राग कानड़ा - बाणी शब्द, Raag Kanrha - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू रामदास जी -- SGGS 1294) रागु कानड़ा चउपदे महला ४ घरु १
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
मेरा मनु साध जनां मिलि हरिआ ॥ हउ बलि बलि बलि बलि साध जनां कउ मिलि संगति पारि उतरिआ ॥१॥ रहाउ ॥

हरि हरि क्रिपा करहु प्रभ अपनी हम साध जनां पग परिआ ॥ धनु धनु साध जिन हरि प्रभु जानिआ मिलि साधू पतित उधरिआ ॥१॥

मनूआ चलै चलै बहु बहु बिधि मिलि साधू वसगति करिआ ॥ जिउं जल तंतु पसारिओ बधकि ग्रसि मीना वसगति खरिआ ॥२॥

हरि के संत संत भल नीके मिलि संत जना मलु लहीआ ॥ हउमै दुरतु गइआ सभु नीकरि जिउ साबुनि कापरु करिआ ॥३॥

मसतकि लिलाटि लिखिआ धुरि ठाकुरि गुर सतिगुर चरन उर धरिआ ॥ सभु दालदु दूख भंज प्रभु पाइआ जन नानक नामि उधरिआ ॥४॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1294) कानड़ा महला ४ ॥
मेरा मनु संत जना पग रेन ॥ हरि हरि कथा सुनी मिलि संगति मनु कोरा हरि रंगि भेन ॥१॥ रहाउ ॥

हम अचित अचेत न जानहि गति मिति गुरि कीए सुचित चितेन ॥ प्रभि दीन दइआलि कीओ अंगीक्रितु मनि हरि हरि नामु जपेन ॥१॥

हरि के संत मिलहि मन प्रीतम कटि देवउ हीअरा तेन ॥ हरि के संत मिले हरि मिलिआ हम कीए पतित पवेन ॥२॥

हरि के जन ऊतम जगि कहीअहि जिन मिलिआ पाथर सेन ॥ जन की महिमा बरनि न साकउ ओइ ऊतम हरि हरि केन ॥३॥

तुम्ह हरि साह वडे प्रभ सुआमी हम वणजारे रासि देन ॥ जन नानक कउ दइआ प्रभ धारहु लदि वाखरु हरि हरि लेन ॥४॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1295) कानड़ा महला ४ ॥
जपि मन राम नाम परगास ॥ हरि के संत मिलि प्रीति लगानी विचे गिरह उदास ॥१॥ रहाउ ॥

हम हरि हिरदै जपिओ नामु नरहरि प्रभि क्रिपा करी किरपास ॥ अनदिनु अनदु भइआ मनु बिगसिआ उदम भए मिलन की आस ॥१॥

हम हरि सुआमी प्रीति लगाई जितने सास लीए हम ग्रास ॥ किलबिख दहन भए खिन अंतरि तूटि गए माइआ के फास ॥२॥

किआ हम किरम किआ करम कमावहि मूरख मुगध रखे प्रभ तास ॥ अवगनीआरे पाथर भारे सतसंगति मिलि तरे तरास ॥३॥

जेती स्रिसटि करी जगदीसरि ते सभि ऊच हम नीच बिखिआस ॥ हमरे अवगुन संगि गुर मेटे जन नानक मेलि लीए प्रभ पास ॥४॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1295) कानड़ा महला ४ ॥
मेरै मनि राम नामु जपिओ गुर वाक ॥ हरि हरि क्रिपा करी जगदीसरि दुरमति दूजा भाउ गइओ सभ झाक ॥१॥ रहाउ ॥

नाना रूप रंग हरि केरे घटि घटि रामु रविओ गुपलाक ॥ हरि के संत मिले हरि प्रगटे उघरि गए बिखिआ के ताक ॥१॥

संत जना की बहुतु बहु सोभा जिन उरि धारिओ हरि रसिक रसाक ॥ हरि के संत मिले हरि मिलिआ जैसे गऊ देखि बछराक ॥२॥

हरि के संत जना महि हरि हरि ते जन ऊतम जनक जनाक ॥ तिन हरि हिरदै बासु बसानी छूटि गई मुसकी मुसकाक ॥३॥

तुमरे जन तुम्ह ही प्रभ कीए हरि राखि लेहु आपन अपनाक ॥ जन नानक के सखा हरि भाई मात पिता बंधप हरि साक ॥४॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1295) कानड़ा महला ४ ॥
मेरे मन हरि हरि राम नामु जपि चीति ॥ हरि हरि वसतु माइआ गड़्हि वेड़्ही गुर कै सबदि लीओ गड़ु जीति ॥१॥ रहाउ ॥

मिथिआ भरमि भरमि बहु भ्रमिआ लुबधो पुत्र कलत्र मोह प्रीति ॥ जैसे तरवर की तुछ छाइआ खिन महि बिनसि जाइ देह भीति ॥१॥

हमरे प्रान प्रीतम जन ऊतम जिन मिलिआ मनि होइ प्रतीति ॥ परचै रामु रविआ घट अंतरि असथिरु रामु रविआ रंगि प्रीति ॥२॥

हरि के संत संत जन नीके जिन मिलिआं मनु रंगि रंगीति ॥ हरि रंगु लहै न उतरै कबहू हरि हरि जाइ मिलै हरि प्रीति ॥३॥

हम बहु पाप कीए अपराधी गुरि काटे कटित कटीति ॥ हरि हरि नामु दीओ मुखि अउखधु जन नानक पतित पुनीति ॥४॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1296) कानड़ा महला ४ ॥
जपि मन राम नाम जगंनाथ ॥ घूमन घेर परे बिखु बिखिआ सतिगुर काढि लीए दे हाथ ॥१॥ रहाउ ॥

सुआमी अभै निरंजन नरहरि तुम्ह राखि लेहु हम पापी पाथ ॥ काम क्रोध बिखिआ लोभि लुभते कासट लोह तरे संगि साथ ॥१॥

तुम्ह वड पुरख बड अगम अगोचर हम ढूढि रहे पाई नही हाथ ॥ तू परै परै अपर्मपरु सुआमी तू आपन जानहि आपि जगंनाथ ॥२॥

अद्रिसटु अगोचर नामु धिआए सतसंगति मिलि साधू पाथ ॥ हरि हरि कथा सुनी मिलि संगति हरि हरि जपिओ अकथ कथ काथ ॥३॥

हमरे प्रभ जगदीस गुसाई हम राखि लेहु जगंनाथ ॥ जन नानकु दासु दास दासन को प्रभ करहु क्रिपा राखहु जन साथ ॥४॥६॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1296) कानड़ा महला ४ पड़ताल घरु ५ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मन जापहु राम गुपाल ॥ हरि रतन जवेहर लाल ॥ हरि गुरमुखि घड़ि टकसाल ॥ हरि हो हो किरपाल ॥१॥ रहाउ ॥

तुमरे गुन अगम अगोचर एक जीह किआ कथै बिचारी राम राम राम राम लाल ॥ तुमरी जी अकथ कथा तू तू तू ही जानहि हउ हरि जपि भई निहाल निहाल निहाल ॥१॥

हमरे हरि प्रान सखा सुआमी हरि मीता मेरे मनि तनि जीह हरि हरे हरे राम नाम धनु माल ॥ जा को भागु तिनि लीओ री सुहागु हरि हरि हरे हरे गुन गावै गुरमति हउ बलि बले हउ बलि बले जन नानक हरि जपि भई निहाल निहाल निहाल ॥२॥१॥७॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1296) कानड़ा महला ४ ॥
हरि गुन गावहु जगदीस ॥ एका जीह कीचै लख बीस ॥ जपि हरि हरि सबदि जपीस ॥ हरि हो हो किरपीस ॥१॥ रहाउ ॥

हरि किरपा करि सुआमी हम लाइ हरि सेवा हरि जपि जपे हरि जपि जपे जपु जापउ जगदीस ॥ तुमरे जन रामु जपहि ते ऊतम तिन कउ हउ घुमि घुमे घुमि घुमि जीस ॥१॥

हरि तुम वड वडे वडे वड ऊचे सो करहि जि तुधु भावीस ॥ जन नानक अम्रितु पीआ गुरमती धनु धंनु धनु धंनु धंनु गुरू साबीस ॥२॥२॥८॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1297) कानड़ा महला ४ ॥
भजु रामो मनि राम ॥ जिसु रूप न रेख वडाम ॥ सतसंगति मिलु भजु राम ॥ बड हो हो भाग मथाम ॥१॥ रहाउ ॥

जितु ग्रिहि मंदरि हरि होतु जासु तितु घरि आनदो आनंदु भजु राम राम राम ॥ राम नाम गुन गावहु हरि प्रीतम उपदेसि गुरू गुर सतिगुरा सुखु होतु हरि हरे हरि हरे हरे भजु राम राम राम ॥१॥

