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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
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ਲ੍ਯਾਇ ਕੈ ਤਾਹੀ ਕੌ ਪੈ ਸੰਗ ਕੈ ਗੁਰੁ ਪਾਇਨ ਊਪਰ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥

ल्याइ कै ताही कौ पै संग कै गुरु पाइन ऊपर सीस झुकायो ॥

layai kai taahee kau pai sa(n)g kai gur pain uoopar sees jhukaayo ||

ਹੋਇ ਬਿਦਾ ਤਬ ਹੀ ਗੁਰ ਤੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਪੁਨੇ ਪੁਰਿ ਆਯੋ ॥੮੯੧॥

होइ बिदा तब ही गुर ते कबि स्याम कहै अपुने पुरि आयो ॥८९१॥

hoi bidhaa tab hee gur te kab sayaam kahai apune pur aayo ||891||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮਿਲੇ ਆਇ ਕੈ ਕੁਟੰਬ ਕੇ ਅਤਿ ਹੀ ਹਰਖ ਬਢਾਇ ॥

मिले आइ कै कुटंब के अति ही हरख बढाइ ॥

mile aai kai kuTa(n)b ke at hee harakh baddai ||

ਸੁਖ ਤਿਹ ਕੋ ਪ੍ਰਾਪਤਿ ਭਯੋ ਚਿਤਵਨ ਗਈ ਪਰਾਇ ॥੮੯੨॥

सुख तिह को प्रापति भयो चितवन गई पराइ ॥८९२॥

sukh teh ko praapat bhayo chitavan giee parai ||892||


ਇਤਿ ਸਸਤ੍ਰ ਬਿਦਿਆ ਸੀਖ ਕੈ ਸੰਦੀਪਨ ਕੋ ਪੁਤ੍ਰ ਆਨਿ ਦੇ ਕਰਿ ਬਿਦਾ ਹੋਇ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਆਵਤ ਭਏ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति ससत्र बिदिआ सीख कै संदीपन को पुत्र आनि दे करि बिदा होइ गृह को आवत भए धिआइ समापतं ॥

eit sasatr bidhiaa seekh kai sa(n)dheepan ko putr aan dhe kar bidhaa hoi gireh ko aavat bhe dhiaai samaapata(n) ||

ਅਥ ਊਧੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੇਜਾ ॥

अथ ऊधो बृज भेजा ॥

ath uoodho biraj bhejaa ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੋਵਤ ਹੀ ਇਹ ਚਿੰਤ ਕਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸਨ ਸਿਉ ਇਹ ਕਾਰਜ ਕਈਯੈ ॥

सोवत ही इह चिंत करी बृज बासन सिउ इह कारज कईयै ॥

sovat hee ieh chi(n)t karee biraj baasan siau ieh kaaraj kieeyai ||

ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਤੇ ਬੁਲਾਇ ਕੈ ਊਧਵ ਭੇਜ ਕਹਿਯੋ ਤਿਹ ਠਉਰਹਿ ਦਈਯੈ ॥

प्रात भए ते बुलाइ कै ऊधव भेज कहियो तिह ठउरहि दईयै ॥

praat bhe te bulai kai uoodhav bhej kahiyo teh Thaureh dhieeyai ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਜਾਇ ਸੰਤੋਖ ਕਰੈ ਸੁ ਸੰਤੋਖ ਕਰੈ ਹਮਰੀ ਧਰਮ ਮਈਯੈ ॥

ग्वारनि जाइ संतोख करै सु संतोख करै हमरी धरम मईयै ॥

gavaiaaran jai sa(n)tokh karai su sa(n)tokh karai hamaree dharam mieeyai ||

ਯਾ ਤੇ ਨ ਬਾਤ ਭਲੀ ਕਛੁ ਅਉਰ ਹੈ ਮੋਹਿ ਬਿਬੇਕਹਿ ਕੋ ਝਗਰਈਯੈ ॥੮੯੩॥

या ते न बात भली कछु अउर है मोहि बिबेकहि को झगरईयै ॥८९३॥

yaa te na baat bhalee kachh aaur hai moh bibekeh ko jhagarieeyai ||893||


ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਤੇ ਬੁਲਾਇ ਕੈ ਊਧਵ ਪੈ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਹਿ ਭੇਜ ਦਯੋ ਹੈ ॥

प्रात भए ते बुलाइ कै ऊधव पै बृज भूमहि भेज दयो है ॥

praat bhe te bulai kai uoodhav pai biraj bhoomeh bhej dhayo hai ||

ਸੋ ਚਲਿ ਨੰਦ ਕੇ ਧਾਮ ਗਯੋ ਬਤੀਯਾ ਕਹਿ ਸੋਕ ਅਸੋਕ ਭਯੋ ਹੈ ॥

सो चलि नंद के धाम गयो बतीया कहि सोक असोक भयो है ॥

so chal na(n)dh ke dhaam gayo bateeyaa keh sok asok bhayo hai ||

ਨੰਦ ਕਹਿਯੋ ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਕੇ ਕਬਹੂੰ ਹਰਿ ਜੀ ਮੁਹਿ ਚਿਤ ਕਯੋ ਹੈ ॥

नंद कहियो संगि ऊधव के कबहूँ हरि जी मुहि चित कयो है ॥

na(n)dh kahiyo sa(n)g uoodhav ke kabahoo(n) har jee muh chit kayo hai ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਸੁਧਿ ਸ੍ਯਾਮਹਿ ਕੈ ਧਰਨੀ ਪਰ ਸੋ ਮੁਰਝਾਇ ਪਯੋ ਹੈ ॥੮੯੪॥

यौ कहि कै सुधि स्यामहि कै धरनी पर सो मुरझाइ पयो है ॥८९४॥

yau keh kai sudh sayaameh kai dharanee par so murajhai payo hai ||894||


ਜਬ ਨੰਦ ਪਰਿਯੋ ਗਿਰ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਤਬ ਯਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਜਦੁਬੀਰ ਅਏ ॥

जब नंद परियो गिर भूमि बिखै तब याहि कहियो जदुबीर अए ॥

jab na(n)dh pariyo gir bhoom bikhai tab yaeh kahiyo jadhubeer ae ||

ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਉਠਿ ਠਾਢ ਭਯੋ ਮਨ ਕੇ ਸਭ ਸੋਕ ਪਰਾਇ ਗਏ ॥

सुनि कै बतीया उठि ठाढ भयो मन के सभ सोक पराइ गए ॥

sun kai bateeyaa uTh Thaadd bhayo man ke sabh sok parai ge ||

ਉਠ ਕੈ ਸੁਧਿ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਜਾਨਤ ਊਧਵ ਪੇਚ ਕਏ ॥

उठ कै सुधि सो इह भाति कहियो हम जानत ऊधव पेच कए ॥

auTh kai sudh so ieh bhaat kahiyo ham jaanat uoodhav pech ke ||

ਤਜ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਪੁਰ ਬੀਚ ਗਏ ਫਿਰਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਨਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਅਏ ॥੮੯੫॥

तज कै बृज को पुर बीच गए फिरि कै बृज मै नही स्याम अए ॥८९५॥

taj kai biraj ko pur beech ge fir kai biraj mai nahee sayaam ae ||895||


ਸ੍ਯਾਮ ਗਏ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਗਨ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖੁ ਦੀਨੋ ॥

स्याम गए तजि कै बृज को बृज लोगन को अति ही दुखु दीनो ॥

sayaam ge taj kai biraj ko biraj logan ko at hee dhukh dheeno ||

ਊਧਵ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਹਮਰੀ ਤਿਹ ਕੈ ਬਿਨੁ ਭਯੋ ਹਮਰੋ ਪੁਰ ਹੀਨੋ ॥

ऊधव बात सुनो हमरी तिह कै बिनु भयो हमरो पुर हीनो ॥

uoodhav baat suno hamaree teh kai bin bhayo hamaro pur heeno ||

ਦੈ ਬਿਧਿ ਨੈ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹ ਬਾਲਕ ਪਾਪ ਬਿਨਾ ਹਮ ਤੇ ਫਿਰਿ ਛੀਨੋ ॥

दै बिधि नै हमरे गृह बालक पाप बिना हम ते फिरि छीनो ॥

dhai bidh nai hamare gireh baalak paap binaa ham te fir chheeno ||

ਯੌ ਕਹਿ ਸੀਸ ਝੁਕਾਇ ਰਹਿਯੋ ਬਹੁ ਸੋਕ ਬਢਿਯੋ ਅਤਿ ਰੋਦਨ ਕੀਨੋ ॥੮੯੬॥

यौ कहि सीस झुकाइ रहियो बहु सोक बढियो अति रोदन कीनो ॥८९६॥

yau keh sees jhukai rahiyo bahu sok baddiyo at rodhan keeno ||896||


ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਪਰਿਯੋ ਧਰਿ ਪੈ ਉਠਿ ਫੇਰਿ ਕਹਿਯੋ ਸੰਗ ਊਧਵ ਇਉ ॥

कहि कै इह बात परियो धरि पै उठि फेरि कहियो संग ऊधव इउ ॥

keh kai ieh baat pariyo dhar pai uTh fer kahiyo sa(n)g uoodhav iau ||

ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਸ੍ਯਾਮ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਹਮ ਸੰਗ ਕਹੋ ਕਬ ਕਾਰਨਿ ਕਿਉ ॥

तजि कै बृज स्याम गए मथुरा हम संग कहो कब कारनि किउ ॥

taj kai biraj sayaam ge mathuraa ham sa(n)g kaho kab kaaran kiau ||

ਤੁਮਰੇ ਅਬ ਪਾਇ ਲਗੋ ਉਠ ਕੈ ਸੁ ਭਈ ਬਿਰਥਾ ਸੁ ਕਹੋ ਸਭ ਜਿਉ ॥

तुमरे अब पाइ लगो उठ कै सु भई बिरथा सु कहो सभ जिउ ॥

tumare ab pai lago uTh kai su bhiee birathaa su kaho sabh jiau ||

ਤਿਹ ਤੇ ਨਹੀ ਲੇਤ ਕਛੂ ਸੁਧਿ ਹੈ ਮੁਹਿ ਪਾਪਿ ਪਛਾਨਿ ਕਛੂ ਰਿਸ ਸਿਉ ॥੮੯੭॥

तिह ते नही लेत कछू सुधि है मुहि पापि पछानि कछू रिस सिउ ॥८९७॥

teh te nahee let kachhoo sudh hai muh paap pachhaan kachhoo ris siau ||897||


ਸੁਨਿ ਕੈ ਤਿਨ ਊਧਵ ਯੌ ਬਤੀਯਾ ਇਹ ਭਾਤਨਿ ਸਿਉ ਤਿਹ ਉਤਰ ਦੀਨੋ ॥

सुनि कै तिन ऊधव यौ बतीया इह भातनि सिउ तिह उतर दीनो ॥

sun kai tin uoodhav yau bateeyaa ieh bhaatan siau teh utar dheeno ||

ਥੋ ਸੁਤ ਸੋ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਕੋ ਤੁਮ ਤੇ ਸਭ ਪੈ ਪ੍ਰਭ ਜੂ ਨਹੀ ਛੀਨੋ ॥

थो सुत सो बसुदेवहि को तुम ते सभ पै प्रभ जू नही छीनो ॥

tho sut so basudheveh ko tum te sabh pai prabh joo nahee chheeno ||

ਸੁਨਿ ਕੈ ਪੁਰਿ ਕੋ ਪਤਿ ਯੌ ਬਤੀਯਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਉਸਾਸ ਕਹੈ ਤਿਨ ਲੀਨੋ ॥

सुनि कै पुरि को पति यौ बतीया कबि स्याम उसास कहै तिन लीनो ॥

sun kai pur ko pat yau bateeyaa kab sayaam usaas kahai tin leeno ||

ਧੀਰ ਗਯੋ ਛੁਟਿ ਰੋਵਤ ਭਯੋ ਇਨ ਹੂੰ ਤਿਹ ਦੇਖਤ ਰੋਦਨ ਕੀਨੋ ॥੮੯੮॥

धीर गयो छुटि रोवत भयो इन हूँ तिह देखत रोदन कीनो ॥८९८॥

dheer gayo chhuT rovat bhayo in hoo(n) teh dhekhat rodhan keeno ||898||


ਹਠਿ ਊਧਵ ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਪੁਰ ਕੇ ਪਤਿ ਸੋ ਕਛੁ ਸੋਕ ਨ ਕੀਜੈ ॥

हठि ऊधव कै इह भाति कहियो पुर के पति सो कछु सोक न कीजै ॥

haTh uoodhav kai ieh bhaat kahiyo pur ke pat so kachh sok na keejai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਮੁਹਿ ਜੋ ਬਤੀਯਾ ਤਿਹ ਕੀ ਬਿਰਥਾ ਸਭ ਹੀ ਸੁਨਿ ਲੀਜੈ ॥

स्याम कही मुहि जो बतीया तिह की बिरथा सभ ही सुनि लीजै ॥

sayaam kahee muh jo bateeyaa teh kee birathaa sabh hee sun leejai ||

ਜਾ ਕੀ ਕਥਾ ਸੁਨਿ ਹੋਤ ਖੁਸੀ ਮਨ ਦੇਖਤ ਹੀ ਜਿਸ ਕੋ ਮੁਖ ਜੀਜੈ ॥

जा की कथा सुनि होत खुसी मन देखत ही जिस को मुख जीजै ॥

jaa kee kathaa sun hot khusee man dhekhat hee jis ko mukh jeejai ||

ਵਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਨਹਿ ਚਿੰਤ ਕਰੋ ਨ ਕਛੂ ਇਹ ਤੇ ਤੁਮਰੋ ਫੁਨਿ ਛੀਜੈ ॥੮੯੯॥

वाहि कहियो नहि चिंत करो न कछू इह ते तुमरो फुनि छीजै ॥८९९॥

vaeh kahiyo neh chi(n)t karo na kachhoo ieh te tumaro fun chheejai ||899||


ਸੁਨਿ ਕੈ ਇਮ ਊਧਵ ਤੇ ਬਤੀਯਾ ਫਿਰਿ ਊਧਵ ਕੋ ਸੋਊ ਪੂਛਨ ਲਾਗਿਯੋ ॥

सुनि कै इम ऊधव ते बतीया फिरि ऊधव को सोऊ पूछन लागियो ॥

sun kai im uoodhav te bateeyaa fir uoodhav ko souoo poochhan laagiyo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਥਾ ਸੁਨਿ ਚਿਤ ਕੇ ਬੀਚ ਹੁਲਾਸ ਬਢਿਓ ਸਭ ਹੀ ਦੁਖ ਭਾਗਿਯੋ ॥

कान्रह कथा सुनि चित के बीच हुलास बढिओ सभ ही दुख भागियो ॥

kaanreh kathaa sun chit ke beech hulaas baddio sabh hee dhukh bhaagiyo ||

ਅਉਰ ਦਈ ਸਭ ਛੋਰਿ ਕਥਾ ਹਰਿ ਬਾਤ ਸੁਨੈਬੇ ਬਿਖੈ ਅਨੁਰਾਗਿਯੋ ॥

अउर दई सभ छोरि कथा हरि बात सुनैबे बिखै अनुरागियो ॥

aaur dhiee sabh chhor kathaa har baat sunaibe bikhai anuraagiyo ||

ਧ੍ਯਾਨ ਲਗਾਵਤ ਜਿਉ ਜੁਗੀਯਾ ਇਹ ਤਿਉ ਹਰਿ ਧ੍ਯਾਨ ਕੇ ਭੀਤਰ ਪਾਗਿਯੋ ॥੯੦੦॥

ध्यान लगावत जिउ जुगीया इह तिउ हरि ध्यान के भीतर पागियो ॥९००॥

dhayaan lagaavat jiau jugeeyaa ieh tiau har dhayaan ke bheetar paagiyo ||900||


ਯੌ ਕਹਿ ਊਧਵ ਜਾਤ ਭਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਜਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਸੁਧਿ ਪਾਈ ॥

यौ कहि ऊधव जात भयो बृज मै जह ग्वारनि की सुधि पाई ॥

yau keh uoodhav jaat bhayo biraj mai jeh gavaiaaran kee sudh paiee ||

ਮਾਨਹੁ ਸੋਕ ਕੋ ਧਾਮ ਹੁਤੋ ਦ੍ਰੁਮ ਠਉਰ ਰਹੇ ਸੁ ਤਹਾ ਮੁਰਝਾਈ ॥

मानहु सोक को धाम हुतो द्रुम ठउर रहे सु तहा मुरझाई ॥

maanahu sok ko dhaam huto dhrum Thaur rahe su tahaa murajhaiee ||

ਮੋਨ ਰਹੀ ਗ੍ਰਿਹ ਬੈਠਿ ਤ੍ਰੀਯਾ ਮਨੋ ਯੌ ਉਪਜੀ ਇਹ ਤੇ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

मोन रही गृह बैठि त्रीया मनो यौ उपजी इह ते दुचिताई ॥

mon rahee gireh baiTh treeyaa mano yau upajee ieh te dhuchitaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਨੇ ਤੇ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਭਈ ਨਹਿ ਆਇ ਸੁਨੇ ਫਿਰਿ ਭੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥੯੦੧॥

स्याम सुने ते प्रसंन्य भई नहि आइ सुने फिरि भी दुखदाई ॥९०१॥

sayaam sune te prasa(n)nay bhiee neh aai sune fir bhee dhukhadhaiee ||901||


ਊਧਵ ਬਾਚ ॥

ऊधव बाच ॥

uoodhav baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਊਧਵ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨਿ ਲੀਜੈ ॥

ऊधव ग्वारनि सो इह भाति कहियो हरि की बतीया सुनि लीजै ॥

uoodhav gavaiaaran so ieh bhaat kahiyo har kee bateeyaa sun leejai ||

ਮਾਰਗ ਜਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਚਲੀਯੈ ਜੋਊ ਕਾਜ ਕਹਿਯੋ ਸੋਊ ਕਾਰਜ ਕੀਜੈ ॥

मारग जाहि कहियो चलीयै जोऊ काज कहियो सोऊ कारज कीजै ॥

maarag jaeh kahiyo chaleeyai jouoo kaaj kahiyo souoo kaaraj keejai ||

ਜੋਗਿਨ ਫਾਰਿ ਸਭੈ ਪਟ ਹੋਵਹੁ ਯੌ ਤੁਮ ਸੋ ਕਹਿਯੋ ਸੋਊ ਕਰੀਜੈ ॥

जोगिन फारि सभै पट होवहु यौ तुम सो कहियो सोऊ करीजै ॥

jogin faar sabhai paT hovahu yau tum so kahiyo souoo kareejai ||

ਤਾਹੀ ਕੀ ਓਰਿ ਰਹੋ ਲਿਵ ਲਾਇ ਰੀ ਯਾ ਤੇ ਕਛੂ ਤੁਮਰੋ ਨਹੀ ਖੀਜੈ ॥੯੦੨॥

ताही की ओरि रहो लिव लाइ री या ते कछू तुमरो नही खीजै ॥९०२॥

taahee kee or raho liv lai ree yaa te kachhoo tumaro nahee kheejai ||902||


ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਬਾਚ ॥

ग्वारनि बाच ॥

gavaiaaran baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੁਨਿ ਊਧਵ ਤੇ ਬਿਧਿ ਯਾ ਬਤੀਯਾ ਤਿਨ ਊਧਵ ਕੋ ਇਮ ਉਤਰੁ ਦੀਨੋ ॥

सुनि ऊधव ते बिधि या बतीया तिन ऊधव को इम उतरु दीनो ॥

sun uoodhav te bidh yaa bateeyaa tin uoodhav ko im utar dheeno ||

ਜਾ ਸੁਨਿ ਬ੍ਰਯੋਗ ਹੁਲਾਸ ਘਟੈ ਜਿਹ ਕੋ ਸੁਨਿਏ ਦੁਖ ਹੋਵਤ ਜੀ ਨੋ ॥

जा सुनि ब्रयोग हुलास घटै जिह को सुनिए दुख होवत जी नो ॥

jaa sun brayog hulaas ghaTai jeh ko sunie dhukh hovat jee no ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਤੁਮ ਹੋ ਹਮ ਕੋ ਹਮਰੋ ਤੁਮਰੇ ਰਸ ਮੈ ਮਨੁ ਭੀਨੋ ॥

त्यागि गए तुम हो हम को हमरो तुमरे रस मै मनु भीनो ॥

tayaag ge tum ho ham ko hamaro tumare ras mai man bheeno ||

ਯੌ ਕਹਿਯੋ ਤਾ ਸੰਗ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਹਰਿ ਜੂ ਤੁਹਿ ਪ੍ਰੇਮ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਦੀਨੋ ॥੯੦੩॥

यौ कहियो ता संग यौ कहीयो हरि जू तुहि प्रेम बिदा करि दीनो ॥९०३॥

yau kahiyo taa sa(n)g yau kaheeyo har joo tuh prem bidhaa kar dheeno ||903||


ਫਿਰ ਕੈ ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਕੇ ਬ੍ਰਿਜ ਭਾਮਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

फिर कै संगि ऊधव के बृज भामनि स्याम कहै इह भाति उचारियो ॥

fir kai sa(n)g uoodhav ke biraj bhaaman sayaam kahai ieh bhaat uchaariyo ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਨ ਲਈ ਸੁਧਿ ਹੈ ਰਸ ਸੋ ਹਮਰੋ ਮਨੂਆ ਤੁਮ ਜਾਰਿਯੋ ॥

त्यागि गए न लई सुधि है रस सो हमरो मनूआ तुम जारियो ॥

tayaag ge na liee sudh hai ras so hamaro manooaa tum jaariyo ||

ਇਉ ਕਹਿ ਕੈ ਪੁਨਿ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਸੁ ਕਿਧੌ ਕਬਿ ਯੌ ਜਸੁ ਸਾਰਿਯੋ ॥

इउ कहि कै पुनि ऐसे कहियो तिह को सु किधौ कबि यौ जसु सारियो ॥

eiau keh kai pun aaise kahiyo teh ko su kidhau kab yau jas saariyo ||

ਊਧਵ ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਹਰਿ ਜੂ ਤੁਹਿ ਪ੍ਰੇਮ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰਿਯੋ ॥੯੦੪॥

ऊधव स्याम सो यौ कहीयो हरि जू तुहि प्रेम बिदा करि डारियो ॥९०४॥

uoodhav sayaam so yau kaheeyo har joo tuh prem bidhaa kar ddaariyo ||904||


ਫੇਰਿ ਕਹਿਯੋ ਇਮ ਊਧਵ ਸੋ ਜਬ ਹੀ ਸਭ ਹੀ ਹਰਿ ਕੇ ਰਸ ਭੀਨੀ ॥

फेरि कहियो इम ऊधव सो जब ही सभ ही हरि के रस भीनी ॥

fer kahiyo im uoodhav so jab hee sabh hee har ke ras bheenee ||

ਜੋ ਤਿਨ ਸੋ ਕਹਿਯੋ ਊਧਵ ਇਉ ਤਿਨ ਊਧਵ ਸੋ ਬਿਨਤੀ ਇਹ ਕੀਨੀ ॥

जो तिन सो कहियो ऊधव इउ तिन ऊधव सो बिनती इह कीनी ॥

jo tin so kahiyo uoodhav iau tin uoodhav so binatee ieh keenee ||

ਕੰਚਨ ਸੋ ਜਿਨ ਕੋ ਤਨ ਥੋ ਜੋਊ ਹਾਨ ਬਿਖੈ ਹੁਤੀ ਗ੍ਵਾਰਿ ਨਵੀਨੀ ॥

कंचन सो जिन को तन थो जोऊ हान बिखै हुती ग्वारि नवीनी ॥

ka(n)chan so jin ko tan tho jouoo haan bikhai hutee gavaiaar naveenee ||

ਊਧਵ ਜੂ ਹਮ ਕੋ ਤਜਿ ਕੈ ਤੁਮਰੇ ਬਿਨੁ ਸ੍ਯਾਮ ਕਛੂ ਸੁਧਿ ਲੀਨੀ ॥੯੦੫॥

ऊधव जू हम को तजि कै तुमरे बिनु स्याम कछू सुधि लीनी ॥९०५॥

uoodhav joo ham ko taj kai tumare bin sayaam kachhoo sudh leenee ||905||


ਏਕ ਕਹੈ ਅਤਿ ਆਤੁਰ ਹ੍ਵੈ ਇਕ ਕੋਪਿ ਕਹੈ ਜਿਨ ਤੇ ਹਿਤ ਭਾਗਿਯੋ ॥

एक कहै अति आतुर ह्वै इक कोपि कहै जिन ते हित भागियो ॥

ek kahai at aatur havai ik kop kahai jin te hit bhaagiyo ||

ਊਧਵ ਜੂ ਜਿਹ ਦੇਖਨ ਕੋ ਹਮਰੋ ਮਨੂਆ ਅਤਿ ਹੀ ਅਨੁਰਾਗਿਯੋ ॥

ऊधव जू जिह देखन को हमरो मनूआ अति ही अनुरागियो ॥

uoodhav joo jeh dhekhan ko hamaro manooaa at hee anuraagiyo ||

ਸੋ ਹਮ ਕੋ ਤਜਿ ਗਯੋ ਪੁਰ ਮੈ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਪਾਗਿਯੋ ॥

सो हम को तजि गयो पुर मै पुर बासिन के रस भीतर पागियो ॥

so ham ko taj gayo pur mai pur baasin ke ras bheetar paagiyo ||

ਜਉ ਹਰਿ ਜੂ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਤਜੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿਨ ਭੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਤਿਆਗਿਯੋ ॥੯੦੬॥

जउ हरि जू बृज नारि तजी बृज नारिन भी बृजनाथ तिआगियो ॥९०६॥

jau har joo biraj naar tajee biraj naarin bhee birajanaath tiaagiyo ||906||


ਏਕਨ ਯੌ ਕਹਿਯੋ ਸ੍ਯਾਮ ਤਜਿਯੋ ਇਕ ਐਸੇ ਕਹੈ ਹਮ ਕਾਮ ਕਰੈਗੀ ॥

एकन यौ कहियो स्याम तजियो इक ऐसे कहै हम काम करैगी ॥

ekan yau kahiyo sayaam tajiyo ik aaise kahai ham kaam karaigee ||

ਭੇਖ ਜਿਤੇ ਕਹਿਯੋ ਜੋਗਿਨ ਕੇ ਤਿਤਨੇ ਹਮ ਆਪਨੇ ਅੰਗਿ ਡਰੈਗੀ ॥

भेख जिते कहियो जोगिन के तितने हम आपने अंगि डरैगी ॥

bhekh jite kahiyo jogin ke titane ham aapane a(n)g ddaraigee ||

ਏਕ ਕਹੈ ਹਮ ਜੈ ਹੈ ਤਹਾ ਇਕ ਐਸੇ ਕਹੈ ਗੁਨਿ ਹੀ ਉਚਰੈਗੀ ॥

एक कहै हम जै है तहा इक ऐसे कहै गुनि ही उचरैगी ॥

ek kahai ham jai hai tahaa ik aaise kahai gun hee ucharaigee ||

ਏਕ ਕਹੈ ਹਮ ਖੈ ਮਰਿ ਹੈ ਬਿਖ ਇਕ ਯੌ ਕਹੈ ਧ੍ਯਾਨ ਹੀ ਬੀਚ ਮਰੈਗੀ ॥੯੦੭॥

एक कहै हम खै मरि है बिख इक यौ कहै ध्यान ही बीच मरैगी ॥९०७॥

ek kahai ham khai mar hai bikh ik yau kahai dhayaan hee beech maraigee ||907||


ਊਧਵ ਬਾਚ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ॥

ऊधव बाच गोपिन सो ॥

uoodhav baach gopin so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪਿਖਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਦਸਾ ਬਿਸਮੈ ਹੁਇ ਊਧਵ ਯੌ ਉਚਰੋ ॥

पिखि ग्वारनि की इह भाति दसा बिसमै हुइ ऊधव यौ उचरो ॥

pikh gavaiaaran kee ieh bhaat dhasaa bisamai hui uoodhav yau ucharo ||

ਹਮ ਜਾਨਤ ਹੈ ਤੁਮਰੀ ਹਰਿ ਸੋ ਬਲਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਘਨੀ ਇਹ ਕਾਮ ਕਰੋ ॥

हम जानत है तुमरी हरि सो बलि प्रीति घनी इह काम करो ॥

ham jaanat hai tumaree har so bal preet ghanee ieh kaam karo ||

ਜੋਊ ਸ੍ਯਾਮ ਪਠਿਯੋ ਤੁਮ ਪੈ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਰਾਵਲ ਭੇਖਨ ਅੰਗਿ ਧਰੋ ॥

जोऊ स्याम पठियो तुम पै हम को इह रावल भेखन अंगि धरो ॥

jouoo sayaam paThiyo tum pai ham ko ieh raaval bhekhan a(n)g dharo ||

ਤਜਿ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹ ਕੇ ਪੁਨਿ ਕਾਜ ਸਭੈ ਸਖੀ ਮੋਰੇ ਹੀ ਧ੍ਯਾਨ ਕੇ ਬੀਚ ਅਰੋ ॥੯੦੮॥

तजि कै गृह के पुनि काज सभै सखी मोरे ही ध्यान के बीच अरो ॥९०८॥

taj kai gireh ke pun kaaj sabhai sakhee more hee dhayaan ke beech aro ||908||


ਗੋਪਿਨ ਬਾਚ ਊਧਵ ਸੋ ॥

गोपिन बाच ऊधव सो ॥

gopin baach uoodhav so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਏਕ ਸਮੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੁੰਜਨ ਮੈ ਮੁਹਿ ਕਾਨਨ ਸ੍ਯਾਮ ਤਟੰਕ ਧਰਾਏ ॥

एक समै बृज कुँजन मै मुहि कानन स्याम तटंक धराए ॥

ek samai biraj ku(n)jan mai muh kaanan sayaam taTa(n)k dharaae ||

ਕੰਚਨ ਕੇ ਬਹੁ ਮੋਲ ਜਰੇ ਨਗ ਬ੍ਰਹਮ ਸਕੈ ਉਪਮਾ ਨ ਗਨਾਏ ॥

कंचन के बहु मोल जरे नग ब्रहम सकै उपमा न गनाए ॥

ka(n)chan ke bahu mol jare nag braham sakai upamaa na ganaae ||

ਬਜ੍ਰ ਲਗੇ ਜਿਨ ਬੀਚ ਛਟਾ ਚਮਕੈ ਚਹੂੰ ਓਰਿ ਧਰਾ ਛਬਿ ਪਾਏ ॥

बज्र लगे जिन बीच छटा चमकै चहूँ ओरि धरा छबि पाए ॥

bajr lage jin beech chhaTaa chamakai chahoo(n) or dharaa chhab paae ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਹਰਿ ਵੈ ਦਏ ਊਧਵ ਦੈ ਅਬ ਰਾਵਲ ਭੇਖ ਪਠਾਏ ॥੯੦੯॥

तउन समै हरि वै दए ऊधव दै अब रावल भेख पठाए ॥९०९॥

taun samai har vai dhe uoodhav dhai ab raaval bhekh paThaae ||909||


ਏਕ ਕਹੈ ਹਮ ਜੋਗਨਿ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ਕਹੈ ਇਕ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਹੀ ਕਰੈਂਗੀ ॥

एक कहै हम जोगनि ह्वै है कहै इक स्याम कहियो ही करैंगी ॥

ek kahai ham jogan havai hai kahai ik sayaam kahiyo hee karai(n)gee ||

ਡਾਰਿ ਬਿਭੂਤਿ ਸਭੈ ਤਨ ਪੈ ਬਟੂਆ ਚਿਪੀਆ ਕਰ ਬੀਚ ਧਰੈਂਗੀ ॥

डारि बिभूति सभै तन पै बटूआ चिपीआ कर बीच धरैंगी ॥

ddaar bibhoot sabhai tan pai baTooaa chipeeaa kar beech dharai(n)gee ||

ਏਕ ਕਹੈ ਹਮ ਜਾਹਿ ਤਹਾ ਇਕ ਯੌ ਕਹੈ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਖਾਇ ਮਰੈਂਗੀ ॥

एक कहै हम जाहि तहा इक यौ कहै ग्वारनि खाइ मरैंगी ॥

ek kahai ham jaeh tahaa ik yau kahai gavaiaaran khai marai(n)gee ||

ਏਕ ਕਹੈ ਬਿਰਹਾਗਨਿ ਕੋ ਉਪਜਾਇ ਕੈ ਤਾਹੀ ਕੇ ਸੰਗ ਜਰੈਂਗੀ ॥੯੧੦॥

एक कहै बिरहागनि को उपजाइ कै ताही के संग जरैंगी ॥९१०॥

ek kahai birahaagan ko upajai kai taahee ke sa(n)g jarai(n)gee ||910||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਊਧਵ ਸੋ ॥

राधे बाच ऊधव सो ॥

raadhe baach uoodhav so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪ੍ਰੇਮ ਛਕੀ ਅਪਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਕੀ ਜਾਈ ॥

प्रेम छकी अपने मुख ते इह भाति कहियो बृखभानु की जाई ॥

prem chhakee apane mukh te ieh bhaat kahiyo birakhabhaan kee jaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਅਬ ਧੋ ਹਮਰੀ ਗਤਿ ਕਾਈ ॥

स्याम गए मथुरा तजि कै बृज को अब धो हमरी गति काई ॥

sayaam ge mathuraa taj kai biraj ko ab dho hamaree gat kaiee ||

ਦੇਖਤ ਹੀ ਪੁਰ ਕੀ ਤ੍ਰੀਯ ਕੋ ਸੁ ਛਕੇ ਤਿਨ ਕੇ ਰਸ ਮੈ ਜੀਯ ਆਈ ॥

देखत ही पुर की त्रीय को सु छके तिन के रस मै जीय आई ॥

dhekhat hee pur kee treey ko su chhake tin ke ras mai jeey aaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਲਯੋ ਕੁਬਜਾ ਬਸਿ ਕੈ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੧॥

कान्रह लयो कुबजा बसि कै टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९११॥

kaanreh layo kubajaa bas kai Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||911||


ਸੇਜ ਬਨੀ ਸੰਗਿ ਫੂਲਨ ਸੁੰਦਰ ਚਾਦਨੀ ਰਾਤਿ ਭਲੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

सेज बनी संगि फूलन सुँदर चादनी राति भली छबि पाई ॥

sej banee sa(n)g foolan su(n)dhar chaadhanee raat bhalee chhab paiee ||

ਸੇਤ ਬਹੇ ਜਮੁਨਾ ਪਟ ਹੈ ਸਿਤ ਮੋਤਿਨ ਹਾਰ ਗਰੈ ਛਬਿ ਛਾਈ ॥

सेत बहे जमुना पट है सित मोतिन हार गरै छबि छाई ॥

set bahe jamunaa paT hai sit motin haar garai chhab chhaiee ||

ਮੈਨ ਚੜਿਯੋ ਸਰ ਲੈ ਬਰ ਕੈ ਬਧਬੋ ਹਮ ਕੋ ਬਿਨੁ ਜਾਨਿ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥

मैन चड़ियो सर लै बर कै बधबो हम को बिनु जानि कन्रहाई ॥

main chaRiyo sar lai bar kai badhabo ham ko bin jaan kanrahaiee ||

ਸੋਊ ਲਯੋ ਕੁਬਿਜਾ ਬਸ ਕੈ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੨॥

सोऊ लयो कुबिजा बस कै टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१२॥

souoo layo kubijaa bas kai Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||912||


ਰਾਤਿ ਬਨੀ ਘਨ ਕੀ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਯਾਮ ਸੀਗਾਰ ਭਲੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

राति बनी घन की अति सुँदर स्याम सीगार भली छबि पाई ॥

raat banee ghan kee at su(n)dhar sayaam seegaar bhalee chhab paiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਬਹੈ ਜਮੁਨਾ ਤਰਏ ਇਹ ਜਾ ਬਿਨੁ ਕੋ ਨਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਸਹਾਈ ॥

स्याम बहै जमुना तरए इह जा बिनु को नही स्याम सहाई ॥

sayaam bahai jamunaa tare ieh jaa bin ko nahee sayaam sahaiee ||

ਸ੍ਯਾਮਹਿ ਮੈਨ ਲਗਿਯੋ ਦੁਖ ਦੇਵਨ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨਹਿ ਜਾਈ ॥

स्यामहि मैन लगियो दुख देवन ऐसे कहियो बृखभानहि जाई ॥

sayaameh main lagiyo dhukh dhevan aaise kahiyo birakhabhaaneh jaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਲਯੋ ਕੁਬਿਜਾ ਬਸਿ ਕੈ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੩॥

स्याम लयो कुबिजा बसि कै टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१३॥

sayaam layo kubijaa bas kai Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||913||


ਫੂਲਿ ਰਹੇ ਸਿਗਰੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਤਰੁ ਫੂਲ ਲਤਾ ਤਿਨ ਸੋ ਲਪਟਾਈ ॥

फूलि रहे सिगरे बृज के तरु फूल लता तिन सो लपटाई ॥

fool rahe sigare biraj ke tar fool lataa tin so lapaTaiee ||

ਫੂਲਿ ਰਹੇ ਸਰਿ ਸਾਰਸ ਸੁੰਦਰ ਸੋਭ ਸਮੂਹ ਬਢੀ ਅਧਿਕਾਈ ॥

फूलि रहे सरि सारस सुँदर सोभ समूह बढी अधिकाई ॥

fool rahe sar saaras su(n)dhar sobh samooh baddee adhikaiee ||

ਚੇਤ ਚੜਿਯੋ ਸੁਕ ਸੁੰਦਰ ਕੋਕਿਲਕਾ ਜੁਤ ਕੰਤ ਬਿਨਾ ਨ ਸੁਹਾਈ ॥

चेत चड़ियो सुक सुँदर कोकिलका जुत कंत बिना न सुहाई ॥

chet chaRiyo suk su(n)dhar kokilakaa jut ka(n)t binaa na suhaiee ||

ਦਾਸੀ ਕੇ ਸੰਗਿ ਰਹਿਯੋ ਗਹਿ ਹੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੪॥

दासी के संगि रहियो गहि हो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१४॥

dhaasee ke sa(n)g rahiyo geh ho Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||914||


ਬਾਸ ਸੁਬਾਸ ਅਕਾਸ ਮਿਲੀ ਅਰੁ ਬਾਸਤ ਭੂਮਿ ਮਹਾ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

बास सुबास अकास मिली अरु बासत भूमि महा छबि पाई ॥

baas subaas akaas milee ar baasat bhoom mahaa chhab paiee ||

ਸੀਤਲ ਮੰਦ ਸੁਗੰਧਿ ਸਮੀਰ ਬਹੈ ਮਕਰੰਦ ਨਿਸੰਕ ਮਿਲਾਈ ॥

सीतल मंद सुगंधि समीर बहै मकरंद निसंक मिलाई ॥

seetal ma(n)dh suga(n)dh sameer bahai makara(n)dh nisa(n)k milaiee ||

ਪੈਰ ਪਰਾਗ ਰਹੀ ਹੈ ਬੈਸਾਖ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਗਨ ਕੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥

पैर पराग रही है बैसाख सभै बृज लोगन की दुखदाई ॥

pair paraag rahee hai baisaakh sabhai biraj logan kee dhukhadhaiee ||

ਮਾਲਿਨ ਲੈਬ ਕਰੋ ਰਸ ਕੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੫॥

मालिन लैब करो रस को टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१५॥

maalin laib karo ras ko Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||915||


ਨੀਰ ਸਮੀਰ ਹੁਤਾਸਨ ਕੇ ਸਮ ਅਉਰ ਅਕਾਸ ਧਰਾ ਤਪਤਾਈ ॥

नीर समीर हुतासन के सम अउर अकास धरा तपताई ॥

neer sameer hutaasan ke sam aaur akaas dharaa tapataiee ||

ਪੰਥ ਨ ਪੰਥੀ ਚਲੈ ਕੋਊਓ ਤਰੁ ਤਾਕਿ ਤਰੈ ਤਨ ਤਾਪ ਸਿਰਾਈ ॥

पंथ न पंथी चलै कोऊओ तरु ताकि तरै तन ताप सिराई ॥

pa(n)th na pa(n)thee chalai kouooo tar taak tarai tan taap siraiee ||

ਜੇਠ ਮਹਾ ਬਲਵੰਤ ਭਯੋ ਅਤਿ ਬਿਆਕੁਲ ਜੀਯ ਮਹਾ ਰਤਿ ਪਾਈ ॥

जेठ महा बलवंत भयो अति बिआकुल जीय महा रति पाई ॥

jeTh mahaa balava(n)t bhayo at biaakul jeey mahaa rat paiee ||

ਐਸੇ ਸਕ੍ਯੋ ਧਸਕ੍ਯੋ ਸਸਕ੍ਯੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੬॥

ऐसे सक्यो धसक्यो ससक्यो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१६॥

aaise sakayo dhasakayo sasakayo Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||916||


ਪਉਨ ਪ੍ਰਚੰਡ ਬਹੈ ਅਤਿ ਤਾਪਤ ਚੰਚਲ ਚਿਤਿ ਦਸੋ ਦਿਸ ਧਾਈ ॥

पउन प्रचंड बहै अति तापत चंचल चिति दसो दिस धाई ॥

paun pracha(n)dd bahai at taapat cha(n)chal chit dhaso dhis dhaiee ||

ਬੈਸ ਅਵਾਸ ਰਹੈ ਨਰ ਨਾਰਿ ਬਿਹੰਗਮ ਵਾਰਿ ਸੁ ਛਾਹ ਤਕਾਈ ॥

बैस अवास रहै नर नारि बिहंगम वारि सु छाह तकाई ॥

bais avaas rahai nar naar biha(n)gam vaar su chhaeh takaiee ||

ਦੇਖਿ ਅਸਾੜ ਨਈ ਰਿਤ ਦਾਦੁਰ ਮੋਰਨ ਹੂੰ ਘਨਘੋਰ ਲਗਾਈ ॥

देखि असाड़ नई रित दादुर मोरन हूँ घनघोर लगाई ॥

dhekh asaaR niee rit dhaadhur moran hoo(n) ghanaghor lagaiee ||

ਗਾਢ ਪਰੀ ਬਿਰਹੀ ਜਨ ਕੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੭॥

गाढ परी बिरही जन को टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१७॥

gaadd paree birahee jan ko Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||917||


ਤਾਲ ਭਰੇ ਜਲ ਪੂਰਨ ਸੋ ਅਰੁ ਸਿੰਧੁ ਮਿਲੀ ਸਰਿਤਾ ਸਭ ਜਾਈ ॥

ताल भरे जल पूरन सो अरु सिंधु मिली सरिता सभ जाई ॥

taal bhare jal pooran so ar si(n)dh milee saritaa sabh jaiee ||

ਤੈਸੇ ਘਟਾਨਿ ਛਟਾਨਿ ਮਿਲੀ ਅਤਿ ਹੀ ਪਪੀਹਾ ਪੀਯ ਟੇਰ ਲਗਾਈ ॥

तैसे घटानि छटानि मिली अति ही पपीहा पीय टेर लगाई ॥

taise ghaTaan chhaTaan milee at hee papeehaa peey Ter lagaiee ||

ਸਾਵਨ ਮਾਹਿ ਲਗਿਓ ਬਰਸਾਵਨ ਭਾਵਨ ਨਾਹਿ ਹਹਾ ਘਰਿ ਮਾਈ ॥

सावन माहि लगिओ बरसावन भावन नाहि हहा घरि माई ॥

saavan maeh lagio barasaavan bhaavan naeh hahaa ghar maiee ||

ਲਾਗ ਰਹਿਯੋ ਪੁਰ ਭਾਮਿਨ ਸੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੮॥

लाग रहियो पुर भामिन सो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१८॥

laag rahiyo pur bhaamin so Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||918||


ਭਾਦਵ ਮਾਹਿ ਚੜਿਯੋ ਬਿਨੁ ਨਾਹ ਦਸੋ ਦਿਸ ਮਾਹਿ ਘਟਾ ਘਰਹਾਈ ॥

भादव माहि चड़ियो बिनु नाह दसो दिस माहि घटा घरहाई ॥

bhaadhav maeh chaRiyo bin naeh dhaso dhis maeh ghaTaa gharahaiee ||

ਦ੍ਯੋਸ ਨਿਸਾ ਨਹਿ ਜਾਨ ਪਰੈ ਤਮ ਬਿਜੁ ਛਟਾ ਰਵਿ ਕੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

द्योस निसा नहि जान परै तम बिजु छटा रवि की छबि पाई ॥

dhayos nisaa neh jaan parai tam bij chhaTaa rav kee chhab paiee ||

ਮੂਸਲਧਾਰ ਛੁਟੈ ਨਭਿ ਤੇ ਅਵਨੀ ਸਗਰੀ ਜਲ ਪੂਰਨਿ ਛਾਈ ॥

मूसलधार छुटै नभि ते अवनी सगरी जल पूरनि छाई ॥

moosaladhaar chhuTai nabh te avanee sagaree jal pooran chhaiee ||

ਐਸੇ ਸਮੇ ਤਜਿ ਗਯੋ ਹਮ ਕੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੧੯॥

ऐसे समे तजि गयो हम को टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९१९॥

aaise same taj gayo ham ko Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||919||


ਮਾਸ ਕੁਆਰ ਚਢਿਯੋ ਬਲੁ ਧਾਰਿ ਪੁਕਾਰ ਰਹੀ ਨ ਮਿਲੇ ਸੁਖਦਾਈ ॥

मास कुआर चढियो बलु धारि पुकार रही न मिले सुखदाई ॥

maas kuaar chaddiyo bal dhaar pukaar rahee na mile sukhadhaiee ||

ਸੇਤ ਘਟਾ ਅਰੁ ਰਾਤਿ ਤਟਾ ਸਰ ਤੁੰਗ ਅਟਾ ਸਿਮਕੈ ਦਰਸਾਈ ॥

सेत घटा अरु राति तटा सर तुँग अटा सिमकै दरसाई ॥

set ghaTaa ar raat taTaa sar tu(n)g aTaa simakai dharasaiee ||

ਨੀਰ ਬਿਹੀਨ ਫਿਰੈ ਨਭਿ ਛੀਨ ਸੁ ਦੇਖਿ ਅਧੀਨ ਭਯੋ ਹੀਯਰਾਈ ॥

नीर बिहीन फिरै नभि छीन सु देखि अधीन भयो हीयराई ॥

neer biheen firai nabh chheen su dhekh adheen bhayo heeyaraiee ||

ਪ੍ਰੇਮ ਤਕੀ ਤਿਨ ਸੋ ਬਿਥਕ੍ਰਯੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੦॥

प्रेम तकी तिन सो बिथक्रयो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२०॥

prem takee tin so bithakrayo Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||920||


ਕਾਤਿਕ ਮੈ ਗੁਨਿ ਦੀਪ ਪ੍ਰਕਾਸਿਤ ਤੈਸੇ ਅਕਾਸ ਮੈ ਉਜਲਤਾਈ ॥

कातिक मै गुनि दीप प्रकासित तैसे अकास मै उजलताई ॥

kaatik mai gun dheep prakaasit taise akaas mai ujalataiee ||

ਜੂਪ ਜਹਾ ਤਹ ਫੈਲ ਰਹਿਯੋ ਸਿਗਰੇ ਨਰ ਨਾਰਿਨ ਖੇਲ ਮਚਾਈ ॥

जूप जहा तह फैल रहियो सिगरे नर नारिन खेल मचाई ॥

joop jahaa teh fail rahiyo sigare nar naarin khel machaiee ||

ਚਿਤ੍ਰ ਭਏ ਘਰ ਆਂਙਨ ਦੇਖਿ ਗਚੇ ਤਹ ਕੇ ਅਰੁ ਚਿਤ ਭ੍ਰਮਾਈ ॥

चित्र भए घर आँङन देखि गचे तह के अरु चित भ्रमाई ॥

chitr bhe ghar aa(n)n(g)n dhekh gache teh ke ar chit bhramaiee ||

ਆਯੋ ਨਹੀ ਮਨ ਭਾਯੋ ਤਹੀ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੧॥

आयो नही मन भायो तही टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२१॥

aayo nahee man bhaayo tahee Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||921||


ਬਾਰਿਜ ਫੂਲਿ ਰਹੇ ਸਰਿ ਪੁੰਜ ਸੁਗੰਧ ਸਨੇ ਸਰਿਤਾਨ ਘਟਾਈ ॥

बारिज फूलि रहे सरि पुँज सुगंध सने सरितान घटाई ॥

baarij fool rahe sar pu(n)j suga(n)dh sane saritaan ghaTaiee ||

ਕੁੰਜਤ ਕੰਤ ਬਿਨਾ ਕੁਲਹੰਸ ਕਲੇਸ ਬਢੈ ਸੁਨਿ ਕੈ ਤਿਹ ਮਾਈ ॥

कुँजत कंत बिना कुलहंस कलेस बढै सुनि कै तिह माई ॥

ku(n)jat ka(n)t binaa kulaha(n)s kales baddai sun kai teh maiee ||

ਬਾਸੁਰ ਰੈਨਿ ਨ ਚੈਨ ਕਹੂੰ ਛਿਨ ਮੰਘਰ ਮਾਸਿ ਅਯੋ ਨ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥

बासुर रैनि न चैन कहूँ छिन मंघर मासि अयो न कन्रहाई ॥

baasur rain na chain kahoo(n) chhin ma(n)ghar maas ayo na kanrahaiee ||

ਜਾਤ ਨਹੀ ਤਿਨ ਸੋ ਮਸਕ੍ਰਯੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੨॥

जात नही तिन सो मसक्रयो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२२॥

jaat nahee tin so masakrayo Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||922||


ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਅਵਾਸ ਸੁ ਬਾਸੁ ਉਦਾਸਿ ਬਢੀ ਅਤਿ ਸੀਤਲਤਾਈ ॥

भूमि अकास अवास सु बासु उदासि बढी अति सीतलताई ॥

bhoom akaas avaas su baas udhaas baddee at seetalataiee ||

ਕੂਲ ਦੁਕੂਲ ਤੇ ਸੂਲ ਉਠੈ ਸਭ ਤੇਲ ਤਮੋਲ ਲਗੈ ਦੁਖਦਾਈ ॥

कूल दुकूल ते सूल उठै सभ तेल तमोल लगै दुखदाई ॥

kool dhukool te sool uThai sabh tel tamol lagai dhukhadhaiee ||

ਪੋਖ ਸੰਤੋਖ ਨ ਹੋਤ ਕਛੂ ਤਨ ਸੋਖਤ ਜਿਉ ਕੁਮਦੀ ਮੁਰਝਾਈ ॥

पोख संतोख न होत कछू तन सोखत जिउ कुमदी मुरझाई ॥

pokh sa(n)tokh na hot kachhoo tan sokhat jiau kumadhee murajhaiee ||

ਲੋਭਿ ਰਹਿਯੋ ਉਨ ਪ੍ਰੇਮ ਗਹਿਯੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੩॥

लोभि रहियो उन प्रेम गहियो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२३॥

lobh rahiyo un prem gahiyo Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||923||


ਮਾਹਿ ਮੈ ਨਾਹ ਨਹੀ ਘਰਿ ਮਾਹਿ ਸੁ ਦਾਹ ਕਰੈ ਰਵਿ ਜੋਤਿ ਦਿਖਾਈ ॥

माहि मै नाह नही घरि माहि सु दाह करै रवि जोति दिखाई ॥

maeh mai naeh nahee ghar maeh su dhaeh karai rav jot dhikhaiee ||

ਜਾਨੀ ਨ ਜਾਤ ਬਿਲਾਤਤ ਦ੍ਰਯੋਸਨ ਰੈਨਿ ਕੀ ਬ੍ਰਿਧ ਭਈ ਅਧਿਕਾਈ ॥

जानी न जात बिलातत द्रयोसन रैनि की बृध भई अधिकाई ॥

jaanee na jaat bilaatat dhrayosan rain kee biradh bhiee adhikaiee ||

ਕੋਕਿਲ ਦੇਖਿ ਕਪੋਤਿ ਸਿਲੀਮੁਖ ਕੂੰਜਤ ਏ ਸੁਨਿ ਕੈ ਡਰ ਪਾਈ ॥

कोकिल देखि कपोति सिलीमुख कूँजत ए सुनि कै डर पाई ॥

kokil dhekh kapot sileemukh koo(n)jat e sun kai ddar paiee ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੀ ਰੀਤਿ ਕਰੀ ਉਨ ਸੋ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੪॥

प्रीति की रीति करी उन सो टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२४॥

preet kee reet karee un so Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||924||


ਫਾਗੁਨ ਫਾਗੁ ਬਢਿਯੋ ਅਨੁਰਾਗ ਸੁਹਾਗਨਿ ਭਾਗ ਸੁਹਾਗ ਸੁਹਾਈ ॥

फागुन फागु बढियो अनुराग सुहागनि भाग सुहाग सुहाई ॥

faagun faag baddiyo anuraag suhaagan bhaag suhaag suhaiee ||

ਕੇਸਰ ਚੀਰ ਬਨਾਇ ਸਰੀਰ ਗੁਲਾਬ ਅੰਬੀਰ ਗੁਲਾਲ ਉਡਾਈ ॥

केसर चीर बनाइ सरीर गुलाब अंबीर गुलाल उडाई ॥

kesar cheer banai sareer gulaab a(n)beer gulaal uddaiee ||

ਸੋ ਛਬਿ ਮੈ ਨ ਲਖੀ ਜਨੁ ਦ੍ਵਾਦਸ ਮਾਸ ਕੀ ਸੋਭਤ ਆਗਿ ਜਗਾਈ ॥

सो छबि मै न लखी जनु द्वादस मास की सोभत आगि जगाई ॥

so chhab mai na lakhee jan dhavaiaadhas maas kee sobhat aag jagaiee ||

ਆਸ ਕੋ ਤ੍ਯਾਗਿ ਨਿਰਾਸ ਭਈ ਟਸਕ੍ਯੋ ਨ ਹੀਯੋ ਕਸਕ੍ਯੋ ਨ ਕਸਾਈ ॥੯੨੫॥

आस को त्यागि निरास भई टसक्यो न हीयो कसक्यो न कसाई ॥९२५॥

aas ko tayaag niraas bhiee Tasakayo na heeyo kasakayo na kasaiee ||925||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਬ੍ਰਿਹ ਨਾਟਕ ਬਾਰਹਮਾਹ ਸੰਪੂਰਨਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे कृसनावतारे बृह नाटक बारहमाह संपूरनम सतु ॥

eit sree bachitr naaTake gra(n)the kirasanaavataare bireh naaTak baarahamaeh sa(n)pooranam sat ||


ਗੋਪਿਨ ਬਾਚ ਆਪਸ ਮੈ ॥

गोपिन बाच आपस मै ॥

gopin baach aapas mai ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਯਾ ਹੀ ਕੇ ਸੰਗਿ ਸੁਨੋ ਮਿਲ ਕੈ ਹਮ ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਮੈ ਖੇਲ ਮਚਾਯੋ ॥

या ही के संगि सुनो मिल कै हम कुँज गलीन मै खेल मचायो ॥

yaa hee ke sa(n)g suno mil kai ham ku(n)j galeen mai khel machaayo ||

ਗਾਵਤ ਭਯੋ ਸੋਊ ਠਉਰ ਤਹਾ ਹਮ ਹੂੰ ਮਿਲ ਕੈ ਤਹ ਮੰਗਲ ਗਾਯੋ ॥

गावत भयो सोऊ ठउर तहा हम हूँ मिल कै तह मंगल गायो ॥

gaavat bhayo souoo Thaur tahaa ham hoo(n) mil kai teh ma(n)gal gaayo ||

ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਯੋ ਮਥੁਰਾ ਇਨ ਗ੍ਵਾਰਨ ਤੇ ਮਨੂਆ ਉਚਟਾਯੋ ॥

सो बृज त्यागि गयो मथुरा इन ग्वारन ते मनूआ उचटायो ॥

so biraj tayaag gayo mathuraa in gavaiaaran te manooaa uchaTaayo ||

ਯੌ ਕਹਿ ਊਧਵ ਸੋ ਤਿਨ ਟੇਰਿ ਹਹਾ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਆਯੋ ॥੯੨੬॥

यौ कहि ऊधव सो तिन टेरि हहा हमरे गृहि स्याम न आयो ॥९२६॥

yau keh uoodhav so tin Ter hahaa hamare gireh sayaam na aayo ||926||


ਗੋਪਿਨ ਬਾਚ ਊਧਵ ਸੋ ॥

गोपिन बाच ऊधव सो ॥

gopin baach uoodhav so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਏਕ ਸਮੈ ਹਮ ਕੋ ਸੁਨਿ ਊਧਵ ਕੁੰਜਨ ਮੈ ਫਿਰੈ ਸੰਗਿ ਲੀਯੇ ॥

एक समै हम को सुनि ऊधव कुँजन मै फिरै संगि लीये ॥

ek samai ham ko sun uoodhav ku(n)jan mai firai sa(n)g leeye ||

ਹਰਿ ਜੂ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਸਾਥ ਘਨੇ ਹਮ ਪੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਹਿਯੋ ਪ੍ਰੇਮ ਕੀਯੇ ॥

हरि जू अति ही हित साथ घने हम पै अति ही कहियो प्रेम कीये ॥

har joo at hee hit saath ghane ham pai at hee kahiyo prem keeye ||

ਤਿਨ ਕੇ ਬਸਿ ਗਯੋ ਹਮਰੋ ਮਨ ਹ੍ਵੈ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁਖੁ ਭਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਹੀਯੇ ॥

तिन के बसि गयो हमरो मन ह्वै अति ही सुखु भयो बृज नारि हीये ॥

tin ke bas gayo hamaro man havai at hee sukh bhayo biraj naar heeye ||

ਅਬ ਸੋ ਤਜਿ ਕੈ ਮਥਰਾ ਕੋ ਗਯੋ ਤਿਹ ਕੇ ਬਿਛੁਰੇ ਫਲੁ ਕਵਨ ਜੀਯੇ ॥੯੨੭॥

अब सो तजि कै मथरा को गयो तिह के बिछुरे फलु कवन जीये ॥९२७॥

ab so taj kai matharaa ko gayo teh ke bichhure fal kavan jeeye ||927||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ॥

कबियो बाच ॥

kabiyo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਪੈ ਜਿਤਨੀ ਫੁਨਿ ਊਧਵ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਬਾਤ ਬਖਾਨੀ ॥

ग्वारनि पै जितनी फुनि ऊधव स्याम कहै हरि बात बखानी ॥

gavaiaaran pai jitanee fun uoodhav sayaam kahai har baat bakhaanee ||

ਗ੍ਯਾਨ ਕੋ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਨਹਿ ਪ੍ਰੇਮ ਚਿਤਾਰ ਸਭੇ ਉਚਰਾਨੀ ॥

ग्यान को उतर देत भई नहि प्रेम चितार सभे उचरानी ॥

gayaan ko utar dhet bhiee neh prem chitaar sabhe ucharaanee ||

ਜਾਹੀ ਕੇ ਦੇਖਤ ਭੋਜਨ ਖਾਤ ਸਖੀ ਜਿਹ ਕੇ ਬਿਨੁ ਪੀਤ ਨ ਪਾਨੀ ॥

जाही के देखत भोजन खात सखी जिह के बिनु पीत न पानी ॥

jaahee ke dhekhat bhojan khaat sakhee jeh ke bin peet na paanee ||

ਗ੍ਯਾਨ ਕੀ ਜੋ ਇਨ ਬਾਤ ਕਹੀ ਤਿਨ ਹੂੰ ਹਿਤ ਸੋ ਕਰਿ ਏਕ ਨ ਜਾਨੀ ॥੯੨੮॥

ग्यान की जो इन बात कही तिन हूँ हित सो करि एक न जानी ॥९२८॥

gayaan kee jo in baat kahee tin hoo(n) hit so kar ek na jaanee ||928||


ਗੋਪਿਨ ਬਾਚ ਊਧਵ ਸੋ ॥

गोपिन बाच ऊधव सो ॥

gopin baach uoodhav so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਿਲ ਕੈ ਤਿਨ ਊਧਵ ਸੰਗਿ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਸੋ ਸੁਨ ਊਧਵ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ॥

मिल कै तिन ऊधव संगि कहियो हरि सो सुन ऊधव यौ कहीयो ॥

mil kai tin uoodhav sa(n)g kahiyo har so sun uoodhav yau kaheeyo ||

ਕਹਿ ਕੈ ਕਰਿ ਊਧਵ ਗ੍ਯਾਨ ਜਿਤੋ ਪਠਿਯੋ ਤਿਤਨੋ ਸਭ ਹੀ ਗਹੀਯੋ ॥

कहि कै करि ऊधव ग्यान जितो पठियो तितनो सभ ही गहीयो ॥

keh kai kar uoodhav gayaan jito paThiyo titano sabh hee gaheeyo ||

ਸਭ ਹੀ ਇਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਹਿਤ ਆਖਨ ਸੋ ਚਹੀਯੋ ॥

सभ ही इन ग्वारनि पै कबि स्याम कहियो हित आखन सो चहीयो ॥

sabh hee in gavaiaaran pai kab sayaam kahiyo hit aakhan so chaheeyo ||

ਇਨ ਕੋ ਤੁਮ ਤਿਆਗ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਹਮਰੀ ਸੁਧਿ ਲੇਤ ਸਦਾ ਰਹੀਯੋ ॥੯੨੯॥

इन को तुम तिआग गए मथुरा हमरी सुधि लेत सदा रहीयो ॥९२९॥

ein ko tum tiaag ge mathuraa hamaree sudh let sadhaa raheeyo ||929||


ਜਬ ਊਧਵ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਤਬ ਊਧਵ ਕੋ ਮਨ ਪ੍ਰੇਮ ਭਰਿਯੋ ਹੈ ॥

जब ऊधव सो इह भाति कहियो तब ऊधव को मन प्रेम भरियो है ॥

jab uoodhav so ieh bhaat kahiyo tab uoodhav ko man prem bhariyo hai ||

ਅਉਰ ਗਈ ਸੁਧਿ ਭੂਲ ਸਭੈ ਮਨ ਤੇ ਸਭ ਗ੍ਯਾਨ ਹੁਤੋ ਸੁ ਟਰਿਯੋ ਹੈ ॥

अउर गई सुधि भूल सभै मन ते सभ ग्यान हुतो सु टरियो है ॥

aaur giee sudh bhool sabhai man te sabh gayaan huto su Tariyo hai ||

ਸੋ ਮਿਲਿ ਕੈ ਸੰਗਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਅਤਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੀ ਬਾਤ ਕੇ ਸੰਗਿ ਢਰਿਯੋ ਹੈ ॥

सो मिलि कै संगि ग्वारनि के अति प्रीति की बात के संगि ढरियो है ॥

so mil kai sa(n)g gavaiaaran ke at preet kee baat ke sa(n)g ddariyo hai ||

ਗ੍ਯਾਨ ਕੇ ਡਾਰ ਮਨੋ ਕਪਰੇ ਹਿਤ ਕੀ ਸਰਿਤਾ ਹਿਤ ਮਹਿ ਕੂਦ ਪਰਿਯੋ ਹੈ ॥੯੩੦॥

ग्यान के डार मनो कपरे हित की सरिता हित महि कूद परियो है ॥९३०॥

gayaan ke ddaar mano kapare hit kee saritaa hit meh koodh pariyo hai ||930||


ਯੌ ਕਹਿ ਸੰਗਿ ਗੁਆਰਨਿ ਕੇ ਜਬ ਹੀ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੋ ਹਿਤ ਚੀਨੋ ॥

यौ कहि संगि गुआरनि के जब ही सभ ग्वारनि को हित चीनो ॥

yau keh sa(n)g guaaran ke jab hee sabh gavaiaaran ko hit cheeno ||

ਊਧਵ ਗ੍ਯਾਨ ਦਯੋ ਤਜਿ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਜਬ ਪ੍ਰੇਮ ਕੋ ਸੰਗ੍ਰਹ ਕੀਨੋ ॥

ऊधव ग्यान दयो तजि कै मन मै जब प्रेम को संग्रह कीनो ॥

uoodhav gayaan dhayo taj kai man mai jab prem ko sa(n)greh keeno ||

ਹੋਇ ਗਯੋ ਤਨਮੈ ਹਿਤ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਸੁ ਕਰਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਹੀਨੋ ॥

होइ गयो तनमै हित सो इह भाति कहियो सु करियो बृज हीनो ॥

hoi gayo tanamai hit so ieh bhaat kahiyo su kariyo biraj heeno ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਤੁਮ ਕੋ ਮਥਰਾ ਤਿਹ ਤੇ ਹਰਿ ਕਾਮ ਸਖੀ ਘਟ ਕੀਨੋ ॥੯੩੧॥

त्यागि गए तुम को मथरा तिह ते हरि काम सखी घट कीनो ॥९३१॥

tayaag ge tum ko matharaa teh te har kaam sakhee ghaT keeno ||931||


ਊਧਵ ਬਾਚ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ॥

ऊधव बाच गोपिन सो ॥

uoodhav baach gopin so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਾਇ ਕੈ ਹਉ ਮਥਰਾ ਮੈ ਸਖੀ ਹਰਿ ਤੇ ਤੁਮ ਲਯੈਬੇ ਕੋ ਦੂਤ ਪਠੈ ਹੋਂ ॥

जाइ कै हउ मथरा मै सखी हरि ते तुम लयैबे को दूत पठै हों ॥

jai kai hau matharaa mai sakhee har te tum layaibe ko dhoot paThai ho(n) ||

ਬੀਤਤ ਜੋ ਤੁਮ ਪੈ ਬਿਰਥਾ ਸਭ ਹੀ ਜਦੁਰਾਇ ਕੇ ਪਾਸ ਕਹੈ ਹੋਂ ॥

बीतत जो तुम पै बिरथा सभ ही जदुराइ के पास कहै हों ॥

beetat jo tum pai birathaa sabh hee jadhurai ke paas kahai ho(n) ||

ਕੈ ਤੁਮਰੀ ਬਿਨਤੀ ਉਹ ਪੈ ਬਿਧਿ ਜਾ ਰਿਝ ਹੈ ਬਿਧਿ ਤਾ ਰਿਝਵੈ ਹੋਂ ॥

कै तुमरी बिनती उह पै बिधि जा रिझ है बिधि ता रिझवै हों ॥

kai tumaree binatee uh pai bidh jaa rijh hai bidh taa rijhavai ho(n) ||

ਪਾਇਨ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਕੌ ਬ੍ਰਿਜ ਭੀਤਰ ਫੇਰਿ ਲਿਯੈ ਹੋਂ ॥੯੩੨॥

पाइन पै कबि स्याम कहै हरि कौ बृज भीतर फेरि लियै हों ॥९३२॥

pain pai kab sayaam kahai har kau biraj bheetar fer liyai ho(n) ||932||


ਯੌ ਜਬ ਊਧਵ ਬਾਤ ਕਹੀ ਉਠਿ ਪਾਇਨ ਲਾਗਤ ਭੀ ਤਬ ਸੋਊ ॥

यौ जब ऊधव बात कही उठि पाइन लागत भी तब सोऊ ॥

yau jab uoodhav baat kahee uTh pain laagat bhee tab souoo ||

ਦੂਖ ਘਟਿਓ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਤੇ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਆਨੰਦ ਹੋਊ ॥

दूख घटिओ तिन के मन ते अति ही मन भीतर आनंद होऊ ॥

dhookh ghaTio tin ke man te at hee man bheetar aana(n)dh houoo ||

ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬਿਧਿ ਯਾ ਉਚਰੋਊ ॥

कै बिनती संगि ऊधव के कबि स्याम कहै बिधि या उचरोऊ ॥

kai binatee sa(n)g uoodhav ke kab sayaam kahai bidh yaa ucharouoo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਜਾਇ ਕੈ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਕਰਿ ਕੈ ਕਹਿਯੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਨ ਤ੍ਯਾਗਤ ਕੋਊ ॥੯੩੩॥

स्याम सो जाइ कै यौ कहीयो करि कै कहियो प्रीति न त्यागत कोऊ ॥९३३॥

sayaam so jai kai yau kaheeyo kar kai kahiyo preet na tayaagat kouoo ||933||


ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਮੈ ਖੇਲਤ ਹੀ ਸਭ ਹੀ ਮਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੋ ਹਰਿਓ ॥

कुँज गलीन मै खेलत ही सभ ही मन ग्वारनि को हरिओ ॥

ku(n)j galeen mai khelat hee sabh hee man gavaiaaran ko hario ||

ਜਿਨ ਕੇ ਹਿਤ ਲੋਗਨ ਹਾਸ ਸਹਿਯੋ ਜਿਨ ਕੇ ਹਿਤ ਸਤ੍ਰਨ ਸੋ ਲਰਿਓ ॥

जिन के हित लोगन हास सहियो जिन के हित सत्रन सो लरिओ ॥

jin ke hit logan haas sahiyo jin ke hit satran so lario ||

ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬਿਨਤੀ ਕਰਿ ਕੈ ਇਮ ਉਚਰਿਓ ॥

संगि ऊधव के कबि स्याम कहै बिनती करि कै इम उचरिओ ॥

sa(n)g uoodhav ke kab sayaam kahai binatee kar kai im uchario ||

ਹਮ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਮਥਰਾ ਤਿਹ ਤੇ ਤੁਮ ਕਾਮ ਬੁਰੋ ਕਰਿਓ ॥੯੩੪॥

हम त्यागि गए बृज मै मथरा तिह ते तुम काम बुरो करिओ ॥९३४॥

ham tayaag ge biraj mai matharaa teh te tum kaam buro kario ||934||


ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸਨ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਪਾਗਿਓ ॥

बृज बासन त्यागि गए मथुरा पुर बासिन के रस भीतर पागिओ ॥

biraj baasan tayaag ge mathuraa pur baasin ke ras bheetar paagio ||

ਪ੍ਰੇਮ ਜਿਤੋ ਪਰ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਥੋ ਉਨ ਸੰਗਿ ਰਚੇ ਇਨ ਤੇ ਸਭ ਭਾਗਿਓ ॥

प्रेम जितो पर ग्वारनि थो उन संगि रचे इन ते सभ भागिओ ॥

prem jito par gavaiaaran tho un sa(n)g rache in te sabh bhaagio ||

ਦੈ ਤੁਹਿ ਹਾਥਿ ਸੁਨੋ ਬਤੀਯਾ ਹਮ ਜੋਗ ਕੇ ਭੇਖ ਪਠਾਵਨ ਲਾਗਿਓ ॥

दै तुहि हाथि सुनो बतीया हम जोग के भेख पठावन लागिओ ॥

dhai tuh haath suno bateeyaa ham jog ke bhekh paThaavan laagio ||

ਤਾ ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਹਰਿ ਜੂ ਤੁਮ ਪ੍ਰੇਮ ਸਭੈ ਅਬ ਤ੍ਯਾਗਿਓ ॥੯੩੫॥

ता संगि ऊधव यौ कहीयो हरि जू तुम प्रेम सभै अब त्यागिओ ॥९३५॥

taa sa(n)g uoodhav yau kaheeyo har joo tum prem sabhai ab tayaagio ||935||


ਊਧਵ ਜੋ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਚਲਿ ਕੈ ਜਬ ਹੀ ਮਥੁਰਾ ਪੁਰਿ ਜਈਯੈ ॥

ऊधव जो तजि कै बृज को चलि कै जब ही मथुरा पुरि जईयै ॥

uoodhav jo taj kai biraj ko chal kai jab hee mathuraa pur jieeyai ||

ਪੈ ਅਪੁਨੇ ਚਿਤ ਮੈ ਹਿਤ ਕੈ ਹਮ ਓਰ ਤੇ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਪਾਇਨ ਪਈਯੈ ॥

पै अपुने चित मै हित कै हम ओर ते स्याम के पाइन पईयै ॥

pai apune chit mai hit kai ham or te sayaam ke pain pieeyai ||

ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਬਿਨਤੀ ਤਿਹ ਪੈ ਫਿਰ ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਉਤਰ ਦਈਯੈ ॥

कै अति ही बिनती तिह पै फिर कै इह भाति सो उतर दईयै ॥

kai at hee binatee teh pai fir kai ieh bhaat so utar dhieeyai ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਨਿਬਾਹੀਯੈ ਤਉ ਕਰੀਯੈ ਪਰ ਯੌ ਨਹੀ ਕਾਹੂੰ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਰਈਯੈ ॥੯੩੬॥

प्रीति निबाहीयै तउ करीयै पर यौ नही काहूँ सो प्रीति करईयै ॥९३६॥

preet nibaaheeyai tau kareeyai par yau nahee kaahoo(n) so preet karieeyai ||936||


ਊਧਵ ਮੋ ਸੁਨ ਲੈ ਬਤੀਯਾ ਜਦੁਬੀਰ ਕੋ ਧ੍ਯਾਨ ਜਬੈ ਕਰਿ ਹੋਂ ॥

ऊधव मो सुन लै बतीया जदुबीर को ध्यान जबै करि हों ॥

uoodhav mo sun lai bateeyaa jadhubeer ko dhayaan jabai kar ho(n) ||

ਬਿਰਹਾ ਤਬ ਆਇ ਕੈ ਮੋਹਿ ਗ੍ਰਸੈ ਤਿਹ ਕੇ ਗ੍ਰਸਏ ਨ ਜੀਯੋ ਮਰਿ ਹੋਂ ॥

बिरहा तब आइ कै मोहि ग्रसै तिह के ग्रसए न जीयो मरि हों ॥

birahaa tab aai kai moh grasai teh ke grase na jeeyo mar ho(n) ||

ਨ ਕਛੂ ਸੁਧਿ ਮੋ ਤਨ ਮੈ ਰਹਿ ਹੈ ਧਰਨੀ ਪਰ ਹ੍ਵੈ ਬਿਸੁਧੀ ਝਰਿ ਹੋਂ ॥

न कछू सुधि मो तन मै रहि है धरनी पर ह्वै बिसुधी झरि हों ॥

n kachhoo sudh mo tan mai reh hai dharanee par havai bisudhee jhar ho(n) ||

ਤਿਹ ਤੇ ਹਮ ਕੋ ਬ੍ਰਿਥਾ ਕਹੀਐ ਕਿਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਧੀਰਜ ਹਉ ਧਰਿ ਹੋਂ ॥੯੩੭॥

तिह ते हम को बृथा कहीऐ किह भाति सो धीरज हउ धरि हों ॥९३७॥

teh te ham ko birathaa kaheeaai keh bhaat so dheeraj hau dhar ho(n) ||937||


ਦੀਨ ਹ੍ਵੈ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋਊ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਜੁ ਥੀ ਅਤਿ ਹੀ ਅਭਿਮਾਨੀ ॥

दीन ह्वै ग्वारनि सोऊ कहै कबि स्याम जु थी अति ही अभिमानी ॥

dheen havai gavaiaaran souoo kahai kab sayaam ju thee at hee abhimaanee ||

ਕੰਚਨ ਸੇ ਤਨ ਕੰਜ ਮੁਖੀ ਜੋਊ ਰੂਪ ਬਿਖੈ ਰਤਿ ਕੀ ਫੁਨਿ ਸਾਨੀ ॥

कंचन से तन कंज मुखी जोऊ रूप बिखै रति की फुनि सानी ॥

ka(n)chan se tan ka(n)j mukhee jouoo roop bikhai rat kee fun saanee ||

ਯੌ ਕਹੈ ਬ੍ਯਾਕੁਲ ਹ੍ਵੈ ਬਤੀਯਾ ਕਬਿ ਨੇ ਤਿਹ ਕੀ ਉਪਮਾ ਪਹਿਚਾਨੀ ॥

यौ कहै ब्याकुल ह्वै बतीया कबि ने तिह की उपमा पहिचानी ॥

yau kahai bayaakul havai bateeyaa kab ne teh kee upamaa pahichaanee ||

ਊਧਵ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਸਫਰੀ ਸਭ ਨਾਮ ਲੈ ਸ੍ਯਾਮ ਕੋ ਜੀਵਤ ਪਾਨੀ ॥੯੩੮॥

ऊधव ग्वारनीया सफरी सभ नाम लै स्याम को जीवत पानी ॥९३८॥

uoodhav gavaiaaraneeyaa safaree sabh naam lai sayaam ko jeevat paanee ||938||


ਆਤੁਰ ਹ੍ਵੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਸੰਗਿ ਊਧਵ ਕੇ ਸੁ ਕਹਿਯੋ ਇਮ ਬੈਨਾ ॥

आतुर ह्वै बृखभान सुता संगि ऊधव के सु कहियो इम बैना ॥

aatur havai birakhabhaan sutaa sa(n)g uoodhav ke su kahiyo im bainaa ||

ਭੂਖਨ ਭੋਜਨ ਧਾਮ ਜਿਤੋ ਹਮ ਕੇ ਜਦੁਬੀਰ ਬਿਨਾ ਸੁ ਰੁਚੈ ਨਾ ॥

भूखन भोजन धाम जितो हम के जदुबीर बिना सु रुचै ना ॥

bhookhan bhojan dhaam jito ham ke jadhubeer binaa su ruchai naa ||

ਯੌਂ ਕਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਯੋਗ ਬਿਖੈ ਬਸਿ ਗੇ ਕਬਿ ਨੇ ਜਸ ਯੌ ਉਚਰੈਨਾ ॥

यौं कहि स्याम बियोग बिखै बसि गे कबि ने जस यौ उचरैना ॥

yaua(n) keh sayaam biyog bikhai bas ge kab ne jas yau ucharainaa ||

ਰੋਵਤ ਭੀ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖ ਸੋ ਜੁ ਹੁਤੇ ਮਨੋ ਬਾਲ ਕੇ ਕੰਜਨ ਨੈਨਾ ॥੯੩੯॥

रोवत भी अति ही दुख सो जु हुते मनो बाल के कंजन नैना ॥९३९॥

rovat bhee at hee dhukh so ju hute mano baal ke ka(n)jan nainaa ||939||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਅਤਿ ਪ੍ਰੇਮ ਛਕੀ ਮਨ ਮੈ ਜਦੁਬੀਰ ਕੋ ਧਿਆਨ ਲਗੈ ਕੈ ॥

बृखभान सुता अति प्रेम छकी मन मै जदुबीर को धिआन लगै कै ॥

birakhabhaan sutaa at prem chhakee man mai jadhubeer ko dhiaan lagai kai ||

ਰੋਵਤ ਭੀ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖ ਸੋ ਸੰਗ ਕਾਜਰ ਨੀਰ ਗਿਰਿਯੋ ਢਰ ਕੈ ਕੈ ॥

रोवत भी अति ही दुख सो संग काजर नीर गिरियो ढर कै कै ॥

rovat bhee at hee dhukh so sa(n)g kaajar neer giriyo ddar kai kai ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਮੁਖ ਤੇ ਉਮਗੈ ਕੈ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि स्याम कहियो मुख ते उमगै कै ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab sayaam kahiyo mukh te umagai kai ||

ਚੰਦਹਿ ਕੋ ਜੁ ਕਲੰਕ ਹੁਤੋ ਮਨੋ ਨੈਨਨਿ ਪੈਡ ਚਲ੍ਯੋ ਨਿਚੁਰੈ ਕੈ ॥੯੪੦॥

चंदहि को जु कलंक हुतो मनो नैननि पैड चल्यो निचुरै कै ॥९४०॥

cha(n)dheh ko ju kala(n)k huto mano nainan paidd chalayo nichurai kai ||940||


ਗਹਿ ਧੀਰਜ ਊਧਵ ਸੋ ਬਚਨਾ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰੇ ॥

गहि धीरज ऊधव सो बचना बृखभान सुता इह भाति उचारे ॥

geh dheeraj uoodhav so bachanaa birakhabhaan sutaa ieh bhaat uchaare ||

ਨੇਹੁ ਤਜਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸਨ ਸੋ ਤਿਹ ਤੇ ਕਛੂ ਜਾਨਤ ਦੋਖ ਬਿਚਾਰੇ ॥

नेहु तजियो बृज बासन सो तिह ते कछू जानत दोख बिचारे ॥

neh tajiyo biraj baasan so teh te kachhoo jaanat dhokh bichaare ||

ਬੈਠਿ ਗਏ ਰਥ ਭੀਤਰ ਆਪ ਨਹੀ ਇਨ ਕੀ ਸੋਊ ਓਰਿ ਨਿਹਾਰੇ ॥

बैठि गए रथ भीतर आप नही इन की सोऊ ओरि निहारे ॥

baiTh ge rath bheetar aap nahee in kee souoo or nihaare ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਮਥੁਰਾ ਹਮ ਜਾਨਤ ਹੈ ਘਟ ਭਾਗ ਹਮਾਰੇ ॥੯੪੧॥

त्यागि गए बृज को मथुरा हम जानत है घट भाग हमारे ॥९४१॥

tayaag ge biraj ko mathuraa ham jaanat hai ghaT bhaag hamaare ||941||


ਜਬ ਜੈਹੋ ਕਹਿਯੋ ਮਥੁਰਾ ਕੈ ਬਿਖੈ ਹਰਿ ਪੈ ਹਮਰੀ ਬਿਨਤੀ ਇਹ ਕੀਜੋ ॥

जब जैहो कहियो मथुरा कै बिखै हरि पै हमरी बिनती इह कीजो ॥

jab jaiho kahiyo mathuraa kai bikhai har pai hamaree binatee ieh keejo ||

ਪਾਇਨ ਕੋ ਗਹਿ ਕੈ ਰਹੀਯੋ ਘਟਕਾ ਦਸ ਜੋ ਮੁਹਿ ਨਾਮਹਿ ਲੀਜੋ ॥

पाइन को गहि कै रहीयो घटका दस जो मुहि नामहि लीजो ॥

pain ko geh kai raheeyo ghaTakaa dhas jo muh naameh leejo ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਪਾਛੇ ਤੇ ਮੋ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨਿ ਲੈ ਇਹ ਭਾਤਹਿ ਸੋ ਉਚਰੀਜੋ ॥

ताही के पाछे ते मो बतीया सुनि लै इह भातहि सो उचरीजो ॥

taahee ke paachhe te mo bateeyaa sun lai ieh bhaateh so uchareejo ||

ਜਾਨਤ ਹੋ ਹਿਤ ਤ੍ਯਾਗ ਗਏ ਕਬਹੂੰ ਹਮਰੇ ਹਿਤ ਕੇ ਸੰਗ ਭੀਜੋ ॥੯੪੨॥

जानत हो हित त्याग गए कबहूँ हमरे हित के संग भीजो ॥९४२॥

jaanat ho hit tayaag ge kabahoo(n) hamare hit ke sa(n)g bheejo ||942||


ਊਧਵ ਕੋ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਬਚਨਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਉਚਰਿਯੋ ਹੈ ॥

ऊधव को बृखभान सुता बचना इह भाति सो उचरियो है ॥

uoodhav ko birakhabhaan sutaa bachanaa ieh bhaat so uchariyo hai ||

ਤਿਆਗ ਦਈ ਜਬ ਅਉਰ ਕਥਾ ਮਨ ਜਉ ਸੰਗਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਪ੍ਰੇਮ ਭਰਿਯੋ ਹੈ ॥

तिआग दई जब अउर कथा मन जउ संगि स्याम के प्रेम भरियो है ॥

tiaag dhiee jab aaur kathaa man jau sa(n)g sayaam ke prem bhariyo hai ||

ਤਾ ਸੰਗ ਸੋਊ ਕਹੋ ਬਤੀਯਾ ਬਨ ਮੈ ਹਮਰੋ ਜੋਊ ਸੰਗਿ ਅਰਿਯੋ ਹੈ ॥

ता संग सोऊ कहो बतीया बन मै हमरो जोऊ संगि अरियो है ॥

taa sa(n)g souoo kaho bateeyaa ban mai hamaro jouoo sa(n)g ariyo hai ||

ਮੈ ਤੁਮਰੇ ਸੰਗਿ ਮਾਨ ਕਰਿਯੋ ਤੁਮ ਹੂੰ ਹਮਰੇ ਸੰਗ ਮਾਨ ਕਰਿਯੋ ਹੈ ॥੯੪੩॥

मै तुमरे संगि मान करियो तुम हूँ हमरे संग मान करियो है ॥९४३॥

mai tumare sa(n)g maan kariyo tum hoo(n) hamare sa(n)g maan kariyo hai ||943||


ਬਨ ਮੈ ਹਮਰੋ ਸੰਗਿ ਕੇਲ ਕਰੇ ਮਨ ਮੈ ਅਬ ਸੋ ਜਦੁਬੀਰ ਚਿਤਾਰੋ ॥

बन मै हमरो संगि केल करे मन मै अब सो जदुबीर चितारो ॥

ban mai hamaro sa(n)g kel kare man mai ab so jadhubeer chitaaro ||

ਮੋਰੇ ਜੁ ਸੰਗਿ ਕਹੀ ਬਤੀਯਾ ਹਿਤ ਕੀ ਸੋਈ ਅਪਨੇ ਚਿਤ ਨਿਹਾਰੋ ॥

मोरे जु संगि कही बतीया हित की सोई अपने चित निहारो ॥

more ju sa(n)g kahee bateeyaa hit kee soiee apane chit nihaaro ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਧ੍ਯਾਨ ਕਰੋ ਕਿਹ ਹੇਤ ਤਜਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਔ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ਪਧਾਰੋ ॥

ताही को ध्यान करो किह हेत तजियो बृज औ मथुरा को पधारो ॥

taahee ko dhayaan karo keh het tajiyo biraj aau mathuraa ko padhaaro ||

ਜਾਨਤ ਹੈ ਤੁਮਰੋ ਕਛੁ ਦੋਸ ਨਹੀ ਕਛੁ ਹੈ ਘਟ ਭਾਗ ਹਮਾਰੋ ॥੯੪੪॥

जानत है तुमरो कछु दोस नही कछु है घट भाग हमारो ॥९४४॥

jaanat hai tumaro kachh dhos nahee kachh hai ghaT bhaag hamaaro ||944||


ਯੌ ਸੁਨਿ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਯੋ ਊਧਵ ਪ੍ਰੀਤਿ ਘਨੀ ਹਰਿ ਕੀ ਸੰਗ ਤੇਰੈ ॥

यौ सुनि उतर देत भयो ऊधव प्रीति घनी हरि की संग तेरै ॥

yau sun utar dhet bhayo uoodhav preet ghanee har kee sa(n)g terai ||

ਜਾਨਤ ਹੋ ਅਬ ਆਵਤ ਹੈ ਉਪਜੈ ਇਹ ਚਿੰਤ ਕਹਿਯੋ ਮਨ ਮੇਰੈ ॥

जानत हो अब आवत है उपजै इह चिंत कहियो मन मेरै ॥

jaanat ho ab aavat hai upajai ieh chi(n)t kahiyo man merai ||

ਕਿਉ ਮਥਰਾ ਤਜਿ ਆਵਤ ਹੈ ਜੁ ਫਿਰੈ ਨਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਫੁਨਿ ਫੇਰੈ ॥

किउ मथरा तजि आवत है जु फिरै नहि ग्वारनि के फुनि फेरै ॥

kiau matharaa taj aavat hai ju firai neh gavaiaaran ke fun ferai ||

ਜਾਨਤ ਹੈ ਹਮਰੇ ਘਟਿ ਭਾਗਨ ਆਵਤ ਹੈ ਹਰਿ ਜੂ ਫਿਰਿ ਡੇਰੈ ॥੯੪੫॥

जानत है हमरे घटि भागन आवत है हरि जू फिरि डेरै ॥९४५॥

jaanat hai hamare ghaT bhaagan aavat hai har joo fir dderai ||945||


ਯੌ ਕਹਿ ਰੋਵਤ ਭੀ ਲਲਨਾ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਸੋਕ ਬਢਾਯੋ ॥

यौ कहि रोवत भी ललना अपने मन मै अति सोक बढायो ॥

yau keh rovat bhee lalanaa apane man mai at sok baddaayo ||

ਝੂਮਿ ਗਿਰੀ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਪਰ ਸੋ ਹ੍ਰਿਦੈ ਆਨੰਦ ਥੋ ਤਿਤਨੋ ਬਿਸਰਾਯੋ ॥

झूमि गिरी पृथमी पर सो हृदै आनंद थो तितनो बिसरायो ॥

jhoom giree pirathamee par so hiradhai aana(n)dh tho titano bisaraayo ||

ਭੂਲ ਗਈ ਸੁਧਿ ਅਉਰ ਸਬੈ ਹਰਿ ਕੇ ਮਨ ਧ੍ਯਾਨ ਬਿਖੈ ਤਿਨ ਲਾਯੋ ॥

भूल गई सुधि अउर सबै हरि के मन ध्यान बिखै तिन लायो ॥

bhool giee sudh aaur sabai har ke man dhayaan bikhai tin laayo ||

ਯੌ ਕਹਿ ਊਧਵ ਸੋ ਤਿਨਿ ਟੇਰਿ ਹਹਾ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਆਯੋ ॥੯੪੬॥

यौ कहि ऊधव सो तिनि टेरि हहा हमरे गृहि स्याम न आयो ॥९४६॥

yau keh uoodhav so tin Ter hahaa hamare gireh sayaam na aayo ||946||


ਜਾਹੀ ਕੇ ਸੰਗਿ ਸੁਨੋ ਮਿਲ ਕੈ ਹਮ ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਮੈ ਖੇਲ ਮਚਾਯੋ ॥

जाही के संगि सुनो मिल कै हम कुँज गलीन मै खेल मचायो ॥

jaahee ke sa(n)g suno mil kai ham ku(n)j galeen mai khel machaayo ||

ਗਾਵਤ ਭਯੋ ਸੋਊ ਠਉਰ ਤਹਾ ਹਮਹੂੰ ਮਿਲ ਕੈ ਤਹ ਮੰਗਲ ਗਾਯੋ ॥

गावत भयो सोऊ ठउर तहा हमहूँ मिल कै तह मंगल गायो ॥

gaavat bhayo souoo Thaur tahaa hamahoo(n) mil kai teh ma(n)gal gaayo ||

ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਇਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤੇ ਮਨੂਆ ਉਚਟਾਯੋ ॥

सो बृज त्यागि गए मथुरा इन ग्वारनि ते मनूआ उचटायो ॥

so biraj tayaag ge mathuraa in gavaiaaran te manooaa uchaTaayo ||

ਯੌ ਕਹਿ ਊਧਵ ਸੋ ਤਿਨ ਟੇਰਿ ਹਹਾ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਆਯੋ ॥੯੪੭॥

यौ कहि ऊधव सो तिन टेरि हहा हमरे गृहि स्याम न आयो ॥९४७॥

yau keh uoodhav so tin Ter hahaa hamare gireh sayaam na aayo ||947||


ਬ੍ਰਿਜ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਯੋ ਮਥਰਾ ਕੋ ਸੋਊ ਮਨ ਤੇ ਸਭ ਹੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥਿ ਬਿਸਾਰੀ ॥

बृज त्यागि गयो मथरा को सोऊ मन ते सभ ही बृजनाथि बिसारी ॥

biraj tayaag gayo matharaa ko souoo man te sabh hee birajanaath bisaaree ||

ਸੰਗਿ ਰਚੇ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸੋਊ ਜਾਨਿ ਪਿਆਰੀ ॥

संगि रचे पुर बासिन के कबि स्याम कहै सोऊ जानि पिआरी ॥

sa(n)g rache pur baasin ke kab sayaam kahai souoo jaan piaaree ||

ਊਧਵ ਜੂ ਸੁਨੀਯੈ ਬਿਰਥਾ ਤਿਹ ਤੇ ਅਤਿ ਬ੍ਯਾਕੁਲ ਭੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰੀ ॥

ऊधव जू सुनीयै बिरथा तिह ते अति ब्याकुल भी बृज नारी ॥

uoodhav joo suneeyai birathaa teh te at bayaakul bhee biraj naaree ||

ਕੰਚੁਰੀ ਜਿਉ ਅਹਿਰਾਜ ਤਜੈ ਤਿਹ ਭਾਤਿ ਤਜੀ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰ ਮੁਰਾਰੀ ॥੯੪੮॥

कंचुरी जिउ अहिराज तजै तिह भाति तजी बृज नार मुरारी ॥९४८॥

ka(n)churee jiau ahiraaj tajai teh bhaat tajee biraj naar muraaree ||948||


ਊਧਵ ਕੇ ਫਿਰਿ ਸੰਗ ਕਹਿਯੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਜਈ ਹੈ ॥

ऊधव के फिरि संग कहियो कबि स्याम कहै बृखभान जई है ॥

uoodhav ke fir sa(n)g kahiyo kab sayaam kahai birakhabhaan jiee hai ||

ਜਾ ਮੁਖ ਕੇ ਸਮ ਚੰਦ੍ਰ ਪ੍ਰਭਾ ਜੁ ਤਿਹੂੰ ਪੁਰ ਮਾਨਹੁ ਰੂਪਮਈ ਹੈ ॥

जा मुख के सम चंद्र प्रभा जु तिहूँ पुर मानहु रूपमई है ॥

jaa mukh ke sam cha(n)dhr prabhaa ju tihoo(n) pur maanahu roopamiee hai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਗਯੋ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਤਿਹ ਤੇ ਅਤਿ ਬ੍ਯਾਕੁਲ ਚਿਤ ਭਈ ਹੈ ॥

स्याम गयो तजि कै बृज को तिह ते अति ब्याकुल चित भई है ॥

sayaam gayo taj kai biraj ko teh te at bayaakul chit bhiee hai ||

ਜਾ ਦਿਨ ਕੇ ਮਥੁਰਾ ਮੈ ਗਏ ਬਿਨੁ ਤ੍ਵੈ ਹਮਰੀ ਸੁਧਿ ਹੂੰ ਨ ਲਈ ਹੈ ॥੯੪੯॥

जा दिन के मथुरा मै गए बिनु त्वै हमरी सुधि हूँ न लई है ॥९४९॥

jaa dhin ke mathuraa mai ge bin tavai hamaree sudh hoo(n) na liee hai ||949||


ਜਾ ਦਿਨ ਕੇ ਬ੍ਰਿਜ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਬਿਨ ਤ੍ਵੈ ਕੋਊ ਮਾਨਸ ਹੂੰ ਨ ਪਠਾਯੋ ॥

जा दिन के बृज त्यागि गए बिन त्वै कोऊ मानस हूँ न पठायो ॥

jaa dhin ke biraj tayaag ge bin tavai kouoo maanas hoo(n) na paThaayo ||

ਹੇਤ ਜਿਤੋ ਇਨ ਊਪਰ ਥੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਤਨੋ ਬਿਸਰਾਯੋ ॥

हेत जितो इन ऊपर थो कबि स्याम कहै तितनो बिसरायो ॥

het jito in uoopar tho kab sayaam kahai titano bisaraayo ||

ਆਪ ਰਚੇ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਸੋ ਇਨ ਕੋ ਦੁਖੁ ਦੈ ਉਨ ਕੋ ਰਿਝਵਾਯੋ ॥

आप रचे पुर बासिन सो इन को दुखु दै उन को रिझवायो ॥

aap rache pur baasin so in ko dhukh dhai un ko rijhavaayo ||

ਤਾ ਸੰਗ ਜਾਇ ਕੋ ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਤੁਮਰੇ ਕਹੁ ਕਾ ਜੀਯ ਆਯੋ ॥੯੫੦॥

ता संग जाइ को यौ कहीयो हरि जी तुमरे कहु का जीय आयो ॥९५०॥

taa sa(n)g jai ko yau kaheeyo har jee tumare kahu kaa jeey aayo ||950||


ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਬ੍ਰਿਜ ਕਉ ਚਲਿ ਕੈ ਫਿਰਿ ਆਪ ਨਹੀ ਬ੍ਰਿਜ ਆਏ ॥

त्यागि गए मथुरा बृज कउ चलि कै फिरि आप नही बृज आए ॥

tayaag ge mathuraa biraj kau chal kai fir aap nahee biraj aae ||

ਸੰਗਿ ਰਚੇ ਪੁਰਬਾਸਿਨ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਨ ਆਨੰਦ ਪਾਏ ॥

संगि रचे पुरबासिन के कबि स्याम कहै मन आनंद पाए ॥

sa(n)g rache purabaasin ke kab sayaam kahai man aana(n)dh paae ||

ਦੈ ਗਯੋ ਹੈ ਇਨ ਕੋ ਦੁਖ ਊਧਵ ਪੈ ਮਨ ਮੈ ਨ ਹੁਲਾਸ ਬਢਾਏ ॥

दै गयो है इन को दुख ऊधव पै मन मै न हुलास बढाए ॥

dhai gayo hai in ko dhukh uoodhav pai man mai na hulaas baddaae ||

ਆਪ ਨ ਥੇ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਉਪਜੇ ਇਨ ਸੋ ਸੁ ਭਏ ਛਿਨ ਬੀਚ ਪਰਾਏ ॥੯੫੧॥

आप न थे बृज मै उपजे इन सो सु भए छिन बीच पराए ॥९५१॥

aap na the biraj mai upaje in so su bhe chhin beech paraae ||951||


ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਨ ਲਈ ਇਨ ਕੀ ਸੁਧਿ ਹੋਤ ਕਛੂ ਮਨਿ ਮੋਹ ਤੁਹਾਰੇ ॥

त्यागि गए न लई इन की सुधि होत कछू मनि मोह तुहारे ॥

tayaag ge na liee in kee sudh hot kachhoo man moh tuhaare ||

ਆਪ ਰਚੇ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਸੋ ਇਨ ਕੇ ਸਭ ਪ੍ਰੇਮ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰੇ ॥

आप रचे पुर बासिन सो इन के सभ प्रेम बिदा करि डारे ॥

aap rache pur baasin so in ke sabh prem bidhaa kar ddaare ||

ਤਾ ਤੇ ਨ ਮਾਨ ਕਰੋ ਫਿਰਿ ਆਵਹੁ ਜੀਤਤ ਭੇ ਤੁਮ ਹੂੰ ਹਮ ਹਾਰੇ ॥

ता ते न मान करो फिरि आवहु जीतत भे तुम हूँ हम हारे ॥

taa te na maan karo fir aavahu jeetat bhe tum hoo(n) ham haare ||

ਤਾ ਤੇ ਤਜੋ ਮਥੁਰਾ ਫਿਰਿ ਆਵਹੁ ਹੇ ਸਭ ਗਊਅਨ ਕੇ ਰਖਵਾਰੇ ॥੯੫੨॥

ता ते तजो मथुरा फिरि आवहु हे सभ गऊअन के रखवारे ॥९५२॥

taa te tajo mathuraa fir aavahu he sabh guooan ke rakhavaare ||952||


ਸ੍ਯਾਮ ਚਿਤਾਰ ਕੈ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਨ ਮੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਦੁਖ ਪਾਵੈ ॥

स्याम चितार कै स्याम कहै मन मै सभ ग्वारनीया दुख पावै ॥

sayaam chitaar kai sayaam kahai man mai sabh gavaiaaraneeyaa dhukh paavai ||

ਏਕ ਪਰੈ ਮੁਰਝਾਇ ਧਰਾ ਇਕ ਬਿਯੋਗ ਭਰੀ ਗੁਨ ਬਿਯੋਗ ਹੀ ਗਾਵੈ ॥

एक परै मुरझाइ धरा इक बियोग भरी गुन बियोग ही गावै ॥

ek parai murajhai dharaa ik biyog bharee gun biyog hee gaavai ||

ਕੋਊ ਕਹੈ ਜਦੁਰਾ ਮੁਖ ਤੇ ਸੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਬਾਤ ਤਹਾ ਏਊ ਧਾਵੈ ॥

कोऊ कहै जदुरा मुख ते सुनि स्रउनन बात तहा एऊ धावै ॥

kouoo kahai jadhuraa mukh te sun sraunan baat tahaa euoo dhaavai ||

ਜਉ ਪਿਖਵੈ ਨ ਤਹਾ ਤਿਨ ਕੋ ਸੁ ਕਹੈ ਹਮ ਕੋ ਹਰਿ ਹਾਥਿ ਨ ਆਵੈ ॥੯੫੩॥

जउ पिखवै न तहा तिन को सु कहै हम को हरि हाथि न आवै ॥९५३॥

jau pikhavai na tahaa tin ko su kahai ham ko har haath na aavai ||953||


ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਬ੍ਯਾਕੁਲ ਚਿਤ ਭਈ ਹਰਿ ਕੇ ਨਹੀ ਆਵਨ ਕੀ ਸੁਧਿ ਪਾਈ ॥

ग्वारनि ब्याकुल चित भई हरि के नही आवन की सुधि पाई ॥

gavaiaaran bayaakul chit bhiee har ke nahee aavan kee sudh paiee ||

ਬ੍ਯਾਕੁਲ ਹੋਇ ਗਈ ਚਿਤ ਮੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਮਨ ਮੈ ਮੁਰਝਾਈ ॥

ब्याकुल होइ गई चित मै बृखभान सुता मन मै मुरझाई ॥

bayaakul hoi giee chit mai birakhabhaan sutaa man mai murajhaiee ||

ਜੋ ਬਿਰਥਾ ਮਨ ਬੀਚ ਹੁਤੀ ਸੋਊ ਊਧਵ ਕੇ ਤਿਹ ਪਾਸ ਸੁਨਾਈ ॥

जो बिरथा मन बीच हुती सोऊ ऊधव के तिह पास सुनाई ॥

jo birathaa man beech hutee souoo uoodhav ke teh paas sunaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਆਵਤ ਹੈ ਤਿਹ ਤੇ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖ ਭਯੋ ਬਰਨਿਯੋ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥੯੫੪॥

स्याम न आवत है तिह ते अति ही दुख भयो बरनियो नही जाई ॥९५४॥

sayaam na aavat hai teh te at hee dhukh bhayo baraniyo nahee jaiee ||954||


ਊਧਵ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਯੋ ਅਤਿ ਬਿਯੋਗ ਮਨੇ ਅਪਨੇ ਸੋਊ ਕੈ ਹੈ ॥

ऊधव उतर देत भयो अति बियोग मने अपने सोऊ कै है ॥

uoodhav utar dhet bhayo at biyog mane apane souoo kai hai ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਮਨ ਮਧਿ ਬਿਖੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜੋਊ ਬਾਤ ਰੁਚੈ ਹੈ ॥

ग्वारनि के मन मधि बिखै कबि स्याम कहै जोऊ बात रुचै है ॥

gavaiaaran ke man madh bikhai kab sayaam kahai jouoo baat ruchai hai ||

ਥੋਰੇ ਹੀ ਦ੍ਰਯੋਸਨ ਮੈ ਮਿਲਿ ਹੈ ਜਿਹ ਕੇ ਉਰ ਮੈ ਨ ਕਛੂ ਭ੍ਰਮ ਭੈ ਹੈ ॥

थोरे ही द्रयोसन मै मिलि है जिह के उर मै न कछू भ्रम भै है ॥

thore hee dhrayosan mai mil hai jeh ke ur mai na kachhoo bhram bhai hai ||

ਜੋਗਿਨ ਹੋਇ ਜਪੋ ਹਰਿ ਕੋ ਮੁਖ ਮਾਗਹੁਗੀ ਤੁਮ ਸੋ ਬਰੁ ਦੈ ਹੈ ॥੯੫੫॥

जोगिन होइ जपो हरि को मुख मागहुगी तुम सो बरु दै है ॥९५५॥

jogin hoi japo har ko mukh maagahugee tum so bar dhai hai ||955||


ਉਨ ਦੈ ਇਮ ਊਧਵ ਗ੍ਯਾਨ ਚਲਿਯੋ ਚਲਿ ਕੈ ਜਸੁਧਾ ਪਤਿ ਪੈ ਸੋਊ ਆਯੋ ॥

उन दै इम ऊधव ग्यान चलियो चलि कै जसुधा पति पै सोऊ आयो ॥

aun dhai im uoodhav gayaan chaliyo chal kai jasudhaa pat pai souoo aayo ||

ਆਵਤ ਹੀ ਜਸੁਧਾ ਜਸੁਧਾ ਪਤਿ ਪਾਇਨ ਊਪਰ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥

आवत ही जसुधा जसुधा पति पाइन ऊपर सीस झुकायो ॥

aavat hee jasudhaa jasudhaa pat pain uoopar sees jhukaayo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਸਦਾ ਕਹੀਯੋ ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਮੋ ਪਹਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪਠਾਯੋ ॥

स्याम ही स्याम सदा कहीयो कहि कै इह मो पहि कान्रह पठायो ॥

sayaam hee sayaam sadhaa kaheeyo keh kai ieh mo peh kaanreh paThaayo ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਰਥ ਪੈ ਚੜ ਕੈ ਰਥ ਕੋ ਮਥੁਰਾ ਹੀ ਕੀ ਓਰਿ ਚਲਾਯੋ ॥੯੫੬॥

यौ कहि कै रथ पै चड़ कै रथ को मथुरा ही की ओरि चलायो ॥९५६॥

yau keh kai rath pai chaR kai rath ko mathuraa hee kee or chalaayo ||956||


ਊਧਵ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

ऊधव बाच कान्रह जू सो ॥

uoodhav baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਇ ਤਬੈ ਮਥੁਰਾ ਪੁਰ ਮੈ ਬਲਿਰਾਮ ਅਉ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਪਾਇ ਪਰਿਯੋ ॥

आइ तबै मथुरा पुर मै बलिराम अउ स्याम के पाइ परियो ॥

aai tabai mathuraa pur mai baliraam aau sayaam ke pai pariyo ||

ਕਹਿਯੋ ਜੋ ਤੁਮ ਮੋ ਕਹਿ ਕੈ ਪਠਿਯੋ ਤਿਨ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਹੀ ਸੋ ਉਚਰਿਯੋ ॥

कहियो जो तुम मो कहि कै पठियो तिन सो इह भाति ही सो उचरियो ॥

kahiyo jo tum mo keh kai paThiyo tin so ieh bhaat hee so uchariyo ||

ਸੰਗ ਨੰਦ ਕੇ ਅਉ ਉਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਚਰਚਾ ਕਰਿ ਗ੍ਯਾਨ ਕੀ ਫੇਰਿ ਫਿਰਿਯੋ ॥

संग नंद के अउ उन ग्वारनि के चरचा करि ग्यान की फेरि फिरियो ॥

sa(n)g na(n)dh ke aau un gavaiaaran ke charachaa kar gayaan kee fer firiyo ||

ਤੁਮਰੋ ਮੁਖ ਭਾਨੁ ਨਿਹਾਰਤ ਹੀ ਤਮ ਸੋ ਦੁਖ ਥੋ ਸਭ ਦੂਰ ਕਰਿਯੋ ॥੯੫੭॥

तुमरो मुख भानु निहारत ही तम सो दुख थो सभ दूर करियो ॥९५७॥

tumaro mukh bhaan nihaarat hee tam so dhukh tho sabh dhoor kariyo ||957||


ਤੁਮਰੇ ਪਗ ਭੇਟਿ ਗਯੋ ਜਬ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਫੁਨਿ ਨੰਦ ਕੇ ਧਾਮਿ ਗਯੋ ॥

तुमरे पग भेटि गयो जब ही तब ही फुनि नंद के धामि गयो ॥

tumare pag bheT gayo jab hee tab hee fun na(n)dh ke dhaam gayo ||

ਤਿਹ ਕੋ ਕਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਗ੍ਯਾਨ ਪ੍ਰਬੋਧ ਉਠਿਯੋ ਚਲਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਪਾਸ ਅਯੋ ॥

तिह को करि कै हरि ग्यान प्रबोध उठियो चलि ग्वारनि पास अयो ॥

teh ko kar kai har gayaan prabodh uThiyo chal gavaiaaran paas ayo ||

ਤੁਮਰੋ ਉਨ ਦੁਖ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਪੈ ਸੁਨਿ ਉਤਰ ਮੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਦਯੋ ॥

तुमरो उन दुख कहियो हम पै सुनि उतर मै इह भाति दयो ॥

tumaro un dhukh kahiyo ham pai sun utar mai ieh bhaat dhayo ||

ਬਲਿ ਸ੍ਯਾਮਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸਦਾ ਜਪੀਯੋ ਸੁਨਿ ਨਾਮਹਿ ਪ੍ਰੇਮ ਘਨੋ ਬਢਯੋ ॥੯੫੮॥

बलि स्यामहि स्याम सदा जपीयो सुनि नामहि प्रेम घनो बढयो ॥९५८॥

bal sayaameh sayaam sadhaa japeeyo sun naameh prem ghano baddayo ||958||


ਊਧਵ ਸੰਦੇਸ ਬਾਚ ॥

ऊधव संदेस बाच ॥

uoodhav sa(n)dhes baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਮੋ ਸੰਗ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਓਰ ਤੇ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਪਾਇਨ ਪਈਯੈ ॥

ग्वारनि मो संग ऐसे कहियो हम ओर ते स्याम के पाइन पईयै ॥

gavaiaaran mo sa(n)g aaise kahiyo ham or te sayaam ke pain pieeyai ||

ਯੌ ਕਹੀਯੋ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਕੋ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸਿਨ ਕੋ ਸੁਖੁ ਦਈਯੈ ॥

यौ कहीयो पुर बासिन को तजि कै बृज बासिन को सुखु दईयै ॥

yau kaheeyo pur baasin ko taj kai biraj baasin ko sukh dhieeyai ||

ਜਸੁਧਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਰੀ ਬਿਨਤੀ ਬਿਨਤੀ ਕਹੀਯੋ ਸੰਗਿ ਪੂਤ ਕਨ੍ਰਹ੍ਰਹਈਯੈ ॥

जसुधा इह भाति करी बिनती बिनती कहीयो संगि पूत कन्रह्रहईयै ॥

jasudhaa ieh bhaat karee binatee binatee kaheeyo sa(n)g poot kanrahrahieeyai ||


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