Pt 21 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 21 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग सारंग -- SGGS 1243) मः १ ॥
बेदु पुकारे पुंनु पापु सुरग नरक का बीउ ॥ जो बीजै सो उगवै खांदा जाणै जीउ ॥ गिआनु सलाहे वडा करि सचो सचा नाउ ॥ सचु बीजै सचु उगवै दरगह पाईऐ थाउ ॥ बेदु वपारी गिआनु रासि करमी पलै होइ ॥ नानक रासी बाहरा लदि न चलिआ कोइ ॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1244) सलोक मः १ ॥
मरणि न मूरतु पुछिआ पुछी थिति न वारु ॥ इकन्ही लदिआ इकि लदि चले इकन्ही बधे भार ॥ इकन्हा होई साखती इकन्हा होई सार ॥ लसकर सणै दमामिआ छुटे बंक दुआर ॥ नानक ढेरी छारु की भी फिरि होई छार ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1244) मः १ ॥
नानक ढेरी ढहि पई मिटी संदा कोटु ॥ भीतरि चोरु बहालिआ खोटु वे जीआ खोटु ॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1244) सलोक मः १ ॥
धनवंता इव ही कहै अवरी धन कउ जाउ ॥ नानकु निरधनु तितु दिनि जितु दिनि विसरै नाउ ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1244) मः १ ॥
सूरजु चड़ै विजोगि सभसै घटै आरजा ॥ तनु मनु रता भोगि कोई हारै को जिणै ॥ सभु को भरिआ फूकि आखणि कहणि न थम्हीऐ ॥ नानक वेखै आपि फूक कढाए ढहि पवै ॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1245) सलोक मः १ ॥
ध्रिगु तिना का जीविआ जि लिखि लिखि वेचहि नाउ ॥ खेती जिन की उजड़ै खलवाड़े किआ थाउ ॥ सचै सरमै बाहरे अगै लहहि न दादि ॥ अकलि एह न आखीऐ अकलि गवाईऐ बादि ॥ अकली साहिबु सेवीऐ अकली पाईऐ मानु ॥ अकली पड़्हि कै बुझीऐ अकली कीचै दानु ॥ नानकु आखै राहु एहु होरि गलां सैतानु ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1245) सलोक मः १ ॥
सचु वरतु संतोखु तीरथु गिआनु धिआनु इसनानु ॥ दइआ देवता खिमा जपमाली ते माणस परधान ॥ जुगति धोती सुरति चउका तिलकु करणी होइ ॥ भाउ भोजनु नानका विरला त कोई कोइ ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1245) सलोक मः १ ॥
गिआन विहूणा गावै गीत ॥ भुखे मुलां घरे मसीति ॥ मखटू होइ कै कंन पड़ाए ॥ फकरु करे होरु जाति गवाए ॥ गुरु पीरु सदाए मंगण जाइ ॥ ता कै मूलि न लगीऐ पाइ ॥ घालि खाइ किछु हथहु देइ ॥ नानक राहु पछाणहि सेइ ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1246) मः १ ॥
मनहु जि अंधे कूप कहिआ बिरदु न जाणन्ही ॥ मनि अंधै ऊंधै कवलि दिसन्हि खरे करूप ॥ इकि कहि जाणहि कहिआ बुझहि ते नर सुघड़ सरूप ॥ इकना नाद न बेद न गीअ रसु रस कस न जाणंति ॥ इकना सुधि न बुधि न अकलि सर अखर का भेउ न लहंति ॥ नानक से नर असलि खर जि बिनु गुण गरबु करंति ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1254) रागु मलार चउपदे महला १ घरु १
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइआ है मरणा ॥ खसमु विसारि खुआरी कीनी ध्रिगु जीवणु नही रहणा ॥१॥

प्राणी एको नामु धिआवहु ॥ अपनी पति सेती घरि जावहु ॥१॥ रहाउ ॥

तुधनो सेवहि तुझु किआ देवहि मांगहि लेवहि रहहि नही ॥ तू दाता जीआ सभना का जीआ अंदरि जीउ तुही ॥२॥

गुरमुखि धिआवहि सि अम्रितु पावहि सेई सूचे होही ॥ अहिनिसि नामु जपहु रे प्राणी मैले हछे होही ॥३॥

जेही रुति काइआ सुखु तेहा तेहो जेही देही ॥ नानक रुति सुहावी साई बिनु नावै रुति केही ॥४॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1254) मलार महला १ ॥
करउ बिनउ गुर अपने प्रीतम हरि वरु आणि मिलावै ॥ सुणि घन घोर सीतलु मनु मोरा लाल रती गुण गावै ॥१॥

