पड़ताल - शब्द, Partal - Shabads (Mahalla 4 5) Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अर्जन देव जी -- राग आसा -- 408 SGGS) आसा महला ५ घरु १५ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
बिकार माइआ मादि सोइओ सूझ बूझ न आवै ॥ पकरि केस जमि उठारिओ तद ही घरि जावै ॥१॥ लोभ बिखिआ बिखै लागे हिरि वित चित दुखाही ॥ खिन भंगुना कै मानि माते असुर जाणहि नाही ॥१॥ रहाउ ॥ बेद सासत्र जन पुकारहि सुनै नाही डोरा ॥ निपटि बाजी हारि मूका पछुताइओ मनि भोरा ॥२॥ डानु सगल गैर वजहि भरिआ दीवान लेखै न परिआ ॥ जेंह कारजि रहै ओल्हा सोइ कामु न करिआ ॥३॥ ऐसो जगु मोहि गुरि दिखाइओ तउ एक कीरति गाइआ ॥ मानु तानु तजि सिआनप सरणि नानकु आइआ ॥४॥१॥१५२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग धनासरी -- 683 SGGS) धनासरी महला ५ घरु ९ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि चरन सरन गोबिंद दुख भंजना दास अपुने कउ नामु देवहु ॥ द्रिसटि प्रभ धारहु क्रिपा करि तारहु भुजा गहि कूप ते काढि लेवहु ॥ रहाउ ॥ काम क्रोध करि अंध माइआ के बंध अनिक दोखा तनि छादि पूरे ॥ प्रभ बिना आन न राखनहारा नामु सिमरावहु सरनि सूरे ॥१॥ पतित उधारणा जीअ जंत तारणा बेद उचार नही अंतु पाइओ ॥ गुणह सुख सागरा ब्रहम रतनागरा भगति वछलु नानक गाइओ ॥२॥१॥५३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग सूही -- 746 SGGS) रागु सूही महला ५ घरु ५ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रीति प्रीति गुरीआ मोहन लालना ॥ जपि मन गोबिंद एकै अवरु नही को लेखै संत लागु मनहि छाडु दुबिधा की कुरीआ ॥१॥ रहाउ ॥ निरगुन हरीआ सरगुन धरीआ अनिक कोठरीआ भिंन भिंन भिंन भिन करीआ ॥ विचि मन कोटवरीआ ॥ निज मंदरि पिरीआ ॥ तहा आनद करीआ ॥ नह मरीआ नह जरीआ ॥१॥ किरतनि जुरीआ बहु बिधि फिरीआ पर कउ हिरीआ ॥ बिखना घिरीआ ॥ अब साधू संगि परीआ ॥ हरि दुआरै खरीआ ॥ दरसनु करीआ ॥ नानक गुर मिरीआ ॥ बहुरि न फिरीआ ॥२॥१॥४४॥

(गुरू रामदास जी -- राग बिलावलु -- 800 SGGS) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु बिलावलु महला ४ पड़ताल घरु १३ ॥
बोलहु भईआ राम नामु पतित पावनो ॥ हरि संत भगत तारनो ॥ हरि भरिपुरे रहिआ ॥ जलि थले राम नामु ॥ नित गाईऐ हरि दूख बिसारनो ॥१॥ रहाउ ॥ हरि कीआ है सफल जनमु हमारा ॥ हरि जपिआ हरि दूख बिसारनहारा ॥ गुरु भेटिआ है मुकति दाता ॥ हरि कीई हमारी सफल जाता ॥ मिलि संगती गुन गावनो ॥१॥ मन राम नाम करि आसा ॥ भाउ दूजा बिनसि बिनासा ॥ विचि आसा होइ निरासी ॥ सो जनु मिलिआ हरि पासी ॥ कोई राम नाम गुन गावनो ॥ जनु नानकु तिसु पगि लावनो ॥२॥१॥७॥४॥६॥७॥१७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग बिलावलु -- 830 SGGS) रागु बिलावलु महला ५ घरु १३ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मोहन नीद न आवै हावै हार कजर बसत्र अभरन कीने ॥ उडीनी उडीनी उडीनी ॥ कब घरि आवै री ॥१॥ रहाउ ॥ सरनि सुहागनि चरन सीसु धरि ॥ लालनु मोहि मिलावहु ॥ कब घरि आवै री ॥१॥ सुनहु सहेरी मिलन बात कहउ ॥ सगरो अहं मिटावहु तउ घर ही लालनु पावहु ॥ तब रस मंगल गुन गावहु ॥ आनद रूप धिआवहु ॥ नानकु दुआरै आइओ ॥ तउ मै लालनु पाइओ री ॥२॥ मोहन रूपु दिखावै ॥ अब मोहि नीद सुहावै ॥ सभ मेरी तिखा बुझानी ॥ अब मै सहजि समानी ॥ मीठी पिरहि कहानी ॥ मोहनु लालनु पाइओ री ॥ रहाउ दूजा ॥१॥१२८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग रामकली -- 901 SGGS) रागु रामकली महला ५ पड़ताल घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
नरनरह नमसकारं ॥ जलन थलन बसुध गगन एक एकंकारं ॥१॥ रहाउ ॥ हरन धरन पुन पुनह करन ॥ नह गिरह निरंहारं ॥१॥ ग्मभीर धीर नाम हीर ऊच मूच अपारं ॥ करन केल गुण अमोल नानक बलिहारं ॥२॥१॥५९॥

(गुरू रामदास जी -- राग नट नाराइन -- 977 SGGS) नट नाराइन महला ४ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरे मन सेव सफल हरि घाल ॥ ले गुर पग रेन रवाल ॥ सभि दालिद भंजि दुख दाल ॥ हरि हो हो हो नदरि निहाल ॥१॥ रहाउ ॥ हरि का ग्रिहु हरि आपि सवारिओ हरि रंग रंग महल बेअंत लाल लाल हरि लाल ॥ हरि आपनी क्रिपा करी आपि ग्रिहि आइओ हम हरि की गुर कीई है बसीठी हम हरि देखे भई निहाल निहाल निहाल निहाल ॥१॥ हरि आवते की खबरि गुरि पाई मनि तनि आनदो आनंद भए हरि आवते सुने मेरे लाल हरि लाल ॥ जनु नानकु हरि हरि मिले भए गलतान हाल निहाल निहाल ॥२॥१॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग नट नाराइन -- 980 SGGS) नट पड़ताल महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कोऊ है मेरो साजनु मीतु ॥ हरि नामु सुनावै नीत ॥ बिनसै दुखु बिपरीति ॥ सभु अरपउ मनु तनु चीतु ॥१॥ रहाउ ॥ कोई विरला आपन कीत ॥ संगि चरन कमल मनु सीत ॥ करि किरपा हरि जसु दीत ॥१॥ हरि भजि जनमु पदारथु जीत ॥ कोटि पतित होहि पुनीत ॥ नानक दास बलि बलि कीत ॥२॥१॥१०॥१९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग भैरउ -- 1153 SGGS) रागु भैरउ महला ५ पड़ताल घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
परतिपाल प्रभ क्रिपाल कवन गुन गनी ॥ अनिक रंग बहु तरंग सरब को धनी ॥१॥ रहाउ ॥ अनिक गिआन अनिक धिआन अनिक जाप जाप ताप ॥ अनिक गुनित धुनित ललित अनिक धार मुनी ॥१॥ अनिक नाद अनिक बाज निमख निमख अनिक स्वाद अनिक दोख अनिक रोग मिटहि जस सुनी ॥ नानक सेव अपार देव तटह खटह बरत पूजा गवन भवन जात्र करन सगल फल पुनी ॥२॥१॥५७॥८॥२१॥७॥५७॥९३॥

(गुरू रामदास जी -- राग सारंग -- 1200 SGGS) सारग महला ४ घरु ५ दुपदे पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जपि मन जगंनाथ जगदीसरो जगजीवनो मनमोहन सिउ प्रीति लागी मै हरि हरि हरि टेक सभ दिनसु सभ राति ॥१॥ रहाउ ॥ हरि की उपमा अनिक अनिक अनिक गुन गावत सुक नारद ब्रहमादिक तव गुन सुआमी गनिन न जाति ॥ तू हरि बेअंतु तू हरि बेअंतु तू हरि सुआमी तू आपे ही जानहि आपनी भांति ॥१॥ हरि कै निकटि निकटि हरि निकट ही बसते ते हरि के जन साधू हरि भगात ॥ ते हरि के जन हरि सिउ रलि मिले जैसे जन नानक सललै सलल मिलाति ॥२॥१॥८॥

