Pt 22 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 22 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मलार -- SGGS 1287) पउड़ी ॥
अम्रित नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥ बाझु गुरू जगतु बउराना नावै सार न पाई ॥ सतिगुरु सेवहि से परवाणु जिन्ह जोती जोति मिलाई ॥ सो साहिबु सो सेवकु तेहा जिसु भाणा मंनि वसाई ॥ आपणै भाणै कहु किनि सुखु पाइआ अंधा अंधु कमाई ॥ बिखिआ कदे ही रजै नाही मूरख भुख न जाई ॥ दूजै सभु को लगि विगुता बिनु सतिगुर बूझ न पाई ॥ सतिगुरु सेवे सो सुखु पाए जिस नो किरपा करे रजाई ॥२०॥

(राग मलार -- SGGS 1287) सलोक मः १ ॥
सरमु धरमु दुइ नानका जे धनु पलै पाइ ॥ सो धनु मित्रु न कांढीऐ जितु सिरि चोटां खाइ ॥ जिन कै पलै धनु वसै तिन का नाउ फकीर ॥ जिन्ह कै हिरदै तू वसहि ते नर गुणी गहीर ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1287) मः १ ॥
दुखी दुनी सहेड़ीऐ जाइ त लगहि दुख ॥ नानक सचे नाम बिनु किसै न लथी भुख ॥ रूपी भुख न उतरै जां देखां तां भुख ॥ जेते रस सरीर के तेते लगहि दुख ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1287) मः १ ॥
अंधी कमी अंधु मनु मनि अंधै तनु अंधु ॥ चिकड़ि लाइऐ किआ थीऐ जां तुटै पथर बंधु ॥ बंधु तुटा बेड़ी नही ना तुलहा ना हाथ ॥ नानक सचे नाम विणु केते डुबे साथ ॥३॥

(राग मलार -- SGGS 1287) मः १ ॥
लख मण सुइना लख मण रुपा लख साहा सिरि साह ॥ लख लसकर लख वाजे नेजे लखी घोड़ी पातिसाह ॥ जिथै साइरु लंघणा अगनि पाणी असगाह ॥ कंधी दिसि न आवई धाही पवै कहाह ॥ नानक ओथै जाणीअहि साह केई पातिसाह ॥४॥

(राग मलार -- SGGS 1287) पउड़ी ॥
इकन्हा गलीं जंजीर बंदि रबाणीऐ ॥ बधे छुटहि सचि सचु पछाणीऐ ॥ लिखिआ पलै पाइ सो सचु जाणीऐ ॥ हुकमी होइ निबेड़ु गइआ जाणीऐ ॥ भउजल तारणहारु सबदि पछाणीऐ ॥ चोर जार जूआर पीड़े घाणीऐ ॥ निंदक लाइतबार मिले हड़्हवाणीऐ ॥ गुरमुखि सचि समाइ सु दरगह जाणीऐ ॥२१॥

(राग मलार -- SGGS 1288) मः १ ॥
हरणां बाजां तै सिकदारां एन्हा पड़्हिआ नाउ ॥ फांधी लगी जाति फहाइनि अगै नाही थाउ ॥ सो पड़िआ सो पंडितु बीना जिन्ही कमाणा नाउ ॥ पहिलो दे जड़ अंदरि जमै ता उपरि होवै छांउ ॥ राजे सीह मुकदम कुते ॥ जाइ जगाइन्हि बैठे सुते ॥ चाकर नहदा पाइन्हि घाउ ॥ रतु पितु कुतिहो चटि जाहु ॥ जिथै जीआं होसी सार ॥ नकीं वढीं लाइतबार ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1288) पउड़ी ॥
आपि उपाए मेदनी आपे करदा सार ॥ भै बिनु भरमु न कटीऐ नामि न लगै पिआरु ॥ सतिगुर ते भउ ऊपजै पाईऐ मोख दुआर ॥ भै ते सहजु पाईऐ मिलि जोती जोति अपार ॥ भै ते भैजलु लंघीऐ गुरमती वीचारु ॥ भै ते निरभउ पाईऐ जिस दा अंतु न पारावारु ॥ मनमुख भै की सार न जाणनी त्रिसना जलते करहि पुकार ॥ नानक नावै ही ते सुखु पाइआ गुरमती उरि धार ॥२२॥