बरसु घना मेरा मनु भीना ॥ अम्रित बूंद सुहानी हीअरै गुरि मोही मनु हरि रसि लीना ॥१॥ रहाउ ॥

सहजि सुखी वर कामणि पिआरी जिसु गुर बचनी मनु मानिआ ॥ हरि वरि नारि भई सोहागणि मनि तनि प्रेमु सुखानिआ ॥२॥

अवगण तिआगि भई बैरागनि असथिरु वरु सोहागु हरी ॥ सोगु विजोगु तिसु कदे न विआपै हरि प्रभि अपणी किरपा करी ॥३॥

आवण जाणु नही मनु निहचलु पूरे गुर की ओट गही ॥ नानक राम नामु जपि गुरमुखि धनु सोहागणि सचु सही ॥४॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1254) मलार महला १ ॥
साची सुरति नामि नही त्रिपते हउमै करत गवाइआ ॥ पर धन पर नारी रतु निंदा बिखु खाई दुखु पाइआ ॥ सबदु चीनि भै कपट न छूटे मनि मुखि माइआ माइआ ॥ अजगरि भारि लदे अति भारी मरि जनमे जनमु गवाइआ ॥१॥

मनि भावै सबदु सुहाइआ ॥ भ्रमि भ्रमि जोनि भेख बहु कीन्हे गुरि राखे सचु पाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

तीरथि तेजु निवारि न न्हाते हरि का नामु न भाइआ ॥ रतन पदारथु परहरि तिआगिआ जत को तत ही आइआ ॥ बिसटा कीट भए उत ही ते उत ही माहि समाइआ ॥ अधिक सुआद रोग अधिकाई बिनु गुर सहजु न पाइआ ॥२॥

सेवा सुरति रहसि गुण गावा गुरमुखि गिआनु बीचारा ॥ खोजी उपजै बादी बिनसै हउ बलि बलि गुर करतारा ॥ हम नीच होते हीणमति झूठे तू सबदि सवारणहारा ॥ आतम चीनि तहा तू तारण सचु तारे तारणहारा ॥३॥

बैसि सुथानि कहां गुण तेरे किआ किआ कथउ अपारा ॥ अलखु न लखीऐ अगमु अजोनी तूं नाथां नाथणहारा ॥ किसु पहि देखि कहउ तू कैसा सभि जाचक तू दातारा ॥ भगतिहीणु नानकु दरि देखहु इकु नामु मिलै उरि धारा ॥४॥३॥

(राग मलार -- SGGS 1255) मलार महला १ ॥
जिनि धन पिर का सादु न जानिआ सा बिलख बदन कुमलानी ॥ भई निरासी करम की फासी बिनु गुर भरमि भुलानी ॥१॥

बरसु घना मेरा पिरु घरि आइआ ॥ बलि जावां गुर अपने प्रीतम जिनि हरि प्रभु आणि मिलाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

नउतन प्रीति सदा ठाकुर सिउ अनदिनु भगति सुहावी ॥ मुकति भए गुरि दरसु दिखाइआ जुगि जुगि भगति सुभावी ॥२॥

हम थारे त्रिभवण जगु तुमरा तू मेरा हउ तेरा ॥ सतिगुरि मिलिऐ निरंजनु पाइआ बहुरि न भवजलि फेरा ॥३॥

अपुने पिर हरि देखि विगासी तउ धन साचु सीगारो ॥ अकुल निरंजन सिउ सचि साची गुरमति नामु अधारो ॥४॥

मुकति भई बंधन गुरि खोल्हे सबदि सुरति पति पाई ॥ नानक राम नामु रिद अंतरि गुरमुखि मेलि मिलाई ॥५॥४॥

(राग मलार -- SGGS 1255) महला १ मलार ॥
पर दारा पर धनु पर लोभा हउमै बिखै बिकार ॥ दुसट भाउ तजि निंद पराई कामु क्रोधु चंडार ॥१॥

महल महि बैठे अगम अपार ॥ भीतरि अम्रितु सोई जनु पावै जिसु गुर का सबदु रतनु आचार ॥१॥ रहाउ ॥

दुख सुख दोऊ सम करि जानै बुरा भला संसार ॥ सुधि बुधि सुरति नामि हरि पाईऐ सतसंगति गुर पिआर ॥२॥

अहिनिसि लाहा हरि नामु परापति गुरु दाता देवणहारु ॥ गुरमुखि सिख सोई जनु पाए जिस नो नदरि करे करतारु ॥३॥

काइआ महलु मंदरु घरु हरि का तिसु महि राखी जोति अपार ॥ नानक गुरमुखि महलि बुलाईऐ हरि मेले मेलणहार ॥४॥५॥

