सभु किछु भावै ॥ सचै सबदे सचि सुहावै ॥ ऐथै साचे से दरि साचे नदरी नदरि सवारी हे ॥८॥ बिनु साचे जो दूजै लाइआ ॥ माइआ मोह दुख सबाइआ ॥ बिनु गुर दुखु सुखु जापै नाही माइआ मोह दुखु भारी हे ॥९॥ साचा सबदु जिना मनि भाइआ ॥ पूरबि लिखिआ तिनी कमाइआ ॥ सचो सेवहि सचु धिआवहि सचि रते वीचारी हे ॥१०॥ गुर की सेवा मीठी लागी ॥ अनदिनु सूख सहज समाधी ॥ हरि हरि करतिआ मनु निरमलु होआ गुर की सेव पिआरी हे ॥११॥ से जन सुखीए सतिगुरि सचे लाए ॥ आपे भाणे आपि मिलाए ॥ सतिगुरि राखे से जन उबरे होर माइआ मोह खुआरी हे ॥१२॥ गुरमुखि साचा सबदि पछाता ॥ ना तिसु कुट्मबु ना तिसु माता ॥ एको एकु रविआ सभ अंतरि सभना जीआ का आधारी हे ॥१३॥ हउमै मेरा दूजा भाइआ ॥ किछु न चलै धुरि खसमि लिखि पाइआ ॥ गुर साचे ते साचु कमावहि साचै दूख निवारी हे ॥१४॥ जा तू देहि सदा सुखु पाए ॥ साचै सबदे साचु कमाए ॥ अंदरु साचा मनु तनु साचा भगति भरे भंडारी हे ॥१५॥ आपे वेखै हुकमि चलाए ॥ अपणा भाणा आपि कराए ॥ नानक नामि रते बैरागी मनु तनु रसना नामि सवारी हे ॥१६॥७॥

मारू महला ३ ॥
आपे आपु उपाइ उपंना ॥ सभ महि वरतै एकु परछंना ॥ सभना सार करे जगजीवनु जिनि अपणा आपु पछाता हे ॥१॥ जिनि ब्रहमा बिसनु महेसु उपाए ॥ सिरि सिरि धंधै आपे लाए ॥ जिसु भावै तिसु आपे मेले जिनि गुरमुखि एको जाता हे ॥२॥ आवा गउणु है संसारा ॥ माइआ मोहु बहु चितै बिकारा ॥ थिरु साचा सालाही सद ही जिनि गुर का सबदु पछाता हे ॥३॥ इकि मूलि लगे ओनी सुखु पाइआ ॥ डाली लागे तिनी जनमु गवाइआ ॥ अम्रित फल तिन जन कउ लागे जो बोलहि अम्रित बाता हे ॥४॥ हम गुण नाही किआ बोलह बोल ॥ तू सभना देखहि तोलहि तोल ॥ जिउ भावै तिउ राखहि रहणा गुरमुखि एको जाता हे ॥५॥ जा तुधु भाणा ता सची कारै लाए ॥ अवगण छोडि गुण माहि समाए ॥ गुण महि एको निरमलु साचा गुर कै सबदि पछाता हे ॥६॥ जह देखा तह एको सोई ॥ दूजी दुरमति सबदे खोई ॥ एकसु महि प्रभु एकु समाणा अपणै रंगि सद राता हे ॥७॥ काइआ कमलु है कुमलाणा ॥ मनमुखु सबदु न बुझै इआणा ॥ गुर परसादी काइआ खोजे पाए जगजीवनु दाता हे ॥८॥ कोट गही के पाप निवारे ॥ सदा हरि जीउ राखै उर धारे ॥ जो इछे सोई फलु पाए जिउ रंगु मजीठै राता हे ॥९॥ मनमुखु गिआनु कथे न होई ॥ फिरि फिरि आवै ठउर न कोई ॥ गुरमुखि गिआनु सदा सालाहे जुगि जुगि एको जाता हे ॥१०॥ मनमुखु कार करे सभि दुख सबाए ॥ अंतरि सबदु नाही किउ दरि जाए ॥ गुरमुखि सबदु वसै मनि साचा सद सेवे सुखदाता हे ॥११॥ जह देखा तू सभनी थाई ॥ पूरै गुरि सभ सोझी पाई ॥ नामो नामु धिआईऐ सदा सद इहु मनु नामे राता हे ॥१२॥ नामे राता पवितु सरीरा ॥ बिनु नावै डूबि मुए बिनु नीरा ॥ आवहि जावहि नामु नही बूझहि इकना गुरमुखि सबदु पछाता हे ॥१३॥ पूरै सतिगुरि बूझ बुझाई ॥ विणु नावै मुकति किनै न पाई ॥ नामे नामि मिलै वडिआई सहजि रहै रंगि राता हे ॥१४॥ काइआ नगरु ढहै ढहि ढेरी ॥ बिनु सबदै चूकै नही फेरी ॥ साचु सलाहे साचि समावै जिनि गुरमुखि एको जाता हे ॥१५॥ जिस नो नदरि करे सो पाए ॥ साचा सबदु वसै मनि आए ॥ नानक नामि रते निरंकारी दरि साचै साचु पछाता हे ॥१६॥८॥