(राग मलार -- SGGS 1288) सलोक मः १ ॥
रूपै कामै दोसती भुखै सादै गंढु ॥ लबै मालै घुलि मिलि मिचलि ऊंघै सउड़ि पलंघु ॥ भंउकै कोपु खुआरु होइ फकड़ु पिटे अंधु ॥ चुपै चंगा नानका विणु नावै मुहि गंधु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1288) मः १ ॥
राजु मालु रूपु जाति जोबनु पंजे ठग ॥ एनी ठगीं जगु ठगिआ किनै न रखी लज ॥ एना ठगन्हि ठग से जि गुर की पैरी पाहि ॥ नानक करमा बाहरे होरि केते मुठे जाहि ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1288) पउड़ी ॥
पड़िआ लेखेदारु लेखा मंगीऐ ॥ विणु नावै कूड़िआरु अउखा तंगीऐ ॥ अउघट रुधे राह गलीआं रोकीआं ॥ सचा वेपरवाहु सबदि संतोखीआं ॥ गहिर गभीर अथाहु हाथ न लभई ॥ मुहे मुहि चोटा खाहु विणु गुर कोइ न छुटसी ॥ पति सेती घरि जाहु नामु वखाणीऐ ॥ हुकमी साह गिराह देंदा जाणीऐ ॥२३॥

(राग मलार -- SGGS 1289) सलोक मः १ ॥
पउणै पाणी अगनी जीउ तिन किआ खुसीआ किआ पीड़ ॥ धरती पाताली आकासी इकि दरि रहनि वजीर ॥ इकना वडी आरजा इकि मरि होहि जहीर ॥ इकि दे खाहि निखुटै नाही इकि सदा फिरहि फकीर ॥ हुकमी साजे हुकमी ढाहे एक चसे महि लख ॥ सभु को नथै नथिआ बखसे तोड़े नथ ॥ वरना चिहना बाहरा लेखे बाझु अलखु ॥ किउ कथीऐ किउ आखीऐ जापै सचो सचु ॥ करणा कथना कार सभ नानक आपि अकथु ॥ अकथ की कथा सुणेइ ॥ रिधि बुधि सिधि गिआनु सदा सुखु होइ ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1289) मः १ ॥
अजरु जरै त नउ कुल बंधु ॥ पूजै प्राण होवै थिरु कंधु ॥ कहां ते आइआ कहां एहु जाणु ॥ जीवत मरत रहै परवाणु ॥ हुकमै बूझै ततु पछाणै ॥ इहु परसादु गुरू ते जाणै ॥ होंदा फड़ीअगु नानक जाणु ॥ ना हउ ना मै जूनी पाणु ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1289) पउड़ी ॥
पड़्हीऐ नामु सालाह होरि बुधीं मिथिआ ॥ बिनु सचे वापार जनमु बिरथिआ ॥ अंतु न पारावारु न किन ही पाइआ ॥ सभु जगु गरबि गुबारु तिन सचु न भाइआ ॥ चले नामु विसारि तावणि ततिआ ॥ बलदी अंदरि तेलु दुबिधा घतिआ ॥ आइआ उठी खेलु फिरै उवतिआ ॥ नानक सचै मेलु सचै रतिआ ॥२४॥

(राग मलार -- SGGS 1289) सलोक मः १ ॥
पहिलां मासहु निमिआ मासै अंदरि वासु ॥ जीउ पाइ मासु मुहि मिलिआ हडु चमु तनु मासु ॥ मासहु बाहरि कढिआ ममा मासु गिरासु ॥ मुहु मासै का जीभ मासै की मासै अंदरि सासु ॥ वडा होआ वीआहिआ घरि लै आइआ मासु ॥ मासहु ही मासु ऊपजै मासहु सभो साकु ॥ सतिगुरि मिलिऐ हुकमु बुझीऐ तां को आवै रासि ॥ आपि छुटे नह छूटीऐ नानक बचनि बिणासु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1289) मः १ ॥
मासु मासु करि मूरखु झगड़े गिआनु धिआनु नही जाणै ॥ कउणु मासु कउणु सागु कहावै किसु महि पाप समाणे ॥ गैंडा मारि होम जग कीए देवतिआ की बाणे ॥ मासु छोडि बैसि नकु पकड़हि राती माणस खाणे ॥ फड़ु करि लोकां नो दिखलावहि गिआनु धिआनु नही सूझै ॥ नानक अंधे सिउ किआ कहीऐ कहै न कहिआ बूझै ॥ अंधा सोइ जि अंधु कमावै तिसु रिदै सि लोचन नाही ॥ मात पिता की रकतु निपंने मछी मासु न खांही ॥ इसत्री पुरखै जां निसि मेला ओथै मंधु कमाही ॥ मासहु निमे मासहु जमे हम मासै के भांडे ॥ गिआनु धिआनु कछु सूझै नाही चतुरु कहावै पांडे ॥ बाहर का मासु मंदा सुआमी घर का मासु चंगेरा ॥ जीअ जंत सभि मासहु होए जीइ लइआ वासेरा ॥ अभखु भखहि भखु तजि छोडहि अंधु गुरू जिन केरा ॥ मासहु निमे मासहु जमे हम मासै के भांडे ॥ गिआनु धिआनु कछु सूझै नाही चतुरु कहावै पांडे ॥ मासु पुराणी मासु कतेबीं चहु जुगि मासु कमाणा ॥ जजि काजि वीआहि सुहावै ओथै मासु समाणा ॥ इसत्री पुरख निपजहि मासहु पातिसाह सुलतानां ॥ जे ओइ दिसहि नरकि जांदे तां उन्ह का दानु न लैणा ॥ देंदा नरकि सुरगि लैदे देखहु एहु धिङाणा ॥ आपि न बूझै लोक बुझाए पांडे खरा सिआणा ॥ पांडे तू जाणै ही नाही किथहु मासु उपंना ॥ तोइअहु अंनु कमादु कपाहां तोइअहु त्रिभवणु गंना ॥ तोआ आखै हउ बहु बिधि हछा तोऐ बहुतु बिकारा ॥ एते रस छोडि होवै संनिआसी नानकु कहै विचारा ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1290) पउड़ी ॥
हउ किआ आखा इक जीभ तेरा अंतु न किन ही पाइआ ॥ सचा सबदु वीचारि से तुझ ही माहि समाइआ ॥ इकि भगवा वेसु करि भरमदे विणु सतिगुर किनै न पाइआ ॥ देस दिसंतर भवि थके तुधु अंदरि आपु लुकाइआ ॥ गुर का सबदु रतंनु है करि चानणु आपि दिखाइआ ॥ आपणा आपु पछाणिआ गुरमती सचि समाइआ ॥ आवा गउणु बजारीआ बाजारु जिनी रचाइआ ॥ इकु थिरु सचा सालाहणा जिन मनि सचा भाइआ ॥२५॥

(राग मलार -- SGGS 1290) सलोक मः १ ॥
नानक माइआ करम बिरखु फल अम्रित फल विसु ॥ सभ कारण करता करे जिसु खवाले तिसु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1290) पउड़ी ॥
सिरि सिरि होइ निबेड़ु हुकमि चलाइआ ॥ तेरै हथि निबेड़ु तूहै मनि भाइआ ॥ कालु चलाए बंनि कोइ न रखसी ॥ जरु जरवाणा कंन्हि चड़िआ नचसी ॥ सतिगुरु बोहिथु बेड़ु सचा रखसी ॥ अगनि भखै भड़हाड़ु अनदिनु भखसी ॥ फाथा चुगै चोग हुकमी छुटसी ॥ करता करे सु होगु कूड़ु निखुटसी ॥२६॥

(राग मलार -- SGGS 1291) सलोक मः १ ॥
घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥ पंच सबद धुनिकार धुनि तह बाजै सबदु नीसाणु ॥ दीप लोअ पाताल तह खंड मंडल हैरानु ॥ तार घोर बाजिंत्र तह साचि तखति सुलतानु ॥ सुखमन कै घरि रागु सुनि सुंनि मंडलि लिव लाइ ॥ अकथ कथा बीचारीऐ मनसा मनहि समाइ ॥ उलटि कमलु अम्रिति भरिआ इहु मनु कतहु न जाइ ॥ अजपा जापु न वीसरै आदि जुगादि समाइ ॥ सभि सखीआ पंचे मिले गुरमुखि निज घरि वासु ॥ सबदु खोजि इहु घरु लहै नानकु ता का दासु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1291) मः १ ॥
चिलिमिलि बिसीआर दुनीआ फानी ॥ कालूबि अकल मन गोर न मानी ॥ मन कमीन कमतरीन तू दरीआउ खुदाइआ ॥ एकु चीजु मुझै देहि अवर जहर चीज न भाइआ ॥ पुराब खाम कूजै हिकमति खुदाइआ ॥ मन तुआना तू कुदरती आइआ ॥ सग नानक दीबान मसताना नित चड़ै सवाइआ ॥ आतस दुनीआ खुनक नामु खुदाइआ ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1291) सलोक मः १ ॥
धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भांडा धनु मसु ॥ धनु लेखारी नानका जिनि नामु लिखाइआ सचु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1291) मः १ ॥
आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूं ॥ एको कहीऐ नानका दूजा काहे कू ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1291) पउड़ी ॥
तूं आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥ तुधु बिनु दूजा को नही तू रहिआ समाई ॥ तेरी गति मिति तूहै जाणदा तुधु कीमति पाई ॥ तू अलख अगोचरु अगमु है गुरमति दिखाई ॥ अंतरि अगिआनु दुखु भरमु है गुर गिआनि गवाई ॥ जिसु क्रिपा करहि तिसु मेलि लैहि सो नामु धिआई ॥ तू करता पुरखु अगमु है रविआ सभ ठाई ॥ जितु तू लाइहि सचिआ तितु को लगै नानक गुण गाई ॥२८॥१॥ सुधु

(राग परभाती बिभास -- SGGS 1327) ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु परभाती बिभास महला १ चउपदे घरु १ ॥
नाइ तेरै तरणा नाइ पति पूज ॥ नाउ तेरा गहणा मति मकसूदु ॥ नाइ तेरै नाउ मंने सभ कोइ ॥ विणु नावै पति कबहु न होइ ॥१॥

अवर सिआणप सगली पाजु ॥ जै बखसे तै पूरा काजु ॥१॥ रहाउ ॥

नाउ तेरा ताणु नाउ दीबाणु ॥ नाउ तेरा लसकरु नाउ सुलतानु ॥ नाइ तेरै माणु महत परवाणु ॥ तेरी नदरी करमि पवै नीसाणु ॥२॥

नाइ तेरै सहजु नाइ सालाह ॥ नाउ तेरा अम्रितु बिखु उठि जाइ ॥ नाइ तेरै सभि सुख वसहि मनि आइ ॥ बिनु नावै बाधी जम पुरि जाइ ॥३॥

नारी बेरी घर दर देस ॥ मन कीआ खुसीआ कीचहि वेस ॥ जां सदे तां ढिल न पाइ ॥ नानक कूड़ु कूड़ो होइ जाइ ॥४॥१॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1327) प्रभाती महला १ ॥
तेरा नामु रतनु करमु चानणु सुरति तिथै लोइ ॥ अंधेरु अंधी वापरै सगल लीजै खोइ ॥१॥

इहु संसारु सगल बिकारु ॥ तेरा नामु दारू अवरु नासति करणहारु अपारु ॥१॥ रहाउ ॥

पाताल पुरीआ एक भार होवहि लाख करोड़ि ॥ तेरे लाल कीमति ता पवै जां सिरै होवहि होरि ॥२॥

दूखा ते सुख ऊपजहि सूखी होवहि दूख ॥ जितु मुखि तू सालाहीअहि तितु मुखि कैसी भूख ॥३॥

नानक मूरखु एकु तू अवरु भला सैसारु ॥ जितु तनि नामु न ऊपजै से तन होहि खुआर ॥४॥२॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1328) प्रभाती महला १ ॥
जै कारणि बेद ब्रहमै उचरे संकरि छोडी माइआ ॥ जै कारणि सिध भए उदासी देवी मरमु न पाइआ ॥१॥

बाबा मनि साचा मुखि साचा कहीऐ तरीऐ साचा होई ॥ दुसमनु दूखु न आवै नेड़ै हरि मति पावै कोई ॥१॥ रहाउ ॥

अगनि बि्मब पवणै की बाणी तीनि नाम के दासा ॥ ते तसकर जो नामु न लेवहि वासहि कोट पंचासा ॥२॥

जे को एक करै चंगिआई मनि चिति बहुतु बफावै ॥ एते गुण एतीआ चंगिआईआ देइ न पछोतावै ॥३॥

तुधु सालाहनि तिन धनु पलै नानक का धनु सोई ॥ जे को जीउ कहै ओना कउ जम की तलब न होई ॥४॥३॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1328) प्रभाती महला १ ॥
जा कै रूपु नाही जाति नाही नाही मुखु मासा ॥ सतिगुरि मिले निरंजनु पाइआ तेरै नामि है निवासा ॥१॥

अउधू सहजे ततु बीचारि ॥ जा ते फिरि न आवहु सैसारि ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै करमु नाही धरमु नाही नाही सुचि माला ॥ सिव जोति कंनहु बुधि पाई सतिगुरू रखवाला ॥२॥

जा कै बरतु नाही नेमु नाही नाही बकबाई ॥ गति अवगति की चिंत नाही सतिगुरू फुरमाई ॥३॥

जा कै आस नाही निरास नाही चिति सुरति समझाई ॥ तंत कउ परम तंतु मिलिआ नानका बुधि पाई ॥४॥४॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1328) प्रभाती महला १ ॥
ता का कहिआ दरि परवाणु ॥ बिखु अम्रितु दुइ सम करि जाणु ॥१॥

किआ कहीऐ सरबे रहिआ समाइ ॥ जो किछु वरतै सभ तेरी रजाइ ॥१॥ रहाउ ॥

प्रगटी जोति चूका अभिमानु ॥ सतिगुरि दीआ अम्रित नामु ॥२॥

कलि महि आइआ सो जनु जाणु ॥ साची दरगह पावै माणु ॥३॥

कहणा सुनणा अकथ घरि जाइ ॥ कथनी बदनी नानक जलि जाइ ॥४॥५॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1328) प्रभाती महला १ ॥
अम्रितु नीरु गिआनि मन मजनु अठसठि तीरथ संगि गहे ॥ गुर उपदेसि जवाहर माणक सेवे सिखु सो खोजि लहै ॥१॥

