बाबा सेख फरीद जी - सलोक बाणी शब्द, Baba Sheikh Farid ji - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(बाबा सेख फरीद जी -- राग आसा -- 488 SGGS) आसा सेख फरीद जीउ की बाणी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
दिलहु मुहबति जिंन्ह सेई सचिआ ॥ जिन्ह मनि होरु मुखि होरु सि कांढे कचिआ ॥१॥

रते इसक खुदाइ रंगि दीदार के ॥ विसरिआ जिन्ह नामु ते भुइ भारु थीए ॥१॥ रहाउ ॥

आपि लीए लड़ि लाइ दरि दरवेस से ॥ तिन धंनु जणेदी माउ आए सफलु से ॥२॥

परवदगार अपार अगम बेअंत तू ॥ जिना पछाता सचु चुमा पैर मूं ॥३॥

तेरी पनह खुदाइ तू बखसंदगी ॥ सेख फरीदै खैरु दीजै बंदगी ॥४॥१॥

(बाबा सेख फरीद जी -- राग आसा -- 488 SGGS) आसा ॥
बोलै सेख फरीदु पिआरे अलह लगे ॥ इहु तनु होसी खाक निमाणी गोर घरे ॥१॥

आजु मिलावा सेख फरीद टाकिम कूंजड़ीआ मनहु मचिंदड़ीआ ॥१॥ रहाउ ॥

जे जाणा मरि जाईऐ घुमि न आईऐ ॥ झूठी दुनीआ लगि न आपु वञाईऐ ॥२॥

बोलीऐ सचु धरमु झूठु न बोलीऐ ॥ जो गुरु दसै वाट मुरीदा जोलीऐ ॥३॥

छैल लंघंदे पारि गोरी मनु धीरिआ ॥ कंचन वंने पासे कलवति चीरिआ ॥४॥

सेख हैयाती जगि न कोई थिरु रहिआ ॥ जिसु आसणि हम बैठे केते बैसि गइआ ॥५॥

कतिक कूंजां चेति डउ सावणि बिजुलीआं ॥ सीआले सोहंदीआं पिर गलि बाहड़ीआं ॥६॥

चले चलणहार विचारा लेइ मनो ॥ गंढेदिआं छिअ माह तुड़ंदिआ हिकु खिनो ॥७॥

जिमी पुछै असमान फरीदा खेवट किंनि गए ॥ जालण गोरां नालि उलामे जीअ सहे ॥८॥२॥

(बाबा सेख फरीद जी -- राग सूही -- 794 SGGS) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु सूही बाणी सेख फरीद जी की ॥
तपि तपि लुहि लुहि हाथ मरोरउ ॥ बावलि होई सो सहु लोरउ ॥ तै सहि मन महि कीआ रोसु ॥ मुझु अवगन सह नाही दोसु ॥१॥

तै साहिब की मै सार न जानी ॥ जोबनु खोइ पाछै पछुतानी ॥१॥ रहाउ ॥

काली कोइल तू कित गुन काली ॥ अपने प्रीतम के हउ बिरहै जाली ॥ पिरहि बिहून कतहि सुखु पाए ॥ जा होइ क्रिपालु ता प्रभू मिलाए ॥२॥

विधण खूही मुंध इकेली ॥ ना को साथी ना को बेली ॥ करि किरपा प्रभि साधसंगि मेली ॥ जा फिरि देखा ता मेरा अलहु बेली ॥३॥

वाट हमारी खरी उडीणी ॥ खंनिअहु तिखी बहुतु पिईणी ॥ उसु ऊपरि है मारगु मेरा ॥ सेख फरीदा पंथु सम्हारि सवेरा ॥४॥१॥

(बाबा सेख फरीद जी -- राग सूही ललित -- 794 SGGS) सूही ललित ॥
बेड़ा बंधि न सकिओ बंधन की वेला ॥ भरि सरवरु जब ऊछलै तब तरणु दुहेला ॥१॥

हथु न लाइ कसु्मभड़ै जलि जासी ढोला ॥१॥ रहाउ ॥

इक आपीन्है पतली सह केरे बोला ॥ दुधा थणी न आवई फिरि होइ न मेला ॥२॥

कहै फरीदु सहेलीहो सहु अलाएसी ॥ हंसु चलसी डुमणा अहि तनु ढेरी थीसी ॥३॥२॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1377 SGGS) सलोक सेख फरीद के
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

जितु दिहाड़ै धन वरी साहे लए लिखाइ ॥ मलकु जि कंनी सुणीदा मुहु देखाले आइ ॥ जिंदु निमाणी कढीऐ हडा कू कड़काइ ॥ साहे लिखे न चलनी जिंदू कूं समझाइ ॥ जिंदु वहुटी मरणु वरु लै जासी परणाइ ॥ आपण हथी जोलि कै कै गलि लगै धाइ ॥ वालहु निकी पुरसलात कंनी न सुणी आइ ॥ फरीदा किड़ी पवंदीई खड़ा न आपु मुहाइ ॥१॥

फरीदा दर दरवेसी गाखड़ी चलां दुनीआं भति ॥ बंन्हि उठाई पोटली किथै वंञा घति ॥२॥

किझु न बुझै किझु न सुझै दुनीआ गुझी भाहि ॥ सांईं मेरै चंगा कीता नाही त हं भी दझां आहि ॥३॥

फरीदा जे जाणा तिल थोड़ड़े समलि बुकु भरी ॥ जे जाणा सहु नंढड़ा तां थोड़ा माणु करी ॥४॥

जे जाणा लड़ु छिजणा पीडी पाईं गंढि ॥ तै जेवडु मै नाहि को सभु जगु डिठा हंढि ॥५॥

फरीदा जे तू अकलि लतीफु काले लिखु न लेख ॥ आपनड़े गिरीवान महि सिरु नींवां करि देखु ॥६॥

फरीदा जो तै मारनि मुकीआं तिन्हा न मारे घुमि ॥ आपनड़ै घरि जाईऐ पैर तिन्हा दे चुमि ॥७॥

फरीदा जां तउ खटण वेल तां तू रता दुनी सिउ ॥ मरग सवाई नीहि जां भरिआ तां लदिआ ॥८॥

देखु फरीदा जु थीआ दाड़ी होई भूर ॥ अगहु नेड़ा आइआ पिछा रहिआ दूरि ॥९॥

देखु फरीदा जि थीआ सकर होई विसु ॥ सांई बाझहु आपणे वेदण कहीऐ किसु ॥१०॥

फरीदा अखी देखि पतीणीआं सुणि सुणि रीणे कंन ॥ साख पकंदी आईआ होर करेंदी वंन ॥११॥

फरीदा कालीं जिनी न राविआ धउली रावै कोइ ॥ करि सांई सिउ पिरहड़ी रंगु नवेला होइ ॥१२॥

(गुरू अमरदास जी -- -- 1378 SGGS) मः ३ ॥
फरीदा काली धउली साहिबु सदा है जे को चिति करे ॥ आपणा लाइआ पिरमु न लगई जे लोचै सभु कोइ ॥ एहु पिरमु पिआला खसम का जै भावै तै देइ ॥१३॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1378 SGGS) फरीदा जिन्ह लोइण जगु मोहिआ से लोइण मै डिठु ॥ कजल रेख न सहदिआ से पंखी सूइ बहिठु ॥१४॥

फरीदा कूकेदिआ चांगेदिआ मती देदिआ नित ॥ जो सैतानि वंञाइआ से कित फेरहि चित ॥१५॥

फरीदा थीउ पवाही दभु ॥ जे सांई लोड़हि सभु ॥ इकु छिजहि बिआ लताड़ीअहि ॥ तां साई दै दरि वाड़ीअहि ॥१६॥

फरीदा खाकु न निंदीऐ खाकू जेडु न कोइ ॥ जीवदिआ पैरा तलै मुइआ उपरि होइ ॥१७॥

फरीदा जा लबु ता नेहु किआ लबु त कूड़ा नेहु ॥ किचरु झति लघाईऐ छपरि तुटै मेहु ॥१८॥

फरीदा जंगलु जंगलु किआ भवहि वणि कंडा मोड़ेहि ॥ वसी रबु हिआलीऐ जंगलु किआ ढूढेहि ॥१९॥

फरीदा इनी निकी जंघीऐ थल डूंगर भविओम्हि ॥ अजु फरीदै कूजड़ा सै कोहां थीओमि ॥२०॥

फरीदा राती वडीआं धुखि धुखि उठनि पास ॥ धिगु तिन्हा दा जीविआ जिना विडाणी आस ॥२१॥

फरीदा जे मै होदा वारिआ मिता आइड़िआं ॥ हेड़ा जलै मजीठ जिउ उपरि अंगारा ॥२२॥

फरीदा लोड़ै दाख बिजउरीआं किकरि बीजै जटु ॥ हंढै उंन कताइदा पैधा लोड़ै पटु ॥२३॥

फरीदा गलीए चिकड़ु दूरि घरु नालि पिआरे नेहु ॥ चला त भिजै क्मबली रहां त तुटै नेहु ॥२४॥

भिजउ सिजउ क्मबली अलह वरसउ मेहु ॥ जाइ मिला तिना सजणा तुटउ नाही नेहु ॥२५॥

फरीदा मै भोलावा पग दा मतु मैली होइ जाइ ॥ गहिला रूहु न जाणई सिरु भी मिटी खाइ ॥२६॥

फरीदा सकर खंडु निवात गुड़ु माखिओ मांझा दुधु ॥ सभे वसतू मिठीआं रब न पुजनि तुधु ॥२७॥

फरीदा रोटी मेरी काठ की लावणु मेरी भुख ॥ जिना खाधी चोपड़ी घणे सहनिगे दुख ॥२८॥

रुखी सुखी खाइ कै ठंढा पाणी पीउ ॥ फरीदा देखि पराई चोपड़ी ना तरसाए जीउ ॥२९॥

अजु न सुती कंत सिउ अंगु मुड़े मुड़ि जाइ ॥ जाइ पुछहु डोहागणी तुम किउ रैणि विहाइ ॥३०॥

साहुरै ढोई ना लहै पेईऐ नाही थाउ ॥ पिरु वातड़ी न पुछई धन सोहागणि नाउ ॥३१॥

साहुरै पेईऐ कंत की कंतु अगमु अथाहु ॥ नानक सो सोहागणी जु भावै बेपरवाह ॥३२॥

नाती धोती स्मबही सुती आइ नचिंदु ॥ फरीदा रही सु बेड़ी हिंङु दी गई कथूरी गंधु ॥३३॥

जोबन जांदे ना डरां जे सह प्रीति न जाइ ॥ फरीदा कितीं जोबन प्रीति बिनु सुकि गए कुमलाइ ॥३४॥

फरीदा चिंत खटोला वाणु दुखु बिरहि विछावण लेफु ॥ एहु हमारा जीवणा तू साहिब सचे वेखु ॥३५॥

बिरहा बिरहा आखीऐ बिरहा तू सुलतानु ॥ फरीदा जितु तनि बिरहु न ऊपजै सो तनु जाणु मसानु ॥३६॥

फरीदा ए विसु गंदला धरीआं खंडु लिवाड़ि ॥ इकि राहेदे रहि गए इकि राधी गए उजाड़ि ॥३७॥

फरीदा चारि गवाइआ हंढि कै चारि गवाइआ समि ॥ लेखा रबु मंगेसीआ तू आंहो केर्हे कमि ॥३८॥

फरीदा दरि दरवाजै जाइ कै किउ डिठो घड़ीआलु ॥ एहु निदोसां मारीऐ हम दोसां दा किआ हालु ॥३९॥

घड़ीए घड़ीए मारीऐ पहरी लहै सजाइ ॥ सो हेड़ा घड़ीआल जिउ डुखी रैणि विहाइ ॥४०॥

बुढा होआ सेख फरीदु क्मबणि लगी देह ॥ जे सउ वर्हिआ जीवणा भी तनु होसी खेह ॥४१॥

फरीदा बारि पराइऐ बैसणा सांई मुझै न देहि ॥ जे तू एवै रखसी जीउ सरीरहु लेहि ॥४२॥

कंधि कुहाड़ा सिरि घड़ा वणि कै सरु लोहारु ॥ फरीदा हउ लोड़ी सहु आपणा तू लोड़हि अंगिआर ॥४३॥

