Pt 16 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 16 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मारू -- SGGS 1061) मारू महला ३ ॥
जुग छतीह कीओ गुबारा ॥ तू आपे जाणहि सिरजणहारा ॥ होर किआ को कहै कि आखि वखाणै तू आपे कीमति पाइदा ॥१॥

ओअंकारि सभ स्रिसटि उपाई ॥ सभु खेलु तमासा तेरी वडिआई ॥ आपे वेक करे सभि साचा आपे भंनि घड़ाइदा ॥२॥

बाजीगरि इक बाजी पाई ॥ पूरे गुर ते नदरी आई ॥ सदा अलिपतु रहै गुर सबदी साचे सिउ चितु लाइदा ॥३॥

बाजहि बाजे धुनि आकारा ॥ आपि वजाए वजावणहारा ॥ घटि घटि पउणु वहै इक रंगी मिलि पवणै सभ वजाइदा ॥४॥

करता करे सु निहचउ होवै ॥ गुर कै सबदे हउमै खोवै ॥ गुर परसादी किसै दे वडिआई नामो नामु धिआइदा ॥५॥

गुर सेवे जेवडु होरु लाहा नाही ॥ नामु मंनि वसै नामो सालाही ॥ नामो नामु सदा सुखदाता नामो लाहा पाइदा ॥६॥

बिनु नावै सभ दुखु संसारा ॥ बहु करम कमावहि वधहि विकारा ॥ नामु न सेवहि किउ सुखु पाईऐ बिनु नावै दुखु पाइदा ॥७॥

आपि करे तै आपि कराए ॥ गुर परसादी किसै बुझाए ॥ गुरमुखि होवहि से बंधन तोड़हि मुकती कै घरि पाइदा ॥८॥

गणत गणै सो जलै संसारा ॥ सहसा मूलि न चुकै विकारा ॥ गुरमुखि होवै सु गणत चुकाए सचे सचि समाइदा ॥९॥

जे सचु देइ त पाए कोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सचु नामु सालाहे रंगि राता गुर किरपा ते सुखु पाइदा ॥१०॥

जपु तपु संजमु नामु पिआरा ॥ किलविख काटे काटणहारा ॥ हरि कै नामि तनु मनु सीतलु होआ सहजे सहजि समाइदा ॥११॥

अंतरि लोभु मनि मैलै मलु लाए ॥ मैले करम करे दुखु पाए ॥ कूड़ो कूड़ु करे वापारा कूड़ु बोलि दुखु पाइदा ॥१२॥

निरमल बाणी को मंनि वसाए ॥ गुर परसादी सहसा जाए ॥ गुर कै भाणै चलै दिनु राती नामु चेति सुखु पाइदा ॥१३॥

आपि सिरंदा सचा सोई ॥ आपि उपाइ खपाए सोई ॥ गुरमुखि होवै सु सदा सलाहे मिलि साचे सुखु पाइदा ॥१४॥

अनेक जतन करे इंद्री वसि न होई ॥ कामि करोधि जलै सभु कोई ॥ सतिगुर सेवे मनु वसि आवै मन मारे मनहि समाइदा ॥१५॥

मेरा तेरा तुधु आपे कीआ ॥ सभि तेरे जंत तेरे सभि जीआ ॥ नानक नामु समालि सदा तू गुरमती मंनि वसाइदा ॥१६॥४॥१८॥

(राग मारू -- SGGS 1062) मारू महला ३ ॥
हरि जीउ दाता अगम अथाहा ॥ ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥ तिस नो अपड़ि न सकै कोई आपे मेलि मिलाइदा ॥१॥

जो किछु करै सु निहचउ होई ॥ तिसु बिनु दाता अवरु न कोई ॥ जिस नो नाम दानु करे सो पाए गुर सबदी मेलाइदा ॥२॥

चउदह भवण तेरे हटनाले ॥ सतिगुरि दिखाए अंतरि नाले ॥ नावै का वापारी होवै गुर सबदी को पाइदा ॥३॥

सतिगुरि सेविऐ सहज अनंदा ॥ हिरदै आइ वुठा गोविंदा ॥ सहजे भगति करे दिनु राती आपे भगति कराइदा ॥४॥

सतिगुर ते विछुड़े तिनी दुखु पाइआ ॥ अनदिनु मारीअहि दुखु सबाइआ ॥ मथे काले महलु न पावहि दुख ही विचि दुखु पाइदा ॥५॥

सतिगुरु सेवहि से वडभागी ॥ सहज भाइ सची लिव लागी ॥ सचो सचु कमावहि सद ही सचै मेलि मिलाइदा ॥६॥