(राग मलार -- SGGS 1256) मलार महला १ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
पवणै पाणी जाणै जाति ॥ काइआं अगनि करे निभरांति ॥ जमहि जीअ जाणै जे थाउ ॥ सुरता पंडितु ता का नाउ ॥१॥

गुण गोबिंद न जाणीअहि माइ ॥ अणडीठा किछु कहणु न जाइ ॥ किआ करि आखि वखाणीऐ माइ ॥१॥ रहाउ ॥

ऊपरि दरि असमानि पइआलि ॥ किउ करि कहीऐ देहु वीचारि ॥ बिनु जिहवा जो जपै हिआइ ॥ कोई जाणै कैसा नाउ ॥२॥

कथनी बदनी रहै निभरांति ॥ सो बूझै होवै जिसु दाति ॥ अहिनिसि अंतरि रहै लिव लाइ ॥ सोई पुरखु जि सचि समाइ ॥३॥

जाति कुलीनु सेवकु जे होइ ॥ ता का कहणा कहहु न कोइ ॥ विचि सनातीं सेवकु होइ ॥ नानक पण्हीआ पहिरै सोइ ॥४॥१॥६॥

(राग मलार -- SGGS 1256) मलार महला १ ॥
दुखु वेछोड़ा इकु दुखु भूख ॥ इकु दुखु सकतवार जमदूत ॥ इकु दुखु रोगु लगै तनि धाइ ॥ वैद न भोले दारू लाइ ॥१॥

वैद न भोले दारू लाइ ॥ दरदु होवै दुखु रहै सरीर ॥ ऐसा दारू लगै न बीर ॥१॥ रहाउ ॥

खसमु विसारि कीए रस भोग ॥ तां तनि उठि खलोए रोग ॥ मन अंधे कउ मिलै सजाइ ॥ वैद न भोले दारू लाइ ॥२॥

चंदन का फलु चंदन वासु ॥ माणस का फलु घट महि सासु ॥ सासि गइऐ काइआ ढलि पाइ ॥ ता कै पाछै कोइ न खाइ ॥३॥

कंचन काइआ निरमल हंसु ॥ जिसु महि नामु निरंजन अंसु ॥ दूख रोग सभि गइआ गवाइ ॥ नानक छूटसि साचै नाइ ॥४॥२॥७॥

(राग मलार -- SGGS 1256) मलार महला १ ॥
दुख महुरा मारण हरि नामु ॥ सिला संतोख पीसणु हथि दानु ॥ नित नित लेहु न छीजै देह ॥ अंत कालि जमु मारै ठेह ॥१॥

ऐसा दारू खाहि गवार ॥ जितु खाधै तेरे जाहि विकार ॥१॥ रहाउ ॥

राजु मालु जोबनु सभु छांव ॥ रथि फिरंदै दीसहि थाव ॥ देह न नाउ न होवै जाति ॥ ओथै दिहु ऐथै सभ राति ॥२॥

साद करि समधां त्रिसना घिउ तेलु ॥ कामु क्रोधु अगनी सिउ मेलु ॥ होम जग अरु पाठ पुराण ॥ जो तिसु भावै सो परवाण ॥३॥

तपु कागदु तेरा नामु नीसानु ॥ जिन कउ लिखिआ एहु निधानु ॥ से धनवंत दिसहि घरि जाइ ॥ नानक जननी धंनी माइ ॥४॥३॥८॥

(राग मलार -- SGGS 1257) मलार महला १ ॥
बागे कापड़ बोलै बैण ॥ लमा नकु काले तेरे नैण ॥ कबहूं साहिबु देखिआ भैण ॥१॥

ऊडां ऊडि चड़ां असमानि ॥ साहिब सम्रिथ तेरै ताणि ॥ जलि थलि डूंगरि देखां तीर ॥ थान थनंतरि साहिबु बीर ॥२॥

जिनि तनु साजि दीए नालि ख्मभ ॥ अति त्रिसना उडणै की डंझ ॥ नदरि करे तां बंधां धीर ॥ जिउ वेखाले तिउ वेखां बीर ॥३॥

न इहु तनु जाइगा न जाहिगे ख्मभ ॥ पउणै पाणी अगनी का सनबंध ॥ नानक करमु होवै जपीऐ करि गुरु पीरु ॥ सचि समावै एहु सरीरु ॥४॥४॥९॥

(राग मलार -- SGGS 1273) मलार महला १ असटपदीआ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
चकवी नैन नींद नहि चाहै बिनु पिर नींद न पाई ॥ सूरु चर्है प्रिउ देखै नैनी निवि निवि लागै पांई ॥१॥

