Pt 4 - राग आसा - बाणी शब्द, Part 4 - Raag Asa - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 382) आसा महला ५ ॥
बंधन काटि बिसारे अउगन अपना बिरदु सम्हारिआ ॥ होए क्रिपाल मात पित निआई बारिक जिउ प्रतिपारिआ ॥१॥

गुरसिख राखे गुर गोपालि ॥ काढि लीए महा भवजल ते अपनी नदरि निहालि ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै सिमरणि जम ते छुटीऐ हलति पलति सुखु पाईऐ ॥ सासि गिरासि जपहु जपु रसना नीत नीत गुण गाईऐ ॥२॥

भगति प्रेम परम पदु पाइआ साधसंगि दुख नाठे ॥ छिजै न जाइ किछु भउ न बिआपे हरि धनु निरमलु गाठे ॥३॥

अंति काल प्रभ भए सहाई इत उत राखनहारे ॥ प्रान मीत हीत धनु मेरै नानक सद बलिहारे ॥४॥६॥४५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 382) आसा महला ५ ॥
जा तूं साहिबु ता भउ केहा हउ तुधु बिनु किसु सालाही ॥ एकु तूं ता सभु किछु है मै तुधु बिनु दूजा नाही ॥१॥

बाबा बिखु देखिआ संसारु ॥ रखिआ करहु गुसाई मेरे मै नामु तेरा आधारु ॥१॥ रहाउ ॥

जाणहि बिरथा सभा मन की होरु किसु पहि आखि सुणाईऐ ॥ विणु नावै सभु जगु बउराइआ नामु मिलै सुखु पाईऐ ॥२॥

किआ कहीऐ किसु आखि सुणाईऐ जि कहणा सु प्रभ जी पासि ॥ सभु किछु कीता तेरा वरतै सदा सदा तेरी आस ॥३॥

जे देहि वडिआई ता तेरी वडिआई इत उत तुझहि धिआउ ॥ नानक के प्रभ सदा सुखदाते मै ताणु तेरा इकु नाउ ॥४॥७॥४६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 382) आसा महला ५ ॥
अम्रितु नामु तुम्हारा ठाकुर एहु महा रसु जनहि पीओ ॥ जनम जनम चूके भै भारे दुरतु बिनासिओ भरमु बीओ ॥१॥

दरसनु पेखत मै जीओ ॥ सुनि करि बचन तुम्हारे सतिगुर मनु तनु मेरा ठारु थीओ ॥१॥ रहाउ ॥

तुम्हरी क्रिपा ते भइओ साधसंगु एहु काजु तुम्ह आपि कीओ ॥ दिड़ु करि चरण गहे प्रभ तुम्हरे सहजे बिखिआ भई खीओ ॥२॥

सुख निधान नामु प्रभ तुमरा एहु अबिनासी मंत्रु लीओ ॥ करि किरपा मोहि सतिगुरि दीना तापु संतापु मेरा बैरु गीओ ॥३॥

धंनु सु माणस देही पाई जितु प्रभि अपनै मेलि लीओ ॥ धंनु सु कलिजुगु साधसंगि कीरतनु गाईऐ नानक नामु अधारु हीओ ॥४॥८॥४७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 383) आसा महला ५ ॥
आगै ही ते सभु किछु हूआ अवरु कि जाणै गिआना ॥ भूल चूक अपना बारिकु बखसिआ पारब्रहम भगवाना ॥१॥

सतिगुरु मेरा सदा दइआला मोहि दीन कउ राखि लीआ ॥ काटिआ रोगु महा सुखु पाइआ हरि अम्रितु मुखि नामु दीआ ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक पाप मेरे परहरिआ बंधन काटे मुकत भए ॥ अंध कूप महा घोर ते बाह पकरि गुरि काढि लीए ॥२॥

निरभउ भए सगल भउ मिटिआ राखे राखनहारे ॥ ऐसी दाति तेरी प्रभ मेरे कारज सगल सवारे ॥३॥

गुण निधान साहिब मनि मेला ॥ सरणि पइआ नानक सोहेला ॥४॥९॥४८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 383) आसा महला ५ ॥
तूं विसरहि तां सभु को लागू चीति आवहि तां सेवा ॥ अवरु न कोऊ दूजा सूझै साचे अलख अभेवा ॥१॥

चीति आवै तां सदा दइआला लोगन किआ वेचारे ॥ बुरा भला कहु किस नो कहीऐ सगले जीअ तुम्हारे ॥१॥ रहाउ ॥

तेरी टेक तेरा आधारा हाथ देइ तूं राखहि ॥ जिसु जन ऊपरि तेरी किरपा तिस कउ बिपु न कोऊ भाखै ॥२॥

ओहो सुखु ओहा वडिआई जो प्रभ जी मनि भाणी ॥ तूं दाना तूं सद मिहरवाना नामु मिलै रंगु माणी ॥३॥

तुधु आगै अरदासि हमारी जीउ पिंडु सभु तेरा ॥ कहु नानक सभ तेरी वडिआई कोई नाउ न जाणै मेरा ॥४॥१०॥४९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 383) आसा महला ५ ॥
करि किरपा प्रभ अंतरजामी साधसंगि हरि पाईऐ ॥ खोलि किवार दिखाले दरसनु पुनरपि जनमि न आईऐ ॥१॥

मिलउ परीतम सुआमी अपुने सगले दूख हरउ रे ॥ पारब्रहमु जिन्हि रिदै अराधिआ ता कै संगि तरउ रे ॥१॥ रहाउ ॥

महा उदिआन पावक सागर भए हरख सोग महि बसना ॥ सतिगुरु भेटि भइआ मनु निरमलु जपि अम्रितु हरि रसना ॥२॥

तनु धनु थापि कीओ सभु अपना कोमल बंधन बांधिआ ॥ गुर परसादि भए जन मुकते हरि हरि नामु अराधिआ ॥३॥

राखि लीए प्रभि राखनहारै जो प्रभ अपुने भाणे ॥ जीउ पिंडु सभु तुम्हरा दाते नानक सद कुरबाणे ॥४॥११॥५०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 383) आसा महला ५ ॥
मोह मलन नीद ते छुटकी कउनु अनुग्रहु भइओ री ॥ महा मोहनी तुधु न विआपै तेरा आलसु कहा गइओ री ॥१॥ रहाउ ॥

कामु क्रोधु अहंकारु गाखरो संजमि कउन छुटिओ री ॥ सुरि नर देव असुर त्रै गुनीआ सगलो भवनु लुटिओ री ॥१॥

दावा अगनि बहुतु त्रिण जाले कोई हरिआ बूटु रहिओ री ॥ ऐसो समरथु वरनि न साकउ ता की उपमा जात न कहिओ री ॥२॥

काजर कोठ महि भई न कारी निरमल बरनु बनिओ री ॥ महा मंत्रु गुर हिरदै बसिओ अचरज नामु सुनिओ री ॥३॥

करि किरपा प्रभ नदरि अवलोकन अपुनै चरणि लगाई ॥ प्रेम भगति नानक सुखु पाइआ साधू संगि समाई ॥४॥१२॥५१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 384) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा घरु ७ महला ५ ॥
लालु चोलना तै तनि सोहिआ ॥ सुरिजन भानी तां मनु मोहिआ ॥१॥

कवन बनी री तेरी लाली ॥ कवन रंगि तूं भई गुलाली ॥१॥ रहाउ ॥

तुम ही सुंदरि तुमहि सुहागु ॥ तुम घरि लालनु तुम घरि भागु ॥२॥

तूं सतवंती तूं परधानि ॥ तूं प्रीतम भानी तुही सुर गिआनि ॥३॥

प्रीतम भानी तां रंगि गुलाल ॥ कहु नानक सुभ द्रिसटि निहाल ॥४॥

सुनि री सखी इह हमरी घाल ॥ प्रभ आपि सीगारि सवारनहार ॥१॥ रहाउ दूजा ॥१॥५२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 384) आसा महला ५ ॥
दूखु घनो जब होते दूरि ॥ अब मसलति मोहि मिली हदूरि ॥१॥

चुका निहोरा सखी सहेरी ॥ भरमु गइआ गुरि पिर संगि मेरी ॥१॥ रहाउ ॥

निकटि आनि प्रिअ सेज धरी ॥ काणि कढन ते छूटि परी ॥२॥

मंदरि मेरै सबदि उजारा ॥ अनद बिनोदी खसमु हमारा ॥३॥

मसतकि भागु मै पिरु घरि आइआ ॥ थिरु सोहागु नानक जन पाइआ ॥४॥२॥५३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 384) आसा महला ५ ॥
साचि नामि मेरा मनु लागा ॥ लोगन सिउ मेरा ठाठा बागा ॥१॥

बाहरि सूतु सगल सिउ मउला ॥ अलिपतु रहउ जैसे जल महि कउला ॥१॥ रहाउ ॥

मुख की बात सगल सिउ करता ॥ जीअ संगि प्रभु अपुना धरता ॥२॥

दीसि आवत है बहुतु भीहाला ॥ सगल चरन की इहु मनु राला ॥३॥

नानक जनि गुरु पूरा पाइआ ॥ अंतरि बाहरि एकु दिखाइआ ॥४॥३॥५४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 385) आसा महला ५ ॥
पावतु रलीआ जोबनि बलीआ ॥ नाम बिना माटी संगि रलीआ ॥१॥

