Pt 43 - गुरू अर्जन देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 43 - Guru Arjan Dev ji (Mahalla 5) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मलार -- SGGS 1269) मलार महला ५ ॥
हरि कै भजनि कउन कउन न तारे ॥ खग तन मीन तन म्रिग तन बराह तन साधू संगि उधारे ॥१॥ रहाउ ॥

देव कुल दैत कुल जख्य किंनर नर सागर उतरे पारे ॥ जो जो भजनु करै साधू संगि ता के दूख बिदारे ॥१॥

काम करोध महा बिखिआ रस इन ते भए निरारे ॥ दीन दइआल जपहि करुणा मै नानक सद बलिहारे ॥२॥९॥१३॥

(राग मलार -- SGGS 1269) मलार महला ५ ॥
आजु मै बैसिओ हरि हाट ॥ नामु रासि साझी करि जन सिउ जांउ न जम कै घाट ॥१॥ रहाउ ॥

धारि अनुग्रहु पारब्रहमि राखे भ्रम के खुल्हे कपाट ॥ बेसुमार साहु प्रभु पाइआ लाहा चरन निधि खाट ॥१॥

सरनि गही अचुत अबिनासी किलबिख काढे है छांटि ॥ कलि कलेस मिटे दास नानक बहुरि न जोनी माट ॥२॥१०॥१४॥

(राग मलार -- SGGS 1269) मलार महला ५ ॥
बहु बिधि माइआ मोह हिरानो ॥ कोटि मधे कोऊ बिरला सेवकु पूरन भगतु चिरानो ॥१॥ रहाउ ॥

इत उत डोलि डोलि स्रमु पाइओ तनु धनु होत बिरानो ॥ लोग दुराइ करत ठगिआई होतौ संगि न जानो ॥१॥

म्रिग पंखी मीन दीन नीच इह संकट फिरि आनो ॥ कहु नानक पाहन प्रभ तारहु साधसंगति सुख मानो ॥२॥११॥१५॥

(राग मलार -- SGGS 1269) मलार महला ५ ॥
दुसट मुए बिखु खाई री माई ॥ जिस के जीअ तिन ही रखि लीने मेरे प्रभ कउ किरपा आई ॥१॥ रहाउ ॥

अंतरजामी सभ महि वरतै तां भउ कैसा भाई ॥ संगि सहाई छोडि न जाई प्रभु दीसै सभनी ठाईं ॥१॥

अनाथा नाथु दीन दुख भंजन आपि लीए लड़ि लाई ॥ हरि की ओट जीवहि दास तेरे नानक प्रभ सरणाई ॥२॥१२॥१६॥

(राग मलार -- SGGS 1269) मलार महला ५ ॥
मन मेरे हरि के चरन रवीजै ॥ दरस पिआस मेरो मनु मोहिओ हरि पंख लगाइ मिलीजै ॥१॥ रहाउ ॥

खोजत खोजत मारगु पाइओ साधू सेव करीजै ॥ धारि अनुग्रहु सुआमी मेरे नामु महा रसु पीजै ॥१॥

त्राहि त्राहि करि सरनी आए जलतउ किरपा कीजै ॥ करु गहि लेहु दास अपुने कउ नानक अपुनो कीजै ॥२॥१३॥१७॥

(राग मलार -- SGGS 1270) मलार मः ५ ॥
प्रभ को भगति बछलु बिरदाइओ ॥ निंदक मारि चरन तल दीने अपुनो जसु वरताइओ ॥१॥ रहाउ ॥

जै जै कारु कीनो सभ जग महि दइआ जीअन महि पाइओ ॥ कंठि लाइ अपुनो दासु राखिओ ताती वाउ न लाइओ ॥१॥

अंगीकारु कीओ मेरे सुआमी भ्रमु भउ मेटि सुखाइओ ॥ महा अनंद करहु दास हरि के नानक बिस्वासु मनि आइओ ॥२॥१४॥१८॥

(राग मलार -- SGGS 1270) रागु मलार महला ५ चउपदे घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गुरमुखि दीसै ब्रहम पसारु ॥ गुरमुखि त्रै गुणीआं बिसथारु ॥ गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥ बिनु गुर पूरे घोर अंधारु ॥१॥

मेरे मन गुरु गुरु करत सदा सुखु पाईऐ ॥ गुर उपदेसि हरि हिरदै वसिओ सासि गिरासि अपणा खसमु धिआईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

गुर के चरण विटहु बलि जाउ ॥ गुर के गुण अनदिनु नित गाउ ॥ गुर की धूड़ि करउ इसनानु ॥ साची दरगह पाईऐ मानु ॥२॥

