Pt 10 - राग आसा - बाणी शब्द, Part 10 - Raag Asa - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू नानक देव जी -- SGGS 463) सलोकु मः १ ॥
सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥ सचे तेरे लोअ सचे आकार ॥ सचे तेरे करणे सरब बीचार ॥ सचा तेरा अमरु सचा दीबाणु ॥ सचा तेरा हुकमु सचा फुरमाणु ॥ सचा तेरा करमु सचा नीसाणु ॥ सचे तुधु आखहि लख करोड़ि ॥ सचै सभि ताणि सचै सभि जोरि ॥ सची तेरी सिफति सची सालाह ॥ सची तेरी कुदरति सचे पातिसाह ॥ नानक सचु धिआइनि सचु ॥ जो मरि जमे सु कचु निकचु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 463) मः १ ॥
वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥ वडी वडिआई जा सचु निआउ ॥ वडी वडिआई जा निहचल थाउ ॥ वडी वडिआई जाणै आलाउ ॥ वडी वडिआई बुझै सभि भाउ ॥ वडी वडिआई जा पुछि न दाति ॥ वडी वडिआई जा आपे आपि ॥ नानक कार न कथनी जाइ ॥ कीता करणा सरब रजाइ ॥२॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 463) महला २ ॥
इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु ॥ इकन्हा हुकमि समाइ लए इकन्हा हुकमे करे विणासु ॥ इकन्हा भाणै कढि लए इकन्हा माइआ विचि निवासु ॥ एव भि आखि न जापई जि किसै आणे रासि ॥ नानक गुरमुखि जाणीऐ जा कउ आपि करे परगासु ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 463) पउड़ी ॥
नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥ ओथै सचे ही सचि निबड़ै चुणि वखि कढे जजमालिआ ॥ थाउ न पाइनि कूड़िआर मुह काल्है दोजकि चालिआ ॥ तेरै नाइ रते से जिणि गए हारि गए सि ठगण वालिआ ॥ लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 463) सलोक मः १ ॥
विसमादु नाद विसमादु वेद ॥ विसमादु जीअ विसमादु भेद ॥ विसमादु रूप विसमादु रंग ॥ विसमादु नागे फिरहि जंत ॥ विसमादु पउणु विसमादु पाणी ॥ विसमादु अगनी खेडहि विडाणी ॥ विसमादु धरती विसमादु खाणी ॥ विसमादु सादि लगहि पराणी ॥ विसमादु संजोगु विसमादु विजोगु ॥ विसमादु भुख विसमादु भोगु ॥ विसमादु सिफति विसमादु सालाह ॥ विसमादु उझड़ विसमादु राह ॥ विसमादु नेड़ै विसमादु दूरि ॥ विसमादु देखै हाजरा हजूरि ॥ वेखि विडाणु रहिआ विसमादु ॥ नानक बुझणु पूरै भागि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 464) मः १ ॥
कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥ कुदरति पाताली आकासी कुदरति सरब आकारु ॥ कुदरति वेद पुराण कतेबा कुदरति सरब वीचारु ॥ कुदरति खाणा पीणा पैन्हणु कुदरति सरब पिआरु ॥ कुदरति जाती जिनसी रंगी कुदरति जीअ जहान ॥ कुदरति नेकीआ कुदरति बदीआ कुदरति मानु अभिमानु ॥ कुदरति पउणु पाणी बैसंतरु कुदरति धरती खाकु ॥ सभ तेरी कुदरति तूं कादिरु करता पाकी नाई पाकु ॥ नानक हुकमै अंदरि वेखै वरतै ताको ताकु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 464) पउड़ी ॥
आपीन्है भोग भोगि कै होइ भसमड़ि भउरु सिधाइआ ॥ वडा होआ दुनीदारु गलि संगलु घति चलाइआ ॥ अगै करणी कीरति वाचीऐ बहि लेखा करि समझाइआ ॥ थाउ न होवी पउदीई हुणि सुणीऐ किआ रूआइआ ॥ मनि अंधै जनमु गवाइआ ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 464) सलोक मः १ ॥
