Pt 2 - राग वडहंसु - बाणी शब्द, Part 2 - Raag Vadhans - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अमरदास जी -- SGGS 569) वडहंसु महला ३ ॥
रतन पदारथ वणजीअहि सतिगुरि दीआ बुझाई राम ॥ लाहा लाभु हरि भगति है गुण महि गुणी समाई राम ॥ गुण महि गुणी समाए जिसु आपि बुझाए लाहा भगति सैसारे ॥ बिनु भगती सुखु न होई दूजै पति खोई गुरमति नामु अधारे ॥ वखरु नामु सदा लाभु है जिस नो एतु वापारि लाए ॥ रतन पदारथ वणजीअहि जां सतिगुरु देइ बुझाए ॥१॥

माइआ मोहु सभु दुखु है खोटा इहु वापारा राम ॥ कूड़ु बोलि बिखु खावणी बहु वधहि विकारा राम ॥ बहु वधहि विकारा सहसा इहु संसारा बिनु नावै पति खोई ॥ पड़ि पड़ि पंडित वादु वखाणहि बिनु बूझे सुखु न होई ॥ आवण जाणा कदे न चूकै माइआ मोह पिआरा ॥ माइआ मोहु सभु दुखु है खोटा इहु वापारा ॥२॥

खोटे खरे सभि परखीअनि तितु सचे कै दरबारा राम ॥ खोटे दरगह सुटीअनि ऊभे करनि पुकारा राम ॥ ऊभे करनि पुकारा मुगध गवारा मनमुखि जनमु गवाइआ ॥ बिखिआ माइआ जिनि जगतु भुलाइआ साचा नामु न भाइआ ॥ मनमुख संता नालि वैरु करि दुखु खटे संसारा ॥ खोटे खरे परखीअनि तितु सचै दरवारा राम ॥३॥

आपि करे किसु आखीऐ होरु करणा किछू न जाई राम ॥ जितु भावै तितु लाइसी जिउ तिस दी वडिआई राम ॥ जिउ तिस दी वडिआई आपि कराई वरीआमु न फुसी कोई ॥ जगजीवनु दाता करमि बिधाता आपे बखसे सोई ॥ गुर परसादी आपु गवाईऐ नानक नामि पति पाई ॥ आपि करे किसु आखीऐ होरु करणा किछू न जाई ॥४॥४॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 570) वडहंसु महला ३ ॥
सचा सउदा हरि नामु है सचा वापारा राम ॥ गुरमती हरि नामु वणजीऐ अति मोलु अफारा राम ॥ अति मोलु अफारा सच वापारा सचि वापारि लगे वडभागी ॥ अंतरि बाहरि भगती राते सचि नामि लिव लागी ॥ नदरि करे सोई सचु पाए गुर कै सबदि वीचारा ॥ नानक नामि रते तिन ही सुखु पाइआ साचै के वापारा ॥१॥

हंउमै माइआ मैलु है माइआ मैलु भरीजै राम ॥ गुरमती मनु निरमला रसना हरि रसु पीजै राम ॥ रसना हरि रसु पीजै अंतरु भीजै साच सबदि बीचारी ॥ अंतरि खूहटा अम्रिति भरिआ सबदे काढि पीऐ पनिहारी ॥ जिसु नदरि करे सोई सचि लागै रसना रामु रवीजै ॥ नानक नामि रते से निरमल होर हउमै मैलु भरीजै ॥२॥

पंडित जोतकी सभि पड़ि पड़ि कूकदे किसु पहि करहि पुकारा राम ॥ माइआ मोहु अंतरि मलु लागै माइआ के वापारा राम ॥ माइआ के वापारा जगति पिआरा आवणि जाणि दुखु पाई ॥ बिखु का कीड़ा बिखु सिउ लागा बिस्टा माहि समाई ॥ जो धुरि लिखिआ सोइ कमावै कोइ न मेटणहारा ॥ नानक नामि रते तिन सदा सुखु पाइआ होरि मूरख कूकि मुए गावारा ॥३॥

माइआ मोहि मनु रंगिआ मोहि सुधि न काई राम ॥ गुरमुखि इहु मनु रंगीऐ दूजा रंगु जाई राम ॥ दूजा रंगु जाई साचि समाई सचि भरे भंडारा ॥ गुरमुखि होवै सोई बूझै सचि सवारणहारा ॥ आपे मेले सो हरि मिलै होरु कहणा किछू न जाए ॥ नानक विणु नावै भरमि भुलाइआ इकि नामि रते रंगु लाए ॥४॥५॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 571) वडहंसु महला ३ ॥
ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥ आपे सचा बखसि लए फिरि होइ न फेरा राम ॥ फिरि होइ न फेरा अंति सचि निबेड़ा गुरमुखि मिलै वडिआई ॥ साचै रंगि राते सहजे माते सहजे रहे समाई ॥ सचा मनि भाइआ सचु वसाइआ सबदि रते अंति निबेरा ॥ नानक नामि रते से सचि समाणे बहुरि न भवजलि फेरा ॥१॥

