Pt 4 - राग सूही - बाणी शब्द, Part 4 - Raag Suhi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अमरदास जी -- SGGS 767) रागु सूही छंत महला ३ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥ गुरमुखि हरि फलु पावहु ॥ गुरमुखि फलु पावहु हरि नामु धिआवहु जनम जनम के दूख निवारे ॥ बलिहारी गुर अपणे विटहु जिनि कारज सभि सवारे ॥ हरि प्रभु क्रिपा करे हरि जापहु सुख फल हरि जन पावहु ॥ नानकु कहै सुणहु जन भाई सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥१॥

सुणि हरि गुण भीने सहजि सुभाए ॥ गुरमति सहजे नामु धिआए ॥ जिन कउ धुरि लिखिआ तिन गुरु मिलिआ तिन जनम मरण भउ भागा ॥ अंदरहु दुरमति दूजी खोई सो जनु हरि लिव लागा ॥ जिन कउ क्रिपा कीनी मेरै सुआमी तिन अनदिनु हरि गुण गाए ॥ सुणि मन भीने सहजि सुभाए ॥२॥

जुग महि राम नामु निसतारा ॥ गुर ते उपजै सबदु वीचारा ॥ गुर सबदु वीचारा राम नामु पिआरा जिसु किरपा करे सु पाए ॥ सहजे गुण गावै दिनु राती किलविख सभि गवाए ॥ सभु को तेरा तू सभना का हउ तेरा तू हमारा ॥ जुग महि राम नामु निसतारा ॥३॥

साजन आइ वुठे घर माही ॥ हरि गुण गावहि त्रिपति अघाही ॥ हरि गुण गाइ सदा त्रिपतासी फिरि भूख न लागै आए ॥ दह दिसि पूज होवै हरि जन की जो हरि हरि नामु धिआए ॥ नानक हरि आपे जोड़ि विछोड़े हरि बिनु को दूजा नाही ॥ साजन आइ वुठे घर माही ॥४॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 768) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु सूही महला ३ घरु ३ ॥
भगत जना की हरि जीउ राखै जुगि जुगि रखदा आइआ राम ॥ सो भगतु जो गुरमुखि होवै हउमै सबदि जलाइआ राम ॥ हउमै सबदि जलाइआ मेरे हरि भाइआ जिस दी साची बाणी ॥ सची भगति करहि दिनु राती गुरमुखि आखि वखाणी ॥ भगता की चाल सची अति निरमल नामु सचा मनि भाइआ ॥ नानक भगत सोहहि दरि साचै जिनी सचो सचु कमाइआ ॥१॥

हरि भगता की जाति पति है भगत हरि कै नामि समाणे राम ॥ हरि भगति करहि विचहु आपु गवावहि जिन गुण अवगण पछाणे राम ॥ गुण अउगण पछाणै हरि नामु वखाणै भै भगति मीठी लागी ॥ अनदिनु भगति करहि दिनु राती घर ही महि बैरागी ॥ भगती राते सदा मनु निरमलु हरि जीउ वेखहि सदा नाले ॥ नानक से भगत हरि कै दरि साचे अनदिनु नामु सम्हाले ॥२॥

मनमुख भगति करहि बिनु सतिगुर विणु सतिगुर भगति न होई राम ॥ हउमै माइआ रोगि विआपे मरि जनमहि दुखु होई राम ॥ मरि जनमहि दुखु होई दूजै भाइ परज विगोई विणु गुर ततु न जानिआ ॥ भगति विहूणा सभु जगु भरमिआ अंति गइआ पछुतानिआ ॥ कोटि मधे किनै पछाणिआ हरि नामा सचु सोई ॥ नानक नामि मिलै वडिआई दूजै भाइ पति खोई ॥३॥

भगता कै घरि कारजु साचा हरि गुण सदा वखाणे राम ॥ भगति खजाना आपे दीआ कालु कंटकु मारि समाणे राम ॥ कालु कंटकु मारि समाणे हरि मनि भाणे नामु निधानु सचु पाइआ ॥ सदा अखुटु कदे न निखुटै हरि दीआ सहजि सुभाइआ ॥ हरि जन ऊचे सद ही ऊचे गुर कै सबदि सुहाइआ ॥ नानक आपे बखसि मिलाए जुगि जुगि सोभा पाइआ ॥४॥१॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 769) सूही महला ३ ॥
सबदि सचै सचु सोहिला जिथै सचे का होइ वीचारो राम ॥ हउमै सभि किलविख काटे साचु रखिआ उरि धारे राम ॥ सचु रखिआ उर धारे दुतरु तारे फिरि भवजलु तरणु न होई ॥ सचा सतिगुरु सची बाणी जिनि सचु विखालिआ सोई ॥ साचे गुण गावै सचि समावै सचु वेखै सभु सोई ॥ नानक साचा साहिबु साची नाई सचु निसतारा होई ॥१॥

साचै सतिगुरि साचु बुझाइआ पति राखै सचु सोई राम ॥ सचा भोजनु भाउ सचा है सचै नामि सुखु होई राम ॥ साचै नामि सुखु होई मरै न कोई गरभि न जूनी वासा ॥ जोती जोति मिलाई सचि समाई सचि नाइ परगासा ॥ जिनी सचु जाता से सचे होए अनदिनु सचु धिआइनि ॥ नानक सचु नामु जिन हिरदै वसिआ ना वीछुड़ि दुखु पाइनि ॥२॥

सची बाणी सचे गुण गावहि तितु घरि सोहिला होई राम ॥ निरमल गुण साचे तनु मनु साचा विचि साचा पुरखु प्रभु सोई राम ॥ सभु सचु वरतै सचो बोलै जो सचु करै सु होई ॥ जह देखा तह सचु पसरिआ अवरु न दूजा कोई ॥ सचे उपजै सचि समावै मरि जनमै दूजा होई ॥ नानक सभु किछु आपे करता आपि करावै सोई ॥३॥

सचे भगत सोहहि दरवारे सचो सचु वखाणे राम ॥ घट अंतरे साची बाणी साचो आपि पछाणे राम ॥ आपु पछाणहि ता सचु जाणहि साचे सोझी होई ॥ सचा सबदु सची है सोभा साचे ही सुखु होई ॥ साचि रते भगत इक रंगी दूजा रंगु न कोई ॥ नानक जिस कउ मसतकि लिखिआ तिसु सचु परापति होई ॥४॥२॥३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 769) सूही महला ३ ॥
जुग चारे धन जे भवै बिनु सतिगुर सोहागु न होई राम ॥ निहचलु राजु सदा हरि केरा तिसु बिनु अवरु न कोई राम ॥ तिसु बिनु अवरु न कोई सदा सचु सोई गुरमुखि एको जाणिआ ॥ धन पिर मेलावा होआ गुरमती मनु मानिआ ॥ सतिगुरु मिलिआ ता हरि पाइआ बिनु हरि नावै मुकति न होई ॥ नानक कामणि कंतै रावे मनि मानिऐ सुखु होई ॥१॥

सतिगुरु सेवि धन बालड़ीए हरि वरु पावहि सोई राम ॥ सदा होवहि सोहागणी फिरि मैला वेसु न होई राम ॥ फिरि मैला वेसु न होई गुरमुखि बूझै कोई हउमै मारि पछाणिआ ॥ करणी कार कमावै सबदि समावै अंतरि एको जाणिआ ॥ गुरमुखि प्रभु रावे दिनु राती आपणा साची सोभा होई ॥ नानक कामणि पिरु रावे आपणा रवि रहिआ प्रभु सोई ॥२॥

गुर की कार करे धन बालड़ीए हरि वरु देइ मिलाए राम ॥ हरि कै रंगि रती है कामणि मिलि प्रीतम सुखु पाए राम ॥ मिलि प्रीतम सुखु पाए सचि समाए सचु वरतै सभ थाई ॥ सचा सीगारु करे दिनु राती कामणि सचि समाई ॥ हरि सुखदाता सबदि पछाता कामणि लइआ कंठि लाए ॥ नानक महली महलु पछाणै गुरमती हरि पाए ॥३॥

सा धन बाली धुरि मेली मेरै प्रभि आपि मिलाई राम ॥ गुरमती घटि चानणु होआ प्रभु रवि रहिआ सभ थाई राम ॥ प्रभु रवि रहिआ सभ थाई मंनि वसाई पूरबि लिखिआ पाइआ ॥ सेज सुखाली मेरे प्रभ भाणी सचु सीगारु बणाइआ ॥ कामणि निरमल हउमै मलु खोई गुरमति सचि समाई ॥ नानक आपि मिलाई करतै नामु नवै निधि पाई ॥४॥३॥४॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 770) सूही महला ३ ॥
हरि हरे हरि गुण गावहु हरि गुरमुखे पाए राम ॥ अनदिनो सबदि रवहु अनहद सबद वजाए राम ॥ अनहद सबद वजाए हरि जीउ घरि आए हरि गुण गावहु नारी ॥ अनदिनु भगति करहि गुर आगै सा धन कंत पिआरी ॥ गुर का सबदु वसिआ घट अंतरि से जन सबदि सुहाए ॥ नानक तिन घरि सद ही सोहिला हरि करि किरपा घरि आए ॥१॥

भगता मनि आनंदु भइआ हरि नामि रहे लिव लाए राम ॥ गुरमुखे मनु निरमलु होआ निरमल हरि गुण गाए राम ॥ निरमल गुण गाए नामु मंनि वसाए हरि की अम्रित बाणी ॥ जिन्ह मनि वसिआ सेई जन निसतरे घटि घटि सबदि समाणी ॥ तेरे गुण गावहि सहजि समावहि सबदे मेलि मिलाए ॥ नानक सफल जनमु तिन केरा जि सतिगुरि हरि मारगि पाए ॥२॥

संतसंगति सिउ मेलु भइआ हरि हरि नामि समाए राम ॥ गुर कै सबदि सद जीवन मुकत भए हरि कै नामि लिव लाए राम ॥ हरि नामि चितु लाए गुरि मेलि मिलाए मनूआ रता हरि नाले ॥ सुखदाता पाइआ मोहु चुकाइआ अनदिनु नामु सम्हाले ॥ गुर सबदे राता सहजे माता नामु मनि वसाए ॥ नानक तिन घरि सद ही सोहिला जि सतिगुर सेवि समाए ॥३॥

बिनु सतिगुर जगु भरमि भुलाइआ हरि का महलु न पाइआ राम ॥ गुरमुखे इकि मेलि मिलाइआ तिन के दूख गवाइआ राम ॥ तिन के दूख गवाइआ जा हरि मनि भाइआ सदा गावहि रंगि राते ॥ हरि के भगत सदा जन निरमल जुगि जुगि सद ही जाते ॥ साची भगति करहि दरि जापहि घरि दरि सचा सोई ॥ नानक सचा सोहिला सची सचु बाणी सबदे ही सुखु होई ॥४॥४॥५॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 771) सूही महला ३ ॥
जे लोड़हि वरु बालड़ीए ता गुर चरणी चितु लाए राम ॥ सदा होवहि सोहागणी हरि जीउ मरै न जाए राम ॥ हरि जीउ मरै न जाए गुर कै सहजि सुभाए सा धन कंत पिआरी ॥ सचि संजमि सदा है निरमल गुर कै सबदि सीगारी ॥ मेरा प्रभु साचा सद ही साचा जिनि आपे आपु उपाइआ ॥ नानक सदा पिरु रावे आपणा जिनि गुर चरणी चितु लाइआ ॥१॥

पिरु पाइअड़ा बालड़ीए अनदिनु सहजे माती राम ॥ गुरमती मनि अनदु भइआ तितु तनि मैलु न राती राम ॥ तितु तनि मैलु न राती हरि प्रभि राती मेरा प्रभु मेलि मिलाए ॥ अनदिनु रावे हरि प्रभु अपणा विचहु आपु गवाए ॥ गुरमति पाइआ सहजि मिलाइआ अपणे प्रीतम राती ॥ नानक नामु मिलै वडिआई प्रभु रावे रंगि राती ॥२॥

पिरु रावे रंगि रातड़ीए पिर का महलु तिन पाइआ राम ॥ सो सहो अति निरमलु दाता जिनि विचहु आपु गवाइआ राम ॥ विचहु मोहु चुकाइआ जा हरि भाइआ हरि कामणि मनि भाणी ॥ अनदिनु गुण गावै नित साचे कथे अकथ कहाणी ॥ जुग चारे साचा एको वरतै बिनु गुर किनै न पाइआ ॥ नानक रंगि रवै रंगि राती जिनि हरि सेती चितु लाइआ ॥३॥

कामणि मनि सोहिलड़ा साजन मिले पिआरे राम ॥ गुरमती मनु निरमलु होआ हरि राखिआ उरि धारे राम ॥ हरि राखिआ उरि धारे अपना कारजु सवारे गुरमती हरि जाता ॥ प्रीतमि मोहि लइआ मनु मेरा पाइआ करम बिधाता ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाइआ हरि वसिआ मंनि मुरारे ॥ नानक मेलि लई गुरि अपुनै गुर कै सबदि सवारे ॥४॥५॥६॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 772) सूही महला ३ ॥
सोहिलड़ा हरि राम नामु गुर सबदी वीचारे राम ॥ हरि मनु तनो गुरमुखि भीजै राम नामु पिआरे राम ॥ राम नामु पिआरे सभि कुल उधारे राम नामु मुखि बाणी ॥ आवण जाण रहे सुखु पाइआ घरि अनहद सुरति समाणी ॥ हरि हरि एको पाइआ हरि प्रभु नानक किरपा धारे ॥ सोहिलड़ा हरि राम नामु गुर सबदी वीचारे ॥१॥

हम नीवी प्रभु अति ऊचा किउ करि मिलिआ जाए राम ॥ गुरि मेली बहु किरपा धारी हरि कै सबदि सुभाए राम ॥ मिलु सबदि सुभाए आपु गवाए रंग सिउ रलीआ माणे ॥ सेज सुखाली जा प्रभु भाइआ हरि हरि नामि समाणे ॥ नानक सोहागणि सा वडभागी जे चलै सतिगुर भाए ॥ हम नीवी प्रभु अति ऊचा किउ करि मिलिआ जाए राम ॥२॥

घटि घटे सभना विचि एको एको राम भतारो राम ॥ इकना प्रभु दूरि वसै इकना मनि आधारो राम ॥ इकना मन आधारो सिरजणहारो वडभागी गुरु पाइआ ॥ घटि घटि हरि प्रभु एको सुआमी गुरमुखि अलखु लखाइआ ॥ सहजे अनदु होआ मनु मानिआ नानक ब्रहम बीचारो ॥ घटि घटे सभना विचि एको एको राम भतारो राम ॥३॥

गुरु सेवनि सतिगुरु दाता हरि हरि नामि समाइआ राम ॥ हरि धूड़ि देवहु मै पूरे गुर की हम पापी मुकतु कराइआ राम ॥ पापी मुकतु कराए आपु गवाए निज घरि पाइआ वासा ॥ बिबेक बुधी सुखि रैणि विहाणी गुरमति नामि प्रगासा ॥ हरि हरि अनदु भइआ दिनु राती नानक हरि मीठ लगाए ॥ गुरु सेवनि सतिगुरु दाता हरि हरि नामि समाए ॥४॥६॥७॥५॥७॥१२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 773) रागु सूही महला ४ छंत घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सतिगुरु पुरखु मिलाइ अवगण विकणा गुण रवा बलि राम जीउ ॥ हरि हरि नामु धिआइ गुरबाणी नित नित चवा बलि राम जीउ ॥ गुरबाणी सद मीठी लागी पाप विकार गवाइआ ॥ हउमै रोगु गइआ भउ भागा सहजे सहजि मिलाइआ ॥ काइआ सेज गुर सबदि सुखाली गिआन तति करि भोगो ॥ अनदिनु सुखि माणे नित रलीआ नानक धुरि संजोगो ॥१॥

सतु संतोखु करि भाउ कुड़मु कुड़माई आइआ बलि राम जीउ ॥ संत जना करि मेलु गुरबाणी गावाईआ बलि राम जीउ ॥ बाणी गुर गाई परम गति पाई पंच मिले सोहाइआ ॥ गइआ करोधु ममता तनि नाठी पाखंडु भरमु गवाइआ ॥ हउमै पीर गई सुखु पाइआ आरोगत भए सरीरा ॥ गुर परसादी ब्रहमु पछाता नानक गुणी गहीरा ॥२॥

मनमुखि विछुड़ी दूरि महलु न पाए बलि गई बलि राम जीउ ॥ अंतरि ममता कूरि कूड़ु विहाझे कूड़ि लई बलि राम जीउ ॥ कूड़ु कपटु कमावै महा दुखु पावै विणु सतिगुर मगु न पाइआ ॥ उझड़ पंथि भ्रमै गावारी खिनु खिनु धके खाइआ ॥ आपे दइआ करे प्रभु दाता सतिगुरु पुरखु मिलाए ॥ जनम जनम के विछुड़े जन मेले नानक सहजि सुभाए ॥३॥

आइआ लगनु गणाइ हिरदै धन ओमाहीआ बलि राम जीउ ॥ पंडित पाधे आणि पती बहि वाचाईआ बलि राम जीउ ॥ पती वाचाई मनि वजी वधाई जब साजन सुणे घरि आए ॥ गुणी गिआनी बहि मता पकाइआ फेरे ततु दिवाए ॥ वरु पाइआ पुरखु अगमु अगोचरु सद नवतनु बाल सखाई ॥ नानक किरपा करि कै मेले विछुड़ि कदे न जाई ॥४॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 773) सूही महला ४ ॥
हरि पहिलड़ी लाव परविरती करम द्रिड़ाइआ बलि राम जीउ ॥ बाणी ब्रहमा वेदु धरमु द्रिड़हु पाप तजाइआ बलि राम जीउ ॥ धरमु द्रिड़हु हरि नामु धिआवहु सिम्रिति नामु द्रिड़ाइआ ॥ सतिगुरु गुरु पूरा आराधहु सभि किलविख पाप गवाइआ ॥ सहज अनंदु होआ वडभागी मनि हरि हरि मीठा लाइआ ॥ जनु कहै नानकु लाव पहिली आर्मभु काजु रचाइआ ॥१॥

हरि दूजड़ी लाव सतिगुरु पुरखु मिलाइआ बलि राम जीउ ॥ निरभउ भै मनु होइ हउमै मैलु गवाइआ बलि राम जीउ ॥ निरमलु भउ पाइआ हरि गुण गाइआ हरि वेखै रामु हदूरे ॥ हरि आतम रामु पसारिआ सुआमी सरब रहिआ भरपूरे ॥ अंतरि बाहरि हरि प्रभु एको मिलि हरि जन मंगल गाए ॥ जन नानक दूजी लाव चलाई अनहद सबद वजाए ॥२॥

हरि तीजड़ी लाव मनि चाउ भइआ बैरागीआ बलि राम जीउ ॥ संत जना हरि मेलु हरि पाइआ वडभागीआ बलि राम जीउ ॥ निरमलु हरि पाइआ हरि गुण गाइआ मुखि बोली हरि बाणी ॥ संत जना वडभागी पाइआ हरि कथीऐ अकथ कहाणी ॥ हिरदै हरि हरि हरि धुनि उपजी हरि जपीऐ मसतकि भागु जीउ ॥ जनु नानकु बोले तीजी लावै हरि उपजै मनि बैरागु जीउ ॥३॥

हरि चउथड़ी लाव मनि सहजु भइआ हरि पाइआ बलि राम जीउ ॥ गुरमुखि मिलिआ सुभाइ हरि मनि तनि मीठा लाइआ बलि राम जीउ ॥ हरि मीठा लाइआ मेरे प्रभ भाइआ अनदिनु हरि लिव लाई ॥ मन चिंदिआ फलु पाइआ सुआमी हरि नामि वजी वाधाई ॥ हरि प्रभि ठाकुरि काजु रचाइआ धन हिरदै नामि विगासी ॥ जनु नानकु बोले चउथी लावै हरि पाइआ प्रभु अविनासी ॥४॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 774) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु सूही छंत महला ४ घरु २ ॥
गुरमुखि हरि गुण गाए ॥ हिरदै रसन रसाए ॥ हरि रसन रसाए मेरे प्रभ भाए मिलिआ सहजि सुभाए ॥ अनदिनु भोग भोगे सुखि सोवै सबदि रहै लिव लाए ॥ वडै भागि गुरु पूरा पाईऐ अनदिनु नामु धिआए ॥ सहजे सहजि मिलिआ जगजीवनु नानक सुंनि समाए ॥१॥

संगति संत मिलाए ॥ हरि सरि निरमलि नाए ॥ निरमलि जलि नाए मैलु गवाए भए पवितु सरीरा ॥ दुरमति मैलु गई भ्रमु भागा हउमै बिनठी पीरा ॥ नदरि प्रभू सतसंगति पाई निज घरि होआ वासा ॥ हरि मंगल रसि रसन रसाए नानक नामु प्रगासा ॥२॥

अंतरि रतनु बीचारे ॥ गुरमुखि नामु पिआरे ॥ हरि नामु पिआरे सबदि निसतारे अगिआनु अधेरु गवाइआ ॥ गिआनु प्रचंडु बलिआ घटि चानणु घर मंदर सोहाइआ ॥ तनु मनु अरपि सीगार बणाए हरि प्रभ साचे भाइआ ॥ जो प्रभु कहै सोई परु कीजै नानक अंकि समाइआ ॥३॥

हरि प्रभि काजु रचाइआ ॥ गुरमुखि वीआहणि आइआ ॥ वीआहणि आइआ गुरमुखि हरि पाइआ सा धन कंत पिआरी ॥ संत जना मिलि मंगल गाए हरि जीउ आपि सवारी ॥ सुरि नर गण गंधरब मिलि आए अपूरब जंञ बणाई ॥ नानक प्रभु पाइआ मै साचा ना कदे मरै न जाई ॥४॥१॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 775) रागु सूही छंत महला ४ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आवहो संत जनहु गुण गावह गोविंद केरे राम ॥ गुरमुखि मिलि रहीऐ घरि वाजहि सबद घनेरे राम ॥ सबद घनेरे हरि प्रभ तेरे तू करता सभ थाई ॥ अहिनिसि जपी सदा सालाही साच सबदि लिव लाई ॥ अनदिनु सहजि रहै रंगि राता राम नामु रिद पूजा ॥ नानक गुरमुखि एकु पछाणै अवरु न जाणै दूजा ॥१॥

सभ महि रवि रहिआ सो प्रभु अंतरजामी राम ॥ गुर सबदि रवै रवि रहिआ सो प्रभु मेरा सुआमी राम ॥ प्रभु मेरा सुआमी अंतरजामी घटि घटि रविआ सोई ॥ गुरमति सचु पाईऐ सहजि समाईऐ तिसु बिनु अवरु न कोई ॥ सहजे गुण गावा जे प्रभ भावा आपे लए मिलाए ॥ नानक सो प्रभु सबदे जापै अहिनिसि नामु धिआए ॥२॥

इहु जगो दुतरु मनमुखु पारि न पाई राम ॥ अंतरे हउमै ममता कामु क्रोधु चतुराई राम ॥ अंतरि चतुराई थाइ न पाई बिरथा जनमु गवाइआ ॥ जम मगि दुखु पावै चोटा खावै अंति गइआ पछुताइआ ॥ बिनु नावै को बेली नाही पुतु कुट्मबु सुतु भाई ॥ नानक माइआ मोहु पसारा आगै साथि न जाई ॥३॥

हउ पूछउ अपना सतिगुरु दाता किन बिधि दुतरु तरीऐ राम ॥ सतिगुर भाइ चलहु जीवतिआ इव मरीऐ राम ॥ जीवतिआ मरीऐ भउजलु तरीऐ गुरमुखि नामि समावै ॥ पूरा पुरखु पाइआ वडभागी सचि नामि लिव लावै ॥ मति परगासु भई मनु मानिआ राम नामि वडिआई ॥ नानक प्रभु पाइआ सबदि मिलाइआ जोती जोति मिलाई ॥४॥१॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 776) सूही महला ४ घरु ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गुरु संत जनो पिआरा मै मिलिआ मेरी त्रिसना बुझि गईआसे ॥ हउ मनु तनु देवा सतिगुरै मै मेले प्रभ गुणतासे ॥ धनु धंनु गुरू वड पुरखु है मै दसे हरि साबासे ॥ वडभागी हरि पाइआ जन नानक नामि विगासे ॥१॥

गुरु सजणु पिआरा मै मिलिआ हरि मारगु पंथु दसाहा ॥ घरि आवहु चिरी विछुंनिआ मिलु सबदि गुरू प्रभ नाहा ॥ हउ तुझु बाझहु खरी उडीणीआ जिउ जल बिनु मीनु मराहा ॥ वडभागी हरि धिआइआ जन नानक नामि समाहा ॥२॥

मनु दह दिसि चलि चलि भरमिआ मनमुखु भरमि भुलाइआ ॥ नित आसा मनि चितवै मन त्रिसना भुख लगाइआ ॥ अनता धनु धरि दबिआ फिरि बिखु भालण गइआ ॥ जन नानक नामु सलाहि तू बिनु नावै पचि पचि मुइआ ॥३॥

गुरु सुंदरु मोहनु पाइ करे हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ ॥ मेरै हिरदै सुधि बुधि विसरि गई मन आसा चिंत विसारिआ ॥ मै अंतरि वेदन प्रेम की गुर देखत मनु साधारिआ ॥ वडभागी प्रभ आइ मिलु जनु नानकु खिनु खिनु वारिआ ॥४॥१॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 776) सूही छंत महला ४ ॥
मारेहिसु वे जन हउमै बिखिआ जिनि हरि प्रभ मिलण न दितीआ ॥ देह कंचन वे वंनीआ इनि हउमै मारि विगुतीआ ॥ मोहु माइआ वे सभ कालखा इनि मनमुखि मूड़ि सजुतीआ ॥ जन नानक गुरमुखि उबरे गुर सबदी हउमै छुटीआ ॥१॥

वसि आणिहु वे जन इसु मन कउ मनु बासे जिउ नित भउदिआ ॥ दुखि रैणि वे विहाणीआ नित आसा आस करेदिआ ॥ गुरु पाइआ वे संत जनो मनि आस पूरी हरि चउदिआ ॥ जन नानक प्रभ देहु मती छडि आसा नित सुखि सउदिआ ॥२॥

सा धन आसा चिति करे राम राजिआ हरि प्रभ सेजड़ीऐ आई ॥ मेरा ठाकुरु अगम दइआलु है राम राजिआ करि किरपा लेहु मिलाई ॥ मेरै मनि तनि लोचा गुरमुखे राम राजिआ हरि सरधा सेज विछाई ॥ जन नानक हरि प्रभ भाणीआ राम राजिआ मिलिआ सहजि सुभाई ॥३॥

इकतु सेजै हरि प्रभो राम राजिआ गुरु दसे हरि मेलेई ॥ मै मनि तनि प्रेम बैरागु है राम राजिआ गुरु मेले किरपा करेई ॥ हउ गुर विटहु घोलि घुमाइआ राम राजिआ जीउ सतिगुर आगै देई ॥ गुरु तुठा जीउ राम राजिआ जन नानक हरि मेलेई ॥४॥२॥६॥५॥७॥६॥१८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 777) रागु सूही छंत महला ५ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सुणि बावरे तू काए देखि भुलाना ॥ सुणि बावरे नेहु कूड़ा लाइओ कुस्मभ रंगाना ॥ कूड़ी डेखि भुलो अढु लहै न मुलो गोविद नामु मजीठा ॥ थीवहि लाला अति गुलाला सबदु चीनि गुर मीठा ॥ मिथिआ मोहि मगनु थी रहिआ झूठ संगि लपटाना ॥ नानक दीन सरणि किरपा निधि राखु लाज भगताना ॥१॥

सुणि बावरे सेवि ठाकुरु नाथु पराणा ॥ सुणि बावरे जो आइआ तिसु जाणा ॥ निहचलु हभ वैसी सुणि परदेसी संतसंगि मिलि रहीऐ ॥ हरि पाईऐ भागी सुणि बैरागी चरण प्रभू गहि रहीऐ ॥ एहु मनु दीजै संक न कीजै गुरमुखि तजि बहु माणा ॥ नानक दीन भगत भव तारण तेरे किआ गुण आखि वखाणा ॥२॥

सुणि बावरे किआ कीचै कूड़ा मानो ॥ सुणि बावरे हभु वैसी गरबु गुमानो ॥ निहचलु हभ जाणा मिथिआ माणा संत प्रभू होइ दासा ॥ जीवत मरीऐ भउजलु तरीऐ जे थीवै करमि लिखिआसा ॥ गुरु सेवीजै अम्रितु पीजै जिसु लावहि सहजि धिआनो ॥ नानकु सरणि पइआ हरि दुआरै हउ बलि बलि सद कुरबानो ॥३॥

सुणि बावरे मतु जाणहि प्रभु मै पाइआ ॥ सुणि बावरे थीउ रेणु जिनी प्रभु धिआइआ ॥ जिनि प्रभु धिआइआ तिनि सुखु पाइआ वडभागी दरसनु पाईऐ ॥ थीउ निमाणा सद कुरबाणा सगला आपु मिटाईऐ ॥ ओहु धनु भाग सुधा जिनि प्रभु लधा हम तिसु पहि आपु वेचाइआ ॥ नानक दीन सरणि सुख सागर राखु लाज अपनाइआ ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 777) सूही महला ५ ॥
हरि चरण कमल की टेक सतिगुरि दिती तुसि कै बलि राम जीउ ॥ हरि अम्रिति भरे भंडार सभु किछु है घरि तिस कै बलि राम जीउ ॥ बाबुलु मेरा वड समरथा करण कारण प्रभु हारा ॥ जिसु सिमरत दुखु कोई न लागै भउजलु पारि उतारा ॥ आदि जुगादि भगतन का राखा उसतति करि करि जीवा ॥ नानक नामु महा रसु मीठा अनदिनु मनि तनि पीवा ॥१॥

हरि आपे लए मिलाइ किउ वेछोड़ा थीवई बलि राम जीउ ॥ जिस नो तेरी टेक सो सदा सद जीवई बलि राम जीउ ॥ तेरी टेक तुझै ते पाई साचे सिरजणहारा ॥ जिस ते खाली कोई नाही ऐसा प्रभू हमारा ॥ संत जना मिलि मंगलु गाइआ दिनु रैनि आस तुम्हारी ॥ सफलु दरसु भेटिआ गुरु पूरा नानक सद बलिहारी ॥२॥

सम्हलिआ सचु थानु मानु महतु सचु पाइआ बलि राम जीउ ॥ सतिगुरु मिलिआ दइआलु गुण अबिनासी गाइआ बलि राम जीउ ॥ गुण गोविंद गाउ नित नित प्राण प्रीतम सुआमीआ ॥ सुभ दिवस आए गहि कंठि लाए मिले अंतरजामीआ ॥ सतु संतोखु वजहि वाजे अनहदा झुणकारे ॥ सुणि भै बिनासे सगल नानक प्रभ पुरख करणैहारे ॥३॥

उपजिआ ततु गिआनु साहुरै पेईऐ इकु हरि बलि राम जीउ ॥ ब्रहमै ब्रहमु मिलिआ कोइ न साकै भिंन करि बलि राम जीउ ॥ बिसमु पेखै बिसमु सुणीऐ बिसमादु नदरी आइआ ॥ जलि थलि महीअलि पूरन सुआमी घटि घटि रहिआ समाइआ ॥ जिस ते उपजिआ तिसु माहि समाइआ कीमति कहणु न जाए ॥ जिस के चलत न जाही लखणे नानक तिसहि धिआए ॥४॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 778) रागु सूही छंत महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गोबिंद गुण गावण लागे ॥ हरि रंगि अनदिनु जागे ॥ हरि रंगि जागे पाप भागे मिले संत पिआरिआ ॥ गुर चरण लागे भरम भागे काज सगल सवारिआ ॥ सुणि स्रवण बाणी सहजि जाणी हरि नामु जपि वडभागै ॥ बिनवंति नानक सरणि सुआमी जीउ पिंडु प्रभ आगै ॥१॥

अनहत सबदु सुहावा ॥ सचु मंगलु हरि जसु गावा ॥ गुण गाइ हरि हरि दूख नासे रहसु उपजै मनि घणा ॥ मनु तंनु निरमलु देखि दरसनु नामु प्रभ का मुखि भणा ॥ होइ रेण साधू प्रभ अराधू आपणे प्रभ भावा ॥ बिनवंति नानक दइआ धारहु सदा हरि गुण गावा ॥२॥

गुर मिलि सागरु तरिआ ॥ हरि चरण जपत निसतरिआ ॥ हरि चरण धिआए सभि फल पाए मिटे आवण जाणा ॥ भाइ भगति सुभाइ हरि जपि आपणे प्रभ भावा ॥ जपि एकु अलख अपार पूरन तिसु बिना नही कोई ॥ बिनवंति नानक गुरि भरमु खोइआ जत देखा तत सोई ॥३॥

पतित पावन हरि नामा ॥ पूरन संत जना के कामा ॥ गुरु संतु पाइआ प्रभु धिआइआ सगल इछा पुंनीआ ॥ हउ ताप बिनसे सदा सरसे प्रभ मिले चिरी विछुंनिआ ॥ मनि साति आई वजी वधाई मनहु कदे न वीसरै ॥ बिनवंति नानक सतिगुरि द्रिड़ाइआ सदा भजु जगदीसरै ॥४॥१॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 779) रागु सूही छंत महला ५ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तू ठाकुरो बैरागरो मै जेही घण चेरी राम ॥ तूं सागरो रतनागरो हउ सार न जाणा तेरी राम ॥ सार न जाणा तू वड दाणा करि मिहरमति सांई ॥ किरपा कीजै सा मति दीजै आठ पहर तुधु धिआई ॥ गरबु न कीजै रेण होवीजै ता गति जीअरे तेरी ॥ सभ ऊपरि नानक का ठाकुरु मै जेही घण चेरी राम ॥१॥

तुम्ह गउहर अति गहिर ग्मभीरा तुम पिर हम बहुरीआ राम ॥ तुम वडे वडे वड ऊचे हउ इतनीक लहुरीआ राम ॥ हउ किछु नाही एको तूहै आपे आपि सुजाना ॥ अम्रित द्रिसटि निमख प्रभ जीवा सरब रंग रस माना ॥ चरणह सरनी दासह दासी मनि मउलै तनु हरीआ ॥ नानक ठाकुरु सरब समाणा आपन भावन करीआ ॥२॥

तुझु ऊपरि मेरा है माणा तूहै मेरा ताणा राम ॥ सुरति मति चतुराई तेरी तू जाणाइहि जाणा राम ॥ सोई जाणै सोई पछाणै जा कउ नदरि सिरंदे ॥ मनमुखि भूली बहुती राही फाथी माइआ फंदे ॥ ठाकुर भाणी सा गुणवंती तिन ही सभ रंग माणा ॥ नानक की धर तूहै ठाकुर तू नानक का माणा ॥३॥

हउ वारी वंञा घोली वंञा तू परबतु मेरा ओल्हा राम ॥ हउ बलि जाई लख लख लख बरीआ जिनि भ्रमु परदा खोल्हा राम ॥ मिटे अंधारे तजे बिकारे ठाकुर सिउ मनु माना ॥ प्रभ जी भाणी भई निकाणी सफल जनमु परवाना ॥ भई अमोली भारा तोली मुकति जुगति दरु खोल्हा ॥ कहु नानक हउ निरभउ होई सो प्रभु मेरा ओल्हा ॥४॥१॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 780) सूही महला ५ ॥
साजनु पुरखु सतिगुरु मेरा पूरा तिसु बिनु अवरु न जाणा राम ॥ मात पिता भाई सुत बंधप जीअ प्राण मनि भाणा राम ॥ जीउ पिंडु सभु तिस का दीआ सरब गुणा भरपूरे ॥ अंतरजामी सो प्रभु मेरा सरब रहिआ भरपूरे ॥ ता की सरणि सरब सुख पाए होए सरब कलिआणा ॥ सदा सदा प्रभ कउ बलिहारै नानक सद कुरबाणा ॥१॥

ऐसा गुरु वडभागी पाईऐ जितु मिलिऐ प्रभु जापै राम ॥ जनम जनम के किलविख उतरहि हरि संत धूड़ी नित नापै राम ॥ हरि धूड़ी नाईऐ प्रभू धिआईऐ बाहुड़ि जोनि न आईऐ ॥ गुर चरणी लागे भ्रम भउ भागे मनि चिंदिआ फलु पाईऐ ॥ हरि गुण नित गाए नामु धिआए फिरि सोगु नाही संतापै ॥ नानक सो प्रभु जीअ का दाता पूरा जिसु परतापै ॥२॥

हरि हरे हरि गुण निधे हरि संतन कै वसि आए राम ॥ संत चरण गुर सेवा लागे तिनी परम पद पाए राम ॥ परम पदु पाइआ आपु मिटाइआ हरि पूरन किरपा धारी ॥ सफल जनमु होआ भउ भागा हरि भेटिआ एकु मुरारी ॥ जिस का सा तिन ही मेलि लीआ जोती जोति समाइआ ॥ नानक नामु निरंजन जपीऐ मिलि सतिगुर सुखु पाइआ ॥३॥

गाउ मंगलो नित हरि जनहु पुंनी इछ सबाई राम ॥ रंगि रते अपुने सुआमी सेती मरै न आवै जाई राम ॥ अबिनासी पाइआ नामु धिआइआ सगल मनोरथ पाए ॥ सांति सहज आनंद घनेरे गुर चरणी मनु लाए ॥ पूरि रहिआ घटि घटि अबिनासी थान थनंतरि साई ॥ कहु नानक कारज सगले पूरे गुर चरणी मनु लाई ॥४॥२॥५॥


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