भै विचि पवणु वहै सदवाउ ॥ भै विचि चलहि लख दरीआउ ॥ भै विचि अगनि कढै वेगारि ॥ भै विचि धरती दबी भारि ॥ भै विचि इंदु फिरै सिर भारि ॥ भै विचि राजा धरम दुआरु ॥ भै विचि सूरजु भै विचि चंदु ॥ कोह करोड़ी चलत न अंतु ॥ भै विचि सिध बुध सुर नाथ ॥ भै विचि आडाणे आकास ॥ भै विचि जोध महाबल सूर ॥ भै विचि आवहि जावहि पूर ॥ सगलिआ भउ लिखिआ सिरि लेखु ॥ नानक निरभउ निरंकारु सचु एकु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 464) मः १ ॥
नानक निरभउ निरंकारु होरि केते राम रवाल ॥ केतीआ कंन्ह कहाणीआ केते बेद बीचार ॥ केते नचहि मंगते गिड़ि मुड़ि पूरहि ताल ॥ बाजारी बाजार महि आइ कढहि बाजार ॥ गावहि राजे राणीआ बोलहि आल पताल ॥ लख टकिआ के मुंदड़े लख टकिआ के हार ॥ जितु तनि पाईअहि नानका से तन होवहि छार ॥ गिआनु न गलीई ढूढीऐ कथना करड़ा सारु ॥ करमि मिलै ता पाईऐ होर हिकमति हुकमु खुआरु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 465) पउड़ी ॥
नदरि करहि जे आपणी ता नदरी सतिगुरु पाइआ ॥ एहु जीउ बहुते जनम भरमिआ ता सतिगुरि सबदु सुणाइआ ॥ सतिगुर जेवडु दाता को नही सभि सुणिअहु लोक सबाइआ ॥ सतिगुरि मिलिऐ सचु पाइआ जिन्ही विचहु आपु गवाइआ ॥ जिनि सचो सचु बुझाइआ ॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 465) सलोक मः १ ॥
घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन्ह गोपाल ॥ गहणे पउणु पाणी बैसंतरु चंदु सूरजु अवतार ॥ सगली धरती मालु धनु वरतणि सरब जंजाल ॥ नानक मुसै गिआन विहूणी खाइ गइआ जमकालु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 465) मः १ ॥
वाइनि चेले नचनि गुर ॥ पैर हलाइनि फेरन्हि सिर ॥ उडि उडि रावा झाटै पाइ ॥ वेखै लोकु हसै घरि जाइ ॥ रोटीआ कारणि पूरहि ताल ॥ आपु पछाड़हि धरती नालि ॥ गावनि गोपीआ गावनि कान्ह ॥ गावनि सीता राजे राम ॥ निरभउ निरंकारु सचु नामु ॥ जा का कीआ सगल जहानु ॥ सेवक सेवहि करमि चड़ाउ ॥ भिंनी रैणि जिन्हा मनि चाउ ॥ सिखी सिखिआ गुर वीचारि ॥ नदरी करमि लघाए पारि ॥ कोलू चरखा चकी चकु ॥ थल वारोले बहुतु अनंतु ॥ लाटू माधाणीआ अनगाह ॥ पंखी भउदीआ लैनि न साह ॥ सूऐ चाड़ि भवाईअहि जंत ॥ नानक भउदिआ गणत न अंत ॥ बंधन बंधि भवाए सोइ ॥ पइऐ किरति नचै सभु कोइ ॥ नचि नचि हसहि चलहि से रोइ ॥ उडि न जाही सिध न होहि ॥ नचणु कुदणु मन का चाउ ॥ नानक जिन्ह मनि भउ तिन्हा मनि भाउ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 465) पउड़ी ॥
नाउ तेरा निरंकारु है नाइ लइऐ नरकि न जाईऐ ॥ जीउ पिंडु सभु तिस दा दे खाजै आखि गवाईऐ ॥ जे लोड़हि चंगा आपणा करि पुंनहु नीचु सदाईऐ ॥ जे जरवाणा परहरै जरु वेस करेदी आईऐ ॥ को रहै न भरीऐ पाईऐ ॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 465) सलोक मः १ ॥
मुसलमाना सिफति सरीअति पड़ि पड़ि करहि बीचारु ॥ बंदे से जि पवहि विचि बंदी वेखण कउ दीदारु ॥ हिंदू सालाही सालाहनि दरसनि रूपि अपारु ॥ तीरथि नावहि अरचा पूजा अगर वासु बहकारु ॥ जोगी सुंनि धिआवन्हि जेते अलख नामु करतारु ॥ सूखम मूरति नामु निरंजन काइआ का आकारु ॥ सतीआ मनि संतोखु उपजै देणै कै वीचारि ॥ दे दे मंगहि सहसा गूणा सोभ करे संसारु ॥ चोरा जारा तै कूड़िआरा खाराबा वेकार ॥ इकि होदा खाइ चलहि ऐथाऊ तिना भि काई कार ॥ जलि थलि जीआ पुरीआ लोआ आकारा आकार ॥ ओइ जि आखहि सु तूंहै जाणहि तिना भि तेरी सार ॥ नानक भगता भुख सालाहणु सचु नामु आधारु ॥ सदा अनंदि रहहि दिनु राती गुणवंतिआ पा छारु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 466) मः १ ॥