माइआ मोहु सभु बरलु है दूजै भाइ खुआई राम ॥ माता पिता सभु हेतु है हेते पलचाई राम ॥ हेते पलचाई पुरबि कमाई मेटि न सकै कोई ॥ जिनि स्रिसटि साजी सो करि वेखै तिसु जेवडु अवरु न कोई ॥ मनमुखि अंधा तपि तपि खपै बिनु सबदै सांति न आई ॥ नानक बिनु नावै सभु कोई भुला माइआ मोहि खुआई ॥२॥

एहु जगु जलता देखि कै भजि पए हरि सरणाई राम ॥ अरदासि करीं गुर पूरे आगै रखि लेवहु देहु वडाई राम ॥ रखि लेवहु सरणाई हरि नामु वडाई तुधु जेवडु अवरु न दाता ॥ सेवा लागे से वडभागे जुगि जुगि एको जाता ॥ जतु सतु संजमु करम कमावै बिनु गुर गति नही पाई ॥ नानक तिस नो सबदु बुझाए जो जाइ पवै हरि सरणाई ॥३॥

जो हरि मति देइ सा ऊपजै होर मति न काई राम ॥ अंतरि बाहरि एकु तू आपे देहि बुझाई राम ॥ आपे देहि बुझाई अवर न भाई गुरमुखि हरि रसु चाखिआ ॥ दरि साचै सदा है साचा साचै सबदि सुभाखिआ ॥ घर महि निज घरु पाइआ सतिगुरु देइ वडाई ॥ नानक जो नामि रते सेई महलु पाइनि मति परवाणु सचु साई ॥४॥६॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 572) वडहंसु महला ४ छंत
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरै मनि मेरै मनि सतिगुरि प्रीति लगाई राम ॥ हरि हरि हरि हरि नामु मेरै मंनि वसाई राम ॥ हरि हरि नामु मेरै मंनि वसाई सभि दूख विसारणहारा ॥ वडभागी गुर दरसनु पाइआ धनु धनु सतिगुरू हमारा ॥ ऊठत बैठत सतिगुरु सेवह जितु सेविऐ सांति पाई ॥ मेरै मनि मेरै मनि सतिगुर प्रीति लगाई ॥१॥

हउ जीवा हउ जीवा सतिगुर देखि सरसे राम ॥ हरि नामो हरि नामु द्रिड़ाए जपि हरि हरि नामु विगसे राम ॥ जपि हरि हरि नामु कमल परगासे हरि नामु नवं निधि पाई ॥ हउमै रोगु गइआ दुखु लाथा हरि सहजि समाधि लगाई ॥ हरि नामु वडाई सतिगुर ते पाई सुखु सतिगुर देव मनु परसे ॥ हउ जीवा हउ जीवा सतिगुर देखि सरसे ॥२॥

कोई आणि कोई आणि मिलावै मेरा सतिगुरु पूरा राम ॥ हउ मनु तनु हउ मनु तनु देवा तिसु काटि सरीरा राम ॥ हउ मनु तनु काटि काटि तिसु देई जो सतिगुर बचन सुणाए ॥ मेरै मनि बैरागु भइआ बैरागी मिलि गुर दरसनि सुखु पाए ॥ हरि हरि क्रिपा करहु सुखदाते देहु सतिगुर चरन हम धूरा ॥ कोई आणि कोई आणि मिलावै मेरा सतिगुरु पूरा ॥३॥

गुर जेवडु गुर जेवडु दाता मै अवरु न कोई राम ॥ हरि दानो हरि दानु देवै हरि पुरखु निरंजनु सोई राम ॥ हरि हरि नामु जिनी आराधिआ तिन का दुखु भरमु भउ भागा ॥ सेवक भाइ मिले वडभागी जिन गुर चरनी मनु लागा ॥ कहु नानक हरि आपि मिलाए मिलि सतिगुर पुरख सुखु होई ॥ गुर जेवडु गुर जेवडु दाता मै अवरु न कोई ॥४॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 572) वडहंसु महला ४ ॥
हंउ गुर बिनु हंउ गुर बिनु खरी निमाणी राम ॥ जगजीवनु जगजीवनु दाता गुर मेलि समाणी राम ॥ सतिगुरु मेलि हरि नामि समाणी जपि हरि हरि नामु धिआइआ ॥ जिसु कारणि हंउ ढूंढि ढूढेदी सो सजणु हरि घरि पाइआ ॥ एक द्रिस्टि हरि एको जाता हरि आतम रामु पछाणी ॥ हंउ गुर बिनु हंउ गुर बिनु खरी निमाणी ॥१॥

