Pt 19 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 19 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मारू -- SGGS 1087) सलोकु मः १ ॥
भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥ पूछहु जाइ सिआणिआ दुखु काटै मेरा कोइ ॥ सतिगुरु साचा मनि वसै साजनु उत ही ठाइ ॥ नानक मनु त्रिपतासीऐ सिफती साचै नाइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1088) सलोकु मः १ ॥
महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥ जे गुण होवनि ता पिरु रवै नानक अवगुण मुंध ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1088) मः १ ॥
साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥ नानक अहिनिसि सदा भली पिर कै हेति पिआरि ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1088) मः १ ॥
ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगमु अथाहु ॥ नानक धंनु सोहागणी जो भावहि वेपरवाह ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1089) सलोकु मः १ ॥
ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥ नानक लालो लालु है सचै रता सचु ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥ साहिबु लेखा मंगसी दुनीआ देखि न भूलु ॥ दिल दरवानी जो करे दरवेसी दिलु रासि ॥ इसक मुहबति नानका लेखा करते पासि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1090) मः १ ॥
अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥ हीरै हीरा बेधिआ नानक कंठि सुभाइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥ कालरु लादसि सरु लाघणउ लाभु न पूंजी साथि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1090) मः १ ॥
पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥ नानक वखरु निरमलउ धंनु साहु वापारु ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1090) मः १ ॥
पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥ माथै ऊभै जमु मारसी नानक मेलणु नामि ॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
भोलतणि भै मनि वसै हेकै पाधर हीडु ॥ अति डाहपणि दुखु घणो तीने थाव भरीडु ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1091) मः १ ॥
मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥ नानक नामु समालि तू बीजउ अवरु न कोइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1091) मः १ ॥
सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥ वडा वेपरवाहु सतिगुरु मिलै त पारि पवा ॥ मझ भरि दुख बदुख ॥ नानक सचे नाम बिनु किसै न लथी भुख ॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1091) सलोकु मः १ ॥
सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥ हुकमु न जाई मेटिआ जो लिखिआ सो नालि ॥ कउणु मूआ कउणु मारसी कउणु आवै कउणु जाइ ॥ कउणु रहसी नानका किस की सुरति समाइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1091) मः १ ॥
हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥ त्रिसना थकी नानका जा मनु रता नाइ ॥ लोइण रते लोइणी कंनी सुरति समाइ ॥ जीभ रसाइणि चूनड़ी रती लाल लवाइ ॥ अंदरु मुसकि झकोलिआ कीमति कही न जाइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1092) सलोक मः १ ॥
हउ मै करी तां तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥ बूझहु गिआनी बूझणा एह अकथ कथा मन माहि ॥ बिनु गुर ततु न पाईऐ अलखु वसै सभ माहि ॥ सतिगुरु मिलै त जाणीऐ जां सबदु वसै मन माहि ॥ आपु गइआ भ्रमु भउ गइआ जनम मरन दुख जाहि ॥ गुरमति अलखु लखाईऐ ऊतम मति तराहि ॥ नानक सोहं हंसा जपु जापहु त्रिभवण तिसै समाहि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1093) मः १ ॥
जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥ किस नो कहीऐ नानका जा घरि वरतै सभु कोइ ॥२॥

(राग तुखारी -- SGGS 1107) तुखारी छंत महला १ बारह माहा
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तू सुणि किरत करमा पुरबि कमाइआ ॥ सिरि सिरि सुख सहमा देहि सु तू भला ॥ हरि रचना तेरी किआ गति मेरी हरि बिनु घड़ी न जीवा ॥ प्रिअ बाझु दुहेली कोइ न बेली गुरमुखि अम्रितु पीवां ॥ रचना राचि रहे निरंकारी प्रभ मनि करम सुकरमा ॥ नानक पंथु निहाले सा धन तू सुणि आतम रामा ॥१॥

(राग तुखारी -- SGGS 1107) बाबीहा प्रिउ बोले कोकिल बाणीआ ॥ सा धन सभि रस चोलै अंकि समाणीआ ॥ हरि अंकि समाणी जा प्रभ भाणी सा सोहागणि नारे ॥ नव घर थापि महल घरु ऊचउ निज घरि वासु मुरारे ॥ सभ तेरी तू मेरा प्रीतमु निसि बासुर रंगि रावै ॥ नानक प्रिउ प्रिउ चवै बबीहा कोकिल सबदि सुहावै ॥२॥

(राग तुखारी -- SGGS 1107) तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥ मनि तनि रवत रवंने घड़ी न बीसरै ॥ किउ घड़ी बिसारी हउ बलिहारी हउ जीवा गुण गाए ॥ ना कोई मेरा हउ किसु केरा हरि बिनु रहणु न जाए ॥ ओट गही हरि चरण निवासे भए पवित्र सरीरा ॥ नानक द्रिसटि दीरघ सुखु पावै गुर सबदी मनु धीरा ॥३॥

(राग तुखारी -- SGGS 1107) बरसै अम्रित धार बूंद सुहावणी ॥ साजन मिले सहजि सुभाइ हरि सिउ प्रीति बणी ॥ हरि मंदरि आवै जा प्रभ भावै धन ऊभी गुण सारी ॥ घरि घरि कंतु रवै सोहागणि हउ किउ कंति विसारी ॥ उनवि घन छाए बरसु सुभाए मनि तनि प्रेमु सुखावै ॥ नानक वरसै अम्रित बाणी करि किरपा घरि आवै ॥४॥

(राग तुखारी -- SGGS 1107) चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥ बन फूले मंझ बारि मै पिरु घरि बाहुड़ै ॥ पिरु घरि नही आवै धन किउ सुखु पावै बिरहि बिरोध तनु छीजै ॥ कोकिल अ्मबि सुहावी बोलै किउ दुखु अंकि सहीजै ॥ भवरु भवंता फूली डाली किउ जीवा मरु माए ॥ नानक चेति सहजि सुखु पावै जे हरि वरु घरि धन पाए ॥५॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) वैसाखु भला साखा वेस करे ॥ धन देखै हरि दुआरि आवहु दइआ करे ॥ घरि आउ पिआरे दुतर तारे तुधु बिनु अढु न मोलो ॥ कीमति कउण करे तुधु भावां देखि दिखावै ढोलो ॥ दूरि न जाना अंतरि माना हरि का महलु पछाना ॥ नानक वैसाखीं प्रभु पावै सुरति सबदि मनु माना ॥६॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) माहु जेठु भला प्रीतमु किउ बिसरै ॥ थल तापहि सर भार सा धन बिनउ करै ॥ धन बिनउ करेदी गुण सारेदी गुण सारी प्रभ भावा ॥ साचै महलि रहै बैरागी आवण देहि त आवा ॥ निमाणी निताणी हरि बिनु किउ पावै सुख महली ॥ नानक जेठि जाणै तिसु जैसी करमि मिलै गुण गहिली ॥७॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) आसाड़ु भला सूरजु गगनि तपै ॥ धरती दूख सहै सोखै अगनि भखै ॥ अगनि रसु सोखै मरीऐ धोखै भी सो किरतु न हारे ॥ रथु फिरै छाइआ धन ताकै टीडु लवै मंझि बारे ॥ अवगण बाधि चली दुखु आगै सुखु तिसु साचु समाले ॥ नानक जिस नो इहु मनु दीआ मरणु जीवणु प्रभ नाले ॥८॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) सावणि सरस मना घण वरसहि रुति आए ॥ मै मनि तनि सहु भावै पिर परदेसि सिधाए ॥ पिरु घरि नही आवै मरीऐ हावै दामनि चमकि डराए ॥ सेज इकेली खरी दुहेली मरणु भइआ दुखु माए ॥ हरि बिनु नीद भूख कहु कैसी कापड़ु तनि न सुखावए ॥ नानक सा सोहागणि कंती पिर कै अंकि समावए ॥९॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) भादउ भरमि भुली भरि जोबनि पछुताणी ॥ जल थल नीरि भरे बरस रुते रंगु माणी ॥ बरसै निसि काली किउ सुखु बाली दादर मोर लवंते ॥ प्रिउ प्रिउ चवै बबीहा बोले भुइअंगम फिरहि डसंते ॥ मछर डंग साइर भर सुभर बिनु हरि किउ सुखु पाईऐ ॥ नानक पूछि चलउ गुर अपुने जह प्रभु तह ही जाईऐ ॥१०॥

(राग तुखारी -- SGGS 1108) असुनि आउ पिरा सा धन झूरि मुई ॥ ता मिलीऐ प्रभ मेले दूजै भाइ खुई ॥ झूठि विगुती ता पिर मुती कुकह काह सि फुले ॥ आगै घाम पिछै रुति जाडा देखि चलत मनु डोले ॥ दह दिसि साख हरी हरीआवल सहजि पकै सो मीठा ॥ नानक असुनि मिलहु पिआरे सतिगुर भए बसीठा ॥११॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) कतकि किरतु पइआ जो प्रभ भाइआ ॥ दीपकु सहजि बलै तति जलाइआ ॥ दीपक रस तेलो धन पिर मेलो धन ओमाहै सरसी ॥ अवगण मारी मरै न सीझै गुणि मारी ता मरसी ॥ नामु भगति दे निज घरि बैठे अजहु तिनाड़ी आसा ॥ नानक मिलहु कपट दर खोलहु एक घड़ी खटु मासा ॥१२॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) मंघर माहु भला हरि गुण अंकि समावए ॥ गुणवंती गुण रवै मै पिरु निहचलु भावए ॥ निहचलु चतुरु सुजाणु बिधाता चंचलु जगतु सबाइआ ॥ गिआनु धिआनु गुण अंकि समाणे प्रभ भाणे ता भाइआ ॥ गीत नाद कवित कवे सुणि राम नामि दुखु भागै ॥ नानक सा धन नाह पिआरी अभ भगती पिर आगै ॥१३॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) पोखि तुखारु पड़ै वणु त्रिणु रसु सोखै ॥ आवत की नाही मनि तनि वसहि मुखे ॥ मनि तनि रवि रहिआ जगजीवनु गुर सबदी रंगु माणी ॥ अंडज जेरज सेतज उतभुज घटि घटि जोति समाणी ॥ दरसनु देहु दइआपति दाते गति पावउ मति देहो ॥ नानक रंगि रवै रसि रसीआ हरि सिउ प्रीति सनेहो ॥१४॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) माघि पुनीत भई तीरथु अंतरि जानिआ ॥ साजन सहजि मिले गुण गहि अंकि समानिआ ॥ प्रीतम गुण अंके सुणि प्रभ बंके तुधु भावा सरि नावा ॥ गंग जमुन तह बेणी संगम सात समुंद समावा ॥ पुंन दान पूजा परमेसुर जुगि जुगि एको जाता ॥ नानक माघि महा रसु हरि जपि अठसठि तीरथ नाता ॥१५॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) फलगुनि मनि रहसी प्रेमु सुभाइआ ॥ अनदिनु रहसु भइआ आपु गवाइआ ॥ मन मोहु चुकाइआ जा तिसु भाइआ करि किरपा घरि आओ ॥ बहुते वेस करी पिर बाझहु महली लहा न थाओ ॥ हार डोर रस पाट पट्मबर पिरि लोड़ी सीगारी ॥ नानक मेलि लई गुरि अपणै घरि वरु पाइआ नारी ॥१६॥

(राग तुखारी -- SGGS 1109) बे दस माह रुती थिती वार भले ॥ घड़ी मूरत पल साचे आए सहजि मिले ॥ प्रभ मिले पिआरे कारज सारे करता सभ बिधि जाणै ॥ जिनि सीगारी तिसहि पिआरी मेलु भइआ रंगु माणै ॥ घरि सेज सुहावी जा पिरि रावी गुरमुखि मसतकि भागो ॥ नानक अहिनिसि रावै प्रीतमु हरि वरु थिरु सोहागो ॥१७॥१॥

(राग तुखारी -- SGGS 1110) तुखारी महला १ ॥
पहिलै पहरै नैण सलोनड़ीए रैणि अंधिआरी राम ॥ वखरु राखु मुईए आवै वारी राम ॥ वारी आवै कवणु जगावै सूती जम रसु चूसए ॥ रैणि अंधेरी किआ पति तेरी चोरु पड़ै घरु मूसए ॥ राखणहारा अगम अपारा सुणि बेनंती मेरीआ ॥ नानक मूरखु कबहि न चेतै किआ सूझै रैणि अंधेरीआ ॥१॥

दूजा पहरु भइआ जागु अचेती राम ॥ वखरु राखु मुईए खाजै खेती राम ॥ राखहु खेती हरि गुर हेती जागत चोरु न लागै ॥ जम मगि न जावहु ना दुखु पावहु जम का डरु भउ भागै ॥ रवि ससि दीपक गुरमति दुआरै मनि साचा मुखि धिआवए ॥ नानक मूरखु अजहु न चेतै किव दूजै सुखु पावए ॥२॥

तीजा पहरु भइआ नीद विआपी राम ॥ माइआ सुत दारा दूखि संतापी राम ॥ माइआ सुत दारा जगत पिआरा चोग चुगै नित फासै ॥ नामु धिआवै ता सुखु पावै गुरमति कालु न ग्रासै ॥ जमणु मरणु कालु नही छोडै विणु नावै संतापी ॥ नानक तीजै त्रिबिधि लोका माइआ मोहि विआपी ॥३॥

