Pt 5 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 5 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग माझ -- SGGS 150) पउड़ी ॥
हउ ढाढी वेकारु कारै लाइआ ॥ राति दिहै कै वार धुरहु फुरमाइआ ॥ ढाढी सचै महलि खसमि बुलाइआ ॥ सची सिफति सालाह कपड़ा पाइआ ॥ सचा अम्रित नामु भोजनु आइआ ॥ गुरमती खाधा रजि तिनि सुखु पाइआ ॥ ढाढी करे पसाउ सबदु वजाइआ ॥ नानक सचु सालाहि पूरा पाइआ ॥२७॥ सुधु

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 151) रागु गउड़ी गुआरेरी महला १ चउपदे दुपदे
ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
भउ मुचु भारा वडा तोलु ॥ मन मति हउली बोले बोलु ॥ सिरि धरि चलीऐ सहीऐ भारु ॥ नदरी करमी गुर बीचारु ॥१॥

भै बिनु कोइ न लंघसि पारि ॥ भै भउ राखिआ भाइ सवारि ॥१॥ रहाउ ॥

भै तनि अगनि भखै भै नालि ॥ भै भउ घड़ीऐ सबदि सवारि ॥ भै बिनु घाड़त कचु निकच ॥ अंधा सचा अंधी सट ॥२॥

बुधी बाजी उपजै चाउ ॥ सहस सिआणप पवै न ताउ ॥ नानक मनमुखि बोलणु वाउ ॥ अंधा अखरु वाउ दुआउ ॥३॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 151) गउड़ी महला १ ॥
डरि घरु घरि डरु डरि डरु जाइ ॥ सो डरु केहा जितु डरि डरु पाइ ॥ तुधु बिनु दूजी नाही जाइ ॥ जो किछु वरतै सभ तेरी रजाइ ॥१॥

डरीऐ जे डरु होवै होरु ॥ डरि डरि डरणा मन का सोरु ॥१॥ रहाउ ॥

ना जीउ मरै न डूबै तरै ॥ जिनि किछु कीआ सो किछु करै ॥ हुकमे आवै हुकमे जाइ ॥ आगै पाछै हुकमि समाइ ॥२॥

हंसु हेतु आसा असमानु ॥ तिसु विचि भूख बहुतु नै सानु ॥ भउ खाणा पीणा आधारु ॥ विणु खाधे मरि होहि गवार ॥३॥

जिस का कोइ कोई कोइ कोइ ॥ सभु को तेरा तूं सभना का सोइ ॥ जा के जीअ जंत धनु मालु ॥ नानक आखणु बिखमु बीचारु ॥४॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 151) गउड़ी महला १ ॥
माता मति पिता संतोखु ॥ सतु भाई करि एहु विसेखु ॥१॥

कहणा है किछु कहणु न जाइ ॥ तउ कुदरति कीमति नही पाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सरम सुरति दुइ ससुर भए ॥ करणी कामणि करि मन लए ॥२॥

साहा संजोगु वीआहु विजोगु ॥ सचु संतति कहु नानक जोगु ॥३॥३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 152) गउड़ी महला १ ॥
पउणै पाणी अगनी का मेलु ॥ चंचल चपल बुधि का खेलु ॥ नउ दरवाजे दसवा दुआरु ॥ बुझु रे गिआनी एहु बीचारु ॥१॥

कथता बकता सुनता सोई ॥ आपु बीचारे सु गिआनी होई ॥१॥ रहाउ ॥

देही माटी बोलै पउणु ॥ बुझु रे गिआनी मूआ है कउणु ॥ मूई सुरति बादु अहंकारु ॥ ओहु न मूआ जो देखणहारु ॥२॥

जै कारणि तटि तीरथ जाही ॥ रतन पदारथ घट ही माही ॥ पड़ि पड़ि पंडितु बादु वखाणै ॥ भीतरि होदी वसतु न जाणै ॥३॥

हउ न मूआ मेरी मुई बलाइ ॥ ओहु न मूआ जो रहिआ समाइ ॥ कहु नानक गुरि ब्रहमु दिखाइआ ॥ मरता जाता नदरि न आइआ ॥४॥४॥

(राग गउड़ी दखणी -- SGGS 152) गउड़ी महला १ दखणी ॥
सुणि सुणि बूझै मानै नाउ ॥ ता कै सद बलिहारै जाउ ॥ आपि भुलाए ठउर न ठाउ ॥ तूं समझावहि मेलि मिलाउ ॥१॥

नामु मिलै चलै मै नालि ॥ बिनु नावै बाधी सभ कालि ॥१॥ रहाउ ॥

खेती वणजु नावै की ओट ॥ पापु पुंनु बीज की पोट ॥ कामु क्रोधु जीअ महि चोट ॥ नामु विसारि चले मनि खोट ॥२॥

साचे गुर की साची सीख ॥ तनु मनु सीतलु साचु परीख ॥ जल पुराइनि रस कमल परीख ॥ सबदि रते मीठे रस ईख ॥३॥

