33 Savaiye (P:10),
33 ਸਵਯੇ (ਪਾਤਸਾਹੀ 10),
33 सवये (पातसाही 10)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Gurbani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ੴ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ ॥

ੴ वाहिगुरू जी की फतहि ॥

ikOankaar vaahiguroo jee kee fateh ||

ਸਵਯੇ ॥

सवये ॥

savaye ||

ਸ੍ਰੀ ਮੁਖਵਾਕ ਪਾਤਸਾਹੀ ੧੦ ॥

स्री मुखवाक पातसाही १० ॥

sree mukhavaak paatasaahee 10 ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||


ਜਾਗਤ ਜੋਤਿ ਜਪੈ ਨਿਸ ਬਾਸੁਰ ਏਕੁ ਬਿਨਾ ਮਨਿ ਨੈਕ ਨ ਆਨੈ ॥

जागत जोति जपै निस बासुर एकु बिना मनि नैक न आनै ॥

jaagat jot japai nis baasur ek binaa man naik na aanai ||

ਪੂਰਨ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਤੀਤ ਸਜੈ ਬ੍ਰਤ ਗੋਰ ਮੜ੍ਰਹੀ ਮਠ ਭੂਲ ਨ ਮਾਨੈ ॥

पूरन प्रेम प्रतीत सजै ब्रत गोर मड़्रही मठ भूल न मानै ॥

pooran prem prateet sajai brat gor maRrahee maTh bhool na maanai ||

ਤੀਰਥ ਦਾਨ ਦਇਆ ਤਪ ਸੰਜਮ ਏਕੁ ਬਿਨਾ ਨਹਿ ਏਕ ਪਛਾਨੈ ॥

तीरथ दान दइआ तप संजम एकु बिना नहि एक पछानै ॥

teerath dhaan dhiaa tap sa(n)jam ek binaa neh ek pachhaanai ||

ਪੂਰਨ ਜੋਤਿ ਜਗੈ ਘਟ ਮੈ ਤਬ ਖਾਲਸ ਤਾਹਿ ਨ ਖਾਲਸ ਜਾਨੈ ॥੧॥

पूरन जोति जगै घट मै तब खालस ताहि न खालस जानै ॥१॥

pooran jot jagai ghaT mai tab khaalas taeh na khaalas jaanai ||1||


ਸਤਿ ਸਦੈਵ ਸਰੂਪ ਸਤ ਬ੍ਰਤ ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧ ਅਜੈ ਹੈ ॥

सति सदैव सरूप सत ब्रत आदि अनादि अगाध अजै है ॥

sat sadhaiv saroop sat brat aadh anaadh agaadh ajai hai ||

ਦਾਨ ਦਯਾ ਦਮ ਸੰਜਮ ਨੇਮ ਜਤ ਬ੍ਰਤ ਸੀਲ ਸੁਬ੍ਰਿਤ ਅਬੈ ਹੈ ॥

दान दया दम संजम नेम जत ब्रत सील सुबृत अबै है ॥

dhaan dhayaa dham sa(n)jam nem jat brat seel subirat abai hai ||

ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਨਾਦਿ ਅਨਾਹਦ ਆਪਿ ਅਦ੍ਵੇਖ ਅਭੇਖ ਅਭੈ ਹੈ ॥

आदि अनील अनादि अनाहद आपि अद्वेख अभेख अभै है ॥

aadh aneel anaadh anaahadh aap adhavaiekh abhekh abhai hai ||

ਰੂਪ ਅਰੂਪ ਅਰੇਖ ਜਰਾਰਦਨ ਦੀਨ ਦਯਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਭਏ ਹੈ ॥੨॥

रूप अरूप अरेख जरारदन दीन दयाल कृपाल भए है ॥२॥

roop aroop arekh jaraaradhan dheen dhayaal kirapaal bhe hai ||2||


ਆਦਿ ਅਦ੍ਵੈਖ ਅਵੇਖ ਮਹਾ ਪ੍ਰਭ ਸਤਿ ਸਰੂਪ ਸੁ ਜੋਤਿ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ॥

आदि अद्वैख अवेख महा प्रभ सति सरूप सु जोति प्रकासी ॥

aadh adhavaikh avekh mahaa prabh sat saroop su jot prakaasee ||

ਪੂਰ ਰਹਯੋ ਸਭ ਹੀ ਘਟ ਕੈ ਪਟ ਤਤ ਸਮਾਧਿ ਸੁਭਾਵ ਪ੍ਰਨਾਸੀ ॥

पूर रहयो सभ ही घट कै पट तत समाधि सुभाव प्रनासी ॥

poor rahayo sabh hee ghaT kai paT tat samaadh subhaav pranaasee ||

ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਜਗਾਦਿ ਤੁਹੀ ਪ੍ਰਭ ਫੈਲ ਰਹਯੋ ਸਭ ਅੰਤਰ ਬਾਸੀ ॥

आदि जुगादि जगादि तुही प्रभ फैल रहयो सभ अंतर बासी ॥

aadh jugaadh jagaadh tuhee prabh fail rahayo sabh a(n)tar baasee ||

ਦੀਨ ਦਯਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰ ਆਦਿ ਅਜੋਨ ਅਜੈ ਅਬਿਨਾਸੀ ॥੩॥

दीन दयाल कृपाल कृपा कर आदि अजोन अजै अबिनासी ॥३॥

dheen dhayaal kirapaal kirapaa kar aadh ajon ajai abinaasee ||3||


ਆਦਿ ਅਭੇਖ ਅਛੇਦ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭ ਬੇਦ ਕਤੇਬਨਿ ਭੇਦੁ ਨ ਪਾਯੋ ॥

आदि अभेख अछेद सदा प्रभ बेद कतेबनि भेदु न पायो ॥

aadh abhekh achhedh sadhaa prabh bedh kateban bhedh na paayo ||

ਦੀਨ ਦਯਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਨਿਧਿ ਸਤਿ ਸਦੈਵ ਸਭੈ ਘਟ ਛਾਯੋ ॥

दीन दयाल कृपाल कृपानिधि सति सदैव सभै घट छायो ॥

dheen dhayaal kirapaal kirapaanidh sat sadhaiv sabhai ghaT chhaayo ||

ਸੇਸ ਸੁਰੇਸ ਗਣੇਸ ਮਹੇਸੁਰ ਗਾਹਿ ਫਿਰੈ ਸ੍ਰੁਤਿ ਥਾਹ ਨਾ ਆਯੋ ॥

सेस सुरेस गणेस महेसुर गाहि फिरै स्रुति थाह ना आयो ॥

ses sures ganes mahesur gaeh firai srut thaeh naa aayo ||

ਰੇ ਮਨ ਮੂੜਿ ਅਗੂੜ ਇਸੋ ਪ੍ਰਭ ਤੈ ਕਿਹਿ ਕਾਜਿ ਕਹੋ ਬਿਸਰਾਯੋ ॥੪॥

रे मन मूड़ि अगूड़ इसो प्रभ तै किहि काजि कहो बिसरायो ॥४॥

re man mooR agooR iso prabh tai keh kaaj kaho bisaraayo ||4||


ਅਚੁਤ ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਨਾਹਦ ਸਤ ਸਰੂਪ ਸਦੈਵ ਬਖਾਨੇ ॥