मारू सोलहे ३ ॥
आपे करता सभु जिसु करणा ॥ जीअ जंत सभि तेरी सरणा ॥ आपे गुपतु वरतै सभ अंतरि गुर कै सबदि पछाता हे ॥१॥ हरि के भगति भरे भंडारा ॥ आपे बखसे सबदि वीचारा ॥ जो तुधु भावै सोई करसहि सचे सिउ मनु राता हे ॥२॥ आपे हीरा रतनु अमोलो ॥ आपे नदरी तोले तोलो ॥ जीअ जंत सभि सरणि तुमारी करि किरपा आपि पछाता हे ॥३॥ जिस नो नदरि होवै धुरि तेरी ॥ मरै न जमै चूकै फेरी ॥ साचे गुण गावै दिनु राती जुगि जुगि एको जाता हे ॥४॥ माइआ मोहि सभु जगतु उपाइआ ॥ ब्रहमा बिसनु देव सबाइआ ॥ जो तुधु भाणे से नामि लागे गिआन मती पछाता हे ॥५॥ पाप पुंन वरतै संसारा ॥ हरखु सोगु सभु दुखु है भारा ॥ गुरमुखि होवै सो सुखु पाए जिनि गुरमुखि नामु पछाता हे ॥६॥ किरतु न कोई मेटणहारा ॥ गुर कै सबदे मोख दुआरा ॥ पूरबि लिखिआ सो फलु पाइआ जिनि आपु मारि पछाता हे ॥७॥ माइआ मोहि हरि सिउ चितु न लागै ॥ दूजै भाइ घणा दुखु आगै ॥ मनमुख भरमि भुले भेखधारी अंत कालि पछुताता हे ॥८॥ हरि कै भाणै हरि गुण गाए ॥ सभि किलबिख काटे दूख सबाए ॥ हरि निरमलु निरमल है बाणी हरि सेती मनु राता हे ॥९॥ जिस नो नदरि करे सो गुण निधि पाए ॥ हउमै मेरा ठाकि रहाए ॥ गुण अवगण का एको दाता गुरमुखि विरली जाता हे ॥१०॥ मेरा प्रभु निरमलु अति अपारा ॥ आपे मेलै गुर सबदि वीचारा ॥ आपे बखसे सचु द्रिड़ाए मनु तनु साचै राता हे ॥११॥ मनु तनु मैला विचि जोति अपारा ॥ गुरमति बूझै करि वीचारा ॥ हउमै मारि सदा मनु निरमलु रसना सेवि सुखदाता हे ॥१२॥ गड़ काइआ अंदरि बहु हट बाजारा ॥ तिसु विचि नामु है अति अपारा ॥ गुर कै सबदि सदा दरि सोहै हउमै मारि पछाता हे ॥१३॥ रतनु अमोलकु अगम अपारा ॥ कीमति कवणु करे वेचारा ॥ गुर कै सबदे तोलि तोलाए अंतरि सबदि पछाता हे ॥१४॥ सिम्रिति सासत्र बहुतु बिसथारा ॥ माइआ मोहु पसरिआ पासारा ॥ मूरख पड़हि सबदु न बूझहि गुरमुखि विरलै जाता हे ॥१५॥ आपे करता करे कराए ॥ सची बाणी सचु द्रिड़ाए ॥ नानक नामु मिलै वडिआई जुगि जुगि एको जाता हे ॥१६॥९॥


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