गुरु बोहिथु भवजल तारणहारु ॥ गुरि भेटिऐ न होइ जोनि अउतारु ॥ गुर की सेवा सो जनु पाए ॥ जा कउ करमि लिखिआ धुरि आए ॥३॥

गुरु मेरी जीवनि गुरु आधारु ॥ गुरु मेरी वरतणि गुरु परवारु ॥ गुरु मेरा खसमु सतिगुर सरणाई ॥ नानक गुरु पारब्रहमु जा की कीम न पाई ॥४॥१॥१९॥

(राग मलार -- SGGS 1270) मलार महला ५ ॥
गुर के चरन हिरदै वसाए ॥ करि किरपा प्रभि आपि मिलाए ॥ अपने सेवक कउ लए प्रभु लाइ ॥ ता की कीमति कही न जाइ ॥१॥

करि किरपा पूरन सुखदाते ॥ तुम्हरी क्रिपा ते तूं चिति आवहि आठ पहर तेरै रंगि राते ॥१॥ रहाउ ॥

गावणु सुनणु सभु तेरा भाणा ॥ हुकमु बूझै सो साचि समाणा ॥ जपि जपि जीवहि तेरा नांउ ॥ तुझ बिनु दूजा नाही थाउ ॥२॥

दुख सुख करते हुकमु रजाइ ॥ भाणै बखस भाणै देइ सजाइ ॥ दुहां सिरिआं का करता आपि ॥ कुरबाणु जांई तेरे परताप ॥३॥

तेरी कीमति तूहै जाणहि ॥ तू आपे बूझहि सुणि आपि वखाणहि ॥ सेई भगत जो तुधु भाणे ॥ नानक तिन कै सद कुरबाणे ॥४॥२॥२०॥

(राग मलार -- SGGS 1271) मलार महला ५ ॥
परमेसरु होआ दइआलु ॥ मेघु वरसै अम्रित धार ॥ सगले जीअ जंत त्रिपतासे ॥ कारज आए पूरे रासे ॥१॥

सदा सदा मन नामु सम्हालि ॥ गुर पूरे की सेवा पाइआ ऐथै ओथै निबहै नालि ॥१॥ रहाउ ॥

दुखु भंना भै भंजनहार ॥ आपणिआ जीआ की कीती सार ॥ राखनहार सदा मिहरवान ॥ सदा सदा जाईऐ कुरबान ॥२॥

कालु गवाइआ करतै आपि ॥ सदा सदा मन तिस नो जापि ॥ द्रिसटि धारि राखे सभि जंत ॥ गुण गावहु नित नित भगवंत ॥३॥

एको करता आपे आप ॥ हरि के भगत जाणहि परताप ॥ नावै की पैज रखदा आइआ ॥ नानकु बोलै तिस का बोलाइआ ॥४॥३॥२१॥

(राग मलार -- SGGS 1271) मलार महला ५ ॥
गुर सरणाई सगल निधान ॥ साची दरगहि पाईऐ मानु ॥ भ्रमु भउ दूखु दरदु सभु जाइ ॥ साधसंगि सद हरि गुण गाइ ॥१॥

मन मेरे गुरु पूरा सालाहि ॥ नामु निधानु जपहु दिनु राती मन चिंदे फल पाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर जेवडु अवरु न कोइ ॥ गुरु पारब्रहमु परमेसरु सोइ ॥ जनम मरण दूख ते राखै ॥ माइआ बिखु फिरि बहुड़ि न चाखै ॥२॥

गुर की महिमा कथनु न जाइ ॥ गुरु परमेसरु साचै नाइ ॥ सचु संजमु करणी सभु साची ॥ सो मनु निरमलु जो गुर संगि राची ॥३॥

गुरु पूरा पाईऐ वड भागि ॥ कामु क्रोधु लोभु मन ते तिआगि ॥ करि किरपा गुर चरण निवासि ॥ नानक की प्रभ सचु अरदासि ॥४॥४॥२२॥

(राग मलार -- SGGS 1271) रागु मलार महला ५ पड़ताल घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गुर मनारि प्रिअ दइआर सिउ रंगु कीआ ॥ कीनो री सगल सींगार ॥ तजिओ री सगल बिकार ॥ धावतो असथिरु थीआ ॥१॥ रहाउ ॥

ऐसे रे मन पाइ कै आपु गवाइ कै करि साधन सिउ संगु ॥ बाजे बजहि म्रिदंग अनाहद कोकिल री राम नामु बोलै मधुर बैन अति सुहीआ ॥१॥

ऐसी तेरे दरसन की सोभ अति अपार प्रिअ अमोघ तैसे ही संगि संत बने ॥ भव उतार नाम भने ॥ रम राम राम माल ॥ मनि फेरते हरि संगि संगीआ ॥ जन नानक प्रिउ प्रीतमु थीआ ॥२॥१॥२३॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
मनु घनै भ्रमै बनै ॥ उमकि तरसि चालै ॥ प्रभ मिलबे की चाह ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुन माई मोहि आई कहंउ बेदन काहि ॥१॥

आन उपाव सगर कीए नहि दूख साकहि लाहि ॥ भजु सरनि साधू नानका मिलु गुन गोबिंदहि गाहि ॥२॥२॥२४॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
प्रिअ की सोभ सुहावनी नीकी ॥ हाहा हूहू गंध्रब अपसरा अनंद मंगल रस गावनी नीकी ॥१॥ रहाउ ॥

धुनित ललित गुनग्य अनिक भांति बहु बिधि रूप दिखावनी नीकी ॥१॥

गिरि तर थल जल भवन भरपुरि घटि घटि लालन छावनी नीकी ॥ साधसंगि रामईआ रसु पाइओ नानक जा कै भावनी नीकी ॥२॥३॥२५॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
गुर प्रीति पिआरे चरन कमल रिद अंतरि धारे ॥१॥ रहाउ ॥

दरसु सफलिओ दरसु पेखिओ गए किलबिख गए ॥ मन निरमल उजीआरे ॥१॥

बिसम बिसमै बिसम भई ॥ अघ कोटि हरते नाम लई ॥ गुर चरन मसतकु डारि पही ॥ प्रभ एक तूंही एक तुही ॥ भगत टेक तुहारे ॥ जन नानक सरनि दुआरे ॥२॥४॥२६॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
बरसु सरसु आगिआ ॥ होहि आनंद सगल भाग ॥१॥ रहाउ ॥

संत संगे मनु परफड़ै मिलि मेघ धर सुहाग ॥१॥

घनघोर प्रीति मोर ॥ चितु चात्रिक बूंद ओर ॥ ऐसो हरि संगे मन मोह ॥ तिआगि माइआ धोह ॥ मिलि संत नानक जागिआ ॥२॥५॥२७॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
गुन गोपाल गाउ नीत ॥ राम नाम धारि चीत ॥१॥ रहाउ ॥

छोडि मानु तजि गुमानु मिलि साधूआ कै संगि ॥ हरि सिमरि एक रंगि मिटि जांहि दोख मीत ॥१॥

पारब्रहम भए दइआल ॥ बिनसि गए बिखै जंजाल ॥ साध जनां कै चरन लागि ॥ नानक गावै गोबिंद नीत ॥२॥६॥२८॥

(राग मलार -- SGGS 1272) मलार महला ५ ॥
घनु गरजत गोबिंद रूप ॥ गुन गावत सुख चैन ॥१॥ रहाउ ॥

हरि चरन सरन तरन सागर धुनि अनहता रस बैन ॥१॥

पथिक पिआस चित सरोवर आतम जलु लैन ॥ हरि दरस प्रेम जन नानक करि किरपा प्रभ दैन ॥२॥७॥२९॥

(राग मलार -- SGGS 1273) मलार महला ५ ॥
हे गोबिंद हे गोपाल हे दइआल लाल ॥१॥ रहाउ ॥

प्रान नाथ अनाथ सखे दीन दरद निवार ॥१॥

हे सम्रथ अगम पूरन मोहि मइआ धारि ॥२॥

अंध कूप महा भइआन नानक पारि उतार ॥३॥८॥३०॥

(राग मलार -- SGGS 1278) रागु मलार छंत महला ५ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रीतम प्रेम भगति के दाते ॥ अपने जन संगि राते ॥ जन संगि राते दिनसु राते इक निमख मनहु न वीसरै ॥ गोपाल गुण निधि सदा संगे सरब गुण जगदीसरै ॥ मनु मोहि लीना चरन संगे नाम रसि जन माते ॥ नानक प्रीतम क्रिपाल सदहूं किनै कोटि मधे जाते ॥१॥

प्रीतम तेरी गति अगम अपारे ॥ महा पतित तुम्ह तारे ॥ पतित पावन भगति वछल क्रिपा सिंधु सुआमीआ ॥ संतसंगे भजु निसंगे रंउ सदा अंतरजामीआ ॥ कोटि जनम भ्रमंत जोनी ते नाम सिमरत तारे ॥ नानक दरस पिआस हरि जीउ आपि लेहु सम्हारे ॥२॥

हरि चरन कमल मनु लीना ॥ प्रभ जल जन तेरे मीना ॥ जल मीन प्रभ जीउ एक तूहै भिंन आन न जानीऐ ॥ गहि भुजा लेवहु नामु देवहु तउ प्रसादी मानीऐ ॥ भजु साधसंगे एक रंगे क्रिपाल गोबिद दीना ॥ अनाथ नीच सरणाइ नानक करि मइआ अपुना कीना ॥३॥

आपस कउ आपु मिलाइआ ॥ भ्रम भंजन हरि राइआ ॥ आचरज सुआमी अंतरजामी मिले गुण निधि पिआरिआ ॥ महा मंगल सूख उपजे गोबिंद गुण नित सारिआ ॥ मिलि संगि सोहे देखि मोहे पुरबि लिखिआ पाइआ ॥ बिनवंति नानक सरनि तिन की जिन्ही हरि हरि धिआइआ ॥४॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1284) सलोक मः ५ ॥
राति न विहावी साकतां जिन्हा विसरै नाउ ॥ राती दिनस सुहेलीआ नानक हरि गुण गांउ ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1284) मः ५ ॥
रतन जवेहर माणका हभे मणी मथंनि ॥ नानक जो प्रभि भाणिआ सचै दरि सोहंनि ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1291) पउड़ी नवी मः ५ ॥
सभो वरतै चलतु चलतु वखाणिआ ॥ पारब्रहमु परमेसरु गुरमुखि जाणिआ ॥ लथे सभि विकार सबदि नीसाणिआ ॥ साधू संगि उधारु भए निकाणिआ ॥ सिमरि सिमरि दातारु सभि रंग माणिआ ॥ परगटु भइआ संसारि मिहर छावाणिआ ॥ आपे बखसि मिलाए सद कुरबाणिआ ॥ नानक लए मिलाइ खसमै भाणिआ ॥२७॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गाईऐ गुण गोपाल क्रिपा निधि ॥ दुख बिदारन सुखदाते सतिगुर जा कउ भेटत होइ सगल सिधि ॥१॥ रहाउ ॥

सिमरत नामु मनहि साधारै ॥ कोटि पराधी खिन महि तारै ॥१॥

जा कउ चीति आवै गुरु अपना ॥ ता कउ दूखु नही तिलु सुपना ॥२॥

जा कउ सतिगुरु अपना राखै ॥ सो जनु हरि रसु रसना चाखै ॥३॥

कहु नानक गुरि कीनी मइआ ॥ हलति पलति मुख ऊजल भइआ ॥४॥१॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
आराधउ तुझहि सुआमी अपने ॥ ऊठत बैठत सोवत जागत सासि सासि सासि हरि जपने ॥१॥ रहाउ ॥

ता कै हिरदै बसिओ नामु ॥ जा कउ सुआमी कीनो दानु ॥१॥

ता कै हिरदै आई सांति ॥ ठाकुर भेटे गुर बचनांति ॥२॥

सरब कला सोई परबीन ॥ नाम मंत्रु जा कउ गुरि दीन ॥३॥

कहु नानक ता कै बलि जाउ ॥ कलिजुग महि पाइआ जिनि नाउ ॥४॥२॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
कीरति प्रभ की गाउ मेरी रसनां ॥ अनिक बार करि बंदन संतन ऊहां चरन गोबिंद जी के बसना ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक भांति करि दुआरु न पावउ ॥ होइ क्रिपालु त हरि हरि धिआवउ ॥१॥

कोटि करम करि देह न सोधा ॥ साधसंगति महि मनु परबोधा ॥२॥

त्रिसन न बूझी बहु रंग माइआ ॥ नामु लैत सरब सुख पाइआ ॥३॥

पारब्रहम जब भए दइआल ॥ कहु नानक तउ छूटे जंजाल ॥४॥३॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1298) कानड़ा महला ५ ॥
ऐसी मांगु गोबिद ते ॥ टहल संतन की संगु साधू का हरि नामां जपि परम गते ॥१॥ रहाउ ॥

पूजा चरना ठाकुर सरना ॥ सोई कुसलु जु प्रभ जीउ करना ॥१॥

सफल होत इह दुरलभ देही ॥ जा कउ सतिगुरु मइआ करेही ॥२॥

अगिआन भरमु बिनसै दुख डेरा ॥ जा कै ह्रिदै बसहि गुर पैरा ॥३॥

साधसंगि रंगि प्रभु धिआइआ ॥ कहु नानक तिनि पूरा पाइआ ॥४॥४॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
भगति भगतन हूं बनि आई ॥ तन मन गलत भए ठाकुर सिउ आपन लीए मिलाई ॥१॥ रहाउ ॥