कान कुंडलीआ बसत्र ओढलीआ ॥ सेज सुखलीआ मनि गरबलीआ ॥१॥ रहाउ ॥

तलै कुंचरीआ सिरि कनिक छतरीआ ॥ हरि भगति बिना ले धरनि गडलीआ ॥२॥

रूप सुंदरीआ अनिक इसतरीआ ॥ हरि रस बिनु सभि सुआद फिकरीआ ॥३॥

माइआ छलीआ बिकार बिखलीआ ॥ सरणि नानक प्रभ पुरख दइअलीआ ॥४॥४॥५५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 385) आसा महला ५ ॥
एकु बगीचा पेड घन करिआ ॥ अम्रित नामु तहा महि फलिआ ॥१॥

ऐसा करहु बीचारु गिआनी ॥ जा ते पाईऐ पदु निरबानी ॥ आसि पासि बिखूआ के कुंटा बीचि अम्रितु है भाई रे ॥१॥ रहाउ ॥

सिंचनहारे एकै माली ॥ खबरि करतु है पात पत डाली ॥२॥

सगल बनसपति आणि जड़ाई ॥ सगली फूली निफल न काई ॥३॥

अम्रित फलु नामु जिनि गुर ते पाइआ ॥ नानक दास तरी तिनि माइआ ॥४॥५॥५६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 385) आसा महला ५ ॥
राज लीला तेरै नामि बनाई ॥ जोगु बनिआ तेरा कीरतनु गाई ॥१॥

सरब सुखा बने तेरै ओल्है ॥ भ्रम के परदे सतिगुर खोल्हे ॥१॥ रहाउ ॥

हुकमु बूझि रंग रस माणे ॥ सतिगुर सेवा महा निरबाणे ॥२॥

जिनि तूं जाता सो गिरसत उदासी परवाणु ॥ नामि रता सोई निरबाणु ॥३॥

जा कउ मिलिओ नामु निधाना ॥ भनति नानक ता का पूर खजाना ॥४॥६॥५७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 385) आसा महला ५ ॥
तीरथि जाउ त हउ हउ करते ॥ पंडित पूछउ त माइआ राते ॥१॥

सो असथानु बतावहु मीता ॥ जा कै हरि हरि कीरतनु नीता ॥१॥ रहाउ ॥

सासत्र बेद पाप पुंन वीचार ॥ नरकि सुरगि फिरि फिरि अउतार ॥२॥

गिरसत महि चिंत उदास अहंकार ॥ करम करत जीअ कउ जंजार ॥३॥

प्रभ किरपा ते मनु वसि आइआ ॥ नानक गुरमुखि तरी तिनि माइआ ॥४॥

साधसंगि हरि कीरतनु गाईऐ ॥ इहु असथानु गुरू ते पाईऐ ॥१॥ रहाउ दूजा ॥७॥५८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 385) आसा महला ५ ॥
घर महि सूख बाहरि फुनि सूखा ॥ हरि सिमरत सगल बिनासे दूखा ॥१॥

सगल सूख जां तूं चिति आंवैं ॥ सो नामु जपै जो जनु तुधु भावै ॥१॥ रहाउ ॥

तनु मनु सीतलु जपि नामु तेरा ॥ हरि हरि जपत ढहै दुख डेरा ॥२॥

हुकमु बूझै सोई परवानु ॥ साचु सबदु जा का नीसानु ॥३॥

गुरि पूरै हरि नामु द्रिड़ाइआ ॥ भनति नानकु मेरै मनि सुखु पाइआ ॥४॥८॥५९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 386) आसा महला ५ ॥
जहा पठावहु तह तह जाईं ॥ जो तुम देहु सोई सुखु पाईं ॥१॥

सदा चेरे गोविंद गोसाई ॥ तुम्हरी क्रिपा ते त्रिपति अघाईं ॥१॥ रहाउ ॥

तुमरा दीआ पैन्हउ खाईं ॥ तउ प्रसादि प्रभ सुखी वलाईं ॥२॥

मन तन अंतरि तुझै धिआईं ॥ तुम्हरै लवै न कोऊ लाईं ॥३॥

कहु नानक नित इवै धिआईं ॥ गति होवै संतह लगि पाईं ॥४॥९॥६०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 386) आसा महला ५ ॥
ऊठत बैठत सोवत धिआईऐ ॥ मारगि चलत हरे हरि गाईऐ ॥१॥

स्रवन सुनीजै अम्रित कथा ॥ जासु सुनी मनि होइ अनंदा दूख रोग मन सगले लथा ॥१॥ रहाउ ॥

कारजि कामि बाट घाट जपीजै ॥ गुर प्रसादि हरि अम्रितु पीजै ॥२॥

दिनसु रैनि हरि कीरतनु गाईऐ ॥ सो जनु जम की वाट न पाईऐ ॥३॥

आठ पहर जिसु विसरहि नाही ॥ गति होवै नानक तिसु लगि पाई ॥४॥१०॥६१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 386) आसा महला ५ ॥
जा कै सिमरनि सूख निवासु ॥ भई कलिआण दुख होवत नासु ॥१॥

