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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
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ਗੋਪਿਨ ਕੀ ਜਬ ਯੌ ਗਤਿ ਭੀ ਤਬ ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਇਯਾ ॥

गोपिन की जब यौ गति भी तब ता छबि को कबि स्याम कहइया ॥

gopin kee jab yau gat bhee tab taa chhab ko kab sayaam kahiyaa ||

ਜਿਉ ਸੰਗ ਮੀਨਨ ਕੇ ਲਰ ਕੈ ਤਿਨ ਤ੍ਯਾਗ ਸਭੋ ਮਨੋ ਬਾਰਿ ਧਰਇਯਾ ॥੪੮੦॥

जिउ संग मीनन के लर कै तिन त्याग सभो मनो बारि धरइया ॥४८०॥

jiau sa(n)g meenan ke lar kai tin tayaag sabho mano baar dhariyaa ||480||


ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਤਨ ਕੀ ਛੁਟਗੀ ਸੁਧਿ ਡੋਲਤ ਹੈ ਬਨ ਮੈ ਜਨੁ ਬਉਰੀ ॥

गोपिन के तन की छुटगी सुधि डोलत है बन मै जनु बउरी ॥

gopin ke tan kee chhuTagee sudh ddolat hai ban mai jan bauree ||

ਏਕ ਉਠੈ ਇਕ ਝੂਮਿ ਗਿਰੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਮਹਰੀ ਇਕ ਆਵਤ ਦਉਰੀ ॥

एक उठै इक झूमि गिरै बृज की महरी इक आवत दउरी ॥

ek uThai ik jhoom girai biraj kee maharee ik aavat dhauree ||

ਆਤੁਰ ਹ੍ਵੈ ਅਤਿ ਢੂੰਡਤ ਹੈ ਤਿਨ ਕੇ ਸਿਰ ਕੀ ਗਿਰ ਗੀ ਸੁ ਪਿਛਉਰੀ ॥

आतुर ह्वै अति ढूँडत है तिन के सिर की गिर गी सु पिछउरी ॥

aatur havai at ddoo(n)ddat hai tin ke sir kee gir gee su pichhauree ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਧ੍ਯਾਨ ਬਸਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਸੋਊ ਜਾਨ ਗਹੈ ਫੁਨਿ ਰੂਖਨ ਕਉਰੀ ॥੪੮੧॥

कान्रह को ध्यान बसियो मन मै सोऊ जान गहै फुनि रूखन कउरी ॥४८१॥

kaanreh ko dhayaan basiyo man mai souoo jaan gahai fun rookhan kauree ||481||


ਫੇਰਿ ਤਜੈ ਤਿਨ ਰੂਖਨ ਕੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਨੰਦ ਲਾਲ ਕਹਾ ਰੇ ॥

फेरि तजै तिन रूखन को इह भाति कहै नंद लाल कहा रे ॥

fer tajai tin rookhan ko ieh bhaat kahai na(n)dh laal kahaa re ||

ਚੰਪਕ ਮਉਲਸਿਰੀ ਬਟ ਤਾਲ ਲਵੰਗ ਲਤਾ ਕਚਨਾਰ ਜਹਾ ਰੇ ॥

चंपक मउलसिरी बट ताल लवंग लता कचनार जहा रे ॥

cha(n)pak maulasiree baT taal lava(n)g lataa kachanaar jahaa re ||

ਪੈ ਜਿਹ ਕੇ ਹਮ ਕਾਰਨ ਕੋ ਪਗਿ ਕੰਟਕਕਾ ਸਿਰਿ ਧੂਪ ਸਹਾ ਰੇ ॥

पै जिह के हम कारन को पगि कंटकका सिरि धूप सहा रे ॥

pai jeh ke ham kaaran ko pag ka(n)Takakaa sir dhoop sahaa re ||

ਸੋ ਹਮ ਕੌ ਤੁਮ ਦੇਹੁ ਬਤਾਇ ਪਰੈ ਤੁਮ ਪਾਇਨ ਜਾਵ ਤਹਾ ਰੇ ॥੪੮੨॥

सो हम कौ तुम देहु बताइ परै तुम पाइन जाव तहा रे ॥४८२॥

so ham kau tum dheh batai parai tum pain jaav tahaa re ||482||


ਬੇਲ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਜਿਹ ਜਾ ਗੁਲ ਚੰਪਕ ਕਾ ਸੁ ਪ੍ਰਭਾ ਅਤਿ ਪਾਈ ॥

बेल बिराजत है जिह जा गुल चंपक का सु प्रभा अति पाई ॥

bel biraajat hai jeh jaa gul cha(n)pak kaa su prabhaa at paiee ||

ਮੌਲਿਸਿਰੀ ਗੁਲ ਲਾਲ ਗੁਲਾਬ ਧਰਾ ਤਿਨ ਫੂਲਨ ਸੋ ਛਬਿ ਛਾਈ ॥

मौलिसिरी गुल लाल गुलाब धरा तिन फूलन सो छबि छाई ॥

maualisiree gul laal gulaab dharaa tin foolan so chhab chhaiee ||

ਚੰਪਕ ਮਉਲਸਿਰੀ ਬਟ ਤਾਲ ਲਵੰਗ ਲਤਾ ਕਚਨਾਰ ਸੁਹਾਈ ॥

चंपक मउलसिरी बट ताल लवंग लता कचनार सुहाई ॥

cha(n)pak maulasiree baT taal lava(n)g lataa kachanaar suhaiee ||

ਬਾਰਿ ਝਰੈ ਝਰਨਾ ਗਿਰਿ ਤੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁਖਦਾਈ ॥੪੮੩॥

बारि झरै झरना गिरि ते कबि स्याम कहै अति ही सुखदाई ॥४८३॥

baar jharai jharanaa gir te kab sayaam kahai at hee sukhadhaiee ||483||


ਤਿਹ ਕਾਨਨ ਕੋ ਹਰਿ ਕੇ ਹਿਤ ਤੇ ਗੁਪੀਆ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ॥

तिह कानन को हरि के हित ते गुपीआ बृज की इह भाति कहै ॥

teh kaanan ko har ke hit te gupeeaa biraj kee ieh bhaat kahai ||

ਬਰ ਪੀਪਰ ਹੇਰਿ ਹਿਯਾ ਨ ਕਹੂੰ ਜਿਹ ਕੇ ਹਿਤ ਸੋ ਸਿਰਿ ਧੂਪ ਸਹੈ ॥

बर पीपर हेरि हिया न कहूँ जिह के हित सो सिरि धूप सहै ॥

bar peepar her hiyaa na kahoo(n) jeh ke hit so sir dhoop sahai ||

ਅਹੋ ਕਿਉ ਤਜਿ ਆਵਤ ਹੋ ਭਰਤਾ ਬਿਨੁ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪਿਖੇ ਨਹਿ ਧਾਮਿ ਰਹੈ ॥

अहो किउ तजि आवत हो भरता बिनु कान्रह पिखे नहि धामि रहै ॥

aho kiau taj aavat ho bharataa bin kaanreh pikhe neh dhaam rahai ||

ਇਕ ਬਾਤ ਕਰੈ ਸੁਨ ਕੈ ਇਕ ਬੋਲਬ ਰੂਖਨ ਕੋ ਹਰਿ ਜਾਨਿ ਗਹੈ ॥੪੮੪॥

इक बात करै सुन कै इक बोलब रूखन को हरि जानि गहै ॥४८४॥

eik baat karai sun kai ik bolab rookhan ko har jaan gahai ||484||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਿਯੋਗ ਕੋ ਮਾਨਿ ਬਧੂ ਬ੍ਰਿਜ ਡੋਲਤ ਹੈ ਬਨ ਬੀਚ ਦਿਵਾਨੀ ॥

कान्रह बियोग को मानि बधू बृज डोलत है बन बीच दिवानी ॥

kaanreh biyog ko maan badhoo biraj ddolat hai ban beech dhivaanee ||

ਕੂੰਜਨ ਜਯੋ ਕੁਰਲਾਤ ਫਿਰੈ ਤਿਹ ਜਾ ਜਿਹ ਜਾ ਕਛੁ ਖਾਨ ਨ ਪਾਨੀ ॥

कूँजन जयो कुरलात फिरै तिह जा जिह जा कछु खान न पानी ॥

koo(n)jan jayo kuralaat firai teh jaa jeh jaa kachh khaan na paanee ||

ਏਕ ਗਿਰੈ ਮੁਰਝਾਇ ਧਰਾ ਪਰ ਏਕ ਉਠੈ ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਨੀ ॥

एक गिरै मुरझाइ धरा पर एक उठै कहि कै इह बानी ॥

ek girai murajhai dharaa par ek uThai keh kai ieh baanee ||

ਨੇਹੁ ਬਢਾਇ ਮਹਾ ਹਮ ਸੋ ਕਤ ਜਾਤ ਭਯੋ ਭਗਵਾਨ ਗੁਮਾਨੀ ॥੪੮੫॥

नेहु बढाइ महा हम सो कत जात भयो भगवान गुमानी ॥४८५॥

neh baddai mahaa ham so kat jaat bhayo bhagavaan gumaanee ||485||


ਨੈਨ ਨਚਾਇ ਮਨੋ ਮ੍ਰਿਗ ਸੇ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਮਨ ਚੋਰਿ ਲਯੋ ਹੈ ॥

नैन नचाइ मनो मृग से सभ गोपिन को मन चोरि लयो है ॥

nain nachai mano mirag se sabh gopin ko man chor layo hai ||

ਤਾਹੀ ਕੈ ਬੀਚ ਰਹਿਯੋ ਗਡਿ ਕੈ ਤਿਹ ਤੇ ਨਹਿ ਛੂਟਨ ਨੈਕੁ ਭਯੋ ਹੈ ॥

ताही कै बीच रहियो गडि कै तिह ते नहि छूटन नैकु भयो है ॥

taahee kai beech rahiyo gadd kai teh te neh chhooTan naik bhayo hai ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਹੇਤ ਫਿਰੈ ਬਨ ਮੈ ਤਜਿ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹ ਸ੍ਵਾਸ ਨ ਏਕ ਲਯੋ ਹੈ ॥

ताही के हेत फिरै बन मै तजि कै गृह स्वास न एक लयो है ॥

taahee ke het firai ban mai taj kai gireh savaiaas na ek layo hai ||

ਸੋ ਬਿਰਥਾ ਹਮ ਸੋ ਬਨ ਭ੍ਰਾਤ ਕਹੋ ਹਰਿ ਜੀ ਕਿਹ ਓਰਿ ਗਯੋ ਹੈ ॥੪੮੬॥

सो बिरथा हम सो बन भ्रात कहो हरि जी किह ओरि गयो है ॥४८६॥

so birathaa ham so ban bhraat kaho har jee keh or gayo hai ||486||


ਜਿਨ ਹੂੰ ਬਨ ਬੀਚ ਮਰੀਚ ਮਰਿਯੋ ਪੁਰ ਰਾਵਨਿ ਸੇਵਕ ਜਾਹਿ ਦਹਿਯੋ ਹੈ ॥

जिन हूँ बन बीच मरीच मरियो पुर रावनि सेवक जाहि दहियो है ॥

jin hoo(n) ban beech mareech mariyo pur raavan sevak jaeh dhahiyo hai ||

ਤਾਹੀ ਸੋ ਹੇਤ ਕਰਿਯੋ ਹਮ ਹੂੰ ਬਹੁ ਲੋਗਨ ਕੋ ਉਪਹਾਸ ਸਹਿਯੋ ਹੈ ॥

ताही सो हेत करियो हम हूँ बहु लोगन को उपहास सहियो है ॥

taahee so het kariyo ham hoo(n) bahu logan ko upahaas sahiyo hai ||

ਵਾਸਰ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਸੁੰਦਰ ਸੋ ਮਿਲਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨਿਯਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ॥

वासर से दृग सुँदर सो मिलि ग्वारिनिया इह भाति कहियो है ॥

vaasar se dhirag su(n)dhar so mil gavaiaariniyaa ieh bhaat kahiyo hai ||

ਤਾਹੀ ਕੀ ਚੋਟ ਚਟਾਕ ਲਗੇ ਹਮਰੋ ਮਨੂਆ ਮ੍ਰਿਗ ਠਉਰ ਰਹਿਯੋ ਹੈ ॥੪੮੭॥

ताही की चोट चटाक लगे हमरो मनूआ मृग ठउर रहियो है ॥४८७॥

taahee kee choT chaTaak lage hamaro manooaa mirag Thaur rahiyo hai ||487||


ਬੇਦ ਪੜੈ ਸਮ ਕੋ ਫਲ ਹੋ ਬਹੁ ਮੰਗਨ ਕੋ ਜੋਊ ਦਾਨ ਦਿਵਾਵੈ ॥

बेद पड़ै सम को फल हो बहु मंगन को जोऊ दान दिवावै ॥

bedh paRai sam ko fal ho bahu ma(n)gan ko jouoo dhaan dhivaavai ||

ਕੀਨ ਅਕੀਨ ਲਖੈ ਫਲ ਹੋ ਜੋਊ ਆਥਿਤ ਲੋਗਨ ਅੰਨ ਜਿਵਾਵੈ ॥

कीन अकीन लखै फल हो जोऊ आथित लोगन अंन जिवावै ॥

keen akeen lakhai fal ho jouoo aathit logan a(n)n jivaavai ||

ਦਾਨ ਲਹੈ ਹਮਰੇ ਜੀਅ ਕੋ ਇਹ ਕੇ ਸਮ ਕੋ ਨ ਸੋਊ ਫਲ ਪਾਵੈ ॥

दान लहै हमरे जीअ को इह के सम को न सोऊ फल पावै ॥

dhaan lahai hamare jeea ko ieh ke sam ko na souoo fal paavai ||

ਜੋ ਬਨ ਮੈ ਹਮ ਕੋ ਜਰਰਾ ਇਕ ਏਕ ਘਰੀ ਭਗਵਾਨ ਦਿਖਾਵੈ ॥੪੮੮॥

जो बन मै हम को जररा इक एक घरी भगवान दिखावै ॥४८८॥

jo ban mai ham ko jararaa ik ek gharee bhagavaan dhikhaavai ||488||


ਜਾਹਿ ਬਿਭੀਛਨ ਲੰਕ ਦਈ ਅਰੁ ਦੈਤਨ ਕੇ ਕੁਪਿ ਕੈ ਗਨ ਮਾਰੇ ॥

जाहि बिभीछन लंक दई अरु दैतन के कुपि कै गन मारे ॥

jaeh bibheechhan la(n)k dhiee ar dhaitan ke kup kai gan maare ||

ਪੈ ਤਿਨ ਹੂੰ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਭ ਸਾਧਨ ਰਾਖਿ ਅਸਾਧ ਸੰਘਾਰੇ ॥

पै तिन हूँ कबि स्याम कहै सभ साधन राखि असाध संघारे ॥

pai tin hoo(n) kab sayaam kahai sabh saadhan raakh asaadh sa(n)ghaare ||

ਸੋ ਇਹ ਜਾ ਹਮ ਤੇ ਛਪ ਗਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਕਰ ਕੈ ਸੰਗਿ ਪ੍ਰੀਤਿ ਹਮਾਰੇ ॥

सो इह जा हम ते छप गयो अति ही कर कै संगि प्रीति हमारे ॥

so ieh jaa ham te chhap gayo at hee kar kai sa(n)g preet hamaare ||

ਪਾਇ ਪਰੋ ਕਹੀਯੋ ਬਨ ਭ੍ਰਾਤ ਕਹੋ ਹਰਿ ਜੀ ਕਿਹ ਓਰਿ ਪਧਾਰੇ ॥੪੮੯॥

पाइ परो कहीयो बन भ्रात कहो हरि जी किह ओरि पधारे ॥४८९॥

pai paro kaheeyo ban bhraat kaho har jee keh or padhaare ||489||


ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਖੋਜਿ ਰਹੀ ਬਨ ਮੈ ਹਰਿ ਜੀ ਬਨ ਮੈ ਨਹੀ ਖੋਜਤ ਪਾਏ ॥

ग्वारिन खोजि रही बन मै हरि जी बन मै नही खोजत पाए ॥

gavaiaarin khoj rahee ban mai har jee ban mai nahee khojat paae ||

ਏਕ ਬਿਚਾਰ ਕਰਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਫਿਰ ਕੈ ਨ ਗਯੋ ਕਬਹੂੰ ਉਹ ਜਾਏ ॥

एक बिचार करियो मन मै फिर कै न गयो कबहूँ उह जाए ॥

ek bichaar kariyo man mai fir kai na gayo kabahoo(n) uh jaae ||

ਫੇਰਿ ਫਿਰੀ ਮਨ ਮੈ ਗਿਨਤੀ ਕਰਿ ਪਾਰਥ ਸੂਤ ਕੀ ਡੋਰ ਲਗਾਏ ॥

फेरि फिरी मन मै गिनती करि पारथ सूत की डोर लगाए ॥

fer firee man mai ginatee kar paarath soot kee ddor lagaae ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਚਕਈ ਜਨੁ ਆਵਤ ਹੈ ਕਰ ਮੈ ਫਿਰਿ ਧਾਏ ॥੪੯੦॥

यौ उपजी उपमा चकई जनु आवत है कर मै फिरि धाए ॥४९०॥

yau upajee upamaa chakiee jan aavat hai kar mai fir dhaae ||490||


ਆਇ ਕੇ ਢੂੰਢਿ ਰਹੀ ਸੋਊ ਠਉਰ ਤਹਾ ਭਗਵਾਨ ਨ ਢੂੰਢਡ ਪਾਏ ॥

आइ के ढूँढि रही सोऊ ठउर तहा भगवान न ढूँढड पाए ॥

aai ke ddoo(n)dd rahee souoo Thaur tahaa bhagavaan na ddoo(n)ddadd paae ||

ਇਉ ਜੁ ਰਹੀ ਸਭ ਹੀ ਚਕਿ ਕੈ ਜਨੁ ਚਿਤ੍ਰ ਲਿਖੀ ਪ੍ਰਿਤਿਮਾ ਛਬਿ ਪਾਏ ॥

इउ जु रही सभ ही चकि कै जनु चित्र लिखी पृतिमा छबि पाए ॥

eiau ju rahee sabh hee chak kai jan chitr likhee piratimaa chhab paae ||

ਅਉਰ ਉਪਾਵ ਕਰਿਯੋ ਪੁਨਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹੀ ਭੀਤਰਿ ਚਿਤ ਲਗਾਏ ॥

अउर उपाव करियो पुनि ग्वारिन कान्रह ही भीतरि चित लगाए ॥

aaur upaav kariyo pun gavaiaarin kaanreh hee bheetar chit lagaae ||

ਗਾਇ ਉਠੀ ਤਿਹ ਕੇ ਗੁਨ ਏਕ ਬਜਾਇ ਉਠੀ ਇਕ ਸ੍ਵਾਗ ਲਗਾਏ ॥੪੯੧॥

गाइ उठी तिह के गुन एक बजाइ उठी इक स्वाग लगाए ॥४९१॥

gai uThee teh ke gun ek bajai uThee ik savaiaag lagaae ||491||


ਹੋਤ ਬਕੀ ਇਕ ਹੋਤ ਤ੍ਰਿਣਾਵ੍ਰਤ ਏਕ ਅਘਾਸੁਰ ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਧਾਵੈ ॥

होत बकी इक होत तृणाव्रत एक अघासुर ह्वै करि धावै ॥

hot bakee ik hot tiranaavrat ek aghaasur havai kar dhaavai ||

ਹੋਇ ਹਰੀ ਤਿਨ ਮੈ ਧਸਿ ਕੈ ਧਰਨੀ ਪਰ ਤਾ ਕਹੁ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਵੈ ॥

होइ हरी तिन मै धसि कै धरनी पर ता कहु मारि गिरावै ॥

hoi haree tin mai dhas kai dharanee par taa kahu maar giraavai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ਲਾਗ ਰਹਿਯੋ ਤਿਨ ਕੌ ਅਤ ਹੀ ਮਨ ਨੈਕ ਨ ਛੂਟਨ ਪਾਵੈ ॥

कान्रह सो लाग रहियो तिन कौ अत ही मन नैक न छूटन पावै ॥

kaanreh so laag rahiyo tin kau at hee man naik na chhooTan paavai ||

ਇਉ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਬਨੀਆ ਜਨੁ ਸਾਲਨ ਕੇ ਹਿਤ ਰੋਰ ਬਨਾਵੈ ॥੪੯੨॥

इउ उपजी उपमा बनीआ जनु सालन के हित रोर बनावै ॥४९२॥

eiau upajee upamaa baneeaa jan saalan ke hit ror banaavai ||492||


ਰਾਜਾ ਪਰੀਛਤ ਬਾਚ ਸੁਕ ਸੋ ॥

राजा परीछत बाच सुक सो ॥

raajaa pareechhat baach suk so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸੁਕ ਸੰਗ ਰਾਜੇ ਕਹੁ ਕਹੀ ਜੂਥ ਦਿਜਨ ਕੇ ਨਾਥ ॥