अचुत आदि अनील अनाहद सत सरूप सदैव बखाने ॥

achut aadh aneel anaahadh sat saroop sadhaiv bakhaane ||

ਆਦਿ ਅਜੋਨਿ ਅਜਾਇ ਜਹਾ ਬਿਨੁ ਪਰਮ ਪੁਨੀਤ ਪਰੰਪਰ ਮਾਨੇ ॥

आदि अजोनि अजाइ जहा बिनु परम पुनीत परंपर माने ॥

aadh ajon ajai jahaa bin param puneet para(n)par maane ||

ਸਿਧ ਸਯੰਭੂ ਪ੍ਰਸਿਧ ਸਬੈ ਜਗ ਏਕ ਹੀ ਠੌਰ ਅਨੇਕ ਬਖਾਨੇ ॥

सिध सयंभू प्रसिध सबै जग एक ही ठौर अनेक बखाने ॥

sidh saya(n)bhoo prasidh sabai jag ek hee Thauar anek bakhaane ||

ਰੇ ਮਨ ਰੰਕ ਕਲੰਕ ਬਿਨਾ ਹਰਿ ਤੈ ਕਿਹ ਕਾਰਣ ਤੇ ਨ ਪਹਿਚਾਨੇ ॥੫॥

रे मन रंक कलंक बिना हरि तै किह कारण ते न पहिचाने ॥५॥

re man ra(n)k kala(n)k binaa har tai keh kaaran te na pahichaane ||5||


ਅਛਰ ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਨਾਹਦ ਸਤ ਸਦੈਵ ਤੁਹੀ ਕਰਤਾਰਾ ॥

अछर आदि अनील अनाहद सत सदैव तुही करतारा ॥

achhar aadh aneel anaahadh sat sadhaiv tuhee karataaraa ||

ਜੀਵ ਜਿਤੇ ਜਲ ਮੈ ਥਲ ਮੈ ਸਬ ਕੈ ਸਦ ਪੇਟ ਕੌ ਪੋਖਨ ਹਾਰਾ ॥

जीव जिते जल मै थल मै सब कै सद पेट कौ पोखन हारा ॥

jeev jite jal mai thal mai sab kai sadh peT kau pokhan haaraa ||

ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕੁਰਾਨ ਦੁਹੂੰ ਮਿਲਿ ਭਾਤਿ ਅਨੇਕ ਬਿਚਾਰ ਬਿਚਾਰਾ ॥

बेद पुरान कुरान दुहूँ मिलि भाति अनेक बिचार बिचारा ॥

bedh puraan kuraan dhuhoo(n) mil bhaat anek bichaar bichaaraa ||

ਔਰ ਜਹਾਨ ਨਿਦਾਨ ਕਛੂ ਨਹਿ ਏ ਸੁਬਹਾਨ ਤੁਹੀ ਸਿਰਦਾਰਾ ॥੬॥

और जहान निदान कछू नहि ए सुबहान तुही सिरदारा ॥६॥

aauar jahaan nidhaan kachhoo neh e subahaan tuhee siradhaaraa ||6||


ਆਦਿ ਅਗਾਧਿ ਅਛੇਦ ਅਭੇਦ ਅਲੇਖ ਅਜੇਅ ਅਨਾਹਦ ਜਾਨਾ ॥

आदि अगाधि अछेद अभेद अलेख अजेअ अनाहद जाना ॥

aadh agaadh achhedh abhedh alekh ajea anaahadh jaanaa ||

ਭੂਤ ਭਵਿਖ ਭਵਾਨ ਤੁਹੀ ਸਬਹੂੰ ਸਬ ਠੌਰਨ ਮੋ ਮਨ ਮਾਨਾ ॥

भूत भविख भवान तुही सबहूँ सब ठौरन मो मन माना ॥

bhoot bhavikh bhavaan tuhee sabahoo(n) sab Thauaran mo man maanaa ||

ਸਦੇਵ ਅਦੇਵ ਮਣੀਧਰ ਨਾਰਦ ਸਾਰਦ ਸਤਿ ਸਦੈਵ ਪਛਾਨਾ ॥

सदेव अदेव मणीधर नारद सारद सति सदैव पछाना ॥

sadhev adhev maneedhar naaradh saaradh sat sadhaiv pachhaanaa ||

ਦੀਨ ਦਯਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਨਿਧਿਕੋ ਕਛੁ ਭੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕੁਰਾਨ ਨ ਜਾਨਾ ॥੭॥

दीन दयाल कृपानिधिको कछु भेद पुरान कुरान न जाना ॥७॥

dheen dhayaal kirapaanidhiko kachh bhedh puraan kuraan na jaanaa ||7||


ਸਤਿ ਸਦੈਵ ਸਰੂਪ ਸਦਾਬ੍ਰਤ ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਤੁਹੀ ਉਪਜਾਯੋ ॥

सति सदैव सरूप सदाब्रत बेद कतेब तुही उपजायो ॥

sat sadhaiv saroop sadhaabrat bedh kateb tuhee upajaayo ||

ਦੇਵ ਅਦੇਵਨ ਦੇਵ ਮਹੀਧਰ ਭੂਤ ਭਵਾਨ ਵਹੀ ਠਹਰਾਯੋ ॥

देव अदेवन देव महीधर भूत भवान वही ठहरायो ॥

dhev adhevan dhev maheedhar bhoot bhavaan vahee Thaharaayo ||

ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਅਨੀਲ ਅਨਾਹਦ ਲੋਕ ਅਲੋਕ ਬਿਲੋਕ ਨ ਪਾਯੋ ॥

आदि जुगादि अनील अनाहद लोक अलोक बिलोक न पायो ॥

aadh jugaadh aneel anaahadh lok alok bilok na paayo ||

ਰੇ ਮਨ ਮੂੜ ਅਗੂੜਿ ਇਸੋ ਪ੍ਰਭ ਤੋਹਿ ਕਹੋ ਕਿਹਿ ਆਨ ਸੁਨਾਯੋ ॥੮॥

रे मन मूड़ अगूड़ि इसो प्रभ तोहि कहो किहि आन सुनायो ॥८॥

re man mooR agooR iso prabh toh kaho keh aan sunaayo ||8||


ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਮਹੀਧਰ ਨਾਗਨ ਸਿਧ ਪ੍ਰਸਿਧ ਬਡੋ ਤਪੁ ਕੀਨੋ ॥

देव अदेव महीधर नागन सिध प्रसिध बडो तपु कीनो ॥

dhev adhev maheedhar naagan sidh prasidh baddo tap keeno ||

ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕੁਰਾਨ ਸਬੈ ਗੁਨ ਗਾਇ ਥਕੇ ਪੈ ਤੋ ਜਾਇ ਨ ਚੀਨੋ ॥

बेद पुरान कुरान सबै गुन गाइ थके पै तो जाइ न चीनो ॥

bedh puraan kuraan sabai gun gai thake pai to jai na cheeno ||

ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਪਤਾਰ ਦਿਸਾ ਬਿਦਿਸਾ ਜਿਹਿ ਸੋ ਸਬ ਕੇ ਚਿਤ ਚੀਨੋ ॥

भूमि अकास पतार दिसा बिदिसा जिहि सो सब के चित चीनो ॥

bhoom akaas pataar dhisaa bidhisaa jeh so sab ke chit cheeno ||

ਪੂਰ ਰਹੀ ਮਹਿ ਮੋ ਮਹਿਮਾ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨਿ ਆਨਿ ਮੁਝੈ ਕਹਿ ਦੀਨੋ ॥੯॥

पूर रही महि मो महिमा मन मै तिनि आनि मुझै कहि दीनो ॥९॥

poor rahee meh mo mahimaa man mai tin aan mujhai keh dheeno ||9||


ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਨ ਭੇਦ ਲਹਯੋ ਤਿਹਿ ਸਿਧ ਸਮਾਧਿ ਸਬੈ ਕਰਿ ਹਾਰੇ ॥

बेद कतेब न भेद लहयो तिहि सिध समाधि सबै करि हारे ॥

bedh kateb na bhedh lahayo teh sidh samaadh sabai kar haare ||

ਸਿੰਮ੍ਰਿਤ ਸਾਸਤ੍ਰ ਬੇਦ ਸਬੈ ਬਹੁ ਭਾਤਿ ਪੁਰਾਨ ਬੀਚਾਰ ਬੀਚਾਰੇ ॥

सिंमृत सासत्र बेद सबै बहु भाति पुरान बीचार बीचारे ॥

si(n)mirat saasatr bedh sabai bahu bhaat puraan beechaar beechaare ||

ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧਿ ਕਥਾ ਧ੍ਰੂਅ ਸੇ ਪ੍ਰਹਿਲਾਦਿ ਅਜਾਮਲ ਤਾਰੇ ॥

आदि अनादि अगाधि कथा ध्रूअ से प्रहिलादि अजामल तारे ॥

aadh anaadh agaadh kathaa dhraooa se prahilaadh ajaamal taare ||

ਨਾਮੁ ਉਚਾਰ ਤਰੀ ਗਨਿਕਾ ਸੋਈ ਨਾਮੁ ਅਧਾਰ ਬੀਚਾਰ ਹਮਾਰੇ ॥੧੦॥

नामु उचार तरी गनिका सोई नामु अधार बीचार हमारे ॥१०॥

naam uchaar taree ganikaa soiee naam adhaar beechaar hamaare ||10||


ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧਿ ਸਦਾ ਪ੍ਰਭ ਸਿਧ ਸ੍ਵਰੂਪ ਸਬੋ ਪਹਿਚਾਨਯੋ ॥

आदि अनादि अगाधि सदा प्रभ सिध स्वरूप सबो पहिचानयो ॥

aadh anaadh agaadh sadhaa prabh sidh savairoop sabo pahichaanayo ||

ਗੰਧ੍ਰਬ ਜਛ ਮਹੀਧਰ ਨਾਗਨ ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਚਹੂੰ ਚਕ ਜਾਨਯੋ ॥

गंध्रब जछ महीधर नागन भूमि अकास चहूँ चक जानयो ॥

ga(n)dhrab jachh maheedhar naagan bhoom akaas chahoo(n) chak jaanayo ||

ਲੋਕ ਅਲੋਕ ਦਿਸਾ ਬਿਦਿਸਾ ਅਰੁ ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਦੁਹੂੰ ਪ੍ਰਭ ਮਾਨਯੋ ॥

लोक अलोक दिसा बिदिसा अरु देव अदेव दुहूँ प्रभ मानयो ॥

lok alok dhisaa bidhisaa ar dhev adhev dhuhoo(n) prabh maanayo ||

ਚਿਤ ਅਗਯਾਨ ਸੁ ਜਾਨ ਸੁਯੰਭਵ ਕੌਨ ਕੀ ਕਾਨਿ ਨਿਧਾਨ ਭੁਲਾਨਯੋ ॥੧੧॥

चित अगयान सु जान सुयंभव कौन की कानि निधान भुलानयो ॥११॥

chit agayaan su jaan suya(n)bhav kauan kee kaan nidhaan bhulaanayo ||11||


ਕਾਹੂੰ ਲੈ ਠੋਕਿ ਬਧੇ ਉਰਿ ਠਾਕੁਰ ਕਾਹੂੰ ਮਹੇਸ ਕੋ ਏਸ ਬਖਾਨਯੋ ॥

काहूँ लै ठोकि बधे उरि ठाकुर काहूँ महेस को एस बखानयो ॥

kaahoo(n) lai Thok badhe ur Thaakur kaahoo(n) mahes ko es bakhaanayo ||

ਕਾਹੂ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਮੰਦਰ ਮੈ ਹਰਿ ਕਾਹੂ ਮਸੀਤ ਕੈ ਬੀਚ ਪ੍ਰਮਾਨਯੋ ॥

काहू कहियो हरि मंदर मै हरि काहू मसीत कै बीच प्रमानयो ॥

kaahoo kahiyo har ma(n)dhar mai har kaahoo maseet kai beech pramaanayo ||

ਕਾਹੂੰ ਨੇ ਰਾਮ ਕਹਯੋ ਕ੍ਰਿਸਨਾ ਕਹੁ ਕਾਹੂ ਮਨੈ ਅਵਤਾਰਨ ਮਾਨਯੋ ॥

काहूँ ने राम कहयो कृसना कहु काहू मनै अवतारन मानयो ॥

kaahoo(n) ne raam kahayo kirasanaa kahu kaahoo manai avataaran maanayo ||

ਫੋਕਟ ਧਰਮ ਬਿਸਾਰ ਸਬੈ ਕਰਤਾਰ ਹੀ ਕਉ ਕਰਤਾ ਜੀਅ ਜਾਨਯੋ ॥੧੨॥

फोकट धरम बिसार सबै करतार ही कउ करता जीअ जानयो ॥१२॥

fokaT dharam bisaar sabai karataar hee kau karataa jeea jaanayo ||12||


ਜੌ ਕਹੋ ਰਾਮ ਅਜੋਨਿ ਅਜੈ ਅਤਿ ਕਾਹੇ ਕੌ ਕੌਸਲਿ ਕੁਖ ਜਯੋ ਜੂ ॥

जौ कहो राम अजोनि अजै अति काहे कौ कौसलि कुख जयो जू ॥

jau kaho raam ajon ajai at kaahe kau kauasal kukh jayo joo ||

ਕਾਲ ਹੂੰ ਕਾਲ ਕਹੋ ਜਿਹ ਕੌ ਕਿਹਿ ਕਾਰਣ ਕਾਲ ਤੇ ਦੀਨ ਭਯੋ ਜੂ ॥

काल हूँ काल कहो जिह कौ किहि कारण काल ते दीन भयो जू ॥

kaal hoo(n) kaal kaho jeh kau keh kaaran kaal te dheen bhayo joo ||

ਸਤਿ ਸਰੂਪ ਬਿਬੈਰ ਕਹਾਇ ਸੁ ਕਯੋਂ ਪਥ ਕੋ ਰਥ ਹਾਕਿ ਧਯੋ ਜੂ ॥

सति सरूप बिबैर कहाइ सु कयों पथ को रथ हाकि धयो जू ॥

sat saroop bibair kahai su kayo(n) path ko rath haak dhayo joo ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਮਾਨਿ ਪ੍ਰਭੂ ਕਰਿ ਕੈ ਜਿਹ ਕੋ ਕੋਊ ਭੇਦੁ ਨ ਲੈਨ ਲਯੋ ਜੂ ॥੧੩॥