पिर भावै प्रेमु सखाई ॥ तिसु बिनु घड़ी नही जगि जीवा ऐसी पिआस तिसाई ॥१॥ रहाउ ॥

सरवरि कमलु किरणि आकासी बिगसै सहजि सुभाई ॥ प्रीतम प्रीति बनी अभ ऐसी जोती जोति मिलाई ॥२॥

चात्रिकु जल बिनु प्रिउ प्रिउ टेरै बिलप करै बिललाई ॥ घनहर घोर दसौ दिसि बरसै बिनु जल पिआस न जाई ॥३॥

मीन निवास उपजै जल ही ते सुख दुख पुरबि कमाई ॥ खिनु तिलु रहि न सकै पलु जल बिनु मरनु जीवनु तिसु तांई ॥४॥

धन वांढी पिरु देस निवासी सचे गुर पहि सबदु पठाईं ॥ गुण संग्रहि प्रभु रिदै निवासी भगति रती हरखाई ॥५॥

प्रिउ प्रिउ करै सभै है जेती गुर भावै प्रिउ पाईं ॥ प्रिउ नाले सद ही सचि संगे नदरी मेलि मिलाई ॥६॥

सभ महि जीउ जीउ है सोई घटि घटि रहिआ समाई ॥ गुर परसादि घर ही परगासिआ सहजे सहजि समाई ॥७॥

अपना काजु सवारहु आपे सुखदाते गोसांईं ॥ गुर परसादि घर ही पिरु पाइआ तउ नानक तपति बुझाई ॥८॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1273) मलार महला १ ॥
जागतु जागि रहै गुर सेवा बिनु हरि मै को नाही ॥ अनिक जतन करि रहणु न पावै आचु काचु ढरि पांही ॥१॥

इसु तन धन का कहहु गरबु कैसा ॥ बिनसत बार न लागै बवरे हउमै गरबि खपै जगु ऐसा ॥१॥ रहाउ ॥

जै जगदीस प्रभू रखवारे राखै परखै सोई ॥ जेती है तेती तुझ ही ते तुम्ह सरि अवरु न कोई ॥२॥

जीअ उपाइ जुगति वसि कीनी आपे गुरमुखि अंजनु ॥ अमरु अनाथ सरब सिरि मोरा काल बिकाल भरम भै खंजनु ॥३॥

कागद कोटु इहु जगु है बपुरो रंगनि चिहन चतुराई ॥ नान्ही सी बूंद पवनु पति खोवै जनमि मरै खिनु ताईं ॥४॥

नदी उपकंठि जैसे घरु तरवरु सरपनि घरु घर माही ॥ उलटी नदी कहां घरु तरवरु सरपनि डसै दूजा मन मांही ॥५॥

गारुड़ गुर गिआनु धिआनु गुर बचनी बिखिआ गुरमति जारी ॥ मन तन हेंव भए सचु पाइआ हरि की भगति निरारी ॥६॥

जेती है तेती तुधु जाचै तू सरब जीआं दइआला ॥ तुम्हरी सरणि परे पति राखहु साचु मिलै गोपाला ॥७॥

बाधी धंधि अंध नही सूझै बधिक करम कमावै ॥ सतिगुर मिलै त सूझसि बूझसि सच मनि गिआनु समावै ॥८॥

निरगुण देह साच बिनु काची मै पूछउ गुरु अपना ॥ नानक सो प्रभु प्रभू दिखावै बिनु साचे जगु सुपना ॥९॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1274) मलार महला १ ॥
चात्रिक मीन जल ही ते सुखु पावहि सारिंग सबदि सुहाई ॥१॥

रैनि बबीहा बोलिओ मेरी माई ॥१॥ रहाउ ॥

प्रिअ सिउ प्रीति न उलटै कबहू जो तै भावै साई ॥२॥

नीद गई हउमै तनि थाकी सच मति रिदै समाई ॥३॥

रूखीं बिरखीं ऊडउ भूखा पीवा नामु सुभाई ॥४॥

लोचन तार ललता बिललाती दरसन पिआस रजाई ॥५॥

प्रिअ बिनु सीगारु करी तेता तनु तापै कापरु अंगि न सुहाई ॥६॥

अपने पिआरे बिनु इकु खिनु रहि न सकंउ बिन मिले नींद न पाई ॥७॥

पिरु नजीकि न बूझै बपुड़ी सतिगुरि दीआ दिखाई ॥८॥

सहजि मिलिआ तब ही सुखु पाइआ त्रिसना सबदि बुझाई ॥९॥

कहु नानक तुझ ते मनु मानिआ कीमति कहनु न जाई ॥१०॥३॥

(राग मलार -- SGGS 1274) मलार महला १ असटपदीआ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अखली ऊंडी जलु भर नालि ॥ डूगरु ऊचउ गड़ु पातालि ॥ सागरु सीतलु गुर सबद वीचारि ॥ मारगु मुकता हउमै मारि ॥१॥

मै अंधुले नावै की जोति ॥ नाम अधारि चला गुर कै भै भेति ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर सबदी पाधरु जाणि ॥ गुर कै तकीऐ साचै ताणि ॥ नामु सम्हालसि रूड़्ही बाणि ॥ थैं भावै दरु लहसि पिराणि ॥२॥

ऊडां बैसा एक लिव तार ॥ गुर कै सबदि नाम आधार ॥ ना जलु डूंगरु न ऊची धार ॥ निज घरि वासा तह मगु न चालणहार ॥३॥

जितु घरि वसहि तूहै बिधि जाणहि बीजउ महलु न जापै ॥ सतिगुर बाझहु समझ न होवी सभु जगु दबिआ छापै ॥ करण पलाव करै बिललातउ बिनु गुर नामु न जापै ॥ पल पंकज महि नामु छडाए जे गुर सबदु सिञापै ॥४॥

इकि मूरख अंधे मुगध गवार ॥ इकि सतिगुर कै भै नाम अधार ॥ साची बाणी मीठी अम्रित धार ॥ जिनि पीती तिसु मोख दुआर ॥५॥

नामु भै भाइ रिदै वसाही गुर करणी सचु बाणी ॥ इंदु वरसै धरति सुहावी घटि घटि जोति समाणी ॥ कालरि बीजसि दुरमति ऐसी निगुरे की नीसाणी ॥ सतिगुर बाझहु घोर अंधारा डूबि मुए बिनु पाणी ॥६॥

जो किछु कीनो सु प्रभू रजाइ ॥ जो धुरि लिखिआ सु मेटणा न जाइ ॥ हुकमे बाधा कार कमाइ ॥ एक सबदि राचै सचि समाइ ॥७॥

चहु दिसि हुकमु वरतै प्रभ तेरा चहु दिसि नाम पतालं ॥ सभ महि सबदु वरतै प्रभ साचा करमि मिलै बैआलं ॥ जांमणु मरणा दीसै सिरि ऊभौ खुधिआ निद्रा कालं ॥ नानक नामु मिलै मनि भावै साची नदरि रसालं ॥८॥१॥४॥

(राग मलार -- SGGS 1275) मलार महला १ ॥
मरण मुकति गति सार न जानै ॥ कंठे बैठी गुर सबदि पछानै ॥१॥

तू कैसे आड़ि फाथी जालि ॥ अलखु न जाचहि रिदै सम्हालि ॥१॥ रहाउ ॥

एक जीअ कै जीआ खाही ॥ जलि तरती बूडी जल माही ॥२॥

सरब जीअ कीए प्रतपानी ॥ जब पकड़ी तब ही पछुतानी ॥३॥

जब गलि फास पड़ी अति भारी ॥ ऊडि न साकै पंख पसारी ॥४॥

रसि चूगहि मनमुखि गावारि ॥ फाथी छूटहि गुण गिआन बीचारि ॥५॥

सतिगुरु सेवि तूटै जमकालु ॥ हिरदै साचा सबदु सम्हालु ॥६॥

गुरमति साची सबदु है सारु ॥ हरि का नामु रखै उरि धारि ॥७॥

से दुख आगै जि भोग बिलासे ॥ नानक मुकति नही बिनु नावै साचे ॥८॥२॥५॥

(राग मलार -- SGGS 1278) वार मलार की महला १
राणे कैलास तथा मालदे की धुनि ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

(राग मलार -- SGGS 1279) महला १ ॥
हेको पाधरु हेकु दरु गुर पउड़ी निज थानु ॥ रूड़उ ठाकुरु नानका सभि सुख साचउ नामु ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1279) पउड़ी ॥
आपीन्है आपु साजि आपु पछाणिआ ॥ अ्मबरु धरति विछोड़ि चंदोआ ताणिआ ॥ विणु थम्हा गगनु रहाइ सबदु नीसाणिआ ॥ सूरजु चंदु उपाइ जोति समाणिआ ॥ कीए राति दिनंतु चोज विडाणिआ ॥ तीरथ धरम वीचार नावण पुरबाणिआ ॥ तुधु सरि अवरु न कोइ कि आखि वखाणिआ ॥ सचै तखति निवासु होर आवण जाणिआ ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1279) सलोक मः १ ॥
नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥ नागां मिरगां मछीआं रसीआं घरि धनु होइ ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1279) मः १ ॥
नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥ गाई पुता निरधना पंथी चाकरु होइ ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1279) पउड़ी ॥
तू सचा सचिआरु जिनि सचु वरताइआ ॥ बैठा ताड़ी लाइ कवलु छपाइआ ॥ ब्रहमै वडा कहाइ अंतु न पाइआ ॥ ना तिसु बापु न माइ किनि तू जाइआ ॥ ना तिसु रूपु न रेख वरन सबाइआ ॥ ना तिसु भुख पिआस रजा धाइआ ॥ गुर महि आपु समोइ सबदु वरताइआ ॥ सचे ही पतीआइ सचि समाइआ ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1279) सलोक मः १ ॥
वैदु बुलाइआ वैदगी पकड़ि ढंढोले बांह ॥ भोला वैदु न जाणई करक कलेजे माहि ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1279) पउड़ी ॥
ब्रहमा बिसनु महेसु देव उपाइआ ॥ ब्रहमे दिते बेद पूजा लाइआ ॥ दस अवतारी रामु राजा आइआ ॥ दैता मारे धाइ हुकमि सबाइआ ॥ ईस महेसुरु सेव तिन्ही अंतु न पाइआ ॥ सची कीमति पाइ तखतु रचाइआ ॥ दुनीआ धंधै लाइ आपु छपाइआ ॥ धरमु कराए करम धुरहु फुरमाइआ ॥३॥

(राग मलार -- SGGS 1280) पउड़ी ॥
आपे छिंझ पवाइ मलाखाड़ा रचिआ ॥ लथे भड़थू पाइ गुरमुखि मचिआ ॥ मनमुख मारे पछाड़ि मूरख कचिआ ॥ आपि भिड़ै मारे आपि आपि कारजु रचिआ ॥ सभना खसमु एकु है गुरमुखि जाणीऐ ॥ हुकमी लिखै सिरि लेखु विणु कलम मसवाणीऐ ॥ सतसंगति मेलापु जिथै हरि गुण सदा वखाणीऐ ॥ नानक सचा सबदु सलाहि सचु पछाणीऐ ॥४॥

(राग मलार -- SGGS 1280) पउड़ी ॥
दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥ बेद बाणी वरताइ अंदरि वादु घतिआ ॥ परविरति निरविरति हाठा दोवै विचि धरमु फिरै रैबारिआ ॥ मनमुख कचे कूड़िआर तिन्ही निहचउ दरगह हारिआ ॥ गुरमती सबदि सूर है कामु क्रोधु जिन्ही मारिआ ॥ सचै अंदरि महलि सबदि सवारिआ ॥ से भगत तुधु भावदे सचै नाइ पिआरिआ ॥ सतिगुरु सेवनि आपणा तिन्हा विटहु हउ वारिआ ॥५॥

(राग मलार -- SGGS 1280) पउड़ी ॥
सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥ आडाणे आकास करि खिन महि ढाहि उसारणहार ॥ आपे जगतु उपाइ कै कुदरति करे वीचार ॥ मनमुख अगै लेखा मंगीऐ बहुती होवै मार ॥ गुरमुखि पति सिउ लेखा निबड़ै बखसे सिफति भंडार ॥ ओथै हथु न अपड़ै कूक न सुणीऐ पुकार ॥ ओथै सतिगुरु बेली होवै कढि लए अंती वार ॥ एना जंता नो होर सेवा नही सतिगुरु सिरि करतार ॥६॥

(राग मलार -- SGGS 1281) पउड़ी ॥
हरि जीउ सचा सचु तू सचे लैहि मिलाइ ॥ दूजै दूजी तरफ है कूड़ि मिलै न मिलिआ जाइ ॥ आपे जोड़ि विछोड़िऐ आपे कुदरति देइ दिखाइ ॥ मोहु सोगु विजोगु है पूरबि लिखिआ कमाइ ॥ हउ बलिहारी तिन कउ जो हरि चरणी रहै लिव लाइ ॥ जिउ जल महि कमलु अलिपतु है ऐसी बणत बणाइ ॥ से सुखीए सदा सोहणे जिन्ह विचहु आपु गवाइ ॥ तिन्ह सोगु विजोगु कदे नही जो हरि कै अंकि समाइ ॥७॥

(राग मलार -- SGGS 1282) पउड़ी ॥
अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥ गुर कै सबदि वीचारीऐ गुण महि रहै समाइ ॥ अपणा आपु आपि तोलसी आपे मिलै मिलाइ ॥ तिस की कीमति ना पवै कहणा किछू न जाइ ॥ हउ बलिहारी गुर आपणे जिनि सची बूझ दिती बुझाइ ॥ जगतु मुसै अम्रितु लुटीऐ मनमुख बूझ न पाइ ॥ विणु नावै नालि न चलसी जासी जनमु गवाइ ॥ गुरमती जागे तिन्ही घरु रखिआ दूता का किछु न वसाइ ॥८॥

(राग मलार -- SGGS 1282) पउड़ी ॥
नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥ गुरमुखि नामु धिआइ तुझै समाइआ ॥ जुग छतीह गुबारु तिस ही भाइआ ॥ जला बि्मबु असरालु तिनै वरताइआ ॥ नीलु अनीलु अगमु सरजीतु सबाइआ ॥ अगनि उपाई वादु भुख तिहाइआ ॥ दुनीआ कै सिरि कालु दूजा भाइआ ॥ रखै रखणहारु जिनि सबदु बुझाइआ ॥९॥

(राग मलार -- SGGS 1282) पउड़ी ॥
आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥ आपे लेखा मंगसी आपि कराए कार ॥ जो तिसु भावै सो थीऐ हुकमु करे गावारु ॥ आपि छडाए छुटीऐ आपे बखसणहारु ॥ आपे वेखै सुणे आपि सभसै दे आधारु ॥ सभ महि एकु वरतदा सिरि सिरि करे बीचारु ॥ गुरमुखि आपु वीचारीऐ लगै सचि पिआरु ॥ नानक किस नो आखीऐ आपे देवणहारु ॥१०॥

(राग मलार -- SGGS 1283) पउड़ी ॥
सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥ तू सभु किछु आपे आपि दूजे किसु गणी ॥ माणस कूड़ा गरबु सची तुधु मणी ॥ आवा गउणु रचाइ उपाई मेदनी ॥ सतिगुरु सेवे आपणा आइआ तिसु गणी ॥ जे हउमै विचहु जाइ त केही गणत गणी ॥ मनमुख मोहि गुबारि जिउ भुला मंझि वणी ॥ कटे पाप असंख नावै इक कणी ॥११॥

(राग मलार -- SGGS 1283) पउड़ी ॥
खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥ तू करता गोविंदु तुधु सिरजी तुधै गोई ॥ लख चउरासीह मेदनी तुझ ही ते होई ॥ इकि राजे खान मलूक कहहि कहावहि कोई ॥ इकि साह सदावहि संचि धनु दूजै पति खोई ॥ इकि दाते इक मंगते सभना सिरि सोई ॥ विणु नावै बाजारीआ भीहावलि होई ॥ कूड़ निखुटे नानका सचु करे सु होई ॥१२॥

(राग मलार -- SGGS 1284) पउड़ी ॥
आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥ त्रै गुण सरब जंजालु है नामि न धरे पिआरु ॥ गुण छोडि अउगण कमावदे दरगह होहि खुआरु ॥ जूऐ जनमु तिनी हारिआ कितु आए संसारि ॥ सचै सबदि मनु मारिआ अहिनिसि नामि पिआरि ॥ जिनी पुरखी उरि धारिआ सचा अलख अपारु ॥ तू गुणदाता निधानु हहि असी अवगणिआर ॥ जिसु बखसे सो पाइसी गुर सबदी वीचारु ॥१३॥

(राग मलार -- SGGS 1284) पउड़ी ॥
सचा सतिगुरु सेवि सचु सम्हालिआ ॥ अंति खलोआ आइ जि सतिगुर अगै घालिआ ॥ पोहि न सकै जमकालु सचा रखवालिआ ॥ गुर साखी जोति जगाइ दीवा बालिआ ॥ मनमुख विणु नावै कूड़िआर फिरहि बेतालिआ ॥ पसू माणस चमि पलेटे अंदरहु कालिआ ॥ सभो वरतै सचु सचै सबदि निहालिआ ॥ नानक नामु निधानु है पूरै गुरि देखालिआ ॥१४॥

(राग मलार -- SGGS 1284) पउड़ी ॥
इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥ इकि पाला ककरु भंनि सीतलु जलु हेंवही ॥ इकि भसम चड़्हावहि अंगि मैलु न धोवही ॥ इकि जटा बिकट बिकराल कुलु घरु खोवही ॥ इकि नगन फिरहि दिनु राति नींद न सोवही ॥ इकि अगनि जलावहि अंगु आपु विगोवही ॥ विणु नावै तनु छारु किआ कहि रोवही ॥ सोहनि खसम दुआरि जि सतिगुरु सेवही ॥१५॥

(राग मलार -- SGGS 1285) पउड़ी ॥
इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥ तिन मुखि नाही नामु न तीरथि न्हाइआ ॥ हथी सिर खोहाइ न भदु कराइआ ॥ कुचिल रहहि दिन राति सबदु न भाइआ ॥ तिन जाति न पति न करमु जनमु गवाइआ ॥ मनि जूठै वेजाति जूठा खाइआ ॥ बिनु सबदै आचारु न किन ही पाइआ ॥ गुरमुखि ओअंकारि सचि समाइआ ॥१६॥

(राग मलार -- SGGS 1285) पउड़ी ॥
सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥ इकि गावहि राग परीआ रागि न भीजई ॥ इकि नचि नचि पूरहि ताल भगति न कीजई ॥ इकि अंनु न खाहि मूरख तिना किआ कीजई ॥ त्रिसना होई बहुतु किवै न धीजई ॥ करम वधहि कै लोअ खपि मरीजई ॥ लाहा नामु संसारि अम्रितु पीजई ॥ हरि भगती असनेहि गुरमुखि घीजई ॥१७॥

(राग मलार -- SGGS 1286) पउड़ी ॥
पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥ पूरै करमि धिआइ पूरा सबदु मंनि वसाइआ ॥ पूरै गिआनि धिआनि मैलु चुकाइआ ॥ हरि सरि तीरथि जाणि मनूआ नाइआ ॥ सबदि मरै मनु मारि धंनु जणेदी माइआ ॥ दरि सचै सचिआरु सचा आइआ ॥ पुछि न सकै कोइ जां खसमै भाइआ ॥ नानक सचु सलाहि लिखिआ पाइआ ॥१८॥

(राग मलार -- SGGS 1286) सलोक मः १ ॥
कुलहां देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥ चूहा खड न मावई तिकलि बंन्है छज ॥ देन्हि दुआई से मरहि जिन कउ देनि सि जाहि ॥ नानक हुकमु न जापई किथै जाइ समाहि ॥ फसलि अहाड़ी एकु नामु सावणी सचु नाउ ॥ मै महदूदु लिखाइआ खसमै कै दरि जाइ ॥ दुनीआ के दर केतड़े केते आवहि जांहि ॥ केते मंगहि मंगते केते मंगि मंगि जाहि ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1286) मः १ ॥
सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥ डकै फूकै खेह उडावै साहि गइऐ पछुताइ ॥ अंधी फूकि मुई देवानी ॥ खसमि मिटी फिरि भानी ॥ अधु गुल्हा चिड़ी का चुगणु गैणि चड़ी बिललाइ ॥ खसमै भावै ओहा चंगी जि करे खुदाइ खुदाइ ॥ सकता सीहु मारे सै मिरिआ सभ पिछै पै खाइ ॥ होइ सताणा घुरै न मावै साहि गइऐ पछुताइ ॥ अंधा किस नो बुकि सुणावै ॥ खसमै मूलि न भावै ॥ अक सिउ प्रीति करे अक तिडा अक डाली बहि खाइ ॥ खसमै भावै ओहो चंगा जि करे खुदाइ खुदाइ ॥ नानक दुनीआ चारि दिहाड़े सुखि कीतै दुखु होई ॥ गला वाले हैनि घणेरे छडि न सकै कोई ॥ मखीं मिठै मरणा ॥ जिन तू रखहि तिन नेड़ि न आवै तिन भउ सागरु तरणा ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1286) पउड़ी ॥
अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥ तू दाता सभि मंगते इको देवणहारु ॥ जिनी सेविआ तिनी सुखु पाइआ गुरमती वीचारु ॥ इकना नो तुधु एवै भावदा माइआ नालि पिआरु ॥ गुर कै सबदि सलाहीऐ अंतरि प्रेम पिआरु ॥ विणु प्रीती भगति न होवई विणु सतिगुर न लगै पिआरु ॥ तू प्रभु सभि तुधु सेवदे इक ढाढी करे पुकार ॥ देहि दानु संतोखीआ सचा नामु मिलै आधारु ॥१९॥

(राग मलार -- SGGS 1287) सलोक मः १ ॥
राती कालु घटै दिनि कालु ॥ छिजै काइआ होइ परालु ॥ वरतणि वरतिआ सरब जंजालु ॥ भुलिआ चुकि गइआ तप तालु ॥ अंधा झखि झखि पइआ झेरि ॥ पिछै रोवहि लिआवहि फेरि ॥ बिनु बूझे किछु सूझै नाही ॥ मोइआ रोंहि रोंदे मरि जांहीं ॥ नानक खसमै एवै भावै ॥ सेई मुए जिन चिति न आवै ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1287) मः १ ॥
मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥ वंनु गइआ रूपु विणसिआ दुखी देह रुली ॥ किथहु आइआ कह गइआ किहु न सीओ किहु सी ॥ मनि मुखि गला गोईआ कीता चाउ रली ॥ नानक सचे नाम बिनु सिर खुर पति पाटी ॥२॥


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