जिना सतिगुरु जिन सतिगुरु पाइआ तिन हरि प्रभु मेलि मिलाए राम ॥ तिन चरण तिन चरण सरेवह हम लागह तिन कै पाए राम ॥ हरि हरि चरण सरेवह तिन के जिन सतिगुरु पुरखु प्रभु ध्याइआ ॥ तू वडदाता अंतरजामी मेरी सरधा पूरि हरि राइआ ॥ गुरसिख मेलि मेरी सरधा पूरी अनदिनु राम गुण गाए ॥ जिन सतिगुरु जिन सतिगुरु पाइआ तिन हरि प्रभु मेलि मिलाए ॥२॥

हंउ वारी हंउ वारी गुरसिख मीत पिआरे राम ॥ हरि नामो हरि नामु सुणाए मेरा प्रीतमु नामु अधारे राम ॥ हरि हरि नामु मेरा प्रान सखाई तिसु बिनु घड़ी निमख नही जीवां ॥ हरि हरि क्रिपा करे सुखदाता गुरमुखि अम्रितु पीवां ॥ हरि आपे सरधा लाइ मिलाए हरि आपे आपि सवारे ॥ हंउ वारी हंउ वारी गुरसिख मीत पिआरे ॥३॥

हरि आपे हरि आपे पुरखु निरंजनु सोई राम ॥ हरि आपे हरि आपे मेलै करै सो होई राम ॥ जो हरि प्रभ भावै सोई होवै अवरु न करणा जाई ॥ बहुतु सिआणप लइआ न जाई करि थाके सभि चतुराई ॥ गुर प्रसादि जन नानक देखिआ मै हरि बिनु अवरु न कोई ॥ हरि आपे हरि आपे पुरखु निरंजनु सोई ॥४॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 573) वडहंसु महला ४ ॥
हरि सतिगुर हरि सतिगुर मेलि हरि सतिगुर चरण हम भाइआ राम ॥ तिमर अगिआनु गवाइआ गुर गिआनु अंजनु गुरि पाइआ राम ॥ गुर गिआन अंजनु सतिगुरू पाइआ अगिआन अंधेर बिनासे ॥ सतिगुर सेवि परम पदु पाइआ हरि जपिआ सास गिरासे ॥ जिन कंउ हरि प्रभि किरपा धारी ते सतिगुर सेवा लाइआ ॥ हरि सतिगुर हरि सतिगुर मेलि हरि सतिगुर चरण हम भाइआ ॥१॥

मेरा सतिगुरु मेरा सतिगुरु पिआरा मै गुर बिनु रहणु न जाई राम ॥ हरि नामो हरि नामु देवै मेरा अंति सखाई राम ॥ हरि हरि नामु मेरा अंति सखाई गुरि सतिगुरि नामु द्रिड़ाइआ ॥ जिथै पुतु कलत्रु कोई बेली नाही तिथै हरि हरि नामि छडाइआ ॥ धनु धनु सतिगुरु पुरखु निरंजनु जितु मिलि हरि नामु धिआई ॥ मेरा सतिगुरु मेरा सतिगुरु पिआरा मै गुर बिनु रहणु न जाई ॥२॥

जिनी दरसनु जिनी दरसनु सतिगुर पुरख न पाइआ राम ॥ तिन निहफलु तिन निहफलु जनमु सभु ब्रिथा गवाइआ राम ॥ निहफलु जनमु तिन ब्रिथा गवाइआ ते साकत मुए मरि झूरे ॥ घरि होदै रतनि पदारथि भूखे भागहीण हरि दूरे ॥ हरि हरि तिन का दरसु न करीअहु जिनी हरि हरि नामु न धिआइआ ॥ जिनी दरसनु जिनी दरसनु सतिगुर पुरख न पाइआ ॥३॥

हम चात्रिक हम चात्रिक दीन हरि पासि बेनंती राम ॥ गुर मिलि गुर मेलि मेरा पिआरा हम सतिगुर करह भगती राम ॥ हरि हरि सतिगुर करह भगती जां हरि प्रभु किरपा धारे ॥ मै गुर बिनु अवरु न कोई बेली गुरु सतिगुरु प्राण हम्हारे ॥ कहु नानक गुरि नामु द्रिड़्हाइआ हरि हरि नामु हरि सती ॥ हम चात्रिक हम चात्रिक दीन हरि पासि बेनंती ॥४॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 574) वडहंसु महला ४ ॥
हरि किरपा हरि किरपा करि सतिगुरु मेलि सुखदाता राम ॥ हम पूछह हम पूछह सतिगुर पासि हरि बाता राम ॥ सतिगुर पासि हरि बात पूछह जिनि नामु पदारथु पाइआ ॥ पाइ लगह नित करह बिनंती गुरि सतिगुरि पंथु बताइआ ॥ सोई भगतु दुखु सुखु समतु करि जाणै हरि हरि नामि हरि राता ॥ हरि किरपा हरि किरपा करि गुरु सतिगुरु मेलि सुखदाता ॥१॥