अनदु करहु प्रभ के गुन गावहु ॥ सतिगुरु अपना सद सदा मनावहु ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर का सचु सबदु कमावहु ॥ थिरु घरि बैठे प्रभु अपना पावहु ॥२॥

पर का बुरा न राखहु चीत ॥ तुम कउ दुखु नही भाई मीत ॥३॥

हरि हरि तंतु मंतु गुरि दीन्हा ॥ इहु सुखु नानक अनदिनु चीन्हा ॥४॥११॥६२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 386) आसा महला ५ ॥
जिसु नीच कउ कोई न जानै ॥ नामु जपत उहु चहु कुंट मानै ॥१॥

दरसनु मागउ देहि पिआरे ॥ तुमरी सेवा कउन कउन न तारे ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै निकटि न आवै कोई ॥ सगल स्रिसटि उआ के चरन मलि धोई ॥२॥

जो प्रानी काहू न आवत काम ॥ संत प्रसादि ता को जपीऐ नाम ॥३॥

साधसंगि मन सोवत जागे ॥ तब प्रभ नानक मीठे लागे ॥४॥१२॥६३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 386) आसा महला ५ ॥
एको एकी नैन निहारउ ॥ सदा सदा हरि नामु सम्हारउ ॥१॥

राम रामा रामा गुन गावउ ॥ संत प्रतापि साध कै संगे हरि हरि नामु धिआवउ रे ॥१॥ रहाउ ॥

सगल समग्री जा कै सूति परोई ॥ घट घट अंतरि रविआ सोई ॥२॥

ओपति परलउ खिन महि करता ॥ आपि अलेपा निरगुनु रहता ॥३॥

करन करावन अंतरजामी ॥ अनंद करै नानक का सुआमी ॥४॥१३॥६४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 387) आसा महला ५ ॥
कोटि जनम के रहे भवारे ॥ दुलभ देह जीती नही हारे ॥१॥

किलबिख बिनासे दुख दरद दूरि ॥ भए पुनीत संतन की धूरि ॥१॥ रहाउ ॥

प्रभ के संत उधारन जोग ॥ तिसु भेटे जिसु धुरि संजोग ॥२॥

मनि आनंदु मंत्रु गुरि दीआ ॥ त्रिसन बुझी मनु निहचलु थीआ ॥३॥

नामु पदारथु नउ निधि सिधि ॥ नानक गुर ते पाई बुधि ॥४॥१४॥६५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 387) आसा महला ५ ॥
मिटी तिआस अगिआन अंधेरे ॥ साध सेवा अघ कटे घनेरे ॥१॥

सूख सहज आनंदु घना ॥ गुर सेवा ते भए मन निरमल हरि हरि हरि हरि नामु सुना ॥१॥ रहाउ ॥

बिनसिओ मन का मूरखु ढीठा ॥ प्रभ का भाणा लागा मीठा ॥२॥

गुर पूरे के चरण गहे ॥ कोटि जनम के पाप लहे ॥३॥

रतन जनमु इहु सफल भइआ ॥ कहु नानक प्रभ करी मइआ ॥४॥१५॥६६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 387) आसा महला ५ ॥
सतिगुरु अपना सद सदा सम्हारे ॥ गुर के चरन केस संगि झारे ॥१॥

जागु रे मन जागनहारे ॥ बिनु हरि अवरु न आवसि कामा झूठा मोहु मिथिआ पसारे ॥१॥ रहाउ ॥

गुर की बाणी सिउ रंगु लाइ ॥ गुरु किरपालु होइ दुखु जाइ ॥२॥

गुर बिनु दूजा नाही थाउ ॥ गुरु दाता गुरु देवै नाउ ॥३॥

गुरु पारब्रहमु परमेसरु आपि ॥ आठ पहर नानक गुर जापि ॥४॥१६॥६७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 387) आसा महला ५ ॥
आपे पेडु बिसथारी साख ॥ अपनी खेती आपे राख ॥१॥

जत कत पेखउ एकै ओही ॥ घट घट अंतरि आपे सोई ॥१॥ रहाउ ॥

आपे सूरु किरणि बिसथारु ॥ सोई गुपतु सोई आकारु ॥२॥

सरगुण निरगुण थापै नाउ ॥ दुह मिलि एकै कीनो ठाउ ॥३॥

कहु नानक गुरि भ्रमु भउ खोइआ ॥ अनद रूपु सभु नैन अलोइआ ॥४॥१७॥६८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 387) आसा महला ५ ॥
उकति सिआनप किछू न जाना ॥ दिनु रैणि तेरा नामु वखाना ॥१॥

मै निरगुन गुणु नाही कोइ ॥ करन करावनहार प्रभ सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

