Shabad (P:10),
ਸ਼ਬਦ (ਪਾਤਿਸ਼ਾਹੀ 10),
शबद (पातिसाही 10)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Gurbani LangMeanings
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ਸਬਦ ॥

सबद ॥

sabadh ||

ੴ ਸਤਿਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सतिगुरप्रसादि ॥

ikOankaar satiguraprasaadh ||

ਰਾਮਕਲੀ ਪਾਤਸਾਹੀ ੧੦ ॥

रामकली पातसाही १० ॥

raamakalee paatasaahee 10 ||


ਰੇ ਮਨ ਐਸੋ ਕਰ ਸੰਨਿਆਸਾ ॥

रे मन ऐसो कर संनिआसा ॥

re man aaiso kar sa(n)niaasaa ||

ਬਨ ਸੇ ਸਦਨ ਸਬੈ ਕਰ ਸਮਝਹੁ ਮਨ ਹੀ ਮਾਹਿ ਉਦਾਸਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

बन से सदन सबै कर समझहु मन ही माहि उदासा ॥१॥ रहाउ ॥

ban se sadhan sabai kar samajhahu man hee maeh udhaasaa ||1|| rahaau ||


ਜਤ ਕੀ ਜਟਾ ਜੋਗ ਕੋ ਮੰਜਨੁ ਨੇਮ ਕੇ ਨਖਨ ਬਢਾਓ ॥

जत की जटा जोग को मंजनु नेम के नखन बढाओ ॥

jat kee jaTaa jog ko ma(n)jan nem ke nakhan baddaao ||

ਗਿਆਨ ਗੁਰੂ ਆਤਮ ਉਪਦੇਸਹੁ ਨਾਮ ਬਿਭੂਤ ਲਗਾਓ ॥੧॥

गिआन गुरू आतम उपदेसहु नाम बिभूत लगाओ ॥१॥

giaan guroo aatam upadhesahu naam bibhoot lagaao ||1||


ਅਲਪ ਅਹਾਰ ਸੁਲਪ ਸੀ ਨਿੰਦ੍ਰਾ ਦਯਾ ਛਿਮਾ ਤਨ ਪ੍ਰੀਤਿ ॥

अलप अहार सुलप सी निंद्रा दया छिमा तन प्रीति ॥

alap ahaar sulap see ni(n)dhraa dhayaa chhimaa tan preet ||

ਸੀਲ ਸੰਤੋਖ ਸਦਾ ਨਿਰਬਾਹਿਬੋ ਹ੍ਵੈਬੋ ਤ੍ਰਿਗੁਣ ਅਤੀਤ ॥੨॥

सील संतोख सदा निरबाहिबो ह्वैबो तृगुण अतीत ॥२॥

seel sa(n)tokh sadhaa nirabaahibo havaibo tiragun ateet ||2||


ਕਾਮ ਕ੍ਰੋਧ ਹੰਕਾਰ ਲੋਭ ਹਠ ਮੋਹ ਨ ਮਨ ਸਿਉ ਲ੍ਯਾਵੈ ॥

काम क्रोध हंकार लोभ हठ मोह न मन सिउ ल्यावै ॥

kaam krodh ha(n)kaar lobh haTh moh na man siau layaavai ||

ਤਬ ਹੀ ਆਤਮ ਤਤ ਕੋ ਦਰਸੇ ਪਰਮ ਪੁਰਖ ਕਹ ਪਾਵੈ ॥੩॥੧॥

तब ही आतम तत को दरसे परम पुरख कह पावै ॥३॥१॥

tab hee aatam tat ko dharase param purakh keh paavai ||3||1||


ਰਾਮਕਲੀ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

रामकली पातिसाही १० ॥

raamakalee paatisaahee 10 ||


ਰੇ ਮਨ ਇਹ ਬਿਧਿ ਜੋਗੁ ਕਮਾਓ ॥

रे मन इह बिधि जोगु कमाओ ॥

re man ieh bidh jog kamaao ||

ਸਿੰਙੀ ਸਾਚੁ ਅਕਪਟ ਕੰਠਲਾ ਧਿਆਨ ਬਿਭੂਤ ਚੜਾਓ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

सिंङी साचु अकपट कंठला धिआन बिभूत चड़ाओ ॥१॥ रहाउ ॥

si(n)n(g)ee saach akapaT ka(n)Thalaa dhiaan bibhoot chaRaao ||1|| rahaau ||


ਤਾਤੀ ਗਹੁ ਆਤਮ ਬਸਿ ਕਰ ਕੀ ਭਿੱਛਾ ਨਾਮ ਅਧਾਰੰ ॥

ताती गहु आतम बसि कर की भिच्छा नाम अधारं ॥

taatee gahu aatam bas kar kee bhi'chhaa naam adhaara(n) ||

ਬਾਜੇ ਪਰਮ ਤਾਰ ਤਤੁ ਹਰਿ ਕੋ ਉਪਜੈ ਰਾਗ ਰਸਾਰੰ ॥੧॥

बाजे परम तार ततु हरि को उपजै राग रसारं ॥१॥

baaje param taar tat har ko upajai raag rasaara(n) ||1||


ਉਘਟੈ ਤਾਨ ਤਰੰਗ ਰੰਗਿ ਅਤਿ ਗਿਆਨ ਗੀਤ ਬੰਧਾਨੰ ॥

उघटै तान तरंग रंगि अति गिआन गीत बंधानं ॥

aughaTai taan tara(n)g ra(n)g at giaan geet ba(n)dhaana(n) ||

ਚਕਿ ਚਕਿ ਰਹੇ ਦੇਵ ਦਾਨਵ ਮੁਨਿ ਛਕਿ ਛਕਿ ਬ੍ਯੋਮ ਬਿਵਾਨੰ ॥੨॥

चकि चकि रहे देव दानव मुनि छकि छकि ब्योम बिवानं ॥२॥

chak chak rahe dhev dhaanav mun chhak chhak bayom bivaana(n) ||2||


ਆਤਮ ਉਪਦੇਸ ਭੇਸੁ ਸੰਜਮ ਕੋ ਜਾਪ ਸੁ ਅਜਪਾ ਜਾਪੈ ॥

आतम उपदेस भेसु संजम को जाप सु अजपा जापै ॥

aatam upadhes bhes sa(n)jam ko jaap su ajapaa jaapai ||

ਸਦਾ ਰਹੈ ਕੰਚਨ ਸੀ ਕਾਯਾ ਕਾਲ ਨ ਕਬਹੂੰ ਬ੍ਯਾਪੈ ॥੩॥੨॥

सदा रहै कंचन सी काया काल न कबहूँ ब्यापै ॥३॥२॥

sadhaa rahai ka(n)chan see kaayaa kaal na kabahoo(n) bayaapai ||3||2||


ਰਾਮਕਲੀ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

रामकली पातिसाही १० ॥

raamakalee paatisaahee 10 ||


ਪ੍ਰਾਨੀ ਪਰਮ ਪੁਰਖ ਪਗਿ ਲਾਗੋ ॥

प्रानी परम पुरख पगि लागो ॥

praanee param purakh pag laago ||

ਸੋਵਤ ਕਹਾ ਮੋਹ ਨਿੰਦ੍ਰਾ ਮੈ ਕਬਹੂੰ ਸੁਚਿਤ ਹ੍ਵੈ ਜਾਗੋ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