फरीदा इकना आटा अगला इकना नाही लोणु ॥ अगै गए सिंञापसनि चोटां खासी कउणु ॥४४॥

पासि दमामे छतु सिरि भेरी सडो रड ॥ जाइ सुते जीराण महि थीए अतीमा गड ॥४५॥

फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ उसारेदे भी गए ॥ कूड़ा सउदा करि गए गोरी आइ पए ॥४६॥

फरीदा खिंथड़ि मेखा अगलीआ जिंदु न काई मेख ॥ वारी आपो आपणी चले मसाइक सेख ॥४७॥

फरीदा दुहु दीवी बलंदिआ मलकु बहिठा आइ ॥ गड़ु लीता घटु लुटिआ दीवड़े गइआ बुझाइ ॥४८॥

फरीदा वेखु कपाहै जि थीआ जि सिरि थीआ तिलाह ॥ कमादै अरु कागदै कुंने कोइलिआह ॥ मंदे अमल करेदिआ एह सजाइ तिनाह ॥४९॥

फरीदा कंनि मुसला सूफु गलि दिलि काती गुड़ु वाति ॥ बाहरि दिसै चानणा दिलि अंधिआरी राति ॥५०॥

फरीदा रती रतु न निकलै जे तनु चीरै कोइ ॥ जो तन रते रब सिउ तिन तनि रतु न होइ ॥५१॥

(गुरू अमरदास जी -- -- 1380 SGGS) मः ३ ॥
इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥ जो सह रते आपणे तितु तनि लोभु रतु न होइ ॥ भै पइऐ तनु खीणु होइ लोभु रतु विचहु जाइ ॥ जिउ बैसंतरि धातु सुधु होइ तिउ हरि का भउ दुरमति मैलु गवाइ ॥ नानक ते जन सोहणे जि रते हरि रंगु लाइ ॥५२॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1380 SGGS) फरीदा सोई सरवरु ढूढि लहु जिथहु लभी वथु ॥ छपड़ि ढूढै किआ होवै चिकड़ि डुबै हथु ॥५३॥

फरीदा नंढी कंतु न राविओ वडी थी मुईआसु ॥ धन कूकेंदी गोर में तै सह ना मिलीआसु ॥५४॥

फरीदा सिरु पलिआ दाड़ी पली मुछां भी पलीआं ॥ रे मन गहिले बावले माणहि किआ रलीआं ॥५५॥

फरीदा कोठे धुकणु केतड़ा पिर नीदड़ी निवारि ॥ जो दिह लधे गाणवे गए विलाड़ि विलाड़ि ॥५६॥

फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ एतु न लाए चितु ॥ मिटी पई अतोलवी कोइ न होसी मितु ॥५७॥

फरीदा मंडप मालु न लाइ मरग सताणी चिति धरि ॥ साई जाइ सम्हालि जिथै ही तउ वंञणा ॥५८॥

फरीदा जिन्ही कमी नाहि गुण ते कमड़े विसारि ॥ मतु सरमिंदा थीवही सांई दै दरबारि ॥५९॥

फरीदा साहिब दी करि चाकरी दिल दी लाहि भरांदि ॥ दरवेसां नो लोड़ीऐ रुखां दी जीरांदि ॥६०॥

फरीदा काले मैडे कपड़े काला मैडा वेसु ॥ गुनही भरिआ मै फिरा लोकु कहै दरवेसु ॥६१॥

तती तोइ न पलवै जे जलि टुबी देइ ॥ फरीदा जो डोहागणि रब दी झूरेदी झूरेइ ॥६२॥

जां कुआरी ता चाउ वीवाही तां मामले ॥ फरीदा एहो पछोताउ वति कुआरी न थीऐ ॥६३॥

कलर केरी छपड़ी आइ उलथे हंझ ॥ चिंजू बोड़न्हि ना पीवहि उडण संदी डंझ ॥६४॥

हंसु उडरि कोध्रै पइआ लोकु विडारणि जाइ ॥ गहिला लोकु न जाणदा हंसु न कोध्रा खाइ ॥६५॥