मिटी मुसलमान की पेड़ै पई कुम्हिआर ॥ घड़ि भांडे इटा कीआ जलदी करे पुकार ॥ जलि जलि रोवै बपुड़ी झड़ि झड़ि पवहि अंगिआर ॥ नानक जिनि करतै कारणु कीआ सो जाणै करतारु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 466) पउड़ी ॥
बिनु सतिगुर किनै न पाइओ बिनु सतिगुर किनै न पाइआ ॥ सतिगुर विचि आपु रखिओनु करि परगटु आखि सुणाइआ ॥ सतिगुर मिलिऐ सदा मुकतु है जिनि विचहु मोहु चुकाइआ ॥ उतमु एहु बीचारु है जिनि सचे सिउ चितु लाइआ ॥ जगजीवनु दाता पाइआ ॥६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 466) सलोक मः १ ॥
हउ विचि आइआ हउ विचि गइआ ॥ हउ विचि जमिआ हउ विचि मुआ ॥ हउ विचि दिता हउ विचि लइआ ॥ हउ विचि खटिआ हउ विचि गइआ ॥ हउ विचि सचिआरु कूड़िआरु ॥ हउ विचि पाप पुंन वीचारु ॥ हउ विचि नरकि सुरगि अवतारु ॥ हउ विचि हसै हउ विचि रोवै ॥ हउ विचि भरीऐ हउ विचि धोवै ॥ हउ विचि जाती जिनसी खोवै ॥ हउ विचि मूरखु हउ विचि सिआणा ॥ मोख मुकति की सार न जाणा ॥ हउ विचि माइआ हउ विचि छाइआ ॥ हउमै करि करि जंत उपाइआ ॥ हउमै बूझै ता दरु सूझै ॥ गिआन विहूणा कथि कथि लूझै ॥ नानक हुकमी लिखीऐ लेखु ॥ जेहा वेखहि तेहा वेखु ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 466) महला २ ॥
हउमै एहा जाति है हउमै करम कमाहि ॥ हउमै एई बंधना फिरि फिरि जोनी पाहि ॥ हउमै किथहु ऊपजै कितु संजमि इह जाइ ॥ हउमै एहो हुकमु है पइऐ किरति फिराहि ॥ हउमै दीरघ रोगु है दारू भी इसु माहि ॥ किरपा करे जे आपणी ता गुर का सबदु कमाहि ॥ नानकु कहै सुणहु जनहु इतु संजमि दुख जाहि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 466) पउड़ी ॥
सेव कीती संतोखीईं जिन्ही सचो सचु धिआइआ ॥ ओन्ही मंदै पैरु न रखिओ करि सुक्रितु धरमु कमाइआ ॥ ओन्ही दुनीआ तोड़े बंधना अंनु पाणी थोड़ा खाइआ ॥ तूं बखसीसी अगला नित देवहि चड़हि सवाइआ ॥ वडिआई वडा पाइआ ॥७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 467) सलोक मः १ ॥
पुरखां बिरखां तीरथां तटां मेघां खेतांह ॥ दीपां लोआं मंडलां खंडां वरभंडांह ॥ अंडज जेरज उतभुजां खाणी सेतजांह ॥ सो मिति जाणै नानका सरां मेरां जंताह ॥ नानक जंत उपाइ कै समाले सभनाह ॥ जिनि करतै करणा कीआ चिंता भि करणी ताह ॥ सो करता चिंता करे जिनि उपाइआ जगु ॥ तिसु जोहारी सुअसति तिसु तिसु दीबाणु अभगु ॥ नानक सचे नाम बिनु किआ टिका किआ तगु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 467) मः १ ॥
लख नेकीआ चंगिआईआ लख पुंना परवाणु ॥ लख तप उपरि तीरथां सहज जोग बेबाण ॥ लख सूरतण संगराम रण महि छुटहि पराण ॥ लख सुरती लख गिआन धिआन पड़ीअहि पाठ पुराण ॥ जिनि करतै करणा कीआ लिखिआ आवण जाणु ॥ नानक मती मिथिआ करमु सचा नीसाणु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 467) पउड़ी ॥
सचा साहिबु एकु तूं जिनि सचो सचु वरताइआ ॥ जिसु तूं देहि तिसु मिलै सचु ता तिन्ही सचु कमाइआ ॥ सतिगुरि मिलिऐ सचु पाइआ जिन्ह कै हिरदै सचु वसाइआ ॥ मूरख सचु न जाणन्ही मनमुखी जनमु गवाइआ ॥ विचि दुनीआ काहे आइआ ॥८॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 467) सलोकु मः १ ॥