सभ सिसटि धार हरि तुम किरपाल करता सभु तू तू तू राम राम राम ॥ जन नानको सरणागती देहु गुरमती भजु राम राम राम ॥२॥३॥९॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1297) कानड़ा महला ४ ॥
सतिगुर चाटउ पग चाट ॥ जितु मिलि हरि पाधर बाट ॥ भजु हरि रसु रस हरि गाट ॥ हरि हो हो लिखे लिलाट ॥१॥ रहाउ ॥

खट करम किरिआ करि बहु बहु बिसथार सिध साधिक जोगीआ करि जट जटा जट जाट ॥ करि भेख न पाईऐ हरि ब्रहम जोगु हरि पाईऐ सतसंगती उपदेसि गुरू गुर संत जना खोलि खोलि कपाट ॥१॥

तू अपर्मपरु सुआमी अति अगाहु तू भरपुरि रहिआ जल थले हरि इकु इको इक एकै हरि थाट ॥ तू जाणहि सभ बिधि बूझहि आपे जन नानक के प्रभ घटि घटे घटि घटे घटि हरि घाट ॥२॥४॥१०॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1297) कानड़ा महला ४ ॥
जपि मन गोबिद माधो ॥ हरि हरि अगम अगाधो ॥ मति गुरमति हरि प्रभु लाधो ॥ धुरि हो हो लिखे लिलाधो ॥१॥ रहाउ ॥

बिखु माइआ संचि बहु चितै बिकार सुखु पाईऐ हरि भजु संत संत संगती मिलि सतिगुरू गुरु साधो ॥ जिउ छुहि पारस मनूर भए कंचन तिउ पतित जन मिलि संगती सुध होवत गुरमती सुध हाधो ॥१॥

जिउ कासट संगि लोहा बहु तरता तिउ पापी संगि तरे साध साध संगती गुर सतिगुरू गुर साधो ॥ चारि बरन चारि आस्रम है कोई मिलै गुरू गुर नानक सो आपि तरै कुल सगल तराधो ॥२॥५॥११॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1297) कानड़ा महला ४ ॥
हरि जसु गावहु भगवान ॥ जसु गावत पाप लहान ॥ मति गुरमति सुनि जसु कान ॥ हरि हो हो किरपान ॥१॥ रहाउ ॥

तेरे जन धिआवहि इक मनि इक चिति ते साधू सुख पावहि जपि हरि हरि नामु निधान ॥ उसतति करहि प्रभ तेरीआ मिलि साधू साध जना गुर सतिगुरू भगवान ॥१॥

जिन कै हिरदै तू सुआमी ते सुख फल पावहि ते तरे भव सिंधु ते भगत हरि जान ॥ तिन सेवा हम लाइ हरे हम लाइ हरे जन नानक के हरि तू तू तू तू तू भगवान ॥२॥६॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गाईऐ गुण गोपाल क्रिपा निधि ॥ दुख बिदारन सुखदाते सतिगुर जा कउ भेटत होइ सगल सिधि ॥१॥ रहाउ ॥

सिमरत नामु मनहि साधारै ॥ कोटि पराधी खिन महि तारै ॥१॥

जा कउ चीति आवै गुरु अपना ॥ ता कउ दूखु नही तिलु सुपना ॥२॥

जा कउ सतिगुरु अपना राखै ॥ सो जनु हरि रसु रसना चाखै ॥३॥

कहु नानक गुरि कीनी मइआ ॥ हलति पलति मुख ऊजल भइआ ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
आराधउ तुझहि सुआमी अपने ॥ ऊठत बैठत सोवत जागत सासि सासि सासि हरि जपने ॥१॥ रहाउ ॥

ता कै हिरदै बसिओ नामु ॥ जा कउ सुआमी कीनो दानु ॥१॥

ता कै हिरदै आई सांति ॥ ठाकुर भेटे गुर बचनांति ॥२॥

सरब कला सोई परबीन ॥ नाम मंत्रु जा कउ गुरि दीन ॥३॥

कहु नानक ता कै बलि जाउ ॥ कलिजुग महि पाइआ जिनि नाउ ॥४॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
कीरति प्रभ की गाउ मेरी रसनां ॥ अनिक बार करि बंदन संतन ऊहां चरन गोबिंद जी के बसना ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक भांति करि दुआरु न पावउ ॥ होइ क्रिपालु त हरि हरि धिआवउ ॥१॥

