200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE
Bani Lang | Meanings |
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ਅਥ ਨਿਹਕਲੰਕੀ ਚੌਬੀਸਵੌ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥
अथ निहकलंकी चौबीसवौ अवतार कथनं ॥
ath nihakala(n)kee chauabeesavau avataar kathana(n) ||
ਚੌਪਈ ॥
चौपई ॥
chauapiee ||
ਅਬ ਮੈ ਮਹਾ ਸੁਧ ਮਤਿ ਕਰਿ ਕੈ ॥
अब मै महा सुध मति करि कै ॥
ab mai mahaa sudh mat kar kai ||
ਕਹੋ ਕਥਾ ਚਿਤੁ ਲਾਇ ਬਿਚਰਿ ਕੈ ॥
कहो कथा चितु लाइ बिचरि कै ॥
kaho kathaa chit lai bichar kai ||
ਚਉਬੀਸਵੋ ਕਲਕੀ ਅਵਤਾਰਾ ॥
चउबीसवो कलकी अवतारा ॥
chaubeesavo kalakee avataaraa ||
ਤਾ ਕਰ ਕਹੋ ਪ੍ਰਸੰਗ ਸੁਧਾਰਾ ॥੧॥
ता कर कहो प्रसंग सुधारा ॥१॥
taa kar kaho prasa(n)g sudhaaraa ||1||
ਭਾਰਾਕ੍ਰਿਤ ਹੋਤ ਜਬ ਧਰਣੀ ॥
भाराकृत होत जब धरणी ॥
bhaaraakirat hot jab dharanee ||
ਪਾਪ ਗ੍ਰਸਤ ਕਛੁ ਜਾਤ ਨ ਬਰਣੀ ॥
पाप ग्रसत कछु जात न बरणी ॥
paap grasat kachh jaat na baranee ||
ਭਾਤਿ ਭਾਤਿ ਤਨ ਹੋਤ ਉਤਪਾਤਾ ॥
भाति भाति तन होत उतपाता ॥
bhaat bhaat tan hot utapaataa ||
ਪੁਤ੍ਰਹਿ ਸੇਜਿ ਸੋਵਤ ਲੈ ਮਾਤਾ ॥੨॥
पुत्रहि सेजि सोवत लै माता ॥२॥
putreh sej sovat lai maataa ||2||
ਸੁਤਾ ਪਿਤਾ ਤਨ ਰਮਤ ਨਿਸੰਕਾ ॥
सुता पिता तन रमत निसंका ॥
sutaa pitaa tan ramat nisa(n)kaa ||
ਭਗਨੀ ਭਰਤ ਭ੍ਰਾਤ ਕਹੁ ਅੰਕਾ ॥
भगनी भरत भ्रात कहु अंका ॥
bhaganee bharat bhraat kahu a(n)kaa ||
ਭ੍ਰਾਤ ਬਹਨ ਤਨ ਕਰਤ ਬਿਹਾਰਾ ॥
भ्रात बहन तन करत बिहारा ॥
bhraat bahan tan karat bihaaraa ||
ਇਸਤ੍ਰੀ ਤਜੀ ਸਕਲ ਸੰਸਾਰਾ ॥੩॥
इसत्री तजी सकल संसारा ॥३॥
eisatree tajee sakal sa(n)saaraa ||3||
ਸੰਕਰ ਬਰਣ ਪ੍ਰਜਾ ਸਭ ਹੋਈ ॥
संकर बरण प्रजा सभ होई ॥
sa(n)kar baran prajaa sabh hoiee ||
ਏਕ ਗ੍ਰਯਾਤ ਕੋ ਰਹਾ ਨ ਕੋਈ ॥
एक ग्रयात को रहा न कोई ॥
ek grayaat ko rahaa na koiee ||
ਅਤਿ ਬਿਭਚਾਰ ਫਸੀ ਬਰ ਨਾਰੀ ॥
अति बिभचार फसी बर नारी ॥
at bibhachaar fasee bar naaree ||
ਧਰਮ ਰੀਤ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਬਿਸਾਰੀ ॥੪॥
धरम रीत की प्रीति बिसारी ॥४॥
dharam reet kee preet bisaaree ||4||
ਘਰਿ ਘਰਿ ਝੂਠ ਅਮਸਿਆ ਭਈ ॥
घरि घरि झूठ अमसिआ भई ॥
ghar ghar jhooTh amasiaa bhiee ||
ਸਾਚ ਕਲਾ ਸਸਿ ਕੀ ਦੁਰ ਗਈ ॥
साच कला ससि की दुर गई ॥
saach kalaa sas kee dhur giee ||
ਜਹ ਤਹ ਹੋਨ ਲਗੇ ਉਤਪਾਤਾ ॥
जह तह होन लगे उतपाता ॥
jeh teh hon lage utapaataa ||
ਭੋਗਤ ਪੂਤ ਸੇਜਿ ਚੜਿ ਮਾਤਾ ॥੫॥
भोगत पूत सेजि चड़ि माता ॥५॥
bhogat poot sej chaR maataa ||5||
ਢੂੰਢਤ ਸਾਚ ਨ ਕਤਹੂੰ ਪਾਯਾ ॥
ढूँढत साच न कतहूँ पाया ॥
ddoo(n)ddat saach na katahoo(n) paayaa ||
ਝੂਠ ਹੀ ਸੰਗ ਸਬੋ ਚਿਤ ਲਾਯਾ ॥
झूठ ही संग सबो चित लाया ॥
jhooTh hee sa(n)g sabo chit laayaa ||
ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਗ੍ਰਿਹ ਗ੍ਰਿਹ ਮਤ ਹੋਈ ॥
भिंन भिंन गृह गृह मत होई ॥
bhi(n)n bhi(n)n gireh gireh mat hoiee ||
ਸਾਸਤ੍ਰ ਸਿਮ੍ਰਿਤ ਛੁਐ ਨ ਕੋਈ ॥੬॥
सासत्र सिमृत छुऐ न कोई ॥६॥
saasatr simirat chhuaai na koiee ||6||
ਹਿੰਦਵ ਕੋਈ ਨ ਤੁਰਕਾ ਰਹਿ ਹੈ ॥
हिंदव कोई न तुरका रहि है ॥
hi(n)dhav koiee na turakaa reh hai ||
ਭਿਨ ਭਿਨ ਘਰਿ ਘਰਿ ਮਤ ਗਹਿ ਹੈ ॥
भिन भिन घरि घरि मत गहि है ॥
bhin bhin ghar ghar mat geh hai ||
ਏਕ ਏਕ ਕੇ ਪੰਥ ਨ ਚਲਿ ਹੈ ॥
एक एक के पंथ न चलि है ॥
ek ek ke pa(n)th na chal hai ||
ਏਕ ਏਕ ਕੀ ਬਾਤ ਉਥਲਿ ਹੈ ॥੭॥
एक एक की बात उथलि है ॥७॥
ek ek kee baat uthal hai ||7||
ਭਾਰਾਕ੍ਰਿਤ ਧਰਾ ਸਬ ਹੁਇ ਹੈ ॥
भाराकृत धरा सब हुइ है ॥
bhaaraakirat dharaa sab hui hai ||
ਧਰਮ ਕਰਮ ਪਰ ਚਲੈ ਨ ਕੁਇ ਹੈ ॥
धरम करम पर चलै न कुइ है ॥
dharam karam par chalai na kui hai ||
ਘਰਿ ਘਰਿ ਅਉਰ ਅਉਰ ਮਤ ਹੋਈ ॥
घरि घरि अउर अउर मत होई ॥
ghar ghar aaur aaur mat hoiee ||
ਏਕ ਧਰਮ ਪਰ ਚਲੈ ਨ ਕੋਈ ॥੮॥
एक धरम पर चलै न कोई ॥८॥
ek dharam par chalai na koiee ||8||
ਦੋਹਰਾ ॥
दोहरा ॥
dhoharaa ||
ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਘਰਿ ਘਰਿ ਮਤੋ ਏਕ ਨ ਚਲ ਹੈ ਕੋਇ ॥
भिंन भिंन घरि घरि मतो एक न चल है कोइ ॥
bhi(n)n bhi(n)n ghar ghar mato ek na chal hai koi ||
ਪਾਪ ਪ੍ਰਚੁਰ ਜਹ ਤਹ ਭਯੋ ਧਰਮ ਨ ਕਤਹੂੰ ਹੋਇ ॥੯॥
पाप प्रचुर जह तह भयो धरम न कतहूँ होइ ॥९॥
paap prachur jeh teh bhayo dharam na katahoo(n) hoi ||9||
ਚੌਪਈ ॥
चौपई ॥
chauapiee ||
ਸੰਕਰ ਬਰਣ ਪ੍ਰਜਾ ਸਭ ਹੋਈ ॥
संकर बरण प्रजा सभ होई ॥
sa(n)kar baran prajaa sabh hoiee ||
ਛਤ੍ਰੀ ਜਗਤਿ ਨ ਦੇਖੀਐ ਕੋਈ ॥
छत्री जगति न देखीऐ कोई ॥
chhatree jagat na dhekheeaai koiee ||
ਏਕ ਏਕ ਐਸੇ ਮਤ ਕੈ ਹੈ ॥
एक एक ऐसे मत कै है ॥
ek ek aaise mat kai hai ||
ਜਾ ਤੇ ਪ੍ਰਾਪਤਿ ਸੂਦ੍ਰਤਾ ਹੋਇ ਹੈ ॥੧੦॥
जा ते प्रापति सूद्रता होइ है ॥१०॥
jaa te praapat soodhrataa hoi hai ||10||
ਹਿੰਦੂ ਤੁਰਕ ਮਤ ਦੁਹੂੰ ਪ੍ਰਹਰਿ ਕਰਿ ॥
हिंदू तुरक मत दुहूँ प्रहरि करि ॥
hi(n)dhoo turak mat dhuhoo(n) prahar kar ||
ਚਲਿ ਹੈ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਮਤ ਘਰਿ ਘਰਿ ॥
चलि है भिंन भिंन मत घरि घरि ॥
chal hai bhi(n)n bhi(n)n mat ghar ghar ||
ਏਕ ਏਕ ਕੇ ਮੰਤ੍ਰ ਨ ਗਹਿ ਹੈ ॥
एक एक के मंत्र न गहि है ॥
ek ek ke ma(n)tr na geh hai ||
ਏਕ ਏਕ ਕੇ ਸੰਗਿ ਨ ਰਹਿ ਹੈ ॥੧੧॥
एक एक के संगि न रहि है ॥११॥
ek ek ke sa(n)g na reh hai ||11||
ਆਪੁ ਆਪੁ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਕਹੈ ਹੈ ॥
आपु आपु पारब्रहम कहै है ॥
aap aap paarabraham kahai hai ||
ਨੀਚ ਊਚ ਕਹ ਸੀਸ ਨ ਨੈ ਹੈ ॥
नीच ऊच कह सीस न नै है ॥
neech uooch keh sees na nai hai ||
ਏਕ ਏਕ ਮਤ ਇਕ ਇਕ ਧਾਮਾ ॥
एक एक मत इक इक धामा ॥
ek ek mat ik ik dhaamaa ||
ਘਰਿ ਘਰਿ ਹੋਇ ਬੈਠ ਹੈ ਰਾਮਾ ॥੧੨॥
घरि घरि होइ बैठ है रामा ॥१२॥
ghar ghar hoi baiTh hai raamaa ||12||
ਪੜਿ ਹੈ ਕੋਇ ਨ ਭੂਲਿ ਪੁਰਾਨਾ ॥
पड़ि है कोइ न भूलि पुराना ॥
paR hai koi na bhool puraanaa ||
ਕੋਊ ਨ ਪਕਰ ਹੈ ਪਾਨਿ ਕੁਰਾਨਾ ॥
कोऊ न पकर है पानि कुराना ॥
kouoo na pakar hai paan kuraanaa ||
ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਜਵਨ ਕਰਿ ਲਹਿ ਹੈ ॥
बेद कतेब जवन करि लहि है ॥
bedh kateb javan kar leh hai ||
ਤਾ ਕਹੁ ਗੋਬਰਾਗਨਿ ਮੋ ਦਹਿ ਹੈ ॥੧੩॥
ता कहु गोबरागनि मो दहि है ॥१३॥
taa kahu gobaraagan mo dheh hai ||13||
ਚਲੀ ਪਾਪ ਕੀ ਜਗਤਿ ਕਹਾਨੀ ॥
चली पाप की जगति कहानी ॥
chalee paap kee jagat kahaanee ||
ਭਾਜਾ ਧਰਮ ਛਾਡ ਰਜਧਾਨੀ ॥
भाजा धरम छाड रजधानी ॥
bhaajaa dharam chhaadd rajadhaanee ||
ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਘਰਿ ਘਰਿ ਮਤ ਚਲਾ ॥
भिंन भिंन घरि घरि मत चला ॥
bhi(n)n bhi(n)n ghar ghar mat chalaa ||
ਯਾ ਤੇ ਧਰਮ ਭਰਮਿ ਉਡਿ ਟਲਾ ॥੧੪॥
या ते धरम भरमि उडि टला ॥१४॥
yaa te dharam bharam udd Talaa ||14||
ਏਕ ਏਕ ਮਤ ਐਸ ਉਚੈ ਹੈ ॥
एक एक मत ऐस उचै है ॥
ek ek mat aais uchai hai ||
ਜਾ ਤੇ ਸਕਲ ਸੂਦ੍ਰ ਹੁਇ ਜੈ ਹੈ ॥
जा ते सकल सूद्र हुइ जै है ॥
jaa te sakal soodhr hui jai hai ||
ਛਤ੍ਰੀ ਬ੍ਰਹਮਨ ਰਹਾ ਨ ਕੋਈ ॥
छत्री ब्रहमन रहा न कोई ॥
chhatree brahaman rahaa na koiee ||
ਸੰਕਰ ਬਰਨ ਪ੍ਰਜਾ ਸਬ ਹੋਈ ॥੧੫॥
संकर बरन प्रजा सब होई ॥१५॥
sa(n)kar baran prajaa sab hoiee ||15||
ਸੂਦ੍ਰ ਧਾਮਿ ਬਸਿ ਹੈ ਬ੍ਰਹਮਣੀ ॥
सूद्र धामि बसि है ब्रहमणी ॥
soodhr dhaam bas hai brahamanee ||
ਬਈਸ ਨਾਰਿ ਹੋਇ ਹੈ ਛਤ੍ਰਨੀ ॥
बईस नारि होइ है छत्रनी ॥
biees naar hoi hai chhatranee ||
ਬਸਿ ਹੈ ਛਤ੍ਰਿ ਧਾਮਿ ਬੈਸਾਨੀ ॥
बसि है छतृ धामि बैसानी ॥
bas hai chhatr dhaam baisaanee ||
ਬ੍ਰਹਮਨ ਗ੍ਰਿਹ ਇਸਤ੍ਰੀ ਸੂਦ੍ਰਾਨੀ ॥੧੬॥
ब्रहमन गृह इसत्री सूद्रानी ॥१६॥
brahaman gireh isatree soodhraanee ||16||
ਏਕ ਧਰਮ ਪਰ ਪ੍ਰਜਾ ਨ ਚਲ ਹੈ ॥
एक धरम पर प्रजा न चल है ॥
ek dharam par prajaa na chal hai ||
ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਦੋਊ ਮਤ ਦਲ ਹੈ ॥
बेद कतेब दोऊ मत दल है ॥
bedh kateb dhouoo mat dhal hai ||
ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਮਤ ਘਰਿ ਘਰਿ ਹੋਈ ॥
भिंन भिंन मत घरि घरि होई ॥
bhi(n)n bhi(n)n mat ghar ghar hoiee ||
ਏਕ ਪੈਂਡ ਚਲ ਹੈ ਨਹੀ ਕੋਈ ॥੧੭॥
एक पैंड चल है नही कोई ॥१७॥
ek pai(n)dd chal hai nahee koiee ||17||
ਗੀਤਾ ਮਾਲਤੀ ਛੰਦ ॥
गीता मालती छंद ॥
geetaa maalatee chha(n)dh ||
ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਮਤੋ ਘਰੋ ਘਰਿ ਏਕ ਏਕ ਚਲਾਇ ਹੈ ॥
भिंन भिंन मतो घरो घरि एक एक चलाइ है ॥
bhi(n)n bhi(n)n mato gharo ghar ek ek chalai hai ||
ਐਂਡ ਬੈਂਡ ਫਿਰੈ ਸਬੈ ਸਿਰ ਏਕ ਏਕ ਨ ਨ੍ਯਾਇ ਹੈ ॥
ऐंड बैंड फिरै सबै सिर एक एक न न्याइ है ॥
aai(n)dd bai(n)dd firai sabai sir ek ek na nayai hai ||
ਪੁਨਿ ਅਉਰ ਅਉਰ ਨਏ ਨਏ ਮਤ ਮਾਸਿ ਮਾਸਿ ਉਚਾਹਿਾਂਗੇ ॥
पुनि अउर अउर नए नए मत मासि मासि उचाहिाँगे ॥
pun aaur aaur ne ne mat maas maas uchaahiaa(n)ge ||
ਦੇਵ ਪਿਤਰਨ ਪੀਰ ਕੋ ਨਹਿ ਭੂਲਿ ਪੂਜਨ ਜਾਹਿਾਂਗੇ ॥੧੮॥
देव पितरन पीर को नहि भूलि पूजन जाहिाँगे ॥१८॥
dhev pitaran peer ko neh bhool poojan jaahiaa(n)ge ||18||
ਦੇਵ ਪੀਰ ਬਿਸਾਰ ਕੈ ਪਰਮੇਸ੍ਰ ਆਪੁ ਕਹਾਹਿਾਂਗੇ ॥
देव पीर बिसार कै परमेस्र आपु कहाहिाँगे ॥
dhev peer bisaar kai paramesr aap kahaahiaa(n)ge ||
ਨਰ ਭਾਤਿ ਭਾਤਨ ਏਕ ਕੋ ਜੁਰਿ ਏਕ ਏਕ ਉਡਾਹਿਾਂਗੇ ॥
नर भाति भातन एक को जुरि एक एक उडाहिाँगे ॥
nar bhaat bhaatan ek ko jur ek ek uddaahiaa(n)ge ||
ਏਕ ਮਾਸ ਦੁਮਾਸ ਲੌ ਅਧ ਮਾਸ ਲੌ ਤੁ ਚਲਾਹਿਾਂਗੇ ॥
एक मास दुमास लौ अध मास लौ तु चलाहिाँगे ॥
ek maas dhumaas lau adh maas lau ta chalaahiaa(n)ge ||
ਅੰਤਿ ਬੂਬਰਿ ਪਾਨ ਜਿਉ ਮਤ ਆਪ ਹੀ ਮਿਟਿ ਜਾਹਿਾਂਗੇ ॥੧੯॥
अंति बूबरि पान जिउ मत आप ही मिटि जाहिाँगे ॥१९॥
a(n)t boobar paan jiau mat aap hee miT jaahiaa(n)ge ||19||
ਬੇਦ ਅਉਰ ਕਤੇਬ ਕੇ ਦੋ ਦੂਖ ਕੈ ਮਤ ਡਾਰਿ ਹੈ ॥
बेद अउर कतेब के दो दूख कै मत डारि है ॥
bedh aaur kateb ke dho dhookh kai mat ddaar hai ||
ਹਿਤ ਆਪਨੇ ਤਿਹ ਠਉਰ ਭੀਤਰ ਜੰਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰ ਉਚਾਰਿ ਹੈ ॥
हित आपने तिह ठउर भीतर जंत्र मंत्र उचारि है ॥
hit aapane teh Thaur bheetar ja(n)tr ma(n)tr uchaar hai ||
ਮੁਖ ਬੇਦ ਅਉਰ ਕਤੇਬ ਕੋ ਕੋਈ ਨਾਮ ਲੇਨ ਨ ਦੇਹਿਗੇ ॥
मुख बेद अउर कतेब को कोई नाम लेन न देहिगे ॥
mukh bedh aaur kateb ko koiee naam len na dhehige ||
ਕਿਸਹੂੰ ਨ ਕਉਡੀ ਪੁਨਿ ਤੇ ਕਬਹੂੰ ਨ ਕਿਉ ਹੀ ਦੇਹਗੇ ॥੨੦॥
किसहूँ न कउडी पुनि ते कबहूँ न किउ ही देहगे ॥२०॥
kisahoo(n) na kauddee pun te kabahoo(n) na kiau hee dhehage ||20||
ਪਾਪ ਕਰਮ ਕਰੈ ਜਹਾ ਤਹਾ ਧਰਮ ਕਰਮ ਬਿਸਾਰਿ ਕੈ ॥
पाप करम करै जहा तहा धरम करम बिसारि कै ॥
paap karam karai jahaa tahaa dharam karam bisaar kai ||
ਨਹਿ ਦ੍ਰਬ ਦੇਖਤ ਛੋਡ ਹੈ ਲੈ ਪੁਤ੍ਰ ਮਿਤ੍ਰ ਸੰਘਾਰਿ ਕੈ ॥
नहि द्रब देखत छोड है लै पुत्र मित्र संघारि कै ॥
neh dhrab dhekhat chhodd hai lai putr mitr sa(n)ghaar kai ||
ਏਕਨੇਕ ਉਠਾਇ ਹੈ ਮਤਿ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਦਿਨੰ ਦਿਨਾ ॥
एकनेक उठाइ है मति भिंन भिंन दिनं दिना ॥
ekanek uThai hai mat bhi(n)n bhi(n)n dhina(n) dhinaa ||
ਫੋਕਟੰ ਧਰਮ ਸਬੈ ਕਲਿ ਕੇਵਲੰ ਪ੍ਰਭਣੰ ਬਿਨਾ ॥੨੧॥
फोकटं धरम सबै कलि केवलं प्रभणं बिना ॥२१॥
fokaTa(n) dharam sabai kal kevala(n) prabhana(n) binaa ||21||
ਇਕ ਦਿਵਸ ਚਲੈ ਕੋਊ ਮਤਿ ਦੋਇ ਦਿਉਸ ਚਲਾਹਿਗੇ ॥
इक दिवस चलै कोऊ मति दोइ दिउस चलाहिगे ॥
eik dhivas chalai kouoo mat dhoi dhiaus chalaahige ||
ਅੰਤਿ ਜੋਰਿ ਕੈ ਬਹਰੋ ਸਭੈ ਦਿਨ ਤੀਸਰੈ ਮਿਟ ਜਾਹਿਗੇ ॥
अंति जोरि कै बहरो सभै दिन तीसरै मिट जाहिगे ॥
a(n)t jor kai baharo sabhai dhin teesarai miT jaahige ||
ਪੁਨਿ ਅਉਰ ਅਉਰ ਉਚਾਹਿਗੇ ਮਤਣੋ ਗਤੰ ਚਤੁਰਥ ਦਿਨੰ ॥
पुनि अउर अउर उचाहिगे मतणो गतं चतुरथ दिनं ॥
pun aaur aaur uchaahige matano gata(n) chaturath dhina(n) ||
ਧਰਮ ਫੋਕਟਣੰ ਸਬੰ ਇਕ ਕੇਵਲੰ ਕਲਿਨੰ ਬਿਨੰ ॥੨੨॥
धरम फोकटणं सबं इक केवलं कलिनं बिनं ॥२२॥
dharam fokaTana(n) saba(n) ik kevala(n) kalina(n) bina(n) ||22||
ਛੰਦ ਬੰਦ ਜਹਾ ਤਹਾ ਨਰ ਨਾਰਿ ਨਿਤ ਨਏ ਕਰਹਿ ॥
छंद बंद जहा तहा नर नारि नित नए करहि ॥
chha(n)dh ba(n)dh jahaa tahaa nar naar nit ne kareh ||
ਪੁਨਿ ਜੰਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰ ਜਹਾ ਤਹਾ ਨਹੀ ਤੰਤ੍ਰ ਕਰਤ ਕਛੂ ਡਰਹਿ ॥
पुनि जंत्र मंत्र जहा तहा नही तंत्र करत कछू डरहि ॥
pun ja(n)tr ma(n)tr jahaa tahaa nahee ta(n)tr karat kachhoo ddareh ||
ਧਰਮ ਛਤ੍ਰ ਉਤਾਰ ਕੈ ਰਨ ਛੋਰਿ ਛਤ੍ਰੀ ਭਾਜ ਹੈ ॥
धरम छत्र उतार कै रन छोरि छत्री भाज है ॥
dharam chhatr utaar kai ran chhor chhatree bhaaj hai ||
ਸੂਦ੍ਰ ਬੈਸ ਜਹਾ ਤਹਾ ਗਹਿ ਅਸਤ੍ਰ ਆਹਵ ਗਾਜ ਹੈ ॥੨੩॥
सूद्र बैस जहा तहा गहि असत्र आहव गाज है ॥२३॥
soodhr bais jahaa tahaa geh asatr aahav gaaj hai ||23||
ਛਤ੍ਰੀਆਨੀ ਛੋਰ ਕੈ ਨਰ ਨਾਹ ਨੀਚਨਿ ਰਾਵ ਹੈ ॥
छत्रीआनी छोर कै नर नाह नीचनि राव है ॥
chhatreeaanee chhor kai nar naeh neechan raav hai ||
ਤਜਿ ਰਾਜ ਅਉਰ ਸਮਾਜ ਕੋ ਗ੍ਰਿਹਿ ਨੀਚਿ ਰਾਨੀ ਜਾਵ ਹੈ ॥
तजि राज अउर समाज को गृहि नीचि रानी जाव है ॥
taj raaj aaur samaaj ko gireh neech raanee jaav hai ||
ਸੂਦ੍ਰ ਬ੍ਰਹਮ ਸੁਤਾ ਭਏ ਰਤਿ ਬ੍ਰਹਮ ਸੂਦ੍ਰੀ ਹੋਹਿਗੇ ॥
सूद्र ब्रहम सुता भए रति ब्रहम सूद्री होहिगे ॥
soodhr braham sutaa bhe rat braham soodhree hohige ||
ਬੇਸਿਯਾ ਬਾਲ ਬਿਲੋਕ ਕੈ ਮੁਨਿ ਰਾਜ ਧੀਰਜ ਖੋਹਿਗੇ ॥੨੪॥
बेसिया बाल बिलोक कै मुनि राज धीरज खोहिगे ॥२४॥
besiyaa baal bilok kai mun raaj dheeraj khohige ||24||
ਧਰਮ ਭਰਮਿ ਉਡ੍ਯੋ ਜਹਾ ਤਹਾ ਪਾਪ ਪਗ ਪਗ ਪਰ ਹੋਹਿਗੇ ॥
धरम भरमि उड्यो जहा तहा पाप पग पग पर होहिगे ॥
dharam bharam uddayo jahaa tahaa paap pag pag par hohige ||
ਨਿਜ ਸਿਖ ਨਾਰਿ ਗੁਰੂ ਰਮੈ ਗੁਰ ਦਾਰਾ ਸੋ ਸਿਖ ਸੋਹਿਗੇ ॥
निज सिख नारि गुरू रमै गुर दारा सो सिख सोहिगे ॥
nij sikh naar guroo ramai gur dhaaraa so sikh sohige ||
ਅਬਿਬੇਕ ਅਉਰ ਬਿਬੇਕ ਕੋ ਨ ਬਿਬੇਕ ਬੈਠਿ ਬਿਚਾਰ ਹੈ ॥
अबिबेक अउर बिबेक को न बिबेक बैठि बिचार है ॥
abibek aaur bibek ko na bibek baiTh bichaar hai ||
ਪੁਨਿ ਝੂਠ ਬੋਲਿ ਕਮਾਹਿਗੇ ਸਿਰ ਸਾਚ ਬੋਲ ਉਤਾਰ ਹੈ ॥੨੫॥
पुनि झूठ बोलि कमाहिगे सिर साच बोल उतार है ॥२५॥
pun jhooTh bol kamaahige sir saach bol utaar hai ||25||
ਬ੍ਰਿਧ ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥
बृध नराज छंद ॥
biradh naraaj chha(n)dh ||
ਅਕ੍ਰਿਤ ਕ੍ਰਿਤ ਕਾਰਣੋ ਅਨਿਤ ਨਿਤ ਹੋਹਿਗੇ ॥
अकृत कृत कारणो अनित नित होहिगे ॥
akirat kirat kaarano anit nit hohige ||
ਤਿਆਗਿ ਧਰਮਣੋ ਤ੍ਰੀਅੰ ਕੁਨਾਰਿ ਸਾਧ ਜੋਹਿਗੇ ॥
तिआगि धरमणो त्रीअं कुनारि साध जोहिगे ॥
tiaag dharamano treea(n) kunaar saadh johige ||
ਪਵਿਤ੍ਰ ਚਿਤ੍ਰ ਚਿਤ੍ਰਤੰ ਬਚਿਤ੍ਰ ਮਿਤ੍ਰ ਧੋਹਿਗੇ ॥
पवित्र चित्र चित्रतं बचित्र मित्र धोहिगे ॥
pavitr chitr chitrata(n) bachitr mitr dhohige ||
ਅਮਿਤ੍ਰ ਮਿਤ੍ਰ ਭਾਵਣੋ ਸੁਮਿਤ੍ਰ ਅਮਿਤ੍ਰ ਹੋਹਿਗੇ ॥੨੬॥
अमित्र मित्र भावणो सुमित्र अमित्र होहिगे ॥२६॥
amitr mitr bhaavano sumitr amitr hohige ||26||
ਕਲ੍ਰਯੰ ਕ੍ਰਿਤੰ ਕਰੰਮਣੋ ਅਭਛ ਭਛ ਜਾਹਿਗੇ ॥
कल्रयं कृतं करंमणो अभछ भछ जाहिगे ॥
kalraya(n) kirata(n) kara(n)mano abhachh bhachh jaahige ||
ਅਕੱਜ ਕੱਜਣੋ ਨਰੰ ਅਧਰਮ ਧਰਮ ਪਾਹਿਗੇ ॥
अकज्ज कज्जणो नरं अधरम धरम पाहिगे ॥
aka'j ka'jano nara(n) adharam dharam paahige ||
ਸੁਧਰਮ ਧਰਮ ਧੋਹਿ ਹੈ ਧ੍ਰਿਤੰ ਧਰਾ ਧਰੇਸਣੰ ॥
सुधरम धरम धोहि है धृतं धरा धरेसणं ॥
sudharam dharam dhoh hai dhirata(n) dharaa dharesana(n) ||
ਅਧਰਮ ਧਰਮਣੋ ਧ੍ਰਿਤੰ ਕੁਕਰਮ ਕਰਮਣੋ ਕ੍ਰਿਤੰ ॥੨੭॥
अधरम धरमणो धृतं कुकरम करमणो कृतं ॥२७॥
adharam dharamano dhirata(n) kukaram karamano kirata(n) ||27||
ਕਿ ਉਲੰਘਿ ਧਰਮ ਕਰਮਣੋ ਅਧਰਮ ਧਰਮ ਬਿਆਪ ਹੈ ॥
कि उलंघि धरम करमणो अधरम धरम बिआप है ॥
k ula(n)gh dharam karamano adharam dharam biaap hai ||
ਸੁ ਤਿਆਗਿ ਜੱਗਿ ਜਾਪਣੋ ਅਜੋਗ ਜਾਪ ਜਾਪ ਹੈ ॥
सु तिआगि जग्गि जापणो अजोग जाप जाप है ॥
s tiaag ja'g jaapano ajog jaap jaap hai ||
ਸੁ ਧਰਮ ਕਰਮਣੰ ਭਯੋ ਅਧਰਮ ਕਰਮ ਨਿਰਭ੍ਰਮੰ ॥
सु धरम करमणं भयो अधरम करम निरभ्रमं ॥
s dharam karamana(n) bhayo adharam karam nirabhrama(n) ||
ਸੁ ਸਾਧ ਸੰਕ੍ਰਤੰ ਚਿਤੰ ਅਸਾਧ ਨਿਰਭਯੰ ਡੁਲੰ ॥੨੮॥
सु साध संक्रतं चितं असाध निरभयं डुलं ॥२८॥
s saadh sa(n)krata(n) chita(n) asaadh nirabhaya(n) ddula(n) ||28||
ਅਧਰਮ ਕਰਮਣੋ ਕ੍ਰਿਤੰ ਸੁ ਧਰਮ ਕਰਮਣੋ ਤਜੰ ॥
अधरम करमणो कृतं सु धरम करमणो तजं ॥
adharam karamano kirata(n) su dharam karamano taja(n) ||
ਪ੍ਰਹਰਖ ਬਰਖਣੰ ਧਨੰ ਨ ਕਰਖ ਸਰਬਤੋ ਨ੍ਰਿਪੰ ॥
प्रहरख बरखणं धनं न करख सरबतो नृपं ॥
praharakh barakhana(n) dhana(n) na karakh sarabato nirapa(n) ||
ਅਕੱਜ ਕੱਜਣੋ ਕ੍ਰਿਤੰ ਨ੍ਰਿੱਲਜ ਸਰਬਤੋ ਫਿਰੰ ॥
अकज्ज कज्जणो कृतं नृल्लज सरबतो फिरं ॥
aka'j ka'jano kirata(n) nira'laj sarabato fira(n) ||
ਅਨਰਥ ਬਰਤਿਤੰ ਭੂਅੰ ਨ ਅਰਥ ਕਥਤੰ ਨਰੰ ॥੨੯॥
अनरथ बरतितं भूअं न अरथ कथतं नरं ॥२९॥
anarath baratita(n) bhooa(n) na arath kathata(n) nara(n) ||29||
ਤਰਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥
तरनराज छंद ॥
taranaraaj chha(n)dh ||
ਬਰਨ ਹੈ ਅਬਰਨ ਕੋ ॥
बरन है अबरन को ॥
baran hai abaran ko ||
ਛਾਡਿ ਹਰਿ ਸਰਨ ਕੋ ॥੩੦॥
छाडि हरि सरन को ॥३०॥
chhaadd har saran ko ||30||
ਛਾਡਿ ਸੁਭ ਸਾਜ ਕੋ ॥
छाडि सुभ साज को ॥
chhaadd subh saaj ko ||
ਲਾਗ ਹੈ ਅਕਾਜ ਕੋ ॥੩੧॥
लाग है अकाज को ॥३१॥
laag hai akaaj ko ||31||
ਤ੍ਯਾਗ ਹੈ ਨਾਮ ਕੋ ॥
त्याग है नाम को ॥
tayaag hai naam ko ||
ਲਾਗ ਹੈ ਕਾਮ ਕੋ ॥੩੨॥
लाग है काम को ॥३२॥
laag hai kaam ko ||32||
ਲਾਜ ਕੋ ਛੋਰ ਹੈ ॥
लाज को छोर है ॥
laaj ko chhor hai ||
ਦਾਨਿ ਮੁਖ ਮੋਰ ਹੈ ॥੩੩॥
दानि मुख मोर है ॥३३॥
dhaan mukh mor hai ||33||
ਚਰਨ ਨਹੀ ਧਿਆਇ ਹੈ ॥
चरन नही धिआइ है ॥
charan nahee dhiaai hai ||
ਦੁਸਟ ਗਤਿ ਪਾਇ ਹੈ ॥੩੪॥
दुसट गति पाइ है ॥३४॥
dhusaT gat pai hai ||34||
ਨਰਕ ਕਹੁ ਜਾਹਿਗੇ ॥
नरक कहु जाहिगे ॥
narak kahu jaahige ||
ਅੰਤਿ ਪਛੁਤਾਹਿਗੇ ॥੩੫॥
अंति पछुताहिगे ॥३५॥
a(n)t pachhutaahige ||35||
ਧਰਮ ਕਹਿ ਖੋਹਿਗੇ ॥
धरम कहि खोहिगे ॥
dharam keh khohige ||
ਪਾਪ ਕਰ ਰੋਹਿਗੈ ॥੩੬॥
पाप कर रोहिगै ॥३६॥
paap kar rohigai ||36||
ਨਰਕਿ ਪੁਨਿ ਬਾਸ ਹੈ ॥
नरकि पुनि बास है ॥
narak pun baas hai ||
ਤ੍ਰਾਸ ਜਮ ਤ੍ਰਾਸ ਹੈ ॥੩੭॥
त्रास जम त्रास है ॥३७॥
traas jam traas hai ||37||
ਕੁਮਾਰਿ ਲਲਤ ਛੰਦ ॥
कुमारि ललत छंद ॥
kumaar lalat chha(n)dh ||
ਅਧਰਮ ਕਰਮ ਕੈ ਹੈ ॥
अधरम करम कै है ॥
adharam karam kai hai ||
ਨ ਭੂਲ ਨਾਮ ਲੈ ਹੈ ॥
न भूल नाम लै है ॥
n bhool naam lai hai ||
ਕਿਸੂ ਨ ਦਾਨ ਦੇਹਿਗੇ ॥
किसू न दान देहिगे ॥
kisoo na dhaan dhehige ||
ਸੁ ਸਾਧ ਲੂਟਿ ਲੇਹਿਗੇ ॥੩੮॥
सु साध लूटि लेहिगे ॥३८॥
s saadh looT lehige ||38||
ਨ ਦੇਹ ਫੇਰਿ ਲੈ ਕੈ ॥
न देह फेरि लै कै ॥
n dheh fer lai kai ||
ਨ ਦੇਹ ਦਾਨ ਕੈ ਕੈ ॥
न देह दान कै कै ॥
n dheh dhaan kai kai ||
ਹਰਿ ਨਾਮ ਕੌ ਨ ਲੈ ਹੈ ॥
हरि नाम कौ न लै है ॥
har naam kau na lai hai ||
ਬਿਸੇਖ ਨਰਕਿ ਜੈ ਹੈ ॥੩੯॥
बिसेख नरकि जै है ॥३९॥
bisekh narak jai hai ||39||
ਨ ਧਰਮ ਠਾਢਿ ਰਹਿ ਹੈ ॥
न धरम ठाढि रहि है ॥
n dharam Thaadd reh hai ||
ਕਰੈ ਨ ਜਉਨ ਕਹਿ ਹੈ ॥
करै न जउन कहि है ॥
karai na jaun keh hai ||
ਨ ਪ੍ਰੀਤਿ ਮਾਤ ਸੰਗਾ ॥
न प्रीति मात संगा ॥
n preet maat sa(n)gaa ||
ਅਧੀਨ ਅਰਧੰਗਾ ॥੪੦॥
अधीन अरधंगा ॥४०॥
adheen aradha(n)gaa ||40||
ਅਭੱਛ ਭੱਛ ਭਛੈ ॥
अभच्छ भच्छ भछै ॥
abha'chh bha'chh bhachhai ||
ਅਕੱਛ ਕਾਛ ਕੱਛੈ ॥
अकच्छ काछ कच्छै ॥
aka'chh kaachh ka'chhai ||
ਅਭਾਖ ਬੈਨ ਭਾਖੈ ॥
अभाख बैन भाखै ॥
abhaakh bain bhaakhai ||
ਕਿਸੂ ਨ ਕਾਣਿ ਰਾਖੈ ॥੪੧॥
किसू न काणि राखै ॥४१॥
kisoo na kaan raakhai ||41||
ਅਧਰਮ ਕਰਮ ਕਰ ਹੈ ॥
अधरम करम कर है ॥
adharam karam kar hai ||
ਨ ਤਾਤ ਮਾਤ ਡਰਿ ਹੈ ॥
न तात मात डरि है ॥
n taat maat ddar hai ||
ਕੁਮੰਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰ ਕੈ ਹੈ ॥
कुमंत्र मंत्र कै है ॥
kuma(n)tr ma(n)tr kai hai ||
ਸੁਮੰਤ੍ਰ ਕੋ ਨ ਲੈ ਹੈ ॥੪੨॥
सुमंत्र को न लै है ॥४२॥
suma(n)tr ko na lai hai ||42||
ਅਧਰਮ ਕਰਮ ਕੈ ਹੈ ॥
अधरम करम कै है ॥
adharam karam kai hai ||
ਸੁ ਭਰਮ ਧਰਮ ਖੁਐ ਹੈ ॥
सु भरम धरम खुऐ है ॥
s bharam dharam khuaai hai ||
ਸੁ ਕਾਲ ਫਾਸਿ ਫਸ ਹੈ ॥
सु काल फासि फस है ॥
s kaal faas fas hai ||
ਨਿਦਾਨ ਨਰਕ ਬਸਿ ਹੈ ॥੪੩॥
निदान नरक बसि है ॥४३॥
nidhaan narak bas hai ||43||
ਕੁਕਰਮ ਕਰਮ ਲਾਗੇ ॥
कुकरम करम लागे ॥
kukaram karam laage ||
ਸੁਧਰਮ ਛਾਡਿ ਭਾਗੇ ॥
सुधरम छाडि भागे ॥
sudharam chhaadd bhaage ||
ਕਮਾਤ ਨਿੱਤ ਪਾਪੰ ॥
कमात नित्त पापं ॥
kamaat ni't paapa(n) ||
ਬਿਸਾਰਿ ਸਰਬ ਜਾਪੰ ॥੪੪॥
बिसारि सरब जापं ॥४४॥
bisaar sarab jaapa(n) ||44||
ਸੁ ਮੱਦ ਮੋਹ ਮੱਤੇ ॥
सु मद्द मोह मत्ते ॥
s ma'dh moh ma'te ||
ਸੁ ਕਰਮ ਕੇ ਕੁਪੱਤੇ ॥
सु करम के कुपत्ते ॥
s karam ke kupa'te ||
ਸੁ ਕਾਮ ਕ੍ਰੋਧ ਰਾਚੇ ॥
सु काम क्रोध राचे ॥
s kaam krodh raache ||
ਉਤਾਰਿ ਲਾਜ ਨਾਚੇ ॥੪੫॥
उतारि लाज नाचे ॥४५॥
autaar laaj naache ||45||
ਨਗ ਸਰੂਪੀ ਛੰਦ ॥
नग सरूपी छंद ॥
nag saroopee chha(n)dh ||
ਨ ਧਰਮ ਕਰਮ ਕਉ ਕਰੈ ॥
न धरम करम कउ करै ॥
n dharam karam kau karai ||
ਬ੍ਰਿਥਾ ਕਥਾ ਸੁਨੈ ਰਰੈ ॥
बृथा कथा सुनै ररै ॥
birathaa kathaa sunai rarai ||
ਕੁਕਰਮ ਕਰਮਿ ਸੋ ਫਸੈ ॥
कुकरम करमि सो फसै ॥
kukaram karam so fasai ||
ਸਤਿ ਛਾਡਿ ਧਰਮ ਵਾ ਨਸੈ ॥੪੬॥
सति छाडि धरम वा नसै ॥४६॥
sat chhaadd dharam vaa nasai ||46||
ਪੁਰਾਣ ਕਾਬਿ ਨ ਪੜੈ ॥
पुराण काबि न पड़ै ॥
puraan kaab na paRai ||
ਕੁਰਾਨ ਲੈ ਨ ਤੇ ਰੜੈ ॥
कुरान लै न ते रड़ै ॥
kuraan lai na te raRai ||
ਅਧਰਮ ਕਰਮ ਕੋ ਕਰੈ ॥
अधरम करम को करै ॥
adharam karam ko karai ||
ਸੁ ਧਰਮ ਜਾਸੁ ਤੇ ਡਰੈ ॥੪੭॥
सु धरम जासु ते डरै ॥४७॥
s dharam jaas te ddarai ||47||
ਧਰਾਕਿ ਵਰਣਤਾ ਭਈ ॥
धराकि वरणता भई ॥
dharaak varanataa bhiee ||
ਸੁ ਭਰਮ ਧਰਮ ਕੀ ਗਈ ॥
सु भरम धरम की गई ॥
s bharam dharam kee giee ||
ਗ੍ਰਿਹੰ ਗ੍ਰਿਹੰ ਨਯੰ ਮਤੰ ॥
गृहं गृहं नयं मतं ॥
giraha(n) giraha(n) naya(n) mata(n) ||
ਚਲੇ ਭੂਅੰ ਜਥਾ ਤਥੰ ॥੪੮॥
चले भूअं जथा तथं ॥४८॥
chale bhooa(n) jathaa tatha(n) ||48||
ਗ੍ਰਿਹੰ ਗ੍ਰਿਹੰ ਨਏ ਮਤੰ ॥
गृहं गृहं नए मतं ॥
giraha(n) giraha(n) ne mata(n) ||
ਭਈ ਧਰੰ ਨਈ ਗਤੰ ॥
भई धरं नई गतं ॥
bhiee dhara(n) niee gata(n) ||
ਅਧਰਮ ਰਾਜਤਾ ਲਈ ॥
अधरम राजता लई ॥
adharam raajataa liee ||
ਨਿਕਾਰਿ ਧਰਮ ਦੇਸ ਦੀ ॥੪੯॥
निकारि धरम देस दी ॥४९॥
nikaar dharam dhes dhee ||49||
ਪ੍ਰਬੋਧ ਏਕ ਨ ਲਗੈ ॥
प्रबोध एक न लगै ॥
prabodh ek na lagai ||
ਸੁ ਧਰਮ ਅਧਰਮ ਤੇ ਭਗੈ ॥
सु धरम अधरम ते भगै ॥
s dharam adharam te bhagai ||
ਕੁਕਰਮ ਪ੍ਰਚੁਰਯੰ ਜਗੰ ॥
कुकरम प्रचुरयं जगं ॥
kukaram prachuraya(n) jaga(n) ||
ਸੁ ਕਰਮ ਪੰਖ ਕੈ ਭਗੰ ॥੫੦॥
सु करम पंख कै भगं ॥५०॥
s karam pa(n)kh kai bhaga(n) ||50||
ਪ੍ਰਪੰਚ ਪੰਚ ਹੁਇ ਗਡਾ ॥
प्रपंच पंच हुइ गडा ॥
prapa(n)ch pa(n)ch hui gaddaa ||
ਅਪ੍ਰਪੰਚ ਪੰਖ ਕੇ ਉਡਾ ॥
अप्रपंच पंख के उडा ॥
aprapa(n)ch pa(n)kh ke uddaa ||
ਕੁਕਰਮ ਬਿਚਰਤੰ ਜਗੰ ॥
कुकरम बिचरतं जगं ॥
kukaram bicharata(n) jaga(n) ||
ਸੁਕਰਮ ਸੁ ਭ੍ਰਮੰ ਭਗੰ ॥੫੧॥
सुकरम सु भ्रमं भगं ॥५१॥
sukaram su bhrama(n) bhaga(n) ||51||
ਰਮਾਣ ਛੰਦ ॥
रमाण छंद ॥
ramaan chha(n)dh ||
ਸੁਕ੍ਰਿਤੰ ਤਜਿਹੈ ॥
सुकृतं तजिहै ॥
sukirata(n) tajihai ||
ਕੁਕ੍ਰਿਤੰ ਭਜਿ ਹੈ ॥੫੨॥
कुकृतं भजि है ॥५२॥
kukirata(n) bhaj hai ||52||
ਭ੍ਰਮਣੰ ਭਰਿ ਹੈ ॥
भ्रमणं भरि है ॥
bhramana(n) bhar hai ||
ਜਸ ਤੇ ਟਰਿ ਹੈ ॥੫੩॥
जस ते टरि है ॥५३॥
jas te Tar hai ||53||
ਕਰਿ ਹੈ ਕੁਕ੍ਰਿਤੰ ॥
करि है कुकृतं ॥
kar hai kukirata(n) ||
ਰਰਿ ਹੈ ਅਨ੍ਰਿਥੰ ॥੫੪॥
ररि है अनृथं ॥५४॥
rar hai aniratha(n) ||54||
ਜਪ ਹੈ ਅਜਪੰ ॥
जप है अजपं ॥
jap hai ajapa(n) ||
ਕੁਥਪੇਣ ਥਪੰ ॥੫੫॥
कुथपेण थपं ॥५५॥
kuthapen thapa(n) ||55||
ਸੋਮਰਾਜੀ ਛੰਦ ॥
सोमराजी छंद ॥
somaraajee chha(n)dh ||
ਸੁਨੈ ਦੇਸਿ ਦੇਸੰ ਮੁਨੰ ਪਾਪ ਕਰਮਾ ॥
सुनै देसि देसं मुनं पाप करमा ॥
sunai dhes dhesa(n) muna(n) paap karamaa ||
ਚੁਨੈ ਜੂਠ ਕੂਠੰ ਸ੍ਰੁਤੰ ਛੋਰ ਧਰਮਾ ॥੫੬॥
चुनै जूठ कूठं स्रुतं छोर धरमा ॥५६॥
chunai jooTh kooTha(n) sruta(n) chhor dharamaa ||56||
ਤਜੈ ਧਰਮ ਨਾਰੀ ਤਕੈ ਪਾਪ ਨਾਰੰ ॥
तजै धरम नारी तकै पाप नारं ॥
tajai dharam naaree takai paap naara(n) ||
ਮਹਾ ਰੂਪ ਪਾਪੀ ਕੁਵਿਤ੍ਰਾਧਿਕਾਰੰ ॥੫੭॥
महा रूप पापी कुवित्राधिकारं ॥५७॥
mahaa roop paapee kuvitraadhikaara(n) ||57||
ਕਰੈ ਨਿਤ ਅਨਰਥੰ ਸਮਰਥੰ ਨ ਏਤੀ ॥
करै नित अनरथं समरथं न एती ॥
karai nit anaratha(n) samaratha(n) na etee ||
ਕਰੈ ਪਾਪ ਤੇਤੋ ਪਰਾਲਬਧ ਜੇਤੀ ॥੫੮॥
करै पाप तेतो परालबध जेती ॥५८॥
karai paap teto paraalabadh jetee ||58||
ਨਏ ਨਿੱਤ ਮੱਤੰ ਉਠੈ ਏਕ ਏਕੰ ॥
नए नित्त मत्तं उठै एक एकं ॥
ne ni't ma'ta(n) uThai ek eka(n) ||
ਕਰੈ ਨਿੰਤ ਅਨਰਥੰ ਅਨੇਕੰ ਅਨੇਕੰ ॥੫੯॥
करै निंत अनरथं अनेकं अनेकं ॥५९॥
karai ni(n)t anaratha(n) aneka(n) aneka(n) ||59||
ਪ੍ਰਿਯਾ ਛੰਦ ॥
पृया छंद ॥
pirayaa chha(n)dh ||
ਦੁਖ ਦੰਦ ਹੈ ਸੁਖਕੰਦ ਜੀ ॥
दुख दंद है सुखकंद जी ॥
dhukh dha(n)dh hai sukhaka(n)dh jee ||
ਨਹੀ ਬੰਧ ਹੈ ਜਗਬੰਦ ਜੀ ॥੬੦॥
नही बंध है जगबंद जी ॥६०॥
nahee ba(n)dh hai jagaba(n)dh jee ||60||
ਨਹੀ ਬੇਦ ਬਾਕ ਪ੍ਰਮਾਨ ਹੈ ॥
नही बेद बाक प्रमान है ॥
nahee bedh baak pramaan hai ||
ਮਤ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਬਖਾਨ ਹੈ ॥੬੧॥
मत भिंन भिंन बखान है ॥६१॥
mat bhi(n)n bhi(n)n bakhaan hai ||61||
ਨ ਕੁਰਾਨ ਕੋ ਮਤੁ ਲੇਹਗੇ ॥
न कुरान को मतु लेहगे ॥
n kuraan ko mat lehage ||
ਨ ਪੁਰਾਨ ਦੇਖਨ ਦੇਹਗੇ ॥੬੨॥
न पुरान देखन देहगे ॥६२॥
n puraan dhekhan dhehage ||62||
ਨਹੀ ਏਕ ਮੰਤ੍ਰਹਿ ਜਾਪ ਹੈ ॥
नही एक मंत्रहि जाप है ॥
nahee ek ma(n)treh jaap hai ||
ਦਿਨ ਦ੍ਵੈਕ ਥਾਪਨ ਥਾਪ ਹੈ ॥੬੩॥
दिन द्वैक थापन थाप है ॥६३॥
dhin dhavaik thaapan thaap hai ||63||
ਗਾਹਾ ਛੰਦੁ ਦੂਜਾ ॥
गाहा छंदु दूजा ॥
gaahaa chha(n)dh dhoojaa ||
ਕ੍ਰੀਅਤੰ ਪਾਪਣੋ ਕਰਮੰ ਨ ਅਧਰਮੰ ਭਰਮਣੰ ਤ੍ਰਸਤਾਇ ॥
क्रीअतं पापणो करमं न अधरमं भरमणं त्रसताइ ॥
kreeata(n) paapano karama(n) na adharama(n) bharamana(n) trasatai ||
ਕੁਕਰਮ ਕਰਮਾਕ੍ਰਿਤੰ ਨ ਦੇਵ ਲੋਕੇਣ ਪ੍ਰਾਪਤਹਿ ॥੬੪॥
कुकरम करमाकृतं न देव लोकेण प्रापतहि ॥६४॥
kukaram karamaakirata(n) na dhev loken praapateh ||64||
ਰਤ੍ਰਯੰ ਅਨਰਥੰ ਨਿਤ੍ਰਯੰ ਸੁਅਰਥ ਅਰਥਿੰ ਨ ਬੁਝਿਯਮ ॥
रत्रयं अनरथं नित्रयं सुअरथ अरथिं न बुझियम ॥
ratraya(n) anaratha(n) nitraya(n) suarath arathi(n) na bujhiyam ||
ਨ ਪ੍ਰਹਰਖ ਬਰਖਣੰ ਧਨਿਨੰ ਚਿਤੰ ਬਸੀਅ ਬਿਰਾਟਕੰ ॥੬੫॥
न प्रहरख बरखणं धनिनं चितं बसीअ बिराटकं ॥६५॥
n praharakh barakhana(n) dhanina(n) chita(n) baseea biraaTaka(n) ||65||
ਮਾਤਵੰ ਮਦ੍ਰਯੰ ਕੁਨਾਰੰ ਅਨਰਤੰ ਧਰਮਣੋ ਤ੍ਰੀਆਇ ॥
मातवं मद्रयं कुनारं अनरतं धरमणो त्रीआइ ॥
maatava(n) madhraya(n) kunaara(n) anarata(n) dharamano treeaai ||
ਕੁਕਰਮਣੋ ਕਥਤੰ ਬਦਿਤੰ ਲਜਿਣੋ ਤਜਤੰ ਨਰੰ ॥੬੬॥
कुकरमणो कथतं बदितं लजिणो तजतं नरं ॥६६॥
kukaramano kathata(n) badhita(n) lajino tajata(n) nara(n) ||66||
ਸਜ੍ਰਯੰ ਕੁਤਿਸਿਤੰ ਕਰਮੰ ਭਜਿਤੰ ਤਜਤੰ ਨ ਲਜਾ ॥
सज्रयं कुतिसितं करमं भजितं तजतं न लजा ॥
sajraya(n) kutisita(n) karama(n) bhajita(n) tajata(n) na lajaa ||
ਕੁਵਿਰਤੰ ਨਿਤਪ੍ਰਤਿ ਕ੍ਰਿਤਣੇ ਧਰਮ ਕਰਮੇਣ ਤਿਆਗਤੰ ॥੬੭॥
कुविरतं नितप्रति कृतणे धरम करमेण तिआगतं ॥६७॥
kuvirata(n) nitaprat kiratane dharam karamen tiaagata(n) ||67||
ਚਤੁਰਪਦੀ ਛੰਦ ॥
चतुरपदी छंद ॥
chaturapadhee chha(n)dh ||
ਕੁਕ੍ਰਿਤੰ ਨਿਤ ਕਰਿ ਹੈ ਸੁਕ੍ਰਿਤਾਨੁ ਨ ਸਰ ਹੈ ਅਘ ਓਘਨ ਰੁਚਿ ਰਾਚੇ ॥
कुकृतं नित करि है सुकृतानु न सर है अघ ओघन रुचि राचे ॥
kukirata(n) nit kar hai sukirataan na sar hai agh oghan ruch raache ||
ਮਾਨ ਹੈ ਨ ਬੇਦਨ ਸਿੰਮ੍ਰਿਤਿ ਕਤੇਬਨ ਲੋਕ ਲਾਜ ਤਜਿ ਨਾਚੇ ॥
मान है न बेदन सिंमृति कतेबन लोक लाज तजि नाचे ॥
maan hai na bedhan si(n)mirat kateban lok laaj taj naache ||
ਚੀਨ ਹੈ ਨ ਬਾਨੀ ਸੁਭਗ ਭਵਾਨੀ ਪਾਪ ਕਰਮ ਰਤਿ ਹੁਇ ਹੈ ॥
चीन है न बानी सुभग भवानी पाप करम रति हुइ है ॥
cheen hai na baanee subhag bhavaanee paap karam rat hui hai ||
ਗੁਰਦੇਵ ਨ ਮਾਨੈ ਭਲ ਨ ਬਖਾਨੈ ਅੰਤਿ ਨਰਕ ਕਹ ਜੈ ਹੈ ॥੬੮॥
गुरदेव न मानै भल न बखानै अंति नरक कह जै है ॥६८॥
gurdhev na maanai bhal na bakhaanai a(n)t narak keh jai hai ||68||
ਜਪ ਹੈ ਨ ਭਵਾਨੀ ਅਕਥ ਕਹਾਨੀ ਪਾਪ ਕਰਮ ਰਤਿ ਐਸੇ ॥
जप है न भवानी अकथ कहानी पाप करम रति ऐसे ॥
jap hai na bhavaanee akath kahaanee paap karam rat aaise ||
ਮਾਨਿ ਹੈ ਨ ਦੇਵੰ ਅਲਖ ਅਭੇਵੰ ਦੁਰਕ੍ਰਿਤੰ ਮੁਨਿ ਵਰ ਜੈਸੇ ॥
मानि है न देवं अलख अभेवं दुरकृतं मुनि वर जैसे ॥
maan hai na dheva(n) alakh abheva(n) dhurakirata(n) mun var jaise ||
ਚੀਨ ਹੈ ਨ ਬਾਤੰ ਪਰ ਤ੍ਰਿਯਾ ਰਾਤੰ ਧਰਮਣਿ ਕਰਮ ਉਦਾਸੀ ॥
चीन है न बातं पर तृया रातं धरमणि करम उदासी ॥
cheen hai na baata(n) par tirayaa raata(n) dharaman karam udhaasee ||
ਜਾਨਿ ਹੈ ਨ ਬਾਤੰ ਅਧਕ ਅਗਿਆਤੰ ਅੰਤ ਨਰਕ ਕੇ ਬਾਸੀ ॥੬੯॥
जानि है न बातं अधक अगिआतं अंत नरक के बासी ॥६९॥
jaan hai na baata(n) adhak agiaata(n) a(n)t narak ke baasee ||69||
ਨਿਤ ਨਵ ਮਤਿ ਕਰ ਹੈ ਹਰਿ ਨ ਨਿਸਰਿ ਹੈ ਪ੍ਰਭ ਕੋ ਨਾਮ ਨ ਲੈ ਹੈ ॥
नित नव मति कर है हरि न निसरि है प्रभ को नाम न लै है ॥
nit nav mat kar hai har na nisar hai prabh ko naam na lai hai ||
ਸ੍ਰੁਤਿ ਸਮ੍ਰਿਤਿ ਨ ਮਾਨੈ ਤਜਤ ਕੁਰਾਨੈ ਅਉਰ ਹੀ ਪੈਂਡ ਬਤੈ ਹੈ ॥
स्रुति समृति न मानै तजत कुरानै अउर ही पैंड बतै है ॥
srut samirat na maanai tajat kuraanai aaur hee pai(n)dd batai hai ||
ਪਰ ਤ੍ਰੀਅ ਰਸ ਰਾਚੇ ਸਤ ਕੇ ਕਾਚੇ ਨਿਜ ਤ੍ਰੀਯ ਗਮਨ ਨ ਕਰ ਹੈ ॥
पर त्रीअ रस राचे सत के काचे निज त्रीय गमन न कर है ॥
par treea ras raache sat ke kaache nij treey gaman na kar hai ||
ਮਾਨ ਹੈ ਨ ਏਕੰ ਪੂਜ ਅਨੇਕੰ ਅੰਤਿ ਨਰਕ ਮਹਿ ਪਰ ਹੈ ॥੭੦॥
मान है न एकं पूज अनेकं अंति नरक महि पर है ॥७०॥
maan hai na eka(n) pooj aneka(n) a(n)t narak meh par hai ||70||
ਪਾਹਣ ਪੂਜੈ ਹੈ ਏਕ ਨ ਧਿਐ ਹੈ ਮਤਿ ਕੇ ਅਧਿਕ ਅੰਧੇਰਾ ॥
पाहण पूजै है एक न धिऐ है मति के अधिक अंधेरा ॥
paahan poojai hai ek na dhiaai hai mat ke adhik a(n)dheraa ||
ਅਮ੍ਰਿਤ ਕਹੁ ਤਜਿ ਹੈ ਬਿਖ ਕਹੁ ਭਜਿ ਹੈ ਸਾਝਹਿ ਕਹਹਿ ਸਵੇਰਾ ॥
अमृत कहु तजि है बिख कहु भजि है साझहि कहहि सवेरा ॥
amirat kahu taj hai bikh kahu bhaj hai saajheh kaheh saveraa ||
ਫੋਕਟ ਧਰਮਣਿ ਰਤਿ ਕੁਕ੍ਰਿਤ ਬਿਨਾ ਮਤਿ ਕਹੋ ਕਹਾ ਫਲ ਪੈ ਹੈ ॥
फोकट धरमणि रति कुकृत बिना मति कहो कहा फल पै है ॥
fokaT dharaman rat kukirat binaa mat kaho kahaa fal pai hai ||
ਬਾਧੇ ਮ੍ਰਿਤ ਸਾਲੈ ਜਾਹਿ ਉਤਾਲੈ ਅੰਤ ਅਧੋਗਤਿ ਜੈ ਹੈ ॥੭੧॥
बाधे मृत सालै जाहि उतालै अंत अधोगति जै है ॥७१॥
baadhe mirat saalai jaeh utaalai a(n)t adhogat jai hai ||71||
ਏਲਾ ਛੰਦ ॥
एला छंद ॥
elaa chha(n)dh ||
ਕਰ ਹੈ ਨਿਤ ਅਨਰਥ ਅਰਥ ਨਹੀ ਏਕ ਕਮੈ ਹੈ ॥
कर है नित अनरथ अरथ नही एक कमै है ॥
kar hai nit anarath arath nahee ek kamai hai ||
ਨਹਿ ਲੈ ਹੈ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਦਾਨ ਕਾਹੂੰ ਨਹੀ ਦੈ ਹੈ ॥
नहि लै है हरि नामु दान काहूँ नही दै है ॥
neh lai hai har naam dhaan kaahoo(n) nahee dhai hai ||
ਨਿਤ ਇਕ ਮਤ ਤਜੈ ਇਕ ਮਤਿ ਨਿਤ ਉਚੈ ਹੈ ॥੭੨॥
नित इक मत तजै इक मति नित उचै है ॥७२॥
nit ik mat tajai ik mat nit uchai hai ||72||
ਨਿਤ ਇਕ ਮਤਿ ਮਿਟੈ ਉਠੈ ਹੈ ਨਿਤ ਇਕ ਮਤਿ ॥
नित इक मति मिटै उठै है नित इक मति ॥
nit ik mat miTai uThai hai nit ik mat ||
ਧਰਮ ਕਰਮ ਰਹਿ ਗਇਓ ਭਈ ਬਸੁਧਾ ਅਉਰੈ ਗਤਿ ॥
धरम करम रहि गइओ भई बसुधा अउरै गति ॥
dharam karam reh gio bhiee basudhaa aaurai gat ||
ਭਰਮ ਧਰਮ ਕੈ ਗਇਓ ਪਾਪ ਪ੍ਰਚਰਿਓ ਜਹਾ ਤਹ ॥੭੩॥
भरम धरम कै गइओ पाप प्रचरिओ जहा तह ॥७३॥
bharam dharam kai gio paap prachario jahaa teh ||73||
ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਇਸਟ ਤਜਿ ਦੀਨ ਕਰਤ ਆਰਿਸਟ ਪੁਸਟ ਸਬ ॥
सृसटि इसट तजि दीन करत आरिसट पुसट सब ॥
sirasaT isaT taj dheen karat aarisaT pusaT sab ||
ਬ੍ਰਿਸਟਿ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਤੇ ਮਿਟੀ ਭਏ ਪਾਪਿਸਟ ਭ੍ਰਿਸਟ ਤਬ ॥
बृसटि सृसटि ते मिटी भए पापिसट भृसट तब ॥
birasaT sirasaT te miTee bhe paapisaT bhirasaT tab ||
ਇਕ ਇਕ ਨਿੰਦ ਹੈ ਇਕ ਇਕ ਕਹਿ ਹਸਿ ਚਲੈ ॥੭੪॥
इक इक निंद है इक इक कहि हसि चलै ॥७४॥
eik ik ni(n)dh hai ik ik keh has chalai ||74||
ਤਜੀ ਆਨਿ ਜਹਾਨ ਕਾਨਿ ਕਾਹੂੰ ਨਹੀ ਮਾਨਹਿ ॥
तजी आनि जहान कानि काहूँ नही मानहि ॥
tajee aan jahaan kaan kaahoo(n) nahee maaneh ||
ਤਾਤ ਮਾਤ ਕੀ ਨਿੰਦ ਨੀਚ ਊਚਹ ਸਮ ਜਾਨਹਿ ॥
तात मात की निंद नीच ऊचह सम जानहि ॥
taat maat kee ni(n)dh neech uoocheh sam jaaneh ||
ਧਰਮ ਭਰਮ ਕੈ ਗਇਓ ਭਈ ਇਕ ਬਰਣ ਪ੍ਰਜਾ ਸਬ ॥੭੫॥
धरम भरम कै गइओ भई इक बरण प्रजा सब ॥७५॥
dharam bharam kai gio bhiee ik baran prajaa sab ||75||
ਘਤਾ ਛੰਦ ॥
घता छंद ॥
ghataa chha(n)dh ||
ਕਰਿ ਹੈ ਪਾਪ ਅਨੇਕ ਨ ਏਕ ਧਰਮ ਕਰ ਹੈ ਨਰ ॥
करि है पाप अनेक न एक धरम कर है नर ॥
kar hai paap anek na ek dharam kar hai nar ||
ਮਿਟ ਜੈ ਹੈ ਸਭ ਖਸਟ ਕਰਮ ਕੇ ਧਰਮ ਘਰਨ ਘਰਿ ॥
मिट जै है सभ खसट करम के धरम घरन घरि ॥
miT jai hai sabh khasaT karam ke dharam gharan ghar ||
ਨਹਿ ਸੁਕ੍ਰਿਤ ਕਮੈ ਹੈ ਅਧੋਗਤਿ ਜੈ ਹੈ ॥
नहि सुकृत कमै है अधोगति जै है ॥
neh sukirat kamai hai adhogat jai hai ||
ਅਮਰ ਲੋਗਿ ਜੈ ਹੈ ਨ ਬਰ ॥੭੬॥
अमर लोगि जै है न बर ॥७६॥
amar log jai hai na bar ||76||
ਧਰਮ ਨ ਕਰ ਹੈ ਏਕ ਅਨੇਕ ਪਾਪ ਕੈ ਹੈ ਸਬ ॥
धरम न कर है एक अनेक पाप कै है सब ॥
dharam na kar hai ek anek paap kai hai sab ||
ਲਾਜ ਬੇਚਿ ਤਹ ਫਿਰੈ ਸਕਲ ਜਗੁ ॥
लाज बेचि तह फिरै सकल जगु ॥
laaj bech teh firai sakal jag ||
ਪਾਪ ਕਮੈ ਵਹ ਦੁਰਗਤਿ ਪੈ ਹੈ ॥
पाप कमै वह दुरगति पै है ॥
paap kamai veh dhuragat pai hai ||
ਪਾਪ ਸਮੁੰਦ ਜੈ ਹੈ ਨ ਤਰਿ ॥੭੭॥
पाप समुँद जै है न तरि ॥७७॥
paap samu(n)dh jai hai na tar ||77||
ਦੋਹਰਾ ॥
दोहरा ॥
dhoharaa ||
ਠਉਰ ਠਉਰ ਨਵ ਮਤ ਚਲੇ ਉਠਾ ਧਰਮ ਕੋ ਦੌਰ ॥
ठउर ठउर नव मत चले उठा धरम को दौर ॥
Thaur Thaur nav mat chale uThaa dharam ko dhauar ||
ਸੁਕ੍ਰਿਤ ਜਹ ਤਹ ਦੁਰ ਰਹੀ ਪਾਪ ਭਇਓ ਸਿਰਮੌਰ ॥੭੮॥
सुकृत जह तह दुर रही पाप भइओ सिरमौर ॥७८॥
sukirat jeh teh dhur rahee paap bhio siramauar ||78||
ਨਵਪਦੀ ਛੰਦ ॥
नवपदी छंद ॥
navapadhee chha(n)dh ||
ਜਹ ਤਹ ਕਰਨ ਲਗੇ ਸਭ ਪਾਪਨ ॥
जह तह करन लगे सभ पापन ॥
jeh teh karan lage sabh paapan ||
ਧਰਮ ਕਰਮ ਤਜਿ ਕਰ ਹਰਿ ਜਾਪਨ ॥
धरम करम तजि कर हरि जापन ॥
dharam karam taj kar har jaapan ||
ਪਾਹਨ ਕਉ ਸੁ ਕਰਤ ਸਬ ਬੰਦਨ ॥
पाहन कउ सु करत सब बंदन ॥
paahan kau su karat sab ba(n)dhan ||
ਡਾਰਤ ਧੂਪ ਦੀਪ ਸਿਰਿ ਚੰਦਨ ॥੭੯॥
डारत धूप दीप सिरि चंदन ॥७९॥
ddaarat dhoop dheep sir cha(n)dhan ||79||
ਜਹ ਤਹ ਧਰਮ ਕਰਮ ਤਜਿ ਭਾਗਤ ॥
जह तह धरम करम तजि भागत ॥
jeh teh dharam karam taj bhaagat ||
ਉਠਿ ਉਠਿ ਪਾਪ ਕਰਮ ਸੌ ਲਾਗਤ ॥
उठि उठि पाप करम सौ लागत ॥
auTh uTh paap karam sau laagat ||
ਜਹ ਤਹ ਭਈ ਧਰਮ ਗਤਿ ਲੋਪੰ ॥
जह तह भई धरम गति लोपं ॥
jeh teh bhiee dharam gat lopa(n) ||
ਪਾਪਹਿ ਲਗੀ ਚਉਗਨੀ ਓਪੰ ॥੮੦॥
पापहि लगी चउगनी ओपं ॥८०॥
paapeh lagee chauganee opa(n) ||80||
ਭਾਜ੍ਯੋ ਧਰਮ ਭਰਮ ਤਜਿ ਅਪਨਾ ॥
भाज्यो धरम भरम तजि अपना ॥
bhaajayo dharam bharam taj apanaa ||
ਜਾਨੁਕ ਹੁਤੋ ਲਖਾ ਇਹ ਸੁਪਨਾ ॥
जानुक हुतो लखा इह सुपना ॥
jaanuk huto lakhaa ieh supanaa ||
ਸਭ ਸੰਸਾਰ ਤਜੀ ਤ੍ਰੀਅ ਆਪਨ ॥
सभ संसार तजी त्रीअ आपन ॥
sabh sa(n)saar tajee treea aapan ||
ਮੰਤ੍ਰ ਕੁਮੰਤ੍ਰ ਲਗੇ ਮਿਲਿ ਜਾਪਨ ॥੮੧॥
मंत्र कुमंत्र लगे मिलि जापन ॥८१॥
ma(n)tr kuma(n)tr lage mil jaapan ||81||
ਚਹੁ ਦਿਸ ਘੋਰ ਪ੍ਰਚਰ ਭਇਓ ਪਾਪਾ ॥
चहु दिस घोर प्रचर भइओ पापा ॥
chahu dhis ghor prachar bhio paapaa ||
ਕੋਊ ਨ ਜਾਪ ਸਕੈ ਹਰਿ ਜਾਪਾ ॥
कोऊ न जाप सकै हरि जापा ॥
kouoo na jaap sakai har jaapaa ||
ਪਾਪ ਕ੍ਰਿਆ ਸਭ ਜਾ ਚਲ ਪਈ ॥
पाप कृआ सभ जा चल पई ॥
paap kriaa sabh jaa chal piee ||
ਧਰਮ ਕ੍ਰਿਆ ਯਾ ਜਗ ਤੇ ਗਈ ॥੮੨॥
धरम कृआ या जग ते गई ॥८२॥
dharam kriaa yaa jag te giee ||82||
ਅੜਿਲ ਦੂਜਾ ॥
अड़िल दूजा ॥
aRil dhoojaa ||
ਜਹਾ ਤਹਾ ਆਧਰਮ ਉਪਜਿਯਾ ॥
जहा तहा आधरम उपजिया ॥
jahaa tahaa aadharam upajiyaa ||
ਜਾਨੁਕ ਧਰਮ ਪੰਖ ਕਰਿ ਭਜਿਯਾ ॥
जानुक धरम पंख करि भजिया ॥
jaanuk dharam pa(n)kh kar bhajiyaa ||
ਡੋਲਤ ਜਹ ਤਹ ਪੁਰਖ ਅਪਾਵਨ ॥
डोलत जह तह पुरख अपावन ॥
ddolat jeh teh purakh apaavan ||
ਲਾਗਤ ਕਤ ਹੀ ਧਰਮ ਕੋ ਦਾਵਨ ॥੮੩॥
लागत कत ही धरम को दावन ॥८३॥
laagat kat hee dharam ko dhaavan ||83||
ਅਰਥਹ ਛਾਡਿ ਅਨਰਥ ਬਤਾਵਤ ॥
अरथह छाडि अनरथ बतावत ॥
aratheh chhaadd anarath bataavat ||
ਧਰਮ ਕਰਮ ਚਿਤਿ ਏਕ ਨ ਲਿਆਵਤ ॥
धरम करम चिति एक न लिआवत ॥
dharam karam chit ek na liaavat ||
ਕਰਮ ਧਰਮ ਕੀ ਕ੍ਰਿਆ ਭੁਲਾਵਤ ॥
करम धरम की कृआ भुलावत ॥
karam dharam kee kriaa bhulaavat ||
ਜਹਾ ਤਹਾ ਆਰਿਸਟ ਬਤਾਵਤ ॥੮੪॥
जहा तहा आरिसट बतावत ॥८४॥
jahaa tahaa aarisaT bataavat ||84||
ਕੁਲਕ ਛੰਦ ॥
कुलक छंद ॥
kulak chha(n)dh ||
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