Pt 13 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 13 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग रामकली -- SGGS 908) रामकली महला ३ असटपदीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सरमै दीआ मुंद्रा कंनी पाइ जोगी खिंथा करि तू दइआ ॥ आवणु जाणु बिभूति लाइ जोगी ता तीनि भवण जिणि लइआ ॥१॥

ऐसी किंगुरी वजाइ जोगी ॥ जितु किंगुरी अनहदु वाजै हरि सिउ रहै लिव लाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सतु संतोखु पतु करि झोली जोगी अम्रित नामु भुगति पाई ॥ धिआन का करि डंडा जोगी सिंङी सुरति वजाई ॥२॥

मनु द्रिड़ु करि आसणि बैसु जोगी ता तेरी कलपणा जाई ॥ काइआ नगरी महि मंगणि चड़हि जोगी ता नामु पलै पाई ॥३॥

इतु किंगुरी धिआनु न लागै जोगी ना सचु पलै पाइ ॥ इतु किंगुरी सांति न आवै जोगी अभिमानु न विचहु जाइ ॥४॥

भउ भाउ दुइ पत लाइ जोगी इहु सरीरु करि डंडी ॥ गुरमुखि होवहि ता तंती वाजै इन बिधि त्रिसना खंडी ॥५॥

हुकमु बुझै सो जोगी कहीऐ एकस सिउ चितु लाए ॥ सहसा तूटै निरमलु होवै जोग जुगति इव पाए ॥६॥

नदरी आवदा सभु किछु बिनसै हरि सेती चितु लाइ ॥ सतिगुर नालि तेरी भावनी लागै ता इह सोझी पाइ ॥७॥

एहु जोगु न होवै जोगी जि कुट्मबु छोडि परभवणु करहि ॥ ग्रिह सरीर महि हरि हरि नामु गुर परसादी अपणा हरि प्रभु लहहि ॥८॥

इहु जगतु मिटी का पुतला जोगी इसु महि रोगु वडा त्रिसना माइआ ॥ अनेक जतन भेख करे जोगी रोगु न जाइ गवाइआ ॥९॥

हरि का नामु अउखधु है जोगी जिस नो मंनि वसाए ॥ गुरमुखि होवै सोई बूझै जोग जुगति सो पाए ॥१०॥

जोगै का मारगु बिखमु है जोगी जिस नो नदरि करे सो पाए ॥ अंतरि बाहरि एको वेखै विचहु भरमु चुकाए ॥११॥

विणु वजाई किंगुरी वाजै जोगी सा किंगुरी वजाइ ॥ कहै नानकु मुकति होवहि जोगी साचे रहहि समाइ ॥१२॥१॥१०॥

(राग रामकली -- SGGS 909) रामकली महला ३ ॥
भगति खजाना गुरमुखि जाता सतिगुरि बूझि बुझाई ॥१॥

संतहु गुरमुखि देइ वडिआई ॥१॥ रहाउ ॥

सचि रहहु सदा सहजु सुखु उपजै कामु क्रोधु विचहु जाई ॥२॥

आपु छोडि नाम लिव लागी ममता सबदि जलाई ॥३॥

जिस ते उपजै तिस ते बिनसै अंते नामु सखाई ॥४॥

सदा हजूरि दूरि नह देखहु रचना जिनि रचाई ॥५॥

सचा सबदु रवै घट अंतरि सचे सिउ लिव लाई ॥६॥

सतसंगति महि नामु निरमोलकु वडै भागि पाइआ जाई ॥७॥

भरमि न भूलहु सतिगुरु सेवहु मनु राखहु इक ठाई ॥८॥

बिनु नावै सभ भूली फिरदी बिरथा जनमु गवाई ॥९॥

जोगी जुगति गवाई हंढै पाखंडि जोगु न पाई ॥१०॥

सिव नगरी महि आसणि बैसै गुर सबदी जोगु पाई ॥११॥

धातुर बाजी सबदि निवारे नामु वसै मनि आई ॥१२॥

एहु सरीरु सरवरु है संतहु इसनानु करे लिव लाई ॥१३॥

नामि इसनानु करहि से जन निरमल सबदे मैलु गवाई ॥१४॥

त्रै गुण अचेत नामु चेतहि नाही बिनु नावै बिनसि जाई ॥१५॥

ब्रहमा बिसनु महेसु त्रै मूरति त्रिगुणि भरमि भुलाई ॥१६॥

गुर परसादी त्रिकुटी छूटै चउथै पदि लिव लाई ॥१७॥

पंडित पड़हि पड़ि वादु वखाणहि तिंना बूझ न पाई ॥१८॥

बिखिआ माते भरमि भुलाए उपदेसु कहहि किसु भाई ॥१९॥

भगत जना की ऊतम बाणी जुगि जुगि रही समाई ॥२०॥

बाणी लागै सो गति पाए सबदे सचि समाई ॥२१॥

काइआ नगरी सबदे खोजे नामु नवं निधि पाई ॥२२॥

मनसा मारि मनु सहजि समाणा बिनु रसना उसतति कराई ॥२३॥

लोइण देखि रहे बिसमादी चितु अदिसटि लगाई ॥२४॥

अदिसटु सदा रहै निरालमु जोती जोति मिलाई ॥२५॥

हउ गुरु सालाही सदा आपणा जिनि साची बूझ बुझाई ॥२६॥

नानकु एक कहै बेनंती नावहु गति पति पाई ॥२७॥२॥११॥

(राग रामकली -- SGGS 910) रामकली महला ३ ॥
हरि की पूजा दुल्मभ है संतहु कहणा कछू न जाई ॥१॥

संतहु गुरमुखि पूरा पाई ॥ नामो पूज कराई ॥१॥ रहाउ ॥

हरि बिनु सभु किछु मैला संतहु किआ हउ पूज चड़ाई ॥२॥

हरि साचे भावै सा पूजा होवै भाणा मनि वसाई ॥३॥

पूजा करै सभु लोकु संतहु मनमुखि थाइ न पाई ॥४॥

सबदि मरै मनु निरमलु संतहु एह पूजा थाइ पाई ॥५॥

पवित पावन से जन साचे एक सबदि लिव लाई ॥६॥

बिनु नावै होर पूज न होवी भरमि भुली लोकाई ॥७॥

गुरमुखि आपु पछाणै संतहु राम नामि लिव लाई ॥८॥

आपे निरमलु पूज कराए गुर सबदी थाइ पाई ॥९॥

पूजा करहि परु बिधि नही जाणहि दूजै भाइ मलु लाई ॥१०॥

गुरमुखि होवै सु पूजा जाणै भाणा मनि वसाई ॥११॥

भाणे ते सभि सुख पावै संतहु अंते नामु सखाई ॥१२॥

अपणा आपु न पछाणहि संतहु कूड़ि करहि वडिआई ॥१३॥

पाखंडि कीनै जमु नही छोडै लै जासी पति गवाई ॥१४॥

जिन अंतरि सबदु आपु पछाणहि गति मिति तिन ही पाई ॥१५॥

एहु मनूआ सुंन समाधि लगावै जोती जोति मिलाई ॥१६॥

सुणि सुणि गुरमुखि नामु वखाणहि सतसंगति मेलाई ॥१७॥

गुरमुखि गावै आपु गवावै दरि साचै सोभा पाई ॥१८॥

साची बाणी सचु वखाणै सचि नामि लिव लाई ॥१९॥

भै भंजनु अति पाप निखंजनु मेरा प्रभु अंति सखाई ॥२०॥

सभु किछु आपे आपि वरतै नानक नामि वडिआई ॥२१॥३॥१२॥

(राग रामकली -- SGGS 910) रामकली महला ३ ॥
हम कुचल कुचील अति अभिमानी मिलि सबदे मैलु उतारी ॥१॥

संतहु गुरमुखि नामि निसतारी ॥ सचा नामु वसिआ घट अंतरि करतै आपि सवारी ॥१॥ रहाउ ॥

पारस परसे फिरि पारसु होए हरि जीउ अपणी किरपा धारी ॥२॥

इकि भेख करहि फिरहि अभिमानी तिन जूऐ बाजी हारी ॥३॥

इकि अनदिनु भगति करहि दिनु राती राम नामु उरि धारी ॥४॥

अनदिनु राते सहजे माते सहजे हउमै मारी ॥५॥

भै बिनु भगति न होई कब ही भै भाइ भगति सवारी ॥६॥

माइआ मोहु सबदि जलाइआ गिआनि तति बीचारी ॥७॥

आपे आपि कराए करता आपे बखसि भंडारी ॥८॥

तिस किआ गुणा का अंतु न पाइआ हउ गावा सबदि वीचारी ॥९॥

हरि जीउ जपी हरि जीउ सालाही विचहु आपु निवारी ॥१०॥

नामु पदारथु गुर ते पाइआ अखुट सचे भंडारी ॥११॥

अपणिआ भगता नो आपे तुठा अपणी किरपा करि कल धारी ॥१२॥

तिन साचे नाम की सदा भुख लागी गावनि सबदि वीचारी ॥१३॥

जीउ पिंडु सभु किछु है तिस का आखणु बिखमु बीचारी ॥१४॥

सबदि लगे सेई जन निसतरे भउजलु पारि उतारी ॥१५॥

बिनु हरि साचे को पारि न पावै बूझै को वीचारी ॥१६॥

जो धुरि लिखिआ सोई पाइआ मिलि हरि सबदि सवारी ॥१७॥

काइआ कंचनु सबदे राती साचै नाइ पिआरी ॥१८॥

काइआ अम्रिति रही भरपूरे पाईऐ सबदि वीचारी ॥१९॥

जो प्रभु खोजहि सेई पावहि होरि फूटि मूए अहंकारी ॥२०॥

बादी बिनसहि सेवक सेवहि गुर कै हेति पिआरी ॥२१॥

सो जोगी ततु गिआनु बीचारे हउमै त्रिसना मारी ॥२२॥

सतिगुरु दाता तिनै पछाता जिस नो क्रिपा तुमारी ॥२३॥

सतिगुरु न सेवहि माइआ लागे डूबि मूए अहंकारी ॥२४॥

जिचरु अंदरि सासु तिचरु सेवा कीचै जाइ मिलीऐ राम मुरारी ॥२५॥

अनदिनु जागत रहै दिनु राती अपने प्रिअ प्रीति पिआरी ॥२६॥

तनु मनु वारी वारि घुमाई अपने गुर विटहु बलिहारी ॥२७॥

माइआ मोहु बिनसि जाइगा उबरे सबदि वीचारी ॥२८॥

आपि जगाए सेई जागे गुर कै सबदि वीचारी ॥२९॥

नानक सेई मूए जि नामु न चेतहि भगत जीवे वीचारी ॥३०॥४॥१३॥

(राग रामकली -- SGGS 911) रामकली महला ३ ॥
नामु खजाना गुर ते पाइआ त्रिपति रहे आघाई ॥१॥

संतहु गुरमुखि मुकति गति पाई ॥ एकु नामु वसिआ घट अंतरि पूरे की वडिआई ॥१॥ रहाउ ॥

आपे करता आपे भुगता देदा रिजकु सबाई ॥२॥

जो किछु करणा सो करि रहिआ अवरु न करणा जाई ॥३॥

आपे साजे स्रिसटि उपाए सिरि सिरि धंधै लाई ॥४॥

तिसहि सरेवहु ता सुखु पावहु सतिगुरि मेलि मिलाई ॥५॥

आपणा आपु आपि उपाए अलखु न लखणा जाई ॥६॥

आपे मारि जीवाले आपे तिस नो तिलु न तमाई ॥७॥

इकि दाते इकि मंगते कीते आपे भगति कराई ॥८॥

से वडभागी जिनी एको जाता सचे रहे समाई ॥९॥

आपि सरूपु सिआणा आपे कीमति कहणु न जाई ॥१०॥

आपे दुखु सुखु पाए अंतरि आपे भरमि भुलाई ॥११॥

वडा दाता गुरमुखि जाता निगुरी अंध फिरै लोकाई ॥१२॥

जिनी चाखिआ तिना सादु आइआ सतिगुरि बूझ बुझाई ॥१३॥

इकना नावहु आपि भुलाए इकना गुरमुखि देइ बुझाई ॥१४॥

सदा सदा सालाहिहु संतहु तिस दी वडी वडिआई ॥१५॥

तिसु बिनु अवरु न कोई राजा करि तपावसु बणत बणाई ॥१६॥

निआउ तिसै का है सद साचा विरले हुकमु मनाई ॥१७॥

तिस नो प्राणी सदा धिआवहु जिनि गुरमुखि बणत बणाई ॥१८॥

सतिगुर भेटै सो जनु सीझै जिसु हिरदै नामु वसाई ॥१९॥

सचा आपि सदा है साचा बाणी सबदि सुणाई ॥२०॥

नानक सुणि वेखि रहिआ विसमादु मेरा प्रभु रविआ स्रब थाई ॥२१॥५॥१४॥

(राग रामकली -- SGGS 917) रामकली महला ३ अनंदु
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥ सतिगुरु त पाइआ सहज सेती मनि वजीआ वाधाईआ ॥ राग रतन परवार परीआ सबद गावण आईआ ॥ सबदो त गावहु हरी केरा मनि जिनी वसाइआ ॥ कहै नानकु अनंदु होआ सतिगुरू मै पाइआ ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 917) ए मन मेरिआ तू सदा रहु हरि नाले ॥ हरि नालि रहु तू मंन मेरे दूख सभि विसारणा ॥ अंगीकारु ओहु करे तेरा कारज सभि सवारणा ॥ सभना गला समरथु सुआमी सो किउ मनहु विसारे ॥ कहै नानकु मंन मेरे सदा रहु हरि नाले ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 917) साचे साहिबा किआ नाही घरि तेरै ॥ घरि त तेरै सभु किछु है जिसु देहि सु पावए ॥ सदा सिफति सलाह तेरी नामु मनि वसावए ॥ नामु जिन कै मनि वसिआ वाजे सबद घनेरे ॥ कहै नानकु सचे साहिब किआ नाही घरि तेरै ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 917) साचा नामु मेरा आधारो ॥ साचु नामु अधारु मेरा जिनि भुखा सभि गवाईआ ॥ करि सांति सुख मनि आइ वसिआ जिनि इछा सभि पुजाईआ ॥ सदा कुरबाणु कीता गुरू विटहु जिस दीआ एहि वडिआईआ ॥ कहै नानकु सुणहु संतहु सबदि धरहु पिआरो ॥ साचा नामु मेरा आधारो ॥४॥

(राग रामकली -- SGGS 917) वाजे पंच सबद तितु घरि सभागै ॥ घरि सभागै सबद वाजे कला जितु घरि धारीआ ॥ पंच दूत तुधु वसि कीते कालु कंटकु मारिआ ॥ धुरि करमि पाइआ तुधु जिन कउ सि नामि हरि कै लागे ॥ कहै नानकु तह सुखु होआ तितु घरि अनहद वाजे ॥५॥

(राग रामकली -- SGGS 917) साची लिवै बिनु देह निमाणी ॥ देह निमाणी लिवै बाझहु किआ करे वेचारीआ ॥ तुधु बाझु समरथ कोइ नाही क्रिपा करि बनवारीआ ॥ एस नउ होरु थाउ नाही सबदि लागि सवारीआ ॥ कहै नानकु लिवै बाझहु किआ करे वेचारीआ ॥६॥

(राग रामकली -- SGGS 917) आनंदु आनंदु सभु को कहै आनंदु गुरू ते जाणिआ ॥ जाणिआ आनंदु सदा गुर ते क्रिपा करे पिआरिआ ॥ करि किरपा किलविख कटे गिआन अंजनु सारिआ ॥ अंदरहु जिन का मोहु तुटा तिन का सबदु सचै सवारिआ ॥ कहै नानकु एहु अनंदु है आनंदु गुर ते जाणिआ ॥७॥

(राग रामकली -- SGGS 918) बाबा जिसु तू देहि सोई जनु पावै ॥ पावै त सो जनु देहि जिस नो होरि किआ करहि वेचारिआ ॥ इकि भरमि भूले फिरहि दह दिसि इकि नामि लागि सवारिआ ॥ गुर परसादी मनु भइआ निरमलु जिना भाणा भावए ॥ कहै नानकु जिसु देहि पिआरे सोई जनु पावए ॥८॥

(राग रामकली -- SGGS 918) आवहु संत पिआरिहो अकथ की करह कहाणी ॥ करह कहाणी अकथ केरी कितु दुआरै पाईऐ ॥ तनु मनु धनु सभु सउपि गुर कउ हुकमि मंनिऐ पाईऐ ॥ हुकमु मंनिहु गुरू केरा गावहु सची बाणी ॥ कहै नानकु सुणहु संतहु कथिहु अकथ कहाणी ॥९॥

(राग रामकली -- SGGS 918) ए मन चंचला चतुराई किनै न पाइआ ॥ चतुराई न पाइआ किनै तू सुणि मंन मेरिआ ॥ एह माइआ मोहणी जिनि एतु भरमि भुलाइआ ॥ माइआ त मोहणी तिनै कीती जिनि ठगउली पाईआ ॥ कुरबाणु कीता तिसै विटहु जिनि मोहु मीठा लाइआ ॥ कहै नानकु मन चंचल चतुराई किनै न पाइआ ॥१०॥

(राग रामकली -- SGGS 918) ए मन पिआरिआ तू सदा सचु समाले ॥ एहु कुट्मबु तू जि देखदा चलै नाही तेरै नाले ॥ साथि तेरै चलै नाही तिसु नालि किउ चितु लाईऐ ॥ ऐसा कमु मूले न कीचै जितु अंति पछोताईऐ ॥ सतिगुरू का उपदेसु सुणि तू होवै तेरै नाले ॥ कहै नानकु मन पिआरे तू सदा सचु समाले ॥११॥

(राग रामकली -- SGGS 918) अगम अगोचरा तेरा अंतु न पाइआ ॥ अंतो न पाइआ किनै तेरा आपणा आपु तू जाणहे ॥ जीअ जंत सभि खेलु तेरा किआ को आखि वखाणए ॥ आखहि त वेखहि सभु तूहै जिनि जगतु उपाइआ ॥ कहै नानकु तू सदा अगमु है तेरा अंतु न पाइआ ॥१२॥

(राग रामकली -- SGGS 918) सुरि नर मुनि जन अम्रितु खोजदे सु अम्रितु गुर ते पाइआ ॥ पाइआ अम्रितु गुरि क्रिपा कीनी सचा मनि वसाइआ ॥ जीअ जंत सभि तुधु उपाए इकि वेखि परसणि आइआ ॥ लबु लोभु अहंकारु चूका सतिगुरू भला भाइआ ॥ कहै नानकु जिस नो आपि तुठा तिनि अम्रितु गुर ते पाइआ ॥१३॥

(राग रामकली -- SGGS 918) भगता की चाल निराली ॥ चाला निराली भगताह केरी बिखम मारगि चलणा ॥ लबु लोभु अहंकारु तजि त्रिसना बहुतु नाही बोलणा ॥ खंनिअहु तिखी वालहु निकी एतु मारगि जाणा ॥ गुर परसादी जिनी आपु तजिआ हरि वासना समाणी ॥ कहै नानकु चाल भगता जुगहु जुगु निराली ॥१४॥

(राग रामकली -- SGGS 919) जिउ तू चलाइहि तिव चलह सुआमी होरु किआ जाणा गुण तेरे ॥ जिव तू चलाइहि तिवै चलह जिना मारगि पावहे ॥ करि किरपा जिन नामि लाइहि सि हरि हरि सदा धिआवहे ॥ जिस नो कथा सुणाइहि आपणी सि गुरदुआरै सुखु पावहे ॥ कहै नानकु सचे साहिब जिउ भावै तिवै चलावहे ॥१५॥

(राग रामकली -- SGGS 919) एहु सोहिला सबदु सुहावा ॥ सबदो सुहावा सदा सोहिला सतिगुरू सुणाइआ ॥ एहु तिन कै मंनि वसिआ जिन धुरहु लिखिआ आइआ ॥ इकि फिरहि घनेरे करहि गला गली किनै न पाइआ ॥ कहै नानकु सबदु सोहिला सतिगुरू सुणाइआ ॥१६॥

(राग रामकली -- SGGS 919) पवितु होए से जना जिनी हरि धिआइआ ॥ हरि धिआइआ पवितु होए गुरमुखि जिनी धिआइआ ॥ पवितु माता पिता कुट्मब सहित सिउ पवितु संगति सबाईआ ॥ कहदे पवितु सुणदे पवितु से पवितु जिनी मंनि वसाइआ ॥ कहै नानकु से पवितु जिनी गुरमुखि हरि हरि धिआइआ ॥१७॥

(राग रामकली -- SGGS 919) करमी सहजु न ऊपजै विणु सहजै सहसा न जाइ ॥ नह जाइ सहसा कितै संजमि रहे करम कमाए ॥ सहसै जीउ मलीणु है कितु संजमि धोता जाए ॥ मंनु धोवहु सबदि लागहु हरि सिउ रहहु चितु लाइ ॥ कहै नानकु गुर परसादी सहजु उपजै इहु सहसा इव जाइ ॥१८॥

(राग रामकली -- SGGS 919) जीअहु मैले बाहरहु निरमल ॥ बाहरहु निरमल जीअहु त मैले तिनी जनमु जूऐ हारिआ ॥ एह तिसना वडा रोगु लगा मरणु मनहु विसारिआ ॥ वेदा महि नामु उतमु सो सुणहि नाही फिरहि जिउ बेतालिआ ॥ कहै नानकु जिन सचु तजिआ कूड़े लागे तिनी जनमु जूऐ हारिआ ॥१९॥

(राग रामकली -- SGGS 919) जीअहु निरमल बाहरहु निरमल ॥ बाहरहु त निरमल जीअहु निरमल सतिगुर ते करणी कमाणी ॥ कूड़ की सोइ पहुचै नाही मनसा सचि समाणी ॥ जनमु रतनु जिनी खटिआ भले से वणजारे ॥ कहै नानकु जिन मंनु निरमलु सदा रहहि गुर नाले ॥२०॥

(राग रामकली -- SGGS 919) जे को सिखु गुरू सेती सनमुखु होवै ॥ होवै त सनमुखु सिखु कोई जीअहु रहै गुर नाले ॥ गुर के चरन हिरदै धिआए अंतर आतमै समाले ॥ आपु छडि सदा रहै परणै गुर बिनु अवरु न जाणै कोए ॥ कहै नानकु सुणहु संतहु सो सिखु सनमुखु होए ॥२१॥

(राग रामकली -- SGGS 920) जे को गुर ते वेमुखु होवै बिनु सतिगुर मुकति न पावै ॥ पावै मुकति न होर थै कोई पुछहु बिबेकीआ जाए ॥ अनेक जूनी भरमि आवै विणु सतिगुर मुकति न पाए ॥ फिरि मुकति पाए लागि चरणी सतिगुरू सबदु सुणाए ॥ कहै नानकु वीचारि देखहु विणु सतिगुर मुकति न पाए ॥२२॥

(राग रामकली -- SGGS 920) आवहु सिख सतिगुरू के पिआरिहो गावहु सची बाणी ॥ बाणी त गावहु गुरू केरी बाणीआ सिरि बाणी ॥ जिन कउ नदरि करमु होवै हिरदै तिना समाणी ॥ पीवहु अम्रितु सदा रहहु हरि रंगि जपिहु सारिगपाणी ॥ कहै नानकु सदा गावहु एह सची बाणी ॥२३॥

(राग रामकली -- SGGS 920) सतिगुरू बिना होर कची है बाणी ॥ बाणी त कची सतिगुरू बाझहु होर कची बाणी ॥ कहदे कचे सुणदे कचे कचीं आखि वखाणी ॥ हरि हरि नित करहि रसना कहिआ कछू न जाणी ॥ चितु जिन का हिरि लइआ माइआ बोलनि पए रवाणी ॥ कहै नानकु सतिगुरू बाझहु होर कची बाणी ॥२४॥

(राग रामकली -- SGGS 920) गुर का सबदु रतंनु है हीरे जितु जड़ाउ ॥ सबदु रतनु जितु मंनु लागा एहु होआ समाउ ॥ सबद सेती मनु मिलिआ सचै लाइआ भाउ ॥ आपे हीरा रतनु आपे जिस नो देइ बुझाइ ॥ कहै नानकु सबदु रतनु है हीरा जितु जड़ाउ ॥२५॥

(राग रामकली -- SGGS 920) सिव सकति आपि उपाइ कै करता आपे हुकमु वरताए ॥ हुकमु वरताए आपि वेखै गुरमुखि किसै बुझाए ॥ तोड़े बंधन होवै मुकतु सबदु मंनि वसाए ॥ गुरमुखि जिस नो आपि करे सु होवै एकस सिउ लिव लाए ॥ कहै नानकु आपि करता आपे हुकमु बुझाए ॥२६॥

(राग रामकली -- SGGS 920) सिम्रिति सासत्र पुंन पाप बीचारदे ततै सार न जाणी ॥ ततै सार न जाणी गुरू बाझहु ततै सार न जाणी ॥ तिही गुणी संसारु भ्रमि सुता सुतिआ रैणि विहाणी ॥ गुर किरपा ते से जन जागे जिना हरि मनि वसिआ बोलहि अम्रित बाणी ॥ कहै नानकु सो ततु पाए जिस नो अनदिनु हरि लिव लागै जागत रैणि विहाणी ॥२७॥

(राग रामकली -- SGGS 920) माता के उदर महि प्रतिपाल करे सो किउ मनहु विसारीऐ ॥ मनहु किउ विसारीऐ एवडु दाता जि अगनि महि आहारु पहुचावए ॥ ओस नो किहु पोहि न सकी जिस नउ आपणी लिव लावए ॥ आपणी लिव आपे लाए गुरमुखि सदा समालीऐ ॥ कहै नानकु एवडु दाता सो किउ मनहु विसारीऐ ॥२८॥

(राग रामकली -- SGGS 921) जैसी अगनि उदर महि तैसी बाहरि माइआ ॥ माइआ अगनि सभ इको जेही करतै खेलु रचाइआ ॥ जा तिसु भाणा ता जमिआ परवारि भला भाइआ ॥ लिव छुड़की लगी त्रिसना माइआ अमरु वरताइआ ॥ एह माइआ जितु हरि विसरै मोहु उपजै भाउ दूजा लाइआ ॥ कहै नानकु गुर परसादी जिना लिव लागी तिनी विचे माइआ पाइआ ॥२९॥

(राग रामकली -- SGGS 921) हरि आपि अमुलकु है मुलि न पाइआ जाइ ॥ मुलि न पाइआ जाइ किसै विटहु रहे लोक विललाइ ॥ ऐसा सतिगुरु जे मिलै तिस नो सिरु सउपीऐ विचहु आपु जाइ ॥ जिस दा जीउ तिसु मिलि रहै हरि वसै मनि आइ ॥ हरि आपि अमुलकु है भाग तिना के नानका जिन हरि पलै पाइ ॥३०॥

(राग रामकली -- SGGS 921) हरि रासि मेरी मनु वणजारा ॥ हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ॥ हरि हरि नित जपिहु जीअहु लाहा खटिहु दिहाड़ी ॥ एहु धनु तिना मिलिआ जिन हरि आपे भाणा ॥ कहै नानकु हरि रासि मेरी मनु होआ वणजारा ॥३१॥

(राग रामकली -- SGGS 921) ए रसना तू अन रसि राचि रही तेरी पिआस न जाइ ॥ पिआस न जाइ होरतु कितै जिचरु हरि रसु पलै न पाइ ॥ हरि रसु पाइ पलै पीऐ हरि रसु बहुड़ि न त्रिसना लागै आइ ॥ एहु हरि रसु करमी पाईऐ सतिगुरु मिलै जिसु आइ ॥ कहै नानकु होरि अन रस सभि वीसरे जा हरि वसै मनि आइ ॥३२॥

(राग रामकली -- SGGS 921) ए सरीरा मेरिआ हरि तुम महि जोति रखी ता तू जग महि आइआ ॥ हरि जोति रखी तुधु विचि ता तू जग महि आइआ ॥ हरि आपे माता आपे पिता जिनि जीउ उपाइ जगतु दिखाइआ ॥ गुर परसादी बुझिआ ता चलतु होआ चलतु नदरी आइआ ॥ कहै नानकु स्रिसटि का मूलु रचिआ जोति राखी ता तू जग महि आइआ ॥३३॥

(राग रामकली -- SGGS 921) मनि चाउ भइआ प्रभ आगमु सुणिआ ॥ हरि मंगलु गाउ सखी ग्रिहु मंदरु बणिआ ॥ हरि गाउ मंगलु नित सखीए सोगु दूखु न विआपए ॥ गुर चरन लागे दिन सभागे आपणा पिरु जापए ॥ अनहत बाणी गुर सबदि जाणी हरि नामु हरि रसु भोगो ॥ कहै नानकु प्रभु आपि मिलिआ करण कारण जोगो ॥३४॥

(राग रामकली -- SGGS 922) ए सरीरा मेरिआ इसु जग महि आइ कै किआ तुधु करम कमाइआ ॥ कि करम कमाइआ तुधु सरीरा जा तू जग महि आइआ ॥ जिनि हरि तेरा रचनु रचिआ सो हरि मनि न वसाइआ ॥ गुर परसादी हरि मंनि वसिआ पूरबि लिखिआ पाइआ ॥ कहै नानकु एहु सरीरु परवाणु होआ जिनि सतिगुर सिउ चितु लाइआ ॥३५॥

(राग रामकली -- SGGS 922) ए नेत्रहु मेरिहो हरि तुम महि जोति धरी हरि बिनु अवरु न देखहु कोई ॥ हरि बिनु अवरु न देखहु कोई नदरी हरि निहालिआ ॥ एहु विसु संसारु तुम देखदे एहु हरि का रूपु है हरि रूपु नदरी आइआ ॥ गुर परसादी बुझिआ जा वेखा हरि इकु है हरि बिनु अवरु न कोई ॥ कहै नानकु एहि नेत्र अंध से सतिगुरि मिलिऐ दिब द्रिसटि होई ॥३६॥

(राग रामकली -- SGGS 922) ए स्रवणहु मेरिहो साचै सुनणै नो पठाए ॥ साचै सुनणै नो पठाए सरीरि लाए सुणहु सति बाणी ॥ जितु सुणी मनु तनु हरिआ होआ रसना रसि समाणी ॥ सचु अलख विडाणी ता की गति कही न जाए ॥ कहै नानकु अम्रित नामु सुणहु पवित्र होवहु साचै सुनणै नो पठाए ॥३७॥

(राग रामकली -- SGGS 922) हरि जीउ गुफा अंदरि रखि कै वाजा पवणु वजाइआ ॥ वजाइआ वाजा पउण नउ दुआरे परगटु कीए दसवा गुपतु रखाइआ ॥ गुरदुआरै लाइ भावनी इकना दसवा दुआरु दिखाइआ ॥ तह अनेक रूप नाउ नव निधि तिस दा अंतु न जाई पाइआ ॥ कहै नानकु हरि पिआरै जीउ गुफा अंदरि रखि कै वाजा पवणु वजाइआ ॥३८॥

(राग रामकली -- SGGS 922) एहु साचा सोहिला साचै घरि गावहु ॥ गावहु त सोहिला घरि साचै जिथै सदा सचु धिआवहे ॥ सचो धिआवहि जा तुधु भावहि गुरमुखि जिना बुझावहे ॥ इहु सचु सभना का खसमु है जिसु बखसे सो जनु पावहे ॥ कहै नानकु सचु सोहिला सचै घरि गावहे ॥३९॥

(राग रामकली -- SGGS 922) अनदु सुणहु वडभागीहो सगल मनोरथ पूरे ॥ पारब्रहमु प्रभु पाइआ उतरे सगल विसूरे ॥ दूख रोग संताप उतरे सुणी सची बाणी ॥ संत साजन भए सरसे पूरे गुर ते जाणी ॥ सुणते पुनीत कहते पवितु सतिगुरु रहिआ भरपूरे ॥ बिनवंति नानकु गुर चरण लागे वाजे अनहद तूरे ॥४०॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 947) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रामकली की वार महला ३ ॥
जोधै वीरै पूरबाणी की धुनी ॥
सलोकु मः ३ ॥
सतिगुरु सहजै दा खेतु है जिस नो लाए भाउ ॥ नाउ बीजे नाउ उगवै नामे रहै समाइ ॥ हउमै एहो बीजु है सहसा गइआ विलाइ ॥ ना किछु बीजे न उगवै जो बखसे सो खाइ ॥ अ्मभै सेती अ्मभु रलिआ बहुड़ि न निकसिआ जाइ ॥ नानक गुरमुखि चलतु है वेखहु लोका आइ ॥ लोकु कि वेखै बपुड़ा जिस नो सोझी नाहि ॥ जिसु वेखाले सो वेखै जिसु वसिआ मन माहि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 947) मः ३ ॥
मनमुखु दुख का खेतु है दुखु बीजे दुखु खाइ ॥ दुख विचि जमै दुखि मरै हउमै करत विहाइ ॥ आवणु जाणु न सुझई अंधा अंधु कमाइ ॥ जो देवै तिसै न जाणई दिते कउ लपटाइ ॥ नानक पूरबि लिखिआ कमावणा अवरु न करणा जाइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 947) मः ३ ॥
सतिगुरि मिलिऐ सदा सुखु जिस नो आपे मेले सोइ ॥ सुखै एहु बिबेकु है अंतरु निरमलु होइ ॥ अगिआन का भ्रमु कटीऐ गिआनु परापति होइ ॥ नानक एको नदरी आइआ जह देखा तह सोइ ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 947) पउड़ी ॥
सचै तखतु रचाइआ बैसण कउ जांई ॥ सभु किछु आपे आपि है गुर सबदि सुणाई ॥ आपे कुदरति साजीअनु करि महल सराई ॥ चंदु सूरजु दुइ चानणे पूरी बणत बणाई ॥ आपे वेखै सुणे आपि गुर सबदि धिआई ॥१॥

वाहु वाहु सचे पातिसाह तू सची नाई ॥१॥ रहाउ ॥

(राग रामकली -- SGGS 947) मः ३ ॥
नानक महिदी करि कै रखिआ सो सहु नदरि करेइ ॥ आपे पीसै आपे घसै आपे ही लाइ लएइ ॥ इहु पिरम पिआला खसम का जै भावै तै देइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 947) पउड़ी ॥
वेकी स्रिसटि उपाईअनु सभ हुकमि आवै जाइ समाही ॥ आपे वेखि विगसदा दूजा को नाही ॥ जिउ भावै तिउ रखु तू गुर सबदि बुझाही ॥ सभना तेरा जोरु है जिउ भावै तिवै चलाही ॥ तुधु जेवड मै नाहि को किसु आखि सुणाई ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 947) सलोकु मः ३ ॥
भरमि भुलाई सभु जगु फिरी फावी होई भालि ॥ सो सहु सांति न देवई किआ चलै तिसु नालि ॥ गुर परसादी हरि धिआईऐ अंतरि रखीऐ उर धारि ॥ नानक घरि बैठिआ सहु पाइआ जा किरपा कीती करतारि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 948) मः ३ ॥
धंधा धावत दिनु गइआ रैणि गवाई सोइ ॥ कूड़ु बोलि बिखु खाइआ मनमुखि चलिआ रोइ ॥ सिरै उपरि जम डंडु है दूजै भाइ पति खोइ ॥ हरि नामु कदे न चेतिओ फिरि आवण जाणा होइ ॥ गुर परसादी हरि मनि वसै जम डंडु न लागै कोइ ॥ नानक सहजे मिलि रहै करमि परापति होइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 948) पउड़ी ॥
इकि आपणी सिफती लाइअनु दे सतिगुर मती ॥ इकना नो नाउ बखसिओनु असथिरु हरि सती ॥ पउणु पाणी बैसंतरो हुकमि करहि भगती ॥ एना नो भउ अगला पूरी बणत बणती ॥ सभु इको हुकमु वरतदा मंनिऐ सुखु पाई ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 948) मः ३ ॥
किउ करि इहु मनु मारीऐ किउ करि मिरतकु होइ ॥ कहिआ सबदु न मानई हउमै छडै न कोइ ॥ गुर परसादी हउमै छुटै जीवन मुकतु सो होइ ॥ नानक जिस नो बखसे तिसु मिलै तिसु बिघनु न लागै कोइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 948) मः ३ ॥
जीवत मरणा सभु को कहै जीवन मुकति किउ होइ ॥ भै का संजमु जे करे दारू भाउ लाएइ ॥ अनदिनु गुण गावै सुख सहजे बिखु भवजलु नामि तरेइ ॥ नानक गुरमुखि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 948) पउड़ी ॥
दूजा भाउ रचाइओनु त्रै गुण वरतारा ॥ ब्रहमा बिसनु महेसु उपाइअनु हुकमि कमावनि कारा ॥ पंडित पड़दे जोतकी ना बूझहि बीचारा ॥ सभु किछु तेरा खेलु है सचु सिरजणहारा ॥ जिसु भावै तिसु बखसि लैहि सचि सबदि समाई ॥४॥


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