चलि चलि गईआं पंखीआं जिन्ही वसाए तल ॥ फरीदा सरु भरिआ भी चलसी थके कवल इकल ॥६६॥

फरीदा इट सिराणे भुइ सवणु कीड़ा लड़िओ मासि ॥ केतड़िआ जुग वापरे इकतु पइआ पासि ॥६७॥

फरीदा भंनी घड़ी सवंनवी टुटी नागर लजु ॥ अजराईलु फरेसता कै घरि नाठी अजु ॥६८॥

फरीदा भंनी घड़ी सवंनवी टूटी नागर लजु ॥ जो सजण भुइ भारु थे से किउ आवहि अजु ॥६९॥

फरीदा बे निवाजा कुतिआ एह न भली रीति ॥ कबही चलि न आइआ पंजे वखत मसीति ॥७०॥

उठु फरीदा उजू साजि सुबह निवाज गुजारि ॥ जो सिरु सांई ना निवै सो सिरु कपि उतारि ॥७१॥

जो सिरु साई ना निवै सो सिरु कीजै कांइ ॥ कुंने हेठि जलाईऐ बालण संदै थाइ ॥७२॥

फरीदा किथै तैडे मापिआ जिन्ही तू जणिओहि ॥ तै पासहु ओइ लदि गए तूं अजै न पतीणोहि ॥७३॥

फरीदा मनु मैदानु करि टोए टिबे लाहि ॥ अगै मूलि न आवसी दोजक संदी भाहि ॥७४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1381 SGGS) महला ५ ॥
फरीदा खालकु खलक महि खलक वसै रब माहि ॥ मंदा किस नो आखीऐ जां तिसु बिनु कोई नाहि ॥७५॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1381 SGGS) फरीदा जि दिहि नाला कपिआ जे गलु कपहि चुख ॥ पवनि न इती मामले सहां न इती दुख ॥७६॥

चबण चलण रतंन से सुणीअर बहि गए ॥ हेड़े मुती धाह से जानी चलि गए ॥७७॥

फरीदा बुरे दा भला करि गुसा मनि न हढाइ ॥ देही रोगु न लगई पलै सभु किछु पाइ ॥७८॥

फरीदा पंख पराहुणी दुनी सुहावा बागु ॥ नउबति वजी सुबह सिउ चलण का करि साजु ॥७९॥

फरीदा राति कथूरी वंडीऐ सुतिआ मिलै न भाउ ॥ जिंन्हा नैण नींद्रावले तिंन्हा मिलणु कुआउ ॥८०॥

फरीदा मै जानिआ दुखु मुझ कू दुखु सबाइऐ जगि ॥ ऊचे चड़ि कै देखिआ तां घरि घरि एहा अगि ॥८१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1382 SGGS) महला ५ ॥
फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बाग ॥ जो जन पीरि निवाजिआ तिंन्हा अंच न लाग ॥८२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1382 SGGS) महला ५ ॥
फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥ विरले केई पाईअनि जिंन्हा पिआरे नेह ॥८३॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1382 SGGS) कंधी वहण न ढाहि तउ भी लेखा देवणा ॥ जिधरि रब रजाइ वहणु तिदाऊ गंउ करे ॥८४॥

फरीदा डुखा सेती दिहु गइआ सूलां सेती राति ॥ खड़ा पुकारे पातणी बेड़ा कपर वाति ॥८५॥

लमी लमी नदी वहै कंधी केरै हेति ॥ बेड़े नो कपरु किआ करे जे पातण रहै सुचेति ॥८६॥

फरीदा गलीं सु सजण वीह इकु ढूंढेदी न लहां ॥ धुखां जिउ मांलीह कारणि तिंन्हा मा पिरी ॥८७॥

फरीदा इहु तनु भउकणा नित नित दुखीऐ कउणु ॥ कंनी बुजे दे रहां किती वगै पउणु ॥८८॥

फरीदा रब खजूरी पकीआं माखिअ नई वहंन्हि ॥ जो जो वंञैं डीहड़ा सो उमर हथ पवंनि ॥८९॥

फरीदा तनु सुका पिंजरु थीआ तलीआं खूंडहि काग ॥ अजै सु रबु न बाहुड़िओ देखु बंदे के भाग ॥९०॥

कागा करंग ढंढोलिआ सगला खाइआ मासु ॥ ए दुइ नैना मति छुहउ पिर देखन की आस ॥९१॥

कागा चूंडि न पिंजरा बसै त उडरि जाहि ॥ जितु पिंजरै मेरा सहु वसै मासु न तिदू खाहि ॥९२॥

फरीदा गोर निमाणी सडु करे निघरिआ घरि आउ ॥ सरपर मैथै आवणा मरणहु ना डरिआहु ॥९३॥

एनी लोइणी देखदिआ केती चलि गई ॥ फरीदा लोकां आपो आपणी मै आपणी पई ॥९४॥

आपु सवारहि मै मिलहि मै मिलिआ सुखु होइ ॥ फरीदा जे तू मेरा होइ रहहि सभु जगु तेरा होइ ॥९५॥

कंधी उतै रुखड़ा किचरकु बंनै धीरु ॥ फरीदा कचै भांडै रखीऐ किचरु ताई नीरु ॥९६॥

फरीदा महल निसखण रहि गए वासा आइआ तलि ॥ गोरां से निमाणीआ बहसनि रूहां मलि ॥ आखीं सेखा बंदगी चलणु अजु कि कलि ॥९७॥

फरीदा मउतै दा बंना एवै दिसै जिउ दरीआवै ढाहा ॥ अगै दोजकु तपिआ सुणीऐ हूल पवै काहाहा ॥ इकना नो सभ सोझी आई इकि फिरदे वेपरवाहा ॥ अमल जि कीतिआ दुनी विचि से दरगह ओगाहा ॥९८॥

फरीदा दरीआवै कंन्है बगुला बैठा केल करे ॥ केल करेदे हंझ नो अचिंते बाज पए ॥ बाज पए तिसु रब दे केलां विसरीआं ॥ जो मनि चिति न चेते सनि सो गाली रब कीआं ॥९९॥

साढे त्रै मण देहुरी चलै पाणी अंनि ॥ आइओ बंदा दुनी विचि वति आसूणी बंन्हि ॥ मलकल मउत जां आवसी सभ दरवाजे भंनि ॥ तिन्हा पिआरिआ भाईआं अगै दिता बंन्हि ॥ वेखहु बंदा चलिआ चहु जणिआ दै कंन्हि ॥ फरीदा अमल जि कीते दुनी विचि दरगह आए कमि ॥१००॥

फरीदा हउ बलिहारी तिन्ह पंखीआ जंगलि जिंन्हा वासु ॥ ककरु चुगनि थलि वसनि रब न छोडनि पासु ॥१०१॥

फरीदा रुति फिरी वणु क्मबिआ पत झड़े झड़ि पाहि ॥ चारे कुंडा ढूंढीआं रहणु किथाऊ नाहि ॥१०२॥

फरीदा पाड़ि पटोला धज करी क्मबलड़ी पहिरेउ ॥ जिन्ही वेसी सहु मिलै सेई वेस करेउ ॥१०३॥

(गुरू अमरदास जी -- -- 1383 SGGS) मः ३ ॥
काइ पटोला पाड़ती क्मबलड़ी पहिरेइ ॥ नानक घर ही बैठिआ सहु मिलै जे नीअति रासि करेइ ॥१०४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1383 SGGS) मः ५ ॥
फरीदा गरबु जिन्हा वडिआईआ धनि जोबनि आगाह ॥ खाली चले धणी सिउ टिबे जिउ मीहाहु ॥१०५॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1383 SGGS) फरीदा तिना मुख डरावणे जिना विसारिओनु नाउ ॥ ऐथै दुख घणेरिआ अगै ठउर न ठाउ ॥१०६॥