कोटि करम करि देह न सोधा ॥ साधसंगति महि मनु परबोधा ॥२॥

त्रिसन न बूझी बहु रंग माइआ ॥ नामु लैत सरब सुख पाइआ ॥३॥

पारब्रहम जब भए दइआल ॥ कहु नानक तउ छूटे जंजाल ॥४॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
ऐसी मांगु गोबिद ते ॥ टहल संतन की संगु साधू का हरि नामां जपि परम गते ॥१॥ रहाउ ॥

पूजा चरना ठाकुर सरना ॥ सोई कुसलु जु प्रभ जीउ करना ॥१॥

सफल होत इह दुरलभ देही ॥ जा कउ सतिगुरु मइआ करेही ॥२॥

अगिआन भरमु बिनसै दुख डेरा ॥ जा कै ह्रिदै बसहि गुर पैरा ॥३॥

साधसंगि रंगि प्रभु धिआइआ ॥ कहु नानक तिनि पूरा पाइआ ॥४॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
भगति भगतन हूं बनि आई ॥ तन मन गलत भए ठाकुर सिउ आपन लीए मिलाई ॥१॥ रहाउ ॥

गावनहारी गावै गीत ॥ ते उधरे बसे जिह चीत ॥१॥

पेखे बिंजन परोसनहारै ॥ जिह भोजनु कीनो ते त्रिपतारै ॥२॥

अनिक स्वांग काछे भेखधारी ॥ जैसो सा तैसो द्रिसटारी ॥३॥

कहन कहावन सगल जंजार ॥ नानक दास सचु करणी सार ॥४॥५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
तेरो जनु हरि जसु सुनत उमाहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

मनहि प्रगासु पेखि प्रभ की सोभा जत कत पेखउ आहिओ ॥१॥

सभ ते परै परै ते ऊचा गहिर ग्मभीर अथाहिओ ॥२॥

ओति पोति मिलिओ भगतन कउ जन सिउ परदा लाहिओ ॥३॥

गुर प्रसादि गावै गुण नानक सहज समाधि समाहिओ ॥४॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
संतन पहि आपि उधारन आइओ ॥१॥ रहाउ ॥

दरसन भेटत होत पुनीता हरि हरि मंत्रु द्रिड़ाइओ ॥१॥

काटे रोग भए मन निरमल हरि हरि अउखधु खाइओ ॥२॥

असथित भए बसे सुख थाना बहुरि न कतहू धाइओ ॥३॥

संत प्रसादि तरे कुल लोगा नानक लिपत न माइओ ॥४॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
बिसरि गई सभ ताति पराई ॥ जब ते साधसंगति मोहि पाई ॥१॥ रहाउ ॥

ना को बैरी नही बिगाना सगल संगि हम कउ बनि आई ॥१॥

जो प्रभ कीनो सो भल मानिओ एह सुमति साधू ते पाई ॥२॥

सभ महि रवि रहिआ प्रभु एकै पेखि पेखि नानक बिगसाई ॥३॥८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
ठाकुर जीउ तुहारो परना ॥ मानु महतु तुम्हारै ऊपरि तुम्हरी ओट तुम्हारी सरना ॥१॥ रहाउ ॥

तुम्हरी आस भरोसा तुम्हरा तुमरा नामु रिदै लै धरना ॥ तुमरो बलु तुम संगि सुहेले जो जो कहहु सोई सोई करना ॥१॥

तुमरी दइआ मइआ सुखु पावउ होहु क्रिपाल त भउजलु तरना ॥ अभै दानु नामु हरि पाइओ सिरु डारिओ नानक संत चरना ॥२॥९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साध सरनि चरन चितु लाइआ ॥ सुपन की बात सुनी पेखी सुपना नाम मंत्रु सतिगुरू द्रिड़ाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

नह त्रिपतानो राज जोबनि धनि बहुरि बहुरि फिरि धाइआ ॥ सुखु पाइआ त्रिसना सभ बुझी है सांति पाई गुन गाइआ ॥१॥

बिनु बूझे पसू की निआई भ्रमि मोहि बिआपिओ माइआ ॥ साधसंगि जम जेवरी काटी नानक सहजि समाइआ ॥२॥१०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
हरि के चरन हिरदै गाइ ॥ सीतला सुख सांति मूरति सिमरि सिमरि नित धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

