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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ਬਧ ਕੈ ਧੋਬੀ ਕੌ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕਰਿ ਤਾ ਤ੍ਰੀਯ ਕੋ ਕਾਮ ॥

बध कै धोबी कौ कृसन करि ता त्रीय को काम ॥

badh kai dhobee kau kirasan kar taa treey ko kaam ||

ਰਥ ਧਵਾਇ ਤਬ ਹੀ ਚਲੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਸਾਮੁਹਿ ਧਾਮ ॥੮੨੫॥

रथ धवाइ तब ही चले नृप के सामुहि धाम ॥८२५॥

rath dhavai tab hee chale nirap ke saamuh dhaam ||825||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਗੇ ਤੇ ਸ੍ਯਾਮ ਮਿਲਿਯੋ ਬਾਗਵਾਨ ਸੁ ਹਾਰ ਗਰੇ ਹਰਿ ਕੇ ਤਿਨਿ ਡਾਰਿਯੋ ॥

आगे ते स्याम मिलियो बागवान सु हार गरे हरि के तिनि डारियो ॥

aage te sayaam miliyo baagavaan su haar gare har ke tin ddaariyo ||

ਪਾਇ ਪਰਿਯੋ ਹਰਿ ਕੇ ਬਹੁ ਬਾਰਨ ਭੋਜਨ ਧਾਮ ਲਿਜਾਇ ਜਿਵਾਰਿਯੋ ॥

पाइ परियो हरि के बहु बारन भोजन धाम लिजाइ जिवारियो ॥

pai pariyo har ke bahu baaran bhojan dhaam lijai jivaariyo ||

ਤਾ ਕੋ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਕੈ ਮਾਗਤ ਭਯੋ ਬਰੁ ਸਾਧ ਕੀ ਸੰਗਤਿ ਕੋ ਜੀਯ ਧਾਰਿਯੋ ॥

ता को प्रसंनि कै मागत भयो बरु साध की संगति को जीय धारियो ॥

taa ko prasa(n)n kai maagat bhayo bar saadh kee sa(n)gat ko jeey dhaariyo ||

ਜਾਨ ਲਈ ਜੀਯ ਕੀ ਘਨ ਸ੍ਯਾਮ ਤਬੈ ਬਰੁ ਵਾ ਉਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥੮੨੬॥

जान लई जीय की घन स्याम तबै बरु वा उह भाति उचारियो ॥८२६॥

jaan liee jeey kee ghan sayaam tabai bar vaa uh bhaat uchaariyo ||826||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਰੁ ਜਬ ਮਾਲੀ ਕਉ ਦਯੋ ਰੀਝਿ ਮਨੈ ਘਨ ਸ੍ਯਾਮ ॥

बरु जब माली कउ दयो रीझि मनै घन स्याम ॥

bar jab maalee kau dhayo reejh manai ghan sayaam ||

ਫਿਰਿ ਪੁਰ ਹਾਟਨ ਪੈ ਗਏ ਕਰਨ ਕੂਬਰੀ ਕਾਮ ॥੮੨੭॥

फिरि पुर हाटन पै गए करन कूबरी काम ॥८२७॥

fir pur haaTan pai ge karan koobaree kaam ||827||


ਇਤਿ ਬਾਗਵਾਨ ਕੋ ਉਧਾਰ ਕੀਆ ॥

इति बागवान को उधार कीआ ॥

eit baagavaan ko udhaar keeaa ||

ਅਥ ਕੁਬਜਾ ਕੋ ਉਧਾਰ ਕਰਨੰ ॥

अथ कुबजा को उधार करनं ॥

ath kubajaa ko udhaar karana(n) ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹਰਿ ਆਵਤ ਅਗ੍ਰ ਮਿਲੀ ਕੁਬਿਜਾ ਹਰਿ ਕੋ ਤਿਨਿ ਸੁੰਦਰ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰਿਯੋ ॥

हरि आवत अग्र मिली कुबिजा हरि को तिनि सुँदर रूप निहारियो ॥

har aavat agr milee kubijaa har ko tin su(n)dhar roop nihaariyo ||

ਗੰਧ ਲਏ ਨ੍ਰਿਪ ਲਾਵਨ ਕੋ ਸੁ ਲਗਾਊ ਹਉ ਯਾ ਮਨ ਬੀਚ ਬਿਚਾਰਿਯੋ ॥

गंध लए नृप लावन को सु लगाऊ हउ या मन बीच बिचारियो ॥

ga(n)dh le nirap laavan ko su lagaauoo hau yaa man beech bichaariyo ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਲਖੀ ਹਰਿ ਸੰਗ ਲਗੀ ਹਮਰੇ ਤਬ ਹੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

प्रीति लखी हरि संग लगी हमरे तब ही इह भाति उचारियो ॥

preet lakhee har sa(n)g lagee hamare tab hee ieh bhaat uchaariyo ||

ਲ੍ਯਾਵਹੁ ਲਾਵਹੁ ਰੀ ਹਮ ਕੋ ਕਬਿ ਨੈ ਜਸੁ ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਇਮ ਸਾਰਿਯੋ ॥੮੨੮॥

ल्यावहु लावहु री हम को कबि नै जसु ता छबि को इम सारियो ॥८२८॥

layaavahu laavahu ree ham ko kab nai jas taa chhab ko im saariyo ||828||


ਜਦੁਰਾਇ ਕੋ ਆਇਸੁ ਮਾਨ ਤ੍ਰੀਯਾ ਨ੍ਰਿਪ ਕੋ ਇਹ ਚੰਦਨ ਦੇਹ ਲਗਾਯੋ ॥

जदुराइ को आइसु मान त्रीया नृप को इह चंदन देह लगायो ॥

jadhurai ko aais maan treeyaa nirap ko ieh cha(n)dhan dheh lagaayo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੋ ਰੂਪੁ ਨਿਹਾਰਤ ਹੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਨੈ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥

स्याम को रूपु निहारत ही कबि स्याम मनै अति ही सुखु पायो ॥

sayaam ko roop nihaarat hee kab sayaam manai at hee sukh paayo ||

ਜਾ ਕੋ ਨ ਅੰਤ ਲਖਿਯੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਕਰਿ ਕੈ ਮਨਿ ਪ੍ਰੇਮ ਕਈ ਦਿਨ ਗਾਯੋ ॥

जा को न अंत लखियो ब्रहमा करि कै मनि प्रेम कई दिन गायो ॥

jaa ko na a(n)t lakhiyo brahamaa kar kai man prem kiee dhin gaayo ||

ਭਾਗ ਬਡੋ ਇਹ ਮਾਲਿਨ ਕੇ ਹਰਿ ਕੇ ਤਨ ਕੋ ਜਿਨਿ ਹਾਥ ਛੁਹਾਯੋ ॥੮੨੯॥

भाग बडो इह मालिन के हरि के तन को जिनि हाथ छुहायो ॥८२९॥

bhaag baddo ieh maalin ke har ke tan ko jin haath chhuhaayo ||829||


ਹਰਿ ਏਕ ਧਰਿਯੋ ਪਗ ਪਾਇਨ ਪੈ ਅਰੁ ਹਾਥ ਸੋ ਹਾਥ ਗਹਿਯੋ ਕੁਬਜਾ ਕੋ ॥

हरि एक धरियो पग पाइन पै अरु हाथ सो हाथ गहियो कुबजा को ॥

har ek dhariyo pag pain pai ar haath so haath gahiyo kubajaa ko ||

ਸੀਧੀ ਕਰੀ ਕੁਬਰੀ ਤੇ ਸੋਊ ਇਤਨੋ ਬਲੁ ਹੈ ਜਗ ਮੈ ਕਹੁ ਕਾ ਕੋ ॥

सीधी करी कुबरी ते सोऊ इतनो बलु है जग मै कहु का को ॥

seedhee karee kubaree te souoo itano bal hai jag mai kahu kaa ko ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਯੋ ਬਕ ਬੀਰ ਅਬੈ ਕਰਿ ਹੈ ਬਧ ਸੋ ਪਤਿ ਪੈ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ॥

जाहि मरियो बक बीर अबै करि है बध सो पति पै मथुरा को ॥

jaeh mariyo bak beer abai kar hai badh so pat pai mathuraa ko ||

ਭਾਗ ਬਡੇ ਇਹ ਕੇ ਜਿਹ ਕੋ ਉਪਚਾਰ ਕਰਿਯੋ ਹਰਿ ਬੈਦ ਹ੍ਵੈ ਤਾ ਕੋ ॥੮੩੦॥

भाग बडे इह के जिह को उपचार करियो हरि बैद ह्वै ता को ॥८३०॥

bhaag badde ieh ke jeh ko upachaar kariyo har baidh havai taa ko ||830||


ਪ੍ਰਤਿ ਉਤਰ ਬਾਚ ॥

प्रति उतर बाच ॥

prat utar baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪ੍ਰਭ ਧਾਮਿ ਅਬੈ ਚਲੀਯੈ ਹਮਰੇ ਇਹ ਭਾਤ ਕਹਿਯੋ ਕੁਬਜਾ ਹਰਿ ਸੋ ॥

प्रभ धामि अबै चलीयै हमरे इह भात कहियो कुबजा हरि सो ॥

prabh dhaam abai chaleeyai hamare ieh bhaat kahiyo kubajaa har so ||

ਅਤਿ ਹੀ ਮੁਖੁ ਦੇਖ ਕੈ ਰੀਝ ਰਹੀ ਸੁ ਕਹਿਯੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਬਿਨ ਹੀ ਡਰ ਸੋ ॥

अति ही मुखु देख कै रीझ रही सु कहियो नृप के बिन ही डर सो ॥

at hee mukh dhekh kai reejh rahee su kahiyo nirap ke bin hee ddar so ||

ਹਰਿ ਜਾਨ੍ਯੋ ਕਿ ਮੋ ਮੈ ਰਹੀ ਬਸ ਹ੍ਵੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਤਿਹ ਸੋ ਛਰ ਸੋ ॥

हरि जान्यो कि मो मै रही बस ह्वै इह भाति कहियो तिह सो छर सो ॥

har jaanayo k mo mai rahee bas havai ieh bhaat kahiyo teh so chhar so ||

ਕਰਿਹੌ ਤੁਮਰੋ ਸੁ ਮਨੋਰਥ ਪੂਰਨ ਕੰਸ ਕੋ ਕੈ ਬਧ ਹਉ ਬਰ ਸੋ ॥੮੩੧॥

करिहौ तुमरो सु मनोरथ पूरन कंस को कै बध हउ बर सो ॥८३१॥

karihau tumaro su manorath pooran ka(n)s ko kai badh hau bar so ||831||


ਕੁਬਜਾ ਕੋ ਸੁਵਾਰ ਕੈ ਕਾਜ ਤਬੈ ਪੁਨਿ ਦੇਖਨ ਕੇ ਰਸ ਮੈ ਅਨੁਰਾਗਿਯੋ ॥

कुबजा को सुवार कै काज तबै पुनि देखन के रस मै अनुरागियो ॥

kubajaa ko suvaar kai kaaj tabai pun dhekhan ke ras mai anuraagiyo ||

ਧਾਇ ਗਯੋ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਧਨੁ ਸੁੰਦਰ ਕੋ ਸੋ ਦੇਖਨ ਲਾਗਿਯੋ ॥

धाइ गयो तिह ठउर बिखै धनु सुँदर को सो देखन लागियो ॥

dhai gayo teh Thaur bikhai dhan su(n)dhar ko so dhekhan laagiyo ||

ਭ੍ਰਿਤਨ ਕੇ ਕਰਤੇ ਸੁ ਮਨੈ ਹਰਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕੁਪਿ ਜਾਗਿਯੋ ॥

भृतन के करते सु मनै हरि के मन मै अति ही कुपि जागियो ॥

bhiratan ke karate su manai har ke man mai at hee kup jaagiyo ||

ਗਾੜੀ ਕਸੀਸ ਦਈ ਧਨ ਕੋ ਦ੍ਰਿੜ ਕੈ ਜਿਹ ਤੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕੋ ਧਨੁ ਭਾਗਿਯੋ ॥੮੩੨॥

गाड़ी कसीस दई धन को दृड़ कै जिह ते नृप को धनु भागियो ॥८३२॥

gaaRee kasees dhiee dhan ko dhiraR kai jeh te nirap ko dhan bhaagiyo ||832||


ਗਾੜੀ ਕਸੀਸ ਦਈ ਕੁਪਿ ਕੈ ਰੁਪਿ ਠਾਢ ਭਯੋ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ॥

गाड़ी कसीस दई कुपि कै रुपि ठाढ भयो तिह ठउर बिखै ॥

gaaRee kasees dhiee kup kai rup Thaadd bhayo teh Thaur bikhai ||

ਬਰ ਸਿੰਘ ਮਨੋ ਦ੍ਰਿਗ ਕਾਢ ਕੈ ਠਾਢੋ ਹੈ ਪੇਖੈ ਜੋਊ ਗਿਰੈ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ॥

बर सिंघ मनो दृग काढ कै ठाढो है पेखै जोऊ गिरै भूमि बिखै ॥

bar si(n)gh mano dhirag kaadd kai Thaaddo hai pekhai jouoo girai bhoom bikhai ||

ਦੇਖਤ ਹੀ ਡਰਪਿਯੋ ਮਘਵਾ ਡਰਪਿਯੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਜੋਊ ਲੇਖ ਲਿਖੈ ॥

देखत ही डरपियो मघवा डरपियो ब्रहमा जोऊ लेख लिखै ॥

dhekhat hee ddarapiyo maghavaa ddarapiyo brahamaa jouoo lekh likhai ||

ਧਨੁ ਕੇ ਟੁਕਰੇ ਸੰਗ ਜੋਧਨ ਮਾਰਤ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁ ਤਿਖੈ ॥੮੩੩॥

धनु के टुकरे संग जोधन मारत स्याम कहै अति ही सु तिखै ॥८३३॥

dhan ke Tukare sa(n)g jodhan maarat sayaam kahai at hee su tikhai ||833||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਧਨੁਖ ਤੇਜ ਮੈ ਬਰਨਿਓ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕਥਾ ਕੇ ਕਾਜ ॥

धनुख तेज मै बरनिओ कृसन कथा के काज ॥

dhanukh tej mai baranio kirasan kathaa ke kaaj ||

ਅਤਿ ਹੀ ਚੂਕ ਮੋ ਤੇ ਭਈ ਛਿਮੀਯੈ ਸੋ ਮਹਾਰਾਜ ॥੮੩੪॥

अति ही चूक मो ते भई छिमीयै सो महाराज ॥८३४॥

at hee chook mo te bhiee chhimeeyai so mahaaraaj ||834||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਧਨੁ ਕੋ ਟੁਕਰਾ ਕਰਿ ਲੈ ਹਰਿ ਜੀ ਬਰ ਬੀਰਨ ਕੋ ਸੋਊ ਮਾਰਨ ਲਾਗਿਯੋ ॥

धनु को टुकरा करि लै हरि जी बर बीरन को सोऊ मारन लागियो ॥

dhan ko Tukaraa kar lai har jee bar beeran ko souoo maaran laagiyo ||

ਧਾਇ ਪਰੇ ਨ੍ਰਿਪ ਬੀਰ ਤਬੈ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕੁਪਿ ਜਾਗਿਯੋ ॥

धाइ परे नृप बीर तबै तिन के मन मै अति ही कुपि जागियो ॥

dhai pare nirap beer tabai tin ke man mai at hee kup jaagiyo ||

ਫੇਰਿ ਲਗਿਯੋ ਤਿਨ ਕੋ ਹਰਿ ਮਾਰਨ ਜੁਧਹ ਕੇ ਰਸ ਮੋ ਅਨੁਰਾਗਿਯੋ ॥

फेरि लगियो तिन को हरि मारन जुधह के रस मो अनुरागियो ॥

fer lagiyo tin ko har maaran judheh ke ras mo anuraagiyo ||

ਸੋਰ ਭਯੋ ਅਤਿ ਠਉਰ ਤਹਾ ਸੁਨ ਕੈ ਜਿਹ ਕੋ ਸਿਵ ਜੂ ਉਠਿ ਭਾਗਿਯੋ ॥੮੩੫॥

सोर भयो अति ठउर तहा सुन कै जिह को सिव जू उठि भागियो ॥८३५॥

sor bhayo at Thaur tahaa sun kai jeh ko siv joo uTh bhaagiyo ||835||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਤੀਨੋ ਲੋਕ ਪਤਿ ਅਤਿ ਜੁਧੁ ਕਰਿ ਕੋਪਿ ਭਰੇ ਤਊਨੇ ਠਉਰ ਜਹਾ ਬਰਬੀਰ ਅਤਿ ਸ੍ਵੈ ਰਹੇ ॥

तीनो लोक पति अति जुधु करि कोपि भरे तऊने ठउर जहा बरबीर अति स्वै रहे ॥

teeno lok pat at judh kar kop bhare tuoone Thaur jahaa barabeer at savai rahe ||

ਐਸੇ ਬੀਰ ਗਿਰੇ ਜੈਸੇ ਬਾਢੀ ਕੇ ਕਟੇ ਤੇ ਰੂਖ ਗਿਰੇ ਬਿਸੰਭਾਰੁ ਅਸਿ ਹਾਥਨ ਨਹੀ ਗਹੇ ॥

ऐसे बीर गिरे जैसे बाढी के कटे ते रूख गिरे बिसंभारु असि हाथन नही गहे ॥

aaise beer gire jaise baaddee ke kaTe te rookh gire bisa(n)bhaar as haathan nahee gahe ||

ਅਤਿ ਹੀ ਤਰੰਗਨੀ ਉਠੀ ਹੈ ਤਹਾ ਜੋਧਨ ਤੈ ਸੀਸ ਸਮ ਬਟੇ ਅਸਿ ਨਕ੍ਰ ਭਾਤਿ ਹ੍ਵੈ ਬਹੇ ॥

अति ही तरंगनी उठी है तहा जोधन तै सीस सम बटे असि नक्र भाति ह्वै बहे ॥

at hee tara(n)ganee uThee hai tahaa jodhan tai sees sam baTe as nakr bhaat havai bahe ||

ਗੋਰੇ ਪੈ ਬਰਦ ਚੜਿ ਆਇ ਥੇ ਬਰਦ ਪਤਿ ਗੋਰੀ ਗਉਰਾ ਗੋਰੇ ਰੁਦ੍ਰ ਰਾਤੇ ਰਾਤੇ ਹ੍ਵੈ ਰਹੇ ॥੮੩੬॥

गोरे पै बरद चड़ि आइ थे बरद पति गोरी गउरा गोरे रुद्र राते राते ह्वै रहे ॥८३६॥

gore pai baradh chaR aai the baradh pat goree gauraa gore rudhr raate raate havai rahe ||836||


ਕ੍ਰੋਧ ਭਰੇ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਲਭਦ੍ਰ ਜੂ ਨੈ ਕੀਨੋ ਰਨ ਭਾਗ ਗਏ ਭਟ ਨ ਸੁਭਟ ਠਾਢ ਕੁਇ ਰਹਿਯੋ ॥

क्रोध भरे कान्रह बलभद्र जू नै कीनो रन भाग गए भट न सुभट ठाढ कुइ रहियो ॥

krodh bhare kaanreh balabhadhr joo nai keeno ran bhaag ge bhaT na subhaT Thaadd kui rahiyo ||

ਐਸੇ ਝੂਮਿ ਪਰੇ ਬੀਰ ਮਾਰੇ ਧਨ ਟੂਕਨ ਕੇ ਮਾਨੋ ਕੰਸ ਰਾਜਾ ਜੂ ਕੋ ਸਾਰੋ ਦਲੁ ਸ੍ਵੈ ਰਹਿਯੋ ॥

ऐसे झूमि परे बीर मारे धन टूकन के मानो कंस राजा जू को सारो दलु स्वै रहियो ॥

aaise jhoom pare beer maare dhan Tookan ke maano ka(n)s raajaa joo ko saaro dhal savai rahiyo ||

ਕੇਤੇ ਉਠਿ ਭਾਗੇ ਕੇਤੇ ਜੁਧ ਹੀ ਕੋ ਫੇਰਿ ਲਾਗੇ ਸੋਊ ਸਮ ਬਨ ਹਰ ਹਰਿ ਤਾਤੋ ਹ੍ਵੈ ਕਹਿਯੋ ॥

केते उठि भागे केते जुध ही को फेरि लागे सोऊ सम बन हर हरि तातो ह्वै कहियो ॥

kete uTh bhaage kete judh hee ko fer laage souoo sam ban har har taato havai kahiyo ||

ਗਜਨ ਕੇ ਸੁੰਡਨ ਤੇ ਐਸੇ ਛੀਟੈ ਛੂਟੀ ਜਾ ਤੇ ਅੰਬਰ ਅਨੂਪ ਲਾਲ ਛੀਟ ਛਬਿ ਹ੍ਵੈ ਰਹਿਯੋ ॥੮੩੭॥

गजन के सुँडन ते ऐसे छीटै छूटी जा ते अंबर अनूप लाल छीट छबि ह्वै रहियो ॥८३७॥

gajan ke su(n)ddan te aaise chheeTai chhooTee jaa te a(n)bar anoop laal chheeT chhab havai rahiyo ||837||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਹਲੀ ਧਨੁ ਟੂਕ ਸੋ ਘਨ ਦਲ ਦਯੋ ਨਿਘਾਇ ॥

कृसन हली धनु टूक सो घन दल दयो निघाइ ॥

kirasan halee dhan Took so ghan dhal dhayo nighai ||

ਤਿਨ ਸੁਨ ਕੈ ਬਧ ਸ੍ਰਉਨਿ ਨ੍ਰਿਪ ਅਉ ਪੁਨਿ ਦਯੋ ਪਠਾਇ ॥੮੩੮॥

तिन सुन कै बध स्रउनि नृप अउ पुनि दयो पठाइ ॥८३८॥

tin sun kai badh sraun nirap aau pun dhayo paThai ||838||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੀਚ ਚਮੂੰ ਧਸਿ ਬੀਰਨ ਕੀ ਧਨ ਟੂਕਨ ਸੋ ਬਹੁ ਬੀਰ ਸੰਘਾਰੇ ॥

बीच चमूँ धसि बीरन की धन टूकन सो बहु बीर संघारे ॥

beech chamoo(n) dhas beeran kee dhan Tookan so bahu beer sa(n)ghaare ||

ਭਾਗਿ ਗਏ ਸੁ ਬਚੇ ਤਿਨ ਤੇ ਜੋਊ ਫੇਰਿ ਲਰੇ ਸੋਊ ਫੇਰਿ ਹੀ ਮਾਰੇ ॥

भागि गए सु बचे तिन ते जोऊ फेरि लरे सोऊ फेरि ही मारे ॥

bhaag ge su bache tin te jouoo fer lare souoo fer hee maare ||

ਜੂਝਿ ਪਰੀ ਚਤੁਰੰਗ ਚਮੂੰ ਤਹ ਸ੍ਰਉਨਤ ਕੈ ਸੁ ਚਲੇ ਪਰਨਾਰੇ ॥

जूझि परी चतुरंग चमूँ तह स्रउनत कै सु चले परनारे ॥

joojh paree chatura(n)g chamoo(n) teh sraunat kai su chale paranaare ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਜੀਯ ਮੈ ਰਨ ਭੂਮਿ ਮਨੋ ਤਨ ਭੂਖਨ ਧਾਰੇ ॥੮੩੯॥

यौ उपजी उपमा जीय मै रन भूमि मनो तन भूखन धारे ॥८३९॥

yau upajee upamaa jeey mai ran bhoom mano tan bhookhan dhaare ||839||


ਜੁਧ ਕਰਿਯੋ ਅਤਿ ਕੋਪ ਦੁਹੂੰ ਰਿਪੁ ਬੀਰ ਕੇ ਬੀਰ ਘਨੇ ਹਨਿ ਦੀਨੇ ॥

जुध करियो अति कोप दुहूँ रिपु बीर के बीर घने हनि दीने ॥

judh kariyo at kop dhuhoo(n) rip beer ke beer ghane han dheene ||

ਹਾਨਿ ਬਿਖੈ ਜੋਊ ਜ੍ਵਾਨ ਹੁਤੇ ਸਜਿ ਆਏ ਹੁਤੇ ਜੋਊ ਸਾਜ ਨਵੀਨੇ ॥

हानि बिखै जोऊ ज्वान हुते सजि आए हुते जोऊ साज नवीने ॥

haan bikhai jouoo javaiaan hute saj aae hute jouoo saaj naveene ||

ਸੋ ਝਟਿ ਭੂਮਿ ਗਿਰੇ ਰਨ ਕੀ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਚੀਨੇ ॥

सो झटि भूमि गिरे रन की तिह ठउर बिखै अति सुँदर चीने ॥

so jhaT bhoom gire ran kee teh Thaur bikhai at su(n)dhar cheene ||

ਯੌ ਉਪਮਾ ਉਪਜੀ ਜੀਯ ਮੈ ਰਨ ਭੂਮੀ ਕੋ ਮਾਨਹੁ ਭੂਖਨ ਦੀਨੇ ॥੮੪੦॥

यौ उपमा उपजी जीय मै रन भूमी को मानहु भूखन दीने ॥८४०॥

yau upamaa upajee jeey mai ran bhoomee ko maanahu bhookhan dheene ||840||


ਧਨੁ ਟੂਕਨ ਸੋ ਰਿਪੁ ਮਾਰਿ ਘਨੇ ਚਲ ਕੈ ਸੋਊ ਨੰਦ ਬਬਾ ਪਹਿ ਆਏ ॥

धनु टूकन सो रिपु मारि घने चल कै सोऊ नंद बबा पहि आए ॥

dhan Tookan so rip maar ghane chal kai souoo na(n)dh babaa peh aae ||

ਆਵਤ ਹੀ ਸਭ ਪਾਇ ਲਗੇ ਅਤਿ ਆਨੰਦ ਸੋ ਤਿਹ ਕੰਠਿ ਲਗਾਏ ॥

आवत ही सभ पाइ लगे अति आनंद सो तिह कंठि लगाए ॥

aavat hee sabh pai lage at aana(n)dh so teh ka(n)Th lagaae ||

ਗੇ ਥੇ ਕਹਾ ਪੁਰ ਦੇਖਨ ਕੋ ਬਚਨਾ ਉਨ ਪੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੁਨਾਏ ॥

गे थे कहा पुर देखन को बचना उन पै इह भाति सुनाए ॥

ge the kahaa pur dhekhan ko bachanaa un pai ieh bhaat sunaae ||

ਰੈਨ ਪਰੀ ਗ੍ਰਿਹ ਸੋਇ ਰਹੇ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਆਨੰਦ ਪਾਏ ॥੮੪੧॥

रैन परी गृह सोइ रहे अति ही मन भीतर आनंद पाए ॥८४१॥

rain paree gireh soi rahe at hee man bheetar aana(n)dh paae ||841||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸੁਪਨ ਪਿਖਾ ਇਕ ਕੰਸ ਨੇ ਅਤੈ ਭਯਾਨਕ ਰੂਪ ॥

सुपन पिखा इक कंस ने अतै भयानक रूप ॥

supan pikhaa ik ka(n)s ne atai bhayaanak roop ||

ਅਤਿ ਬਿਆਕੁਲ ਜੀਯ ਹੋਇ ਕੈ ਭ੍ਰਿਤ ਬੁਲਾਏ ਭੂਪਿ ॥੮੪੨॥

अति बिआकुल जीय होइ कै भृत बुलाए भूपि ॥८४२॥

at biaakul jeey hoi kai bhirat bulaae bhoop ||842||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਭ੍ਰਿਤਨ ਸੋ ॥

कंस बाच भृतन सो ॥

ka(n)s baach bhiratan so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਭ੍ਰਿਤ ਬੁਲਾਇ ਕੈ ਰਾਜੇ ਕਹੀ ਇਕ ਖੇਲਨ ਕੋ ਰੰਗ ਭੂਮਿ ਬਨਾਵਹੁ ॥

भृत बुलाइ कै राजे कही इक खेलन को रंग भूमि बनावहु ॥

bhirat bulai kai raaje kahee ik khelan ko ra(n)g bhoom banaavahu ||

ਗੋਪਨ ਕੋ ਇਕਠਾ ਰਖੀਏ ਹਮਰੇ ਸਬ ਹੀ ਦਲ ਕੋ ਸੁ ਬੁਲਾਵਹੁ ॥

गोपन को इकठा रखीए हमरे सब ही दल को सु बुलावहु ॥

gopan ko ikaThaa rakhe'ee hamare sab hee dhal ko su bulaavahu ||

ਕਾਰਜ ਸੀਘ੍ਰ ਕਰੋ ਸੁ ਇਹੈ ਹਮਰੇ ਇਕ ਪੈ ਗਨ ਕਉ ਤਿਸਿਟਾਵਹੁ ॥

कारज सीघ्र करो सु इहै हमरे इक पै गन कउ तिसिटावहु ॥

kaaraj seeghr karo su ihai hamare ik pai gan kau tisiTaavahu ||

ਖੇਲ ਬਿਖੈ ਤੁਮ ਮਲਨ ਠਾਢਿ ਕੈ ਆਪ ਸਬੈ ਕਸਿ ਕੈ ਕਟਿ ਆਵਹੁ ॥੮੪੩॥

खेल बिखै तुम मलन ठाढि कै आप सबै कसि कै कटि आवहु ॥८४३॥

khel bikhai tum malan Thaadd kai aap sabai kas kai kaT aavahu ||843||


ਭ੍ਰਿਤ ਸਭੈ ਨ੍ਰਿਪ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨ ਕੈ ਉਠ ਕੈ ਸੋਊ ਕਾਰਜ ਕੀਨੋ ॥

भृत सभै नृप की बतीया सुन कै उठ कै सोऊ कारज कीनो ॥

bhirat sabhai nirap kee bateeyaa sun kai uTh kai souoo kaaraj keeno ||

ਠਾਢਿ ਕੀਯੋ ਗਜ ਪਉਰ ਬਿਖੈ ਸੁ ਰਚਿਯੋ ਰੰਗ ਭੂਮਿ ਕੋ ਠਉਰ ਨਵੀਨੋ ॥

ठाढि कीयो गज पउर बिखै सु रचियो रंग भूमि को ठउर नवीनो ॥

Thaadd keeyo gaj paur bikhai su rachiyo ra(n)g bhoom ko Thaur naveeno ||

ਮਲ ਜਹਾ ਰਿਪੁ ਬੀਰ ਘਨੇ ਪਿਖਿਏ ਰਿਪੁ ਆਵਤ ਜਾਹਿ ਪਸੀਨੋ ॥

मल जहा रिपु बीर घने पिखिए रिपु आवत जाहि पसीनो ॥

mal jahaa rip beer ghane pikhie rip aavat jaeh paseeno ||

ਐਸੀ ਬਨਾਇ ਕੈ ਠਉਰ ਸੋਊ ਹਰਿ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮਾਨਸ ਭੇਜਿ ਸੁ ਦੀਨੋ ॥੮੪੪॥

ऐसी बनाइ कै ठउर सोऊ हरि के गृह मानस भेजि सु दीनो ॥८४४॥

aaisee banai kai Thaur souoo har ke gireh maanas bhej su dheeno ||844||


ਨ੍ਰਿਪ ਸੇਵਕ ਲੈ ਇਨ ਸੰਗ ਚਲਿਯੋ ਚਲਿ ਕੈ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਕੇ ਪਉਰ ਪੈ ਆਯੋ ॥

नृप सेवक लै इन संग चलियो चलि कै नृप कंस के पउर पै आयो ॥

nirap sevak lai in sa(n)g chaliyo chal kai nirap ka(n)s ke paur pai aayo ||

ਐ ਕੈ ਕਹਿਯੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੋ ਘਰੁ ਹੈ ਤਿਹ ਤੇ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥

ऐ कै कहियो नृप को घरु है तिह ते सभ ग्वारन सीस झुकायो ॥

aai kai kahiyo nirap ko ghar hai teh te sabh gavaiaaran sees jhukaayo ||

ਆਗੇ ਪਿਖਿਯੋ ਗਜ ਮਤ ਮਹਾ ਕਹਿਯੋ ਦੂਰ ਕਰੋ ਗਜਵਾਨ ਰਿਸਾਯੋ ॥

आगे पिखियो गज मत महा कहियो दूर करो गजवान रिसायो ॥

aage pikhiyo gaj mat mahaa kahiyo dhoor karo gajavaan risaayo ||

ਧਾਇ ਪਰਿਯੋ ਹਰਿ ਊਪਰਿ ਯੌ ਮਨੋ ਪੁਨ ਕੇ ਊਪਰਿ ਪਾਪ ਸਿਧਾਯੋ ॥੮੪੫॥

धाइ परियो हरि ऊपरि यौ मनो पुन के ऊपरि पाप सिधायो ॥८४५॥

dhai pariyo har uoopar yau mano pun ke uoopar paap sidhaayo ||845||


ਕੋਪ ਭਰੇ ਗਜ ਮਤ ਮਹਾ ਭਰ ਸੁੰਡਿ ਲਏ ਭਟ ਸੁੰਦਰ ਦੋਊ ॥

कोप भरे गज मत महा भर सुँडि लए भट सुँदर दोऊ ॥

kop bhare gaj mat mahaa bhar su(n)dd le bhaT su(n)dhar dhouoo ||

ਸੋ ਤਬ ਹੀ ਘਨ ਸੋ ਗਰਜਿਯੋ ਜਿਹ ਕੀ ਸਮ ਉਪਮ ਅਉਰ ਨ ਕੋਊ ॥

सो तब ही घन सो गरजियो जिह की सम उपम अउर न कोऊ ॥

so tab hee ghan so garajiyo jeh kee sam upam aaur na kouoo ||

ਪੇਟ ਤਰੇ ਤਿਹ ਕੇ ਪਸਰੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬਧੀਯਾ ਅਰਿ ਜੋਊ ॥

पेट तरे तिह के पसरे कबि स्याम कहै बधीया अरि जोऊ ॥

peT tare teh ke pasare kab sayaam kahai badheeyaa ar jouoo ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਜੀਯ ਮੈ ਅਪਨੇ ਰਿਪੁ ਸੋ ਮਨੋ ਖੇਲਤ ਦੋਊ ॥੮੪੬॥

यौ उपजी उपमा जीय मै अपने रिपु सो मनो खेलत दोऊ ॥८४६॥

yau upajee upamaa jeey mai apane rip so mano khelat dhouoo ||846||


ਤਬ ਕੋਪੁ ਕਰਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਹਰਿ ਜੂ ਤਿਹ ਕੋ ਤਬ ਦਾਤ ਉਖਾਰਿ ਲਯੋ ਹੈ ॥

तब कोपु करियो मन मै हरि जू तिह को तब दात उखारि लयो है ॥

tab kop kariyo man mai har joo teh ko tab dhaat ukhaar layo hai ||

ਏਕ ਦਈ ਗਜ ਸੂੰਡ ਬਿਖੈ ਕੁਪਿ ਦੂਸਰ ਸੀਸ ਕੇ ਬੀਚ ਦਯੋ ਹੈ ॥

एक दई गज सूँड बिखै कुपि दूसर सीस के बीच दयो है ॥

ek dhiee gaj soo(n)dd bikhai kup dhoosar sees ke beech dhayo hai ||

ਚੋਟ ਲਗੀ ਸਿਰ ਬੀਚ ਘਨੀ ਧਰਨੀ ਪਰ ਸੋ ਮੁਰਝਾਇ ਪਯੋ ਹੈ ॥

चोट लगी सिर बीच घनी धरनी पर सो मुरझाइ पयो है ॥

choT lagee sir beech ghanee dharanee par so murajhai payo hai ||

ਸੋ ਮਰਿ ਗਯੋ ਰਿਪੁ ਕੇ ਬਧ ਕੋ ਮਥੁਰਾ ਹੂੰ ਕੋ ਆਗਮ ਆਜ ਭਯੋ ਹੈ ॥੮੪੭॥

सो मरि गयो रिपु के बध को मथुरा हूँ को आगम आज भयो है ॥८४७॥

so mar gayo rip ke badh ko mathuraa hoo(n) ko aagam aaj bhayo hai ||847||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਗਜ ਬਧਹਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री दसम सिकंधे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे गज बधहि धयाइ समापतम ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare gaj badheh dhayai samaapatam ||


ਅਥ ਚੰਡੂਰ ਮੁਸਟ ਜੁਧ ॥

अथ चंडूर मुसट जुध ॥

ath cha(n)ddoor musaT judh ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੰਧਿ ਧਰਿਯੋ ਗਜ ਦਾਤ ਉਖਾਰ ਕੈ ਬੀਚ ਗਏ ਰੰਗ ਭੂਮਿ ਕੇ ਦੋਊ ॥

कंधि धरियो गज दात उखार कै बीच गए रंग भूमि के दोऊ ॥

ka(n)dh dhariyo gaj dhaat ukhaar kai beech ge ra(n)g bhoom ke dhouoo ||

ਬੀਰਨ ਬੀਰ ਬਡੋ ਈ ਪਿਖਿਯੋ ਬਲਵਾਨ ਲਖਿਯੋ ਇਨ ਮਲਨ ਸੋਊ ॥

बीरन बीर बडो ई पिखियो बलवान लखियो इन मलन सोऊ ॥

beeran beer baddo iee pikhiyo balavaan lakhiyo in malan souoo ||

ਸਾਧਨ ਦੇਖਿ ਲਖਿਯੋ ਕਰਤਾ ਜਗ ਯਾ ਸਮ ਦੂਸਰ ਅਉਰ ਨ ਕੋਊ ॥

साधन देखि लखियो करता जग या सम दूसर अउर न कोऊ ॥

saadhan dhekh lakhiyo karataa jag yaa sam dhoosar aaur na kouoo ||

ਤਾਤ ਲਖਿਯੋ ਕਰ ਕੈ ਲਰਕਾ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਲਖਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਘਰਿ ਖੋਊ ॥੮੪੮॥

तात लखियो कर कै लरका नृप कंस लखियो मन मै घरि खोऊ ॥८४८॥

taat lakhiyo kar kai larakaa nirap ka(n)s lakhiyo man mai ghar khouoo ||848||


ਤਉ ਨ੍ਰਿਪ ਬੈਠਿ ਸਭਾ ਹੂੰ ਕੇ ਭੀਤਰ ਮਲਨ ਸੋ ਜਦੁਰਾਇ ਲਰਾਯੋ ॥

तउ नृप बैठि सभा हूँ के भीतर मलन सो जदुराइ लरायो ॥

tau nirap baiTh sabhaa hoo(n) ke bheetar malan so jadhurai laraayo ||

ਮੁਸਟ ਕੇ ਸਾਥ ਲਰਿਯੋ ਮੁਸਲੀ ਸੁ ਚੰਡੂਰ ਸੋ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਜੁਧੁ ਮਚਾਯੋ ॥

मुसट के साथ लरियो मुसली सु चंडूर सो स्याम जू जुधु मचायो ॥

musaT ke saath lariyo musalee su cha(n)ddoor so sayaam joo judh machaayo ||

ਭੂਮਿ ਪਰੇ ਰਨ ਕੀ ਗਿਰ ਸੋ ਹਰ ਜੂ ਮਨ ਭੀਤਰ ਕੋਪੁ ਬਢਾਯੋ ॥

भूमि परे रन की गिर सो हर जू मन भीतर कोपु बढायो ॥

bhoom pare ran kee gir so har joo man bheetar kop baddaayo ||

ਏਕ ਲਗੀ ਨ ਤਹਾ ਘਟਿਕਾ ਧਰਨੀ ਪਰ ਤਾ ਕਹੁ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਯੋ ॥੮੪੯॥

एक लगी न तहा घटिका धरनी पर ता कहु मारि गिरायो ॥८४९॥

ek lagee na tahaa ghaTikaa dharanee par taa kahu maar giraayo ||849||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਚੰਡੂਰ ਮੁਸਟ ਮਲ ਬਧਹਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री दसम सिकंधे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे चंडूर मुसट मल बधहि धयाइ समापतम ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare cha(n)ddoor musaT mal badheh dhayai samaapatam ||


ਅਥ ਕੰਸ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ कंस बध कथनं ॥

ath ka(n)s badh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਰਿ ਲਏ ਰਿਪੁ ਬੀਰ ਦੋਊ ਨ੍ਰਿਪ ਤਉ ਮਨ ਭੀਤਰਿ ਕ੍ਰੋਧ ਭਰਿਯੋ ॥

मारि लए रिपु बीर दोऊ नृप तउ मन भीतरि क्रोध भरियो ॥

maar le rip beer dhouoo nirap tau man bheetar krodh bhariyo ||

ਇਨ ਕੋ ਭਟ ਮਾਰਹੁ ਖੇਤ ਅਬੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਅਰੁ ਸੋਰ ਕਰਿਯੋ ॥

इन को भट मारहु खेत अबै इह भाति कहियो अरु सोर करियो ॥

ein ko bhaT maarahu khet abai ieh bhaat kahiyo ar sor kariyo ||

ਜਦੁਰਾਇ ਭਰਥੂ ਤਬ ਪਾਨ ਲਗੋ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਨਹੀ ਨੈਕੁ ਡਰਿਯੋ ॥

जदुराइ भरथू तब पान लगो अपने मन मै नही नैकु डरियो ॥

jadhurai bharathoo tab paan lago apane man mai nahee naik ddariyo ||

ਜੋਊ ਆਇ ਪਰਿਯੋ ਹਰ ਪੈ ਕੁਪਿ ਕੈ ਹਰਿ ਥਾ ਪਰ ਸੋ ਸੋਊ ਮਾਰਿ ਡਰਿਯੋ ॥੮੫੦॥

जोऊ आइ परियो हर पै कुपि कै हरि था पर सो सोऊ मारि डरियो ॥८५०॥

jouoo aai pariyo har pai kup kai har thaa par so souoo maar ddariyo ||850||


ਹਰਿ ਕੂਦਿ ਤਬੈ ਰੰਗ ਭੂਮਹਿ ਤੇ ਨ੍ਰਿਪ ਥੋ ਸੁ ਜਹਾ ਤਹ ਹੀ ਪਗੁ ਧਾਰਿਯੋ ॥

हरि कूदि तबै रंग भूमहि ते नृप थो सु जहा तह ही पगु धारियो ॥

har koodh tabai ra(n)g bhoomeh te nirap tho su jahaa teh hee pag dhaariyo ||

ਕੰਸ ਲਈ ਕਰਿ ਢਾਲਿ ਸੰਭਾਰ ਕੈ ਕੋਪ ਭਰਿਯੋ ਅਸਿ ਖੈਚ ਨਿਕਾਰਿਯੋ ॥

कंस लई करि ढालि संभार कै कोप भरियो असि खैच निकारियो ॥

ka(n)s liee kar ddaal sa(n)bhaar kai kop bhariyo as khaich nikaariyo ||

ਦਉਰਿ ਦਈ ਤਿਹ ਕੇ ਤਨ ਪੈ ਹਰਿ ਫਾਧਿ ਗਏ ਅਤਿ ਦਾਵ ਸੰਭਾਰਿਯੋ ॥

दउरि दई तिह के तन पै हरि फाधि गए अति दाव संभारियो ॥

dhaur dhiee teh ke tan pai har faadh ge at dhaav sa(n)bhaariyo ||

ਕੇਸਨ ਤੇ ਗਹਿ ਕੈ ਰਿਪੁ ਕੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਕੈ ਬਲ ਤਾਹਿੰ ਪਛਾਰਿਯੋ ॥੮੫੧॥

केसन ते गहि कै रिपु को धरनी पर कै बल ताहिं पछारियो ॥८५१॥

kesan te geh kai rip ko dharanee par kai bal taahi(n) pachhaariyo ||851||


ਗਹਿ ਕੇਸਨ ਤੇ ਪਟਕਿਯੋ ਧਰ ਸੋ ਗਹ ਗੋਡਨ ਤੇ ਤਬ ਘੀਸ ਦਯੋ ॥

गहि केसन ते पटकियो धर सो गह गोडन ते तब घीस दयो ॥

geh kesan te paTakiyo dhar so geh goddan te tab ghees dhayo ||

ਨ੍ਰਿਪ ਮਾਰਿ ਹੁਲਾਸ ਬਢਿਯੋ ਜੀਯ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਪੁਰ ਭੀਤਰ ਸੋਰ ਪਯੋ ॥

नृप मारि हुलास बढियो जीय मै अति ही पुर भीतर सोर पयो ॥

nirap maar hulaas baddiyo jeey mai at hee pur bheetar sor payo ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਪ੍ਰਤਾਪ ਪਿਖੋ ਹਰਿ ਕੋ ਜਿਨਿ ਸਾਧਨ ਰਾਖ ਕੈ ਸਤ੍ਰ ਛਯੋ ॥

कबि स्याम प्रताप पिखो हरि को जिनि साधन राख कै सत्र छयो ॥

kab sayaam prataap pikho har ko jin saadhan raakh kai satr chhayo ||

ਕਟਿ ਬੰਧਨ ਤਾਤ ਦਏ ਮਨ ਕੇ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਮੈ ਜਸ ਵਾਹਿ ਲਯੋ ॥੮੫੨॥

कटि बंधन तात दए मन के सभ ही जग मै जस वाहि लयो ॥८५२॥

kaT ba(n)dhan taat dhe man ke sabh hee jag mai jas vaeh layo ||852||


ਰਿਪੁ ਕੋ ਬਧ ਕੈ ਤਬ ਹੀ ਹਰਿ ਜੂ ਬਿਸਰਾਤ ਕੇ ਘਾਟ ਕੈ ਊਪਰਿ ਆਯੋ ॥

रिपु को बध कै तब ही हरि जू बिसरात के घाट कै ऊपरि आयो ॥

rip ko badh kai tab hee har joo bisaraat ke ghaaT kai uoopar aayo ||

ਕੰਸ ਕੇ ਬੀਰ ਬਲੀ ਜੁ ਹੁਤੇ ਤਿਨ ਦੇਖਤ ਸ੍ਯਾਮ ਕੋ ਕੋਪੁ ਬਢਾਯੋ ॥

कंस के बीर बली जु हुते तिन देखत स्याम को कोपु बढायो ॥

ka(n)s ke beer balee ju hute tin dhekhat sayaam ko kop baddaayo ||

ਸੋ ਨ ਗਯੋ ਤਿਨ ਪਾਸ ਛਮਿਯੋ ਹਰਿ ਕੇ ਸੰਗਿ ਆਇ ਕੈ ਜੁਧ ਮਚਾਯੋ ॥

सो न गयो तिन पास छमियो हरि के संगि आइ कै जुध मचायो ॥

so na gayo tin paas chhamiyo har ke sa(n)g aai kai judh machaayo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਸੰਭਾਰਿ ਤਬੈ ਬਲ ਕੋ ਤਿਨ ਕੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਯੋ ॥੮੫੩॥

स्याम संभारि तबै बल को तिन को धरनी पर मारि गिरायो ॥८५३॥

sayaam sa(n)bhaar tabai bal ko tin ko dharanee par maar giraayo ||853||


ਗਜ ਸੋ ਅਤਿ ਹੀ ਕੁਪਿ ਜੁਧ ਕਰਿਯੋ ਤਿਹ ਤੇ ਡਰਿ ਕੈ ਨਹੀ ਪੈਗ ਟਰੇ ॥

गज सो अति ही कुपि जुध करियो तिह ते डरि कै नही पैग टरे ॥

gaj so at hee kup judh kariyo teh te ddar kai nahee paig Tare ||

ਦੋਊ ਮਲ ਮਰੇ ਰੰਗਿ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਤਹਾ ਪਹਰੇ ਕੁ ਲਰੇ ॥

दोऊ मल मरे रंगि भूमि बिखै कबि स्याम तहा पहरे कु लरे ॥

dhouoo mal mare ra(n)g bhoom bikhai kab sayaam tahaa pahare k lare ||

ਨ੍ਰਿਪ ਰਾਜ ਕੋ ਮਾਰ ਗਏ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਬੀਰ ਭਿਰੇ ਸੋਊ ਆਨਿ ਮਰੇ ॥

नृप राज को मार गए जमुना तटि बीर भिरे सोऊ आनि मरे ॥

nirap raaj ko maar ge jamunaa taT beer bhire souoo aan mare ||

ਰਖਿ ਸਾਧਨ ਸਤ੍ਰ ਸੰਘਾਰ ਦਏ ਨਭਿ ਤੇ ਤਿਹ ਊਪਰਿ ਫੂਲ ਪਰੇ ॥੮੫੪॥

रखि साधन सत्र संघार दए नभि ते तिह ऊपरि फूल परे ॥८५४॥

rakh saadhan satr sa(n)ghaar dhe nabh te teh uoopar fool pare ||854||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री दसम सिकंध पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे नृप कंस बधहि धिआइ समापतम ॥

eit sree dhasam sika(n)dh puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare nirap ka(n)s badheh dhiaai samaapatam ||


ਅਥ ਕੰਸ ਬਧੂ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਪਹਿ ਆਵਤ ਭਈ ॥

अथ कंस बधू कान्रह जू पहि आवत भई ॥

ath ka(n)s badhoo kaanreh joo peh aavat bhiee ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਾਜ ਸੁਤਾ ਦੁਖੁ ਮਾਨਿ ਮਨੈ ਤਜਿ ਧਾਮਨ ਕੋ ਹਰਿ ਜੂ ਪਹਿ ਆਈ ॥

राज सुता दुखु मानि मनै तजि धामन को हरि जू पहि आई ॥

raaj sutaa dhukh maan manai taj dhaaman ko har joo peh aaiee ||

ਆਇ ਕੈ ਸੋ ਘਿਘਿਆਤ ਭਈ ਹਰਿ ਪੈ ਦੁਖ ਕੀ ਸਭ ਬਾਤ ਸੁਨਾਈ ॥

आइ कै सो घिघिआत भई हरि पै दुख की सभ बात सुनाई ॥

aai kai so ghighiaat bhiee har pai dhukh kee sabh baat sunaiee ||

ਡਾਰਿ ਦਯੋ ਸਿਰ ਊਪਰ ਕੋ ਪਟ ਪੈ ਤਿਹ ਭੀਤਰ ਛਾਰ ਮਿਲਾਈ ॥

डारि दयो सिर ऊपर को पट पै तिह भीतर छार मिलाई ॥

ddaar dhayo sir uoopar ko paT pai teh bheetar chhaar milaiee ||

ਕੰਠਿ ਲਗਾਇ ਰਹੀ ਭਰਤਾ ਹਰਿ ਜੂ ਤਿਹ ਦੇਖਤ ਗ੍ਰੀਵ ਨਿਵਾਈ ॥੮੫੫॥

कंठि लगाइ रही भरता हरि जू तिह देखत ग्रीव निवाई ॥८५५॥

ka(n)Th lagai rahee bharataa har joo teh dhekhat greev nivaiee ||855||


ਰਿਪੁ ਕਰਮ ਕਰੇ ਤਬ ਹੀ ਹਰਿ ਜੀ ਫਿਰ ਕੈ ਸੋਊ ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਪਹਿ ਆਏ ॥

रिपु करम करे तब ही हरि जी फिर कै सोऊ मात पिता पहि आए ॥

rip karam kare tab hee har jee fir kai souoo maat pitaa peh aae ||

ਤਾਤ ਨ ਮਾਤ ਭਏ ਬਸਿ ਮੋਹ ਕੇ ਪੁਤ੍ਰ ਦੁਹੂਨ ਕੋ ਸੀਸ ਨਿਵਾਏ ॥

तात न मात भए बसि मोह के पुत्र दुहून को सीस निवाए ॥

taat na maat bhe bas moh ke putr dhuhoon ko sees nivaae ||

ਬ੍ਰਹਮ ਲਖਿਯੋ ਤਿਨ ਕੋ ਕਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਜੀ ਤਿਨ ਕੈ ਮਨ ਮੋਹ ਬਢਾਏ ॥

ब्रहम लखियो तिन को करि कै हरि जी तिन कै मन मोह बढाए ॥

braham lakhiyo tin ko kar kai har jee tin kai man moh baddaae ||

ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਅਤਿ ਭਾਤਿ ਕੇ ਭਾਵ ਕੈ ਬੰਧਨ ਪਾਇਨ ਤੇ ਛੁਟਵਾਏ ॥੮੫੬॥

कै बिनती अति भाति के भाव कै बंधन पाइन ते छुटवाए ॥८५६॥

kai binatee at bhaat ke bhaav kai ba(n)dhan pain te chhuTavaae ||856||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਕੰਸ ਕੇ ਕਰਮ ਕਰਿ ਤਾਤ ਮਾਤ ਕੋ ਛੁਰਾਵਤ ਭਏ ॥

इति स्री दसम सिकंधे पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे कंस के करम करि तात मात को छुरावत भए ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare ka(n)s ke karam kar taat maat ko chhuraavat bhe ||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਨੰਦ ਪ੍ਰਤਿ ॥

कान्रह जू बाच नंद प्रति ॥

kaanreh joo baach na(n)dh prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਚਲਿ ਆਇ ਕੈ ਸੋ ਫਿਰਿ ਨੰਦ ਕੇ ਧਾਮਿ ਕਿਧੌ ਤਿਨ ਸੋ ਬਿਨਤੀ ਅਤਿ ਕੀਨੀ ॥

चलि आइ कै सो फिरि नंद के धामि किधौ तिन सो बिनती अति कीनी ॥

chal aai kai so fir na(n)dh ke dhaam kidhau tin so binatee at keenee ||

ਹਉ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਕੋ ਸੁਤ ਹੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਤਿਨ ਮਾਨ ਕੈ ਲੀਨੀ ॥

हउ बसुदेवहि को सुत हो इह भाति कहियो तिन मान कै लीनी ॥

hau basudheveh ko sut ho ieh bhaat kahiyo tin maan kai leenee ||

ਜਾਹੁ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮ ਧਾਮਨ ਕੋ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨਿ ਮੋਹ ਪ੍ਰਜਾ ਬ੍ਰਿਜ ਭੀਨੀ ॥

जाहु कहियो तुम धामन को बतीया सुनि मोह प्रजा बृज भीनी ॥

jaahu kahiyo tum dhaaman ko bateeyaa sun moh prajaa biraj bheenee ||

ਨੰਦ ਕਹਿਯੋ ਸੁ ਕਹਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਬਿਨੁ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਈ ਸੁ ਪੁਰੀ ਸਭ ਹੀਨੀ ॥੮੫੭॥

नंद कहियो सु कहियो बृज की बिनु कान्रह भई सु पुरी सभ हीनी ॥८५७॥

na(n)dh kahiyo su kahiyo biraj kee bin kaanreh bhiee su puree sabh heenee ||857||


ਸੀਸ ਝੁਕਾਇ ਗਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਸੋਕ ਭਯੋ ਹੈ ॥

सीस झुकाइ गयो बृज को अति ही मन भीतर सोक भयो है ॥

sees jhukai gayo biraj ko at hee man bheetar sok bhayo hai ||

ਜਿਉ ਕੋਊ ਤਾਤ ਮਰੈ ਪਛੁਤਾਤ ਹੈ ਪ੍ਯਾਰੋ ਕੋਊ ਮਨੋ ਭ੍ਰਾਤ ਛਯੋ ਹੈ ॥

जिउ कोऊ तात मरै पछुतात है प्यारो कोऊ मनो भ्रात छयो है ॥

jiau kouoo taat marai pachhutaat hai payaaro kouoo mano bhraat chhayo hai ||

ਪੈ ਜਿਮ ਰਾਜ ਬਡੇ ਰਿਪੁਰਾਜ ਕੀ ਪੈਰਨ ਮੈ ਪਤਿ ਖੋਇ ਗਯੋ ਹੈ ॥

पै जिम राज बडे रिपुराज की पैरन मै पति खोइ गयो है ॥

pai jim raaj badde ripuraaj kee pairan mai pat khoi gayo hai ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਬਸੁਦੇ ਠਗਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਨੋ ਧਨ ਲੂਟਿ ਲਯੋ ਹੈ ॥੮੫੮॥

यौ उपजी उपमा बसुदे ठगि स्याम मनो धन लूटि लयो है ॥८५८॥

yau upajee upamaa basudhe Thag sayaam mano dhan looT layo hai ||858||


ਨੰਦ ਬਾਚ ਪੁਰ ਜਨ ਸੋ ॥

नंद बाच पुर जन सो ॥

na(n)dh baach pur jan so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨੰਦ ਆਇ ਬ੍ਰਿਜ ਪੁਰ ਬਿਖੈ ਕਹੀ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕੀ ਬਾਤ ॥

नंद आइ बृज पुर बिखै कही कृसन की बात ॥

na(n)dh aai biraj pur bikhai kahee kirasan kee baat ||

ਸੁਨਤ ਸੋਕ ਕੀਨੋ ਸਬੈ ਰੋਦਨ ਕੀਨੋ ਮਾਤ ॥੮੫੯॥

सुनत सोक कीनो सबै रोदन कीनो मात ॥८५९॥

sunat sok keeno sabai rodhan keeno maat ||859||


ਜਸੁਧਾ ਬਾਚ ॥

जसुधा बाच ॥

jasudhaa baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਚਿਯੋ ਜਿਨਿ ਤਾਤ ਬਡੇ ਅਹਿ ਤੇ ਜਿਨ ਹੂੰ ਬਕ ਬੀਰ ਬਲੀ ਹਨਿ ਦਈਯਾ ॥

बचियो जिनि तात बडे अहि ते जिन हूँ बक बीर बली हनि दईया ॥

bachiyo jin taat badde eh te jin hoo(n) bak beer balee han dhieeyaa ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਯੋ ਅਘ ਨਾਮ ਮਹਾ ਰਿਪੁ ਪੈ ਪਿਅਰਵਾ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਈਆ ॥

जाहि मरियो अघ नाम महा रिपु पै पिअरवा मुसलीधर भईआ ॥

jaeh mariyo agh naam mahaa rip pai piaravaa musaleedhar bhieeaa ||

ਜੋ ਤਪਸ੍ਯਾ ਕਰਿ ਕੈ ਪ੍ਰਭ ਤੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਪਰਿ ਪਾਇਨ ਲਈਯਾ ॥

जो तपस्या करि कै प्रभ ते कबि स्याम कहै परि पाइन लईया ॥

jo tapasayaa kar kai prabh te kab sayaam kahai par pain lieeyaa ||

ਸੋ ਪੁਰ ਬਾਸਨ ਛੀਨ ਲਯੋ ਹਮ ਤੇ ਸੁਨੀਯੇ ਸਖੀ ਪੂਤ ਕਨ੍ਰਹਈਆ ॥੮੬੦॥

सो पुर बासन छीन लयो हम ते सुनीये सखी पूत कन्रहईआ ॥८६०॥

so pur baasan chheen layo ham te suneeye sakhee poot kanrahieeaa ||860||


ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨੀਆ ਬਿਰਲਾਪੁ ॥

सभ ग्वारनीआ बिरलापु ॥

sabh gavaiaaraneeaa biralaap ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੁਨਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਸਭੈ ਮਿਲਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਪੈ ਮਿਲਿ ਕੈ ਤਿਨ ਸੋਕ ਸੁ ਕੀਨੋ ॥

सुनि कै इह बात सभै मिलि ग्वारनि पै मिलि कै तिन सोक सु कीनो ॥

sun kai ieh baat sabhai mil gavaiaaran pai mil kai tin sok su keeno ||

ਆਨੰਦ ਦੂਰਿ ਕਰਿਯੋ ਮਨ ਤੇ ਹਰਿ ਧ੍ਯਾਨ ਬਿਖੈ ਤਿਨਹੂੰ ਮਨ ਦੀਨੋ ॥

आनंद दूरि करियो मन ते हरि ध्यान बिखै तिनहूँ मन दीनो ॥

aana(n)dh dhoor kariyo man te har dhayaan bikhai tinahoo(n) man dheeno ||

ਧਰਨੀ ਪਰ ਸੋ ਮੁਰਝਾਇ ਗਿਰੀ ਸੁ ਪਰਿਯੋ ਤਿਨ ਕੇ ਤਨ ਤੇ ਸੁ ਪਸੀਨੋ ॥

धरनी पर सो मुरझाइ गिरी सु परियो तिन के तन ते सु पसीनो ॥

dharanee par so murajhai giree su pariyo tin ke tan te su paseeno ||

ਹਾਹੁਕ ਲੈਨ ਲਗੀ ਸਭਿ ਹੀ ਸੁ ਭਯੋ ਸੁਖ ਤੇ ਤਿਨ ਕੋ ਤਨ ਹੀਨੋ ॥੮੬੧॥

हाहुक लैन लगी सभि ही सु भयो सुख ते तिन को तन हीनो ॥८६१॥

haahuk lain lagee sabh hee su bhayo sukh te tin ko tan heeno ||861||


ਅਤਿ ਆਤੁਰ ਹ੍ਵੈ ਹਰਿ ਪ੍ਰੀਤਹਿ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਕੇ ਗੁਨ ਗਾਵੈ ॥

अति आतुर ह्वै हरि प्रीतहि सो कबि स्याम कहै हरि के गुन गावै ॥

at aatur havai har preeteh so kab sayaam kahai har ke gun gaavai ||

ਸੋਰਠਿ ਸੁਧ ਮਲਾਰ ਬਿਲਾਵਲ ਸਾਰੰਗ ਭੀਤਰ ਤਾਨ ਬਸਾਵੈ ॥

सोरठि सुध मलार बिलावल सारंग भीतर तान बसावै ॥

soraTh sudh malaar bilaaval saara(n)g bheetar taan basaavai ||

ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਤਿਹ ਤੇ ਜੀਯ ਮੈ ਤਿਹ ਧ੍ਯਾਨਹਿ ਤੇ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖੁ ਪਾਵੈ ॥

धिआन धरै तिह ते जीय मै तिह ध्यानहि ते अति ही दुखु पावै ॥

dhiaan dharai teh te jeey mai teh dhayaaneh te at hee dhukh paavai ||

ਯੌ ਮੁਰਝਾਵਤ ਹੈ ਮੁਖ ਤਾ ਸਸਿ ਜਿਉ ਪਿਖਿ ਕੰਜ ਮਨੋ ਮੁਰਝਾਵੈ ॥੮੬੨॥

यौ मुरझावत है मुख ता ससि जिउ पिखि कंज मनो मुरझावै ॥८६२॥

yau murajhaavat hai mukh taa sas jiau pikh ka(n)j mano murajhaavai ||862||


ਪੁਰ ਬਾਸਨਿ ਸੰਗਿ ਰਚੇ ਹਰਿ ਜੂ ਹਮਹੂੰ ਮਨ ਤੇ ਜਦੁਰਾਇ ਬਿਸਾਰੀ ॥

पुर बासनि संगि रचे हरि जू हमहूँ मन ते जदुराइ बिसारी ॥

pur baasan sa(n)g rache har joo hamahoo(n) man te jadhurai bisaaree ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਏ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਠਉਰ ਹਮ ਊਪਰ ਤੇ ਅਤਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਸੁ ਟਾਰੀ ॥

त्यागि गए हम को इह ठउर हम ऊपर ते अति प्रीति सु टारी ॥

tayaag ge ham ko ieh Thaur ham uoopar te at preet su Taaree ||

ਪੈ ਕਹਿ ਕੈ ਨ ਕਛੁ ਪਠਿਯੋ ਤਿਹ ਤ੍ਰੀਯਨ ਕੇ ਬਸਿ ਭੈ ਗਿਰਧਾਰੀ ॥

पै कहि कै न कछु पठियो तिह त्रीयन के बसि भै गिरधारी ॥

pai keh kai na kachh paThiyo teh treeyan ke bas bhai giradhaaree ||

ਏਕ ਗਿਰੀ ਕਹੂੰ ਐਸੇ ਧਰਾ ਇਕ ਕੂਕਤ ਹੈ ਸੁ ਹਹਾ ਰੀ ਹਹਾ ਰੀ ॥੮੬੩॥

एक गिरी कहूँ ऐसे धरा इक कूकत है सु हहा री हहा री ॥८६३॥

ek giree kahoo(n) aaise dharaa ik kookat hai su hahaa ree hahaa ree ||863||


ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਬੋਲਤ ਹੈ ਜੀਯ ਮੈ ਅਤਿ ਮਾਨਿ ਉਦਾਸੀ ॥

इह भाति सो ग्वारनि बोलत है जीय मै अति मानि उदासी ॥

eeh bhaat so gavaiaaran bolat hai jeey mai at maan udhaasee ||

ਸੋਕ ਬਢਿਯੋ ਤਿਨ ਕੇ ਜੀਯ ਮੈ ਹਰਿ ਡਾਰਿ ਗਏ ਹਿਤ ਕੀ ਤਿਨ ਫਾਸੀ ॥

सोक बढियो तिन के जीय मै हरि डारि गए हित की तिन फासी ॥

sok baddiyo tin ke jeey mai har ddaar ge hit kee tin faasee ||

ਅਉ ਰਿਸ ਮਾਨਿ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਜਦੁਰਾਇ ਨ ਮਾਨਤ ਲੋਗਨ ਹਾਸੀ ॥

अउ रिस मानि कहै मुख ते जदुराइ न मानत लोगन हासी ॥

aau ris maan kahai mukh te jadhurai na maanat logan haasee ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਹਮੈ ਸੁ ਗਏ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਪੁਰ ਬਾਸਿਨ ਸੰਗਿ ਫਸੇ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸੀ ॥੮੬੪॥

त्यागि हमै सु गए बृज मै पुर बासिन संगि फसे बृज बासी ॥८६४॥

tayaag hamai su ge biraj mai pur baasin sa(n)g fase biraj baasee ||864||


ਰੋਦਨ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਮਿਲਿ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਅਤਿ ਹੋਇ ਬਿਚਾਰੀ ॥

रोदन कै सभ ग्वारनीया मिलि ऐसे कहियो अति होइ बिचारी ॥

rodhan kai sabh gavaiaaraneeyaa mil aaise kahiyo at hoi bichaaree ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਬ੍ਰਿਜੈ ਮਥੁਰਾ ਮੈ ਗਏ ਤਜਿ ਨੇਹ ਅਨੇਹ ਕੀ ਬਾਤ ਬਿਚਾਰੀ ॥

त्यागि बृजै मथुरा मै गए तजि नेह अनेह की बात बिचारी ॥

tayaag birajai mathuraa mai ge taj neh aneh kee baat bichaaree ||

ਏਕ ਗਿਰੈ ਧਰਿ ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਇਕ ਐਸੇ ਸੰਭਾਰਿ ਕਹੈ ਬ੍ਰਿਜਨਾਰੀ ॥

एक गिरै धरि यौ कहि कै इक ऐसे संभारि कहै बृजनारी ॥

ek girai dhar yau keh kai ik aaise sa(n)bhaar kahai birajanaaree ||

ਰੀ ਸਜਨੀ ਸੁਨੀਯੋ ਬਤੀਯਾ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥਿ ਬਿਸਾਰੀ ॥੮੬੫॥

री सजनी सुनीयो बतीया बृज नारि सभै बृजनाथि बिसारी ॥८६५॥

ree sajanee suneeyo bateeyaa biraj naar sabhai birajanaath bisaaree ||865||


ਆਖਨਿ ਆਗਹਿ ਠਾਢਿ ਲਗੈ ਸਖੀ ਦੇਤ ਨਹੀ ਕਿ ਹੇਤ ਦਿਖਾਈ ॥

आखनि आगहि ठाढि लगै सखी देत नही कि हेत दिखाई ॥

aakhan aageh Thaadd lagai sakhee dhet nahee k het dhikhaiee ||

ਜਾ ਸੰਗਿ ਕੇਲ ਕਰੇ ਬਨ ਮੈ ਤਿਹ ਤੇ ਅਤਿ ਹੀ ਜੀਯ ਮੈ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

जा संगि केल करे बन मै तिह ते अति ही जीय मै दुचिताई ॥

jaa sa(n)g kel kare ban mai teh te at hee jeey mai dhuchitaiee ||

ਹੇਤੁ ਤਜਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਸਨ ਸੋ ਨ ਸੰਦੇਸ ਪਠਿਯੋ ਜੀਯ ਕੈ ਸੁ ਢਿਠਾਈ ॥

हेतु तजियो बृज बासन सो न संदेस पठियो जीय कै सु ढिठाई ॥

het tajiyo biraj baasan so na sa(n)dhes paThiyo jeey kai su ddiThaiee ||

ਤਾਹੀ ਕੀ ਓਰਿ ਨਿਹਾਰਤ ਹੈ ਪਿਖੀਯੈ ਨਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਹਹਾ ਮੋਰੀ ਮਾਈ ॥੮੬੬॥

ताही की ओरि निहारत है पिखीयै नही स्याम हहा मोरी माई ॥८६६॥

taahee kee or nihaarat hai pikheeyai nahee sayaam hahaa moree maiee ||866||


ਬਾਰਹਮਾਹ ॥

बारहमाह ॥

baarahamaeh ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫਾਗੁਨ ਮੈ ਸਖੀ ਡਾਰਿ ਗੁਲਾਲ ਸਭੈ ਹਰਿ ਸਿਉ ਬਨ ਬੀਚ ਰਮੈ ॥

फागुन मै सखी डारि गुलाल सभै हरि सिउ बन बीच रमै ॥

faagun mai sakhee ddaar gulaal sabhai har siau ban beech ramai ||

ਪਿਚਕਾਰਨ ਲੈ ਕਰਿ ਗਾਵਤਿ ਗੀਤ ਸਭੈ ਮਿਲਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤਉਨ ਸਮੈ ॥

पिचकारन लै करि गावति गीत सभै मिलि ग्वारनि तउन समै ॥

pichakaaran lai kar gaavat geet sabhai mil gavaiaaran taun samai ||

ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਕੇ ਬੀਚ ਕਿਧੌ ਮਨ ਕੇ ਕਰਿ ਦੂਰ ਗਮੈ ॥

अति सुँदर कुँज गलीन के बीच किधौ मन के करि दूर गमै ॥

at su(n)dhar ku(n)j galeen ke beech kidhau man ke kar dhoor gamai ||

ਅਰੁ ਤ੍ਯਾਗਿ ਤਮੈ ਸਭ ਧਾਮਨ ਕੀ ਇਹ ਸੁੰਦਰਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਮਾਨਿ ਤਮੈ ॥੮੬੭॥

अरु त्यागि तमै सभ धामन की इह सुँदरि स्याम की मानि तमै ॥८६७॥

ar tayaag tamai sabh dhaaman kee ieh su(n)dhar sayaam kee maan tamai ||867||


ਫੂਲਿ ਸੀ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਫੂਲਿ ਰਹੀ ਪਟ ਰੰਗਨ ਕੇ ਫੁਨਿ ਫੂਲ ਲੀਏ ॥

फूलि सी ग्वारनि फूलि रही पट रंगन के फुनि फूल लीए ॥

fool see gavaiaaran fool rahee paT ra(n)gan ke fun fool le'ee ||

ਇਕ ਸ੍ਯਾਮ ਸੀਗਾਰ ਸੁ ਗਾਵਤ ਹੈ ਪੁਨਿ ਕੋਕਿਲਕਾ ਸਮ ਹੋਤ ਜੀਏ ॥

इक स्याम सीगार सु गावत है पुनि कोकिलका सम होत जीए ॥

eik sayaam seegaar su gaavat hai pun kokilakaa sam hot je'ee ||

ਰਿਤੁ ਨਾਮਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਯੋ ਸਜਨੀ ਤਿਹ ਤੇ ਸਭ ਛਾਜ ਸੁ ਸਾਜ ਦੀਏ ॥

रितु नामहि स्याम भयो सजनी तिह ते सभ छाज सु साज दीए ॥

rit naameh sayaam bhayo sajanee teh te sabh chhaaj su saaj dhe'ee ||

ਪਿਖਿ ਜਾ ਚਤੁਰਾਨਨ ਚਉਕਿ ਰਹੈ ਜਿਹ ਦੇਖਤ ਹੋਤ ਹੁਲਾਸ ਹੀਏ ॥੮੬੮॥

पिखि जा चतुरानन चउकि रहै जिह देखत होत हुलास हीए ॥८६८॥

pikh jaa chaturaanan chauk rahai jeh dhekhat hot hulaas he'ee ||868||


ਏਕ ਸਮੈ ਰਹੈ ਕਿੰਸੁਕ ਫੂਲਿ ਸਖੀ ਤਹ ਪਉਨ ਬਹੈ ਸੁਖਦਾਈ ॥

एक समै रहै किंसुक फूलि सखी तह पउन बहै सुखदाई ॥

ek samai rahai ki(n)suk fool sakhee teh paun bahai sukhadhaiee ||

ਭਉਰ ਗੁੰਜਾਰਤ ਹੈ ਇਤ ਤੇ ਉਤ ਤੇ ਮੁਰਲੀ ਨੰਦ ਲਾਲ ਬਜਾਈ ॥

भउर गुँजारत है इत ते उत ते मुरली नंद लाल बजाई ॥

bhaur gu(n)jaarat hai it te ut te muralee na(n)dh laal bajaiee ||

ਰੀਝਿ ਰਹਿਯੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਸੁਰ ਮੰਡਲ ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਬਰਨਿਯੋ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥

रीझि रहियो सुनि कै सुर मंडल ता छबि को बरनियो नही जाई ॥

reejh rahiyo sun kai sur ma(n)ddal taa chhab ko baraniyo nahee jaiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਅਉਸਰ ਯਾਹਿ ਭਈ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੬੯॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु अउसर याहि भई दुखदाई ॥८६९॥

taun samai sukhadhaik thee rit aausar yaeh bhiee dhukhadhaiee ||869||


ਜੇਠ ਸਮੈ ਸਖੀ ਤੀਰ ਨਦੀ ਹਮ ਖੇਲਤ ਚਿਤਿ ਹੁਲਾਸ ਬਢਾਈ ॥

जेठ समै सखी तीर नदी हम खेलत चिति हुलास बढाई ॥

jeTh samai sakhee teer nadhee ham khelat chit hulaas baddaiee ||

ਚੰਦਨ ਸੋ ਤਨ ਲੀਪ ਸਭੈ ਸੁ ਗੁਲਾਬਹਿ ਸੋ ਧਰਨੀ ਛਿਰਕਾਈ ॥

चंदन सो तन लीप सभै सु गुलाबहि सो धरनी छिरकाई ॥

cha(n)dhan so tan leep sabhai su gulaabeh so dharanee chhirakaiee ||

ਲਾਇ ਸੁਗੰਧ ਭਲੀ ਕਪਰਿਯੋ ਪਰ ਤਾ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾ ਬਰਨੀ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥

लाइ सुगंध भली कपरियो पर ता की प्रभा बरनी नही जाई ॥

lai suga(n)dh bhalee kapariyo par taa kee prabhaa baranee nahee jaiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਇਹ ਅਉਸਰ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੦॥

तउन समै सुखदाइक थी इह अउसर स्याम बिना दुखदाई ॥८७०॥

taun samai sukhadhaik thee ieh aausar sayaam binaa dhukhadhaiee ||870||


ਪਉਨ ਪ੍ਰਚੰਡ ਚਲੈ ਜਿਹ ਅਉਸਰ ਅਉਰ ਬਘੂਲਨ ਧੂਰਿ ਉਡਾਈ ॥

पउन प्रचंड चलै जिह अउसर अउर बघूलन धूरि उडाई ॥

paun pracha(n)dd chalai jeh aausar aaur baghoolan dhoor uddaiee ||

ਧੂਪ ਲਗੈ ਜਿਹ ਮਾਸ ਬੁਰੀ ਸੁ ਲਗੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਸੀਤਲ ਜਾਈ ॥

धूप लगै जिह मास बुरी सु लगै सुखदाइक सीतल जाई ॥

dhoop lagai jeh maas buree su lagai sukhadhaik seetal jaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਸੰਗ ਸਭੈ ਹਮ ਖੇਲਤ ਸੀਤਲ ਪਾਟਕ ਕਾਬਿ ਛਟਾਈ ॥

स्याम के संग सभै हम खेलत सीतल पाटक काबि छटाई ॥

sayaam ke sa(n)g sabhai ham khelat seetal paaTak kaab chhaTaiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਅਉਸਰ ਯਾਹਿ ਭਈ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੧॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु अउसर याहि भई दुखदाई ॥८७१॥

taun samai sukhadhaik thee rit aausar yaeh bhiee dhukhadhaiee ||871||


ਜੋਰਿ ਘਟਾ ਘਟ ਆਏ ਜਹਾ ਸਖੀ ਬੂੰਦਨ ਮੇਘ ਭਲੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

जोरि घटा घट आए जहा सखी बूँदन मेघ भली छबि पाई ॥

jor ghaTaa ghaT aae jahaa sakhee boo(n)dhan megh bhalee chhab paiee ||

ਬੋਲਤ ਚਾਤ੍ਰਿਕ ਦਾਦਰ ਅਉ ਘਨ ਮੋਰਨ ਪੈ ਘਨਘੋਰ ਲਗਾਈ ॥

बोलत चातृक दादर अउ घन मोरन पै घनघोर लगाई ॥

bolat chaatirak dhaadhar aau ghan moran pai ghanaghor lagaiee ||

ਤਾਹਿ ਸਮੈ ਹਮ ਕਾਨਰ ਕੇ ਸੰਗਿ ਖੇਲਤ ਥੀ ਅਤਿ ਪ੍ਰੇਮ ਬਢਾਈ ॥

ताहि समै हम कानर के संगि खेलत थी अति प्रेम बढाई ॥

taeh samai ham kaanar ke sa(n)g khelat thee at prem baddaiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਅਉਸਰ ਯਾਹਿ ਭਈ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੨॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु अउसर याहि भई दुखदाई ॥८७२॥

taun samai sukhadhaik thee rit aausar yaeh bhiee dhukhadhaiee ||872||


ਮੇਘ ਪਰੈ ਕਬਹੂੰ ਉਘਰੈ ਸਖੀ ਛਾਇ ਲਗੈ ਦ੍ਰੁਮ ਕੀ ਸੁਖਦਾਈ ॥

मेघ परै कबहूँ उघरै सखी छाइ लगै द्रुम की सुखदाई ॥

megh parai kabahoo(n) ugharai sakhee chhai lagai dhrum kee sukhadhaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਸੰਗਿ ਫਿਰੈ ਸਜਨੀ ਰੰਗ ਫੂਲਨ ਕੇ ਹਮ ਬਸਤ੍ਰ ਬਨਾਈ ॥

स्याम के संगि फिरै सजनी रंग फूलन के हम बसत्र बनाई ॥

sayaam ke sa(n)g firai sajanee ra(n)g foolan ke ham basatr banaiee ||

ਖੇਲਤ ਕ੍ਰੀੜ ਕਰੈ ਰਸ ਕੀ ਇਹ ਅਉਸਰ ਕਉ ਬਰਨਿਯੋ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥

खेलत क्रीड़ करै रस की इह अउसर कउ बरनियो नही जाई ॥

khelat kreeR karai ras kee ieh aausar kau baraniyo nahee jaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਸਨੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਅਤਿ ਭੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੩॥

स्याम सनै सुखदाइक थी रित स्याम बिना अति भी दुखदाई ॥८७३॥

sayaam sanai sukhadhaik thee rit sayaam binaa at bhee dhukhadhaiee ||873||


ਮਾਸ ਅਸੂ ਹਮ ਕਾਨਰ ਕੇ ਸੰਗਿ ਖੇਲਤ ਚਿਤਿ ਹੁਲਾਸ ਬਢਾਈ ॥

मास असू हम कानर के संगि खेलत चिति हुलास बढाई ॥

maas asoo ham kaanar ke sa(n)g khelat chit hulaas baddaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਤਹਾ ਪੁਨਿ ਗਾਵਤ ਥੋ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਰਾਗਨ ਤਾਨ ਬਸਾਈ ॥

कान्रह तहा पुनि गावत थो अति सुँदर रागन तान बसाई ॥

kaanreh tahaa pun gaavat tho at su(n)dhar raagan taan basaiee ||

ਗਾਵਤ ਥੀ ਹਮ ਹੂੰ ਸੰਗ ਤਾਹੀ ਕੇ ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਬਰਨਿਯੋ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥

गावत थी हम हूँ संग ताही के ता छबि को बरनियो नही जाई ॥

gaavat thee ham hoo(n) sa(n)g taahee ke taa chhab ko baraniyo nahee jaiee ||

ਤਾ ਸੰਗ ਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਅਬ ਭੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੪॥

ता संग मै सुखदाइक थी रितु स्याम बिना अब भी दुखदाई ॥८७४॥

taa sa(n)g mai sukhadhaik thee rit sayaam binaa ab bhee dhukhadhaiee ||874||


ਕਾਤਿਕ ਕੀ ਸਖੀ ਰਾਸਿ ਬਿਖੈ ਰਤਿ ਖੇਲਤ ਥੀ ਹਰਿ ਸੋ ਚਿਤੁ ਲਾਈ ॥

कातिक की सखी रासि बिखै रति खेलत थी हरि सो चितु लाई ॥

kaatik kee sakhee raas bikhai rat khelat thee har so chit laiee ||

ਸੇਤਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਪਟ ਛਾਜਤ ਸੇਤ ਨਦੀ ਤਹ ਧਾਰ ਬਹਾਈ ॥

सेतहि ग्वारनि के पट छाजत सेत नदी तह धार बहाई ॥

seteh gavaiaaran ke paT chhaajat set nadhee teh dhaar bahaiee ||

ਭੂਖਨ ਸੇਤਹਿ ਗੋਪਨਿ ਕੇ ਅਰੁ ਮੋਤਿਨ ਹਾਰ ਭਲੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

भूखन सेतहि गोपनि के अरु मोतिन हार भली छबि पाई ॥

bhookhan seteh gopan ke ar motin haar bhalee chhab paiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਅਉਸਰ ਯਾਹਿ ਭਈ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੫॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु अउसर याहि भई दुखदाई ॥८७५॥

taun samai sukhadhaik thee rit aausar yaeh bhiee dhukhadhaiee ||875||


ਮਘ੍ਰ ਸਮੈ ਸਬ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਸੰਗਿ ਹੁਇ ਖੇਲਤ ਥੀ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਪਾਈ ॥

मघ्र समै सब स्याम के संगि हुइ खेलत थी मनि आनंद पाई ॥

maghr samai sab sayaam ke sa(n)g hui khelat thee man aana(n)dh paiee ||

ਸੀਤ ਲਗੈ ਤਬ ਦੂਰ ਕਰੈ ਹਮ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਅੰਗ ਸੋ ਅੰਗ ਮਿਲਾਈ ॥

सीत लगै तब दूर करै हम स्याम के अंग सो अंग मिलाई ॥

seet lagai tab dhoor karai ham sayaam ke a(n)g so a(n)g milaiee ||

ਫੂਲ ਚੰਬੇਲੀ ਕੇ ਫੂਲਿ ਰਹੇ ਜਹਿ ਨੀਰ ਘਟਿਯੋ ਜਮਨਾ ਜੀਅ ਆਈ ॥

फूल चंबेली के फूलि रहे जहि नीर घटियो जमना जीअ आई ॥

fool cha(n)belee ke fool rahe jeh neer ghaTiyo jamanaa jeea aaiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਅਉਸਰ ਯਾਹਿ ਭਈ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੬॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु अउसर याहि भई दुखदाई ॥८७६॥

taun samai sukhadhaik thee rit aausar yaeh bhiee dhukhadhaiee ||876||


ਬੀਚ ਸਰਦ ਰਿਤੁ ਕੇ ਸਜਨੀ ਹਮ ਖੇਲਤ ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਲਗਾਈ ॥

बीच सरद रितु के सजनी हम खेलत स्याम सो प्रीति लगाई ॥

beech saradh rit ke sajanee ham khelat sayaam so preet lagaiee ||

ਆਨੰਦ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਮੈ ਤਜ ਕੈ ਸਭ ਹੀ ਜੀਯ ਕੀ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

आनंद कै अति ही मन मै तज कै सभ ही जीय की दुचिताई ॥

aana(n)dh kai at hee man mai taj kai sabh hee jeey kee dhuchitaiee ||

ਨਾਰਿ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀਨ ਬਿਖੈ ਮਨ ਕੀ ਤਜਿ ਕੈ ਸਭ ਸੰਕ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥

नारि सभै बृज कीन बिखै मन की तजि कै सभ संक कन्रहाई ॥

naar sabhai biraj keen bikhai man kee taj kai sabh sa(n)k kanrahaiee ||

ਤਾ ਸੰਗ ਸੋ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਅਬ ਭੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੭॥

ता संग सो सुखदाइक थी रितु स्याम बिना अब भी दुखदाई ॥८७७॥

taa sa(n)g so sukhadhaik thee rit sayaam binaa ab bhee dhukhadhaiee ||877||


ਮਾਘ ਬਿਖੈ ਮਿਲ ਕੈ ਹਰਿ ਸੋ ਹਮ ਸੋ ਰਸ ਰਾਸ ਕੀ ਖੇਲ ਮਚਾਈ ॥

माघ बिखै मिल कै हरि सो हम सो रस रास की खेल मचाई ॥

maagh bikhai mil kai har so ham so ras raas kee khel machaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਜਾਵਤ ਥੋ ਮੁਰਲੀ ਤਿਹ ਅਉਸਰ ਕੋ ਬਰਨਿਯੋ ਨਹਿ ਜਾਈ ॥

कान्रह बजावत थो मुरली तिह अउसर को बरनियो नहि जाई ॥

kaanreh bajaavat tho muralee teh aausar ko baraniyo neh jaiee ||

ਫੂਲਿ ਰਹੇ ਤਹਿ ਫੂਲ ਭਲੇ ਪਿਖਿਯੋ ਜਿਹ ਰੀਝਿ ਰਹੈ ਸੁਰਰਾਈ ॥

फूलि रहे तहि फूल भले पिखियो जिह रीझि रहै सुरराई ॥

fool rahe teh fool bhale pikhiyo jeh reejh rahai suraraiee ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸੁਖਦਾਇਕ ਥੀ ਰਿਤੁ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਅਬ ਭੀ ਦੁਖਦਾਈ ॥੮੭੮॥

तउन समै सुखदाइक थी रितु स्याम बिना अब भी दुखदाई ॥८७८॥

taun samai sukhadhaik thee rit sayaam binaa ab bhee dhukhadhaiee ||878||


ਸ੍ਯਾਮ ਚਿਤਾਰਿ ਸਭੈ ਤਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜੁ ਹੁਤੀ ਬਡਭਾਗੀ ॥

स्याम चितारि सभै तह ग्वारनि स्याम कहै जु हुती बडभागी ॥

sayaam chitaar sabhai teh gavaiaaran sayaam kahai ju hutee baddabhaagee ||

ਤ੍ਯਾਗ ਦਈ ਸੁਧਿ ਅਉਰ ਸਭੈ ਹਰਿ ਬਾਤਨ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਪਾਗੀ ॥

त्याग दई सुधि अउर सभै हरि बातन के रस भीतर पागी ॥

tayaag dhiee sudh aaur sabhai har baatan ke ras bheetar paagee ||

ਏਕ ਗਿਰੀ ਧਰਿ ਹ੍ਵੈ ਬਿਸੁਧੀ ਇਕ ਪੈ ਕਰੁਨਾ ਹੀ ਬਿਖੈ ਅਨੁਰਾਗੀ ॥

एक गिरी धरि ह्वै बिसुधी इक पै करुना ही बिखै अनुरागी ॥

ek giree dhar havai bisudhee ik pai karunaa hee bikhai anuraagee ||

ਕੈ ਸੁਧਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਖੇਲਨ ਕੀ ਮਿਲ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਰੋਵਨ ਲਾਗੀ ॥੮੭੯॥

कै सुधि स्याम के खेलन की मिल कै सभ ग्वारनि रोवन लागी ॥८७९॥

kai sudh sayaam ke khelan kee mil kai sabh gavaiaaran rovan laagee ||879||


ਇਤਿ ਗੋਪੀਅਨ ਕੋ ਬ੍ਰਿਲਾਪ ਪੂਰਨੰ ॥

इति गोपीअन को बृलाप पूरनं ॥

eit gopeean ko biralaap poorana(n) ||

ਅਥ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਮੰਤ੍ਰ ਗਾਇਤ੍ਰੀ ਸੀਖਨ ਸਮੈ ॥

अथ कान्रह जू मंत्र गाइत्री सीखन समै ॥

ath kaanreh joo ma(n)tr gaitree seekhan samai ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਉਤ ਤੇ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਭੀ ਦਸਾ ਇਤ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਥਾ ਭਈ ਤਾਹਿ ਸੁਨਾਊ ॥

उत ते इह ग्वारनि की भी दसा इत कान्रह कथा भई ताहि सुनाऊ ॥

aut te ieh gavaiaaran kee bhee dhasaa it kaanreh kathaa bhiee taeh sunaauoo ||

ਲੀਪ ਕੈ ਭੂਮਹਿ ਗੋਬਰ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਭ ਪੁਰੋਹਿਤ ਗਾਊ ॥

लीप कै भूमहि गोबर सो कबि स्याम कहै सभ पुरोहित गाऊ ॥

leep kai bhoomeh gobar so kab sayaam kahai sabh purohit gaauoo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬੈਠਾਇ ਕੈ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਬਿ ਪੈ ਗਰਗੈ ਸੁ ਪਵਿਤ੍ਰਹਿ ਠਾਊ ॥

कान्रह बैठाइ कै स्याम कहै कबि पै गरगै सु पवित्रहि ठाऊ ॥

kaanreh baiThai kai sayaam kahai kab pai garagai su pavitreh Thaauoo ||

ਮੰਤ੍ਰ ਗਾਇਤ੍ਰੀ ਕੋ ਤਾਹਿ ਦਯੋ ਜੋਊ ਹੈ ਭੁਗੀਆ ਧਰਨੀਧਰ ਨਾਊ ॥੮੮੦॥

मंत्र गाइत्री को ताहि दयो जोऊ है भुगीआ धरनीधर नाऊ ॥८८०॥

ma(n)tr gaitree ko taeh dhayo jouoo hai bhugeeaa dharaneedhar naauoo ||880||


ਡਾਰਿ ਜਨੇਊ ਸੁ ਸ੍ਯਾਮਿ ਗਰੈ ਫਿਰ ਕੈ ਤਿਹ ਮੰਤ੍ਰ ਸੁ ਸ੍ਰਉਨ ਮੈ ਦੀਨੋ ॥

डारि जनेऊ सु स्यामि गरै फिर कै तिह मंत्र सु स्रउन मै दीनो ॥

ddaar janeuoo su sayaam garai fir kai teh ma(n)tr su sraun mai dheeno ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਹਰਿ ਪਾਇ ਪਰਿਯੋ ਗਰਗੈ ਬਹੁ ਭਾਤਨ ਕੋ ਧਨ ਦੀਨੋ ॥

सो सुनि कै हरि पाइ परियो गरगै बहु भातन को धन दीनो ॥

so sun kai har pai pariyo garagai bahu bhaatan ko dhan dheeno ||

ਅਸ ਬਡੈ ਗਜਰਾਜ ਔ ਉਸਟ ਦਏ ਪਟ ਸੁੰਦਰ ਸਾਜ ਨਵੀਨੋ ॥

अस बडै गजराज औ उसट दए पट सुँदर साज नवीनो ॥

as baddai gajaraaj aau usaT dhe paT su(n)dhar saaj naveeno ||

ਲਾਲ ਪਨੇ ਅਰੁ ਸਬਜ ਮਨੀ ਤਿਹ ਪਾਇ ਪੁਰੋਹਿਤ ਆਨੰਦ ਕੀਨੋ ॥੮੮੧॥

लाल पने अरु सबज मनी तिह पाइ पुरोहित आनंद कीनो ॥८८१॥

laal pane ar sabaj manee teh pai purohit aana(n)dh keeno ||881||


ਮੰਤ੍ਰ ਪੁਰੋਹਿਤ ਦੈ ਹਰਿ ਕੋ ਧਨੁ ਲੈ ਬਹੁਤ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥

मंत्र पुरोहित दै हरि को धनु लै बहुत मन मै सुखु पायो ॥

ma(n)tr purohit dhai har ko dhan lai bahut man mai sukh paayo ||

ਤਿਆਗਿ ਸਬੈ ਦੁਖ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਆਨੰਦ ਬੀਚ ਬਢਾਯੋ ॥

तिआगि सबै दुख को तब ही अति ही मन आनंद बीच बढायो ॥

tiaag sabai dhukh ko tab hee at hee man aana(n)dh beech baddaayo ||

ਸੋ ਧਨ ਪਾਇ ਤਹਾ ਤੇ ਚਲਿਯੋ ਚਲਿ ਕੈ ਅਪੁਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਭੀਤਰ ਆਯੋ ॥

सो धन पाइ तहा ते चलियो चलि कै अपुने गृह भीतर आयो ॥

so dhan pai tahaa te chaliyo chal kai apune gireh bheetar aayo ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਮਿਤ੍ਰ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਭਏ ਗ੍ਰਿਹ ਤੇ ਸਭ ਦਾਰਿਦ ਦੂਰ ਪਰਾਯੋ ॥੮੮੨॥

सो सुनि मित्र प्रसंनि भए गृह ते सभ दारिद दूर परायो ॥८८२॥

so sun mitr prasa(n)n bhe gireh te sabh dhaaridh dhoor paraayo ||882||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਸ੍ਰੀ ਕ੍ਰਿਸਨਿ ਜੂ ਕੋ ਗਾਇਤ੍ਰੀ ਮੰਤ੍ਰ ਸਿਖਾਇ ਜਗ੍ਰਯੋਪਵੀਤ ਗਰੇ ਡਾਰਾ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री दसम सिकंध पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे स्री कृसनि जू को गाइत्री मंत्र सिखाइ जग्रयोपवीत गरे डारा धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥

eit sree dhasam sika(n)dh puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare sree kirasan joo ko gaitree ma(n)tr sikhai jagrayopaveet gare ddaaraa dhiaai samaapatam sat subham sat ||


ਅਥ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਕੋ ਰਾਜ ਦੀਬੋ ॥

अथ उग्रसैन को राज दीबो ॥

ath ugrasain ko raaj dheebo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੰਤ੍ਰ ਪੁਰੋਹਿਤ ਤੇ ਹਰਿ ਲੈ ਅਪੁਨੇ ਰਿਪੁ ਕੋ ਫਿਰਿ ਤਾਤ ਛਡਾਯੋ ॥

मंत्र पुरोहित ते हरि लै अपुने रिपु को फिरि तात छडायो ॥

ma(n)tr purohit te har lai apune rip ko fir taat chhaddaayo ||

ਛੂਟਤ ਸੋ ਹਰਿ ਰੂਪੁ ਨਿਹਾਰ ਕੈ ਆਇ ਕੈ ਪਾਇਨ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥

छूटत सो हरि रूपु निहार कै आइ कै पाइन सीस झुकायो ॥

chhooTat so har roop nihaar kai aai kai pain sees jhukaayo ||

ਰਾਜੁ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਕੋ ਤੁਮ ਲੇਹੁ ਜੂ ਸੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੈ ਜਦੁਰਾਇ ਬੈਠਾਯੋ ॥

राजु कहियो हरि को तुम लेहु जू सो नृप कै जदुराइ बैठायो ॥

raaj kahiyo har ko tum leh joo so nirap kai jadhurai baiThaayo ||

ਆਨੰਦ ਭਯੋ ਜਗ ਮੈ ਜਸੁ ਭਯੋ ਹਰਿ ਸੰਤਨ ਕੋ ਦੁਖੁ ਦੂਰਿ ਪਰਾਯੋ ॥੮੮੩॥

आनंद भयो जग मै जसु भयो हरि संतन को दुखु दूरि परायो ॥८८३॥

aana(n)dh bhayo jag mai jas bhayo har sa(n)tan ko dhukh dhoor paraayo ||883||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜਬੈ ਰਿਪੁ ਕੋ ਬਧ ਕੈ ਰਿਪੁ ਤਾਤ ਕੋ ਰਾਜੁ ਕਿਧੋ ਫਿਰਿ ਦੀਨੋ ॥

कान्रह जबै रिपु को बध कै रिपु तात को राजु किधो फिरि दीनो ॥

kaanreh jabai rip ko badh kai rip taat ko raaj kidho fir dheeno ||

ਦੇਤ ਉਦਾਰ ਸੁ ਜਿਉ ਦਮਰੀ ਤਿਹ ਕੋ ਇਮ ਕੈ ਫੁਨਿ ਰੰਚ ਨ ਲੀਨੋ ॥

देत उदार सु जिउ दमरी तिह को इम कै फुनि रंच न लीनो ॥

dhet udhaar su jiau dhamaree teh ko im kai fun ra(n)ch na leeno ||

ਮਾਰ ਕੈ ਸਤ੍ਰ ਅਭੇਖ ਕਰੇ ਸੁ ਦੀਯੋ ਸਭ ਸੰਤਨ ਕੇ ਸੁਖ ਜੀ ਨੋ ॥

मार कै सत्र अभेख करे सु दीयो सभ संतन के सुख जी नो ॥

maar kai satr abhekh kare su dheeyo sabh sa(n)tan ke sukh jee no ||

ਅਸਤ੍ਰਨਿ ਕੀ ਬਿਧਿ ਸੀਖਨ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਹਲੀ ਮੁਸਲੀ ਮਨ ਕੀਨੋ ॥੮੮੪॥

असत्रनि की बिधि सीखन को कबि स्याम हली मुसली मन कीनो ॥८८४॥

asatran kee bidh seekhan ko kab sayaam halee musalee man keeno ||884||


ਇਤਿ ਰਾਜਾ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਕੋ ਰਾਜ ਦੀਬੋ ਧਿਆਇ ਸੰਪੂਰਨੰ ॥

इति राजा उग्रसैन को राज दीबो धिआइ संपूरनं ॥

eit raajaa ugrasain ko raaj dheebo dhiaai sa(n)poorana(n) ||

ਅਥ ਧਨੁਖ ਬਿਦਿਆ ਸੀਖਨ ਸੰਦੀਪਨ ਪੈ ਚਲੇ ॥

अथ धनुख बिदिआ सीखन संदीपन पै चले ॥

ath dhanukh bidhiaa seekhan sa(n)dheepan pai chale ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਇਸ ਪਾਇ ਪਿਤਾ ਤੇ ਦੋਊ ਧਨੁ ਸੀਖਨ ਕੀ ਬਿਧਿ ਕਾਜ ਚਲੇ ॥

आइस पाइ पिता ते दोऊ धनु सीखन की बिधि काज चले ॥

aais pai pitaa te dhouoo dhan seekhan kee bidh kaaj chale ||

ਜਿਨ ਕੇ ਮੁਖਿ ਕੀ ਸਮ ਚੰਦ੍ਰ ਪ੍ਰਭਾ ਜੋਊ ਬੀਰਨ ਤੇ ਬਰਬੀਰ ਭਲੇ ॥

जिन के मुखि की सम चंद्र प्रभा जोऊ बीरन ते बरबीर भले ॥

jin ke mukh kee sam cha(n)dhr prabhaa jouoo beeran te barabeer bhale ||

ਗੁਰ ਪਾਸਿ ਸੰਦੀਪਨ ਕੇ ਤਬ ਹੀ ਦਿਨ ਥੋਰਨਿ ਮੈ ਭਏ ਜਾਇ ਖਲੇ ॥

गुर पासि संदीपन के तब ही दिन थोरनि मै भए जाइ खले ॥

gur paas sa(n)dheepan ke tab hee dhin thoran mai bhe jai khale ||

ਜਿਨਹੂੰ ਕੁਪਿ ਕੈ ਮੁਰ ਨਾਮ ਮਰਯੋ ਜਿਨ ਹੂੰ ਛਲ ਸੋ ਬਲਿ ਰਾਜ ਛਲੇ ॥੮੮੫॥

जिनहूँ कुपि कै मुर नाम मरयो जिन हूँ छल सो बलि राज छले ॥८८५॥

jinahoo(n) kup kai mur naam marayo jin hoo(n) chhal so bal raaj chhale ||885||


ਚਉਸਠ ਦਿਵਸ ਮੈ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਭ ਹੀ ਤਿਹ ਤੇ ਬਿਧਿ ਸੀਖ ਸੁ ਲੀਨੀ ॥

चउसठ दिवस मै स्याम कहै सभ ही तिह ते बिधि सीख सु लीनी ॥

chausaTh dhivas mai sayaam kahai sabh hee teh te bidh seekh su leenee ||

ਪੈਸਠਵੇ ਦਿਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਭੇ ਗੁਰ ਸੋ ਉਠ ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਇਹ ਕੀਨੀ ॥

पैसठवे दिन प्रापत भे गुर सो उठ कै बिनती इह कीनी ॥

paisaThave dhin praapat bhe gur so uTh kai binatee ieh keenee ||

ਤਉ ਗੁਰ ਪੂਛਿ ਕਿਧੌ ਤ੍ਰੀਯ ਤੇ ਸੁਤ ਹੂੰ ਕੀ ਸੁ ਬਾਤ ਪੈ ਮਾਗਿ ਕੈ ਲੀਨੀ ॥

तउ गुर पूछि किधौ त्रीय ते सुत हूँ की सु बात पै मागि कै लीनी ॥

tau gur poochh kidhau treey te sut hoo(n) kee su baat pai maag kai leenee ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਬੀਚ ਦੁਹੂੰ ਜੋਊ ਵਾਹਿ ਕਹੀ ਤਿਹ ਕੋ ਸੋਈ ਦੀਨੀ ॥੮੮੬॥

सो सुनि स्रउनन बीच दुहूँ जोऊ वाहि कही तिह को सोई दीनी ॥८८६॥

so sun sraunan beech dhuhoo(n) jouoo vaeh kahee teh ko soiee dheenee ||886||


ਬੀਰ ਬਡੇ ਰਥਿ ਬੈਠਿ ਦੋਊ ਚਲਿ ਕੈ ਤਟਿ ਸੋ ਨਦੀਆ ਪਤਿ ਆਏ ॥

बीर बडे रथि बैठि दोऊ चलि कै तटि सो नदीआ पति आए ॥

beer badde rath baiTh dhouoo chal kai taT so nadheeaa pat aae ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਰੂਪੁ ਨਿਹਾਰਤ ਹੀ ਬਚਨਾ ਤਿਨਿ ਸੀਸ ਝੁਕਾਇ ਸੁਨਾਏ ॥

ताही को रूपु निहारत ही बचना तिनि सीस झुकाइ सुनाए ॥

taahee ko roop nihaarat hee bachanaa tin sees jhukai sunaae ||

ਏਕ ਬਲੀ ਇਹ ਬੀਚ ਰਹੈ ਨਹੀ ਜਾਨਤ ਹੈ ਤਿਨ ਹੂੰ ਕਿ ਚੁਰਾਏ ॥

एक बली इह बीच रहै नही जानत है तिन हूँ कि चुराए ॥

ek balee ieh beech rahai nahee jaanat hai tin hoo(n) k churaae ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਬੀਚ ਧਸੇ ਜਲ ਕੇ ਕਰਿ ਕੋਪ ਦੁਹੂੰ ਮਿਲਿ ਸੰਖ ਬਜਾਏ ॥੮੮੭॥

सो सुनि बीच धसे जल के करि कोप दुहूँ मिलि संख बजाए ॥८८७॥

so sun beech dhase jal ke kar kop dhuhoo(n) mil sa(n)kh bajaae ||887||


ਬੀਚ ਧਸੇ ਜਲ ਕੇ ਜਬ ਹੀ ਇਕ ਰੂਪ ਭਯਾਨਕ ਦੈਤ ਨਿਹਾਰਿਯੋ ॥

बीच धसे जल के जब ही इक रूप भयानक दैत निहारियो ॥

beech dhase jal ke jab hee ik roop bhayaanak dhait nihaariyo ||

ਦੇਖਤ ਹੀ ਤਿਹ ਕੋਪ ਭਰੇ ਗਹਿ ਆਯੁਧ ਪਾਨਿ ਘਨੋ ਰਨ ਪਾਰਿਯੋ ॥

देखत ही तिह कोप भरे गहि आयुध पानि घनो रन पारियो ॥

dhekhat hee teh kop bhare geh aayudh paan ghano ran paariyo ||

ਜੁਧ ਭਯੋ ਦਿਨ ਬੀਸ ਤਹਾ ਤਿਹ ਕੋ ਜਸੁ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

जुध भयो दिन बीस तहा तिह को जसु पै कबि स्याम उचारियो ॥

judh bhayo dhin bees tahaa teh ko jas pai kab sayaam uchaariyo ||

ਜਿਉ ਮ੍ਰਿਗਰਾਜ ਮਰੈ ਮ੍ਰਿਗ ਕੋ ਤਿਮ ਸੋ ਕੁਪਿ ਕੈ ਜਦੁਬੀਰਿ ਪਛਾਰਿਯੋ ॥੮੮੮॥

जिउ मृगराज मरै मृग को तिम सो कुपि कै जदुबीरि पछारियो ॥८८८॥

jiau miragaraaj marai mirag ko tim so kup kai jadhubeer pachhaariyo ||888||


ਇਤਿ ਦੈਤ ਬਧਹ ॥

इति दैत बधह ॥

eit dhait badheh ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਰ ਕੈ ਰਾਕਸ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਤਿਹ ਕੇ ਉਰ ਤੇ ਹਰਿ ਸੰਖ ਨਿਕਾਰਿਯੋ ॥

मार कै राकस को तब ही तिह के उर ते हरि संख निकारियो ॥

maar kai raakas ko tab hee teh ke ur te har sa(n)kh nikaariyo ||

ਬੇਦਨ ਕੀ ਜਿਹ ਤੇ ਧੁਨਿ ਹੋਵਤ ਕਾਢਿ ਲੀਯੋ ਸੋਊ ਜੋ ਰਿਪੁ ਮਾਰਿਯੋ ॥

बेदन की जिह ते धुनि होवत काढि लीयो सोऊ जो रिपु मारियो ॥

bedhan kee jeh te dhun hovat kaadd leeyo souoo jo rip maariyo ||

ਤਉ ਹਰਿ ਜੂ ਮਨ ਆਨੰਦ ਕੈ ਸੁਤ ਸੂਰਜ ਕੇ ਪੁਰ ਮੋ ਪਗ ਧਾਰਿਯੋ ॥

तउ हरि जू मन आनंद कै सुत सूरज के पुर मो पग धारियो ॥

tau har joo man aana(n)dh kai sut sooraj ke pur mo pag dhaariyo ||

ਸੋ ਲਖ ਕੈ ਹਰਿ ਪਾਇ ਪਰਿਯੋ ਮਨ ਕੋ ਸਭ ਸੋਕ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰਿਯੋ ॥੮੮੯॥

सो लख कै हरि पाइ परियो मन को सभ सोक बिदा करि डारियो ॥८८९॥

so lakh kai har pai pariyo man ko sabh sok bidhaa kar ddaariyo ||889||


ਸੂਰਜ ਕੇ ਸੁਤ ਮੰਡਲ ਮੈ ਜਦੁ ਨੰਦਨ ਟੇਰਿ ਕਹਿਯੋ ਮੁਖ ਸੋਂ ॥

सूरज के सुत मंडल मै जदु नंदन टेरि कहियो मुख सों ॥

sooraj ke sut ma(n)ddal mai jadh na(n)dhan Ter kahiyo mukh so(n) ||

ਮੋ ਗੁਰ ਕੋ ਸੁਤ ਹਿਯਾ ਨ ਕਹੂੰ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਸੁ ਕਿਧੌ ਜਮ ਸੋਂ ॥

मो गुर को सुत हिया न कहूँ इह भाति कहियो सु किधौ जम सों ॥

mo gur ko sut hiyaa na kahoo(n) ieh bhaat kahiyo su kidhau jam so(n) ||

ਜਮ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਨ ਫਿਰੈ ਜਮ ਲੋਕ ਤੇ ਦੇਵਨ ਕੇ ਫੁਨਿ ਆਇਸ ਸੋਂ ॥

जम ऐसे कहियो न फिरै जम लोक ते देवन के फुनि आइस सों ॥

jam aaise kahiyo na firai jam lok te dhevan ke fun aais so(n) ||

ਤਬ ਹੀ ਹਰਿ ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਕਰਿ ਫੇਰਿ ਨ ਪੰਡਤ ਬਾਮਨ ਕੋ ਸੁਤ ਸੋਂ ॥੮੯੦॥

तब ही हरि देहु कहियो करि फेरि न पंडत बामन को सुत सों ॥८९०॥

tab hee har dheh kahiyo kar fer na pa(n)ddat baaman ko sut so(n) ||890||


ਜਮੁ ਆਇਸ ਪਾਇ ਕਿਧੌ ਹਰਿ ਤੇ ਹਰਿ ਕੇ ਸੋਊ ਪਾਇਨ ਆਨਿ ਲਗਾਯੋ ॥

जमु आइस पाइ किधौ हरि ते हरि के सोऊ पाइन आनि लगायो ॥

jam aais pai kidhau har te har ke souoo pain aan lagaayo ||

ਲੈ ਤਿਨ ਕੋ ਜਦੁਰਾਇ ਚਲਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥

लै तिन को जदुराइ चलियो अति ही अपने मन मै सुखु पायो ॥

lai tin ko jadhurai chaliyo at hee apane man mai sukh paayo ||


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