फरीदा पिछल राति न जागिओहि जीवदड़ो मुइओहि ॥ जे तै रबु विसारिआ त रबि न विसरिओहि ॥१०७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1383 SGGS) मः ५ ॥
फरीदा कंतु रंगावला वडा वेमुहताजु ॥ अलह सेती रतिआ एहु सचावां साजु ॥१०८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1383 SGGS) मः ५ ॥
फरीदा दुखु सुखु इकु करि दिल ते लाहि विकारु ॥ अलह भावै सो भला तां लभी दरबारु ॥१०९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1383 SGGS) मः ५ ॥
फरीदा दुनी वजाई वजदी तूं भी वजहि नालि ॥ सोई जीउ न वजदा जिसु अलहु करदा सार ॥११०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- -- 1383 SGGS) मः ५ ॥
फरीदा दिलु रता इसु दुनी सिउ दुनी न कितै कमि ॥ मिसल फकीरां गाखड़ी सु पाईऐ पूर करमि ॥१११॥

(बाबा सेख फरीद जी -- -- 1384 SGGS) पहिलै पहरै फुलड़ा फलु भी पछा राति ॥ जो जागंन्हि लहंनि से साई कंनो दाति ॥११२॥

दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥ इकि जागंदे ना लहन्हि इकन्हा सुतिआ देइ उठालि ॥११३॥

ढूढेदीए सुहाग कू तउ तनि काई कोर ॥ जिन्हा नाउ सुहागणी तिन्हा झाक न होर ॥११४॥

सबर मंझ कमाण ए सबरु का नीहणो ॥ सबर संदा बाणु खालकु खता न करी ॥११५॥

सबर अंदरि साबरी तनु एवै जालेन्हि ॥ होनि नजीकि खुदाइ दै भेतु न किसै देनि ॥११६॥

सबरु एहु सुआउ जे तूं बंदा दिड़ु करहि ॥ वधि थीवहि दरीआउ टुटि न थीवहि वाहड़ा ॥११७॥

फरीदा दरवेसी गाखड़ी चोपड़ी परीति ॥ इकनि किनै चालीऐ दरवेसावी रीति ॥११८॥

तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड बलंन्हि ॥ पैरी थकां सिरि जुलां जे मूं पिरी मिलंन्हि ॥११९॥

तनु न तपाइ तनूर जिउ बालणु हड न बालि ॥ सिरि पैरी किआ फेड़िआ अंदरि पिरी निहालि ॥१२०॥

हउ ढूढेदी सजणा सजणु मैडे नालि ॥ नानक अलखु न लखीऐ गुरमुखि देइ दिखालि ॥१२१॥

हंसा देखि तरंदिआ बगा आइआ चाउ ॥ डुबि मुए बग बपुड़े सिरु तलि उपरि पाउ ॥१२२॥

मै जाणिआ वड हंसु है तां मै कीता संगु ॥ जे जाणा बगु बपुड़ा जनमि न भेड़ी अंगु ॥१२३॥

किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि धरे ॥ जे तिसु भावै नानका कागहु हंसु करे ॥१२४॥

सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास ॥ इहु तनु लहरी गडु थिआ सचे तेरी आस ॥१२५॥

कवणु सु अखरु कवणु गुणु कवणु सु मणीआ मंतु ॥ कवणु सु वेसो हउ करी जितु वसि आवै कंतु ॥१२६॥

निवणु सु अखरु खवणु गुणु जिहबा मणीआ मंतु ॥ ए त्रै भैणे वेस करि तां वसि आवी कंतु ॥१२७॥

मति होदी होइ इआणा ॥ ताण होदे होइ निताणा ॥ अणहोदे आपु वंडाए ॥ को ऐसा भगतु सदाए ॥१२८॥

इकु फिका न गालाइ सभना मै सचा धणी ॥ हिआउ न कैही ठाहि माणक सभ अमोलवे ॥१२९॥

सभना मन माणिक ठाहणु मूलि मचांगवा ॥ जे तउ पिरीआ दी सिक हिआउ न ठाहे कही दा ॥१३०॥


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