Pt 3 - राग मारू - बाणी शब्द, Part 3 - Raag Maru - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1015) मारू महला १ ॥
ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥ सचा साकु न तुटई गुरु मेले सहीआह ॥१॥

बलिहारी गुर आपणे सद बलिहारै जाउ ॥ गुर बिनु एता भवि थकी गुरि पिरु मेलिमु दितमु मिलाइ ॥१॥ रहाउ ॥

फुफी नानी मासीआ देर जेठानड़ीआह ॥ आवनि वंञनि ना रहनि पूर भरे पहीआह ॥२॥

मामे तै मामाणीआ भाइर बाप न माउ ॥ साथ लडे तिन नाठीआ भीड़ घणी दरीआउ ॥३॥

साचउ रंगि रंगावलो सखी हमारो कंतु ॥ सचि विछोड़ा ना थीऐ सो सहु रंगि रवंतु ॥४॥

सभे रुती चंगीआ जितु सचे सिउ नेहु ॥ सा धन कंतु पछाणिआ सुखि सुती निसि डेहु ॥५॥

पतणि कूके पातणी वंञहु ध्रुकि विलाड़ि ॥ पारि पवंदड़े डिठु मै सतिगुर बोहिथि चाड़ि ॥६॥

हिकनी लदिआ हिकि लदि गए हिकि भारे भर नालि ॥ जिनी सचु वणंजिआ से सचे प्रभ नालि ॥७॥

ना हम चंगे आखीअह बुरा न दिसै कोइ ॥ नानक हउमै मारीऐ सचे जेहड़ा सोइ ॥८॥२॥१०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1015) मारू महला १ ॥
ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥ सदा साहिब कै रंगे राता अनदिनु नामु वखाणा ॥१॥

बाबा मूरखु हा नावै बलि जाउ ॥ तू करता तू दाना बीना तेरै नामि तराउ ॥१॥ रहाउ ॥

मूरखु सिआणा एकु है एक जोति दुइ नाउ ॥ मूरखा सिरि मूरखु है जि मंने नाही नाउ ॥२॥

गुर दुआरै नाउ पाईऐ बिनु सतिगुर पलै न पाइ ॥ सतिगुर कै भाणै मनि वसै ता अहिनिसि रहै लिव लाइ ॥३॥

राजं रंगं रूपं मालं जोबनु ते जूआरी ॥ हुकमी बाधे पासै खेलहि चउपड़ि एका सारी ॥४॥

जगि चतुरु सिआणा भरमि भुलाणा नाउ पंडित पड़हि गावारी ॥ नाउ विसारहि बेदु समालहि बिखु भूले लेखारी ॥५॥

कलर खेती तरवर कंठे बागा पहिरहि कजलु झरै ॥ एहु संसारु तिसै की कोठी जो पैसै सो गरबि जरै ॥६॥

रयति राजे कहा सबाए दुहु अंतरि सो जासी ॥ कहत नानकु गुर सचे की पउड़ी रहसी अलखु निवासी ॥७॥३॥११॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1016) मारू महला ३ घरु ५ असटपदी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जिस नो प्रेमु मंनि वसाए ॥ साचै सबदि सहजि सुभाए ॥ एहा वेदन सोई जाणै अवरु कि जाणै कारी जीउ ॥१॥

आपे मेले आपि मिलाए ॥ आपणा पिआरु आपे लाए ॥ प्रेम की सार सोई जाणै जिस नो नदरि तुमारी जीउ ॥१॥ रहाउ ॥

दिब द्रिसटि जागै भरमु चुकाए ॥ गुर परसादि परम पदु पाए ॥ सो जोगी इह जुगति पछाणै गुर कै सबदि बीचारी जीउ ॥२॥

संजोगी धन पिर मेला होवै ॥ गुरमति विचहु दुरमति खोवै ॥ रंग सिउ नित रलीआ माणै अपणे कंत पिआरी जीउ ॥३॥

सतिगुर बाझहु वैदु न कोई ॥ आपे आपि निरंजनु सोई ॥ सतिगुर मिलिऐ मरै मंदा होवै गिआन बीचारी जीउ ॥४॥

एहु सबदु सारु जिस नो लाए ॥ गुरमुखि त्रिसना भुख गवाए ॥ आपण लीआ किछू न पाईऐ करि किरपा कल धारी जीउ ॥५॥

अगम निगमु सतिगुरू दिखाइआ ॥ करि किरपा अपनै घरि आइआ ॥ अंजन माहि निरंजनु जाता जिन कउ नदरि तुमारी जीउ ॥६॥

गुरमुखि होवै सो ततु पाए ॥ आपणा आपु विचहु गवाए ॥ सतिगुर बाझहु सभु धंधु कमावै वेखहु मनि वीचारी जीउ ॥७॥

