Pt 3 - गुरू रामदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 3 - Guru Ramdas ji (Mahalla 4) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग गउड़ी माझ -- SGGS 173) गउड़ी माझ महला ४ ॥
मन माही मन माही मेरे गोविंदा हरि रंगि रता मन माही जीउ ॥ हरि रंगु नालि न लखीऐ मेरे गोविदा गुरु पूरा अलखु लखाही जीउ ॥ हरि हरि नामु परगासिआ मेरे गोविंदा सभ दालद दुख लहि जाही जीउ ॥ हरि पदु ऊतमु पाइआ मेरे गोविंदा वडभागी नामि समाही जीउ ॥१॥

नैणी मेरे पिआरिआ नैणी मेरे गोविदा किनै हरि प्रभु डिठड़ा नैणी जीउ ॥ मेरा मनु तनु बहुतु बैरागिआ मेरे गोविंदा हरि बाझहु धन कुमलैणी जीउ ॥ संत जना मिलि पाइआ मेरे गोविदा मेरा हरि प्रभु सजणु सैणी जीउ ॥ हरि आइ मिलिआ जगजीवनु मेरे गोविंदा मै सुखि विहाणी रैणी जीउ ॥२॥

मै मेलहु संत मेरा हरि प्रभु सजणु मै मनि तनि भुख लगाईआ जीउ ॥ हउ रहि न सकउ बिनु देखे मेरे प्रीतम मै अंतरि बिरहु हरि लाईआ जीउ ॥ हरि राइआ मेरा सजणु पिआरा गुरु मेले मेरा मनु जीवाईआ जीउ ॥ मेरै मनि तनि आसा पूरीआ मेरे गोविंदा हरि मिलिआ मनि वाधाईआ जीउ ॥३॥

वारी मेरे गोविंदा वारी मेरे पिआरिआ हउ तुधु विटड़िअहु सद वारी जीउ ॥ मेरै मनि तनि प्रेमु पिरम का मेरे गोविदा हरि पूंजी राखु हमारी जीउ ॥ सतिगुरु विसटु मेलि मेरे गोविंदा हरि मेले करि रैबारी जीउ ॥ हरि नामु दइआ करि पाइआ मेरे गोविंदा जन नानकु सरणि तुमारी जीउ ॥४॥३॥२९॥६७॥

(राग गउड़ी माझ -- SGGS 174) गउड़ी माझ महला ४ ॥
चोजी मेरे गोविंदा चोजी मेरे पिआरिआ हरि प्रभु मेरा चोजी जीउ ॥ हरि आपे कान्हु उपाइदा मेरे गोविदा हरि आपे गोपी खोजी जीउ ॥ हरि आपे सभ घट भोगदा मेरे गोविंदा आपे रसीआ भोगी जीउ ॥ हरि सुजाणु न भुलई मेरे गोविंदा आपे सतिगुरु जोगी जीउ ॥१॥

आपे जगतु उपाइदा मेरे गोविदा हरि आपि खेलै बहु रंगी जीउ ॥ इकना भोग भोगाइदा मेरे गोविंदा इकि नगन फिरहि नंग नंगी जीउ ॥ आपे जगतु उपाइदा मेरे गोविदा हरि दानु देवै सभ मंगी जीउ ॥ भगता नामु आधारु है मेरे गोविंदा हरि कथा मंगहि हरि चंगी जीउ ॥२॥

हरि आपे भगति कराइदा मेरे गोविंदा हरि भगता लोच मनि पूरी जीउ ॥ आपे जलि थलि वरतदा मेरे गोविदा रवि रहिआ नही दूरी जीउ ॥ हरि अंतरि बाहरि आपि है मेरे गोविदा हरि आपि रहिआ भरपूरी जीउ ॥ हरि आतम रामु पसारिआ मेरे गोविंदा हरि वेखै आपि हदूरी जीउ ॥३॥

हरि अंतरि वाजा पउणु है मेरे गोविंदा हरि आपि वजाए तिउ वाजै जीउ ॥ हरि अंतरि नामु निधानु है मेरे गोविंदा गुर सबदी हरि प्रभु गाजै जीउ ॥ आपे सरणि पवाइदा मेरे गोविंदा हरि भगत जना राखु लाजै जीउ ॥ वडभागी मिलु संगती मेरे गोविंदा जन नानक नाम सिधि काजै जीउ ॥४॥४॥३०॥६८॥

(राग गउड़ी माझ -- SGGS 175) गउड़ी माझ महला ४ ॥
मै हरि नामै हरि बिरहु लगाई जीउ ॥ मेरा हरि प्रभु मितु मिलै सुखु पाई जीउ ॥ हरि प्रभु देखि जीवा मेरी माई जीउ ॥ मेरा नामु सखा हरि भाई जीउ ॥१॥