सुक संग राजे कहु कही जूथ दिजन के नाथ ॥

suk sa(n)g raaje kahu kahee jooth dhijan ke naath ||

ਅਗਨਿ ਭਾਵ ਕਿਹ ਬਿਧਿ ਕਹੈ ਕ੍ਰਿਸਨ ਭਾਵ ਕੇ ਸਾਥ ॥੪੯੩॥

अगनि भाव किह बिधि कहै कृसन भाव के साथ ॥४९३॥

agan bhaav keh bidh kahai kirasan bhaav ke saath ||493||


ਸੁਕ ਬਾਚ ਰਾਜਾ ਸੋ ॥

सुक बाच राजा सो ॥

suk baach raajaa so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਾਜਨ ਪਾਸ ਬ੍ਯਾਸ ਕੋ ਬਾਲ ਕਥਾ ਸੁ ਅਰੌਚਕ ਭਾਤਿ ਸੁਨਾਵੈ ॥

राजन पास ब्यास को बाल कथा सु अरौचक भाति सुनावै ॥

raajan paas bayaas ko baal kathaa su arauachak bhaat sunaavai ||

ਗ੍ਵਾਰਨੀਆ ਬਿਰਹਾਨੁਲ ਭਾਵ ਕਰੈ ਬਿਰਹਾਨਲ ਕੋ ਉਪਜਾਵੈ ॥

ग्वारनीआ बिरहानुल भाव करै बिरहानल को उपजावै ॥

gavaiaaraneeaa birahaanul bhaav karai birahaanal ko upajaavai ||

ਪੰਚ ਭੂ ਆਤਮ ਲੋਗਨ ਕੋ ਇਹ ਕਉਤੁਕ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਡਰ ਪਾਵੈ ॥

पंच भू आतम लोगन को इह कउतुक कै अति ही डर पावै ॥

pa(n)ch bhoo aatam logan ko ieh kautuk kai at hee ddar paavai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਧ੍ਯਾਨ ਕਰੇ ਜਬ ਹੀ ਬਿਰਹਾਨਲ ਕੀ ਲਪਟਾਨ ਬੁਝਾਵੈ ॥੪੯੪॥

कान्रह को ध्यान करे जब ही बिरहानल की लपटान बुझावै ॥४९४॥

kaanreh ko dhayaan kare jab hee birahaanal kee lapaTaan bujhaavai ||494||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਸੁਰ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਏਕ ਬਨੈ ਬਛੁਰਾਸੁਰ ਮੂਰਤਿ ਏਕ ਧਰੈ ॥

बृखभासुर ग्वारनि एक बनै बछुरासुर मूरति एक धरै ॥

birakhabhaasur gavaiaaran ek banai bachhuraasur moorat ek dharai ||

ਇਕ ਹ੍ਵੈ ਚਤੁਰਾਨਨ ਗ੍ਵਾਰ ਹਰੈ ਇਕ ਹ੍ਵੈ ਬ੍ਰਹਮਾ ਫਿਰਿ ਪਾਇ ਪਰੈ ॥

इक ह्वै चतुरानन ग्वार हरै इक ह्वै ब्रहमा फिरि पाइ परै ॥

eik havai chaturaanan gavaiaar harai ik havai brahamaa fir pai parai ||

ਇਕ ਹ੍ਵੈ ਬਗੁਲਾ ਭਗਵਾਨ ਕੇ ਸਾਥ ਮਹਾ ਕਰ ਕੈ ਮਨਿ ਕੋਪ ਲਰੈ ॥

इक ह्वै बगुला भगवान के साथ महा कर कै मनि कोप लरै ॥

eik havai bagulaa bhagavaan ke saath mahaa kar kai man kop larai ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਧੂ ਬ੍ਰਿਜ ਖੇਲ ਕਰੈ ਜਿਹ ਭਾਤਿ ਕਿਧੋ ਨੰਦ ਲਾਲ ਕਰੈ ॥੪੯੫॥

इह भाति बधू बृज खेल करै जिह भाति किधो नंद लाल करै ॥४९५॥

eeh bhaat badhoo biraj khel karai jeh bhaat kidho na(n)dh laal karai ||495||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਰਿਤ੍ਰ ਸਭੈ ਕਰ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਫੇਰਿ ਲਗੀ ਗੁਨ ਗਾਵਨ ॥

कान्रह चरित्र सभै कर कै सभ ग्वारिन फेरि लगी गुन गावन ॥

kaanreh charitr sabhai kar kai sabh gavaiaarin fer lagee gun gaavan ||

ਤਾਲ ਬਜਾਇ ਬਜਾ ਮੁਰਲੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਰਿ ਭਾਵਨ ॥

ताल बजाइ बजा मुरली कबि स्याम कहै अति ही करि भावन ॥

taal bajai bajaa muralee kab sayaam kahai at hee kar bhaavan ||

ਫੇਰਿ ਚਿਤਾਰ ਕਹਿਯੋ ਹਮਰੇ ਸੰਗਿ ਖੇਲ ਕਰਿਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਇਹ ਠਾਵਨ ॥

फेरि चितार कहियो हमरे संगि खेल करियो हरि जी इह ठावन ॥

fer chitaar kahiyo hamare sa(n)g khel kariyo har jee ieh Thaavan ||

ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਭੂਲ ਗਈ ਸੁਧਿ ਬੀਚ ਲਗੀ ਮਨ ਕੇ ਦੁਖ ਪਾਵਨ ॥੪੯੬॥

ग्वारिन स्याम की भूल गई सुधि बीच लगी मन के दुख पावन ॥४९६॥

gavaiaarin sayaam kee bhool giee sudh beech lagee man ke dhukh paavan ||496||


ਅਤਿ ਹੋਇ ਗਈ ਤਨ ਮੈ ਹਰਿ ਸਾਥ ਸੁ ਗੋਪਿਨ ਕੀ ਸਭ ਹੀ ਘਰਨੀ ॥

अति होइ गई तन मै हरि साथ सु गोपिन की सभ ही घरनी ॥

at hoi giee tan mai har saath su gopin kee sabh hee gharanee ||

ਤਿਹ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰ ਕੈ ਬਸਿ ਭਈ ਜੁ ਹੁਤੀ ਅਤਿ ਰੂਪਨ ਕੀ ਧਰਨੀ ॥

तिह रूप निहार कै बसि भई जु हुती अति रूपन की धरनी ॥

teh roop nihaar kai bas bhiee ju hutee at roopan kee dharanee ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਪਰੀ ਮੁਰਝਾਇ ਧਰੀ ਕਬਿ ਨੇ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਬਰਨੀ ॥

इह भाति परी मुरझाइ धरी कबि ने उपमा तिह की बरनी ॥

eeh bhaat paree murajhai dharee kab ne upamaa teh kee baranee ||

ਜਿਮ ਘੰਟਕ ਹੇਰ ਮੈ ਭੂਮਿ ਕੇ ਬੀਚ ਪਰੈ ਗਿਰ ਬਾਨ ਲਗੇ ਹਰਨੀ ॥੪੯੭॥

जिम घंटक हेर मै भूमि के बीच परै गिर बान लगे हरनी ॥४९७॥

jim gha(n)Tak her mai bhoom ke beech parai gir baan lage haranee ||497||


ਬਰੁਨੀ ਸਰ ਭਉਹਨ ਕੋ ਧਨੁ ਕੈ ਸੁ ਸਿੰਗਾਰ ਕੇ ਸਾਜਨ ਸਾਥ ਕਰੀ ॥

बरुनी सर भउहन को धनु कै सु सिंगार के साजन साथ करी ॥

barunee sar bhauhan ko dhan kai su si(n)gaar ke saajan saath karee ||

ਰਸ ਕੋ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਰਿ ਕੋਪ ਸੁ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਸਾਮੁਹਿ ਜਾਇ ਅਰੀ ॥

रस को मन मै अति ही करि कोप सु कान्रह के सामुहि जाइ अरी ॥

ras ko man mai at hee kar kop su kaanreh ke saamuh jai aree ||

ਅਤਿ ਹੀ ਕਰਿ ਨੇਹੁ ਕੋ ਕ੍ਰੋਧੁ ਮਨੈ ਤਿਹ ਠਉਰ ਤੇ ਪੈਗ ਨ ਏਕ ਟਰੀ ॥

अति ही करि नेहु को क्रोधु मनै तिह ठउर ते पैग न एक टरी ॥

at hee kar neh ko krodh manai teh Thaur te paig na ek Taree ||

ਮਨੋ ਮੈਨ ਹੀ ਸੋ ਅਤਿ ਹੀ ਰਨ ਕੈ ਧਰਨੀ ਪਰ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਜੂਝਿ ਪਰੀ ॥੪੯੮॥

मनो मैन ही सो अति ही रन कै धरनी पर ग्वारिन जूझि परी ॥४९८॥

mano main hee so at hee ran kai dharanee par gavaiaarin joojh paree ||498||


ਤਿਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਪਿਖਿ ਪ੍ਰੇਮ ਤਬੈ ਪ੍ਰਗਟੇ ਭਗਵਾਨ ਸਿਤਾਬੀ ॥

तिन ग्वारिन को अति ही पिखि प्रेम तबै प्रगटे भगवान सिताबी ॥

tin gavaiaarin ko at hee pikh prem tabai pragaTe bhagavaan sitaabee ||

ਜੋਤਿ ਭਈ ਧਰਨੀ ਪਰ ਇਉ ਰਜਨੀ ਮਹਿ ਛੂਟਤ ਜਿਉ ਮਹਤਾਬੀ ॥

जोति भई धरनी पर इउ रजनी महि छूटत जिउ महताबी ॥

jot bhiee dharanee par iau rajanee meh chhooTat jiau mahataabee ||

ਚਉਕ ਪਰੀ ਤਬ ਹੀ ਇਹ ਇਉ ਜੈਸੇ ਚਉਕ ਪਰੈ ਤਮ ਮੈ ਡਰਿ ਖੁਆਬੀ ॥

चउक परी तब ही इह इउ जैसे चउक परै तम मै डरि खुआबी ॥

chauk paree tab hee ieh iau jaise chauk parai tam mai ddar khuaabee ||

ਛਾਡਿ ਚਲਿਯੋ ਤਨ ਕੋ ਮਨ ਇਉ ਜਿਮ ਭਾਜਤ ਹੈ ਗ੍ਰਿਹ ਛਾਡਿ ਸਰਾਬੀ ॥੪੯੯॥

छाडि चलियो तन को मन इउ जिम भाजत है गृह छाडि सराबी ॥४९९॥

chhaadd chaliyo tan ko man iau jim bhaajat hai gireh chhaadd saraabee ||499||


ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਧਾਇ ਚਲੀ ਮਿਲਬੇ ਕਹੁ ਜੋ ਪਿਖਏ ਭਗਵਾਨ ਗੁਮਾਨੀ ॥

ग्वारिन धाइ चली मिलबे कहु जो पिखए भगवान गुमानी ॥

gavaiaarin dhai chalee milabe kahu jo pikhe bhagavaan gumaanee ||

ਜਿਉ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਮ੍ਰਿਗ ਦੇਖਿ ਚਲੈ ਜੁ ਹੁਤੀ ਅਤਿ ਰੂਪ ਬਿਖੈ ਅਭਿਮਾਨੀ ॥

जिउ मृगनी मृग देखि चलै जु हुती अति रूप बिखै अभिमानी ॥

jiau miraganee mirag dhekh chalai ju hutee at roop bikhai abhimaanee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਖਾਨੀ ॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि नै मुख ते इह भाति बखानी ॥

taa chhab kee at hee upamaa kab nai mukh te ieh bhaat bakhaanee ||

ਜਿਉ ਜਲ ਚਾਤ੍ਰਿਕ ਬੂੰਦ ਪਰੈ ਜਿਮ ਕੂਦਿ ਪਰੈ ਮਛਲੀ ਪਿਖਿ ਪਾਨੀ ॥੫੦੦॥

जिउ जल चातृक बूँद परै जिम कूदि परै मछली पिखि पानी ॥५००॥

jiau jal chaatirak boo(n)dh parai jim koodh parai machhalee pikh paanee ||500||


ਰਾਜਤ ਹੈ ਪੀਅਰੋ ਪਟ ਕੰਧਿ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਮ੍ਰਿਗ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਦੋਊ ॥

राजत है पीअरो पट कंधि बिराजत है मृग से दृग दोऊ ॥

raajat hai peearo paT ka(n)dh biraajat hai mirag se dhirag dhouoo ||

ਛਾਜਤ ਹੈ ਮਨਿ ਸੋ ਉਰ ਮੈ ਨਦੀਆ ਪਤਿ ਸਾਥ ਲੀਏ ਫੁਨਿ ਜੋਊ ॥

छाजत है मनि सो उर मै नदीआ पति साथ लीए फुनि जोऊ ॥

chhaajat hai man so ur mai nadheeaa pat saath le'ee fun jouoo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਫਿਰੈ ਤਿਨ ਗੋਪਿਨ ਮੈ ਜਿਹ ਕੀ ਜਗ ਮੈ ਸਮ ਤੁਲਿ ਨ ਕੋਊ ॥

कान्रह फिरै तिन गोपिन मै जिह की जग मै सम तुलि न कोऊ ॥

kaanreh firai tin gopin mai jeh kee jag mai sam tul na kouoo ||

ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਰੀਝ ਰਹੀ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਸੋਊ ਰੀਝਤ ਹੈ ਚਕ ਦੇਖਤ ਸੋਊ ॥੫੦੧॥

ग्वारिन रीझ रही बृज की सोऊ रीझत है चक देखत सोऊ ॥५०१॥

gavaiaarin reejh rahee biraj kee souoo reejhat hai chak dhekhat souoo ||501||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕਉਲ ਜਿਉ ਪ੍ਰਭਾਤ ਤੈ ਬਿਛਰਿਯੋ ਮਿਲੀ ਬਾਤ ਤੈ ਗੁਨੀ ਜਿਉ ਸੁਰ ਸਾਤ ਤੈ ਬਚਾਯੋ ਚੋਰ ਗਾਤ ਤੈ ॥

कउल जिउ प्रभात तै बिछरियो मिली बात तै गुनी जिउ सुर सात तै बचायो चोर गात तै ॥

kaul jiau prabhaat tai bichhariyo milee baat tai gunee jiau sur saat tai bachaayo chor gaat tai ||

ਜੈਸੇ ਧਨੀ ਧਨ ਤੈ ਅਉ ਰਿਨੀ ਲੋਕ ਮਨਿ ਤੈ ਲਰਈਯਾ ਜੈਸੇ ਰਨ ਤੈ ਤਜਈਯਾ ਜਿਉ ਨਸਾਤ ਤੈ ॥

जैसे धनी धन तै अउ रिनी लोक मनि तै लरईया जैसे रन तै तजईया जिउ नसात तै ॥

jaise dhanee dhan tai aau rinee lok man tai larieeyaa jaise ran tai tajieeyaa jiau nasaat tai ||

ਜੈਸੇ ਦੁਖੀ ਸੂਖ ਤੈ ਅਭੂਖੀ ਜੈਸੇ ਭੂਖ ਤੈ ਸੁ ਰਾਜਾ ਸਤ੍ਰ ਆਪਨੇ ਕੋ ਸੁਨੇ ਜੈਸੇ ਘਾਤ ਤੈ ॥

जैसे दुखी सूख तै अभूखी जैसे भूख तै सु राजा सत्र आपने को सुने जैसे घात तै ॥

jaise dhukhee sookh tai abhookhee jaise bhookh tai su raajaa satr aapane ko sune jaise ghaat tai ||

ਹੋਤ ਹੈ ਪ੍ਰਸੰਨ ਜੇਤੇ ਏਤੇ ਏਤੀ ਬਾਤਨ ਤੈ ਹੋਤ ਹੈ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਗੋਪੀ ਤੈਸੇ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਤ ਤੈ ॥੫੦੨॥

होत है प्रसंन जेते एते एती बातन तै होत है प्रसंन्य गोपी तैसे कान्रह बात तै ॥५०२॥

hot hai prasa(n)n jete ete etee baatan tai hot hai prasa(n)nay gopee taise kaanreh baat tai ||502||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ॥

कान्रह जू बाच ॥

kaanreh joo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹਸਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਸੰਗਿ ਗੋਪਿਨ ਕਾਨ ਚਲੋ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਖੇਲ ਕਰੈ ॥

हसि बात कही संगि गोपिन कान चलो जमुना तटि खेल करै ॥

has baat kahee sa(n)g gopin kaan chalo jamunaa taT khel karai ||

ਚਿਟਕਾਰਨ ਸੋ ਭਿਰ ਕੈ ਤਿਹ ਜਾ ਤੁਮਹੂੰ ਹੂੰ ਤਰੋ ਹਮਹੂੰ ਹੂੰ ਤਰੈ ॥

चिटकारन सो भिर कै तिह जा तुमहूँ हूँ तरो हमहूँ हूँ तरै ॥

chiTakaaran so bhir kai teh jaa tumahoo(n) hoo(n) taro hamahoo(n) hoo(n) tarai ||

ਗੁਹਿ ਕੈ ਬਨ ਫੂਲਨ ਸੁੰਦਰ ਹਾਰ ਸੋ ਕੇਲ ਕਰੈ ਤਿਨ ਡਾਰਿ ਗਰੈ ॥

गुहि कै बन फूलन सुँदर हार सो केल करै तिन डारि गरै ॥

guh kai ban foolan su(n)dhar haar so kel karai tin ddaar garai ||

ਬਿਰਹਾ ਛੁਧ ਕੋ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਹਸ ਕੈ ਰਸ ਕੈ ਸੰਗਿ ਪੇਟ ਭਰੈ ॥੫੦੩॥

बिरहा छुध को तिह ठउर बिखै हस कै रस कै संगि पेट भरै ॥५०३॥

birahaa chhudh ko teh Thaur bikhai has kai ras kai sa(n)g peT bharai ||503||


ਆਇਸੁ ਮਾਨਿ ਤਬੈ ਹਰਿ ਕੋ ਸਭ ਧਾਇ ਚਲੀ ਗੁਪੀਆ ਤਿਹ ਠਉਰੈ ॥

आइसु मानि तबै हरि को सभ धाइ चली गुपीआ तिह ठउरै ॥

aais maan tabai har ko sabh dhai chalee gupeeaa teh Thaurai ||

ਏਕ ਚਲੈ ਮੁਸਕਾਇ ਭਲੀ ਬਿਧਿ ਏਕ ਚਲੈ ਹਰੂਏ ਇਕ ਦਉਰੈ ॥

एक चलै मुसकाइ भली बिधि एक चलै हरूए इक दउरै ॥

ek chalai musakai bhalee bidh ek chalai harooe ik dhaurai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਜਲ ਮੈ ਜਮੁਨਾ ਕਹੁ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਹਉਰੈ ॥

स्याम कहै उपमा तिह की जल मै जमुना कहु ग्वारिन हउरै ॥

sayaam kahai upamaa teh kee jal mai jamunaa kahu gavaiaarin haurai ||

ਰੀਝ ਰਹੈ ਬਨ ਕੇ ਮ੍ਰਿਗ ਦੇਖਿ ਸੁ ਅਉਰ ਪਿਖੈ ਗਜ ਗਾਮਨ ਸਉਰੈ ॥੫੦੪॥

रीझ रहै बन के मृग देखि सु अउर पिखै गज गामन सउरै ॥५०४॥

reejh rahai ban ke mirag dhekh su aaur pikhai gaj gaaman saurai ||504||


ਸ੍ਯਾਮ ਸਮੇਤ ਸਭੈ ਗੁਪੀਆ ਜਮੁਨਾ ਜਲ ਕੋ ਤਰਿ ਪਾਰਿ ਪਰਈਯਾ ॥

स्याम समेत सभै गुपीआ जमुना जल को तरि पारि परईया ॥

sayaam samet sabhai gupeeaa jamunaa jal ko tar paar parieeyaa ||

ਪਾਰ ਭਈ ਜਬ ਹੀ ਹਿਤ ਸੋ ਗਿਰਦਾ ਕਰ ਕੈ ਤਿਹ ਕੋ ਤਿਸਟਈਯਾ ॥

पार भई जब ही हित सो गिरदा कर कै तिह को तिसटईया ॥

paar bhiee jab hee hit so giradhaa kar kai teh ko tisaTieeyaa ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੁਨਈਯਾ ॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि नै मुख ते इह भाति सुनईया ॥

taa chhab kee at hee upamaa kab nai mukh te ieh bhaat sunieeyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਯੋ ਸਸਿ ਸੁਧ ਮਨੋ ਸਮ ਰਾਜਤ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਤੀਰ ਤਰਈਯਾ ॥੫੦੫॥

कान्रह भयो ससि सुध मनो सम राजत ग्वारिन तीर तरईया ॥५०५॥

kaanreh bhayo sas sudh mano sam raajat gavaiaarin teer tarieeyaa ||505||


ਬਾਤ ਲਗੀ ਕਹਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਕਵਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਿਲ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ॥

बात लगी कहने मुख ते कवि स्याम कहै मिल कै सभ ग्वारिन ॥

baat lagee kahane mukh te kav sayaam kahai mil kai sabh gavaiaarin ||

ਚੰਦ੍ਰਮੁਖੀ ਮ੍ਰਿਗ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗਨੀ ਲਖੀਯੈ ਤਿਨ ਭਾਨ ਅਨੰਤ ਅਪਾਰਨਿ ॥

चंद्रमुखी मृग से दृगनी लखीयै तिन भान अनंत अपारनि ॥

cha(n)dhramukhee mirag se dhiraganee lakheeyai tin bhaan ana(n)t apaaran ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਸਾਥ ਕਰੀ ਚਰਚਾ ਮਿਲਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਸਭ ਸੁੰਦਰ ਬਾਰਨਿ ॥

कान्रह के साथ करी चरचा मिलि कै बृज की सभ सुँदर बारनि ॥

kaanreh ke saath karee charachaa mil kai biraj kee sabh su(n)dhar baaran ||

ਛੋਰਿ ਦਈ ਗ੍ਰਿਹ ਕੀ ਸਭ ਲਾਜ ਜੁ ਹੋਇ ਮਹਾ ਰਸ ਕੀ ਚਸਕਾਰਨਿ ॥੫੦੬॥

छोरि दई गृह की सभ लाज जु होइ महा रस की चसकारनि ॥५०६॥

chhor dhiee gireh kee sabh laaj ju hoi mahaa ras kee chasakaaran ||506||


ਕੈ ਰਸ ਕੇ ਹਰਿ ਕਾਰਨੁ ਕੈ ਕਰਿ ਕਸਟ ਬਡੋ ਕੋਊ ਮੰਤਰ ਸਾਧੋ ॥

कै रस के हरि कारनु कै करि कसट बडो कोऊ मंतर साधो ॥

kai ras ke har kaaran kai kar kasaT baddo kouoo ma(n)tar saadho ||

ਕੈ ਕੋਊ ਜੰਤ੍ਰ ਬਡੋਈ ਸਧਿਯੋ ਇਨ ਕੋ ਅਪਨੇ ਮਨ ਭੀਤਰ ਬਾਧੋ ॥

कै कोऊ जंत्र बडोई सधियो इन को अपने मन भीतर बाधो ॥

kai kouoo ja(n)tr baddoiee sadhiyo in ko apane man bheetar baadho ||

ਕੈ ਕੇਹੂੰ ਤੰਤ੍ਰ ਕੇ ਸਾਥ ਕਿਧੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਰਿ ਧਾਧੋ ॥

कै केहूँ तंत्र के साथ किधो कबि स्याम कहै अति ही करि धाधो ॥

kai kehoo(n) ta(n)tr ke saath kidho kab sayaam kahai at hee kar dhaadho ||

ਚੋਰਿ ਲਯੋ ਮਨੁ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੋ ਛਿਨ ਭੀਤਰ ਦੀਨ ਦਯਾਨਿਧਿ ਮਾਧੋ ॥੫੦੭॥

चोरि लयो मनु ग्वारिन को छिन भीतर दीन दयानिधि माधो ॥५०७॥

chor layo man gavaiaarin ko chhin bheetar dheen dhayaanidh maadho ||507||


ਗੋਪੀ ਵਾਚ ॥

गोपी वाच ॥

gopee vaach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਸਾਥ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਕੋ ਤਜਿ ਕੈ ਕਿਹ ਓਰਿ ਗਏ ਥੇ ॥

कान्रह के ग्वारिन साथ कहियो हम को तजि कै किह ओरि गए थे ॥

kaanreh ke gavaiaarin saath kahiyo ham ko taj kai keh or ge the ||

ਪ੍ਰੀਤਿ ਬਢਾਇ ਮਹਾ ਹਮ ਸੋ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਪੈ ਰਸ ਕੇਲ ਕਏ ਥੇ ॥

प्रीति बढाइ महा हम सो जमुना तटि पै रस केल कए थे ॥

preet baddai mahaa ham so jamunaa taT pai ras kel ke the ||

ਯੌ ਤਜਿ ਗੇ ਜਿਮ ਰਾਹਿ ਮੁਸਾਫਿਰ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮ ਨਾਹਿ ਨਏ ਥੇ ॥

यौ तजि गे जिम राहि मुसाफिर स्याम कहियो तुम नाहि नए थे ॥

yau taj ge jim raeh musaafir sayaam kahiyo tum naeh ne the ||

ਫੂਲ ਖਿਰੇ ਮੁਖ ਆਏ ਕਹਾ ਅਪਨੀ ਬਿਰੀਆ ਕਹੂੰ ਭਉਰ ਭਏ ਥੇ ॥੫੦੮॥

फूल खिरे मुख आए कहा अपनी बिरीआ कहूँ भउर भए थे ॥५०८॥

fool khire mukh aae kahaa apanee bireeaa kahoo(n) bhaur bhe the ||508||


ਅਥ ਚਤੁਰ ਪੁਰਖ ਭੇਦ ਕਥਨੰ ॥

अथ चतुर पुरख भेद कथनं ॥

ath chatur purakh bhedh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਨਰ ਏਕ ਅਕੀਨ ਹੀ ਪ੍ਰੀਤ ਕਰੈ ਇਕ ਕੀਨ ਕਰੈ ਇਕ ਕੀਨ ਜੁ ਜਾਨੈ ॥

नर एक अकीन ही प्रीत करै इक कीन करै इक कीन जु जानै ॥

nar ek akeen hee preet karai ik keen karai ik keen ju jaanai ||

ਏਕ ਨ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੇ ਭੇਦ ਜਨੈ ਜੋਊ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਰੈ ਅਰਿ ਕੈ ਤਿਹ ਮਾਨੈ ॥

एक न प्रीति के भेद जनै जोऊ प्रीति करै अरि कै तिह मानै ॥

ek na preet ke bhedh janai jouoo preet karai ar kai teh maanai ||

ਸੋ ਨਰ ਮੂੜ ਬਿਖੈ ਕਹੀਯੈ ਜਗਿ ਜੋ ਨਰ ਰੰਚ ਨ ਪ੍ਰੀਤਿ ਪਛਾਨੈ ॥

सो नर मूड़ बिखै कहीयै जगि जो नर रंच न प्रीति पछानै ॥

so nar mooR bikhai kaheeyai jag jo nar ra(n)ch na preet pachhaanai ||

ਸੋ ਚਰਚਾ ਰਸ ਕੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸੁ ਗ੍ਵਾਰਿਨੀਆ ਸੰਗਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਖਾਨੈ ॥੫੦੯॥

सो चरचा रस की इह भाति सु ग्वारिनीआ संगि कान्रह बखानै ॥५०९॥

so charachaa ras kee ieh bhaat su gavaiaarineeaa sa(n)g kaanreh bakhaanai ||509||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ॥

गोपी बाच ॥

gopee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗ੍ਵਾਰਿਨੀਆ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਕਰਿ ਨੇਹ ਕੋ ਅੰਤਿ ਦਗਾ ਕੋਊ ਦੈ ਹੈ ॥

ग्वारिनीआ इह भाति कहै करि नेह को अंति दगा कोऊ दै है ॥

gavaiaarineeaa ieh bhaat kahai kar neh ko a(n)t dhagaa kouoo dhai hai ||

ਦੋ ਜਨ ਛਾਡਿ ਪਰੋ ਹਰਿ ਗਯੋ ਜਨ ਜੋ ਛਲ ਸੋ ਤਿਹ ਕੋ ਹਰਿ ਲੈ ਹੈ ॥

दो जन छाडि परो हरि गयो जन जो छल सो तिह को हरि लै है ॥

dho jan chhaadd paro har gayo jan jo chhal so teh ko har lai hai ||

ਜੋ ਬਟਹਾ ਜਨ ਘਾਵਤ ਹੈ ਕੋਊ ਜਾਤ ਚਲਿਯੋ ਪਿਖ ਕੈ ਮਧਿਮੈ ਹੈ ॥

जो बटहा जन घावत है कोऊ जात चलियो पिख कै मधिमै है ॥

jo baTahaa jan ghaavat hai kouoo jaat chaliyo pikh kai madhimai hai ||

ਪੈ ਖਿਝ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਤਿਨ ਕੀ ਸਮ ਏ ਹੈ ॥੫੧੦॥

पै खिझ कै अति ही गुपीआ इह भाति कहियो तिन की सम ए है ॥५१०॥

pai khijh kai at hee gupeeaa ieh bhaat kahiyo tin kee sam e hai ||510||


ਜਬ ਹੀ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਬਾਤ ਕਹੀ ਤਬ ਹੀ ਤਿਨ ਕੇ ਸੰਗ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹਸੈ ॥

जब ही इह ग्वारिन बात कही तब ही तिन के संग कान्रह हसै ॥

jab hee ieh gavaiaarin baat kahee tab hee tin ke sa(n)g kaanreh hasai ||

ਜਿਹ ਨਾਮ ਕੇ ਲੇਤ ਜਰਾ ਮੁਖ ਤੇ ਤਜ ਕੈ ਗਨਕਾ ਸਭ ਪਾਪ ਨਸੇ ॥

जिह नाम के लेत जरा मुख ते तज कै गनका सभ पाप नसे ॥

jeh naam ke let jaraa mukh te taj kai ganakaa sabh paap nase ||

ਨ ਜਪਿਯੋ ਜਿਹ ਜਾਪ ਸੋਊ ਉਜਰੇ ਜਿਹ ਜਾਪ ਜਪਿਯੋ ਸੋਊ ਧਾਮ ਬਸੇ ॥

न जपियो जिह जाप सोऊ उजरे जिह जाप जपियो सोऊ धाम बसे ॥

n japiyo jeh jaap souoo ujare jeh jaap japiyo souoo dhaam base ||

ਤਿਨ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਮਹੂੰ ਅਤਿ ਹੀ ਰਸ ਬੀਚ ਫਸੇ ॥੫੧੧॥

तिन गोपिन सो इह भाति कहियो हमहूँ अति ही रस बीच फसे ॥५११॥

tin gopin so ieh bhaat kahiyo hamahoo(n) at hee ras beech fase ||511||


ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਹਸੇ ਹਰਿ ਜੂ ਉਠ ਕੈ ਜਮੁਨਾ ਜਲ ਬੀਚ ਤਰੇ ॥

कहि कै इह बात हसे हरि जू उठ कै जमुना जल बीच तरे ॥

keh kai ieh baat hase har joo uTh kai jamunaa jal beech tare ||

ਛਿਨ ਏਕ ਲਗਿਯੋ ਨ ਤਬੈ ਤਿਹ ਕੋ ਲਖਿ ਕੈ ਜਮੁਨਾ ਕਹ ਪਾਰ ਪਰੇ ॥

छिन एक लगियो न तबै तिह को लखि कै जमुना कह पार परे ॥

chhin ek lagiyo na tabai teh ko lakh kai jamunaa keh paar pare ||

ਲਖਿ ਕੈ ਜਲ ਕੋ ਸੰਗ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਭਗਵਾਨ ਮਹਾ ਉਪਹਾਸ ਕਰੇ ॥

लखि कै जल को संग गोपिन के भगवान महा उपहास करे ॥

lakh kai jal ko sa(n)g gopin ke bhagavaan mahaa upahaas kare ||

ਬਹੁ ਹੋਰਨਿ ਤੈ ਅਰੁ ਬ੍ਰਯਾਹਨਿ ਤੈ ਕੁਰਮਾਤਨ ਤੈ ਅਤਿ ਸੋਊ ਖਰੇ ॥੫੧੨॥

बहु होरनि तै अरु ब्रयाहनि तै कुरमातन तै अति सोऊ खरे ॥५१२॥

bahu horan tai ar brayaahan tai kuramaatan tai at souoo khare ||512||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਜਨੀ ਪਰ ਗੀ ਤਬ ਹੀ ਭਗਵਾਨ ਕਹਿਯੋ ਹਸਿ ਕੈ ਹਮ ਰਾਸ ਕਰੈ ॥

रजनी पर गी तब ही भगवान कहियो हसि कै हम रास करै ॥

rajanee par gee tab hee bhagavaan kahiyo has kai ham raas karai ||

ਸਸਿ ਰਾਜਤ ਹੈ ਸਿਤ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਮੁਖ ਸੁੰਦਰ ਸੇਤ ਹੀ ਹਾਰ ਡਰੈ ॥

ससि राजत है सित गोपिन के मुख सुँदर सेत ही हार डरै ॥

sas raajat hai sit gopin ke mukh su(n)dhar set hee haar ddarai ||

ਹਿਤ ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਸਭ ਹੀ ਰਸ ਖੇਲ ਕਰੈ ਕਰ ਡਾਰ ਗਰੈ ॥

हित सो बृज भूमि बिखै सभ ही रस खेल करै कर डार गरै ॥

hit so biraj bhoom bikhai sabh hee ras khel karai kar ddaar garai ||

ਤੁਮ ਕੋ ਜੋਊ ਸੋਕ ਬਢਿਯੋ ਬਿਛੁਰੇ ਹਮ ਸੋ ਮਿਲਿ ਕੈ ਅਬ ਸੋਕ ਹਰੈ ॥੫੧੩॥

तुम को जोऊ सोक बढियो बिछुरे हम सो मिलि कै अब सोक हरै ॥५१३॥

tum ko jouoo sok baddiyo bichhure ham so mil kai ab sok harai ||513||


ਐਹੋ ਤ੍ਰੀਯਾ ਕਹਿ ਸ੍ਰੀ ਜਦੁਬੀਰ ਸਭੈ ਤੁਮ ਰਾਸ ਕੋ ਖੇਲ ਕਰੋ ॥

ऐहो त्रीया कहि स्री जदुबीर सभै तुम रास को खेल करो ॥

aaiho treeyaa keh sree jadhubeer sabhai tum raas ko khel karo ||

ਗਹਿ ਕੈ ਕਰ ਸੋ ਕਰੁ ਮੰਡਲ ਕੈ ਨ ਕਛੂ ਮਨ ਭੀਤਰ ਲਾਜ ਧਰੋ ॥

गहि कै कर सो करु मंडल कै न कछू मन भीतर लाज धरो ॥

geh kai kar so kar ma(n)ddal kai na kachhoo man bheetar laaj dharo ||

ਹਮਹੂੰ ਤੁਮਰੇ ਸੰਗ ਰਾਸ ਕਰੈ ਨਚਿ ਹੈ ਨਚਿਯੋ ਨਹ ਨੈਕੁ ਡਰੋ ॥

हमहूँ तुमरे संग रास करै नचि है नचियो नह नैकु डरो ॥

hamahoo(n) tumare sa(n)g raas karai nach hai nachiyo neh naik ddaro ||

ਸਭ ਹੀ ਮਨ ਬੀਚ ਅਸੋਕ ਕਰੋ ਅਤਿ ਹੀ ਮਨ ਸੋਕਨ ਕੋ ਸੁ ਹਰੋ ॥੫੧੪॥

सभ ही मन बीच असोक करो अति ही मन सोकन को सु हरो ॥५१४॥

sabh hee man beech asok karo at hee man sokan ko su haro ||514||


ਤਿਨ ਸੋ ਭਗਵਾਨ ਕਹੀ ਫਿਰ ਯੋ ਸਜਨੀ ਹਮਰੀ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨਿ ਲੀਜੈ ॥

तिन सो भगवान कही फिर यो सजनी हमरी बिनती सुनि लीजै ॥

tin so bhagavaan kahee fir yo sajanee hamaree binatee sun leejai ||

ਆਨੰਦ ਬੀਚ ਕਰੋ ਮਨ ਕੇ ਜਿਹ ਤੇ ਹਮਰੇ ਤਨ ਕੋ ਮਨ ਜੀਜੈ ॥

आनंद बीच करो मन के जिह ते हमरे तन को मन जीजै ॥

aana(n)dh beech karo man ke jeh te hamare tan ko man jeejai ||

ਮਿਤਵਾ ਜਿਹ ਤੇ ਹਿਤ ਮਾਨਤ ਹੈ ਤਬ ਹੀ ਉਠ ਕੈ ਸੋਊ ਕਾਰਜ ਕੀਜੈ ॥

मितवा जिह ते हित मानत है तब ही उठ कै सोऊ कारज कीजै ॥

mitavaa jeh te hit maanat hai tab hee uTh kai souoo kaaraj keejai ||

ਦੈ ਰਸ ਕੋ ਸਿਰਪਾਵ ਤਿਸੈ ਮਨ ਕੋ ਸਭ ਸੋਕ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਦੀਜੈ ॥੫੧੫॥

दै रस को सिरपाव तिसै मन को सभ सोक बिदा करि दीजै ॥५१५॥

dhai ras ko sirapaav tisai man ko sabh sok bidhaa kar dheejai ||515||


ਹਸਿ ਕੈ ਭਗਵਾਨ ਕਹੀ ਫਿਰਿ ਯੌ ਰਸ ਕੀ ਬਤੀਯਾ ਹਮ ਤੇ ਸੁਨ ਲਈਯੈ ॥

हसि कै भगवान कही फिरि यौ रस की बतीया हम ते सुन लईयै ॥

has kai bhagavaan kahee fir yau ras kee bateeyaa ham te sun lieeyai ||

ਜਾ ਕੈ ਲੀਏ ਮਿਤਵਾ ਹਿਤ ਮਾਨਤ ਸੋ ਸੁਨ ਕੈ ਉਠਿ ਕਾਰਜ ਕਈਯੈ ॥

जा कै लीए मितवा हित मानत सो सुन कै उठि कारज कईयै ॥

jaa kai le'ee mitavaa hit maanat so sun kai uTh kaaraj kieeyai ||

ਗੋਪਿਨ ਸਾਥ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਿ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਈਯੈ ॥

गोपिन साथ कृपा करि कै कबि स्याम कहियो मुसलीधर भईयै ॥

gopin saath kirapaa kar kai kab sayaam kahiyo musaleedhar bhieeyai ||

ਜਾ ਸੰਗ ਹੇਤ ਮਹਾ ਕਰੀਯੈ ਬਿਨੁ ਦਾਮਨ ਤਾ ਹੀ ਕੇ ਹਾਥਿ ਬਿਕਈਯੈ ॥੫੧੬॥

जा संग हेत महा करीयै बिनु दामन ता ही के हाथि बिकईयै ॥५१६॥

jaa sa(n)g het mahaa kareeyai bin dhaaman taa hee ke haath bikieeyai ||516||


ਕਾਨਰ ਕੀ ਸੁਨ ਕੈ ਬਤੀਆ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਧੀਰ ਗਹਿਯੋ ਹੈ ॥

कानर की सुन कै बतीआ मन मै तिन ग्वारिन धीर गहियो है ॥

kaanar kee sun kai bateeaa man mai tin gavaiaarin dheer gahiyo hai ||

ਦੋਖ ਜਿਤੋ ਮਨ ਭੀਤਰ ਥੋ ਰਸ ਪਾਵਕ ਮੋ ਤ੍ਰਿਣ ਤੁਲਿ ਦਹਿਯੋ ਹੈ ॥

दोख जितो मन भीतर थो रस पावक मो तृण तुलि दहियो है ॥

dhokh jito man bheetar tho ras paavak mo tiran tul dhahiyo hai ||

ਰਾਸ ਕਰਿਯੋ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲਿ ਕੈ ਜਸੁਧਾ ਸੁਤ ਕੋ ਤਿਨ ਮਾਨਿ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ॥

रास करियो सभ ही मिलि कै जसुधा सुत को तिन मानि कहियो है ॥

raas kariyo sabh hee mil kai jasudhaa sut ko tin maan kahiyo hai ||

ਰੀਝ ਰਹੀ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਗਨ ਅਉ ਨਭ ਮੰਡਲ ਰੀਝ ਰਹਿਯੋ ਹੈ ॥੫੧੭॥

रीझ रही पृथमी पृथमी गन अउ नभ मंडल रीझ रहियो है ॥५१७॥

reejh rahee pirathamee pirathamee gan aau nabh ma(n)ddal reejh rahiyo hai ||517||


ਗਾਵਤ ਏਕ ਬਜਾਵਤ ਤਾਲ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰਿ ਮਹਾ ਹਿਤ ਸੋ ॥

गावत एक बजावत ताल सभै बृज नारि महा हित सो ॥

gaavat ek bajaavat taal sabhai biraj naar mahaa hit so ||

ਭਗਵਾਨ ਕੋ ਮਾਨਿ ਕਹਿਯੋ ਤਬ ਹੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਚਿਤ ਸੋ ॥

भगवान को मानि कहियो तब ही कबि स्याम कहै अति ही चित सो ॥

bhagavaan ko maan kahiyo tab hee kab sayaam kahai at hee chit so ||

ਇਨ ਸੀਖ ਲਈ ਗਤਿ ਗਾਮਨ ਤੇ ਸੁਰ ਭਾਮਨ ਤੇ ਕਿ ਕਿਧੋ ਕਿਤ ਸੋ ॥

इन सीख लई गति गामन ते सुर भामन ते कि किधो कित सो ॥

ein seekh liee gat gaaman te sur bhaaman te k kidho kit so ||

ਅਬ ਮੋਹਿ ਇਹੈ ਸਮਝਿਯੋ ਸੁ ਪਰੈ ਜਿਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸਿਖੇ ਇਨ ਹੂੰ ਤਿਤ ਸੋ ॥੫੧੮॥

अब मोहि इहै समझियो सु परै जिह कान्रह सिखे इन हूँ तित सो ॥५१८॥

ab moh ihai samajhiyo su parai jeh kaanreh sikhe in hoo(n) tit so ||518||


ਮੋਰ ਕੋ ਪੰਖ ਬਿਰਾਜਤ ਸੀਸ ਸੁ ਰਾਜਤ ਕੁੰਡਲ ਕਾਨਨ ਦੋਊ ॥

मोर को पंख बिराजत सीस सु राजत कुँडल कानन दोऊ ॥

mor ko pa(n)kh biraajat sees su raajat ku(n)ddal kaanan dhouoo ||

ਲਾਲ ਕੀ ਮਾਲ ਸੁ ਛਾਜਤ ਕੰਠਹਿ ਤਾ ਉਪਮਾ ਸਮ ਹੈ ਨਹਿ ਕੋਊ ॥

लाल की माल सु छाजत कंठहि ता उपमा सम है नहि कोऊ ॥

laal kee maal su chhaajat ka(n)Theh taa upamaa sam hai neh kouoo ||

ਜੋ ਰਿਪੁ ਪੈ ਮਗ ਜਾਤ ਚਲਿਯੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਉਪਮਾ ਚਲਿ ਦੇਖਤ ਓਊ ॥

जो रिपु पै मग जात चलियो सुनि कै उपमा चलि देखत ओऊ ॥

jo rip pai mag jaat chaliyo sun kai upamaa chal dhekhat ouoo ||

ਅਉਰ ਕੀ ਬਾਤ ਕਹਾ ਕਹੀਯੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਰਾਦਿਕ ਰੀਝਤ ਸੋਊ ॥੫੧੯॥

अउर की बात कहा कहीयै कबि स्याम सुरादिक रीझत सोऊ ॥५१९॥

aaur kee baat kahaa kaheeyai kab sayaam suraadhik reejhat souoo ||519||


ਗੋਪਿਨ ਸੰਗ ਤਹਾ ਭਗਵਾਨ ਮਨੈ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਕੋ ਕਰ ਗਾਵੈ ॥

गोपिन संग तहा भगवान मनै अति ही हित को कर गावै ॥

gopin sa(n)g tahaa bhagavaan manai at hee hit ko kar gaavai ||

ਰੀਝ ਰਹੈ ਖਗ ਠਉਰ ਸਮੇਤ ਸੁ ਯਾ ਬਿਧਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਰਿਝਾਵੈ ॥

रीझ रहै खग ठउर समेत सु या बिधि ग्वारिन कान्रह रिझावै ॥

reejh rahai khag Thaur samet su yaa bidh gavaiaarin kaanreh rijhaavai ||

ਜਾ ਕਹੁ ਖੋਜਿ ਕਈ ਗਣ ਗੰਧ੍ਰਬ ਕਿੰਨਰ ਭੇਦ ਨ ਰੰਚਕ ਪਾਵੈ ॥

जा कहु खोजि कई गण गंध्रब किंनर भेद न रंचक पावै ॥

jaa kahu khoj kiee gan ga(n)dhrab ki(n)nar bhedh na ra(n)chak paavai ||

ਗਾਵਤ ਸੋ ਹਰਿ ਜੂ ਤਿਹ ਜਾ ਤਜ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਚਲਿ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗ ਆਵੈ ॥੫੨੦॥

गावत सो हरि जू तिह जा तज कै मृगनी चलि कै मृग आवै ॥५२०॥

gaavat so har joo teh jaa taj kai miraganee chal kai mirag aavai ||520||


ਗਾਵਤ ਸਾਰੰਗ ਸੁਧ ਮਲਾਰ ਬਿਭਾਸ ਬਿਲਾਵਲ ਅਉ ਫੁਨਿ ਗਉਰੀ ॥

गावत सारंग सुध मलार बिभास बिलावल अउ फुनि गउरी ॥

gaavat saara(n)g sudh malaar bibhaas bilaaval aau fun gauree ||

ਜਾ ਸੁਰ ਸ੍ਰੋਨਨ ਮੈ ਸੁਨ ਕੈ ਸੁਰ ਭਾਮਿਨ ਧਾਵਤ ਡਾਰਿ ਪਿਛਉਰੀ ॥

जा सुर स्रोनन मै सुन कै सुर भामिन धावत डारि पिछउरी ॥

jaa sur sronan mai sun kai sur bhaamin dhaavat ddaar pichhauree ||

ਸੋ ਸੁਨ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਰਸ ਕੈ ਸੰਗ ਹੋਇ ਗਈ ਜਨੁ ਬਉਰੀ ॥

सो सुन कै सभ ग्वारनिया रस कै संग होइ गई जनु बउरी ॥

so sun kai sabh gavaiaaraniyaa ras kai sa(n)g hoi giee jan bauree ||

ਤਿਆਗ ਕੈ ਕਾਨਨ ਤਾ ਸੁਨ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗ ਲੈ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਚਲਿ ਆਵਤ ਦਉਰੀ ॥੫੨੧॥

तिआग कै कानन ता सुन कै मृग लै मृगनी चलि आवत दउरी ॥५२१॥

tiaag kai kaanan taa sun kai mirag lai miraganee chal aavat dhauree ||521||


ਏਕ ਨਚੈ ਇਕ ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਬਜਾਵਤ ਤਾਲ ਦਿਖਾਵਤ ਭਾਵਨ ॥

एक नचै इक गावत गीत बजावत ताल दिखावत भावन ॥

ek nachai ik gaavat geet bajaavat taal dhikhaavat bhaavan ||

ਰਾਸ ਬਿਖੈ ਅਤਿ ਹੀ ਰਸ ਸੋ ਸੁ ਰਿਝਾਵਨ ਕਾਜ ਸਭੈ ਮਨ ਭਾਵਨਿ ॥

रास बिखै अति ही रस सो सु रिझावन काज सभै मन भावनि ॥

raas bikhai at hee ras so su rijhaavan kaaj sabhai man bhaavan ||

ਚਾਦਨੀ ਸੁੰਦਰ ਰਾਤਿ ਬਿਖੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸੁ ਬਿਖੈ ਰੁਤ ਸਾਵਨ ॥

चादनी सुँदर राति बिखै कबि स्याम कहै सु बिखै रुत सावन ॥

chaadhanee su(n)dhar raat bikhai kab sayaam kahai su bikhai rut saavan ||

ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਤਜਿ ਕੈ ਪੁਰ ਕੋ ਮਿਲਿ ਖੇਲਿ ਕਰੈ ਰਸ ਨੀਕਨਿ ਠਾਵਨ ॥੫੨੨॥

ग्वारनिया तजि कै पुर को मिलि खेलि करै रस नीकनि ठावन ॥५२२॥

gavaiaaraniyaa taj kai pur ko mil khel karai ras neekan Thaavan ||522||


ਸੁੰਦਰ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਿਲਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਖੇਲ ਕਰਿਯੋ ਹੈ ॥

सुँदर ठउर बिखै कबि स्याम कहै मिलि ग्वारिन खेल करियो है ॥

su(n)dhar Thaur bikhai kab sayaam kahai mil gavaiaarin khel kariyo hai ||

ਮਾਨਹੁ ਆਪ ਹੀ ਤੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਸੁਰ ਮੰਡਲ ਸੁਧਿ ਬਨਾਇ ਧਰਿਯੋ ਹੈ ॥

मानहु आप ही ते ब्रहमा सुर मंडल सुधि बनाइ धरियो है ॥

maanahu aap hee te brahamaa sur ma(n)ddal sudh banai dhariyo hai ||

ਜਾ ਪਿਖ ਕੇ ਖਗ ਰੀਝ ਰਹੈ ਮ੍ਰਿਗ ਤਿਆਗ ਤਿਸੈ ਨਹੀ ਚਾਰੋ ਚਰਿਯੋ ਹੈ ॥

जा पिख के खग रीझ रहै मृग तिआग तिसै नही चारो चरियो है ॥

jaa pikh ke khag reejh rahai mirag tiaag tisai nahee chaaro chariyo hai ||

ਅਉਰ ਕੀ ਬਾਤ ਕਹਾ ਕਹੀਯੇ ਜਿਹ ਕੇ ਪਿਖਏ ਭਗਵਾਨ ਛਰਿਯੋ ਹੈ ॥੫੨੩॥

अउर की बात कहा कहीये जिह के पिखए भगवान छरियो है ॥५२३॥

aaur kee baat kahaa kaheeye jeh ke pikhe bhagavaan chhariyo hai ||523||


ਇਤ ਤੇ ਨੰਦਲਾਲ ਸਖਾ ਲੀਏ ਸੰਗਿ ਉਤੈ ਫੁਨਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਜੂਥ ਸਬੈ ॥

इत ते नंदलाल सखा लीए संगि उतै फुनि ग्वारिन जूथ सबै ॥

eit te na(n)dhalaal sakhaa le'ee sa(n)g utai fun gavaiaarin jooth sabai ||

ਬਹਸਾ ਬਹਸੀ ਤਹ ਹੋਨ ਲਗੀ ਰਸ ਬਾਤਨ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਤਬੈ ॥

बहसा बहसी तह होन लगी रस बातन सो कबि स्याम तबै ॥

bahasaa bahasee teh hon lagee ras baatan so kab sayaam tabai ||

ਜਿਹ ਕੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਨਹੀ ਅੰਤ ਲਖੈ ਨਹ ਨਾਰਦ ਪਾਵਤ ਜਾਹਿ ਛਬੈ ॥

जिह को ब्रहमा नही अंत लखै नह नारद पावत जाहि छबै ॥

jeh ko brahamaa nahee a(n)t lakhai neh naaradh paavat jaeh chhabai ||

ਮ੍ਰਿਗ ਜਿਉ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਮਹਿ ਰਾਜਤ ਹੈ ਹਰਿ ਤਿਉ ਗਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਬੀਚ ਫਬੈ ॥੫੨੪॥

