भक्त जैदेव जी - बाणी शब्द, Bhagat Jaidev ji - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(राग गूजरी -- SGGS 526) गूजरी स्री जैदेव जीउ का पदा घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
परमादि पुरखमनोपिमं सति आदि भाव रतं ॥ परमदभुतं परक्रिति परं जदिचिंति सरब गतं ॥१॥

केवल राम नाम मनोरमं ॥ बदि अम्रित तत मइअं ॥ न दनोति जसमरणेन जनम जराधि मरण भइअं ॥१॥ रहाउ ॥

इछसि जमादि पराभयं जसु स्वसति सुक्रित क्रितं ॥ भव भूत भाव समब्यिअं परमं प्रसंनमिदं ॥२॥

लोभादि द्रिसटि पर ग्रिहं जदिबिधि आचरणं ॥ तजि सकल दुहक्रित दुरमती भजु चक्रधर सरणं ॥३॥

हरि भगत निज निहकेवला रिद करमणा बचसा ॥ जोगेन किं जगेन किं दानेन किं तपसा ॥४॥

गोबिंद गोबिंदेति जपि नर सकल सिधि पदं ॥ जैदेव आइउ तस सफुटं भव भूत सरब गतं ॥५॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1106) रागु मारू बाणी जैदेउ जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
चंद सत भेदिआ नाद सत पूरिआ सूर सत खोड़सा दतु कीआ ॥ अबल बलु तोड़िआ अचल चलु थपिआ अघड़ु घड़िआ तहा अपिउ पीआ ॥१॥

मन आदि गुण आदि वखाणिआ ॥ तेरी दुबिधा द्रिसटि समानिआ ॥१॥ रहाउ ॥

अरधि कउ अरधिआ सरधि कउ सरधिआ सलल कउ सललि समानि आइआ ॥ बदति जैदेउ जैदेव कउ रमिआ ब्रहमु निरबाणु लिव लीणु पाइआ ॥२॥१॥


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