इकि भ्रमि भूले फिरहि अहंकारी ॥ इकना गुरमुखि हउमै मारी ॥ सचै सबदि रते बैरागी होरि भरमि भुले गावारी जीउ ॥८॥

गुरमुखि जिनी नामु न पाइआ ॥ मनमुखि बिरथा जनमु गवाइआ ॥ अगै विणु नावै को बेली नाही बूझै गुर बीचारी जीउ ॥९॥

अम्रित नामु सदा सुखदाता ॥ गुरि पूरै जुग चारे जाता ॥ जिसु तू देवहि सोई पाए नानक ततु बीचारी जीउ ॥१०॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1017) मारू महला ५ घरु ३ असटपदीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
लख चउरासीह भ्रमते भ्रमते दुलभ जनमु अब पाइओ ॥१॥

रे मूड़े तू होछै रसि लपटाइओ ॥ अम्रितु संगि बसतु है तेरै बिखिआ सिउ उरझाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

रतन जवेहर बनजनि आइओ कालरु लादि चलाइओ ॥२॥

जिह घर महि तुधु रहना बसना सो घरु चीति न आइओ ॥३॥

अटल अखंड प्राण सुखदाई इक निमख नही तुझु गाइओ ॥४॥

जहा जाणा सो थानु विसारिओ इक निमख नही मनु लाइओ ॥५॥

पुत्र कलत्र ग्रिह देखि समग्री इस ही महि उरझाइओ ॥६॥

जितु को लाइओ तित ही लागा तैसे करम कमाइओ ॥७॥

जउ भइओ क्रिपालु ता साधसंगु पाइआ जन नानक ब्रहमु धिआइओ ॥८॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1017) मारू महला ५ ॥
करि अनुग्रहु राखि लीनो भइओ साधू संगु ॥ हरि नाम रसु रसना उचारै मिसट गूड़ा रंगु ॥१॥

मेरे मान को असथानु ॥ मीत साजन सखा बंधपु अंतरजामी जानु ॥१॥ रहाउ ॥

संसार सागरु जिनि उपाइओ सरणि प्रभ की गही ॥ गुर प्रसादी प्रभु अराधे जमकंकरु किछु न कही ॥२॥

मोख मुकति दुआरि जा कै संत रिदा भंडारु ॥ जीअ जुगति सुजाणु सुआमी सदा राखणहारु ॥३॥

दूख दरद कलेस बिनसहि जिसु बसै मन माहि ॥ मिरतु नरकु असथान बिखड़े बिखु न पोहै ताहि ॥४॥

रिधि सिधि नव निधि जा कै अम्रिता परवाह ॥ आदि अंते मधि पूरन ऊच अगम अगाह ॥५॥

सिध साधिक देव मुनि जन बेद करहि उचारु ॥ सिमरि सुआमी सुख सहजि भुंचहि नही अंतु पारावारु ॥६॥

अनिक प्राछत मिटहि खिन महि रिदै जपि भगवान ॥ पावना ते महा पावन कोटि दान इसनान ॥७॥

बल बुधि सुधि पराण सरबसु संतना की रासि ॥ बिसरु नाही निमख मन ते नानक की अरदासि ॥८॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1017) मारू महला ५ ॥
ससत्रि तीखणि काटि डारिओ मनि न कीनो रोसु ॥ काजु उआ को ले सवारिओ तिलु न दीनो दोसु ॥१॥

मन मेरे राम रउ नित नीति ॥ दइआल देव क्रिपाल गोबिंद सुनि संतना की रीति ॥१॥ रहाउ ॥

चरण तलै उगाहि बैसिओ स्रमु न रहिओ सरीरि ॥ महा सागरु नह विआपै खिनहि उतरिओ तीरि ॥२॥

चंदन अगर कपूर लेपन तिसु संगे नही प्रीति ॥ बिसटा मूत्र खोदि तिलु तिलु मनि न मनी बिपरीति ॥३॥

ऊच नीच बिकार सुक्रित संलगन सभ सुख छत्र ॥ मित्र सत्रु न कछू जानै सरब जीअ समत ॥४॥

करि प्रगासु प्रचंड प्रगटिओ अंधकार बिनास ॥ पवित्र अपवित्रह किरण लागे मनि न भइओ बिखादु ॥५॥

सीत मंद सुगंध चलिओ सरब थान समान ॥ जहा सा किछु तहा लागिओ तिलु न संका मान ॥६॥

सुभाइ अभाइ जु निकटि आवै सीतु ता का जाइ ॥ आप पर का कछु न जाणै सदा सहजि सुभाइ ॥७॥

चरण सरण सनाथ इहु मनु रंगि राते लाल ॥ गोपाल गुण नित गाउ नानक भए प्रभ किरपाल ॥८॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1018) मारू महला ५ घरु ४ असटपदीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
चादना चादनु आंगनि प्रभ जीउ अंतरि चादना ॥१॥