ताही को मानि प्रभू करि कै जिह को कोऊ भेदु न लैन लयो जू ॥१३॥

taahee ko maan prabhoo kar kai jeh ko kouoo bhedh na lain layo joo ||13||


ਕ੍ਯੋ ਕਹੋ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕ੍ਰਿਪਾਨਿਧਿ ਹੈ ਕਿਹ ਕਾਜ ਤੇ ਬਧਕ ਬਾਣੁ ਲਗਾਯੋ ॥

क्यो कहो कृसन कृपानिधि है किह काज ते बधक बाणु लगायो ॥

kayo kaho kirasan kirapaanidh hai keh kaaj te badhak baan lagaayo ||

ਅਉਰ ਕੁਲੀਨ ਉਧਾਰਤ ਜੋ ਕਿਹ ਤੇ ਅਪਨੋ ਕੁਲਿ ਨਾਸੁ ਕਰਾਯੋ ॥

अउर कुलीन उधारत जो किह ते अपनो कुलि नासु करायो ॥

aaur kuleen udhaarat jo keh te apano kul naas karaayo ||

ਆਦਿ ਅਜੋਨਿ ਕਹਾਇ ਕਹੋ ਕਿਮ ਦੇਵਕਿ ਕੇ ਜਠਰੰਤਰ ਆਯੋ ॥

आदि अजोनि कहाइ कहो किम देवकि के जठरंतर आयो ॥

aadh ajon kahai kaho kim dhevak ke jaThara(n)tar aayo ||

ਤਾਤ ਨ ਮਾਤ ਕਹੈ ਜਿਹ ਕੋ ਤਿਹ ਕਯੋ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਬਾਪੁ ਕਹਾਯੋ ॥੧੪॥

तात न मात कहै जिह को तिह कयो बसुदेवहि बापु कहायो ॥१४॥

taat na maat kahai jeh ko teh kayo basudheveh baap kahaayo ||14||


ਕਾਹੇ ਕੌ ਏਸ ਮਹੇਸਹਿ ਭਾਖਤ ਕਾਹਿ ਦਿਜੇਸ ਕੋ ਏਸ ਬਖਾਨਯੋ ॥

काहे कौ एस महेसहि भाखत काहि दिजेस को एस बखानयो ॥

kaahe kau es maheseh bhaakhat kaeh dhijes ko es bakhaanayo ||

ਹੈ ਨ ਰਘ੍ਵੇਸ ਜਦ੍ਵੇਸ ਰਮਾਪਤਿ ਤੈ ਜਿਨ ਕੋ ਬਿਸੁਨਾਥ ਪਛਾਨਯੋ ॥

है न रघ्वेस जद्वेस रमापति तै जिन को बिसुनाथ पछानयो ॥

hai na raghavaies jadhavaies ramaapat tai jin ko bisunaath pachhaanayo ||

ਏਕ ਕੋ ਛਾਡਿ ਅਨੇਕ ਭਜੇ ਸੁਕਦੇਵ ਪਰਾਸਰ ਬਯਾਸ ਝੁਠਾਨਯੋ ॥

एक को छाडि अनेक भजे सुकदेव परासर बयास झुठानयो ॥

ek ko chhaadd anek bhaje sukadhev paraasar bayaas jhuThaanayo ||

ਫੋਕਟ ਧਰਮ ਸਜੇ ਸਬ ਹੀ ਹਮ ਏਕ ਹੀ ਕੌ ਬਿਧਿ ਨੇਕ ਪ੍ਰਮਾਨਯੋ ॥੧੫॥

फोकट धरम सजे सब ही हम एक ही कौ बिधि नेक प्रमानयो ॥१५॥

fokaT dharam saje sab hee ham ek hee kau bidh nek pramaanayo ||15||


ਕੋਊ ਦਿਜੇਸ ਕੁ ਮਾਨਤ ਹੈ ਅਰੁ ਕੋਊ ਮਹੇਸ ਕੋ ਏਸ ਬਤੈ ਹੈ ॥

कोऊ दिजेस कु मानत है अरु कोऊ महेस को एस बतै है ॥

kouoo dhijes k maanat hai ar kouoo mahes ko es batai hai ||

ਕੋਊ ਕਹੈ ਬਿਸਨੋ ਬਿਸੁਨਾਇਕ ਜਾਹਿ ਭਜੇ ਅਘ ਓਘ ਕਟੈ ਹੈ ॥

कोऊ कहै बिसनो बिसुनाइक जाहि भजे अघ ओघ कटै है ॥

kouoo kahai bisano bisunaik jaeh bhaje agh ogh kaTai hai ||

ਬਾਰ ਹਜਾਰ ਬਿਚਾਰ ਅਰੇ ਜੜ ਅੰਤ ਸਮੇ ਸਬ ਹੀ ਤਜਿ ਜੈ ਹੈ ॥

बार हजार बिचार अरे जड़ अंत समे सब ही तजि जै है ॥

baar hajaar bichaar are jaR a(n)t same sab hee taj jai hai ||

ਤਾ ਹੀ ਕੋ ਧਯਾਨ ਪ੍ਰਮਾਨਿ ਹੀਏ ਜੋਊ ਕੇ ਅਬ ਹੈ ਅਰ ਆਗੈ ਊ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੧੬॥

ता ही को धयान प्रमानि हीए जोऊ के अब है अर आगै ऊ ह्वै है ॥१६॥

taa hee ko dhayaan pramaan he'ee jouoo ke ab hai ar aagai uoo havai hai ||16||


ਕੋਟਕ ਇੰਦ੍ਰ ਕਰੇ ਜਿਹ ਕੇ ਕਈ ਕੋਟਿ ਉਪਿੰਦ੍ਰ ਬਨਾਇ ਖਪਾਯੋ ॥

कोटक इंद्र करे जिह के कई कोटि उपिंद्र बनाइ खपायो ॥

koTak i(n)dhr kare jeh ke kiee koT upi(n)dhr banai khapaayo ||

ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਫਨਿੰਦ੍ਰ ਧਰਾਧਰ ਪਛ ਪਸੂ ਨਹਿ ਜਾਤਿ ਗਨਾਯੋ ॥

दानव देव फनिंद्र धराधर पछ पसू नहि जाति गनायो ॥

dhaanav dhev fani(n)dhr dharaadhar pachh pasoo neh jaat ganaayo ||

ਆਜ ਲਗੇ ਤਪੁ ਸਾਧਤ ਹੈ ਸਿਵ ਊ ਬ੍ਰਹਮਾ ਕਛੁ ਪਾਰ ਨ ਪਾਯੋ ॥

आज लगे तपु साधत है सिव ऊ ब्रहमा कछु पार न पायो ॥

aaj lage tap saadhat hai siv uoo brahamaa kachh paar na paayo ||

ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਨ ਭੇਦ ਲਖਯੋ ਜਿਹ ਸੋਊ ਗੁਰੂ ਗੁਰ ਮੋਹਿ ਬਤਾਯੋ ॥੧੭॥