सोवत कहा मोह निंद्रा मै कबहूँ सुचित ह्वै जागो ॥१॥ रहाउ ॥

sovat kahaa moh ni(n)dhraa mai kabahoo(n) suchit havai jaago ||1|| rahaau ||


ਔਰਨ ਕਹਾ ਉਪਦੇਸਤ ਹੈ ਪਸੁ ਤੋਹਿ ਪ੍ਰਬੋਧ ਨ ਲਾਗੋ ॥

औरन कहा उपदेसत है पसु तोहि प्रबोध न लागो ॥

aauaran kahaa upadhesat hai pas toh prabodh na laago ||

ਸਿੰਚਤ ਕਹਾ ਪਰੇ ਬਿਖਿਯਨ ਕਹ ਕਬਹੁ ਬਿਖੈ ਰਸ ਤ੍ਯਾਗੋ ॥੧॥

सिंचत कहा परे बिखियन कह कबहु बिखै रस त्यागो ॥१॥

si(n)chat kahaa pare bikhiyan keh kabahu bikhai ras tayaago ||1||


ਕੇਵਲ ਕਰਮ ਭਰਮ ਸੇ ਚੀਨਹੁ ਧਰਮ ਕਰਮ ਅਨੁਰਾਗੋ ॥

केवल करम भरम से चीनहु धरम करम अनुरागो ॥

keval karam bharam se cheenahu dharam karam anuraago ||

ਸੰਗ੍ਰਹ ਕਰੋ ਸਦਾ ਸਿਮਰਨ ਕੋ ਪਰਮ ਪਾਪ ਤਜਿ ਭਾਗੋ ॥੨॥

संग्रह करो सदा सिमरन को परम पाप तजि भागो ॥२॥

sa(n)greh karo sadhaa simaran ko param paap taj bhaago ||2||


ਜਾ ਤੇ ਦੂਖ ਪਾਪ ਨਹਿ ਭੇਟੈ ਕਾਲ ਜਾਲ ਤੇ ਤਾਗੋ ॥

जा ते दूख पाप नहि भेटै काल जाल ते तागो ॥

jaa te dhookh paap neh bheTai kaal jaal te taago ||

ਜੌ ਸੁਖ ਚਾਹੋ ਸਦਾ ਸਭਨ ਕੌ ਤੌ ਹਰਿ ਕੇ ਰਸਿ ਪਾਗੋ ॥੩॥੩॥

जौ सुख चाहो सदा सभन कौ तौ हरि के रसि पागो ॥३॥३॥

jau sukh chaaho sadhaa sabhan kau tau har ke ras paago ||3||3||


ਰਾਗੁ ਸੋਰਠਿ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

रागु सोरठि पातिसाही १० ॥

raag soraTh paatisaahee 10 ||


ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਤੋ ਕਹ ਲਾਜ ਹਮਾਰੀ ॥

प्रभ जू तो कह लाज हमारी ॥

prabh joo to keh laaj hamaaree ||

ਨੀਲ ਕੰਠ ਨਰਹਰਿ ਨਾਰਾਇਣ ਨੀਲ ਬਸਨ ਬਨਵਾਰੀ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

नील कंठ नरहरि नाराइण नील बसन बनवारी ॥१॥ रहाउ ॥

neel ka(n)Th narahar naarain neel basan banavaaree ||1|| rahaau ||


ਪਰਮ ਪੁਰਖ ਪਰਮੇਸਰ ਸੁਆਮੀ ਪਾਵਨ ਪਉਨ ਅਹਾਰੀ ॥

परम पुरख परमेसर सुआमी पावन पउन अहारी ॥

param purakh paramesar suaamee paavan paun ahaaree ||

ਮਾਧਵ ਮਹਾ ਜੋਤਿ ਮਧੁ ਮਰਦਨ ਮਾਨ ਮੁਕੰਦ ਮੁਰਾਰੀ ॥੧॥

माधव महा जोति मधु मरदन मान मुकंद मुरारी ॥१॥

maadhav mahaa jot madh maradhan maan muka(n)dh muraaree ||1||


ਨਿਰਬਿਕਾਰ ਨਿਰਜੁਰ ਨਿੰਦ੍ਰਾ ਬਿਨੁ ਨਿਰਬਿਖ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰੀ ॥