आराधना अराधनु नीका हरि हरि नामु अराधना ॥२॥

तिआगना तिआगनु नीका कामु क्रोधु लोभु तिआगना ॥३॥

मागना मागनु नीका हरि जसु गुर ते मागना ॥४॥

जागना जागनु नीका हरि कीरतन महि जागना ॥५॥

लागना लागनु नीका गुर चरणी मनु लागना ॥६॥

इह बिधि तिसहि परापते जा कै मसतकि भागना ॥७॥

कहु नानक तिसु सभु किछु नीका जो प्रभ की सरनागना ॥८॥१॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1018) मारू महला ५ ॥
आउ जी तू आउ हमारै हरि जसु स्रवन सुनावना ॥१॥ रहाउ ॥

तुधु आवत मेरा मनु तनु हरिआ हरि जसु तुम संगि गावना ॥१॥

संत क्रिपा ते हिरदै वासै दूजा भाउ मिटावना ॥२॥

भगत दइआ ते बुधि परगासै दुरमति दूख तजावना ॥३॥

दरसनु भेटत होत पुनीता पुनरपि गरभि न पावना ॥४॥

नउ निधि रिधि सिधि पाई जो तुमरै मनि भावना ॥५॥

संत बिना मै थाउ न कोई अवर न सूझै जावना ॥६॥

मोहि निरगुन कउ कोइ न राखै संता संगि समावना ॥७॥

कहु नानक गुरि चलतु दिखाइआ मन मधे हरि हरि रावना ॥८॥२॥५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1019) मारू महला ५ ॥
जीवना सफल जीवन सुनि हरि जपि जपि सद जीवना ॥१॥ रहाउ ॥

पीवना जितु मनु आघावै नामु अम्रित रसु पीवना ॥१॥

खावना जितु भूख न लागै संतोखि सदा त्रिपतीवना ॥२॥

पैनणा रखु पति परमेसुर फिरि नागे नही थीवना ॥३॥

भोगना मन मधे हरि रसु संतसंगति महि लीवना ॥४॥

बिनु तागे बिनु सूई आनी मनु हरि भगती संगि सीवना ॥५॥

मातिआ हरि रस महि राते तिसु बहुड़ि न कबहू अउखीवना ॥६॥

मिलिओ तिसु सरब निधाना प्रभि क्रिपालि जिसु दीवना ॥७॥

सुखु नानक संतन की सेवा चरण संत धोइ पीवना ॥८॥३॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1019) मारू महला ५ घरु ८ अंजुलीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जिसु ग्रिहि बहुतु तिसै ग्रिहि चिंता ॥ जिसु ग्रिहि थोरी सु फिरै भ्रमंता ॥ दुहू बिवसथा ते जो मुकता सोई सुहेला भालीऐ ॥१॥

ग्रिह राज महि नरकु उदास करोधा ॥ बहु बिधि बेद पाठ सभि सोधा ॥ देही महि जो रहै अलिपता तिसु जन की पूरन घालीऐ ॥२॥

जागत सूता भरमि विगूता ॥ बिनु गुर मुकति न होईऐ मीता ॥ साधसंगि तुटहि हउ बंधन एको एकु निहालीऐ ॥३॥

करम करै त बंधा नह करै त निंदा ॥ मोह मगन मनु विआपिआ चिंदा ॥ गुर प्रसादि सुखु दुखु सम जाणै घटि घटि रामु हिआलीऐ ॥४॥

संसारै महि सहसा बिआपै ॥ अकथ कथा अगोचर नही जापै ॥ जिसहि बुझाए सोई बूझै ओहु बालक वागी पालीऐ ॥५॥

छोडि बहै तउ छूटै नाही ॥ जउ संचै तउ भउ मन माही ॥ इस ही महि जिस की पति राखै तिसु साधू चउरु ढालीऐ ॥६॥

जो सूरा तिस ही होइ मरणा ॥ जो भागै तिसु जोनी फिरणा ॥ जो वरताए सोई भल मानै बुझि हुकमै दुरमति जालीऐ ॥७॥

जितु जितु लावहि तितु तितु लगना ॥ करि करि वेखै अपणे जचना ॥ नानक के पूरन सुखदाते तू देहि त नामु समालीऐ ॥८॥१॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1019) मारू महला ५ ॥
बिरखै हेठि सभि जंत इकठे ॥ इकि तते इकि बोलनि मिठे ॥ असतु उदोतु भइआ उठि चले जिउ जिउ अउध विहाणीआ ॥१॥

पाप करेदड़ सरपर मुठे ॥ अजराईलि फड़े फड़ि कुठे ॥ दोजकि पाए सिरजणहारै लेखा मंगै बाणीआ ॥२॥

संगि न कोई भईआ बेबा ॥ मालु जोबनु धनु छोडि वञेसा ॥ करण करीम न जातो करता तिल पीड़े जिउ घाणीआ ॥३॥