बेद कतेब न भेद लखयो जिह सोऊ गुरू गुर मोहि बतायो ॥१७॥

bedh kateb na bhedh lakhayo jeh souoo guroo gur moh bataayo ||17||


ਧਯਾਨ ਲਗਾਇ ਠਗਿਓ ਸਬ ਲੋਗਨ ਸੀਸ ਜਟਾ ਨ ਹਾਥਿ ਬਢਾਏ ॥

धयान लगाइ ठगिओ सब लोगन सीस जटा न हाथि बढाए ॥

dhayaan lagai Thagio sab logan sees jaTaa na haath baddaae ||

ਲਾਇ ਬਿਭੂਤ ਫਿਰਯੋ ਮੁਖ ਊਪਰਿ ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਸਬੈ ਡਹਕਾਏ ॥

लाइ बिभूत फिरयो मुख ऊपरि देव अदेव सबै डहकाए ॥

lai bibhoot firayo mukh uoopar dhev adhev sabai ddahakaae ||

ਲੋਭ ਕੇ ਲਾਗੇ ਫਿਰਯੋ ਘਰ ਹੀ ਘਰਿ ਜੋਗ ਕੇ ਨਯਾਸ ਸਬੈ ਬਿਸਰਾਏ ॥

लोभ के लागे फिरयो घर ही घरि जोग के नयास सबै बिसराए ॥

lobh ke laage firayo ghar hee ghar jog ke nayaas sabai bisaraae ||

ਲਾਜ ਗਈ ਕਛੁ ਕਾਜੁ ਸਰਯੋ ਨਹਿ ਪ੍ਰੇਮ ਬਿਨਾ ਪ੍ਰਭ ਪਾਨਿ ਨ ਆਏ ॥੧੮॥

लाज गई कछु काजु सरयो नहि प्रेम बिना प्रभ पानि न आए ॥१८॥

laaj giee kachh kaaj sarayo neh prem binaa prabh paan na aae ||18||


ਕਾਹੇ ਕਉ ਡਿੰਭ ਕਰੈ ਮਨ ਮੂਰਖ ਡਿੰਭ ਕਰੇ ਅਪੁਨੀ ਪਤਿ ਖ੍ਵੈ ਹੈ ॥

काहे कउ डिंभ करै मन मूरख डिंभ करे अपुनी पति ख्वै है ॥

kaahe kau ddi(n)bh karai man moorakh ddi(n)bh kare apunee pat khavai hai ||

ਕਾਹੇ ਕਉ ਲੋਗ ਠਗੇ ਠਗ ਲੋਗਨਿ ਲੋਗ ਗਯੋ ਪਰਲੋਗ ਗਵੈ ਹੈ ॥

काहे कउ लोग ठगे ठग लोगनि लोग गयो परलोग गवै है ॥

kaahe kau log Thage Thag logan log gayo paralog gavai hai ||

ਦੀਲ ਦਯਾਲ ਕੀ ਠੌਰ ਜਹਾ ਤਿਹਿ ਠੌਰ ਬਿਖੈ ਤੁਹਿ ਠੌਰ ਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥

दील दयाल की ठौर जहा तिहि ठौर बिखै तुहि ठौर न ह्वै है ॥

dheel dhayaal kee Thauar jahaa teh Thauar bikhai tuh Thauar na havai hai ||

ਚੇਤ ਰੇ ਚੇਤ ਅਚੇਤ ਮਹਾ ਜੜ ਭੇਖ ਕੇ ਕੀਨੇ ਅਲੇਖ ਨ ਪੈ ਹੈ ॥੧੯॥

चेत रे चेत अचेत महा जड़ भेख के कीने अलेख न पै है ॥१९॥

chet re chet achet mahaa jaR bhekh ke keene alekh na pai hai ||19||


ਕਾਹੇ ਕਉ ਪੂਜਤ ਪਾਹਨ ਕਉ ਕਛੁ ਪਾਹਨ ਮੈ ਪਰਮੇਸਰ ਨਾਹੀ ॥

काहे कउ पूजत पाहन कउ कछु पाहन मै परमेसर नाही ॥

kaahe kau poojat paahan kau kachh paahan mai paramesar naahee ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਪੂਜ ਪ੍ਰਭੂ ਕਰਿ ਕੇ ਜਿਹ ਪੂਜਤ ਹੀ ਅਘ ਓਘ ਮਿਟਾਹੀ ॥

ताही को पूज प्रभू करि के जिह पूजत ही अघ ओघ मिटाही ॥

taahee ko pooj prabhoo kar ke jeh poojat hee agh ogh miTaahee ||

ਆਧਿ ਬਿਆਧਿ ਕੇ ਬੰਧਨ ਜੇਤਕ ਨਾਮ ਕੇ ਲੇਤ ਸਬੈ ਛੁਟਿ ਜਾਹੀ ॥

आधि बिआधि के बंधन जेतक नाम के लेत सबै छुटि जाही ॥

aadh biaadh ke ba(n)dhan jetak naam ke let sabai chhuT jaahee ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਧਯਾਨੁ ਪ੍ਰਮਾਨ ਸਦਾ ਇਨ ਫੋਕਟ ਧਰਮ ਕਰੇ ਫਲੁ ਨਾਹੀ ॥੨੦॥