गुण गावहु संत जीउ मेरे हरि प्रभ केरे जीउ ॥ जपि गुरमुखि नामु जीउ भाग वडेरे जीउ ॥ हरि हरि नामु जीउ प्रान हरि मेरे जीउ ॥ फिरि बहुड़ि न भवजल फेरे जीउ ॥२॥

किउ हरि प्रभ वेखा मेरै मनि तनि चाउ जीउ ॥ हरि मेलहु संत जीउ मनि लगा भाउ जीउ ॥ गुर सबदी पाईऐ हरि प्रीतम राउ जीउ ॥ वडभागी जपि नाउ जीउ ॥३॥

मेरै मनि तनि वडड़ी गोविंद प्रभ आसा जीउ ॥ हरि मेलहु संत जीउ गोविद प्रभ पासा जीउ ॥ सतिगुर मति नामु सदा परगासा जीउ ॥ जन नानक पूरिअड़ी मनि आसा जीउ ॥४॥५॥३१॥६९॥

(राग गउड़ी माझ -- SGGS 175) गउड़ी माझ महला ४ ॥
मेरा बिरही नामु मिलै ता जीवा जीउ ॥ मन अंदरि अम्रितु गुरमति हरि लीवा जीउ ॥ मनु हरि रंगि रतड़ा हरि रसु सदा पीवा जीउ ॥ हरि पाइअड़ा मनि जीवा जीउ ॥१॥

मेरै मनि तनि प्रेमु लगा हरि बाणु जीउ ॥ मेरा प्रीतमु मित्रु हरि पुरखु सुजाणु जीउ ॥ गुरु मेले संत हरि सुघड़ु सुजाणु जीउ ॥ हउ नाम विटहु कुरबाणु जीउ ॥२॥

हउ हरि हरि सजणु हरि मीतु दसाई जीउ ॥ हरि दसहु संतहु जी हरि खोजु पवाई जीउ ॥ सतिगुरु तुठड़ा दसे हरि पाई जीउ ॥ हरि नामे नामि समाई जीउ ॥३॥

मै वेदन प्रेमु हरि बिरहु लगाई जीउ ॥ गुर सरधा पूरि अम्रितु मुखि पाई जीउ ॥ हरि होहु दइआलु हरि नामु धिआई जीउ ॥ जन नानक हरि रसु पाई जीउ ॥४॥६॥२०॥१८॥३२॥७०॥

(राग गउड़ी पूरबी -- SGGS 234) रागु गउड़ी पूरबी महला ४ करहले
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
करहले मन परदेसीआ किउ मिलीऐ हरि माइ ॥ गुरु भागि पूरै पाइआ गलि मिलिआ पिआरा आइ ॥१॥

मन करहला सतिगुरु पुरखु धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

मन करहला वीचारीआ हरि राम नाम धिआइ ॥ जिथै लेखा मंगीऐ हरि आपे लए छडाइ ॥२॥

मन करहला अति निरमला मलु लागी हउमै आइ ॥ परतखि पिरु घरि नालि पिआरा विछुड़ि चोटा खाइ ॥३॥

मन करहला मेरे प्रीतमा हरि रिदै भालि भालाइ ॥ उपाइ कितै न लभई गुरु हिरदै हरि देखाइ ॥४॥

मन करहला मेरे प्रीतमा दिनु रैणि हरि लिव लाइ ॥ घरु जाइ पावहि रंग महली गुरु मेले हरि मेलाइ ॥५॥

मन करहला तूं मीतु मेरा पाखंडु लोभु तजाइ ॥ पाखंडि लोभी मारीऐ जम डंडु देइ सजाइ ॥६॥

मन करहला मेरे प्रान तूं मैलु पाखंडु भरमु गवाइ ॥ हरि अम्रित सरु गुरि पूरिआ मिलि संगती मलु लहि जाइ ॥७॥

मन करहला मेरे पिआरिआ इक गुर की सिख सुणाइ ॥ इहु मोहु माइआ पसरिआ अंति साथि न कोई जाइ ॥८॥

मन करहला मेरे साजना हरि खरचु लीआ पति पाइ ॥ हरि दरगह पैनाइआ हरि आपि लइआ गलि लाइ ॥९॥

मन करहला गुरि मंनिआ गुरमुखि कार कमाइ ॥ गुर आगै करि जोदड़ी जन नानक हरि मेलाइ ॥१०॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 234) गउड़ी महला ४ ॥
मन करहला वीचारीआ वीचारि देखु समालि ॥ बन फिरि थके बन वासीआ पिरु गुरमति रिदै निहालि ॥१॥

मन करहला गुर गोविंदु समालि ॥१॥ रहाउ ॥

मन करहला वीचारीआ मनमुख फाथिआ महा जालि ॥ गुरमुखि प्राणी मुकतु है हरि हरि नामु समालि ॥२॥