गावनहारी गावै गीत ॥ ते उधरे बसे जिह चीत ॥१॥

पेखे बिंजन परोसनहारै ॥ जिह भोजनु कीनो ते त्रिपतारै ॥२॥

अनिक स्वांग काछे भेखधारी ॥ जैसो सा तैसो द्रिसटारी ॥३॥

कहन कहावन सगल जंजार ॥ नानक दास सचु करणी सार ॥४॥५॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
तेरो जनु हरि जसु सुनत उमाहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

मनहि प्रगासु पेखि प्रभ की सोभा जत कत पेखउ आहिओ ॥१॥

सभ ते परै परै ते ऊचा गहिर ग्मभीर अथाहिओ ॥२॥

ओति पोति मिलिओ भगतन कउ जन सिउ परदा लाहिओ ॥३॥

गुर प्रसादि गावै गुण नानक सहज समाधि समाहिओ ॥४॥६॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
संतन पहि आपि उधारन आइओ ॥१॥ रहाउ ॥

दरसन भेटत होत पुनीता हरि हरि मंत्रु द्रिड़ाइओ ॥१॥

काटे रोग भए मन निरमल हरि हरि अउखधु खाइओ ॥२॥

असथित भए बसे सुख थाना बहुरि न कतहू धाइओ ॥३॥

संत प्रसादि तरे कुल लोगा नानक लिपत न माइओ ॥४॥७॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
बिसरि गई सभ ताति पराई ॥ जब ते साधसंगति मोहि पाई ॥१॥ रहाउ ॥

ना को बैरी नही बिगाना सगल संगि हम कउ बनि आई ॥१॥

जो प्रभ कीनो सो भल मानिओ एह सुमति साधू ते पाई ॥२॥

सभ महि रवि रहिआ प्रभु एकै पेखि पेखि नानक बिगसाई ॥३॥८॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1299) कानड़ा महला ५ ॥
ठाकुर जीउ तुहारो परना ॥ मानु महतु तुम्हारै ऊपरि तुम्हरी ओट तुम्हारी सरना ॥१॥ रहाउ ॥

तुम्हरी आस भरोसा तुम्हरा तुमरा नामु रिदै लै धरना ॥ तुमरो बलु तुम संगि सुहेले जो जो कहहु सोई सोई करना ॥१॥

तुमरी दइआ मइआ सुखु पावउ होहु क्रिपाल त भउजलु तरना ॥ अभै दानु नामु हरि पाइओ सिरु डारिओ नानक संत चरना ॥२॥९॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साध सरनि चरन चितु लाइआ ॥ सुपन की बात सुनी पेखी सुपना नाम मंत्रु सतिगुरू द्रिड़ाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

नह त्रिपतानो राज जोबनि धनि बहुरि बहुरि फिरि धाइआ ॥ सुखु पाइआ त्रिसना सभ बुझी है सांति पाई गुन गाइआ ॥१॥

बिनु बूझे पसू की निआई भ्रमि मोहि बिआपिओ माइआ ॥ साधसंगि जम जेवरी काटी नानक सहजि समाइआ ॥२॥१०॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
हरि के चरन हिरदै गाइ ॥ सीतला सुख सांति मूरति सिमरि सिमरि नित धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

सगल आस होत पूरन कोटि जनम दुखु जाइ ॥१॥

पुंन दान अनेक किरिआ साधू संगि समाइ ॥ ताप संताप मिटे नानक बाहुड़ि कालु न खाइ ॥२॥११॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कथीऐ संतसंगि प्रभ गिआनु ॥ पूरन परम जोति परमेसुर सिमरत पाईऐ मानु ॥१॥ रहाउ ॥

आवत जात रहे स्रम नासे सिमरत साधू संगि ॥ पतित पुनीत होहि खिन भीतरि पारब्रहम कै रंगि ॥१॥

जो जो कथै सुनै हरि कीरतनु ता की दुरमति नास ॥ सगल मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आस ॥२॥१॥१२॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साधसंगति निधि हरि को नाम ॥ संगि सहाई जीअ कै काम ॥१॥ रहाउ ॥

संत रेनु निति मजनु करै ॥ जनम जनम के किलबिख हरै ॥१॥

संत जना की ऊची बानी ॥ सिमरि सिमरि तरे नानक प्रानी ॥२॥२॥१३॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
साधू हरि हरे गुन गाइ ॥ मान तनु धनु प्रान प्रभ के सिमरत दुखु जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

ईत ऊत कहा लोभावहि एक सिउ मनु लाइ ॥१॥

महा पवित्र संत आसनु मिलि संगि गोबिदु धिआइ ॥२॥

सगल तिआगि सरनि आइओ नानक लेहु मिलाइ ॥३॥३॥१४॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1300) कानड़ा महला ५ ॥
पेखि पेखि बिगसाउ साजन प्रभु आपना इकांत ॥१॥ रहाउ ॥

आनदा सुख सहज मूरति तिसु आन नाही भांति ॥१॥

सिमरत इक बार हरि हरि मिटि कोटि कसमल जांति ॥२॥

गुण रमंत दूख नासहि रिद भइअंत सांति ॥३॥

अम्रिता रसु पीउ रसना नानक हरि रंगि रात ॥४॥४॥१५॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
साजना संत आउ मेरै ॥१॥ रहाउ ॥

आनदा गुन गाइ मंगल कसमला मिटि जाहि परेरै ॥१॥

संत चरन धरउ माथै चांदना ग्रिहि होइ अंधेरै ॥२॥

संत प्रसादि कमलु बिगसै गोबिंद भजउ पेखि नेरै ॥३॥

प्रभ क्रिपा ते संत पाए वारि वारि नानक उह बेरै ॥४॥५॥१६॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
चरन सरन गोपाल तेरी ॥ मोह मान धोह भरम राखि लीजै काटि बेरी ॥१॥ रहाउ ॥

बूडत संसार सागर ॥ उधरे हरि सिमरि रतनागर ॥१॥

सीतला हरि नामु तेरा ॥ पूरनो ठाकुर प्रभु मेरा ॥२॥

दीन दरद निवारि तारन ॥ हरि क्रिपा निधि पतित उधारन ॥३॥

कोटि जनम दूख करि पाइओ ॥ सुखी नानक गुरि नामु द्रिड़ाइओ ॥४॥६॥१७॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
धनि उह प्रीति चरन संगि लागी ॥ कोटि जाप ताप सुख पाए आइ मिले पूरन बडभागी ॥१॥ रहाउ ॥

मोहि अनाथु दासु जनु तेरा अवर ओट सगली मोहि तिआगी ॥ भोर भरम काटे प्रभ सिमरत गिआन अंजन मिलि सोवत जागी ॥१॥

तू अथाहु अति बडो सुआमी क्रिपा सिंधु पूरन रतनागी ॥ नानकु जाचकु हरि हरि नामु मांगै मसतकु आनि धरिओ प्रभ पागी ॥२॥७॥१८॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ ॥
कुचिल कठोर कपट कामी ॥ जिउ जानहि तिउ तारि सुआमी ॥१॥ रहाउ ॥

तू समरथु सरनि जोगु तू राखहि अपनी कल धारि ॥१॥

जाप ताप नेम सुचि संजम नाही इन बिधे छुटकार ॥ गरत घोर अंध ते काढहु प्रभ नानक नदरि निहारि ॥२॥८॥१९॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1301) कानड़ा महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
नाराइन नरपति नमसकारै ॥ ऐसे गुर कउ बलि बलि जाईऐ आपि मुकतु मोहि तारै ॥१॥ रहाउ ॥

कवन कवन कवन गुन कहीऐ अंतु नही कछु पारै ॥ लाख लाख लाख कई कोरै को है ऐसो बीचारै ॥१॥

बिसम बिसम बिसम ही भई है लाल गुलाल रंगारै ॥ कहु नानक संतन रसु आई है जिउ चाखि गूंगा मुसकारै ॥२॥१॥२०॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
न जानी संतन प्रभ बिनु आन ॥ ऊच नीच सभ पेखि समानो मुखि बकनो मनि मान ॥१॥ रहाउ ॥

घटि घटि पूरि रहे सुख सागर भै भंजन मेरे प्रान ॥ मनहि प्रगासु भइओ भ्रमु नासिओ मंत्रु दीओ गुर कान ॥१॥

करत रहे क्रतग्य करुणा मै अंतरजामी िग्यान ॥ आठ पहर नानक जसु गावै मांगन कउ हरि दान ॥२॥२॥२१॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
कहन कहावन कउ कई केतै ॥ ऐसो जनु बिरलो है सेवकु जो तत जोग कउ बेतै ॥१॥ रहाउ ॥

दुखु नाही सभु सुखु ही है रे एकै एकी नेतै ॥ बुरा नही सभु भला ही है रे हार नही सभ जेतै ॥१॥

सोगु नाही सदा हरखी है रे छोडि नाही किछु लेतै ॥ कहु नानक जनु हरि हरि हरि है कत आवै कत रमतै ॥२॥३॥२२॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
हीए को प्रीतमु बिसरि न जाइ ॥ तन मन गलत भए तिह संगे मोहनी मोहि रही मोरी माइ ॥१॥ रहाउ ॥

जै जै पहि कहउ ब्रिथा हउ अपुनी तेऊ तेऊ गहे रहे अटकाइ ॥ अनिक भांति की एकै जाली ता की गंठि नही छोराइ ॥१॥

फिरत फिरत नानक दासु आइओ संतन ही सरनाइ ॥ काटे अगिआन भरम मोह माइआ लीओ कंठि लगाइ ॥२॥४॥२३॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
आनद रंग बिनोद हमारै ॥ नामो गावनु नामु धिआवनु नामु हमारे प्रान अधारै ॥१॥ रहाउ ॥

नामो गिआनु नामु इसनाना हरि नामु हमारे कारज सवारै ॥ हरि नामो सोभा नामु बडाई भउजलु बिखमु नामु हरि तारै ॥१॥

अगम पदारथ लाल अमोला भइओ परापति गुर चरनारै ॥ कहु नानक प्रभ भए क्रिपाला मगन भए हीअरै दरसारै ॥२॥५॥२४॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1302) कानड़ा महला ५ ॥
साजन मीत सुआमी नेरो ॥ पेखत सुनत सभन कै संगे थोरै काज बुरो कह फेरो ॥१॥ रहाउ ॥

नाम बिना जेतो लपटाइओ कछू नही नाही कछु तेरो ॥ आगै द्रिसटि आवत सभ परगट ईहा मोहिओ भरम अंधेरो ॥१॥

अटकिओ सुत बनिता संग माइआ देवनहारु दातारु बिसेरो ॥ कहु नानक एकै भारोसउ बंधन काटनहारु गुरु मेरो ॥२॥६॥२५॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
बिखै दलु संतनि तुम्हरै गाहिओ ॥ तुमरी टेक भरोसा ठाकुर सरनि तुम्हारी आहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

जनम जनम के महा पराछत दरसनु भेटि मिटाहिओ ॥ भइओ प्रगासु अनद उजीआरा सहजि समाधि समाहिओ ॥१॥

कउनु कहै तुम ते कछु नाही तुम समरथ अथाहिओ ॥ क्रिपा निधान रंग रूप रस नामु नानक लै लाहिओ ॥२॥७॥२६॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
बूडत प्रानी हरि जपि धीरै ॥ बिनसै मोहु भरमु दुखु पीरै ॥१॥ रहाउ ॥

सिमरउ दिनु रैनि गुर के चरना ॥ जत कत पेखउ तुमरी सरना ॥१॥

संत प्रसादि हरि के गुन गाइआ ॥ गुर भेटत नानक सुखु पाइआ ॥२॥८॥२७॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
सिमरत नामु मनहि सुखु पाईऐ ॥ साध जना मिलि हरि जसु गाईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

करि किरपा प्रभ रिदै बसेरो ॥ चरन संतन कै माथा मेरो ॥१॥

पारब्रहम कउ सिमरहु मनां ॥ गुरमुखि नानक हरि जसु सुनां ॥२॥९॥२८॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
मेरे मन प्रीति चरन प्रभ परसन ॥ रसना हरि हरि भोजनि त्रिपतानी अखीअन कउ संतोखु प्रभ दरसन ॥१॥ रहाउ ॥

करननि पूरि रहिओ जसु प्रीतम कलमल दोख सगल मल हरसन ॥ पावन धावन सुआमी सुख पंथा अंग संग काइआ संत सरसन ॥१॥

सरनि गही पूरन अबिनासी आन उपाव थकित नही करसन ॥ करु गहि लीए नानक जन अपने अंध घोर सागर नही मरसन ॥२॥१०॥२९॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
कुहकत कपट खपट खल गरजत मरजत मीचु अनिक बरीआ ॥१॥ रहाउ ॥

अहं मत अन रत कुमित हित प्रीतम पेखत भ्रमत लाख गरीआ ॥१॥

अनित बिउहार अचार बिधि हीनत मम मद मात कोप जरीआ ॥ करुण क्रिपाल गोपाल दीन बंधु नानक उधरु सरनि परीआ ॥२॥११॥३०॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1303) कानड़ा महला ५ ॥
जीअ प्रान मान दाता ॥ हरि बिसरते ही हानि ॥१॥ रहाउ ॥

गोबिंद तिआगि आन लागहि अम्रितो डारि भूमि पागहि ॥ बिखै रस सिउ आसकत मूड़े काहे सुख मानि ॥१॥

कामि क्रोधि लोभि बिआपिओ जनम ही की खानि ॥ पतित पावन सरनि आइओ उधरु नानक जानि ॥२॥१२॥३१॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ ॥
अविलोकउ राम को मुखारबिंद ॥ खोजत खोजत रतनु पाइओ बिसरी सभ चिंद ॥१॥ रहाउ ॥

चरन कमल रिदै धारि ॥ उतरिआ दुखु मंद ॥१॥

राज धनु परवारु मेरै सरबसो गोबिंद ॥ साधसंगमि लाभु पाइओ नानक फिरि न मरंद ॥२॥१३॥३२॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ घरु ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रभ पूजहो नामु अराधि ॥ गुर सतिगुर चरनी लागि ॥ हरि पावहु मनु अगाधि ॥ जगु जीतो हो हो गुर किरपाधि ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक पूजा मै बहु बिधि खोजी सा पूजा जि हरि भावासि ॥ माटी की इह पुतरी जोरी किआ एह करम कमासि ॥ प्रभ बाह पकरि जिसु मारगि पावहु सो तुधु जंत मिलासि ॥१॥

अवर ओट मै कोइ न सूझै इक हरि की ओट मै आस ॥ किआ दीनु करे अरदासि ॥ जउ सभ घटि प्रभू निवास ॥ प्रभ चरनन की मनि पिआस ॥ जन नानक दासु कहीअतु है तुम्हरा हउ बलि बलि सद बलि जास ॥२॥१॥३३॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1304) कानड़ा महला ५ घरु ६
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जगत उधारन नाम प्रिअ तेरै ॥ नव निधि नामु निधानु हरि केरै ॥ हरि रंग रंग रंग अनूपेरै ॥ काहे रे मन मोहि मगनेरै ॥ नैनहु देखु साध दरसेरै ॥ सो पावै जिसु लिखतु लिलेरै ॥१॥ रहाउ ॥

सेवउ साध संत चरनेरै ॥ बांछउ धूरि पवित्र करेरै ॥ अठसठि मजनु मैलु कटेरै ॥ सासि सासि धिआवहु मुखु नही मोरै ॥ किछु संगि न चालै लाख करोरै ॥ प्रभ जी को नामु अंति पुकरोरै ॥१॥

मनसा मानि एक निरंकेरै ॥ सगल तिआगहु भाउ दूजेरै ॥ कवन कहां हउ गुन प्रिअ तेरै ॥ बरनि न साकउ एक टुलेरै ॥ दरसन पिआस बहुतु मनि मेरै ॥ मिलु नानक देव जगत गुर केरै ॥२॥१॥३४॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ ॥
ऐसी कउन बिधे दरसन परसना ॥१॥ रहाउ ॥

आस पिआस सफल मूरति उमगि हीउ तरसना ॥१॥

दीन लीन पिआस मीन संतना हरि संतना ॥ हरि संतना की रेन ॥ हीउ अरपि देन ॥ प्रभ भए है किरपेन ॥ मानु मोहु तिआगि छोडिओ तउ नानक हरि जीउ भेटना ॥२॥२॥३५॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ ॥
रंगा रंग रंगन के रंगा ॥ कीट हसत पूरन सभ संगा ॥१॥ रहाउ ॥

बरत नेम तीरथ सहित गंगा ॥ जलु हेवत भूख अरु नंगा ॥ पूजाचार करत मेलंगा ॥ चक्र करम तिलक खाटंगा ॥ दरसनु भेटे बिनु सतसंगा ॥१॥

हठि निग्रहि अति रहत बिटंगा ॥ हउ रोगु बिआपै चुकै न भंगा ॥ काम क्रोध अति त्रिसन जरंगा ॥ सो मुकतु नानक जिसु सतिगुरु चंगा ॥२॥३॥३६॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1305) कानड़ा महला ५ घरु ७
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तिख बूझि गई गई मिलि साध जना ॥ पंच भागे चोर सहजे सुखैनो हरे गुन गावती गावती गावती दरस पिआरि ॥१॥ रहाउ ॥

जैसी करी प्रभ मो सिउ मो सिउ ऐसी हउ कैसे करउ ॥ हीउ तुम्हारे बलि बले बलि बले बलि गई ॥१॥

पहिले पै संत पाइ धिआइ धिआइ प्रीति लाइ ॥ प्रभ थानु तेरो केहरो जितु जंतन करि बीचारु ॥ अनिक दास कीरति करहि तुहारी ॥ सोई मिलिओ जो भावतो जन नानक ठाकुर रहिओ समाइ ॥ एक तूही तूही तूही ॥२॥१॥३७॥


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