निरबिकार निरजुर निंद्रा बिनु निरबिख नरक निवारी ॥

nirabikaar nirajur ni(n)dhraa bin nirabikh narak nivaaree ||

ਕ੍ਰਿਪਾ ਸਿੰਧ ਕਾਲ ਤ੍ਰੈ ਦਰਸੀ ਕੁਕ੍ਰਿਤ ਪ੍ਰਨਾਸਨਕਾਰੀ ॥੨॥

कृपा सिंध काल त्रै दरसी कुकृत प्रनासनकारी ॥२॥

kirapaa si(n)dh kaal trai dharasee kukirat pranaasanakaaree ||2||


ਧਨੁਰਪਾਨਿ ਧ੍ਰਿਤਮਾਨ ਧਰਾਧਰ ਅਨਬਿਕਾਰ ਅਸਿਧਾਰੀ ॥

धनुरपानि धृतमान धराधर अनबिकार असिधारी ॥

dhanurapaan dhiratamaan dharaadhar anabikaar asidhaaree ||

ਹੌ ਮਤਿ ਮੰਦ ਚਰਨ ਸਰਨਾਗਤਿ ਕਰ ਗਹਿ ਲੇਹੁ ਉਬਾਰੀ ॥੩॥੧॥੪॥

हौ मति मंद चरन सरनागति कर गहि लेहु उबारी ॥३॥१॥४॥

hau mat ma(n)dh charan saranaagat kar geh leh ubaaree ||3||1||4||


ਰਾਗੁ ਕਲਿਆਣ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

रागु कलिआण पातिसाही १० ॥

raag kaliaan paatisaahee 10 ||


ਬਿਨ ਕਰਤਾਰ ਨ ਕਿਰਤਮ ਮਾਨੋ ॥

बिन करतार न किरतम मानो ॥

bin karataar na kiratam maano ||

ਆਦਿ ਅਜੋਨਿ ਅਜੈ ਅਬਿਨਾਸੀ ਤਿਹ ਪਰਮੇਸਰ ਜਾਨੋ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

आदि अजोनि अजै अबिनासी तिह परमेसर जानो ॥१॥ रहाउ ॥

aadh ajon ajai abinaasee teh paramesar jaano ||1|| rahaau ||


ਕਹਾ ਭਯੋ ਜੋ ਆਨ ਜਗਤ ਮੈ ਦਸਕ ਅਸੁਰ ਹਰਿ ਘਾਏ ॥

कहा भयो जो आन जगत मै दसक असुर हरि घाए ॥

kahaa bhayo jo aan jagat mai dhasak asur har ghaae ||

ਅਧਿਕ ਪ੍ਰਪੰਚ ਦਿਖਾਇ ਸਭਨ ਕਹ ਆਪਹਿ ਬ੍ਰਹਮੁ ਕਹਾਏ ॥੧॥

अधिक प्रपंच दिखाइ सभन कह आपहि ब्रहमु कहाए ॥१॥

adhik prapa(n)ch dhikhai sabhan keh aapeh braham kahaae ||1||


ਭੰਜਨ ਗੜ੍ਹਨ ਸਮਰਥ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭੁ ਸੋ ਕਿਮ ਜਾਤਿ ਗਿਨਾਯੋ ॥

भंजन गड़्हन समरथ सदा प्रभु सो किम जाति गिनायो ॥

bha(n)jan gaRhan samarath sadhaa prabh so kim jaat ginaayo ||

ਤਾ ਤੇ ਸਰਬ ਕਾਲ ਕੇ ਅਸਿ ਕੋ ਘਾਇ ਬਚਾਇ ਨ ਆਯੋ ॥੨॥

ता ते सरब काल के असि को घाइ बचाइ न आयो ॥२॥

taa te sarab kaal ke as ko ghai bachai na aayo ||2||


ਕੈਸੇ ਤੋਹਿ ਤਾਰਿਹੈ ਸੁਨਿ ਜੜ ਆਪ ਡੁਬਿਯੋ ਭਵ ਸਾਗਰ ॥

कैसे तोहि तारिहै सुनि जड़ आप डुबियो भव सागर ॥

kaise toh taarihai sun jaR aap ddubiyo bhav saagar ||

ਛੁਟਿਹੋ ਕਾਲ ਫਾਸ ਤੇ ਤਬ ਹੀ ਗਹੋ ਸਰਨਿ ਜਗਤਾਗਰ ॥੩॥੧॥੫॥

छुटिहो काल फास ते तब ही गहो सरनि जगतागर ॥३॥१॥५॥

chhuTiho kaal faas te tab hee gaho saran jagataagar ||3||1||5||


ਖਿਆਲ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

खिआल पातिसाही १० ॥

khiaal paatisaahee 10 ||


ਮਿਤ੍ਰ ਪਿਆਰੇ ਨੂੰ ਹਾਲੁ ਮੁਰੀਦਾਂ ਦਾ ਕਹਣਾ ॥

मित्र पिआरे नूँ हालु मुरीदाँ दा कहणा ॥

mitr piaare noo(n) haal mureedhaa(n) dhaa kahanaa ||

ਤੁਧ ਬਿਨੁ ਰੋਗੁ ਰਜਾਈਆਂ ਦਾ ਓਢਣੁ ਨਾਗ ਨਿਵਾਸਾਂ ਦੇ ਰਹਣਾ ॥

तुध बिनु रोगु रजाईआँ दा ओढणु नाग निवासाँ दे रहणा ॥

tudh bin rog rajaieeaa(n) dhaa oddan naag nivaasaa(n) dhe rahanaa ||

ਸੂਲ ਸੁਰਾਹੀ ਖੰਜਰੁ ਪਿਯਾਲਾ ਬਿੰਗ ਕਸਾਈਯਾਂ ਦਾ ਸਹਣਾ ॥

सूल सुराही खंजरु पियाला बिंग कसाईयाँ दा सहणा ॥

sool suraahee kha(n)jar piyaalaa bi(n)g kasaieeyaa(n) dhaa sahanaa ||

ਯਾਰੜੇ ਦਾ ਸਾਨੂੰ ਸੱਥਰ ਚੰਗਾ ਭੱਠ ਖੇੜਿਆਂ ਦਾ ਰਹਣਾ ॥੧॥੧॥੬॥

यारड़े दा सानूँ सत्थर चंगा भट्ठ खेड़िआँ दा रहणा ॥१॥१॥६॥

yaaraRe dhaa saanoo(n) sa'thar cha(n)gaa bha'Th kheRiaa(n) dhaa rahanaa ||1||1||6||


ਤਿਲੰਗ ਕਾਫੀ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

तिलंग काफी पातिसाही १० ॥

tila(n)g kaafee paatisaahee 10 ||


ਕੇਵਲ ਕਾਲਈ ਕਰਤਾਰ ॥

केवल कालई करतार ॥

keval kaaliee karataar ||

ਆਦਿ ਅੰਤ ਅਨੰਤ ਮੂਰਤਿ ਗੜ੍ਹਨ ਭੰਜਨਹਾਰ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

आदि अंत अनंत मूरति गड़्हन भंजनहार ॥१॥ रहाउ ॥

aadh a(n)t ana(n)t moorat gaRhan bha(n)janahaar ||1|| rahaau ||


ਨਿੰਦ ਉਸਤਤ ਜਉਨ ਕੇ ਸਮ ਸਤ੍ਰ ਮਿਤ੍ਰ ਨ ਕੋਇ ॥

निंद उसतत जउन के सम सत्र मित्र न कोइ ॥

ni(n)dh usatat jaun ke sam satr mitr na koi ||

ਕਉਨ ਬਾਟ ਪਰੀ ਤਿਸੈ ਪਥ ਸਾਰਥੀ ਰਥ ਹੋਇ ॥੧॥

कउन बाट परी तिसै पथ सारथी रथ होइ ॥१॥

kaun baaT paree tisai path saarathee rath hoi ||1||


ਤਾਤ ਮਾਤ ਨ ਜਾਤ ਜਾਕਰ ਪੁਤ੍ਰ ਪੌਤ੍ਰ ਮੁਕੰਦ ॥

तात मात न जात जाकर पुत्र पौत्र मुकंद ॥

taat maat na jaat jaakar putr pauatr muka(n)dh ||

ਕਉਨ ਕਾਜ ਕਹਾਹਿਂਗੇ ਤੇ ਆਨ ਦੇਵਿਕ ਨੰਦ ॥੨॥

कउन काज कहाहिंगे ते आन देविक नंद ॥२॥

kaun kaaj kahaahi(n)ge te aan dhevik na(n)dh ||2||


ਦੇਵ ਦੈਤ ਦਿਸਾ ਵਿਸਾ ਜਿਹ ਕੀਨ ਸਰਬ ਪਸਾਰ ॥

देव दैत दिसा विसा जिह कीन सरब पसार ॥

dhev dhait dhisaa visaa jeh keen sarab pasaar ||

ਕਉਨ ਉਪਮਾ ਤੌਨ ਕੌ ਮੁਖ ਲੇਤ ਨਾਮੁ ਮੁਰਾਰ ॥੩॥੧॥੭॥

कउन उपमा तौन कौ मुख लेत नामु मुरार ॥३॥१॥७॥

kaun upamaa tauan kau mukh let naam muraar ||3||1||7||


ਰਾਗ ਬਿਲਾਵਲ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

राग बिलावल पातिसाही १० ॥

raag bilaaval paatisaahee 10 ||


ਸੋ ਕਿਮ ਮਾਨਸ ਰੂਪ ਕਹਾਏ ॥

सो किम मानस रूप कहाए ॥

so kim maanas roop kahaae ||

ਸਿਧ ਸਮਾਧਿ ਸਾਧ ਕਰ ਹਾਰੇ ਕ੍ਯੋਹੂੰ ਨ ਦੇਖਨ ਪਾਏ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

सिध समाधि साध कर हारे क्योहूँ न देखन पाए ॥१॥ रहाउ ॥

sidh samaadh saadh kar haare kayohoo(n) na dhekhan paae ||1|| rahaau ||


ਨਾਰਦ ਬਿਆਸ ਪਰਾਸਰ ਧ੍ਰੂਅ ਸੇ ਧਿਆਵਤ ਧਿਆਨ ਲਗਾਏ ॥

नारद बिआस परासर ध्रूअ से धिआवत धिआन लगाए ॥

naaradh biaas paraasar dhraooa se dhiaavat dhiaan lagaae ||

ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਹਾਰਿ ਹਠ ਛਾਡਿਓ ਤਦਪਿ ਧਿਆਨ ਨ ਆਏ ॥੧॥

बेद पुरान हारि हठ छाडिओ तदपि धिआन न आए ॥१॥

bedh puraan haar haTh chhaaddio tadhap dhiaan na aae ||1||


ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਪਿਸਾਚ ਪ੍ਰੇਤ ਤੇ ਨੇਤਹ ਨੇਤ ਕਹਾਏ ॥

दानव देव पिसाच प्रेत ते नेतह नेत कहाए ॥

dhaanav dhev pisaach pret te neteh net kahaae ||

ਸੂਛਮ ਤੇ ਸੂਛਮ ਕਰ ਚੀਨੇ ਬ੍ਰਿਧਨ ਬ੍ਰਿਧ ਬਤਾਏ ॥੨॥

सूछम ते सूछम कर चीने बृधन बृध बताए ॥२॥

soochham te soochham kar cheene biradhan biradh bataae ||2||


ਭੂਮ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲ ਸਭੈ ਸਜਿ ਏਕ ਅਨੇਕ ਸਦਾਏ ॥

भूम अकास पताल सभै सजि एक अनेक सदाए ॥

bhoom akaas pataal sabhai saj ek anek sadhaae ||

ਸੋ ਨਰ ਕਾਲ ਫਾਸ ਤੇ ਬਾਚੇ ਜੋ ਹਰਿ ਸਰਣਿ ਸਿਧਾਏ ॥੩॥੧॥੮॥

सो नर काल फास ते बाचे जो हरि सरणि सिधाए ॥३॥१॥८॥

so nar kaal faas te baache jo har saran sidhaae ||3||1||8||


ਰਾਗ ਦੇਵਗੰਧਾਰੀ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

राग देवगंधारी पातिसाही १० ॥

raag dhevaga(n)dhaaree paatisaahee 10 ||


ਇਕ ਬਿਨ ਦੂਸਰ ਸੋ ਨ ਚਿਨਾਰ ॥

इक बिन दूसर सो न चिनार ॥

eik bin dhoosar so na chinaar ||

ਭੰਜਨ ਗੜਨ ਸਮਰਥ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭ ਜਾਨਤ ਹੈ ਕਰਤਾਰ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

भंजन गड़न समरथ सदा प्रभ जानत है करतार ॥१॥ रहाउ ॥

bha(n)jan gaRan samarath sadhaa prabh jaanat hai karataar ||1|| rahaau ||


ਕਹਾ ਭਇਓ ਜੋ ਅਤ ਹਿਤ ਚਿਤ ਕਰ ਬਹੁ ਬਿਧ ਸਿਲਾ ਪੁਜਾਈ ॥

कहा भइओ जो अत हित चित कर बहु बिध सिला पुजाई ॥

kahaa bhio jo at hit chit kar bahu bidh silaa pujaiee ||

ਪ੍ਰਾਨ ਥਕਿਓ ਪਾਹਨ ਕਹ ਪਰਸਤ ਕਛੁ ਕਰਿ ਸਿਧ ਨ ਆਈ ॥੧॥

प्रान थकिओ पाहन कह परसत कछु करि सिध न आई ॥१॥

praan thakio paahan keh parasat kachh kar sidh na aaiee ||1||


ਅਛਤ ਧੂਪ ਦੀਪ ਅਰਪਤ ਹੈ ਪਾਹਨ ਕਛੂ ਨ ਖੈਹੈ ॥

अछत धूप दीप अरपत है पाहन कछू न खैहै ॥

achhat dhoop dheep arapat hai paahan kachhoo na khaihai ||

ਤਾ ਮੈਂ ਕਹਾਂ ਸਿਧ ਹੈ ਰੇ ਜੜ ਤੋਹਿ ਕਛੂ ਬਰ ਦੈਹੈ ॥੨॥

ता मैं कहाँ सिध है रे जड़ तोहि कछू बर दैहै ॥२॥

taa mai(n) kahaa(n) sidh hai re jaR toh kachhoo bar dhaihai ||2||


ਜੌ ਜੀਯ ਹੋਤ ਤੌ ਦੇਤ ਕਛੁ ਤੁਹਿ ਕਰ ਮਨ ਬਚ ਕਰਮ ਬਿਚਾਰ ॥

जौ जीय होत तौ देत कछु तुहि कर मन बच करम बिचार ॥

jau jeey hot tau dhet kachh tuh kar man bach karam bichaar ||

ਕੇਵਲ ਏਕ ਸਰਣ ਸੁਆਮੀ ਬਿਨੁ ਯੌ ਨਹਿ ਕਤਹਿ ਉਧਾਰ ॥੩॥੧॥੯॥

केवल एक सरण सुआमी बिनु यौ नहि कतहि उधार ॥३॥१॥९॥

keval ek saran suaamee bin yau neh kateh udhaar ||3||1||9||


ਰਾਗ ਦੇਵਗੰਧਾਰੀ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

राग देवगंधारी पातिसाही १० ॥

raag dhevaga(n)dhaaree paatisaahee 10 ||


ਬਿਨੁ ਹਰਿ ਨਾਮ ਨ ਬਾਚਨ ਪੈਹੈ ॥

बिनु हरि नाम न बाचन पैहै ॥

bin har naam na baachan paihai ||

ਚੌਦਹਿ ਲੋਕ ਜਾਹਿ ਬਸ ਕੀਨੇ ਤਾ ਤੇ ਕਹਾਂ ਪਲੈਹੈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥

चौदहि लोक जाहि बस कीने ता ते कहाँ पलैहै ॥१॥ रहाउ ॥

chauadheh lok jaeh bas keene taa te kahaa(n) palaihai ||1|| rahaau ||


ਰਾਮ ਰਹੀਮ ਉਬਾਰ ਨ ਸਕਹੈ ਜਾ ਕਰ ਨਾਮ ਰਟੈ ਹੈ ॥

राम रहीम उबार न सकहै जा कर नाम रटै है ॥

raam raheem ubaar na sakahai jaa kar naam raTai hai ||

ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਿਸਨ ਰੁਦ੍ਰ ਸੂਰਜ ਸਸਿ ਤੇ ਬਸਿ ਕਾਲ ਸਬੈ ਹੈ ॥੧॥

ब्रहमा बिसन रुद्र सूरज ससि ते बसि काल सबै है ॥१॥

brahamaa bisan rudhr sooraj sas te bas kaal sabai hai ||1||


ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕੁਰਾਨ ਸਬੈ ਮਤ ਜਾਕਹ ਨੇਤ ਕਹੈ ਹੈ ॥

बेद पुरान कुरान सबै मत जाकह नेत कहै है ॥

bedh puraan kuraan sabai mat jaakeh net kahai hai ||

ਇੰਦ੍ਰ ਫਨਿੰਦ੍ਰ ਮੁਨਿੰਦ੍ਰ ਕਲਪ ਬਹੁ ਧਿਆਵਤ ਧਿਆਨ ਨ ਐਹੈ ॥੨॥

इंद्र फनिंद्र मुनिंद्र कलप बहु धिआवत धिआन न ऐहै ॥२॥

ei(n)dhr fani(n)dhr muni(n)dhr kalap bahu dhiaavat dhiaan na aaihai ||2||


ਜਾਕਰ ਰੂਪ ਰੰਗ ਨਹਿ ਜਨਿਯਤ ਸੋ ਕਿਮ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹੈ ॥

जाकर रूप रंग नहि जनियत सो किम स्याम कहै है ॥

jaakar roop ra(n)g neh janiyat so kim sayaam kahai hai ||

ਛੁਟਹੋ ਕਾਲ ਜਾਲ ਤੇ ਤਬ ਹੀ ਤਾਂਹਿ ਚਰਨ ਲਪਟੈਹੈ ॥੩॥੧॥੧੦॥

छुटहो काल जाल ते तब ही ताँहि चरन लपटैहै ॥३॥१॥१०॥

chhuTaho kaal jaal te tab hee taa(n)h charan lapaTaihai ||3||1||10||



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