जिस नो सचा देइ सु पाए ॥ अंतरि साचु भरमु चुकाए ॥ सचु सचै का आपे दाता जिसु देवै सो सचु पाइदा ॥७॥

आपे करता सभना का सोई ॥ जिस नो आपि बुझाए बूझै कोई ॥ आपे बखसे दे वडिआई आपे मेलि मिलाइदा ॥८॥

हउमै करदिआ जनमु गवाइआ ॥ आगै मोहु न चूकै माइआ ॥ अगै जमकालु लेखा लेवै जिउ तिल घाणी पीड़ाइदा ॥९॥

पूरै भागि गुर सेवा होई ॥ नदरि करे ता सेवे कोई ॥ जमकालु तिसु नेड़ि न आवै महलि सचै सुखु पाइदा ॥१०॥

तिन सुखु पाइआ जो तुधु भाए ॥ पूरै भागि गुर सेवा लाए ॥ तेरै हथि है सभ वडिआई जिसु देवहि सो पाइदा ॥११॥

अंदरि परगासु गुरू ते पाए ॥ नामु पदारथु मंनि वसाए ॥ गिआन रतनु सदा घटि चानणु अगिआन अंधेरु गवाइदा ॥१२॥

अगिआनी अंधे दूजै लागे ॥ बिनु पाणी डुबि मूए अभागे ॥ चलदिआ घरु दरु नदरि न आवै जम दरि बाधा दुखु पाइदा ॥१३॥

बिनु सतिगुर सेवे मुकति न होई ॥ गिआनी धिआनी पूछहु कोई ॥ सतिगुरु सेवे तिसु मिलै वडिआई दरि सचै सोभा पाइदा ॥१४॥

सतिगुर नो सेवे तिसु आपि मिलाए ॥ ममता काटि सचि लिव लाए ॥ सदा सचु वणजहि वापारी नामो लाहा पाइदा ॥१५॥

आपे करे कराए करता ॥ सबदि मरै सोई जनु मुकता ॥ नानक नामु वसै मन अंतरि नामो नामु धिआइदा ॥१६॥५॥१९॥

(राग मारू -- SGGS 1063) मारू महला ३ ॥
जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥ भाणे विचि को विरला आइआ ॥ भाणा मंने सो सुखु पाए भाणे विचि सुखु पाइदा ॥१॥

गुरमुखि तेरा भाणा भावै ॥ सहजे ही सुखु सचु कमावै ॥ भाणे नो लोचै बहुतेरी आपणा भाणा आपि मनाइदा ॥२॥

तेरा भाणा मंने सु मिलै तुधु आए ॥ जिसु भाणा भावै सो तुझहि समाए ॥ भाणे विचि वडी वडिआई भाणा किसहि कराइदा ॥३॥

जा तिसु भावै ता गुरू मिलाए ॥ गुरमुखि नामु पदारथु पाए ॥ तुधु आपणै भाणै सभ स्रिसटि उपाई जिस नो भाणा देहि तिसु भाइदा ॥४॥

मनमुखु अंधु करे चतुराई ॥ भाणा न मंने बहुतु दुखु पाई ॥ भरमे भूला आवै जाए घरु महलु न कबहू पाइदा ॥५॥

सतिगुरु मेले दे वडिआई ॥ सतिगुर की सेवा धुरि फुरमाई ॥ सतिगुर सेवे ता नामु पाए नामे ही सुखु पाइदा ॥६॥

सभ नावहु उपजै नावहु छीजै ॥ गुर किरपा ते मनु तनु भीजै ॥ रसना नामु धिआए रसि भीजै रस ही ते रसु पाइदा ॥७॥

महलै अंदरि महलु को पाए ॥ गुर कै सबदि सचि चितु लाए ॥ जिस नो सचु देइ सोई सचु पाए सचे सचि मिलाइदा ॥८॥

नामु विसारि मनि तनि दुखु पाइआ ॥ माइआ मोहु सभु रोगु कमाइआ ॥ बिनु नावै मनु तनु है कुसटी नरके वासा पाइदा ॥९॥

नामि रते तिन निरमल देहा ॥ निरमल हंसा सदा सुखु नेहा ॥ नामु सलाहि सदा सुखु पाइआ निज घरि वासा पाइदा ॥१०॥

सभु को वणजु करे वापारा ॥ विणु नावै सभु तोटा संसारा ॥ नागो आइआ नागो जासी विणु नावै दुखु पाइदा ॥११॥

जिस नो नामु देइ सो पाए ॥ गुर कै सबदि हरि मंनि वसाए ॥ गुर किरपा ते नामु वसिआ घट अंतरि नामो नामु धिआइदा ॥१२॥

नावै नो लोचै जेती सभ आई ॥ नाउ तिना मिलै धुरि पुरबि कमाई ॥ जिनी नाउ पाइआ से वडभागी गुर कै सबदि मिलाइदा ॥१३॥

काइआ कोटु अति अपारा ॥ तिसु विचि बहि प्रभु करे वीचारा ॥ सचा निआउ सचो वापारा निहचलु वासा पाइदा ॥१४॥

अंतर घर बंके थानु सुहाइआ ॥ गुरमुखि विरलै किनै थानु पाइआ ॥ इतु साथि निबहै सालाहे सचे हरि सचा मंनि वसाइदा ॥१५॥

मेरै करतै इक बणत बणाई ॥ इसु देही विचि सभ वथु पाई ॥ नानक नामु वणजहि रंगि राते गुरमुखि को नामु पाइदा ॥१६॥६॥२०॥

(राग मारू -- SGGS 1064) मारू महला ३ ॥
काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥ तिथै हरि वसै जिस दा अंतु न पारावारा ॥ अनदिनु हरि सेविहु सची बाणी हरि जीउ सबदि मिलाइदा ॥१॥

हरि चेतहि तिन बलिहारै जाउ ॥ गुर कै सबदि तिन मेलि मिलाउ ॥ तिन की धूरि लाई मुखि मसतकि सतसंगति बहि गुण गाइदा ॥२॥

हरि के गुण गावा जे हरि प्रभ भावा ॥ अंतरि हरि नामु सबदि सुहावा ॥ गुरबाणी चहु कुंडी सुणीऐ साचै नामि समाइदा ॥३॥

सो जनु साचा जि अंतरु भाले ॥ गुर कै सबदि हरि नदरि निहाले ॥ गिआन अंजनु पाए गुर सबदी नदरी नदरि मिलाइदा ॥४॥

वडै भागि इहु सरीरु पाइआ ॥ माणस जनमि सबदि चितु लाइआ ॥ बिनु सबदै सभु अंध अंधेरा गुरमुखि किसहि बुझाइदा ॥५॥

इकि कितु आए जनमु गवाए ॥ मनमुख लागे दूजै भाए ॥ एह वेला फिरि हाथि न आवै पगि खिसिऐ पछुताइदा ॥६॥

गुर कै सबदि पवित्रु सरीरा ॥ तिसु विचि वसै सचु गुणी गहीरा ॥ सचो सचु वेखै सभ थाई सचु सुणि मंनि वसाइदा ॥७॥

हउमै गणत गुर सबदि निवारे ॥ हरि जीउ हिरदै रखहु उर धारे ॥ गुर कै सबदि सदा सालाहे मिलि साचे सुखु पाइदा ॥८॥

सो चेते जिसु आपि चेताए ॥ गुर कै सबदि वसै मनि आए ॥ आपे वेखै आपे बूझै आपै आपु समाइदा ॥९॥

जिनि मन विचि वथु पाई सोई जाणै ॥ गुर कै सबदे आपु पछाणै ॥ आपु पछाणै सोई जनु निरमलु बाणी सबदु सुणाइदा ॥१०॥

एह काइआ पवितु है सरीरु ॥ गुर सबदी चेतै गुणी गहीरु ॥ अनदिनु गुण गावै रंगि राता गुण कहि गुणी समाइदा ॥११॥

एहु सरीरु सभ मूलु है माइआ ॥ दूजै भाइ भरमि भुलाइआ ॥ हरि न चेतै सदा दुखु पाए बिनु हरि चेते दुखु पाइदा ॥१२॥

जि सतिगुरु सेवे सो परवाणु ॥ काइआ हंसु निरमलु दरि सचै जाणु ॥ हरि सेवे हरि मंनि वसाए सोहै हरि गुण गाइदा ॥१३॥

बिनु भागा गुरु सेविआ न जाइ ॥ मनमुख भूले मुए बिललाइ ॥ जिन कउ नदरि होवै गुर केरी हरि जीउ आपि मिलाइदा ॥१४॥

काइआ कोटु पके हटनाले ॥ गुरमुखि लेवै वसतु समाले ॥ हरि का नामु धिआइ दिनु राती ऊतम पदवी पाइदा ॥१५॥

आपे सचा है सुखदाता ॥ पूरे गुर कै सबदि पछाता ॥ नानक नामु सलाहे साचा पूरै भागि को पाइदा ॥१६॥७॥२१॥

(राग मारू -- SGGS 1066) मारू महला ३ ॥
निरंकारि आकारु उपाइआ ॥ माइआ मोहु हुकमि बणाइआ ॥ आपे खेल करे सभि करता सुणि साचा मंनि वसाइदा ॥१॥

माइआ माई त्रै गुण परसूति जमाइआ ॥ चारे बेद ब्रहमे नो फुरमाइआ ॥ वर्हे माह वार थिती करि इसु जग महि सोझी पाइदा ॥२॥

गुर सेवा ते करणी सार ॥ राम नामु राखहु उरि धार ॥ गुरबाणी वरती जग अंतरि इसु बाणी ते हरि नामु पाइदा ॥३॥

वेदु पड़ै अनदिनु वाद समाले ॥ नामु न चेतै बधा जमकाले ॥ दूजै भाइ सदा दुखु पाए त्रै गुण भरमि भुलाइदा ॥४॥

गुरमुखि एकसु सिउ लिव लाए ॥ त्रिबिधि मनसा मनहि समाए ॥ साचै सबदि सदा है मुकता माइआ मोहु चुकाइदा ॥५॥

जो धुरि राते से हुणि राते ॥ गुर परसादी सहजे माते ॥ सतिगुरु सेवि सदा प्रभु पाइआ आपै आपु मिलाइदा ॥६॥

माइआ मोहि भरमि न पाए ॥ दूजै भाइ लगा दुखु पाए ॥ सूहा रंगु दिन थोड़े होवै इसु जादे बिलम न लाइदा ॥७॥

एहु मनु भै भाइ रंगाए ॥ इतु रंगि साचे माहि समाए ॥ पूरै भागि को इहु रंगु पाए गुरमती रंगु चड़ाइदा ॥८॥

मनमुखु बहुतु करे अभिमानु ॥ दरगह कब ही न पावै मानु ॥ दूजै लागे जनमु गवाइआ बिनु बूझे दुखु पाइदा ॥९॥

मेरै प्रभि अंदरि आपु लुकाइआ ॥ गुर परसादी हरि मिलै मिलाइआ ॥ सचा प्रभु सचा वापारा नामु अमोलकु पाइदा ॥१०॥

इसु काइआ की कीमति किनै न पाई ॥ मेरै ठाकुरि इह बणत बणाई ॥ गुरमुखि होवै सु काइआ सोधै आपहि आपु मिलाइदा ॥११॥

काइआ विचि तोटा काइआ विचि लाहा ॥ गुरमुखि खोजे वेपरवाहा ॥ गुरमुखि वणजि सदा सुखु पाए सहजे सहजि मिलाइदा ॥१२॥

सचा महलु सचे भंडारा ॥ आपे देवै देवणहारा ॥ गुरमुखि सालाहे सुखदाते मनि मेले कीमति पाइदा ॥१३॥

काइआ विचि वसतु कीमति नही पाई ॥ गुरमुखि आपे दे वडिआई ॥ जिस दा हटु सोई वथु जाणै गुरमुखि देइ न पछोताइदा ॥१४॥

हरि जीउ सभ महि रहिआ समाई ॥ गुर परसादी पाइआ जाई ॥ आपे मेलि मिलाए आपे सबदे सहजि समाइदा ॥१५॥

आपे सचा सबदि मिलाए ॥ सबदे विचहु भरमु चुकाए ॥ नानक नामि मिलै वडिआई नामे ही सुखु पाइदा ॥१६॥८॥२२॥

(राग मारू -- SGGS 1067) मारू महला ३ ॥
अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ आपे मिहरवान अगम अथाहे ॥ अपड़ि कोइ न सकै तिस नो गुर सबदी मेलाइआ ॥१॥

तुधुनो सेवहि जो तुधु भावहि ॥ गुर कै सबदे सचि समावहि ॥ अनदिनु गुण रवहि दिनु राती रसना हरि रसु भाइआ ॥२॥

सबदि मरहि से मरणु सवारहि ॥ हरि के गुण हिरदै उर धारहि ॥ जनमु सफलु हरि चरणी लागे दूजा भाउ चुकाइआ ॥३॥

हरि जीउ मेले आपि मिलाए ॥ गुर कै सबदे आपु गवाए ॥ अनदिनु सदा हरि भगती राते इसु जग महि लाहा पाइआ ॥४॥

तेरे गुण कहा मै कहणु न जाई ॥ अंतु न पारा कीमति नही पाई ॥ आपे दइआ करे सुखदाता गुण महि गुणी समाइआ ॥५॥

इसु जग महि मोहु है पासारा ॥ मनमुखु अगिआनी अंधु अंधारा ॥ धंधै धावतु जनमु गवाइआ बिनु नावै दुखु पाइआ ॥६॥

करमु होवै ता सतिगुरु पाए ॥ हउमै मैलु सबदि जलाए ॥ मनु निरमलु गिआनु रतनु चानणु अगिआनु अंधेरु गवाइआ ॥७॥

तेरे नाम अनेक कीमति नही पाई ॥ सचु नामु हरि हिरदै वसाई ॥ कीमति कउणु करे प्रभ तेरी तू आपे सहजि समाइआ ॥८॥

नामु अमोलकु अगम अपारा ॥ ना को होआ तोलणहारा ॥ आपे तोले तोलि तोलाए गुर सबदी मेलि तोलाइआ ॥९॥

सेवक सेवहि करहि अरदासि ॥ तू आपे मेलि बहालहि पासि ॥ सभना जीआ का सुखदाता पूरै करमि धिआइआ ॥१०॥

जतु सतु संजमु जि सचु कमावै ॥ इहु मनु निरमलु जि हरि गुण गावै ॥ इसु बिखु महि अम्रितु परापति होवै हरि जीउ मेरे भाइआ ॥११॥

जिस नो बुझाए सोई बूझै ॥ हरि गुण गावै अंदरु सूझै ॥ हउमै मेरा ठाकि रहाए सहजे ही सचु पाइआ ॥१२॥

बिनु करमा होर फिरै घनेरी ॥ मरि मरि जमै चुकै न फेरी ॥ बिखु का राता बिखु कमावै सुखु न कबहू पाइआ ॥१३॥

बहुते भेख करे भेखधारी ॥ बिनु सबदै हउमै किनै न मारी ॥ जीवतु मरै ता मुकति पाए सचै नाइ समाइआ ॥१४॥

अगिआनु त्रिसना इसु तनहि जलाए ॥ तिस दी बूझै जि गुर सबदु कमाए ॥ तनु मनु सीतलु क्रोधु निवारे हउमै मारि समाइआ ॥१५॥

सचा साहिबु सची वडिआई ॥ गुर परसादी विरलै पाई ॥ नानकु एक कहै बेनंती नामे नामि समाइआ ॥१६॥१॥२३॥

(राग मारू -- SGGS 1068) मारू महला ३ ॥
नदरी भगता लैहु मिलाए ॥ भगत सलाहनि सदा लिव लाए ॥ तउ सरणाई उबरहि करते आपे मेलि मिलाइआ ॥१॥

पूरै सबदि भगति सुहाई ॥ अंतरि सुखु तेरै मनि भाई ॥ मनु तनु सची भगती राता सचे सिउ चितु लाइआ ॥२॥

हउमै विचि सद जलै सरीरा ॥ करमु होवै भेटे गुरु पूरा ॥ अंतरि अगिआनु सबदि बुझाए सतिगुर ते सुखु पाइआ ॥३॥

मनमुखु अंधा अंधु कमाए ॥ बहु संकट जोनी भरमाए ॥ जम का जेवड़ा कदे न काटै अंते बहु दुखु पाइआ ॥४॥

आवण जाणा सबदि निवारे ॥ सचु नामु रखै उर धारे ॥ गुर कै सबदि मरै मनु मारे हउमै जाइ समाइआ ॥५॥

आवण जाणै परज विगोई ॥ बिनु सतिगुर थिरु कोइ न होई ॥ अंतरि जोति सबदि सुखु वसिआ जोती जोति मिलाइआ ॥६॥

पंच दूत चितवहि विकारा ॥ माइआ मोह का एहु पसारा ॥ सतिगुरु सेवे ता मुकतु होवै पंच दूत वसि आइआ ॥७॥

बाझु गुरू है मोहु गुबारा ॥ फिरि फिरि डुबै वारो वारा ॥ सतिगुर भेटे सचु द्रिड़ाए सचु नामु मनि भाइआ ॥८॥

साचा दरु साचा दरवारा ॥ सचे सेवहि सबदि पिआरा ॥ सची धुनि सचे गुण गावा सचे माहि समाइआ ॥९॥

घरै अंदरि को घरु पाए ॥ गुर कै सबदे सहजि सुभाए ॥ ओथै सोगु विजोगु न विआपै सहजे सहजि समाइआ ॥१०॥

दूजै भाइ दुसटा का वासा ॥ भउदे फिरहि बहु मोह पिआसा ॥ कुसंगति बहहि सदा दुखु पावहि दुखो दुखु कमाइआ ॥११॥

सतिगुर बाझहु संगति न होई ॥ बिनु सबदे पारु न पाए कोई ॥ सहजे गुण रवहि दिनु राती जोती जोति मिलाइआ ॥१२॥

काइआ बिरखु पंखी विचि वासा ॥ अम्रितु चुगहि गुर सबदि निवासा ॥ उडहि न मूले न आवहि न जाही निज घरि वासा पाइआ ॥१३॥

काइआ सोधहि सबदु वीचारहि ॥ मोह ठगउरी भरमु निवारहि ॥ आपे क्रिपा करे सुखदाता आपे मेलि मिलाइआ ॥१४॥

सद ही नेड़ै दूरि न जाणहु ॥ गुर कै सबदि नजीकि पछाणहु ॥ बिगसै कमलु किरणि परगासै परगटु करि देखाइआ ॥१५॥

आपे करता सचा सोई ॥ आपे मारि जीवाले अवरु न कोई ॥ नानक नामु मिलै वडिआई आपु गवाइ सुखु पाइआ ॥१६॥२॥२४॥

(राग मारू -- SGGS 1086) मारू वार महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

(राग मारू -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥ दूजा भ्रमु गड़ु कटिआ मोहु लोभु अहंकारा ॥ हरि का नामु मनि वसिआ गुर सबदि वीचारा ॥ सच संजमि मति ऊतमा हरि लगा पिआरा ॥ सभु सचो सचु वरतदा सचु सिरजणहारा ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1087) सलोकु मः ३ ॥
केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥ सतसंगति सिउ मिलदो रहै सचे धरे पिआरु ॥ विचहु मलु कटे आपणी कुला का करे उधारु ॥ गुणा की रासि संग्रहै अवगण कढै विडारि ॥ नानक मिलिआ सो जाणीऐ गुरू न छोडै आपणा दूजै न धरे पिआरु ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥ सचै तखति बैठा निआउ करि सतसंगति मेलि मिलाई ॥ सचा उपदेसु हरि जापणा हरि सिउ बणि आई ॥ ऐथै सुखदाता मनि वसै अंति होइ सखाई ॥ हरि सिउ प्रीति ऊपजी गुरि सोझी पाई ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1087) मः ३ ॥
आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥ आपे किस ही बखसि लए आपे कार कमाइ ॥ नानक चानणु गुर मिले दुख बिखु जाली नाइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥ चलदिआ नालि न चलई सभु झूठु दरबु लखा ॥ अगिआनी अंधु न बूझई सिर ऊपरि जम खड़गु कलखा ॥ गुर परसादी उबरे जिन हरि रसु चखा ॥ आपि कराए करे आपि आपे हरि रखा ॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥ आवणु जावणु दुखु घणा कदे न चूकै चिंद ॥ कापड़ जिवै पछोड़ीऐ घड़ी मुहत घड़ीआलु ॥ नानक सचे नाम बिनु सिरहु न चुकै जंजालु ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1088) मः ३ ॥
त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥ ना झुरु हीअड़े सचु चउ नानक सचो सचु ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥ आपे भगती लाइओनु गुर सबदि नीसाणे ॥ सनमुख सदा सोहणे सचै दरि जाणे ॥ ऐथै ओथै मुकति है जिन राम पछाणे ॥ धंनु धंनु से जन जिन हरि सेविआ तिन हउ कुरबाणे ॥४॥

(राग मारू -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥ किरपा करि कै आपणी गुर सबदि मिलाइआ ॥ गुर की बाणी निरमली हरि रसु पीआइआ ॥ हरि रसु जिनी चाखिआ अन रस ठाकि रहाइआ ॥ हरि रसु पी सदा त्रिपति भए फिरि त्रिसना भुख गवाइआ ॥५॥

(राग मारू -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥ नानक धन आगै खड़ी सोभावंती नारि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥ जिनी सचु पछाणिआ सचु राजे सेई ॥ एहि भूपति राजे न आखीअहि दूजै भाइ दुखु होई ॥ कीता किआ सालाहीऐ जिसु जादे बिलम न होई ॥ निहचलु सचा एकु है गुरमुखि बूझै सु निहचलु होई ॥६॥

(राग मारू -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥ नानक से सोहागणी जि सतिगुर माहि समाहि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1088) मः ३ ॥
मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥ जे राचै सच रंगि गूड़ै रंगि अपार कै ॥ नानक गुर परसादी छुटीऐ जे चितु लगै सचि ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥ आपे स्रिसटि सभ साजीअनु आपे वरतीजै ॥ गुरमुखि सदा सलाहीऐ सचु कीमति कीजै ॥ गुर सबदी कमलु बिगासिआ इव हरि रसु पीजै ॥ आवण जाणा ठाकिआ सुखि सहजि सवीजै ॥७॥

(राग मारू -- SGGS 1089) मः ३ ॥
सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥ नानक तरवरु एकु है एको फुलु भिरंगु ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1089) पउड़ी ॥
जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥ हरि सेती सदा मिलि रहे जिनी आपु पछाना ॥ गिआनीआ का इहु महतु है मन माहि समाना ॥ हरि जीउ का महलु पाइआ सचु लाइ धिआना ॥ जिन गुर परसादी मनु जीतिआ जगु तिनहि जिताना ॥८॥

(राग मारू -- SGGS 1089) सलोकु मः ३ ॥
जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥ दरगह लेखा मंगीऐ किसु किसु उतरु देउ ॥ भिखिआ नामु संतोखु मड़ी सदा सचु है नालि ॥ भेखी हाथ न लधीआ सभ बधी जमकालि ॥ नानक गला झूठीआ सचा नामु समालि ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1089) मः ३ ॥
जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥ ऐसा सतिगुरु लोड़ि लहु जिसु जेवडु अवरु न कोइ ॥ तिसु सरणाई छूटीऐ लेखा मंगै न कोइ ॥ सचु द्रिड़ाए सचु द्रिड़ु सचा ओहु सबदु देइ ॥ हिरदै जिस दै सचु है तनु मनु भी सचा होइ ॥ नानक सचै हुकमि मंनिऐ सची वडिआई देइ ॥ सचे माहि समावसी जिस नो नदरि करेइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1089) पउड़ी ॥
सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥ अंधे आपु न पछाणनी दूजै पचि जावहि ॥ अति करोध सिउ लूझदे अगै पिछै दुखु पावहि ॥ हरि जीउ अहंकारु न भावई वेद कूकि सुणावहि ॥ अहंकारि मुए से विगती गए मरि जनमहि फिरि आवहि ॥९॥

(राग मारू -- SGGS 1089) सलोकु मः ३ ॥
कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥ पिरम पदारथु मंनि लै धंनु सवारणहारु ॥ हुकमु पछाणै ऊजला सिरि कासट लोहा पारि ॥ त्रिसना छोडै भै वसै नानक करणी सारु ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1089) मः ३ ॥
मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥ नानक जे इहु मारीऐ गुर सबदी वीचारि ॥ एहु मनु मारिआ ना मरै जे लोचै सभु कोइ ॥ नानक मन ही कउ मनु मारसी जे सतिगुरु भेटै सोइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥ सकती किनै न पाइओ फिरि जनमि बिनासा ॥ गुरि सेविऐ साति पाईऐ जपि सास गिरासा ॥ सिम्रिति सासत सोधि देखु ऊतम हरि दासा ॥ नानक नाम बिना को थिरु नही नामे बलि जासा ॥१०॥

(राग मारू -- SGGS 1090) सलोकु मः ३ ॥
होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥ नव खंड मधे पूजीआ अपणै चजि वीचारि ॥ मतु सचा अखरु भुलि जाइ चउकै भिटै न कोइ ॥ झूठे चउके नानका सचा एको सोइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1090) मः ३ ॥
आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥ आपे दे वडिआईआ कहु नानक सचा सोइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥ अफरिओ जग महि वरतदा पापी सिउ लूझै ॥ गुर सबदी हरि भेदीऐ हरि जपि हरि बूझै ॥ सो हरि सरणाई छुटीऐ जो मन सिउ जूझै ॥ मनि वीचारि हरि जपु करे हरि दरगह सीझै ॥११॥

(राग मारू -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥ खिन महि मारि पछाड़सी भाइ दूजै ठागे ॥ फिरि वेला हथि न आवई जम का डंडु लागे ॥ तिन जम डंडु न लगई जो हरि लिव जागे ॥ सभ तेरी तुधु छडावणी सभ तुधै लागे ॥१२॥

(राग मारू -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥ इकि आपे भरमि भुलाइअनु तिन निहफल कामु ॥ इकनी गुरमुखि बुझिआ हरि आतम रामु ॥ इकनी सुणि कै मंनिआ हरि ऊतम कामु ॥ अंतरि हरि रंगु उपजिआ गाइआ हरि गुण नामु ॥१३॥

(राग मारू -- SGGS 1091) पउड़ी ॥
जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥ जो इछनि सो पाइदे हरि नामु धिआवै ॥ जिस नो क्रिपा करे तिसु गुरु मिलै सो हरि गुण गावै ॥ धरम राइ तिन का मितु है जम मगि न पावै ॥ हरि नामु धिआवहि दिनसु राति हरि नामि समावै ॥१४॥

(राग मारू -- SGGS 1091) पउड़ी ॥
इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥ एहु अखुटु कदे न निखुटई खाइ खरचिउ पलै ॥ हरि जन नेड़ि न आवई जमकंकर जमकलै ॥ से साह सचे वणजारिआ जिन हरि धनु पलै ॥ हरि किरपा ते हरि पाईऐ जा आपि हरि घलै ॥१५॥

(राग मारू -- SGGS 1091) सलोकु मः ३ ॥
मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥ बाहरहु पंडित सदाइदे मनहु मूरख गावार ॥ हरि सिउ चितु न लाइनी वादी धरनि पिआरु ॥ वादा कीआ करनि कहाणीआ कूड़ु बोलि करहि आहारु ॥ जग महि राम नामु हरि निरमला होरु मैला सभु आकारु ॥ नानक नामु न चेतनी होइ मैले मरहि गवार ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1091) मः ३ ॥
दुखु लगा बिनु सेविऐ हुकमु मंने दुखु जाइ ॥ आपे दाता सुखै दा आपे देइ सजाइ ॥ नानक एवै जाणीऐ सभु किछु तिसै रजाइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1091) पउड़ी ॥
हरि नाम बिना जगतु है निरधनु बिनु नावै त्रिपति नाही ॥ दूजै भरमि भुलाइआ हउमै दुखु पाही ॥ बिनु करमा किछू न पाईऐ जे बहुतु लोचाही ॥ आवै जाइ जमै मरै गुर सबदि छुटाही ॥ आपि करै किसु आखीऐ दूजा को नाही ॥१६॥

(राग मारू -- SGGS 1092) सलोकु मः ३ ॥
इसु जग महि संती धनु खटिआ जिना सतिगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥ सतिगुरि सचु द्रिड़ाइआ इसु धन की कीमति कही न जाइ ॥ इतु धनि पाइऐ भुख लथी सुखु वसिआ मनि आइ ॥ जिंन्हा कउ धुरि लिखिआ तिनी पाइआ आइ ॥ मनमुखु जगतु निरधनु है माइआ नो बिललाइ ॥ अनदिनु फिरदा सदा रहै भुख न कदे जाइ ॥ सांति न कदे आवई नह सुखु वसै मनि आइ ॥ सदा चिंत चितवदा रहै सहसा कदे न जाइ ॥ नानक विणु सतिगुर मति भवी सतिगुर नो मिलै ता सबदु कमाइ ॥ सदा सदा सुख महि रहै सचे माहि समाइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1092) मः ३ ॥
जिनि उपाई मेदनी सोई सार करेइ ॥ एको सिमरहु भाइरहु तिसु बिनु अवरु न कोइ ॥ खाणा सबदु चंगिआईआ जितु खाधै सदा त्रिपति होइ ॥ पैनणु सिफति सनाइ है सदा सदा ओहु ऊजला मैला कदे न होइ ॥ सहजे सचु धनु खटिआ थोड़ा कदे न होइ ॥ देही नो सबदु सीगारु है जितु सदा सदा सुखु होइ ॥ नानक गुरमुखि बुझीऐ जिस नो आपि विखाले सोइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1092) पउड़ी ॥
अंतरि जपु तपु संजमो गुर सबदी जापै ॥ हरि हरि नामु धिआईऐ हउमै अगिआनु गवापै ॥ अंदरु अम्रिति भरपूरु है चाखिआ सादु जापै ॥ जिन चाखिआ से निरभउ भए से हरि रसि ध्रापै ॥ हरि किरपा धारि पीआइआ फिरि कालु न विआपै ॥१७॥

(राग मारू -- SGGS 1092) सलोकु मः ३ ॥
लोकु अवगणा की बंन्है गंठड़ी गुण न विहाझै कोइ ॥ गुण का गाहकु नानका विरला कोई होइ ॥ गुर परसादी गुण पाईअन्हि जिस नो नदरि करेइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1092) मः ३ ॥
गुण अवगुण समानि हहि जि आपि कीते करतारि ॥ नानक हुकमि मंनिऐ सुखु पाईऐ गुर सबदी वीचारि ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1092) पउड़ी ॥
अंदरि राजा तखतु है आपे करे निआउ ॥ गुर सबदी दरु जाणीऐ अंदरि महलु असराउ ॥ खरे परखि खजानै पाईअनि खोटिआ नाही थाउ ॥ सभु सचो सचु वरतदा सदा सचु निआउ ॥ अम्रित का रसु आइआ मनि वसिआ नाउ ॥१८॥


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