खुसि खुसि लैदा वसतु पराई ॥ वेखै सुणे तेरै नालि खुदाई ॥ दुनीआ लबि पइआ खात अंदरि अगली गल न जाणीआ ॥४॥

जमि जमि मरै मरै फिरि जमै ॥ बहुतु सजाइ पइआ देसि लमै ॥ जिनि कीता तिसै न जाणी अंधा ता दुखु सहै पराणीआ ॥५॥

खालक थावहु भुला मुठा ॥ दुनीआ खेलु बुरा रुठ तुठा ॥ सिदकु सबूरी संतु न मिलिओ वतै आपण भाणीआ ॥६॥

मउला खेल करे सभि आपे ॥ इकि कढे इकि लहरि विआपे ॥ जिउ नचाए तिउ तिउ नचनि सिरि सिरि किरत विहाणीआ ॥७॥

मिहर करे ता खसमु धिआई ॥ संता संगति नरकि न पाई ॥ अम्रित नाम दानु नानक कउ गुण गीता नित वखाणीआ ॥८॥२॥८॥१२॥२०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1020) मारू सोलहे महला १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥ जिनि सिरजी तिन ही फुनि गोई ॥ जिउ भावै तिउ राखहु रहणा तुम सिउ किआ मुकराई हे ॥१॥

आपि उपाए आपि खपाए ॥ आपे सिरि सिरि धंधै लाए ॥ आपे वीचारी गुणकारी आपे मारगि लाई हे ॥२॥

आपे दाना आपे बीना ॥ आपे आपु उपाइ पतीना ॥ आपे पउणु पाणी बैसंतरु आपे मेलि मिलाई हे ॥३॥

आपे ससि सूरा पूरो पूरा ॥ आपे गिआनि धिआनि गुरु सूरा ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै साचे सिउ लिव लाई हे ॥४॥

आपे पुरखु आपे ही नारी ॥ आपे पासा आपे सारी ॥ आपे पिड़ बाधी जगु खेलै आपे कीमति पाई हे ॥५॥

आपे भवरु फुलु फलु तरवरु ॥ आपे जलु थलु सागरु सरवरु ॥ आपे मछु कछु करणीकरु तेरा रूपु न लखणा जाई हे ॥६॥

आपे दिनसु आपे ही रैणी ॥ आपि पतीजै गुर की बैणी ॥ आदि जुगादि अनाहदि अनदिनु घटि घटि सबदु रजाई हे ॥७॥

आपे रतनु अनूपु अमोलो ॥ आपे परखे पूरा तोलो ॥ आपे किस ही कसि बखसे आपे दे लै भाई हे ॥८॥

आपे धनखु आपे सरबाणा ॥ आपे सुघड़ु सरूपु सिआणा ॥ कहता बकता सुणता सोई आपे बणत बणाई हे ॥९॥

पउणु गुरू पाणी पित जाता ॥ उदर संजोगी धरती माता ॥ रैणि दिनसु दुइ दाई दाइआ जगु खेलै खेलाई हे ॥१०॥

आपे मछुली आपे जाला ॥ आपे गऊ आपे रखवाला ॥ सरब जीआ जगि जोति तुमारी जैसी प्रभि फुरमाई हे ॥११॥

आपे जोगी आपे भोगी ॥ आपे रसीआ परम संजोगी ॥ आपे वेबाणी निरंकारी निरभउ ताड़ी लाई हे ॥१२॥

खाणी बाणी तुझहि समाणी ॥ जो दीसै सभ आवण जाणी ॥ सेई साह सचे वापारी सतिगुरि बूझ बुझाई हे ॥१३॥

सबदु बुझाए सतिगुरु पूरा ॥ सरब कला साचे भरपूरा ॥ अफरिओ वेपरवाहु सदा तू ना तिसु तिलु न तमाई हे ॥१४॥

कालु बिकालु भए देवाने ॥ सबदु सहज रसु अंतरि माने ॥ आपे मुकति त्रिपति वरदाता भगति भाइ मनि भाई हे ॥१५॥

आपि निरालमु गुर गम गिआना ॥ जो दीसै तुझ माहि समाना ॥ नानकु नीचु भिखिआ दरि जाचै मै दीजै नामु वडाई हे ॥१६॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1021) मारू महला १ ॥
आपे धरती धउलु अकासं ॥ आपे साचे गुण परगासं ॥ जती सती संतोखी आपे आपे कार कमाई हे ॥१॥

जिसु करणा सो करि करि वेखै ॥ कोइ न मेटै साचे लेखै ॥ आपे करे कराए आपे आपे दे वडिआई हे ॥२॥

पंच चोर चंचल चितु चालहि ॥ पर घर जोहहि घरु नही भालहि ॥ काइआ नगरु ढहै ढहि ढेरी बिनु सबदै पति जाई हे ॥३॥