गुर समानि तीरथु नही कोइ ॥ सरु संतोखु तासु गुरु होइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरु दरीआउ सदा जलु निरमलु मिलिआ दुरमति मैलु हरै ॥ सतिगुरि पाइऐ पूरा नावणु पसू परेतहु देव करै ॥२॥

रता सचि नामि तल हीअलु सो गुरु परमलु कहीऐ ॥ जा की वासु बनासपति सउरै तासु चरण लिव रहीऐ ॥३॥

गुरमुखि जीअ प्रान उपजहि गुरमुखि सिव घरि जाईऐ ॥ गुरमुखि नानक सचि समाईऐ गुरमुखि निज पदु पाईऐ ॥४॥६॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1329) प्रभाती महला १ ॥
गुर परसादी विदिआ वीचारै पड़ि पड़ि पावै मानु ॥ आपा मधे आपु परगासिआ पाइआ अम्रितु नामु ॥१॥

करता तू मेरा जजमानु ॥ इक दखिणा हउ तै पहि मागउ देहि आपणा नामु ॥१॥ रहाउ ॥

पंच तसकर धावत राखे चूका मनि अभिमानु ॥ दिसटि बिकारी दुरमति भागी ऐसा ब्रहम गिआनु ॥२॥

जतु सतु चावल दइआ कणक करि प्रापति पाती धानु ॥ दूधु करमु संतोखु घीउ करि ऐसा मांगउ दानु ॥३॥

खिमा धीरजु करि गऊ लवेरी सहजे बछरा खीरु पीऐ ॥ सिफति सरम का कपड़ा मांगउ हरि गुण नानक रवतु रहै ॥४॥७॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1329) प्रभाती महला १ ॥
आवतु किनै न राखिआ जावतु किउ राखिआ जाइ ॥ जिस ते होआ सोई परु जाणै जां उस ही माहि समाइ ॥१॥

तूहै है वाहु तेरी रजाइ ॥ जो किछु करहि सोई परु होइबा अवरु न करणा जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जैसे हरहट की माला टिंड लगत है इक सखनी होर फेर भरीअत है ॥ तैसो ही इहु खेलु खसम का जिउ उस की वडिआई ॥२॥

सुरती कै मारगि चलि कै उलटी नदरि प्रगासी ॥ मनि वीचारि देखु ब्रहम गिआनी कउनु गिरही कउनु उदासी ॥३॥

जिस की आसा तिस ही सउपि कै एहु रहिआ निरबाणु ॥ जिस ते होआ सोई करि मानिआ नानक गिरही उदासी सो परवाणु ॥४॥८॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1329) प्रभाती महला १ ॥
दिसटि बिकारी बंधनि बांधै हउ तिस कै बलि जाई ॥ पाप पुंन की सार न जाणै भूला फिरै अजाई ॥१॥

बोलहु सचु नामु करतार ॥ फुनि बहुड़ि न आवण वार ॥१॥ रहाउ ॥

ऊचा ते फुनि नीचु करतु है नीच करै सुलतानु ॥ जिनी जाणु सुजाणिआ जगि ते पूरे परवाणु ॥२॥

ता कउ समझावण जाईऐ जे को भूला होई ॥ आपे खेल करे सभ करता ऐसा बूझै कोई ॥३॥

नाउ प्रभातै सबदि धिआईऐ छोडहु दुनी परीता ॥ प्रणवति नानक दासनि दासा जगि हारिआ तिनि जीता ॥४॥९॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1330) प्रभाती महला १ ॥
मनु माइआ मनु धाइआ मनु पंखी आकासि ॥ तसकर सबदि निवारिआ नगरु वुठा साबासि ॥ जा तू राखहि राखि लैहि साबतु होवै रासि ॥१॥

ऐसा नामु रतनु निधि मेरै ॥ गुरमति देहि लगउ पगि तेरै ॥१॥ रहाउ ॥

मनु जोगी मनु भोगीआ मनु मूरखु गावारु ॥ मनु दाता मनु मंगता मन सिरि गुरु करतारु ॥ पंच मारि सुखु पाइआ ऐसा ब्रहमु वीचारु ॥२॥

घटि घटि एकु वखाणीऐ कहउ न देखिआ जाइ ॥ खोटो पूठो रालीऐ बिनु नावै पति जाइ ॥ जा तू मेलहि ता मिलि रहां जां तेरी होइ रजाइ ॥३॥

जाति जनमु नह पूछीऐ सच घरु लेहु बताइ ॥ सा जाति सा पति है जेहे करम कमाइ ॥ जनम मरन दुखु काटीऐ नानक छूटसि नाइ ॥४॥१०॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1330) प्रभाती महला १ ॥
जागतु बिगसै मूठो अंधा ॥ गलि फाही सिरि मारे धंधा ॥ आसा आवै मनसा जाइ ॥ उरझी ताणी किछु न बसाइ ॥१॥

जागसि जीवण जागणहारा ॥ सुख सागर अम्रित भंडारा ॥१॥ रहाउ ॥

कहिओ न बूझै अंधु न सूझै भोंडी कार कमाई ॥ आपे प्रीति प्रेम परमेसुरु करमी मिलै वडाई ॥२॥

दिनु दिनु आवै तिलु तिलु छीजै माइआ मोहु घटाई ॥ बिनु गुर बूडो ठउर न पावै जब लग दूजी राई ॥३॥

अहिनिसि जीआ देखि सम्हालै सुखु दुखु पुरबि कमाई ॥ करमहीणु सचु भीखिआ मांगै नानक मिलै वडाई ॥४॥११॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1330) प्रभाती महला १ ॥
मसटि करउ मूरखु जगि कहीआ ॥ अधिक बकउ तेरी लिव रहीआ ॥ भूल चूक तेरै दरबारि ॥ नाम बिना कैसे आचार ॥१॥

ऐसे झूठि मुठे संसारा ॥ निंदकु निंदै मुझै पिआरा ॥१॥ रहाउ ॥

जिसु निंदहि सोई बिधि जाणै ॥ गुर कै सबदे दरि नीसाणै ॥ कारण नामु अंतरगति जाणै ॥ जिस नो नदरि करे सोई बिधि जाणै ॥२॥

मै मैलौ ऊजलु सचु सोइ ॥ ऊतमु आखि न ऊचा होइ ॥ मनमुखु खूल्हि महा बिखु खाइ ॥ गुरमुखि होइ सु राचै नाइ ॥३॥

अंधौ बोलौ मुगधु गवारु ॥ हीणौ नीचु बुरौ बुरिआरु ॥ नीधन कौ धनु नामु पिआरु ॥ इहु धनु सारु होरु बिखिआ छारु ॥४॥

उसतति निंदा सबदु वीचारु ॥ जो देवै तिस कउ जैकारु ॥ तू बखसहि जाति पति होइ ॥ नानकु कहै कहावै सोइ ॥५॥१२॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1331) प्रभाती महला १ ॥
खाइआ मैलु वधाइआ पैधै घर की हाणि ॥ बकि बकि वादु चलाइआ बिनु नावै बिखु जाणि ॥१॥

बाबा ऐसा बिखम जालि मनु वासिआ ॥ बिबलु झागि सहजि परगासिआ ॥१॥ रहाउ ॥

बिखु खाणा बिखु बोलणा बिखु की कार कमाइ ॥ जम दरि बाधे मारीअहि छूटसि साचै नाइ ॥२॥

जिव आइआ तिव जाइसी कीआ लिखि लै जाइ ॥ मनमुखि मूलु गवाइआ दरगह मिलै सजाइ ॥३॥

जगु खोटौ सचु निरमलौ गुर सबदीं वीचारि ॥ ते नर विरले जाणीअहि जिन अंतरि गिआनु मुरारि ॥४॥

अजरु जरै नीझरु झरै अमर अनंद सरूप ॥ नानकु जल कौ मीनु सै थे भावै राखहु प्रीति ॥५॥१३॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1331) प्रभाती महला १ ॥
गीत नाद हरख चतुराई ॥ रहस रंग फुरमाइसि काई ॥ पैन्हणु खाणा चीति न पाई ॥ साचु सहजु सुखु नामि वसाई ॥१॥

किआ जानां किआ करै करावै ॥ नाम बिना तनि किछु न सुखावै ॥१॥ रहाउ ॥

जोग बिनोद स्वाद आनंदा ॥ मति सत भाइ भगति गोबिंदा ॥ कीरति करम कार निज संदा ॥ अंतरि रवतौ राज रविंदा ॥२॥

प्रिउ प्रिउ प्रीति प्रेमि उर धारी ॥ दीना नाथु पीउ बनवारी ॥ अनदिनु नामु दानु ब्रतकारी ॥ त्रिपति तरंग ततु बीचारी ॥३॥

अकथौ कथउ किआ मै जोरु ॥ भगति करी कराइहि मोर ॥ अंतरि वसै चूकै मै मोर ॥ किसु सेवी दूजा नही होरु ॥४॥

गुर का सबदु महा रसु मीठा ॥ ऐसा अम्रितु अंतरि डीठा ॥ जिनि चाखिआ पूरा पदु होइ ॥ नानक ध्रापिओ तनि सुखु होइ ॥५॥१४॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1331) प्रभाती महला १ ॥
अंतरि देखि सबदि मनु मानिआ अवरु न रांगनहारा ॥ अहिनिसि जीआ देखि समाले तिस ही की सरकारा ॥१॥

मेरा प्रभु रांगि घणौ अति रूड़ौ ॥ दीन दइआलु प्रीतम मनमोहनु अति रस लाल सगूड़ौ ॥१॥ रहाउ ॥

ऊपरि कूपु गगन पनिहारी अम्रितु पीवणहारा ॥ जिस की रचना सो बिधि जाणै गुरमुखि गिआनु वीचारा ॥२॥

पसरी किरणि रसि कमल बिगासे ससि घरि सूरु समाइआ ॥ कालु बिधुंसि मनसा मनि मारी गुर प्रसादि प्रभु पाइआ ॥३॥

अति रसि रंगि चलूलै राती दूजा रंगु न कोई ॥ नानक रसनि रसाए राते रवि रहिआ प्रभु सोई ॥४॥१५॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1332) प्रभाती महला १ ॥
बारह महि रावल खपि जावहि चहु छिअ महि संनिआसी ॥ जोगी कापड़ीआ सिरखूथे बिनु सबदै गलि फासी ॥१॥

सबदि रते पूरे बैरागी ॥ अउहठि हसत महि भीखिआ जाची एक भाइ लिव लागी ॥१॥ रहाउ ॥

ब्रहमण वादु पड़हि करि किरिआ करणी करम कराए ॥ बिनु बूझे किछु सूझै नाही मनमुखु विछुड़ि दुखु पाए ॥२॥

सबदि मिले से सूचाचारी साची दरगह माने ॥ अनदिनु नामि रतनि लिव लागे जुगि जुगि साचि समाने ॥३॥

सगले करम धरम सुचि संजम जप तप तीरथ सबदि वसे ॥ नानक सतिगुर मिलै मिलाइआ दूख पराछत काल नसे ॥४॥१६॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1332) प्रभाती महला १ ॥
संता की रेणु साध जन संगति हरि कीरति तरु तारी ॥ कहा करै बपुरा जमु डरपै गुरमुखि रिदै मुरारी ॥१॥

जलि जाउ जीवनु नाम बिना ॥ हरि जपि जापु जपउ जपमाली गुरमुखि आवै सादु मना ॥१॥ रहाउ ॥

गुर उपदेस साचु सुखु जा कउ किआ तिसु उपमा कहीऐ ॥ लाल जवेहर रतन पदारथ खोजत गुरमुखि लहीऐ ॥२॥

चीनै गिआनु धिआनु धनु साचौ एक सबदि लिव लावै ॥ निराल्मबु निरहारु निहकेवलु निरभउ ताड़ी लावै ॥३॥

साइर सपत भरे जल निरमलि उलटी नाव तरावै ॥ बाहरि जातौ ठाकि रहावै गुरमुखि सहजि समावै ॥४॥

सो गिरही सो दासु उदासी जिनि गुरमुखि आपु पछानिआ ॥ नानकु कहै अवरु नही दूजा साच सबदि मनु मानिआ ॥५॥१७॥

(राग परभाती बिभास -- SGGS 1342) प्रभाती असटपदीआ महला १ बिभास
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
दुबिधा बउरी मनु बउराइआ ॥ झूठै लालचि जनमु गवाइआ ॥ लपटि रही फुनि बंधु न पाइआ ॥ सतिगुरि राखे नामु द्रिड़ाइआ ॥१॥

ना मनु मरै न माइआ मरै ॥ जिनि किछु कीआ सोई जाणै सबदु वीचारि भउ सागरु तरै ॥१॥ रहाउ ॥

माइआ संचि राजे अहंकारी ॥ माइआ साथि न चलै पिआरी ॥ माइआ ममता है बहु रंगी ॥ बिनु नावै को साथि न संगी ॥२॥

जिउ मनु देखहि पर मनु तैसा ॥ जैसी मनसा तैसी दसा ॥ जैसा करमु तैसी लिव लावै ॥ सतिगुरु पूछि सहज घरु पावै ॥३॥

रागि नादि मनु दूजै भाइ ॥ अंतरि कपटु महा दुखु पाइ ॥ सतिगुरु भेटै सोझी पाइ ॥ सचै नामि रहै लिव लाइ ॥४॥

सचै सबदि सचु कमावै ॥ सची बाणी हरि गुण गावै ॥ निज घरि वासु अमर पदु पावै ॥ ता दरि साचै सोभा पावै ॥५॥

गुर सेवा बिनु भगति न होई ॥ अनेक जतन करै जे कोई ॥ हउमै मेरा सबदे खोई ॥ निरमल नामु वसै मनि सोई ॥६॥

इसु जग महि सबदु करणी है सारु ॥ बिनु सबदै होरु मोहु गुबारु ॥ सबदे नामु रखै उरि धारि ॥ सबदे गति मति मोख दुआरु ॥७॥

अवरु नाही करि देखणहारो ॥ साचा आपि अनूपु अपारो ॥ राम नाम ऊतम गति होई ॥ नानक खोजि लहै जनु कोई ॥८॥१॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1342) प्रभाती महला १ ॥
माइआ मोहि सगल जगु छाइआ ॥ कामणि देखि कामि लोभाइआ ॥ सुत कंचन सिउ हेतु वधाइआ ॥ सभु किछु अपना इकु रामु पराइआ ॥१॥

ऐसा जापु जपउ जपमाली ॥ दुख सुख परहरि भगति निराली ॥१॥ रहाउ ॥

गुण निधान तेरा अंतु न पाइआ ॥ साच सबदि तुझ माहि समाइआ ॥ आवा गउणु तुधु आपि रचाइआ ॥ सेई भगत जिन सचि चितु लाइआ ॥२॥

गिआनु धिआनु नरहरि निरबाणी ॥ बिनु सतिगुर भेटे कोइ न जाणी ॥ सगल सरोवर जोति समाणी ॥ आनद रूप विटहु कुरबाणी ॥३॥

भाउ भगति गुरमती पाए ॥ हउमै विचहु सबदि जलाए ॥ धावतु राखै ठाकि रहाए ॥ सचा नामु मंनि वसाए ॥४॥

बिसम बिनोद रहे परमादी ॥ गुरमति मानिआ एक लिव लागी ॥ देखि निवारिआ जल महि आगी ॥ सो बूझै होवै वडभागी ॥५॥

सतिगुरु सेवे भरमु चुकाए ॥ अनदिनु जागै सचि लिव लाए ॥ एको जाणै अवरु न कोइ ॥ सुखदाता सेवे निरमलु होइ ॥६॥

सेवा सुरति सबदि वीचारि ॥ जपु तपु संजमु हउमै मारि ॥ जीवन मुकतु जा सबदु सुणाए ॥ सची रहत सचा सुखु पाए ॥७॥

सुखदाता दुखु मेटणहारा ॥ अवरु न सूझसि बीजी कारा ॥ तनु मनु धनु हरि आगै राखिआ ॥ नानकु कहै महा रसु चाखिआ ॥८॥२॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1343) प्रभाती महला १ ॥
निवली करम भुअंगम भाठी रेचक पूरक कु्मभ करै ॥ बिनु सतिगुर किछु सोझी नाही भरमे भूला बूडि मरै ॥ अंधा भरिआ भरि भरि धोवै अंतर की मलु कदे न लहै ॥ नाम बिना फोकट सभि करमा जिउ बाजीगरु भरमि भुलै ॥१॥

खटु करम नामु निरंजनु सोई ॥ तू गुण सागरु अवगुण मोही ॥१॥ रहाउ ॥

माइआ धंधा धावणी दुरमति कार बिकार ॥ मूरखु आपु गणाइदा बूझि न सकै कार ॥ मनसा माइआ मोहणी मनमुख बोल खुआर ॥ मजनु झूठा चंडाल का फोकट चार सींगार ॥२॥

झूठी मन की मति है करणी बादि बिबादु ॥ झूठे विचि अहंकरणु है खसम न पावै सादु ॥ बिनु नावै होरु कमावणा फिका आवै सादु ॥ दुसटी सभा विगुचीऐ बिखु वाती जीवण बादि ॥३॥

ए भ्रमि भूले मरहु न कोई ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु होई ॥ बिनु सतिगुर मुकति किनै न पाई ॥ आवहि जांहि मरहि मरि जाई ॥४॥

एहु सरीरु है त्रै गुण धातु ॥ इस नो विआपै सोग संतापु ॥ सो सेवहु जिसु माई न बापु ॥ विचहु चूकै तिसना अरु आपु ॥५॥

जह जह देखा तह तह सोई ॥ बिनु सतिगुर भेटे मुकति न होई ॥ हिरदै सचु एह करणी सारु ॥ होरु सभु पाखंडु पूज खुआरु ॥६॥

दुबिधा चूकै तां सबदु पछाणु ॥ घरि बाहरि एको करि जाणु ॥ एहा मति सबदु है सारु ॥ विचि दुबिधा माथै पवै छारु ॥७॥

करणी कीरति गुरमति सारु ॥ संत सभा गुण गिआनु बीचारु ॥ मनु मारे जीवत मरि जाणु ॥ नानक नदरी नदरि पछाणु ॥८॥३॥


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