मन करहला मेरे पिआरिआ सतसंगति सतिगुरु भालि ॥ सतसंगति लगि हरि धिआईऐ हरि हरि चलै तेरै नालि ॥३॥

मन करहला वडभागीआ हरि एक नदरि निहालि ॥ आपि छडाए छुटीऐ सतिगुर चरण समालि ॥४॥

मन करहला मेरे पिआरिआ विचि देही जोति समालि ॥ गुरि नउ निधि नामु विखालिआ हरि दाति करी दइआलि ॥५॥

मन करहला तूं चंचला चतुराई छडि विकरालि ॥ हरि हरि नामु समालि तूं हरि मुकति करे अंत कालि ॥६॥

मन करहला वडभागीआ तूं गिआनु रतनु समालि ॥ गुर गिआनु खड़गु हथि धारिआ जमु मारिअड़ा जमकालि ॥७॥

अंतरि निधानु मन करहले भ्रमि भवहि बाहरि भालि ॥ गुरु पुरखु पूरा भेटिआ हरि सजणु लधड़ा नालि ॥८॥

रंगि रतड़े मन करहले हरि रंगु सदा समालि ॥ हरि रंगु कदे न उतरै गुर सेवा सबदु समालि ॥९॥

हम पंखी मन करहले हरि तरवरु पुरखु अकालि ॥ वडभागी गुरमुखि पाइआ जन नानक नामु समालि ॥१०॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 300) गउड़ी की वार महला ४ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सलोक मः ४ ॥
सतिगुरु पुरखु दइआलु है जिस नो समतु सभु कोइ ॥ एक द्रिसटि करि देखदा मन भावनी ते सिधि होइ ॥ सतिगुर विचि अम्रितु है हरि उतमु हरि पदु सोइ ॥ नानक किरपा ते हरि धिआईऐ गुरमुखि पावै कोइ ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 300) मः ४ ॥
हउमै माइआ सभ बिखु है नित जगि तोटा संसारि ॥ लाहा हरि धनु खटिआ गुरमुखि सबदु वीचारि ॥ हउमै मैलु बिखु उतरै हरि अम्रितु हरि उर धारि ॥ सभि कारज तिन के सिधि हहि जिन गुरमुखि किरपा धारि ॥ नानक जो धुरि मिले से मिलि रहे हरि मेले सिरजणहारि ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) पउड़ी ॥
तू सचा साहिबु सचु है सचु सचा गोसाई ॥ तुधुनो सभ धिआइदी सभ लगै तेरी पाई ॥ तेरी सिफति सुआलिउ सरूप है जिनि कीती तिसु पारि लघाई ॥ गुरमुखा नो फलु पाइदा सचि नामि समाई ॥ वडे मेरे साहिबा वडी तेरी वडिआई ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) सलोक मः ४ ॥
विणु नावै होरु सलाहणा सभु बोलणु फिका सादु ॥ मनमुख अहंकारु सलाहदे हउमै ममता वादु ॥ जिन सालाहनि से मरहि खपि जावै सभु अपवादु ॥ जन नानक गुरमुखि उबरे जपि हरि हरि परमानादु ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) मः ४ ॥
सतिगुर हरि प्रभु दसि नामु धिआई मनि हरी ॥ नानक नामु पवितु हरि मुखि बोली सभि दुख परहरी ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) पउड़ी ॥
तू आपे आपि निरंकारु है निरंजन हरि राइआ ॥ जिनी तू इक मनि सचु धिआइआ तिन का सभु दुखु गवाइआ ॥ तेरा सरीकु को नाही जिस नो लवै लाइ सुणाइआ ॥ तुधु जेवडु दाता तूहै निरंजना तूहै सचु मेरै मनि भाइआ ॥ सचे मेरे साहिबा सचे सचु नाइआ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) सलोक मः ४ ॥
मन अंतरि हउमै रोगु है भ्रमि भूले मनमुख दुरजना ॥ नानक रोगु गवाइ मिलि सतिगुर साधू सजना ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) मः ४ ॥
मनु तनु रता रंग सिउ गुरमुखि हरि गुणतासु ॥ जन नानक हरि सरणागती हरि मेले गुर साबासि ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) पउड़ी ॥
तू करता पुरखु अगमु है किसु नालि तू वड़ीऐ ॥ तुधु जेवडु होइ सु आखीऐ तुधु जेहा तूहै पड़ीऐ ॥ तू घटि घटि इकु वरतदा गुरमुखि परगड़ीऐ ॥ तू सचा सभस दा खसमु है सभ दू तू चड़ीऐ ॥ तू करहि सु सचे होइसी ता काइतु कड़ीऐ ॥३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) सलोक मः ४ ॥
मै मनि तनि प्रेमु पिरम का अठे पहर लगंनि ॥ जन नानक किरपा धारि प्रभ सतिगुर सुखि वसंनि ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) मः ४ ॥
जिन अंदरि प्रीति पिरम की जिउ बोलनि तिवै सोहंनि ॥ नानक हरि आपे जाणदा जिनि लाई प्रीति पिरंनि ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 301) पउड़ी ॥
तू करता आपि अभुलु है भुलण विचि नाही ॥ तू करहि सु सचे भला है गुर सबदि बुझाही ॥ तू करण कारण समरथु है दूजा को नाही ॥ तू साहिबु अगमु दइआलु है सभि तुधु धिआही ॥ सभि जीअ तेरे तू सभस दा तू सभ छडाही ॥४॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) सलोक मः ४ ॥
सुणि साजन प्रेम संदेसरा अखी तार लगंनि ॥ गुरि तुठै सजणु मेलिआ जन नानक सुखि सवंनि ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) मः ४ ॥
सतिगुरु दाता दइआलु है जिस नो दइआ सदा होइ ॥ सतिगुरु अंदरहु निरवैरु है सभु देखै ब्रहमु इकु सोइ ॥ निरवैरा नालि जि वैरु चलाइदे तिन विचहु तिसटिआ न कोइ ॥ सतिगुरु सभना दा भला मनाइदा तिस दा बुरा किउ होइ ॥ सतिगुर नो जेहा को इछदा तेहा फलु पाए कोइ ॥ नानक करता सभु किछु जाणदा जिदू किछु गुझा न होइ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) पउड़ी ॥
जिस नो साहिबु वडा करे सोई वड जाणी ॥ जिसु साहिब भावै तिसु बखसि लए सो साहिब मनि भाणी ॥ जे को ओस दी रीस करे सो मूड़ अजाणी ॥ जिस नो सतिगुरु मेले सु गुण रवै गुण आखि वखाणी ॥ नानक सचा सचु है बुझि सचि समाणी ॥५॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) सलोक मः ४ ॥
हरि सति निरंजन अमरु है निरभउ निरवैरु निरंकारु ॥ जिन जपिआ इक मनि इक चिति तिन लथा हउमै भारु ॥ जिन गुरमुखि हरि आराधिआ तिन संत जना जैकारु ॥ कोई निंदा करे पूरे सतिगुरू की तिस नो फिटु फिटु कहै सभु संसारु ॥ सतिगुर विचि आपि वरतदा हरि आपे रखणहारु ॥ धनु धंनु गुरू गुण गावदा तिस नो सदा सदा नमसकारु ॥ जन नानक तिन कउ वारिआ जिन जपिआ सिरजणहारु ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) मः ४ ॥
आपे धरती साजीअनु आपे आकासु ॥ विचि आपे जंत उपाइअनु मुखि आपे देइ गिरासु ॥ सभु आपे आपि वरतदा आपे ही गुणतासु ॥ जन नानक नामु धिआइ तू सभि किलविख कटे तासु ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) पउड़ी ॥
तू सचा साहिबु सचु है सचु सचे भावै ॥ जो तुधु सचु सलाहदे तिन जम कंकरु नेड़ि न आवै ॥ तिन के मुख दरि उजले जिन हरि हिरदै सचा भावै ॥ कूड़िआर पिछाहा सटीअनि कूड़ु हिरदै कपटु महा दुखु पावै ॥ मुह काले कूड़िआरीआ कूड़िआर कूड़ो होइ जावै ॥६॥

(राग गउड़ी -- SGGS 302) सलोक मः ४ ॥
सतिगुरु धरती धरम है तिसु विचि जेहा को बीजे तेहा फलु पाए ॥ गुरसिखी अम्रितु बीजिआ तिन अम्रित फलु हरि पाए ॥ ओना हलति पलति मुख उजले ओइ हरि दरगह सची पैनाए ॥ इकन्हा अंदरि खोटु नित खोटु कमावहि ओहु जेहा बीजे तेहा फलु खाए ॥ जा सतिगुरु सराफु नदरि करि देखै सुआवगीर सभि उघड़ि आए ॥ ओइ जेहा चितवहि नित तेहा पाइनि ओइ तेहो जेहे दयि वजाए ॥ नानक दुही सिरी खसमु आपे वरतै नित करि करि देखै चलत सबाए ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 303) मः ४ ॥
इकु मनु इकु वरतदा जितु लगै सो थाइ पाइ ॥ कोई गला करे घनेरीआ जि घरि वथु होवै साई खाइ ॥ बिनु सतिगुर सोझी ना पवै अहंकारु न विचहु जाइ ॥ अहंकारीआ नो दुख भुख है हथु तडहि घरि घरि मंगाइ ॥ कूड़ु ठगी गुझी ना रहै मुलमा पाजु लहि जाइ ॥ जिसु होवै पूरबि लिखिआ तिसु सतिगुरु मिलै प्रभु आइ ॥ जिउ लोहा पारसि भेटीऐ मिलि संगति सुवरनु होइ जाइ ॥ जन नानक के प्रभ तू धणी जिउ भावै तिवै चलाइ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 303) पउड़ी ॥
जिन हरि हिरदै सेविआ तिन हरि आपि मिलाए ॥ गुण की साझि तिन सिउ करी सभि अवगण सबदि जलाए ॥ अउगण विकणि पलरी जिसु देहि सु सचे पाए ॥ बलिहारी गुर आपणे जिनि अउगण मेटि गुण परगटीआए ॥ वडी वडिआई वडे की गुरमुखि आलाए ॥७॥