(गुरू रामदास जी -- राग सारंग -- 1202 SGGS) सारग महला ४ पड़ताल ॥
जपि मन गोविंदु हरि गोविंदु गुणी निधानु सभ स्रिसटि का प्रभो मेरे मन हरि बोलि हरि पुरखु अबिनासी ॥१॥ रहाउ ॥ हरि का नामु अम्रितु हरि हरि हरे सो पीऐ जिसु रामु पिआसी ॥ हरि आपि दइआलु दइआ करि मेलै जिसु सतिगुरू सो जनु हरि हरि अम्रित नामु चखासी ॥१॥ जो जन सेवहि सद सदा मेरा हरि हरे तिन का सभु दूखु भरमु भउ जासी ॥ जनु नानकु नामु लए तां जीवै जिउ चात्रिकु जलि पीऐ त्रिपतासी ॥२॥५॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग सारंग -- 1229 SGGS) सारग महला ५ घरु ६ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सुभ बचन बोलि गुन अमोल ॥ किंकरी बिकार ॥ देखु री बीचार ॥ गुर सबदु धिआइ महलु पाइ ॥ हरि संगि रंग करती महा केल ॥१॥ रहाउ ॥ सुपन री संसारु ॥ मिथनी बिसथारु ॥ सखी काइ मोहि मोहिली प्रिअ प्रीति रिदै मेल ॥१॥ सरब री प्रीति पिआरु ॥ प्रभु सदा री दइआरु ॥ कांएं आन आन रुचीऐ ॥ हरि संगि संगि खचीऐ ॥ जउ साधसंग पाए ॥ कहु नानक हरि धिआए ॥ अब रहे जमहि मेल ॥२॥१॥१३०॥

(गुरू रामदास जी -- राग मलार -- 1265 SGGS) मलार महला ४ पड़ताल घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि जन बोलत स्रीराम नामा मिलि साधसंगति हरि तोर ॥१॥ रहाउ ॥ हरि धनु बनजहु हरि धनु संचहु जिसु लागत है नही चोर ॥१॥ चात्रिक मोर बोलत दिनु राती सुनि घनिहर की घोर ॥२॥ जो बोलत है म्रिग मीन पंखेरू सु बिनु हरि जापत है नही होर ॥३॥ नानक जन हरि कीरति गाई छूटि गइओ जम का सभ सोर ॥४॥१॥८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग मलार -- 1271 SGGS) रागु मलार महला ५ पड़ताल घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गुर मनारि प्रिअ दइआर सिउ रंगु कीआ ॥ कीनो री सगल सींगार ॥ तजिओ री सगल बिकार ॥ धावतो असथिरु थीआ ॥१॥ रहाउ ॥ ऐसे रे मन पाइ कै आपु गवाइ कै करि साधन सिउ संगु ॥ बाजे बजहि म्रिदंग अनाहद कोकिल री राम नामु बोलै मधुर बैन अति सुहीआ ॥१॥ ऐसी तेरे दरसन की सोभ अति अपार प्रिअ अमोघ तैसे ही संगि संत बने ॥ भव उतार नाम भने ॥ रम राम राम माल ॥ मनि फेरते हरि संगि संगीआ ॥ जन नानक प्रिउ प्रीतमु थीआ ॥२॥१॥२३॥

(गुरू रामदास जी -- राग कानड़ा -- 1296 SGGS) कानड़ा महला ४ पड़ताल घरु ५ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मन जापहु राम गुपाल ॥ हरि रतन जवेहर लाल ॥ हरि गुरमुखि घड़ि टकसाल ॥ हरि हो हो किरपाल ॥१॥ रहाउ ॥ तुमरे गुन अगम अगोचर एक जीह किआ कथै बिचारी राम राम राम राम लाल ॥ तुमरी जी अकथ कथा तू तू तू ही जानहि हउ हरि जपि भई निहाल निहाल निहाल ॥१॥ हमरे हरि प्रान सखा सुआमी हरि मीता मेरे मनि तनि जीह हरि हरे हरे राम नाम धनु माल ॥ जा को भागु तिनि लीओ री सुहागु हरि हरि हरे हरे गुन गावै गुरमति हउ बलि बले हउ बलि बले जन नानक हरि जपि भई निहाल निहाल निहाल ॥२॥१॥७॥

(गुरू रामदास जी -- राग परभाती बिभास -- 1337 SGGS) प्रभाती बिभास पड़ताल महला ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जपि मन हरि हरि नामु निधान ॥ हरि दरगह पावहि मान ॥ जिनि जपिआ ते पारि परान ॥१॥ रहाउ ॥ सुनि मन हरि हरि नामु करि धिआनु ॥ सुनि मन हरि कीरति अठसठि मजानु ॥ सुनि मन गुरमुखि पावहि मानु ॥१॥ जपि मन परमेसुरु परधानु ॥ खिन खोवै पाप कोटान ॥ मिलु नानक हरि भगवान ॥२॥१॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग परभाती बिभास -- 1341 SGGS) प्रभाती महला ५ बिभास पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रम राम राम राम जाप ॥ कलि कलेस लोभ मोह बिनसि जाइ अहं ताप ॥१॥ रहाउ ॥ आपु तिआगि संत चरन लागि मनु पवितु जाहि पाप ॥१॥ नानकु बारिकु कछू न जानै राखन कउ प्रभु माई बाप ॥२॥१॥१४॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates