Pt 4 - राग भैरउ - बाणी शब्द, Part 4 - Raag Bhairo - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(भक्त कबीर जी -- SGGS 1162) गंग गुसाइनि गहिर ग्मभीर ॥ जंजीर बांधि करि खरे कबीर ॥१॥

मनु न डिगै तनु काहे कउ डराइ ॥ चरन कमल चितु रहिओ समाइ ॥ रहाउ ॥

गंगा की लहरि मेरी टुटी जंजीर ॥ म्रिगछाला पर बैठे कबीर ॥२॥

कहि कंबीर कोऊ संग न साथ ॥ जल थल राखन है रघुनाथ ॥३॥१०॥१८॥

(भक्त कबीर जी -- SGGS 1162) भैरउ कबीर जीउ असटपदी घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अगम द्रुगम गड़ि रचिओ बास ॥ जा महि जोति करे परगास ॥ बिजुली चमकै होइ अनंदु ॥ जिह पउड़्हे प्रभ बाल गोबिंद ॥१॥

इहु जीउ राम नाम लिव लागै ॥ जरा मरनु छूटै भ्रमु भागै ॥१॥ रहाउ ॥

अबरन बरन सिउ मन ही प्रीति ॥ हउमै गावनि गावहि गीत ॥ अनहद सबद होत झुनकार ॥ जिह पउड़्हे प्रभ स्री गोपाल ॥२॥

खंडल मंडल मंडल मंडा ॥ त्रिअ असथान तीनि त्रिअ खंडा ॥ अगम अगोचरु रहिआ अभ अंत ॥ पारु न पावै को धरनीधर मंत ॥३॥

कदली पुहप धूप परगास ॥ रज पंकज महि लीओ निवास ॥ दुआदस दल अभ अंतरि मंत ॥ जह पउड़े स्री कमला कंत ॥४॥

अरध उरध मुखि लागो कासु ॥ सुंन मंडल महि करि परगासु ॥ ऊहां सूरज नाही चंद ॥ आदि निरंजनु करै अनंद ॥५॥

सो ब्रहमंडि पिंडि सो जानु ॥ मान सरोवरि करि इसनानु ॥ सोहं सो जा कउ है जाप ॥ जा कउ लिपत न होइ पुंन अरु पाप ॥६॥

अबरन बरन घाम नही छाम ॥ अवर न पाईऐ गुर की साम ॥ टारी न टरै आवै न जाइ ॥ सुंन सहज महि रहिओ समाइ ॥७॥

मन मधे जानै जे कोइ ॥ जो बोलै सो आपै होइ ॥ जोति मंत्रि मनि असथिरु करै ॥ कहि कबीर सो प्रानी तरै ॥८॥१॥

(भक्त कबीर जी -- SGGS 1162) कोटि सूर जा कै परगास ॥ कोटि महादेव अरु कबिलास ॥ दुरगा कोटि जा कै मरदनु करै ॥ ब्रहमा कोटि बेद उचरै ॥१॥

जउ जाचउ तउ केवल राम ॥ आन देव सिउ नाही काम ॥१॥ रहाउ ॥

कोटि चंद्रमे करहि चराक ॥ सुर तेतीसउ जेवहि पाक ॥ नव ग्रह कोटि ठाढे दरबार ॥ धरम कोटि जा कै प्रतिहार ॥२॥

पवन कोटि चउबारे फिरहि ॥ बासक कोटि सेज बिसथरहि ॥ समुंद कोटि जा के पानीहार ॥ रोमावलि कोटि अठारह भार ॥३॥

कोटि कमेर भरहि भंडार ॥ कोटिक लखिमी करै सीगार ॥ कोटिक पाप पुंन बहु हिरहि ॥ इंद्र कोटि जा के सेवा करहि ॥४॥

छपन कोटि जा कै प्रतिहार ॥ नगरी नगरी खिअत अपार ॥ लट छूटी वरतै बिकराल ॥ कोटि कला खेलै गोपाल ॥५॥

कोटि जग जा कै दरबार ॥ गंध्रब कोटि करहि जैकार ॥ बिदिआ कोटि सभै गुन कहै ॥ तऊ पारब्रहम का अंतु न लहै ॥६॥

बावन कोटि जा कै रोमावली ॥ रावन सैना जह ते छली ॥ सहस कोटि बहु कहत पुरान ॥ दुरजोधन का मथिआ मानु ॥७॥

कंद्रप कोटि जा कै लवै न धरहि ॥ अंतर अंतरि मनसा हरहि ॥ कहि कबीर सुनि सारिगपान ॥ देहि अभै पदु मांगउ दान ॥८॥२॥१८॥२०॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1163) भैरउ बाणी नामदेउ जीउ की घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रे जिहबा करउ सत खंड ॥ जामि न उचरसि स्री गोबिंद ॥१॥