मूरख मुगध अगिआन अवीचारी ॥ नाम तेरे की आस मनि धारी ॥२॥

जपु तपु संजमु करम न साधा ॥ नामु प्रभू का मनहि अराधा ॥३॥

किछू न जाना मति मेरी थोरी ॥ बिनवति नानक ओट प्रभ तोरी ॥४॥१८॥६९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 388) आसा महला ५ ॥
हरि हरि अखर दुइ इह माला ॥ जपत जपत भए दीन दइआला ॥१॥

करउ बेनती सतिगुर अपुनी ॥ करि किरपा राखहु सरणाई मो कउ देहु हरे हरि जपनी ॥१॥ रहाउ ॥

हरि माला उर अंतरि धारै ॥ जनम मरण का दूखु निवारै ॥२॥

हिरदै समालै मुखि हरि हरि बोलै ॥ सो जनु इत उत कतहि न डोलै ॥३॥

कहु नानक जो राचै नाइ ॥ हरि माला ता कै संगि जाइ ॥४॥१९॥७०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 388) आसा महला ५ ॥
जिस का सभु किछु तिस का होइ ॥ तिसु जन लेपु न बिआपै कोइ ॥१॥

हरि का सेवकु सद ही मुकता ॥ जो किछु करै सोई भल जन कै अति निरमल दास की जुगता ॥१॥ रहाउ ॥

सगल तिआगि हरि सरणी आइआ ॥ तिसु जन कहा बिआपै माइआ ॥२॥

नामु निधानु जा के मन माहि ॥ तिस कउ चिंता सुपनै नाहि ॥३॥

कहु नानक गुरु पूरा पाइआ ॥ भरमु मोहु सगल बिनसाइआ ॥४॥२०॥७१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 388) आसा महला ५ ॥
जउ सुप्रसंन होइओ प्रभु मेरा ॥ तां दूखु भरमु कहु कैसे नेरा ॥१॥

सुनि सुनि जीवा सोइ तुम्हारी ॥ मोहि निरगुन कउ लेहु उधारी ॥१॥ रहाउ ॥

मिटि गइआ दूखु बिसारी चिंता ॥ फलु पाइआ जपि सतिगुर मंता ॥२॥

सोई सति सति है सोइ ॥ सिमरि सिमरि रखु कंठि परोइ ॥३॥

कहु नानक कउन उह करमा ॥ जा कै मनि वसिआ हरि नामा ॥४॥२१॥७२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 388) आसा महला ५ ॥
कामि क्रोधि अहंकारि विगूते ॥ हरि सिमरनु करि हरि जन छूटे ॥१॥

सोइ रहे माइआ मद माते ॥ जागत भगत सिमरत हरि राते ॥१॥ रहाउ ॥

मोह भरमि बहु जोनि भवाइआ ॥ असथिरु भगत हरि चरण धिआइआ ॥२॥

बंधन अंध कूप ग्रिह मेरा ॥ मुकते संत बुझहि हरि नेरा ॥३॥

कहु नानक जो प्रभ सरणाई ॥ ईहा सुखु आगै गति पाई ॥४॥२२॥७३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 389) आसा महला ५ ॥
तू मेरा तरंगु हम मीन तुमारे ॥ तू मेरा ठाकुरु हम तेरै दुआरे ॥१॥

तूं मेरा करता हउ सेवकु तेरा ॥ सरणि गही प्रभ गुनी गहेरा ॥१॥ रहाउ ॥

तू मेरा जीवनु तू आधारु ॥ तुझहि पेखि बिगसै कउलारु ॥२॥

तू मेरी गति पति तू परवानु ॥ तू समरथु मै तेरा ताणु ॥३॥

अनदिनु जपउ नाम गुणतासि ॥ नानक की प्रभ पहि अरदासि ॥४॥२३॥७४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 389) आसा महला ५ ॥
रोवनहारै झूठु कमाना ॥ हसि हसि सोगु करत बेगाना ॥१॥

को मूआ का कै घरि गावनु ॥ को रोवै को हसि हसि पावनु ॥१॥ रहाउ ॥

बाल बिवसथा ते बिरधाना ॥ पहुचि न मूका फिरि पछुताना ॥२॥

त्रिहु गुण महि वरतै संसारा ॥ नरक सुरग फिरि फिरि अउतारा ॥३॥

कहु नानक जो लाइआ नाम ॥ सफल जनमु ता का परवान ॥४॥२४॥७५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 389) आसा महला ५ ॥
सोइ रही प्रभ खबरि न जानी ॥ भोरु भइआ बहुरि पछुतानी ॥१॥

प्रिअ प्रेम सहजि मनि अनदु धरउ री ॥ प्रभ मिलबे की लालसा ता ते आलसु कहा करउ री ॥१॥ रहाउ ॥