पड़ि पड़ि गडी लदीअहि पड़ि पड़ि भरीअहि साथ ॥ पड़ि पड़ि बेड़ी पाईऐ पड़ि पड़ि गडीअहि खात ॥ पड़ीअहि जेते बरस बरस पड़ीअहि जेते मास ॥ पड़ीऐ जेती आरजा पड़ीअहि जेते सास ॥ नानक लेखै इक गल होरु हउमै झखणा झाख ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 467) मः १ ॥
लिखि लिखि पड़िआ ॥ तेता कड़िआ ॥ बहु तीरथ भविआ ॥ तेतो लविआ ॥ बहु भेख कीआ देही दुखु दीआ ॥ सहु वे जीआ अपणा कीआ ॥ अंनु न खाइआ सादु गवाइआ ॥ बहु दुखु पाइआ दूजा भाइआ ॥ बसत्र न पहिरै ॥ अहिनिसि कहरै ॥ मोनि विगूता ॥ किउ जागै गुर बिनु सूता ॥ पग उपेताणा ॥ अपणा कीआ कमाणा ॥ अलु मलु खाई सिरि छाई पाई ॥ मूरखि अंधै पति गवाई ॥ विणु नावै किछु थाइ न पाई ॥ रहै बेबाणी मड़ी मसाणी ॥ अंधु न जाणै फिरि पछुताणी ॥ सतिगुरु भेटे सो सुखु पाए ॥ हरि का नामु मंनि वसाए ॥ नानक नदरि करे सो पाए ॥ आस अंदेसे ते निहकेवलु हउमै सबदि जलाए ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) पउड़ी ॥
भगत तेरै मनि भावदे दरि सोहनि कीरति गावदे ॥ नानक करमा बाहरे दरि ढोअ न लहन्ही धावदे ॥ इकि मूलु न बुझन्हि आपणा अणहोदा आपु गणाइदे ॥ हउ ढाढी का नीच जाति होरि उतम जाति सदाइदे ॥ तिन्ह मंगा जि तुझै धिआइदे ॥९॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) सलोकु मः १ ॥
कूड़ु राजा कूड़ु परजा कूड़ु सभु संसारु ॥ कूड़ु मंडप कूड़ु माड़ी कूड़ु बैसणहारु ॥ कूड़ु सुइना कूड़ु रुपा कूड़ु पैन्हणहारु ॥ कूड़ु काइआ कूड़ु कपड़ु कूड़ु रूपु अपारु ॥ कूड़ु मीआ कूड़ु बीबी खपि होए खारु ॥ कूड़ि कूड़ै नेहु लगा विसरिआ करतारु ॥ किसु नालि कीचै दोसती सभु जगु चलणहारु ॥ कूड़ु मिठा कूड़ु माखिउ कूड़ु डोबे पूरु ॥ नानकु वखाणै बेनती तुधु बाझु कूड़ो कूड़ु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) मः १ ॥
सचु ता परु जाणीऐ जा रिदै सचा होइ ॥ कूड़ की मलु उतरै तनु करे हछा धोइ ॥ सचु ता परु जाणीऐ जा सचि धरे पिआरु ॥ नाउ सुणि मनु रहसीऐ ता पाए मोख दुआरु ॥ सचु ता परु जाणीऐ जा जुगति जाणै जीउ ॥ धरति काइआ साधि कै विचि देइ करता बीउ ॥ सचु ता परु जाणीऐ जा सिख सची लेइ ॥ दइआ जाणै जीअ की किछु पुंनु दानु करेइ ॥ सचु तां परु जाणीऐ जा आतम तीरथि करे निवासु ॥ सतिगुरू नो पुछि कै बहि रहै करे निवासु ॥ सचु सभना होइ दारू पाप कढै धोइ ॥ नानकु वखाणै बेनती जिन सचु पलै होइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) पउड़ी ॥
दानु महिंडा तली खाकु जे मिलै त मसतकि लाईऐ ॥ कूड़ा लालचु छडीऐ होइ इक मनि अलखु धिआईऐ ॥ फलु तेवेहो पाईऐ जेवेही कार कमाईऐ ॥ जे होवै पूरबि लिखिआ ता धूड़ि तिन्हा दी पाईऐ ॥ मति थोड़ी सेव गवाईऐ ॥१०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) सलोकु मः १ ॥
सचि कालु कूड़ु वरतिआ कलि कालख बेताल ॥ बीउ बीजि पति लै गए अब किउ उगवै दालि ॥ जे इकु होइ त उगवै रुती हू रुति होइ ॥ नानक पाहै बाहरा कोरै रंगु न सोइ ॥ भै विचि खु्मबि चड़ाईऐ सरमु पाहु तनि होइ ॥ नानक भगती जे रपै कूड़ै सोइ न कोइ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 468) मः १ ॥
लबु पापु दुइ राजा महता कूड़ु होआ सिकदारु ॥ कामु नेबु सदि पुछीऐ बहि बहि करे बीचारु ॥ अंधी रयति गिआन विहूणी भाहि भरे मुरदारु ॥ गिआनी नचहि वाजे वावहि रूप करहि सीगारु ॥ ऊचे कूकहि वादा गावहि जोधा का वीचारु ॥ मूरख पंडित हिकमति हुजति संजै करहि पिआरु ॥ धरमी धरमु करहि गावावहि मंगहि मोख दुआरु ॥ जती सदावहि जुगति न जाणहि छडि बहहि घर बारु ॥ सभु को पूरा आपे होवै घटि न कोई आखै ॥ पति परवाणा पिछै पाईऐ ता नानक तोलिआ जापै ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 469) मः १ ॥
वदी सु वजगि नानका सचा वेखै सोइ ॥ सभनी छाला मारीआ करता करे सु होइ ॥ अगै जाति न जोरु है अगै जीउ नवे ॥ जिन की लेखै पति पवै चंगे सेई केइ ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 469) पउड़ी ॥
धुरि करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ॥ एना जंता कै वसि किछु नाही तुधु वेकी जगतु उपाइआ ॥ इकना नो तूं मेलि लैहि इकि आपहु तुधु खुआइआ ॥ गुर किरपा ते जाणिआ जिथै तुधु आपु बुझाइआ ॥ सहजे ही सचि समाइआ ॥११॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 469) सलोकु मः १ ॥
दुखु दारू सुखु रोगु भइआ जा सुखु तामि न होई ॥ तूं करता करणा मै नाही जा हउ करी न होई ॥१॥

बलिहारी कुदरति वसिआ ॥ तेरा अंतु न जाई लखिआ ॥१॥ रहाउ ॥

जाति महि जोति जोति महि जाता अकल कला भरपूरि रहिआ ॥ तूं सचा साहिबु सिफति सुआल्हिउ जिनि कीती सो पारि पइआ ॥ कहु नानक करते कीआ बाता जो किछु करणा सु करि रहिआ ॥२॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 469) मः २ ॥
जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं ब्राहमणह ॥ खत्री सबदं सूर सबदं सूद्र सबदं परा क्रितह ॥ सरब सबदं एक सबदं जे को जाणै भेउ ॥ नानकु ता का दासु है सोई निरंजन देउ ॥३॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 469) मः २ ॥
एक क्रिसनं सरब देवा देव देवा त आतमा ॥ आतमा बासुदेवस्यि जे को जाणै भेउ ॥ नानकु ता का दासु है सोई निरंजन देउ ॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 469) मः १ ॥
कु्मभे बधा जलु रहै जल बिनु कु्मभु न होइ ॥ गिआन का बधा मनु रहै गुर बिनु गिआनु न होइ ॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 469) पउड़ी ॥
पड़िआ होवै गुनहगारु ता ओमी साधु न मारीऐ ॥ जेहा घाले घालणा तेवेहो नाउ पचारीऐ ॥ ऐसी कला न खेडीऐ जितु दरगह गइआ हारीऐ ॥ पड़िआ अतै ओमीआ वीचारु अगै वीचारीऐ ॥ मुहि चलै सु अगै मारीऐ ॥१२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) सलोकु मः १ ॥
नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥ जुगु जुगु फेरि वटाईअहि गिआनी बुझहि ताहि ॥ सतजुगि रथु संतोख का धरमु अगै रथवाहु ॥ त्रेतै रथु जतै का जोरु अगै रथवाहु ॥ दुआपुरि रथु तपै का सतु अगै रथवाहु ॥ कलजुगि रथु अगनि का कूड़ु अगै रथवाहु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) मः १ ॥
साम कहै सेत्मबरु सुआमी सच महि आछै साचि रहे ॥ सभु को सचि समावै ॥ रिगु कहै रहिआ भरपूरि ॥ राम नामु देवा महि सूरु ॥ नाइ लइऐ पराछत जाहि ॥ नानक तउ मोखंतरु पाहि ॥ जुज महि जोरि छली चंद्रावलि कान्ह क्रिसनु जादमु भइआ ॥ पारजातु गोपी लै आइआ बिंद्राबन महि रंगु कीआ ॥ कलि महि बेदु अथरबणु हूआ नाउ खुदाई अलहु भइआ ॥ नील बसत्र ले कपड़े पहिरे तुरक पठाणी अमलु कीआ ॥ चारे वेद होए सचिआर ॥ पड़हि गुणहि तिन्ह चार वीचार ॥ भाउ भगति करि नीचु सदाए ॥ तउ नानक मोखंतरु पाए ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) पउड़ी ॥
सतिगुर विटहु वारिआ जितु मिलिऐ खसमु समालिआ ॥ जिनि करि उपदेसु गिआन अंजनु दीआ इन्ही नेत्री जगतु निहालिआ ॥ खसमु छोडि दूजै लगे डुबे से वणजारिआ ॥ सतिगुरू है बोहिथा विरलै किनै वीचारिआ ॥ करि किरपा पारि उतारिआ ॥१३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) सलोकु मः १ ॥
सिमल रुखु सराइरा अति दीरघ अति मुचु ॥ ओइ जि आवहि आस करि जाहि निरासे कितु ॥ फल फिके फुल बकबके कमि न आवहि पत ॥ मिठतु नीवी नानका गुण चंगिआईआ ततु ॥ सभु को निवै आप कउ पर कउ निवै न कोइ ॥ धरि ताराजू तोलीऐ निवै सु गउरा होइ ॥ अपराधी दूणा निवै जो हंता मिरगाहि ॥ सीसि निवाइऐ किआ थीऐ जा रिदै कुसुधे जाहि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) मः १ ॥
पड़ि पुसतक संधिआ बादं ॥ सिल पूजसि बगुल समाधं ॥ मुखि झूठ बिभूखण सारं ॥ त्रैपाल तिहाल बिचारं ॥ गलि माला तिलकु लिलाटं ॥ दुइ धोती बसत्र कपाटं ॥ जे जाणसि ब्रहमं करमं ॥ सभि फोकट निसचउ करमं ॥ कहु नानक निहचउ धिआवै ॥ विणु सतिगुर वाट न पावै ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 470) पउड़ी ॥
कपड़ु रूपु सुहावणा छडि दुनीआ अंदरि जावणा ॥ मंदा चंगा आपणा आपे ही कीता पावणा ॥ हुकम कीए मनि भावदे राहि भीड़ै अगै जावणा ॥ नंगा दोजकि चालिआ ता दिसै खरा डरावणा ॥ करि अउगण पछोतावणा ॥१४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) सलोकु मः १ ॥
दइआ कपाह संतोखु सूतु जतु गंढी सतु वटु ॥ एहु जनेऊ जीअ का हई त पाडे घतु ॥ ना एहु तुटै न मलु लगै ना एहु जलै न जाइ ॥ धंनु सु माणस नानका जो गलि चले पाइ ॥ चउकड़ि मुलि अणाइआ बहि चउकै पाइआ ॥ सिखा कंनि चड़ाईआ गुरु ब्राहमणु थिआ ॥ ओहु मुआ ओहु झड़ि पइआ वेतगा गइआ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) मः १ ॥
लख चोरीआ लख जारीआ लख कूड़ीआ लख गालि ॥ लख ठगीआ पहिनामीआ राति दिनसु जीअ नालि ॥ तगु कपाहहु कतीऐ बाम्हणु वटे आइ ॥ कुहि बकरा रिंन्हि खाइआ सभु को आखै पाइ ॥ होइ पुराणा सुटीऐ भी फिरि पाईऐ होरु ॥ नानक तगु न तुटई जे तगि होवै जोरु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) मः १ ॥
नाइ मंनिऐ पति ऊपजै सालाही सचु सूतु ॥ दरगह अंदरि पाईऐ तगु न तूटसि पूत ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) मः १ ॥
तगु न इंद्री तगु न नारी ॥ भलके थुक पवै नित दाड़ी ॥ तगु न पैरी तगु न हथी ॥ तगु न जिहवा तगु न अखी ॥ वेतगा आपे वतै ॥ वटि धागे अवरा घतै ॥ लै भाड़ि करे वीआहु ॥ कढि कागलु दसे राहु ॥ सुणि वेखहु लोका एहु विडाणु ॥ मनि अंधा नाउ सुजाणु ॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) पउड़ी ॥
साहिबु होइ दइआलु किरपा करे ता साई कार कराइसी ॥ सो सेवकु सेवा करे जिस नो हुकमु मनाइसी ॥ हुकमि मंनिऐ होवै परवाणु ता खसमै का महलु पाइसी ॥ खसमै भावै सो करे मनहु चिंदिआ सो फलु पाइसी ॥ ता दरगह पैधा जाइसी ॥१५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) सलोक मः १ ॥
गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥ धोती टिका तै जपमाली धानु मलेछां खाई ॥ अंतरि पूजा पड़हि कतेबा संजमु तुरका भाई ॥ छोडीले पाखंडा ॥ नामि लइऐ जाहि तरंदा ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 471) मः १ ॥
माणस खाणे करहि निवाज ॥ छुरी वगाइनि तिन गलि ताग ॥ तिन घरि ब्रहमण पूरहि नाद ॥ उन्हा भि आवहि ओई साद ॥ कूड़ी रासि कूड़ा वापारु ॥ कूड़ु बोलि करहि आहारु ॥ सरम धरम का डेरा दूरि ॥ नानक कूड़ु रहिआ भरपूरि ॥ मथै टिका तेड़ि धोती कखाई ॥ हथि छुरी जगत कासाई ॥ नील वसत्र पहिरि होवहि परवाणु ॥ मलेछ धानु ले पूजहि पुराणु ॥ अभाखिआ का कुठा बकरा खाणा ॥ चउके उपरि किसै न जाणा ॥ दे कै चउका कढी कार ॥ उपरि आइ बैठे कूड़िआर ॥ मतु भिटै वे मतु भिटै ॥ इहु अंनु असाडा फिटै ॥ तनि फिटै फेड़ करेनि ॥ मनि जूठै चुली भरेनि ॥ कहु नानक सचु धिआईऐ ॥ सुचि होवै ता सचु पाईऐ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) पउड़ी ॥
चितै अंदरि सभु को वेखि नदरी हेठि चलाइदा ॥ आपे दे वडिआईआ आपे ही करम कराइदा ॥ वडहु वडा वड मेदनी सिरे सिरि धंधै लाइदा ॥ नदरि उपठी जे करे सुलताना घाहु कराइदा ॥ दरि मंगनि भिख न पाइदा ॥१६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) सलोकु मः १ ॥
जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥ अगै वसतु सिञाणीऐ पितरी चोर करेइ ॥ वढीअहि हथ दलाल के मुसफी एह करेइ ॥ नानक अगै सो मिलै जि खटे घाले देइ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) मः १ ॥
जिउ जोरू सिरनावणी आवै वारो वार ॥ जूठे जूठा मुखि वसै नित नित होइ खुआरु ॥ सूचे एहि न आखीअहि बहनि जि पिंडा धोइ ॥ सूचे सेई नानका जिन मनि वसिआ सोइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) पउड़ी ॥
तुरे पलाणे पउण वेग हर रंगी हरम सवारिआ ॥ कोठे मंडप माड़ीआ लाइ बैठे करि पासारिआ ॥ चीज करनि मनि भावदे हरि बुझनि नाही हारिआ ॥ करि फुरमाइसि खाइआ वेखि महलति मरणु विसारिआ ॥ जरु आई जोबनि हारिआ ॥१७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) सलोकु मः १ ॥
जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ ॥ गोहे अतै लकड़ी अंदरि कीड़ा होइ ॥ जेते दाणे अंन के जीआ बाझु न कोइ ॥ पहिला पाणी जीउ है जितु हरिआ सभु कोइ ॥ सूतकु किउ करि रखीऐ सूतकु पवै रसोइ ॥ नानक सूतकु एव न उतरै गिआनु उतारे धोइ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) मः १ ॥
मन का सूतकु लोभु है जिहवा सूतकु कूड़ु ॥ अखी सूतकु वेखणा पर त्रिअ पर धन रूपु ॥ कंनी सूतकु कंनि पै लाइतबारी खाहि ॥ नानक हंसा आदमी बधे जम पुरि जाहि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 472) मः १ ॥
सभो सूतकु भरमु है दूजै लगै जाइ ॥ जमणु मरणा हुकमु है भाणै आवै जाइ ॥ खाणा पीणा पवित्रु है दितोनु रिजकु स्मबाहि ॥ नानक जिन्ही गुरमुखि बुझिआ तिन्हा सूतकु नाहि ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) पउड़ी ॥
सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥ सहि मेले ता नदरी आईआ ॥ जा तिसु भाणा ता मनि वसाईआ ॥ करि हुकमु मसतकि हथु धरि विचहु मारि कढीआ बुरिआईआ ॥ सहि तुठै नउ निधि पाईआ ॥१८॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) सलोकु मः १ ॥
पहिला सुचा आपि होइ सुचै बैठा आइ ॥ सुचे अगै रखिओनु कोइ न भिटिओ जाइ ॥ सुचा होइ कै जेविआ लगा पड़णि सलोकु ॥ कुहथी जाई सटिआ किसु एहु लगा दोखु ॥ अंनु देवता पाणी देवता बैसंतरु देवता लूणु पंजवा पाइआ घिरतु ॥ ता होआ पाकु पवितु ॥ पापी सिउ तनु गडिआ थुका पईआ तितु ॥ जितु मुखि नामु न ऊचरहि बिनु नावै रस खाहि ॥ नानक एवै जाणीऐ तितु मुखि थुका पाहि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) मः १ ॥