गुर ते बूझै त्रिभवणु सूझै ॥ मनसा मारि मनै सिउ लूझै ॥ जो तुधु सेवहि से तुध ही जेहे निरभउ बाल सखाई हे ॥४॥

आपे सुरगु मछु पइआला ॥ आपे जोति सरूपी बाला ॥ जटा बिकट बिकराल सरूपी रूपु न रेखिआ काई हे ॥५॥

बेद कतेबी भेदु न जाता ॥ ना तिसु मात पिता सुत भ्राता ॥ सगले सैल उपाइ समाए अलखु न लखणा जाई हे ॥६॥

करि करि थाकी मीत घनेरे ॥ कोइ न काटै अवगुण मेरे ॥ सुरि नर नाथु साहिबु सभना सिरि भाइ मिलै भउ जाई हे ॥७॥

भूले चूके मारगि पावहि ॥ आपि भुलाइ तूहै समझावहि ॥ बिनु नावै मै अवरु न दीसै नावहु गति मिति पाई हे ॥८॥

गंगा जमुना केल केदारा ॥ कासी कांती पुरी दुआरा ॥ गंगा सागरु बेणी संगमु अठसठि अंकि समाई हे ॥९॥

आपे सिध साधिकु वीचारी ॥ आपे राजनु पंचा कारी ॥ तखति बहै अदली प्रभु आपे भरमु भेदु भउ जाई हे ॥१०॥

आपे काजी आपे मुला ॥ आपि अभुलु न कबहू भुला ॥ आपे मिहर दइआपति दाता ना किसै को बैराई हे ॥११॥

जिसु बखसे तिसु दे वडिआई ॥ सभसै दाता तिलु न तमाई ॥ भरपुरि धारि रहिआ निहकेवलु गुपतु प्रगटु सभ ठाई हे ॥१२॥

किआ सालाही अगम अपारै ॥ साचे सिरजणहार मुरारै ॥ जिस नो नदरि करे तिसु मेले मेलि मिलै मेलाई हे ॥१३॥

ब्रहमा बिसनु महेसु दुआरै ॥ ऊभे सेवहि अलख अपारै ॥ होर केती दरि दीसै बिललादी मै गणत न आवै काई हे ॥१४॥

साची कीरति साची बाणी ॥ होर न दीसै बेद पुराणी ॥ पूंजी साचु सचे गुण गावा मै धर होर न काई हे ॥१५॥

जुगु जुगु साचा है भी होसी ॥ कउणु न मूआ कउणु न मरसी ॥ नानकु नीचु कहै बेनंती दरि देखहु लिव लाई हे ॥१६॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1022) मारू महला १ ॥
दूजी दुरमति अंनी बोली ॥ काम क्रोध की कची चोली ॥ घरि वरु सहजु न जाणै छोहरि बिनु पिर नीद न पाई हे ॥१॥

अंतरि अगनि जलै भड़कारे ॥ मनमुखु तके कुंडा चारे ॥ बिनु सतिगुर सेवे किउ सुखु पाईऐ साचे हाथि वडाई हे ॥२॥

कामु क्रोधु अहंकारु निवारे ॥ तसकर पंच सबदि संघारे ॥ गिआन खड़गु लै मन सिउ लूझै मनसा मनहि समाई हे ॥३॥

मा की रकतु पिता बिदु धारा ॥ मूरति सूरति करि आपारा ॥ जोति दाति जेती सभ तेरी तू करता सभ ठाई हे ॥४॥

तुझ ही कीआ जमण मरणा ॥ गुर ते समझ पड़ी किआ डरणा ॥ तू दइआलु दइआ करि देखहि दुखु दरदु सरीरहु जाई हे ॥५॥

निज घरि बैसि रहे भउ खाइआ ॥ धावत राखे ठाकि रहाइआ ॥ कमल बिगास हरे सर सुभर आतम रामु सखाई हे ॥६॥

मरणु लिखाइ मंडल महि आए ॥ किउ रहीऐ चलणा परथाए ॥ सचा अमरु सचे अमरा पुरि सो सचु मिलै वडाई हे ॥७॥

आपि उपाइआ जगतु सबाइआ ॥ जिनि सिरिआ तिनि धंधै लाइआ ॥ सचै ऊपरि अवर न दीसै साचे कीमति पाई हे ॥८॥

ऐथै गोइलड़ा दिन चारे ॥ खेलु तमासा धुंधूकारे ॥ बाजी खेलि गए बाजीगर जिउ निसि सुपनै भखलाई हे ॥९॥

तिन कउ तखति मिली वडिआई ॥ निरभउ मनि वसिआ लिव लाई ॥ खंडी ब्रहमंडी पाताली पुरीई त्रिभवण ताड़ी लाई हे ॥१०॥

साची नगरी तखतु सचावा ॥ गुरमुखि साचु मिलै सुखु पावा ॥ साचे साचै तखति वडाई हउमै गणत गवाई हे ॥११॥

गणत गणीऐ सहसा जीऐ ॥ किउ सुखु पावै दूऐ तीऐ ॥ निरमलु एकु निरंजनु दाता गुर पूरे ते पति पाई हे ॥१२॥

जुगि जुगि विरली गुरमुखि जाता ॥ साचा रवि रहिआ मनु राता ॥ तिस की ओट गही सुखु पाइआ मनि तनि मैलु न काई हे ॥१३॥

जीभ रसाइणि साचै राती ॥ हरि प्रभु संगी भउ न भराती ॥ स्रवण स्रोत रजे गुरबाणी जोती जोति मिलाई हे ॥१४॥

रखि रखि पैर धरे पउ धरणा ॥ जत कत देखउ तेरी सरणा ॥ दुखु सुखु देहि तूहै मनि भावहि तुझ ही सिउ बणि आई हे ॥१५॥

अंत कालि को बेली नाही ॥ गुरमुखि जाता तुधु सालाही ॥ नानक नामि रते बैरागी निज घरि ताड़ी लाई हे ॥१६॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1023) मारू महला १ ॥
आदि जुगादी अपर अपारे ॥ आदि निरंजन खसम हमारे ॥ साचे जोग जुगति वीचारी साचे ताड़ी लाई हे ॥१॥

केतड़िआ जुग धुंधूकारै ॥ ताड़ी लाई सिरजणहारै ॥ सचु नामु सची वडिआई साचै तखति वडाई हे ॥२॥

सतजुगि सतु संतोखु सरीरा ॥ सति सति वरतै गहिर ग्मभीरा ॥ सचा साहिबु सचु परखै साचै हुकमि चलाई हे ॥३॥

सत संतोखी सतिगुरु पूरा ॥ गुर का सबदु मने सो सूरा ॥ साची दरगह साचु निवासा मानै हुकमु रजाई हे ॥४॥

सतजुगि साचु कहै सभु कोई ॥ सचि वरतै साचा सोई ॥ मनि मुखि साचु भरम भउ भंजनु गुरमुखि साचु सखाई हे ॥५॥

त्रेतै धरम कला इक चूकी ॥ तीनि चरण इक दुबिधा सूकी ॥ गुरमुखि होवै सु साचु वखाणै मनमुखि पचै अवाई हे ॥६॥

मनमुखि कदे न दरगह सीझै ॥ बिनु सबदै किउ अंतरु रीझै ॥ बाधे आवहि बाधे जावहि सोझी बूझ न काई हे ॥७॥

दइआ दुआपुरि अधी होई ॥ गुरमुखि विरला चीनै कोई ॥ दुइ पग धरमु धरे धरणीधर गुरमुखि साचु तिथाई हे ॥८॥

राजे धरमु करहि परथाए ॥ आसा बंधे दानु कराए ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई थाके करम कमाई हे ॥९॥

करम धरम करि मुकति मंगाही ॥ मुकति पदारथु सबदि सलाही ॥ बिनु गुर सबदै मुकति न होई परपंचु करि भरमाई हे ॥१०॥

माइआ ममता छोडी न जाई ॥ से छूटे सचु कार कमाई ॥ अहिनिसि भगति रते वीचारी ठाकुर सिउ बणि आई हे ॥११॥

इकि जप तप करि करि तीरथ नावहि ॥ जिउ तुधु भावै तिवै चलावहि ॥ हठि निग्रहि अपतीजु न भीजै बिनु हरि गुर किनि पति पाई हे ॥१२॥

कली काल महि इक कल राखी ॥ बिनु गुर पूरे किनै न भाखी ॥ मनमुखि कूड़ु वरतै वरतारा बिनु सतिगुर भरमु न जाई हे ॥१३॥

सतिगुरु वेपरवाहु सिरंदा ॥ ना जम काणि न छंदा बंदा ॥ जो तिसु सेवे सो अबिनासी ना तिसु कालु संताई हे ॥१४॥

गुर महि आपु रखिआ करतारे ॥ गुरमुखि कोटि असंख उधारे ॥ सरब जीआ जगजीवनु दाता निरभउ मैलु न काई हे ॥१५॥

सगले जाचहि गुर भंडारी ॥ आपि निरंजनु अलख अपारी ॥ नानकु साचु कहै प्रभ जाचै मै दीजै साचु रजाई हे ॥१६॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1024) मारू महला १ ॥
साचै मेले सबदि मिलाए ॥ जा तिसु भाणा सहजि समाए ॥ त्रिभवण जोति धरी परमेसरि अवरु न दूजा भाई हे ॥१॥

जिस के चाकर तिस की सेवा ॥ सबदि पतीजै अलख अभेवा ॥ भगता का गुणकारी करता बखसि लए वडिआई हे ॥२॥