हुकमि संजोगी गड़ि दस दुआर ॥ पंच वसहि मिलि जोति अपार ॥ आपि तुलै आपे वणजार ॥ नानक नामि सवारणहार ॥४॥५॥

(राग गउड़ी -- SGGS 152) गउड़ी महला १ ॥
जातो जाइ कहा ते आवै ॥ कह उपजै कह जाइ समावै ॥ किउ बाधिओ किउ मुकती पावै ॥ किउ अबिनासी सहजि समावै ॥१॥

नामु रिदै अम्रितु मुखि नामु ॥ नरहर नामु नरहर निहकामु ॥१॥ रहाउ ॥

सहजे आवै सहजे जाइ ॥ मन ते उपजै मन माहि समाइ ॥ गुरमुखि मुकतो बंधु न पाइ ॥ सबदु बीचारि छुटै हरि नाइ ॥२॥

तरवर पंखी बहु निसि बासु ॥ सुख दुखीआ मनि मोह विणासु ॥ साझ बिहाग तकहि आगासु ॥ दह दिसि धावहि करमि लिखिआसु ॥३॥

नाम संजोगी गोइलि थाटु ॥ काम क्रोध फूटै बिखु माटु ॥ बिनु वखर सूनो घरु हाटु ॥ गुर मिलि खोले बजर कपाट ॥४॥

साधु मिलै पूरब संजोग ॥ सचि रहसे पूरे हरि लोग ॥ मनु तनु दे लै सहजि सुभाइ ॥ नानक तिन कै लागउ पाइ ॥५॥६॥

(राग गउड़ी -- SGGS 153) गउड़ी महला १ ॥
कामु क्रोधु माइआ महि चीतु ॥ झूठ विकारि जागै हित चीतु ॥ पूंजी पाप लोभ की कीतु ॥ तरु तारी मनि नामु सुचीतु ॥१॥

वाहु वाहु साचे मै तेरी टेक ॥ हउ पापी तूं निरमलु एक ॥१॥ रहाउ ॥

अगनि पाणी बोलै भड़वाउ ॥ जिहवा इंद्री एकु सुआउ ॥ दिसटि विकारी नाही भउ भाउ ॥ आपु मारे ता पाए नाउ ॥२॥

सबदि मरै फिरि मरणु न होइ ॥ बिनु मूए किउ पूरा होइ ॥ परपंचि विआपि रहिआ मनु दोइ ॥ थिरु नाराइणु करे सु होइ ॥३॥

बोहिथि चड़उ जा आवै वारु ॥ ठाके बोहिथ दरगह मार ॥ सचु सालाही धंनु गुरदुआरु ॥ नानक दरि घरि एकंकारु ॥४॥७॥

(राग गउड़ी -- SGGS 153) गउड़ी महला १ ॥
उलटिओ कमलु ब्रहमु बीचारि ॥ अम्रित धार गगनि दस दुआरि ॥ त्रिभवणु बेधिआ आपि मुरारि ॥१॥

रे मन मेरे भरमु न कीजै ॥ मनि मानिऐ अम्रित रसु पीजै ॥१॥ रहाउ ॥

जनमु जीति मरणि मनु मानिआ ॥ आपि मूआ मनु मन ते जानिआ ॥ नजरि भई घरु घर ते जानिआ ॥२॥

जतु सतु तीरथु मजनु नामि ॥ अधिक बिथारु करउ किसु कामि ॥ नर नाराइण अंतरजामि ॥३॥

आन मनउ तउ पर घर जाउ ॥ किसु जाचउ नाही को थाउ ॥ नानक गुरमति सहजि समाउ ॥४॥८॥

(राग गउड़ी -- SGGS 153) गउड़ी महला १ ॥
सतिगुरु मिलै सु मरणु दिखाए ॥ मरण रहण रसु अंतरि भाए ॥ गरबु निवारि गगन पुरु पाए ॥१॥

मरणु लिखाइ आए नही रहणा ॥ हरि जपि जापि रहणु हरि सरणा ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुरु मिलै त दुबिधा भागै ॥ कमलु बिगासि मनु हरि प्रभ लागै ॥ जीवतु मरै महा रसु आगै ॥२॥

सतिगुरि मिलिऐ सच संजमि सूचा ॥ गुर की पउड़ी ऊचो ऊचा ॥ करमि मिलै जम का भउ मूचा ॥३॥

गुरि मिलिऐ मिलि अंकि समाइआ ॥ करि किरपा घरु महलु दिखाइआ ॥ नानक हउमै मारि मिलाइआ ॥४॥९॥

(राग गउड़ी -- SGGS 154) गउड़ी महला १ ॥
किरतु पइआ नह मेटै कोइ ॥ किआ जाणा किआ आगै होइ ॥ जो तिसु भाणा सोई हूआ ॥ अवरु न करणै वाला दूआ ॥१॥

ना जाणा करम केवड तेरी दाति ॥ करमु धरमु तेरे नाम की जाति ॥१॥ रहाउ ॥

तू एवडु दाता देवणहारु ॥ तोटि नाही तुधु भगति भंडार ॥ कीआ गरबु न आवै रासि ॥ जीउ पिंडु सभु तेरै पासि ॥२॥

तू मारि जीवालहि बखसि मिलाइ ॥ जिउ भावी तिउ नामु जपाइ ॥ तूं दाना बीना साचा सिरि मेरै ॥ गुरमति देइ भरोसै तेरै ॥३॥

तन महि मैलु नाही मनु राता ॥ गुर बचनी सचु सबदि पछाता ॥ तेरा ताणु नाम की वडिआई ॥ नानक रहणा भगति सरणाई ॥४॥१०॥

(राग गउड़ी -- SGGS 154) गउड़ी महला १ ॥
जिनि अकथु कहाइआ अपिओ पीआइआ ॥ अन भै विसरे नामि समाइआ ॥१॥

किआ डरीऐ डरु डरहि समाना ॥ पूरे गुर कै सबदि पछाना ॥१॥ रहाउ ॥

जिसु नर रामु रिदै हरि रासि ॥ सहजि सुभाइ मिले साबासि ॥२॥

जाहि सवारै साझ बिआल ॥ इत उत मनमुख बाधे काल ॥३॥

अहिनिसि रामु रिदै से पूरे ॥ नानक राम मिले भ्रम दूरे ॥४॥११॥

(राग गउड़ी -- SGGS 154) गउड़ी महला १ ॥
जनमि मरै त्रै गुण हितकारु ॥ चारे बेद कथहि आकारु ॥ तीनि अवसथा कहहि वखिआनु ॥ तुरीआवसथा सतिगुर ते हरि जानु ॥१॥

राम भगति गुर सेवा तरणा ॥ बाहुड़ि जनमु न होइ है मरणा ॥१॥ रहाउ ॥

चारि पदारथ कहै सभु कोई ॥ सिम्रिति सासत पंडित मुखि सोई ॥ बिनु गुर अरथु बीचारु न पाइआ ॥ मुकति पदारथु भगति हरि पाइआ ॥२॥

जा कै हिरदै वसिआ हरि सोई ॥ गुरमुखि भगति परापति होई ॥ हरि की भगति मुकति आनंदु ॥ गुरमति पाए परमानंदु ॥३॥

जिनि पाइआ गुरि देखि दिखाइआ ॥ आसा माहि निरासु बुझाइआ ॥ दीना नाथु सरब सुखदाता ॥ नानक हरि चरणी मनु राता ॥४॥१२॥

(राग गउड़ी चेती -- SGGS 154) गउड़ी चेती महला १ ॥
अम्रित काइआ रहै सुखाली बाजी इहु संसारो ॥ लबु लोभु मुचु कूड़ु कमावहि बहुतु उठावहि भारो ॥ तूं काइआ मै रुलदी देखी जिउ धर उपरि छारो ॥१॥

सुणि सुणि सिख हमारी ॥ सुक्रितु कीता रहसी मेरे जीअड़े बहुड़ि न आवै वारी ॥१॥ रहाउ ॥

हउ तुधु आखा मेरी काइआ तूं सुणि सिख हमारी ॥ निंदा चिंदा करहि पराई झूठी लाइतबारी ॥ वेलि पराई जोहहि जीअड़े करहि चोरी बुरिआरी ॥ हंसु चलिआ तूं पिछै रहीएहि छुटड़ि होईअहि नारी ॥२॥

तूं काइआ रहीअहि सुपनंतरि तुधु किआ करम कमाइआ ॥ करि चोरी मै जा किछु लीआ ता मनि भला भाइआ ॥ हलति न सोभा पलति न ढोई अहिला जनमु गवाइआ ॥३॥

हउ खरी दुहेली होई बाबा नानक मेरी बात न पुछै कोई ॥१॥ रहाउ ॥

ताजी तुरकी सुइना रुपा कपड़ केरे भारा ॥ किस ही नालि न चले नानक झड़ि झड़ि पए गवारा ॥ कूजा मेवा मै सभ किछु चाखिआ इकु अम्रितु नामु तुमारा ॥४॥

दे दे नीव दिवाल उसारी भसमंदर की ढेरी ॥ संचे संचि न देई किस ही अंधु जाणै सभ मेरी ॥ सोइन लंका सोइन माड़ी स्मपै किसै न केरी ॥५॥

सुणि मूरख मंन अजाणा ॥ होगु तिसै का भाणा ॥१॥ रहाउ ॥

साहु हमारा ठाकुरु भारा हम तिस के वणजारे ॥ जीउ पिंडु सभ रासि तिसै की मारि आपे जीवाले ॥६॥१॥१३॥

(राग गउड़ी चेती -- SGGS 155) गउड़ी चेती महला १ ॥
अवरि पंच हम एक जना किउ राखउ घर बारु मना ॥ मारहि लूटहि नीत नीत किसु आगै करी पुकार जना ॥१॥

स्री राम नामा उचरु मना ॥ आगै जम दलु बिखमु घना ॥१॥ रहाउ ॥

उसारि मड़ोली राखै दुआरा भीतरि बैठी सा धना ॥ अम्रित केल करे नित कामणि अवरि लुटेनि सु पंच जना ॥२॥

ढाहि मड़ोली लूटिआ देहुरा सा धन पकड़ी एक जना ॥ जम डंडा गलि संगलु पड़िआ भागि गए से पंच जना ॥३॥

कामणि लोड़ै सुइना रुपा मित्र लुड़ेनि सु खाधाता ॥ नानक पाप करे तिन कारणि जासी जमपुरि बाधाता ॥४॥२॥१४॥

(राग गउड़ी चेती -- SGGS 155) गउड़ी चेती महला १ ॥
मुंद्रा ते घट भीतरि मुंद्रा कांइआ कीजै खिंथाता ॥ पंच चेले वसि कीजहि रावल इहु मनु कीजै डंडाता ॥१॥

जोग जुगति इव पावसिता ॥ एकु सबदु दूजा होरु नासति कंद मूलि मनु लावसिता ॥१॥ रहाउ ॥

मूंडि मुंडाइऐ जे गुरु पाईऐ हम गुरु कीनी गंगाता ॥ त्रिभवण तारणहारु सुआमी एकु न चेतसि अंधाता ॥२॥

करि पट्मबु गली मनु लावसि संसा मूलि न जावसिता ॥ एकसु चरणी जे चितु लावहि लबि लोभि की धावसिता ॥३॥

जपसि निरंजनु रचसि मना ॥ काहे बोलहि जोगी कपटु घना ॥१॥ रहाउ ॥

काइआ कमली हंसु इआणा मेरी मेरी करत बिहाणीता ॥ प्रणवति नानकु नागी दाझै फिरि पाछै पछुताणीता ॥४॥३॥१५॥

(राग गउड़ी चेती -- SGGS 156) गउड़ी चेती महला १ ॥
अउखध मंत्र मूलु मन एकै जे करि द्रिड़ु चितु कीजै रे ॥ जनम जनम के पाप करम के काटनहारा लीजै रे ॥१॥

मन एको साहिबु भाई रे ॥ तेरे तीनि गुणा संसारि समावहि अलखु न लखणा जाई रे ॥१॥ रहाउ ॥

सकर खंडु माइआ तनि मीठी हम तउ पंड उचाई रे ॥ राति अनेरी सूझसि नाही लजु टूकसि मूसा भाई रे ॥२॥

मनमुखि करहि तेता दुखु लागै गुरमुखि मिलै वडाई रे ॥ जो तिनि कीआ सोई होआ किरतु न मेटिआ जाई रे ॥३॥

सुभर भरे न होवहि ऊणे जो राते रंगु लाई रे ॥ तिन की पंक होवै जे नानकु तउ मूड़ा किछु पाई रे ॥४॥४॥१६॥

(राग गउड़ी चेती -- SGGS 156) गउड़ी चेती महला १ ॥
कत की माई बापु कत केरा किदू थावहु हम आए ॥ अगनि बि्मब जल भीतरि निपजे काहे कमि उपाए ॥१॥

मेरे साहिबा कउणु जाणै गुण तेरे ॥ कहे न जानी अउगण मेरे ॥१॥ रहाउ ॥

केते रुख बिरख हम चीने केते पसू उपाए ॥ केते नाग कुली महि आए केते पंख उडाए ॥२॥

हट पटण बिज मंदर भंनै करि चोरी घरि आवै ॥ अगहु देखै पिछहु देखै तुझ ते कहा छपावै ॥३॥

तट तीरथ हम नव खंड देखे हट पटण बाजारा ॥ लै कै तकड़ी तोलणि लागा घट ही महि वणजारा ॥४॥

जेता समुंदु सागरु नीरि भरिआ तेते अउगण हमारे ॥ दइआ करहु किछु मिहर उपावहु डुबदे पथर तारे ॥५॥

जीअड़ा अगनि बराबरि तपै भीतरि वगै काती ॥ प्रणवति नानकु हुकमु पछाणै सुखु होवै दिनु राती ॥६॥५॥१७॥

(राग गउड़ी बैरागणि -- SGGS 156) गउड़ी बैरागणि महला १ ॥
रैणि गवाई सोइ कै दिवसु गवाइआ खाइ ॥ हीरे जैसा जनमु है कउडी बदले जाइ ॥१॥

नामु न जानिआ राम का ॥ मूड़े फिरि पाछै पछुताहि रे ॥१॥ रहाउ ॥

अनता धनु धरणी धरे अनत न चाहिआ जाइ ॥ अनत कउ चाहन जो गए से आए अनत गवाइ ॥२॥

आपण लीआ जे मिलै ता सभु को भागठु होइ ॥ करमा उपरि निबड़ै जे लोचै सभु कोइ ॥३॥

नानक करणा जिनि कीआ सोई सार करेइ ॥ हुकमु न जापी खसम का किसै वडाई देइ ॥४॥१॥१८॥

(राग गउड़ी बैरागणि -- SGGS 157) गउड़ी बैरागणि महला १ ॥
हरणी होवा बनि बसा कंद मूल चुणि खाउ ॥ गुर परसादी मेरा सहु मिलै वारि वारि हउ जाउ जीउ ॥१॥

मै बनजारनि राम की ॥ तेरा नामु वखरु वापारु जी ॥१॥ रहाउ ॥

कोकिल होवा अंबि बसा सहजि सबद बीचारु ॥ सहजि सुभाइ मेरा सहु मिलै दरसनि रूपि अपारु ॥२॥

मछुली होवा जलि बसा जीअ जंत सभि सारि ॥ उरवारि पारि मेरा सहु वसै हउ मिलउगी बाह पसारि ॥३॥

नागनि होवा धर वसा सबदु वसै भउ जाइ ॥ नानक सदा सोहागणी जिन जोती जोति समाइ ॥४॥२॥१९॥

(राग गउड़ी पूरबी दीपकी -- SGGS 157) गउड़ी पूरबी दीपकी महला १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥ तितु घरि गावहु सोहिला सिवरहु सिरजणहारो ॥१॥

तुम गावहु मेरे निरभउ का सोहिला ॥ हउ वारी जाउ जितु सोहिलै सदा सुखु होइ ॥१॥ रहाउ ॥

नित नित जीअड़े समालीअनि देखैगा देवणहारु ॥ तेरे दानै कीमति ना पवै तिसु दाते कवणु सुमारु ॥२॥

स्मबति साहा लिखिआ मिलि करि पावहु तेलु ॥ देहु सजण आसीसड़ीआ जिउ होवै साहिब सिउ मेलु ॥३॥

घरि घरि एहो पाहुचा सदड़े नित पवंनि ॥ सदणहारा सिमरीऐ नानक से दिह आवंनि ॥४॥१॥२०॥

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 220) रागु गउड़ी असटपदीआ महला १ गउड़ी गुआरेरी
ੴ सतिनामु करता पुरखु गुरप्रसादि ॥
निधि सिधि निरमल नामु बीचारु ॥ पूरन पूरि रहिआ बिखु मारि ॥ त्रिकुटी छूटी बिमल मझारि ॥ गुर की मति जीइ आई कारि ॥१॥

इन बिधि राम रमत मनु मानिआ ॥ गिआन अंजनु गुर सबदि पछानिआ ॥१॥ रहाउ ॥

इकु सुखु मानिआ सहजि मिलाइआ ॥ निरमल बाणी भरमु चुकाइआ ॥ लाल भए सूहा रंगु माइआ ॥ नदरि भई बिखु ठाकि रहाइआ ॥२॥

उलट भई जीवत मरि जागिआ ॥ सबदि रवे मनु हरि सिउ लागिआ ॥ रसु संग्रहि बिखु परहरि तिआगिआ ॥ भाइ बसे जम का भउ भागिआ ॥३॥

साद रहे बादं अहंकारा ॥ चितु हरि सिउ राता हुकमि अपारा ॥ जाति रहे पति के आचारा ॥ द्रिसटि भई सुखु आतम धारा ॥४॥

तुझ बिनु कोइ न देखउ मीतु ॥ किसु सेवउ किसु देवउ चीतु ॥ किसु पूछउ किसु लागउ पाइ ॥ किसु उपदेसि रहा लिव लाइ ॥५॥

गुर सेवी गुर लागउ पाइ ॥ भगति करी राचउ हरि नाइ ॥ सिखिआ दीखिआ भोजन भाउ ॥ हुकमि संजोगी निज घरि जाउ ॥६॥

गरब गतं सुख आतम धिआना ॥ जोति भई जोती माहि समाना ॥ लिखतु मिटै नही सबदु नीसाना ॥ करता करणा करता जाना ॥७॥

नह पंडितु नह चतुरु सिआना ॥ नह भूलो नह भरमि भुलाना ॥ कथउ न कथनी हुकमु पछाना ॥ नानक गुरमति सहजि समाना ॥८॥१॥

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 221) गउड़ी गुआरेरी महला १ ॥
मनु कुंचरु काइआ उदिआनै ॥ गुरु अंकसु सचु सबदु नीसानै ॥ राज दुआरै सोभ सु मानै ॥१॥

चतुराई नह चीनिआ जाइ ॥ बिनु मारे किउ कीमति पाइ ॥१॥ रहाउ ॥

घर महि अम्रितु तसकरु लेई ॥ नंनाकारु न कोइ करेई ॥ राखै आपि वडिआई देई ॥२॥

नील अनील अगनि इक ठाई ॥ जलि निवरी गुरि बूझ बुझाई ॥ मनु दे लीआ रहसि गुण गाई ॥३॥

जैसा घरि बाहरि सो तैसा ॥ बैसि गुफा महि आखउ कैसा ॥ सागरि डूगरि निरभउ ऐसा ॥४॥

मूए कउ कहु मारे कउनु ॥ निडरे कउ कैसा डरु कवनु ॥ सबदि पछानै तीने भउन ॥५॥

जिनि कहिआ तिनि कहनु वखानिआ ॥ जिनि बूझिआ तिनि सहजि पछानिआ ॥ देखि बीचारि मेरा मनु मानिआ ॥६॥

कीरति सूरति मुकति इक नाई ॥ तही निरंजनु रहिआ समाई ॥ निज घरि बिआपि रहिआ निज ठाई ॥७॥

उसतति करहि केते मुनि प्रीति ॥ तनि मनि सूचै साचु सु चीति ॥ नानक हरि भजु नीता नीति ॥८॥२॥

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 222) गउड़ी गुआरेरी महला १ ॥
ना मनु मरै न कारजु होइ ॥ मनु वसि दूता दुरमति दोइ ॥ मनु मानै गुर ते इकु होइ ॥१॥

निरगुण रामु गुणह वसि होइ ॥ आपु निवारि बीचारे सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

मनु भूलो बहु चितै विकारु ॥ मनु भूलो सिरि आवै भारु ॥ मनु मानै हरि एकंकारु ॥२॥

मनु भूलो माइआ घरि जाइ ॥ कामि बिरूधउ रहै न ठाइ ॥ हरि भजु प्राणी रसन रसाइ ॥३॥

गैवर हैवर कंचन सुत नारी ॥ बहु चिंता पिड़ चालै हारी ॥ जूऐ खेलणु काची सारी ॥४॥

स्मपउ संची भए विकार ॥ हरख सोक उभे दरवारि ॥ सुखु सहजे जपि रिदै मुरारि ॥५॥

नदरि करे ता मेलि मिलाए ॥ गुण संग्रहि अउगण सबदि जलाए ॥ गुरमुखि नामु पदारथु पाए ॥६॥

बिनु नावै सभ दूख निवासु ॥ मनमुख मूड़ माइआ चित वासु ॥ गुरमुखि गिआनु धुरि करमि लिखिआसु ॥७॥

मनु चंचलु धावतु फुनि धावै ॥ साचे सूचे मैलु न भावै ॥ नानक गुरमुखि हरि गुण गावै ॥८॥३॥

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 222) गउड़ी गुआरेरी महला १ ॥
हउमै करतिआ नह सुखु होइ ॥ मनमति झूठी सचा सोइ ॥ सगल बिगूते भावै दोइ ॥ सो कमावै धुरि लिखिआ होइ ॥१॥

ऐसा जगु देखिआ जूआरी ॥ सभि सुख मागै नामु बिसारी ॥१॥ रहाउ ॥

अदिसटु दिसै ता कहिआ जाइ ॥ बिनु देखे कहणा बिरथा जाइ ॥ गुरमुखि दीसै सहजि सुभाइ ॥ सेवा सुरति एक लिव लाइ ॥२॥

सुखु मांगत दुखु आगल होइ ॥ सगल विकारी हारु परोइ ॥ एक बिना झूठे मुकति न होइ ॥ करि करि करता देखै सोइ ॥३॥

त्रिसना अगनि सबदि बुझाए ॥ दूजा भरमु सहजि सुभाए ॥ गुरमती नामु रिदै वसाए ॥ साची बाणी हरि गुण गाए ॥४॥

तन महि साचो गुरमुखि भाउ ॥ नाम बिना नाही निज ठाउ ॥ प्रेम पराइण प्रीतम राउ ॥ नदरि करे ता बूझै नाउ ॥५॥

माइआ मोहु सरब जंजाला ॥ मनमुख कुचील कुछित बिकराला ॥ सतिगुरु सेवे चूकै जंजाला ॥ अम्रित नामु सदा सुखु नाला ॥६॥

गुरमुखि बूझै एक लिव लाए ॥ निज घरि वासै साचि समाए ॥ जमणु मरणा ठाकि रहाए ॥ पूरे गुर ते इह मति पाए ॥७॥

कथनी कथउ न आवै ओरु ॥ गुरु पुछि देखिआ नाही दरु होरु ॥ दुखु सुखु भाणै तिसै रजाइ ॥ नानकु नीचु कहै लिव लाइ ॥८॥४॥

(राग गउड़ी -- SGGS 223) गउड़ी महला १ ॥
दूजी माइआ जगत चित वासु ॥ काम क्रोध अहंकार बिनासु ॥१॥

दूजा कउणु कहा नही कोई ॥ सभ महि एकु निरंजनु सोई ॥१॥ रहाउ ॥

दूजी दुरमति आखै दोइ ॥ आवै जाइ मरि दूजा होइ ॥२॥

धरणि गगन नह देखउ दोइ ॥ नारी पुरख सबाई लोइ ॥३॥

रवि ससि देखउ दीपक उजिआला ॥ सरब निरंतरि प्रीतमु बाला ॥४॥

करि किरपा मेरा चितु लाइआ ॥ सतिगुरि मो कउ एकु बुझाइआ ॥५॥

एकु निरंजनु गुरमुखि जाता ॥ दूजा मारि सबदि पछाता ॥६॥

एको हुकमु वरतै सभ लोई ॥ एकसु ते सभ ओपति होई ॥७॥

राह दोवै खसमु एको जाणु ॥ गुर कै सबदि हुकमु पछाणु ॥८॥

सगल रूप वरन मन माही ॥ कहु नानक एको सालाही ॥९॥५॥

(राग गउड़ी -- SGGS 223) गउड़ी महला १ ॥
अधिआतम करम करे ता साचा ॥ मुकति भेदु किआ जाणै काचा ॥१॥

ऐसा जोगी जुगति बीचारै ॥ पंच मारि साचु उरि धारै ॥१॥ रहाउ ॥

जिस कै अंतरि साचु वसावै ॥ जोग जुगति की कीमति पावै ॥२॥

रवि ससि एको ग्रिह उदिआनै ॥ करणी कीरति करम समानै ॥३॥

एक सबद इक भिखिआ मागै ॥ गिआनु धिआनु जुगति सचु जागै ॥४॥

भै रचि रहै न बाहरि जाइ ॥ कीमति कउण रहै लिव लाइ ॥५॥

आपे मेले भरमु चुकाए ॥ गुर परसादि परम पदु पाए ॥६॥

गुर की सेवा सबदु वीचारु ॥ हउमै मारे करणी सारु ॥७॥

जप तप संजम पाठ पुराणु ॥ कहु नानक अपर्मपर मानु ॥८॥६॥

(राग गउड़ी -- SGGS 223) गउड़ी महला १ ॥
खिमा गही ब्रतु सील संतोखं ॥ रोगु न बिआपै ना जम दोखं ॥ मुकत भए प्रभ रूप न रेखं ॥१॥

जोगी कउ कैसा डरु होइ ॥ रूखि बिरखि ग्रिहि बाहरि सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

निरभउ जोगी निरंजनु धिआवै ॥ अनदिनु जागै सचि लिव लावै ॥ सो जोगी मेरै मनि भावै ॥२॥

कालु जालु ब्रहम अगनी जारे ॥ जरा मरण गतु गरबु निवारे ॥ आपि तरै पितरी निसतारे ॥३॥

सतिगुरु सेवे सो जोगी होइ ॥ भै रचि रहै सु निरभउ होइ ॥ जैसा सेवै तैसो होइ ॥४॥

नर निहकेवल निरभउ नाउ ॥ अनाथह नाथ करे बलि जाउ ॥ पुनरपि जनमु नाही गुण गाउ ॥५॥

अंतरि बाहरि एको जाणै ॥ गुर कै सबदे आपु पछाणै ॥ साचै सबदि दरि नीसाणै ॥६॥

सबदि मरै तिसु निज घरि वासा ॥ आवै न जावै चूकै आसा ॥ गुर कै सबदि कमलु परगासा ॥७॥

जो दीसै सो आस निरासा ॥ काम क्रोध बिखु भूख पिआसा ॥ नानक बिरले मिलहि उदासा ॥८॥७॥

(राग गउड़ी -- SGGS 224) गउड़ी महला १ ॥
ऐसो दासु मिलै सुखु होई ॥ दुखु विसरै पावै सचु सोई ॥१॥

दरसनु देखि भई मति पूरी ॥ अठसठि मजनु चरनह धूरी ॥१॥ रहाउ ॥

नेत्र संतोखे एक लिव तारा ॥ जिहवा सूची हरि रस सारा ॥२॥

सचु करणी अभ अंतरि सेवा ॥ मनु त्रिपतासिआ अलख अभेवा ॥३॥

जह जह देखउ तह तह साचा ॥ बिनु बूझे झगरत जगु काचा ॥४॥

गुरु समझावै सोझी होई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥५॥

करि किरपा राखहु रखवाले ॥ बिनु बूझे पसू भए बेताले ॥६॥

गुरि कहिआ अवरु नही दूजा ॥ किसु कहु देखि करउ अन पूजा ॥७॥

संत हेति प्रभि त्रिभवण धारे ॥ आतमु चीनै सु ततु बीचारे ॥८॥

साचु रिदै सचु प्रेम निवास ॥ प्रणवति नानक हम ता के दास ॥९॥८॥

(राग गउड़ी -- SGGS 224) गउड़ी महला १ ॥
ब्रहमै गरबु कीआ नही जानिआ ॥ बेद की बिपति पड़ी पछुतानिआ ॥ जह प्रभ सिमरे तही मनु मानिआ ॥१॥

ऐसा गरबु बुरा संसारै ॥ जिसु गुरु मिलै तिसु गरबु निवारै ॥१॥ रहाउ ॥

बलि राजा माइआ अहंकारी ॥ जगन करै बहु भार अफारी ॥ बिनु गुर पूछे जाइ पइआरी ॥२॥

हरीचंदु दानु करै जसु लेवै ॥ बिनु गुर अंतु न पाइ अभेवै ॥ आपि भुलाइ आपे मति देवै ॥३॥

दुरमति हरणाखसु दुराचारी ॥ प्रभु नाराइणु गरब प्रहारी ॥ प्रहलाद उधारे किरपा धारी ॥४॥

भूलो रावणु मुगधु अचेति ॥ लूटी लंका सीस समेति ॥ गरबि गइआ बिनु सतिगुर हेति ॥५॥

सहसबाहु मधु कीट महिखासा ॥ हरणाखसु ले नखहु बिधासा ॥ दैत संघारे बिनु भगति अभिआसा ॥६॥

जरासंधि कालजमुन संघारे ॥ रकतबीजु कालुनेमु बिदारे ॥ दैत संघारि संत निसतारे ॥७॥

आपे सतिगुरु सबदु बीचारे ॥ दूजै भाइ दैत संघारे ॥ गुरमुखि साचि भगति निसतारे ॥८॥

बूडा दुरजोधनु पति खोई ॥ रामु न जानिआ करता सोई ॥ जन कउ दूखि पचै दुखु होई ॥९॥

जनमेजै गुर सबदु न जानिआ ॥ किउ सुखु पावै भरमि भुलानिआ ॥ इकु तिलु भूले बहुरि पछुतानिआ ॥१०॥

कंसु केसु चांडूरु न कोई ॥ रामु न चीनिआ अपनी पति खोई ॥ बिनु जगदीस न राखै कोई ॥११॥

बिनु गुर गरबु न मेटिआ जाइ ॥ गुरमति धरमु धीरजु हरि नाइ ॥ नानक नामु मिलै गुण गाइ ॥१२॥९॥

(राग गउड़ी -- SGGS 225) गउड़ी महला १ ॥
चोआ चंदनु अंकि चड़ावउ ॥ पाट पट्मबर पहिरि हढावउ ॥ बिनु हरि नाम कहा सुखु पावउ ॥१॥

किआ पहिरउ किआ ओढि दिखावउ ॥ बिनु जगदीस कहा सुखु पावउ ॥१॥ रहाउ ॥

कानी कुंडल गलि मोतीअन की माला ॥ लाल निहाली फूल गुलाला ॥ बिनु जगदीस कहा सुखु भाला ॥२॥

नैन सलोनी सुंदर नारी ॥ खोड़ सीगार करै अति पिआरी ॥ बिनु जगदीस भजे नित खुआरी ॥३॥

दर घर महला सेज सुखाली ॥ अहिनिसि फूल बिछावै माली ॥ बिनु हरि नाम सु देह दुखाली ॥४॥

हैवर गैवर नेजे वाजे ॥ लसकर नेब खवासी पाजे ॥ बिनु जगदीस झूठे दिवाजे ॥५॥

सिधु कहावउ रिधि सिधि बुलावउ ॥ ताज कुलह सिरि छत्रु बनावउ ॥ बिनु जगदीस कहा सचु पावउ ॥६॥

खानु मलूकु कहावउ राजा ॥ अबे तबे कूड़े है पाजा ॥ बिनु गुर सबद न सवरसि काजा ॥७॥

हउमै ममता गुर सबदि विसारी ॥ गुरमति जानिआ रिदै मुरारी ॥ प्रणवति नानक सरणि तुमारी ॥८॥१०॥

(राग गउड़ी -- SGGS 225) गउड़ी महला १ ॥
सेवा एक न जानसि अवरे ॥ परपंच बिआधि तिआगै कवरे ॥ भाइ मिलै सचु साचै सचु रे ॥१॥

ऐसा राम भगतु जनु होई ॥ हरि गुण गाइ मिलै मलु धोई ॥१॥ रहाउ ॥

ऊंधो कवलु सगल संसारै ॥ दुरमति अगनि जगत परजारै ॥ सो उबरै गुर सबदु बीचारै ॥२॥

भ्रिंग पतंगु कुंचरु अरु मीना ॥ मिरगु मरै सहि अपुना कीना ॥ त्रिसना राचि ततु नही बीना ॥३॥

कामु चितै कामणि हितकारी ॥ क्रोधु बिनासै सगल विकारी ॥ पति मति खोवहि नामु विसारी ॥४॥

पर घरि चीतु मनमुखि डोलाइ ॥ गलि जेवरी धंधै लपटाइ ॥ गुरमुखि छूटसि हरि गुण गाइ ॥५॥

जिउ तनु बिधवा पर कउ देई ॥ कामि दामि चितु पर वसि सेई ॥ बिनु पिर त्रिपति न कबहूं होई ॥६॥

पड़ि पड़ि पोथी सिम्रिति पाठा ॥ बेद पुराण पड़ै सुणि थाटा ॥ बिनु रस राते मनु बहु नाटा ॥७॥

जिउ चात्रिक जल प्रेम पिआसा ॥ जिउ मीना जल माहि उलासा ॥ नानक हरि रसु पी त्रिपतासा ॥८॥११॥


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