सुणि गुरमुखि सुणि गुरमुखि नामि सभि बिनसे हंउमै पापा राम ॥ जपि हरि हरि जपि हरि हरि नामु लथिअड़े जगि तापा राम ॥ हरि हरि नामु जिनी आराधिआ तिन के दुख पाप निवारे ॥ सतिगुरि गिआन खड़गु हथि दीना जमकंकर मारि बिदारे ॥ हरि प्रभि क्रिपा धारी सुखदाते दुख लाथे पाप संतापा ॥ सुणि गुरमुखि सुणि गुरमुखि नामु सभि बिनसे हंउमै पापा ॥२॥

जपि हरि हरि जपि हरि हरि नामु मेरै मनि भाइआ राम ॥ मुखि गुरमुखि मुखि गुरमुखि जपि सभि रोग गवाइआ राम ॥ गुरमुखि जपि सभि रोग गवाइआ अरोगत भए सरीरा ॥ अनदिनु सहज समाधि हरि लागी हरि जपिआ गहिर ग्मभीरा ॥ जाति अजाति नामु जिन धिआइआ तिन परम पदारथु पाइआ ॥ जपि हरि हरि जपि हरि हरि नामु मेरै मनि भाइआ ॥३॥

हरि धारहु हरि धारहु किरपा करि किरपा लेहु उबारे राम ॥ हम पापी हम पापी निरगुण दीन तुम्हारे राम ॥ हम पापी निरगुण दीन तुम्हारे हरि दैआल सरणाइआ ॥ तू दुख भंजनु सरब सुखदाता हम पाथर तरे तराइआ ॥ सतिगुर भेटि राम रसु पाइआ जन नानक नामि उधारे ॥ हरि धारहु हरि धारहु किरपा करि किरपा लेहु उबारे राम ॥४॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 575) वडहंसु महला ४ घोड़ीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
देह तेजणि जी रामि उपाईआ राम ॥ धंनु माणस जनमु पुंनि पाईआ राम ॥ माणस जनमु वड पुंने पाइआ देह सु कंचन चंगड़ीआ ॥ गुरमुखि रंगु चलूला पावै हरि हरि हरि नव रंगड़ीआ ॥ एह देह सु बांकी जितु हरि जापी हरि हरि नामि सुहावीआ ॥ वडभागी पाई नामु सखाई जन नानक रामि उपाईआ ॥१॥

देह पावउ जीनु बुझि चंगा राम ॥ चड़ि लंघा जी बिखमु भुइअंगा राम ॥ बिखमु भुइअंगा अनत तरंगा गुरमुखि पारि लंघाए ॥ हरि बोहिथि चड़ि वडभागी लंघै गुरु खेवटु सबदि तराए ॥ अनदिनु हरि रंगि हरि गुण गावै हरि रंगी हरि रंगा ॥ जन नानक निरबाण पदु पाइआ हरि उतमु हरि पदु चंगा ॥२॥

कड़ीआलु मुखे गुरि गिआनु द्रिड़ाइआ राम ॥ तनि प्रेमु हरि चाबकु लाइआ राम ॥ तनि प्रेमु हरि हरि लाइ चाबकु मनु जिणै गुरमुखि जीतिआ ॥ अघड़ो घड़ावै सबदु पावै अपिउ हरि रसु पीतिआ ॥ सुणि स्रवण बाणी गुरि वखाणी हरि रंगु तुरी चड़ाइआ ॥ महा मारगु पंथु बिखड़ा जन नानक पारि लंघाइआ ॥३॥

घोड़ी तेजणि देह रामि उपाईआ राम ॥ जितु हरि प्रभु जापै सा धनु धंनु तुखाईआ राम ॥ जितु हरि प्रभु जापै सा धंनु साबासै धुरि पाइआ किरतु जुड़ंदा ॥ चड़ि देहड़ि घोड़ी बिखमु लघाए मिलु गुरमुखि परमानंदा ॥ हरि हरि काजु रचाइआ पूरै मिलि संत जना जंञ आई ॥ जन नानक हरि वरु पाइआ मंगलु मिलि संत जना वाधाई ॥४॥१॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 575) वडहंसु महला ४ ॥
देह तेजनड़ी हरि नव रंगीआ राम ॥ गुर गिआनु गुरू हरि मंगीआ राम ॥ गिआन मंगी हरि कथा चंगी हरि नामु गति मिति जाणीआ ॥ सभु जनमु सफलिउ कीआ करतै हरि राम नामि वखाणीआ ॥ हरि राम नामु सलाहि हरि प्रभ हरि भगति हरि जन मंगीआ ॥ जनु कहै नानकु सुणहु संतहु हरि भगति गोविंद चंगीआ ॥१॥

देह कंचन जीनु सुविना राम ॥ जड़ि हरि हरि नामु रतंना राम ॥ जड़ि नाम रतनु गोविंद पाइआ हरि मिले हरि गुण सुख घणे ॥ गुर सबदु पाइआ हरि नामु धिआइआ वडभागी हरि रंग हरि बणे ॥ हरि मिले सुआमी अंतरजामी हरि नवतन हरि नव रंगीआ ॥ नानकु वखाणै नामु जाणै हरि नामु हरि प्रभ मंगीआ ॥२॥

कड़ीआलु मुखे गुरि अंकसु पाइआ राम ॥ मनु मैगलु गुर सबदि वसि आइआ राम ॥ मनु वसगति आइआ परम पदु पाइआ सा धन कंति पिआरी ॥ अंतरि प्रेमु लगा हरि सेती घरि सोहै हरि प्रभ नारी ॥ हरि रंगि राती सहजे माती हरि प्रभु हरि हरि पाइआ ॥ नानक जनु हरि दासु कहतु है वडभागी हरि हरि धिआइआ ॥३॥

देह घोड़ी जी जितु हरि पाइआ राम ॥ मिलि सतिगुर जी मंगलु गाइआ राम ॥ हरि गाइ मंगलु राम नामा हरि सेव सेवक सेवकी ॥ प्रभ जाइ पावै रंग महली हरि रंगु माणै रंग की ॥ गुण राम गाए मनि सुभाए हरि गुरमती मनि धिआइआ ॥ जन नानक हरि किरपा धारी देह घोड़ी चड़ि हरि पाइआ ॥४॥२॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 576) रागु वडहंसु महला ५ छंत घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गुर मिलि लधा जी रामु पिआरा राम ॥ इहु तनु मनु दितड़ा वारो वारा राम ॥ तनु मनु दिता भवजलु जिता चूकी कांणि जमाणी ॥ असथिरु थीआ अम्रितु पीआ रहिआ आवण जाणी ॥ सो घरु लधा सहजि समधा हरि का नामु अधारा ॥ कहु नानक सुखि माणे रलीआं गुर पूरे कंउ नमसकारा ॥१॥

सुणि सजण जी मैडड़े मीता राम ॥ गुरि मंत्रु सबदु सचु दीता राम ॥ सचु सबदु धिआइआ मंगलु गाइआ चूके मनहु अदेसा ॥ सो प्रभु पाइआ कतहि न जाइआ सदा सदा संगि बैसा ॥ प्रभ जी भाणा सचा माणा प्रभि हरि धनु सहजे दीता ॥ कहु नानक तिसु जन बलिहारी तेरा दानु सभनी है लीता ॥२॥

तउ भाणा तां त्रिपति अघाए राम ॥ मनु थीआ ठंढा सभ त्रिसन बुझाए राम ॥ मनु थीआ ठंढा चूकी डंझा पाइआ बहुतु खजाना ॥ सिख सेवक सभि भुंचण लगे हंउ सतगुर कै कुरबाना ॥ निरभउ भए खसम रंगि राते जम की त्रास बुझाए ॥ नानक दासु सदा संगि सेवकु तेरी भगति करंउ लिव लाए ॥३॥

पूरी आसा जी मनसा मेरे राम ॥ मोहि निरगुण जीउ सभि गुण तेरे राम ॥ सभि गुण तेरे ठाकुर मेरे कितु मुखि तुधु सालाही ॥ गुणु अवगुणु मेरा किछु न बीचारिआ बखसि लीआ खिन माही ॥ नउ निधि पाई वजी वाधाई वाजे अनहद तूरे ॥ कहु नानक मै वरु घरि पाइआ मेरे लाथे जी सगल विसूरे ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 577) सलोकु ॥
किआ सुणेदो कूड़ु वंञनि पवण झुलारिआ ॥ नानक सुणीअर ते परवाणु जो सुणेदे सचु धणी ॥१॥

छंतु ॥
तिन घोलि घुमाई जिन प्रभु स्रवणी सुणिआ राम ॥ से सहजि सुहेले जिन हरि हरि रसना भणिआ राम ॥ से सहजि सुहेले गुणह अमोले जगत उधारण आए ॥ भै बोहिथ सागर प्रभ चरणा केते पारि लघाए ॥ जिन कंउ क्रिपा करी मेरै ठाकुरि तिन का लेखा न गणिआ ॥ कहु नानक तिसु घोलि घुमाई जिनि प्रभु स्रवणी सुणिआ ॥१॥

सलोकु ॥
लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥ नानक से अखड़ीआं बिअंनि जिनी डिसंदो मा पिरी ॥१॥

