Pt 6 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 6 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग आसा -- SGGS 362) आसा महला ३ ॥
लालै आपणी जाति गवाई ॥ तनु मनु अरपे सतिगुर सरणाई ॥ हिरदै नामु वडी वडिआई ॥ सदा प्रीतमु प्रभु होइ सखाई ॥१॥

सो लाला जीवतु मरै ॥ सोगु हरखु दुइ सम करि जाणै गुर परसादी सबदि उधरै ॥१॥ रहाउ ॥

करणी कार धुरहु फुरमाई ॥ बिनु सबदै को थाइ न पाई ॥ करणी कीरति नामु वसाई ॥ आपे देवै ढिल न पाई ॥२॥

मनमुखि भरमि भुलै संसारु ॥ बिनु रासी कूड़ा करे वापारु ॥ विणु रासी वखरु पलै न पाइ ॥ मनमुखि भुला जनमु गवाइ ॥३॥

सतिगुरु सेवे सु लाला होइ ॥ ऊतम जाती ऊतमु सोइ ॥ गुर पउड़ी सभ दू ऊचा होइ ॥ नानक नामि वडाई होइ ॥४॥७॥४६॥

(राग आसा -- SGGS 363) आसा महला ३ ॥
मनमुखि झूठो झूठु कमावै ॥ खसमै का महलु कदे न पावै ॥ दूजै लगी भरमि भुलावै ॥ ममता बाधा आवै जावै ॥१॥

दोहागणी का मन देखु सीगारु ॥ पुत्र कलति धनि माइआ चितु लाए झूठु मोहु पाखंड विकारु ॥१॥ रहाउ ॥

सदा सोहागणि जो प्रभ भावै ॥ गुर सबदी सीगारु बणावै ॥ सेज सुखाली अनदिनु हरि रावै ॥ मिलि प्रीतम सदा सुखु पावै ॥२॥

सा सोहागणि साची जिसु साचि पिआरु ॥ अपणा पिरु राखै सदा उर धारि ॥ नेड़ै वेखै सदा हदूरि ॥ मेरा प्रभु सरब रहिआ भरपूरि ॥३॥

आगै जाति रूपु न जाइ ॥ तेहा होवै जेहे करम कमाइ ॥ सबदे ऊचो ऊचा होइ ॥ नानक साचि समावै सोइ ॥४॥८॥४७॥

(राग आसा -- SGGS 363) आसा महला ३ ॥
भगति रता जनु सहजि सुभाइ ॥ गुर कै भै साचै साचि समाइ ॥ बिनु गुर पूरे भगति न होइ ॥ मनमुख रुंने अपनी पति खोइ ॥१॥

मेरे मन हरि जपि सदा धिआइ ॥ सदा अनंदु होवै दिनु राती जो इछै सोई फलु पाइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुर पूरे ते पूरा पाए ॥ हिरदै सबदु सचु नामु वसाए ॥ अंतरु निरमलु अम्रित सरि नाए ॥ सदा सूचे साचि समाए ॥२॥

हरि प्रभु वेखै सदा हजूरि ॥ गुर परसादि रहिआ भरपूरि ॥ जहा जाउ तह वेखा सोइ ॥ गुर बिनु दाता अवरु न कोइ ॥३॥

गुरु सागरु पूरा भंडार ॥ ऊतम रतन जवाहर अपार ॥ गुर परसादी देवणहारु ॥ नानक बखसे बखसणहारु ॥४॥९॥४८॥

(राग आसा -- SGGS 363) आसा महला ३ ॥
गुरु साइरु सतिगुरु सचु सोइ ॥ पूरै भागि गुर सेवा होइ ॥ सो बूझै जिसु आपि बुझाए ॥ गुर परसादी सेव कराए ॥१॥

गिआन रतनि सभ सोझी होइ ॥ गुर परसादि अगिआनु बिनासै अनदिनु जागै वेखै सचु सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

मोहु गुमानु गुर सबदि जलाए ॥ पूरे गुर ते सोझी पाए ॥ अंतरि महलु गुर सबदि पछाणै ॥ आवण जाणु रहै थिरु नामि समाणे ॥२॥

जमणु मरणा है संसारु ॥ मनमुखु अचेतु माइआ मोहु गुबारु ॥ पर निंदा बहु कूड़ु कमावै ॥ विसटा का कीड़ा विसटा माहि समावै ॥३॥

सतसंगति मिलि सभ सोझी पाए ॥ गुर का सबदु हरि भगति द्रिड़ाए ॥ भाणा मंने सदा सुखु होइ ॥ नानक सचि समावै सोइ ॥४॥१०॥४९॥

(राग आसा -- SGGS 364) आसा महला ३ पंचपदे ॥
सबदि मरै तिसु सदा अनंद ॥ सतिगुर भेटे गुर गोबिंद ॥ ना फिरि मरै न आवै जाइ ॥ पूरे गुर ते साचि समाइ ॥१॥

जिन्ह कउ नामु लिखिआ धुरि लेखु ॥ ते अनदिनु नामु सदा धिआवहि गुर पूरे ते भगति विसेखु ॥१॥ रहाउ ॥

जिन्ह कउ हरि प्रभु लए मिलाइ ॥ तिन्ह की गहण गति कही न जाइ ॥ पूरै सतिगुर दिती वडिआई ॥ ऊतम पदवी हरि नामि समाई ॥२॥

जो किछु करे सु आपे आपि ॥ एक घड़ी महि थापि उथापि ॥ कहि कहि कहणा आखि सुणाए ॥ जे सउ घाले थाइ न पाए ॥३॥

जिन्ह कै पोतै पुंनु तिन्हा गुरू मिलाए ॥ सचु बाणी गुरु सबदु सुणाए ॥ जहां सबदु वसै तहां दुखु जाए ॥ गिआनि रतनि साचै सहजि समाए ॥४॥

नावै जेवडु होरु धनु नाही कोइ ॥ जिस नो बखसे साचा सोइ ॥ पूरै सबदि मंनि वसाए ॥ नानक नामि रते सुखु पाए ॥५॥११॥५०॥

(राग आसा -- SGGS 364) आसा महला ३ ॥
निरति करे बहु वाजे वजाए ॥ इहु मनु अंधा बोला है किसु आखि सुणाए ॥ अंतरि लोभु भरमु अनल वाउ ॥ दीवा बलै न सोझी पाइ ॥१॥

गुरमुखि भगति घटि चानणु होइ ॥ आपु पछाणि मिलै प्रभु सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि निरति हरि लागै भाउ ॥ पूरे ताल विचहु आपु गवाइ ॥ मेरा प्रभु साचा आपे जाणु ॥ गुर कै सबदि अंतरि ब्रहमु पछाणु ॥२॥

गुरमुखि भगति अंतरि प्रीति पिआरु ॥ गुर का सबदु सहजि वीचारु ॥ गुरमुखि भगति जुगति सचु सोइ ॥ पाखंडि भगति निरति दुखु होइ ॥३॥

एहा भगति जनु जीवत मरै ॥ गुर परसादी भवजलु तरै ॥ गुर कै बचनि भगति थाइ पाइ ॥ हरि जीउ आपि वसै मनि आइ ॥४॥

हरि क्रिपा करे सतिगुरू मिलाए ॥ निहचल भगति हरि सिउ चितु लाए ॥ भगति रते तिन्ह सची सोइ ॥ नानक नामि रते सुखु होइ ॥५॥१२॥५१॥

(राग आसा काफी -- SGGS 365) आसा घरु ८ काफी महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि कै भाणै सतिगुरु मिलै सचु सोझी होई ॥ गुर परसादी मनि वसै हरि बूझै सोई ॥१॥

मै सहु दाता एकु है अवरु नाही कोई ॥ गुर किरपा ते मनि वसै ता सदा सुखु होई ॥१॥ रहाउ ॥

इसु जुग महि निरभउ हरि नामु है पाईऐ गुर वीचारि ॥ बिनु नावै जम कै वसि है मनमुखि अंध गवारि ॥२॥

हरि कै भाणै जनु सेवा करै बूझै सचु सोई ॥ हरि कै भाणै सालाहीऐ भाणै मंनिऐ सुखु होई ॥३॥

हरि कै भाणै जनमु पदारथु पाइआ मति ऊतम होई ॥ नानक नामु सलाहि तूं गुरमुखि गति होई ॥४॥३९॥१३॥५२॥

(राग आसा -- SGGS 422) आसा महला ३ असटपदीआ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सासतु बेदु सिम्रिति सरु तेरा सुरसरी चरण समाणी ॥ साखा तीनि मूलु मति रावै तूं तां सरब विडाणी ॥१॥

ता के चरण जपै जनु नानकु बोले अम्रित बाणी ॥१॥ रहाउ ॥

तेतीस करोड़ी दास तुम्हारे रिधि सिधि प्राण अधारी ॥ ता के रूप न जाही लखणे किआ करि आखि वीचारी ॥२॥

तीनि गुणा तेरे जुग ही अंतरि चारे तेरीआ खाणी ॥ करमु होवै ता परम पदु पाईऐ कथे अकथ कहाणी ॥३॥

तूं करता कीआ सभु तेरा किआ को करे पराणी ॥ जा कउ नदरि करहि तूं अपणी साई सचि समाणी ॥४॥

नामु तेरा सभु कोई लेतु है जेती आवण जाणी ॥ जा तुधु भावै ता गुरमुखि बूझै होर मनमुखि फिरै इआणी ॥५॥

चारे वेद ब्रहमे कउ दीए पड़ि पड़ि करे वीचारी ॥ ता का हुकमु न बूझै बपुड़ा नरकि सुरगि अवतारी ॥६॥

जुगह जुगह के राजे कीए गावहि करि अवतारी ॥ तिन भी अंतु न पाइआ ता का किआ करि आखि वीचारी ॥७॥

तूं सचा तेरा कीआ सभु साचा देहि त साचु वखाणी ॥ जा कउ सचु बुझावहि अपणा सहजे नामि समाणी ॥८॥१॥२३॥

(राग आसा -- SGGS 423) आसा महला ३ ॥
सतिगुर हमरा भरमु गवाइआ ॥ हरि नामु निरंजनु मंनि वसाइआ ॥ सबदु चीनि सदा सुखु पाइआ ॥१॥

सुणि मन मेरे ततु गिआनु ॥ देवण वाला सभ बिधि जाणै गुरमुखि पाईऐ नामु निधानु ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर भेटे की वडिआई ॥ जिनि ममता अगनि त्रिसना बुझाई ॥ सहजे माता हरि गुण गाई ॥२॥

विणु गुर पूरे कोइ न जाणी ॥ माइआ मोहि दूजै लोभाणी ॥ गुरमुखि नामु मिलै हरि बाणी ॥३॥

गुर सेवा तपां सिरि तपु सारु ॥ हरि जीउ मनि वसै सभ दूख विसारणहारु ॥ दरि साचै दीसै सचिआरु ॥४॥

गुर सेवा ते त्रिभवण सोझी होइ ॥ आपु पछाणि हरि पावै सोइ ॥ साची बाणी महलु परापति होइ ॥५॥

गुर सेवा ते सभ कुल उधारे ॥ निरमल नामु रखै उरि धारे ॥ साची सोभा साचि दुआरे ॥६॥

से वडभागी जि गुरि सेवा लाए ॥ अनदिनु भगति सचु नामु द्रिड़ाए ॥ नामे उधरे कुल सबाए ॥७॥

नानकु साचु कहै वीचारु ॥ हरि का नामु रखहु उरि धारि ॥ हरि भगती राते मोख दुआरु ॥८॥२॥२४॥

(राग आसा -- SGGS 423) आसा महला ३ ॥
आसा आस करे सभु कोई ॥ हुकमै बूझै निरासा होई ॥ आसा विचि सुते कई लोई ॥ सो जागै जागावै सोई ॥१॥

सतिगुरि नामु बुझाइआ विणु नावै भुख न जाई ॥ नामे त्रिसना अगनि बुझै नामु मिलै तिसै रजाई ॥१॥ रहाउ ॥

कलि कीरति सबदु पछानु ॥ एहा भगति चूकै अभिमानु ॥ सतिगुरु सेविऐ होवै परवानु ॥ जिनि आसा कीती तिस नो जानु ॥२॥

तिसु किआ दीजै जि सबदु सुणाए ॥ करि किरपा नामु मंनि वसाए ॥ इहु सिरु दीजै आपु गवाए ॥ हुकमै बूझे सदा सुखु पाए ॥३॥

आपि करे तै आपि कराए ॥ आपे गुरमुखि नामु वसाए ॥ आपि भुलावै आपि मारगि पाए ॥ सचै सबदि सचि समाए ॥४॥

सचा सबदु सची है बाणी ॥ गुरमुखि जुगि जुगि आखि वखाणी ॥ मनमुखि मोहि भरमि भोलाणी ॥ बिनु नावै सभ फिरै बउराणी ॥५॥

तीनि भवन महि एका माइआ ॥ मूरखि पड़ि पड़ि दूजा भाउ द्रिड़ाइआ ॥ बहु करम कमावै दुखु सबाइआ ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाइआ ॥६॥

अम्रितु मीठा सबदु वीचारि ॥ अनदिनु भोगे हउमै मारि ॥ सहजि अनंदि किरपा धारि ॥ नामि रते सदा सचि पिआरि ॥७॥

हरि जपि पड़ीऐ गुर सबदु वीचारि ॥ हरि जपि पड़ीऐ हउमै मारि ॥ हरि जपीऐ भइ सचि पिआरि ॥ नानक नामु गुरमति उर धारि ॥८॥३॥२५॥

(राग आसा काफी -- SGGS 424) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा महला ३ असटपदीआ घरु ८ काफी ॥
गुर ते सांति ऊपजै जिनि त्रिसना अगनि बुझाई ॥ गुर ते नामु पाईऐ वडी वडिआई ॥१॥

एको नामु चेति मेरे भाई ॥ जगतु जलंदा देखि कै भजि पए सरणाई ॥१॥ रहाउ ॥

गुर ते गिआनु ऊपजै महा ततु बीचारा ॥ गुर ते घरु दरु पाइआ भगती भरे भंडारा ॥२॥

गुरमुखि नामु धिआईऐ बूझै वीचारा ॥ गुरमुखि भगति सलाह है अंतरि सबदु अपारा ॥३॥

गुरमुखि सूखु ऊपजै दुखु कदे न होई ॥ गुरमुखि हउमै मारीऐ मनु निरमलु होई ॥४॥

सतिगुरि मिलिऐ आपु गइआ त्रिभवण सोझी पाई ॥ निरमल जोति पसरि रही जोती जोति मिलाई ॥५॥

पूरै गुरि समझाइआ मति ऊतम होई ॥ अंतरु सीतलु सांति होइ नामे सुखु होई ॥६॥

पूरा सतिगुरु तां मिलै जां नदरि करेई ॥ किलविख पाप सभ कटीअहि फिरि दुखु बिघनु न होई ॥७॥

आपणै हथि वडिआईआ दे नामे लाए ॥ नानक नामु निधानु मनि वसिआ वडिआई पाए ॥८॥४॥२६॥

(राग आसा -- SGGS 425) आसा महला ३ ॥
सुणि मन मंनि वसाइ तूं आपे आइ मिलै मेरे भाई ॥ अनदिनु सची भगति करि सचै चितु लाई ॥१॥

एको नामु धिआइ तूं सुखु पावहि मेरे भाई ॥ हउमै दूजा दूरि करि वडी वडिआई ॥१॥ रहाउ ॥

इसु भगती नो सुरि नर मुनि जन लोचदे विणु सतिगुर पाई न जाइ ॥ पंडित पड़दे जोतिकी तिन बूझ न पाइ ॥२॥

आपै थै सभु रखिओनु किछु कहणु न जाई ॥ आपे देइ सु पाईऐ गुरि बूझ बुझाई ॥३॥

जीअ जंत सभि तिस दे सभना का सोई ॥ मंदा किस नो आखीऐ जे दूजा होई ॥४॥

इको हुकमु वरतदा एका सिरि कारा ॥ आपि भवाली दितीअनु अंतरि लोभु विकारा ॥५॥

इक आपे गुरमुखि कीतिअनु बूझनि वीचारा ॥ भगति भी ओना नो बखसीअनु अंतरि भंडारा ॥६॥

गिआनीआ नो सभु सचु है सचु सोझी होई ॥ ओइ भुलाए किसै दे न भुलन्ही सचु जाणनि सोई ॥७॥

घर महि पंच वरतदे पंचे वीचारी ॥ नानक बिनु सतिगुर वसि न आवन्ही नामि हउमै मारी ॥८॥५॥२७॥

(राग आसा -- SGGS 425) आसा महला ३ ॥
घरै अंदरि सभु वथु है बाहरि किछु नाही ॥ गुर परसादी पाईऐ अंतरि कपट खुलाही ॥१॥

सतिगुर ते हरि पाईऐ भाई ॥ अंतरि नामु निधानु है पूरै सतिगुरि दीआ दिखाई ॥१॥ रहाउ ॥

हरि का गाहकु होवै सो लए पाए रतनु वीचारा ॥ अंदरु खोलै दिब दिसटि देखै मुकति भंडारा ॥२॥

अंदरि महल अनेक हहि जीउ करे वसेरा ॥ मन चिंदिआ फलु पाइसी फिरि होइ न फेरा ॥३॥

पारखीआ वथु समालि लई गुर सोझी होई ॥ नामु पदारथु अमुलु सा गुरमुखि पावै कोई ॥४॥

बाहरु भाले सु किआ लहै वथु घरै अंदरि भाई ॥ भरमे भूला सभु जगु फिरै मनमुखि पति गवाई ॥५॥

घरु दरु छोडे आपणा पर घरि झूठा जाई ॥ चोरै वांगू पकड़ीऐ बिनु नावै चोटा खाई ॥६॥

जिन्ही घरु जाता आपणा से सुखीए भाई ॥ अंतरि ब्रहमु पछाणिआ गुर की वडिआई ॥७॥

आपे दानु करे किसु आखीऐ आपे देइ बुझाई ॥ नानक नामु धिआइ तूं दरि सचै सोभा पाई ॥८॥६॥२८॥

(राग आसा -- SGGS 426) आसा महला ३ ॥
आपै आपु पछाणिआ सादु मीठा भाई ॥ हरि रसि चाखिऐ मुकतु भए जिन्हा साचो भाई ॥१॥

हरि जीउ निरमल निरमला निरमल मनि वासा ॥ गुरमती सालाहीऐ बिखिआ माहि उदासा ॥१॥ रहाउ ॥

बिनु सबदै आपु न जापई सभ अंधी भाई ॥ गुरमती घटि चानणा नामु अंति सखाई ॥२॥

नामे ही नामि वरतदे नामे वरतारा ॥ अंतरि नामु मुखि नामु है नामे सबदि वीचारा ॥३॥

नामु सुणीऐ नामु मंनीऐ नामे वडिआई ॥ नामु सलाहे सदा सदा नामे महलु पाई ॥४॥

नामे ही घटि चानणा नामे सोभा पाई ॥ नामे ही सुखु ऊपजै नामे सरणाई ॥५॥

बिनु नावै कोइ न मंनीऐ मनमुखि पति गवाई ॥ जम पुरि बाधे मारीअहि बिरथा जनमु गवाई ॥६॥

नामै की सभ सेवा करै गुरमुखि नामु बुझाई ॥ नामहु ही नामु मंनीऐ नामे वडिआई ॥७॥

जिस नो देवै तिसु मिलै गुरमती नामु बुझाई ॥ नानक सभ किछु नावै कै वसि है पूरै भागि को पाई ॥८॥७॥२९॥

(राग आसा -- SGGS 426) आसा महला ३ ॥
दोहागणी महलु न पाइन्ही न जाणनि पिर का सुआउ ॥ फिका बोलहि ना निवहि दूजा भाउ सुआउ ॥१॥

इहु मनूआ किउ करि वसि आवै ॥ गुर परसादी ठाकीऐ गिआन मती घरि आवै ॥१॥ रहाउ ॥

सोहागणी आपि सवारीओनु लाइ प्रेम पिआरु ॥ सतिगुर कै भाणै चलदीआ नामे सहजि सीगारु ॥२॥

सदा रावहि पिरु आपणा सची सेज सुभाइ ॥ पिर कै प्रेमि मोहीआ मिलि प्रीतम सुखु पाइ ॥३॥

गिआन अपारु सीगारु है सोभावंती नारि ॥ सा सभराई सुंदरी पिर कै हेति पिआरि ॥४॥

सोहागणी विचि रंगु रखिओनु सचै अलखि अपारि ॥ सतिगुरु सेवनि आपणा सचै भाइ पिआरि ॥५॥

सोहागणी सीगारु बणाइआ गुण का गलि हारु ॥ प्रेम पिरमलु तनि लावणा अंतरि रतनु वीचारु ॥६॥

भगति रते से ऊतमा जति पति सबदे होइ ॥ बिनु नावै सभ नीच जाति है बिसटा का कीड़ा होइ ॥७॥

हउ हउ करदी सभ फिरै बिनु सबदै हउ न जाइ ॥ नानक नामि रते तिन हउमै गई सचै रहे समाइ ॥८॥८॥३०॥

(राग आसा -- SGGS 426) आसा महला ३ ॥
सचे रते से निरमले सदा सची सोइ ॥ ऐथै घरि घरि जापदे आगै जुगि जुगि परगटु होइ ॥१॥

ए मन रूड़्हे रंगुले तूं सचा रंगु चड़ाइ ॥ रूड़ी बाणी जे रपै ना इहु रंगु लहै न जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

हम नीच मैले अति अभिमानी दूजै भाइ विकार ॥ गुरि पारसि मिलिऐ कंचनु होए निरमल जोति अपार ॥२॥

बिनु गुर कोइ न रंगीऐ गुरि मिलिऐ रंगु चड़ाउ ॥ गुर कै भै भाइ जो रते सिफती सचि समाउ ॥३॥

भै बिनु लागि न लगई ना मनु निरमलु होइ ॥ बिनु भै करम कमावणे झूठे ठाउ न कोइ ॥४॥

जिस नो आपे रंगे सु रपसी सतसंगति मिलाइ ॥ पूरे गुर ते सतसंगति ऊपजै सहजे सचि सुभाइ ॥५॥

बिनु संगती सभि ऐसे रहहि जैसे पसु ढोर ॥ जिन्हि कीते तिसै न जाणन्ही बिनु नावै सभि चोर ॥६॥

इकि गुण विहाझहि अउगण विकणहि गुर कै सहजि सुभाइ ॥ गुर सेवा ते नाउ पाइआ वुठा अंदरि आइ ॥७॥

सभना का दाता एकु है सिरि धंधै लाइ ॥ नानक नामे लाइ सवारिअनु सबदे लए मिलाइ ॥८॥९॥३१॥

(राग आसा -- SGGS 427) आसा महला ३ ॥
सभ नावै नो लोचदी जिसु क्रिपा करे सो पाए ॥ बिनु नावै सभु दुखु है सुखु तिसु जिसु मंनि वसाए ॥१॥

तूं बेअंतु दइआलु है तेरी सरणाई ॥ गुर पूरे ते पाईऐ नामे वडिआई ॥१॥ रहाउ ॥

अंतरि बाहरि एकु है बहु बिधि स्रिसटि उपाई ॥ हुकमे कार कराइदा दूजा किसु कहीऐ भाई ॥२॥

बुझणा अबुझणा तुधु कीआ इह तेरी सिरि कार ॥ इकन्हा बखसिहि मेलि लैहि इकि दरगह मारि कढे कूड़िआर ॥३॥

इकि धुरि पवित पावन हहि तुधु नामे लाए ॥ गुर सेवा ते सुखु ऊपजै सचै सबदि बुझाए ॥४॥

इकि कुचल कुचील विखली पते नावहु आपि खुआए ॥ ना ओन सिधि न बुधि है न संजमी फिरहि उतवताए ॥५॥

नदरि करे जिसु आपणी तिस नो भावनी लाए ॥ सतु संतोखु इह संजमी मनु निरमलु सबदु सुणाए ॥६॥

लेखा पड़ि न पहूचीऐ कथि कहणै अंतु न पाइ ॥ गुर ते कीमति पाईऐ सचि सबदि सोझी पाइ ॥७॥

इहु मनु देही सोधि तूं गुर सबदि वीचारि ॥ नानक इसु देही विचि नामु निधानु है पाईऐ गुर कै हेति अपारि ॥८॥१०॥३२॥

(राग आसा -- SGGS 427) आसा महला ३ ॥
सचि रतीआ सोहागणी जिना गुर कै सबदि सीगारि ॥ घर ही सो पिरु पाइआ सचै सबदि वीचारि ॥१॥

अवगण गुणी बखसाइआ हरि सिउ लिव लाई ॥ हरि वरु पाइआ कामणी गुरि मेलि मिलाई ॥१॥ रहाउ ॥

इकि पिरु हदूरि न जाणन्ही दूजै भरमि भुलाइ ॥ किउ पाइन्हि डोहागणी दुखी रैणि विहाइ ॥२॥

जिन कै मनि सचु वसिआ सची कार कमाइ ॥ अनदिनु सेवहि सहज सिउ सचे माहि समाइ ॥३॥

दोहागणी भरमि भुलाईआ कूड़ु बोलि बिखु खाहि ॥ पिरु न जाणनि आपणा सुंञी सेज दुखु पाहि ॥४॥

सचा साहिबु एकु है मतु मन भरमि भुलाहि ॥ गुर पूछि सेवा करहि सचु निरमलु मंनि वसाहि ॥५॥

सोहागणी सदा पिरु पाइआ हउमै आपु गवाइ ॥ पिर सेती अनदिनु गहि रही सची सेज सुखु पाइ ॥६॥

मेरी मेरी करि गए पलै किछु न पाइ ॥ महलु नाही डोहागणी अंति गई पछुताइ ॥७॥

सो पिरु मेरा एकु है एकसु सिउ लिव लाइ ॥ नानक जे सुखु लोड़हि कामणी हरि का नामु मंनि वसाइ ॥८॥११॥३३॥

(राग आसा -- SGGS 428) आसा महला ३ ॥
अम्रितु जिन्हा चखाइओनु रसु आइआ सहजि सुभाइ ॥ सचा वेपरवाहु है तिस नो तिलु न तमाइ ॥१॥

अम्रितु सचा वरसदा गुरमुखा मुखि पाइ ॥ मनु सदा हरीआवला सहजे हरि गुण गाइ ॥१॥ रहाउ ॥

मनमुखि सदा दोहागणी दरि खड़ीआ बिललाहि ॥ जिन्हा पिर का सुआदु न आइओ जो धुरि लिखिआ सो कमाहि ॥२॥

गुरमुखि बीजे सचु जमै सचु नामु वापारु ॥ जो इतु लाहै लाइअनु भगती देइ भंडार ॥३॥

गुरमुखि सदा सोहागणी भै भगति सीगारि ॥ अनदिनु रावहि पिरु आपणा सचु रखहि उर धारि ॥४॥

जिन्हा पिरु राविआ आपणा तिन्हा विटहु बलि जाउ ॥ सदा पिर कै संगि रहहि विचहु आपु गवाइ ॥५॥

तनु मनु सीतलु मुख उजले पिर कै भाइ पिआरि ॥ सेज सुखाली पिरु रवै हउमै त्रिसना मारि ॥६॥

करि किरपा घरि आइआ गुर कै हेति अपारि ॥ वरु पाइआ सोहागणी केवल एकु मुरारि ॥७॥

सभे गुनह बखसाइ लइओनु मेले मेलणहारि ॥ नानक आखणु आखीऐ जे सुणि धरे पिआरु ॥८॥१२॥३४॥

(राग आसा -- SGGS 428) आसा महला ३ ॥
सतिगुर ते गुण ऊपजै जा प्रभु मेलै सोइ ॥ सहजे नामु धिआईऐ गिआनु परगटु होइ ॥१॥

ए मन मत जाणहि हरि दूरि है सदा वेखु हदूरि ॥ सद सुणदा सद वेखदा सबदि रहिआ भरपूरि ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि आपु पछाणिआ तिन्ही इक मनि धिआइआ ॥ सदा रवहि पिरु आपणा सचै नामि सुखु पाइआ ॥२॥

ए मन तेरा को नही करि वेखु सबदि वीचारु ॥ हरि सरणाई भजि पउ पाइहि मोख दुआरु ॥३॥

सबदि सुणीऐ सबदि बुझीऐ सचि रहै लिव लाइ ॥ सबदे हउमै मारीऐ सचै महलि सुखु पाइ ॥४॥

इसु जुग महि सोभा नाम की बिनु नावै सोभ न होइ ॥ इह माइआ की सोभा चारि दिहाड़े जादी बिलमु न होइ ॥५॥

जिनी नामु विसारिआ से मुए मरि जाहि ॥ हरि रस सादु न आइओ बिसटा माहि समाहि ॥६॥

इकि आपे बखसि मिलाइअनु अनदिनु नामे लाइ ॥ सचु कमावहि सचि रहहि सचे सचि समाहि ॥७॥

बिनु सबदै सुणीऐ न देखीऐ जगु बोला अंन्हा भरमाइ ॥ बिनु नावै दुखु पाइसी नामु मिलै तिसै रजाइ ॥८॥

जिन बाणी सिउ चितु लाइआ से जन निरमल परवाणु ॥ नानक नामु तिन्हा कदे न वीसरै से दरि सचे जाणु ॥९॥१३॥३५॥

(राग आसा -- SGGS 429) आसा महला ३ ॥
सबदौ ही भगत जापदे जिन्ह की बाणी सची होइ ॥ विचहु आपु गइआ नाउ मंनिआ सचि मिलावा होइ ॥१॥

हरि हरि नामु जन की पति होइ ॥ सफलु तिन्हा का जनमु है तिन्ह मानै सभु कोइ ॥१॥ रहाउ ॥

हउमै मेरा जाति है अति क्रोधु अभिमानु ॥ सबदि मरै ता जाति जाइ जोती जोति मिलै भगवानु ॥२॥

पूरा सतिगुरु भेटिआ सफल जनमु हमारा ॥ नामु नवै निधि पाइआ भरे अखुट भंडारा ॥३॥

आवहि इसु रासी के वापारीए जिन्हा नामु पिआरा ॥ गुरमुखि होवै सो धनु पाए तिन्हा अंतरि सबदु वीचारा ॥४॥

भगती सार न जाणन्ही मनमुख अहंकारी ॥ धुरहु आपि खुआइअनु जूऐ बाजी हारी ॥५॥

बिनु पिआरै भगति न होवई ना सुखु होइ सरीरि ॥ प्रेम पदारथु पाईऐ गुर भगती मन धीरि ॥६॥

जिस नो भगति कराए सो करे गुर सबद वीचारि ॥ हिरदै एको नामु वसै हउमै दुबिधा मारि ॥७॥

भगता की जति पति एको नामु है आपे लए सवारि ॥ सदा सरणाई तिस की जिउ भावै तिउ कारजु सारि ॥८॥

भगति निराली अलाह दी जापै गुर वीचारि ॥ नानक नामु हिरदै वसै भै भगती नामि सवारि ॥९॥१४॥३६॥

(राग आसा -- SGGS 430) आसा महला ३ ॥
अन रस महि भोलाइआ बिनु नामै दुख पाइ ॥ सतिगुरु पुरखु न भेटिओ जि सची बूझ बुझाइ ॥१॥

ए मन मेरे बावले हरि रसु चखि सादु पाइ ॥ अन रसि लागा तूं फिरहि बिरथा जनमु गवाइ ॥१॥ रहाउ ॥

इसु जुग महि गुरमुख निरमले सचि नामि रहहि लिव लाइ ॥ विणु करमा किछु पाईऐ नही किआ करि कहिआ जाइ ॥२॥

आपु पछाणहि सबदि मरहि मनहु तजि विकार ॥ गुर सरणाई भजि पए बखसे बखसणहार ॥३॥

बिनु नावै सुखु न पाईऐ ना दुखु विचहु जाइ ॥ इहु जगु माइआ मोहि विआपिआ दूजै भरमि भुलाइ ॥४॥

दोहागणी पिर की सार न जाणही किआ करि करहि सीगारु ॥ अनदिनु सदा जलदीआ फिरहि सेजै रवै न भतारु ॥५॥

सोहागणी महलु पाइआ विचहु आपु गवाइ ॥ गुर सबदी सीगारीआ अपणे सहि लईआ मिलाइ ॥६॥

मरणा मनहु विसारिआ माइआ मोहु गुबारु ॥ मनमुख मरि मरि जमहि भी मरहि जम दरि होहि खुआरु ॥७॥

आपि मिलाइअनु से मिले गुर सबदि वीचारि ॥ नानक नामि समाणे मुख उजले तितु सचै दरबारि ॥८॥२२॥१५॥३७॥

(राग आसा -- SGGS 434) रागु आसा महला ३ पटी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अयो अंङै सभु जगु आइआ काखै घंङै कालु भइआ ॥ रीरी लली पाप कमाणे पड़ि अवगण गुण वीसरिआ ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 434) मन ऐसा लेखा तूं की पड़िआ ॥ लेखा देणा तेरै सिरि रहिआ ॥१॥ रहाउ ॥

(राग आसा -- SGGS 434) सिधंङाइऐ सिमरहि नाही नंनै ना तुधु नामु लइआ ॥ छछै छीजहि अहिनिसि मूड़े किउ छूटहि जमि पाकड़िआ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 434) बबै बूझहि नाही मूड़े भरमि भुले तेरा जनमु गइआ ॥ अणहोदा नाउ धराइओ पाधा अवरा का भारु तुधु लइआ ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 434) जजै जोति हिरि लई तेरी मूड़े अंति गइआ पछुतावहिगा ॥ एकु सबदु तूं चीनहि नाही फिरि फिरि जूनी आवहिगा ॥४॥

(राग आसा -- SGGS 434) तुधु सिरि लिखिआ सो पड़ु पंडित अवरा नो न सिखालि बिखिआ ॥ पहिला फाहा पइआ पाधे पिछो दे गलि चाटड़िआ ॥५॥

(राग आसा -- SGGS 435) ससै संजमु गइओ मूड़े एकु दानु तुधु कुथाइ लइआ ॥ साई पुत्री जजमान की सा तेरी एतु धानि खाधै तेरा जनमु गइआ ॥६॥

(राग आसा -- SGGS 435) ममै मति हिरि लई तेरी मूड़े हउमै वडा रोगु पइआ ॥ अंतर आतमै ब्रहमु न चीन्हिआ माइआ का मुहताजु भइआ ॥७॥

(राग आसा -- SGGS 435) ककै कामि क्रोधि भरमिओहु मूड़े ममता लागे तुधु हरि विसरिआ ॥ पड़हि गुणहि तूं बहुतु पुकारहि विणु बूझे तूं डूबि मुआ ॥८॥

(राग आसा -- SGGS 435) ततै तामसि जलिओहु मूड़े थथै थान भरिसटु होआ ॥ घघै घरि घरि फिरहि तूं मूड़े ददै दानु न तुधु लइआ ॥९॥

(राग आसा -- SGGS 435) पपै पारि न पवही मूड़े परपंचि तूं पलचि रहिआ ॥ सचै आपि खुआइओहु मूड़े इहु सिरि तेरै लेखु पइआ ॥१०॥

(राग आसा -- SGGS 435) भभै भवजलि डुबोहु मूड़े माइआ विचि गलतानु भइआ ॥ गुर परसादी एको जाणै एक घड़ी महि पारि पइआ ॥११॥

(राग आसा -- SGGS 435) ववै वारी आईआ मूड़े वासुदेउ तुधु वीसरिआ ॥ एह वेला न लहसहि मूड़े फिरि तूं जम कै वसि पइआ ॥१२॥

(राग आसा -- SGGS 435) झझै कदे न झूरहि मूड़े सतिगुर का उपदेसु सुणि तूं विखा ॥ सतिगुर बाझहु गुरु नही कोई निगुरे का है नाउ बुरा ॥१३॥

(राग आसा -- SGGS 435) धधै धावत वरजि रखु मूड़े अंतरि तेरै निधानु पइआ ॥ गुरमुखि होवहि ता हरि रसु पीवहि जुगा जुगंतरि खाहि पइआ ॥१४॥

(राग आसा -- SGGS 435) गगै गोबिदु चिति करि मूड़े गली किनै न पाइआ ॥ गुर के चरन हिरदै वसाइ मूड़े पिछले गुनह सभ बखसि लइआ ॥१५॥

(राग आसा -- SGGS 435) हाहै हरि कथा बूझु तूं मूड़े ता सदा सुखु होई ॥ मनमुखि पड़हि तेता दुखु लागै विणु सतिगुर मुकति न होई ॥१६॥

(राग आसा -- SGGS 435) रारै रामु चिति करि मूड़े हिरदै जिन्ह कै रवि रहिआ ॥ गुर परसादी जिन्ही रामु पछाता निरगुण रामु तिन्ही बूझि लहिआ ॥१७॥

(राग आसा -- SGGS 435) तेरा अंतु न जाई लखिआ अकथु न जाई हरि कथिआ ॥ नानक जिन्ह कउ सतिगुरु मिलिआ तिन्ह का लेखा निबड़िआ ॥१८॥१॥२॥

(राग आसा -- SGGS 439) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा महला ३ छंत घरु १ ॥
हम घरे साचा सोहिला साचै सबदि सुहाइआ राम ॥ धन पिर मेलु भइआ प्रभि आपि मिलाइआ राम ॥ प्रभि आपि मिलाइआ सचु मंनि वसाइआ कामणि सहजे माती ॥ गुर सबदि सीगारी सचि सवारी सदा रावे रंगि राती ॥ आपु गवाए हरि वरु पाए ता हरि रसु मंनि वसाइआ ॥ कहु नानक गुर सबदि सवारी सफलिउ जनमु सबाइआ ॥१॥

दूजड़ै कामणि भरमि भुली हरि वरु न पाए राम ॥ कामणि गुणु नाही बिरथा जनमु गवाए राम ॥ बिरथा जनमु गवाए मनमुखि इआणी अउगणवंती झूरे ॥ आपणा सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाइआ ता पिरु मिलिआ हदूरे ॥ देखि पिरु विगसी अंदरहु सरसी सचै सबदि सुभाए ॥ नानक विणु नावै कामणि भरमि भुलाणी मिलि प्रीतम सुखु पाए ॥२॥

पिरु संगि कामणि जाणिआ गुरि मेलि मिलाई राम ॥ अंतरि सबदि मिली सहजे तपति बुझाई राम ॥ सबदि तपति बुझाई अंतरि सांति आई सहजे हरि रसु चाखिआ ॥ मिलि प्रीतम अपणे सदा रंगु माणे सचै सबदि सुभाखिआ ॥ पड़ि पड़ि पंडित मोनी थाके भेखी मुकति न पाई ॥ नानक बिनु भगती जगु बउराना सचै सबदि मिलाई ॥३॥

सा धन मनि अनदु भइआ हरि जीउ मेलि पिआरे राम ॥ सा धन हरि कै रसि रसी गुर कै सबदि अपारे राम ॥ सबदि अपारे मिले पिआरे सदा गुण सारे मनि वसे ॥ सेज सुहावी जा पिरि रावी मिलि प्रीतम अवगण नसे ॥ जितु घरि नामु हरि सदा धिआईऐ सोहिलड़ा जुग चारे ॥ नानक नामि रते सदा अनदु है हरि मिलिआ कारज सारे ॥४॥१॥६॥


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