चउथा पहरु भइआ दउतु बिहागै राम ॥ तिन घरु राखिअड़ा जो अनदिनु जागै राम ॥ गुर पूछि जागे नामि लागे तिना रैणि सुहेलीआ ॥ गुर सबदु कमावहि जनमि न आवहि तिना हरि प्रभु बेलीआ ॥ कर क्मपि चरण सरीरु क्मपै नैण अंधुले तनु भसम से ॥ नानक दुखीआ जुग चारे बिनु नाम हरि के मनि वसे ॥४॥

खूली गंठि उठो लिखिआ आइआ राम ॥ रस कस सुख ठाके बंधि चलाइआ राम ॥ बंधि चलाइआ जा प्रभ भाइआ ना दीसै ना सुणीऐ ॥ आपण वारी सभसै आवै पकी खेती लुणीऐ ॥ घड़ी चसे का लेखा लीजै बुरा भला सहु जीआ ॥ नानक सुरि नर सबदि मिलाए तिनि प्रभि कारणु कीआ ॥५॥२॥

(राग तुखारी -- SGGS 1110) तुखारी महला १ ॥
तारा चड़िआ लमा किउ नदरि निहालिआ राम ॥ सेवक पूर करमा सतिगुरि सबदि दिखालिआ राम ॥ गुर सबदि दिखालिआ सचु समालिआ अहिनिसि देखि बीचारिआ ॥ धावत पंच रहे घरु जाणिआ कामु क्रोधु बिखु मारिआ ॥ अंतरि जोति भई गुर साखी चीने राम करमा ॥ नानक हउमै मारि पतीणे तारा चड़िआ लमा ॥१॥

गुरमुखि जागि रहे चूकी अभिमानी राम ॥ अनदिनु भोरु भइआ साचि समानी राम ॥ साचि समानी गुरमुखि मनि भानी गुरमुखि साबतु जागे ॥ साचु नामु अम्रितु गुरि दीआ हरि चरनी लिव लागे ॥ प्रगटी जोति जोति महि जाता मनमुखि भरमि भुलाणी ॥ नानक भोरु भइआ मनु मानिआ जागत रैणि विहाणी ॥२॥

अउगण वीसरिआ गुणी घरु कीआ राम ॥ एको रवि रहिआ अवरु न बीआ राम ॥ रवि रहिआ सोई अवरु न कोई मन ही ते मनु मानिआ ॥ जिनि जल थल त्रिभवण घटु घटु थापिआ सो प्रभु गुरमुखि जानिआ ॥ करण कारण समरथ अपारा त्रिबिधि मेटि समाई ॥ नानक अवगण गुणह समाणे ऐसी गुरमति पाई ॥३॥

आवण जाण रहे चूका भोला राम ॥ हउमै मारि मिले साचा चोला राम ॥ हउमै गुरि खोई परगटु होई चूके सोग संतापै ॥ जोती अंदरि जोति समाणी आपु पछाता आपै ॥ पेईअड़ै घरि सबदि पतीणी साहुरड़ै पिर भाणी ॥ नानक सतिगुरि मेलि मिलाई चूकी काणि लोकाणी ॥४॥३॥

(राग तुखारी -- SGGS 1111) तुखारी महला १ ॥
भोलावड़ै भुली भुलि भुलि पछोताणी ॥ पिरि छोडिअड़ी सुती पिर की सार न जाणी ॥ पिरि छोडी सुती अवगणि मुती तिसु धन विधण राते ॥ कामि क्रोधि अहंकारि विगुती हउमै लगी ताते ॥ उडरि हंसु चलिआ फुरमाइआ भसमै भसम समाणी ॥ नानक सचे नाम विहूणी भुलि भुलि पछोताणी ॥१॥

सुणि नाह पिआरे इक बेनंती मेरी ॥ तू निज घरि वसिअड़ा हउ रुलि भसमै ढेरी ॥ बिनु अपने नाहै कोइ न चाहै किआ कहीऐ किआ कीजै ॥ अम्रित नामु रसन रसु रसना गुर सबदी रसु पीजै ॥ विणु नावै को संगि न साथी आवै जाइ घनेरी ॥ नानक लाहा लै घरि जाईऐ साची सचु मति तेरी ॥२॥

साजन देसि विदेसीअड़े सानेहड़े देदी ॥ सारि समाले तिन सजणा मुंध नैण भरेदी ॥ मुंध नैण भरेदी गुण सारेदी किउ प्रभ मिला पिआरे ॥ मारगु पंथु न जाणउ विखड़ा किउ पाईऐ पिरु पारे ॥ सतिगुर सबदी मिलै विछुंनी तनु मनु आगै राखै ॥ नानक अम्रित बिरखु महा रस फलिआ मिलि प्रीतम रसु चाखै ॥३॥

महलि बुलाइड़ीए बिलमु न कीजै ॥ अनदिनु रतड़ीए सहजि मिलीजै ॥ सुखि सहजि मिलीजै रोसु न कीजै गरबु निवारि समाणी ॥ साचै राती मिलै मिलाई मनमुखि आवण जाणी ॥ जब नाची तब घूघटु कैसा मटुकी फोड़ि निरारी ॥ नानक आपै आपु पछाणै गुरमुखि ततु बीचारी ॥४॥४॥

(राग तुखारी -- SGGS 1112) तुखारी महला १ ॥
मेरे लाल रंगीले हम लालन के लाले ॥ गुरि अलखु लखाइआ अवरु न दूजा भाले ॥ गुरि अलखु लखाइआ जा तिसु भाइआ जा प्रभि किरपा धारी ॥ जगजीवनु दाता पुरखु बिधाता सहजि मिले बनवारी ॥ नदरि करहि तू तारहि तरीऐ सचु देवहु दीन दइआला ॥ प्रणवति नानक दासनि दासा तू सरब जीआ प्रतिपाला ॥१॥

भरिपुरि धारि रहे अति पिआरे ॥ सबदे रवि रहिआ गुर रूपि मुरारे ॥ गुर रूप मुरारे त्रिभवण धारे ता का अंतु न पाइआ ॥ रंगी जिनसी जंत उपाए नित देवै चड़ै सवाइआ ॥ अपर्मपरु आपे थापि उथापे तिसु भावै सो होवै ॥ नानक हीरा हीरै बेधिआ गुण कै हारि परोवै ॥२॥

गुण गुणहि समाणे मसतकि नाम नीसाणो ॥ सचु साचि समाइआ चूका आवण जाणो ॥ सचु साचि पछाता साचै राता साचु मिलै मनि भावै ॥ साचे ऊपरि अवरु न दीसै साचे साचि समावै ॥ मोहनि मोहि लीआ मनु मेरा बंधन खोलि निरारे ॥ नानक जोती जोति समाणी जा मिलिआ अति पिआरे ॥३॥

सच घरु खोजि लहे साचा गुर थानो ॥ मनमुखि नह पाईऐ गुरमुखि गिआनो ॥ देवै सचु दानो सो परवानो सद दाता वड दाणा ॥ अमरु अजोनी असथिरु जापै साचा महलु चिराणा ॥ दोति उचापति लेखु न लिखीऐ प्रगटी जोति मुरारी ॥ नानक साचा साचै राचा गुरमुखि तरीऐ तारी ॥४॥५॥

(राग तुखारी -- SGGS 1112) तुखारी महला १ ॥
ए मन मेरिआ तू समझु अचेत इआणिआ राम ॥ ए मन मेरिआ छडि अवगण गुणी समाणिआ राम ॥ बहु साद लुभाणे किरत कमाणे विछुड़िआ नही मेला ॥ किउ दुतरु तरीऐ जम डरि मरीऐ जम का पंथु दुहेला ॥ मनि रामु नही जाता साझ प्रभाता अवघटि रुधा किआ करे ॥ बंधनि बाधिआ इन बिधि छूटै गुरमुखि सेवै नरहरे ॥१॥

ए मन मेरिआ तू छोडि आल जंजाला राम ॥ ए मन मेरिआ हरि सेवहु पुरखु निराला राम ॥ हरि सिमरि एकंकारु साचा सभु जगतु जिंनि उपाइआ ॥ पउणु पाणी अगनि बाधे गुरि खेलु जगति दिखाइआ ॥ आचारि तू वीचारि आपे हरि नामु संजम जप तपो ॥ सखा सैनु पिआरु प्रीतमु नामु हरि का जपु जपो ॥२॥

ए मन मेरिआ तू थिरु रहु चोट न खावही राम ॥ ए मन मेरिआ गुण गावहि सहजि समावही राम ॥ गुण गाइ राम रसाइ रसीअहि गुर गिआन अंजनु सारहे ॥ त्रै लोक दीपकु सबदि चानणु पंच दूत संघारहे ॥ भै काटि निरभउ तरहि दुतरु गुरि मिलिऐ कारज सारए ॥ रूपु रंगु पिआरु हरि सिउ हरि आपि किरपा धारए ॥३॥

ए मन मेरिआ तू किआ लै आइआ किआ लै जाइसी राम ॥ ए मन मेरिआ ता छुटसी जा भरमु चुकाइसी राम ॥ धनु संचि हरि हरि नाम वखरु गुर सबदि भाउ पछाणहे ॥ मैलु परहरि सबदि निरमलु महलु घरु सचु जाणहे ॥ पति नामु पावहि घरि सिधावहि झोलि अम्रित पी रसो ॥ हरि नामु धिआईऐ सबदि रसु पाईऐ वडभागि जपीऐ हरि जसो ॥४॥

ए मन मेरिआ बिनु पउड़ीआ मंदरि किउ चड़ै राम ॥ ए मन मेरिआ बिनु बेड़ी पारि न अ्मबड़ै राम ॥ पारि साजनु अपारु प्रीतमु गुर सबद सुरति लंघावए ॥ मिलि साधसंगति करहि रलीआ फिरि न पछोतावए ॥ करि दइआ दानु दइआल साचा हरि नाम संगति पावओ ॥ नानकु पइअ्मपै सुणहु प्रीतम गुर सबदि मनु समझावओ ॥५॥६॥

(राग भैरउ -- SGGS 1125) रागु भैरउ महला १ घरु १ चउपदे
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
तुझ ते बाहरि किछू न होइ ॥ तू करि करि देखहि जाणहि सोइ ॥१॥

किआ कहीऐ किछु कही न जाइ ॥ जो किछु अहै सभ तेरी रजाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जो किछु करणा सु तेरै पासि ॥ किसु आगै कीचै अरदासि ॥२॥

आखणु सुनणा तेरी बाणी ॥ तू आपे जाणहि सरब विडाणी ॥३॥

करे कराए जाणै आपि ॥ नानक देखै थापि उथापि ॥४॥१॥

(राग भैरउ -- SGGS 1125) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु भैरउ महला १ घरु २ ॥
गुर कै सबदि तरे मुनि केते इंद्रादिक ब्रहमादि तरे ॥ सनक सनंदन तपसी जन केते गुर परसादी पारि परे ॥१॥

भवजलु बिनु सबदै किउ तरीऐ ॥ नाम बिना जगु रोगि बिआपिआ दुबिधा डुबि डुबि मरीऐ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरु देवा गुरु अलख अभेवा त्रिभवण सोझी गुर की सेवा ॥ आपे दाति करी गुरि दातै पाइआ अलख अभेवा ॥२॥

मनु राजा मनु मन ते मानिआ मनसा मनहि समाई ॥ मनु जोगी मनु बिनसि बिओगी मनु समझै गुण गाई ॥३॥

गुर ते मनु मारिआ सबदु वीचारिआ ते विरले संसारा ॥ नानक साहिबु भरिपुरि लीणा साच सबदि निसतारा ॥४॥१॥२॥

(राग भैरउ -- SGGS 1125) भैरउ महला १ ॥
नैनी द्रिसटि नही तनु हीना जरि जीतिआ सिरि कालो ॥ रूपु रंगु रहसु नही साचा किउ छोडै जम जालो ॥१॥

प्राणी हरि जपि जनमु गइओ ॥ साच सबद बिनु कबहु न छूटसि बिरथा जनमु भइओ ॥१॥ रहाउ ॥

तन महि कामु क्रोधु हउ ममता कठिन पीर अति भारी ॥ गुरमुखि राम जपहु रसु रसना इन बिधि तरु तू तारी ॥२॥

बहरे करन अकलि भई होछी सबद सहजु नही बूझिआ ॥ जनमु पदारथु मनमुखि हारिआ बिनु गुर अंधु न सूझिआ ॥३॥

रहै उदासु आस निरासा सहज धिआनि बैरागी ॥ प्रणवति नानक गुरमुखि छूटसि राम नामि लिव लागी ॥४॥२॥३॥

(राग भैरउ -- SGGS 1126) भैरउ महला १ ॥
भूंडी चाल चरण कर खिसरे तुचा देह कुमलानी ॥ नेत्री धुंधि करन भए बहरे मनमुखि नामु न जानी ॥१॥

अंधुले किआ पाइआ जगि आइ ॥ रामु रिदै नही गुर की सेवा चाले मूलु गवाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जिहवा रंगि नही हरि राती जब बोलै तब फीके ॥ संत जना की निंदा विआपसि पसू भए कदे होहि न नीके ॥२॥

अम्रित का रसु विरली पाइआ सतिगुर मेलि मिलाए ॥ जब लगु सबद भेदु नही आइआ तब लगु कालु संताए ॥३॥

अन को दरु घरु कबहू न जानसि एको दरु सचिआरा ॥ गुर परसादि परम पदु पाइआ नानकु कहै विचारा ॥४॥३॥४॥

(राग भैरउ -- SGGS 1126) भैरउ महला १ ॥
सगली रैणि सोवत गलि फाही दिनसु जंजालि गवाइआ ॥ खिनु पलु घड़ी नही प्रभु जानिआ जिनि इहु जगतु उपाइआ ॥१॥

मन रे किउ छूटसि दुखु भारी ॥ किआ ले आवसि किआ ले जावसि राम जपहु गुणकारी ॥१॥ रहाउ ॥

ऊंधउ कवलु मनमुख मति होछी मनि अंधै सिरि धंधा ॥ कालु बिकालु सदा सिरि तेरै बिनु नावै गलि फंधा ॥२॥

डगरी चाल नेत्र फुनि अंधुले सबद सुरति नही भाई ॥ सासत्र बेद त्रै गुण है माइआ अंधुलउ धंधु कमाई ॥३॥

खोइओ मूलु लाभु कह पावसि दुरमति गिआन विहूणे ॥ सबदु बीचारि राम रसु चाखिआ नानक साचि पतीणे ॥४॥४॥५॥

(राग भैरउ -- SGGS 1126) भैरउ महला १ ॥
गुर कै संगि रहै दिनु राती रामु रसनि रंगि राता ॥ अवरु न जाणसि सबदु पछाणसि अंतरि जाणि पछाता ॥१॥

सो जनु ऐसा मै मनि भावै ॥ आपु मारि अपर्मपरि राता गुर की कार कमावै ॥१॥ रहाउ ॥

अंतरि बाहरि पुरखु निरंजनु आदि पुरखु आदेसो ॥ घट घट अंतरि सरब निरंतरि रवि रहिआ सचु वेसो ॥२॥

साचि रते सचु अम्रितु जिहवा मिथिआ मैलु न राई ॥ निरमल नामु अम्रित रसु चाखिआ सबदि रते पति पाई ॥३॥

गुणी गुणी मिलि लाहा पावसि गुरमुखि नामि वडाई ॥ सगले दूख मिटहि गुर सेवा नानक नामु सखाई ॥४॥५॥६॥

(राग भैरउ -- SGGS 1127) भैरउ महला १ ॥
हिरदै नामु सरब धनु धारणु गुर परसादी पाईऐ ॥ अमर पदारथ ते किरतारथ सहज धिआनि लिव लाईऐ ॥१॥

मन रे राम भगति चितु लाईऐ ॥ गुरमुखि राम नामु जपि हिरदै सहज सेती घरि जाईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

भरमु भेदु भउ कबहु न छूटसि आवत जात न जानी ॥ बिनु हरि नाम को मुकति न पावसि डूबि मुए बिनु पानी ॥२॥

धंधा करत सगली पति खोवसि भरमु न मिटसि गवारा ॥ बिनु गुर सबद मुकति नही कब ही अंधुले धंधु पसारा ॥३॥

अकुल निरंजन सिउ मनु मानिआ मन ही ते मनु मूआ ॥ अंतरि बाहरि एको जानिआ नानक अवरु न दूआ ॥४॥६॥७॥

(राग भैरउ -- SGGS 1127) भैरउ महला १ ॥
जगन होम पुंन तप पूजा देह दुखी नित दूख सहै ॥ राम नाम बिनु मुकति न पावसि मुकति नामि गुरमुखि लहै ॥१॥

राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा ॥ बिखु खावै बिखु बोली बोलै बिनु नावै निहफलु मरि भ्रमना ॥१॥ रहाउ ॥

पुसतक पाठ बिआकरण वखाणै संधिआ करम तिकाल करै ॥ बिनु गुर सबद मुकति कहा प्राणी राम नाम बिनु उरझि मरै ॥२॥

डंड कमंडल सिखा सूतु धोती तीरथि गवनु अति भ्रमनु करै ॥ राम नाम बिनु सांति न आवै जपि हरि हरि नामु सु पारि परै ॥३॥

जटा मुकटु तनि भसम लगाई बसत्र छोडि तनि नगनु भइआ ॥ राम नाम बिनु त्रिपति न आवै किरत कै बांधै भेखु भइआ ॥४॥

जेते जीअ जंत जलि थलि महीअलि जत्र कत्र तू सरब जीआ ॥ गुर परसादि राखि ले जन कउ हरि रसु नानक झोलि पीआ ॥५॥७॥८॥

(राग भैरउ -- SGGS 1153) भैरउ असटपदीआ महला १ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आतम महि रामु राम महि आतमु चीनसि गुर बीचारा ॥ अम्रित बाणी सबदि पछाणी दुख काटै हउ मारा ॥१॥