सगल आस होत पूरन कोटि जनम दुखु जाइ ॥१॥

पुंन दान अनेक किरिआ साधू संगि समाइ ॥ ताप संताप मिटे नानक बाहुड़ि कालु न खाइ ॥२॥११॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कथीऐ संतसंगि प्रभ गिआनु ॥ पूरन परम जोति परमेसुर सिमरत पाईऐ मानु ॥१॥ रहाउ ॥

आवत जात रहे स्रम नासे सिमरत साधू संगि ॥ पतित पुनीत होहि खिन भीतरि पारब्रहम कै रंगि ॥१॥

जो जो कथै सुनै हरि कीरतनु ता की दुरमति नास ॥ सगल मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आस ॥२॥१॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साधसंगति निधि हरि को नाम ॥ संगि सहाई जीअ कै काम ॥१॥ रहाउ ॥

संत रेनु निति मजनु करै ॥ जनम जनम के किलबिख हरै ॥१॥

संत जना की ऊची बानी ॥ सिमरि सिमरि तरे नानक प्रानी ॥२॥२॥१३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साधू हरि हरे गुन गाइ ॥ मान तनु धनु प्रान प्रभ के सिमरत दुखु जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

ईत ऊत कहा लोभावहि एक सिउ मनु लाइ ॥१॥

महा पवित्र संत आसनु मिलि संगि गोबिदु धिआइ ॥२॥

सगल तिआगि सरनि आइओ नानक लेहु मिलाइ ॥३॥३॥१४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
पेखि पेखि बिगसाउ साजन प्रभु आपना इकांत ॥१॥ रहाउ ॥

आनदा सुख सहज मूरति तिसु आन नाही भांति ॥१॥

सिमरत इक बार हरि हरि मिटि कोटि कसमल जांति ॥२॥

गुण रमंत दूख नासहि रिद भइअंत सांति ॥३॥

अम्रिता रसु पीउ रसना नानक हरि रंगि रात ॥४॥४॥१५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
साजना संत आउ मेरै ॥१॥ रहाउ ॥

आनदा गुन गाइ मंगल कसमला मिटि जाहि परेरै ॥१॥

संत चरन धरउ माथै चांदना ग्रिहि होइ अंधेरै ॥२॥

संत प्रसादि कमलु बिगसै गोबिंद भजउ पेखि नेरै ॥३॥

प्रभ क्रिपा ते संत पाए वारि वारि नानक उह बेरै ॥४॥५॥१६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
चरन सरन गोपाल तेरी ॥ मोह मान धोह भरम राखि लीजै काटि बेरी ॥१॥ रहाउ ॥

बूडत संसार सागर ॥ उधरे हरि सिमरि रतनागर ॥१॥

सीतला हरि नामु तेरा ॥ पूरनो ठाकुर प्रभु मेरा ॥२॥

दीन दरद निवारि तारन ॥ हरि क्रिपा निधि पतित उधारन ॥३॥

कोटि जनम दूख करि पाइओ ॥ सुखी नानक गुरि नामु द्रिड़ाइओ ॥४॥६॥१७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
धनि उह प्रीति चरन संगि लागी ॥ कोटि जाप ताप सुख पाए आइ मिले पूरन बडभागी ॥१॥ रहाउ ॥

मोहि अनाथु दासु जनु तेरा अवर ओट सगली मोहि तिआगी ॥ भोर भरम काटे प्रभ सिमरत गिआन अंजन मिलि सोवत जागी ॥१॥

तू अथाहु अति बडो सुआमी क्रिपा सिंधु पूरन रतनागी ॥ नानकु जाचकु हरि हरि नामु मांगै मसतकु आनि धरिओ प्रभ पागी ॥२॥७॥१८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
कुचिल कठोर कपट कामी ॥ जिउ जानहि तिउ तारि सुआमी ॥१॥ रहाउ ॥

तू समरथु सरनि जोगु तू राखहि अपनी कल धारि ॥१॥

जाप ताप नेम सुचि संजम नाही इन बिधे छुटकार ॥ गरत घोर अंध ते काढहु प्रभ नानक नदरि निहारि ॥२॥८॥१९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
नाराइन नरपति नमसकारै ॥ ऐसे गुर कउ बलि बलि जाईऐ आपि मुकतु मोहि तारै ॥१॥ रहाउ ॥

कवन कवन कवन गुन कहीऐ अंतु नही कछु पारै ॥ लाख लाख लाख कई कोरै को है ऐसो बीचारै ॥१॥

बिसम बिसम बिसम ही भई है लाल गुलाल रंगारै ॥ कहु नानक संतन रसु आई है जिउ चाखि गूंगा मुसकारै ॥२॥१॥२०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
न जानी संतन प्रभ बिनु आन ॥ ऊच नीच सभ पेखि समानो मुखि बकनो मनि मान ॥१॥ रहाउ ॥

घटि घटि पूरि रहे सुख सागर भै भंजन मेरे प्रान ॥ मनहि प्रगासु भइओ भ्रमु नासिओ मंत्रु दीओ गुर कान ॥१॥

करत रहे क्रतग्य करुणा मै अंतरजामी िग्यान ॥ आठ पहर नानक जसु गावै मांगन कउ हरि दान ॥२॥२॥२१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
कहन कहावन कउ कई केतै ॥ ऐसो जनु बिरलो है सेवकु जो तत जोग कउ बेतै ॥१॥ रहाउ ॥

दुखु नाही सभु सुखु ही है रे एकै एकी नेतै ॥ बुरा नही सभु भला ही है रे हार नही सभ जेतै ॥१॥

सोगु नाही सदा हरखी है रे छोडि नाही किछु लेतै ॥ कहु नानक जनु हरि हरि हरि है कत आवै कत रमतै ॥२॥३॥२२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
हीए को प्रीतमु बिसरि न जाइ ॥ तन मन गलत भए तिह संगे मोहनी मोहि रही मोरी माइ ॥१॥ रहाउ ॥

जै जै पहि कहउ ब्रिथा हउ अपुनी तेऊ तेऊ गहे रहे अटकाइ ॥ अनिक भांति की एकै जाली ता की गंठि नही छोराइ ॥१॥

फिरत फिरत नानक दासु आइओ संतन ही सरनाइ ॥ काटे अगिआन भरम मोह माइआ लीओ कंठि लगाइ ॥२॥४॥२३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
आनद रंग बिनोद हमारै ॥ नामो गावनु नामु धिआवनु नामु हमारे प्रान अधारै ॥१॥ रहाउ ॥

नामो गिआनु नामु इसनाना हरि नामु हमारे कारज सवारै ॥ हरि नामो सोभा नामु बडाई भउजलु बिखमु नामु हरि तारै ॥१॥

अगम पदारथ लाल अमोला भइओ परापति गुर चरनारै ॥ कहु नानक प्रभ भए क्रिपाला मगन भए हीअरै दरसारै ॥२॥५॥२४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
साजन मीत सुआमी नेरो ॥ पेखत सुनत सभन कै संगे थोरै काज बुरो कह फेरो ॥१॥ रहाउ ॥

नाम बिना जेतो लपटाइओ कछू नही नाही कछु तेरो ॥ आगै द्रिसटि आवत सभ परगट ईहा मोहिओ भरम अंधेरो ॥१॥

अटकिओ सुत बनिता संग माइआ देवनहारु दातारु बिसेरो ॥ कहु नानक एकै भारोसउ बंधन काटनहारु गुरु मेरो ॥२॥६॥२५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
बिखै दलु संतनि तुम्हरै गाहिओ ॥ तुमरी टेक भरोसा ठाकुर सरनि तुम्हारी आहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

जनम जनम के महा पराछत दरसनु भेटि मिटाहिओ ॥ भइओ प्रगासु अनद उजीआरा सहजि समाधि समाहिओ ॥१॥

कउनु कहै तुम ते कछु नाही तुम समरथ अथाहिओ ॥ क्रिपा निधान रंग रूप रस नामु नानक लै लाहिओ ॥२॥७॥२६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
बूडत प्रानी हरि जपि धीरै ॥ बिनसै मोहु भरमु दुखु पीरै ॥१॥ रहाउ ॥

सिमरउ दिनु रैनि गुर के चरना ॥ जत कत पेखउ तुमरी सरना ॥१॥

संत प्रसादि हरि के गुन गाइआ ॥ गुर भेटत नानक सुखु पाइआ ॥२॥८॥२७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
सिमरत नामु मनहि सुखु पाईऐ ॥ साध जना मिलि हरि जसु गाईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

करि किरपा प्रभ रिदै बसेरो ॥ चरन संतन कै माथा मेरो ॥१॥

पारब्रहम कउ सिमरहु मनां ॥ गुरमुखि नानक हरि जसु सुनां ॥२॥९॥२८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
मेरे मन प्रीति चरन प्रभ परसन ॥ रसना हरि हरि भोजनि त्रिपतानी अखीअन कउ संतोखु प्रभ दरसन ॥१॥ रहाउ ॥

करननि पूरि रहिओ जसु प्रीतम कलमल दोख सगल मल हरसन ॥ पावन धावन सुआमी सुख पंथा अंग संग काइआ संत सरसन ॥१॥

सरनि गही पूरन अबिनासी आन उपाव थकित नही करसन ॥ करु गहि लीए नानक जन अपने अंध घोर सागर नही मरसन ॥२॥१०॥२९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
कुहकत कपट खपट खल गरजत मरजत मीचु अनिक बरीआ ॥१॥ रहाउ ॥

अहं मत अन रत कुमित हित प्रीतम पेखत भ्रमत लाख गरीआ ॥१॥

अनित बिउहार अचार बिधि हीनत मम मद मात कोप जरीआ ॥ करुण क्रिपाल गोपाल दीन बंधु नानक उधरु सरनि परीआ ॥२॥११॥३०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
जीअ प्रान मान दाता ॥ हरि बिसरते ही हानि ॥१॥ रहाउ ॥

गोबिंद तिआगि आन लागहि अम्रितो डारि भूमि पागहि ॥ बिखै रस सिउ आसकत मूड़े काहे सुख मानि ॥१॥

कामि क्रोधि लोभि बिआपिओ जनम ही की खानि ॥ पतित पावन सरनि आइओ उधरु नानक जानि ॥२॥१२॥३१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ ॥
अविलोकउ राम को मुखारबिंद ॥ खोजत खोजत रतनु पाइओ बिसरी सभ चिंद ॥१॥ रहाउ ॥

चरन कमल रिदै धारि ॥ उतरिआ दुखु मंद ॥१॥

राज धनु परवारु मेरै सरबसो गोबिंद ॥ साधसंगमि लाभु पाइओ नानक फिरि न मरंद ॥२॥१३॥३२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ घरु ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रभ पूजहो नामु अराधि ॥ गुर सतिगुर चरनी लागि ॥ हरि पावहु मनु अगाधि ॥ जगु जीतो हो हो गुर किरपाधि ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक पूजा मै बहु बिधि खोजी सा पूजा जि हरि भावासि ॥ माटी की इह पुतरी जोरी किआ एह करम कमासि ॥ प्रभ बाह पकरि जिसु मारगि पावहु सो तुधु जंत मिलासि ॥१॥

अवर ओट मै कोइ न सूझै इक हरि की ओट मै आस ॥ किआ दीनु करे अरदासि ॥ जउ सभ घटि प्रभू निवास ॥ प्रभ चरनन की मनि पिआस ॥ जन नानक दासु कहीअतु है तुम्हरा हउ बलि बलि सद बलि जास ॥२॥१॥३३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ घरु ६
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जगत उधारन नाम प्रिअ तेरै ॥ नव निधि नामु निधानु हरि केरै ॥ हरि रंग रंग रंग अनूपेरै ॥ काहे रे मन मोहि मगनेरै ॥ नैनहु देखु साध दरसेरै ॥ सो पावै जिसु लिखतु लिलेरै ॥१॥ रहाउ ॥

सेवउ साध संत चरनेरै ॥ बांछउ धूरि पवित्र करेरै ॥ अठसठि मजनु मैलु कटेरै ॥ सासि सासि धिआवहु मुखु नही मोरै ॥ किछु संगि न चालै लाख करोरै ॥ प्रभ जी को नामु अंति पुकरोरै ॥१॥

मनसा मानि एक निरंकेरै ॥ सगल तिआगहु भाउ दूजेरै ॥ कवन कहां हउ गुन प्रिअ तेरै ॥ बरनि न साकउ एक टुलेरै ॥ दरसन पिआस बहुतु मनि मेरै ॥ मिलु नानक देव जगत गुर केरै ॥२॥१॥३४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ ॥
ऐसी कउन बिधे दरसन परसना ॥१॥ रहाउ ॥

आस पिआस सफल मूरति उमगि हीउ तरसना ॥१॥

दीन लीन पिआस मीन संतना हरि संतना ॥ हरि संतना की रेन ॥ हीउ अरपि देन ॥ प्रभ भए है किरपेन ॥ मानु मोहु तिआगि छोडिओ तउ नानक हरि जीउ भेटना ॥२॥२॥३५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ ॥
रंगा रंग रंगन के रंगा ॥ कीट हसत पूरन सभ संगा ॥१॥ रहाउ ॥