छंतु ॥
जिनी हरि प्रभु डिठा तिन कुरबाणे राम ॥ से साची दरगह भाणे राम ॥ ठाकुरि माने से परधाने हरि सेती रंगि राते ॥ हरि रसहि अघाए सहजि समाए घटि घटि रमईआ जाते ॥ सेई सजण संत से सुखीए ठाकुर अपणे भाणे ॥ कहु नानक जिन हरि प्रभु डिठा तिन कै सद कुरबाणे ॥२॥

सलोकु ॥
देह अंधारी अंध सुंञी नाम विहूणीआ ॥ नानक सफल जनमु जै घटि वुठा सचु धणी ॥१॥

छंतु ॥
तिन खंनीऐ वंञां जिन मेरा हरि प्रभु डीठा राम ॥ जन चाखि अघाणे हरि हरि अम्रितु मीठा राम ॥ हरि मनहि मीठा प्रभू तूठा अमिउ वूठा सुख भए ॥ दुख नास भरम बिनास तन ते जपि जगदीस ईसह जै जए ॥ मोह रहत बिकार थाके पंच ते संगु तूटा ॥ कहु नानक तिन खंनीऐ वंञा जिन घटि मेरा हरि प्रभु वूठा ॥३॥

सलोकु ॥
जो लोड़ीदे राम सेवक सेई कांढिआ ॥ नानक जाणे सति सांई संत न बाहरा ॥१॥

छंतु ॥
मिलि जलु जलहि खटाना राम ॥ संगि जोती जोति मिलाना राम ॥ समाइ पूरन पुरख करते आपि आपहि जाणीऐ ॥ तह सुंनि सहजि समाधि लागी एकु एकु वखाणीऐ ॥ आपि गुपता आपि मुकता आपि आपु वखाना ॥ नानक भ्रम भै गुण बिनासे मिलि जलु जलहि खटाना ॥४॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 578) वडहंसु महला ५ ॥
प्रभ करण कारण समरथा राम ॥ रखु जगतु सगल दे हथा राम ॥ समरथ सरणा जोगु सुआमी क्रिपा निधि सुखदाता ॥ हंउ कुरबाणी दास तेरे जिनी एकु पछाता ॥ वरनु चिहनु न जाइ लखिआ कथन ते अकथा ॥ बिनवंति नानक सुणहु बिनती प्रभ करण कारण समरथा ॥१॥

एहि जीअ तेरे तू करता राम ॥ प्रभ दूख दरद भ्रम हरता राम ॥ भ्रम दूख दरद निवारि खिन महि रखि लेहु दीन दैआला ॥ मात पिता सुआमि सजणु सभु जगतु बाल गोपाला ॥ जो सरणि आवै गुण निधान पावै सो बहुड़ि जनमि न मरता ॥ बिनवंति नानक दासु तेरा सभि जीअ तेरे तू करता ॥२॥

आठ पहर हरि धिआईऐ राम ॥ मन इछिअड़ा फलु पाईऐ राम ॥ मन इछ पाईऐ प्रभु धिआईऐ मिटहि जम के त्रासा ॥ गोबिदु गाइआ साध संगाइआ भई पूरन आसा ॥ तजि मानु मोहु विकार सगले प्रभू कै मनि भाईऐ ॥ बिनवंति नानक दिनसु रैणी सदा हरि हरि धिआईऐ ॥३॥

दरि वाजहि अनहत वाजे राम ॥ घटि घटि हरि गोबिंदु गाजे राम ॥ गोविद गाजे सदा बिराजे अगम अगोचरु ऊचा ॥ गुण बेअंत किछु कहणु न जाई कोइ न सकै पहूचा ॥ आपि उपाए आपि प्रतिपाले जीअ जंत सभि साजे ॥ बिनवंति नानक सुखु नामि भगती दरि वजहि अनहद वाजे ॥४॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 578) रागु वडहंसु महला १ घरु ५ अलाहणीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥ मुहलति पुनी पाई भरी जानीअड़ा घति चलाइआ ॥ जानी घति चलाइआ लिखिआ आइआ रुंने वीर सबाए ॥ कांइआ हंस थीआ वेछोड़ा जां दिन पुंने मेरी माए ॥ जेहा लिखिआ तेहा पाइआ जेहा पुरबि कमाइआ ॥ धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥१॥

साहिबु सिमरहु मेरे भाईहो सभना एहु पइआणा ॥ एथै धंधा कूड़ा चारि दिहा आगै सरपर जाणा ॥ आगै सरपर जाणा जिउ मिहमाणा काहे गारबु कीजै ॥ जितु सेविऐ दरगह सुखु पाईऐ नामु तिसै का लीजै ॥ आगै हुकमु न चलै मूले सिरि सिरि किआ विहाणा ॥ साहिबु सिमरिहु मेरे भाईहो सभना एहु पइआणा ॥२॥

जो तिसु भावै सम्रथ सो थीऐ हीलड़ा एहु संसारो ॥ जलि थलि महीअलि रवि रहिआ साचड़ा सिरजणहारो ॥ साचा सिरजणहारो अलख अपारो ता का अंतु न पाइआ ॥ आइआ तिन का सफलु भइआ है इक मनि जिनी धिआइआ ॥ ढाहे ढाहि उसारे आपे हुकमि सवारणहारो ॥ जो तिसु भावै सम्रथ सो थीऐ हीलड़ा एहु संसारो ॥३॥

नानक रुंना बाबा जाणीऐ जे रोवै लाइ पिआरो ॥ वालेवे कारणि बाबा रोईऐ रोवणु सगल बिकारो ॥ रोवणु सगल बिकारो गाफलु संसारो माइआ कारणि रोवै ॥ चंगा मंदा किछु सूझै नाही इहु तनु एवै खोवै ॥ ऐथै आइआ सभु को जासी कूड़ि करहु अहंकारो ॥ नानक रुंना बाबा जाणीऐ जे रोवै लाइ पिआरो ॥४॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 579) वडहंसु महला १ ॥
आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहां ॥ रोवह बिरहा तन का आपणा साहिबु सम्हालेहां ॥ साहिबु सम्हालिह पंथु निहालिह असा भि ओथै जाणा ॥ जिस का कीआ तिन ही लीआ होआ तिसै का भाणा ॥ जो तिनि करि पाइआ सु आगै आइआ असी कि हुकमु करेहा ॥ आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहा ॥१॥

मरणु न मंदा लोका आखीऐ जे मरि जाणै ऐसा कोइ ॥ सेविहु साहिबु सम्रथु आपणा पंथु सुहेला आगै होइ ॥ पंथि सुहेलै जावहु तां फलु पावहु आगै मिलै वडाई ॥ भेटै सिउ जावहु सचि समावहु तां पति लेखै पाई ॥ महली जाइ पावहु खसमै भावहु रंग सिउ रलीआ माणै ॥ मरणु न मंदा लोका आखीऐ जे कोई मरि जाणै ॥२॥

मरणु मुणसा सूरिआ हकु है जो होइ मरनि परवाणो ॥ सूरे सेई आगै आखीअहि दरगह पावहि साची माणो ॥ दरगह माणु पावहि पति सिउ जावहि आगै दूखु न लागै ॥ करि एकु धिआवहि तां फलु पावहि जितु सेविऐ भउ भागै ॥ ऊचा नही कहणा मन महि रहणा आपे जाणै जाणो ॥ मरणु मुणसां सूरिआ हकु है जो होइ मरहि परवाणो ॥३॥

नानक किस नो बाबा रोईऐ बाजी है इहु संसारो ॥ कीता वेखै साहिबु आपणा कुदरति करे बीचारो ॥ कुदरति बीचारे धारण धारे जिनि कीआ सो जाणै ॥ आपे वेखै आपे बूझै आपे हुकमु पछाणै ॥ जिनि किछु कीआ सोई जाणै ता का रूपु अपारो ॥ नानक किस नो बाबा रोईऐ बाजी है इहु संसारो ॥४॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 581) वडहंसु महला १ ॥
जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥ सचड़ा दूरि न भालीऐ घटि घटि सबदु पछाणोवा ॥ सचु सबदु पछाणहु दूरि न जाणहु जिनि एह रचना राची ॥ नामु धिआए ता सुखु पाए बिनु नावै पिड़ काची ॥ जिनि थापी बिधि जाणै सोई किआ को कहै वखाणो ॥ जिनि जगु थापि वताइआ जालो सो साहिबु परवाणो ॥१॥

बाबा आइआ है उठि चलणा अध पंधै है संसारोवा ॥ सिरि सिरि सचड़ै लिखिआ दुखु सुखु पुरबि वीचारोवा ॥ दुखु सुखु दीआ जेहा कीआ सो निबहै जीअ नाले ॥ जेहे करम कराए करता दूजी कार न भाले ॥ आपि निरालमु धंधै बाधी करि हुकमु छडावणहारो ॥ अजु कलि करदिआ कालु बिआपै दूजै भाइ विकारो ॥२॥

जम मारग पंथु न सुझई उझड़ु अंध गुबारोवा ॥ ना जलु लेफ तुलाईआ ना भोजन परकारोवा ॥ भोजन भाउ न ठंढा पाणी ना कापड़ु सीगारो ॥ गलि संगलु सिरि मारे ऊभौ ना दीसै घर बारो ॥ इब के राहे जमनि नाही पछुताणे सिरि भारो ॥ बिनु साचे को बेली नाही साचा एहु बीचारो ॥३॥

बाबा रोवहि रवहि सु जाणीअहि मिलि रोवै गुण सारेवा ॥ रोवै माइआ मुठड़ी धंधड़ा रोवणहारेवा ॥ धंधा रोवै मैलु न धोवै सुपनंतरु संसारो ॥ जिउ बाजीगरु भरमै भूलै झूठि मुठी अहंकारो ॥ आपे मारगि पावणहारा आपे करम कमाए ॥ नामि रते गुरि पूरै राखे नानक सहजि सुभाए ॥४॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 581) वडहंसु महला १ ॥
बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥ सचा घरु सचड़ै सेवीऐ सचु खरा सचिआरोवा ॥ कूड़ि लबि जां थाइ न पासी अगै लहै न ठाओ ॥ अंतरि आउ न बैसहु कहीऐ जिउ सुंञै घरि काओ ॥ जमणु मरणु वडा वेछोड़ा बिनसै जगु सबाए ॥ लबि धंधै माइआ जगतु भुलाइआ कालु खड़ा रूआए ॥१॥

बाबा आवहु भाईहो गलि मिलह मिलि मिलि देह आसीसा हे ॥ बाबा सचड़ा मेलु न चुकई प्रीतम कीआ देह असीसा हे ॥ आसीसा देवहो भगति करेवहो मिलिआ का किआ मेलो ॥ इकि भूले नावहु थेहहु थावहु गुर सबदी सचु खेलो ॥ जम मारगि नही जाणा सबदि समाणा जुगि जुगि साचै वेसे ॥ साजन सैण मिलहु संजोगी गुर मिलि खोले फासे ॥२॥

बाबा नांगड़ा आइआ जग महि दुखु सुखु लेखु लिखाइआ ॥ लिखिअड़ा साहा ना टलै जेहड़ा पुरबि कमाइआ ॥ बहि साचै लिखिआ अम्रितु बिखिआ जितु लाइआ तितु लागा ॥ कामणिआरी कामण पाए बहु रंगी गलि तागा ॥ होछी मति भइआ मनु होछा गुड़ु सा मखी खाइआ ॥ ना मरजादु आइआ कलि भीतरि नांगो बंधि चलाइआ ॥३॥

बाबा रोवहु जे किसै रोवणा जानीअड़ा बंधि पठाइआ है ॥ लिखिअड़ा लेखु न मेटीऐ दरि हाकारड़ा आइआ है ॥ हाकारा आइआ जा तिसु भाइआ रुंने रोवणहारे ॥ पुत भाई भातीजे रोवहि प्रीतम अति पिआरे ॥ भै रोवै गुण सारि समाले को मरै न मुइआ नाले ॥ नानक जुगि जुगि जाण सिजाणा रोवहि सचु समाले ॥४॥५॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 582) वडहंसु महला ३ महला तीजा
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥ सा धन रंड न कबहू बैसई ना कदे होवै सोगु ॥ ना कदे होवै सोगु अनदिनु रस भोग सा धन महलि समाणी ॥ जिनि प्रिउ जाता करम बिधाता बोले अम्रित बाणी ॥ गुणवंतीआ गुण सारहि अपणे कंत समालहि ना कदे लगै विजोगो ॥ सचड़ा पिरु सालाहीऐ सभु किछु करणै जोगो ॥१॥

सचड़ा साहिबु सबदि पछाणीऐ आपे लए मिलाए ॥ सा धन प्रिअ कै रंगि रती विचहु आपु गवाए ॥ विचहु आपु गवाए फिरि कालु न खाए गुरमुखि एको जाता ॥ कामणि इछ पुंनी अंतरि भिंनी मिलिआ जगजीवनु दाता ॥ सबद रंगि राती जोबनि माती पिर कै अंकि समाए ॥ सचड़ा साहिबु सबदि पछाणीऐ आपे लए मिलाए ॥२॥

जिनी आपणा कंतु पछाणिआ हउ तिन पूछउ संता जाए ॥ आपु छोडि सेवा करी पिरु सचड़ा मिलै सहजि सुभाए ॥ पिरु सचा मिलै आए साचु कमाए साचि सबदि धन राती ॥ कदे न रांड सदा सोहागणि अंतरि सहज समाधी ॥ पिरु रहिआ भरपूरे वेखु हदूरे रंगु माणे सहजि सुभाए ॥ जिनी आपणा कंतु पछाणिआ हउ तिन पूछउ संता जाए ॥३॥

पिरहु विछुंनीआ भी मिलह जे सतिगुर लागह साचे पाए ॥ सतिगुरु सदा दइआलु है अवगुण सबदि जलाए ॥ अउगुण सबदि जलाए दूजा भाउ गवाए सचे ही सचि राती ॥ सचै सबदि सदा सुखु पाइआ हउमै गई भराती ॥ पिरु निरमाइलु सदा सुखदाता नानक सबदि मिलाए ॥ पिरहु विछुंनीआ भी मिलह जे सतिगुर लागह साचे पाए ॥४॥१॥


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