नानक हउमै रोग बुरे ॥ जह देखां तह एका बेदन आपे बखसै सबदि धुरे ॥१॥ रहाउ ॥

आपे परखे परखणहारै बहुरि सूलाकु न होई ॥ जिन कउ नदरि भई गुरि मेले प्रभ भाणा सचु सोई ॥२॥

पउणु पाणी बैसंतरु रोगी रोगी धरति सभोगी ॥ मात पिता माइआ देह सि रोगी रोगी कुट्मब संजोगी ॥३॥

रोगी ब्रहमा बिसनु सरुद्रा रोगी सगल संसारा ॥ हरि पदु चीनि भए से मुकते गुर का सबदु वीचारा ॥४॥

रोगी सात समुंद सनदीआ खंड पताल सि रोगि भरे ॥ हरि के लोक सि साचि सुहेले सरबी थाई नदरि करे ॥५॥

रोगी खट दरसन भेखधारी नाना हठी अनेका ॥ बेद कतेब करहि कह बपुरे नह बूझहि इक एका ॥६॥

मिठ रसु खाइ सु रोगि भरीजै कंद मूलि सुखु नाही ॥ नामु विसारि चलहि अन मारगि अंत कालि पछुताही ॥७॥

तीरथि भरमै रोगु न छूटसि पड़िआ बादु बिबादु भइआ ॥ दुबिधा रोगु सु अधिक वडेरा माइआ का मुहताजु भइआ ॥८॥

गुरमुखि साचा सबदि सलाहै मनि साचा तिसु रोगु गइआ ॥ नानक हरि जन अनदिनु निरमल जिन कउ करमि नीसाणु पइआ ॥९॥१॥

(राग बसंत -- SGGS 1168) रागु बसंतु महला १ घरु १ चउपदे दुतुके
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
माहा माह मुमारखी चड़िआ सदा बसंतु ॥ परफड़ु चित समालि सोइ सदा सदा गोबिंदु ॥१॥

भोलिआ हउमै सुरति विसारि ॥ हउमै मारि बीचारि मन गुण विचि गुणु लै सारि ॥१॥ रहाउ ॥

करम पेडु साखा हरी धरमु फुलु फलु गिआनु ॥ पत परापति छाव घणी चूका मन अभिमानु ॥२॥

अखी कुदरति कंनी बाणी मुखि आखणु सचु नामु ॥ पति का धनु पूरा होआ लागा सहजि धिआनु ॥३॥

माहा रुती आवणा वेखहु करम कमाइ ॥ नानक हरे न सूकही जि गुरमुखि रहे समाइ ॥४॥१॥

(राग बसंत -- SGGS 1168) महला १ बसंतु ॥
रुति आईले सरस बसंत माहि ॥ रंगि राते रवहि सि तेरै चाइ ॥ किसु पूज चड़ावउ लगउ पाइ ॥१॥

तेरा दासनि दासा कहउ राइ ॥ जगजीवन जुगति न मिलै काइ ॥१॥ रहाउ ॥

तेरी मूरति एका बहुतु रूप ॥ किसु पूज चड़ावउ देउ धूप ॥ तेरा अंतु न पाइआ कहा पाइ ॥ तेरा दासनि दासा कहउ राइ ॥२॥

तेरे सठि स्मबत सभि तीरथा ॥ तेरा सचु नामु परमेसरा ॥ तेरी गति अविगति नही जाणीऐ ॥ अणजाणत नामु वखाणीऐ ॥३॥

नानकु वेचारा किआ कहै ॥ सभु लोकु सलाहे एकसै ॥ सिरु नानक लोका पाव है ॥ बलिहारी जाउ जेते तेरे नाव है ॥४॥२॥

(राग बसंत -- SGGS 1168) बसंतु महला १ ॥
सुइने का चउका कंचन कुआर ॥ रुपे कीआ कारा बहुतु बिसथारु ॥ गंगा का उदकु करंते की आगि ॥ गरुड़ा खाणा दुध सिउ गाडि ॥१॥

रे मन लेखै कबहू न पाइ ॥ जामि न भीजै साच नाइ ॥१॥ रहाउ ॥

दस अठ लीखे होवहि पासि ॥ चारे बेद मुखागर पाठि ॥ पुरबी नावै वरनां की दाति ॥ वरत नेम करे दिन राति ॥२॥

काजी मुलां होवहि सेख ॥ जोगी जंगम भगवे भेख ॥ को गिरही करमा की संधि ॥ बिनु बूझे सभ खड़ीअसि बंधि ॥३॥

जेते जीअ लिखी सिरि कार ॥ करणी उपरि होवगि सार ॥ हुकमु करहि मूरख गावार ॥ नानक साचे के सिफति भंडार ॥४॥३॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates