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ਧਾਇ ਗਯੋ ਬਲਿਭਦ੍ਰ ਪੈ ਪੂਛਨ ਰੋਇ ਇਹੀ ਤਿਨ ਬੈਨ ਸੁਨਾਯੋ ॥

धाइ गयो बलिभद्र पै पूछन रोइ इही तिन बैन सुनायो ॥

dhai gayo balibhadhr pai poochhan roi ihee tin bain sunaayo ||

Guru Gobind Singh ji / / Chaubis Avatar / Dasam Granth Sahib ji - Page 502

ਕਾਨ੍ਰਹ ਗੁਫਾ ਕੇ ਬਿਖੈ ਧਸਿ ਕੈ ਤਿਹ ਤੇ ਬਹੁਰੇ ਨਹੀ ਬਾਹਰਿ ਆਯੋ ॥੨੦੫੪॥

कान्रह गुफा के बिखै धसि कै तिह ते बहुरे नही बाहरि आयो ॥२०५४॥

kaanreh gufaa ke bikhai dhas kai teh te bahure nahee baahar aayo ||2054||

Guru Gobind Singh ji / / Chaubis Avatar / Dasam Granth Sahib ji - Page 503


ਹਲੀ ਬਾਚ ॥

हली बाच ॥

halee baach ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਕੈ ਲਰਿ ਕੈ ਅਰਿ ਕਾਹੂ ਕੇ ਸੰਗਿ ਤਨ ਆਪਨ ਕੋ ਜਮਲੋਕਿ ਪਠਾਯੋ ॥

कै लरि कै अरि काहू के संगि तन आपन को जमलोकि पठायो ॥

kai lar kai ar kaahoo ke sa(n)g tan aapan ko jamalok paThaayo ||

Guru Gobind Singh ji / / Chaubis Avatar / Dasam Granth Sahib ji - Page 503

ਖੋਜਤ ਕੈ ਮਨਿ ਯਾ ਜੜ ਕੀ ਬਲਿ ਲੋਕਿ ਗਯੋ ਕੋਊ ਮਾਰਗ ਪਾਯੋ ॥

खोजत कै मनि या जड़ की बलि लोकि गयो कोऊ मारग पायो ॥

khojat kai man yaa jaR kee bal lok gayo kouoo maarag paayo ||

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ਕੈ ਮਨਿ ਲੈ ਇਹ ਭ੍ਰਾਤ ਕੇ ਪ੍ਰਾਨ ਗਯੋ ਜਮ ਲੈ ਤਿਨ ਲੈਨ ਕਉ ਧਾਯੋ ॥

कै मनि लै इह भ्रात के प्रान गयो जम लै तिन लैन कउ धायो ॥

kai man lai ieh bhraat ke praan gayo jam lai tin lain kau dhaayo ||

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ਕੈ ਇਹ ਮੂਰਖ ਕੋ ਸੁ ਕੁਬੋਲ ਲਗਿਯੋ ਹੁਇ ਲਜਾਤੁਰ ਧਾਮਿ ਨ ਆਯੋ ॥੨੦੫੫॥

कै इह मूरख को सु कुबोल लगियो हुइ लजातुर धामि न आयो ॥२०५५॥

kai ieh moorakh ko su kubol lagiyo hui lajaatur dhaam na aayo ||2055||

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ਰੋਇ ਜਬੈ ਸੰਗ ਭੂਪਤਿ ਕੋ ਮੁਖ ਤੇ ਮੁਸਲੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

रोइ जबै संग भूपति को मुख ते मुसली इह भाति उचारियो ॥

roi jabai sa(n)g bhoopat ko mukh te musalee ieh bhaat uchaariyo ||

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ਤਉ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕਉ ਮਿਲਿ ਕੈ ਸਭ ਜਾਦਵ ਲਾਤਨ ਮੂਕਨ ਮਾਰਿਯੋ ॥

तउ सत्राजित कउ मिलि कै सभ जादव लातन मूकन मारियो ॥

tau satraajit kau mil kai sabh jaadhav laatan mookan maariyo ||

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ਪਾਗ ਉਤਾਰ ਦਈ ਮੁਸਕੈ ਗਹਿ ਗੋਡਨ ਤੇ ਮਧਿ ਕੂਪ ਕੇ ਡਾਰਿਯੋ ॥

पाग उतार दई मुसकै गहि गोडन ते मधि कूप के डारियो ॥

paag utaar dhiee musakai geh goddan te madh koop ke ddaariyo ||

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ਛੋਡਬੋ ਤਾ ਕੇ ਕਹਿਯੋ ਨ ਕਿਹੂ ਸਭ ਹੂ ਤਿਹ ਕੋ ਬਧਬੋ ਚਿਤਿ ਧਾਰਿਯੋ ॥੨੦੫੬॥

छोडबो ता के कहियो न किहू सभ हू तिह को बधबो चिति धारियो ॥२०५६॥

chhoddabo taa ke kahiyo na kihoo sabh hoo teh ko badhabo chit dhaariyo ||2056||

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ਕਾਨਰ ਕੀ ਜਬ ਏ ਬਤੀਯਾ ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਸਭ ਨਾਰਿਨ ਜਉ ਸੁਨਿ ਪਾਈ ॥

कानर की जब ए बतीया प्रभ की सभ नारिन जउ सुनि पाई ॥

kaanar kee jab e bateeyaa prabh kee sabh naarin jau sun paiee ||

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ਰੋਵਤ ਭੀ ਕੋਊ ਭੂਮਿ ਪਰੀ ਗਿਰ ਪੀਟਤ ਭੀ ਕਰਿ ਕੈ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

रोवत भी कोऊ भूमि परी गिर पीटत भी करि कै दुचिताई ॥

rovat bhee kouoo bhoom paree gir peeTat bhee kar kai dhuchitaiee ||

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ਏਕ ਕਹੈ ਪਤਿ ਪ੍ਰਾਨ ਤਜੇ ਅਬ ਹੁਇ ਹੈ ਕਹਾ ਹਮਰੀ ਗਤਿ ਮਾਈ ॥

एक कहै पति प्रान तजे अब हुइ है कहा हमरी गति माई ॥

ek kahai pat praan taje ab hui hai kahaa hamaree gat maiee ||

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ਅਉਰ ਰੁਕਮਨਿ ਦੇਤ ਦਿਜੋਤਮ ਦਾਨ ਸਤੀ ਫੁਨਿ ਹੋਬੇ ਕਉ ਆਈ ॥੨੦੫੭॥

अउर रुकमनि देत दिजोतम दान सती फुनि होबे कउ आई ॥२०५७॥

aaur rukaman dhet dhijotam dhaan satee fun hobe kau aaiee ||2057||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਬਸੁਦੇਵ ਅਰੁ ਦੇਵਕੀ ਦੁਬਿਧਾ ਚਿਤਹਿ ਬਢਾਇ ॥

बसुदेव अरु देवकी दुबिधा चितहि बढाइ ॥

basudhev ar dhevakee dhubidhaa chiteh baddai ||

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ਪ੍ਰਭ ਗਤਿ ਦ੍ਵੈ ਬਿਧਿ ਹੇਰਿ ਕੈ ਬਰਜਿਓ ਰੁਕਮਨਿ ਆਇ ॥੨੦੫੮॥

प्रभ गति द्वै बिधि हेरि कै बरजिओ रुकमनि आइ ॥२०५८॥

prabh gat dhavai bidh her kai barajio rukaman aai ||2058||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਪੁਤ੍ਰ ਬਧੂ ਹੂ ਕੋ ਦੇਵਕੀ ਆਇ ਸੁ ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਬਿਧਿ ਯਾ ਸਮਝਾਯੋ ॥

पुत्र बधू हू को देवकी आइ सु स्याम भनै बिधि या समझायो ॥

putr badhoo hoo ko dhevakee aai su sayaam bhanai bidh yaa samajhaayo ||

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ਜੋ ਹਰਿ ਜੂਝ ਮਰੇ ਰਨ ਮੋ ਜਰਿਬੋ ਤੁਹਿ ਕੋ ਨਿਸਚੈ ਬਨਿ ਆਯੋ ॥

जो हरि जूझ मरे रन मो जरिबो तुहि को निसचै बनि आयो ॥

jo har joojh mare ran mo jaribo tuh ko nisachai ban aayo ||

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ਜਉ ਮਨਿ ਢੂੰਢਤ ਯਾ ਜੜ ਕੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਘਨੇ ਪੁਨਿ ਕੋਸ ਸਿਧਾਯੋ ॥

जउ मनि ढूँढत या जड़ की बृजनाथ घने पुनि कोस सिधायो ॥

jau man ddoo(n)ddat yaa jaR kee birajanaath ghane pun kos sidhaayo ||

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ਤਾ ਤੇ ਰਹੋ ਚੁਪਿ ਕੈ ਸੁਧਿ ਲੈ ਅਰੁ ਯੌ ਕਹਿ ਪਾਇਨ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥੨੦੫੯॥

ता ते रहो चुपि कै सुधि लै अरु यौ कहि पाइन सीस झुकायो ॥२०५९॥

taa te raho chup kai sudh lai ar yau keh pain sees jhukaayo ||2059||

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ਐਸੋ ਸਮੋਧ ਕੈ ਪੁਤ੍ਰ ਬਧੂ ਕੋ ਭਵਾਨੀ ਕੋ ਪੈ ਤਿਨ ਜਾਇ ਮਨਾਯੋ ॥

ऐसो समोध कै पुत्र बधू को भवानी को पै तिन जाइ मनायो ॥

aaiso samodh kai putr badhoo ko bhavaanee ko pai tin jai manaayo ||

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ਠਾਈਸ ਦਿਵਸ ਲਉ ਸੇਵ ਕਰੀ ਤਿਹ ਕੀ ਤਿਹ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਰਿਝਵਾਯੋ ॥

ठाईस दिवस लउ सेव करी तिह की तिह को अति ही रिझवायो ॥

Thaiees dhivas lau sev karee teh kee teh ko at hee rijhavaayo ||

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ਰੀਝਿ ਸਿਵਾ ਤਿਨ ਪੈ ਤਬ ਹੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਇਹੀ ਬਰੁਦਾਨ ਦਿਵਾਯੋ ॥

रीझि सिवा तिन पै तब ही कबि स्याम इही बरुदान दिवायो ॥

reejh sivaa tin pai tab hee kab sayaam ihee barudhaan dhivaayo ||

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ਆਇ ਹੈ ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਸੋਕ ਕਰੋ ਤਬ ਲਉ ਹਰਿ ਲੀਨੇ ਤ੍ਰੀਆ ਮਨਿ ਆਯੋ ॥੨੦੬੦॥

आइ है स्याम न सोक करो तब लउ हरि लीने त्रीआ मनि आयो ॥२०६०॥

aai hai sayaam na sok karo tab lau har leene treeaa man aayo ||2060||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਹੇਰਿ ਤ੍ਰੀਆ ਮਨਿ ਕੇ ਜੁਤ ਸੋਕ ਕੀ ਬਾਤ ਸਭੈ ਬਿਸਰਾਈ ॥

कान्रह को हेरि त्रीआ मनि के जुत सोक की बात सभै बिसराई ॥

kaanreh ko her treeaa man ke jut sok kee baat sabhai bisaraiee ||

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ਡਾਰਿ ਕਮੰਡਲ ਮੈ ਜਲੁ ਸੀਤਲ ਮਾਇ ਪੀਯੋ ਪੁਨਿ ਵਾਰ ਕੈ ਆਈ ॥

डारि कमंडल मै जलु सीतल माइ पीयो पुनि वार कै आई ॥

ddaar kama(n)ddal mai jal seetal mai peeyo pun vaar kai aaiee ||

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ਜਾਦਵ ਅਉਰ ਸਭੈ ਹਰਖੈ ਅਰੁ ਬਾਜਤ ਭੀ ਪੁਰ ਬੀਚ ਬਧਾਈ ॥

जादव अउर सभै हरखै अरु बाजत भी पुर बीच बधाई ॥

jaadhav aaur sabhai harakhai ar baajat bhee pur beech badhaiee ||

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ਅਉਰ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸਿਵਾ ਸੁ ਸਭੋ ਜਗਮਾਇ ਸਹੀ ਠਹਰਾਈ ॥੨੦੬੧॥

अउर कहै कबि स्याम सिवा सु सभो जगमाइ सही ठहराई ॥२०६१॥

aaur kahai kab sayaam sivaa su sabho jagamai sahee Thaharaiee ||2061||

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ਇਤਿ ਜਾਮਵੰਤ ਕੋ ਜੀਤ ਕੈ ਦੁਹਿਤਾ ਤਿਸ ਕੀ ਮਨਿ ਸਹਿਤ ਲਿਆਵਤ ਭਏ ॥

इति जामवंत को जीत कै दुहिता तिस की मनि सहित लिआवत भए ॥

eit jaamava(n)t ko jeet kai dhuhitaa tis kee man sahit liaavat bhe ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਹੇਰ ਕੈ ਸ੍ਯਾਮ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕਉ ਮਨਿ ਲੈ ਕਰ ਮੈ ਫੁਨਿ ਤਾ ਸਿਰ ਮਾਰੀ ॥

हेर कै स्याम सत्राजित कउ मनि लै कर मै फुनि ता सिर मारी ॥

her kai sayaam satraajit kau man lai kar mai fun taa sir maaree ||

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ਜਾ ਹਿਤ ਦੋਸ ਦਯੋ ਸੋਈ ਲੈ ਜੜ ਕੋਪ ਭਰੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰੀ ॥

जा हित दोस दयो सोई लै जड़ कोप भरे इह भाति उचारी ॥

jaa hit dhos dhayo soiee lai jaR kop bhare ieh bhaat uchaaree ||

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ਚਉਕਿ ਕਹੈ ਸਭ ਜਾਦਵ ਯੌ ਸੁ ਪਿਖੋ ਰਿਸਿ ਕੈਸੀ ਕਰੀ ਗਿਰਧਾਰੀ ॥

चउकि कहै सभ जादव यौ सु पिखो रिसि कैसी करी गिरधारी ॥

chauk kahai sabh jaadhav yau su pikho ris kaisee karee giradhaaree ||

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ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਬਿਤਨ ਬੀਚ ਕਥਾ ਜਗ ਮੈ ਕਬ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਥਾਰੀ ॥੨੦੬੨॥

सो इह भाति कबितन बीच कथा जग मै कब स्याम बिथारी ॥२०६२॥

so ieh bhaat kabitan beech kathaa jag mai kab sayaam bithaaree ||2062||

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ਹਾਥਿ ਰਹਿਓ ਮਨਿ ਕੋ ਧਰਿ ਕੈ ਤਿਨਿ ਨੈਕੁ ਨ ਕਾਹੂੰ ਕੀ ਓਰਿ ਨਿਹਾਰਿਓ ॥

हाथि रहिओ मनि को धरि कै तिनि नैकु न काहूँ की ओरि निहारिओ ॥

haath rahio man ko dhar kai tin naik na kaahoo(n) kee or nihaario ||

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ਲਜਿਤ ਹ੍ਵੈ ਖਿਸਿਯਾਨੋ ਘਨੋ ਦੁਬਿਧਾ ਕਰਿ ਧਾਮ ਕੀ ਓਰਿ ਸਿਧਾਰਿਓ ॥

लजित ह्वै खिसियानो घनो दुबिधा करि धाम की ओरि सिधारिओ ॥

lajit havai khisiyaano ghano dhubidhaa kar dhaam kee or sidhaario ||

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ਬੈਰ ਪਰਿਯੋ ਹਮਰੋ ਹਰਿ ਸੋ ਰੁ ਕਲੰਕ ਚੜਿਯੋ ਗਯੋ ਭ੍ਰਾਤ੍ਰ ਮਾਰਿਓ ॥

बैर परियो हमरो हरि सो रु कलंक चड़ियो गयो भ्रात्र मारिओ ॥

bair pariyo hamaro har so r kala(n)k chaRiyo gayo bhraatr maario ||

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ਭੀਰ ਪਰੀ ਤੇ ਅਧੀਰ ਭਯੋ ਦੁਹਿਤਾ ਦੇਉ ਸ੍ਯਾਮ ਇਹੀ ਚਿਤਿ ਧਾਰਿਓ ॥੨੦੬੩॥

भीर परी ते अधीर भयो दुहिता देउ स्याम इही चिति धारिओ ॥२०६३॥

bheer paree te adheer bhayo dhuhitaa dheau sayaam ihee chit dhaario ||2063||

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ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਕੰਧੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕੋ ਮਣਿ ਦੈਬੋ ਬਰਨਨਣ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री दसम सकंधे बचित्र नाटक कृसनावतारे सत्राजित को मणि दैबो बरननण धिआइ समापतं ॥

eit sree dhasam saka(n)dhe bachitr naaTak kirasanaavataare satraajit ko man dhaibo barananan dhiaai samaapata(n) ||

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ਅਥ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕੀ ਦੁਹਿਤਾ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹ ਕਥਨੰ ॥

अथ सत्राजित की दुहिता को ब्याह कथनं ॥

ath satraajit kee dhuhitaa ko bayaeh kathana(n) ||

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ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

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ਬੋਲਿ ਦਿਜੋਤਮ ਬੇਦਨ ਕੀ ਬਿਧਿ ਜੈਸ ਕਹੀ ਤਿਸ ਬ੍ਯਾਹ ਰਚਾਯੋ ॥

बोलि दिजोतम बेदन की बिधि जैस कही तिस ब्याह रचायो ॥

bol dhijotam bedhan kee bidh jais kahee tis bayaeh rachaayo ||

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ਸਤਿ ਭਾਮਨਿ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਜਿਹ ਕੋ ਸਭ ਲੋਗਨ ਮੈ ਜਸੁ ਛਾਯੋ ॥

सति भामनि को कबि स्याम भनै जिह को सभ लोगन मै जसु छायो ॥

sat bhaaman ko kab sayaam bhanai jeh ko sabh logan mai jas chhaayo ||

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ਪਾਵਤ ਹੈ ਉਪਮਾ ਲਛਮੀ ਕੀ ਨ ਤਾ ਸਮ ਯੌ ਕਹਿਬੋ ਬਨਿ ਆਯੋ ॥

पावत है उपमा लछमी की न ता सम यौ कहिबो बनि आयो ॥

paavat hai upamaa lachhamee kee na taa sam yau kahibo ban aayo ||

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ਤਾਹੀ ਕੇ ਬ੍ਯਾਹਨ ਕਾਜ ਸੁ ਦੈ ਮਨਿ ਮਾਨਿ ਭਲੈ ਘਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬੁਲਾਯੋ ॥੨੦੬੪॥

ताही के ब्याहन काज सु दै मनि मानि भलै घनि स्याम बुलायो ॥२०६४॥

taahee ke bayaahan kaaj su dhai man maan bhalai ghan sayaam bulaayo ||2064||

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ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਸੁਨੇ ਬਤੀਯਾ ਸੁਭ ਸਾਜਿ ਜਨੇਤ ਜਹਾ ਕੋ ਸਿਧਾਏ ॥

स्री बृजनाथ सुने बतीया सुभ साजि जनेत जहा को सिधाए ॥

sree birajanaath sune bateeyaa subh saaj janet jahaa ko sidhaae ||

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ਆਵਤ ਸੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਪ੍ਰਭੁ ਕੋ ਸਭ ਆਗੇ ਹੀ ਤੇ ਮਿਲਿਬੇ ਕਉ ਧਾਏ ॥

आवत सो सुनि कै प्रभु को सभ आगे ही ते मिलिबे कउ धाए ॥

aavat so sun kai prabh ko sabh aage hee te milibe kau dhaae ||

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ਆਦਰ ਸੰਗ ਲਵਾਇ ਕੈ ਜਾਇ ਬ੍ਯਾਹ ਕੀਯੋ ਦਿਜ ਦਾਨ ਦਿਵਾਏ ॥

आदर संग लवाइ कै जाइ ब्याह कीयो दिज दान दिवाए ॥

aadhar sa(n)g lavai kai jai bayaeh keeyo dhij dhaan dhivaae ||

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ਐਸੇ ਬਿਵਾਹ ਪ੍ਰਭੂ ਸੁਖੁ ਪਾਇ ਤ੍ਰੀਯਾ ਸੰਗ ਲੈ ਕਰਿ ਧਾਮਹਿ ਆਏ ॥੨੦੬੫॥

ऐसे बिवाह प्रभू सुखु पाइ त्रीया संग लै करि धामहि आए ॥२०६५॥

aaise bivaeh prabhoo sukh pai treeyaa sa(n)g lai kar dhaameh aae ||2065||

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ਇਤਿ ਬਿਵਾਹ ਸੰਪੂਰਨ ਹੋਤ ਭਯੋ ॥

इति बिवाह संपूरन होत भयो ॥

eit bivaeh sa(n)pooran hot bhayo ||

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ਲਛੀਆ ਗ੍ਰਿਹ ਪ੍ਰਸੰਗ ॥

लछीआ गृह प्रसंग ॥

lachheeaa gireh prasa(n)g ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਤਉ ਹੀ ਲਉ ਐਸੋ ਸੁਨੀ ਬਤੀਯਾ ਲਛੀਆ ਗ੍ਰਿਹਿ ਮੈ ਸੁਤ ਪੰਡੁ ਕੇ ਆਏ ॥

तउ ही लउ ऐसो सुनी बतीया लछीआ गृहि मै सुत पंडु के आए ॥

tau hee lau aaiso sunee bateeyaa lachheeaa gireh mai sut pa(n)dd ke aae ||

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ਗਾਇ ਸਮੇਤ ਸਭੋ ਮਿਲਿ ਕੌਰਨ ਚਿਤ ਬਿਖੈ ਕਰੁਨਾ ਨ ਬਸਾਏ ॥

गाइ समेत सभो मिलि कौरन चित बिखै करुना न बसाए ॥

gai samet sabho mil kauaran chit bikhai karunaa na basaae ||

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ਐਸੇ ਬਿਚਾਰ ਕੀਓ ਚਿਤ ਮੈ ਸੁ ਤਹਾ ਕੋ ਚਲੈ ਸਭ ਬਿਸਨੁ ਬੁਲਾਏ ॥

ऐसे बिचार कीओ चित मै सु तहा को चलै सभ बिसनु बुलाए ॥

aaise bichaar keeo chit mai su tahaa ko chalai sabh bisan bulaae ||

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ਐਸੇ ਬਿਚਾਰ ਸੁ ਸਾਜ ਕੈ ਸ੍ਯੰਦਨ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਤਹਾ ਕੋ ਸਿਧਾਏ ॥੨੦੬੬॥

ऐसे बिचार सु साज कै स्यंदन स्री बृजनाथ तहा को सिधाए ॥२०६६॥

aaise bichaar su saaj kai saya(n)dhan sree birajanaath tahaa ko sidhaae ||2066||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਲੇ ਉਤ ਕਉ ਜਬ ਹੀ ਬਰਮਾਕ੍ਰਿਤ ਤੋ ਇਤ ਮੰਤ੍ਰ ਬਿਚਾਰਿਯੋ ॥

कान्रह चले उत कउ जब ही बरमाकृत तो इत मंत्र बिचारियो ॥

kaanreh chale ut kau jab hee baramaakirat to it ma(n)tr bichaariyo ||

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ਲੈ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕਉ ਆਪਨੇ ਸੰਗ ਕਹਿਯੋ ਅਰੇ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੰŧ ਕਉ ਪਧਾਰਿਯੋ ॥

लै अक्रूर कउ आपने संग कहियो अरे कान्रह कहं कउ पधारियो ॥

lai akraoor kau aapane sa(n)g kahiyo are kaanreh kaha(n) kau padhaariyo ||

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ਛੀਨ ਲੈ ਯਾ ਤੇ ਅਰੇ ਮਿਲਿ ਕੈ ਮਨਿ ਐਸੇ ਬਿਚਾਰ ਕੀਯੋ ਤਿਹ ਮਾਰਿਯੋ ॥

छीन लै या ते अरे मिलि कै मनि ऐसे बिचार कीयो तिह मारियो ॥

chheen lai yaa te are mil kai man aaise bichaar keeyo teh maariyo ||

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ਲੈ ਬਰਮਾਕ੍ਰਿਤ ਵਾ ਬਧ ਕੈ ਮਨਿ ਆਪਨੇ ਧਾਮ ਕੀ ਓਰਿ ਸਿਧਾਰਿਯੋ ॥੨੦੬੭॥

लै बरमाकृत वा बध कै मनि आपने धाम की ओरि सिधारियो ॥२०६७॥

lai baramaakirat vaa badh kai man aapane dhaam kee or sidhaariyo ||2067||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਸਤਿ ਧੰਨਾ ਭੀ ਸੰਗਿ ਰਲਾਯੋ ॥

सति धंना भी संगि रलायो ॥

sat dha(n)naa bhee sa(n)g ralaayo ||

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ਜਬ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕੋ ਤਿਨ ਘਾਯੋ ॥

जब सत्राजित को तिन घायो ॥

jab satraajit ko tin ghaayo ||

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ਏ ਤਿਹ ਬਧ ਕੈ ਡੇਰਨ ਆਏ ॥

ए तिह बध कै डेरन आए ॥

e teh badh kai dderan aae ||

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ਉਤੈ ਸੰਦੇਸ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਨਿ ਪਾਏ ॥੨੦੬੮॥

उतै संदेस स्याम सुनि पाए ॥२०६८॥

autai sa(n)dhes sayaam sun paae ||2068||

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ਦੂਤ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

दूत बाच कान्रह सो ॥

dhoot baach kaanreh so ||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਪ੍ਰਭੁ ਸੋ ਦੂਤਨ ਬੈਨ ਉਚਾਰੇ ॥

प्रभु सो दूतन बैन उचारे ॥

prabh so dhootan bain uchaare ||

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ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕ੍ਰਿਤਬਰਮਾ ਮਾਰੇ ॥

सत्राजित कृतबरमा मारे ॥

satraajit kiratabaramaa maare ||

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ਮਨਿ ਧਨ ਛੀਨਿ ਤਾਹਿ ਤੇ ਲਯੋ ॥

मनि धन छीनि ताहि ते लयो ॥

man dhan chheen taeh te layo ||

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ਤੋਹਿ ਤ੍ਰੀਆ ਕੋ ਅਤਿ ਦੁਖੁ ਦਯੋ ॥੨੦੬੯॥

तोहि त्रीआ को अति दुखु दयो ॥२०६९॥

toh treeaa ko at dhukh dhayo ||2069||

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ਜਬ ਜਦੁਪਤਿ ਇਹ ਬਿਧਿ ਸੁਨਿ ਪਾਯੋ ॥

जब जदुपति इह बिधि सुनि पायो ॥

jab jadhupat ieh bidh sun paayo ||

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ਛੋਰਿ ਅਉਰ ਸਭ ਕਾਰਜ ਆਯੋ ॥

छोरि अउर सभ कारज आयो ॥

chhor aaur sabh kaaraj aayo ||

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ਹਰਿ ਆਵਨ ਕ੍ਰਿਤਬਰਮੈ ਜਾਨੀ ॥

हरि आवन कृतबरमै जानी ॥

har aavan kiratabaramai jaanee ||

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ਸਤਿਧੰਨਾ ਸੋ ਬਾਤ ਬਖਾਨੀ ॥੨੦੭੦॥

सतिधंना सो बात बखानी ॥२०७०॥

satidha(n)naa so baat bakhaanee ||2070||

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ਅੜਿਲ ॥

अड़िल ॥

aRil ||

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ਕਹੁ ਸਤਿਧੰਨਾ ਬਾਤ ਅਬੈ ਹਮ ਕਿਆ ਕਰੈ ॥

कहु सतिधंना बात अबै हम किआ करै ॥

kahu satidha(n)naa baat abai ham kiaa karai ||

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ਕਹੋ ਪਰੈ ਕੈ ਜਾਇ ਕਹੋ ਲਰਿ ਕੈ ਮਰੈ ॥

कहो परै कै जाइ कहो लरि कै मरै ॥

kaho parai kai jai kaho lar kai marai ||

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ਦੁਇ ਮੈ ਇਕ ਮੁਹਿ ਬਾਤ ਕਹੋ ਸਮਝਾਇ ਕੈ ॥

दुइ मै इक मुहि बात कहो समझाइ कै ॥

dhui mai ik muh baat kaho samajhai kai ||

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ਹੋ ਕੇ ਉਪਾਇ ਕੈ ਸ੍ਯਾਮਹਿ ਮਾਰੈ ਜਾਇ ਕੈ ॥੨੦੭੧॥

हो के उपाइ कै स्यामहि मारै जाइ कै ॥२०७१॥

ho ke upai kai sayaameh maarai jai kai ||2071||

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ਕ੍ਰਿਤਬਰਮਾ ਕੀ ਬਾਤ ਸੁਨਤ ਤਿਨਿ ਯੌ ਕਹਿਯੋ ॥

कृतबरमा की बात सुनत तिनि यौ कहियो ॥

kiratabaramaa kee baat sunat tin yau kahiyo ||

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ਜਦੁਪਤਿ ਬਲੀ ਪ੍ਰਚੰਡ ਹਨਿਯੋ ਅਰਿ ਜੋ ਚਹਿਯੋ ॥

जदुपति बली प्रचंड हनियो अरि जो चहियो ॥

jadhupat balee pracha(n)dd haniyo ar jo chahiyo ||

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ਤਾ ਸੋ ਹਮ ਪੈ ਬਲ ਨ ਲਰੈ ਪੁਨਿ ਜਾਇ ਕੈ ॥

ता सो हम पै बल न लरै पुनि जाइ कै ॥

taa so ham pai bal na larai pun jai kai ||

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ਹੋ ਕੰਸ ਸੇ ਛਿਨ ਮੈ ਮਾਰਿ ਦਏ ਸੁਖ ਪਾਇ ਕੈ ॥੨੦੭੨॥

हो कंस से छिन मै मारि दए सुख पाइ कै ॥२०७२॥

ho ka(n)s se chhin mai maar dhe sukh pai kai ||2072||

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ਬਤੀਆ ਸੁਨਿ ਤਿਹ ਕੀ ਅਕ੍ਰੂਰ ਪੈ ਆਯੋ ॥

बतीआ सुनि तिह की अक्रूर पै आयो ॥

bateeaa sun teh kee akraoor pai aayo ||

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ਪ੍ਰਭੁ ਦੁਬਿਧਾ ਕੋ ਭੇਦ ਸੁ ਤਾਹਿ ਸੁਨਾਯੋ ॥

प्रभु दुबिधा को भेद सु ताहि सुनायो ॥

prabh dhubidhaa ko bhedh su taeh sunaayo ||

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ਤਿਨ ਕਹਿਯੋ ਅਬ ਸੁਨਿ ਤੇਰੋ ਇਹੀ ਉਪਾਇ ਹੈ ॥

तिन कहियो अब सुनि तेरो इही उपाइ है ॥

tin kahiyo ab sun tero ihee upai hai ||

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ਹੋ ਪ੍ਰਭ ਤੇ ਬਚ ਹੈ ਸੋਊ ਜੁ ਪ੍ਰਾਨ ਬਚਾਇ ਹੈ ॥੨੦੭੩॥

हो प्रभ ते बच है सोऊ जु प्रान बचाइ है ॥२०७३॥

ho prabh te bach hai souoo ju praan bachai hai ||2073||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਦੈ ਮਨਿ ਤਾਹਿ ਉਦਾਸ ਭਯੋ ਕਿਹ ਓਰਿ ਭਜੋ ਚਿਤ ਮੈ ਇਹ ਧਾਰਿਯੋ ॥

दै मनि ताहि उदास भयो किह ओरि भजो चित मै इह धारियो ॥

dhai man taeh udhaas bhayo keh or bhajo chit mai ieh dhaariyo ||

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ਮੈ ਅਪਰਾਧ ਕੀਓ ਹਰਿ ਕੋ ਮਨਿ ਹੇਤੁ ਬਲੀ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਮਾਰਿਯੋ ॥

मै अपराध कीओ हरि को मनि हेतु बली सत्राजित मारियो ॥

mai aparaadh keeo har ko man het balee satraajit maariyo ||

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ਤਾਹਿ ਕੇ ਹੇਤੁ ਗੁਸਾ ਕਰਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸਭੈ ਅਪਨੋ ਪੁਰਖਤ ਸੰਭਾਰਿਯੋ ॥

ताहि के हेतु गुसा करि स्याम सभै अपनो पुरखत संभारियो ॥

taeh ke het gusaa kar sayaam sabhai apano purakhat sa(n)bhaariyo ||

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ਜਉ ਰਹਿ ਹਉ ਤਊ ਮਾਰਤ ਹੈ ਏਹ ਕੈ ਡਰੁ ਉਤਰ ਓਰਿ ਸਿਧਾਰਿਯੋ ॥੨੦੭੪॥

जउ रहि हउ तऊ मारत है एह कै डरु उतर ओरि सिधारियो ॥२०७४॥

jau reh hau tuoo maarat hai eh kai ddar utar or sidhaariyo ||2074||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਸਤਿਧੰਨਾ ਮਨਿ ਲੈ ਜਹਾ ਭਜ ਗਯੋ ਤ੍ਰਾਸ ਬਢਾਇ ॥

सतिधंना मनि लै जहा भज गयो त्रास बढाइ ॥

satidha(n)naa man lai jahaa bhaj gayo traas baddai ||

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ਸ੍ਯੰਦਨ ਪੈ ਚੜਿ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਤਹ ਹੀ ਪਹੁੰਚਿਯੋ ਜਾਇ ॥੨੦੭੫॥

स्यंदन पै चड़ि स्याम जू तह ही पहुँचियो जाइ ॥२०७५॥

saya(n)dhan pai chaR sayaam joo teh hee pahu(n)chiyo jai ||2075||

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ਪਾਵ ਪਿਆਦੋ ਸਤ੍ਰ ਹੋਇ ਭਜਿਯੋ ਸੁ ਤ੍ਰਾਸ ਬਢਾਇ ॥

पाव पिआदो सत्र होइ भजियो सु त्रास बढाइ ॥

paav piaadho satr hoi bhajiyo su traas baddai ||

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ਤਬ ਜਦੁਬੀਰ ਕ੍ਰਿਪਾਨ ਸੋ ਮਾਰਿਯੋ ਤਾ ਕੋ ਜਾਇ ॥੨੦੭੬॥

तब जदुबीर कृपान सो मारियो ता को जाइ ॥२०७६॥

tab jadhubeer kirapaan so maariyo taa ko jai ||2076||

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ਖੋਜਤ ਭਯੋ ਤਿਹ ਮਾਰ ਕੈ ਮਨਿ ਨਹੀ ਆਈ ਹਾਥਿ ॥

खोजत भयो तिह मार कै मनि नही आई हाथि ॥

khojat bhayo teh maar kai man nahee aaiee haath ||

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ਮਨਿ ਨਹੀ ਆਈ ਹਾਥਿ ਯੌ ਕਹਿਯੋ ਹਲੀ ਕੇ ਸਾਥ ॥੨੦੭੭॥

मनि नही आई हाथि यौ कहियो हली के साथ ॥२०७७॥

man nahee aaiee haath yau kahiyo halee ke saath ||2077||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਐਸੇ ਲਖਿਯੋ ਮੁਸਲੀ ਮਨ ਮੈ ਸੁ ਪ੍ਰਭੂ ਹਮ ਤੇ ਮਨਿ ਆਜ ਛਪਾਈ ॥

ऐसे लखियो मुसली मन मै सु प्रभू हम ते मनि आज छपाई ॥

aaise lakhiyo musalee man mai su prabhoo ham te man aaj chhapaiee ||

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ਲੈ ਅਕ੍ਰੂਰ ਬਨਾਰਸ ਗਯੋ ਮਨਿ ਕਉ ਤਿਹ ਕੀ ਨ ਕਛੂ ਸੁਧਿ ਪਾਈ ॥

लै अक्रूर बनारस गयो मनि कउ तिह की न कछू सुधि पाई ॥

lai akraoor banaaras gayo man kau teh kee na kachhoo sudh paiee ||

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ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਮੋ ਇਕ ਸਿਖ੍ਯ ਹੈ ਭੂਪਤਿ ਜਾਤ ਤਹਾ ਹਉ ਸੋ ਐਸੇ ਸੁਨਾਈ ॥

स्याम जू मो इक सिख्य है भूपति जात तहा हउ सो ऐसे सुनाई ॥

sayaam joo mo ik sikhay hai bhoopat jaat tahaa hau so aaise sunaiee ||

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ਯੌ ਬਤੀਯਾ ਕਹਿ ਜਾਤ ਰਹਿਯੋ ਜਦੁਬੀਰ ਕੀ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥੨੦੭੮॥

यौ बतीया कहि जात रहियो जदुबीर की कै मन मै दुचिताई ॥२०७८॥

yau bateeyaa keh jaat rahiyo jadhubeer kee kai man mai dhuchitaiee ||2078||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਜਉ ਮੁਸਲੀ ਤਿਹ ਪੈ ਗਯੋ ਤਉ ਭੂਪਤਿ ਸੁਖੁ ਪਾਇ ॥

जउ मुसली तिह पै गयो तउ भूपति सुखु पाइ ॥

jau musalee teh pai gayo tau bhoopat sukh pai ||

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ਲੈ ਅਪੁਨੇ ਤਿਹ ਧਾਮ ਗਯੋ ਆਗੇ ਹੀ ਤੇ ਆਇ ॥੨੦੭੯॥

लै अपुने तिह धाम गयो आगे ही ते आइ ॥२०७९॥

lai apune teh dhaam gayo aage hee te aai ||2079||

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ਗਦਾ ਜੁਧ ਮੈ ਅਤਿ ਚਤੁਰੁ ਯੌ ਸਭ ਤੇ ਸੁਨਿ ਪਾਇ ॥

गदा जुध मै अति चतुरु यौ सभ ते सुनि पाइ ॥

gadhaa judh mai at chatur yau sabh te sun pai ||

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ਤਬੈ ਦੁਰਜੋਧਨ ਹਲੀ ਤੇ ਸਭ ਸੀਖੀ ਬਿਧਿ ਆਇ ॥੨੦੮੦॥

तबै दुरजोधन हली ते सभ सीखी बिधि आइ ॥२०८०॥

tabai dhurajodhan halee te sabh seekhee bidh aai ||2080||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਸਤਿਧੰਨਾ ਕਉ ਮਾਰ ਜਬੈ ਜਦੁਨੰਦਨ ਦ੍ਵਾਰਵਤੀ ਹੂ ਕੇ ਭੀਤਰ ਆਯੋ ॥

सतिधंना कउ मार जबै जदुनंदन द्वारवती हू के भीतर आयो ॥

satidha(n)naa kau maar jabai jadhuna(n)dhan dhavaiaaravatee hoo ke bheetar aayo ||

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ਕੰਚਨ ਕੋ ਅਕ੍ਰੂਰ ਬਨਾਰਸ ਦਾਨ ਕਰੈ ਬਹੁ ਯੌ ਸੁਨਿ ਪਾਯੋ ॥

कंचन को अक्रूर बनारस दान करै बहु यौ सुनि पायो ॥

ka(n)chan ko akraoor banaaras dhaan karai bahu yau sun paayo ||

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ਸੂਰਜ ਦਿਤ ਉਹੀ ਪਹਿ ਹੈ ਮਨਿ ਯੌ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਸੁ ਜਨਾਯੋ ॥

सूरज दित उही पहि है मनि यौ अपने मन मै सु जनायो ॥

sooraj dhit uhee peh hai man yau apane man mai su janaayo ||

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ਮਾਨਸ ਭੇਜ ਭਲੋ ਤਿਹ ਪੈ ਤਿਹ ਕੋ ਅਪੁਨੇ ਪਹਿ ਬੋਲਿ ਪਠਾਯੋ ॥੨੦੮੧॥

मानस भेज भलो तिह पै तिह को अपुने पहि बोलि पठायो ॥२०८१॥

maanas bhej bhalo teh pai teh ko apune peh bol paThaayo ||2081||

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ਜਉ ਹਰਿ ਪੈ ਸੋਊ ਆਵਤ ਭਯੋ ਤਿਹ ਤੇ ਮਨਿ ਤੋ ਇਨ ਮਾਗਿ ਲਈ ਹੈ ॥

जउ हरि पै सोऊ आवत भयो तिह ते मनि तो इन मागि लई है ॥

jau har pai souoo aavat bhayo teh te man to in maag liee hai ||

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ਸੂਰਜ ਜੇ ਤਿਹ ਰੀਝਿ ਦਈ ਧਨਸਤਿ ਕੀ ਜਾ ਹਿਤੁ ਦੇਹ ਗਈ ਹੈ ॥

सूरज जे तिह रीझि दई धनसति की जा हितु देह गई है ॥

sooraj je teh reejh dhiee dhanasat kee jaa hit dheh giee hai ||

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ਜਾ ਹਿਤੁ ਸ੍ਯਾਮ ਤ੍ਰਿਯਾ ਹਰਿ ਭ੍ਰਾਤਹਿ ਮਾਨਹਿ ਕੀ ਮਨਿ ਬਾਤ ਠਈ ਹੈ ॥

जा हितु स्याम तृया हरि भ्रातहि मानहि की मनि बात ठई है ॥

jaa hit sayaam tirayaa har bhraateh maaneh kee man baat Thiee hai ||

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ਸੋ ਦਿਖਰਾਇ ਸਭੋ ਹਰਖਾਇ ਕੈ ਲੈ ਅਕ੍ਰੂਰਹ ਫੇਰਿ ਦਈ ਹੈ ॥੨੦੮੨॥

सो दिखराइ सभो हरखाइ कै लै अक्रूरह फेरि दई है ॥२०८२॥

so dhikharai sabho harakhai kai lai akraooreh fer dhiee hai ||2082||

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ਜੋ ਸਤ੍ਰਾਜਿਤ ਕੈ ਕਰਿ ਸੇਵ ਸੁ ਸੂਰਜ ਕੀ ਫੁਨਿ ਤਾਹਿ ਤੇ ਪਾਈ ॥

जो सत्राजित कै करि सेव सु सूरज की फुनि ताहि ते पाई ॥

jo satraajit kai kar sev su sooraj kee fun taeh te paiee ||

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ਜਾ ਹਰਿ ਕੈ ਇਹ ਕੋ ਬਧ ਕਾਰਨ ਕੈ ਧਨਸਤਿ ਸੁ ਆਪਨੀ ਦੇਹ ਗਵਾਈ ॥

जा हरि कै इह को बध कारन कै धनसति सु आपनी देह गवाई ॥

jaa har kai ieh ko badh kaaran kai dhanasat su aapanee dheh gavaiee ||

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ਤਾਹਿ ਗਯੋ ਅਕ੍ਰੂਰ ਥੋ ਲੈ ਤਿਹ ਤੇ ਫਿਰਿ ਸੋ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਪੈ ਆਈ ॥

ताहि गयो अक्रूर थो लै तिह ते फिरि सो बृजनाथ पै आई ॥

taeh gayo akraoor tho lai teh te fir so birajanaath pai aaiee ||

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ਸੋ ਹਰਿ ਦੇਤ ਭਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਮੁੰਦਰੀ ਮਨੋ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਰਾਘਵ ਹਾਈ ॥੨੦੮੩॥

सो हरि देत भयो तिह को मुँदरी मनो स्याम जू राघव हाई ॥२०८३॥

so har dhet bhayo teh ko mu(n)dharee mano sayaam joo raaghav haiee ||2083||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਬਡੇ ਜਸਹਿ ਪਾਵਤ ਭਯੋ ਮਨਿ ਦੈ ਸ੍ਰੀ ਜਦੁਬੀਰ ॥

बडे जसहि पावत भयो मनि दै स्री जदुबीर ॥

badde jaseh paavat bhayo man dhai sree jadhubeer ||

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ਜੋ ਕਟੀਆ ਸਿਰ ਦੁਰਜਨਨ ਹਰਤਾ ਸਾਧਨ ਪੀਰ ॥੨੦੮੪॥

जो कटीआ सिर दुरजनन हरता साधन पीर ॥२०८४॥

jo kaTeeaa sir dhurajanan harataa saadhan peer ||2084||

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ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਸਤਿਧੰਨੇ ਕੋ ਬਧ ਕੈ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕੋ ਮਨਿ ਦੇਤ ਭਏ ॥

इति स्री दसम सिकंध पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे सतिधंने को बध कै अक्रूर को मनि देत भए ॥

eit sree dhasam sika(n)dh puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare satidha(n)ne ko badh kai akraoor ko man dhet bhe ||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਕੋ ਦਿਲੀ ਮਹਿ ਆਵਨ ਕਥਨੰ ॥

कान्रह जू को दिली महि आवन कथनं ॥

kaanreh joo ko dhilee meh aavan kathana(n) ||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਜਬ ਅਕ੍ਰੂਰਹਿ ਕੋ ਮਨਿ ਦਈ ॥

जब अक्रूरहि को मनि दई ॥

jab akraooreh ko man dhiee ||

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ਜਦੁਪਤਿ ਦਿਲੀ ਕੋ ਸੁਧਿ ਲਈ ॥

जदुपति दिली को सुधि लई ॥

jadhupat dhilee ko sudh liee ||

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ਤਬ ਦਿਲੀ ਕੇ ਭੀਤਰ ਆਏ ॥

तब दिली के भीतर आए ॥

tab dhilee ke bheetar aae ||

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ਪਾਡਵ ਪਾਚ ਚਰਨ ਲਪਟਾਏ ॥੨੦੮੫॥

पाडव पाच चरन लपटाए ॥२०८५॥

paaddav paach charan lapaTaae ||2085||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਤਬ ਕੁੰਤੀ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਗਏ ਕੁਸਲ ਪੂਛਿਓ ਜਾਇ ॥

तब कुँती के गृह गए कुसल पूछिओ जाइ ॥

tab ku(n)tee ke gireh ge kusal poochhio jai ||

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ਜੋ ਦੁਖ ਇਨ ਕੈਰਵਿ ਦਏ ਸੋ ਸਭ ਦਏ ਬਤਾਇ ॥੨੦੮੬॥

जो दुख इन कैरवि दए सो सभ दए बताइ ॥२०८६॥

jo dhukh in kairav dhe so sabh dhe batai ||2086||

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ਇੰਦ੍ਰਪ੍ਰਸਤ ਮੈ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜੂ ਰਹੇ ਮਾਸ ਜਬ ਚਾਰ ॥

इंद्रप्रसत मै कृसन जू रहे मास जब चार ॥

ei(n)dhraprasat mai kirasan joo rahe maas jab chaar ||

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ਤਬ ਅਰਜੁਨ ਕੋ ਸੰਗ ਲੈ ਇਕ ਦਿਨ ਚੜੇ ਸਿਕਾਰ ॥੨੦੮੭॥

तब अरजुन को संग लै इक दिन चड़े सिकार ॥२०८७॥

tab arajun ko sa(n)g lai ik dhin chaRe sikaar ||2087||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਸੋਧ ਸਿਕਾਰ ਕੋ ਲੈ ਹਰਿ ਜੂ ਸੁ ਘਨੋ ਜਹ ਥੋ ਤਿਹ ਓਰਿ ਸਿਧਾਰੇ ॥

सोध सिकार को लै हरि जू सु घनो जह थो तिह ओरि सिधारे ॥

sodh sikaar ko lai har joo su ghano jeh tho teh or sidhaare ||

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ਗੋਇਨ ਸੂਕਰ ਰੀਛ ਬਡੇ ਬਹੁ ਚੀਤਰੁ ਅਉਰ ਸਸੇ ਬਹੁ ਮਾਰੇ ॥

गोइन सूकर रीछ बडे बहु चीतरु अउर ससे बहु मारे ॥

goin sookar reechh badde bahu cheetar aaur sase bahu maare ||

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ਗੈਂਡੇ ਹਨੇ ਮਹਿਖਾਸ ਕੇ ਮਤ ਕਰੀ ਅਰੁ ਸਿੰਘਨ ਝੁੰਡਹਿ ਝਾਰੇ ॥

गैंडे हने महिखास के मत करी अरु सिंघन झुँडहि झारे ॥

gai(n)dde hane mahikhaas ke mat karee ar si(n)ghan jhu(n)ddeh jhaare ||

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ਨੈਕੁ ਸੰਭਾਰ ਰਹੀ ਨ ਪਰੈ ਬਿਸੰਭਾਰ ਜਿਨੋ ਸਰ ਸ੍ਯਾਮ ਪ੍ਰਹਾਰੇ ॥੨੦੮੮॥

नैकु संभार रही न परै बिसंभार जिनो सर स्याम प्रहारे ॥२०८८॥

naik sa(n)bhaar rahee na parai bisa(n)bhaar jino sar sayaam prahaare ||2088||

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ਪਾਰਥ ਕੋ ਸੰਗ ਲੈ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਬਨ ਮੋ ਧਸਿ ਕੈ ਬਹੁਤੇ ਮ੍ਰਿਗ ਘਾਏ ॥

पारथ को संग लै प्रभ जू बन मो धसि कै बहुते मृग घाए ॥

paarath ko sa(n)g lai prabh joo ban mo dhas kai bahute mirag ghaae ||

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ਏਕ ਹਨੇ ਕਰਵਾਰਿਨ ਸੋ ਤਕਿ ਏਕਨ ਕੇ ਤਨਿ ਬਾਨ ਲਗਾਏ ॥

एक हने करवारिन सो तकि एकन के तनि बान लगाए ॥

ek hane karavaarin so tak ekan ke tan baan lagaae ||

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ਅਸ੍ਵਨ ਕੋ ਦਵਰਾਇ ਭਜਾਇ ਕੈ ਕੂਕਰ ਤੇਊ ਹਨੇ ਜੁ ਪਰਾਏ ॥

अस्वन को दवराइ भजाइ कै कूकर तेऊ हने जु पराए ॥

asavain ko dhavarai bhajai kai kookar teuoo hane ju paraae ||

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ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਕੇ ਅਗ੍ਰਜ ਜੇ ਉਠਿ ਭਾਜਤ ਭੇ ਤੇਊ ਜਾਨ ਨ ਪਾਏ ॥੨੦੮੯॥

स्री बृजनाथ के अग्रज जे उठि भाजत भे तेऊ जान न पाए ॥२०८९॥

sree birajanaath ke agraj je uTh bhaajat bhe teuoo jaan na paae ||2089||

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ਪਾਰਥ ਏਕ ਹਨੇ ਮ੍ਰਿਗਵਾ ਇਕ ਆਪਹਿ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਘਾਏ ॥

पारथ एक हने मृगवा इक आपहि स्री बृज नाइक घाए ॥

paarath ek hane miragavaa ik aapeh sree biraj naik ghaae ||

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ਜੇ ਉਠਿ ਭਾਜਤ ਭੇ ਬਨ ਮੈ ਸੋਊ ਕੂਕਰ ਡਾਰਿ ਸਬੈ ਗਹਿਵਾਏ ॥

जे उठि भाजत भे बन मै सोऊ कूकर डारि सबै गहिवाए ॥

je uTh bhaajat bhe ban mai souoo kookar ddaar sabai gahivaae ||

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ਤੀਤਰ ਜੇ ਉਡਿ ਕੈ ਨਭਿ ਓਰਿ ਗਏ ਤਿਨ ਕੋ ਪ੍ਰਭ ਬਾਜ ਚਲਾਏ ॥

तीतर जे उडि कै नभि ओरि गए तिन को प्रभ बाज चलाए ॥

teetar je udd kai nabh or ge tin ko prabh baaj chalaae ||

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ਚੀਤਨ ਏਕ ਮ੍ਰਿਗਾ ਗਹਿ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜਮਲੋਕਿ ਪਠਾਏ ॥੨੦੯੦॥

चीतन एक मृगा गहि कै कबि स्याम कहै जमलोकि पठाए ॥२०९०॥

cheetan ek miragaa geh kai kab sayaam kahai jamalok paThaae ||2090||

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ਬੇਸਰੇ ਅਉਰ ਕੁਹੀ ਬਹਿਰੀ ਅਰੁ ਬਾਜ ਜੁਰੇ ਬਹੁਤੇ ਸੰਗ ਲੀਨੇ ॥

बेसरे अउर कुही बहिरी अरु बाज जुरे बहुते संग लीने ॥

besare aaur kuhee bahiree ar baaj jure bahute sa(n)g leene ||

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ਬਾਸੇ ਘਨੇ ਲਗਰਾ ਚਰਗੇ ਸਿਕਰੇਨ ਕੋ ਫੇਟ ਭਲੀ ਬਿਧਿ ਕੀਨੇ ॥

बासे घने लगरा चरगे सिकरेन को फेट भली बिधि कीने ॥

baase ghane lagaraa charage sikaren ko feT bhalee bidh keene ||

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ਧੂਤੀ ਉਕਾਬ ਬਸੀਨਨ ਕੋ ਸਜਿ ਕੰਠਿਜ ਗੋਲਿਨ ਦ੍ਵਾਲ ਨਵੀਨੇ ॥

धूती उकाब बसीनन को सजि कंठिज गोलिन द्वाल नवीने ॥

dhootee ukaab baseenan ko saj ka(n)Thij golin dhavaiaal naveene ||

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ਜਾ ਸੰਗ ਹੇਰਿ ਚਲਾਵਤ ਭੇ ਤਿਨ ਪਛਿਨ ਤੇ ਇਕ ਜਾਨ ਨ ਦੀਨੇ ॥੨੦੯੧॥

जा संग हेरि चलावत भे तिन पछिन ते इक जान न दीने ॥२०९१॥

jaa sa(n)g her chalaavat bhe tin pachhin te ik jaan na dheene ||2091||

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ਪਾਰਥ ਅਉ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਮਿਲਿ ਕੈ ਜਬ ਐਸੋ ਸਿਕਾਰ ਕੀਓ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

पारथ अउ प्रभ जू मिलि कै जब ऐसो सिकार कीओ सुख पायो ॥

paarath aau prabh joo mil kai jab aaiso sikaar keeo sukh paayo ||

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ਆਪਸ ਮੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਤਿਹ ਠਉਰ ਦੁਹੂ ਅਤਿ ਹੇਤੁ ਬਢਾਯੋ ॥

आपस मै कबि स्याम भनै तिह ठउर दुहू अति हेतु बढायो ॥

aapas mai kab sayaam bhanai teh Thaur dhuhoo at het baddaayo ||

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ਅਉ ਦੁਹੂੰ ਕੋ ਜਲ ਪੀਵਨ ਕੋ ਮਨੁ ਅਉਸਰ ਤਉਨ ਸੁ ਹੈ ਲਲਚਾਯੋ ॥

अउ दुहूँ को जल पीवन को मनु अउसर तउन सु है ललचायो ॥

aau dhuhoo(n) ko jal peevan ko man aausar taun su hai lalachaayo ||

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ਛੋਰਿ ਅਖੇਟਕ ਦੀਨ ਦੁਹੂੰ ਚਲਿ ਕੈ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਜਮਨਾ ਤਟਿ ਆਯੋ ॥੨੦੯੨॥

छोरि अखेटक दीन दुहूँ चलि कै प्रभ जू जमना तटि आयो ॥२०९२॥

chhor akheTak dheen dhuhoo(n) chal kai prabh joo jamanaa taT aayo ||2092||

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ਜਾਤ ਹੁਤੇ ਜਲ ਪੀਵਨ ਕੇ ਹਿਤ ਤਉ ਹੀ ਲਉ ਸੁੰਦਰਿ ਨਾਰਿ ਨਿਹਾਰੀ ॥

जात हुते जल पीवन के हित तउ ही लउ सुँदरि नारि निहारी ॥

jaat hute jal peevan ke hit tau hee lau su(n)dhar naar nihaaree ||

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ਪੂਛਹੁ ਕੋ ਹੈ ਕਹਾ ਇਹ ਦੇਸੁ ਕਹਿਯੋ ਸੰਗਿ ਪਾਰਥ ਯੌ ਗਿਰਿਧਾਰੀ ॥

पूछहु को है कहा इह देसु कहियो संगि पारथ यौ गिरिधारी ॥

poochhahu ko hai kahaa ieh dhes kahiyo sa(n)g paarath yau giridhaaree ||

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ਆਇਸ ਮਾਨਿ ਪੁਰੰਦਰ ਕੋ ਸੁ ਭਯੋ ਤਿਹ ਕੇ ਸੰਗ ਬਾਤ ਉਚਾਰੀ ॥

आइस मानि पुरंदर को सु भयो तिह के संग बात उचारी ॥

aais maan pura(n)dhar ko su bhayo teh ke sa(n)g baat uchaaree ||

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ਕਉਨ ਕੀ ਬੇਟੀ ਹੈ ਦੇਸ ਕਹਾ ਤੁਹਿ ਕੋ ਤੋਹਿ ਭ੍ਰਾਤ ਤੂ ਕਉਨ ਕੀ ਨਾਰੀ ॥੨੦੯੩॥

कउन की बेटी है देस कहा तुहि को तोहि भ्रात तू कउन की नारी ॥२०९३॥

kaun kee beTee hai dhes kahaa tuh ko toh bhraat too kaun kee naaree ||2093||

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ਜਮੁਨਾ ਬਾਚ ਅਰਜਨੁ ਸੋ ॥

जमुना बाच अरजनु सो ॥

jamunaa baach arajan so ||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਅਰਜੁਨ ਸੋ ਜਮਨਾ ਤਬੈ ਐਸੇ ਕਹਿਓ ਸੁਨਾਇ ॥

अरजुन सो जमना तबै ऐसे कहिओ सुनाइ ॥

arajun so jamanaa tabai aaise kahio sunai ||

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ਜਦੁਪਤਿ ਬਰ ਹੀ ਚਾਹਿ ਚਿਤਿ ਤਪੁ ਕੀਨੋ ਮੈ ਆਇ ॥੨੦੯੪॥

जदुपति बर ही चाहि चिति तपु कीनो मै आइ ॥२०९४॥

jadhupat bar hee chaeh chit tap keeno mai aai ||2094||

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ਪਾਰਥ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

पारथ बाच कान्रह जू सो ॥

paarath baach kaanreh joo so ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਤਬ ਪਾਰਥ ਆਇ ਕੈ ਸੀਸ ਨਿਵਾਇ ਸੁ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਸਿਉ ਇਹ ਬੈਨ ਉਚਾਰੇ ॥

तब पारथ आइ कै सीस निवाइ सु स्याम जू सिउ इह बैन उचारे ॥

tab paarath aai kai sees nivai su sayaam joo siau ieh bain uchaare ||

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ਸੂਰਜ ਕੀ ਦੁਹਿਤਾ ਜਮਨਾ ਇਹ ਨਾਮ ਪ੍ਰਭੂ ਜਗ ਜਾਹਿਰ ਸਾਰੇ ॥

सूरज की दुहिता जमना इह नाम प्रभू जग जाहिर सारे ॥

sooraj kee dhuhitaa jamanaa ieh naam prabhoo jag jaahir saare ||

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ਭੇਸ ਤਪੋਧਨ ਕਾਹੇ ਕੀਯੋ ਇਨ ਅਉ ਗ੍ਰਿਹ ਕੇ ਸਭ ਕਾਜ ਬਿਸਾਰੇ ॥

भेस तपोधन काहे कीयो इन अउ गृह के सभ काज बिसारे ॥

bhes tapodhan kaahe keeyo in aau gireh ke sabh kaaj bisaare ||

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ਅਰਜੁਨ ਉਤਰ ਐਸੇ ਦੀਯੋ ਘਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਨੋ ਬਰ ਹੇਤੁ ਤੁਮਾਰੇ ॥੨੦੯੫॥

अरजुन उतर ऐसे दीयो घनि स्याम सुनो बर हेतु तुमारे ॥२०९५॥

arajun utar aaise dheeyo ghan sayaam suno bar het tumaare ||2095||

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ਪਾਰਥ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨਿ ਯੌ ਬਹੀਯਾ ਗਹਿ ਡਾਰਿ ਲਈ ਰਥ ਊਪਰ ॥

पारथ की बतीया सुनि यौ बहीया गहि डारि लई रथ ऊपर ॥

paarath kee bateeyaa sun yau baheeyaa geh ddaar liee rath uoopar ||

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ਚੰਦ ਸੋ ਆਨਨ ਜਾਹਿ ਲਸੈ ਅਤਿ ਜੋਤਿ ਜਗੈ ਸੁ ਕਪੋਲਨ ਦੂ ਪਰ ॥

चंद सो आनन जाहि लसै अति जोति जगै सु कपोलन दू पर ॥

cha(n)dh so aanan jaeh lasai at jot jagai su kapolan dhoo par ||

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ਕੈ ਕੈ ਕ੍ਰਿਪਾ ਅਤਿ ਹੀ ਤਿਹ ਪੈ ਨ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਿ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਐਸੀ ਕਿਸੀ ਪਰ ॥

कै कै कृपा अति ही तिह पै न कृपा करि स्याम जू ऐसी किसी पर ॥

kai kai kirapaa at hee teh pai na kirapaa kar sayaam joo aaisee kisee par ||

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ਆਪਨੇ ਧਾਮਿ ਲਿਆਵਤ ਭਯੋ ਸਭ ਐਸ ਕਥਾ ਇਹ ਮਾਲੁਮ ਭੂ ਪਰ ॥੨੦੯੬॥

आपने धामि लिआवत भयो सभ ऐस कथा इह मालुम भू पर ॥२०९६॥

aapane dhaam liaavat bhayo sabh aais kathaa ieh maalum bhoo par ||2096||

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ਡਾਰਿ ਤਬੈ ਰਥ ਪੈ ਜਮਨਾ ਕਹੁ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਡੇਰਨ ਆਯੋ ॥

डारि तबै रथ पै जमना कहु स्री बृज नाइक डेरन आयो ॥

ddaar tabai rath pai jamanaa kahu sree biraj naik dderan aayo ||

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ਬ੍ਯਾਹ ਕੇ ਬੀਚ ਸਭਾ ਹੂ ਜੁਧਿਸਟਰ ਗਯੋ ਨ੍ਰਿਪ ਪਾਇਨ ਸੋ ਲਪਟਾਯੋ ॥

ब्याह के बीच सभा हू जुधिसटर गयो नृप पाइन सो लपटायो ॥

bayaeh ke beech sabhaa hoo judhisaTar gayo nirap pain so lapaTaayo ||

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ਦੁਆਰਕਾ ਜੈਸਿ ਰਚੀ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਤੁਮ ਮੋ ਪੁਰ ਤੈਸਿ ਰਚੋ ਸੁ ਸੁਨਾਯੋ ॥

दुआरका जैसि रची प्रभ जू तुम मो पुर तैसि रचो सु सुनायो ॥

dhuaarakaa jais rachee prabh joo tum mo pur tais racho su sunaayo ||

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ਆਇਸ ਦੇਤ ਭਯੋ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਕਰਮਾਬਿਸ੍ਵ ਸੋ ਤਿਨ ਤੈਸੋ ਬਨਾਯੋ ॥੨੦੯੭॥

आइस देत भयो प्रभ जू करमाबिस्व सो तिन तैसो बनायो ॥२०९७॥

aais dhet bhayo prabh joo karamaabisavai so tin taiso banaayo ||2097||

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ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸਿਕਾਰ ਖੇਲਬੋ ਜਮੁਨਾ ਕੋ ਬਿਵਾਹਤ ਭਏ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सिकार खेलबो जमुना को बिवाहत भए ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the sikaar khelabo jamunaa ko bivaahat bhe ||

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ਉਜੈਨ ਰਾਜਾ ਕੀ ਦੁਹਿਤਾ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹ ਕਥਨੰ ॥

उजैन राजा की दुहिता को ब्याह कथनं ॥

aujain raajaa kee dhuhitaa ko bayaeh kathana(n) ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਪੰਡੁ ਕੇ ਪੁਤ੍ਰਨ ਤੇ ਅਰੁ ਕੁੰਤੀ ਤੇ ਲੈ ਕੇ ਬਿਦਾ ਘਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸਿਧਾਯੋ ॥

पंडु के पुत्रन ते अरु कुँती ते लै के बिदा घनि स्याम सिधायो ॥

pa(n)dd ke putran te ar ku(n)tee te lai ke bidhaa ghan sayaam sidhaayo ||

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ਭੂਪ ਉਜੈਨ ਪੁਰੀ ਕੋ ਜਹਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਹ ਪੈ ਚਲਿ ਆਯੋ ॥

भूप उजैन पुरी को जहा कबि स्याम कहै तिह पै चलि आयो ॥

bhoop ujain puree ko jahaa kab sayaam kahai teh pai chal aayo ||

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ਤਾ ਦੁਹਿਤਾ ਹੂ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹਨ ਕਾਜ ਦੁਰਜੋਧਨ ਹੂ ਕੋ ਭੀ ਚਿਤੁ ਲੁਭਾਯੋ ॥

ता दुहिता हू को ब्याहन काज दुरजोधन हू को भी चितु लुभायो ॥

taa dhuhitaa hoo ko bayaahan kaaj dhurajodhan hoo ko bhee chit lubhaayo ||

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ਸੈਨ ਬਨਾਇ ਭਲੀ ਅਪਨੀ ਤਿਹ ਬ੍ਯਾਹਨ ਕਉ ਇਤ ਤੇ ਇਹ ਧਾਯੋ ॥੨੦੯੮॥

सैन बनाइ भली अपनी तिह ब्याहन कउ इत ते इह धायो ॥२०९८॥

sain banai bhalee apanee teh bayaahan kau it te ieh dhaayo ||2098||

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ਸਜਿ ਸੈਨ ਦੁਰਜੋਧਨ ਆਯੋ ਉਤੇ ਪੁਰ ਤਾਹੀ ਇਤੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਆਏ ॥

सजि सैन दुरजोधन आयो उते पुर ताही इतै बृज नाइक आए ॥

saj sain dhurajodhan aayo ute pur taahee itai biraj naik aae ||

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ਭੂਪਤਿ ਅਉਰ ਬਡੇ ਬਲਵੰਡ ਸੁ ਵਾਹ ਬਿਯਾਹ ਕਉ ਦੇਖਨ ਧਾਏ ॥

भूपति अउर बडे बलवंड सु वाह बियाह कउ देखन धाए ॥

bhoopat aaur badde balava(n)dd su vaeh biyaeh kau dhekhan dhaae ||

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ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਤਿਹ ਕੀ ਭਗਨੀ ਤਿਹ ਆਨੰਦ ਦੁੰਦਭਿ ਕੋਟਿ ਬਜਾਏ ॥

स्याम भनै तिह की भगनी तिह आनंद दुँदभि कोटि बजाए ॥

sayaam bhanai teh kee bhaganee teh aana(n)dh dhu(n)dhabh koT bajaae ||

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ਤਉ ਹੀ ਲਉ ਸ੍ਯਾਮ ਜੀ ਬ੍ਯਾਹ ਕੈ ਤਾਹ ਕੋ ਪਾਰਥ ਲੈ ਸੰਗਿ ਅਉਧਿ ਸਿਧਾਏ ॥੨੦੯੯॥

तउ ही लउ स्याम जी ब्याह कै ताह को पारथ लै संगि अउधि सिधाए ॥२०९९॥

tau hee lau sayaam jee bayaeh kai taeh ko paarath lai sa(n)g aaudh sidhaae ||2099||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਜਬ ਜਦੁਬੀਰ ਅਜੁਧਿਆ ਆਯੋ ॥

जब जदुबीर अजुधिआ आयो ॥

jab jadhubeer ajudhiaa aayo ||

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ਸੁਨਿ ਭੂਪਤਿ ਲੈਬੇ ਕਹੁ ਧਾਯੋ ॥

सुनि भूपति लैबे कहु धायो ॥

sun bhoopat laibe kahu dhaayo ||

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ਸਿੰਘਾਸਨ ਅਪਨੇ ਬੈਠਾਰਿਯੋ ॥

सिंघासन अपने बैठारियो ॥

si(n)ghaasan apane baiThaariyo ||

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ਚਿਤ ਕੋ ਸੋਕ ਦੂਰ ਕਰਿ ਡਾਰਿਯੋ ॥੨੧੦੦॥

चित को सोक दूर करि डारियो ॥२१००॥

chit ko sok dhoor kar ddaariyo ||2100||

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ਚਰਨ ਪ੍ਰਭੂ ਕੇ ਗਹਿ ਕਰ ਰਹਿਯੋ ॥

चरन प्रभू के गहि कर रहियो ॥

charan prabhoo ke geh kar rahiyo ||

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ਤੁਮ ਦਰਸਨ ਪਾਵਤ ਦੁਖ ਬਹਿਯੋ ॥

तुम दरसन पावत दुख बहियो ॥

tum dharasan paavat dhukh bahiyo ||

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ਅਰੁ ਨ੍ਰਿਪ ਚਿਤ ਮੈ ਪ੍ਰੇਮ ਬਢਾਯੋ ॥

अरु नृप चित मै प्रेम बढायो ॥

ar nirap chit mai prem baddaayo ||

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ਮਨ ਅਪਨੋ ਸੰਗਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਿਲਾਯੋ ॥੨੧੦੧॥

मन अपनो संगि स्याम मिलायो ॥२१०१॥

man apano sa(n)g sayaam milaayo ||2101||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਨ੍ਰਿਪ ਸੋ ॥

कान्रह जू बाच नृप सो ॥

kaanreh joo baach nirap so ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਦੇਖ ਕੈ ਪ੍ਰੀਤਿ ਨ੍ਰਿਪੋਤਮ ਕੀ ਹਸਿ ਕੈ ਤਿਹ ਸੋ ਇਮ ਸ੍ਯਾਮ ਉਚਾਰੋ ॥

देख कै प्रीति नृपोतम की हसि कै तिह सो इम स्याम उचारो ॥

dhekh kai preet nirapotam kee has kai teh so im sayaam uchaaro ||

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ਹੋ ਤੁਮ ਰਾਘਵ ਕੇ ਕੁਲ ਤੇ ਜਿਨਿ ਰਾਵਨ ਸੋ ਰਿਸਿ ਸਤ੍ਰ ਪਛਾਰੋ ॥

हो तुम राघव के कुल ते जिनि रावन सो रिसि सत्र पछारो ॥

ho tum raaghav ke kul te jin raavan so ris satr pachhaaro ||

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ਮਾਗਵੋ ਛਤ੍ਰਨ ਕੋ ਨ ਕਹਿਯੋ ਤਊ ਮਾਗਤਿ ਹੋ ਨਹਿ ਸੰਕ ਬਿਚਾਰੋ ॥

मागवो छत्रन को न कहियो तऊ मागति हो नहि संक बिचारो ॥

maagavo chhatran ko na kahiyo tuoo maagat ho neh sa(n)k bichaaro ||

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ਅਪਨੀ ਦੈ ਦੁਹਿਤਾ ਹਮ ਕਉ ਤਿਹ ਕਉ ਚਿਤ ਚਾਹਤ ਹੈ ਸੁ ਹਮਾਰੋ ॥੨੧੦੨॥

अपनी दै दुहिता हम कउ तिह कउ चित चाहत है सु हमारो ॥२१०२॥

apanee dhai dhuhitaa ham kau teh kau chit chaahat hai su hamaaro ||2102||

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ਨ੍ਰਿਪੋ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

नृपो बाच कान्रह सो ॥

nirapo baach kaanreh so ||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਤਬ ਯੌ ਭੂਪ ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਭਾਖੀ ॥

तब यौ भूप स्याम सो भाखी ॥

tab yau bhoop sayaam so bhaakhee ||

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ਏਕ ਪ੍ਰਤਿਗ੍ਰਯਾ ਮੈ ਕਰ ਰਾਖੀ ॥

एक प्रतिग्रया मै कर राखी ॥

ek pratigrayaa mai kar raakhee ||

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ਜੋ ਇਨ ਸਤ ਬ੍ਰਿਖਭਨ ਕੋ ਨਾਥੈ ॥

जो इन सत बृखभन को नाथै ॥

jo in sat birakhabhan ko naathai ||

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ਸੋ ਇਹ ਕੋ ਲੈ ਜਾ ਕਰਿ ਸਾਥੈ ॥੨੧੦੩॥

सो इह को लै जा करि साथै ॥२१०३॥

so ieh ko lai jaa kar saathai ||2103||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਕਟਿ ਸੋ ਕਸਿ ਸ੍ਯਾਮ ਪਿਤੰਬਰ ਕੋ ਅਪੁਨੋ ਪੁਨਿ ਸਾਤਊ ਬੇਖ ਬਨਾਏ ॥

कटि सो कसि स्याम पितंबर को अपुनो पुनि सातऊ बेख बनाए ॥

kaT so kas sayaam pita(n)bar ko apuno pun saatuoo bekh banaae ||

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ਦੇਖਬੇ ਭੀਤਰ ਏਕ ਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਲਗੈ ਕਿਨ ਹੂ ਲਖਿ ਭੇਦ ਨ ਪਾਏ ॥

देखबे भीतर एक ही स्याम लगै किन हू लखि भेद न पाए ॥

dhekhabe bheetar ek hee sayaam lagai kin hoo lakh bhedh na paae ||

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ਪਾਗਹਿ ਦਾਬਿ ਨਚਾਇ ਕੈ ਭਉਹਨ ਸੂਰ ਸਭੋ ਮਹਿ ਸੂਰ ਕਹਾਏ ॥

पागहि दाबि नचाइ कै भउहन सूर सभो महि सूर कहाए ॥

paageh dhaab nachai kai bhauhan soor sabho meh soor kahaae ||

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ਧੰਨਿ ਹੀ ਧੰਨਿ ਕਹਿਯੋ ਸਭ ਹੀ ਜਬ ਸਾਤ ਹੀ ਬੈਲਨ ਕੋ ਨਥਿ ਆਏ ॥੨੧੦੪॥

धंनि ही धंनि कहियो सभ ही जब सात ही बैलन को नथि आए ॥२१०४॥

dha(n)n hee dha(n)n kahiyo sabh hee jab saat hee bailan ko nath aae ||2104||

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ਜਬ ਨਾਥਤ ਭਯੋ ਪ੍ਰਭ ਸਾਤ ਬ੍ਰਿਖਭ ਤਬ ਭਾਖਤ ਭੇ ਭਟਵਾ ਇਹ ਸਾਥੇ ॥

जब नाथत भयो प्रभ सात बृखभ तब भाखत भे भटवा इह साथे ॥

jab naathat bhayo prabh saat birakhabh tab bhaakhat bhe bhaTavaa ieh saathe ||

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ਆਵਤ ਜੋ ਬਲਵੰਤ ਇਹੀ ਹਿਤ ਸੋ ਪੁਰਏ ਇਨ ਸਿੰਗਨ ਸਾਥੇ ॥

आवत जो बलवंत इही हित सो पुरए इन सिंगन साथे ॥

aavat jo balava(n)t ihee hit so pure in si(n)gan saathe ||

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ਕਉਨ ਬਲੀ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਜਗ ਮੈ ਇਨ ਸਾਤਨ ਕੇ ਜੋਊ ਨਾਕਹਿ ਨਾਥੇ ॥

कउन बली प्रगटियो जग मै इन सातन के जोऊ नाकहि नाथे ॥

kaun balee pragaTiyo jag mai in saatan ke jouoo naakeh naathe ||

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ਬੀਰ ਕਹੈ ਹਸ ਕੈ ਰਨਧੀਰ ਬਿਨਾ ਰਿਪੁ ਚੀਰ ਸੁ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥੇ ॥੨੧੦੫॥

बीर कहै हस कै रनधीर बिना रिपु चीर सु स्री बृजनाथे ॥२१०५॥

beer kahai has kai ranadheer binaa rip cheer su sree birajanaathe ||2105||

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ਸਾਧ ਕਹੈ ਇਕ ਯੌ ਹਸਿ ਕੈ ਸਮ ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਜੋ ਜਗ ਬੀਰ ਬਿਯੋ ਹੈ ॥

साध कहै इक यौ हसि कै सम स्याम की जो जग बीर बियो है ॥

saadh kahai ik yau has kai sam sayaam kee jo jag beer biyo hai ||

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ਜਾ ਮਘਵਾਜਿਤ ਜੀਤ ਲਯੋ ਸਿਰ ਰਾਵਣ ਕਾਟਿ ਕਬੰਧ ਕਿਯੋ ਹੈ ॥

जा मघवाजित जीत लयो सिर रावण काटि कबंध कियो है ॥

jaa maghavaajit jeet layo sir raavan kaaT kaba(n)dh kiyo hai ||

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ਗਾੜ ਪਰੀ ਗਜ ਪੈ ਜਬ ਹੀ ਤਿਹ ਨਾਕਹਿ ਤੇ ਪ੍ਰਭੁ ਰਾਖਿ ਲਿਯੋ ਹੈ ॥

गाड़ परी गज पै जब ही तिह नाकहि ते प्रभु राखि लियो है ॥

gaaR paree gaj pai jab hee teh naakeh te prabh raakh liyo hai ||

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ਭੀਰ ਪਰੇ ਰਨਧੀਰ ਭਯੋ ਜਨ ਪੀਰ ਨਿਹਾਰਿ ਅਧੀਰ ਭਯੋ ਹੈ ॥੨੧੦੬॥

भीर परे रनधीर भयो जन पीर निहारि अधीर भयो है ॥२१०६॥

bheer pare ranadheer bhayo jan peer nihaar adheer bhayo hai ||2106||

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ਜੋ ਬਿਧਿ ਬੇਦ ਕੇ ਬੀਚ ਲਿਖੀ ਬਿਧਿ ਤਾਹੀ ਸੋ ਬ੍ਯਾਹ ਸਿਆਮ ਕੋ ਕੀਨੋ ॥

जो बिधि बेद के बीच लिखी बिधि ताही सो ब्याह सिआम को कीनो ॥

jo bidh bedh ke beech likhee bidh taahee so bayaeh siaam ko keeno ||

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ਆਨੰਦ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਚਿਤ ਮੈ ਸਭ ਦੀਨ ਸੁ ਬਿਪ੍ਰਨ ਸਾਜ ਨਵੀਨੋ ॥

आनंद कै अति ही चित मै सभ दीन सु बिप्रन साज नवीनो ॥

aana(n)dh kai at hee chit mai sabh dheen su bipran saaj naveeno ||

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ਅਉ ਗਜਰਾਜ ਬਡੇ ਅਰੁ ਬਾਜ ਘਨੇ ਧਨ ਲੈ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਕੋ ਦੀਨੋ ॥

अउ गजराज बडे अरु बाज घने धन लै बृजनाथ को दीनो ॥

aau gajaraaj badde ar baaj ghane dhan lai birajanaath ko dheeno ||

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ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਭੂਪਤਿ ਲੋਕ ਬਿਖੈ ਅਤਿ ਹੀ ਜਸੁ ਲੀਨੋ ॥੨੧੦੭॥

स्याम भने इह भाति सो भूपति लोक बिखै अति ही जसु लीनो ॥२१०७॥

sayaam bhane ieh bhaat so bhoopat lok bikhai at hee jas leeno ||2107||

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ਨ੍ਰਿਪ ਬਾਚ ਸਭਾ ਸੋ ॥

नृप बाच सभा सो ॥

nirap baach sabhaa so ||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਭੂਪ ਸਿੰਘਾਸਨ ਊਪਰਿ ਬੈਠ ਕੈ ਮਧਿ ਸਭਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਖਾਨਿਯੋ ॥

भूप सिंघासन ऊपरि बैठ कै मधि सभा इह भाति बखानियो ॥

bhoop si(n)ghaasan uoopar baiTh kai madh sabhaa ieh bhaat bakhaaniyo ||

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ਤੈਸੋ ਈ ਕਾਮੁ ਕੀਯੋ ਜਦੁਨੰਦਨ ਜਿਉ ਧਨੁ ਸ੍ਰੀ ਰਘੁਨੰਦਨ ਤਾਨਿਯੋ ॥

तैसो ई कामु कीयो जदुनंदन जिउ धनु स्री रघुनंदन तानियो ॥

taiso iee kaam keeyo jadhuna(n)dhan jiau dhan sree raghuna(n)dhan taaniyo ||

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ਜੀਤਿ ਉਜੈਨ ਕੇ ਭੂਪ ਕੀ ਭੈਨ ਪੁਰੀ ਇਹ ਅਉਧ ਜਬੈ ਪਗੁ ਠਾਨਿਯੋ ॥

जीति उजैन के भूप की भैन पुरी इह अउध जबै पगु ठानियो ॥

jeet ujain ke bhoop kee bhain puree ieh aaudh jabai pag Thaaniyo ||

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ਦੇਖਤ ਹੀ ਸਭ ਹੀ ਮਨ ਮੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਸੂਰ ਸਹੀ ਕਰਿ ਜਾਨਿਯੋ ॥੨੧੦੮॥

देखत ही सभ ही मन मै बृज नाइक सूर सही करि जानियो ॥२१०८॥

dhekhat hee sabh hee man mai biraj naik soor sahee kar jaaniyo ||2108||

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ਭੂਪ ਜਬੈ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਜਦੁਬੀਰ ਕੋ ਬੀਰ ਸਹੀ ਕਰਿ ਜਾਨਿਯੋ ॥

भूप जबै अपने मन मै जदुबीर को बीर सही करि जानियो ॥

bhoop jabai apane man mai jadhubeer ko beer sahee kar jaaniyo ||

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ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਜੁਧ ਸਮੈ ਅਰਿ ਅਉਰ ਨ ਆਂਖਨ ਅਗ੍ਰਜ ਆਨਿਯੋ ॥

स्री बृज नाइक जुध समै अरि अउर न आँखन अग्रज आनियो ॥

sree biraj naik judh samai ar aaur na aa(n)khan agraj aaniyo ||

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ਮੰਤ੍ਰਨ ਹੇਰਿ ਸਭੈ ਹਰਿ ਕੋ ਬਰੁ ਲਾਇਕ ਹੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਖਾਨਿਯੋ ॥

मंत्रन हेरि सभै हरि को बरु लाइक है इह भाति बखानियो ॥

ma(n)tran her sabhai har ko bar laik hai ieh bhaat bakhaaniyo ||

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ਅਉਧ ਕੇ ਰਾਇ ਤਬੈ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਹਾ ਸੁਖੁ ਮਾਨਿਯੋ ॥੨੧੦੯॥

अउध के राइ तबै अपुने मन मै कबि स्याम महा सुखु मानियो ॥२१०९॥

aaudh ke rai tabai apune man mai kab sayaam mahaa sukh maaniyo ||2109||

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ਕਰਮਨ ਮੈ ਦਿਜ ਸ੍ਰੇਸਟ ਜੁ ਥੇ ਜਬ ਸੋ ਇਹ ਭੂਪ ਸਭਾ ਹੂੰ ਮੈ ਆਏ ॥

करमन मै दिज स्रेसट जु थे जब सो इह भूप सभा हूँ मै आए ॥

karaman mai dhij sresaT ju the jab so ieh bhoop sabhaa hoo(n) mai aae ||

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ਦੈ ਕੈ ਅਸੀਸ ਨ੍ਰਿਪੋਤਮ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਇਹ ਬੈਨ ਸੁਨਾਏ ॥

दै कै असीस नृपोतम को कबि स्याम भनै इह बैन सुनाए ॥

dhai kai asees nirapotam ko kab sayaam bhanai ieh bain sunaae ||

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ਜਾ ਦੁਹਿਤਾ ਕੇ ਸੁਨੋ ਤੁਮ ਹੇਤੁ ਘਨੇ ਦਿਜ ਦੇਸਨ ਦੇਸ ਪਠਾਏ ॥

जा दुहिता के सुनो तुम हेतु घने दिज देसन देस पठाए ॥

jaa dhuhitaa ke suno tum het ghane dhij dhesan dhes paThaae ||

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ਸੋ ਤੁਮ ਰਾਇ ਅਚਾਨਕ ਹੀ ਬਰੁ ਲਾਇਕ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਇਕ ਪਾਏ ॥੨੧੧੦॥

सो तुम राइ अचानक ही बरु लाइक स्री बृज नाइक पाए ॥२११०॥

so tum rai achaanak hee bar laik sree biraj naik paae ||2110||

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ਯੌ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਤਿਨ ਕੀ ਚਿਤ ਕੇ ਨ੍ਰਿਪ ਬੀਚ ਹੁਲਾਸ ਬਢੈ ਕੈ ॥

यौ सुनि कै बतीया तिन की चित के नृप बीच हुलास बढै कै ॥

yau sun kai bateeyaa tin kee chit ke nirap beech hulaas baddai kai ||

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ਦਾਜ ਦਯੋ ਜਿਹ ਅੰਤ ਨ ਆਵਤ ਬਾਜਨ ਦ੍ਵਾਰ ਅਨੇਕ ਬਜੈ ਕੈ ॥

दाज दयो जिह अंत न आवत बाजन द्वार अनेक बजै कै ॥

dhaaj dhayo jeh a(n)t na aavat baajan dhavaiaar anek bajai kai ||

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ਬਿਪ੍ਰਨ ਦੀਨ ਘਨੀ ਦਛਨਾ ਸੁਖੁ ਪਾਇ ਕਿਤੈ ਜਦੁਬੀਰ ਚਿਤੈ ਕੈ ॥

बिप्रन दीन घनी दछना सुखु पाइ कितै जदुबीर चितै कै ॥

bipran dheen ghanee dhachhanaa sukh pai kitai jadhubeer chitai kai ||

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ਸੁੰਦਰ ਜੋ ਆਪਨੀ ਦੁਹਿਤਾ ਸੁ ਦਈ ਘਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਸੰਗਿ ਪਠੈ ਕੈ ॥੨੧੧੧॥

सुँदर जो आपनी दुहिता सु दई घनि स्याम के संगि पठै कै ॥२१११॥

su(n)dhar jo aapanee dhuhitaa su dhiee ghan sayaam ke sa(n)g paThai kai ||2111||

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ਜੀਤਿ ਸੁਅੰਬਰ ਮੈ ਹਰਿ ਆਉਧ ਕੇ ਭੂਪਤਿ ਕੀ ਦੁਹਿਤਾ ਜਬ ਆਯੋ ॥

जीति सुअंबर मै हरि आउध के भूपति की दुहिता जब आयो ॥

jeet sua(n)bar mai har aaudh ke bhoopat kee dhuhitaa jab aayo ||

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ਬਾਗ ਕੇ ਭੀਤਰ ਸੈਲ ਕਰੈ ਸੰਗ ਪਾਰਥ ਥੇ ਚਿਤ ਮੈ ਠਹਰਾਯੋ ॥

बाग के भीतर सैल करै संग पारथ थे चित मै ठहरायो ॥

baag ke bheetar sail karai sa(n)g paarath the chit mai Thaharaayo ||

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ਪੋਸਤ ਭਾਗ ਅਫੀਮ ਘਨੇ ਮਦ ਪੀਵਨ ਕੇ ਤਿਨਿ ਕਾਜ ਮੰਗਾਯੋ ॥

पोसत भाग अफीम घने मद पीवन के तिनि काज मंगायो ॥

posat bhaag afeem ghane madh peevan ke tin kaaj ma(n)gaayo ||

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ਮੰਗਨ ਲੋਗਨ ਬੋਲਿ ਪਠਿਯੋ ਬਹੁ ਆਵਤ ਭੇ ਜਨ ਪਾਰ ਨ ਪਾਯੋ ॥੨੧੧੨॥

मंगन लोगन बोलि पठियो बहु आवत भे जन पार न पायो ॥२११२॥

ma(n)gan logan bol paThiyo bahu aavat bhe jan paar na paayo ||2112||

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ਬਹੁ ਰਾਮਜਨੀ ਤਹ ਨਾਚਤ ਹੈ ਇਕ ਝਾਝਰ ਬੀਨ ਮ੍ਰਿਦੰਗ ਬਜਾਵੈ ॥

बहु रामजनी तह नाचत है इक झाझर बीन मृदंग बजावै ॥

bahu raamajanee teh naachat hai ik jhaajhar been miradha(n)g bajaavai ||

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ਦੈ ਇਕ ਝੂਮਕ ਆਵਤ ਹੈ ਇਕ ਭਾਮਿਨ ਦੈ ਹਰਿ ਝੂਮਕ ਜਾਵੈ ॥

दै इक झूमक आवत है इक भामिन दै हरि झूमक जावै ॥

dhai ik jhoomak aavat hai ik bhaamin dhai har jhoomak jaavai ||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਪਟੰਬਰ ਦੇਤ ਤਿਨੈ ਮਨਿ ਲਾਲ ਘਨੇ ਚਿਤ ਕੋ ਜੁ ਰਿਝਾਵੈ ॥

कान्रह पटंबर देत तिनै मनि लाल घने चित को जु रिझावै ॥

kaanreh paTa(n)bar dhet tinai man laal ghane chit ko ju rijhaavai ||

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ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਬਹੁ ਮੋਲ ਖਰੇ ਸੁਰ ਰਾਜਹਿ ਕੋ ਕੋਊ ਹਾਥਿ ਨ ਆਵੈ ॥੨੧੧੩॥

स्याम भनै बहु मोल खरे सुर राजहि को कोऊ हाथि न आवै ॥२११३॥

sayaam bhanai bahu mol khare sur raajeh ko kouoo haath na aavai ||2113||

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ਪਾਵਤ ਰਾਮਜਨੀ ਨਰ ਕੈ ਧਨ ਪਾਵਤ ਹੈ ਬਹੁ ਦਾਨ ਗਵਇਯਾ ॥

पावत रामजनी नर कै धन पावत है बहु दान गवइया ॥

paavat raamajanee nar kai dhan paavat hai bahu dhaan gaviyaa ||

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ਏਕ ਰਿਝਾਵਤ ਹੈ ਹਰਿ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਨੈ ਪੜਿ ਛੰਤ ਸਵਇਯਾ ॥

एक रिझावत है हरि को कबि स्याम भनै पड़ि छंत सवइया ॥

ek rijhaavat hai har ko kab sayaam bhanai paR chha(n)t saviyaa ||

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ਅਉਰ ਦਿਸਾ ਕੇ ਬਿਖੈ ਸੁ ਘਨੇ ਮਿਲਿ ਨਾਚਤ ਹੈ ਕਰਿ ਗਾਨ ਭਵਇਆ ॥

अउर दिसा के बिखै सु घने मिलि नाचत है करि गान भवइआ ॥

aaur dhisaa ke bikhai su ghane mil naachat hai kar gaan bhaviaa ||

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ਕਉਨ ਕਮੀ ਕਹੋ ਹੈ ਤਿਨ ਕੋ ਜੋਊ ਸ੍ਰੀ ਜਦੁਬੀਰ ਕੇ ਧਾਮ ਅਵਇਯਾ ॥੨੧੧੪॥

कउन कमी कहो है तिन को जोऊ स्री जदुबीर के धाम अवइया ॥२११४॥

kaun kamee kaho hai tin ko jouoo sree jadhubeer ke dhaam aviyaa ||2114||

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ਤਿਨ ਕੌ ਬਹੁ ਦੈ ਸੰਗਿ ਪਾਰਥ ਲੈ ਹਰਿ ਭੋਜਨ ਕੀ ਭੂਅ ਮੈ ਪਗ ਧਾਰਿਯੋ ॥

तिन कौ बहु दै संगि पारथ लै हरि भोजन की भूअ मै पग धारियो ॥

tin kau bahu dhai sa(n)g paarath lai har bhojan kee bhooa mai pag dhaariyo ||

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ਪੋਸਤ ਭਾਗ ਅਫੀਮ ਮੰਗਾਇ ਪੀਓ ਮਦ ਸੋਕ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰਿਯੋ ॥

पोसत भाग अफीम मंगाइ पीओ मद सोक बिदा करि डारियो ॥

posat bhaag afeem ma(n)gai peeo madh sok bidhaa kar ddaariyo ||

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ਮਤਿ ਹੋ ਚਾਰੋਈ ਕੈਫਨ ਸੋ ਸੁਤ ਇੰਦ੍ਰ ਕੈ ਸੋ ਇਮਿ ਸ੍ਯਾਮ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

मति हो चारोई कैफन सो सुत इंद्र कै सो इमि स्याम उचारियो ॥

mat ho chaaroiee kaifan so sut i(n)dhr kai so im sayaam uchaariyo ||

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ਕਾਮ ਕੀਯੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਘਟਿ ਕਿਉ ਮਦਰਾ ਕੋ ਨ ਆਠਵੋ ਸਿੰਧੁ ਸਵਾਰਿਯੋ ॥੨੧੧੫॥

काम कीयो ब्रहमा घटि किउ मदरा को न आठवो सिंधु सवारियो ॥२११५॥

kaam keeyo brahamaa ghaT kiau madharaa ko na aaThavo si(n)dh savaariyo ||2115||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਤਬ ਪਾਰਥ ਕਰ ਜੋਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਸਿਉ ਕਹਿਯੋ ਸੁਨਾਇ ॥

तब पारथ कर जोरि कै हरि सिउ कहियो सुनाइ ॥

tab paarath kar jor kai har siau kahiyo sunai ||

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ਜੜ ਬਾਮਨ ਇਨ ਰਸਨ ਕੋ ਜਾਨੇ ਕਹਾ ਉਪਾਇ ॥੨੧੧੬॥

जड़ बामन इन रसन को जाने कहा उपाइ ॥२११६॥

jaR baaman in rasan ko jaane kahaa upai ||2116||

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ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਬ੍ਰਿਖਭ ਨਾਥਿ ਅਵਧ ਰਾਜੇ ਕੀ ਦੁਹਿਤਾ ਬਿਵਾਹਤ ਭਏ ॥

इति स्री दसम सिकंध पुराणे बचित्र नाटक कृसनावतारे बृखभ नाथि अवध राजे की दुहिता बिवाहत भए ॥

eit sree dhasam sika(n)dh puraane bachitr naaTak kirasanaavataare birakhabh naath avadh raaje kee dhuhitaa bivaahat bhe ||

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ਅਥ ਇੰਦ੍ਰ ਭੂਮਾਸੁਰ ਕੇ ਦੁਖ ਤੇ ਆਵਤ ਭਏ ਕਥਨੰ ॥

अथ इंद्र भूमासुर के दुख ते आवत भए कथनं ॥

ath i(n)dhr bhoomaasur ke dhukh te aavat bhe kathana(n) ||

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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

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ਦ੍ਵਾਰਵਤੀ ਜਬ ਜਦੁਪਤਿ ਆਯੋ ॥

द्वारवती जब जदुपति आयो ॥

dhavaiaaravatee jab jadhupat aayo ||

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ਇੰਦ੍ਰ ਆਇ ਪਾਇਨ ਲਪਟਾਯੋ ॥

इंद्र आइ पाइन लपटायो ॥

ei(n)dhr aai pain lapaTaayo ||

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ਭੂਮਾਸੁਰ ਕੋ ਦੂਖ ਸੁਨਾਯੋ ॥

भूमासुर को दूख सुनायो ॥

bhoomaasur ko dhookh sunaayo ||

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ਪ੍ਰਭ ਤਿਹ ਤੇ ਮੈ ਅਤਿ ਦੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥੨੧੧੭॥

प्रभ तिह ते मै अति दुखु पायो ॥२११७॥

prabh teh te mai at dhukh paayo ||2117||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਸੋ ਮੋ ਪਰ ਅਤਿ ਪ੍ਰਬਲ ਹੈ ਮੋ ਪੈ ਸਧਿਯੋ ਨ ਜਾਇ ॥

सो मो पर अति प्रबल है मो पै सधियो न जाइ ॥

so mo par at prabal hai mo pai sadhiyo na jai ||

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ਤਾ ਕੋ ਆਪਨ ਹੀ ਪ੍ਰਭੂ ਕੀਜੈ ਨਾਸ ਉਪਾਇ ॥੨੧੧੮॥

ता को आपन ही प्रभू कीजै नास उपाइ ॥२११८॥

taa ko aapan hee prabhoo keejai naas upai ||2118||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਤਬ ਇੰਦ੍ਰ ਬਿਦਾ ਕੈ ਦਯੋ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਤਿਹ ਕੋ ਸੁ ਸਮੋਧ ਭਲੈ ਕਰਿ ਕੈ ॥

तब इंद्र बिदा कै दयो प्रभ जू तिह को सु समोध भलै करि कै ॥

tab i(n)dhr bidhaa kai dhayo prabh joo teh ko su samodh bhalai kar kai ||

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ਮਨ ਮੈ ਕਹਿਯੋ ਚਿੰਤ ਨ ਤੂ ਕਰਿ ਰੇ ਚਲਿ ਹੋਂ ਨਹੀ ਹਉ ਤਿਹ ਤੇ ਟਰਿ ਕੈ ॥

मन मै कहियो चिंत न तू करि रे चलि हों नही हउ तिह ते टरि कै ॥

man mai kahiyo chi(n)t na too kar re chal ho(n) nahee hau teh te Tar kai ||

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ਕੁਪ ਕੈ ਜਬ ਹੀ ਰਥ ਪੈ ਚੜਿ ਹੋਂ ਸਭ ਸਸਤ੍ਰਨ ਹਾਥਨ ਮੈ ਧਰਿ ਕੈ ॥

कुप कै जब ही रथ पै चड़ि हों सभ ससत्रन हाथन मै धरि कै ॥

kup kai jab hee rath pai chaR ho(n) sabh sasatran haathan mai dhar kai ||

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ਡਰਿ ਤੂ ਨ ਅਰੇ ਡਰਿ ਹਉ ਤੁਮਰੇ ਅਰਿ ਕਉ ਪਲਿ ਮੈ ਸਤਿ ਧਾ ਕਰਿ ਕੈ ॥੨੧੧੯॥

डरि तू न अरे डरि हउ तुमरे अरि कउ पलि मै सति धा करि कै ॥२११९॥

ddar too na are ddar hau tumare ar kau pal mai sat dhaa kar kai ||2119||

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ਮਘਵਾ ਸਿਰ ਨਿਆਇ ਗਯੋ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਤਿਹ ਕੋ ਚਿਤ ਮੈ ਬਧਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਸਾਯੋ ॥

मघवा सिर निआइ गयो गृह को तिह को चित मै बधि स्याम बसायो ॥

maghavaa sir niaai gayo gireh ko teh ko chit mai badh sayaam basaayo ||

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ਸੰਗ ਲਈ ਜਦੁਵੀ ਪ੍ਰਿਤਨਾ ਨਹਿ ਪਾਰਥ ਕੋ ਕਰਿ ਸੰਗਿ ਚਲਾਯੋ ॥

संग लई जदुवी पृतना नहि पारथ को करि संगि चलायो ॥

sa(n)g liee jadhuvee piratanaa neh paarath ko kar sa(n)g chalaayo ||

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ਏਕ ਤ੍ਰੀਯਾ ਹਿਤ ਲੈ ਸੰਗਿ ਕਉਤਕਿ ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਨਾਯੋ ॥

एक त्रीया हित लै संगि कउतकि यौ कहि कै कबि स्याम सुनायो ॥

ek treeyaa hit lai sa(n)g kautak yau keh kai kab sayaam sunaayo ||

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ਸ੍ਯਾਮ ਚਲੇ ਤਿਹ ਓਰ ਨਹੀ ਤਿਹ ਊਪਰਿ ਅੰਤ ਦਸਾਨਿਹ ਧਾਯੋ ॥੨੧੨੦॥

स्याम चले तिह ओर नही तिह ऊपरि अंत दसानिह धायो ॥२१२०॥

sayaam chale teh or nahee teh uoopar a(n)t dhasaaneh dhaayo ||2120||

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ਗਰੁੜੁ ਪਰ ਸ੍ਯਾਮ ਜਬੈ ਚੜ ਕੈ ਤਿਹ ਸਤ੍ਰਹਿ ਕੀ ਜਬ ਓਰਿ ਸਿਧਾਰਿਯੋ ॥

गरुड़ु पर स्याम जबै चड़ कै तिह सत्रहि की जब ओरि सिधारियो ॥

garuR par sayaam jabai chaR kai teh satreh kee jab or sidhaariyo ||

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ਪਾਹਨ ਕੋਟਿ ਪਿਖਿਯੋ ਪ੍ਰਿਥਮੈ ਦੁਤੀਏ ਬਰੁ ਲੋਹ ਕੋ ਨੈਨ ਨਿਹਾਰਿਯੋ ॥

पाहन कोटि पिखियो पृथमै दुतीए बरु लोह को नैन निहारियो ॥

paahan koT pikhiyo pirathamai dhute'ee bar loh ko nain nihaariyo ||

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ਨੀਰ ਕੋ ਹੇਰਤ ਭਯੋ ਤ੍ਰਿਤੀਏ ਅਰੁ ਆਗਿ ਕੋ ਚਉਥੀ ਸੁ ਠਾਉਰ ਬਿਚਾਰਿਯੋ ॥

नीर को हेरत भयो तृतीए अरु आगि को चउथी सु ठाउर बिचारियो ॥

neer ko herat bhayo tirate'ee ar aag ko chauthee su Thaaur bichaariyo ||

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ਪਾਚਵੋ ਪਉਨ ਪਿਖਿਓ ਖਟ ਫਾਸਨ ਕ੍ਰੋਧ ਕੀਯੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਹਕਾਰਿਯੋ ॥੨੧੨੧॥

पाचवो पउन पिखिओ खट फासन क्रोध कीयो इह भाति हकारियो ॥२१२१॥

paachavo paun pikhio khaT faasan krodh keeyo ieh bhaat hakaariyo ||2121||

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ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ॥

कान्रह जू बाच ॥

kaanreh joo baach ||

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ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

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ਅਰੇ ਦੁਰਗ ਪਤਿ ਦੁਰਗ ਕੇ ਰਹਿਯੋ ਕਹਾ ਛਪ ਬੀਚ ॥

अरे दुरग पति दुरग के रहियो कहा छप बीच ॥

are dhurag pat dhurag ke rahiyo kahaa chhap beech ||

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ਰਿਸਿ ਹਮ ਸੋ ਰਨ ਮਾਡ ਤੁਹਿ ਠਾਢਿ ਪੁਕਾਰਤ ਮੀਚ ॥੨੧੨੨॥

रिसि हम सो रन माड तुहि ठाढि पुकारत मीच ॥२१२२॥

ris ham so ran maadd tuh Thaadd pukaarat meech ||2122||

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ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

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ਜਉ ਇਹ ਭਾਤ ਕਹਿਯੋ ਜਦੁਨੰਦਨ ਤਉ ਉਹ ਸਤ੍ਰ ਲਖਿਯੋ ਕੋਊ ਆਯੋ ॥

जउ इह भात कहियो जदुनंदन तउ उह सत्र लखियो कोऊ आयो ॥

jau ieh bhaat kahiyo jadhuna(n)dhan tau uh satr lakhiyo kouoo aayo ||

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