रंगी ले जिहबा हरि कै नाइ ॥ सुरंग रंगीले हरि हरि धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

मिथिआ जिहबा अवरें काम ॥ निरबाण पदु इकु हरि को नामु ॥२॥

असंख कोटि अन पूजा करी ॥ एक न पूजसि नामै हरी ॥३॥

प्रणवै नामदेउ इहु करणा ॥ अनंत रूप तेरे नाराइणा ॥४॥१॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1163) पर धन पर दारा परहरी ॥ ता कै निकटि बसै नरहरी ॥१॥

जो न भजंते नाराइणा ॥ तिन का मै न करउ दरसना ॥१॥ रहाउ ॥

जिन कै भीतरि है अंतरा ॥ जैसे पसु तैसे ओइ नरा ॥२॥

प्रणवति नामदेउ नाकहि बिना ॥ ना सोहै बतीस लखना ॥३॥२॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1163) दूधु कटोरै गडवै पानी ॥ कपल गाइ नामै दुहि आनी ॥१॥

दूधु पीउ गोबिंदे राइ ॥ दूधु पीउ मेरो मनु पतीआइ ॥ नाही त घर को बापु रिसाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सोइन कटोरी अम्रित भरी ॥ लै नामै हरि आगै धरी ॥२॥

एकु भगतु मेरे हिरदे बसै ॥ नामे देखि नराइनु हसै ॥३॥

दूधु पीआइ भगतु घरि गइआ ॥ नामे हरि का दरसनु भइआ ॥४॥३॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1164) मै बउरी मेरा रामु भतारु ॥ रचि रचि ता कउ करउ सिंगारु ॥१॥

भले निंदउ भले निंदउ भले निंदउ लोगु ॥ तनु मनु राम पिआरे जोगु ॥१॥ रहाउ ॥

बादु बिबादु काहू सिउ न कीजै ॥ रसना राम रसाइनु पीजै ॥२॥

अब जीअ जानि ऐसी बनि आई ॥ मिलउ गुपाल नीसानु बजाई ॥३॥

उसतति निंदा करै नरु कोई ॥ नामे स्रीरंगु भेटल सोई ॥४॥४॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1164) कबहू खीरि खाड घीउ न भावै ॥ कबहू घर घर टूक मगावै ॥ कबहू कूरनु चने बिनावै ॥१॥

जिउ रामु राखै तिउ रहीऐ रे भाई ॥ हरि की महिमा किछु कथनु न जाई ॥१॥ रहाउ ॥

कबहू तुरे तुरंग नचावै ॥ कबहू पाइ पनहीओ न पावै ॥२॥

कबहू खाट सुपेदी सुवावै ॥ कबहू भूमि पैआरु न पावै ॥३॥

भनति नामदेउ इकु नामु निसतारै ॥ जिह गुरु मिलै तिह पारि उतारै ॥४॥५॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1164) हसत खेलत तेरे देहुरे आइआ ॥ भगति करत नामा पकरि उठाइआ ॥१॥

हीनड़ी जाति मेरी जादिम राइआ ॥ छीपे के जनमि काहे कउ आइआ ॥१॥ रहाउ ॥

लै कमली चलिओ पलटाइ ॥ देहुरै पाछै बैठा जाइ ॥२॥

जिउ जिउ नामा हरि गुण उचरै ॥ भगत जनां कउ देहुरा फिरै ॥३॥६॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1164) भैरउ नामदेउ जीउ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जैसी भूखे प्रीति अनाज ॥ त्रिखावंत जल सेती काज ॥ जैसी मूड़ कुट्मब पराइण ॥ ऐसी नामे प्रीति नराइण ॥१॥

नामे प्रीति नाराइण लागी ॥ सहज सुभाइ भइओ बैरागी ॥१॥ रहाउ ॥

जैसी पर पुरखा रत नारी ॥ लोभी नरु धन का हितकारी ॥ कामी पुरख कामनी पिआरी ॥ ऐसी नामे प्रीति मुरारी ॥२॥

साई प्रीति जि आपे लाए ॥ गुर परसादी दुबिधा जाए ॥ कबहु न तूटसि रहिआ समाइ ॥ नामे चितु लाइआ सचि नाइ ॥३॥

जैसी प्रीति बारिक अरु माता ॥ ऐसा हरि सेती मनु राता ॥ प्रणवै नामदेउ लागी प्रीति ॥ गोबिदु बसै हमारै चीति ॥४॥१॥७॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1164) घर की नारि तिआगै अंधा ॥ पर नारी सिउ घालै धंधा ॥ जैसे सि्मबलु देखि सूआ बिगसाना ॥ अंत की बार मूआ लपटाना ॥१॥

पापी का घरु अगने माहि ॥ जलत रहै मिटवै कब नाहि ॥१॥ रहाउ ॥

हरि की भगति न देखै जाइ ॥ मारगु छोडि अमारगि पाइ ॥ मूलहु भूला आवै जाइ ॥ अम्रितु डारि लादि बिखु खाइ ॥२॥

जिउ बेस्वा के परै अखारा ॥ कापरु पहिरि करहि सींगारा ॥ पूरे ताल निहाले सास ॥ वा के गले जम का है फास ॥३॥

जा के मसतकि लिखिओ करमा ॥ सो भजि परि है गुर की सरना ॥ कहत नामदेउ इहु बीचारु ॥ इन बिधि संतहु उतरहु पारि ॥४॥२॥८॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1165) संडा मरका जाइ पुकारे ॥ पड़ै नही हम ही पचि हारे ॥ रामु कहै कर ताल बजावै चटीआ सभै बिगारे ॥१॥

राम नामा जपिबो करै ॥ हिरदै हरि जी को सिमरनु धरै ॥१॥ रहाउ ॥

बसुधा बसि कीनी सभ राजे बिनती करै पटरानी ॥ पूतु प्रहिलादु कहिआ नही मानै तिनि तउ अउरै ठानी ॥२॥

दुसट सभा मिलि मंतर उपाइआ करसह अउध घनेरी ॥ गिरि तर जल जुआला भै राखिओ राजा रामि माइआ फेरी ॥३॥

काढि खड़गु कालु भै कोपिओ मोहि बताउ जु तुहि राखै ॥ पीत पीतांबर त्रिभवण धणी थ्मभ माहि हरि भाखै ॥४॥

हरनाखसु जिनि नखह बिदारिओ सुरि नर कीए सनाथा ॥ कहि नामदेउ हम नरहरि धिआवह रामु अभै पद दाता ॥५॥३॥९॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1165) सुलतानु पूछै सुनु बे नामा ॥ देखउ राम तुम्हारे कामा ॥१॥

नामा सुलताने बाधिला ॥ देखउ तेरा हरि बीठुला ॥१॥ रहाउ ॥

बिसमिलि गऊ देहु जीवाइ ॥ नातरु गरदनि मारउ ठांइ ॥२॥

बादिसाह ऐसी किउ होइ ॥ बिसमिलि कीआ न जीवै कोइ ॥३॥

मेरा कीआ कछू न होइ ॥ करि है रामु होइ है सोइ ॥४॥

बादिसाहु चड़्हिओ अहंकारि ॥ गज हसती दीनो चमकारि ॥५॥

रुदनु करै नामे की माइ ॥ छोडि रामु की न भजहि खुदाइ ॥६॥

न हउ तेरा पूंगड़ा न तू मेरी माइ ॥ पिंडु पड़ै तउ हरि गुन गाइ ॥७॥

करै गजिंदु सुंड की चोट ॥ नामा उबरै हरि की ओट ॥८॥

काजी मुलां करहि सलामु ॥ इनि हिंदू मेरा मलिआ मानु ॥९॥

बादिसाह बेनती सुनेहु ॥ नामे सर भरि सोना लेहु ॥१०॥

मालु लेउ तउ दोजकि परउ ॥ दीनु छोडि दुनीआ कउ भरउ ॥११॥

पावहु बेड़ी हाथहु ताल ॥ नामा गावै गुन गोपाल ॥१२॥

गंग जमुन जउ उलटी बहै ॥ तउ नामा हरि करता रहै ॥१३॥

सात घड़ी जब बीती सुणी ॥ अजहु न आइओ त्रिभवण धणी ॥१४॥

पाखंतण बाज बजाइला ॥ गरुड़ चड़्हे गोबिंद आइला ॥१५॥

अपने भगत परि की प्रतिपाल ॥ गरुड़ चड़्हे आए गोपाल ॥१६॥

कहहि त धरणि इकोडी करउ ॥ कहहि त ले करि ऊपरि धरउ ॥१७॥

कहहि त मुई गऊ देउ जीआइ ॥ सभु कोई देखै पतीआइ ॥१८॥

नामा प्रणवै सेल मसेल ॥ गऊ दुहाई बछरा मेलि ॥१९॥

दूधहि दुहि जब मटुकी भरी ॥ ले बादिसाह के आगे धरी ॥२०॥

बादिसाहु महल महि जाइ ॥ अउघट की घट लागी आइ ॥२१॥

काजी मुलां बिनती फुरमाइ ॥ बखसी हिंदू मै तेरी गाइ ॥२२॥

नामा कहै सुनहु बादिसाह ॥ इहु किछु पतीआ मुझै दिखाइ ॥२३॥

इस पतीआ का इहै परवानु ॥ साचि सीलि चालहु सुलितान ॥२४॥

नामदेउ सभ रहिआ समाइ ॥ मिलि हिंदू सभ नामे पहि जाहि ॥२५॥

जउ अब की बार न जीवै गाइ ॥ त नामदेव का पतीआ जाइ ॥२६॥

नामे की कीरति रही संसारि ॥ भगत जनां ले उधरिआ पारि ॥२७॥

सगल कलेस निंदक भइआ खेदु ॥ नामे नाराइन नाही भेदु ॥२८॥१॥१०॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1166) घरु २ ॥
जउ गुरदेउ त मिलै मुरारि ॥ जउ गुरदेउ त उतरै पारि ॥ जउ गुरदेउ त बैकुंठ तरै ॥ जउ गुरदेउ त जीवत मरै ॥१॥

सति सति सति सति सति गुरदेव ॥ झूठु झूठु झूठु झूठु आन सभ सेव ॥१॥ रहाउ ॥

जउ गुरदेउ त नामु द्रिड़ावै ॥ जउ गुरदेउ न दह दिस धावै ॥ जउ गुरदेउ पंच ते दूरि ॥ जउ गुरदेउ न मरिबो झूरि ॥२॥

जउ गुरदेउ त अम्रित बानी ॥ जउ गुरदेउ त अकथ कहानी ॥ जउ गुरदेउ त अम्रित देह ॥ जउ गुरदेउ नामु जपि लेहि ॥३॥

जउ गुरदेउ भवन त्रै सूझै ॥ जउ गुरदेउ ऊच पद बूझै ॥ जउ गुरदेउ त सीसु अकासि ॥ जउ गुरदेउ सदा साबासि ॥४॥

जउ गुरदेउ सदा बैरागी ॥ जउ गुरदेउ पर निंदा तिआगी ॥ जउ गुरदेउ बुरा भला एक ॥ जउ गुरदेउ लिलाटहि लेख ॥५॥

जउ गुरदेउ कंधु नही हिरै ॥ जउ गुरदेउ देहुरा फिरै ॥ जउ गुरदेउ त छापरि छाई ॥ जउ गुरदेउ सिहज निकसाई ॥६॥

जउ गुरदेउ त अठसठि नाइआ ॥ जउ गुरदेउ तनि चक्र लगाइआ ॥ जउ गुरदेउ त दुआदस सेवा ॥ जउ गुरदेउ सभै बिखु मेवा ॥७॥

जउ गुरदेउ त संसा टूटै ॥ जउ गुरदेउ त जम ते छूटै ॥ जउ गुरदेउ त भउजल तरै ॥ जउ गुरदेउ त जनमि न मरै ॥८॥

जउ गुरदेउ अठदस बिउहार ॥ जउ गुरदेउ अठारह भार ॥ बिनु गुरदेउ अवर नही जाई ॥ नामदेउ गुर की सरणाई ॥९॥१॥२॥११॥

(भक्त रविदास जी -- SGGS 1167) भैरउ बाणी रविदास जीउ की घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
बिनु देखे उपजै नही आसा ॥ जो दीसै सो होइ बिनासा ॥ बरन सहित जो जापै नामु ॥ सो जोगी केवल निहकामु ॥१॥

परचै रामु रवै जउ कोई ॥ पारसु परसै दुबिधा न होई ॥१॥ रहाउ ॥

सो मुनि मन की दुबिधा खाइ ॥ बिनु दुआरे त्रै लोक समाइ ॥ मन का सुभाउ सभु कोई करै ॥ करता होइ सु अनभै रहै ॥२॥

फल कारन फूली बनराइ ॥ फलु लागा तब फूलु बिलाइ ॥ गिआनै कारन करम अभिआसु ॥ गिआनु भइआ तह करमह नासु ॥३॥

घ्रित कारन दधि मथै सइआन ॥ जीवत मुकत सदा निरबान ॥ कहि रविदास परम बैराग ॥ रिदै रामु की न जपसि अभाग ॥४॥१॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 1167) नामदेव ॥
आउ कलंदर केसवा ॥ करि अबदाली भेसवा ॥ रहाउ ॥

जिनि आकास कुलह सिरि कीनी कउसै सपत पयाला ॥ चमर पोस का मंदरु तेरा इह बिधि बने गुपाला ॥१॥

छपन कोटि का पेहनु तेरा सोलह सहस इजारा ॥ भार अठारह मुदगरु तेरा सहनक सभ संसारा ॥२॥

देही महजिदि मनु मउलाना सहज निवाज गुजारै ॥ बीबी कउला सउ काइनु तेरा निरंकार आकारै ॥३॥

भगति करत मेरे ताल छिनाए किह पहि करउ पुकारा ॥ नामे का सुआमी अंतरजामी फिरे सगल बेदेसवा ॥४॥१॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates