Pt 2 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 2 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग सिरीरागु -- SGGS 17) सिरीरागु महला १ ॥
कुंगू की कांइआ रतना की ललिता अगरि वासु तनि सासु ॥ अठसठि तीरथ का मुखि टिका तितु घटि मति विगासु ॥ ओतु मती सालाहणा सचु नामु गुणतासु ॥१॥

बाबा होर मति होर होर ॥ जे सउ वेर कमाईऐ कूड़ै कूड़ा जोरु ॥१॥ रहाउ ॥

पूज लगै पीरु आखीऐ सभु मिलै संसारु ॥ नाउ सदाए आपणा होवै सिधु सुमारु ॥ जा पति लेखै ना पवै सभा पूज खुआरु ॥२॥

जिन कउ सतिगुरि थापिआ तिन मेटि न सकै कोइ ॥ ओना अंदरि नामु निधानु है नामो परगटु होइ ॥ नाउ पूजीऐ नाउ मंनीऐ अखंडु सदा सचु सोइ ॥३॥

खेहू खेह रलाईऐ ता जीउ केहा होइ ॥ जलीआ सभि सिआणपा उठी चलिआ रोइ ॥ नानक नामि विसारिऐ दरि गइआ किआ होइ ॥४॥८॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 17) सिरीरागु महला १ ॥
गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥ जे लोड़हि वरु कामणी नह मिलीऐ पिर कूरि ॥ ना बेड़ी ना तुलहड़ा ना पाईऐ पिरु दूरि ॥१॥

मेरे ठाकुर पूरै तखति अडोलु ॥ गुरमुखि पूरा जे करे पाईऐ साचु अतोलु ॥१॥ रहाउ ॥

प्रभु हरिमंदरु सोहणा तिसु महि माणक लाल ॥ मोती हीरा निरमला कंचन कोट रीसाल ॥ बिनु पउड़ी गड़ि किउ चड़उ गुर हरि धिआन निहाल ॥२॥

गुरु पउड़ी बेड़ी गुरू गुरु तुलहा हरि नाउ ॥ गुरु सरु सागरु बोहिथो गुरु तीरथु दरीआउ ॥ जे तिसु भावै ऊजली सत सरि नावण जाउ ॥३॥

पूरो पूरो आखीऐ पूरै तखति निवास ॥ पूरै थानि सुहावणै पूरै आस निरास ॥ नानक पूरा जे मिलै किउ घाटै गुण तास ॥४॥९॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 17) सिरीरागु महला १ ॥
आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह ॥ मिलि कै करह कहाणीआ सम्रथ कंत कीआह ॥ साचे साहिब सभि गुण अउगण सभि असाह ॥१॥

करता सभु को तेरै जोरि ॥ एकु सबदु बीचारीऐ जा तू ता किआ होरि ॥१॥ रहाउ ॥

जाइ पुछहु सोहागणी तुसी राविआ किनी गुणीं ॥ सहजि संतोखि सीगारीआ मिठा बोलणी ॥ पिरु रीसालू ता मिलै जा गुर का सबदु सुणी ॥२॥

केतीआ तेरीआ कुदरती केवड तेरी दाति ॥ केते तेरे जीअ जंत सिफति करहि दिनु राति ॥ केते तेरे रूप रंग केते जाति अजाति ॥३॥

सचु मिलै सचु ऊपजै सच महि साचि समाइ ॥ सुरति होवै पति ऊगवै गुरबचनी भउ खाइ ॥ नानक सचा पातिसाहु आपे लए मिलाइ ॥४॥१०॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 18) सिरीरागु महला १ ॥
भली सरी जि उबरी हउमै मुई घराहु ॥ दूत लगे फिरि चाकरी सतिगुर का वेसाहु ॥ कलप तिआगी बादि है सचा वेपरवाहु ॥१॥

मन रे सचु मिलै भउ जाइ ॥ भै बिनु निरभउ किउ थीऐ गुरमुखि सबदि समाइ ॥१॥ रहाउ ॥

केता आखणु आखीऐ आखणि तोटि न होइ ॥ मंगण वाले केतड़े दाता एको सोइ ॥ जिस के जीअ पराण है मनि वसिऐ सुखु होइ ॥२॥

जगु सुपना बाजी बनी खिन महि खेलु खेलाइ ॥ संजोगी मिलि एकसे विजोगी उठि जाइ ॥ जो तिसु भाणा सो थीऐ अवरु न करणा जाइ ॥३॥

गुरमुखि वसतु वेसाहीऐ सचु वखरु सचु रासि ॥ जिनी सचु वणंजिआ गुर पूरे साबासि ॥ नानक वसतु पछाणसी सचु सउदा जिसु पासि ॥४॥११॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 18) सिरीरागु महलु १ ॥
धातु मिलै फुनि धातु कउ सिफती सिफति समाइ ॥ लालु गुलालु गहबरा सचा रंगु चड़ाउ ॥ सचु मिलै संतोखीआ हरि जपि एकै भाइ ॥१॥

भाई रे संत जना की रेणु ॥ संत सभा गुरु पाईऐ मुकति पदारथु धेणु ॥१॥ रहाउ ॥

ऊचउ थानु सुहावणा ऊपरि महलु मुरारि ॥ सचु करणी दे पाईऐ दरु घरु महलु पिआरि ॥ गुरमुखि मनु समझाईऐ आतम रामु बीचारि ॥२॥

त्रिबिधि करम कमाईअहि आस अंदेसा होइ ॥ किउ गुर बिनु त्रिकुटी छुटसी सहजि मिलिऐ सुखु होइ ॥ निज घरि महलु पछाणीऐ नदरि करे मलु धोइ ॥३॥

बिनु गुर मैलु न उतरै बिनु हरि किउ घर वासु ॥ एको सबदु वीचारीऐ अवर तिआगै आस ॥ नानक देखि दिखाईऐ हउ सद बलिहारै जासु ॥४॥१२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 18) सिरीरागु महला १ ॥
ध्रिगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ ॥ कलर केरी कंध जिउ अहिनिसि किरि ढहि पाइ ॥ बिनु सबदै सुखु ना थीऐ पिर बिनु दूखु न जाइ ॥१॥

मुंधे पिर बिनु किआ सीगारु ॥ दरि घरि ढोई न लहै दरगह झूठु खुआरु ॥१॥ रहाउ ॥

आपि सुजाणु न भुलई सचा वड किरसाणु ॥ पहिला धरती साधि कै सचु नामु दे दाणु ॥ नउ निधि उपजै नामु एकु करमि पवै नीसाणु ॥२॥

गुर कउ जाणि न जाणई किआ तिसु चजु अचारु ॥ अंधुलै नामु विसारिआ मनमुखि अंध गुबारु ॥ आवणु जाणु न चुकई मरि जनमै होइ खुआरु ॥३॥

चंदनु मोलि अणाइआ कुंगू मांग संधूरु ॥ चोआ चंदनु बहु घणा पाना नालि कपूरु ॥ जे धन कंति न भावई त सभि अड्मबर कूड़ु ॥४॥

सभि रस भोगण बादि हहि सभि सीगार विकार ॥ जब लगु सबदि न भेदीऐ किउ सोहै गुरदुआरि ॥ नानक धंनु सुहागणी जिन सह नालि पिआरु ॥५॥१३॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 19) सिरीरागु महला १ ॥
सुंञी देह डरावणी जा जीउ विचहु जाइ ॥ भाहि बलंदी विझवी धूउ न निकसिओ काइ ॥ पंचे रुंने दुखि भरे बिनसे दूजै भाइ ॥१॥

मूड़े रामु जपहु गुण सारि ॥ हउमै ममता मोहणी सभ मुठी अहंकारि ॥१॥ रहाउ ॥

जिनी नामु विसारिआ दूजी कारै लगि ॥ दुबिधा लागे पचि मुए अंतरि त्रिसना अगि ॥ गुरि राखे से उबरे होरि मुठी धंधै ठगि ॥२॥

मुई परीति पिआरु गइआ मुआ वैरु विरोधु ॥ धंधा थका हउ मुई ममता माइआ क्रोधु ॥ करमि मिलै सचु पाईऐ गुरमुखि सदा निरोधु ॥३॥

सची कारै सचु मिलै गुरमति पलै पाइ ॥ सो नरु जमै ना मरै ना आवै ना जाइ ॥ नानक दरि परधानु सो दरगहि पैधा जाइ ॥४॥१४॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 19) सिरीरागु महल १ ॥
तनु जलि बलि माटी भइआ मनु माइआ मोहि मनूरु ॥ अउगण फिरि लागू भए कूरि वजावै तूरु ॥ बिनु सबदै भरमाईऐ दुबिधा डोबे पूरु ॥१॥

मन रे सबदि तरहु चितु लाइ ॥ जिनि गुरमुखि नामु न बूझिआ मरि जनमै आवै जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

तनु सूचा सो आखीऐ जिसु महि साचा नाउ ॥ भै सचि राती देहुरी जिहवा सचु सुआउ ॥ सची नदरि निहालीऐ बहुड़ि न पावै ताउ ॥२॥

साचे ते पवना भइआ पवनै ते जलु होइ ॥ जल ते त्रिभवणु साजिआ घटि घटि जोति समोइ ॥ निरमलु मैला ना थीऐ सबदि रते पति होइ ॥३॥

इहु मनु साचि संतोखिआ नदरि करे तिसु माहि ॥ पंच भूत सचि भै रते जोति सची मन माहि ॥ नानक अउगण वीसरे गुरि राखे पति ताहि ॥४॥१५॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 20) सिरीरागु महला १ ॥
नानक बेड़ी सच की तरीऐ गुर वीचारि ॥ इकि आवहि इकि जावही पूरि भरे अहंकारि ॥ मनहठि मती बूडीऐ गुरमुखि सचु सु तारि ॥१॥

गुर बिनु किउ तरीऐ सुखु होइ ॥ जिउ भावै तिउ राखु तू मै अवरु न दूजा कोइ ॥१॥ रहाउ ॥

आगै देखउ डउ जलै पाछै हरिओ अंगूरु ॥ जिस ते उपजै तिस ते बिनसै घटि घटि सचु भरपूरि ॥ आपे मेलि मिलावही साचै महलि हदूरि ॥२॥

साहि साहि तुझु समला कदे न विसारेउ ॥ जिउ जिउ साहबु मनि वसै गुरमुखि अम्रितु पेउ ॥ मनु तनु तेरा तू धणी गरबु निवारि समेउ ॥३॥

जिनि एहु जगतु उपाइआ त्रिभवणु करि आकारु ॥ गुरमुखि चानणु जाणीऐ मनमुखि मुगधु गुबारु ॥ घटि घटि जोति निरंतरी बूझै गुरमति सारु ॥४॥

गुरमुखि जिनी जाणिआ तिन कीचै साबासि ॥ सचे सेती रलि मिले सचे गुण परगासि ॥ नानक नामि संतोखीआ जीउ पिंडु प्रभ पासि ॥५॥१६॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 20) सिरीरागु महला १ ॥
सुणि मन मित्र पिआरिआ मिलु वेला है एह ॥ जब लगु जोबनि सासु है तब लगु इहु तनु देह ॥ बिनु गुण कामि न आवई ढहि ढेरी तनु खेह ॥१॥

मेरे मन लै लाहा घरि जाहि ॥ गुरमुखि नामु सलाहीऐ हउमै निवरी भाहि ॥१॥ रहाउ ॥

सुणि सुणि गंढणु गंढीऐ लिखि पड़ि बुझहि भारु ॥ त्रिसना अहिनिसि अगली हउमै रोगु विकारु ॥ ओहु वेपरवाहु अतोलवा गुरमति कीमति सारु ॥२॥

लख सिआणप जे करी लख सिउ प्रीति मिलापु ॥ बिनु संगति साध न ध्रापीआ बिनु नावै दूख संतापु ॥ हरि जपि जीअरे छुटीऐ गुरमुखि चीनै आपु ॥३॥

तनु मनु गुर पहि वेचिआ मनु दीआ सिरु नालि ॥ त्रिभवणु खोजि ढंढोलिआ गुरमुखि खोजि निहालि ॥ सतगुरि मेलि मिलाइआ नानक सो प्रभु नालि ॥४॥१७॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 20) सिरीरागु महला १ ॥
मरणै की चिंता नही जीवण की नही आस ॥ तू सरब जीआ प्रतिपालही लेखै सास गिरास ॥ अंतरि गुरमुखि तू वसहि जिउ भावै तिउ निरजासि ॥१॥

जीअरे राम जपत मनु मानु ॥ अंतरि लागी जलि बुझी पाइआ गुरमुखि गिआनु ॥१॥ रहाउ ॥

अंतर की गति जाणीऐ गुर मिलीऐ संक उतारि ॥ मुइआ जितु घरि जाईऐ तितु जीवदिआ मरु मारि ॥ अनहद सबदि सुहावणे पाईऐ गुर वीचारि ॥२॥

अनहद बाणी पाईऐ तह हउमै होइ बिनासु ॥ सतगुरु सेवे आपणा हउ सद कुरबाणै तासु ॥ खड़ि दरगह पैनाईऐ मुखि हरि नाम निवासु ॥३॥

जह देखा तह रवि रहे सिव सकती का मेलु ॥ त्रिहु गुण बंधी देहुरी जो आइआ जगि सो खेलु ॥ विजोगी दुखि विछुड़े मनमुखि लहहि न मेलु ॥४॥

मनु बैरागी घरि वसै सच भै राता होइ ॥ गिआन महारसु भोगवै बाहुड़ि भूख न होइ ॥ नानक इहु मनु मारि मिलु भी फिरि दुखु न होइ ॥५॥१८॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 21) सिरीरागु महला १ ॥
एहु मनो मूरखु लोभीआ लोभे लगा लोभानु ॥ सबदि न भीजै साकता दुरमति आवनु जानु ॥ साधू सतगुरु जे मिलै ता पाईऐ गुणी निधानु ॥१॥

मन रे हउमै छोडि गुमानु ॥ हरि गुरु सरवरु सेवि तू पावहि दरगह मानु ॥१॥ रहाउ ॥

राम नामु जपि दिनसु राति गुरमुखि हरि धनु जानु ॥ सभि सुख हरि रस भोगणे संत सभा मिलि गिआनु ॥ निति अहिनिसि हरि प्रभु सेविआ सतगुरि दीआ नामु ॥२॥

कूकर कूड़ु कमाईऐ गुर निंदा पचै पचानु ॥ भरमे भूला दुखु घणो जमु मारि करै खुलहानु ॥ मनमुखि सुखु न पाईऐ गुरमुखि सुखु सुभानु ॥३॥

ऐथै धंधु पिटाईऐ सचु लिखतु परवानु ॥ हरि सजणु गुरु सेवदा गुर करणी परधानु ॥ नानक नामु न वीसरै करमि सचै नीसाणु ॥४॥१९॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 21) सिरीरागु महला १ ॥
इकु तिलु पिआरा वीसरै रोगु वडा मन माहि ॥ किउ दरगह पति पाईऐ जा हरि न वसै मन माहि ॥ गुरि मिलिऐ सुखु पाईऐ अगनि मरै गुण माहि ॥१॥

मन रे अहिनिसि हरि गुण सारि ॥ जिन खिनु पलु नामु न वीसरै ते जन विरले संसारि ॥१॥ रहाउ ॥

जोती जोति मिलाईऐ सुरती सुरति संजोगु ॥ हिंसा हउमै गतु गए नाही सहसा सोगु ॥ गुरमुखि जिसु हरि मनि वसै तिसु मेले गुरु संजोगु ॥२॥

काइआ कामणि जे करी भोगे भोगणहारु ॥ तिसु सिउ नेहु न कीजई जो दीसै चलणहारु ॥ गुरमुखि रवहि सोहागणी सो प्रभु सेज भतारु ॥३॥

चारे अगनि निवारि मरु गुरमुखि हरि जलु पाइ ॥ अंतरि कमलु प्रगासिआ अम्रितु भरिआ अघाइ ॥ नानक सतगुरु मीतु करि सचु पावहि दरगह जाइ ॥४॥२०॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 22) सिरीरागु महला १ ॥
हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमति ले हरि बोलि ॥ मनु सच कसवटी लाईऐ तुलीऐ पूरै तोलि ॥ कीमति किनै न पाईऐ रिद माणक मोलि अमोलि ॥१॥

भाई रे हरि हीरा गुर माहि ॥ सतसंगति सतगुरु पाईऐ अहिनिसि सबदि सलाहि ॥१॥ रहाउ ॥

सचु वखरु धनु रासि लै पाईऐ गुर परगासि ॥ जिउ अगनि मरै जलि पाइऐ तिउ त्रिसना दासनि दासि ॥ जम जंदारु न लगई इउ भउजलु तरै तरासि ॥२॥

गुरमुखि कूड़ु न भावई सचि रते सच भाइ ॥ साकत सचु न भावई कूड़ै कूड़ी पांइ ॥ सचि रते गुरि मेलिऐ सचे सचि समाइ ॥३॥

मन महि माणकु लालु नामु रतनु पदारथु हीरु ॥ सचु वखरु धनु नामु है घटि घटि गहिर ग्मभीरु ॥ नानक गुरमुखि पाईऐ दइआ करे हरि हीरु ॥४॥२१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 22) सिरीरागु महला १ ॥
भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देसु ॥ अंतरि मैलु न उतरै ध्रिगु जीवणु ध्रिगु वेसु ॥ होरु कितै भगति न होवई बिनु सतिगुर के उपदेस ॥१॥

मन रे गुरमुखि अगनि निवारि ॥ गुर का कहिआ मनि वसै हउमै त्रिसना मारि ॥१॥ रहाउ ॥

मनु माणकु निरमोलु है राम नामि पति पाइ ॥ मिलि सतसंगति हरि पाईऐ गुरमुखि हरि लिव लाइ ॥ आपु गइआ सुखु पाइआ मिलि सललै सलल समाइ ॥२॥

जिनि हरि हरि नामु न चेतिओ सु अउगुणि आवै जाइ ॥ जिसु सतगुरु पुरखु न भेटिओ सु भउजलि पचै पचाइ ॥ इहु माणकु जीउ निरमोलु है इउ कउडी बदलै जाइ ॥३॥

जिंना सतगुरु रसि मिलै से पूरे पुरख सुजाण ॥ गुर मिलि भउजलु लंघीऐ दरगह पति परवाणु ॥ नानक ते मुख उजले धुनि उपजै सबदु नीसाणु ॥४॥२२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 22) सिरीरागु महला १ ॥
वणजु करहु वणजारिहो वखरु लेहु समालि ॥ तैसी वसतु विसाहीऐ जैसी निबहै नालि ॥ अगै साहु सुजाणु है लैसी वसतु समालि ॥१॥

भाई रे रामु कहहु चितु लाइ ॥ हरि जसु वखरु लै चलहु सहु देखै पतीआइ ॥१॥ रहाउ ॥

जिना रासि न सचु है किउ तिना सुखु होइ ॥ खोटै वणजि वणंजिऐ मनु तनु खोटा होइ ॥ फाही फाथे मिरग जिउ दूखु घणो नित रोइ ॥२॥

खोटे पोतै ना पवहि तिन हरि गुर दरसु न होइ ॥ खोटे जाति न पति है खोटि न सीझसि कोइ ॥ खोटे खोटु कमावणा आइ गइआ पति खोइ ॥३॥

नानक मनु समझाईऐ गुर कै सबदि सालाह ॥ राम नाम रंगि रतिआ भारु न भरमु तिनाह ॥ हरि जपि लाहा अगला निरभउ हरि मन माह ॥४॥२३॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 23) सिरीरागु महला १ घरु २ ॥
धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥ पबणि केरे पत जिउ ढलि ढुलि जुमणहार ॥१॥

रंगु माणि लै पिआरिआ जा जोबनु नउ हुला ॥ दिन थोड़ड़े थके भइआ पुराणा चोला ॥१॥ रहाउ ॥

सजण मेरे रंगुले जाइ सुते जीराणि ॥ हं भी वंञा डुमणी रोवा झीणी बाणि ॥२॥

की न सुणेही गोरीए आपण कंनी सोइ ॥ लगी आवहि साहुरै नित न पेईआ होइ ॥३॥

नानक सुती पेईऐ जाणु विरती संनि ॥ गुणा गवाई गंठड़ी अवगण चली बंनि ॥४॥२४॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 23) सिरीरागु महला १ घरु दूजा २ ॥
आपे रसीआ आपि रसु आपे रावणहारु ॥ आपे होवै चोलड़ा आपे सेज भतारु ॥१॥

रंगि रता मेरा साहिबु रवि रहिआ भरपूरि ॥१॥ रहाउ ॥

आपे माछी मछुली आपे पाणी जालु ॥ आपे जाल मणकड़ा आपे अंदरि लालु ॥२॥

आपे बहु बिधि रंगुला सखीए मेरा लालु ॥ नित रवै सोहागणी देखु हमारा हालु ॥३॥

प्रणवै नानकु बेनती तू सरवरु तू हंसु ॥ कउलु तू है कवीआ तू है आपे वेखि विगसु ॥४॥२५॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 23) सिरीरागु महला १ घरु ३ ॥
इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥ मनु किरसाणु हरि रिदै जमाइ लै इउ पावसि पदु निरबाणी ॥१॥

काहे गरबसि मूड़े माइआ ॥ पित सुतो सगल कालत्र माता तेरे होहि न अंति सखाइआ ॥ रहाउ ॥ बिखै बिकार दुसट किरखा करे इन तजि आतमै होइ धिआई ॥ जपु तपु संजमु होहि जब राखे कमलु बिगसै मधु आस्रमाई ॥२॥

बीस सपताहरो बासरो संग्रहै तीनि खोड़ा नित कालु सारै ॥ दस अठार मै अपर्मपरो चीनै कहै नानकु इव एकु तारै ॥३॥२६॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 24) सिरीरागु महला १ घरु ३ ॥
अमलु करि धरती बीजु सबदो करि सच की आब नित देहि पाणी ॥ होइ किरसाणु ईमानु जमाइ लै भिसतु दोजकु मूड़े एव जाणी ॥१॥

मतु जाण सहि गली पाइआ ॥ माल कै माणै रूप की सोभा इतु बिधी जनमु गवाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

ऐब तनि चिकड़ो इहु मनु मीडको कमल की सार नही मूलि पाई ॥ भउरु उसतादु नित भाखिआ बोले किउ बूझै जा नह बुझाई ॥२॥

आखणु सुनणा पउण की बाणी इहु मनु रता माइआ ॥ खसम की नदरि दिलहि पसिंदे जिनी करि एकु धिआइआ ॥३॥

तीह करि रखे पंज करि साथी नाउ सैतानु मतु कटि जाई ॥ नानकु आखै राहि पै चलणा मालु धनु कित कू संजिआही ॥४॥२७॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 24) सिरीरागु महला १ घरु ४ ॥
सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥ आब खाकु जिनि बंधि रहाई धंनु सिरजणहारो ॥१॥

मरणा मुला मरणा ॥ भी करतारहु डरणा ॥१॥ रहाउ ॥

ता तू मुला ता तू काजी जाणहि नामु खुदाई ॥ जे बहुतेरा पड़िआ होवहि को रहै न भरीऐ पाई ॥२॥

सोई काजी जिनि आपु तजिआ इकु नामु कीआ आधारो ॥ है भी होसी जाइ न जासी सचा सिरजणहारो ॥३॥

पंज वखत निवाज गुजारहि पड़हि कतेब कुराणा ॥ नानकु आखै गोर सदेई रहिओ पीणा खाणा ॥४॥२८॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 24) सिरीरागु महला १ घरु ४ ॥
एकु सुआनु दुइ सुआनी नालि ॥ भलके भउकहि सदा बइआलि ॥ कूड़ु छुरा मुठा मुरदारु ॥ धाणक रूपि रहा करतार ॥१॥

मै पति की पंदि न करणी की कार ॥ हउ बिगड़ै रूपि रहा बिकराल ॥ तेरा एकु नामु तारे संसारु ॥ मै एहा आस एहो आधारु ॥१॥ रहाउ ॥

मुखि निंदा आखा दिनु राति ॥ पर घरु जोही नीच सनाति ॥ कामु क्रोधु तनि वसहि चंडाल ॥ धाणक रूपि रहा करतार ॥२॥

फाही सुरति मलूकी वेसु ॥ हउ ठगवाड़ा ठगी देसु ॥ खरा सिआणा बहुता भारु ॥ धाणक रूपि रहा करतार ॥३॥

मै कीता न जाता हरामखोरु ॥ हउ किआ मुहु देसा दुसटु चोरु ॥ नानकु नीचु कहै बीचारु ॥ धाणक रूपि रहा करतार ॥४॥२९॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 24) सिरीरागु महला १ घरु ४ ॥
एका सुरति जेते है जीअ ॥ सुरति विहूणा कोइ न कीअ ॥ जेही सुरति तेहा तिन राहु ॥ लेखा इको आवहु जाहु ॥१॥

काहे जीअ करहि चतुराई ॥ लेवै देवै ढिल न पाई ॥१॥ रहाउ ॥

तेरे जीअ जीआ का तोहि ॥ कित कउ साहिब आवहि रोहि ॥ जे तू साहिब आवहि रोहि ॥ तू ओना का तेरे ओहि ॥२॥

असी बोलविगाड़ विगाड़ह बोल ॥ तू नदरी अंदरि तोलहि तोल ॥ जह करणी तह पूरी मति ॥ करणी बाझहु घटे घटि ॥३॥

प्रणवति नानक गिआनी कैसा होइ ॥ आपु पछाणै बूझै सोइ ॥ गुर परसादि करे बीचारु ॥ सो गिआनी दरगह परवाणु ॥४॥३०॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 25) सिरीरागु महला १ घरु ४ ॥
तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंतु लहा ॥ जह जह देखा तह तह तू है तुझ ते निकसी फूटि मरा ॥१॥

न जाणा मेउ न जाणा जाली ॥ जा दुखु लागै ता तुझै समाली ॥१॥ रहाउ ॥

तू भरपूरि जानिआ मै दूरि ॥ जो कछु करी सु तेरै हदूरि ॥ तू देखहि हउ मुकरि पाउ ॥ तेरै कमि न तेरै नाइ ॥२॥

जेता देहि तेता हउ खाउ ॥ बिआ दरु नाही कै दरि जाउ ॥ नानकु एक कहै अरदासि ॥ जीउ पिंडु सभु तेरै पासि ॥३॥

आपे नेड़ै दूरि आपे ही आपे मंझि मिआनो ॥ आपे वेखै सुणे आपे ही कुदरति करे जहानो ॥ जो तिसु भावै नानका हुकमु सोई परवानो ॥४॥३१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 25) सिरीरागु महला १ घरु ४ ॥
कीता कहा करे मनि मानु ॥ देवणहारे कै हथि दानु ॥ भावै देइ न देई सोइ ॥ कीते कै कहिऐ किआ होइ ॥१॥

आपे सचु भावै तिसु सचु ॥ अंधा कचा कचु निकचु ॥१॥ रहाउ ॥

जा के रुख बिरख आराउ ॥ जेही धातु तेहा तिन नाउ ॥ फुलु भाउ फलु लिखिआ पाइ ॥ आपि बीजि आपे ही खाइ ॥२॥

कची कंध कचा विचि राजु ॥ मति अलूणी फिका सादु ॥ नानक आणे आवै रासि ॥ विणु नावै नाही साबासि ॥३॥३२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 25) सिरीरागु महला १ घरु ५ ॥
अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा करि सकै ॥ जिउ साहिबु राखै तिउ रहै इसु लोभी का जीउ टल पलै ॥१॥

बिनु तेल दीवा किउ जलै ॥१॥ रहाउ ॥

पोथी पुराण कमाईऐ ॥ भउ वटी इतु तनि पाईऐ ॥ सचु बूझणु आणि जलाईऐ ॥२॥

इहु तेलु दीवा इउ जलै ॥ करि चानणु साहिब तउ मिलै ॥१॥ रहाउ ॥

इतु तनि लागै बाणीआ ॥ सुखु होवै सेव कमाणीआ ॥ सभ दुनीआ आवण जाणीआ ॥३॥

विचि दुनीआ सेव कमाईऐ ॥ ता दरगह बैसणु पाईऐ ॥ कहु नानक बाह लुडाईऐ ॥४॥३३॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 53) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सिरीरागु महला १ घरु १ असटपदीआ ॥
आखि आखि मनु वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥ जिस नो वाइ सुणाईऐ सो केवडु कितु थाइ ॥ आखण वाले जेतड़े सभि आखि रहे लिव लाइ ॥१॥

बाबा अलहु अगम अपारु ॥ पाकी नाई पाक थाइ सचा परवदिगारु ॥१॥ रहाउ ॥

तेरा हुकमु न जापी केतड़ा लिखि न जाणै कोइ ॥ जे सउ साइर मेलीअहि तिलु न पुजावहि रोइ ॥ कीमति किनै न पाईआ सभि सुणि सुणि आखहि सोइ ॥२॥

पीर पैकामर सालक सादक सुहदे अउरु सहीद ॥ सेख मसाइक काजी मुला दरि दरवेस रसीद ॥ बरकति तिन कउ अगली पड़दे रहनि दरूद ॥३॥

पुछि न साजे पुछि न ढाहे पुछि न देवै लेइ ॥ आपणी कुदरति आपे जाणै आपे करणु करेइ ॥ सभना वेखै नदरि करि जै भावै तै देइ ॥४॥

थावा नाव न जाणीअहि नावा केवडु नाउ ॥ जिथै वसै मेरा पातिसाहु सो केवडु है थाउ ॥ अम्बड़ि कोइ न सकई हउ किस नो पुछणि जाउ ॥५॥

वरना वरन न भावनी जे किसै वडा करेइ ॥ वडे हथि वडिआईआ जै भावै तै देइ ॥ हुकमि सवारे आपणै चसा न ढिल करेइ ॥६॥

सभु को आखै बहुतु बहुतु लैणै कै वीचारि ॥ केवडु दाता आखीऐ दे कै रहिआ सुमारि ॥ नानक तोटि न आवई तेरे जुगह जुगह भंडार ॥७॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 53) महला १ ॥
सभे कंत महेलीआ सगलीआ करहि सीगारु ॥ गणत गणावणि आईआ सूहा वेसु विकारु ॥ पाखंडि प्रेमु न पाईऐ खोटा पाजु खुआरु ॥१॥

हरि जीउ इउ पिरु रावै नारि ॥ तुधु भावनि सोहागणी अपणी किरपा लैहि सवारि ॥१॥ रहाउ ॥

गुर सबदी सीगारीआ तनु मनु पिर कै पासि ॥ दुइ कर जोड़ि खड़ी तकै सचु कहै अरदासि ॥ लालि रती सच भै वसी भाइ रती रंगि रासि ॥२॥

प्रिअ की चेरी कांढीऐ लाली मानै नाउ ॥ साची प्रीति न तुटई साचे मेलि मिलाउ ॥ सबदि रती मनु वेधिआ हउ सद बलिहारै जाउ ॥३॥

सा धन रंड न बैसई जे सतिगुर माहि समाइ ॥ पिरु रीसालू नउतनो साचउ मरै न जाइ ॥ नित रवै सोहागणी साची नदरि रजाइ ॥४॥

साचु धड़ी धन माडीऐ कापड़ु प्रेम सीगारु ॥ चंदनु चीति वसाइआ मंदरु दसवा दुआरु ॥ दीपकु सबदि विगासिआ राम नामु उर हारु ॥५॥

नारी अंदरि सोहणी मसतकि मणी पिआरु ॥ सोभा सुरति सुहावणी साचै प्रेमि अपार ॥ बिनु पिर पुरखु न जाणई साचे गुर कै हेति पिआरि ॥६॥

निसि अंधिआरी सुतीए किउ पिर बिनु रैणि विहाइ ॥ अंकु जलउ तनु जालीअउ मनु धनु जलि बलि जाइ ॥ जा धन कंति न रावीआ ता बिरथा जोबनु जाइ ॥७॥

सेजै कंत महेलड़ी सूती बूझ न पाइ ॥ हउ सुती पिरु जागणा किस कउ पूछउ जाइ ॥ सतिगुरि मेली भै वसी नानक प्रेमु सखाइ ॥८॥२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 54) सिरीरागु महला १ ॥
आपे गुण आपे कथै आपे सुणि वीचारु ॥ आपे रतनु परखि तूं आपे मोलु अपारु ॥ साचउ मानु महतु तूं आपे देवणहारु ॥१॥

हरि जीउ तूं करता करतारु ॥ जिउ भावै तिउ राखु तूं हरि नामु मिलै आचारु ॥१॥ रहाउ ॥

आपे हीरा निरमला आपे रंगु मजीठ ॥ आपे मोती ऊजलो आपे भगत बसीठु ॥ गुर कै सबदि सलाहणा घटि घटि डीठु अडीठु ॥२॥

आपे सागरु बोहिथा आपे पारु अपारु ॥ साची वाट सुजाणु तूं सबदि लघावणहारु ॥ निडरिआ डरु जाणीऐ बाझु गुरू गुबारु ॥३॥

असथिरु करता देखीऐ होरु केती आवै जाइ ॥ आपे निरमलु एकु तूं होर बंधी धंधै पाइ ॥ गुरि राखे से उबरे साचे सिउ लिव लाइ ॥४॥

हरि जीउ सबदि पछाणीऐ साचि रते गुर वाकि ॥ तितु तनि मैलु न लगई सच घरि जिसु ओताकु ॥ नदरि करे सचु पाईऐ बिनु नावै किआ साकु ॥५॥

जिनी सचु पछाणिआ से सुखीए जुग चारि ॥ हउमै त्रिसना मारि कै सचु रखिआ उर धारि ॥ जग महि लाहा एकु नामु पाईऐ गुर वीचारि ॥६॥

साचउ वखरु लादीऐ लाभु सदा सचु रासि ॥ साची दरगह बैसई भगति सची अरदासि ॥ पति सिउ लेखा निबड़ै राम नामु परगासि ॥७॥

ऊचा ऊचउ आखीऐ कहउ न देखिआ जाइ ॥ जह देखा तह एकु तूं सतिगुरि दीआ दिखाइ ॥ जोति निरंतरि जाणीऐ नानक सहजि सुभाइ ॥८॥३॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 55) सिरीरागु महला १ ॥
मछुली जालु न जाणिआ सरु खारा असगाहु ॥ अति सिआणी सोहणी किउ कीतो वेसाहु ॥ कीते कारणि पाकड़ी कालु न टलै सिराहु ॥१॥

भाई रे इउ सिरि जाणहु कालु ॥ जिउ मछी तिउ माणसा पवै अचिंता जालु ॥१॥ रहाउ ॥

सभु जगु बाधो काल को बिनु गुर कालु अफारु ॥ सचि रते से उबरे दुबिधा छोडि विकार ॥ हउ तिन कै बलिहारणै दरि सचै सचिआर ॥२॥

सीचाने जिउ पंखीआ जाली बधिक हाथि ॥ गुरि राखे से उबरे होरि फाथे चोगै साथि ॥ बिनु नावै चुणि सुटीअहि कोइ न संगी साथि ॥३॥

सचो सचा आखीऐ सचे सचा थानु ॥ जिनी सचा मंनिआ तिन मनि सचु धिआनु ॥ मनि मुखि सूचे जाणीअहि गुरमुखि जिना गिआनु ॥४॥

सतिगुर अगै अरदासि करि साजनु देइ मिलाइ ॥ साजनि मिलिऐ सुखु पाइआ जमदूत मुए बिखु खाइ ॥ नावै अंदरि हउ वसां नाउ वसै मनि आइ ॥५॥

बाझु गुरू गुबारु है बिनु सबदै बूझ न पाइ ॥ गुरमती परगासु होइ सचि रहै लिव लाइ ॥ तिथै कालु न संचरै जोती जोति समाइ ॥६॥

तूंहै साजनु तूं सुजाणु तूं आपे मेलणहारु ॥ गुर सबदी सालाहीऐ अंतु न पारावारु ॥ तिथै कालु न अपड़ै जिथै गुर का सबदु अपारु ॥७॥

हुकमी सभे ऊपजहि हुकमी कार कमाहि ॥ हुकमी कालै वसि है हुकमी साचि समाहि ॥ नानक जो तिसु भावै सो थीऐ इना जंता वसि किछु नाहि ॥८॥४॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 55) सिरीरागु महला १ ॥
मनि जूठै तनि जूठि है जिहवा जूठी होइ ॥ मुखि झूठै झूठु बोलणा किउ करि सूचा होइ ॥ बिनु अभ सबद न मांजीऐ साचे ते सचु होइ ॥१॥

मुंधे गुणहीणी सुखु केहि ॥ पिरु रलीआ रसि माणसी साचि सबदि सुखु नेहि ॥१॥ रहाउ ॥

पिरु परदेसी जे थीऐ धन वांढी झूरेइ ॥ जिउ जलि थोड़ै मछुली करण पलाव करेइ ॥ पिर भावै सुखु पाईऐ जा आपे नदरि करेइ ॥२॥

पिरु सालाही आपणा सखी सहेली नालि ॥ तनि सोहै मनु मोहिआ रती रंगि निहालि ॥ सबदि सवारी सोहणी पिरु रावे गुण नालि ॥३॥

कामणि कामि न आवई खोटी अवगणिआरि ॥ ना सुखु पेईऐ साहुरै झूठि जली वेकारि ॥ आवणु वंञणु डाखड़ो छोडी कंति विसारि ॥४॥

पिर की नारि सुहावणी मुती सो कितु सादि ॥ पिर कै कामि न आवई बोले फादिलु बादि ॥ दरि घरि ढोई ना लहै छूटी दूजै सादि ॥५॥

पंडित वाचहि पोथीआ ना बूझहि वीचारु ॥ अन कउ मती दे चलहि माइआ का वापारु ॥ कथनी झूठी जगु भवै रहणी सबदु सु सारु ॥६॥

केते पंडित जोतकी बेदा करहि बीचारु ॥ वादि विरोधि सलाहणे वादे आवणु जाणु ॥ बिनु गुर करम न छुटसी कहि सुणि आखि वखाणु ॥७॥

सभि गुणवंती आखीअहि मै गुणु नाही कोइ ॥ हरि वरु नारि सुहावणी मै भावै प्रभु सोइ ॥ नानक सबदि मिलावड़ा ना वेछोड़ा होइ ॥८॥५॥


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