Pt 15 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 15 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मारू -- SGGS 1049) मारू महला ३ ॥
एको सेवी सदा थिरु साचा ॥ दूजै लागा सभु जगु काचा ॥ गुरमती सदा सचु सालाही साचे ही साचि पतीजै हे ॥१॥

तेरे गुण बहुते मै एकु न जाता ॥ आपे लाइ लए जगजीवनु दाता ॥ आपे बखसे दे वडिआई गुरमति इहु मनु भीजै हे ॥२॥

माइआ लहरि सबदि निवारी ॥ इहु मनु निरमलु हउमै मारी ॥ सहजे गुण गावै रंगि राता रसना रामु रवीजै हे ॥३॥

मेरी मेरी करत विहाणी ॥ मनमुखि न बूझै फिरै इआणी ॥ जमकालु घड़ी मुहतु निहाले अनदिनु आरजा छीजै हे ॥४॥

अंतरि लोभु करै नही बूझै ॥ सिर ऊपरि जमकालु न सूझै ॥ ऐथै कमाणा सु अगै आइआ अंतकालि किआ कीजै हे ॥५॥

जो सचि लागे तिन साची सोइ ॥ दूजै लागे मनमुखि रोइ ॥ दुहा सिरिआ का खसमु है आपे आपे गुण महि भीजै हे ॥६॥

गुर कै सबदि सदा जनु सोहै ॥ नाम रसाइणि इहु मनु मोहै ॥ माइआ मोह मैलु पतंगु न लागै गुरमती हरि नामि भीजै हे ॥७॥

सभना विचि वरतै इकु सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ हउमै मारि सदा सुखु पाइआ नाइ साचै अम्रितु पीजै हे ॥८॥

किलबिख दूख निवारणहारा ॥ गुरमुखि सेविआ सबदि वीचारा ॥ सभु किछु आपे आपि वरतै गुरमुखि तनु मनु भीजै हे ॥९॥

माइआ अगनि जलै संसारे ॥ गुरमुखि निवारै सबदि वीचारे ॥ अंतरि सांति सदा सुखु पाइआ गुरमती नामु लीजै हे ॥१०॥

इंद्र इंद्रासणि बैठे जम का भउ पावहि ॥ जमु न छोडै बहु करम कमावहि ॥ सतिगुरु भेटै ता मुकति पाईऐ हरि हरि रसना पीजै हे ॥११॥

मनमुखि अंतरि भगति न होई ॥ गुरमुखि भगति सांति सुखु होई ॥ पवित्र पावन सदा है बाणी गुरमति अंतरु भीजै हे ॥१२॥

ब्रहमा बिसनु महेसु वीचारी ॥ त्रै गुण बधक मुकति निरारी ॥ गुरमुखि गिआनु एको है जाता अनदिनु नामु रवीजै हे ॥१३॥

बेद पड़हि हरि नामु न बूझहि ॥ माइआ कारणि पड़ि पड़ि लूझहि ॥ अंतरि मैलु अगिआनी अंधा किउ करि दुतरु तरीजै हे ॥१४॥

बेद बाद सभि आखि वखाणहि ॥ न अंतरु भीजै न सबदु पछाणहि ॥ पुंनु पापु सभु बेदि द्रिड़ाइआ गुरमुखि अम्रितु पीजै हे ॥१५॥

आपे साचा एको सोई ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोई ॥ नानक नामि रते मनु साचा सचो सचु रवीजै हे ॥१६॥६॥

(राग मारू -- SGGS 1050) मारू महला ३ ॥
सचै सचा तखतु रचाइआ ॥ निज घरि वसिआ तिथै मोहु न माइआ ॥ सद ही साचु वसिआ घट अंतरि गुरमुखि करणी सारी हे ॥१॥

सचा सउदा सचु वापारा ॥ न तिथै भरमु न दूजा पसारा ॥ सचा धनु खटिआ कदे तोटि न आवै बूझै को वीचारी हे ॥२॥

सचै लाए से जन लागे ॥ अंतरि सबदु मसतकि वडभागे ॥ सचै सबदि सदा गुण गावहि सबदि रते वीचारी हे ॥३॥

सचो सचा सचु सालाही ॥ एको वेखा दूजा नाही ॥ गुरमति ऊचो ऊची पउड़ी गिआनि रतनि हउमै मारी हे ॥४॥

माइआ मोहु सबदि जलाइआ ॥ सचु मनि वसिआ जा तुधु भाइआ ॥ सचे की सभ सची करणी हउमै तिखा निवारी हे ॥५॥

माइआ मोहु सभु आपे कीना ॥ गुरमुखि विरलै किन ही चीना ॥ गुरमुखि होवै सु सचु कमावै साची करणी सारी हे ॥६॥

कार कमाई जो मेरे प्रभ भाई ॥ हउमै त्रिसना सबदि बुझाई ॥ गुरमति सद ही अंतरु सीतलु हउमै मारि निवारी हे ॥७॥

सचि लगे तिन सभु किछु भावै ॥ सचै सबदे सचि सुहावै ॥ ऐथै साचे से दरि साचे नदरी नदरि सवारी हे ॥८॥

बिनु साचे जो दूजै लाइआ ॥ माइआ मोह दुख सबाइआ ॥ बिनु गुर दुखु सुखु जापै नाही माइआ मोह दुखु भारी हे ॥९॥

साचा सबदु जिना मनि भाइआ ॥ पूरबि लिखिआ तिनी कमाइआ ॥ सचो सेवहि सचु धिआवहि सचि रते वीचारी हे ॥१०॥

गुर की सेवा मीठी लागी ॥ अनदिनु सूख सहज समाधी ॥ हरि हरि करतिआ मनु निरमलु होआ गुर की सेव पिआरी हे ॥११॥

से जन सुखीए सतिगुरि सचे लाए ॥ आपे भाणे आपि मिलाए ॥ सतिगुरि राखे से जन उबरे होर माइआ मोह खुआरी हे ॥१२॥

गुरमुखि साचा सबदि पछाता ॥ ना तिसु कुट्मबु ना तिसु माता ॥ एको एकु रविआ सभ अंतरि सभना जीआ का आधारी हे ॥१३॥

हउमै मेरा दूजा भाइआ ॥ किछु न चलै धुरि खसमि लिखि पाइआ ॥ गुर साचे ते साचु कमावहि साचै दूख निवारी हे ॥१४॥

जा तू देहि सदा सुखु पाए ॥ साचै सबदे साचु कमाए ॥ अंदरु साचा मनु तनु साचा भगति भरे भंडारी हे ॥१५॥

आपे वेखै हुकमि चलाए ॥ अपणा भाणा आपि कराए ॥ नानक नामि रते बैरागी मनु तनु रसना नामि सवारी हे ॥१६॥७॥

(राग मारू -- SGGS 1051) मारू महला ३ ॥
आपे आपु उपाइ उपंना ॥ सभ महि वरतै एकु परछंना ॥ सभना सार करे जगजीवनु जिनि अपणा आपु पछाता हे ॥१॥

जिनि ब्रहमा बिसनु महेसु उपाए ॥ सिरि सिरि धंधै आपे लाए ॥ जिसु भावै तिसु आपे मेले जिनि गुरमुखि एको जाता हे ॥२॥

आवा गउणु है संसारा ॥ माइआ मोहु बहु चितै बिकारा ॥ थिरु साचा सालाही सद ही जिनि गुर का सबदु पछाता हे ॥३॥

इकि मूलि लगे ओनी सुखु पाइआ ॥ डाली लागे तिनी जनमु गवाइआ ॥ अम्रित फल तिन जन कउ लागे जो बोलहि अम्रित बाता हे ॥४॥

हम गुण नाही किआ बोलह बोल ॥ तू सभना देखहि तोलहि तोल ॥ जिउ भावै तिउ राखहि रहणा गुरमुखि एको जाता हे ॥५॥

जा तुधु भाणा ता सची कारै लाए ॥ अवगण छोडि गुण माहि समाए ॥ गुण महि एको निरमलु साचा गुर कै सबदि पछाता हे ॥६॥

जह देखा तह एको सोई ॥ दूजी दुरमति सबदे खोई ॥ एकसु महि प्रभु एकु समाणा अपणै रंगि सद राता हे ॥७॥

काइआ कमलु है कुमलाणा ॥ मनमुखु सबदु न बुझै इआणा ॥ गुर परसादी काइआ खोजे पाए जगजीवनु दाता हे ॥८॥

कोट गही के पाप निवारे ॥ सदा हरि जीउ राखै उर धारे ॥ जो इछे सोई फलु पाए जिउ रंगु मजीठै राता हे ॥९॥

मनमुखु गिआनु कथे न होई ॥ फिरि फिरि आवै ठउर न कोई ॥ गुरमुखि गिआनु सदा सालाहे जुगि जुगि एको जाता हे ॥१०॥

मनमुखु कार करे सभि दुख सबाए ॥ अंतरि सबदु नाही किउ दरि जाए ॥ गुरमुखि सबदु वसै मनि साचा सद सेवे सुखदाता हे ॥११॥

जह देखा तू सभनी थाई ॥ पूरै गुरि सभ सोझी पाई ॥ नामो नामु धिआईऐ सदा सद इहु मनु नामे राता हे ॥१२॥

नामे राता पवितु सरीरा ॥ बिनु नावै डूबि मुए बिनु नीरा ॥ आवहि जावहि नामु नही बूझहि इकना गुरमुखि सबदु पछाता हे ॥१३॥

पूरै सतिगुरि बूझ बुझाई ॥ विणु नावै मुकति किनै न पाई ॥ नामे नामि मिलै वडिआई सहजि रहै रंगि राता हे ॥१४॥

काइआ नगरु ढहै ढहि ढेरी ॥ बिनु सबदै चूकै नही फेरी ॥ साचु सलाहे साचि समावै जिनि गुरमुखि एको जाता हे ॥१५॥

जिस नो नदरि करे सो पाए ॥ साचा सबदु वसै मनि आए ॥ नानक नामि रते निरंकारी दरि साचै साचु पछाता हे ॥१६॥८॥

(राग मारू -- SGGS 1052) मारू सोलहे ३ ॥
आपे करता सभु जिसु करणा ॥ जीअ जंत सभि तेरी सरणा ॥ आपे गुपतु वरतै सभ अंतरि गुर कै सबदि पछाता हे ॥१॥

हरि के भगति भरे भंडारा ॥ आपे बखसे सबदि वीचारा ॥ जो तुधु भावै सोई करसहि सचे सिउ मनु राता हे ॥२॥

आपे हीरा रतनु अमोलो ॥ आपे नदरी तोले तोलो ॥ जीअ जंत सभि सरणि तुमारी करि किरपा आपि पछाता हे ॥३॥

जिस नो नदरि होवै धुरि तेरी ॥ मरै न जमै चूकै फेरी ॥ साचे गुण गावै दिनु राती जुगि जुगि एको जाता हे ॥४॥

माइआ मोहि सभु जगतु उपाइआ ॥ ब्रहमा बिसनु देव सबाइआ ॥ जो तुधु भाणे से नामि लागे गिआन मती पछाता हे ॥५॥

पाप पुंन वरतै संसारा ॥ हरखु सोगु सभु दुखु है भारा ॥ गुरमुखि होवै सो सुखु पाए जिनि गुरमुखि नामु पछाता हे ॥६॥

किरतु न कोई मेटणहारा ॥ गुर कै सबदे मोख दुआरा ॥ पूरबि लिखिआ सो फलु पाइआ जिनि आपु मारि पछाता हे ॥७॥

माइआ मोहि हरि सिउ चितु न लागै ॥ दूजै भाइ घणा दुखु आगै ॥ मनमुख भरमि भुले भेखधारी अंत कालि पछुताता हे ॥८॥

हरि कै भाणै हरि गुण गाए ॥ सभि किलबिख काटे दूख सबाए ॥ हरि निरमलु निरमल है बाणी हरि सेती मनु राता हे ॥९॥

जिस नो नदरि करे सो गुण निधि पाए ॥ हउमै मेरा ठाकि रहाए ॥ गुण अवगण का एको दाता गुरमुखि विरली जाता हे ॥१०॥

मेरा प्रभु निरमलु अति अपारा ॥ आपे मेलै गुर सबदि वीचारा ॥ आपे बखसे सचु द्रिड़ाए मनु तनु साचै राता हे ॥११॥

मनु तनु मैला विचि जोति अपारा ॥ गुरमति बूझै करि वीचारा ॥ हउमै मारि सदा मनु निरमलु रसना सेवि सुखदाता हे ॥१२॥

गड़ काइआ अंदरि बहु हट बाजारा ॥ तिसु विचि नामु है अति अपारा ॥ गुर कै सबदि सदा दरि सोहै हउमै मारि पछाता हे ॥१३॥

रतनु अमोलकु अगम अपारा ॥ कीमति कवणु करे वेचारा ॥ गुर कै सबदे तोलि तोलाए अंतरि सबदि पछाता हे ॥१४॥

सिम्रिति सासत्र बहुतु बिसथारा ॥ माइआ मोहु पसरिआ पासारा ॥ मूरख पड़हि सबदु न बूझहि गुरमुखि विरलै जाता हे ॥१५॥

आपे करता करे कराए ॥ सची बाणी सचु द्रिड़ाए ॥ नानक नामु मिलै वडिआई जुगि जुगि एको जाता हे ॥१६॥९॥

(राग मारू -- SGGS 1053) मारू महला ३ ॥
सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥ सबदे दूख निवारणहारा ॥ अगमु अगोचरु कीमति नही पाई आपे अगम अथाहा हे ॥१॥

आपे सचा सचु वरताए ॥ इकि जन साचै आपे लाए ॥ साचो सेवहि साचु कमावहि नामे सचि समाहा हे ॥२॥

धुरि भगता मेले आपि मिलाए ॥ सची भगती आपे लाए ॥ साची बाणी सदा गुण गावै इसु जनमै का लाहा हे ॥३॥

गुरमुखि वणजु करहि परु आपु पछाणहि ॥ एकस बिनु को अवरु न जाणहि ॥ सचा साहु सचे वणजारे पूंजी नामु विसाहा हे ॥४॥

आपे साजे स्रिसटि उपाए ॥ विरले कउ गुर सबदु बुझाए ॥ सतिगुरु सेवहि से जन साचे काटे जम का फाहा हे ॥५॥

भंनै घड़े सवारे साजे ॥ माइआ मोहि दूजै जंत पाजे ॥ मनमुख फिरहि सदा अंधु कमावहि जम का जेवड़ा गलि फाहा हे ॥६॥

आपे बखसे गुर सेवा लाए ॥ गुरमती नामु मंनि वसाए ॥ अनदिनु नामु धिआए साचा इसु जग महि नामो लाहा हे ॥७॥

आपे सचा सची नाई ॥ गुरमुखि देवै मंनि वसाई ॥ जिन मनि वसिआ से जन सोहहि तिन सिरि चूका काहा हे ॥८॥

अगम अगोचरु कीमति नही पाई ॥ गुर परसादी मंनि वसाई ॥ सदा सबदि सालाही गुणदाता लेखा कोइ न मंगै ताहा हे ॥९॥

ब्रहमा बिसनु रुद्रु तिस की सेवा ॥ अंतु न पावहि अलख अभेवा ॥ जिन कउ नदरि करहि तू अपणी गुरमुखि अलखु लखाहा हे ॥१०॥

पूरै सतिगुरि सोझी पाई ॥ एको नामु मंनि वसाई ॥ नामु जपी तै नामु धिआई महलु पाइ गुण गाहा हे ॥११॥

सेवक सेवहि मंनि हुकमु अपारा ॥ मनमुख हुकमु न जाणहि सारा ॥ हुकमे मंने हुकमे वडिआई हुकमे वेपरवाहा हे ॥१२॥

गुर परसादी हुकमु पछाणै ॥ धावतु राखै इकतु घरि आणै ॥ नामे राता सदा बैरागी नामु रतनु मनि ताहा हे ॥१३॥

सभ जग महि वरतै एको सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सबदु सलाहहि से जन निरमल निज घरि वासा ताहा हे ॥१४॥

सदा भगत तेरी सरणाई ॥ अगम अगोचर कीमति नही पाई ॥ जिउ तुधु भावहि तिउ तू राखहि गुरमुखि नामु धिआहा हे ॥१५॥

सदा सदा तेरे गुण गावा ॥ सचे साहिब तेरै मनि भावा ॥ नानकु साचु कहै बेनंती सचु देवहु सचि समाहा हे ॥१६॥१॥१०॥

(राग मारू -- SGGS 1054) मारू महला ३ ॥
सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥ अनदिनु साचि नामि लिव लागी ॥ सदा सुखदाता रविआ घट अंतरि सबदि सचै ओमाहा हे ॥१॥

नदरि करे ता गुरू मिलाए ॥ हरि का नामु मंनि वसाए ॥ हरि मनि वसिआ सदा सुखदाता सबदे मनि ओमाहा हे ॥२॥

क्रिपा करे ता मेलि मिलाए ॥ हउमै ममता सबदि जलाए ॥ सदा मुकतु रहै इक रंगी नाही किसै नालि काहा हे ॥३॥

बिनु सतिगुर सेवे घोर अंधारा ॥ बिनु सबदै कोइ न पावै पारा ॥ जो सबदि राते महा बैरागी सो सचु सबदे लाहा हे ॥४॥

दुखु सुखु करतै धुरि लिखि पाइआ ॥ दूजा भाउ आपि वरताइआ ॥ गुरमुखि होवै सु अलिपतो वरतै मनमुख का किआ वेसाहा हे ॥५॥

से मनमुख जो सबदु न पछाणहि ॥ गुर के भै की सार न जाणहि ॥ भै बिनु किउ निरभउ सचु पाईऐ जमु काढि लएगा साहा हे ॥६॥

अफरिओ जमु मारिआ न जाई ॥ गुर कै सबदे नेड़ि न आई ॥ सबदु सुणे ता दूरहु भागै मतु मारे हरि जीउ वेपरवाहा हे ॥७॥

हरि जीउ की है सभ सिरकारा ॥ एहु जमु किआ करे विचारा ॥ हुकमी बंदा हुकमु कमावै हुकमे कढदा साहा हे ॥८॥

गुरमुखि साचै कीआ अकारा ॥ गुरमुखि पसरिआ सभु पासारा ॥ गुरमुखि होवै सो सचु बूझै सबदि सचै सुखु ताहा हे ॥९॥

गुरमुखि जाता करमि बिधाता ॥ जुग चारे गुर सबदि पछाता ॥ गुरमुखि मरै न जनमै गुरमुखि गुरमुखि सबदि समाहा हे ॥१०॥

गुरमुखि नामि सबदि सालाहे ॥ अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ एक नामि जुग चारि उधारे सबदे नाम विसाहा हे ॥११॥

गुरमुखि सांति सदा सुखु पाए ॥ गुरमुखि हिरदै नामु वसाए ॥ गुरमुखि होवै सो नामु बूझै काटे दुरमति फाहा हे ॥१२॥

गुरमुखि उपजै साचि समावै ॥ ना मरि जमै न जूनी पावै ॥ गुरमुखि सदा रहहि रंगि राते अनदिनु लैदे लाहा हे ॥१३॥

गुरमुखि भगत सोहहि दरबारे ॥ सची बाणी सबदि सवारे ॥ अनदिनु गुण गावै दिनु राती सहज सेती घरि जाहा हे ॥१४॥

सतिगुरु पूरा सबदु सुणाए ॥ अनदिनु भगति करहु लिव लाए ॥ हरि गुण गावहि सद ही निरमल निरमल गुण पातिसाहा हे ॥१५॥

गुण का दाता सचा सोई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥ नानक जनु नामु सलाहे बिगसै सो नामु बेपरवाहा हे ॥१६॥२॥११॥

(राग मारू -- SGGS 1055) मारू महला ३ ॥
हरि जीउ सेविहु अगम अपारा ॥ तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥ गुर परसादि रविआ घट अंतरि तितु घटि मति अगाहा हे ॥१॥

सभ महि वरतै एको सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सभना प्रतिपाल करे जगजीवनु देदा रिजकु स्मबाहा हे ॥२॥

पूरै सतिगुरि बूझि बुझाइआ ॥ हुकमे ही सभु जगतु उपाइआ ॥ हुकमु मंने सोई सुखु पाए हुकमु सिरि साहा पातिसाहा हे ॥३॥

सचा सतिगुरु सबदु अपारा ॥ तिस दै सबदि निसतरै संसारा ॥ आपे करता करि करि वेखै देदा सास गिराहा हे ॥४॥

कोटि मधे किसहि बुझाए ॥ गुर कै सबदि रते रंगु लाए ॥ हरि सालाहहि सदा सुखदाता हरि बखसे भगति सलाहा हे ॥५॥

सतिगुरु सेवहि से जन साचे ॥ जो मरि जमहि काचनि काचे ॥ अगम अगोचरु वेपरवाहा भगति वछलु अथाहा हे ॥६॥

सतिगुरु पूरा साचु द्रिड़ाए ॥ सचै सबदि सदा गुण गाए ॥ गुणदाता वरतै सभ अंतरि सिरि सिरि लिखदा साहा हे ॥७॥

सदा हदूरि गुरमुखि जापै ॥ सबदे सेवै सो जनु ध्रापै ॥ अनदिनु सेवहि सची बाणी सबदि सचै ओमाहा हे ॥८॥

अगिआनी अंधा बहु करम द्रिड़ाए ॥ मनहठि करम फिरि जोनी पाए ॥ बिखिआ कारणि लबु लोभु कमावहि दुरमति का दोराहा हे ॥९॥

पूरा सतिगुरु भगति द्रिड़ाए ॥ गुर कै सबदि हरि नामि चितु लाए ॥ मनि तनि हरि रविआ घट अंतरि मनि भीनै भगति सलाहा हे ॥१०॥

मेरा प्रभु साचा असुर संघारणु ॥ गुर कै सबदि भगति निसतारणु ॥ मेरा प्रभु साचा सद ही साचा सिरि साहा पातिसाहा हे ॥११॥

से भगत सचे तेरै मनि भाए ॥ दरि कीरतनु करहि गुर सबदि सुहाए ॥ साची बाणी अनदिनु गावहि निरधन का नामु वेसाहा हे ॥१२॥

जिन आपे मेलि विछोड़हि नाही ॥ गुर कै सबदि सदा सालाही ॥ सभना सिरि तू एको साहिबु सबदे नामु सलाहा हे ॥१३॥

बिनु सबदै तुधुनो कोई न जाणी ॥ तुधु आपे कथी अकथ कहाणी ॥ आपे सबदु सदा गुरु दाता हरि नामु जपि स्मबाहा हे ॥१४॥

तू आपे करता सिरजणहारा ॥ तेरा लिखिआ कोइ न मेटणहारा ॥ गुरमुखि नामु देवहि तू आपे सहसा गणत न ताहा हे ॥१५॥

भगत सचे तेरै दरवारे ॥ सबदे सेवनि भाइ पिआरे ॥ नानक नामि रते बैरागी नामे कारजु सोहा हे ॥१६॥३॥१२॥

(राग मारू -- SGGS 1056) मारू महला ३ ॥
मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥ कोइ न किस ही जेहा उपाइआ ॥ आपे फरकु करे वेखि विगसै सभि रस देही माहा हे ॥१॥

वाजै पउणु तै आपि वजाए ॥ सिव सकती देही महि पाए ॥ गुर परसादी उलटी होवै गिआन रतनु सबदु ताहा हे ॥२॥

अंधेरा चानणु आपे कीआ ॥ एको वरतै अवरु न बीआ ॥ गुर परसादी आपु पछाणै कमलु बिगसै बुधि ताहा हे ॥३॥

अपणी गहण गति आपे जाणै ॥ होरु लोकु सुणि सुणि आखि वखाणै ॥ गिआनी होवै सु गुरमुखि बूझै साची सिफति सलाहा हे ॥४॥

देही अंदरि वसतु अपारा ॥ आपे कपट खुलावणहारा ॥ गुरमुखि सहजे अम्रितु पीवै त्रिसना अगनि बुझाहा हे ॥५॥

सभि रस देही अंदरि पाए ॥ विरले कउ गुरु सबदु बुझाए ॥ अंदरु खोजे सबदु सालाहे बाहरि काहे जाहा हे ॥६॥

विणु चाखे सादु किसै न आइआ ॥ गुर कै सबदि अम्रितु पीआइआ ॥ अम्रितु पी अमरा पदु होए गुर कै सबदि रसु ताहा हे ॥७॥

आपु पछाणै सो सभि गुण जाणै ॥ गुर कै सबदि हरि नामु वखाणै ॥ अनदिनु नामि रता दिनु राती माइआ मोहु चुकाहा हे ॥८॥

गुर सेवा ते सभु किछु पाए ॥ हउमै मेरा आपु गवाए ॥ आपे क्रिपा करे सुखदाता गुर कै सबदे सोहा हे ॥९॥

गुर का सबदु अम्रित है बाणी ॥ अनदिनु हरि का नामु वखाणी ॥ हरि हरि सचा वसै घट अंतरि सो घटु निरमलु ताहा हे ॥१०॥

सेवक सेवहि सबदि सलाहहि ॥ सदा रंगि राते हरि गुण गावहि ॥ आपे बखसे सबदि मिलाए परमल वासु मनि ताहा हे ॥११॥

सबदे अकथु कथे सालाहे ॥ मेरे प्रभ साचे वेपरवाहे ॥ आपे गुणदाता सबदि मिलाए सबदै का रसु ताहा हे ॥१२॥

मनमुखु भूला ठउर न पाए ॥ जो धुरि लिखिआ सु करम कमाए ॥ बिखिआ राते बिखिआ खोजै मरि जनमै दुखु ताहा हे ॥१३॥

आपे आपि आपि सालाहे ॥ तेरे गुण प्रभ तुझ ही माहे ॥ तू आपि सचा तेरी बाणी सची आपे अलखु अथाहा हे ॥१४॥

बिनु गुर दाते कोइ न पाए ॥ लख कोटी जे करम कमाए ॥ गुर किरपा ते घट अंतरि वसिआ सबदे सचु सालाहा हे ॥१५॥

से जन मिले धुरि आपि मिलाए ॥ साची बाणी सबदि सुहाए ॥ नानक जनु गुण गावै नित साचे गुण गावह गुणी समाहा हे ॥१६॥४॥१३॥

(राग मारू -- SGGS 1057) मारू महला ३ ॥
निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥ पूरे गुर ते सोझी होई ॥ हरि रसि भीने सदा धिआइनि गुरमति सीलु संनाहा हे ॥१॥

अंदरि रंगु सदा सचिआरा ॥ गुर कै सबदि हरि नामि पिआरा ॥ नउ निधि नामु वसिआ घट अंतरि छोडिआ माइआ का लाहा हे ॥२॥

रईअति राजे दुरमति दोई ॥ बिनु सतिगुर सेवे एकु न होई ॥ एकु धिआइनि सदा सुखु पाइनि निहचलु राजु तिनाहा हे ॥३॥

आवणु जाणा रखै न कोई ॥ जमणु मरणु तिसै ते होई ॥ गुरमुखि साचा सदा धिआवहु गति मुकति तिसै ते पाहा हे ॥४॥

सचु संजमु सतिगुरू दुआरै ॥ हउमै क्रोधु सबदि निवारै ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाईऐ सीलु संतोखु सभु ताहा हे ॥५॥

हउमै मोहु उपजै संसारा ॥ सभु जगु बिनसै नामु विसारा ॥ बिनु सतिगुर सेवे नामु न पाईऐ नामु सचा जगि लाहा हे ॥६॥

सचा अमरु सबदि सुहाइआ ॥ पंच सबद मिलि वाजा वाइआ ॥ सदा कारजु सचि नामि सुहेला बिनु सबदै कारजु केहा हे ॥७॥

खिन महि हसै खिन महि रोवै ॥ दूजी दुरमति कारजु न होवै ॥ संजोगु विजोगु करतै लिखि पाए किरतु न चलै चलाहा हे ॥८॥

जीवन मुकति गुर सबदु कमाए ॥ हरि सिउ सद ही रहै समाए ॥ गुर किरपा ते मिलै वडिआई हउमै रोगु न ताहा हे ॥९॥

रस कस खाए पिंडु वधाए ॥ भेख करै गुर सबदु न कमाए ॥ अंतरि रोगु महा दुखु भारी बिसटा माहि समाहा हे ॥१०॥

बेद पड़हि पड़ि बादु वखाणहि ॥ घट महि ब्रहमु तिसु सबदि न पछाणहि ॥ गुरमुखि होवै सु ततु बिलोवै रसना हरि रसु ताहा हे ॥११॥

घरि वथु छोडहि बाहरि धावहि ॥ मनमुख अंधे सादु न पावहि ॥ अन रस राती रसना फीकी बोले हरि रसु मूलि न ताहा हे ॥१२॥

मनमुख देही भरमु भतारो ॥ दुरमति मरै नित होइ खुआरो ॥ कामि क्रोधि मनु दूजै लाइआ सुपनै सुखु न ताहा हे ॥१३॥

कंचन देही सबदु भतारो ॥ अनदिनु भोग भोगे हरि सिउ पिआरो ॥ महला अंदरि गैर महलु पाए भाणा बुझि समाहा हे ॥१४॥

आपे देवै देवणहारा ॥ तिसु आगै नही किसै का चारा ॥ आपे बखसे सबदि मिलाए तिस दा सबदु अथाहा हे ॥१५॥

जीउ पिंडु सभु है तिसु केरा ॥ सचा साहिबु ठाकुरु मेरा ॥ नानक गुरबाणी हरि पाइआ हरि जपु जापि समाहा हे ॥१६॥५॥१४॥

(राग मारू -- SGGS 1058) मारू महला ३ ॥
गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥ गुरमुखि गिआनु धिआनु आपारु ॥ गुरमुखि कार करे प्रभ भावै गुरमुखि पूरा पाइदा ॥१॥

गुरमुखि मनूआ उलटि परावै ॥ गुरमुखि बाणी नादु वजावै ॥ गुरमुखि सचि रते बैरागी निज घरि वासा पाइदा ॥२॥

गुर की साखी अम्रित भाखी ॥ सचै सबदे सचु सुभाखी ॥ सदा सचि रंगि राता मनु मेरा सचे सचि समाइदा ॥३॥

गुरमुखि मनु निरमलु सत सरि नावै ॥ मैलु न लागै सचि समावै ॥ सचो सचु कमावै सद ही सची भगति द्रिड़ाइदा ॥४॥

गुरमुखि सचु बैणी गुरमुखि सचु नैणी ॥ गुरमुखि सचु कमावै करणी ॥ सद ही सचु कहै दिनु राती अवरा सचु कहाइदा ॥५॥

गुरमुखि सची ऊतम बाणी ॥ गुरमुखि सचो सचु वखाणी ॥ गुरमुखि सद सेवहि सचो सचा गुरमुखि सबदु सुणाइदा ॥६॥

गुरमुखि होवै सु सोझी पाए ॥ हउमै माइआ भरमु गवाए ॥ गुर की पउड़ी ऊतम ऊची दरि सचै हरि गुण गाइदा ॥७॥

गुरमुखि सचु संजमु करणी सारु ॥ गुरमुखि पाए मोख दुआरु ॥ भाइ भगति सदा रंगि राता आपु गवाइ समाइदा ॥८॥

गुरमुखि होवै मनु खोजि सुणाए ॥ सचै नामि सदा लिव लाए ॥ जो तिसु भावै सोई करसी जो सचे मनि भाइदा ॥९॥

जा तिसु भावै सतिगुरू मिलाए ॥ जा तिसु भावै ता मंनि वसाए ॥ आपणै भाणै सदा रंगि राता भाणै मंनि वसाइदा ॥१०॥

मनहठि करम करे सो छीजै ॥ बहुते भेख करे नही भीजै ॥ बिखिआ राते दुखु कमावहि दुखे दुखि समाइदा ॥११॥

गुरमुखि होवै सु सुखु कमाए ॥ मरण जीवण की सोझी पाए ॥ मरणु जीवणु जो सम करि जाणै सो मेरे प्रभ भाइदा ॥१२॥

गुरमुखि मरहि सु हहि परवाणु ॥ आवण जाणा सबदु पछाणु ॥ मरै न जमै ना दुखु पाए मन ही मनहि समाइदा ॥१३॥

से वडभागी जिनी सतिगुरु पाइआ ॥ हउमै विचहु मोहु चुकाइआ ॥ मनु निरमलु फिरि मैलु न लागै दरि सचै सोभा पाइदा ॥१४॥

आपे करे कराए आपे ॥ आपे वेखै थापि उथापे ॥ गुरमुखि सेवा मेरे प्रभ भावै सचु सुणि लेखै पाइदा ॥१५॥

गुरमुखि सचो सचु कमावै ॥ गुरमुखि निरमलु मैलु न लावै ॥ नानक नामि रते वीचारी नामे नामि समाइदा ॥१६॥१॥१५॥

(राग मारू -- SGGS 1059) मारू महला ३ ॥
आपे स्रिसटि हुकमि सभ साजी ॥ आपे थापि उथापि निवाजी ॥ आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥१॥

काइआ कोटु है आकारा ॥ माइआ मोहु पसरिआ पासारा ॥ बिनु सबदै भसमै की ढेरी खेहू खेह रलाइदा ॥२॥

काइआ कंचन कोटु अपारा ॥ जिसु विचि रविआ सबदु अपारा ॥ गुरमुखि गावै सदा गुण साचे मिलि प्रीतम सुखु पाइदा ॥३॥

काइआ हरि मंदरु हरि आपि सवारे ॥ तिसु विचि हरि जीउ वसै मुरारे ॥ गुर कै सबदि वणजनि वापारी नदरी आपि मिलाइदा ॥४॥

सो सूचा जि करोधु निवारे ॥ सबदे बूझै आपु सवारे ॥ आपे करे कराए करता आपे मंनि वसाइदा ॥५॥

निरमल भगति है निराली ॥ मनु तनु धोवहि सबदि वीचारी ॥ अनदिनु सदा रहै रंगि राता करि किरपा भगति कराइदा ॥६॥

इसु मन मंदर महि मनूआ धावै ॥ सुखु पलरि तिआगि महा दुखु पावै ॥ बिनु सतिगुर भेटे ठउर न पावै आपे खेलु कराइदा ॥७॥

आपि अपर्मपरु आपि वीचारी ॥ आपे मेले करणी सारी ॥ किआ को कार करे वेचारा आपे बखसि मिलाइदा ॥८॥

आपे सतिगुरु मेले पूरा ॥ सचै सबदि महाबल सूरा ॥ आपे मेले दे वडिआई सचे सिउ चितु लाइदा ॥९॥

घर ही अंदरि साचा सोई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥ नामु निधानु वसिआ घट अंतरि रसना नामु धिआइदा ॥१०॥

दिसंतरु भवै अंतरु नही भाले ॥ माइआ मोहि बधा जमकाले ॥ जम की फासी कबहू न तूटै दूजै भाइ भरमाइदा ॥११॥

जपु तपु संजमु होरु कोई नाही ॥ जब लगु गुर का सबदु न कमाही ॥ गुर कै सबदि मिलिआ सचु पाइआ सचे सचि समाइदा ॥१२॥

काम करोधु सबल संसारा ॥ बहु करम कमावहि सभु दुख का पसारा ॥ सतिगुर सेवहि से सुखु पावहि सचै सबदि मिलाइदा ॥१३॥

पउणु पाणी है बैसंतरु ॥ माइआ मोहु वरतै सभ अंतरि ॥ जिनि कीते जा तिसै पछाणहि माइआ मोहु चुकाइदा ॥१४॥

इकि माइआ मोहि गरबि विआपे ॥ हउमै होइ रहे है आपे ॥ जमकालै की खबरि न पाई अंति गइआ पछुताइदा ॥१५॥

जिनि उपाए सो बिधि जाणै ॥ गुरमुखि देवै सबदु पछाणै ॥ नानक दासु कहै बेनंती सचि नामि चितु लाइदा ॥१६॥२॥१६॥

(राग मारू -- SGGS 1060) मारू महला ३ ॥
आदि जुगादि दइआपति दाता ॥ पूरे गुर कै सबदि पछाता ॥ तुधुनो सेवहि से तुझहि समावहि तू आपे मेलि मिलाइदा ॥१॥

अगम अगोचरु कीमति नही पाई ॥ जीअ जंत तेरी सरणाई ॥ जिउ तुधु भावै तिवै चलावहि तू आपे मारगि पाइदा ॥२॥

है भी साचा होसी सोई ॥ आपे साजे अवरु न कोई ॥ सभना सार करे सुखदाता आपे रिजकु पहुचाइदा ॥३॥

अगम अगोचरु अलख अपारा ॥ कोइ न जाणै तेरा परवारा ॥ आपणा आपु पछाणहि आपे गुरमती आपि बुझाइदा ॥४॥

पाताल पुरीआ लोअ आकारा ॥ तिसु विचि वरतै हुकमु करारा ॥ हुकमे साजे हुकमे ढाहे हुकमे मेलि मिलाइदा ॥५॥

हुकमै बूझै सु हुकमु सलाहे ॥ अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ जेही मति देहि सो होवै तू आपे सबदि बुझाइदा ॥६॥

अनदिनु आरजा छिजदी जाए ॥ रैणि दिनसु दुइ साखी आए ॥ मनमुखु अंधु न चेतै मूड़ा सिर ऊपरि कालु रूआइदा ॥७॥

मनु तनु सीतलु गुर चरणी लागा ॥ अंतरि भरमु गइआ भउ भागा ॥ सदा अनंदु सचे गुण गावहि सचु बाणी बोलाइदा ॥८॥

जिनि तू जाता करम बिधाता ॥ पूरै भागि गुर सबदि पछाता ॥ जति पति सचु सचा सचु सोई हउमै मारि मिलाइदा ॥९॥

मनु कठोरु दूजै भाइ लागा ॥ भरमे भूला फिरै अभागा ॥ करमु होवै ता सतिगुरु सेवे सहजे ही सुखु पाइदा ॥१०॥

लख चउरासीह आपि उपाए ॥ मानस जनमि गुर भगति द्रिड़ाए ॥ बिनु भगती बिसटा विचि वासा बिसटा विचि फिरि पाइदा ॥११॥

करमु होवै गुरु भगति द्रिड़ाए ॥ विणु करमा किउ पाइआ जाए ॥ आपे करे कराए करता जिउ भावै तिवै चलाइदा ॥१२॥

सिम्रिति सासत अंतु न जाणै ॥ मूरखु अंधा ततु न पछाणै ॥ आपे करे कराए करता आपे भरमि भुलाइदा ॥१३॥

सभु किछु आपे आपि कराए ॥ आपे सिरि सिरि धंधै लाए ॥ आपे थापि उथापे वेखै गुरमुखि आपि बुझाइदा ॥१४॥

सचा साहिबु गहिर ग्मभीरा ॥ सदा सलाही ता मनु धीरा ॥ अगम अगोचरु कीमति नही पाई गुरमुखि मंनि वसाइदा ॥१५॥

आपि निरालमु होर धंधै लोई ॥ गुर परसादी बूझै कोई ॥ नानक नामु वसै घट अंतरि गुरमती मेलि मिलाइदा ॥१६॥३॥१७॥


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