भंडि जमीऐ भंडि निमीऐ भंडि मंगणु वीआहु ॥ भंडहु होवै दोसती भंडहु चलै राहु ॥ भंडु मुआ भंडु भालीऐ भंडि होवै बंधानु ॥ सो किउ मंदा आखीऐ जितु जमहि राजान ॥ भंडहु ही भंडु ऊपजै भंडै बाझु न कोइ ॥ नानक भंडै बाहरा एको सचा सोइ ॥ जितु मुखि सदा सालाहीऐ भागा रती चारि ॥ नानक ते मुख ऊजले तितु सचै दरबारि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) पउड़ी ॥
सभु को आखै आपणा जिसु नाही सो चुणि कढीऐ ॥ कीता आपो आपणा आपे ही लेखा संढीऐ ॥ जा रहणा नाही ऐतु जगि ता काइतु गारबि हंढीऐ ॥ मंदा किसै न आखीऐ पड़ि अखरु एहो बुझीऐ ॥ मूरखै नालि न लुझीऐ ॥१९॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) सलोकु मः १ ॥
नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ ॥ फिको फिका सदीऐ फिके फिकी सोइ ॥ फिका दरगह सटीऐ मुहि थुका फिके पाइ ॥ फिका मूरखु आखीऐ पाणा लहै सजाइ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 473) मः १ ॥
अंदरहु झूठे पैज बाहरि दुनीआ अंदरि फैलु ॥ अठसठि तीरथ जे नावहि उतरै नाही मैलु ॥ जिन्ह पटु अंदरि बाहरि गुदड़ु ते भले संसारि ॥ तिन्ह नेहु लगा रब सेती देखन्हे वीचारि ॥ रंगि हसहि रंगि रोवहि चुप भी करि जाहि ॥ परवाह नाही किसै केरी बाझु सचे नाह ॥ दरि वाट उपरि खरचु मंगा जबै देइ त खाहि ॥ दीबानु एको कलम एका हमा तुम्हा मेलु ॥ दरि लए लेखा पीड़ि छुटै नानका जिउ तेलु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 474) पउड़ी ॥
आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥ देखहि कीता आपणा धरि कची पकी सारीऐ ॥ जो आइआ सो चलसी सभु कोई आई वारीऐ ॥ जिस के जीअ पराण हहि किउ साहिबु मनहु विसारीऐ ॥ आपण हथी आपणा आपे ही काजु सवारीऐ ॥२०॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 474) सलोकु महला २ ॥
एह किनेही आसकी दूजै लगै जाइ ॥ नानक आसकु कांढीऐ सद ही रहै समाइ ॥ चंगै चंगा करि मंने मंदै मंदा होइ ॥ आसकु एहु न आखीऐ जि लेखै वरतै सोइ ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 474) महला २ ॥
सलामु जबाबु दोवै करे मुंढहु घुथा जाइ ॥ नानक दोवै कूड़ीआ थाइ न काई पाइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 474) पउड़ी ॥
जितु सेविऐ सुखु पाईऐ सो साहिबु सदा सम्हालीऐ ॥ जितु कीता पाईऐ आपणा सा घाल बुरी किउ घालीऐ ॥ मंदा मूलि न कीचई दे लमी नदरि निहालीऐ ॥ जिउ साहिब नालि न हारीऐ तेवेहा पासा ढालीऐ ॥ किछु लाहे उपरि घालीऐ ॥२१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 474) सलोकु महला २ ॥
चाकरु लगै चाकरी नाले गारबु वादु ॥ गला करे घणेरीआ खसम न पाए सादु ॥ आपु गवाइ सेवा करे ता किछु पाए मानु ॥ नानक जिस नो लगा तिसु मिलै लगा सो परवानु ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 474) महला २ ॥
जो जीइ होइ सु उगवै मुह का कहिआ वाउ ॥ बीजे बिखु मंगै अम्रितु वेखहु एहु निआउ ॥२॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 474) महला २ ॥
नालि इआणे दोसती कदे न आवै रासि ॥ जेहा जाणै तेहो वरतै वेखहु को निरजासि ॥ वसतू अंदरि वसतु समावै दूजी होवै पासि ॥ साहिब सेती हुकमु न चलै कही बणै अरदासि ॥ कूड़ि कमाणै कूड़ो होवै नानक सिफति विगासि ॥३॥


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