बरत नेम तीरथ सहित गंगा ॥ जलु हेवत भूख अरु नंगा ॥ पूजाचार करत मेलंगा ॥ चक्र करम तिलक खाटंगा ॥ दरसनु भेटे बिनु सतसंगा ॥१॥

हठि निग्रहि अति रहत बिटंगा ॥ हउ रोगु बिआपै चुकै न भंगा ॥ काम क्रोध अति त्रिसन जरंगा ॥ सो मुकतु नानक जिसु सतिगुरु चंगा ॥२॥३॥३६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ घरु ७
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तिख बूझि गई गई मिलि साध जना ॥ पंच भागे चोर सहजे सुखैनो हरे गुन गावती गावती गावती दरस पिआरि ॥१॥ रहाउ ॥

जैसी करी प्रभ मो सिउ मो सिउ ऐसी हउ कैसे करउ ॥ हीउ तुम्हारे बलि बले बलि बले बलि गई ॥१॥

पहिले पै संत पाइ धिआइ धिआइ प्रीति लाइ ॥ प्रभ थानु तेरो केहरो जितु जंतन करि बीचारु ॥ अनिक दास कीरति करहि तुहारी ॥ सोई मिलिओ जो भावतो जन नानक ठाकुर रहिओ समाइ ॥ एक तूही तूही तूही ॥२॥१॥३७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ घरु ८
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तिआगीऐ गुमानु मानु पेखता दइआल लाल हां हां मन चरन रेन ॥१॥ रहाउ ॥

हरि संत मंत गुपाल गिआन धिआन ॥१॥

हिरदै गोबिंद गाइ चरन कमल प्रीति लाइ दीन दइआल मोहना ॥ क्रिपाल दइआ मइआ धारि ॥ नानकु मागै नामु दानु ॥ तजि मोहु भरमु सगल अभिमानु ॥२॥१॥३८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ ॥
प्रभ कहन मलन दहन लहन गुर मिले आन नही उपाउ ॥१॥ रहाउ ॥

तटन खटन जटन होमन नाही डंडधार सुआउ ॥१॥

जतन भांतन तपन भ्रमन अनिक कथन कथते नही थाह पाई ठाउ ॥ सोधि सगर सोधना सुखु नानका भजु नाउ ॥२॥२॥३९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1306) कानड़ा महला ५ घरु ९
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
पतित पावनु भगति बछलु भै हरन तारन तरन ॥१॥ रहाउ ॥

नैन तिपते दरसु पेखि जसु तोखि सुनत करन ॥१॥

प्रान नाथ अनाथ दाते दीन गोबिद सरन ॥ आस पूरन दुख बिनासन गही ओट नानक हरि चरन ॥२॥१॥४०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1306) कानड़ा महला ५ ॥
चरन सरन दइआल ठाकुर आन नाही जाइ ॥ पतित पावन बिरदु सुआमी उधरते हरि धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

सैसार गार बिकार सागर पतित मोह मान अंध ॥ बिकल माइआ संगि धंध ॥ करु गहे प्रभ आपि काढहु राखि लेहु गोबिंद राइ ॥१॥

अनाथ नाथ सनाथ संतन कोटि पाप बिनास ॥ मनि दरसनै की पिआस ॥ प्रभ पूरन गुनतास ॥ क्रिपाल दइआल गुपाल नानक हरि रसना गुन गाइ ॥२॥२॥४१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1306) कानड़ा महला ५ ॥
वारि वारउ अनिक डारउ ॥ सुखु प्रिअ सुहाग पलक रात ॥१॥ रहाउ ॥

कनिक मंदर पाट सेज सखी मोहि नाहि इन सिउ तात ॥१॥

मुकत लाल अनिक भोग बिनु नाम नानक हात ॥ रूखो भोजनु भूमि सैन सखी प्रिअ संगि सूखि बिहात ॥२॥३॥४२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1306) कानड़ा महला ५ ॥
अहं तोरो मुखु जोरो ॥ गुरु गुरु करत मनु लोरो ॥ प्रिअ प्रीति पिआरो मोरो ॥१॥ रहाउ ॥

ग्रिहि सेज सुहावी आगनि चैना तोरो री तोरो पंच दूतन सिउ संगु तोरो ॥१॥

आइ न जाइ बसे निज आसनि ऊंध कमल बिगसोरो ॥ छुटकी हउमै सोरो ॥ गाइओ री गाइओ प्रभ नानक गुनी गहेरो ॥२॥४॥४३॥


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