कर महि अम्रितु आणि निसारिओ ॥ खिसरि गइओ भूम परि डारिओ ॥२॥

सादि मोहि लादी अहंकारे ॥ दोसु नाही प्रभ करणैहारे ॥३॥

साधसंगि मिटे भरम अंधारे ॥ नानक मेली सिरजणहारे ॥४॥२५॥७६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 389) आसा महला ५ ॥
चरन कमल की आस पिआरे ॥ जमकंकर नसि गए विचारे ॥१॥

तू चिति आवहि तेरी मइआ ॥ सिमरत नाम सगल रोग खइआ ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक दूख देवहि अवरा कउ ॥ पहुचि न साकहि जन तेरे कउ ॥२॥

दरस तेरे की पिआस मनि लागी ॥ सहज अनंद बसै बैरागी ॥३॥

नानक की अरदासि सुणीजै ॥ केवल नामु रिदे महि दीजै ॥४॥२६॥७७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 389) आसा महला ५ ॥
मनु त्रिपतानो मिटे जंजाल ॥ प्रभु अपुना होइआ किरपाल ॥१॥

संत प्रसादि भली बनी ॥ जा कै ग्रिहि सभु किछु है पूरनु सो भेटिआ निरभै धनी ॥१॥ रहाउ ॥

नामु द्रिड़ाइआ साध क्रिपाल ॥ मिटि गई भूख महा बिकराल ॥२॥

ठाकुरि अपुनै कीनी दाति ॥ जलनि बुझी मनि होई सांति ॥३॥

मिटि गई भाल मनु सहजि समाना ॥ नानक पाइआ नाम खजाना ॥४॥२७॥७८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 390) आसा महला ५ ॥
ठाकुर सिउ जा की बनि आई ॥ भोजन पूरन रहे अघाई ॥१॥

कछू न थोरा हरि भगतन कउ ॥ खात खरचत बिलछत देवन कउ ॥१॥ रहाउ ॥

जा का धनी अगम गुसाई ॥ मानुख की कहु केत चलाई ॥२॥

जा की सेवा दस असट सिधाई ॥ पलक दिसटि ता की लागहु पाई ॥३॥

जा कउ दइआ करहु मेरे सुआमी ॥ कहु नानक नाही तिन कामी ॥४॥२८॥७९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 390) आसा महला ५ ॥
जउ मै अपुना सतिगुरु धिआइआ ॥ तब मेरै मनि महा सुखु पाइआ ॥१॥

मिटि गई गणत बिनासिउ संसा ॥ नामि रते जन भए भगवंता ॥१॥ रहाउ ॥

जउ मै अपुना साहिबु चीति ॥ तउ भउ मिटिओ मेरे मीत ॥२॥

जउ मै ओट गही प्रभ तेरी ॥ तां पूरन होई मनसा मेरी ॥३॥

देखि चलित मनि भए दिलासा ॥ नानक दास तेरा भरवासा ॥४॥२९॥८०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 390) आसा महला ५ ॥
अनदिनु मूसा लाजु टुकाई ॥ गिरत कूप महि खाहि मिठाई ॥१॥

सोचत साचत रैनि बिहानी ॥ अनिक रंग माइआ के चितवत कबहू न सिमरै सारिंगपानी ॥१॥ रहाउ ॥

द्रुम की छाइआ निहचल ग्रिहु बांधिआ ॥ काल कै फांसि सकत सरु सांधिआ ॥२॥

बालू कनारा तरंग मुखि आइआ ॥ सो थानु मूड़ि निहचलु करि पाइआ ॥३॥

साधसंगि जपिओ हरि राइ ॥ नानक जीवै हरि गुण गाइ ॥४॥३०॥८१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 390) आसा महला ५ दुतुके ९ ॥
उन कै संगि तू करती केल ॥ उन कै संगि हम तुम संगि मेल ॥ उन्ह कै संगि तुम सभु कोऊ लोरै ॥ ओसु बिना कोऊ मुखु नही जोरै ॥१॥

ते बैरागी कहा समाए ॥ तिसु बिनु तुही दुहेरी री ॥१॥ रहाउ ॥

उन्ह कै संगि तू ग्रिह महि माहरि ॥ उन्ह कै संगि तू होई है जाहरि ॥ उन्ह कै संगि तू रखी पपोलि ॥ ओसु बिना तूं छुटकी रोलि ॥२॥

उन्ह कै संगि तेरा मानु महतु ॥ उन्ह कै संगि तुम साकु जगतु ॥ उन्ह कै संगि तेरी सभ बिधि थाटी ॥ ओसु बिना तूं होई है माटी ॥३॥

