राग आसा काफी - बाणी शब्द, Raag Asa Kafi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अमरदास जी -- SGGS 365) आसा घरु ८ काफी महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि कै भाणै सतिगुरु मिलै सचु सोझी होई ॥ गुर परसादी मनि वसै हरि बूझै सोई ॥१॥

मै सहु दाता एकु है अवरु नाही कोई ॥ गुर किरपा ते मनि वसै ता सदा सुखु होई ॥१॥ रहाउ ॥

इसु जुग महि निरभउ हरि नामु है पाईऐ गुर वीचारि ॥ बिनु नावै जम कै वसि है मनमुखि अंध गवारि ॥२॥

हरि कै भाणै जनु सेवा करै बूझै सचु सोई ॥ हरि कै भाणै सालाहीऐ भाणै मंनिऐ सुखु होई ॥३॥

हरि कै भाणै जनमु पदारथु पाइआ मति ऊतम होई ॥ नानक नामु सलाहि तूं गुरमुखि गति होई ॥४॥३९॥१३॥५२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 369) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा घरु ८ के काफी महला ४ ॥
आइआ मरणु धुराहु हउमै रोईऐ ॥ गुरमुखि नामु धिआइ असथिरु होईऐ ॥१॥

गुर पूरे साबासि चलणु जाणिआ ॥ लाहा नामु सु सारु सबदि समाणिआ ॥१॥ रहाउ ॥

पूरबि लिखे डेह सि आए माइआ ॥ चलणु अजु कि कल्हि धुरहु फुरमाइआ ॥२॥

बिरथा जनमु तिना जिन्ही नामु विसारिआ ॥ जूऐ खेलणु जगि कि इहु मनु हारिआ ॥३॥

जीवणि मरणि सुखु होइ जिन्हा गुरु पाइआ ॥ नानक सचे सचि सचि समाइआ ॥४॥१२॥६४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 396) आसा घरु ८ काफी महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मै बंदा बै खरीदु सचु साहिबु मेरा ॥ जीउ पिंडु सभु तिस दा सभु किछु है तेरा ॥१॥

माणु निमाणे तूं धणी तेरा भरवासा ॥ बिनु साचे अन टेक है सो जाणहु काचा ॥१॥ रहाउ ॥

तेरा हुकमु अपार है कोई अंतु न पाए ॥ जिसु गुरु पूरा भेटसी सो चलै रजाए ॥२॥

चतुराई सिआणपा कितै कामि न आईऐ ॥ तुठा साहिबु जो देवै सोई सुखु पाईऐ ॥३॥

जे लख करम कमाईअहि किछु पवै न बंधा ॥ जन नानक कीता नामु धर होरु छोडिआ धंधा ॥४॥१॥१०३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 396) आसा महला ५ ॥
सरब सुखा मै भालिआ हरि जेवडु न कोई ॥ गुर तुठे ते पाईऐ सचु साहिबु सोई ॥१॥

बलिहारी गुर आपणे सद सद कुरबाना ॥ नामु न विसरउ इकु खिनु चसा इहु कीजै दाना ॥१॥ रहाउ ॥

भागठु सचा सोइ है जिसु हरि धनु अंतरि ॥ सो छूटै महा जाल ते जिसु गुर सबदु निरंतरि ॥२॥

गुर की महिमा किआ कहा गुरु बिबेक सत सरु ॥ ओहु आदि जुगादी जुगह जुगु पूरा परमेसरु ॥३॥

नामु धिआवहु सद सदा हरि हरि मनु रंगे ॥ जीउ प्राण धनु गुरू है नानक कै संगे ॥४॥२॥१०४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 397) आसा महला ५ ॥
साई अलखु अपारु भोरी मनि वसै ॥ दूखु दरदु रोगु माइ मैडा हभु नसै ॥१॥

हउ वंञा कुरबाणु साई आपणे ॥ होवै अनदु घणा मनि तनि जापणे ॥१॥ रहाउ ॥

बिंदक गाल्हि सुणी सचे तिसु धणी ॥ सूखी हूं सुखु पाइ माइ न कीम गणी ॥२॥

नैण पसंदो सोइ पेखि मुसताक भई ॥ मै निरगुणि मेरी माइ आपि लड़ि लाइ लई ॥३॥

बेद कतेब संसार हभा हूं बाहरा ॥ नानक का पातिसाहु दिसै जाहरा ॥४॥३॥१०५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 397) आसा महला ५ ॥
लाख भगत आराधहि जपते पीउ पीउ ॥ कवन जुगति मेलावउ निरगुण बिखई जीउ ॥१॥

तेरी टेक गोविंद गुपाल दइआल प्रभ ॥ तूं सभना के नाथ तेरी स्रिसटि सभ ॥१॥ रहाउ ॥

सदा सहाई संत पेखहि सदा हजूरि ॥ नाम बिहूनड़िआ से मरन्हि विसूरि विसूरि ॥२॥

दास दासतण भाइ मिटिआ तिना गउणु ॥ विसरिआ जिन्हा नामु तिनाड़ा हालु कउणु ॥३॥

जैसे पसु हर्हिआउ तैसा संसारु सभ ॥ नानक बंधन काटि मिलावहु आपि प्रभ ॥४॥४॥१०६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 397) आसा महला ५ ॥
हभे थोक विसारि हिको खिआलु करि ॥ झूठा लाहि गुमानु मनु तनु अरपि धरि ॥१॥

आठ पहर सालाहि सिरजनहार तूं ॥ जीवां तेरी दाति किरपा करहु मूं ॥१॥ रहाउ ॥

सोई कमु कमाइ जितु मुखु उजला ॥ सोई लगै सचि जिसु तूं देहि अला ॥२॥

जो न ढहंदो मूलि सो घरु रासि करि ॥ हिको चिति वसाइ कदे न जाइ मरि ॥३॥

तिन्हा पिआरा रामु जो प्रभ भाणिआ ॥ गुर परसादि अकथु नानकि वखाणिआ ॥४॥५॥१०७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 397) आसा महला ५ ॥
जिन्हा न विसरै नामु से किनेहिआ ॥ भेदु न जाणहु मूलि सांई जेहिआ ॥१॥

मनु तनु होइ निहालु तुम्ह संगि भेटिआ ॥ सुखु पाइआ जन परसादि दुखु सभु मेटिआ ॥१॥ रहाउ ॥

जेते खंड ब्रहमंड उधारे तिंन्ह खे ॥ जिन्ह मनि वुठा आपि पूरे भगत से ॥२॥

जिस नो मंने आपि सोई मानीऐ ॥ प्रगट पुरखु परवाणु सभ ठाई जानीऐ ॥३॥

दिनसु रैणि आराधि सम्हाले साह साह ॥ नानक की लोचा पूरि सचे पातिसाह ॥४॥६॥१०८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 398) आसा महला ५ ॥
पूरि रहिआ स्रब ठाइ हमारा खसमु सोइ ॥ एकु साहिबु सिरि छतु दूजा नाहि कोइ ॥१॥

जिउ भावै तिउ राखु राखणहारिआ ॥ तुझ बिनु अवरु न कोइ नदरि निहारिआ ॥१॥ रहाउ ॥

प्रतिपाले प्रभु आपि घटि घटि सारीऐ ॥ जिसु मनि वुठा आपि तिसु न विसारीऐ ॥२॥

जो किछु करे सु आपि आपण भाणिआ ॥ भगता का सहाई जुगि जुगि जाणिआ ॥३॥

जपि जपि हरि का नामु कदे न झूरीऐ ॥ नानक दरस पिआस लोचा पूरीऐ ॥४॥७॥१०९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 398) आसा महला ५ ॥
किआ सोवहि नामु विसारि गाफल गहिलिआ ॥ कितीं इतु दरीआइ वंञन्हि वहदिआ ॥१॥

बोहिथड़ा हरि चरण मन चड़ि लंघीऐ ॥ आठ पहर गुण गाइ साधू संगीऐ ॥१॥ रहाउ ॥

भोगहि भोग अनेक विणु नावै सुंञिआ ॥ हरि की भगति बिना मरि मरि रुंनिआ ॥२॥

कपड़ भोग सुगंध तनि मरदन मालणा ॥ बिनु सिमरन तनु छारु सरपर चालणा ॥३॥

महा बिखमु संसारु विरलै पेखिआ ॥ छूटनु हरि की सरणि लेखु नानक लेखिआ ॥४॥८॥११०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 398) आसा महला ५ ॥
कोइ न किस ही संगि काहे गरबीऐ ॥ एकु नामु आधारु भउजलु तरबीऐ ॥१॥

मै गरीब सचु टेक तूं मेरे सतिगुर पूरे ॥ देखि तुम्हारा दरसनो मेरा मनु धीरे ॥१॥ रहाउ ॥

राजु मालु जंजालु काजि न कितै गनो ॥ हरि कीरतनु आधारु निहचलु एहु धनो ॥२॥

जेते माइआ रंग तेत पछाविआ ॥ सुख का नामु निधानु गुरमुखि गाविआ ॥३॥

सचा गुणी निधानु तूं प्रभ गहिर ग्मभीरे ॥ आस भरोसा खसम का नानक के जीअरे ॥४॥९॥१११॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 398) आसा महला ५ ॥
जिसु सिमरत दुखु जाइ सहज सुखु पाईऐ ॥ रैणि दिनसु कर जोड़ि हरि हरि धिआईऐ ॥१॥

नानक का प्रभु सोइ जिस का सभु कोइ ॥ सरब रहिआ भरपूरि सचा सचु सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

अंतरि बाहरि संगि सहाई गिआन जोगु ॥ तिसहि अराधि मना बिनासै सगल रोगु ॥२॥

राखनहारु अपारु राखै अगनि माहि ॥ सीतलु हरि हरि नामु सिमरत तपति जाइ ॥३॥

सूख सहज आनंद घणा नानक जन धूरा ॥ कारज सगले सिधि भए भेटिआ गुरु पूरा ॥४॥१०॥११२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 399) आसा महला ५ ॥
गोबिंदु गुणी निधानु गुरमुखि जाणीऐ ॥ होइ क्रिपालु दइआलु हरि रंगु माणीऐ ॥१॥

आवहु संत मिलाह हरि कथा कहाणीआ ॥ अनदिनु सिमरह नामु तजि लाज लोकाणीआ ॥१॥ रहाउ ॥

जपि जपि जीवा नामु होवै अनदु घणा ॥ मिथिआ मोहु संसारु झूठा विणसणा ॥२॥

चरण कमल संगि नेहु किनै विरलै लाइआ ॥ धंनु सुहावा मुखु जिनि हरि धिआइआ ॥३॥

जनम मरण दुख काल सिमरत मिटि जावई ॥ नानक कै सुखु सोइ जो प्रभ भावई ॥४॥११॥११३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 399) आसा महला ५ ॥
आवहु मीत इकत्र होइ रस कस सभि भुंचह ॥ अम्रित नामु हरि हरि जपह मिलि पापा मुंचह ॥१॥

ततु वीचारहु संत जनहु ता ते बिघनु न लागै ॥ खीन भए सभि तसकरा गुरमुखि जनु जागै ॥१॥ रहाउ ॥

बुधि गरीबी खरचु लैहु हउमै बिखु जारहु ॥ साचा हटु पूरा सउदा वखरु नामु वापारहु ॥२॥

जीउ पिंडु धनु अरपिआ सेई पतिवंते ॥ आपनड़े प्रभ भाणिआ नित केल करंते ॥३॥

दुरमति मदु जो पीवते बिखली पति कमली ॥ राम रसाइणि जो रते नानक सच अमली ॥४॥१२॥११४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 399) आसा महला ५ ॥
उदमु कीआ कराइआ आर्मभु रचाइआ ॥ नामु जपे जपि जीवणा गुरि मंत्रु द्रिड़ाइआ ॥१॥

पाइ परह सतिगुरू कै जिनि भरमु बिदारिआ ॥ करि किरपा प्रभि आपणी सचु साजि सवारिआ ॥१॥ रहाउ ॥

करु गहि लीने आपणे सचु हुकमि रजाई ॥ जो प्रभि दिती दाति सा पूरन वडिआई ॥२॥

सदा सदा गुण गाईअहि जपि नामु मुरारी ॥ नेमु निबाहिओ सतिगुरू प्रभि किरपा धारी ॥३॥

नामु धनु गुण गाउ लाभु पूरै गुरि दिता ॥ वणजारे संत नानका प्रभु साहु अमिता ॥४॥१३॥११५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 399) आसा महला ५ ॥
जा का ठाकुरु तुही प्रभ ता के वडभागा ॥ ओहु सुहेला सद सुखी सभु भ्रमु भउ भागा ॥१॥

हम चाकर गोबिंद के ठाकुरु मेरा भारा ॥ करन करावन सगल बिधि सो सतिगुरू हमारा ॥१॥ रहाउ ॥

दूजा नाही अउरु को ता का भउ करीऐ ॥ गुर सेवा महलु पाईऐ जगु दुतरु तरीऐ ॥२॥

द्रिसटि तेरी सुखु पाईऐ मन माहि निधाना ॥ जा कउ तुम किरपाल भए सेवक से परवाना ॥३॥

अम्रित रसु हरि कीरतनो को विरला पीवै ॥ वजहु नानक मिलै एकु नामु रिद जपि जपि जीवै ॥४॥१४॥११६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 400) आसा महला ५ ॥
जा प्रभ की हउ चेरुली सो सभ ते ऊचा ॥ सभु किछु ता का कांढीऐ थोरा अरु मूचा ॥१॥

जीअ प्रान मेरा धनो साहिब की मनीआ ॥ नामि जिसै कै ऊजली तिसु दासी गनीआ ॥१॥ रहाउ ॥

वेपरवाहु अनंद मै नाउ माणक हीरा ॥ रजी धाई सदा सुखु जा का तूं मीरा ॥२॥

सखी सहेरी संग की सुमति द्रिड़ावउ ॥ सेवहु साधू भाउ करि तउ निधि हरि पावउ ॥३॥

सगली दासी ठाकुरै सभ कहती मेरा ॥ जिसहि सीगारे नानका तिसु सुखहि बसेरा ॥४॥१५॥११७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 400) आसा महला ५ ॥
संता की होइ दासरी एहु अचारा सिखु री ॥ सगल गुणा गुण ऊतमो भरता दूरि न पिखु री ॥१॥

इहु मनु सुंदरि आपणा हरि नामि मजीठै रंगि री ॥ तिआगि सिआणप चातुरी तूं जाणु गुपालहि संगि री ॥१॥ रहाउ ॥

भरता कहै सु मानीऐ एहु सीगारु बणाइ री ॥ दूजा भाउ विसारीऐ एहु त्मबोला खाइ री ॥२॥

गुर का सबदु करि दीपको इह सत की सेज बिछाइ री ॥ आठ पहर कर जोड़ि रहु तउ भेटै हरि राइ री ॥३॥

तिस ही चजु सीगारु सभु साई रूपि अपारि री ॥ साई सोहागणि नानका जो भाणी करतारि री ॥४॥१६॥११८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 400) आसा महला ५ ॥
डीगन डोला तऊ लउ जउ मन के भरमा ॥ भ्रम काटे गुरि आपणै पाए बिसरामा ॥१॥

ओइ बिखादी दोखीआ ते गुर ते हूटे ॥ हम छूटे अब उन्हा ते ओइ हम ते छूटे ॥१॥ रहाउ ॥

मेरा तेरा जानता तब ही ते बंधा ॥ गुरि काटी अगिआनता तब छुटके फंधा ॥२॥

जब लगु हुकमु न बूझता तब ही लउ दुखीआ ॥ गुर मिलि हुकमु पछाणिआ तब ही ते सुखीआ ॥३॥

ना को दुसमनु दोखीआ नाही को मंदा ॥ गुर की सेवा सेवको नानक खसमै बंदा ॥४॥१७॥११९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 400) आसा महला ५ ॥
सूख सहज आनदु घणा हरि कीरतनु गाउ ॥ गरह निवारे सतिगुरू दे अपणा नाउ ॥१॥

बलिहारी गुर आपणे सद सद बलि जाउ ॥ गुरू विटहु हउ वारिआ जिसु मिलि सचु सुआउ ॥१॥ रहाउ ॥

सगुन अपसगुन तिस कउ लगहि जिसु चीति न आवै ॥ तिसु जमु नेड़ि न आवई जो हरि प्रभि भावै ॥२॥

पुंन दान जप तप जेते सभ ऊपरि नामु ॥ हरि हरि रसना जो जपै तिसु पूरन कामु ॥३॥

भै बिनसे भ्रम मोह गए को दिसै न बीआ ॥ नानक राखे पारब्रहमि फिरि दूखु न थीआ ॥४॥१८॥१२०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 418) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा काफी महला १ घरु ८ असटपदीआ ॥
जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥ कूड़ु कमावहि आदमी बांधहि घर बारा ॥१॥

जागहु जागहु सूतिहो चलिआ वणजारा ॥१॥ रहाउ ॥

नीत नीत घर बांधीअहि जे रहणा होई ॥ पिंडु पवै जीउ चलसी जे जाणै कोई ॥२॥

ओही ओही किआ करहु है होसी सोई ॥ तुम रोवहुगे ओस नो तुम्ह कउ कउणु रोई ॥३॥

धंधा पिटिहु भाईहो तुम्ह कूड़ु कमावहु ॥ ओहु न सुणई कत ही तुम्ह लोक सुणावहु ॥४॥

जिस ते सुता नानका जागाए सोई ॥ जे घरु बूझै आपणा तां नीद न होई ॥५॥

जे चलदा लै चलिआ किछु स्मपै नाले ॥ ता धनु संचहु देखि कै बूझहु बीचारे ॥६॥

वणजु करहु मखसूदु लैहु मत पछोतावहु ॥ अउगण छोडहु गुण करहु ऐसे ततु परावहु ॥७॥

धरमु भूमि सतु बीजु करि ऐसी किरस कमावहु ॥ तां वापारी जाणीअहु लाहा लै जावहु ॥८॥

करमु होवै सतिगुरु मिलै बूझै बीचारा ॥ नामु वखाणै सुणे नामु नामे बिउहारा ॥९॥

जिउ लाहा तोटा तिवै वाट चलदी आई ॥ जो तिसु भावै नानका साई वडिआई ॥१०॥१३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 424) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा महला ३ असटपदीआ घरु ८ काफी ॥
गुर ते सांति ऊपजै जिनि त्रिसना अगनि बुझाई ॥ गुर ते नामु पाईऐ वडी वडिआई ॥१॥

एको नामु चेति मेरे भाई ॥ जगतु जलंदा देखि कै भजि पए सरणाई ॥१॥ रहाउ ॥

गुर ते गिआनु ऊपजै महा ततु बीचारा ॥ गुर ते घरु दरु पाइआ भगती भरे भंडारा ॥२॥

गुरमुखि नामु धिआईऐ बूझै वीचारा ॥ गुरमुखि भगति सलाह है अंतरि सबदु अपारा ॥३॥

गुरमुखि सूखु ऊपजै दुखु कदे न होई ॥ गुरमुखि हउमै मारीऐ मनु निरमलु होई ॥४॥

सतिगुरि मिलिऐ आपु गइआ त्रिभवण सोझी पाई ॥ निरमल जोति पसरि रही जोती जोति मिलाई ॥५॥

पूरै गुरि समझाइआ मति ऊतम होई ॥ अंतरु सीतलु सांति होइ नामे सुखु होई ॥६॥

पूरा सतिगुरु तां मिलै जां नदरि करेई ॥ किलविख पाप सभ कटीअहि फिरि दुखु बिघनु न होई ॥७॥

आपणै हथि वडिआईआ दे नामे लाए ॥ नानक नामु निधानु मनि वसिआ वडिआई पाए ॥८॥४॥२६॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates