Pt 6, Rudra Avtar,
ਰੁਦ੍ਰ ਅਵਤਾਰ,
रुद्र अवतार


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE


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ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
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ਹਠ ਛਾਡਿ ਸਬੈ ਤਿਨ ਪਾਨ ਪਰੰ ॥੩੫੭॥

हठ छाडि सबै तिन पान परं ॥३५७॥

haTh chhaadd sabai tin paan para(n) ||357||


ਇਮਿ ਨਾਹ ਸੌ ਜੋ ਨਰ ਨੇਹ ਕਰੈ ॥

इमि नाह सौ जो नर नेह करै ॥

eim naeh sau jo nar neh karai ||

ਭਵ ਧਾਰ ਅਪਾਰਹਿ ਪਾਰ ਪਰੈ ॥

भव धार अपारहि पार परै ॥

bhav dhaar apaareh paar parai ||

ਤਨ ਕੇ ਮਨ ਕੇ ਭ੍ਰਮ ਪਾਸਿ ਧਰੇ ॥

तन के मन के भ्रम पासि धरे ॥

tan ke man ke bhram paas dhare ||

ਕਰਿ ਪੰਦ੍ਰਸਵੋ ਗੁਰੁ ਪਾਨ ਪਰੇ ॥੩੫੮॥

करि पंद्रसवो गुरु पान परे ॥३५८॥

kar pa(n)dhrasavo gur paan pare ||358||


ਇਤਿ ਪੰਦ੍ਰਸਵ ਗੁਰੂ ਬਾਨਗਰ ਸਮਾਪਤੰ ॥੧੫॥

इति पंद्रसव गुरू बानगर समापतं ॥१५॥

eit pa(n)dhrasav guroo baanagar samaapata(n) ||15||


ਅਥ ਚਾਵਡਿ ਸੋਰਵੋ ਗੁਰੁ ਕਥਨੰ ॥

अथ चावडि सोरवो गुरु कथनं ॥

ath chaavadd soravo gur kathana(n) ||


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

तोटक छंद ॥

toTak chha(n)dh ||


ਮੁਖ ਬਿਭੂਤ ਭਗਵੇ ਭੇਸ ਬਰੰ ॥

मुख बिभूत भगवे भेस बरं ॥

mukh bibhoot bhagave bhes bara(n) ||

ਸੁਭ ਸੋਭਤ ਚੇਲਕ ਸੰਗ ਨਰੰ ॥

सुभ सोभत चेलक संग नरं ॥

subh sobhat chelak sa(n)g nara(n) ||

ਗੁਨ ਗਾਵਤ ਗੋਬਿੰਦ ਏਕ ਮੁਖੰ ॥

गुन गावत गोबिंद एक मुखं ॥

gun gaavat gobi(n)dh ek mukha(n) ||

ਬਨ ਡੋਲਤ ਆਸ ਉਦਾਸ ਸੁਖੰ ॥੩੫੯॥

बन डोलत आस उदास सुखं ॥३५९॥

ban ddolat aas udhaas sukha(n) ||359||


ਸੁਭ ਸੂਰਤਿ ਪੂਰਤ ਨਾਦ ਨਵੰ ॥

सुभ सूरति पूरत नाद नवं ॥

subh soorat poorat naadh nava(n) ||

ਅਤਿ ਉਜਲ ਅੰਗ ਬਿਭੂਤ ਰਿਖੰ ॥

अति उजल अंग बिभूत रिखं ॥

at ujal a(n)g bibhoot rikha(n) ||

ਨਹੀ ਬੋਲਤ ਡੋਲਤ ਦੇਸ ਦਿਸੰ ॥

नही बोलत डोलत देस दिसं ॥

nahee bolat ddolat dhes dhisa(n) ||

ਗੁਨ ਚਾਰਤ ਧਾਰਤ ਧ੍ਯਾਨ ਹਰੰ ॥੩੬੦॥

गुन चारत धारत ध्यान हरं ॥३६०॥

gun chaarat dhaarat dhayaan hara(n) ||360||


ਅਵਿਲੋਕਯ ਚਾਵੰਡਿ ਚਾਰੁ ਪ੍ਰਭੰ ॥

अविलोकय चावंडि चारु प्रभं ॥

avilokay chaava(n)dd chaar prabha(n) ||

ਗ੍ਰਿਹਿ ਜਾਤ ਉਡੀ ਗਹਿ ਮਾਸੁ ਮੁਖੰ ॥

गृहि जात उडी गहि मासु मुखं ॥

gireh jaat uddee geh maas mukha(n) ||

ਲਖਿ ਕੈ ਪਲ ਚਾਵੰਡਿ ਚਾਰ ਚਲੀ ॥

लखि कै पल चावंडि चार चली ॥

lakh kai pal chaava(n)dd chaar chalee ||

ਤਿਹ ਤੇ ਅਤਿ ਪੁਸਟ ਪ੍ਰਮਾਥ ਬਲੀ ॥੩੬੧॥

तिह ते अति पुसट प्रमाथ बली ॥३६१॥

teh te at pusaT pramaath balee ||361||


ਅਵਿਲੋਕਿਸ ਮਾਸ ਅਕਾਸ ਉਡੀ ॥

अविलोकिस मास अकास उडी ॥

avilokis maas akaas uddee ||

ਅਤਿ ਜੁਧੁ ਤਹੀ ਤਿਹੰ ਸੰਗ ਮੰਡੀ ॥

अति जुधु तही तिहं संग मंडी ॥

at judh tahee tiha(n) sa(n)g ma(n)ddee ||

ਤਜਿ ਮਾਸੁ ਚੜਾ ਉਡਿ ਆਪ ਚਲੀ ॥

तजि मासु चड़ा उडि आप चली ॥

taj maas chaRaa udd aap chalee ||

ਲਹਿ ਕੈ ਚਿਤ ਚਾਵੰਡਿ ਚਾਰ ਬਲੀ ॥੩੬੨॥

लहि कै चित चावंडि चार बली ॥३६२॥

leh kai chit chaava(n)dd chaar balee ||362||


ਅਵਿਲੋਕਿ ਸੁ ਚਾਵੰਡਿ ਚਾਰ ਪਲੰ ॥

अविलोकि सु चावंडि चार पलं ॥

avilok su chaava(n)dd chaar pala(n) ||

ਤਜਿ ਤ੍ਰਾਸ ਭਾਈ ਥਿਰ ਭੂਮਿ ਥਲੰ ॥

तजि त्रास भाई थिर भूमि थलं ॥

taj traas bhaiee thir bhoom thala(n) ||

ਲਖਿ ਤਾਸੁ ਮਨੰ ਮੁਨਿ ਚਉਕ ਰਹ੍ਯੋ ॥

लखि तासु मनं मुनि चउक रह्यो ॥

lakh taas mana(n) mun chauk rahayo ||

ਚਿਤ ਸੋਰ੍ਰਹਸਵੇ ਗੁਰੁ ਤਾਸੁ ਕਹ੍ਯੋ ॥੩੬੩॥

चित सोर्रहसवे गुरु तासु कह्यो ॥३६३॥

chit sorrahasave gur taas kahayo ||363||


ਕੋਊ ਐਸ ਤਜੈ ਜਬ ਸਰਬ ਧਨੰ ॥

कोऊ ऐस तजै जब सरब धनं ॥

kouoo aais tajai jab sarab dhana(n) ||

ਕਰਿ ਕੈ ਬਿਨੁ ਆਸ ਉਦਾਸ ਮਨੰ ॥

करि कै बिनु आस उदास मनं ॥

kar kai bin aas udhaas mana(n) ||

ਤਬ ਪਾਚਉ ਇੰਦ੍ਰੀ ਤਿਆਗ ਰਹੈ ॥

तब पाचउ इंद्री तिआग रहै ॥

tab paachau i(n)dhree tiaag rahai ||

ਇਨ ਚੀਲਨ ਜਿਉ ਸ੍ਰੁਤ ਐਸ ਕਹੈ ॥੩੬੪॥

इन चीलन जिउ स्रुत ऐस कहै ॥३६४॥

ein cheelan jiau srut aais kahai ||364||


ਇਤਿ ਸੋਰ੍ਰਹਵੋ ਗੁਰੂ ਚਾਵੰਡਿ ਸਮਾਪਤੰ ॥੧੬॥

इति सोर्रहवो गुरू चावंडि समापतं ॥१६॥

eit sorrahavo guroo chaava(n)dd samaapata(n) ||16||


ਅਥ ਦੁਧੀਰਾ ਸਤਾਰਵੋ ਗੁਰੂ ਕਥਨੰ ॥

अथ दुधीरा सतारवो गुरू कथनं ॥

ath dhudheeraa sataaravo guroo kathana(n) ||


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

तोटक छंद ॥

toTak chha(n)dh ||


ਕਰਿ ਸੋਰਸਵੋ ਰਿਖਿ ਤਾਸੁ ਗੁਰੰ ॥

करि सोरसवो रिखि तासु गुरं ॥

kar sorasavo rikh taas gura(n) ||

ਉਠਿ ਚਲੀਆ ਬਾਟ ਉਦਾਸ ਚਿਤੰ ॥

उठि चलीआ बाट उदास चितं ॥

auTh chaleeaa baaT udhaas chita(n) ||

ਮੁਖਿ ਪੂਰਤ ਨਾਦਿ ਨਿਨਾਦ ਧੁਨੰ ॥

मुखि पूरत नादि निनाद धुनं ॥

mukh poorat naadh ninaadh dhuna(n) ||

ਸੁਨਿ ਰੀਝਤ ਗੰਧ੍ਰਬ ਦੇਵ ਨਰੰ ॥੩੬੫॥

सुनि रीझत गंध्रब देव नरं ॥३६५॥

sun reejhat ga(n)dhrab dhev nara(n) ||365||


ਚਲਿ ਜਾਤ ਭਏ ਸਰਿਤਾ ਨਿਕਟੰ ॥

चलि जात भए सरिता निकटं ॥

chal jaat bhe saritaa nikaTa(n) ||

ਹਠਵੰਤ ਰਿਖੰ ਤਪਸਾ ਬਿਕਟ ॥

हठवंत रिखं तपसा बिकट ॥

haThava(n)t rikha(n) tapasaa bikaT ||

ਅਵਿਲੋਕ ਦੁਧੀਰਯਾ ਏਕ ਤਹਾ ॥

अविलोक दुधीरया एक तहा ॥

avilok dhudheerayaa ek tahaa ||

ਉਛਰੰਤ ਹੁਤੇ ਨਦਿ ਮਛ ਜਹਾ ॥੩੬੬॥

उछरंत हुते नदि मछ जहा ॥३६६॥

auchhara(n)t hute nadh machh jahaa ||366||


ਥਰਕੰਤ ਹੁਤੋ ਇਕ ਚਿਤ ਨਭੰ ॥

थरकंत हुतो इक चित नभं ॥

tharaka(n)t huto ik chit nabha(n) ||

ਅਤਿ ਉਜਲ ਅੰਗ ਸੁਰੰਗ ਸੁਭੰ ॥

अति उजल अंग सुरंग सुभं ॥

at ujal a(n)g sura(n)g subha(n) ||

ਨਹੀ ਆਨਿ ਬਿਲੋਕਤ ਆਪ ਦ੍ਰਿਗੰ ॥

नही आनि बिलोकत आप दृगं ॥

nahee aan bilokat aap dhiraga(n) ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਰਹ੍ਯੋ ਗਡ ਮਛ ਮਨੰ ॥੩੬੭॥

इह भाति रह्यो गड मछ मनं ॥३६७॥

eeh bhaat rahayo gadd machh mana(n) ||367||


ਤਹਾ ਜਾਇ ਮਹਾ ਮੁਨਿ ਮਜਨ ਕੈ ॥

तहा जाइ महा मुनि मजन कै ॥

tahaa jai mahaa mun majan kai ||

ਉਠਿ ਕੈ ਹਰਿ ਧਿਆਨ ਲਗਾ ਸੁਚ ਕੈ ॥

उठि कै हरि धिआन लगा सुच कै ॥

auTh kai har dhiaan lagaa such kai ||

ਨ ਟਰੋ ਤਬ ਲੌ ਵਹ ਮਛ ਅਰੀ ॥

न टरो तब लौ वह मछ अरी ॥

n Taro tab lau veh machh aree ||

ਰਥ ਸੂਰ ਅਥਿਓ ਨਹ ਡੀਠ ਟਰੀ ॥੩੬੮॥

रथ सूर अथिओ नह डीठ टरी ॥३६८॥

rath soor athio neh ddeeTh Taree ||368||


ਥਰਕੰਤ ਰਹਾ ਨਭਿ ਮਛ ਕਟੰ ॥

थरकंत रहा नभि मछ कटं ॥

tharaka(n)t rahaa nabh machh kaTa(n) ||

ਰਥ ਭਾਨੁ ਹਟਿਓ ਨਹੀ ਧ੍ਯਾਨ ਛੁਟੰ ॥

रथ भानु हटिओ नही ध्यान छुटं ॥

rath bhaan haTio nahee dhayaan chhuTa(n) ||

ਅਵਿਲੋਕ ਮਹਾ ਮੁਨਿ ਮੋਹਿ ਰਹਿਓ ॥

अविलोक महा मुनि मोहि रहिओ ॥

avilok mahaa mun moh rahio ||

ਗੁਰੁ ਸਤ੍ਰਸਵੋ ਕਰ ਤਾਸੁ ਕਹਿਓ ॥੩੬੯॥

गुरु सत्रसवो कर तासु कहिओ ॥३६९॥

gur satrasavo kar taas kahio ||369||


ਇਤਿ ਸਤਾਰਵੋ ਗੁਰੂ ਦੁਧੀਰਾ ਸਮਾਪਤੰ ॥੧੭॥

इति सतारवो गुरू दुधीरा समापतं ॥१७॥

eit sataaravo guroo dhudheeraa samaapata(n) ||17||


ਅਥ ਮ੍ਰਿਗਹਾ ਅਠਾਰਸਵੋ ਗੁਰੂ ਬਰਨਨੰ ॥

अथ मृगहा अठारसवो गुरू बरननं ॥

ath miragahaa aThaarasavo guroo baranana(n) ||


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

तोटक छंद ॥

toTak chha(n)dh ||


ਕਰਿ ਮਜਨ ਗੋਬਿੰਦ ਗਾਇ ਗੁਨੰ ॥

करि मजन गोबिंद गाइ गुनं ॥

kar majan gobi(n)dh gai guna(n) ||

ਉਠਿ ਜਾਤਿ ਭਏ ਬਨ ਮਧਿ ਮੁਨੰ ॥

उठि जाति भए बन मधि मुनं ॥

auTh jaat bhe ban madh muna(n) ||

ਜਹ ਸਾਲ ਤਮਾਲ ਮਢਾਲ ਲਸੈ ॥

जह साल तमाल मढाल लसै ॥

jeh saal tamaal maddaal lasai ||

ਰਥ ਸੂਰਜ ਕੇ ਪਗ ਬਾਜ ਫਸੈ ॥੩੭੦॥

रथ सूरज के पग बाज फसै ॥३७०॥

rath sooraj ke pag baaj fasai ||370||


ਅਵਿਲੋਕ ਤਹਾ ਇਕ ਤਾਲ ਮਹਾ ॥

अविलोक तहा इक ताल महा ॥

avilok tahaa ik taal mahaa ||

ਰਿਖਿ ਜਾਤ ਭਏ ਹਿਤ ਜੋਗ ਜਹਾ ॥

रिखि जात भए हित जोग जहा ॥

rikh jaat bhe hit jog jahaa ||

ਤਹ ਪਤ੍ਰਣ ਮਧ ਲਹ੍ਯੋ ਮ੍ਰਿਗਹਾ ॥

तह पत्रण मध लह्यो मृगहा ॥

teh patran madh lahayo miragahaa ||

ਤਨ ਸੋਭਤ ਕੰਚਨ ਸੁਧ ਪ੍ਰਭਾ ॥੩੭੧॥

तन सोभत कंचन सुध प्रभा ॥३७१॥

tan sobhat ka(n)chan sudh prabhaa ||371||


ਕਰਿ ਸੰਧਿਤ ਬਾਣ ਕਮਾਣ ਸਿਤੰ ॥

करि संधित बाण कमाण सितं ॥

kar sa(n)dhit baan kamaan sita(n) ||

ਮ੍ਰਿਗ ਮਾਰਤ ਕੋਟ ਕਰੋਰ ਕਿਤੰ ॥

मृग मारत कोट करोर कितं ॥

mirag maarat koT karor kita(n) ||

ਸਭ ਸੈਨ ਮੁਨੀਸਰ ਸੰਗਿ ਲਏ ॥

सभ सैन मुनीसर संगि लए ॥

sabh sain muneesar sa(n)g le ||

ਜਹ ਕਾਨਨ ਥੋ ਤਹ ਜਾਤ ਭਏ ॥੩੭੨॥

जह कानन थो तह जात भए ॥३७२॥

jeh kaanan tho teh jaat bhe ||372||


ਕਨਕੰ ਦੁਤਿ ਉਜਲ ਅੰਗ ਸਨੇ ॥

कनकं दुति उजल अंग सने ॥

kanaka(n) dhut ujal a(n)g sane ||

ਮੁਨਿ ਰਾਜ ਮਨੰ ਰਿਤੁ ਰਾਜ ਬਨੇ ॥

मुनि राज मनं रितु राज बने ॥

mun raaj mana(n) rit raaj bane ||

ਰਿਖਿ ਸੰਗ ਸਖਾ ਨਿਸਿ ਬਹੁਤ ਲਏ ॥

रिखि संग सखा निसि बहुत लए ॥

rikh sa(n)g sakhaa nis bahut le ||

ਤਿਹ ਬਾਰਿਧ ਦੂਜ ਬਿਲੋਕਿ ਗਏ ॥੩੭੩॥

तिह बारिध दूज बिलोकि गए ॥३७३॥

teh baaridh dhooj bilok ge ||373||


ਰਿਖਿ ਬੋਲਤ ਘੋਰਤ ਨਾਦ ਨਵੰ ॥

रिखि बोलत घोरत नाद नवं ॥

rikh bolat ghorat naadh nava(n) ||

ਤਿਹ ਠਉਰ ਕੁਲਾਹਲ ਉਚ ਹੂਅੰ ॥

तिह ठउर कुलाहल उच हूअं ॥

teh Thaur kulaahal uch hooa(n) ||

ਜਲ ਪੀਵਤ ਠਉਰ ਹੀ ਠਉਰ ਮੁਨੀ ॥

जल पीवत ठउर ही ठउर मुनी ॥

jal peevat Thaur hee Thaur munee ||

ਬਨ ਮਧਿ ਮਨੋ ਰਿਖ ਮਾਲ ਬਨੀ ॥੩੭੪॥

बन मधि मनो रिख माल बनी ॥३७४॥

ban madh mano rikh maal banee ||374||


ਅਤਿ ਉਜਲ ਅੰਗ ਬਿਭੂਤ ਧਰੈ ॥

अति उजल अंग बिभूत धरै ॥

at ujal a(n)g bibhoot dharai ||

ਬਹੁ ਭਾਤਿ ਨ੍ਯਾਸ ਅਨਾਸ ਕਰੈ ॥

बहु भाति न्यास अनास करै ॥

bahu bhaat nayaas anaas karai ||

ਨਿਵਲ੍ਰਯਾਦਿਕ ਸਰਬੰ ਕਰਮ ਕੀਏ ॥

निवल्रयादिक सरबं करम कीए ॥

nivalrayaadhik saraba(n) karam ke'ee ||

ਰਿਖਿ ਸਰਬ ਚਹੂੰ ਚਕ ਦਾਸ ਥੀਏ ॥੩੭੫॥

रिखि सरब चहूँ चक दास थीए ॥३७५॥

rikh sarab chahoo(n) chak dhaas the'ee ||375||


ਅਨਭੰਗ ਅਖੰਡ ਅਨੰਗ ਤਨੰ ॥

अनभंग अखंड अनंग तनं ॥

anabha(n)g akha(n)dd ana(n)g tana(n) ||

ਬਹੁ ਸਾਧਤ ਨ੍ਯਾਸ ਸੰਨ੍ਯਾਸ ਬਨੰ ॥

बहु साधत न्यास संन्यास बनं ॥

bahu saadhat nayaas sa(n)nayaas bana(n) ||

ਜਟ ਸੋਹਤ ਜਾਨੁਕ ਧੂਰ ਜਟੀ ॥

जट सोहत जानुक धूर जटी ॥

jaT sohat jaanuk dhoor jaTee ||

ਸਿਵ ਕੀ ਜਨੁ ਜੋਗ ਜਟਾ ਪ੍ਰਗਟੀ ॥੩੭੬॥

सिव की जनु जोग जटा प्रगटी ॥३७६॥

siv kee jan jog jaTaa pragaTee ||376||


ਸਿਵ ਤੇ ਜਨੁ ਗੰਗ ਤਰੰਗ ਛੁਟੇ ॥

सिव ते जनु गंग तरंग छुटे ॥

siv te jan ga(n)g tara(n)g chhuTe ||

ਇਹ ਹੁਇ ਜਨ ਜੋਗ ਜਟਾ ਪ੍ਰਗਟੇ ॥

इह हुइ जन जोग जटा प्रगटे ॥

eeh hui jan jog jaTaa pragaTe ||

ਤਪ ਸਰਬ ਤਪੀਸਨ ਕੇ ਸਬ ਹੀ ॥

तप सरब तपीसन के सब ही ॥

tap sarab tapeesan ke sab hee ||

ਮੁਨਿ ਜੇ ਸਬ ਛੀਨ ਲਏ ਤਬ ਹੀ ॥੩੭੭॥

मुनि जे सब छीन लए तब ही ॥३७७॥

mun je sab chheen le tab hee ||377||


ਸ੍ਰੁਤ ਜੇਤਿਕ ਨ੍ਯਾਸ ਉਦਾਸ ਕਹੇ ॥

स्रुत जेतिक न्यास उदास कहे ॥

srut jetik nayaas udhaas kahe ||

ਸਬ ਹੀ ਰਿਖਿ ਅੰਗਨ ਜਾਨ ਲਏ ॥

सब ही रिखि अंगन जान लए ॥

sab hee rikh a(n)gan jaan le ||

ਘਨ ਮੈ ਜਿਮ ਬਿਦੁਲਤਾ ਝਮਕੈ ॥

घन मै जिम बिदुलता झमकै ॥

ghan mai jim bidhulataa jhamakai ||

ਰਿਖਿ ਮੋ ਗੁਨ ਤਾਸ ਸਬੈ ਦਮਕੈ ॥੩੭੮॥

रिखि मो गुन तास सबै दमकै ॥३७८॥

rikh mo gun taas sabai dhamakai ||378||


ਜਸ ਛਾਡਤ ਭਾਨੁ ਅਨੰਤ ਛਟਾ ॥

जस छाडत भानु अनंत छटा ॥

jas chhaaddat bhaan ana(n)t chhaTaa ||

ਰਿਖਿ ਕੇ ਤਿਮ ਸੋਭਤ ਜੋਗ ਜਟਾ ॥

रिखि के तिम सोभत जोग जटा ॥

rikh ke tim sobhat jog jaTaa ||

ਜਿਨ ਕੀ ਦੁਖ ਫਾਸ ਕਹੂੰ ਨ ਕਟੀ ॥

जिन की दुख फास कहूँ न कटी ॥

jin kee dhukh faas kahoo(n) na kaTee ||

ਰਿਖਿ ਭੇਟਤ ਤਾਸੁ ਛਟਾਕ ਛੁਟੀ ॥੩੭੯॥

रिखि भेटत तासु छटाक छुटी ॥३७९॥

rikh bheTat taas chhaTaak chhuTee ||379||


ਨਰ ਜੋ ਨਹੀ ਨਰਕਨ ਤੇ ਨਿਵਰੈ ॥

नर जो नही नरकन ते निवरै ॥

nar jo nahee narakan te nivarai ||

ਰਿਖਿ ਭੇਟਤ ਤਉਨ ਤਰਾਕ ਤਰੈ ॥

रिखि भेटत तउन तराक तरै ॥

rikh bheTat taun taraak tarai ||

ਜਿਨ ਕੇ ਸਮਤਾ ਕਹੂੰ ਨਾਹਿ ਠਟੀ ॥

जिन के समता कहूँ नाहि ठटी ॥

jin ke samataa kahoo(n) naeh ThaTee ||

ਰਿਖਿ ਪੂਜਿ ਘਟੀ ਸਬ ਪਾਪ ਘਟੀ ॥੩੮੦॥

रिखि पूजि घटी सब पाप घटी ॥३८०॥

rikh pooj ghaTee sab paap ghaTee ||380||


ਇਤ ਬਧਿ ਤਉਨ ਬਿਠੋ ਮ੍ਰਿਗਹਾ ॥

इत बधि तउन बिठो मृगहा ॥

eit badh taun biTho miragahaa ||

ਜਸ ਹੇਰਤ ਛੇਰਿਨਿ ਭੀਮ ਭਿਡਹਾ ॥

जस हेरत छेरिनि भीम भिडहा ॥

jas herat chherin bheem bhiddahaa ||

ਤਿਹ ਜਾਨ ਰਿਖੀਨ ਹੀ ਸਾਸ ਸਸ੍ਰਯੋ ॥

तिह जान रिखीन ही सास सस्रयो ॥

teh jaan rikheen hee saas sasrayo ||

ਮ੍ਰਿਗ ਜਾਨ ਮੁਨੀ ਕਹੁ ਬਾਨ ਕਸ੍ਰਯੋ ॥੩੮੧॥

मृग जान मुनी कहु बान कस्रयो ॥३८१॥

mirag jaan munee kahu baan kasrayo ||381||


ਸਰ ਪੇਖ ਸਬੈ ਤਿਹ ਸਾਧ ਕਹੈ ॥

सर पेख सबै तिह साध कहै ॥

sar pekh sabai teh saadh kahai ||

ਮ੍ਰਿਗ ਹੋਇ ਨ ਰੇ ਮੁਨਿ ਰਾਜ ਇਹੈ ॥

मृग होइ न रे मुनि राज इहै ॥

mirag hoi na re mun raaj ihai ||

ਨਹ ਬਾਨ ਸਰਾਸਨ ਪਾਨ ਤਜੇ ॥

नह बान सरासन पान तजे ॥

neh baan saraasan paan taje ||

ਅਸ ਦੇਖਿ ਦ੍ਰਿੜੰ ਮੁਨਿ ਰਾਜ ਲਜੇ ॥੩੮੨॥

अस देखि दृड़ं मुनि राज लजे ॥३८२॥

as dhekh dhiraRa(n) mun raaj laje ||382||


ਬਹੁਤੇ ਚਿਰ ਜਿਉ ਤਿਹ ਧ੍ਯਾਨ ਛੁਟਾ ॥

बहुते चिर जिउ तिह ध्यान छुटा ॥

bahute chir jiau teh dhayaan chhuTaa ||

ਅਵਿਲੋਕ ਧਰੇ ਰਿਖਿ ਪਾਲ ਜਟਾ ॥

अविलोक धरे रिखि पाल जटा ॥

avilok dhare rikh paal jaTaa ||

ਕਸ ਆਵਤ ਹੋ ਡਰੁ ਡਾਰਿ ਅਬੈ ॥

कस आवत हो डरु डारि अबै ॥

kas aavat ho ddar ddaar abai ||

ਮੁਹਿ ਲਾਗਤ ਹੋ ਮ੍ਰਿਗ ਰੂਪ ਸਬੈ ॥੩੮੩॥

मुहि लागत हो मृग रूप सबै ॥३८३॥

muh laagat ho mirag roop sabai ||383||


ਰਿਖ ਪਾਲ ਬਿਲੋਕਿ ਤਿਸੈ ਦਿੜਤਾ ॥

रिख पाल बिलोकि तिसै दिड़ता ॥

rikh paal bilok tisai dhiRataa ||

ਗੁਰੁ ਮਾਨ ਕਰੀ ਬਹੁਤੈ ਉਪਮਾ ॥

गुरु मान करी बहुतै उपमा ॥

gur maan karee bahutai upamaa ||

ਮ੍ਰਿਗ ਸੋ ਜਿਹ ਕੋ ਚਿਤ ਐਸ ਲਗ੍ਯੋ ॥

मृग सो जिह को चित ऐस लग्यो ॥

mirag so jeh ko chit aais lagayo ||

ਪਰਮੇਸਰ ਕੈ ਰਸ ਜਾਨ ਪਗ੍ਰਯੋ ॥੩੮੪॥

परमेसर कै रस जान पग्रयो ॥३८४॥

paramesar kai ras jaan pagrayo ||384||


ਮੁਨ ਕੋ ਤਬ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਸੀਜ ਹੀਆ ॥

मुन को तब प्रेम प्रसीज हीआ ॥

mun ko tab prem praseej heeaa ||

ਗੁਰ ਠਾਰਸਮੋ ਮ੍ਰਿਗ ਨਾਸ ਕੀਆ ॥

गुर ठारसमो मृग नास कीआ ॥

gur Thaarasamo mirag naas keeaa ||

ਮਨ ਮੋ ਤਬ ਦਤ ਬੀਚਾਰ ਕੀਆ ॥

मन मो तब दत बीचार कीआ ॥

man mo tab dhat beechaar keeaa ||

ਗੁਨ ਮ੍ਰਿਗਹਾ ਕੋ ਚਿਤ ਬੀਚ ਲੀਆ ॥੩੮੫॥

गुन मृगहा को चित बीच लीआ ॥३८५॥

gun miragahaa ko chit beech leeaa ||385||


ਹਰਿ ਸੋ ਹਿਤੁ ਜੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਰੈ ॥

हरि सो हितु जो इह भाति करै ॥

har so hit jo ieh bhaat karai ||

ਭਵ ਭਾਰ ਅਪਾਰਹ ਪਾਰ ਪਰੈ ॥

भव भार अपारह पार परै ॥

bhav bhaar apaareh paar parai ||

ਮਲ ਅੰਤਰਿ ਯਾਹੀ ਇਸਨਾਨ ਕਟੈ ॥

मल अंतरि याही इसनान कटै ॥

mal a(n)tar yaahee isanaan kaTai ||

ਜਗ ਤੇ ਫਿਰਿ ਆਵਨ ਜਾਨ ਮਿਟੈ ॥੩੮੬॥

जग ते फिरि आवन जान मिटै ॥३८६॥

jag te fir aavan jaan miTai ||386||


ਗੁਰੁ ਜਾਨ ਤਬੈ ਤਿਹ ਪਾਇ ਪਰਾ ॥

गुरु जान तबै तिह पाइ परा ॥

gur jaan tabai teh pai paraa ||

ਭਵ ਭਾਰ ਅਪਾਰ ਸੁ ਪਾਰ ਤਰਾ ॥

भव भार अपार सु पार तरा ॥

bhav bhaar apaar su paar taraa ||

ਦਸ ਅਸਟਸਮੋ ਗੁਰੁ ਤਾਸੁ ਕੀਯੋ ॥

दस असटसमो गुरु तासु कीयो ॥

dhas asaTasamo gur taas keeyo ||

ਕਬਿ ਬਾਧਿ ਕਬਿਤਨ ਮਧਿ ਲੀਯੋ ॥੩੮੭॥

कबि बाधि कबितन मधि लीयो ॥३८७॥

kab baadh kabitan madh leeyo ||387||


ਸਬ ਹੀ ਸਿਖ ਸੰਜੁਤਿ ਪਾਨ ਗਹੇ ॥

सब ही सिख संजुति पान गहे ॥

sab hee sikh sa(n)jut paan gahe ||

ਅਵਿਲੋਕਿ ਚਰਾਚਰਿ ਚਉਧ ਰਹੇ ॥

अविलोकि चराचरि चउध रहे ॥

avilok charaachar chaudh rahe ||

ਪਸੁ ਪਛ ਚਰਾਚਰ ਜੀਵ ਸਬੈ ॥

पसु पछ चराचर जीव सबै ॥

pas pachh charaachar jeev sabai ||

ਗਣ ਗੰਧ੍ਰਬ ਭੂਤ ਪਿਸਾਚ ਤਬੈ ॥੩੮੮॥

गण गंध्रब भूत पिसाच तबै ॥३८८॥

gan ga(n)dhrab bhoot pisaach tabai ||388||


ਇਤਿ ਅਠਦਸਵੋ ਗੁਰੂ ਮ੍ਰਿਗਹਾ ਸਮਾਪਤੰ ॥੧੮॥

इति अठदसवो गुरू मृगहा समापतं ॥१८॥

eit aThadhasavo guroo miragahaa samaapata(n) ||18||


ਅਥ ਨਲਨੀ ਸੁਕ ਉਨੀਵੋ ਗੁਰੂ ਕਥਨੰ ॥

अथ नलनी सुक उनीवो गुरू कथनं ॥

ath nalanee suk uneevo guroo kathana(n) ||


ਕ੍ਰਿਪਾਣ ਕ੍ਰਿਤ ਛੰਦ ॥

कृपाण कृत छंद ॥

kirapaan kirat chha(n)dh ||


ਮੁਨਿ ਅਤਿ ਅਪਾਰ ॥

मुनि अति अपार ॥

mun at apaar ||

ਗੁਣ ਗਣ ਉਦਾਰ ॥

गुण गण उदार ॥

gun gan udhaar ||

ਬਿਦਿਆ ਬਿਚਾਰ ॥

बिदिआ बिचार ॥

bidhiaa bichaar ||

ਨਿਤ ਕਰਤ ਚਾਰ ॥੩੮੯॥

नित करत चार ॥३८९॥

nit karat chaar ||389||


ਲਖਿ ਛਬਿ ਸੁਰੰਗ ॥

लखि छबि सुरंग ॥

lakh chhab sura(n)g ||

ਲਾਜਤ ਅਨੰਗ ॥

लाजत अनंग ॥

laajat ana(n)g ||

ਪਿਖਿ ਬਿਮਲ ਅੰਗ ॥

पिखि बिमल अंग ॥

pikh bimal a(n)g ||

ਚਕਿ ਰਹਤ ਗੰਗ ॥੩੯੦॥

चकि रहत गंग ॥३९०॥

chak rahat ga(n)g ||390||


ਲਖਿ ਦੁਤਿ ਅਪਾਰ ॥

लखि दुति अपार ॥

lakh dhut apaar ||

ਰੀਝਤ ਕੁਮਾਰ ॥

रीझत कुमार ॥

reejhat kumaar ||

ਗ੍ਯਾਨੀ ਅਪਾਰ ॥

ग्यानी अपार ॥

gayaanee apaar ||

ਗੁਨ ਗਨ ਉਦਾਰ ॥੩੯੧॥

गुन गन उदार ॥३९१॥

gun gan udhaar ||391||


ਅਬਯਕਤ ਅੰਗ ॥

अबयकत अंग ॥

abayakat a(n)g ||

ਆਭਾ ਅਭੰਗ ॥

आभा अभंग ॥

aabhaa abha(n)g ||

ਸੋਭਾ ਸੁਰੰਗ ॥

सोभा सुरंग ॥

sobhaa sura(n)g ||

ਤਨ ਜਨੁ ਅਨੰਗ ॥੩੯੨॥

तन जनु अनंग ॥३९२॥

tan jan ana(n)g ||392||


ਬਹੁ ਕਰਤ ਨ੍ਯਾਸ ॥

बहु करत न्यास ॥

bahu karat nayaas ||

ਨਿਸਿ ਦਿਨ ਉਦਾਸ ॥

निसि दिन उदास ॥

nis dhin udhaas ||

ਤਜਿ ਸਰਬ ਆਸ ॥

तजि सरब आस ॥

taj sarab aas ||

ਅਤਿ ਬੁਧਿ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥੩੯੩॥

अति बुधि प्रकास ॥३९३॥

at budh prakaas ||393||


ਤਨਿ ਸਹਤ ਧੂਪ ॥

तनि सहत धूप ॥

tan sahat dhoop ||

ਸੰਨ੍ਯਾਸ ਭੂਪ ॥

संन्यास भूप ॥

sa(n)nayaas bhoop ||

ਤਨਿ ਛਬਿ ਅਨੂਪ ॥

तनि छबि अनूप ॥

tan chhab anoop ||

ਜਨੁ ਸਿਵ ਸਰੂਪ ॥੩੯੪॥

जनु सिव सरूप ॥३९४॥

jan siv saroop ||394||


ਮੁਖ ਛਬਿ ਪ੍ਰਚੰਡ ॥

मुख छबि प्रचंड ॥

mukh chhab pracha(n)dd ||

ਆਭਾ ਅਭੰਗ ॥

आभा अभंग ॥

aabhaa abha(n)g ||

ਜੁਟਿ ਜੋਗ ਜੰਗ ॥

जुटि जोग जंग ॥

juT jog ja(n)g ||

ਨਹੀ ਮੁਰਤ ਅੰਗ ॥੩੯੫॥

नही मुरत अंग ॥३९५॥

nahee murat a(n)g ||395||


ਅਤਿ ਛਬਿ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥

अति छबि प्रकास ॥

at chhab prakaas ||

ਨਿਸਿ ਦਿਨ ਨਿਰਾਸ ॥

निसि दिन निरास ॥

nis dhin niraas ||

ਮੁਨਿ ਮਨ ਸੁਬਾਸ ॥

मुनि मन सुबास ॥

mun man subaas ||

ਗੁਨ ਗਨ ਉਦਾਸ ॥੩੯੬॥

गुन गन उदास ॥३९६॥

gun gan udhaas ||396||


ਅਬਯਕਤ ਜੋਗ ॥

अबयकत जोग ॥

abayakat jog ||

ਨਹੀ ਕਉਨ ਸੋਗ ॥

नही कउन सोग ॥

nahee kaun sog ||

ਨਿਤਪ੍ਰਤਿ ਅਰੋਗ ॥

नितप्रति अरोग ॥

nitaprat arog ||

ਤਜਿ ਰਾਜ ਭੋਗ ॥੩੯੭॥

तजि राज भोग ॥३९७॥

taj raaj bhog ||397||


ਮੁਨ ਮਨਿ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ॥

मुन मनि कृपाल ॥

mun man kirapaal ||

ਗੁਨ ਗਨ ਦਿਆਲ ॥

गुन गन दिआल ॥

gun gan dhiaal ||

ਸੁਭਿ ਮਤਿ ਸੁਢਾਲ ॥

सुभि मति सुढाल ॥

subh mat suddaal ||

ਦ੍ਰਿੜ ਬ੍ਰਿਤ ਕਰਾਲ ॥੩੯੮॥

दृड़ बृत कराल ॥३९८॥

dhiraR birat karaal ||398||


ਤਨ ਸਹਤ ਸੀਤ ॥

तन सहत सीत ॥

tan sahat seet ||

ਨਹੀ ਮੁਰਤ ਚੀਤ ॥

नही मुरत चीत ॥

nahee murat cheet ||

ਬਹੁ ਬਰਖ ਬੀਤ ॥

बहु बरख बीत ॥

bahu barakh beet ||

ਜਨੁ ਜੋਗ ਜੀਤ ॥੩੯੯॥

जनु जोग जीत ॥३९९॥

jan jog jeet ||399||


ਚਾਲੰਤ ਬਾਤ ॥

चालंत बात ॥

chaala(n)t baat ||

ਥਰਕੰਤ ਪਾਤ ॥

थरकंत पात ॥

tharaka(n)t paat ||

ਪੀਅਰਾਤ ਗਾਤ ॥

पीअरात गात ॥

peearaat gaat ||

ਨਹੀ ਬਦਤ ਬਾਤ ॥੪੦੦॥

नही बदत बात ॥४००॥

nahee badhat baat ||400||


ਭੰਗੰ ਭਛੰਤ ॥

भंगं भछंत ॥

bha(n)ga(n) bhachha(n)t ||

ਕਾਛੀ ਕਛੰਤ ॥

काछी कछंत ॥

kaachhee kachha(n)t ||

ਕਿੰਗ੍ਰੀ ਬਜੰਤ ॥

किंग्री बजंत ॥

ki(n)gree baja(n)t ||

ਭਗਵਤ ਭਨੰਤ ॥੪੦੧॥

भगवत भनंत ॥४०१॥

bhagavat bhana(n)t ||401||


ਨਹੀ ਡੁਲਤ ਅੰਗ ॥

नही डुलत अंग ॥

nahee ddulat a(n)g ||

ਮੁਨਿ ਮਨ ਅਭੰਗ ॥

मुनि मन अभंग ॥

mun man abha(n)g ||

ਜੁਟਿ ਜੋਗ ਜੰਗ ॥

जुटि जोग जंग ॥

juT jog ja(n)g ||

ਜਿਮਿ ਉਡਤ ਚੰਗ ॥੪੦੨॥

जिमि उडत चंग ॥४०२॥

jim uddat cha(n)g ||402||


ਨਹੀ ਕਰਤ ਹਾਇ ॥

नही करत हाइ ॥

nahee karat hai ||

ਤਪ ਕਰਤ ਚਾਇ ॥

तप करत चाइ ॥

tap karat chai ||

ਨਿਤਪ੍ਰਤਿ ਬਨਾਇ ॥

नितप्रति बनाइ ॥

nitaprat banai ||

ਬਹੁ ਭਗਤ ਭਾਇ ॥੪੦੩॥

बहु भगत भाइ ॥४०३॥

bahu bhagat bhai ||403||


ਮੁਖ ਭਛਤ ਪਉਨ ॥

मुख भछत पउन ॥

mukh bhachhat paun ||

ਤਜਿ ਧਾਮ ਗਉਨ ॥

तजि धाम गउन ॥

taj dhaam gaun ||

ਮੁਨਿ ਰਹਤ ਮਉਨ ॥

मुनि रहत मउन ॥

mun rahat maun ||

ਸੁਭ ਰਾਜ ਭਉਨ ॥੪੦੪॥

सुभ राज भउन ॥४०४॥

subh raaj bhaun ||404||


ਸੰਨ੍ਯਾਸ ਦੇਵ ॥

संन्यास देव ॥

sa(n)nayaas dhev ||

ਮੁਨਿ ਮਨ ਅਭੇਵ ॥

मुनि मन अभेव ॥

mun man abhev ||

ਅਨਜੁਰਿ ਅਜੇਵ ॥

अनजुरि अजेव ॥

anajur ajev ||

ਅੰਤਰਿ ਅਤੇਵ ॥੪੦੫॥

अंतरि अतेव ॥४०५॥

a(n)tar atev ||405||


ਅਨਭੂ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥

अनभू प्रकास ॥

anabhoo prakaas ||

ਨਿਤਪ੍ਰਤਿ ਉਦਾਸ ॥

नितप्रति उदास ॥

nitaprat udhaas ||

ਗੁਨ ਅਧਿਕ ਜਾਸ ॥

गुन अधिक जास ॥

gun adhik jaas ||

ਲਖਿ ਲਜਤ ਅਨਾਸ ॥੪੦੬॥

लखि लजत अनास ॥४०६॥

lakh lajat anaas ||406||


ਬ੍ਰਹਮੰਨ ਦੇਵ ॥

ब्रहमंन देव ॥

brahama(n)n dhev ||

ਗੁਨ ਗਨ ਅਭੇਵ ॥

गुन गन अभेव ॥

gun gan abhev ||

ਦੇਵਾਨ ਦੇਵ ॥

देवान देव ॥

dhevaan dhev ||

ਅਨਭਿਖ ਅਜੇਵ ॥੪੦੭॥

अनभिख अजेव ॥४०७॥

anabhikh ajev ||407||


ਸੰਨਿਆਸ ਨਾਥ ॥

संनिआस नाथ ॥

sa(n)niaas naath ||

ਅਨਧਰ ਪ੍ਰਮਾਥ ॥

अनधर प्रमाथ ॥

anadhar pramaath ||

ਇਕ ਰਟਤ ਗਾਥ ॥

इक रटत गाथ ॥

eik raTat gaath ||

ਟਕ ਏਕ ਸਾਥ ॥੪੦੮॥

टक एक साथ ॥४०८॥

Tak ek saath ||408||


ਗੁਨ ਗਨਿ ਅਪਾਰ ॥

गुन गनि अपार ॥

gun gan apaar ||

ਮੁਨਿ ਮਨਿ ਉਦਾਰ ॥

मुनि मनि उदार ॥

mun man udhaar ||

ਸੁਭ ਮਤਿ ਸੁਢਾਰ ॥

सुभ मति सुढार ॥

subh mat suddaar ||

ਬੁਧਿ ਕੋ ਪਹਾਰ ॥੪੦੯॥

बुधि को पहार ॥४०९॥

budh ko pahaar ||409||


ਸੰਨਿਆਸ ਭੇਖ ॥

संनिआस भेख ॥

sa(n)niaas bhekh ||

ਅਨਿਬਿਖ ਅਦ੍ਵੈਖ ॥

अनिबिख अद्वैख ॥

anibikh adhavaikh ||

ਜਾਪਤ ਅਭੇਖ ॥

जापत अभेख ॥

jaapat abhekh ||

ਬ੍ਰਿਧ ਬੁਧਿ ਅਲੇਖ ॥੪੧੦॥

बृध बुधि अलेख ॥४१०॥

biradh budh alekh ||410||


ਕੁਲਕ ਛੰਦ ॥

कुलक छंद ॥

kulak chha(n)dh ||


ਧੰ ਧਕਿਤ ਇੰਦ ॥

धं धकित इंद ॥

dha(n) dhakit i(n)dh ||

ਚੰ ਚਕਿਤ ਚੰਦ ॥

चं चकित चंद ॥

cha(n) chakit cha(n)dh ||

ਥੰ ਥਕਤ ਪਉਨ ॥

थं थकत पउन ॥

tha(n) thakat paun ||

ਭੰ ਭਜਤ ਮਉਨ ॥੪੧੧॥

भं भजत मउन ॥४११॥

bha(n) bhajat maun ||411||


ਜੰ ਜਕਿਤ ਜਛ ॥

जं जकित जछ ॥

ja(n) jakit jachh ||

ਪੰ ਪਚਤ ਪਛ ॥

पं पचत पछ ॥

pa(n) pachat pachh ||

ਧੰ ਧਕਤ ਸਿੰਧੁ ॥

धं धकत सिंधु ॥

dha(n) dhakat si(n)dh ||

ਬੰ ਬਕਤ ਬਿੰਧ ॥੪੧੨॥

बं बकत बिंध ॥४१२॥

ba(n) bakat bi(n)dh ||412||


ਸੰ ਸਕਤ ਸਿੰਧੁ ॥

सं सकत सिंधु ॥

sa(n) sakat si(n)dh ||

ਗੰ ਗਕਤ ਗਿੰਧ ॥

गं गकत गिंध ॥

ga(n) gakat gi(n)dh ||

ਤੰ ਤਕਤ ਦੇਵ ॥

तं तकत देव ॥

ta(n) takat dhev ||

ਅੰ ਅਕਤ ਭੇਵ ॥੪੧੩॥

अं अकत भेव ॥४१३॥

a(n) akat bhev ||413||


ਲੰ ਲਖਤ ਜੋਗਿ ॥

लं लखत जोगि ॥

la(n) lakhat jog ||

ਭੰ ਭ੍ਰਮਤ ਭੋਗਿ ॥

भं भ्रमत भोगि ॥

bha(n) bhramat bhog ||

ਬੰ ਬਕਤ ਬੈਨ ॥

बं बकत बैन ॥

ba(n) bakat bain ||

ਚੰ ਚਕਤ ਨੈਨ ॥੪੧੪॥

चं चकत नैन ॥४१४॥

cha(n) chakat nain ||414||


ਤੰ ਤਜਤ ਅਤ੍ਰ ॥

तं तजत अत्र ॥

ta(n) tajat atr ||

ਛੰ ਛਕਤ ਛਤ੍ਰ ॥

छं छकत छत्र ॥

chha(n) chhakat chhatr ||

ਪੰ ਪਰਤ ਪਾਨ ॥

पं परत पान ॥

pa(n) parat paan ||

ਭੰ ਭਰਤ ਭਾਨ ॥੪੧੫॥

भं भरत भान ॥४१५॥

bha(n) bharat bhaan ||415||


ਬੰ ਬਜਤ ਬਾਦ ॥

बं बजत बाद ॥

ba(n) bajat baadh ||

ਨੰ ਨਜਤ ਨਾਦ ॥

नं नजत नाद ॥

na(n) najat naadh ||

ਅੰ ਉਠਤ ਰਾਗ ॥

अं उठत राग ॥

a(n) uThat raag ||

ਉਫਟਤ ਸੁਹਾਗ ॥੪੧੬॥

उफटत सुहाग ॥४१६॥

aufaTat suhaag ||416||


ਛੰ ਸਕਤ ਸੂਰ ॥

छं सकत सूर ॥

chha(n) sakat soor ||

ਭੰ ਭ੍ਰਮਤ ਹੂਰ ॥

भं भ्रमत हूर ॥

bha(n) bhramat hoor ||

ਰੰ ਰਿਝਤ ਚਿਤ ॥

रं रिझत चित ॥

ra(n) rijhat chit ||

ਤੰ ਤਜਤ ਬਿਤ ॥੪੧੭॥

तं तजत बित ॥४१७॥

ta(n) tajat bit ||417||


ਛੰ ਛਕਤ ਜਛ ॥

छं छकत जछ ॥

chha(n) chhakat jachh ||

ਭੰ ਭ੍ਰਮਤ ਪਛ ॥

भं भ्रमत पछ ॥

bha(n) bhramat pachh ||

ਭੰ ਭਿਰਤ ਭੂਪ ॥

भं भिरत भूप ॥

bha(n) bhirat bhoop ||

ਨਵ ਨਿਰਖ ਰੂਪ ॥੪੧੮॥

नव निरख रूप ॥४१८॥

nav nirakh roop ||418||


ਚਰਪਟ ਛੰਦ ॥

चरपट छंद ॥

charapaT chha(n)dh ||


ਗਲਿਤੰ ਜੋਗੰ ॥

गलितं जोगं ॥

galita(n) joga(n) ||

ਦਲਿਤੰ ਭੋਗੰ ॥

दलितं भोगं ॥

dhalita(n) bhoga(n) ||

ਭਗਿਵੇ ਭੇਸੰ ॥

भगिवे भेसं ॥

bhagive bhesa(n) ||

ਸੁਫਿਲੇ ਦੇਸੰ ॥੪੧੯॥

सुफिले देसं ॥४१९॥

sufile dhesa(n) ||419||


ਅਚਲ ਧਰਮੰ ॥

अचल धरमं ॥

achal dharama(n) ||

ਅਖਿਲ ਕਰਮੰ ॥

अखिल करमं ॥

akhil karama(n) ||

ਅਮਿਤ ਜੋਗੰ ॥

अमित जोगं ॥

amit joga(n) ||

ਤਜਿਤ ਭੋਗੰ ॥੪੨੦॥

तजित भोगं ॥४२०॥

tajit bhoga(n) ||420||


ਸੁਫਲ ਕਰਮੰ ॥

सुफल करमं ॥

sufal karama(n) ||

ਸੁਬ੍ਰਿਤ ਧਰਮੰ ॥

सुबृत धरमं ॥

subirat dharama(n) ||

ਕੁਕ੍ਰਿਤ ਹੰਤਾ ॥

कुकृत हंता ॥

kukirat ha(n)taa ||

ਸੁਗਤੰ ਗੰਤਾ ॥੪੨੧॥

सुगतं गंता ॥४२१॥

sugata(n) ga(n)taa ||421||


ਦਲਿਤੰ ਦ੍ਰੋਹੰ ॥

दलितं द्रोहं ॥

dhalita(n) dhroha(n) ||

ਮਲਿਤੰ ਮੋਹੰ ॥

मलितं मोहं ॥

malita(n) moha(n) ||

ਸਲਿਤੰ ਸਾਰੰ ॥

सलितं सारं ॥

salita(n) saara(n) ||

ਸੁਕ੍ਰਿਤ ਚਾਰੰ ॥੪੨੨॥

सुकृत चारं ॥४२२॥

sukirat chaara(n) ||422||


ਭਗਵੇ ਭੇਸੰ ॥

भगवे भेसं ॥

bhagave bhesa(n) ||

ਸੁਫਲੰ ਦੇਸੰ ॥

सुफलं देसं ॥

sufala(n) dhesa(n) ||

ਸੁਹ੍ਰਿਦੰ ਸਰਤਾ ॥

सुहृदं सरता ॥

suhiradha(n) sarataa ||

ਕੁਕ੍ਰਿਤੰ ਹਰਤਾ ॥੪੨੩॥

कुकृतं हरता ॥४२३॥

kukirata(n) harataa ||423||


ਚਕ੍ਰਿਤੰ ਸੂਰੰ ॥

चकृतं सूरं ॥

chakirata(n) soora(n) ||

ਬਮਤੰ ਨੂਰੰ ॥

बमतं नूरं ॥

bamata(n) noora(n) ||

ਏਕੰ ਜਪਿਤੰ ॥

एकं जपितं ॥

eka(n) japita(n) ||

ਏਕੋ ਥਪਿਤੰ ॥੪੨੪॥

एको थपितं ॥४२४॥

eko thapita(n) ||424||


ਰਾਜੰ ਤਜਿਤ੍ਵੰ ॥

राजं तजित्वं ॥

raaja(n) tajitavai(n) ||

ਈਸੰ ਭਵਿਤ੍ਵੰ ॥

ईसं भवित्वं ॥

e'eesa(n) bhavitavai(n) ||

ਜਪੰ ਜਪਿਤ੍ਵੰ ॥

जपं जपित्वं ॥

japa(n) japitavai(n) ||

ਏਕੰ ਥਪਿਤ੍ਵੰ ॥੪੨੫॥

एकं थपित्वं ॥४२५॥

eka(n) thapitavai(n) ||425||


ਬਜਤੰ ਨਾਦੰ ॥

बजतं नादं ॥

bajata(n) naadha(n) ||

ਬਿਦਿਤੰ ਰਾਗੰ ॥

बिदितं रागं ॥

bidhita(n) raaga(n) ||

ਜਪਤੰ ਜਾਪੰ ॥

जपतं जापं ॥

japata(n) jaapa(n) ||

ਤ੍ਰਸਿਤੰ ਤਾਪੰ ॥੪੨੬॥

त्रसितं तापं ॥४२६॥

trasita(n) taapa(n) ||426||


ਚਕਿਤੰ ਚੰਦੰ ॥

चकितं चंदं ॥

chakita(n) cha(n)dha(n) ||

ਧਕਤੰ ਇੰਦੰ ॥

धकतं इंदं ॥

dhakata(n) i(n)dha(n) ||

ਤਕਤੰ ਦੇਵੰ ॥

तकतं देवं ॥

takata(n) dheva(n) ||

ਭਗਤੰ ਭੇਵੰ ॥੪੨੭॥

भगतं भेवं ॥४२७॥

bhagata(n) bheva(n) ||427||


ਭ੍ਰਮਤੰ ਭੂਤੰ ॥

भ्रमतं भूतं ॥

bhramata(n) bhoota(n) ||

ਲਖਿਤੰ ਰੂਪੰ ॥

लखितं रूपं ॥

lakhita(n) roopa(n) ||

ਚਕ੍ਰਤੰ ਚਾਰੰ ॥

चक्रतं चारं ॥

chakrata(n) chaara(n) ||

ਸੁਹ੍ਰਿਦੰ ਸਾਰੰ ॥੪੨੮॥

सुहृदं सारं ॥४२८॥

suhiradha(n) saara(n) ||428||


ਨਲਿਨੰ ਸੂਅੰ ॥

नलिनं सूअं ॥

nalina(n) sooa(n) ||


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