Pt 8 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 8 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग गूजरी -- SGGS 515) पउड़ी ॥
हरि जीउ सचा सचु है सची गुरबाणी ॥ सतिगुर ते सचु पछाणीऐ सचि सहजि समाणी ॥ अनदिनु जागहि ना सवहि जागत रैणि विहाणी ॥ गुरमती हरि रसु चाखिआ से पुंन पराणी ॥ बिनु गुर किनै न पाइओ पचि मुए अजाणी ॥१७॥

(राग गूजरी -- SGGS 515) सलोकु मः ३ ॥
वाहु वाहु बाणी निरंकार है तिसु जेवडु अवरु न कोइ ॥ वाहु वाहु अगम अथाहु है वाहु वाहु सचा सोइ ॥ वाहु वाहु वेपरवाहु है वाहु वाहु करे सु होइ ॥ वाहु वाहु अम्रित नामु है गुरमुखि पावै कोइ ॥ वाहु वाहु करमी पाईऐ आपि दइआ करि देइ ॥ नानक वाहु वाहु गुरमुखि पाईऐ अनदिनु नामु लएइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) मः ३ ॥
बिनु सतिगुर सेवे साति न आवई दूजी नाही जाइ ॥ जे बहुतेरा लोचीऐ विणु करमै न पाइआ जाइ ॥ जिन्हा अंतरि लोभ विकारु है दूजै भाइ खुआइ ॥ जमणु मरणु न चुकई हउमै विचि दुखु पाइ ॥ जिन्हा सतिगुर सिउ चितु लाइआ सु खाली कोई नाहि ॥ तिन जम की तलब न होवई ना ओइ दुख सहाहि ॥ नानक गुरमुखि उबरे सचै सबदि समाहि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) पउड़ी ॥
ढाढी तिस नो आखीऐ जि खसमै धरे पिआरु ॥ दरि खड़ा सेवा करे गुर सबदी वीचारु ॥ ढाढी दरु घरु पाइसी सचु रखै उर धारि ॥ ढाढी का महलु अगला हरि कै नाइ पिआरि ॥ ढाढी की सेवा चाकरी हरि जपि हरि निसतारि ॥१८॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) सलोकु मः ३ ॥
गूजरी जाति गवारि जा सहु पाए आपणा ॥ गुर कै सबदि वीचारि अनदिनु हरि जपु जापणा ॥ जिसु सतिगुरु मिलै तिसु भउ पवै सा कुलवंती नारि ॥ सा हुकमु पछाणै कंत का जिस नो क्रिपा कीती करतारि ॥ ओह कुचजी कुलखणी परहरि छोडी भतारि ॥ भै पइऐ मलु कटीऐ निरमल होवै सरीरु ॥ अंतरि परगासु मति ऊतम होवै हरि जपि गुणी गहीरु ॥ भै विचि बैसै भै रहै भै विचि कमावै कार ॥ ऐथै सुखु वडिआईआ दरगह मोख दुआर ॥ भै ते निरभउ पाईऐ मिलि जोती जोति अपार ॥ नानक खसमै भावै सा भली जिस नो आपे बखसे करतारु ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) मः ३ ॥
सदा सदा सालाहीऐ सचे कउ बलि जाउ ॥ नानक एकु छोडि दूजै लगै सा जिहवा जलि जाउ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) पउड़ी ॥
अंसा अउतारु उपाइओनु भाउ दूजा कीआ ॥ जिउ राजे राजु कमावदे दुख सुख भिड़ीआ ॥ ईसरु ब्रहमा सेवदे अंतु तिन्ही न लहीआ ॥ निरभउ निरंकारु अलखु है गुरमुखि प्रगटीआ ॥ तिथै सोगु विजोगु न विआपई असथिरु जगि थीआ ॥१९॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) सलोकु मः ३ ॥
एहु सभु किछु आवण जाणु है जेता है आकारु ॥ जिनि एहु लेखा लिखिआ सो होआ परवाणु ॥ नानक जे को आपु गणाइदा सो मूरखु गावारु ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) मः ३ ॥
मनु कुंचरु पीलकु गुरू गिआनु कुंडा जह खिंचे तह जाइ ॥ नानक हसती कुंडे बाहरा फिरि फिरि उझड़ि पाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 516) पउड़ी ॥
तिसु आगै अरदासि जिनि उपाइआ ॥ सतिगुरु अपणा सेवि सभ फल पाइआ ॥ अम्रित हरि का नाउ सदा धिआइआ ॥ संत जना कै संगि दुखु मिटाइआ ॥ नानक भए अचिंतु हरि धनु निहचलाइआ ॥२०॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) सलोक मः ३ ॥
खेति मिआला उचीआ घरु उचा निरणउ ॥ महल भगती घरि सरै सजण पाहुणिअउ ॥ बरसना त बरसु घना बहुड़ि बरसहि काहि ॥ नानक तिन्ह बलिहारणै जिन्ह गुरमुखि पाइआ मन माहि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) मः ३ ॥
मिठा सो जो भावदा सजणु सो जि रासि ॥ नानक गुरमुखि जाणीऐ जा कउ आपि करे परगासु ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) पउड़ी ॥
प्रभ पासि जन की अरदासि तू सचा सांई ॥ तू रखवाला सदा सदा हउ तुधु धिआई ॥ जीअ जंत सभि तेरिआ तू रहिआ समाई ॥ जो दास तेरे की निंदा करे तिसु मारि पचाई ॥ चिंता छडि अचिंतु रहु नानक लगि पाई ॥२१॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) सलोक मः ३ ॥
आसा करता जगु मुआ आसा मरै न जाइ ॥ नानक आसा पूरीआ सचे सिउ चितु लाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) मः ३ ॥
आसा मनसा मरि जाइसी जिनि कीती सो लै जाइ ॥ नानक निहचलु को नही बाझहु हरि कै नाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) पउड़ी ॥
आपे जगतु उपाइओनु करि पूरा थाटु ॥ आपे साहु आपे वणजारा आपे ही हरि हाटु ॥ आपे सागरु आपे बोहिथा आपे ही खेवाटु ॥ आपे गुरु चेला है आपे आपे दसे घाटु ॥ जन नानक नामु धिआइ तू सभि किलविख काटु ॥२२॥१॥ सुधु

सलोक मः ३ ॥ गुर सेवा ते सुखु पाईऐ होर थै सुखु न भालि ॥ गुर कै सबदि मनु भेदीऐ सदा वसै हरि नालि ॥ नानक नामु तिना कउ मिलै जिन हरि वेखै नदरि निहालि ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 548) मः ३ ॥
सिफति खजाना बखस है जिसु बखसै सो खरचै खाइ ॥ सतिगुर बिनु हथि न आवई सभ थके करम कमाइ ॥ नानक मनमुखु जगतु धनहीणु है अगै भुखा कि खाइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 548) सलोक मः ३ ॥
नानक गिआनी जगु जीता जगि जीता सभु कोइ ॥ नामे कारज सिधि है सहजे होइ सु होइ ॥ गुरमति मति अचलु है चलाइ न सकै कोइ ॥ भगता का हरि अंगीकारु करे कारजु सुहावा होइ ॥ मनमुख मूलहु भुलाइअनु विचि लबु लोभु अहंकारु ॥ झगड़ा करदिआ अनदिनु गुदरै सबदि न करै वीचारु ॥ सुधि मति करतै हिरि लई बोलनि सभु विकारु ॥ दितै कितै न संतोखीअनि अंतरि त्रिसना बहुतु अग्यानु अंधारु ॥ नानक मनमुखा नालहु तुटीआ भली जिना माइआ मोहि पिआरु ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) मः ३ ॥
तिन्ह भउ संसा किआ करे जिन सतिगुरु सिरि करतारु ॥ धुरि तिन की पैज रखदा आपे रखणहारु ॥ मिलि प्रीतम सुखु पाइआ सचै सबदि वीचारि ॥ नानक सुखदाता सेविआ आपे परखणहारु ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) सलोक मः ३ ॥
गुरमुखि सचै भावदे दरि सचै सचिआर ॥ साजन मनि आनंदु है गुर का सबदु वीचार ॥ अंतरि सबदु वसाइआ दुखु कटिआ चानणु कीआ करतारि ॥ नानक रखणहारा रखसी आपणी किरपा धारि ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) मः ३ ॥
गुर की सेवा चाकरी भै रचि कार कमाइ ॥ जेहा सेवै तेहो होवै जे चलै तिसै रजाइ ॥ नानक सभु किछु आपि है अवरु न दूजी जाइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) सलोक मः ३ ॥
मनि परतीति न आईआ सहजि न लगो भाउ ॥ सबदै सादु न पाइओ मनहठि किआ गुण गाइ ॥ नानक आइआ सो परवाणु है जि गुरमुखि सचि समाइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) मः ३ ॥
आपणा आपु न पछाणै मूड़ा अवरा आखि दुखाए ॥ मुंढै दी खसलति न गईआ अंधे विछुड़ि चोटा खाए ॥ सतिगुर कै भै भंनि न घड़िओ रहै अंकि समाए ॥ अनदिनु सहसा कदे न चूकै बिनु सबदै दुखु पाए ॥ कामु क्रोधु लोभु अंतरि सबला नित धंधा करत विहाए ॥ चरण कर देखत सुणि थके दिह मुके नेड़ै आए ॥ सचा नामु न लगो मीठा जितु नामि नव निधि पाए ॥ जीवतु मरै मरै फुनि जीवै तां मोखंतरु पाए ॥ धुरि करमु न पाइओ पराणी विणु करमा किआ पाए ॥ गुर का सबदु समालि तू मूड़े गति मति सबदे पाए ॥ नानक सतिगुरु तद ही पाए जां विचहु आपु गवाए ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) सलोक मः ३ ॥
सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का सुआउ न पाइआ ॥ नानक रसना सबदि रसाइ जिनि हरि हरि मंनि वसाइआ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) मः ३ ॥
सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का नाउ विसारिआ ॥ नानक गुरमुखि रसना हरि जपै हरि कै नाइ पिआरिआ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) सलोक मः ३ ॥
दरवेसी को जाणसी विरला को दरवेसु ॥ जे घरि घरि हंढै मंगदा धिगु जीवणु धिगु वेसु ॥ जे आसा अंदेसा तजि रहै गुरमुखि भिखिआ नाउ ॥ तिस के चरन पखालीअहि नानक हउ बलिहारै जाउ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) मः ३ ॥
नानक तरवरु एकु फलु दुइ पंखेरू आहि ॥ आवत जात न दीसही ना पर पंखी ताहि ॥ बहु रंगी रस भोगिआ सबदि रहै निरबाणु ॥ हरि रसि फलि राते नानका करमि सचा नीसाणु ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) सलोक मः ३ ॥
करम धरम सभि बंधना पाप पुंन सनबंधु ॥ ममता मोहु सु बंधना पुत्र कलत्र सु धंधु ॥ जह देखा तह जेवरी माइआ का सनबंधु ॥ नानक सचे नाम बिनु वरतणि वरतै अंधु ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) सलोक मः ३ ॥
गुरमुखि प्रभु सेवहि सद साचा अनदिनु सहजि पिआरि ॥ सदा अनंदि गावहि गुण साचे अरधि उरधि उरि धारि ॥ अंतरि प्रीतमु वसिआ धुरि करमु लिखिआ करतारि ॥ नानक आपि मिलाइअनु आपे किरपा धारि ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) मः ३ ॥
कहिऐ कथिऐ न पाईऐ अनदिनु रहै सदा गुण गाइ ॥ विणु करमै किनै न पाइओ भउकि मुए बिललाइ ॥ गुर कै सबदि मनु तनु भिजै आपि वसै मनि आइ ॥ नानक नदरी पाईऐ आपे लए मिलाइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) सलोक मः ३ ॥
सेखा अंदरहु जोरु छडि तू भउ करि झलु गवाइ ॥ गुर कै भै केते निसतरे भै विचि निरभउ पाइ ॥ मनु कठोरु सबदि भेदि तूं सांति वसै मनि आइ ॥ सांती विचि कार कमावणी सा खसमु पाए थाइ ॥ नानक कामि क्रोधि किनै न पाइओ पुछहु गिआनी जाइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) मः ३ ॥
मनमुख माइआ मोहु है नामि न लगो पिआरु ॥ कूड़ु कमावै कूड़ु संग्रहै कूड़ु करे आहारु ॥ बिखु माइआ धनु संचि मरहि अंते होइ सभु छारु ॥ करम धरम सुच संजम करहि अंतरि लोभु विकारु ॥ नानक जि मनमुखु कमावै सु थाइ ना पवै दरगहि होइ खुआरु ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) सलोक मः ३ ॥
सतिगुर की सेवा सफल है जे को करे चितु लाइ ॥ नामु पदारथु पाईऐ अचिंतु वसै मनि आइ ॥ जनम मरन दुखु कटीऐ हउमै ममता जाइ ॥ उतम पदवी पाईऐ सचे रहै समाइ ॥ नानक पूरबि जिन कउ लिखिआ तिना सतिगुरु मिलिआ आइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) मः ३ ॥
नामि रता सतिगुरू है कलिजुग बोहिथु होइ ॥ गुरमुखि होवै सु पारि पवै जिना अंदरि सचा सोइ ॥ नामु सम्हाले नामु संग्रहै नामे ही पति होइ ॥ नानक सतिगुरु पाइआ करमि परापति होइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) मः ३ ॥
इकि सतिगुर की सेवा करहि चाकरी हरि नामे लगै पिआरु ॥ नानक जनमु सवारनि आपणा कुल का करनि उधारु ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 553) सलोकु मः ३ ॥
एहा संधिआ परवाणु है जितु हरि प्रभु मेरा चिति आवै ॥ हरि सिउ प्रीति ऊपजै माइआ मोहु जलावै ॥ गुर परसादी दुबिधा मरै मनूआ असथिरु संधिआ करे वीचारु ॥ नानक संधिआ करै मनमुखी जीउ न टिकै मरि जमै होइ खुआरु ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 553) मः ३ ॥
प्रिउ प्रिउ करती सभु जगु फिरी मेरी पिआस न जाइ ॥ नानक सतिगुरि मिलिऐ मेरी पिआस गई पिरु पाइआ घरि आइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) सलोकु मः ३ ॥
नानक बिनु सतिगुर भेटे जगु अंधु है अंधे करम कमाइ ॥ सबदै सिउ चितु न लावई जितु सुखु वसै मनि आइ ॥ तामसि लगा सदा फिरै अहिनिसि जलतु बिहाइ ॥ जो तिसु भावै सो थीऐ कहणा किछू न जाइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) मः ३ ॥
सतिगुरू फुरमाइआ कारी एह करेहु ॥ गुरू दुआरै होइ कै साहिबु समालेहु ॥ साहिबु सदा हजूरि है भरमै के छउड़ कटि कै अंतरि जोति धरेहु ॥ हरि का नामु अम्रितु है दारू एहु लाएहु ॥ सतिगुर का भाणा चिति रखहु संजमु सचा नेहु ॥ नानक ऐथै सुखै अंदरि रखसी अगै हरि सिउ केल करेहु ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) सलोक मः ३ ॥
माणसु भरिआ आणिआ माणसु भरिआ आइ ॥ जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ ॥ आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ ॥ जितु पीतै खसमु विसरै दरगह मिलै सजाइ ॥ झूठा मदु मूलि न पीचई जे का पारि वसाइ ॥ नानक नदरी सचु मदु पाईऐ सतिगुरु मिलै जिसु आइ ॥ सदा साहिब कै रंगि रहै महली पावै थाउ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) मः ३ ॥
इहु जगतु जीवतु मरै जा इस नो सोझी होइ ॥ जा तिन्हि सवालिआ तां सवि रहिआ जगाए तां सुधि होइ ॥ नानक नदरि करे जे आपणी सतिगुरु मेलै सोइ ॥ गुर प्रसादि जीवतु मरै ता फिरि मरणु न होइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) मः ३ ॥
किआ जाणा किव मरहगे कैसा मरणा होइ ॥ जे करि साहिबु मनहु न वीसरै ता सहिला मरणा होइ ॥ मरणै ते जगतु डरै जीविआ लोड़ै सभु कोइ ॥ गुर परसादी जीवतु मरै हुकमै बूझै सोइ ॥ नानक ऐसी मरनी जो मरै ता सद जीवणु होइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) सलोक मः ३ ॥
रामु रामु करता सभु जगु फिरै रामु न पाइआ जाइ ॥ अगमु अगोचरु अति वडा अतुलु न तुलिआ जाइ ॥ कीमति किनै न पाईआ कितै न लइआ जाइ ॥ गुर कै सबदि भेदिआ इन बिधि वसिआ मनि आइ ॥ नानक आपि अमेउ है गुर किरपा ते रहिआ समाइ ॥ आपे मिलिआ मिलि रहिआ आपे मिलिआ आइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) मः ३ ॥
ए मन इहु धनु नामु है जितु सदा सदा सुखु होइ ॥ तोटा मूलि न आवई लाहा सद ही होइ ॥ खाधै खरचिऐ तोटि न आवई सदा सदा ओहु देइ ॥ सहसा मूलि न होवई हाणत कदे न होइ ॥ नानक गुरमुखि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) सलोक मः ३ ॥
हउमै विचि जगतु मुआ मरदो मरदा जाइ ॥ जिचरु विचि दमु है तिचरु न चेतई कि करेगु अगै जाइ ॥ गिआनी होइ सु चेतंनु होइ अगिआनी अंधु कमाइ ॥ नानक एथै कमावै सो मिलै अगै पाए जाइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) मः ३ ॥
धुरि खसमै का हुकमु पइआ विणु सतिगुर चेतिआ न जाइ ॥ सतिगुरि मिलिऐ अंतरि रवि रहिआ सदा रहिआ लिव लाइ ॥ दमि दमि सदा समालदा दमु न बिरथा जाइ ॥ जनम मरन का भउ गइआ जीवन पदवी पाइ ॥ नानक इहु मरतबा तिस नो देइ जिस नो किरपा करे रजाइ ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) सलोक मः ३ ॥
सभु किछु हुकमे आवदा सभु किछु हुकमे जाइ ॥ जे को मूरखु आपहु जाणै अंधा अंधु कमाइ ॥ नानक हुकमु को गुरमुखि बुझै जिस नो किरपा करे रजाइ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) मः ३ ॥
सो जोगी जुगति सो पाए जिस नो गुरमुखि नामु परापति होइ ॥ तिसु जोगी की नगरी सभु को वसै भेखी जोगु न होइ ॥ नानक ऐसा विरला को जोगी जिसु घटि परगटु होइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 558) वडहंसु महला ३ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मनि मैलै सभु किछु मैला तनि धोतै मनु हछा न होइ ॥ इह जगतु भरमि भुलाइआ विरला बूझै कोइ ॥१॥

जपि मन मेरे तू एको नामु ॥ सतगुरि दीआ मो कउ एहु निधानु ॥१॥ रहाउ ॥

सिधा के आसण जे सिखै इंद्री वसि करि कमाइ ॥ मन की मैलु न उतरै हउमै मैलु न जाइ ॥२॥

इसु मन कउ होरु संजमु को नाही विणु सतिगुर की सरणाइ ॥ सतगुरि मिलिऐ उलटी भई कहणा किछू न जाइ ॥३॥

भणति नानकु सतिगुर कउ मिलदो मरै गुर कै सबदि फिरि जीवै कोइ ॥ ममता की मलु उतरै इहु मनु हछा होइ ॥४॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 558) वडहंसु महला ३ ॥
नदरी सतगुरु सेवीऐ नदरी सेवा होइ ॥ नदरी इहु मनु वसि आवै नदरी मनु निरमलु होइ ॥१॥

मेरे मन चेति सचा सोइ ॥ एको चेतहि ता सुखु पावहि फिरि दूखु न मूले होइ ॥१॥ रहाउ ॥

नदरी मरि कै जीवीऐ नदरी सबदु वसै मनि आइ ॥ नदरी हुकमु बुझीऐ हुकमे रहै समाइ ॥२॥

जिनि जिहवा हरि रसु न चखिओ सा जिहवा जलि जाउ ॥ अन रस सादे लगि रही दुखु पाइआ दूजै भाइ ॥३॥

सभना नदरि एक है आपे फरकु करेइ ॥ नानक सतगुरि मिलिऐ फलु पाइआ नामु वडाई देइ ॥४॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 558) वडहंसु महला ३ ॥
माइआ मोहु गुबारु है गुर बिनु गिआनु न होई ॥ सबदि लगे तिन बुझिआ दूजै परज विगोई ॥१॥

मन मेरे गुरमति करणी सारु ॥ सदा सदा हरि प्रभु रवहि ता पावहि मोख दुआरु ॥१॥ रहाउ ॥

गुणा का निधानु एकु है आपे देइ ता को पाए ॥ बिनु नावै सभ विछुड़ी गुर कै सबदि मिलाए ॥२॥

मेरी मेरी करदे घटि गए तिना हथि किहु न आइआ ॥ सतगुरि मिलिऐ सचि मिले सचि नामि समाइआ ॥३॥

आसा मनसा एहु सरीरु है अंतरि जोति जगाए ॥ नानक मनमुखि बंधु है गुरमुखि मुकति कराए ॥४॥३॥

(राग वडहंसु -- SGGS 559) वडहंसु महला ३ ॥
सोहागणी सदा मुखु उजला गुर कै सहजि सुभाइ ॥ सदा पिरु रावहि आपणा विचहु आपु गवाइ ॥१॥

मेरे मन तू हरि हरि नामु धिआइ ॥ सतगुरि मो कउ हरि दीआ बुझाइ ॥१॥ रहाउ ॥

दोहागणी खरीआ बिललादीआ तिना महलु न पाइ ॥ दूजै भाइ करूपी दूखु पावहि आगै जाइ ॥२॥

गुणवंती नित गुण रवै हिरदै नामु वसाइ ॥ अउगणवंती कामणी दुखु लागै बिललाइ ॥३॥

सभना का भतारु एकु है सुआमी कहणा किछू न जाइ ॥ नानक आपे वेक कीतिअनु नामे लइअनु लाइ ॥४॥४॥

(राग वडहंसु -- SGGS 559) वडहंसु महला ३ ॥
अम्रित नामु सद मीठा लागा गुर सबदी सादु आइआ ॥ सची बाणी सहजि समाणी हरि जीउ मनि वसाइआ ॥१॥

हरि करि किरपा सतगुरू मिलाइआ ॥ पूरै सतगुरि हरि नामु धिआइआ ॥१॥ रहाउ ॥

ब्रहमै बेद बाणी परगासी माइआ मोह पसारा ॥ महादेउ गिआनी वरतै घरि आपणै तामसु बहुतु अहंकारा ॥२॥

किसनु सदा अवतारी रूधा कितु लगि तरै संसारा ॥ गुरमुखि गिआनि रते जुग अंतरि चूकै मोह गुबारा ॥३॥

सतगुर सेवा ते निसतारा गुरमुखि तरै संसारा ॥ साचै नाइ रते बैरागी पाइनि मोख दुआरा ॥४॥

एको सचु वरतै सभ अंतरि सभना करे प्रतिपाला ॥ नानक इकसु बिनु मै अवरु न जाणा सभना दीवानु दइआला ॥५॥५॥

(राग वडहंसु -- SGGS 559) वडहंसु महला ३ ॥
गुरमुखि सचु संजमु ततु गिआनु ॥ गुरमुखि साचे लगै धिआनु ॥१॥

गुरमुखि मन मेरे नामु समालि ॥ सदा निबहै चलै तेरै नालि ॥ रहाउ ॥ गुरमुखि जाति पति सचु सोइ ॥ गुरमुखि अंतरि सखाई प्रभु होइ ॥२॥

गुरमुखि जिस नो आपि करे सो होइ ॥ गुरमुखि आपि वडाई देवै सोइ ॥३॥

गुरमुखि सबदु सचु करणी सारु ॥ गुरमुखि नानक परवारै साधारु ॥४॥६॥

(राग वडहंसु -- SGGS 560) वडहंसु महला ३ ॥
रसना हरि सादि लगी सहजि सुभाइ ॥ मनु त्रिपतिआ हरि नामु धिआइ ॥१॥

सदा सुखु साचै सबदि वीचारी ॥ आपणे सतगुर विटहु सदा बलिहारी ॥१॥ रहाउ ॥

अखी संतोखीआ एक लिव लाइ ॥ मनु संतोखिआ दूजा भाउ गवाइ ॥२॥

देह सरीरि सुखु होवै सबदि हरि नाइ ॥ नामु परमलु हिरदै रहिआ समाइ ॥३॥

नानक मसतकि जिसु वडभागु ॥ गुर की बाणी सहज बैरागु ॥४॥७॥

(राग वडहंसु -- SGGS 560) वडहंसु महला ३ ॥
पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥ सचै सबदि सचि समाइ ॥१॥

ए मन नामु निधानु तू पाइ ॥ आपणे गुर की मंनि लै रजाइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुर कै सबदि विचहु मैलु गवाइ ॥ निरमलु नामु वसै मनि आइ ॥२॥

भरमे भूला फिरै संसारु ॥ मरि जनमै जमु करे खुआरु ॥३॥

नानक से वडभागी जिन हरि नामु धिआइआ ॥ गुर परसादी मंनि वसाइआ ॥४॥८॥

(राग वडहंसु -- SGGS 560) वडहंसु महला ३ ॥
हउमै नावै नालि विरोधु है दुइ न वसहि इक ठाइ ॥ हउमै विचि सेवा न होवई ता मनु बिरथा जाइ ॥१॥

हरि चेति मन मेरे तू गुर का सबदु कमाइ ॥ हुकमु मंनहि ता हरि मिलै ता विचहु हउमै जाइ ॥ रहाउ ॥ हउमै सभु सरीरु है हउमै ओपति होइ ॥ हउमै वडा गुबारु है हउमै विचि बुझि न सकै कोइ ॥२॥

हउमै विचि भगति न होवई हुकमु न बुझिआ जाइ ॥ हउमै विचि जीउ बंधु है नामु न वसै मनि आइ ॥३॥

नानक सतगुरि मिलिऐ हउमै गई ता सचु वसिआ मनि आइ ॥ सचु कमावै सचि रहै सचे सेवि समाइ ॥४॥९॥१२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 564) वडहंसु महला ३ असटपदीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सची बाणी सचु धुनि सचु सबदु वीचारा ॥ अनदिनु सचु सलाहणा धनु धनु वडभाग हमारा ॥१॥

मन मेरे साचे नाम विटहु बलि जाउ ॥ दासनि दासा होइ रहहि ता पावहि सचा नाउ ॥१॥ रहाउ ॥

जिहवा सची सचि रती तनु मनु सचा होइ ॥ बिनु साचे होरु सालाहणा जासहि जनमु सभु खोइ ॥२॥

सचु खेती सचु बीजणा साचा वापारा ॥ अनदिनु लाहा सचु नामु धनु भगति भरे भंडारा ॥३॥

सचु खाणा सचु पैनणा सचु टेक हरि नाउ ॥ जिस नो बखसे तिसु मिलै महली पाए थाउ ॥४॥

आवहि सचे जावहि सचे फिरि जूनी मूलि न पाहि ॥ गुरमुखि दरि साचै सचिआर हहि साचे माहि समाहि ॥५॥

अंतरु सचा मनु सचा सची सिफति सनाइ ॥ सचै थानि सचु सालाहणा सतिगुर बलिहारै जाउ ॥६॥

सचु वेला मूरतु सचु जितु सचे नालि पिआरु ॥ सचु वेखणा सचु बोलणा सचा सभु आकारु ॥७॥

नानक सचै मेले ता मिले आपे लए मिलाइ ॥ जिउ भावै तिउ रखसी आपे करे रजाइ ॥८॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 565) वडहंसु महला ३ ॥
मनूआ दह दिस धावदा ओहु कैसे हरि गुण गावै ॥ इंद्री विआपि रही अधिकाई कामु क्रोधु नित संतावै ॥१॥

वाहु वाहु सहजे गुण रवीजै ॥ राम नामु इसु जुग महि दुलभु है गुरमति हरि रसु पीजै ॥१॥ रहाउ ॥

सबदु चीनि मनु निरमलु होवै ता हरि के गुण गावै ॥ गुरमती आपै आपु पछाणै ता निज घरि वासा पावै ॥२॥

ए मन मेरे सदा रंगि राते सदा हरि के गुण गाउ ॥ हरि निरमलु सदा सुखदाता मनि चिंदिआ फलु पाउ ॥३॥

हम नीच से ऊतम भए हरि की सरणाई ॥ पाथरु डुबदा काढि लीआ साची वडिआई ॥४॥

बिखु से अम्रित भए गुरमति बुधि पाई ॥ अकहु परमल भए अंतरि वासना वसाई ॥५॥

माणस जनमु दुल्मभु है जग महि खटिआ आइ ॥ पूरै भागि सतिगुरु मिलै हरि नामु धिआइ ॥६॥

मनमुख भूले बिखु लगे अहिला जनमु गवाइआ ॥ हरि का नामु सदा सुख सागरु साचा सबदु न भाइआ ॥७॥

मुखहु हरि हरि सभु को करै विरलै हिरदै वसाइआ ॥ नानक जिन कै हिरदै वसिआ मोख मुकति तिन्ह पाइआ ॥८॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 567) वडहंसु महला ३ छंत
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आपणे पिर कै रंगि रती मुईए सोभावंती नारे ॥ सचै सबदि मिलि रही मुईए पिरु रावे भाइ पिआरे ॥ सचै भाइ पिआरी कंति सवारी हरि हरि सिउ नेहु रचाइआ ॥ आपु गवाइआ ता पिरु पाइआ गुर कै सबदि समाइआ ॥ सा धन सबदि सुहाई प्रेम कसाई अंतरि प्रीति पिआरी ॥ नानक सा धन मेलि लई पिरि आपे साचै साहि सवारी ॥१॥

निरगुणवंतड़ीए पिरु देखि हदूरे राम ॥ गुरमुखि जिनी राविआ मुईए पिरु रवि रहिआ भरपूरे राम ॥ पिरु रवि रहिआ भरपूरे वेखु हजूरे जुगि जुगि एको जाता ॥ धन बाली भोली पिरु सहजि रावै मिलिआ करम बिधाता ॥ जिनि हरि रसु चाखिआ सबदि सुभाखिआ हरि सरि रही भरपूरे ॥ नानक कामणि सा पिर भावै सबदे रहै हदूरे ॥२॥

सोहागणी जाइ पूछहु मुईए जिनी विचहु आपु गवाइआ ॥ पिर का हुकमु न पाइओ मुईए जिनी विचहु आपु न गवाइआ ॥ जिनी आपु गवाइआ तिनी पिरु पाइआ रंग सिउ रलीआ माणै ॥ सदा रंगि राती सहजे माती अनदिनु नामु वखाणै ॥ कामणि वडभागी अंतरि लिव लागी हरि का प्रेमु सुभाइआ ॥ नानक कामणि सहजे राती जिनि सचु सीगारु बणाइआ ॥३॥

हउमै मारि मुईए तू चलु गुर कै भाए ॥ हरि वरु रावहि सदा मुईए निज घरि वासा पाए ॥ निज घरि वासा पाए सबदु वजाए सदा सुहागणि नारी ॥ पिरु रलीआला जोबनु बाला अनदिनु कंति सवारी ॥ हरि वरु सोहागो मसतकि भागो सचै सबदि सुहाए ॥ नानक कामणि हरि रंगि राती जा चलै सतिगुर भाए ॥४॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 568) वडहंसु महला ३ ॥
गुरमुखि सभु वापारु भला जे सहजे कीजै राम ॥ अनदिनु नामु वखाणीऐ लाहा हरि रसु पीजै राम ॥ लाहा हरि रसु लीजै हरि रावीजै अनदिनु नामु वखाणै ॥ गुण संग्रहि अवगण विकणहि आपै आपु पछाणै ॥ गुरमति पाई वडी वडिआई सचै सबदि रसु पीजै ॥ नानक हरि की भगति निराली गुरमुखि विरलै कीजै ॥१॥

गुरमुखि खेती हरि अंतरि बीजीऐ हरि लीजै सरीरि जमाए राम ॥ आपणे घर अंदरि रसु भुंचु तू लाहा लै परथाए राम ॥ लाहा परथाए हरि मंनि वसाए धनु खेती वापारा ॥ हरि नामु धिआए मंनि वसाए बूझै गुर बीचारा ॥ मनमुख खेती वणजु करि थाके त्रिसना भुख न जाए ॥ नानक नामु बीजि मन अंदरि सचै सबदि सुभाए ॥२॥

हरि वापारि से जन लागे जिना मसतकि मणी वडभागो राम ॥ गुरमती मनु निज घरि वसिआ सचै सबदि बैरागो राम ॥ मुखि मसतकि भागो सचि बैरागो साचि रते वीचारी ॥ नाम बिना सभु जगु बउराना सबदे हउमै मारी ॥ साचै सबदि लागि मति उपजै गुरमुखि नामु सोहागो ॥ नानक सबदि मिलै भउ भंजनु हरि रावै मसतकि भागो ॥३॥

खेती वणजु सभु हुकमु है हुकमे मंनि वडिआई राम ॥ गुरमती हुकमु बूझीऐ हुकमे मेलि मिलाई राम ॥ हुकमि मिलाई सहजि समाई गुर का सबदु अपारा ॥ सची वडिआई गुर ते पाई सचु सवारणहारा ॥ भउ भंजनु पाइआ आपु गवाइआ गुरमुखि मेलि मिलाई ॥ कहु नानक नामु निरंजनु अगमु अगोचरु हुकमे रहिआ समाई ॥४॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 569) वडहंसु महला ३ ॥
मन मेरिआ तू सदा सचु समालि जीउ ॥ आपणै घरि तू सुखि वसहि पोहि न सकै जमकालु जीउ ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै साचै सबदि लिव लाए ॥ सदा सचि रता मनु निरमलु आवणु जाणु रहाए ॥ दूजै भाइ भरमि विगुती मनमुखि मोही जमकालि ॥ कहै नानकु सुणि मन मेरे तू सदा सचु समालि ॥१॥

मन मेरिआ अंतरि तेरै निधानु है बाहरि वसतु न भालि ॥ जो भावै सो भुंचि तू गुरमुखि नदरि निहालि ॥ गुरमुखि नदरि निहालि मन मेरे अंतरि हरि नामु सखाई ॥ मनमुख अंधुले गिआन विहूणे दूजै भाइ खुआई ॥ बिनु नावै को छूटै नाही सभ बाधी जमकालि ॥ नानक अंतरि तेरै निधानु है तू बाहरि वसतु न भालि ॥२॥

मन मेरिआ जनमु पदारथु पाइ कै इकि सचि लगे वापारा ॥ सतिगुरु सेवनि आपणा अंतरि सबदु अपारा ॥ अंतरि सबदु अपारा हरि नामु पिआरा नामे नउ निधि पाई ॥ मनमुख माइआ मोह विआपे दूखि संतापे दूजै पति गवाई ॥ हउमै मारि सचि सबदि समाणे सचि रते अधिकाई ॥ नानक माणस जनमु दुल्मभु है सतिगुरि बूझ बुझाई ॥३॥

मन मेरे सतिगुरु सेवनि आपणा से जन वडभागी राम ॥ जो मनु मारहि आपणा से पुरख बैरागी राम ॥ से जन बैरागी सचि लिव लागी आपणा आपु पछाणिआ ॥ मति निहचल अति गूड़ी गुरमुखि सहजे नामु वखाणिआ ॥ इक कामणि हितकारी माइआ मोहि पिआरी मनमुख सोइ रहे अभागे ॥ नानक सहजे सेवहि गुरु अपणा से पूरे वडभागे ॥४॥३॥

(राग वडहंसु -- SGGS 569) वडहंसु महला ३ ॥
रतन पदारथ वणजीअहि सतिगुरि दीआ बुझाई राम ॥ लाहा लाभु हरि भगति है गुण महि गुणी समाई राम ॥ गुण महि गुणी समाए जिसु आपि बुझाए लाहा भगति सैसारे ॥ बिनु भगती सुखु न होई दूजै पति खोई गुरमति नामु अधारे ॥ वखरु नामु सदा लाभु है जिस नो एतु वापारि लाए ॥ रतन पदारथ वणजीअहि जां सतिगुरु देइ बुझाए ॥१॥

माइआ मोहु सभु दुखु है खोटा इहु वापारा राम ॥ कूड़ु बोलि बिखु खावणी बहु वधहि विकारा राम ॥ बहु वधहि विकारा सहसा इहु संसारा बिनु नावै पति खोई ॥ पड़ि पड़ि पंडित वादु वखाणहि बिनु बूझे सुखु न होई ॥ आवण जाणा कदे न चूकै माइआ मोह पिआरा ॥ माइआ मोहु सभु दुखु है खोटा इहु वापारा ॥२॥

खोटे खरे सभि परखीअनि तितु सचे कै दरबारा राम ॥ खोटे दरगह सुटीअनि ऊभे करनि पुकारा राम ॥ ऊभे करनि पुकारा मुगध गवारा मनमुखि जनमु गवाइआ ॥ बिखिआ माइआ जिनि जगतु भुलाइआ साचा नामु न भाइआ ॥ मनमुख संता नालि वैरु करि दुखु खटे संसारा ॥ खोटे खरे परखीअनि तितु सचै दरवारा राम ॥३॥

आपि करे किसु आखीऐ होरु करणा किछू न जाई राम ॥ जितु भावै तितु लाइसी जिउ तिस दी वडिआई राम ॥ जिउ तिस दी वडिआई आपि कराई वरीआमु न फुसी कोई ॥ जगजीवनु दाता करमि बिधाता आपे बखसे सोई ॥ गुर परसादी आपु गवाईऐ नानक नामि पति पाई ॥ आपि करे किसु आखीऐ होरु करणा किछू न जाई ॥४॥४॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates