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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਕੋਪ ਕੈ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਚਲ ਰੀ ਚਲ ਤੂ ਕਿਨਿ ਬੀਚ ਦਈ ਹੈ ॥੬੯੨॥

कोप कै उतर देत भई चल री चल तू किनि बीच दई है ॥६९२॥

kop kai utar dhet bhiee chal ree chal too kin beech dhiee hai ||692||


ਦੂਤੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

दूती बाच कान्रह सो ॥

dhootee baach kaanreh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੋਪ ਕੈ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਇਨ ਆਇ ਕਹਿਯੋ ਫਿਰਿ ਸੰਗ ਸੁਜਾਨੈ ॥

कोप कै उतर देत भई इन आइ कहियो फिरि संग सुजानै ॥

kop kai utar dhet bhiee in aai kahiyo fir sa(n)g sujaanai ||

ਬੈਠ ਰਹੀ ਹਠ ਮਾਨਿ ਤ੍ਰੀਯਾ ਹਉ ਮਨਾਇ ਰਹੀ ਜੜ ਕਿਉ ਹੂੰ ਨ ਮਾਨੈ ॥

बैठ रही हठ मानि त्रीया हउ मनाइ रही जड़ किउ हूँ न मानै ॥

baiTh rahee haTh maan treeyaa hau manai rahee jaR kiau hoo(n) na maanai ||

ਸਾਮ ਦੀਏ ਨ ਮਨੈ ਨਹੀ ਦੰਡ ਮਨੈ ਨਹੀ ਭੇਦ ਦੀਏ ਅਰੁ ਦਾਨੈ ॥

साम दीए न मनै नही दंड मनै नही भेद दीए अरु दानै ॥

saam dhe'ee na manai nahee dha(n)dd manai nahee bhedh dhe'ee ar dhaanai ||

ਐਸੀ ਗੁਵਾਰਿ ਸੋ ਹੇਤ ਕਹਾ ਤੁਮਰੀ ਜੋਊ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੋ ਰੰਗ ਨ ਜਾਨੈ ॥੬੯੩॥

ऐसी गुवारि सो हेत कहा तुमरी जोऊ प्रीति को रंग न जानै ॥६९३॥

aaisee guvaar so het kahaa tumaree jouoo preet ko ra(n)g na jaanai ||693||


ਮੈਨਪ੍ਰਭਾ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

मैनप्रभा बाच कान्रह जू सो ॥

mainaprabhaa baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੈਨਪ੍ਰਭਾ ਹਰਿ ਪਾਸ ਹੁਤੀ ਸੁਨ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਤਬ ਬੋਲਿ ਉਠੀ ਹੈ ॥

मैनप्रभा हरि पास हुती सुन कै बतीया तब बोलि उठी है ॥

mainaprabhaa har paas hutee sun kai bateeyaa tab bol uThee hai ||

ਲਿਆਇ ਹੋ ਹਉ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮ ਤੇ ਹਰਿ ਜੂ ਜੋਊ ਗ੍ਵਾਰ ਰੁਠੀ ਹੈ ॥

लिआइ हो हउ इह भाति कहियो तुम ते हरि जू जोऊ ग्वार रुठी है ॥

liaai ho hau ieh bhaat kahiyo tum te har joo jouoo gavaiaar ruThee hai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਪਾਇਨ ਪੈ ਤਬ ਹੀ ਸੁ ਲਿਯਾਵਨ ਤਾਹੀ ਕੇ ਕਾਜ ਉਠੀ ਹੈ ॥

कान्रह के पाइन पै तब ही सु लियावन ताही के काज उठी है ॥

kaanreh ke pain pai tab hee su liyaavan taahee ke kaaj uThee hai ||

ਸੁੰਦਰਤਾ ਮੁਖ ਊਪਰ ਤੇ ਮਨੋ ਕੰਜ ਪ੍ਰਭਾ ਸਭ ਵਾਰ ਸੁਟੀ ਹੈ ॥੬੯੪॥

सुँदरता मुख ऊपर ते मनो कंज प्रभा सभ वार सुटी है ॥६९४॥

su(n)dharataa mukh uoopar te mano ka(n)j prabhaa sabh vaar suTee hai ||694||


ਹਰਿ ਪਾਇਨ ਪੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਜੂ ਉਹ ਕੇ ਢਿਗ ਹਉ ਚਲਿ ਜੈਹੋ ॥

हरि पाइन पै इह भाति कहियो हरि जू उह के ढिग हउ चलि जैहो ॥

har pain pai ieh bhaat kahiyo har joo uh ke ddig hau chal jaiho ||

ਜਾ ਹੀ ਉਪਾਵ ਤੇ ਆਇ ਹੈ ਸੁੰਦਰਿ ਤਾਹੀ ਉਪਾਇ ਮਨਾਇ ਲਿਯੈ ਹੋ ॥

जा ही उपाव ते आइ है सुँदरि ताही उपाइ मनाइ लियै हो ॥

jaa hee upaav te aai hai su(n)dhar taahee upai manai liyai ho ||

ਪਾਇਨ ਪੈ ਬਿਨਤੀਅਨ ਕੈ ਰਿਝਵਾਇ ਕੈ ਸੁੰਦਰਿ ਗ੍ਵਾਰਿ ਮਨੈਹੋ ॥

पाइन पै बिनतीअन कै रिझवाइ कै सुँदरि ग्वारि मनैहो ॥

pain pai binateean kai rijhavai kai su(n)dhar gavaiaar manaiho ||

ਆਜ ਹੀ ਤੋ ਢਿਗ ਆਨਿ ਮਿਲੈਹੋ ਜੂ ਲ੍ਯਾਏ ਬਿਨਾ ਤੁਮਰੀ ਨ ਕਹੈ ਹੋ ॥੬੯੫॥

आज ही तो ढिग आनि मिलैहो जू ल्याए बिना तुमरी न कहै हो ॥६९५॥

aaj hee to ddig aan milaiho joo layaae binaa tumaree na kahai ho ||695||


ਹਰਿ ਪਾਇਨ ਪੈ ਤਿਹ ਠਉਰ ਚਲੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਫੁਨਿ ਮੈਨਪ੍ਰਭਾ ॥

हरि पाइन पै तिह ठउर चली कबि स्याम कहै फुनि मैनप्रभा ॥

har pain pai teh Thaur chalee kab sayaam kahai fun mainaprabhaa ||

ਜਿਹ ਕੇ ਨਹੀ ਤੁਲਿ ਮੰਦੋਦਰਿ ਹੈ ਜਿਹ ਤੁਲ ਤ੍ਰੀਯਾ ਨਹੀ ਇੰਦ੍ਰ ਸਭਾ ॥

जिह के नही तुलि मंदोदरि है जिह तुल त्रीया नही इंद्र सभा ॥

jeh ke nahee tul ma(n)dhodhar hai jeh tul treeyaa nahee i(n)dhr sabhaa ||

ਜਿਹ ਕੋ ਮੁਖ ਸੁੰਦਰ ਰਾਜਤ ਹੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਲਸੈ ਤ੍ਰੀਯਾ ਵਾ ਕੀ ਅਭਾ ॥

जिह को मुख सुँदर राजत है इह भाति लसै त्रीया वा की अभा ॥

jeh ko mukh su(n)dhar raajat hai ieh bhaat lasai treeyaa vaa kee abhaa ||

ਮਨੋ ਚੰਦ ਕੁਰੰਗਨ ਕੇਹਰ ਕੀਰ ਪ੍ਰਭਾ ਕੋ ਸਭੋ ਧਨ ਯਾਹਿ ਲਭਾ ॥੬੯੬॥

मनो चंद कुरंगन केहर कीर प्रभा को सभो धन याहि लभा ॥६९६॥

mano cha(n)dh kura(n)gan kehar keer prabhaa ko sabho dhan yaeh labhaa ||696||


ਪ੍ਰਤਿਉਤਰ ਬਾਚ ॥

प्रतिउतर बाच ॥

pratiautar baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਚਲਿ ਚੰਦਮੁਖੀ ਹਰਿ ਕੇ ਢਿਗ ਤੇ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਪਹਿ ਪੈ ਚਲਿ ਆਈ ॥

चलि चंदमुखी हरि के ढिग ते बृखभान सुता पहि पै चलि आई ॥

chal cha(n)dhamukhee har ke ddig te birakhabhaan sutaa peh pai chal aaiee ||

ਆਇ ਕੈ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਤਿਹ ਸੋ ਬਲ ਬੇਗ ਚਲੋ ਨੰਦ ਲਾਲ ਬੁਲਾਈ ॥

आइ कै ऐसे कहियो तिह सो बल बेग चलो नंद लाल बुलाई ॥

aai kai aaise kahiyo teh so bal beg chalo na(n)dh laal bulaiee ||

ਮੈ ਨ ਚਲੋ ਹਰਿ ਪਾਸ ਹਹਾ ਚਲੁ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਨ ਕਰੋ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

मै न चलो हरि पास हहा चलु ऐसे कहियो न करो दुचिताई ॥

mai na chalo har paas hahaa chal aaise kahiyo na karo dhuchitaiee ||

ਕਾਹੇ ਕੋ ਬੈਠ ਰਹੀ ਇਹ ਠਉਰ ਮੈ ਮੋਹਨ ਕੋ ਮਨੋ ਚਿਤੁ ਚੁਰਾਈ ॥੬੯੭॥

काहे को बैठ रही इह ठउर मै मोहन को मनो चितु चुराई ॥६९७॥

kaahe ko baiTh rahee ieh Thaur mai mohan ko mano chit churaiee ||697||


ਜਾਹਿ ਘੋਰ ਘਟਾ ਘਟ ਆਏ ਘਨੇ ਚਹੂੰ ਓਰਨ ਮੈ ਜਹ ਮੋਰ ਪੁਕਾਰੈ ॥

जाहि घोर घटा घट आए घने चहूँ ओरन मै जह मोर पुकारै ॥

jaeh ghor ghaTaa ghaT aae ghane chahoo(n) oran mai jeh mor pukaarai ||

ਨਾਚਤ ਹੈ ਜਹ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਤਿਹ ਪੇਖਿ ਘਨੇ ਬਿਰਹੀ ਤਨ ਵਾਰੈ ॥

नाचत है जह ग्वारनीया तिह पेखि घने बिरही तन वारै ॥

naachat hai jeh gavaiaaraneeyaa teh pekh ghane birahee tan vaarai ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਜਦੁਰਾਇ ਸੁਨੋ ਮੁਰਲੀ ਕੇ ਬਜਾਇ ਕੈ ਤੋਹਿ ਚਿਤਾਰੈ ॥

तउन समै जदुराइ सुनो मुरली के बजाइ कै तोहि चितारै ॥

taun samai jadhurai suno muralee ke bajai kai toh chitaarai ||

ਤਾਹੀ ਤੇ ਬੇਗ ਚਲੋ ਸਜਨੀ ਤਿਹ ਕਉਤਕ ਕੋ ਹਮ ਜਾਇ ਨਿਹਾਰੈ ॥੬੯੮॥

ताही ते बेग चलो सजनी तिह कउतक को हम जाइ निहारै ॥६९८॥

taahee te beg chalo sajanee teh kautak ko ham jai nihaarai ||698||


ਤਾ ਤੇ ਨ ਮਾਨ ਕਰੋ ਸਜਨੀ ਹਰਿ ਪਾਸ ਚਲੋ ਨਾਹਿ ਸੰਕ ਬਿਚਾਰੋ ॥

ता ते न मान करो सजनी हरि पास चलो नाहि संक बिचारो ॥

taa te na maan karo sajanee har paas chalo naeh sa(n)k bichaaro ||

ਬਾਤ ਧਰੋ ਰਸ ਹੂੰ ਕੀ ਮਨੈ ਅਪਨੈ ਮਨ ਮੈ ਨ ਕਛੂ ਹਠ ਧਾਰੋ ॥

बात धरो रस हूँ की मनै अपनै मन मै न कछू हठ धारो ॥

baat dharo ras hoo(n) kee manai apanai man mai na kachhoo haTh dhaaro ||

ਕਉਤਕ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਕੋ ਦੇਖਨ ਕੋ ਤਿਹ ਕੋ ਜਸ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਉਚਾਰੋ ॥

कउतक कान्रह्रह को देखन को तिह को जस पै कबि स्याम उचारो ॥

kautak kaanrahreh ko dhekhan ko teh ko jas pai kab sayaam uchaaro ||

ਕਾਹੇ ਕਉ ਬੈਠ ਰਹੀ ਹਠ ਕੈ ਕਹਿਯੋ ਦੇਖਨ ਕਉ ਉਮਗਿਯੋ ਮਨ ਸਾਰੋ ॥੬੯੯॥

काहे कउ बैठ रही हठ कै कहियो देखन कउ उमगियो मन सारो ॥६९९॥

kaahe kau baiTh rahee haTh kai kahiyo dhekhan kau umagiyo man saaro ||699||


ਹਰਿ ਪਾਸ ਨ ਮੈ ਚਲਹੋ ਸਜਨੀ ਪਿਖਬੇ ਕਹੁ ਕਉਤੁਕ ਜੀਯ ਨ ਮੇਰੋ ॥

हरि पास न मै चलहो सजनी पिखबे कहु कउतुक जीय न मेरो ॥

har paas na mai chalaho sajanee pikhabe kahu kautuk jeey na mero ||

ਸ੍ਯਾਮ ਰਚੇ ਸੰਗ ਅਉਰ ਤ੍ਰੀਯਾ ਤਜ ਕੈ ਹਮ ਸੋ ਫੁਨਿ ਨੇਹ ਘਨੇਰੋ ॥

स्याम रचे संग अउर त्रीया तज कै हम सो फुनि नेह घनेरो ॥

sayaam rache sa(n)g aaur treeyaa taj kai ham so fun neh ghanero ||

ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਹੂੰ ਕੇ ਸੰਗਿ ਕਹਿਯੋ ਨਹਿ ਨਾਰੀ ਕਹਾ ਮੁਹਿ ਨੈਨਨ ਹੇਰੋ ॥

चंद्रभगा हूँ के संगि कहियो नहि नारी कहा मुहि नैनन हेरो ॥

cha(n)dhrabhagaa hoo(n) ke sa(n)g kahiyo neh naaree kahaa muh nainan hero ||

ਤਾ ਤੇ ਨ ਪਾਸ ਚਲੋ ਹਰਿ ਹਉ ਉਠਿ ਜਾਹਿ ਜੋਊ ਉਮਗਿਯੋ ਮਨ ਤੇਰੋ ॥੭੦੦॥

ता ते न पास चलो हरि हउ उठि जाहि जोऊ उमगियो मन तेरो ॥७००॥

taa te na paas chalo har hau uTh jaeh jouoo umagiyo man tero ||700||


ਦੂਤੀ ਬਾਚ ॥

दूती बाच ॥

dhootee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੈ ਕਹਾ ਦੇਖਨ ਜਾਉ ਤ੍ਰੀਯਾ ਤੁਹਿ ਲ੍ਯਾਵਨ ਕੋ ਜਦੁਰਾਇ ਪਠਾਈ ॥

मै कहा देखन जाउ त्रीया तुहि ल्यावन को जदुराइ पठाई ॥

mai kahaa dhekhan jaau treeyaa tuh layaavan ko jadhurai paThaiee ||

ਤਾਹੀ ਤੇ ਹਉ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤੇ ਉਠ ਕੈ ਤਬ ਹੀ ਤੁਮਰੇ ਪਹਿ ਆਈ ॥

ताही ते हउ सभ ग्वारनि ते उठ कै तब ही तुमरे पहि आई ॥

taahee te hau sabh gavaiaaran te uTh kai tab hee tumare peh aaiee ||

ਤੂ ਅਭਿਮਾਨ ਕੈ ਬੈਠ ਰਹੀ ਨਹੀ ਮਾਨਤ ਹੈ ਕਛੂ ਸੀਖ ਪਰਾਈ ॥

तू अभिमान कै बैठ रही नही मानत है कछू सीख पराई ॥

too abhimaan kai baiTh rahee nahee maanat hai kachhoo seekh paraiee ||

ਬੇਗ ਚਲੋ ਤੁਹਿ ਸੰਗ ਕਹੋ ਤੁਮਰੇ ਮਗੁ ਹੇਰਤ ਠਾਢਿ ਕਨ੍ਰਹਾਈ ॥੭੦੧॥

बेग चलो तुहि संग कहो तुमरे मगु हेरत ठाढि कन्रहाई ॥७०१॥

beg chalo tuh sa(n)g kaho tumare mag herat Thaadd kanrahaiee ||701||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ॥

राधे बाच ॥

raadhe baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹਰਿ ਪਾਸ ਨ ਮੈ ਚਲਹੋ ਰੀ ਸਖੀ ਤੁ ਕਹਾ ਭਯੋ ਜੁ ਤੁਹਿ ਬਾਤ ਬਨਾਈ ॥

हरि पास न मै चलहो री सखी तु कहा भयो जु तुहि बात बनाई ॥

har paas na mai chalaho ree sakhee ta kahaa bhayo ju tuh baat banaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਨ ਮੋਰੇ ਤੂ ਪਾਸ ਪਠੀ ਇਹ ਬਾਤਨ ਤੇ ਕਪਟੀ ਲਖਿ ਪਾਈ ॥

स्याम न मोरे तू पास पठी इह बातन ते कपटी लखि पाई ॥

sayaam na more too paas paThee ieh baatan te kapaTee lakh paiee ||

ਭੀ ਕਪਟੀ ਤੁ ਕਹਾ ਭਯੋ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤੂ ਨ ਲਖੈ ਕਛੁ ਪੀਰ ਪਰਾਈ ॥

भी कपटी तु कहा भयो ग्वारनि तू न लखै कछु पीर पराई ॥

bhee kapaTee ta kahaa bhayo gavaiaaran too na lakhai kachh peer paraiee ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਸਿਰ ਨ੍ਯਾਇ ਰਹੀ ਕਹਿ ਐਸੋ ਨ ਮਾਨ ਪਿਖਿਯੋ ਕਹੂੰ ਮਾਈ ॥੭੦੨॥

यौ कहि कै सिर न्याइ रही कहि ऐसो न मान पिखियो कहूँ माई ॥७०२॥

yau keh kai sir nayai rahee keh aaiso na maan pikhiyo kahoo(n) maiee ||702||


ਦੂਤੀ ਬਾਚ ॥

दूती बाच ॥

dhootee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫਿਰਿ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਚਲੀਯੇ ਰੀ ਹਹਾ ਬਲ ਮੈ ਹਰਿ ਕੇ ਪਹਿ ਯੋ ਕਹਿ ਆਈ ॥

फिरि ऐसे कहियो चलीये री हहा बल मै हरि के पहि यो कहि आई ॥

fir aaise kahiyo chaleeye ree hahaa bal mai har ke peh yo keh aaiee ||

ਹੋਹੁ ਨ ਆਤੁਰ ਸ੍ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਹਉ ਲ੍ਯਾਵਤ ਹੋ ਉਹਿ ਜਾਇ ਮਨਾਈ ॥

होहु न आतुर स्री बृजनाथ हउ ल्यावत हो उहि जाइ मनाई ॥

hoh na aatur sree birajanaath hau layaavat ho uh jai manaiee ||

ਇਤ ਤੂ ਕਰਿ ਮਾਨ ਰਹੀ ਸਜਨੀ ਹਰਿ ਪੈ ਤੁ ਚਲੋ ਤਜਿ ਕੈ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

इत तू करि मान रही सजनी हरि पै तु चलो तजि कै दुचिताई ॥

eit too kar maan rahee sajanee har pai ta chalo taj kai dhuchitaiee ||

ਤੋ ਬਿਨੁ ਮੋ ਪੈ ਨ ਜਾਤ ਗਯੋ ਕਹਿਯੋ ਜਾਨਤ ਹੈ ਕਛੁ ਬਾਤ ਪਰਾਈ ॥੭੦੩॥

तो बिनु मो पै न जात गयो कहियो जानत है कछु बात पराई ॥७०३॥

to bin mo pai na jaat gayo kahiyo jaanat hai kachh baat paraiee ||703||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ॥

राधे बाच ॥

raadhe baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਉਠ ਆਈ ਹੁਤੀ ਤੁ ਕਹਾ ਭਯੋ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਆਈ ਨ ਪੂਛਿ ਕਹਿਯੋ ਕਛੁ ਸੋਰੀ ॥

उठ आई हुती तु कहा भयो ग्वारनि आई न पूछि कहियो कछु सोरी ॥

auTh aaiee hutee ta kahaa bhayo gavaiaaran aaiee na poochh kahiyo kachh soree ||

ਜਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਫਿਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਪੈ ਇਹ ਤੇ ਕਛੁ ਲਾਜ ਨ ਲਾਗਤ ਤੋਰੀ ॥

जाहि कहियो फिरि कै हरि पै इह ते कछु लाज न लागत तोरी ॥

jaeh kahiyo fir kai har pai ieh te kachh laaj na laagat toree ||

ਮੋ ਬਤੀਯਾ ਜਦੁਰਾਇ ਜੁ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਹੀਯੋ ਸੁ ਅਹੋ ਰੀ ॥

मो बतीया जदुराइ जु पै कबि स्याम कहै कहीयो सु अहो री ॥

mo bateeyaa jadhurai ju pai kab sayaam kahai kaheeyo su aho ree ||

ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਸੰਗਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਰੋ ਤੁਮ ਸੋ ਨਹੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਹਿਯੋ ਪ੍ਰਭ ਮੋਰੀ ॥੭੦੪॥

चंद्रभगा संगि प्रीति करो तुम सो नही प्रीति कहियो प्रभ मोरी ॥७०४॥

cha(n)dhrabhagaa sa(n)g preet karo tum so nahee preet kahiyo prabh moree ||704||


ਸੁਨਿ ਕੈ ਇਹ ਰਾਧਿਕਾ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਤਬ ਸੋ ਉਠਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਪਾਇ ਲਾਗੀ ॥

सुनि कै इह राधिका की बतीया तब सो उठि ग्वारनि पाइ लागी ॥

sun kai ieh raadhikaa kee bateeyaa tab so uTh gavaiaaran pai laagee ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਕੀ ਤੁਮ ਸੋ ਹਰਿ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਹੂੰ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਤਿਯਾਗੀ ॥

प्रीति कहियो हरि की तुम सो हरि चंद्रभगा हूँ सो प्रीति तियागी ॥

preet kahiyo har kee tum so har cha(n)dhrabhagaa hoo(n) so preet tiyaagee ||

ਉਨ ਕੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਬੁਧਿ ਕਹੈ ਤੁਹਿ ਦੇਖਨ ਕੇ ਰਸ ਮੈ ਅਨੁਰਾਗੀ ॥

उन की कबि स्याम सुबुधि कहै तुहि देखन के रस मै अनुरागी ॥

aun kee kab sayaam subudh kahai tuh dhekhan ke ras mai anuraagee ||

ਤਾਹੀ ਤੇ ਬਾਲ ਬਲਾਇ ਲਿਉ ਤੇਰੀ ਮੈ ਬੇਗ ਚਲੋ ਹਰਿ ਪੈ ਬਡਭਾਗੀ ॥੭੦੫॥

ताही ते बाल बलाइ लिउ तेरी मै बेग चलो हरि पै बडभागी ॥७०५॥

taahee te baal balai liau teree mai beg chalo har pai baddabhaagee ||705||


ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਬੁਲਾਵਤ ਹੈ ਚਲੀਯੈ ਕਛੁ ਜਾਨਤ ਹੈ ਰਸ ਬਾਤ ਇਯਾਨੀ ॥

बृजनाथ बुलावत है चलीयै कछु जानत है रस बात इयानी ॥

birajanaath bulaavat hai chaleeyai kachh jaanat hai ras baat iyaanee ||

ਤੋਹੀ ਕੋ ਸ੍ਯਾਮ ਨਿਹਾਰਤ ਹੈ ਤੁਮਰੈ ਬਿਨੁ ਰੀ ਨਹੀ ਪੀਵਤ ਪਾਨੀ ॥

तोही को स्याम निहारत है तुमरै बिनु री नही पीवत पानी ॥

tohee ko sayaam nihaarat hai tumarai bin ree nahee peevat paanee ||

ਤੂ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਨਹੀ ਜਾਊਗੀ ਹਉ ਹਰਿ ਪੈ ਇਹ ਬਾਨੀ ॥

तू इह भाति कहै मुख ते नही जाऊगी हउ हरि पै इह बानी ॥

too ieh bhaat kahai mukh te nahee jaauoogee hau har pai ieh baanee ||

ਤਾਹੀ ਤੇ ਜਾਨਤ ਹੋ ਸਜਨੀ ਅਬ ਜੋਬਨ ਪਾਇ ਭਈ ਹੈ ਦੀਵਾਨੀ ॥੭੦੬॥

ताही ते जानत हो सजनी अब जोबन पाइ भई है दीवानी ॥७०६॥

taahee te jaanat ho sajanee ab joban pai bhiee hai dheevaanee ||706||


ਮਾਨ ਕਰਿਯੋ ਮਨ ਬੀਚ ਤ੍ਰੀਯਾ ਤਜਿ ਬੈਠਿ ਰਹੀ ਹਿਤ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਕੇਰੋ ॥

मान करियो मन बीच त्रीया तजि बैठि रही हित स्याम जू केरो ॥

maan kariyo man beech treeyaa taj baiTh rahee hit sayaam joo kero ||

ਬੈਠਿ ਰਹੀ ਬਕ ਧ੍ਯਾਨ ਧਰੇ ਸਭ ਜਾਨਤ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੋ ਭਾਵਨ ਨੇਰੋ ॥

बैठि रही बक ध्यान धरे सभ जानत प्रीति को भावन नेरो ॥

baiTh rahee bak dhayaan dhare sabh jaanat preet ko bhaavan nero ||

ਤੋ ਸੰਗ ਤੌ ਮੈ ਕਹਿਯੋ ਸਜਨੀ ਕਹਬੇ ਕਹੁ ਜੋ ਉਮਗਿਯੋ ਮਨ ਮੇਰੋ ॥

तो संग तौ मै कहियो सजनी कहबे कहु जो उमगियो मन मेरो ॥

to sa(n)g tau mai kahiyo sajanee kahabe kahu jo umagiyo man mero ||

ਆਵਤ ਹੈ ਇਮ ਮੋ ਮਨ ਮੈ ਦਿਨ ਚਾਰ ਕੋ ਪਾਹੁਨੋ ਜੋਬਨ ਤੇਰੋ ॥੭੦੭॥

आवत है इम मो मन मै दिन चार को पाहुनो जोबन तेरो ॥७०७॥

aavat hai im mo man mai dhin chaar ko paahuno joban tero ||707||


ਤਾ ਕੈ ਨ ਪਾਸ ਚਲੈ ਉਠ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਜੋਊ ਸਭ ਲੋਗਨ ਭੋਗੀ ॥

ता कै न पास चलै उठ कै कबि स्याम जोऊ सभ लोगन भोगी ॥

taa kai na paas chalai uTh kai kab sayaam jouoo sabh logan bhogee ||

ਤਾ ਤੇ ਰਹੀ ਹਠਿ ਬੈਠ ਤ੍ਰੀਯਾ ਉਨ ਕੋ ਕਛੁ ਜੈ ਗੋ ਨ ਆਪਨ ਖੋਗੀ ॥

ता ते रही हठि बैठ त्रीया उन को कछु जै गो न आपन खोगी ॥

taa te rahee haTh baiTh treeyaa un ko kachh jai go na aapan khogee ||

ਜੋਬਨ ਕੋ ਜੁ ਗੁਮਾਨ ਕਰੈ ਤਿਹ ਜੋਬਨ ਕੀ ਸੁ ਦਸਾ ਇਹ ਹੋਗੀ ॥

जोबन को जु गुमान करै तिह जोबन की सु दसा इह होगी ॥

joban ko ju gumaan karai teh joban kee su dhasaa ieh hogee ||

ਤੋ ਤਜਿ ਕੈ ਸੋਊ ਯੋ ਰਮਿ ਹੈ ਜਿਮ ਕੰਧ ਪੈ ਡਾਰ ਬਘੰਬਰ ਜੋਗੀ ॥੭੦੮॥

तो तजि कै सोऊ यो रमि है जिम कंध पै डार बघंबर जोगी ॥७०८॥

to taj kai souoo yo ram hai jim ka(n)dh pai ddaar bagha(n)bar jogee ||708||


ਨੈਨ ਕੁਰੰਗਨ ਸੇ ਤੁਮਰੇ ਕੇਹਰਿ ਕੀ ਕਟਿ ਰੀ ਸੁਨ ਤ੍ਵੈ ਹੈ ॥

नैन कुरंगन से तुमरे केहरि की कटि री सुन त्वै है ॥

nain kura(n)gan se tumare kehar kee kaT ree sun tavai hai ||

ਆਨਨ ਸੁੰਦਰ ਹੈ ਸਸਿ ਸੋ ਜਿਹ ਕੀ ਫੁਨਿ ਕੰਜ ਬਰਾਬਰ ਕ੍ਵੈ ਹੈ ॥

आनन सुँदर है ससि सो जिह की फुनि कंज बराबर क्वै है ॥

aanan su(n)dhar hai sas so jeh kee fun ka(n)j baraabar kavai hai ||

ਬੈਠ ਰਹੀ ਹਠ ਬਾਧਿ ਘਨੋ ਤਿਹ ਤੇ ਕਛੁ ਆਪਨ ਹੀ ਸੁਨ ਖ੍ਵੈ ਹੈ ॥

बैठ रही हठ बाधि घनो तिह ते कछु आपन ही सुन ख्वै है ॥

baiTh rahee haTh baadh ghano teh te kachh aapan hee sun khavai hai ||

ਏ ਤਨ ਸੁ ਤੁਹਿ ਬੈਰ ਕਰਿਯੋ ਹਰਿ ਸਿਉ ਹਠਿਏ ਤੁਮਰੋ ਕਹੁ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ॥੭੦੯॥

ए तन सु तुहि बैर करियो हरि सिउ हठिए तुमरो कहु ह्वै है ॥७०९॥

e tan su tuh bair kariyo har siau haThie tumaro kahu havai hai ||709||


ਸੁਨ ਕੈ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਅਤਿ ਰੋਸ ਭਰੀ ॥

सुन कै इह ग्वारनि की बतीया बृखभान सुता अति रोस भरी ॥

sun kai ieh gavaiaaran kee bateeyaa birakhabhaan sutaa at ros bharee ||

ਨੈਨ ਨਚਾਇ ਚੜਾਇ ਕੈ ਭਉਹਨ ਪੈ ਮਨ ਮੈ ਸੰਗ ਕ੍ਰੋਧ ਜਰੀ ॥

नैन नचाइ चड़ाइ कै भउहन पै मन मै संग क्रोध जरी ॥

nain nachai chaRai kai bhauhan pai man mai sa(n)g krodh jaree ||

ਜੋਊ ਆਈ ਮਨਾਵਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਥੀ ਤਿਹ ਸੋ ਬਤੀਯਾ ਇਮ ਪੈ ਉਚਰੀ ॥

जोऊ आई मनावन ग्वारनि थी तिह सो बतीया इम पै उचरी ॥

jouoo aaiee manaavan gavaiaaran thee teh so bateeyaa im pai ucharee ||

ਸਖੀ ਕਾਹੇ ਕੌ ਹਉ ਹਰਿ ਪਾਸ ਚਲੋ ਹਰਿ ਕੀ ਕਛੁ ਮੋ ਪਰਵਾਹ ਪਰੀ ॥੭੧੦॥

सखी काहे कौ हउ हरि पास चलो हरि की कछु मो परवाह परी ॥७१०॥

sakhee kaahe kau hau har paas chalo har kee kachh mo paravaeh paree ||710||


ਯੌ ਇਹ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਤਬ ਯਾ ਬਿਧਿ ਸੋ ਉਨਿ ਬਾਤ ਕਰੀ ਹੈ ॥

यौ इह उतर देत भई तब या बिधि सो उनि बात करी है ॥

yau ieh utar dhet bhiee tab yaa bidh so un baat karee hai ||

ਰਾਧੇ ਬਲਾਇ ਲਿਉ ਰੋਸ ਕਰੋ ਨਹਿ ਕਿਉ ਕਿਹ ਕੋਪ ਕੇ ਸੰਗ ਭਰੀ ਹੈ ॥

राधे बलाइ लिउ रोस करो नहि किउ किह कोप के संग भरी है ॥

raadhe balai liau ros karo neh kiau keh kop ke sa(n)g bharee hai ||

ਤੂ ਇਤ ਮਾਨ ਰਹੀ ਕਰਿ ਕੈ ਉਤ ਹੇਰਤ ਪੈ ਰਿਪੁ ਚੰਦ ਹਰੀ ਹੈ ॥

तू इत मान रही करि कै उत हेरत पै रिपु चंद हरी है ॥

too it maan rahee kar kai ut herat pai rip cha(n)dh haree hai ||

ਤੂ ਨ ਕਰੈ ਪਰਵਾਹ ਹਰੀ ਹਰਿ ਕੌ ਤੁਮਰੀ ਪਰਵਾਹ ਪਰੀ ਹੈ ॥੭੧੧॥

तू न करै परवाह हरी हरि कौ तुमरी परवाह परी है ॥७११॥

too na karai paravaeh haree har kau tumaree paravaeh paree hai ||711||


ਯੌਂ ਕਹਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਫਿਰਿ ਯੌ ਉਠਿ ਬੇਗ ਚਲੋ ਚਲਿ ਹੋਹੁ ਸੰਜੋਗੀ ॥

यौं कहि बात कही फिरि यौ उठि बेग चलो चलि होहु संजोगी ॥

yaua(n) keh baat kahee fir yau uTh beg chalo chal hoh sa(n)jogee ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਨੈਨ ਲਗੇ ਇਹ ਠਉਰ ਜੋਊ ਸਭ ਲੋਗਨ ਕੋ ਰਸ ਭੋਗੀ ॥

ताही के नैन लगे इह ठउर जोऊ सभ लोगन को रस भोगी ॥

taahee ke nain lage ieh Thaur jouoo sabh logan ko ras bhogee ||

ਤਾ ਕੇ ਨ ਪਾਸ ਚਲੈ ਸਜਨੀ ਉਨ ਕੋ ਕਛ ਜੈ ਹੈ ਨ ਆਪਨ ਖੋਗੀ ॥

ता के न पास चलै सजनी उन को कछ जै है न आपन खोगी ॥

taa ke na paas chalai sajanee un ko kachh jai hai na aapan khogee ||

ਤੈ ਮੁਖ ਰੀ ਬਲਿ ਦੇਖਨ ਕੋ ਜਦੁਰਾਇ ਕੇ ਨੈਨ ਭਏ ਦੋਊ ਬਿਓਗੀ ॥੭੧੨॥

तै मुख री बलि देखन को जदुराइ के नैन भए दोऊ बिओगी ॥७१२॥

tai mukh ree bal dhekhan ko jadhurai ke nain bhe dhouoo biogee ||712||


ਪੇਖਤ ਹੈ ਨਹੀ ਅਉਰ ਤ੍ਰੀਯਾ ਤੁਮਰੋ ਈ ਸੁਨੋ ਬਲਿ ਪੰਥ ਨਿਹਾਰੈ ॥

पेखत है नही अउर त्रीया तुमरो ई सुनो बलि पंथ निहारै ॥

pekhat hai nahee aaur treeyaa tumaro iee suno bal pa(n)th nihaarai ||

ਤੇਰੇ ਹੀ ਧ੍ਯਾਨ ਬਿਖੈ ਅਟਕੇ ਤੁਮਰੀ ਹੀ ਕਿਧੌ ਬਲਿ ਬਾਤ ਉਚਾਰੈ ॥

तेरे ही ध्यान बिखै अटके तुमरी ही किधौ बलि बात उचारै ॥

tere hee dhayaan bikhai aTake tumaree hee kidhau bal baat uchaarai ||

ਝੂਮਿ ਗਿਰੈ ਕਬਹੂੰ ਧਰਨੀ ਕਰਿ ਤ੍ਵੈ ਮਧਿ ਆਪਨ ਆਪ ਸੰਭਾਰੈ ॥

झूमि गिरै कबहूँ धरनी करि त्वै मधि आपन आप संभारै ॥

jhoom girai kabahoo(n) dharanee kar tavai madh aapan aap sa(n)bhaarai ||

ਤਉਨ ਸਮੈ ਸਖੀ ਤੋਹਿ ਚਿਤਾਰਿ ਕੈ ਸ੍ਯਾਮਿ ਜੂ ਮੈਨ ਕੋ ਮਾਨ ਨਿਵਾਰੈ ॥੭੧੩॥

तउन समै सखी तोहि चितारि कै स्यामि जू मैन को मान निवारै ॥७१३॥

taun samai sakhee toh chitaar kai sayaam joo main ko maan nivaarai ||713||


ਤਾ ਤੇ ਨ ਮਾਨ ਕਰੋ ਸਜਨੀ ਉਠਿ ਬੇਗ ਚਲੋ ਕਛੁ ਸੰਕ ਨ ਆਨੋ ॥

ता ते न मान करो सजनी उठि बेग चलो कछु संक न आनो ॥

taa te na maan karo sajanee uTh beg chalo kachh sa(n)k na aano ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਹਮ ਤੇ ਤੁਮਰੇ ਚਿਤ ਮੈ ਅਪਨੋ ਚਿਤ ਮਾਨੋ ॥

स्याम की बात सुनो हम ते तुमरे चित मै अपनो चित मानो ॥

sayaam kee baat suno ham te tumare chit mai apano chit maano ||

ਤੇਰੇ ਹੀ ਧ੍ਯਾਨ ਫਸੇ ਹਰਿ ਜੂ ਕਰ ਕੈ ਮਨਿ ਸੋਕ ਅਸੋਕ ਬਹਾਨੋ ॥

तेरे ही ध्यान फसे हरि जू कर कै मनि सोक असोक बहानो ॥

tere hee dhayaan fase har joo kar kai man sok asok bahaano ||

ਮੂੜ ਰਹੀ ਅਬਲਾ ਕਰਿ ਮਾਨ ਕਛੂ ਹਰਿ ਕੋ ਨਹੀ ਹੇਤ ਪਛਾਨੋ ॥੭੧੪॥

मूड़ रही अबला करि मान कछू हरि को नही हेत पछानो ॥७१४॥

mooR rahee abalaa kar maan kachhoo har ko nahee het pachhaano ||714||


ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਸੁਨ ਕੈ ਬਤੀਯਾ ਤਬ ਰਾਧਿਕਾ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ॥

ग्वारनि की सुन कै बतीया तब राधिका उतर देत भई ॥

gavaiaaran kee sun kai bateeyaa tab raadhikaa utar dhet bhiee ||

ਕਿਹ ਹੇਤ ਕਹਿਯੋ ਤਜਿ ਕੈ ਹਰਿ ਪਾਸਿ ਮਨਾਵਨ ਮੋਹੂ ਕੇ ਕਾਜ ਧਈ ॥

किह हेत कहियो तजि कै हरि पासि मनावन मोहू के काज धई ॥

keh het kahiyo taj kai har paas manaavan mohoo ke kaaj dhiee ||

ਨਹਿ ਹਉ ਚਲਿ ਹੋ ਹਰਿ ਪਾਸ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮਰੀ ਧਉ ਕਹਾ ਗਤਿ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ਦਈ ॥

नहि हउ चलि हो हरि पास कहियो तुमरी धउ कहा गति ह्वै है दई ॥

neh hau chal ho har paas kahiyo tumaree dhau kahaa gat havai hai dhiee ||

ਸਖੀ ਅਉਰਨ ਨਾਮ ਸੁ ਮੂੜ ਧਰੈ ਨ ਲਖੈ ਇਹ ਹਉਹੂੰ ਕਿ ਮੂੜ ਮਈ ॥੭੧੫॥

सखी अउरन नाम सु मूड़ धरै न लखै इह हउहूँ कि मूड़ मई ॥७१५॥

sakhee aauran naam su mooR dharai na lakhai ieh hauhoo(n) k mooR miee ||715||


ਸੁਨ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਕੋ ਕਹਿਯੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੋ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਉਤਰ ਦੀਨੋ ॥

सुन कै बृखभान सुता को कहियो इह भाति सो ग्वारनि उतर दीनो ॥

sun kai birakhabhaan sutaa ko kahiyo ieh bhaat so gavaiaaran utar dheeno ||

ਰੀ ਸੁਨ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਮੋ ਬਤੀਯਾ ਤਿਨ ਹੂੰ ਸੁਨਿ ਸ੍ਰੌਨ ਸੁਨੈਬੇ ਕਉ ਕੀਨੋ ॥

री सुन ग्वारनि मो बतीया तिन हूँ सुनि स्रौन सुनैबे कउ कीनो ॥

ree sun gavaiaaran mo bateeyaa tin hoo(n) sun srauan sunaibe kau keeno ||

ਮੋਹਿ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਕਿ ਤੂ ਮੂੜ ਮੈ ਮੂੜ ਤੁਹੀ ਮਨ ਮੈ ਕਰਿ ਚੀਨੋ ॥

मोहि कहै मुख ते कि तू मूड़ मै मूड़ तुही मन मै करि चीनो ॥

moh kahai mukh te k too mooR mai mooR tuhee man mai kar cheeno ||

ਜੈ ਜਦੁਰਾਇ ਕੀ ਭੇਜੀ ਅਈ ਸੁਨਿ ਤੈ ਜਦੁਰਾਇ ਹੂੰ ਸੋ ਹਠ ਕੀਨੋ ॥੭੧੬॥

जै जदुराइ की भेजी अई सुनि तै जदुराइ हूँ सो हठ कीनो ॥७१६॥

jai jadhurai kee bhejee iee sun tai jadhurai hoo(n) so haTh keeno ||716||


ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਚਲੀਯੈ ਉਠਿ ਕੈ ਬਲਿ ਸੰਕ ਨ ਆਨੋ ॥

यौ कहि कै इह भाति कहियो चलीयै उठि कै बलि संक न आनो ॥

yau keh kai ieh bhaat kahiyo chaleeyai uTh kai bal sa(n)k na aano ||

ਤੋ ਹੀ ਸੋ ਹੇਤੁ ਘਨੋ ਹਰਿ ਕੋ ਤਿਹ ਤੇ ਤੁਮਹੂੰ ਕਹਿਯੋ ਸਾਚ ਹੀ ਜਾਨੋ ॥

तो ही सो हेतु घनो हरि को तिह ते तुमहूँ कहियो साच ही जानो ॥

to hee so het ghano har ko teh te tumahoo(n) kahiyo saach hee jaano ||

ਪਾਇਨ ਤੋਰੇ ਪਰੋ ਲਲਨਾ ਹਠ ਦੂਰ ਕਰੋ ਕਬਹੂੰ ਫੁਨਿ ਮਾਨੋ ॥

पाइन तोरे परो ललना हठ दूर करो कबहूँ फुनि मानो ॥

pain tore paro lalanaa haTh dhoor karo kabahoo(n) fun maano ||

ਤਾ ਤੇ ਨਿਸੰਕ ਚਲੋ ਤਜਿ ਸੰਕ ਕਿਧੌ ਹਰਿ ਕੀ ਵਹ ਪ੍ਰੀਤਿ ਪਛਾਨੋ ॥੭੧੭॥

ता ते निसंक चलो तजि संक किधौ हरि की वह प्रीति पछानो ॥७१७॥

taa te nisa(n)k chalo taj sa(n)k kidhau har kee veh preet pachhaano ||717||


ਕੁੰਜਨ ਮੈ ਸਖੀ ਰਾਸ ਸਮੈ ਹਰਿ ਕੇਲ ਕਰੇ ਤੁਮ ਸੋ ਬਨ ਮੈ ॥

कुँजन मै सखी रास समै हरि केल करे तुम सो बन मै ॥

ku(n)jan mai sakhee raas samai har kel kare tum so ban mai ||

ਜਿਤਨੋ ਉਨ ਕੋ ਹਿਤ ਹੈ ਤੁਹਿ ਮੋ ਤਿਹ ਤੇ ਨਹੀ ਆਧਿਕ ਹੈ ਉਨ ਮੈ ॥

जितनो उन को हित है तुहि मो तिह ते नही आधिक है उन मै ॥

jitano un ko hit hai tuh mo teh te nahee aadhik hai un mai ||

ਮੁਰਝਾਇ ਗਏ ਬਿਨੁ ਤੈ ਹਰਿ ਜੂ ਨਹਿ ਖੇਲਤ ਹੈ ਫੁਨਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਮੈ ॥

मुरझाइ गए बिनु तै हरि जू नहि खेलत है फुनि ग्वारिन मै ॥

murajhai ge bin tai har joo neh khelat hai fun gavaiaarin mai ||

ਤਿਹ ਤੇ ਸੁਨ ਬੇਗ ਨਿਸੰਕ ਚਲੋ ਕਰ ਕੈ ਸੁਧਿ ਪੈ ਬਨ ਕੀ ਮਨ ਮੈ ॥੭੧੮॥

तिह ते सुन बेग निसंक चलो कर कै सुधि पै बन की मन मै ॥७१८॥

teh te sun beg nisa(n)k chalo kar kai sudh pai ban kee man mai ||718||


ਸ੍ਯਾਮ ਬੁਲਾਵਤ ਹੈ ਚਲੀਯੈ ਬਲਿ ਪੈ ਮਨ ਮੈ ਨ ਕਛੂ ਹਠੁ ਕੀਜੈ ॥

स्याम बुलावत है चलीयै बलि पै मन मै न कछू हठु कीजै ॥

sayaam bulaavat hai chaleeyai bal pai man mai na kachhoo haTh keejai ||

ਬੈਠ ਰਹੀ ਕਰਿ ਮਾਨ ਘਨੋ ਕਛੁ ਅਉਰਨ ਹੂੰ ਕੋ ਕਹਿਯੋ ਸੁਨ ਲੀਜੈ ॥

बैठ रही करि मान घनो कछु अउरन हूँ को कहियो सुन लीजै ॥

baiTh rahee kar maan ghano kachh aauran hoo(n) ko kahiyo sun leejai ||

ਤਾ ਤੇ ਹਉ ਬਾਤ ਕਰੋ ਤੁਮ ਸੋ ਇਹ ਤੇ ਨ ਕਛੂ ਤੁਮਰੋ ਕਹਿਯੋ ਛੀਜੈ ॥

ता ते हउ बात करो तुम सो इह ते न कछू तुमरो कहियो छीजै ॥

taa te hau baat karo tum so ieh te na kachhoo tumaro kahiyo chheejai ||

ਨੈਕੁ ਨਿਹਾਰ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਓਰਿ ਸਭੈ ਤਜ ਮਾਨ ਅਬੈ ਹਸਿ ਦੀਜੈ ॥੭੧੯॥

नैकु निहार कहियो हम ओरि सभै तज मान अबै हसि दीजै ॥७१९॥

naik nihaar kahiyo ham or sabhai taj maan abai has dheejai ||719||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਦੂਤੀ ਸੋ ॥

राधे बाच दूती सो ॥

raadhe baach dhootee so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੈ ਨ ਹਸੋ ਹਰਿ ਪਾਸ ਚਲੋ ਨਹੀ ਜਉ ਤੁਹਿ ਸੀ ਸਖੀ ਕੋਟਿਕ ਆਵੈ ॥

मै न हसो हरि पास चलो नही जउ तुहि सी सखी कोटिक आवै ॥

mai na haso har paas chalo nahee jau tuh see sakhee koTik aavai ||

ਆਇ ਉਪਾਵ ਅਨੇਕ ਕਰੈ ਅਰੁ ਪਾਇਨ ਊਪਰ ਸੀਸ ਨਿਆਵੈ ॥

आइ उपाव अनेक करै अरु पाइन ऊपर सीस निआवै ॥

aai upaav anek karai ar pain uoopar sees niaavai ||

ਮੈ ਕਬਹੂ ਨਹੀ ਜਾਉ ਤਹਾ ਤੁਹ ਸੀ ਕਹਿ ਕੋਟਿਕ ਬਾਤ ਬਨਾਵੈ ॥

मै कबहू नही जाउ तहा तुह सी कहि कोटिक बात बनावै ॥

mai kabahoo nahee jaau tahaa tuh see keh koTik baat banaavai ||

ਅਉਰ ਕੀ ਕਉਨ ਗਨੈ ਗਨਤੀ ਬਲਿ ਆਪਨ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਜੂ ਸੀਸ ਝੁਕਾਵੈ ॥੭੨੦॥

अउर की कउन गनै गनती बलि आपन कान्रह्रह जू सीस झुकावै ॥७२०॥

aaur kee kaun ganai ganatee bal aapan kaanrahreh joo sees jhukaavai ||720||


ਪ੍ਰਤਿਉਤਰ ਬਾਚ ॥

प्रतिउतर बाच ॥

pratiautar baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜੋ ਇਨ ਐਸੀ ਕਹੀ ਬਤੀਯਾ ਤਬ ਹੀ ਉਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਯੌ ਕਹਿਯੌ ਹੋ ਰੀ ॥

जो इन ऐसी कही बतीया तब ही उह ग्वारनि यौ कहियौ हो री ॥

jo in aaisee kahee bateeyaa tab hee uh gavaiaaran yau kahiyau ho ree ||

ਜਉ ਹਮ ਬਾਤ ਕਹੀ ਚਲੀਯੈ ਤੂ ਕਹੈ ਹਮ ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤ ਹੀ ਛੋਰੀ ॥

जउ हम बात कही चलीयै तू कहै हम स्याम सो प्रीत ही छोरी ॥

jau ham baat kahee chaleeyai too kahai ham sayaam so preet hee chhoree ||

ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਮਾਈ ਕਹਾ ਕਹੀਯੈ ਇਹ ਸਾਥ ਕਰੇ ਹਿਤਵਾ ਬਰ ਜੋਰੀ ॥

स्याम सो माई कहा कहीयै इह साथ करे हितवा बर जोरी ॥

sayaam so maiee kahaa kaheeyai ieh saath kare hitavaa bar joree ||

ਭੇਜਤ ਹੈ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਪੈ ਇਹ ਸੀ ਤਿਹ ਕੇ ਪਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਥੋਰੀ ॥੭੨੧॥

भेजत है हम को इह पै इह सी तिह के पहि ग्वारनि थोरी ॥७२१॥

bhejat hai ham ko ieh pai ieh see teh ke peh gavaiaaran thoree ||721||


ਭੇਜਤ ਹੈ ਇਹ ਪੈ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਰੂਪ ਕੋ ਮਾਨ ਕਰੈ ॥

भेजत है इह पै हम को इह ग्वारनि रूप को मान करै ॥

bhejat hai ieh pai ham ko ieh gavaiaaran roop ko maan karai ||

ਇਹ ਜਾਨਤ ਵੈ ਘਟ ਹੈ ਹਮ ਤੇ ਤਿਹ ਤੇ ਹਠ ਬਾਧਿ ਰਹੀ ਨ ਟਰੈ ॥

इह जानत वै घट है हम ते तिह ते हठ बाधि रही न टरै ॥

eeh jaanat vai ghaT hai ham te teh te haTh baadh rahee na Tarai ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਪਿਖੋ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਮਤਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਕੋਪ ਤੇ ਪੈ ਨ ਡਰੈ ॥

कबि स्याम पिखो इह ग्वारनि की मति स्याम के कोप ते पै न डरै ॥

kab sayaam pikho ieh gavaiaaran kee mat sayaam ke kop te pai na ddarai ||

ਤਿਹ ਸੋ ਬਲਿ ਜਾਉ ਕਹਾ ਕਹੀਯੈ ਤਿਹ ਲ੍ਯਾਵਹੁ ਯੋ ਮੁਖ ਤੇ ਉਚਰੈ ॥੭੨੨॥

तिह सो बलि जाउ कहा कहीयै तिह ल्यावहु यो मुख ते उचरै ॥७२२॥

teh so bal jaau kahaa kaheeyai teh layaavahu yo mukh te ucharai ||722||


ਸ੍ਯਾਮ ਕਰੈ ਸਖੀ ਅਉਰ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਤਬੈ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਭੂਲ ਪਛਾਨੈ ॥

स्याम करै सखी अउर सो प्रीति तबै इह ग्वारनि भूल पछानै ॥

sayaam karai sakhee aaur so preet tabai ieh gavaiaaran bhool pachhaanai ||

ਵਾ ਕੇ ਕੀਏ ਬਿਨੁ ਰੀ ਸਜਨੀ ਸੁ ਰਹੀ ਕਹਿ ਕੈ ਸੁ ਕਹਿਯੋ ਨਹੀ ਮਾਨੈ ॥

वा के कीए बिनु री सजनी सु रही कहि कै सु कहियो नही मानै ॥

vaa ke ke'ee bin ree sajanee su rahee keh kai su kahiyo nahee maanai ||

ਯਾ ਕੋ ਬਿਸਾਰ ਡਰੈ ਮਨ ਤੇ ਤਬ ਹੀ ਇਹ ਮਾਨਹਿ ਕੋ ਫਲੁ ਜਾਨੈ ॥

या को बिसार डरै मन ते तब ही इह मानहि को फलु जानै ॥

yaa ko bisaar ddarai man te tab hee ieh maaneh ko fal jaanai ||

ਅੰਤ ਖਿਸਾਇ ਘਨੀ ਅਕੁਲਾਇ ਕਹਿਯੋ ਤਬ ਹੀ ਇਹ ਮਾਨੈ ਤੁ ਮਾਨੈ ॥੭੨੩॥

अंत खिसाइ घनी अकुलाइ कहियो तब ही इह मानै तु मानै ॥७२३॥

a(n)t khisai ghanee akulai kahiyo tab hee ieh maanai ta maanai ||723||


ਯੋ ਸੁਨ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਤਿਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੋ ਇਮ ਉਤਰ ਦੀਨੋ ॥

यो सुन कै बृखभान सुता तिह ग्वारनि को इम उतर दीनो ॥

yo sun kai birakhabhaan sutaa teh gavaiaaran ko im utar dheeno ||

ਪ੍ਰੀਤ ਕਰੀ ਹਰਿ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਸੰਗ ਤਉ ਹਮ ਹੂੰ ਅਸ ਮਾਨ ਸੁ ਕੀਨੋ ॥

प्रीत करी हरि चंद्रभगा संग तउ हम हूँ अस मान सु कीनो ॥

preet karee har cha(n)dhrabhagaa sa(n)g tau ham hoo(n) as maan su keeno ||

ਤਉ ਸਜਨੀ ਕਹਿਯੋ ਰੂਠ ਰਹੀ ਅਤਿ ਕ੍ਰੋਧ ਬਢਿਯੋ ਹਮਰੇ ਜਬ ਜੀ ਨੋ ॥

तउ सजनी कहियो रूठ रही अति क्रोध बढियो हमरे जब जी नो ॥

tau sajanee kahiyo rooTh rahee at krodh baddiyo hamare jab jee no ||

ਤੇਰੇ ਕਹੇ ਬਿਨੁ ਰੀ ਹਰਿ ਆਗੇ ਹੂੰ ਮੋ ਹੂ ਸੋ ਨੇਹੁ ਬਿਦਾ ਕਰ ਦੀਨੋ ॥੭੨੪॥

तेरे कहे बिनु री हरि आगे हूँ मो हू सो नेहु बिदा कर दीनो ॥७२४॥

tere kahe bin ree har aage hoo(n) mo hoo so neh bidhaa kar dheeno ||724||


ਯੋ ਕਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਬਤੀਯਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਫਿਰਿ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ॥

यो कहि ग्वारनि सो बतीया कबि स्याम कहै फिरि ऐसे कहियो है ॥

yo keh gavaiaaran so bateeyaa kab sayaam kahai fir aaise kahiyo hai ||

ਜਾਹਿ ਰੀ ਕਾਹੇ ਕੋ ਬੈਠੀ ਹੈ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤੇਰੋ ਕਹਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਮੈ ਸਹਿਯੋ ਹੈ ॥

जाहि री काहे को बैठी है ग्वारनि तेरो कहियो अति ही मै सहियो है ॥

jaeh ree kaahe ko baiThee hai gavaiaaran tero kahiyo at hee mai sahiyo hai ||

ਬਾਤ ਕਹੀ ਅਤਿ ਹੀ ਰਸ ਕੀ ਤੁਹਿ ਤਾ ਕੋ ਨ ਸੋ ਸਖੀ ਚਿਤ ਚਹਿਯੋ ਹੈ ॥

बात कही अति ही रस की तुहि ता को न सो सखी चित चहियो है ॥

baat kahee at hee ras kee tuh taa ko na so sakhee chit chahiyo hai ||

ਤਾਹੀ ਤੇ ਹਉ ਨ ਚਲੋ ਸਜਨੀ ਹਮ ਸੋ ਹਰਿ ਸੋ ਰਸ ਕਉਨ ਰਹਿਯੋ ਹੈ ॥੭੨੫॥

ताही ते हउ न चलो सजनी हम सो हरि सो रस कउन रहियो है ॥७२५॥

taahee te hau na chalo sajanee ham so har so ras kaun rahiyo hai ||725||


ਯੌ ਸੁਨਿ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਕੇ ਹਿਤ ਕੇਰੋ ॥

यौ सुनि उतर देत भई कबि स्याम कहै हरि के हित केरो ॥

yau sun utar dhet bhiee kab sayaam kahai har ke hit kero ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਭੇਜੇ ਤੇ ਯਾ ਪਹਿ ਆਇ ਕੈ ਕੈ ਕੈ ਮਨਾਵਨ ਕੋ ਅਤਿ ਝੇਰੋ ॥

कान्रह के भेजे ते या पहि आइ कै कै कै मनावन को अति झेरो ॥

kaanreh ke bheje te yaa peh aai kai kai kai manaavan ko at jhero ||

ਸ੍ਯਾਮ ਚਕੋਰ ਮਨੋ ਤ੍ਰਨ ਜੋ ਸੁਨ ਰੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਮਨ ਮੇਰੋ ॥

स्याम चकोर मनो त्रन जो सुन री इह भाति कहै मन मेरो ॥

sayaam chakor mano tran jo sun ree ieh bhaat kahai man mero ||

ਤਾਹੀ ਨਿਹਾਰਿ ਨਿਹਾਰਿ ਸੁਨੋ ਸਸਿ ਸੋ ਮੁਖ ਦੇਖਤ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ਰੀ ਤੇਰੋ ॥੭੨੬॥

ताही निहारि निहारि सुनो ससि सो मुख देखत ह्वै है री तेरो ॥७२६॥

taahee nihaar nihaar suno sas so mukh dhekhat havai hai ree tero ||726||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ॥

राधे बाच ॥

raadhe baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੇਖਤ ਹੈ ਤੁ ਕਹਾ ਭਯੋ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਮੈ ਨ ਕਹਿਯੋ ਤਿਹ ਕੇ ਪਹਿ ਜੈਹੋ ॥

देखत है तु कहा भयो ग्वारनि मै न कहियो तिह के पहि जैहो ॥

dhekhat hai ta kahaa bhayo gavaiaaran mai na kahiyo teh ke peh jaiho ||

ਕਾਹੇ ਕੇ ਕਾਜ ਉਰਾਹਨ ਰੀ ਸਹਿ ਹੋ ਅਪਨੋ ਪਤਿ ਦੇਖਿ ਅਘੈ ਹੋ ॥

काहे के काज उराहन री सहि हो अपनो पति देखि अघै हो ॥

kaahe ke kaaj uraahan ree seh ho apano pat dhekh aghai ho ||

ਸ੍ਯਾਮ ਰਚੇ ਸੰਗਿ ਅਉਰ ਤ੍ਰੀਯਾ ਤਿਹ ਕੇ ਪਹਿ ਜਾਇ ਕਹਾ ਜਸ ਪੈਹੋ ॥

स्याम रचे संगि अउर त्रीया तिह के पहि जाइ कहा जस पैहो ॥

sayaam rache sa(n)g aaur treeyaa teh ke peh jai kahaa jas paiho ||

ਤਾ ਤੇ ਪਧਾਰਹੁ ਰੀ ਸਜਨੀ ਹਰਿ ਕੌ ਨਹਿ ਜੀਵਤ ਰੂਪ ਦਿਖੈ ਹੋ ॥੭੨੭॥

ता ते पधारहु री सजनी हरि कौ नहि जीवत रूप दिखै हो ॥७२७॥

taa te padhaarahu ree sajanee har kau neh jeevat roop dhikhai ho ||727||


ਅਥ ਮੈਨਪ੍ਰਭਾ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜੀ ਪਾਸ ਫਿਰ ਆਈ ॥

अथ मैनप्रभा कृसन जी पास फिर आई ॥

ath mainaprabhaa kirasan jee paas fir aaiee ||

ਦੂਤੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

दूती बाच कान्रह जू सो ॥

dhootee baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਯੌ ਜਬ ਤਾਹਿ ਸੁਨੀ ਬਤੀਯਾ ਉਠ ਕੈ ਸੋਊ ਨੰਦ ਲਲਾ ਪਹਿ ਆਈ ॥

यौ जब ताहि सुनी बतीया उठ कै सोऊ नंद लला पहि आई ॥

yau jab taeh sunee bateeyaa uTh kai souoo na(n)dh lalaa peh aaiee ||

ਆਇ ਕੈ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਪੈ ਹਰਿ ਜੂ ਨਹਿ ਮਾਨਤ ਮੂੜ ਮਨਾਈ ॥

आइ कै ऐसे कहियो हरि पै हरि जू नहि मानत मूड़ मनाई ॥

aai kai aaise kahiyo har pai har joo neh maanat mooR manaiee ||

ਕੈ ਤਜਿ ਵਾਹਿ ਰਚੌ ਇਨ ਸੋ ਨਹੀ ਆਪ ਹੂੰ ਜਾਇ ਕੈ ਲਿਆਉ ਮਨਾਈ ॥

कै तजि वाहि रचौ इन सो नही आप हूँ जाइ कै लिआउ मनाई ॥

kai taj vaeh rachau in so nahee aap hoo(n) jai kai liaau manaiee ||

ਯੌ ਸੁਨਿ ਬਾਤ ਚਲਿਯੋ ਤਹ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਆਪ ਹੀ ਧਾਈ ॥੭੨੮॥

यौ सुनि बात चलियो तह को कबि स्याम कहै हरि आप ही धाई ॥७२८॥

yau sun baat chaliyo teh ko kab sayaam kahai har aap hee dhaiee ||728||


ਅਉਰ ਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨਿ ਕੋਊ ਪਠੀ ਚਲਿ ਕੈ ਹਰਿ ਜੂ ਤਬ ਆਪ ਹੀ ਆਯੋ ॥

अउर न ग्वारिनि कोऊ पठी चलि कै हरि जू तब आप ही आयो ॥

aaur na gavaiaarin kouoo paThee chal kai har joo tab aap hee aayo ||

ਤਾਹੀ ਕੋ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰਤ ਹੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

ताही को रूप निहारत ही बृखभान सुता मन मै सुख पायो ॥

taahee ko roop nihaarat hee birakhabhaan sutaa man mai sukh paayo ||

ਪਾਇ ਘਨੋ ਸੁਖ ਪੈ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਊਪਰਿ ਮਾਨ ਸੋ ਬੋਲ ਸੁਨਾਯੋ ॥

पाइ घनो सुख पै मन मै अति ऊपरि मान सो बोल सुनायो ॥

pai ghano sukh pai man mai at uoopar maan so bol sunaayo ||

ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਹੂੰ ਸੋ ਕੇਲ ਕਰੋ ਇਹ ਠਉਰ ਕਹਾ ਤਜਿ ਲਾਜਹਿ ਆਯੋ ॥੭੨੯॥

चंद्रभगा हूँ सो केल करो इह ठउर कहा तजि लाजहि आयो ॥७२९॥

cha(n)dhrabhagaa hoo(n) so kel karo ieh Thaur kahaa taj laajeh aayo ||729||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

राधे बाच कान्रह जू सो ॥

raadhe baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਾਸਹਿ ਕਿਉ ਤਜਿ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਚਲਿ ਕੈ ਹਮਰੇ ਪਹਿ ਕਿਉ ਕਹਿਯੋ ਆਯੋ ॥

रासहि किउ तजि चंद्रभगा चलि कै हमरे पहि किउ कहियो आयो ॥

raaseh kiau taj cha(n)dhrabhagaa chal kai hamare peh kiau kahiyo aayo ||

ਕਿਉ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੀ ਸਿਖ ਮਾਨ ਕੈ ਆਪਨ ਹੀ ਉਠ ਕੈ ਸਖੀ ਧਾਯੋ ॥

किउ इह ग्वारनि की सिख मान कै आपन ही उठ कै सखी धायो ॥

kiau ieh gavaiaaran kee sikh maan kai aapan hee uTh kai sakhee dhaayo ||

ਜਾਨਤ ਥੀ ਕਿ ਬਡੋ ਠਗੁ ਹੈ ਇਹ ਬਾਤਨ ਤੇ ਅਬ ਹੀ ਲਖਿ ਪਾਯੋ ॥

जानत थी कि बडो ठगु है इह बातन ते अब ही लखि पायो ॥

jaanat thee k baddo Thag hai ieh baatan te ab hee lakh paayo ||

ਕਿਉ ਹਮਰੇ ਪਹਿ ਆਏ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਤੋ ਤੁਮ ਕੋ ਨਹੀ ਬੋਲਿ ਪਠਾਯੋ ॥੭੩੦॥

किउ हमरे पहि आए कहियो हम तो तुम को नही बोलि पठायो ॥७३०॥

kiau hamare peh aae kahiyo ham to tum ko nahee bol paThaayo ||730||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਰਾਧੇ ਸੋ ॥

कान्रह जू बाच राधे सो ॥

kaanreh joo baach raadhe so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਯੌ ਸੁਨਿ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਯੋ ਨਹਿ ਰੀ ਤੁਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਬੋਲ ਪਠਾਯੋ ॥

यौ सुनि उतर देत भयो नहि री तुहि ग्वारनि बोल पठायो ॥

yau sun utar dhet bhayo neh ree tuh gavaiaaran bol paThaayo ||

ਨੈਨਨ ਕੇ ਕਰਿ ਭਾਵ ਘਨੇ ਸਰ ਸੋ ਹਮਰੋ ਮਨੂਆ ਮ੍ਰਿਗ ਘਾਯੋ ॥

नैनन के करि भाव घने सर सो हमरो मनूआ मृग घायो ॥

nainan ke kar bhaav ghane sar so hamaro manooaa mirag ghaayo ||

ਤਾ ਬਿਰਹਾਗਨਿ ਸੋ ਸੁਨੀਯੈ ਬਲਿ ਅੰਗ ਜਰਿਯੋ ਸੁ ਗਯੋ ਨ ਬਚਾਯੋ ॥

ता बिरहागनि सो सुनीयै बलि अंग जरियो सु गयो न बचायो ॥

taa birahaagan so suneeyai bal a(n)g jariyo su gayo na bachaayo ||

ਤੇਰੇ ਬੁਲਾਯੋ ਨ ਆਯੋ ਹੋ ਰੀ ਤਿਹ ਠਉਰ ਜਰੇ ਕਹੁ ਸੇਕਿਨਿ ਆਯੋ ॥੭੩੧॥

तेरे बुलायो न आयो हो री तिह ठउर जरे कहु सेकिनि आयो ॥७३१॥

tere bulaayo na aayo ho ree teh Thaur jare kahu sekin aayo ||731||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

राधे बाच कान्रह सो ॥

raadhe baach kaanreh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੰਗ ਫਿਰੀ ਤੁਮਰੇ ਹਰਿ ਖੇਲਤ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੇ ਕਬਿ ਆਨੰਦ ਭੀਨੀ ॥

संग फिरी तुमरे हरि खेलत स्याम कहे कबि आनंद भीनी ॥

sa(n)g firee tumare har khelat sayaam kahe kab aana(n)dh bheenee ||

ਲੋਗਨ ਕੋ ਉਪਹਾਸ ਸਹਿਯੋ ਤੁਹਿ ਮੂਰਤਿ ਚੀਨ ਕੈ ਅਉਰ ਨ ਚੀਨੀ ॥

लोगन को उपहास सहियो तुहि मूरति चीन कै अउर न चीनी ॥

logan ko upahaas sahiyo tuh moorat cheen kai aaur na cheenee ||

ਹੇਤ ਕਰਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਤੁਮ ਸੋ ਤੁਮ ਹੂੰ ਤਜਿ ਹੇਤ ਦਸਾ ਇਹ ਕੀਨੀ ॥

हेत करियो अति ही तुम सो तुम हूँ तजि हेत दसा इह कीनी ॥

het kariyo at hee tum so tum hoo(n) taj het dhasaa ieh keenee ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਰੀ ਸੰਗ ਅਉਰ ਤ੍ਰੀਯਾ ਕਹਿ ਸਾਸ ਲਯੋ ਅਖੀਯਾ ਭਰ ਲੀਨੀ ॥੭੩੨॥

प्रीति करी संग अउर त्रीया कहि सास लयो अखीया भर लीनी ॥७३२॥

preet karee sa(n)g aaur treeyaa keh saas layo akheeyaa bhar leenee ||732||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ॥

कान्रह जू बाच ॥

kaanreh joo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੇਰੋ ਘਨੋ ਹਿਤ ਹੈ ਤੁਮ ਸੋ ਸਖੀ ਅਉਰ ਕਿਸੀ ਨਹਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਮਾਹੀ ॥

मेरो घनो हित है तुम सो सखी अउर किसी नहि ग्वारनि माही ॥

mero ghano hit hai tum so sakhee aaur kisee neh gavaiaaran maahee ||

ਤੇਰੇ ਖਰੇ ਤੁਹਿ ਦੇਖਤ ਹੋ ਬਿਨ ਤ੍ਵੈ ਤੁਹਿ ਮੂਰਤਿ ਕੀ ਪਰਛਾਹੀ ॥

तेरे खरे तुहि देखत हो बिन त्वै तुहि मूरति की परछाही ॥

tere khare tuh dhekhat ho bin tavai tuh moorat kee parachhaahee ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਗਹੀ ਬਹੀਯਾ ਚਲੀਯੈ ਹਮ ਸੋ ਬਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਹੀ ॥

यौ कहि कान्रह गही बहीया चलीयै हम सो बन मै सुख पाही ॥

yau keh kaanreh gahee baheeyaa chaleeyai ham so ban mai sukh paahee ||

ਹ ਹਾ ਚਲੁ ਮੇਰੀ ਸਹੁੰ ਮੇਰੀ ਸਹੁੰ ਮੇਰੀ ਸਹੁੰ ਤੇਰੀ ਸਹੁੰ ਤੇਰੀ ਸਹੁੰ ਨਾਹੀ ਜੂ ਨਾਹੀ ॥੭੩੩॥

ह हा चलु मेरी सहुँ मेरी सहुँ मेरी सहुँ तेरी सहुँ तेरी सहुँ नाही जू नाही ॥७३३॥

h haa chal meree sahu(n) meree sahu(n) meree sahu(n) teree sahu(n) teree sahu(n) naahee joo naahee ||733||


ਯੌ ਕਹਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਗਹੀ ਬਿਹੀਯਾ ਤਿਹੂ ਲੋਗਨ ਕੋ ਭੁਗੀਯਾ ਰਸ ਜੋ ਹੈ ॥

यौ कहि कान्रह गही बिहीया तिहू लोगन को भुगीया रस जो है ॥

yau keh kaanreh gahee biheeyaa tihoo logan ko bhugeeyaa ras jo hai ||

ਕੇਹਰਿ ਸੀ ਜਿਹ ਕੀ ਕਟਿ ਹੈ ਜਿਹ ਆਨਨ ਪੈ ਸਸਿ ਕੋਟਿਕ ਕੋ ਹੈ ॥

केहरि सी जिह की कटि है जिह आनन पै ससि कोटिक को है ॥

kehar see jeh kee kaT hai jeh aanan pai sas koTik ko hai ||

ਐਸੋ ਕਹਿਯੋ ਚਲੀਯੈ ਹਮਰੇ ਸੰਗਿ ਜੋ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਕੋ ਮਨ ਮੋਹੈ ॥

ऐसो कहियो चलीयै हमरे संगि जो सभ ग्वारनि को मन मोहै ॥

aaiso kahiyo chaleeyai hamare sa(n)g jo sabh gavaiaaran ko man mohai ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕਾਹੇ ਕਰੋ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨ ਕੈ ਤੁਹਿ ਲਾਲ ਹੀਐ ਮਧਿ ਜੋ ਹੈ ॥੭੩੪॥

यौ कहि काहे करो बिनती सुन कै तुहि लाल हीऐ मधि जो है ॥७३४॥

yau keh kaahe karo binatee sun kai tuh laal heeaai madh jo hai ||734||


ਕਾਹੇ ਉਰਾਹਨ ਦੇਤ ਸਖੀ ਕਹਿਯੋ ਪ੍ਰੀਤ ਘਨੀ ਹਮਰੀ ਸੰਗ ਤੇਰੇ ॥

काहे उराहन देत सखी कहियो प्रीत घनी हमरी संग तेरे ॥

kaahe uraahan dhet sakhee kahiyo preet ghanee hamaree sa(n)g tere ||

ਨਾਹਕ ਤੂੰ ਭਰਮੀ ਮਨ ਮੈ ਕਛੁ ਬਾਤ ਨ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਮਨਿ ਮੇਰੇ ॥

नाहक तूँ भरमी मन मै कछु बात न चंद्रभगा मनि मेरे ॥

naahak too(n) bharamee man mai kachh baat na cha(n)dhrabhagaa man mere ||

ਤਾ ਤੇ ਉਠੋ ਤਜਿ ਮਾਨ ਸਭੈ ਚਲਿ ਖੇਲਹਿਾਂ ਪੈ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਕੇਰੇ ॥

ता ते उठो तजि मान सभै चलि खेलहिाँ पै जमुना तटि केरे ॥

taa te uTho taj maan sabhai chal khelahiaa(n) pai jamunaa taT kere ||

ਮਾਨਤ ਹੈ ਨਹਿ ਬਾਤ ਹਠੀ ਬਿਰਹਾਤੁਰ ਹੈ ਬਿਰਹੀ ਜਨ ਟੇਰੇ ॥੭੩੫॥

मानत है नहि बात हठी बिरहातुर है बिरही जन टेरे ॥७३५॥

maanat hai neh baat haThee birahaatur hai birahee jan Tere ||735||


ਤ੍ਯਾਗ ਕਹਿਯੋ ਅਬ ਮਾਨ ਸਖੀ ਹਮ ਹੂੰ ਤੁਮ ਹੂੰ ਬਨ ਬੀਚ ਪਧਾਰੈ ॥

त्याग कहियो अब मान सखी हम हूँ तुम हूँ बन बीच पधारै ॥

tayaag kahiyo ab maan sakhee ham hoo(n) tum hoo(n) ban beech padhaarai ||

ਨਾਹਕ ਹੀ ਤੂ ਰਿਸੀ ਮਨ ਮੈ ਨਹੀ ਆਨ ਤ੍ਰੀਯਾ ਮਨ ਬਾਤ ਹਮਾਰੈ ॥

नाहक ही तू रिसी मन मै नही आन त्रीया मन बात हमारै ॥

naahak hee too risee man mai nahee aan treeyaa man baat hamaarai ||

ਤਾ ਤੇ ਅਸੋਕ ਕੇ ਸਾਥ ਸੁਨੋ ਬਲਿ ਤੀਰ ਨਦੀ ਸਭ ਸੋਕਹਿ ਡਾਰੈ ॥

ता ते असोक के साथ सुनो बलि तीर नदी सभ सोकहि डारै ॥

taa te asok ke saath suno bal teer nadhee sabh sokeh ddaarai ||

ਯਾ ਤੇ ਨ ਅਉਰ ਭਲੀ ਕਛੁ ਹੈ ਮਿਲਿ ਕੈ ਹਮ ਮੈਨ ਕੋ ਮਾਨ ਨਿਵਾਰੈ ॥੭੩੬॥

या ते न अउर भली कछु है मिलि कै हम मैन को मान निवारै ॥७३६॥

yaa te na aaur bhalee kachh hai mil kai ham main ko maan nivaarai ||736||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਰਸਾਤਰ ਹ੍ਵੈ ਅਤਿ ਹੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਢਿਗ ਬਾਤ ਉਚਾਰੀ ॥

कान्रह रसातर ह्वै अति ही बृखभान सुता ढिग बात उचारी ॥

kaanreh rasaatar havai at hee birakhabhaan sutaa ddig baat uchaaree ||

ਤਾਹਿ ਮਨੀ ਹਰਿ ਬਾਤ ਸੋਊ ਤਿਨ ਮਾਨ ਕੀ ਬਾਤ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਡਾਰੀ ॥

ताहि मनी हरि बात सोऊ तिन मान की बात बिदा करि डारी ॥

taeh manee har baat souoo tin maan kee baat bidhaa kar ddaaree ||

ਹਾਥਹਿ ਸੋ ਬਹੀਆ ਗਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਅਬ ਖੇਲਹਿ ਯਾਰੀ ॥

हाथहि सो बहीआ गहि स्याम सु ऐसे कहियो अब खेलहि यारी ॥

haatheh so baheeaa geh sayaam su aaise kahiyo ab kheleh yaaree ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹਿਯੋ ਤਬ ਰਾਧਕਾ ਸੋ ਹਮਰੇ ਸੰਗ ਕੇਲ ਕਰੋ ਮੋਰੀ ਪਿਆਰੀ ॥੭੩੭॥

कान्रह कहियो तब राधका सो हमरे संग केल करो मोरी पिआरी ॥७३७॥

kaanreh kahiyo tab raadhakaa so hamare sa(n)g kel karo moree piaaree ||737||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

राधे बाच कान्रह सो ॥

raadhe baach kaanreh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਯੌ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਨੰਦ ਲਾਲ ਲਲਾ ਕਹੁ ਉਤਰ ਦੀਨੋ ॥

यौ सुनि कै बृखभान सुता नंद लाल लला कहु उतर दीनो ॥

yau sun kai birakhabhaan sutaa na(n)dh laal lalaa kahu utar dheeno ||

ਤਾਹੀ ਸੋ ਬਾਤ ਕਰੋ ਹਰਿ ਜੂ ਜਿਹ ਕੇ ਸੰਗ ਨੇਹੁ ਘਨੋ ਤੁਮ ਕੀਨੋ ॥

ताही सो बात करो हरि जू जिह के संग नेहु घनो तुम कीनो ॥

taahee so baat karo har joo jeh ke sa(n)g neh ghano tum keeno ||

ਕਾਹੇ ਕਉ ਮੋਰੀ ਗਹੀ ਬਹੀਆ ਸੁ ਦੁਖਾਵਤ ਕਾਹੇ ਕਉ ਹੋ ਮੁਹਿ ਜੀ ਨੋ ॥

काहे कउ मोरी गही बहीआ सु दुखावत काहे कउ हो मुहि जी नो ॥

kaahe kau moree gahee baheeaa su dhukhaavat kaahe kau ho muh jee no ||

ਯੌ ਕਹਿ ਬਾਤ ਭਰੀ ਅਖੀਆ ਕਰਿ ਕੈ ਦੁਖ ਸਾਸ ਉਸਾਸ ਸੁ ਲੀਨੋ ॥੭੩੮॥

यौ कहि बात भरी अखीआ करि कै दुख सास उसास सु लीनो ॥७३८॥

yau keh baat bharee akheeaa kar kai dhukh saas usaas su leeno ||738||


ਕੇਲ ਕਰੋ ਉਠਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਜਿਨਿ ਸੰਗ ਰਚਿਯੋ ਮਨ ਹੈ ਸੁ ਤੁਮਾਰੋ ॥

केल करो उठि ग्वारनि सो जिनि संग रचियो मन है सु तुमारो ॥

kel karo uTh gavaiaaran so jin sa(n)g rachiyo man hai su tumaaro ||

ਸ੍ਵਾਸਨ ਲੈ ਅਖੀਆ ਭਰ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰੋ ॥

स्वासन लै अखीआ भर कै बृखभान सुता इह भाति उचारो ॥

savaiaasan lai akheeaa bhar kai birakhabhaan sutaa ieh bhaat uchaaro ||

ਸੰਗ ਚਲੋ ਨਹਿ ਹਉ ਤੁਮਰੇ ਕਰਿ ਆਯੁਧ ਲੈ ਕਹਿਓ ਕਿਉ ਨਹੀ ਮਾਰੋ ॥

संग चलो नहि हउ तुमरे करि आयुध लै कहिओ किउ नही मारो ॥

sa(n)g chalo neh hau tumare kar aayudh lai kahio kiau nahee maaro ||

ਸਾਚ ਕਹੋ ਤੁਮ ਸੋ ਬਤੀਯਾ ਤਜਿ ਕੈ ਹਮ ਕੋ ਜਦੁਬੀਰ ਪਧਾਰੋ ॥੭੩੯॥

साच कहो तुम सो बतीया तजि कै हम को जदुबीर पधारो ॥७३९॥

saach kaho tum so bateeyaa taj kai ham ko jadhubeer padhaaro ||739||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਰਾਧੇ ਸੋ ॥

कान्रह जू बाच राधे सो ॥

kaanreh joo baach raadhe so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੰਗ ਚਲੋ ਹਮਰੇ ਉਠ ਕੈ ਸਖੀ ਮਾਨ ਕਛੁ ਮਨ ਮੈ ਨਹੀ ਆਨੋ ॥

संग चलो हमरे उठ कै सखी मान कछु मन मै नही आनो ॥

sa(n)g chalo hamare uTh kai sakhee maan kachh man mai nahee aano ||

ਆਇ ਹੋ ਹਉ ਤਜਿ ਸੰਕਿ ਨਿਸੰਕ ਕਛੂ ਤਿਹ ਤੇ ਰਸ ਰੀਤਿ ਪਛਾਨੋ ॥

आइ हो हउ तजि संकि निसंक कछू तिह ते रस रीति पछानो ॥

aai ho hau taj sa(n)k nisa(n)k kachhoo teh te ras reet pachhaano ||

ਮਿਤ੍ਰ ਕੇ ਬੇਚੇ ਕਿਧੌ ਬਿਕੀਯੈ ਇਹ ਸ੍ਰਉਨ ਸੁਨੋ ਸਖੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਹਾਨੋ ॥

मित्र के बेचे किधौ बिकीयै इह स्रउन सुनो सखी प्रीति कहानो ॥

mitr ke beche kidhau bikeeyai ieh sraun suno sakhee preet kahaano ||

ਤਾ ਤੇ ਹਉ ਤੇਰੀ ਕਰੋ ਬਿਨਤੀ ਕਹਿਬੋ ਮੁਹਿ ਮਾਨਿ ਸਖੀ ਅਬ ਮਾਨੋ ॥੭੪੦॥

ता ते हउ तेरी करो बिनती कहिबो मुहि मानि सखी अब मानो ॥७४०॥

taa te hau teree karo binatee kahibo muh maan sakhee ab maano ||740||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ॥

राधे बाच ॥

raadhe baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਯੌ ਸੁਨਿ ਕੈ ਹਰਿ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਹਰਿ ਕੋ ਤਿਨ ਯਾ ਬਿਧਿ ਉਤਰ ਦੀਨੋ ॥

यौ सुनि कै हरि की बतीया हरि को तिन या बिधि उतर दीनो ॥

yau sun kai har kee bateeyaa har ko tin yaa bidh utar dheeno ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਰਹੀ ਹਮ ਸੋ ਤੁਮਰੀ ਕਹਾ ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਦ੍ਰਿਗਿ ਬਾਰਿ ਭਰੀਨੋ ॥

प्रीति रही हम सो तुमरी कहा यौ कहि कै दृगि बारि भरीनो ॥

preet rahee ham so tumaree kahaa yau keh kai dhirag baar bhareeno ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਰੀ ਸੰਗ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਅਤਿ ਕੋਪ ਬਢਿਯੋ ਤਿਹ ਤੇ ਮੁਹਿ ਜੀ ਨੋ ॥

प्रीति करी संग चंद्रभगा अति कोप बढियो तिह ते मुहि जी नो ॥

preet karee sa(n)g cha(n)dhrabhagaa at kop baddiyo teh te muh jee no ||

ਯੌ ਕਹਿ ਕੈ ਭਰਿ ਸ੍ਵਾਸ ਲਯੌ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਪਟੀਨੋ ॥੭੪੧॥

यौ कहि कै भरि स्वास लयौ कबि स्याम कहै अति ही कपटीनो ॥७४१॥

yau keh kai bhar savaiaas layau kab sayaam kahai at hee kapaTeeno ||741||


ਕ੍ਰੋਧ ਭਰੀ ਫਿਰਿ ਬੋਲਿ ਉਠੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਮੁਖ ਸੁੰਦਰ ਸਿਉ ॥

क्रोध भरी फिरि बोलि उठी बृखभानु सुता मुख सुँदर सिउ ॥

krodh bharee fir bol uThee birakhabhaan sutaa mukh su(n)dhar siau ||

ਤੁਮ ਸੋ ਹਮ ਸੋ ਰਸ ਕਉਨ ਰਹਿਯੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬਿਧਿ ਕੋ ਪਹਿ ਜਿਉ ॥

तुम सो हम सो रस कउन रहियो कबि स्याम कहै बिधि को पहि जिउ ॥

tum so ham so ras kaun rahiyo kab sayaam kahai bidh ko peh jiau ||

ਹਰਿ ਯੌ ਕਹੀ ਮੋ ਹਿਤ ਹੈ ਤੁਹਿ ਸੋ ਉਨਿ ਕੋਪਿ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਸੋ ਕਹੁ ਕਿਉ ॥

हरि यौ कही मो हित है तुहि सो उनि कोपि कहियो हम सो कहु किउ ॥

har yau kahee mo hit hai tuh so un kop kahiyo ham so kahu kiau ||

ਤੁਮਰੇ ਸੰਗਿ ਕੇਲ ਕਰੇ ਬਨ ਮੈ ਸੁਨੀਯੈ ਬਤੀਯਾ ਹਮਰੀ ਬਲਿ ਇਉ ॥੭੪੨॥

तुमरे संगि केल करे बन मै सुनीयै बतीया हमरी बलि इउ ॥७४२॥

tumare sa(n)g kel kare ban mai suneeyai bateeyaa hamaree bal iau ||742||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਰਾਧੇ ਸੋ ॥

कान्रह जू बाच राधे सो ॥

kaanreh joo baach raadhe so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੋਹਿਯੋ ਹਉ ਤੇਰੋ ਸਖੀ ਚਲਿਬੋ ਪਿਖਿ ਮੋਹਿਯੋ ਸੁ ਹਉ ਦ੍ਰਿਗ ਪੇਖਤ ਤੇਰੇ ॥

मोहियो हउ तेरो सखी चलिबो पिखि मोहियो सु हउ दृग पेखत तेरे ॥

mohiyo hau tero sakhee chalibo pikh mohiyo su hau dhirag pekhat tere ||

ਮੋਹਿ ਰਹਿਯੋ ਅਲਕੈ ਤੁਮਰੀ ਪਿਖਿ ਜਾਤ ਗਯੋ ਤਜਿ ਯਾ ਨਹੀ ਡੇਰੇ ॥

मोहि रहियो अलकै तुमरी पिखि जात गयो तजि या नही डेरे ॥

moh rahiyo alakai tumaree pikh jaat gayo taj yaa nahee ddere ||

ਮੋਹਿ ਰਹਿਯੋ ਤੁਹਿ ਅੰਗ ਨਿਹਾਰਤ ਪ੍ਰੀਤਿ ਬਢੀ ਤਿਹ ਤੇ ਮਨ ਮੇਰੇ ॥

मोहि रहियो तुहि अंग निहारत प्रीति बढी तिह ते मन मेरे ॥

moh rahiyo tuh a(n)g nihaarat preet baddee teh te man mere ||

ਮੋਹਿ ਰਹਿਯੋ ਮੁਖ ਤੇਰੋ ਨਿਹਾਰਤ ਜਿਉ ਗਨ ਚੰਦ ਚਕੋਰਨ ਹੇਰੇ ॥੭੪੩॥

मोहि रहियो मुख तेरो निहारत जिउ गन चंद चकोरन हेरे ॥७४३॥

moh rahiyo mukh tero nihaarat jiau gan cha(n)dh chakoran here ||743||


ਤਾ ਤੇ ਨ ਮਾਨ ਕਰੋ ਸਜਨੀ ਮੁਹਿ ਸੰਗ ਚਲੋ ਉਠ ਕੈ ਅਬ ਹੀ ॥

ता ते न मान करो सजनी मुहि संग चलो उठ कै अब ही ॥

taa te na maan karo sajanee muh sa(n)g chalo uTh kai ab hee ||

ਹਮਰੀ ਤੁਮ ਸੋ ਸਖੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਘਨੀ ਕੁਪਿ ਬਾਤ ਕਹੋ ਤਜਿ ਕੈ ਸਬ ਹੀ ॥

हमरी तुम सो सखी प्रीति घनी कुपि बात कहो तजि कै सब ही ॥

hamaree tum so sakhee preet ghanee kup baat kaho taj kai sab hee ||

ਤਿਹ ਤੇ ਇਹ ਛੁਦ੍ਰਨ ਬਾਤ ਕੀ ਰੀਤਿ ਕਹਿਯੋ ਨ ਅਰੀ ਤੁਮ ਕੋ ਫਬਹੀ ॥

तिह ते इह छुद्रन बात की रीति कहियो न अरी तुम को फबही ॥

teh te ieh chhudhran baat kee reet kahiyo na aree tum ko fabahee ||

ਤਿਹ ਤੇ ਸੁਨ ਮੋ ਬਿਨਤੀ ਚਲੀਯੈ ਇਹ ਕਾਜ ਕੀਏ ਨ ਕਛੂ ਲਭ ਹੀ ॥੭੪੪॥

तिह ते सुन मो बिनती चलीयै इह काज कीए न कछू लभ ही ॥७४४॥

teh te sun mo binatee chaleeyai ieh kaaj ke'ee na kachhoo labh hee ||744||


ਅਤਿ ਹੀ ਜਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਰੀ ਬਿਨਤੀ ਤਬ ਹੀ ਮਨ ਰੰਚ ਤ੍ਰੀਯਾ ਸੋਊ ਮਾਨੀ ॥

अति ही जब कान्रह करी बिनती तब ही मन रंच त्रीया सोऊ मानी ॥

at hee jab kaanreh karee binatee tab hee man ra(n)ch treeyaa souoo maanee ||

ਦੂਰ ਕਰੀ ਮਨ ਕੀ ਗਨਤੀ ਜਬ ਹੀ ਹਰਿ ਕੀ ਤਿਨ ਪ੍ਰੀਤਿ ਪਛਾਨੀ ॥

दूर करी मन की गनती जब ही हरि की तिन प्रीति पछानी ॥

dhoor karee man kee ganatee jab hee har kee tin preet pachhaanee ||

ਤਉ ਇਮ ਉਤਰ ਦੇਤ ਭਈ ਜੋਊ ਸੁੰਦਰਤਾ ਮਹਿ ਤ੍ਰੀਯਨ ਰਾਨੀ ॥

तउ इम उतर देत भई जोऊ सुँदरता महि त्रीयन रानी ॥

tau im utar dhet bhiee jouoo su(n)dharataa meh treeyan raanee ||

ਤ੍ਯਾਗ ਦਈ ਦੁਚਿਤਈ ਮਨ ਕੀ ਹਰਿ ਸੋ ਰਸ ਬਾਤਨ ਸੋ ਨਿਜ ਕਾਨੀ ॥੭੪੫॥

त्याग दई दुचितई मन की हरि सो रस बातन सो निज कानी ॥७४५॥

tayaag dhiee dhuchitiee man kee har so ras baatan so nij kaanee ||745||


ਮੋਹਿ ਕਹੋ ਚਲੀਯੈ ਹਮਰੇ ਸੰਗ ਜਾਨਤ ਹੋ ਰਸ ਸਾਥ ਛਰੋਗੇ ॥

मोहि कहो चलीयै हमरे संग जानत हो रस साथ छरोगे ॥

moh kaho chaleeyai hamare sa(n)g jaanat ho ras saath chharoge ||

ਰਾਸ ਬਿਖੈ ਹਮ ਕੋ ਸੰਗ ਲੈ ਸਖੀ ਜਾਨਤ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੰਗ ਅਰੋਗੇ ॥

रास बिखै हम को संग लै सखी जानत ग्वारनि संग अरोगे ॥

raas bikhai ham ko sa(n)g lai sakhee jaanat gavaiaaran sa(n)g aroge ||

ਹਉ ਨਹੀ ਹਾਰਿ ਹਉ ਪੈ ਤੁਮ ਤੇ ਤੁਮ ਹੀ ਹਮ ਤੇ ਹਰਿ ਹਾਰਿ ਪਰੋਗੇ ॥

हउ नही हारि हउ पै तुम ते तुम ही हम ते हरि हारि परोगे ॥

hau nahee haar hau pai tum te tum hee ham te har haar paroge ||

ਏਕ ਨ ਜਾਨਤ ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਲਵਾਇ ਕਹਿਯੋ ਕਛੁ ਕਾਜੁ ਕਰੋਗੇ ॥੭੪੬॥

एक न जानत कुँज गलीन लवाइ कहियो कछु काजु करोगे ॥७४६॥

ek na jaanat ku(n)j galeen lavai kahiyo kachh kaaj karoge ||746||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਜੋ ਹਰਿ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਭੀਨੀ ॥

बृखभान सुता कबि स्याम कहै अति जो हरि के रस भीतर भीनी ॥

birakhabhaan sutaa kab sayaam kahai at jo har ke ras bheetar bheenee ||

ਰੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਕਹਿਯੋ ਹਸਿ ਕੈ ਛਬਿ ਦਾਤਨ ਕੀ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਚੀਨੀ ॥

री बृजनाथ कहियो हसि कै छबि दातन की अति सुँदर चीनी ॥

ree birajanaath kahiyo has kai chhab dhaatan kee at su(n)dhar cheenee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਮਨ ਮੈ ਜੁ ਭਈ ਕਬਿ ਕੇ ਸੋਊ ਕੀਨੀ ॥

ता छबि की अति ही उपमा मन मै जु भई कबि के सोऊ कीनी ॥

taa chhab kee at hee upamaa man mai ju bhiee kab ke souoo keenee ||

ਜਿਉ ਘਨ ਬੀਚ ਲਸੈ ਚਪਲਾ ਤਿਹ ਕੋ ਠਗ ਕੈ ਠਗਨੀ ਠਗ ਲੀਨੀ ॥੭੪੭॥

जिउ घन बीच लसै चपला तिह को ठग कै ठगनी ठग लीनी ॥७४७॥

jiau ghan beech lasai chapalaa teh ko Thag kai Thaganee Thag leenee ||747||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਜੋ ਹਰਿ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਭੀਨੀ ॥

बृखभान सुता कबि स्याम कहै अति जो हरि के रस भीतर भीनी ॥

birakhabhaan sutaa kab sayaam kahai at jo har ke ras bheetar bheenee ||

ਬੀਚ ਹੁਲਾਸ ਬਢਿਯੋ ਮਨ ਕੈ ਜਬ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਕੀ ਬਾਤ ਸਭੈ ਮਨਿ ਲੀਨੀ ॥

बीच हुलास बढियो मन कै जब कान्रह्रह की बात सभै मनि लीनी ॥

beech hulaas baddiyo man kai jab kaanrahreh kee baat sabhai man leenee ||

ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਮੈ ਖੇਲਹਿੰਗੇ ਹਰਿ ਕੇ ਤਿਨ ਸੰਗ ਕਹਿਯੋ ਸੋਊ ਕੀਨੀ ॥

कुँज गलीन मै खेलहिंगे हरि के तिन संग कहियो सोऊ कीनी ॥

ku(n)j galeen mai khelahi(n)ge har ke tin sa(n)g kahiyo souoo keenee ||

ਯੌ ਹਸਿ ਬਾਤ ਨਿਸੰਗ ਕਹਿਯੋ ਮਨ ਕੀ ਦੁਚਿਤਾਈ ਸਭ ਹੀ ਤਜਿ ਦੀਨੀ ॥੭੪੮॥

यौ हसि बात निसंग कहियो मन की दुचिताई सभ ही तजि दीनी ॥७४८॥

yau has baat nisa(n)g kahiyo man kee dhuchitaiee sabh hee taj dheenee ||748||


ਦੋਊ ਜਉ ਹਸਿ ਬਾਤਨ ਸੰਗ ਢਰੇ ਤੁ ਹੁਲਾਸ ਬਿਲਾਸ ਬਢੇ ਸਗਰੇ ॥

दोऊ जउ हसि बातन संग ढरे तु हुलास बिलास बढे सगरे ॥

dhouoo jau has baatan sa(n)g ddare ta hulaas bilaas badde sagare ||

ਹਸਿ ਕੰਠ ਲਗਾਇ ਲਈ ਲਲਨਾ ਗਹਿ ਗਾੜੇ ਅਨੰਗ ਤੇ ਅੰਕ ਭਰੇ ॥

हसि कंठ लगाइ लई ललना गहि गाड़े अनंग ते अंक भरे ॥

has ka(n)Th lagai liee lalanaa geh gaaRe ana(n)g te a(n)k bhare ||

ਤਰਕੀ ਹੈ ਤਨੀ ਦਰਕੀ ਅੰਗੀਆ ਗਰ ਮਾਲ ਤੇ ਟੂਟ ਕੈ ਲਾਲ ਪਰੇ ॥

तरकी है तनी दरकी अंगीआ गर माल ते टूट कै लाल परे ॥

tarakee hai tanee dharakee a(n)geeaa gar maal te TooT kai laal pare ||

ਪੀਯ ਕੇ ਮਿਲਏ ਤ੍ਰੀਯ ਕੇ ਹੀਯ ਤੇ ਅੰਗਰਾ ਬਿਰਹਾਗਨਿ ਕੇ ਨਿਕਰੇ ॥੭੪੯॥

पीय के मिलए त्रीय के हीय ते अंगरा बिरहागनि के निकरे ॥७४९॥

peey ke mile treey ke heey te a(n)garaa birahaagan ke nikare ||749||


ਹਰਿ ਰਾਧਿਕਾ ਸੰਗਿ ਚਲੇ ਬਨ ਲੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਪਾਯੋ ॥

हरि राधिका संगि चले बन लै कबि स्याम कहै मनि आनंद पायो ॥

har raadhikaa sa(n)g chale ban lai kab sayaam kahai man aana(n)dh paayo ||

ਕੁੰਜ ਗਲੀਨ ਮੈ ਕੇਲ ਕਰੇ ਮਨ ਕੋ ਸਭ ਸੋਕ ਹੁਤੋ ਬਿਸਰਾਯੋ ॥

कुँज गलीन मै केल करे मन को सभ सोक हुतो बिसरायो ॥

ku(n)j galeen mai kel kare man ko sabh sok huto bisaraayo ||

ਤਾਹੀ ਕਥਾ ਕੌ ਕਿਧੌ ਜਗ ਮੈ ਮਨ ਮੈ ਸੁਕ ਆਦਿਕ ਗਾਇ ਸੁਨਾਯੋ ॥

ताही कथा कौ किधौ जग मै मन मै सुक आदिक गाइ सुनायो ॥

taahee kathaa kau kidhau jag mai man mai suk aadhik gai sunaayo ||

ਜੋਊ ਸੁਨੈ ਸੋਊ ਰੀਝ ਰਹੈ ਜਿਹ ਕੇ ਸਭ ਹੀ ਧਰਿ ਮੈ ਜਸੁ ਛਾਯੋ ॥੭੫੦॥

जोऊ सुनै सोऊ रीझ रहै जिह के सभ ही धरि मै जसु छायो ॥७५०॥

jouoo sunai souoo reejh rahai jeh ke sabh hee dhar mai jas chhaayo ||750||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਰਾਧੇ ਸੋ ॥

कान्रह जू बाच राधे सो ॥

kaanreh joo baach raadhe so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹਰਿ ਜੂ ਇਮ ਰਾਧਿਕਾ ਸੰਗਿ ਕਹੀ ਜਮੁਨਾ ਮੈ ਤਰੋ ਤੁਮ ਕੋ ਗਹਿ ਹੈ ॥

हरि जू इम राधिका संगि कही जमुना मै तरो तुम को गहि है ॥

har joo im raadhikaa sa(n)g kahee jamunaa mai taro tum ko geh hai ||

ਜਲ ਮੈ ਹਮ ਕੇਲ ਕਰੈਗੇ ਸੁਨੋ ਰਸ ਬਾਤ ਸਭੈ ਸੁ ਤਹਾ ਕਹਿ ਹੈ ॥

जल मै हम केल करैगे सुनो रस बात सभै सु तहा कहि है ॥

jal mai ham kel karaige suno ras baat sabhai su tahaa keh hai ||

ਜਿਹ ਓਰ ਨਿਹਾਰ ਬਧੂ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਲਲਚਾਇ ਮਨੈ ਪਿਖਿਬੋ ਚਹਿ ਹੈ ॥

जिह ओर निहार बधू बृज की ललचाइ मनै पिखिबो चहि है ॥

jeh or nihaar badhoo biraj kee lalachai manai pikhibo cheh hai ||

ਪਹੁਚੈਗੀ ਨਹਿ ਤਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਏ ਹਮ ਹੂੰ ਤੁਮ ਰੀਝਤ ਹਾਰਹਿ ਹੈ ॥੭੫੧॥

पहुचैगी नहि तह ग्वारनि ए हम हूँ तुम रीझत हारहि है ॥७५१॥

pahuchaigee neh teh gavaiaaran e ham hoo(n) tum reejhat haareh hai ||751||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਹਰਿ ਕੇ ਮੁਖ ਤੇ ਜਲ ਪੈਠਨ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਸੁਨਿ ਪਾਈ ॥

बृखभान सुता हरि के मुख ते जल पैठन की बतीया सुनि पाई ॥

birakhabhaan sutaa har ke mukh te jal paiThan kee bateeyaa sun paiee ||

ਧਾਇ ਕੈ ਜਾਇ ਪਰੀ ਸਰ ਮੈ ਕਰਿ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥਿ ਬਡਾਈ ॥

धाइ कै जाइ परी सर मै करि कै अति ही बृजनाथि बडाई ॥

dhai kai jai paree sar mai kar kai at hee birajanaath baddaiee ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਪਾਛੈ ਤੇ ਸ੍ਯਾਮ ਪਰੇ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਉਪਮਾ ਇਹ ਆਈ ॥

ताही के पाछै ते स्याम परे कबि के मन मै उपमा इह आई ॥

taahee ke paachhai te sayaam pare kab ke man mai upamaa ieh aaiee ||

ਮਾਨਹੁ ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਬਾਜ ਪਰਿਯੋ ਪਿਖਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਕੋ ਜਿਉ ਮੁਰਗਾਈ ॥੭੫੨॥

मानहु स्याम जू बाज परियो पिखि कै बृज नारि को जिउ मुरगाई ॥७५२॥

maanahu sayaam joo baaj pariyo pikh kai biraj naar ko jiau muragaiee ||752||


ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਤਬੈ ਧਸਿ ਕੈ ਜਲਿ ਮੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਸੋਊ ਤਬ ਜਾਇ ਗਹੀ ॥

बृजनाथ तबै धसि कै जलि मै बृज नारि सोऊ तब जाइ गही ॥

birajanaath tabai dhas kai jal mai biraj naar souoo tab jai gahee ||

ਹਰਿ ਕੋ ਤਨ ਭੇਟ ਹੁਲਾਸ ਬਢਿਯੋ ਗਿਨਤੀ ਮਨ ਕੀ ਜਲ ਭਾਤਿ ਬਹੀ ॥

हरि को तन भेट हुलास बढियो गिनती मन की जल भाति बही ॥

har ko tan bheT hulaas baddiyo ginatee man kee jal bhaat bahee ||

ਜੋਊ ਆਨੰਦ ਬੀਚ ਬਢਿਯੋ ਮਨ ਕੈ ਕਬਿ ਤਉ ਮੁਖ ਤੇ ਕਥਾ ਭਾਖਿ ਕਹੀ ॥

जोऊ आनंद बीच बढियो मन कै कबि तउ मुख ते कथा भाखि कही ॥

jouoo aana(n)dh beech baddiyo man kai kab tau mukh te kathaa bhaakh kahee ||

ਪਿਖਿਯੋ ਜਿਨ ਹੂੰ ਸੋਊ ਰੀਝ ਰਹਿਯੋ ਪਿਖਿ ਕੈ ਜਮੁਨਾ ਜਿਹ ਰੀਝ ਰਹੀ ॥੭੫੩॥

पिखियो जिन हूँ सोऊ रीझ रहियो पिखि कै जमुना जिह रीझ रही ॥७५३॥

pikhiyo jin hoo(n) souoo reejh rahiyo pikh kai jamunaa jeh reejh rahee ||753||


ਜਲ ਤੇ ਕਢਿ ਕੈ ਫਿਰਿ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਫਿਰਿ ਰਾਸ ਮਚਾਯੋ ॥

जल ते कढि कै फिरि ग्वारनि सो कबि स्याम कहै फिरि रास मचायो ॥

jal te kadd kai fir gavaiaaran so kab sayaam kahai fir raas machaayo ||

ਗਾਵਤ ਭੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਆਨੰਦ ਪਾਯੋ ॥

गावत भी बृखभान सुता अति ही मन भीतर आनंद पायो ॥

gaavat bhee birakhabhaan sutaa at hee man bheetar aana(n)dh paayo ||

ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿਨ ਸੋ ਮਿਲ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜਨਾਥ ਜੂ ਸਾਰੰਗ ਮੈ ਇਕ ਤਾਨ ਬਸਾਯੋ ॥

बृज नारिन सो मिल कै बृजनाथ जू सारंग मै इक तान बसायो ॥

biraj naarin so mil kai birajanaath joo saara(n)g mai ik taan basaayo ||

ਸੋ ਸੁਨ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗ ਆਵਤ ਧਾਵਤ ਗ੍ਵਾਰਨੀਆ ਸੁਨ ਕੈ ਸੁਖੁ ਪਾਯੋ ॥੭੫੪॥

सो सुन कै मृग आवत धावत ग्वारनीआ सुन कै सुखु पायो ॥७५४॥

so sun kai mirag aavat dhaavat gavaiaaraneeaa sun kai sukh paayo ||754||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸਤ੍ਰਹ ਸੈ ਪੈਤਾਲ ਮੈ ਕੀਨੀ ਕਥਾ ਸੁਧਾਰ ॥

सत्रह सै पैताल मै कीनी कथा सुधार ॥

satreh sai paitaal mai keenee kathaa sudhaar ||

ਚੂਕ ਹੋਇ ਜਹ ਤਹ ਸੁ ਕਬਿ ਲੀਜਹੁ ਸਕਲ ਸੁਧਾਰ ॥੭੫੫॥

चूक होइ जह तह सु कबि लीजहु सकल सुधार ॥७५५॥

chook hoi jeh teh su kab leejahu sakal sudhaar ||755||


ਬਿਨਤਿ ਕਰੋ ਦੋਊ ਜੋਰਿ ਕਰਿ ਸੁਨੋ ਜਗਤ ਕੇ ਰਾਇ ॥

बिनति करो दोऊ जोरि करि सुनो जगत के राइ ॥

binat karo dhouoo jor kar suno jagat ke rai ||

ਮੋ ਮਸਤਕ ਤ੍ਵ ਪਗ ਸਦਾ ਰਹੈ ਦਾਸ ਕੇ ਭਾਇ ॥੭੫੬॥

मो मसतक त्व पग सदा रहै दास के भाइ ॥७५६॥

mo masatak tavai pag sadhaa rahai dhaas ke bhai ||756||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਰਾਸ ਮੰਡਲ ਬਰਨਨੰ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री दसम सिकंधे पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे रास मंडल बरननं धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe puraane bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare raas ma(n)ddal baranana(n) dhiaai samaapatam sat subham sat ||


ਸੁਦਰਸਨ ਨਾਮ ਬ੍ਰਹਮਣੁ ਭੁਜੰਗ ਜੋਨ ਤੇ ਉਧਾਰ ਕਰਨ ਕਥਨੰ ॥

सुदरसन नाम ब्रहमणु भुजंग जोन ते उधार करन कथनं ॥

sudharasan naam brahaman bhuja(n)g jon te udhaar karan kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦਿਨ ਪੂਜਾ ਕੋ ਆਇ ਲਗਿਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਜੋਊ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਅਤਿ ਕੈ ਹਿਤ ਸੇਵੀ ॥

दिन पूजा को आइ लगियो तिह को जोऊ ग्वारनीया अति कै हित सेवी ॥

dhin poojaa ko aai lagiyo teh ko jouoo gavaiaaraneeyaa at kai hit sevee ||

ਜਾ ਰਿਪ ਸੁੰਭ ਨਿਸੁੰਭ ਮਰਿਯੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜਗ ਮਾਤ ਅਭੇਵੀ ॥

जा रिप सुँभ निसुँभ मरियो कबि स्याम कहै जग मात अभेवी ॥

jaa rip su(n)bh nisu(n)bh mariyo kab sayaam kahai jag maat abhevee ||


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