Pt 7 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 7 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग आसा -- SGGS 440) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा महला ३ छंत घरु ३ ॥
साजन मेरे प्रीतमहु तुम सह की भगति करेहो ॥ गुरु सेवहु सदा आपणा नामु पदारथु लेहो ॥ भगति करहु तुम सहै केरी जो सह पिआरे भावए ॥ आपणा भाणा तुम करहु ता फिरि सह खुसी न आवए ॥ भगति भाव इहु मारगु बिखड़ा गुर दुआरै को पावए ॥ कहै नानकु जिसु करे किरपा सो हरि भगती चितु लावए ॥१॥

मेरे मन बैरागीआ तूं बैरागु करि किसु दिखावहि ॥ हरि सोहिला तिन्ह सद सदा जो हरि गुण गावहि ॥ करि बैरागु तूं छोडि पाखंडु सो सहु सभु किछु जाणए ॥ जलि थलि महीअलि एको सोई गुरमुखि हुकमु पछाणए ॥ जिनि हुकमु पछाता हरी केरा सोई सरब सुख पावए ॥ इव कहै नानकु सो बैरागी अनदिनु हरि लिव लावए ॥२॥

जह जह मन तूं धावदा तह तह हरि तेरै नाले ॥ मन सिआणप छोडीऐ गुर का सबदु समाले ॥ साथि तेरै सो सहु सदा है इकु खिनु हरि नामु समालहे ॥ जनम जनम के तेरे पाप कटे अंति परम पदु पावहे ॥ साचे नालि तेरा गंढु लागै गुरमुखि सदा समाले ॥ इउ कहै नानकु जह मन तूं धावदा तह हरि तेरै सदा नाले ॥३॥

सतिगुर मिलिऐ धावतु थम्हिआ निज घरि वसिआ आए ॥ नामु विहाझे नामु लए नामि रहे समाए ॥ धावतु थम्हिआ सतिगुरि मिलिऐ दसवा दुआरु पाइआ ॥ तिथै अम्रित भोजनु सहज धुनि उपजै जितु सबदि जगतु थम्हि रहाइआ ॥ तह अनेक वाजे सदा अनदु है सचे रहिआ समाए ॥ इउ कहै नानकु सतिगुरि मिलिऐ धावतु थम्हिआ निज घरि वसिआ आए ॥४॥

मन तूं जोति सरूपु है आपणा मूलु पछाणु ॥ मन हरि जी तेरै नालि है गुरमती रंगु माणु ॥ मूलु पछाणहि तां सहु जाणहि मरण जीवण की सोझी होई ॥ गुर परसादी एको जाणहि तां दूजा भाउ न होई ॥ मनि सांति आई वजी वधाई ता होआ परवाणु ॥ इउ कहै नानकु मन तूं जोति सरूपु है अपणा मूलु पछाणु ॥५॥

मन तूं गारबि अटिआ गारबि लदिआ जाहि ॥ माइआ मोहणी मोहिआ फिरि फिरि जूनी भवाहि ॥ गारबि लागा जाहि मुगध मन अंति गइआ पछुतावहे ॥ अहंकारु तिसना रोगु लगा बिरथा जनमु गवावहे ॥ मनमुख मुगध चेतहि नाही अगै गइआ पछुतावहे ॥ इउ कहै नानकु मन तूं गारबि अटिआ गारबि लदिआ जावहे ॥६॥

मन तूं मत माणु करहि जि हउ किछु जाणदा गुरमुखि निमाणा होहु ॥ अंतरि अगिआनु हउ बुधि है सचि सबदि मलु खोहु ॥ होहु निमाणा सतिगुरू अगै मत किछु आपु लखावहे ॥ आपणै अहंकारि जगतु जलिआ मत तूं आपणा आपु गवावहे ॥ सतिगुर कै भाणै करहि कार सतिगुर कै भाणै लागि रहु ॥ इउ कहै नानकु आपु छडि सुख पावहि मन निमाणा होइ रहु ॥७॥

धंनु सु वेला जितु मै सतिगुरु मिलिआ सो सहु चिति आइआ ॥ महा अनंदु सहजु भइआ मनि तनि सुखु पाइआ ॥ सो सहु चिति आइआ मंनि वसाइआ अवगण सभि विसारे ॥ जा तिसु भाणा गुण परगट होए सतिगुर आपि सवारे ॥ से जन परवाणु होए जिन्ही इकु नामु दिड़िआ दुतीआ भाउ चुकाइआ ॥ इउ कहै नानकु धंनु सु वेला जितु मै सतिगुरु मिलिआ सो सहु चिति आइआ ॥८॥

इकि जंत भरमि भुले तिनि सहि आपि भुलाए ॥ दूजै भाइ फिरहि हउमै करम कमाए ॥ तिनि सहि आपि भुलाए कुमारगि पाए तिन का किछु न वसाई ॥ तिन की गति अवगति तूंहै जाणहि जिनि इह रचन रचाई ॥ हुकमु तेरा खरा भारा गुरमुखि किसै बुझाए ॥ इउ कहै नानकु किआ जंत विचारे जा तुधु भरमि भुलाए ॥९॥

सचे मेरे साहिबा सची तेरी वडिआई ॥ तूं पारब्रहमु बेअंतु सुआमी तेरी कुदरति कहणु न जाई ॥ सची तेरी वडिआई जा कउ तुधु मंनि वसाई सदा तेरे गुण गावहे ॥ तेरे गुण गावहि जा तुधु भावहि सचे सिउ चितु लावहे ॥ जिस नो तूं आपे मेलहि सु गुरमुखि रहै समाई ॥ इउ कहै नानकु सचे मेरे साहिबा सची तेरी वडिआई ॥१०॥२॥७॥५॥२॥७॥

(राग गूजरी -- SGGS 490) रागु गूजरी महला ३ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ध्रिगु इवेहा जीवणा जितु हरि प्रीति न पाइ ॥ जितु कमि हरि वीसरै दूजै लगै जाइ ॥१॥

ऐसा सतिगुरु सेवीऐ मना जितु सेविऐ गोविद प्रीति ऊपजै अवर विसरि सभ जाइ ॥ हरि सेती चितु गहि रहै जरा का भउ न होवई जीवन पदवी पाइ ॥१॥ रहाउ ॥

गोबिंद प्रीति सिउ इकु सहजु उपजिआ वेखु जैसी भगति बनी ॥ आप सेती आपु खाइआ ता मनु निरमलु होआ जोती जोति समई ॥२॥

बिनु भागा ऐसा सतिगुरु न पाईऐ जे लोचै सभु कोइ ॥ कूड़ै की पालि विचहु निकलै ता सदा सुखु होइ ॥३॥

नानक ऐसे सतिगुर की किआ ओहु सेवकु सेवा करे गुर आगै जीउ धरेइ ॥ सतिगुर का भाणा चिति करे सतिगुरु आपे क्रिपा करेइ ॥४॥१॥३॥

(राग गूजरी -- SGGS 490) गूजरी महला ३ ॥
हरि की तुम सेवा करहु दूजी सेवा करहु न कोइ जी ॥ हरि की सेवा ते मनहु चिंदिआ फलु पाईऐ दूजी सेवा जनमु बिरथा जाइ जी ॥१॥

हरि मेरी प्रीति रीति है हरि मेरी हरि मेरी कथा कहानी जी ॥ गुर प्रसादि मेरा मनु भीजै एहा सेव बनी जीउ ॥१॥ रहाउ ॥

हरि मेरा सिम्रिति हरि मेरा सासत्र हरि मेरा बंधपु हरि मेरा भाई ॥ हरि की मै भूख लागै हरि नामि मेरा मनु त्रिपतै हरि मेरा साकु अंति होइ सखाई ॥२॥

हरि बिनु होर रासि कूड़ी है चलदिआ नालि न जाई ॥ हरि मेरा धनु मेरै साथि चालै जहा हउ जाउ तह जाई ॥३॥

सो झूठा जो झूठे लागै झूठे करम कमाई ॥ कहै नानकु हरि का भाणा होआ कहणा कछू न जाई ॥४॥२॥४॥

(राग गूजरी -- SGGS 490) गूजरी महला ३ ॥
जुग माहि नामु दुल्मभु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥ बिनु नावै मुकति न होवई वेखहु को विउपाइ ॥१॥

बलिहारी गुर आपणे सद बलिहारै जाउ ॥ सतिगुर मिलिऐ हरि मनि वसै सहजे रहै समाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जां भउ पाए आपणा बैरागु उपजै मनि आइ ॥ बैरागै ते हरि पाईऐ हरि सिउ रहै समाइ ॥२॥

सेइ मुकत जि मनु जिणहि फिरि धातु न लागै आइ ॥ दसवै दुआरि रहत करे त्रिभवण सोझी पाइ ॥३॥

नानक गुर ते गुरु होइआ वेखहु तिस की रजाइ ॥ इहु कारणु करता करे जोती जोति समाइ ॥४॥३॥५॥

(राग गूजरी -- SGGS 491) गूजरी महला ३ ॥
राम राम सभु को कहै कहिऐ रामु न होइ ॥ गुर परसादी रामु मनि वसै ता फलु पावै कोइ ॥१॥

अंतरि गोविंद जिसु लागै प्रीति ॥ हरि तिसु कदे न वीसरै हरि हरि करहि सदा मनि चीति ॥१॥ रहाउ ॥

हिरदै जिन्ह कै कपटु वसै बाहरहु संत कहाहि ॥ त्रिसना मूलि न चुकई अंति गए पछुताहि ॥२॥

अनेक तीरथ जे जतन करै ता अंतर की हउमै कदे न जाइ ॥ जिसु नर की दुबिधा न जाइ धरम राइ तिसु देइ सजाइ ॥३॥

करमु होवै सोई जनु पाए गुरमुखि बूझै कोई ॥ नानक विचहु हउमै मारे तां हरि भेटै सोई ॥४॥४॥६॥

(राग गूजरी -- SGGS 491) गूजरी महला ३ ॥
तिसु जन सांति सदा मति निहचल जिस का अभिमानु गवाए ॥ सो जनु निरमलु जि गुरमुखि बूझै हरि चरणी चितु लाए ॥१॥

हरि चेति अचेत मना जो इछहि सो फलु होई ॥ गुर परसादी हरि रसु पावहि पीवत रहहि सदा सुखु होई ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुरु भेटे ता पारसु होवै पारसु होइ त पूज कराए ॥ जो उसु पूजे सो फलु पाए दीखिआ देवै साचु बुझाए ॥२॥

विणु पारसै पूज न होवई विणु मन परचे अवरा समझाए ॥ गुरू सदाए अगिआनी अंधा किसु ओहु मारगि पाए ॥३॥

नानक विणु नदरी किछू न पाईऐ जिसु नदरि करे सो पाए ॥ गुर परसादी दे वडिआई अपणा सबदु वरताए ॥४॥५॥७॥

(राग गूजरी -- SGGS 491) गूजरी महला ३ पंचपदे ॥
ना कासी मति ऊपजै ना कासी मति जाइ ॥ सतिगुर मिलिऐ मति ऊपजै ता इह सोझी पाइ ॥१॥

हरि कथा तूं सुणि रे मन सबदु मंनि वसाइ ॥ इह मति तेरी थिरु रहै तां भरमु विचहु जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

हरि चरण रिदै वसाइ तू किलविख होवहि नासु ॥ पंच भू आतमा वसि करहि ता तीरथ करहि निवासु ॥२॥

मनमुखि इहु मनु मुगधु है सोझी किछू न पाइ ॥ हरि का नामु न बुझई अंति गइआ पछुताइ ॥३॥

इहु मनु कासी सभि तीरथ सिम्रिति सतिगुर दीआ बुझाइ ॥ अठसठि तीरथ तिसु संगि रहहि जिन हरि हिरदै रहिआ समाइ ॥४॥

नानक सतिगुर मिलिऐ हुकमु बुझिआ एकु वसिआ मनि आइ ॥ जो तुधु भावै सभु सचु है सचे रहै समाइ ॥५॥६॥८॥

(राग गूजरी -- SGGS 492) गूजरी महला ३ तीजा ॥
एको नामु निधानु पंडित सुणि सिखु सचु सोई ॥ दूजै भाइ जेता पड़हि पड़त गुणत सदा दुखु होई ॥१॥

हरि चरणी तूं लागि रहु गुर सबदि सोझी होई ॥ हरि रसु रसना चाखु तूं तां मनु निरमलु होई ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर मिलिऐ मनु संतोखीऐ ता फिरि त्रिसना भूख न होइ ॥ नामु निधानु पाइआ पर घरि जाइ न कोइ ॥२॥

कथनी बदनी जे करे मनमुखि बूझ न होइ ॥ गुरमती घटि चानणा हरि नामु पावै सोइ ॥३॥

सुणि सासत्र तूं न बुझही ता फिरहि बारो बार ॥ सो मूरखु जो आपु न पछाणई सचि न धरे पिआरु ॥४॥

सचै जगतु डहकाइआ कहणा कछू न जाइ ॥ नानक जो तिसु भावै सो करे जिउ तिस की रजाइ ॥५॥७॥९॥

(राग गूजरी -- SGGS 506) गूजरी महला ३ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
निरति करी इहु मनु नचाई ॥ गुर परसादी आपु गवाई ॥ चितु थिरु राखै सो मुकति होवै जो इछी सोई फलु पाई ॥१॥

नाचु रे मन गुर कै आगै ॥ गुर कै भाणै नाचहि ता सुखु पावहि अंते जम भउ भागै ॥ रहाउ ॥ आपि नचाए सो भगतु कहीऐ आपणा पिआरु आपि लाए ॥ आपे गावै आपि सुणावै इसु मन अंधे कउ मारगि पाए ॥२॥

अनदिनु नाचै सकति निवारै सिव घरि नीद न होई ॥ सकती घरि जगतु सूता नाचै टापै अवरो गावै मनमुखि भगति न होई ॥३॥

सुरि नर विरति पखि करमी नाचे मुनि जन गिआन बीचारी ॥ सिध साधिक लिव लागी नाचे जिन गुरमुखि बुधि वीचारी ॥४॥

खंड ब्रहमंड त्रै गुण नाचे जिन लागी हरि लिव तुमारी ॥ जीअ जंत सभे ही नाचे नाचहि खाणी चारी ॥५॥

जो तुधु भावहि सेई नाचहि जिन गुरमुखि सबदि लिव लाए ॥ से भगत से ततु गिआनी जिन कउ हुकमु मनाए ॥६॥

एहा भगति सचे सिउ लिव लागै बिनु सेवा भगति न होई ॥ जीवतु मरै ता सबदु बीचारै ता सचु पावै कोई ॥७॥

माइआ कै अरथि बहुतु लोक नाचे को विरला ततु बीचारी ॥ गुर परसादी सोई जनु पाए जिन कउ क्रिपा तुमारी ॥८॥

इकु दमु साचा वीसरै सा वेला बिरथा जाइ ॥ साहि साहि सदा समालीऐ आपे बखसे करे रजाइ ॥९॥

सेई नाचहि जो तुधु भावहि जि गुरमुखि सबदु वीचारी ॥ कहु नानक से सहज सुखु पावहि जिन कउ नदरि तुमारी ॥१०॥१॥६॥

(राग गूजरी -- SGGS 508) गूजरी की वार महला ३
सिकंदर बिराहिम की वार की धुनी गाउणी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सलोकु मः ३ ॥
इहु जगतु ममता मुआ जीवण की बिधि नाहि ॥ गुर कै भाणै जो चलै तां जीवण पदवी पाहि ॥ ओइ सदा सदा जन जीवते जो हरि चरणी चितु लाहि ॥ नानक नदरी मनि वसै गुरमुखि सहजि समाहि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 508) मः ३ ॥
अंदरि सहसा दुखु है आपै सिरि धंधै मार ॥ दूजै भाइ सुते कबहि न जागहि माइआ मोह पिआर ॥ नामु न चेतहि सबदु न वीचारहि इहु मनमुख का आचारु ॥ हरि नामु न पाइआ जनमु बिरथा गवाइआ नानक जमु मारि करे खुआर ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) पउड़ी ॥
आपणा आपु उपाइओनु तदहु होरु न कोई ॥ मता मसूरति आपि करे जो करे सु होई ॥ तदहु आकासु न पातालु है ना त्रै लोई ॥ तदहु आपे आपि निरंकारु है ना ओपति होई ॥ जिउ तिसु भावै तिवै करे तिसु बिनु अवरु न कोई ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) सलोकु मः ३ ॥
साहिबु मेरा सदा है दिसै सबदु कमाइ ॥ ओहु अउहाणी कदे नाहि ना आवै ना जाइ ॥ सदा सदा सो सेवीऐ जो सभ महि रहै समाइ ॥ अवरु दूजा किउ सेवीऐ जमै तै मरि जाइ ॥ निहफलु तिन का जीविआ जि खसमु न जाणहि आपणा अवरी कउ चितु लाइ ॥ नानक एव न जापई करता केती देइ सजाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) मः ३ ॥
सचा नामु धिआईऐ सभो वरतै सचु ॥ नानक हुकमु बुझि परवाणु होइ ता फलु पावै सचु ॥ कथनी बदनी करता फिरै हुकमै मूलि न बुझई अंधा कचु निकचु ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) पउड़ी ॥
संजोगु विजोगु उपाइओनु स्रिसटी का मूलु रचाइआ ॥ हुकमी स्रिसटि साजीअनु जोती जोति मिलाइआ ॥ जोती हूं सभु चानणा सतिगुरि सबदु सुणाइआ ॥ ब्रहमा बिसनु महेसु त्रै गुण सिरि धंधै लाइआ ॥ माइआ का मूलु रचाइओनु तुरीआ सुखु पाइआ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) सलोकु मः ३ ॥
सो जपु सो तपु जि सतिगुर भावै ॥ सतिगुर कै भाणै वडिआई पावै ॥ नानक आपु छोडि गुर माहि समावै ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) मः ३ ॥
गुर की सिख को विरला लेवै ॥ नानक जिसु आपि वडिआई देवै ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) पउड़ी ॥
माइआ मोहु अगिआनु है बिखमु अति भारी ॥ पथर पाप बहु लदिआ किउ तरीऐ तारी ॥ अनदिनु भगती रतिआ हरि पारि उतारी ॥ गुर सबदी मनु निरमला हउमै छडि विकारी ॥ हरि हरि नामु धिआईऐ हरि हरि निसतारी ॥३॥

(राग गूजरी -- SGGS 509) मः ३ ॥
नानक मुकति दुआरा अति नीका नान्हा होइ सु जाइ ॥ हउमै मनु असथूलु है किउ करि विचु दे जाइ ॥ सतिगुर मिलिऐ हउमै गई जोति रही सभ आइ ॥ इहु जीउ सदा मुकतु है सहजे रहिआ समाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) पउड़ी ॥
प्रभि संसारु उपाइ कै वसि आपणै कीता ॥ गणतै प्रभू न पाईऐ दूजै भरमीता ॥ सतिगुर मिलिऐ जीवतु मरै बुझि सचि समीता ॥ सबदे हउमै खोईऐ हरि मेलि मिलीता ॥ सभ किछु जाणै करे आपि आपे विगसीता ॥४॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर सिउ चितु न लाइओ नामु न वसिओ मनि आइ ॥ ध्रिगु इवेहा जीविआ किआ जुग महि पाइआ आइ ॥ माइआ खोटी रासि है एक चसे महि पाजु लहि जाइ ॥ हथहु छुड़की तनु सिआहु होइ बदनु जाइ कुमलाइ ॥ जिन सतिगुर सिउ चितु लाइआ तिन्ह सुखु वसिआ मनि आइ ॥ हरि नामु धिआवहि रंग सिउ हरि नामि रहे लिव लाइ ॥ नानक सतिगुर सो धनु सउपिआ जि जीअ महि रहिआ समाइ ॥ रंगु तिसै कउ अगला वंनी चड़ै चड़ाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) मः ३ ॥
माइआ होई नागनी जगति रही लपटाइ ॥ इस की सेवा जो करे तिस ही कउ फिरि खाइ ॥ गुरमुखि कोई गारड़ू तिनि मलि दलि लाई पाइ ॥ नानक सेई उबरे जि सचि रहे लिव लाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) पउड़ी ॥
ढाढी करे पुकार प्रभू सुणाइसी ॥ अंदरि धीरक होइ पूरा पाइसी ॥ जो धुरि लिखिआ लेखु से करम कमाइसी ॥ जा होवै खसमु दइआलु ता महलु घरु पाइसी ॥ सो प्रभु मेरा अति वडा गुरमुखि मेलाइसी ॥५॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) सलोक मः ३ ॥
सभना का सहु एकु है सद ही रहै हजूरि ॥ नानक हुकमु न मंनई ता घर ही अंदरि दूरि ॥ हुकमु भी तिन्हा मनाइसी जिन्ह कउ नदरि करेइ ॥ हुकमु मंनि सुखु पाइआ प्रेम सुहागणि होइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) मः ३ ॥
रैणि सबाई जलि मुई कंत न लाइओ भाउ ॥ नानक सुखि वसनि सोहागणी जिन्ह पिआरा पुरखु हरि राउ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) पउड़ी ॥
सभु जगु फिरि मै देखिआ हरि इको दाता ॥ उपाइ कितै न पाईऐ हरि करम बिधाता ॥ गुर सबदी हरि मनि वसै हरि सहजे जाता ॥ अंदरहु त्रिसना अगनि बुझी हरि अम्रित सरि नाता ॥ वडी वडिआई वडे की गुरमुखि बोलाता ॥६॥

(राग गूजरी -- SGGS 510) सलोकु मः ३ ॥
काइआ हंस किआ प्रीति है जि पइआ ही छडि जाइ ॥ एस नो कूड़ु बोलि कि खवालीऐ जि चलदिआ नालि न जाइ ॥ काइआ मिटी अंधु है पउणै पुछहु जाइ ॥ हउ ता माइआ मोहिआ फिरि फिरि आवा जाइ ॥ नानक हुकमु न जातो खसम का जि रहा सचि समाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) मः ३ ॥
एको निहचल नाम धनु होरु धनु आवै जाइ ॥ इसु धन कउ तसकरु जोहि न सकई ना ओचका लै जाइ ॥ इहु हरि धनु जीऐ सेती रवि रहिआ जीऐ नाले जाइ ॥ पूरे गुर ते पाईऐ मनमुखि पलै न पाइ ॥ धनु वापारी नानका जिन्हा नाम धनु खटिआ आइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) पउड़ी ॥
मेरा साहिबु अति वडा सचु गहिर ग्मभीरा ॥ सभु जगु तिस कै वसि है सभु तिस का चीरा ॥ गुर परसादी पाईऐ निहचलु धनु धीरा ॥ किरपा ते हरि मनि वसै भेटै गुरु सूरा ॥ गुणवंती सालाहिआ सदा थिरु निहचलु हरि पूरा ॥७॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) सलोकु मः ३ ॥
ध्रिगु तिन्हा दा जीविआ जो हरि सुखु परहरि तिआगदे दुखु हउमै पाप कमाइ ॥ मनमुख अगिआनी माइआ मोहि विआपे तिन्ह बूझ न काई पाइ ॥ हलति पलति ओइ सुखु न पावहि अंति गए पछुताइ ॥ गुर परसादी को नामु धिआए तिसु हउमै विचहु जाइ ॥ नानक जिसु पूरबि होवै लिखिआ सो गुर चरणी आइ पाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) मः ३ ॥
मनमुखु ऊधा कउलु है ना तिसु भगति न नाउ ॥ सकती अंदरि वरतदा कूड़ु तिस का है उपाउ ॥ तिस का अंदरु चितु न भिजई मुखि फीका आलाउ ॥ ओइ धरमि रलाए ना रलन्हि ओना अंदरि कूड़ु सुआउ ॥ नानक करतै बणत बणाई मनमुख कूड़ु बोलि बोलि डुबे गुरमुखि तरे जपि हरि नाउ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) पउड़ी ॥
बिनु बूझे वडा फेरु पइआ फिरि आवै जाई ॥ सतिगुर की सेवा न कीतीआ अंति गइआ पछुताई ॥ आपणी किरपा करे गुरु पाईऐ विचहु आपु गवाई ॥ त्रिसना भुख विचहु उतरै सुखु वसै मनि आई ॥ सदा सदा सालाहीऐ हिरदै लिव लाई ॥८॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) सलोकु मः ३ ॥
जि सतिगुरु सेवे आपणा तिस नो पूजे सभु कोइ ॥ सभना उपावा सिरि उपाउ है हरि नामु परापति होइ ॥ अंतरि सीतल साति वसै जपि हिरदै सदा सुखु होइ ॥ अम्रितु खाणा अम्रितु पैनणा नानक नामु वडाई होइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 511) मः ३ ॥
ए मन गुर की सिख सुणि हरि पावहि गुणी निधानु ॥ हरि सुखदाता मनि वसै हउमै जाइ गुमानु ॥ नानक नदरी पाईऐ ता अनदिनु लागै धिआनु ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) पउड़ी ॥
सतु संतोखु सभु सचु है गुरमुखि पविता ॥ अंदरहु कपटु विकारु गइआ मनु सहजे जिता ॥ तह जोति प्रगासु अनंद रसु अगिआनु गविता ॥ अनदिनु हरि के गुण रवै गुण परगटु किता ॥ सभना दाता एकु है इको हरि मिता ॥९॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) सलोकु मः ३ ॥
ब्रहमु बिंदे सो ब्राहमणु कहीऐ जि अनदिनु हरि लिव लाए ॥ सतिगुर पुछै सचु संजमु कमावै हउमै रोगु तिसु जाए ॥ हरि गुण गावै गुण संग्रहै जोती जोति मिलाए ॥ इसु जुग महि को विरला ब्रहम गिआनी जि हउमै मेटि समाए ॥ नानक तिस नो मिलिआ सदा सुखु पाईऐ जि अनदिनु हरि नामु धिआए ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) मः ३ ॥
अंतरि कपटु मनमुख अगिआनी रसना झूठु बोलाइ ॥ कपटि कीतै हरि पुरखु न भीजै नित वेखै सुणै सुभाइ ॥ दूजै भाइ जाइ जगु परबोधै बिखु माइआ मोह सुआइ ॥ इतु कमाणै सदा दुखु पावै जमै मरै फिरि आवै जाइ ॥ सहसा मूलि न चुकई विचि विसटा पचै पचाइ ॥ जिस नो क्रिपा करे मेरा सुआमी तिसु गुर की सिख सुणाइ ॥ हरि नामु धिआवै हरि नामो गावै हरि नामो अंति छडाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) पउड़ी ॥
जिना हुकमु मनाइओनु ते पूरे संसारि ॥ साहिबु सेवन्हि आपणा पूरै सबदि वीचारि ॥ हरि की सेवा चाकरी सचै सबदि पिआरि ॥ हरि का महलु तिन्ही पाइआ जिन्ह हउमै विचहु मारि ॥ नानक गुरमुखि मिलि रहे जपि हरि नामा उर धारि ॥१०॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) सलोकु मः ३ ॥
गुरमुखि धिआन सहज धुनि उपजै सचि नामि चितु लाइआ ॥ गुरमुखि अनदिनु रहै रंगि राता हरि का नामु मनि भाइआ ॥ गुरमुखि हरि वेखहि गुरमुखि हरि बोलहि गुरमुखि हरि सहजि रंगु लाइआ ॥ नानक गुरमुखि गिआनु परापति होवै तिमर अगिआनु अधेरु चुकाइआ ॥ जिस नो करमु होवै धुरि पूरा तिनि गुरमुखि हरि नामु धिआइआ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 512) मः ३ ॥
सतिगुरु जिना न सेविओ सबदि न लगो पिआरु ॥ सहजे नामु न धिआइआ कितु आइआ संसारि ॥ फिरि फिरि जूनी पाईऐ विसटा सदा खुआरु ॥ कूड़ै लालचि लगिआ ना उरवारु न पारु ॥ नानक गुरमुखि उबरे जि आपि मेले करतारि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) पउड़ी ॥
भगत सचै दरि सोहदे सचै सबदि रहाए ॥ हरि की प्रीति तिन ऊपजी हरि प्रेम कसाए ॥ हरि रंगि रहहि सदा रंगि राते रसना हरि रसु पिआए ॥ सफलु जनमु जिन्ही गुरमुखि जाता हरि जीउ रिदै वसाए ॥ बाझु गुरू फिरै बिललादी दूजै भाइ खुआए ॥११॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) सलोकु मः ३ ॥
कलिजुग महि नामु निधानु भगती खटिआ हरि उतम पदु पाइआ ॥ सतिगुर सेवि हरि नामु मनि वसाइआ अनदिनु नामु धिआइआ ॥ विचे ग्रिह गुर बचनि उदासी हउमै मोहु जलाइआ ॥ आपि तरिआ कुल जगतु तराइआ धंनु जणेदी माइआ ॥ ऐसा सतिगुरु सोई पाए जिसु धुरि मसतकि हरि लिखि पाइआ ॥ जन नानक बलिहारी गुर आपणे विटहु जिनि भ्रमि भुला मारगि पाइआ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) मः ३ ॥
त्रै गुण माइआ वेखि भुले जिउ देखि दीपकि पतंग पचाइआ ॥ पंडित भुलि भुलि माइआ वेखहि दिखा किनै किहु आणि चड़ाइआ ॥ दूजै भाइ पड़हि नित बिखिआ नावहु दयि खुआइआ ॥ जोगी जंगम संनिआसी भुले ओन्हा अहंकारु बहु गरबु वधाइआ ॥ छादनु भोजनु न लैही सत भिखिआ मनहठि जनमु गवाइआ ॥ एतड़िआ विचहु सो जनु समधा जिनि गुरमुखि नामु धिआइआ ॥ जन नानक किस नो आखि सुणाईऐ जा करदे सभि कराइआ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) पउड़ी ॥
माइआ मोहु परेतु है कामु क्रोधु अहंकारा ॥ एह जम की सिरकार है एन्हा उपरि जम का डंडु करारा ॥ मनमुख जम मगि पाईअन्हि जिन्ह दूजा भाउ पिआरा ॥ जम पुरि बधे मारीअनि को सुणै न पूकारा ॥ जिस नो क्रिपा करे तिसु गुरु मिलै गुरमुखि निसतारा ॥१२॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) सलोकु मः ३ ॥
हउमै ममता मोहणी मनमुखा नो गई खाइ ॥ जो मोहि दूजै चितु लाइदे तिना विआपि रही लपटाइ ॥ गुर कै सबदि परजालीऐ ता एह विचहु जाइ ॥ तनु मनु होवै उजला नामु वसै मनि आइ ॥ नानक माइआ का मारणु हरि नामु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 513) मः ३ ॥
इहु मनु केतड़िआ जुग भरमिआ थिरु रहै न आवै जाइ ॥ हरि भाणा ता भरमाइअनु करि परपंचु खेलु उपाइ ॥ जा हरि बखसे ता गुर मिलै असथिरु रहै समाइ ॥ नानक मन ही ते मनु मानिआ ना किछु मरै न जाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) पउड़ी ॥
काइआ कोटु अपारु है मिलणा संजोगी ॥ काइआ अंदरि आपि वसि रहिआ आपे रस भोगी ॥ आपि अतीतु अलिपतु है निरजोगु हरि जोगी ॥ जो तिसु भावै सो करे हरि करे सु होगी ॥ हरि गुरमुखि नामु धिआईऐ लहि जाहि विजोगी ॥१३॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) सलोकु मः ३ ॥
वाहु वाहु आपि अखाइदा गुर सबदी सचु सोइ ॥ वाहु वाहु सिफति सलाह है गुरमुखि बूझै कोइ ॥ वाहु वाहु बाणी सचु है सचि मिलावा होइ ॥ नानक वाहु वाहु करतिआ प्रभु पाइआ करमि परापति होइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) मः ३ ॥
वाहु वाहु करती रसना सबदि सुहाई ॥ पूरै सबदि प्रभु मिलिआ आई ॥ वडभागीआ वाहु वाहु मुहहु कढाई ॥ वाहु वाहु करहि सेई जन सोहणे तिन्ह कउ परजा पूजण आई ॥ वाहु वाहु करमि परापति होवै नानक दरि सचै सोभा पाई ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) पउड़ी ॥
बजर कपाट काइआ गड़्ह भीतरि कूड़ु कुसतु अभिमानी ॥ भरमि भूले नदरि न आवनी मनमुख अंध अगिआनी ॥ उपाइ कितै न लभनी करि भेख थके भेखवानी ॥ गुर सबदी खोलाईअन्हि हरि नामु जपानी ॥ हरि जीउ अम्रित बिरखु है जिन पीआ ते त्रिपतानी ॥१४॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) सलोकु मः ३ ॥
वाहु वाहु करतिआ रैणि सुखि विहाइ ॥ वाहु वाहु करतिआ सदा अनंदु होवै मेरी माइ ॥ वाहु वाहु करतिआ हरि सिउ लिव लाइ ॥ वाहु वाहु करमी बोलै बोलाइ ॥ वाहु वाहु करतिआ सोभा पाइ ॥ नानक वाहु वाहु सति रजाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) मः ३ ॥
वाहु वाहु बाणी सचु है गुरमुखि लधी भालि ॥ वाहु वाहु सबदे उचरै वाहु वाहु हिरदै नालि ॥ वाहु वाहु करतिआ हरि पाइआ सहजे गुरमुखि भालि ॥ से वडभागी नानका हरि हरि रिदै समालि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) पउड़ी ॥
ए मना अति लोभीआ नित लोभे राता ॥ माइआ मनसा मोहणी दह दिस फिराता ॥ अगै नाउ जाति न जाइसी मनमुखि दुखु खाता ॥ रसना हरि रसु न चखिओ फीका बोलाता ॥ जिना गुरमुखि अम्रितु चाखिआ से जन त्रिपताता ॥१५॥

(राग गूजरी -- SGGS 514) सलोकु मः ३ ॥
वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि सचा गहिर ग्मभीरु ॥ वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि गुणदाता मति धीरु ॥ वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि सभ महि रहिआ समाइ ॥ वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि देदा रिजकु सबाहि ॥ नानक वाहु वाहु इको करि सालाहीऐ जि सतिगुर दीआ दिखाइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 515) मः ३ ॥
वाहु वाहु गुरमुख सदा करहि मनमुख मरहि बिखु खाइ ॥ ओना वाहु वाहु न भावई दुखे दुखि विहाइ ॥ गुरमुखि अम्रितु पीवणा वाहु वाहु करहि लिव लाइ ॥ नानक वाहु वाहु करहि से जन निरमले त्रिभवण सोझी पाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 515) पउड़ी ॥
हरि कै भाणै गुरु मिलै सेवा भगति बनीजै ॥ हरि कै भाणै हरि मनि वसै सहजे रसु पीजै ॥ हरि कै भाणै सुखु पाईऐ हरि लाहा नित लीजै ॥ हरि कै तखति बहालीऐ निज घरि सदा वसीजै ॥ हरि का भाणा तिनी मंनिआ जिना गुरू मिलीजै ॥१६॥

(राग गूजरी -- SGGS 515) सलोकु मः ३ ॥
वाहु वाहु से जन सदा करहि जिन्ह कउ आपे देइ बुझाइ ॥ वाहु वाहु करतिआ मनु निरमलु होवै हउमै विचहु जाइ ॥ वाहु वाहु गुरसिखु जो नित करे सो मन चिंदिआ फलु पाइ ॥ वाहु वाहु करहि से जन सोहणे हरि तिन्ह कै संगि मिलाइ ॥ वाहु वाहु हिरदै उचरा मुखहु भी वाहु वाहु करेउ ॥ नानक वाहु वाहु जो करहि हउ तनु मनु तिन्ह कउ देउ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 515) मः ३ ॥
वाहु वाहु साहिबु सचु है अम्रितु जा का नाउ ॥ जिनि सेविआ तिनि फलु पाइआ हउ तिन बलिहारै जाउ ॥ वाहु वाहु गुणी निधानु है जिस नो देइ सु खाइ ॥ वाहु वाहु जलि थलि भरपूरु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥ वाहु वाहु गुरसिख नित सभ करहु गुर पूरे वाहु वाहु भावै ॥ नानक वाहु वाहु जो मनि चिति करे तिसु जमकंकरु नेड़ि न आवै ॥२॥


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