(राग गउड़ी -- SGGS 303) सलोक मः ४ ॥
सतिगुर विचि वडी वडिआई जो अनदिनु हरि हरि नामु धिआवै ॥ हरि हरि नामु रमत सुच संजमु हरि नामे ही त्रिपतावै ॥ हरि नामु ताणु हरि नामु दीबाणु हरि नामो रख करावै ॥ जो चितु लाइ पूजे गुर मूरति सो मन इछे फल पावै ॥ जो निंदा करे सतिगुर पूरे की तिसु करता मार दिवावै ॥ फेरि ओह वेला ओसु हथि न आवै ओहु आपणा बीजिआ आपे खावै ॥ नरकि घोरि मुहि कालै खड़िआ जिउ तसकरु पाइ गलावै ॥ फिरि सतिगुर की सरणी पवै ता उबरै जा हरि हरि नामु धिआवै ॥ हरि बाता आखि सुणाए नानकु हरि करते एवै भावै ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 303) मः ४ ॥
पूरे गुर का हुकमु न मंनै ओहु मनमुखु अगिआनु मुठा बिखु माइआ ॥ ओसु अंदरि कूड़ु कूड़ो करि बुझै अणहोदे झगड़े दयि ओस दै गलि पाइआ ॥ ओहु गल फरोसी करे बहुतेरी ओस दा बोलिआ किसै न भाइआ ॥ ओहु घरि घरि हंढै जिउ रंन दोहागणि ओसु नालि मुहु जोड़े ओसु भी लछणु लाइआ ॥ गुरमुखि होइ सु अलिपतो वरतै ओस दा पासु छडि गुर पासि बहि जाइआ ॥ जो गुरु गोपे आपणा सु भला नाही पंचहु ओनि लाहा मूलु सभु गवाइआ ॥ पहिला आगमु निगमु नानकु आखि सुणाए पूरे गुर का बचनु उपरि आइआ ॥ गुरसिखा वडिआई भावै गुर पूरे की मनमुखा ओह वेला हथि न आइआ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 304) पउड़ी ॥
सचु सचा सभ दू वडा है सो लए जिसु सतिगुरु टिके ॥ सो सतिगुरु जि सचु धिआइदा सचु सचा सतिगुरु इके ॥ सोई सतिगुरु पुरखु है जिनि पंजे दूत कीते वसि छिके ॥ जि बिनु सतिगुर सेवे आपु गणाइदे तिन अंदरि कूड़ु फिटु फिटु मुह फिके ॥ ओइ बोले किसै न भावनी मुह काले सतिगुर ते चुके ॥८॥

(राग गउड़ी -- SGGS 304) सलोक मः ४ ॥
हरि प्रभ का सभु खेतु है हरि आपि किरसाणी लाइआ ॥ गुरमुखि बखसि जमाईअनु मनमुखी मूलु गवाइआ ॥ सभु को बीजे आपणे भले नो हरि भावै सो खेतु जमाइआ ॥ गुरसिखी हरि अम्रितु बीजिआ हरि अम्रित नामु फलु अम्रितु पाइआ ॥ जमु चूहा किरस नित कुरकदा हरि करतै मारि कढाइआ ॥ किरसाणी जमी भाउ करि हरि बोहल बखस जमाइआ ॥ तिन का काड़ा अंदेसा सभु लाहिओनु जिनी सतिगुरु पुरखु धिआइआ ॥ जन नानक नामु अराधिआ आपि तरिआ सभु जगतु तराइआ ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 304) मः ४ ॥
सारा दिनु लालचि अटिआ मनमुखि होरे गला ॥ राती ऊघै दबिआ नवे सोत सभि ढिला ॥ मनमुखा दै सिरि जोरा अमरु है नित देवहि भला ॥ जोरा दा आखिआ पुरख कमावदे से अपवित अमेध खला ॥ कामि विआपे कुसुध नर से जोरा पुछि चला ॥ सतिगुर कै आखिऐ जो चलै सो सति पुरखु भल भला ॥ जोरा पुरख सभि आपि उपाइअनु हरि खेल सभि खिला ॥ सभ तेरी बणत बणावणी नानक भल भला ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 304) पउड़ी ॥
तू वेपरवाहु अथाहु है अतुलु किउ तुलीऐ ॥ से वडभागी जि तुधु धिआइदे जिन सतिगुरु मिलीऐ ॥ सतिगुर की बाणी सति सरूपु है गुरबाणी बणीऐ ॥ सतिगुर की रीसै होरि कचु पिचु बोलदे से कूड़िआर कूड़े झड़ि पड़ीऐ ॥ ओन्हा अंदरि होरु मुखि होरु है बिखु माइआ नो झखि मरदे कड़ीऐ ॥९॥

