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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
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ਨਾਸ ਭਏ ਜਗ ਮੈ ਜਨ ਸੋ ਜਿਨਹੂ ਮਨ ਮੈ ਕੁਪ ਕੈ ਨਹਿ ਸੇਵੀ ॥

नास भए जग मै जन सो जिनहू मन मै कुप कै नहि सेवी ॥

naas bhe jag mai jan so jinahoo man mai kup kai neh sevee ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਹੇਤ ਚਲੇ ਤਜਿ ਕੈ ਪੁਰਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਗੋਪ ਸੁ ਪੂਜਨ ਦੇਵੀ ॥੭੫੭॥

ताही के हेत चले तजि कै पुरि ग्वारिन गोप सु पूजन देवी ॥७५७॥

taahee ke het chale taj kai pur gavaiaarin gop su poojan dhevee ||757||


ਆਠ ਭੁਜਾ ਜਿਹ ਕੀ ਜਗਿ ਮਾਲੁਮ ਸੁੰਭ ਸੰਘਾਰਨਿ ਨਾਮ ਜਿਸੀ ਕੋ ॥

आठ भुजा जिह की जगि मालुम सुँभ संघारनि नाम जिसी को ॥

aaTh bhujaa jeh kee jag maalum su(n)bh sa(n)ghaaran naam jisee ko ||

ਸਾਧਨ ਦੋਖਨ ਕੀ ਹਰਤਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਮਾਨਤ ਤ੍ਰਾਸ ਕਿਸੀ ਕੋ ॥

साधन दोखन की हरता कबि स्याम न मानत त्रास किसी को ॥

saadhan dhokhan kee harataa kab sayaam na maanat traas kisee ko ||

ਸਾਤ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲਨ ਸਾਤਨ ਫੈਲ ਰਹਿਓ ਜਸ ਨਾਮੁ ਇਸੀ ਕੋ ॥

सात अकास पतालन सातन फैल रहिओ जस नामु इसी को ॥

saat akaas pataalan saatan fail rahio jas naam isee ko ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਪੂਜਨ ਦ੍ਯੋਸ ਲਗਿਓ ਸਭ ਗੋਪ ਚਲੇ ਹਿਤ ਮਾਨਿ ਤਿਸੀ ਕੋ ॥੭੫੮॥

ताही को पूजन द्योस लगिओ सभ गोप चले हित मानि तिसी को ॥७५८॥

taahee ko poojan dhayos lagio sabh gop chale hit maan tisee ko ||758||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮਹਾਰੁਦ੍ਰ ਅਰੁ ਚੰਡਿ ਕੇ ਚਲੇ ਪੂਜਬੇ ਕਾਜ ॥

महारुद्र अरु चंडि के चले पूजबे काज ॥

mahaarudhr ar cha(n)dd ke chale poojabe kaaj ||

ਜਸੁਧਾ ਤ੍ਰੀਯਾ ਬਲਿਭਦ੍ਰ ਅਉ ਸੰਗ ਲੀਏ ਬ੍ਰਿਜਰਾਜ ॥੭੫੯॥

जसुधा त्रीया बलिभद्र अउ संग लीए बृजराज ॥७५९॥

jasudhaa treeyaa balibhadhr aau sa(n)g le'ee birajaraaj ||759||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪੂਜਨ ਕਾਜ ਚਲੈ ਤਜ ਕੈ ਪੁਰ ਗੋਪ ਸਭੈ ਮਨ ਮੈ ਹਰਖੇ ॥

पूजन काज चलै तज कै पुर गोप सभै मन मै हरखे ॥

poojan kaaj chalai taj kai pur gop sabhai man mai harakhe ||

ਗਹਿ ਅਛਤ ਧੂਪ ਪਚਾਮ੍ਰਿਤ ਦੀਪਕ ਸਾਮੁਹੇ ਚੰਡਿ ਸਿਵੈ ਸਰਖੇ ॥

गहि अछत धूप पचामृत दीपक सामुहे चंडि सिवै सरखे ॥

geh achhat dhoop pachaamirat dheepak saamuhe cha(n)dd sivai sarakhe ||

ਅਤਿ ਆਨੰਦ ਪ੍ਰਾਪਤਿ ਭੇ ਤਿਨ ਕੋ ਦੁਖ ਥੇ ਜੁ ਜਿਤੇ ਸਭ ਹੀ ਘਰਖੇ ॥

अति आनंद प्रापति भे तिन को दुख थे जु जिते सभ ही घरखे ॥

at aana(n)dh praapat bhe tin ko dhukh the ju jite sabh hee gharakhe ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਅਹੀਰਨ ਕੇ ਜੁ ਹੁਤੇ ਸੁਭ ਭਾਗ ਘਰੀ ਇਹ ਮੈ ਪਰਖੇ ॥੭੬੦॥

कबि स्याम अहीरन के जु हुते सुभ भाग घरी इह मै परखे ॥७६०॥

kab sayaam aheeran ke ju hute subh bhaag gharee ieh mai parakhe ||760||


ਏਕ ਭੁਜੰਗਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਬਾ ਕਹੁ ਲੀਲ ਲਯੋ ਤਨ ਨੈਕੁ ਨ ਛੋਰੈ ॥

एक भुजंगन कान्रह बबा कहु लील लयो तन नैकु न छोरै ॥

ek bhuja(n)gan kaanreh babaa kahu leel layo tan naik na chhorai ||

ਸ੍ਰਯਾਹ ਮਨੋ ਅਬਨੂਸਹਿ ਕੋ ਤਰੁ ਕੋਪ ਡਸਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਕਰਿ ਜੋਰੈ ॥

स्रयाह मनो अबनूसहि को तरु कोप डसियो अति ही करि जोरै ॥

srayaeh mano abanooseh ko tar kop ddasiyo at hee kar jorai ||

ਜਿਉ ਪੁਰ ਕੇ ਜਨ ਲਾਤਨ ਮਾਰਤ ਜੋਰ ਕਰੈ ਅਤਿ ਹੀ ਝਕ ਝੋਰੈ ॥

जिउ पुर के जन लातन मारत जोर करै अति ही झक झोरै ॥

jiau pur ke jan laatan maarat jor karai at hee jhak jhorai ||

ਹਾਰਿ ਪਰੇ ਸਭਨੋ ਮਿਲਿ ਕੈ ਤਬ ਕੂਕ ਕਰੀ ਭਗਵਾਨ ਕੀ ਓਰੈ ॥੭੬੧॥

हारि परे सभनो मिलि कै तब कूक करी भगवान की ओरै ॥७६१॥

haar pare sabhano mil kai tab kook karee bhagavaan kee orai ||761||


ਗੋਪ ਪੁਕਾਰਤ ਹੈ ਮਿਲਿ ਕੈ ਸਭ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਯੈ ॥

गोप पुकारत है मिलि कै सभ स्याम कहै मुसलीधर भयै ॥

gop pukaarat hai mil kai sabh sayaam kahai musaleedhar bhayai ||

ਦੋਖ ਕੋ ਹਰਤਾ ਕਰਤਾ ਸੁਖ ਆਵਹੁ ਟੇਰਤ ਦੈਤ ਮਰਯੈ ॥

दोख को हरता करता सुख आवहु टेरत दैत मरयै ॥

dhokh ko harataa karataa sukh aavahu Terat dhait marayai ||

ਮੋਹਿ ਗ੍ਰਸਿਯੋ ਅਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਡੇ ਹਮ ਰੋਵਹਿ ਯਾ ਬਧਿ ਕਾਰਜ ਕਯੈ ॥

मोहि ग्रसियो अहि स्याम बडे हम रोवहि या बधि कारज कयै ॥

moh grasiyo eh sayaam badde ham roveh yaa badh kaaraj kayai ||

ਰੋਗ ਭਏ ਜਿਮ ਬੈਦ ਬੁਲਈਅਤ ਭੀਰ ਪਰੇ ਜਿਮ ਬੀਰ ਬੁਲਯੈ ॥੭੬੨॥

रोग भए जिम बैद बुलईअत भीर परे जिम बीर बुलयै ॥७६२॥

rog bhe jim baidh bulieeat bheer pare jim beer bulayai ||762||


ਸੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਹਰਿ ਬਾਤ ਪਿਤਾ ਉਹ ਸਾਪਹਿ ਕੋ ਤਨ ਛੇਦ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥

सुनि स्रउनन मै हरि बात पिता उह सापहि को तन छेद करिओ है ॥

sun sraunan mai har baat pitaa uh saapeh ko tan chhedh kario hai ||

ਸਾਪ ਕੀ ਦੇਹ ਤਜੀ ਉਨ ਹੂੰ ਇਕ ਸੁੰਦਰ ਮਾਨੁਖ ਦੇਹ ਧਰਿਓ ਹੈ ॥

साप की देह तजी उन हूँ इक सुँदर मानुख देह धरिओ है ॥

saap kee dheh tajee un hoo(n) ik su(n)dhar maanukh dheh dhario hai ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੈ ਬਿਧਿ ਯਾ ਮੁਖ ਤੇ ਉਚਰਿਓ ਹੈ ॥

ता छबि को जस उच महा कबि नै बिधि या मुख ते उचरिओ है ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab nai bidh yaa mukh te uchario hai ||

ਮਾਨਹੁ ਪੁੰਨਿ ਪ੍ਰਤਾਪਨ ਤੇ ਸਸਿ ਛੀਨ ਲਯੋ ਰਿਪੁ ਦੂਰ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥੭੬੩॥

मानहु पुँनि प्रतापन ते ससि छीन लयो रिपु दूर करिओ है ॥७६३॥

maanahu pu(n)n prataapan te sas chheen layo rip dhoor kario hai ||763||


ਬਾਮਨ ਹੋਇ ਗਯੋ ਸੁ ਵਹੈ ਫੁਨਿ ਨਾਮ ਸੁਦਰਸਨ ਹੈ ਪੁਨਿ ਜਾ ਕੋ ॥

बामन होइ गयो सु वहै फुनि नाम सुदरसन है पुनि जा को ॥

baaman hoi gayo su vahai fun naam sudharasan hai pun jaa ko ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਬਤੀਯਾ ਹਸਿ ਕੈ ਤਿਹ ਸੋ ਕਹੁ ਰੇ ਤੈ ਠਉਰ ਕਹਾ ਕੋ ॥

कान्रह कही बतीया हसि कै तिह सो कहु रे तै ठउर कहा को ॥

kaanreh kahee bateeyaa has kai teh so kahu re tai Thaur kahaa ko ||

ਨੈਨ ਨਿਵਾਇ ਮਨੈ ਸੁਖ ਪਾਇ ਸੁ ਜੋਰਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰਿਓ ਕਰ ਤਾ ਕੋ ॥

नैन निवाइ मनै सुख पाइ सु जोरि प्रनाम करिओ कर ता को ॥

nain nivai manai sukh pai su jor pranaam kario kar taa ko ||

ਲੋਗਨ ਕੌ ਬਰਤਾ ਹਰਤਾ ਦੁਖ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਪਤਿ ਜੋ ਚਹੁੰ ਘਾ ਕੋ ॥੭੬੪॥

लोगन कौ बरता हरता दुख स्याम कहै पति जो चहुँ घा को ॥७६४॥

logan kau barataa harataa dhukh sayaam kahai pat jo chahu(n) ghaa ko ||764||


ਦਿਜ ਬਾਚ ॥

दिज बाच ॥

dhij baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅਤ੍ਰਿ ਰਿਖੀਸੁਰ ਕੇ ਸੁਤ ਕੋ ਅਤਿ ਹਾਸਿ ਕਰਿਓ ਤਿਹ ਸ੍ਰਾਪ ਦਯੋ ਹੈ ॥

अतृ रिखीसुर के सुत को अति हासि करिओ तिह स्राप दयो है ॥

atr rikheesur ke sut ko at haas kario teh sraap dhayo hai ||

ਜਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਤੂਅ ਸਾਪ ਸੁ ਹੋ ਬਚਨਾ ਉਨਿ ਯਾ ਬਿਧਿ ਮੋਹਿ ਕਹਿਓ ਹੈ ॥

जाहि कहियो तूअ साप सु हो बचना उनि या बिधि मोहि कहिओ है ॥

jaeh kahiyo tooa saap su ho bachanaa un yaa bidh moh kahio hai ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਸ੍ਰਾਪ ਲਗੇ ਹਮਰੇ ਤਨ ਬਾਮਨ ਤੇ ਅਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਯੋ ਹੈ ॥

ताही के स्राप लगे हमरे तन बामन ते अहि स्याम भयो है ॥

taahee ke sraap lage hamare tan baaman te eh sayaam bhayo hai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਤੁਮੈ ਤਨ ਛੂਵਤ ਹੀ ਤਨ ਕੋ ਸਭ ਪਾਪ ਪਰਾਇ ਗਯੋ ਹੈ ॥੭੬੫॥

कान्रह तुमै तन छूवत ही तन को सभ पाप पराइ गयो है ॥७६५॥

kaanreh tumai tan chhoovat hee tan ko sabh paap parai gayo hai ||765||


ਪੂਜਤ ਤੇ ਜਗ ਮਾਤ ਸਭੈ ਜਨ ਪੂਜਿ ਸਭੈ ਤਿਹ ਡੇਰਨ ਆਏ ॥

पूजत ते जग मात सभै जन पूजि सभै तिह डेरन आए ॥

poojat te jag maat sabhai jan pooj sabhai teh dderan aae ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਪਰਾਕ੍ਰਮ ਕੋ ਉਰਿ ਧਾਰਿ ਸਭੋ ਮਿਲਿ ਕੈ ਉਪਮਾ ਜਸ ਗਾਏ ॥

कान्रह पराक्रम को उरि धारि सभो मिलि कै उपमा जस गाए ॥

kaanreh paraakram ko ur dhaar sabho mil kai upamaa jas gaae ||

ਸੋਰਠਿ ਸਾਰੰਗ ਸੁਧ ਮਲਾਰ ਬਿਲਾਵਲ ਭੀਤਰ ਤਾਨ ਬਸਾਏ ॥

सोरठि सारंग सुध मलार बिलावल भीतर तान बसाए ॥

soraTh saara(n)g sudh malaar bilaaval bheetar taan basaae ||

ਰੀਝਿ ਰਹੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਸੁ ਸਭੈ ਜਨ ਰੀਝਿ ਰਹੇ ਜਿਨ ਹੂੰ ਸੁਨਿ ਪਾਏ ॥੭੬੬॥

रीझि रहे बृज के सु सभै जन रीझि रहे जिन हूँ सुनि पाए ॥७६६॥

reejh rahe biraj ke su sabhai jan reejh rahe jin hoo(n) sun paae ||766||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪੂਜਿ ਚੰਡ ਕੋ ਭਟ ਬਡੇ ਘਰਿ ਆਇ ਮਿਲਿ ਦੋਇ ॥

पूजि चंड को भट बडे घरि आइ मिलि दोइ ॥

pooj cha(n)dd ko bhaT badde ghar aai mil dhoi ||

ਅੰਨ ਖਾਇ ਕੈ ਮਾਤ ਤੇ ਰਹੇ ਸਦਨ ਮੈ ਸੋਇ ॥੭੬੭॥

अंन खाइ कै मात ते रहे सदन मै सोइ ॥७६७॥

a(n)n khai kai maat te rahe sadhan mai soi ||767||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਦਿਜ ਉਧਾਰ ਚੰਡਿ ਪੂਜ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे कृसनावतारे दिज उधार चंडि पूज धिआइ समापतम ॥

eit sree bachitr naaTake gra(n)the kirasanaavataare dhij udhaar cha(n)dd pooj dhiaai samaapatam ||


ਅਥ ਬ੍ਰਿਖਭਾਸੁਰ ਦੈਤ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ बृखभासुर दैत बध कथनं ॥

ath birakhabhaasur dhait badh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਭੋਜਨ ਕੈ ਜਸੁਧਾ ਪਹਿ ਤੇ ਭਟ ਰਾਤਿ ਪਰੇ ਸੋਊ ਸੋਇ ਰਹੈ ਹੈ ॥

भोजन कै जसुधा पहि ते भट राति परे सोऊ सोइ रहै है ॥

bhojan kai jasudhaa peh te bhaT raat pare souoo soi rahai hai ||

ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਬਨ ਬੀਚ ਗਏ ਉਠ ਕੈ ਜਹ ਡੋਲਤ ਸਿੰਘ ਸਹੈ ਹੈ ॥

प्रात भए बन बीच गए उठ कै जह डोलत सिंघ सहै है ॥

praat bhe ban beech ge uTh kai jeh ddolat si(n)gh sahai hai ||

ਬ੍ਰਿਖਭਾਸੁਰ ਥੋ ਤਿਹ ਠਉਰ ਖਰੋ ਜਿਹ ਕੇ ਦੋਊ ਸੀਂਗ ਅਕਾਸ ਖਹੇ ਹੈ ॥

बृखभासुर थो तिह ठउर खरो जिह के दोऊ सींग अकास खहे है ॥

birakhabhaasur tho teh Thaur kharo jeh ke dhouoo see(n)g akaas khahe hai ||

ਦੇਖ ਕੈ ਸੋ ਹਰਿ ਜੂ ਕੁਪ ਕੈ ਦੁਹੂੰ ਹਾਥਨ ਸੋ ਕਰਿ ਜੋਰੁ ਗਹੇ ਹੈ ॥੭੬੮॥

देख कै सो हरि जू कुप कै दुहूँ हाथन सो करि जोरु गहे है ॥७६८॥

dhekh kai so har joo kup kai dhuhoo(n) haathan so kar jor gahe hai ||768||


ਸੀਂਗਨ ਤੇ ਗਹਿ ਡਾਰ ਦਯੋ ਸੁ ਅਠਾਰਹ ਪੈਗ ਪੈ ਜਾਇ ਪਰਿਓ ਹੈ ॥

सींगन ते गहि डार दयो सु अठारह पैग पै जाइ परिओ है ॥

see(n)gan te geh ddaar dhayo su aThaareh paig pai jai pario hai ||

ਫੇਰਿ ਉਠਿਓ ਕਰਿ ਕੋਪ ਮਨੈ ਹਰਿ ਕੇ ਫਿਰਿ ਸਾਮੁਹ ਜੁਧੁ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥

फेरि उठिओ करि कोप मनै हरि के फिरि सामुह जुधु करिओ है ॥

fer uThio kar kop manai har ke fir saamuh judh kario hai ||

ਫੇਰ ਬਗਾਇ ਦੀਯੋ ਹਰਿ ਜੂ ਕਹੀ ਜਾਇ ਗਿਰਿਓ ਸੁ ਨਹੀ ਉਬਰਿਓ ਹੈ ॥

फेर बगाइ दीयो हरि जू कही जाइ गिरिओ सु नही उबरिओ है ॥

fer bagai dheeyo har joo kahee jai girio su nahee ubario hai ||

ਮੋਛ ਭਈ ਤਿਹ ਕੀ ਹਰਿ ਕੇ ਕਰ ਛੂਵਤ ਹੀ ਸੁ ਲਰਿਯੋ ਨ ਮਰਿਯੋ ਹੈ ॥੭੬੯॥

मोछ भई तिह की हरि के कर छूवत ही सु लरियो न मरियो है ॥७६९॥

mochh bhiee teh kee har ke kar chhoovat hee su lariyo na mariyo hai ||769||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਬ੍ਰਿਖਭਾਸੁਰ ਦੈਤ ਬਧਹ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे बृखभासुर दैत बधह धयाइ समापतम सत सुभम सत ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare birakhabhaasur dhait badheh dhayai samaapatam sat subham sat ||


ਅਥ ਕੇਸੀ ਦੈਤ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ केसी दैत बध कथनं ॥

ath kesee dhait badh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜੁਧ ਬਡੋ ਕਰ ਕੈ ਤਿਹ ਕੈ ਸੰਗ ਜਉ ਭਗਵਾਨ ਬਡੋ ਅਰਿ ਮਾਰਿਓ ॥

जुध बडो कर कै तिह कै संग जउ भगवान बडो अरि मारिओ ॥

judh baddo kar kai teh kai sa(n)g jau bhagavaan baddo ar maario ||

ਨਾਰਦ ਤਉ ਮਥੁਰਾ ਮੈ ਗਯੋ ਬਚਨਾ ਸੰਗ ਕੰਸ ਕੇ ਐਸੇ ਉਚਾਰਿਓ ॥

नारद तउ मथुरा मै गयो बचना संग कंस के ऐसे उचारिओ ॥

naaradh tau mathuraa mai gayo bachanaa sa(n)g ka(n)s ke aaise uchaario ||

ਤੂ ਭਗਨੀਪਤਿ ਨੰਦ ਸੁਤਾ ਹਰਿ ਤ੍ਵੈ ਰਿਪੁ ਵਾ ਘਰ ਭੀਤਰ ਡਾਰਿਓ ॥

तू भगनीपति नंद सुता हरि त्वै रिपु वा घर भीतर डारिओ ॥

too bhaganeepat na(n)dh sutaa har tavai rip vaa ghar bheetar ddaario ||

ਦੈਤ ਅਘਾਸੁਰ ਅਉ ਬਕ ਬੀਰ ਮਰਿਓ ਤਿਨ ਹੂੰ ਜਬ ਪਉਰਖ ਹਾਰਿਓ ॥੭੭੦॥

दैत अघासुर अउ बक बीर मरिओ तिन हूँ जब पउरख हारिओ ॥७७०॥

dhait aghaasur aau bak beer mario tin hoo(n) jab paurakh haario ||770||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਪ੍ਰਤਿ ਉਤਰ ॥

कंस बाच प्रति उतर ॥

ka(n)s baach prat utar ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੋਪ ਭਰਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਮਥੁਰਾਪਤਿ ਚਿੰਤ ਕਰੀ ਇਹ ਕੋ ਅਬ ਮਰੀਐ ॥

कोप भरियो मन मै मथुरापति चिंत करी इह को अब मरीऐ ॥

kop bhariyo man mai mathuraapat chi(n)t karee ieh ko ab mareeaai ||

ਇਹ ਕੀ ਸਮ ਕਾਰਜ ਅਉਰ ਕਛੂ ਨਹਿ ਤਾ ਬਧਿ ਆਪਨ ਊਬਰੀਐ ॥

इह की सम कारज अउर कछू नहि ता बधि आपन ऊबरीऐ ॥

eeh kee sam kaaraj aaur kachhoo neh taa badh aapan uoobareeaai ||

ਤਬ ਨਾਰਦ ਬੋਲਿ ਉਠਿਓ ਹਸਿ ਕੈ ਸੁਨੀਐ ਨ੍ਰਿਪ ਕਾਰਜ ਯਾ ਕਰੀਐ ॥

तब नारद बोलि उठिओ हसि कै सुनीऐ नृप कारज या करीऐ ॥

tab naaradh bol uThio has kai suneeaai nirap kaaraj yaa kareeaai ||

ਛਲ ਸੋ ਬਲ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਪਨੇ ਅਰਿ ਕੋ ਸਿਰ ਵਾ ਹਰੀਐ ॥੭੭੧॥

छल सो बल सो कबि स्याम कहै अपने अरि को सिर वा हरीऐ ॥७७१॥

chhal so bal so kab sayaam kahai apane ar ko sir vaa hareeaai ||771||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਨਾਰਦ ਸੋ ॥

कंस बाच नारद सो ॥

ka(n)s baach naaradh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਤਬ ਕੰਸ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਹੀ ਕਰਿ ਕੈ ਸੁਨੀਐ ਰਿਖਿ ਜੂ ਤੁਮ ਸਤਿ ਕਹੀ ਹੈ ॥

तब कंस प्रनाम कही करि कै सुनीऐ रिखि जू तुम सति कही है ॥

tab ka(n)s pranaam kahee kar kai suneeaai rikh joo tum sat kahee hai ||

ਵਾ ਕੀ ਬ੍ਰਿਥਾ ਰਜਨੀ ਦਿਨ ਮੈ ਹਮਰੈ ਮਨ ਮੈ ਬਸਿ ਕੈ ਸੁ ਰਹੀ ਹੈ ॥

वा की बृथा रजनी दिन मै हमरै मन मै बसि कै सु रही है ॥

vaa kee birathaa rajanee dhin mai hamarai man mai bas kai su rahee hai ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਓ ਅਘੁ ਦੈਤ ਬਲੀ ਬਕੁ ਪੂਤਨਾ ਜਾ ਥਨ ਜਾਇ ਗਹੀ ਹੈ ॥

जाहि मरिओ अघु दैत बली बकु पूतना जा थन जाइ गही है ॥

jaeh mario agh dhait balee bak pootanaa jaa than jai gahee hai ||

ਤਾ ਮਰੀਐ ਛਲ ਕੈ ਕਿਧੌ ਸੰਗਿ ਕਿ ਕੈ ਬਲ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਸਹੀ ਹੈ ॥੭੭੨॥

ता मरीऐ छल कै किधौ संगि कि कै बल कै इह बात सही है ॥७७२॥

taa mareeaai chhal kai kidhau sa(n)g k kai bal kai ieh baat sahee hai ||772||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਕੇਸੀ ਸੋ ॥

कंस बाच केसी सो ॥

ka(n)s baach kesee so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੁਨਿ ਤਉ ਮਿਲਿ ਕੈ ਨ੍ਰਿਪ ਸੋ ਗ੍ਰਿਹ ਗਯੋ ਤਬ ਕੰਸਿ ਬਲੀ ਇਕ ਦੈਤ ਬੁਲਾਯੋ ॥

मुनि तउ मिलि कै नृप सो गृह गयो तब कंसि बली इक दैत बुलायो ॥

mun tau mil kai nirap so gireh gayo tab ka(n)s balee ik dhait bulaayo ||

ਮਾਰਹੁ ਜਾਇ ਕਹਿਓ ਜਸੁਧਾ ਪੁਤ ਪੈ ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਪਠਾਯੋ ॥

मारहु जाइ कहिओ जसुधा पुत पै कहि कै इह भाति पठायो ॥

maarahu jai kahio jasudhaa put pai keh kai ieh bhaat paThaayo ||

ਪਾਛੈ ਤੇ ਪੈ ਭਗਨੀ ਭਗਨੀ ਪਤਿ ਡਾਰਿ ਜੰਜੀਰਨ ਧਾਮਿ ਰਖਾਯੋ ॥

पाछै ते पै भगनी भगनी पति डारि जंजीरन धामि रखायो ॥

paachhai te pai bhaganee bhaganee pat ddaar ja(n)jeeran dhaam rakhaayo ||

ਸੰਗਿ ਚੰਡੂਰ ਕਹਿਓ ਇਹ ਭੇਦ ਤਬੈ ਕੁਬਿਲਯਾ ਗਿਰਿ ਬੋਲਿ ਪਠਾਯੋ ॥੭੭੩॥

संगि चंडूर कहिओ इह भेद तबै कुबिलया गिरि बोलि पठायो ॥७७३॥

sa(n)g cha(n)ddoor kahio ieh bhedh tabai kubilayaa gir bol paThaayo ||773||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਅਕ੍ਰੂਰ ਸੋ ॥

कंस बाच अक्रूर सो ॥

ka(n)s baach akraoor so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਭਾਖ ਕਹੀ ਸੰਗ ਭ੍ਰਿਤਨ ਸੋ ਇਕ ਖੇਲਨ ਕੋ ਰੰਗ ਭੂਮਿ ਬਨਈਯੈ ॥

भाख कही संग भृतन सो इक खेलन को रंग भूमि बनईयै ॥

bhaakh kahee sa(n)g bhiratan so ik khelan ko ra(n)g bhoom banieeyai ||

ਸੰਗਿ ਚੰਡੂਰ ਕਹਿਯੋ ਮੁਸਟ ਕੈ ਦਰਵਾਜੇ ਬਿਖੈ ਗਜ ਕੋ ਥਿਰ ਕਈਯੈ ॥

संगि चंडूर कहियो मुसट कै दरवाजे बिखै गज को थिर कईयै ॥

sa(n)g cha(n)ddoor kahiyo musaT kai dharavaaje bikhai gaj ko thir kieeyai ||

ਬੋਲਿ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕਹੀ ਹਮਰੋ ਰਥ ਲੈ ਕਰਿ ਨੰਦ ਪੁਰੀ ਮਹਿ ਜਈਯੈ ॥

बोलि अक्रूर कही हमरो रथ लै करि नंद पुरी महि जईयै ॥

bol akraoor kahee hamaro rath lai kar na(n)dh puree meh jieeyai ||

ਜਗ ਅਬੈ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹ ਹੈ ਇਹ ਬਾਤਨ ਕੋ ਕਰ ਕੈ ਹਰਿ ਲਿਅਈਯੈ ॥੭੭੪॥

जग अबै हमरे गृह है इह बातन को कर कै हरि लिअईयै ॥७७४॥

jag abai hamare gireh hai ieh baatan ko kar kai har lieeyai ||774||


ਜਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਅਕ੍ਰੂਰਹਿ ਕੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪੁਰਿ ਮੈ ਅਤਿ ਕੋਪਹਿ ਸਿਉ ਤਾ ॥

जाहि कहियो अक्रूरहि को बृज के पुरि मै अति कोपहि सिउ ता ॥

jaeh kahiyo akraooreh ko biraj ke pur mai at kopeh siau taa ||

ਜਗ ਅਬੈ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹ ਹੈ ਰਿਝਵਾਇ ਕੈ ਲ੍ਯਾਵਹੁ ਵਾ ਕਹਿ ਇਉ ਤਾ ॥

जग अबै हमरे गृह है रिझवाइ कै ल्यावहु वा कहि इउ ता ॥

jag abai hamare gireh hai rijhavai kai layaavahu vaa keh iau taa ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਉਪਜਿਯੋ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਬਿਉਤਾ ॥

ता छबि को जसु उच महा उपजियो कबि के मन मै बिउता ॥

taa chhab ko jas uch mahaa upajiyo kab ke man mai biautaa ||

ਜਿਉ ਬਨ ਬੀਚ ਹਰੇ ਮ੍ਰਿਤ ਕੇ ਸੁ ਪਠਿਯੋ ਮ੍ਰਿਗਵਾ ਕਹਿ ਕੇਹਰਿ ਨਿਉਤਾ ॥੭੭੫॥

जिउ बन बीच हरे मृत के सु पठियो मृगवा कहि केहरि निउता ॥७७५॥

jiau ban beech hare mirat ke su paThiyo miragavaa keh kehar niautaa ||775||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਨ੍ਰਿਪ ਭੇਜਿਯੋ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕਹੁ ਹਰਿ ਮਾਰਨ ਕੇ ਘਾਤ ॥

नृप भेजियो अक्रूर कहु हरि मारन के घात ॥

nirap bhejiyo akraoor kahu har maaran ke ghaat ||

ਅਬ ਬਧ ਕੇਸੀ ਕੀ ਕਥਾ ਭਈ ਕਹੋ ਸੋਈ ਬਾਤ ॥੭੭੬॥

अब बध केसी की कथा भई कहो सोई बात ॥७७६॥

ab badh kesee kee kathaa bhiee kaho soiee baat ||776||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪ੍ਰਾਤ ਚਲਿਯੋ ਤਹ ਕੋ ਉਠਿ ਸੋ ਰਿਪੁ ਹ੍ਵੈ ਹਯ ਦੀਰਘ ਪੈ ਤਹ ਆਯੋ ॥

प्रात चलियो तह को उठि सो रिपु ह्वै हय दीरघ पै तह आयो ॥

praat chaliyo teh ko uTh so rip havai hay dheeragh pai teh aayo ||

ਦੇਖਤ ਜਾਹਿ ਦਿਨੇਸ ਡਰਿਓ ਮਘਵਾ ਜਿਹ ਪੇਖਤ ਹੀ ਡਰ ਪਾਯੋ ॥

देखत जाहि दिनेस डरिओ मघवा जिह पेखत ही डर पायो ॥

dhekhat jaeh dhines ddario maghavaa jeh pekhat hee ddar paayo ||

ਗ੍ਵਾਰ ਡਰੇ ਤਿਹ ਦੇਖਤ ਹੀ ਹਰਿ ਪਾਇਨ ਊਪਰ ਸੀਸ ਝੁਕਾਯੋ ॥

ग्वार डरे तिह देखत ही हरि पाइन ऊपर सीस झुकायो ॥

gavaiaar ddare teh dhekhat hee har pain uoopar sees jhukaayo ||

ਧੀਰ ਭਯੋ ਜਦੁਰਾਇ ਤਬੈ ਤਿਹ ਸੋ ਕੁਪ ਕੈ ਰਨ ਦੁੰਦ ਮਚਾਯੋ ॥੭੭੭॥

धीर भयो जदुराइ तबै तिह सो कुप कै रन दुँद मचायो ॥७७७॥

dheer bhayo jadhurai tabai teh so kup kai ran dhu(n)dh machaayo ||777||


ਕੋਪ ਭਯੋ ਰਿਪੁ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਤਬ ਪਾਉ ਕੀ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਚੋਟ ਚਲਾਈ ॥

कोप भयो रिपु के मन मै तब पाउ की कान्रह को चोट चलाई ॥

kop bhayo rip ke man mai tab paau kee kaanreh ko choT chalaiee ||

ਦੀਨ ਨ ਲਾਗਨ ਸ੍ਯਾਮ ਤਨੈ ਸੁ ਭਲੀ ਬਿਧਿ ਸੋ ਜਦੁਰਾਇ ਬਚਾਈ ॥

दीन न लागन स्याम तनै सु भली बिधि सो जदुराइ बचाई ॥

dheen na laagan sayaam tanai su bhalee bidh so jadhurai bachaiee ||

ਫੇਰਿ ਗਹਿਓ ਸੋਊ ਪਾਇਨ ਤੇ ਕਰ ਮੋ ਨ ਰਹਿਯੋ ਸੁ ਦਯੋ ਹੈ ਬਗਾਈ ॥

फेरि गहिओ सोऊ पाइन ते कर मो न रहियो सु दयो है बगाई ॥

fer gahio souoo pain te kar mo na rahiyo su dhayo hai bagaiee ||

ਜਿਉ ਲਰਕਾ ਬਟ ਫੈਕਤ ਹੈ ਤਿਮ ਚਾਰ ਸੈ ਪੈਗ ਪਰਿਓ ਸੋਊ ਜਾਈ ॥੭੭੮॥

जिउ लरका बट फैकत है तिम चार सै पैग परिओ सोऊ जाई ॥७७८॥

jiau larakaa baT faikat hai tim chaar sai paig pario souoo jaiee ||778||


ਫੇਰਿ ਸੰਭਾਰਿ ਤਬੈ ਬਲ ਵਾ ਰਿਪੁ ਤੁੰਡ ਪਸਾਰਿ ਹਰਿ ਊਪਰਿ ਧਾਯੋ ॥

फेरि संभारि तबै बल वा रिपु तुँड पसारि हरि ऊपरि धायो ॥

fer sa(n)bhaar tabai bal vaa rip tu(n)dd pasaar har uoopar dhaayo ||

ਲੋਚਨ ਕਾਢਿ ਬਡੇ ਡਰਵਾਨ ਕਿਧੌ ਜਿਨ ਤੇ ਨਭ ਲੋਕ ਡਰਾਯੋ ॥

लोचन काढि बडे डरवान किधौ जिन ते नभ लोक डरायो ॥

lochan kaadd badde ddaravaan kidhau jin te nabh lok ddaraayo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਦਯੋ ਤਿਹ ਕੇ ਮੁਖ ਮੈ ਕਰ ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਮਨ ਮੈ ਜਸ ਭਾਯੋ ॥

स्याम दयो तिह के मुख मै कर ता छबि को मन मै जस भायो ॥

sayaam dhayo teh ke mukh mai kar taa chhab ko man mai jas bhaayo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਹੈ ਕਰ ਕਾਲ ਮਨੋ ਤਨ ਕੇਸੀ ਤੇ ਪ੍ਰਾਨ ਨਿਕਾਸਨ ਆਯੋ ॥੭੭੯॥

कान्रह को है कर काल मनो तन केसी ते प्रान निकासन आयो ॥७७९॥

kaanreh ko hai kar kaal mano tan kesee te praan nikaasan aayo ||779||


ਤਿਨਿ ਬਾਹ ਕਟੀ ਹਰਿ ਦਾਤਨ ਸੋ ਤਿਹ ਕੇ ਸਭ ਦਾਤ ਤਬੈ ਝਰ ਗੇ ॥

तिनि बाह कटी हरि दातन सो तिह के सभ दात तबै झर गे ॥

tin baeh kaTee har dhaatan so teh ke sabh dhaat tabai jhar ge ||

ਜੋਊ ਆਇ ਮਨੋਰਥ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਸਮ ਓਰਨ ਕੀ ਸੋਊ ਹੈ ਗਰ ਗੇ ॥

जोऊ आइ मनोरथ कै मन मै सम ओरन की सोऊ है गर गे ॥

jouoo aai manorath kai man mai sam oran kee souoo hai gar ge ||

ਤਬ ਹੀ ਸੋਊ ਜੂਝਿ ਪਰੋ ਛਿਤ ਪੈ ਨ ਸੋਊ ਫਿਰ ਕੈ ਅਪੁਨੇ ਘਰ ਗੇ ॥

तब ही सोऊ जूझि परो छित पै न सोऊ फिर कै अपुने घर गे ॥

tab hee souoo joojh paro chhit pai na souoo fir kai apune ghar ge ||

ਅਬ ਕਾਨਰ ਕੇ ਕਰ ਲਾਗਤ ਹੀ ਮਰਿ ਗਯੋ ਵਹ ਪਾਪ ਸਭੈ ਹਰ ਗੇ ॥੭੮੦॥

अब कानर के कर लागत ही मरि गयो वह पाप सभै हर गे ॥७८०॥

ab kaanar ke kar laagat hee mar gayo veh paap sabhai har ge ||780||


ਰਾਵਨ ਜਾ ਬਿਧਿ ਰਾਮ ਮਰਿਓ ਬਿਧਿ ਜੋ ਕਰ ਕੈ ਨਰਕਾਸੁਰ ਮਾਰਿਯੋ ॥

रावन जा बिधि राम मरिओ बिधि जो कर कै नरकासुर मारियो ॥

raavan jaa bidh raam mario bidh jo kar kai narakaasur maariyo ||

ਜਿਉ ਪ੍ਰਹਲਾਦ ਕੇ ਰਛਨ ਕੋ ਹਰਿਨਾਕਸ ਮਾਰਿ ਡਰਿਓ ਨ ਉਬਾਰਿਯੋ ॥

जिउ प्रहलाद के रछन को हरिनाकस मारि डरिओ न उबारियो ॥

jiau prahalaadh ke rachhan ko harinaakas maar ddario na ubaariyo ||

ਜਿਉ ਮਧੁ ਕੈਟ ਮਰੇ ਕਰਿ ਚਕ੍ਰ ਲੈ ਪਾਵਕ ਲੀਲ ਲਈ ਡਰੁ ਟਾਰਯੋ ॥

जिउ मधु कैट मरे करि चक्र लै पावक लील लई डरु टारयो ॥

jiau madh kaiT mare kar chakr lai paavak leel liee ddar Taarayo ||

ਤਿਉ ਹਰਿ ਸੰਤਨ ਰਾਖਨ ਕੋ ਕਰਿ ਕੈ ਅਪਨੋ ਬਲ ਦੈਤ ਪਛਾਰਿਯੋ ॥੭੮੧॥

तिउ हरि संतन राखन को करि कै अपनो बल दैत पछारियो ॥७८१॥

tiau har sa(n)tan raakhan ko kar kai apano bal dhait pachhaariyo ||781||


ਮਾਰਿ ਬਡੇ ਰਿਪੁ ਕੋ ਹਰਿ ਜੂ ਸੰਗਿ ਗਊਅਨ ਲੈ ਸੁ ਗਏ ਬਨ ਮੈ ॥

मारि बडे रिपु को हरि जू संगि गऊअन लै सु गए बन मै ॥

maar badde rip ko har joo sa(n)g guooan lai su ge ban mai ||

ਮਨ ਸੋਕ ਸਭੈ ਹਰਿ ਕੈ ਸਬ ਹੀ ਅਤਿ ਕੈ ਫੁਨਿ ਆਨੰਦ ਪੈ ਤਨ ਮੈ ॥

मन सोक सभै हरि कै सब ही अति कै फुनि आनंद पै तन मै ॥

man sok sabhai har kai sab hee at kai fun aana(n)dh pai tan mai ||

ਫੁਨਿ ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਉਪਜੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਇਉ ਮਨ ਮੈ ॥

फुनि ता छबि की अति ही उपमा उपजी कबि स्याम के इउ मन मै ॥

fun taa chhab kee at hee upamaa upajee kab sayaam ke iau man mai ||

ਜਿਮ ਸਿੰਘ ਬਡੋ ਮ੍ਰਿਗ ਜਾਨਿ ਬਧਿਓ ਛਲ ਸੋ ਮ੍ਰਿਗਵਾ ਕੇ ਮਨੋ ਗਨ ਮੈ ॥੭੮੨॥

जिम सिंघ बडो मृग जानि बधिओ छल सो मृगवा के मनो गन मै ॥७८२॥

jim si(n)gh baddo mirag jaan badhio chhal so miragavaa ke mano gan mai ||782||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਕੇਸੀ ਬਧਹਿ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे केसी बधहि धयाइ समापतम सतु सुभम सतु ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare kesee badheh dhayai samaapatam sat subham sat ||


ਅਥ ਨਾਰਦ ਜੂ ਕ੍ਰਿਸਨ ਪਹਿ ਆਏ ॥

अथ नारद जू कृसन पहि आए ॥

ath naaradh joo kirasan peh aae ||

ਅੜਿਲ ॥

अड़िल ॥

aRil ||

ਤਬ ਨਾਰਦ ਚਲਿ ਗਯੋ ਨਿਕਟਿ ਭਟ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕੇ ॥

तब नारद चलि गयो निकटि भट कृसन के ॥

tab naaradh chal gayo nikaT bhaT kirasan ke ||

ਕਰੀ ਉਦਰ ਪੂਰਨਾ ਮਨੋ ਹਿਤ ਤਿਸਨ ਕੇ ॥

करी उदर पूरना मनो हित तिसन के ॥

karee udhar pooranaa mano hit tisan ke ||

ਰਹਿਓ ਮੁਨੀ ਸਿਰ ਨ੍ਯਾਇ ਸ੍ਯਾਮ ਤਰਿ ਪਗਨ ਕੇ ॥

रहिओ मुनी सिर न्याइ स्याम तरि पगन के ॥

rahio munee sir nayai sayaam tar pagan ke ||

ਹੋ ਮਨਿ ਬਿਚਾਰਿ ਕਹਿਯੋ ਸ੍ਯਾਮ ਮਹਾ ਸੰਗਿ ਲਗਨ ਕੇ ॥੭੮੩॥

हो मनि बिचारि कहियो स्याम महा संगि लगन के ॥७८३॥

ho man bichaar kahiyo sayaam mahaa sa(n)g lagan ke ||783||


ਮੁਨਿ ਨਾਰਦ ਜੂ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

मुनि नारद जू बाच कान्रह्रह जू सो ॥

mun naaradh joo baach kaanrahreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅਕ੍ਰੂਰ ਕੇ ਅਗ੍ਰ ਹੀ ਜਾ ਹਰਿ ਸੋ ਮੁਨਿ ਪਾ ਪਰਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਸੁਨਾਈ ॥

अक्रूर के अग्र ही जा हरि सो मुनि पा परि कै इह बात सुनाई ॥

akraoor ke agr hee jaa har so mun paa par kai ieh baat sunaiee ||

ਰੀਝ ਰਹਿਓ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਸੁ ਨਿਹਾਰਿ ਕੈ ਸੁੰਦਰ ਰੂਪ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥

रीझ रहिओ अपुने मन मै सु निहारि कै सुँदर रूप कन्रहाई ॥

reejh rahio apune man mai su nihaar kai su(n)dhar roop kanrahaiee ||

ਬੀਰ ਬਡੋ ਰਨ ਬੀਚ ਹਨੋ ਤੁਮ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

बीर बडो रन बीच हनो तुम ऐसे कहियो अति ही छबि पाई ॥

beer baddo ran beech hano tum aaise kahiyo at hee chhab paiee ||

ਆਯੋ ਹੋ ਹਉ ਸੁ ਘਨੇ ਰਿਪ ਘੇਰਿ ਸਿਕਾਰ ਕੀ ਭਾਤਿ ਬਧੋ ਤਿਨ ਜਾਈ ॥੭੮੪॥

आयो हो हउ सु घने रिप घेरि सिकार की भाति बधो तिन जाई ॥७८४॥

aayo ho hau su ghane rip gher sikaar kee bhaat badho tin jaiee ||784||


ਤਬ ਹਉ ਉਪਮਾ ਤੁਮਰੀ ਕਰਹੋ ਕੁਬਲਿਯਾ ਗਿਰ ਕੋ ਤੁਮ ਜੋ ਮਰਿਹੋ ॥

तब हउ उपमा तुमरी करहो कुबलिया गिर को तुम जो मरिहो ॥

tab hau upamaa tumaree karaho kubaliyaa gir ko tum jo mariho ||

ਮੁਸਟਕ ਬਲ ਸਾਥ ਚੰਡੂਰਹਿ ਸੋ ਰੰਗਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਬਧ ਜਉ ਕਰਿਹੋ ॥

मुसटक बल साथ चंडूरहि सो रंगभूमि बिखै बध जउ करिहो ॥

musaTak bal saath cha(n)ddooreh so ra(n)gabhoom bikhai badh jau kariho ||

ਫਿਰਿ ਕੰਸ ਬਡੇ ਅਪੁਨੇ ਰਿਪੁ ਕੋ ਗਹਿ ਕੇਸ ਤੇ ਪ੍ਰਾਨਨ ਕੋ ਹਰਿਹੋ ॥

फिरि कंस बडे अपुने रिपु को गहि केस ते प्रानन को हरिहो ॥

fir ka(n)s badde apune rip ko geh kes te praanan ko hariho ||

ਰਿਪੁ ਮਾਰਿ ਘਨੇ ਬਨ ਆਸੁਰ ਕੋ ਕਰਿ ਕਾਟਿ ਸਭੈ ਧਰ ਪੈ ਡਰਿਹੋ ॥੭੮੫॥

रिपु मारि घने बन आसुर को करि काटि सभै धर पै डरिहो ॥७८५॥

rip maar ghane ban aasur ko kar kaaT sabhai dhar pai ddariho ||785||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਇਹ ਕਹਿ ਨਾਰਦ ਕ੍ਰਿਸਨ ਸੋ ਬਿਦਾ ਭਯੋ ਮਨ ਮਾਹਿ ॥

इह कहि नारद कृसन सो बिदा भयो मन माहि ॥

eeh keh naaradh kirasan so bidhaa bhayo man maeh ||

ਅਬ ਦਿਨ ਕੰਸਹਿ ਕੇ ਕਹਿਯੋ ਮ੍ਰਿਤ ਕੇ ਫੁਨਿ ਨਿਜਕਾਹਿ ॥੭੮੬॥

अब दिन कंसहि के कहियो मृत के फुनि निजकाहि ॥७८६॥

ab dhin ka(n)seh ke kahiyo mirat ke fun nijakaeh ||786||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਮੁਨਿ ਨਾਰਦ ਜੂ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜੂ ਕੋ ਸਭ ਭੇਦ ਦੇਇ ਫਿਰਿ ਬਿਦਿਆ ਭਏ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे मुनि नारद जू कृसन जू को सभ भेद देइ फिरि बिदिआ भए धयाइ समापतम सतु सुभम सतु ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare mun naaradh joo kirasan joo ko sabh bhedh dhei fir bidhiaa bhe dhayai samaapatam sat subham sat ||


ਅਥ ਬਿਸ੍ਵਾਸੁਰ ਦੈਤ ਜੁਧ ॥

अथ बिस्वासुर दैत जुध ॥

ath bisavaiaasur dhait judh ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਖੇਲਤ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਕ੍ਰਿਸਨ ਆਦਿ ਨਿਰੰਜਨ ਸੋਇ ॥

खेलत ग्वारनि सो कृसन आदि निरंजन सोइ ॥

khelat gavaiaaran so kirasan aadh nira(n)jan soi ||

ਹ੍ਵੈ ਮੇਢਾ ਤਸਕਰ ਕੋਊ ਕੋਊ ਪਹਰੂਆ ਹੋਇ ॥੭੮੭॥

ह्वै मेढा तसकर कोऊ कोऊ पहरूआ होइ ॥७८७॥

havai meddaa tasakar kouoo kouoo paharooaa hoi ||787||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੇਸਵ ਜੂ ਸੰਗ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਸੁਭ ਖੇਲ ਮਚਾਯੋ ॥

केसव जू संग ग्वारनि के बृज भूमि बिखै सुभ खेल मचायो ॥

kesav joo sa(n)g gavaiaaran ke biraj bhoom bikhai subh khel machaayo ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਦੇਖਿ ਤਬੈ ਬਿਸ੍ਵਾਸੁਰ ਹ੍ਵੈ ਚੁਰਵਾ ਤਿਨ ਭਛਨਿ ਆਯੋ ॥

ग्वारनि देखि तबै बिस्वासुर ह्वै चुरवा तिन भछनि आयो ॥

gavaiaaran dhekh tabai bisavaiaasur havai churavaa tin bhachhan aayo ||

ਗ੍ਵਾਰ ਹਰੇ ਹਰਿ ਕੇ ਬਹੁਤੇ ਤਿਹ ਕੋ ਫਿਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਜੂ ਲਖਿ ਪਾਯੋ ॥

ग्वार हरे हरि के बहुते तिह को फिरि कै हरि जू लखि पायो ॥

gavaiaar hare har ke bahute teh ko fir kai har joo lakh paayo ||

ਧਾਇ ਕੈ ਤਾਹੀ ਕੀ ਗ੍ਰੀਵ ਗਹੀ ਬਲ ਸੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਯੋ ॥੭੮੮॥

धाइ कै ताही की ग्रीव गही बल सो धरनी पर मारि गिरायो ॥७८८॥

dhai kai taahee kee greev gahee bal so dharanee par maar giraayo ||788||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਿਸ੍ਵਾਸੁਰ ਕੋ ਸਮਾਰ ਕੈ ਕਰਿ ਸਾਧਨ ਕੇ ਕਾਮ ॥

बिस्वासुर को समार कै करि साधन के काम ॥

bisavaiaasur ko samaar kai kar saadhan ke kaam ||

ਹਲੀ ਸੰਗ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰ ਲੈ ਆਏ ਨਿਸਿ ਕੋ ਧਾਮਿ ॥੭੮੯॥

हली संग सभ ग्वार लै आए निसि को धामि ॥७८९॥

halee sa(n)g sabh gavaiaar lai aae nis ko dhaam ||789||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਬਿਸ੍ਵਾਸੁਰ ਦੈਤ ਬਧਹ ਧਯਾਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे किसनावतारे बिस्वासुर दैत बधह धयाइ समापतम ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kisanaavataare bisavaiaasur dhait badheh dhayai samaapatam ||


ਅਥ ਹਰਿ ਕੋ ਅਕ੍ਰੂਰ ਮਥਰਾ ਕੋ ਲੈ ਜੈਬੋ ॥

अथ हरि को अक्रूर मथरा को लै जैबो ॥

ath har ko akraoor matharaa ko lai jaibo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਿਪੁ ਕੋ ਹਰਿ ਮਾਰਿ ਗਏ ਜਬ ਹੀ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕਿਧੌ ਚਲ ਕੈ ਤਹਿ ਆਯੋ ॥

रिपु को हरि मारि गए जब ही अक्रूर किधौ चल कै तहि आयो ॥

rip ko har maar ge jab hee akraoor kidhau chal kai teh aayo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੋ ਦੇਖਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰਿਓ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥

स्याम को देखि प्रनाम करिओ अपने मन मै अति ही सुखु पायो ॥

sayaam ko dhekh pranaam kario apane man mai at hee sukh paayo ||

ਕੰਸ ਕਹੀ ਸੋਊ ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਜਦੁਰਾ ਅਪੁਨੇ ਹਿਤ ਸਾਥ ਰਿਝਾਯੋ ॥

कंस कही सोऊ कै बिनती जदुरा अपुने हित साथ रिझायो ॥

ka(n)s kahee souoo kai binatee jadhuraa apune hit saath rijhaayo ||

ਅੰਕੁਸ ਸੋ ਗਜ ਜਿਉ ਫਿਰੀਯੈ ਹਰਿ ਕੋ ਤਿਮ ਬਾਤਨ ਤੇ ਹਿਰਿ ਲਿਆਯੋ ॥੭੯੦॥

अंकुस सो गज जिउ फिरीयै हरि को तिम बातन ते हिरि लिआयो ॥७९०॥

a(n)kus so gaj jiau fireeyai har ko tim baatan te hir liaayo ||790||


ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਤਿਹ ਕੀ ਹਰਿ ਜੂ ਪਿਤ ਧਾਮਿ ਗਏ ਇਹ ਬਾਤ ਸੁਨਾਈ ॥

सुनि कै बतीया तिह की हरि जू पित धामि गए इह बात सुनाई ॥

sun kai bateeyaa teh kee har joo pit dhaam ge ieh baat sunaiee ||

ਮੋਹਿ ਅਬੈ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕੈ ਹਾਥਿ ਬੁਲਾਇ ਪਠਿਓ ਮਥੁਰਾ ਹੂੰ ਕੇ ਰਾਈ ॥

मोहि अबै अक्रूर कै हाथि बुलाइ पठिओ मथुरा हूँ के राई ॥

moh abai akraoor kai haath bulai paThio mathuraa hoo(n) ke raiee ||

ਪੇਖਤ ਹੀ ਤਿਹ ਮੂਰਤਿ ਨੰਦ ਕਹੀ ਤੁਮਰੇ ਤਨ ਹੈ ਕੁਸਰਾਈ ॥

पेखत ही तिह मूरति नंद कही तुमरे तन है कुसराई ॥

pekhat hee teh moorat na(n)dh kahee tumare tan hai kusaraiee ||

ਕਾਹੇ ਕੀ ਹੈ ਕੁਸਰਾਤ ਕਹਿਯੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬੁਲਿਓ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਾਈ ॥੭੯੧॥

काहे की है कुसरात कहियो इह भाति बुलिओ मुसलीधर भाई ॥७९१॥

kaahe kee hai kusaraat kahiyo ieh bhaat bulio musaleedhar bhaiee ||791||


ਅਥ ਮਥੁਰਾ ਮੈ ਹਰਿ ਕੋ ਆਗਮ ॥

अथ मथुरा मै हरि को आगम ॥

ath mathuraa mai har ko aagam ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਸੰਗਿ ਗ੍ਵਾਰਨ ਲੈ ਬ੍ਰਿਜਰਾਜ ਚਲਿਯੋ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ਤਬੈ ॥

सुनि कै बतीया संगि ग्वारन लै बृजराज चलियो मथुरा को तबै ॥

sun kai bateeyaa sa(n)g gavaiaaran lai birajaraaj chaliyo mathuraa ko tabai ||

ਬਕਰੇ ਅਤਿ ਲੈ ਪੁਨਿ ਛੀਰ ਘਨੋ ਧਰ ਕੈ ਮੁਸਲੀਧਰ ਸ੍ਯਾਮ ਅਗੈ ॥

बकरे अति लै पुनि छीर घनो धर कै मुसलीधर स्याम अगै ॥

bakare at lai pun chheer ghano dhar kai musaleedhar sayaam agai ||

ਤਿਹ ਦੇਖਤ ਹੀ ਸੁਖ ਹੋਤ ਘਨੋ ਤਨ ਕੋ ਜਿਹ ਦੇਖਤ ਪਾਪ ਭਗੈ ॥

तिह देखत ही सुख होत घनो तन को जिह देखत पाप भगै ॥

teh dhekhat hee sukh hot ghano tan ko jeh dhekhat paap bhagai ||

ਮਨੋ ਗ੍ਵਾਰਨ ਕੋ ਬਨ ਸੁੰਦਰ ਮੈ ਸਮ ਕੇਹਰਿ ਕੀ ਜਦੁਰਾਇ ਲਗੈ ॥੭੯੨॥

मनो ग्वारन को बन सुँदर मै सम केहरि की जदुराइ लगै ॥७९२॥

mano gavaiaaran ko ban su(n)dhar mai sam kehar kee jadhurai lagai ||792||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮਥੁਰਾ ਹਰਿ ਕੇ ਜਾਨ ਕੀ ਸੁਨੀ ਜਸੋਧਾ ਬਾਤ ॥

मथुरा हरि के जान की सुनी जसोधा बात ॥

mathuraa har ke jaan kee sunee jasodhaa baat ||

ਤਬੈ ਲਗੀ ਰੋਦਨ ਕਰਨ ਭੂਲਿ ਗਈ ਸੁਧ ਸਾਤ ॥੭੯੩॥

तबै लगी रोदन करन भूलि गई सुध सात ॥७९३॥

tabai lagee rodhan karan bhool giee sudh saat ||793||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰੋਵਨ ਲਾਗ ਜਬੈ ਜਸੁਧਾ ਅਪੁਨੇ ਮੁਖਿ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਭਾਖੈ ॥

रोवन लाग जबै जसुधा अपुने मुखि ते इह भाति सो भाखै ॥

rovan laag jabai jasudhaa apune mukh te ieh bhaat so bhaakhai ||

ਕੋ ਹੈ ਹਿਤੂ ਹਮਰੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਚਲਤੇ ਹਰਿ ਕੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਫਿਰਿ ਰਾਖੈ ॥

को है हितू हमरो बृज मै चलते हरि को बृज मै फिरि राखै ॥

ko hai hitoo hamaro biraj mai chalate har ko biraj mai fir raakhai ||

ਐਸੋ ਕੋ ਢੀਠ ਕਰੈ ਜੀਯ ਮੋ ਨ੍ਰਿਪ ਸਾਮੁਹਿ ਜਾ ਬਤੀਯਾ ਇਹ ਭਾਖੈ ॥

ऐसो को ढीठ करै जीय मो नृप सामुहि जा बतीया इह भाखै ॥

aaiso ko ddeeTh karai jeey mo nirap saamuh jaa bateeyaa ieh bhaakhai ||

ਸੋਕ ਭਰੀ ਮੁਰਝਾਇ ਗਿਰੀ ਧਰਨੀ ਪਰ ਸੋ ਬਤੀਯਾ ਨਹਿ ਭਾਖੈ ॥੭੯੪॥

सोक भरी मुरझाइ गिरी धरनी पर सो बतीया नहि भाखै ॥७९४॥

sok bharee murajhai giree dharanee par so bateeyaa neh bhaakhai ||794||


ਬਾਰਹ ਮਾਸ ਰਖਿਯੋ ਉਦਰੈ ਮਹਿ ਤੇਰਹਿ ਮਾਸ ਭਏ ਜੋਊ ਜਈਯਾ ॥

बारह मास रखियो उदरै महि तेरहि मास भए जोऊ जईया ॥

baareh maas rakhiyo udharai meh tereh maas bhe jouoo jieeyaa ||

ਪਾਲਿ ਬਡੋ ਜੁ ਕਰਿਯੋ ਤਬ ਹੀ ਹਰਿ ਕੋ ਸੁਨਿ ਮੈ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਯਾ ॥

पालि बडो जु करियो तब ही हरि को सुनि मै मुसलीधर भया ॥

paal baddo ju kariyo tab hee har ko sun mai musaleedhar bhayaa ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਕਾਜ ਕਿਧੌ ਨ੍ਰਿਪ ਵਾ ਬਸੁਦੇਵ ਕੋ ਕੈ ਸੁਤ ਬੋਲਿ ਪਠਈਯਾ ॥

ताही के काज किधौ नृप वा बसुदेव को कै सुत बोलि पठईया ॥

taahee ke kaaj kidhau nirap vaa basudhev ko kai sut bol paThieeyaa ||

ਪੈ ਹਮਰੇ ਘਟ ਭਾਗਨ ਕੇ ਘਰਿ ਭੀਤਰ ਪੈ ਨਹੀ ਸ੍ਯਾਮ ਰਹਈਯਾ ॥੭੯੫॥

पै हमरे घट भागन के घरि भीतर पै नही स्याम रहईया ॥७९५॥

pai hamare ghaT bhaagan ke ghar bheetar pai nahee sayaam rahieeyaa ||795||


ਅਥ ਬ੍ਰਿਹ ਨਾਟਕ ਲਿਖਯਤੇ ॥

अथ बृह नाटक लिखयते ॥

ath bireh naaTak likhayate ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਰਥ ਊਪਰ ਮਹਾਰਾਜ ਗੇ ਰਥਿ ਚੜਿ ਕੈ ਤਜਿ ਗ੍ਰੇਹ ॥

रथ ऊपर महाराज गे रथि चड़ि कै तजि ग्रेह ॥

rath uoopar mahaaraaj ge rath chaR kai taj greh ||

ਗੋਪਿਨ ਕਥਾ ਬ੍ਰਿਲਾਪ ਕੀ ਭਈ ਸੰਤ ਸੁਨਿ ਲੇਹੁ ॥੭੯੬॥

गोपिन कथा बृलाप की भई संत सुनि लेहु ॥७९६॥

gopin kathaa biralaap kee bhiee sa(n)t sun leh ||796||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਬ ਹੀ ਚਲਿਬੇ ਕੀ ਸੁਨੀ ਬਤੀਯਾ ਤਬ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਨੈਨ ਤੇ ਨੀਰ ਢਰਿਯੋ ॥

जब ही चलिबे की सुनी बतीया तब ग्वारनि नैन ते नीर ढरियो ॥

jab hee chalibe kee sunee bateeyaa tab gavaiaaran nain te neer ddariyo ||

ਗਿਨਤੀ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਬੀਚ ਭਈ ਮਨ ਕੋ ਸਭ ਆਨੰਦ ਦੂਰ ਕਰਿਯੋ ॥

गिनती तिन के मन बीच भई मन को सभ आनंद दूर करियो ॥

ginatee tin ke man beech bhiee man ko sabh aana(n)dh dhoor kariyo ||

ਜਿਤਨੋ ਤਿਨ ਮੈ ਰਸ ਜੋਬਨ ਥੋ ਦੁਖ ਕੀ ਸੋਈ ਈਧਨ ਮਾਹਿ ਜਰਿਯੋ ॥

जितनो तिन मै रस जोबन थो दुख की सोई ईधन माहि जरियो ॥

jitano tin mai ras joban tho dhukh kee soiee ieedhan maeh jariyo ||

ਤਿਨ ਤੇ ਨਹੀ ਬੋਲਿਯੋ ਜਾਤ ਕਛੂ ਮਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੇ ਸੰਗ ਜਰਿਯੋ ॥੭੯੭॥

तिन ते नही बोलियो जात कछू मन कान्रह की प्रीति के संग जरियो ॥७९७॥

tin te nahee boliyo jaat kachhoo man kaanreh kee preet ke sa(n)g jariyo ||797||


ਜਾ ਸੰਗਿ ਗਾਵਤ ਥੀ ਮਿਲਿ ਗੀਤ ਕਰੈ ਮਿਲਿ ਕੈ ਜਿਹ ਸੰਗਿ ਅਖਾਰੇ ॥

जा संगि गावत थी मिलि गीत करै मिलि कै जिह संगि अखारे ॥

jaa sa(n)g gaavat thee mil geet karai mil kai jeh sa(n)g akhaare ||

ਜਾ ਹਿਤ ਲੋਗਨ ਹਾਸ ਸਹਿਯੋ ਤਿਹ ਸੰਗਿ ਫਿਰੈ ਨਹਿ ਸੰਕ ਬਿਚਾਰੇ ॥

जा हित लोगन हास सहियो तिह संगि फिरै नहि संक बिचारे ॥

jaa hit logan haas sahiyo teh sa(n)g firai neh sa(n)k bichaare ||

ਜਾ ਹਮਰੋ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਕੈ ਲਰਿ ਆਪ ਬਲੀ ਤਿਨਿ ਦੈਤ ਪਛਾਰੇ ॥

जा हमरो अति ही हित कै लरि आप बली तिनि दैत पछारे ॥

jaa hamaro at hee hit kai lar aap balee tin dhait pachhaare ||

ਸੋ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਮੰਡਲ ਕਉ ਸਜਨੀ ਮਥੁਰਾ ਹੂੰ ਕੀ ਓਰਿ ਪਧਾਰੇ ॥੭੯੮॥

सो तजि कै बृज मंडल कउ सजनी मथुरा हूँ की ओरि पधारे ॥७९८॥

so taj kai biraj ma(n)ddal kau sajanee mathuraa hoo(n) kee or padhaare ||798||


ਜਾਹੀ ਕੇ ਸੰਗਿ ਸੁਨੋ ਸਜਨੀ ਹਮਰੋ ਜਮਨਾ ਤਟਿ ਨੇਹੁ ਭਯੋ ਹੈ ॥

जाही के संगि सुनो सजनी हमरो जमना तटि नेहु भयो है ॥

jaahee ke sa(n)g suno sajanee hamaro jamanaa taT neh bhayo hai ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਬੀਚ ਰਹਿਯੋ ਗਡ ਕੈ ਤਿਹ ਤੇ ਨਹੀ ਛੂਟਨ ਨੈਕੁ ਗਯੋ ਹੈ ॥

ताही के बीच रहियो गड कै तिह ते नही छूटन नैकु गयो है ॥

taahee ke beech rahiyo gadd kai teh te nahee chhooTan naik gayo hai ||

ਤਾ ਚਲਬੇ ਕੀ ਸੁਨੀ ਬਤੀਯਾ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਸੋਕ ਛਯੋ ਹੈ ॥

ता चलबे की सुनी बतीया अति ही मन भीतर सोक छयो है ॥

taa chalabe kee sunee bateeyaa at hee man bheetar sok chhayo hai ||

ਸੋ ਸੁਨੀਯੈ ਸਜਨੀ ਹਮ ਕਉ ਤਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕਉ ਮਥਰਾ ਕੋ ਗਯੋ ਹੈ ॥੭੯੯॥

सो सुनीयै सजनी हम कउ तजि कै बृज कउ मथरा को गयो है ॥७९९॥

so suneeyai sajanee ham kau taj kai biraj kau matharaa ko gayo hai ||799||


ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਸਿਉ ਸੰਗ ਖੇਲਤ ਜਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਕਾਮਨਿ ॥

अति ही हित सिउ संग खेलत जा कबि स्याम कहै अति सुँदर कामनि ॥

at hee hit siau sa(n)g khelat jaa kab sayaam kahai at su(n)dhar kaaman ||

ਰਾਸ ਕੀ ਭੀਤਰ ਯੌ ਲਸਕੈ ਰੁਤਿ ਸਾਵਨ ਕੀ ਚਮਕੈ ਜਿਮ ਦਾਮਨਿ ॥

रास की भीतर यौ लसकै रुति सावन की चमकै जिम दामनि ॥

raas kee bheetar yau lasakai rut saavan kee chamakai jim dhaaman ||

ਚੰਦ ਮੁਖੀ ਤਨ ਕੰਚਨ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਕੰਜ ਪ੍ਰਭਾ ਜੁ ਚਲੈ ਗਜਿ ਗਾਮਨਿ ॥

चंद मुखी तन कंचन से दृग कंज प्रभा जु चलै गजि गामनि ॥

cha(n)dh mukhee tan ka(n)chan se dhirag ka(n)j prabhaa ju chalai gaj gaaman ||

ਤ੍ਯਾਗਿ ਤਿਨੈ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ਚਲਿਯੋ ਜਦੁਰਾਇ ਸੁਨੋ ਸਜਨੀ ਅਬ ਧਾਮਨਿ ॥੮੦੦॥

त्यागि तिनै मथुरा को चलियो जदुराइ सुनो सजनी अब धामनि ॥८००॥

tayaag tinai mathuraa ko chaliyo jadhurai suno sajanee ab dhaaman ||800||


ਕੰਜ ਮੁਖੀ ਤਨ ਕੰਚਨ ਸੇ ਬਿਰਲਾਪ ਕਰੈ ਹਰਿ ਸੋ ਹਿਤ ਲਾਈ ॥

कंज मुखी तन कंचन से बिरलाप करै हरि सो हित लाई ॥

ka(n)j mukhee tan ka(n)chan se biralaap karai har so hit laiee ||

ਸੋਕ ਭਯੋ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਬੀਚ ਅਸੋਕ ਗਯੋ ਤਿਨ ਹੂੰ ਤੇ ਨਸਾਈ ॥

सोक भयो तिन के मन बीच असोक गयो तिन हूँ ते नसाई ॥

sok bhayo tin ke man beech asok gayo tin hoo(n) te nasaiee ||

ਭਾਖਤ ਹੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੁਨੋ ਸਜਨੀ ਹਮ ਤ੍ਯਾਗਿ ਗਯੋ ਹੈ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥

भाखत है इह भाति सुनो सजनी हम त्यागि गयो है कन्रहाई ॥

bhaakhat hai ieh bhaat suno sajanee ham tayaag gayo hai kanrahaiee ||

ਆਪ ਗਏ ਮਥੁਰਾ ਪੁਰ ਮੈ ਜਦੁਰਾਇ ਨ ਜਾਨਤ ਪੀਰ ਪਰਾਈ ॥੮੦੧॥

आप गए मथुरा पुर मै जदुराइ न जानत पीर पराई ॥८०१॥

aap ge mathuraa pur mai jadhurai na jaanat peer paraiee ||801||


ਅੰਗ ਬਿਖੈ ਸਜ ਕੈ ਭਗਵੇ ਪਟ ਹਾਥਨ ਮੈ ਚਿਪੀਆ ਹਮ ਲੈ ਹੈਂ ॥

अंग बिखै सज कै भगवे पट हाथन मै चिपीआ हम लै हैं ॥

a(n)g bikhai saj kai bhagave paT haathan mai chipeeaa ham lai hai(n) ||

ਸੀਸ ਧਰੈ ਗੀ ਜਟਾ ਅਪੁਨੇ ਹਰਿ ਮੂਰਤਿ ਭਿਛ ਕਉ ਮਾਗ ਅਘੈ ਹੈਂ ॥

सीस धरै गी जटा अपुने हरि मूरति भिछ कउ माग अघै हैं ॥

sees dharai gee jaTaa apune har moorat bhichh kau maag aghai hai(n) ||

ਸ੍ਯਾਮ ਚਲੈ ਜਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਹਮਹੂੰ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਚਲਿ ਜੈ ਹੈ ॥

स्याम चलै जिह ठउर बिखै हमहूँ तिह ठउर बिखै चलि जै है ॥

sayaam chalai jeh Thaur bikhai hamahoo(n) teh Thaur bikhai chal jai hai ||

ਤ੍ਯਾਗ ਕਰਿਯੋ ਹਮ ਧਾਮਿਨ ਕੋ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲ ਕੈ ਹਮ ਜੋਗਿਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੮੦੨॥

त्याग करियो हम धामिन को सभ ही मिल कै हम जोगिन ह्वै है ॥८०२॥

tayaag kariyo ham dhaamin ko sabh hee mil kai ham jogin havai hai ||802||


ਬੋਲਤ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਆਪਸਿ ਮੈ ਸੁਨੀਯੈ ਸਜਨੀ ਹਮ ਕਾਮ ਕਰੈਂਗੀ ॥

बोलत ग्वारनि आपसि मै सुनीयै सजनी हम काम करैंगी ॥

bolat gavaiaaran aapas mai suneeyai sajanee ham kaam karai(n)gee ||

ਤ੍ਯਾਗ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਧਾਮਨ ਕਉ ਚਿਪੀਆ ਗਹਿ ਸੀਸ ਜਟਾਨ ਧਰੈਂਗੀ ॥

त्याग कहियो हम धामन कउ चिपीआ गहि सीस जटान धरैंगी ॥

tayaag kahiyo ham dhaaman kau chipeeaa geh sees jaTaan dharai(n)gee ||

ਕੈ ਬਿਖ ਖਾਇ ਮਰੈਗੀ ਕਹਿਯੋ ਨਹਿ ਬੂਡ ਮਰੈ ਨਹੀ ਜਾਇ ਜਰੈਂਗੀ ॥

कै बिख खाइ मरैगी कहियो नहि बूड मरै नही जाइ जरैंगी ॥

kai bikh khai maraigee kahiyo neh boodd marai nahee jai jarai(n)gee ||

ਮਾਨ ਬਯੋਗ ਕਹੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਸਾਥ ਤੇ ਪੈ ਨ ਟਰੇਗੀ ॥੮੦੩॥

मान बयोग कहै सभ ग्वारनि कान्रह के साथ ते पै न टरेगी ॥८०३॥

maan bayog kahai sabh gavaiaaran kaanreh ke saath te pai na Taregee ||803||


ਜਿਨ ਹੂੰ ਹਮਰੇ ਸੰਗਿ ਕੇਲ ਕਰੇ ਬਨ ਬੀਚ ਦਏ ਹਮ ਕਉ ਸੁਖ ਭਾਰੇ ॥

जिन हूँ हमरे संगि केल करे बन बीच दए हम कउ सुख भारे ॥

jin hoo(n) hamare sa(n)g kel kare ban beech dhe ham kau sukh bhaare ||

ਜਾ ਹਮਰੇ ਹਿਤ ਹਾਸ ਸਹਯੈ ਹਮਰੇ ਹਿਤ ਕੈ ਜਿਨਿ ਦੈਤ ਪਛਾਰੇ ॥

जा हमरे हित हास सहयै हमरे हित कै जिनि दैत पछारे ॥

jaa hamare hit haas sahayai hamare hit kai jin dhait pachhaare ||

ਰਾਸ ਬਿਖੈ ਜਿਨਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੇ ਮਨ ਕੇ ਸਭ ਸੋਕ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰੇ ॥

रास बिखै जिनि ग्वारनि के मन के सभ सोक बिदा करि डारे ॥

raas bikhai jin gavaiaaran ke man ke sabh sok bidhaa kar ddaare ||

ਸੋ ਸੁਨੀਯੈ ਹਮਰੇ ਹਿਤ ਕੋ ਤਜਿ ਕੈ ਸੁ ਅਬੈ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ਪਧਾਰੇ ॥੮੦੪॥

सो सुनीयै हमरे हित को तजि कै सु अबै मथुरा को पधारे ॥८०४॥

so suneeyai hamare hit ko taj kai su abai mathuraa ko padhaare ||804||


ਮੁੰਦ੍ਰਿਕਕਾ ਪਹਰੈ ਹਮ ਕਾਨਨ ਅੰਗ ਬਿਖੈ ਭਗਵੇ ਪਟ ਕੈ ਹੈਂ ॥

मुँदृकका पहरै हम कानन अंग बिखै भगवे पट कै हैं ॥

mu(n)dhirakakaa paharai ham kaanan a(n)g bikhai bhagave paT kai hai(n) ||

ਹਾਥਨ ਮੈ ਚਿਪੀਆ ਧਰਿ ਕੈ ਅਪਨੇ ਤਨ ਬੀਚ ਬਿਭੂਤ ਲਗੈ ਹੈਂ ॥

हाथन मै चिपीआ धरि कै अपने तन बीच बिभूत लगै हैं ॥

haathan mai chipeeaa dhar kai apane tan beech bibhoot lagai hai(n) ||

ਪੈ ਕਸਿ ਕੈ ਸਿੰਙੀਆ ਕਟਿ ਮੈ ਹਰਿ ਕੋ ਸੰਗਿ ਗੋਰਖ ਨਾਥ ਜਗੈ ਹੈਂ ॥

पै कसि कै सिंङीआ कटि मै हरि को संगि गोरख नाथ जगै हैं ॥

pai kas kai si(n)n(g)eeaa kaT mai har ko sa(n)g gorakh naath jagai hai(n) ||

ਗ੍ਵਾਰਨੀਆ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈਂ ਤਜਿ ਕੈ ਹਮ ਧਾਮਨ ਜੋਗਿਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈਂ ॥੮੦੫॥

ग्वारनीआ इह भाति कहैं तजि कै हम धामन जोगिन ह्वै हैं ॥८०५॥

gavaiaaraneeaa ieh bhaat kahai(n) taj kai ham dhaaman jogin havai hai(n) ||805||


ਕੈ ਬਿਖ ਖਾਇ ਮਰੈਂਗੀ ਕਹਿਯੋ ਅਪੁਨੇ ਤਨ ਕੋ ਨਹਿ ਘਾਤ ਕਰੈ ਹੈ ॥

कै बिख खाइ मरैंगी कहियो अपुने तन को नहि घात करै है ॥

kai bikh khai marai(n)gee kahiyo apune tan ko neh ghaat karai hai ||

ਮਾਰਿ ਛੁਰੀ ਅਪੁਨੇ ਤਨ ਮੈ ਹਰਿ ਕੇ ਹਮ ਊਪਰ ਪਾਪ ਚੜੈ ਹੈ ॥

मारि छुरी अपुने तन मै हरि के हम ऊपर पाप चड़ै है ॥

maar chhuree apune tan mai har ke ham uoopar paap chaRai hai ||

ਨਾਤੁਰ ਬ੍ਰਹਮ ਕੇ ਜਾ ਪੁਰ ਮੈ ਬਿਰਥਾ ਇਹ ਕੀ ਸੁ ਪੁਕਾਰਿ ਕਰੈ ਹੈ ॥

नातुर ब्रहम के जा पुर मै बिरथा इह की सु पुकारि करै है ॥

naatur braham ke jaa pur mai birathaa ieh kee su pukaar karai hai ||

ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈਂ ਬ੍ਰਿਜ ਤੇ ਹਰਿ ਕੋ ਹਮ ਜਾਨਿ ਨ ਦੈ ਹੈ ॥੮੦੬॥

ग्वारनीया इह भाति कहैं बृज ते हरि को हम जानि न दै है ॥८०६॥

gavaiaaraneeyaa ieh bhaat kahai(n) biraj te har ko ham jaan na dhai hai ||806||


ਸੇਲੀ ਡਰੈਂਗੀ ਗਰੈ ਅਪੁਨੇ ਬਟੂਆ ਅਪੁਨੇ ਕਟਿ ਸਾਥ ਕਸੈ ਹੈ ॥

सेली डरैंगी गरै अपुने बटूआ अपुने कटि साथ कसै है ॥

selee ddarai(n)gee garai apune baTooaa apune kaT saath kasai hai ||

ਲੈ ਕਰਿ ਬੀਚ ਤ੍ਰਿਸੂਲ ਕਿਧੌ ਫਰੂਆ ਤਿਹ ਸਾਮੁਹੇ ਰੂਪ ਜਗੈ ਹੈ ॥

लै करि बीच तृसूल किधौ फरूआ तिह सामुहे रूप जगै है ॥

lai kar beech tirasool kidhau farooaa teh saamuhe roop jagai hai ||

ਘੋਟ ਕੈ ਤਾਹੀ ਕੇ ਧ੍ਯਾਨ ਕੀ ਭਾਗ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁ ਵਾਹੀ ਚੜੈ ਹੈ ॥

घोट कै ताही के ध्यान की भाग कहै कबि स्याम सु वाही चड़ै है ॥

ghoT kai taahee ke dhayaan kee bhaag kahai kab sayaam su vaahee chaRai hai ||

ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਨ ਰਹੈ ਹਮ ਧਾਮਨ ਜੋਗਿਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੮੦੭॥

ग्वारनीया इह भाति कहै न रहै हम धामन जोगिन ह्वै है ॥८०७॥

gavaiaaraneeyaa ieh bhaat kahai na rahai ham dhaaman jogin havai hai ||807||


ਧੂਮ ਡਰੈ ਤਿਹ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਸਾਮੁਹੇ ਅਉਰ ਕਛੂ ਨਹਿ ਕਾਰਜ ਕੈ ਹੈ ॥

धूम डरै तिह के गृह सामुहे अउर कछू नहि कारज कै है ॥

dhoom ddarai teh ke gireh saamuhe aaur kachhoo neh kaaraj kai hai ||

ਧ੍ਯਾਨ ਧਰੈਂਗੀ ਕਿਧੌ ਤਿਹ ਕੌ ਤਿਹ ਧ੍ਯਾਨ ਕੀ ਭਾਗਹਿ ਸੋ ਮਤਿ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥

ध्यान धरैंगी किधौ तिह कौ तिह ध्यान की भागहि सो मति ह्वै है ॥

dhayaan dharai(n)gee kidhau teh kau teh dhayaan kee bhaageh so mat havai hai ||

ਲੈ ਤਿਹ ਕੈ ਫੁਨਿ ਪਾਇਨ ਧੂਰਿ ਕਿਧੌ ਸੁ ਬਿਭੂਤ ਕੀ ਠਉਰ ਚੜੈ ਹੈ ॥

लै तिह कै फुनि पाइन धूरि किधौ सु बिभूत की ठउर चड़ै है ॥

lai teh kai fun pain dhoor kidhau su bibhoot kee Thaur chaRai hai ||

ਕੈ ਹਿਤ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਐਸੋ ਕਹੈਂ ਤਜਿ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹ ਕਉ ਹਮ ਜੋਗਿਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੮੦੮॥

कै हित ग्वारनि ऐसो कहैं तजि कै गृह कउ हम जोगिन ह्वै है ॥८०८॥

kai hit gavaiaaran aaiso kahai(n) taj kai gireh kau ham jogin havai hai ||808||


ਕੈ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਕੀ ਫੁਨਿ ਮਾਲ ਕਹੈ ਕਬਿ ਵਾਹੀ ਕੋ ਨਾਮੁ ਜਪੈ ਹੈ ॥

कै अपुने मन की फुनि माल कहै कबि वाही को नामु जपै है ॥

kai apune man kee fun maal kahai kab vaahee ko naam japai hai ||

ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕੀ ਪੈ ਤਪਸਾ ਹਿਤ ਸੋ ਤਿਹ ਤੇ ਜਦੁਰਾਇ ਰਿਝੈ ਹੈ ॥

कै इह भाति की पै तपसा हित सो तिह ते जदुराइ रिझै है ॥

kai ieh bhaat kee pai tapasaa hit so teh te jadhurai rijhai hai ||

ਮਾਗ ਸਭੈ ਤਿਹ ਤੇ ਮਿਲਿ ਕੈ ਬਰੁ ਪਾਇਨ ਪੈ ਤਹਿ ਤੇ ਹਮ ਲਯੈ ਹੈ ॥

माग सभै तिह ते मिलि कै बरु पाइन पै तहि ते हम लयै है ॥

maag sabhai teh te mil kai bar pain pai teh te ham layai hai ||

ਯਾ ਤੇ ਬਿਚਾਰਿ ਕਹੈ ਗੁਪੀਯਾ ਤਜਿ ਕੈ ਹਮ ਧਾਮਨ ਜੋਗਿਨ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੮੦੯॥

या ते बिचारि कहै गुपीया तजि कै हम धामन जोगिन ह्वै है ॥८०९॥

yaa te bichaar kahai gupeeyaa taj kai ham dhaaman jogin havai hai ||809||


ਠਾਢੀ ਹੈ ਹੋਇ ਇਕਤ੍ਰ ਤ੍ਰੀਯਾ ਜਿਮ ਘੰਟਕ ਹੇਰ ਬਜੈ ਮ੍ਰਿਗਾਇਲ ॥

ठाढी है होइ इकत्र त्रीया जिम घंटक हेर बजै मृगाइल ॥

Thaaddee hai hoi ikatr treeyaa jim gha(n)Tak her bajai miragail ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਬਿ ਚਿਤ ਹਰੈ ਹਰਿ ਕੋ ਹਰਿ ਊਪਰਿ ਹ੍ਵੈ ਅਤਿ ਮਾਇਲ ॥

स्याम कहै कबि चित हरै हरि को हरि ऊपरि ह्वै अति माइल ॥

sayaam kahai kab chit harai har ko har uoopar havai at mail ||

ਧ੍ਰਯਾਨ ਲਗੈ ਦ੍ਰਿਗ ਮੂੰਦ ਰਹੈ ਉਘਰੈ ਨਿਕਟੈ ਤਿਹ ਜਾਨਿ ਉਤਾਇਲ ॥

ध्रयान लगै दृग मूँद रहै उघरै निकटै तिह जानि उताइल ॥

dhrayaan lagai dhirag moo(n)dh rahai ugharai nikaTai teh jaan utail ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਮਨ ਮੈ ਜਿਮ ਮੀਚਤ ਆਂਖ ਉਘਾਰਤ ਘਾਇਲ ॥੮੧੦॥

यौ उपजी उपमा मन मै जिम मीचत आँख उघारत घाइल ॥८१०॥

yau upajee upamaa man mai jim meechat aa(n)kh ughaarat ghail ||810||


ਕੰਚਨ ਕੇ ਤਨ ਜੋ ਸਮ ਥੀ ਜੁ ਹੁਤੀ ਸਮ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਚੰਦ ਕਰਾ ਸੀ ॥

कंचन के तन जो सम थी जु हुती सम ग्वारनि चंद करा सी ॥

ka(n)chan ke tan jo sam thee ju hutee sam gavaiaaran cha(n)dh karaa see ||

ਮੈਨ ਕੀ ਮਾਨੋ ਸਾਣ ਬਨੀ ਦੋਊ ਭਉਹ ਮਨੋ ਅਖੀਯਾ ਸਮ ਗਾਸੀ ॥

मैन की मानो साण बनी दोऊ भउह मनो अखीया सम गासी ॥

main kee maano saan banee dhouoo bhauh mano akheeyaa sam gaasee ||

ਦੇਖਤ ਜਾ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁਖ ਹੋ ਨਹਿ ਦੇਖਤ ਹੀ ਤਿਹ ਹੋਤ ਉਦਾਸੀ ॥

देखत जा अति ही सुख हो नहि देखत ही तिह होत उदासी ॥

dhekhat jaa at hee sukh ho neh dhekhat hee teh hot udhaasee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਨਾ ਸਸਿ ਪੈ ਜਲ ਕੀ ਮਨੋ ਕੰਜ ਮੁਖੀ ਭਈ ਸੂਕਿ ਜਰਾ ਸੀ ॥੮੧੧॥

स्याम बिना ससि पै जल की मनो कंज मुखी भई सूकि जरा सी ॥८११॥

sayaam binaa sas pai jal kee mano ka(n)j mukhee bhiee sook jaraa see ||811||


ਰਥ ਊਪਰਿ ਸ੍ਯਾਮ ਚੜਾਇ ਕੈ ਸੋ ਸੰਗਿ ਲੈ ਸਭ ਗੋਪ ਤਹਾ ਕੋ ਗਏ ਹੈ ॥

रथ ऊपरि स्याम चड़ाइ कै सो संगि लै सभ गोप तहा को गए है ॥

rath uoopar sayaam chaRai kai so sa(n)g lai sabh gop tahaa ko ge hai ||

ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਸੁ ਰਹੀ ਗ੍ਰਿਹ ਮੈ ਜਿਨ ਕੇ ਮਨ ਬੀਚ ਸੁ ਸੋਕ ਭਏ ਹੈ ॥

ग्वारनीया सु रही गृह मै जिन के मन बीच सु सोक भए है ॥

gavaiaaraneeyaa su rahee gireh mai jin ke man beech su sok bhe hai ||

ਠਾਢਿ ਉਡੀਕਤ ਗੋਪਿ ਜਹਾ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਦੋਊ ਏ ਸੋ ਅਏ ਹੈ ॥

ठाढि उडीकत गोपि जहा तिह ठउर बिखै दोऊ ए सो अए है ॥

Thaadd uddeekat gop jahaa teh Thaur bikhai dhouoo e so ae hai ||

ਸੁੰਦਰ ਹੈ ਸਸਿ ਸੇ ਜਿਨ ਕੇ ਮੁਖ ਕੰਚਨ ਸੇ ਤਨ ਰੂਪ ਛਏ ਹੈ ॥੮੧੨॥

सुँदर है ससि से जिन के मुख कंचन से तन रूप छए है ॥८१२॥

su(n)dhar hai sas se jin ke mukh ka(n)chan se tan roop chhe hai ||812||


ਜਬ ਹੀ ਅਕ੍ਰੂਰ ਕੇ ਸੰਗ ਕਿਧੌ ਜਮੁਨਾ ਪੈ ਗਏ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਕ ਸਬੈ ॥

जब ही अक्रूर के संग किधौ जमुना पै गए बृज लोक सबै ॥

jab hee akraoor ke sa(n)g kidhau jamunaa pai ge biraj lok sabai ||

ਅਕ੍ਰੂਰ ਹੀ ਚਿੰਤ ਕਰੀ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਪਾਪ ਕਰਿਯੋ ਹਮਹੂੰ ਸੁ ਅਬੈ ॥

अक्रूर ही चिंत करी मन मै अति पाप करियो हमहूँ सु अबै ॥

akraoor hee chi(n)t karee man mai at paap kariyo hamahoo(n) su abai ||

ਤਬ ਹੀ ਤਜ ਕੈ ਰਥ ਬੀਚ ਧਸਿਯੋ ਜਲ ਕੇ ਸੰਧਿਆ ਕਰਬੇ ਕੋ ਤਬੈ ॥

तब ही तज कै रथ बीच धसियो जल के संधिआ करबे को तबै ॥

tab hee taj kai rath beech dhasiyo jal ke sa(n)dhiaa karabe ko tabai ||

ਇਹ ਕੋ ਮਰਿ ਹੈ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਬਲੀ ਜੁ ਭਈ ਇਹ ਕੀ ਅਤਿ ਚਿੰਤ ਜਬੈ ॥੮੧੩॥

इह को मरि है नृप कंस बली जु भई इह की अति चिंत जबै ॥८१३॥

eeh ko mar hai nirap ka(n)s balee ju bhiee ieh kee at chi(n)t jabai ||813||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨਾਤ ਜਬੈ ਅਕ੍ਰੂਰ ਮਨਿ ਹਰਿ ਕੋ ਕਰਿਯੋ ਬਿਚਾਰ ॥

नात जबै अक्रूर मनि हरि को करियो बिचार ॥

naat jabai akraoor man har ko kariyo bichaar ||

ਤਬ ਤਿਹ ਕੋ ਜਲ ਮੈ ਤਬੈ ਦਰਸਨ ਦਯੋ ਮੁਰਾਰਿ ॥੮੧੪॥

तब तिह को जल मै तबै दरसन दयो मुरारि ॥८१४॥

tab teh ko jal mai tabai dharasan dhayo muraar ||814||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੁੰਡ ਹਜਾਰ ਭੁਜਾ ਸਹਸੇ ਦਸ ਸੇਸ ਕੇ ਆਸਨ ਪੈ ਸੁ ਬਿਰਾਜੈ ॥

मुँड हजार भुजा सहसे दस सेस के आसन पै सु बिराजै ॥

mu(n)dd hajaar bhujaa sahase dhas ses ke aasan pai su biraajai ||

ਪੀਤ ਲਸੈ ਪਟ ਚਕ੍ਰ ਕਰੈ ਜਿਹ ਕੇ ਕਰ ਭੀਤਰ ਨੰਦਗ ਛਾਜੈ ॥

पीत लसै पट चक्र करै जिह के कर भीतर नंदग छाजै ॥

peet lasai paT chakr karai jeh ke kar bheetar na(n)dhag chhaajai ||

ਬੀਚ ਤਬੈ ਜਮੁਨਾ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਫੁਨਿ ਸਾਧਹਿ ਕੇ ਹਰਬੇ ਡਰ ਕਾਜੈ ॥

बीच तबै जमुना प्रगटियो फुनि साधहि के हरबे डर काजै ॥

beech tabai jamunaa pragaTiyo fun saadheh ke harabe ddar kaajai ||

ਜਾ ਕੋ ਕਰਿਯੋ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਹੈ ਜਿਹ ਦੇਖਤ ਹੀ ਘਟ ਸਾਵਨ ਲਾਜੈ ॥੮੧੫॥

जा को करियो सभ ही जग है जिह देखत ही घट सावन लाजै ॥८१५॥

jaa ko kariyo sabh hee jag hai jeh dhekhat hee ghaT saavan laajai ||815||


ਜਲ ਤੇ ਕਢ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਕੈ ਮਥੁਰਾ ਕੋ ਚਲਿਯੋ ਮਨ ਆਨੰਦ ਪਾਈ ॥

जल ते कढ कै मन मै सुख कै मथुरा को चलियो मन आनंद पाई ॥

jal te kadd kai man mai sukh kai mathuraa ko chaliyo man aana(n)dh paiee ||

ਧਾਇ ਗਯੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਪੁਰ ਮੈ ਹਰਿ ਮਾਰਨ ਕੀ ਨ ਕਰੀ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

धाइ गयो नृप के पुर मै हरि मारन की न करी दुचिताई ॥

dhai gayo nirap ke pur mai har maaran kee na karee dhuchitaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰਨ ਕੋ ਮਥੁਰਾ ਕੀ ਜੁਰੀ ਸਭ ਆਨਿ ਲੁਕਾਈ ॥

कान्रह को रूप निहारन को मथुरा की जुरी सभ आनि लुकाई ॥

kaanreh ko roop nihaaran ko mathuraa kee juree sabh aan lukaiee ||

ਜਾ ਕੇ ਕਛੂ ਤਨ ਮੈ ਦੁਖੁ ਹੋ ਹਰਿ ਦੇਖਤ ਹੀ ਸੋਊ ਪਾਰ ਪਰਾਈ ॥੮੧੬॥

जा के कछू तन मै दुखु हो हरि देखत ही सोऊ पार पराई ॥८१६॥

jaa ke kachhoo tan mai dhukh ho har dhekhat hee souoo paar paraiee ||816||


ਹਰਿ ਆਗਮ ਕੀ ਸੁਨ ਕੈ ਬਤੀਆ ਉਠ ਕੈ ਮਥੁਰਾ ਕੀ ਸਭੈ ਤ੍ਰੀਅ ਧਾਈ ॥

हरि आगम की सुन कै बतीआ उठ कै मथुरा की सभै त्रीअ धाई ॥

har aagam kee sun kai bateeaa uTh kai mathuraa kee sabhai treea dhaiee ||

ਆਵਤ ਥੋ ਰਥ ਬੀਚ ਚੜਿਯੋ ਚਲਿ ਕੈ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਸੋਊ ਆਈ ॥

आवत थो रथ बीच चड़ियो चलि कै तिह ठउर बिखै सोऊ आई ॥

aavat tho rath beech chaRiyo chal kai teh Thaur bikhai souoo aaiee ||

ਮੂਰਤਿ ਦੇਖ ਕੈ ਰੀਝ ਰਹੀ ਹਰਿ ਆਨਨ ਓਰ ਰਹੀ ਲਿਵ ਲਾਈ ॥

मूरति देख कै रीझ रही हरि आनन ओर रही लिव लाई ॥

moorat dhekh kai reejh rahee har aanan or rahee liv laiee ||

ਸੋਕ ਕਥਾ ਜਿਤਨੀ ਮਨ ਥੀ ਇਹ ਓਰ ਨਿਹਾਰਿ ਦਈ ਬਿਸਰਾਈ ॥੮੧੭॥

सोक कथा जितनी मन थी इह ओर निहारि दई बिसराई ॥८१७॥

sok kathaa jitanee man thee ieh or nihaar dhiee bisaraiee ||817||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਨੰਦ ਅਉ ਗੋਪਿਨ ਸਹਿਤ ਮਥੁਰਾ ਪ੍ਰਵੇਸ ਕਰਣੰ ॥

इति स्री दसम सिकंधे पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे कान्रह जू नंद अउ गोपिन सहित मथुरा प्रवेस करणं ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare kaanreh joo na(n)dh aau gopin sahit mathuraa praves karana(n) ||


ਅਥ ਕੰਸ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ कंस बध कथनं ॥

ath ka(n)s badh kathana(n) ||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮਥੁਰਾ ਪੁਰ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾ ਕਬਿ ਮਨ ਮੈ ਕਹੀ ਬਿਚਾਰਿ ॥

मथुरा पुर की प्रभा कबि मन मै कही बिचारि ॥

mathuraa pur kee prabhaa kab man mai kahee bichaar ||

ਸੋਭਾ ਜਿਹ ਦੇਖਤ ਸੁ ਕਬਿ ਕਰਿ ਨਹਿ ਸਕਤਿ ਉਚਾਰ ॥੮੧੮॥

सोभा जिह देखत सु कबि करि नहि सकति उचार ॥८१८॥

sobhaa jeh dhekhat su kab kar neh sakat uchaar ||818||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਿਹ ਕੀ ਜਟਿਤ ਨਗ ਭੀਤਰ ਹੈ ਦਮਕੈ ਦੁਤਿ ਮਾਨਹੁ ਬਿਜੁ ਛਟਾ ॥

जिह की जटित नग भीतर है दमकै दुति मानहु बिजु छटा ॥

jeh kee jaTit nag bheetar hai dhamakai dhut maanahu bij chhaTaa ||

ਜਮੁਨਾ ਜਿਹ ਸੁੰਦਰ ਤੀਰ ਬਹੈ ਸੁ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਜਿਹ ਭਾਤਿ ਅਟਾ ॥

जमुना जिह सुँदर तीर बहै सु बिराजत है जिह भाति अटा ॥

jamunaa jeh su(n)dhar teer bahai su biraajat hai jeh bhaat aTaa ||

ਬ੍ਰਹਮਾ ਜਿਹ ਦੇਖਤ ਰੀਝ ਰਹੈ ਰਿਝਵੈ ਪਿਖਿ ਤਾ ਧਰ ਸੀਸ ਜਟਾ ॥

ब्रहमा जिह देखत रीझ रहै रिझवै पिखि ता धर सीस जटा ॥

brahamaa jeh dhekhat reejh rahai rijhavai pikh taa dhar sees jaTaa ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਪ੍ਰਭਾ ਧਰਿ ਹੈ ਪੁਰਿ ਧਾਮ ਸੁ ਬਾਤ ਕਰੈ ਸੰਗ ਮੇਘ ਘਟਾ ॥੮੧੯॥

इह भाति प्रभा धरि है पुरि धाम सु बात करै संग मेघ घटा ॥८१९॥

eeh bhaat prabhaa dhar hai pur dhaam su baat karai sa(n)g megh ghaTaa ||819||


ਹਰਿ ਆਵਤ ਥੋ ਮਗ ਬੀਚ ਚਲਿਯੋ ਰਿਪੁ ਕੋ ਧੁਬੀਆ ਮਗ ਏਕ ਨਿਹਾਰਿਯੋ ॥

हरि आवत थो मग बीच चलियो रिपु को धुबीआ मग एक निहारियो ॥

har aavat tho mag beech chaliyo rip ko dhubeeaa mag ek nihaariyo ||

ਜਉ ਸੁ ਗਹੇ ਤਿਹ ਤੇ ਪਟ ਤਉ ਕੁਪਿ ਕੈ ਨ੍ਰਿਪ ਕੋ ਤਿਹ ਨਾਮ ਉਚਾਰਿਯੋ ॥

जउ सु गहे तिह ते पट तउ कुपि कै नृप को तिह नाम उचारियो ॥

jau su gahe teh te paT tau kup kai nirap ko teh naam uchaariyo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਤਬੈ ਰਿਸ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਸੰਗ ਅੰਗੁਲਿਕਾ ਤਿਹ ਕੇ ਮੁਖ ਮਾਰਿਓ ॥

कान्रह तबै रिस कै मन मै संग अंगुलिका तिह के मुख मारिओ ॥

kaanreh tabai ris kai man mai sa(n)g a(n)gulikaa teh ke mukh maario ||

ਇਉ ਗਿਰ ਗਯੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਸੋ ਪਟ ਜਿਉ ਧੁਬੀਆ ਪਟ ਸੰਗ ਪ੍ਰਹਾਰਿਓ ॥੮੨੦॥

इउ गिर गयो धरनी पर सो पट जिउ धुबीआ पट संग प्रहारिओ ॥८२०॥

eiau gir gayo dharanee par so paT jiau dhubeeaa paT sa(n)g prahaario ||820||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਹਰਿ ਕਹੀ ਰਿਪੁ ਧੁਬੀਆ ਕਹੁ ਕੂਟਿ ॥

सभ ग्वारनि सो हरि कही रिपु धुबीआ कहु कूटि ॥

sabh gavaiaaran so har kahee rip dhubeeaa kahu kooT ||

ਬਸਤ੍ਰ ਜਿਤੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਸਕਲ ਲੇਹੁ ਸਭਨ ਕੋ ਲੂਟਿ ॥੮੨੧॥

बसत्र जिते नृप के सकल लेहु सभन को लूटि ॥८२१॥

basatr jite nirap ke sakal leh sabhan ko looT ||821||


ਸੋਰਠਾ ॥

सोरठा ॥

soraThaa ||

ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਗ੍ਵਾਰ ਅਜਾਨ ਬਸਤ੍ਰ ਪਹਿਰ ਜਾਨਤ ਨਹੀ ॥

बृज के ग्वार अजान बसत्र पहिर जानत नही ॥

biraj ke gavaiaar ajaan basatr pahir jaanat nahee ||

ਬਾਕਾਤਾ ਤ੍ਰੀਆ ਆਨਿ ਚੀਰ ਪੈਨ੍ਰਹਾਏ ਤਿਨ ਤਨੈ ॥੮੨੨॥

बाकाता त्रीआ आनि चीर पैन्रहाए तिन तनै ॥८२२॥

baakaataa treeaa aan cheer painrahaae tin tanai ||822||


ਰਾਜਾ ਪ੍ਰੀਛਤ ਬਾਚ ਸੁਕ ਸੋ ॥

राजा प्रीछत बाच सुक सो ॥

raajaa preechhat baach suk so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਦੈ ਬਰੁ ਤਾ ਤ੍ਰੀਯ ਕੋ ਕ੍ਰਿਸਨ ਮੂੰਡ ਰਹੇ ਨਿਹੁਰਾਇ ॥

दै बरु ता त्रीय को कृसन मूँड रहे निहुराइ ॥

dhai bar taa treey ko kirasan moo(n)dd rahe nihurai ||

ਤਬ ਸੁਕ ਸੋ ਪੁਛਯੌ ਨ੍ਰਿਪੈ ਕਹੋ ਹਮੈ ਕਿਹ ਭਾਇ ॥੮੨੩॥

तब सुक सो पुछयौ नृपै कहो हमै किह भाइ ॥८२३॥

tab suk so puchhayau nirapai kaho hamai keh bhai ||823||


ਸੁਕ ਬਾਚ ਰਾਜਾ ਸੋ ॥

सुक बाच राजा सो ॥

suk baach raajaa so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਚਤੁਰਭੁਜ ਕੋ ਬਰੁ ਵਾਹਿ ਦਯੋ ਬਰੁ ਪਾਇ ਸੁਖੀ ਰਹੁ ਤਾਹਿ ਕਹੇ ॥

चतुरभुज को बरु वाहि दयो बरु पाइ सुखी रहु ताहि कहे ॥

chaturabhuj ko bar vaeh dhayo bar pai sukhee rahu taeh kahe ||

ਹਰਿ ਬਾਕ ਕੇ ਹੋਵਤ ਪੈ ਤਿਨ ਹੂੰ ਅਮਰਾ ਪੁਰ ਕੇ ਫਲ ਹੈ ਸੁ ਲਹੇ ॥

हरि बाक के होवत पै तिन हूँ अमरा पुर के फल है सु लहे ॥

har baak ke hovat pai tin hoo(n) amaraa pur ke fal hai su lahe ||

ਬਹੁ ਦੈ ਕਰਿ ਲਜਿਤ ਹੋਤ ਬਡੇ ਇਮ ਲੋਕ ਏ ਨੀਤਿ ਬਿਖੈ ਹੈ ਕਹੇ ॥

बहु दै करि लजित होत बडे इम लोक ए नीति बिखै है कहे ॥

bahu dhai kar lajit hot badde im lok e neet bikhai hai kahe ||

ਹਰਿ ਜਾਨਿ ਕਿ ਮੈ ਇਹ ਥੋਰੋ ਦਯੋ ਤਿਹ ਤੇ ਮੁੰਡੀਆ ਨਿਹੁਰਾਇ ਰਹੇ ॥੮੨੪॥

हरि जानि कि मै इह थोरो दयो तिह ते मुँडीआ निहुराइ रहे ॥८२४॥

har jaan k mai ieh thoro dhayo teh te mu(n)ddeeaa nihurai rahe ||824||


ਅਥ ਬਾਗਵਾਨ ਕੋ ਉਧਾਰ ॥

अथ बागवान को उधार ॥

ath baagavaan ko udhaar ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||


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