देदे तोटि न आवै साचे ॥ लै लै मुकरि पउदे काचे ॥ मूलु न बूझहि साचि न रीझहि दूजै भरमि भुलाई हे ॥३॥

गुरमुखि जागि रहे दिन राती ॥ साचे की लिव गुरमति जाती ॥ मनमुख सोइ रहे से लूटे गुरमुखि साबतु भाई हे ॥४॥

कूड़े आवै कूड़े जावै ॥ कूड़े राती कूड़ु कमावै ॥ सबदि मिले से दरगह पैधे गुरमुखि सुरति समाई हे ॥५॥

कूड़ि मुठी ठगी ठगवाड़ी ॥ जिउ वाड़ी ओजाड़ि उजाड़ी ॥ नाम बिना किछु सादि न लागै हरि बिसरिऐ दुखु पाई हे ॥६॥

भोजनु साचु मिलै आघाई ॥ नाम रतनु साची वडिआई ॥ चीनै आपु पछाणै सोई जोती जोति मिलाई हे ॥७॥

नावहु भुली चोटा खाए ॥ बहुतु सिआणप भरमु न जाए ॥ पचि पचि मुए अचेत न चेतहि अजगरि भारि लदाई हे ॥८॥

बिनु बाद बिरोधहि कोई नाही ॥ मै देखालिहु तिसु सालाही ॥ मनु तनु अरपि मिलै जगजीवनु हरि सिउ बणत बणाई हे ॥९॥

प्रभ की गति मिति कोइ न पावै ॥ जे को वडा कहाइ वडाई खावै ॥ साचे साहिब तोटि न दाती सगली तिनहि उपाई हे ॥१०॥

वडी वडिआई वेपरवाहे ॥ आपि उपाए दानु समाहे ॥ आपि दइआलु दूरि नही दाता मिलिआ सहजि रजाई हे ॥११॥

इकि सोगी इकि रोगि विआपे ॥ जो किछु करे सु आपे आपे ॥ भगति भाउ गुर की मति पूरी अनहदि सबदि लखाई हे ॥१२॥

इकि नागे भूखे भवहि भवाए ॥ इकि हठु करि मरहि न कीमति पाए ॥ गति अविगत की सार न जाणै बूझै सबदु कमाई हे ॥१३॥

इकि तीरथि नावहि अंनु न खावहि ॥ इकि अगनि जलावहि देह खपावहि ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई कितु बिधि पारि लंघाई हे ॥१४॥

गुरमति छोडहि उझड़ि जाई ॥ मनमुखि रामु न जपै अवाई ॥ पचि पचि बूडहि कूड़ु कमावहि कूड़ि कालु बैराई हे ॥१५॥

हुकमे आवै हुकमे जावै ॥ बूझै हुकमु सो साचि समावै ॥ नानक साचु मिलै मनि भावै गुरमुखि कार कमाई हे ॥१६॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1025) मारू महला १ ॥
आपे करता पुरखु बिधाता ॥ जिनि आपे आपि उपाइ पछाता ॥ आपे सतिगुरु आपे सेवकु आपे स्रिसटि उपाई हे ॥१॥

आपे नेड़ै नाही दूरे ॥ बूझहि गुरमुखि से जन पूरे ॥ तिन की संगति अहिनिसि लाहा गुर संगति एह वडाई हे ॥२॥

जुगि जुगि संत भले प्रभ तेरे ॥ हरि गुण गावहि रसन रसेरे ॥ उसतति करहि परहरि दुखु दालदु जिन नाही चिंत पराई हे ॥३॥

ओइ जागत रहहि न सूते दीसहि ॥ संगति कुल तारे साचु परीसहि ॥ कलिमल मैलु नाही ते निरमल ओइ रहहि भगति लिव लाई हे ॥४॥

बूझहु हरि जन सतिगुर बाणी ॥ एहु जोबनु सासु है देह पुराणी ॥ आजु कालि मरि जाईऐ प्राणी हरि जपु जपि रिदै धिआई हे ॥५॥

छोडहु प्राणी कूड़ कबाड़ा ॥ कूड़ु मारे कालु उछाहाड़ा ॥ साकत कूड़ि पचहि मनि हउमै दुहु मारगि पचै पचाई हे ॥६॥

छोडिहु निंदा ताति पराई ॥ पड़ि पड़ि दझहि साति न आई ॥ मिलि सतसंगति नामु सलाहहु आतम रामु सखाई हे ॥७॥

छोडहु काम क्रोधु बुरिआई ॥ हउमै धंधु छोडहु ल्मपटाई ॥ सतिगुर सरणि परहु ता उबरहु इउ तरीऐ भवजलु भाई हे ॥८॥

आगै बिमल नदी अगनि बिखु झेला ॥ तिथै अवरु न कोई जीउ इकेला ॥ भड़ भड़ अगनि सागरु दे लहरी पड़ि दझहि मनमुख ताई हे ॥९॥

गुर पहि मुकति दानु दे भाणै ॥ जिनि पाइआ सोई बिधि जाणै ॥ जिन पाइआ तिन पूछहु भाई सुखु सतिगुर सेव कमाई हे ॥१०॥

गुर बिनु उरझि मरहि बेकारा ॥ जमु सिरि मारे करे खुआरा ॥ बाधे मुकति नाही नर निंदक डूबहि निंद पराई हे ॥११॥

बोलहु साचु पछाणहु अंदरि ॥ दूरि नाही देखहु करि नंदरि ॥ बिघनु नाही गुरमुखि तरु तारी इउ भवजलु पारि लंघाई हे ॥१२॥

देही अंदरि नामु निवासी ॥ आपे करता है अबिनासी ॥ ना जीउ मरै न मारिआ जाई करि देखै सबदि रजाई हे ॥१३॥

ओहु निरमलु है नाही अंधिआरा ॥ ओहु आपे तखति बहै सचिआरा ॥ साकत कूड़े बंधि भवाईअहि मरि जनमहि आई जाई हे ॥१४॥

गुर के सेवक सतिगुर पिआरे ॥ ओइ बैसहि तखति सु सबदु वीचारे ॥ ततु लहहि अंतरगति जाणहि सतसंगति साचु वडाई हे ॥१५॥

आपि तरै जनु पितरा तारे ॥ संगति मुकति सु पारि उतारे ॥ नानकु तिस का लाला गोला जिनि गुरमुखि हरि लिव लाई हे ॥१६॥६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1026) मारू महला १ ॥
केते जुग वरते गुबारै ॥ ताड़ी लाई अपर अपारै ॥ धुंधूकारि निरालमु बैठा ना तदि धंधु पसारा हे ॥१॥

जुग छतीह तिनै वरताए ॥ जिउ तिसु भाणा तिवै चलाए ॥ तिसहि सरीकु न दीसै कोई आपे अपर अपारा हे ॥२॥

गुपते बूझहु जुग चतुआरे ॥ घटि घटि वरतै उदर मझारे ॥ जुगु जुगु एका एकी वरतै कोई बूझै गुर वीचारा हे ॥३॥

बिंदु रकतु मिलि पिंडु सरीआ ॥ पउणु पाणी अगनी मिलि जीआ ॥ आपे चोज करे रंग महली होर माइआ मोह पसारा हे ॥४॥

गरभ कुंडल महि उरध धिआनी ॥ आपे जाणै अंतरजामी ॥ सासि सासि सचु नामु समाले अंतरि उदर मझारा हे ॥५॥

चारि पदारथ लै जगि आइआ ॥ सिव सकती घरि वासा पाइआ ॥ एकु विसारे ता पिड़ हारे अंधुलै नामु विसारा हे ॥६॥

बालकु मरै बालक की लीला ॥ कहि कहि रोवहि बालु रंगीला ॥ जिस का सा सो तिन ही लीआ भूला रोवणहारा हे ॥७॥

भरि जोबनि मरि जाहि कि कीजै ॥ मेरा मेरा करि रोवीजै ॥ माइआ कारणि रोइ विगूचहि ध्रिगु जीवणु संसारा हे ॥८॥

काली हू फुनि धउले आए ॥ विणु नावै गथु गइआ गवाए ॥ दुरमति अंधुला बिनसि बिनासै मूठे रोइ पूकारा हे ॥९॥

आपु वीचारि न रोवै कोई ॥ सतिगुरु मिलै त सोझी होई ॥ बिनु गुर बजर कपाट न खूलहि सबदि मिलै निसतारा हे ॥१०॥

बिरधि भइआ तनु छीजै देही ॥ रामु न जपई अंति सनेही ॥ नामु विसारि चलै मुहि कालै दरगह झूठु खुआरा हे ॥११॥

नामु विसारि चलै कूड़िआरो ॥ आवत जात पड़ै सिरि छारो ॥ साहुरड़ै घरि वासु न पाए पेईअड़ै सिरि मारा हे ॥१२॥

खाजै पैझै रली करीजै ॥ बिनु अभ भगती बादि मरीजै ॥ सर अपसर की सार न जाणै जमु मारे किआ चारा हे ॥१३॥

परविरती नरविरति पछाणै ॥ गुर कै संगि सबदि घरु जाणै ॥ किस ही मंदा आखि न चलै सचि खरा सचिआरा हे ॥१४॥

साच बिना दरि सिझै न कोई ॥ साच सबदि पैझै पति होई ॥ आपे बखसि लए तिसु भावै हउमै गरबु निवारा हे ॥१५॥

गुर किरपा ते हुकमु पछाणै ॥ जुगह जुगंतर की बिधि जाणै ॥ नानक नामु जपहु तरु तारी सचु तारे तारणहारा हे ॥१६॥१॥७॥


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