(राग गउड़ी -- SGGS 304) सलोक मः ४ ॥
सतिगुर की सेवा निरमली निरमल जनु होइ सु सेवा घाले ॥ जिन अंदरि कपटु विकारु झूठु ओइ आपे सचै वखि कढे जजमाले ॥ सचिआर सिख बहि सतिगुर पासि घालनि कूड़िआर न लभनी कितै थाइ भाले ॥ जिना सतिगुर का आखिआ सुखावै नाही तिना मुह भलेरे फिरहि दयि गाले ॥ जिन अंदरि प्रीति नही हरि केरी से किचरकु वेराईअनि मनमुख बेताले ॥ सतिगुर नो मिलै सु आपणा मनु थाइ रखै ओहु आपि वरतै आपणी वथु नाले ॥ जन नानक इकना गुरु मेलि सुखु देवै इकि आपे वखि कढै ठगवाले ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 305) मः ४ ॥
जिना अंदरि नामु निधानु हरि तिन के काज दयि आदे रासि ॥ तिन चूकी मुहताजी लोकन की हरि प्रभु अंगु करि बैठा पासि ॥ जां करता वलि ता सभु को वलि सभि दरसनु देखि करहि साबासि ॥ साहु पातिसाहु सभु हरि का कीआ सभि जन कउ आइ करहि रहरासि ॥ गुर पूरे की वडी वडिआई हरि वडा सेवि अतुलु सुखु पाइआ ॥ गुरि पूरै दानु दीआ हरि निहचलु नित बखसे चड़ै सवाइआ ॥ कोई निंदकु वडिआई देखि न सकै सो करतै आपि पचाइआ ॥ जनु नानकु गुण बोलै करते के भगता नो सदा रखदा आइआ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 305) पउड़ी ॥
तू साहिबु अगम दइआलु है वड दाता दाणा ॥ तुधु जेवडु मै होरु को दिसि न आवई तूहैं सुघड़ु मेरै मनि भाणा ॥ मोहु कुट्मबु दिसि आवदा सभु चलणहारा आवण जाणा ॥ जो बिनु सचे होरतु चितु लाइदे से कूड़िआर कूड़ा तिन माणा ॥ नानक सचु धिआइ तू बिनु सचे पचि पचि मुए अजाणा ॥१०॥

(राग गउड़ी -- SGGS 305) सलोक मः ४ ॥
अगो दे सत भाउ न दिचै पिछो दे आखिआ कमि न आवै ॥ अध विचि फिरै मनमुखु वेचारा गली किउ सुखु पावै ॥ जिसु अंदरि प्रीति नही सतिगुर की सु कूड़ी आवै कूड़ी जावै ॥ जे क्रिपा करे मेरा हरि प्रभु करता तां सतिगुरु पारब्रहमु नदरी आवै ॥ ता अपिउ पीवै सबदु गुर केरा सभु काड़ा अंदेसा भरमु चुकावै ॥ सदा अनंदि रहै दिनु राती जन नानक अनदिनु हरि गुण गावै ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 305) मः ४ ॥
गुर सतिगुर का जो सिखु अखाए सु भलके उठि हरि नामु धिआवै ॥ उदमु करे भलके परभाती इसनानु करे अम्रित सरि नावै ॥ उपदेसि गुरू हरि हरि जपु जापै सभि किलविख पाप दोख लहि जावै ॥ फिरि चड़ै दिवसु गुरबाणी गावै बहदिआ उठदिआ हरि नामु धिआवै ॥ जो सासि गिरासि धिआए मेरा हरि हरि सो गुरसिखु गुरू मनि भावै ॥ जिस नो दइआलु होवै मेरा सुआमी तिसु गुरसिख गुरू उपदेसु सुणावै ॥ जनु नानकु धूड़ि मंगै तिसु गुरसिख की जो आपि जपै अवरह नामु जपावै ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 306) पउड़ी ॥
जो तुधु सचु धिआइदे से विरले थोड़े ॥ जो मनि चिति इकु अराधदे तिन की बरकति खाहि असंख करोड़े ॥ तुधुनो सभ धिआइदी से थाइ पए जो साहिब लोड़े ॥ जो बिनु सतिगुर सेवे खादे पैनदे से मुए मरि जमे कोड़्हे ॥ ओइ हाजरु मिठा बोलदे बाहरि विसु कढहि मुखि घोले ॥ मनि खोटे दयि विछोड़े ॥११॥

(राग गउड़ी -- SGGS 306) सलोक मः ४ ॥
मलु जूई भरिआ नीला काला खिधोलड़ा तिनि वेमुखि वेमुखै नो पाइआ ॥ पासि न देई कोई बहणि जगत महि गूह पड़ि सगवी मलु लाइ मनमुखु आइआ ॥ पराई जो निंदा चुगली नो वेमुखु करि कै भेजिआ ओथै भी मुहु काला दुहा वेमुखा दा कराइआ ॥ तड़ सुणिआ सभतु जगत विचि भाई वेमुखु सणै नफरै पउली पउदी फावा होइ कै उठि घरि आइआ ॥ अगै संगती कुड़मी वेमुखु रलणा न मिलै ता वहुटी भतीजीं फिरि आणि घरि पाइआ ॥ हलतु पलतु दोवै गए नित भुखा कूके तिहाइआ ॥ धनु धनु सुआमी करता पुरखु है जिनि निआउ सचु बहि आपि कराइआ ॥ जो निंदा करे सतिगुर पूरे की सो साचै मारि पचाइआ ॥ एहु अखरु तिनि आखिआ जिनि जगतु सभु उपाइआ ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 306) मः ४ ॥
साहिबु जिस का नंगा भुखा होवै तिस दा नफरु किथहु रजि खाए ॥ जि साहिब कै घरि वथु होवै सु नफरै हथि आवै अणहोदी किथहु पाए ॥ जिस दी सेवा कीती फिरि लेखा मंगीऐ सा सेवा अउखी होई ॥ नानक सेवा करहु हरि गुर सफल दरसन की फिरि लेखा मंगै न कोई ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 306) पउड़ी ॥
नानक वीचारहि संत जन चारि वेद कहंदे ॥ भगत मुखै ते बोलदे से वचन होवंदे ॥ प्रगट पहारा जापदा सभि लोक सुणंदे ॥ सुखु न पाइनि मुगध नर संत नालि खहंदे ॥ ओइ लोचनि ओना गुणै नो ओइ अहंकारि सड़ंदे ॥ ओइ विचारे किआ करहि जा भाग धुरि मंदे ॥ जो मारे तिनि पारब्रहमि से किसै न संदे ॥ वैरु करहि निरवैर नालि धरम निआइ पचंदे ॥ जो जो संति सरापिआ से फिरहि भवंदे ॥ पेडु मुंढाहूं कटिआ तिसु डाल सुकंदे ॥१२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 306) सलोक मः ४ ॥
अंतरि हरि गुरू धिआइदा वडी वडिआई ॥ तुसि दिती पूरै सतिगुरू घटै नाही इकु तिलु किसै दी घटाई ॥ सचु साहिबु सतिगुरू कै वलि है तां झखि झखि मरै सभ लोकाई ॥ निंदका के मुह काले करे हरि करतै आपि वधाई ॥ जिउ जिउ निंदक निंद करहि तिउ तिउ नित नित चड़ै सवाई ॥ जन नानक हरि आराधिआ तिनि पैरी आणि सभ पाई ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 307) मः ४ ॥
सतिगुर सेती गणत जि रखै हलतु पलतु सभु तिस का गइआ ॥ नित झहीआ पाए झगू सुटे झखदा झखदा झड़ि पइआ ॥ नित उपाव करै माइआ धन कारणि अगला धनु भी उडि गइआ ॥ किआ ओहु खटे किआ ओहु खावै जिसु अंदरि सहसा दुखु पइआ ॥ निरवैरै नालि जि वैरु रचाए सभु पापु जगतै का तिनि सिरि लइआ ॥ ओसु अगै पिछै ढोई नाही जिसु अंदरि निंदा मुहि अंबु पइआ ॥ जे सुइने नो ओहु हथु पाए ता खेहू सेती रलि गइआ ॥ जे गुर की सरणी फिरि ओहु आवै ता पिछले अउगण बखसि लइआ ॥ जन नानक अनदिनु नामु धिआइआ हरि सिमरत किलविख पाप गइआ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 307) पउड़ी ॥
तूहै सचा सचु तू सभ दू उपरि तू दीबाणु ॥ जो तुधु सचु धिआइदे सचु सेवनि सचे तेरा माणु ॥ ओना अंदरि सचु मुख उजले सचु बोलनि सचे तेरा ताणु ॥ से भगत जिनी गुरमुखि सालाहिआ सचु सबदु नीसाणु ॥ सचु जि सचे सेवदे तिन वारी सद कुरबाणु ॥१३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 307) सलोक मः ४ ॥
धुरि मारे पूरै सतिगुरू सेई हुणि सतिगुरि मारे ॥ जे मेलण नो बहुतेरा लोचीऐ न देई मिलण करतारे ॥ सतसंगति ढोई ना लहनि विचि संगति गुरि वीचारे ॥ कोई जाइ मिलै हुणि ओना नो तिसु मारे जमु जंदारे ॥ गुरि बाबै फिटके से फिटे गुरि अंगदि कीते कूड़िआरे ॥ गुरि तीजी पीड़ी वीचारिआ किआ हथि एना वेचारे ॥ गुरु चउथी पीड़ी टिकिआ तिनि निंदक दुसट सभि तारे ॥ कोई पुतु सिखु सेवा करे सतिगुरू की तिसु कारज सभि सवारे ॥ जो इछै सो फलु पाइसी पुतु धनु लखमी खड़ि मेले हरि निसतारे ॥ सभि निधान सतिगुरू विचि जिसु अंदरि हरि उर धारे ॥ सो पाए पूरा सतिगुरू जिसु लिखिआ लिखतु लिलारे ॥ जनु नानकु मागै धूड़ि तिन जो गुरसिख मित पिआरे ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 308) मः ४ ॥
जिन कउ आपि देइ वडिआई जगतु भी आपे आणि तिन कउ पैरी पाए ॥ डरीऐ तां जे किछु आप दू कीचै सभु करता आपणी कला वधाए ॥ देखहु भाई एहु अखाड़ा हरि प्रीतम सचे का जिनि आपणै जोरि सभि आणि निवाए ॥ आपणिआ भगता की रख करे हरि सुआमी निंदका दुसटा के मुह काले कराए ॥ सतिगुर की वडिआई नित चड़ै सवाई हरि कीरति भगति नित आपि कराए ॥ अनदिनु नामु जपहु गुरसिखहु हरि करता सतिगुरु घरी वसाए ॥ सतिगुर की बाणी सति सति करि जाणहु गुरसिखहु हरि करता आपि मुहहु कढाए ॥ गुरसिखा के मुह उजले करे हरि पिआरा गुर का जैकारु संसारि सभतु कराए ॥ जनु नानकु हरि का दासु है हरि दासन की हरि पैज रखाए ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 308) पउड़ी ॥
तू सचा साहिबु आपि है सचु साह हमारे ॥ सचु पूजी नामु द्रिड़ाइ प्रभ वणजारे थारे ॥ सचु सेवहि सचु वणंजि लैहि गुण कथह निरारे ॥ सेवक भाइ से जन मिले गुर सबदि सवारे ॥ तू सचा साहिबु अलखु है गुर सबदि लखारे ॥१४॥

(राग गउड़ी -- SGGS 308) सलोक मः ४ ॥
जिसु अंदरि ताति पराई होवै तिस दा कदे न होवी भला ॥ ओस दै आखिऐ कोई न लगै नित ओजाड़ी पूकारे खला ॥ जिसु अंदरि चुगली चुगलो वजै कीता करतिआ ओस दा सभु गइआ ॥ नित चुगली करे अणहोदी पराई मुहु कढि न सकै ओस दा काला भइआ ॥ करम धरती सरीरु कलिजुग विचि जेहा को बीजे तेहा को खाए ॥ गला उपरि तपावसु न होई विसु खाधी ततकाल मरि जाए ॥ भाई वेखहु निआउ सचु करते का जेहा कोई करे तेहा कोई पाए ॥ जन नानक कउ सभ सोझी पाई हरि दर कीआ बाता आखि सुणाए ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 308) मः ४ ॥
होदै परतखि गुरू जो विछुड़े तिन कउ दरि ढोई नाही ॥ कोई जाइ मिलै तिन निंदका मुह फिके थुक थुक मुहि पाही ॥ जो सतिगुरि फिटके से सभ जगति फिटके नित भ्मभल भूसे खाही ॥ जिन गुरु गोपिआ आपणा से लैदे ढहा फिराही ॥ तिन की भुख कदे न उतरै नित भुखा भुख कूकाही ॥ ओना दा आखिआ को ना सुणै नित हउले हउलि मराही ॥ सतिगुर की वडिआई वेखि न सकनी ओना अगै पिछै थाउ नाही ॥ जो सतिगुरि मारे तिन जाइ मिलहि रहदी खुहदी सभ पति गवाही ॥ ओइ अगै कुसटी गुर के फिटके जि ओसु मिलै तिसु कुसटु उठाही ॥ हरि तिन का दरसनु ना करहु जो दूजै भाइ चितु लाही ॥ धुरि करतै आपि लिखि पाइआ तिसु नालि किहु चारा नाही ॥ जन नानक नामु अराधि तू तिसु अपड़ि को न सकाही ॥ नावै की वडिआई वडी है नित सवाई चड़ै चड़ाही ॥२॥


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