ओहु बैरागी मरै न जाइ ॥ हुकमे बाधा कार कमाइ ॥ जोड़ि विछोड़े नानक थापि ॥ अपनी कुदरति जाणै आपि ॥४॥३१॥८२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 390) आसा महला ५ ॥
ना ओहु मरता ना हम डरिआ ॥ ना ओहु बिनसै ना हम कड़िआ ॥ ना ओहु निरधनु ना हम भूखे ॥ ना ओसु दूखु न हम कउ दूखे ॥१॥

अवरु न कोऊ मारनवारा ॥ जीअउ हमारा जीउ देनहारा ॥१॥ रहाउ ॥

ना उसु बंधन ना हम बाधे ॥ ना उसु धंधा ना हम धाधे ॥ ना उसु मैलु न हम कउ मैला ॥ ओसु अनंदु त हम सद केला ॥२॥

ना उसु सोचु न हम कउ सोचा ॥ ना उसु लेपु न हम कउ पोचा ॥ ना उसु भूख न हम कउ त्रिसना ॥ जा उहु निरमलु तां हम जचना ॥३॥

हम किछु नाही एकै ओही ॥ आगै पाछै एको सोई ॥ नानक गुरि खोए भ्रम भंगा ॥ हम ओइ मिलि होए इक रंगा ॥४॥३२॥८३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 391) आसा महला ५ ॥
अनिक भांति करि सेवा करीऐ ॥ जीउ प्रान धनु आगै धरीऐ ॥ पानी पखा करउ तजि अभिमानु ॥ अनिक बार जाईऐ कुरबानु ॥१॥

साई सुहागणि जो प्रभ भाई ॥ तिस कै संगि मिलउ मेरी माई ॥१॥ रहाउ ॥

दासनि दासी की पनिहारि ॥ उन्ह की रेणु बसै जीअ नालि ॥ माथै भागु त पावउ संगु ॥ मिलै सुआमी अपुनै रंगि ॥२॥

जाप ताप देवउ सभ नेमा ॥ करम धरम अरपउ सभ होमा ॥ गरबु मोहु तजि होवउ रेन ॥ उन्ह कै संगि देखउ प्रभु नैन ॥३॥

निमख निमख एही आराधउ ॥ दिनसु रैणि एह सेवा साधउ ॥ भए क्रिपाल गुपाल गोबिंद ॥ साधसंगि नानक बखसिंद ॥४॥३३॥८४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 391) आसा महला ५ ॥
प्रभ की प्रीति सदा सुखु होइ ॥ प्रभ की प्रीति दुखु लगै न कोइ ॥ प्रभ की प्रीति हउमै मलु खोइ ॥ प्रभ की प्रीति सद निरमल होइ ॥१॥

सुनहु मीत ऐसा प्रेम पिआरु ॥ जीअ प्रान घट घट आधारु ॥१॥ रहाउ ॥

प्रभ की प्रीति भए सगल निधान ॥ प्रभ की प्रीति रिदै निरमल नाम ॥ प्रभ की प्रीति सद सोभावंत ॥ प्रभ की प्रीति सभ मिटी है चिंत ॥२॥

प्रभ की प्रीति इहु भवजलु तरै ॥ प्रभ की प्रीति जम ते नही डरै ॥ प्रभ की प्रीति सगल उधारै ॥ प्रभ की प्रीति चलै संगारै ॥३॥

आपहु कोई मिलै न भूलै ॥ जिसु क्रिपालु तिसु साधसंगि घूलै ॥ कहु नानक तेरै कुरबाणु ॥ संत ओट प्रभ तेरा ताणु ॥४॥३४॥८५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 391) आसा महला ५ ॥
भूपति होइ कै राजु कमाइआ ॥ करि करि अनरथ विहाझी माइआ ॥ संचत संचत थैली कीन्ही ॥ प्रभि उस ते डारि अवर कउ दीन्ही ॥१॥

काच गगरीआ अंभ मझरीआ ॥ गरबि गरबि उआहू महि परीआ ॥१॥ रहाउ ॥

निरभउ होइओ भइआ निहंगा ॥ चीति न आइओ करता संगा ॥ लसकर जोड़े कीआ स्मबाहा ॥ निकसिआ फूक त होइ गइओ सुआहा ॥२॥

ऊचे मंदर महल अरु रानी ॥ हसति घोड़े जोड़े मनि भानी ॥ वड परवारु पूत अरु धीआ ॥ मोहि पचे पचि अंधा मूआ ॥३॥

जिनहि उपाहा तिनहि बिनाहा ॥ रंग रसा जैसे सुपनाहा ॥ सोई मुकता तिसु राजु मालु ॥ नानक दास जिसु खसमु दइआलु ॥४॥३५॥८६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 392) आसा महला ५ ॥
इन्ह सिउ प्रीति करी घनेरी ॥ जउ मिलीऐ तउ वधै वधेरी ॥ गलि चमड़ी जउ छोडै नाही ॥ लागि छुटो सतिगुर की पाई ॥१॥

जग मोहनी हम तिआगि गवाई ॥ निरगुनु मिलिओ वजी वधाई ॥१॥ रहाउ ॥

ऐसी सुंदरि मन कउ मोहै ॥ बाटि घाटि ग्रिहि बनि बनि जोहै ॥ मनि तनि लागै होइ कै मीठी ॥ गुर प्रसादि मै खोटी डीठी ॥२॥

अगरक उस के वडे ठगाऊ ॥ छोडहि नाही बाप न माऊ ॥ मेली अपने उनि ले बांधे ॥ गुर किरपा ते मै सगले साधे ॥३॥

अब मोरै मनि भइआ अनंद ॥ भउ चूका टूटे सभि फंद ॥ कहु नानक जा सतिगुरु पाइआ ॥ घरु सगला मै सुखी बसाइआ ॥४॥३६॥८७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 392) आसा महला ५ ॥
आठ पहर निकटि करि जानै ॥ प्रभ का कीआ मीठा मानै ॥ एकु नामु संतन आधारु ॥ होइ रहे सभ की पग छारु ॥१॥

संत रहत सुनहु मेरे भाई ॥ उआ की महिमा कथनु न जाई ॥१॥ रहाउ ॥

वरतणि जा कै केवल नाम ॥ अनद रूप कीरतनु बिस्राम ॥ मित्र सत्रु जा कै एक समानै ॥ प्रभ अपुने बिनु अवरु न जानै ॥२॥

कोटि कोटि अघ काटनहारा ॥ दुख दूरि करन जीअ के दातारा ॥ सूरबीर बचन के बली ॥ कउला बपुरी संती छली ॥३॥

ता का संगु बाछहि सुरदेव ॥ अमोघ दरसु सफल जा की सेव ॥ कर जोड़ि नानकु करे अरदासि ॥ मोहि संतह टहल दीजै गुणतासि ॥४॥३७॥८८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 392) आसा महला ५ ॥
सगल सूख जपि एकै नाम ॥ सगल धरम हरि के गुण गाम ॥ महा पवित्र साध का संगु ॥ जिसु भेटत लागै प्रभ रंगु ॥१॥

गुर प्रसादि ओइ आनंद पावै ॥ जिसु सिमरत मनि होइ प्रगासा ता की गति मिति कहनु न जावै ॥१॥ रहाउ ॥

वरत नेम मजन तिसु पूजा ॥ बेद पुरान तिनि सिम्रिति सुनीजा ॥ महा पुनीत जा का निरमल थानु ॥ साधसंगति जा कै हरि हरि नामु ॥२॥

प्रगटिओ सो जनु सगले भवन ॥ पतित पुनीत ता की पग रेन ॥ जा कउ भेटिओ हरि हरि राइ ॥ ता की गति मिति कथनु न जाइ ॥३॥

आठ पहर कर जोड़ि धिआवउ ॥ उन साधा का दरसनु पावउ ॥ मोहि गरीब कउ लेहु रलाइ ॥ नानक आइ पए सरणाइ ॥४॥३८॥८९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 393) आसा महला ५ ॥
आठ पहर उदक इसनानी ॥ सद ही भोगु लगाइ सुगिआनी ॥ बिरथा काहू छोडै नाही ॥ बहुरि बहुरि तिसु लागह पाई ॥१॥

सालगिरामु हमारै सेवा ॥ पूजा अरचा बंदन देवा ॥१॥ रहाउ ॥

घंटा जा का सुनीऐ चहु कुंट ॥ आसनु जा का सदा बैकुंठ ॥ जा का चवरु सभ ऊपरि झूलै ॥ ता का धूपु सदा परफुलै ॥२॥

घटि घटि स्मपटु है रे जा का ॥ अभग सभा संगि है साधा ॥ आरती कीरतनु सदा अनंद ॥ महिमा सुंदर सदा बेअंत ॥३॥

जिसहि परापति तिस ही लहना ॥ संत चरन ओहु आइओ सरना ॥ हाथि चड़िओ हरि सालगिरामु ॥ कहु नानक गुरि कीनो दानु ॥४॥३९॥९०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 393) आसा महला ५ पंचपदा ॥
जिह पैडै लूटी पनिहारी ॥ सो मारगु संतन दूरारी ॥१॥

सतिगुर पूरै साचु कहिआ ॥ नाम तेरे की मुकते बीथी जम का मारगु दूरि रहिआ ॥१॥ रहाउ ॥

जह लालच जागाती घाट ॥ दूरि रही उह जन ते बाट ॥२॥

जह आवटे बहुत घन साथ ॥ पारब्रहम के संगी साध ॥३॥

चित्र गुपतु सभ लिखते लेखा ॥ भगत जना कउ द्रिसटि न पेखा ॥४॥

कहु नानक जिसु सतिगुरु पूरा ॥ वाजे ता कै अनहद तूरा ॥५॥४०॥९१॥


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