ताही को धयानु प्रमान सदा इन फोकट धरम करे फलु नाही ॥२०॥

taahee ko dhayaan pramaan sadhaa in fokaT dharam kare fal naahee ||20||


ਫੋਕਟ ਧਰਮ ਭਯੋ ਫਲ ਹੀਨ ਜੁ ਪੂਜ ਸਿਲਾ ਜੁਗਿ ਕੋਟਿ ਗਵਾਈ ॥

फोकट धरम भयो फल हीन जु पूज सिला जुगि कोटि गवाई ॥

fokaT dharam bhayo fal heen ju pooj silaa jug koT gavaiee ||

ਸਿਧਿ ਕਹਾ ਸਿਲ ਕੇ ਪਰਸੈ ਬਲੁ ਬ੍ਰਿਧ ਘਟੀ ਨਵ ਨਿਧਿ ਨ ਪਾਈ ॥

सिधि कहा सिल के परसै बलु बृध घटी नव निधि न पाई ॥

sidh kahaa sil ke parasai bal biradh ghaTee nav nidh na paiee ||

ਆਜ ਹੀ ਆਜੁ ਸਮੋ ਜੁ ਬਿਤਯੋ ਨਹਿ ਕਾਜਿ ਸਰਯੋ ਕਛੁ ਲਾਜਿ ਨ ਆਈ ॥

आज ही आजु समो जु बितयो नहि काजि सरयो कछु लाजि न आई ॥

aaj hee aaj samo ju bitayo neh kaaj sarayo kachh laaj na aaiee ||

ਸ੍ਰੀ ਭਗਵੰਤ ਭਜਯੋ ਨ ਅਰੇ ਜੜ ਐਸੇ ਹੀ ਐਸੇ ਸੁ ਬੈਸ ਗਵਾਈ ॥੨੧॥

स्री भगवंत भजयो न अरे जड़ ऐसे ही ऐसे सु बैस गवाई ॥२१॥

sree bhagava(n)t bhajayo na are jaR aaise hee aaise su bais gavaiee ||21||


ਜੌ ਜੁਗ ਤੇ ਕਰ ਹੈ ਤਪਸਾ ਕੁਛ ਤੋਹਿ ਪ੍ਰਸੰਨੁ ਨ ਪਾਹਨ ਕੈ ਹੈ ॥

जौ जुग ते कर है तपसा कुछ तोहि प्रसंनु न पाहन कै है ॥

jau jug te kar hai tapasaa kuchh toh prasa(n)n na paahan kai hai ||

ਹਾਥਿ ਉਠਾਇ ਭਲੀ ਬਿਧਿ ਸੋ ਜੜ ਤੋਹਿ ਕਛੂ ਬਰਦਾਨੁ ਨ ਦੈ ਹੈ ॥

हाथि उठाइ भली बिधि सो जड़ तोहि कछू बरदानु न दै है ॥

haath uThai bhalee bidh so jaR toh kachhoo baradhaan na dhai hai ||

ਕਉਨ ਭਰੋਸੋ ਭਯਾ ਇਹ ਕੋ ਕਹੁ ਭੀਰ ਪਰੀ ਨਹਿ ਆਨਿ ਬਚੈ ਹੈ ॥

कउन भरोसो भया इह को कहु भीर परी नहि आनि बचै है ॥

kaun bharoso bhayaa ieh ko kahu bheer paree neh aan bachai hai ||

ਜਾਨੁ ਰੇ ਜਾਨੁ ਅਜਾਨ ਹਠੀ ਇਹ ਫੋਕਟ ਧਰਮ ਸੁ ਭਰਮ ਗਵੈ ਹੈ ॥੨੨॥

जानु रे जानु अजान हठी इह फोकट धरम सु भरम गवै है ॥२२॥

jaan re jaan ajaan haThee ieh fokaT dharam su bharam gavai hai ||22||


ਜਾਲ ਬਧੇ ਸਬ ਹੀ ਮ੍ਰਿਤ ਕੇ ਕੋਊ ਰਾਮ ਰਸੂਲ ਨ ਬਾਚਨ ਪਾਏ ॥

जाल बधे सब ही मृत के कोऊ राम रसूल न बाचन पाए ॥

jaal badhe sab hee mirat ke kouoo raam rasool na baachan paae ||

ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਫਨਿੰਦ ਧਰਾਧਰ ਭੂਤ ਭਵਿਖ ਉਪਾਇ ਮਿਟਾਏ ॥

दानव देव फनिंद धराधर भूत भविख उपाइ मिटाए ॥

dhaanav dhev fani(n)dh dharaadhar bhoot bhavikh upai miTaae ||

ਅੰਤ ਮਰੇ ਪਛੁਤਾਇ ਪ੍ਰਿਥੀ ਪਰਿ ਜੇ ਜਗ ਮੈ ਅਵਤਾਰ ਕਹਾਏ ॥

अंत मरे पछुताइ पृथी परि जे जग मै अवतार कहाए ॥

a(n)t mare pachhutai pirathee par je jag mai avataar kahaae ||

ਰੇ ਮਨ ਲੈਲ ਇਕੇਲ ਹੀ ਕਾਲ ਕੇ ਲਾਗਤ ਕਾਹਿ ਨ ਪਾਇਨ ਧਾਏ ॥੨੩॥

रे मन लैल इकेल ही काल के लागत काहि न पाइन धाए ॥२३॥

re man lail ikel hee kaal ke laagat kaeh na pain dhaae ||23||


ਕਾਲ ਹੀ ਪਾਇ ਭਇਓ ਬ੍ਰਹਮਾ ਗਹਿ ਦੰਡ ਕਮੰਡਲ ਭੂਮਿ ਭ੍ਰਮਾਨਯੋ ॥

काल ही पाइ भइओ ब्रहमा गहि दंड कमंडल भूमि भ्रमानयो ॥

kaal hee pai bhio brahamaa geh dha(n)dd kama(n)ddal bhoom bhramaanayo ||

ਕਾਲ ਹੀ ਪਾਇ ਸਦਾ ਸਿਵ ਜੂ ਸਭ ਦੇਸ ਬਦੇਸ ਭਇਆ ਹਮ ਜਾਨਯੋ ॥

काल ही पाइ सदा सिव जू सभ देस बदेस भइआ हम जानयो ॥

kaal hee pai sadhaa siv joo sabh dhes badhes bhiaa ham jaanayo ||

ਕਾਲ ਹੀ ਪਾਇ ਭਯੋ ਮਿਟ ਗਯੋ ਜਗ ਯਾ ਹੀ ਤੇ ਤਾਹਿ ਸਭੋ ਪਹਿਚਾਨਯੋ ॥

काल ही पाइ भयो मिट गयो जग या ही ते ताहि सभो पहिचानयो ॥

kaal hee pai bhayo miT gayo jag yaa hee te taeh sabho pahichaanayo ||

ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਕੇ ਭੇਦ ਸਬੈ ਤਜਿ ਕੇਵਲ ਕਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਨਿਧਿ ਮਾਨਯੋ ॥੨੪॥

बेद कतेब के भेद सबै तजि केवल काल कृपानिधि मानयो ॥२४॥

bedh kateb ke bhedh sabai taj keval kaal kirapaanidh maanayo ||24||


ਕਾਲ ਗਯੋ ਇਨ ਕਾਮਨ ਸਿਉ ਜੜ ਕਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਹੀਐ ਨ ਚਿਤਾਰਯੋ ॥

काल गयो इन कामन सिउ जड़ काल कृपाल हीऐ न चितारयो ॥

kaal gayo in kaaman siau jaR kaal kirapaal heeaai na chitaarayo ||

ਲਾਜ ਕੋ ਛਾਡਿ ਨ੍ਰਿਲਾਜ ਅਰੇ ਤਜਿ ਕਾਜਿ ਅਕਾਜ ਕੇ ਕਾਜ ਸਵਾਰਯੋ ॥

लाज को छाडि नृलाज अरे तजि काजि अकाज के काज सवारयो ॥

laaj ko chhaadd niralaaj are taj kaaj akaaj ke kaaj savaarayo ||

ਬਾਜ ਬਨੇ ਗਜਰਾਜ ਬਡੇ ਖਰ ਕੋ ਚੜਿਬੋ ਚਿਤ ਬੀਚ ਬਿਚਾਰਯੋ ॥

बाज बने गजराज बडे खर को चड़िबो चित बीच बिचारयो ॥

baaj bane gajaraaj badde khar ko chaRibo chit beech bichaarayo ||

ਸ੍ਰੀ ਭਗਵੰਤ ਭਜਯੋ ਨ ਅਰੇ ਜੜ ਲਾਜ ਹੀ ਲਾਜ ਤੈ ਕਾਜੁ ਬਿਗਾਰਯੋ ॥੨੫॥

स्री भगवंत भजयो न अरे जड़ लाज ही लाज तै काजु बिगारयो ॥२५॥

sree bhagava(n)t bhajayo na are jaR laaj hee laaj tai kaaj bigaarayo ||25||


ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਪੜੇ ਬਹੁਤੇ ਦਿਨ ਭੇਦ ਕਛੂ ਤਿਨ ਕੋ ਨਹਿ ਪਾਯੋ ॥

बेद कतेब पड़े बहुते दिन भेद कछू तिन को नहि पायो ॥

bedh kateb paRe bahute dhin bhedh kachhoo tin ko neh paayo ||

ਪੂਜਤ ਠੌਰ ਅਨੇਕ ਫਿਰਯੋ ਪਰ ਏਕ ਕਬੈ ਹੀਯ ਮੈ ਨ ਬਸਾਯੋ ॥

पूजत ठौर अनेक फिरयो पर एक कबै हीय मै न बसायो ॥

poojat Thauar anek firayo par ek kabai heey mai na basaayo ||

ਪਾਹਨ ਕੋ ਅਸਥਾਲਯ ਕੋ ਸਿਰ ਨਯਾਇ ਫਿਰਯੋ ਕਛੁ ਹਾਥਿ ਨ ਆਯੋ ॥

पाहन को असथालय को सिर नयाइ फिरयो कछु हाथि न आयो ॥

paahan ko asathaalay ko sir nayai firayo kachh haath na aayo ||

ਰੇ ਮਨ ਮੂੜ ਅਗੂੜ ਪ੍ਰਭੂ ਤਜਿ ਆਪਨ ਹੂੜ ਕਹਾ ਉਰਝਾਯੋ ॥੨੬॥

रे मन मूड़ अगूड़ प्रभू तजि आपन हूड़ कहा उरझायो ॥२६॥

re man mooR agooR prabhoo taj aapan hooR kahaa urajhaayo ||26||


ਜੋ ਜੁਗਿਯਾਨ ਕੇ ਜਾਇ ਉਠਿ ਆਸ੍ਰਮ ਗੋਰਖ ਕੋ ਤਿਹ ਜਾਪ ਜਪਾਵੈ ॥

जो जुगियान के जाइ उठि आस्रम गोरख को तिह जाप जपावै ॥

jo jugiyaan ke jai uTh aasram gorakh ko teh jaap japaavai ||

ਜਾਇ ਸੰਨਯਾਸਨ ਕੇ ਤਿਹ ਕੌ ਕਹਿ ਦਤ ਹੀ ਸਤਿ ਹੈ ਮੰਤ੍ਰ ਦ੍ਰਿੜਾਵੈ ॥

जाइ संनयासन के तिह कौ कहि दत ही सति है मंत्र दृड़ावै ॥

jai sa(n)nayaasan ke teh kau keh dhat hee sat hai ma(n)tr dhiraRaavai ||

ਜੋ ਕੋਊ ਜਾਇ ਤੁਰਕਨ ਮੈ ਮਹਿਦੀਨ ਕੇ ਦੀਨ ਤਿਸੇ ਗਹਿ ਲਯਾਵੈ ॥

जो कोऊ जाइ तुरकन मै महिदीन के दीन तिसे गहि लयावै ॥

jo kouoo jai turakan mai mahidheen ke dheen tise geh layaavai ||

ਆਪਹਿ ਬੀਚ ਗਨੈ ਕਰਤਾ ਕਰਤਾਰ ਕੋ ਭੇਦੁ ਨ ਕੋਊ ਬਤਾਵੈ ॥੨੭॥

आपहि बीच गनै करता करतार को भेदु न कोऊ बतावै ॥२७॥

aapeh beech ganai karataa karataar ko bhedh na kouoo bataavai ||27||


ਜੋ ਜੁਗੀਆਨ ਕੇ ਜਾਇ ਕਹੈ ਸਬ ਜੋਗਨ ਕੋ ਗ੍ਰਿਹ ਮਾਲ ਉਠੈ ਦੈ ॥

जो जुगीआन के जाइ कहै सब जोगन को गृह माल उठै दै ॥

jo jugeeaan ke jai kahai sab jogan ko gireh maal uThai dhai ||

ਜੋ ਪਰੋ ਭਾਜਿ ਸੰਨ੍ਯਾਸਨ ਕੈ ਕਹੈ ਦੱਤ ਕੇ ਨਾਮ ਪੈ ਧਾਮ ਲੁਟੈ ਦੈ ॥

जो परो भाजि संन्यासन कै कहै दत्त के नाम पै धाम लुटै दै ॥

jo paro bhaaj sa(n)nayaasan kai kahai dha't ke naam pai dhaam luTai dhai ||

ਜੋ ਕਰਿ ਕੋਊ ਮਸੰਦਨ ਸੌ ਕਹੈ ਸਰਬ ਦਰਬ ਲੈ ਮੋਹਿ ਅਬੈ ਦੈ ॥

जो करि कोऊ मसंदन सौ कहै सरब दरब लै मोहि अबै दै ॥

jo kar kouoo masa(n)dhan sau kahai sarab dharab lai moh abai dhai ||

ਲੇਉ ਹੀ ਲੇਉ ਕਹੈ ਸਬ ਕੋ ਨਰ ਕੋਊ ਨ ਬ੍ਰਹਮ ਬਤਾਇ ਹਮੈ ਦੈ ॥੨੮॥

लेउ ही लेउ कहै सब को नर कोऊ न ब्रहम बताइ हमै दै ॥२८॥

leau hee leau kahai sab ko nar kouoo na braham batai hamai dhai ||28||


ਜੋ ਕਰਿ ਸੇਵ ਮਸੰਦਨ ਕੀ ਕਹੈ ਆਨਿ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਸਬੈ ਮੋਹਿ ਦੀਜੈ ॥

जो करि सेव मसंदन की कहै आनि प्रसादि सबै मोहि दीजै ॥

jo kar sev masa(n)dhan kee kahai aan prasaadh sabai moh dheejai ||

ਜੋ ਕਛੁ ਮਾਲ ਤਵਾਲਯ ਸੋ ਅਬ ਹੀ ਉਠਿ ਭੇਟ ਹਮਾਰੀ ਹੀ ਕੀਜੈ ॥

जो कछु माल तवालय सो अब ही उठि भेट हमारी ही कीजै ॥

jo kachh maal tavaalay so ab hee uTh bheT hamaaree hee keejai ||

ਮੇਰੋ ਈ ਧਯਾਨ ਧਰੋ ਨਿਸਿ ਬਾਸੁਰ ਭੂਲ ਕੈ ਅਉਰ ਕੋ ਨਾਮੁ ਨ ਲੀਜੈ ॥

मेरो ई धयान धरो निसि बासुर भूल कै अउर को नामु न लीजै ॥

mero iee dhayaan dharo nis baasur bhool kai aaur ko naam na leejai ||

ਦੀਨੇ ਕੋ ਨਾਮੁ ਸੁਨੈ ਭਜਿ ਰਾਤਹਿ ਲੀਨੇ ਬਿਨਾ ਨਹਿ ਨੈਕੁ ਪ੍ਰਸੀਜੈ ॥੨੯॥

दीने को नामु सुनै भजि रातहि लीने बिना नहि नैकु प्रसीजै ॥२९॥

dheene ko naam sunai bhaj raateh leene binaa neh naik praseejai ||29||


ਆਖਨ ਭੀਤਰਿ ਤੇਲ ਕੌ ਡਾਰ ਸੁ ਲੋਗਨ ਨੀਰੁ ਬਹਾਇ ਦਿਖਾਵੈ ॥

आखन भीतरि तेल कौ डार सु लोगन नीरु बहाइ दिखावै ॥

aakhan bheetar tel kau ddaar su logan neer bahai dhikhaavai ||

ਜੋ ਧਨਵਾਨੁ ਲਖੈ ਨਿਜ ਸੇਵਕ ਤਾਹੀ ਪਰੋਸਿ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਜਿਮਾਵੈ ॥

जो धनवानु लखै निज सेवक ताही परोसि प्रसादि जिमावै ॥

jo dhanavaan lakhai nij sevak taahee paros prasaadh jimaavai ||

ਜੋ ਧਨ ਹੀਨ ਲਖੈ ਤਿਹ ਦੇਤ ਨ ਮਾਗਨ ਜਾਤ ਮੁਖੋ ਨ ਦਿਖਾਵੈ ॥

जो धन हीन लखै तिह देत न मागन जात मुखो न दिखावै ॥

jo dhan heen lakhai teh dhet na maagan jaat mukho na dhikhaavai ||

ਲੂਟਤ ਹੈ ਪਸੁ ਲੋਗਨ ਕੋ ਕਬਹੂੰ ਨ ਪ੍ਰਮੇਸੁਰ ਕੇ ਗੁਨ ਗਾਵੈ ॥੩੦॥

लूटत है पसु लोगन को कबहूँ न प्रमेसुर के गुन गावै ॥३०॥

looTat hai pas logan ko kabahoo(n) na pramesur ke gun gaavai ||30||


ਆਂਖਨ ਮੀਚਿ ਰਹੈ ਬਕ ਕੀ ਜਿਮ ਲੋਗਨ ਏਕ ਪ੍ਰਪੰਚ ਦਿਖਾਯੋ ॥

आँखन मीचि रहै बक की जिम लोगन एक प्रपंच दिखायो ॥

aa(n)khan meech rahai bak kee jim logan ek prapa(n)ch dhikhaayo ||

ਨਿਆਤ ਫਿਰਯੋ ਸਿਰੁ ਬਧਕ ਜਯੋ ਧਯਾਨ ਬਿਲੋਕ ਬਿੜਾਲ ਲਜਾਯੋ ॥

निआत फिरयो सिरु बधक जयो धयान बिलोक बिड़ाल लजायो ॥

niaat firayo sir badhak jayo dhayaan bilok biRaal lajaayo ||

ਲਾਗਿ ਫਿਰਯੋ ਧਨ ਆਸ ਜਿਤੈ ਤਿਤ ਲੋਗ ਗਯੋ ਪਰਲੋਗ ਗਵਾਯੋ ॥

लागि फिरयो धन आस जितै तित लोग गयो परलोग गवायो ॥

laag firayo dhan aas jitai tit log gayo paralog gavaayo ||

ਸ੍ਰੀ ਭਗਵੰਤ ਭਜਯੋ ਨ ਅਰੇ ਜੜ ਧਾਮ ਕੇ ਕਾਮ ਕਹਾ ਉਰਝਾਯੋ ॥੩੧॥

स्री भगवंत भजयो न अरे जड़ धाम के काम कहा उरझायो ॥३१॥

sree bhagava(n)t bhajayo na are jaR dhaam ke kaam kahaa urajhaayo ||31||


ਫੋਕਟ ਕਰਮ ਦ੍ਰਿੜਾਤ ਕਹਾ ਇਨ ਲੋਗਨ ਕੋ ਕੋਈ ਕਾਮ ਨ ਐ ਹੈ ॥

फोकट करम दृड़ात कहा इन लोगन को कोई काम न ऐ है ॥

fokaT karam dhiraRaat kahaa in logan ko koiee kaam na aai hai ||

ਭਾਜਤ ਕਾ ਧਨ ਹੇਤ ਅਰੇ ਜਮ ਕਿੰਕਰ ਤੇ ਨਹ ਭਾਜਨ ਪੈ ਹੈ ॥

भाजत का धन हेत अरे जम किंकर ते नह भाजन पै है ॥

bhaajat kaa dhan het are jam ki(n)kar te neh bhaajan pai hai ||

ਪੁਤ੍ਰ ਕਲਿਤ੍ਰ ਨ ਮਿਤ੍ਰ ਸਬੈ ਊਹਾ ਸਿਖ ਸਖਾ ਕੋਊ ਸਾਖ ਨ ਦੈ ਹੈ ॥

पुत्र कलित्र न मित्र सबै ऊहा सिख सखा कोऊ साख न दै है ॥

putr kalitr na mitr sabai uoohaa sikh sakhaa kouoo saakh na dhai hai ||

ਚੇਤ ਰੇ ਚੇਤ ਅਚੇਤ ਮਹਾ ਪਸੁ ਅੰਤ ਕੀ ਬਾਰ ਇਕੇਲੋ ਈ ਜੈ ਹੈ ॥੩੨॥

चेत रे चेत अचेत महा पसु अंत की बार इकेलो ई जै है ॥३२॥

chet re chet achet mahaa pas a(n)t kee baar ikelo iee jai hai ||32||


ਤੋ ਤਨ ਤਯਾਗਤ ਹੀ ਸੁਨ ਰੇ ਜੜ ਪ੍ਰੇਤ ਬਖਾਨ ਤ੍ਰਿਆ ਭਜਿ ਜੈ ਹੈ ॥

तो तन तयागत ही सुन रे जड़ प्रेत बखान तृआ भजि जै है ॥

to tan tayaagat hee sun re jaR pret bakhaan triaa bhaj jai hai ||

ਪੁਤ੍ਰ ਕਲਤ੍ਰ ਸੁ ਮਿਤ੍ਰ ਸਖਾ ਇਹ ਬੇਗ ਨਿਕਾਰਹੁ ਆਇਸੁ ਦੈ ਹੈ ॥

पुत्र कलत्र सु मित्र सखा इह बेग निकारहु आइसु दै है ॥

putr kalatr su mitr sakhaa ieh beg nikaarahu aais dhai hai ||

ਭਉਨ ਭੰਡਾਰ ਧਰਾ ਗੜ ਜੇਤਕ ਛਾਡਤ ਪ੍ਰਾਨ ਬਿਗਾਨ ਕਹੈ ਹੈ ॥

भउन भंडार धरा गड़ जेतक छाडत प्रान बिगान कहै है ॥

bhaun bha(n)ddaar dharaa gaR jetak chhaaddat praan bigaan kahai hai ||

ਚੇਤ ਰੇ ਚੇਤ ਅਚੇਤ ਮਹਾ ਪਸੁ ਅੰਤ ਕੀ ਬਾਰਿ ਇਕੇਲੋ ਈ ਜੈ ਹੈ ॥੩੩॥

चेत रे चेत अचेत महा पसु अंत की बारि इकेलो ई जै है ॥३३॥

chet re chet achet mahaa pas a(n)t kee baar ikelo iee jai hai ||33||



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