मृग जिउ मृगनी महि राजत है हरि तिउ गन ग्वारिन बीच फबै ॥५२४॥

mirag jiau miraganee meh raajat hai har tiau gan gavaiaarin beech fabai ||524||


ਨੰਦ ਲਾਲ ਲਲਾ ਇਤ ਗਾਵਤ ਹੈ ਉਤ ਤੇ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਮਿਲਿ ਗਾਵੈ ॥

नंद लाल लला इत गावत है उत ते सभ ग्वारनिया मिलि गावै ॥

na(n)dh laal lalaa it gaavat hai ut te sabh gavaiaaraniyaa mil gaavai ||

ਫਾਗੁਨ ਕੀ ਰੁਤਿ ਊਪਰਿ ਆਬਨ ਮਾਨਹੁ ਕੋਕਿਲਕਾ ਕੁਕਹਾਵੈ ॥

फागुन की रुति ऊपरि आबन मानहु कोकिलका कुकहावै ॥

faagun kee rut uoopar aaban maanahu kokilakaa kukahaavai ||

ਤੀਰ ਨਦੀ ਸੋਊ ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਜੋਊ ਉਨ ਕੇ ਮਨ ਭੀਤਰ ਭਾਵੈ ॥

तीर नदी सोऊ गावत गीत जोऊ उन के मन भीतर भावै ॥

teer nadhee souoo gaavat geet jouoo un ke man bheetar bhaavai ||

ਨੈਨ ਨਛਤ੍ਰ ਪਸਾਰਿ ਪਿਖੈ ਸੁਰ ਦੇਵ ਬਧੂ ਮਿਲਿ ਦੇਖਨਿ ਆਵੈ ॥੫੨੫॥

नैन नछत्र पसारि पिखै सुर देव बधू मिलि देखनि आवै ॥५२५॥

nain nachhatr pasaar pikhai sur dhev badhoo mil dhekhan aavai ||525||


ਮੰਡਲ ਰਾਸ ਬਚਿਤ੍ਰ ਮਹਾ ਸਮ ਜੇ ਹਰਿ ਕੀ ਭਗਵਾਨ ਰਚਿਯੋ ਹੈ ॥

मंडल रास बचित्र महा सम जे हरि की भगवान रचियो है ॥

ma(n)ddal raas bachitr mahaa sam je har kee bhagavaan rachiyo hai ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਬੀਚ ਕਹੈ ਕਬਿ ਇਉ ਰਸ ਕੰਚਨ ਕੀ ਸਮਤੁਲਿ ਮਚਿਯੋ ਹੈ ॥

ताही के बीच कहै कबि इउ रस कंचन की समतुलि मचियो है ॥

taahee ke beech kahai kab iau ras ka(n)chan kee samatul machiyo hai ||

ਤਾ ਸੀ ਬਨਾਇਬੇ ਕੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਨ ਬਨੀ ਕਰਿ ਕੈ ਜੁਗ ਕੋਟਿ ਪਚਿਯੋ ਹੈ ॥

ता सी बनाइबे को ब्रहमा न बनी करि कै जुग कोटि पचियो है ॥

taa see banaibe ko brahamaa na banee kar kai jug koT pachiyo hai ||

ਕੰਚਨ ਕੇ ਤਨਿ ਗੋਪਨਿ ਕੋ ਤਿਹ ਮਧਿ ਮਨੀ ਮਨ ਤੁਲਿ ਗਚਿਯੋ ਹੈ ॥੫੨੬॥

कंचन के तनि गोपनि को तिह मधि मनी मन तुलि गचियो है ॥५२६॥

ka(n)chan ke tan gopan ko teh madh manee man tul gachiyo hai ||526||


ਜਲ ਮੈ ਸਫਰੀ ਜਿਮ ਕੇਲ ਕਰੈ ਤਿਮ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਹਰਿ ਕੇ ਸੰਗਿ ਡੋਲੈ ॥

जल मै सफरी जिम केल करै तिम ग्वारनिया हरि के संगि डोलै ॥

jal mai safaree jim kel karai tim gavaiaaraniyaa har ke sa(n)g ddolai ||

ਜਿਉ ਜਨ ਫਾਗ ਕੋ ਖੇਲਤ ਹੈ ਤਿਹ ਭਾਤਿ ਹੀ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਸਾਥ ਕਲੋਲੈ ॥

जिउ जन फाग को खेलत है तिह भाति ही कान्रह के साथ कलोलै ॥

jiau jan faag ko khelat hai teh bhaat hee kaanreh ke saath kalolai ||

ਕੋਕਿਲਕਾ ਜਿਮ ਬੋਲਤ ਹੈ ਤਿਮ ਗਾਵਤ ਤਾ ਕੀ ਬਰਾਬਰ ਬੋਲੈ ॥

कोकिलका जिम बोलत है तिम गावत ता की बराबर बोलै ॥

kokilakaa jim bolat hai tim gaavat taa kee baraabar bolai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਇਹ ਭਾਤਨ ਸੋ ਰਸ ਕਾਨ੍ਰਹਿ ਨਿਚੋਲੈ ॥੫੨੭॥

स्याम कहै सभ ग्वारनिया इह भातन सो रस कान्रहि निचोलै ॥५२७॥

sayaam kahai sabh gavaiaaraniyaa ieh bhaatan so ras kaanreh nicholai ||527||


ਰਸ ਕੀ ਚਰਚਾ ਤਿਨ ਸੋ ਭਗਵਾਨ ਕਰੀ ਹਿਤ ਸੋ ਨ ਕਛੂ ਕਮ ਕੈ ॥

रस की चरचा तिन सो भगवान करी हित सो न कछू कम कै ॥

ras kee charachaa tin so bhagavaan karee hit so na kachhoo kam kai ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤੁਮਰੇ ਮਾਹਿ ਖੇਲ ਬਨਿਓ ਹਮ ਕੈ ॥

इह भाति कहियो कबि स्याम कहै तुमरे माहि खेल बनिओ हम कै ॥

eeh bhaat kahiyo kab sayaam kahai tumare maeh khel banio ham kai ||

ਕਹਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਦੀਯੋ ਹਸਿ ਕੈ ਸੁ ਪ੍ਰਭਾ ਸੁਭ ਦੰਤਨ ਯੌ ਦਮਕੈ ॥

कहि कै इह बात दीयो हसि कै सु प्रभा सुभ दंतन यौ दमकै ॥

keh kai ieh baat dheeyo has kai su prabhaa subh dha(n)tan yau dhamakai ||

ਜਨੁ ਦਿਉਸ ਭਲੇ ਰੁਤਿ ਸਾਵਨ ਕੀ ਅਤਿ ਅਭ੍ਰਨ ਮੈ ਚਪਲਾ ਚਮਕੈ ॥੫੨੮॥

जनु दिउस भले रुति सावन की अति अभ्रन मै चपला चमकै ॥५२८॥

jan dhiaus bhale rut saavan kee at abhran mai chapalaa chamakai ||528||


ਐਹੋ ਲਲਾ ਨੰਦ ਲਾਲ ਕਹੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਅਤਿ ਮੈਨ ਭਰੀ ॥

ऐहो लला नंद लाल कहै सभ ग्वारनिया अति मैन भरी ॥

aaiho lalaa na(n)dh laal kahai sabh gavaiaaraniyaa at main bharee ||

ਹਮਰੇ ਸੰਗ ਆਵਹੁ ਖੇਲ ਕਰੋ ਨ ਕਛੂ ਮਨ ਭੀਤਰ ਸੰਕ ਕਰੀ ॥

हमरे संग आवहु खेल करो न कछू मन भीतर संक करी ॥

hamare sa(n)g aavahu khel karo na kachhoo man bheetar sa(n)k karee ||

ਨੈਨ ਨਚਾਇ ਕਛੂ ਮੁਸਕਾਇ ਕੈ ਭਉਹ ਦੁਊ ਕਰਿ ਟੇਢਿ ਧਰੀ ॥

नैन नचाइ कछू मुसकाइ कै भउह दुऊ करि टेढि धरी ॥

nain nachai kachhoo musakai kai bhauh dhauoo kar Tedd dharee ||

ਮਨ ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਰਸ ਕੀ ਮਨੋ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਕੰਠਹਿ ਫਾਸਿ ਡਰੀ ॥੫੨੯॥

मन यौ उपजी उपमा रस की मनो कान्रह के कंठहि फासि डरी ॥५२९॥

man yau upajee upamaa ras kee mano kaanreh ke ka(n)Theh faas ddaree ||529||


ਖੇਲਤ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਮਧਿ ਸੋਊ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਜੂ ਛਬਿ ਵਾਰੋ ॥

खेलत ग्वारिन मधि सोऊ कबि स्याम कहै हरि जू छबि वारो ॥

khelat gavaiaarin madh souoo kab sayaam kahai har joo chhab vaaro ||

ਖੇਲਤ ਹੈ ਸੋਊ ਮੈਨ ਭਰੀ ਇਨ ਹੂੰ ਪਰ ਮਾਨਹੁ ਚੇਟਕ ਡਾਰੋ ॥

खेलत है सोऊ मैन भरी इन हूँ पर मानहु चेटक डारो ॥

khelat hai souoo main bharee in hoo(n) par maanahu cheTak ddaaro ||

ਤੀਰ ਨਦੀ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਅਤਿ ਹੋਤ ਹੈ ਸੁੰਦਰ ਭਾਤਿ ਅਖਾਰੋ ॥

तीर नदी बृज भूमि बिखै अति होत है सुँदर भाति अखारो ॥

teer nadhee biraj bhoom bikhai at hot hai su(n)dhar bhaat akhaaro ||

ਰੀਝ ਰਹੈ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਕੇ ਸਭੈ ਜਨ ਰੀਝ ਰਹਿਯੋ ਸੁਰ ਮੰਡਲ ਸਾਰੋ ॥੫੩੦॥

रीझ रहै पृथमी के सभै जन रीझ रहियो सुर मंडल सारो ॥५३०॥

reejh rahai pirathamee ke sabhai jan reejh rahiyo sur ma(n)ddal saaro ||530||


ਗਾਵਤ ਏਕ ਨਚੈ ਇਕ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਤਾਰਿਨ ਕਿੰਕਨ ਕੀ ਧੁਨਿ ਬਾਜੈ ॥

गावत एक नचै इक ग्वारनि तारिन किंकन की धुनि बाजै ॥

gaavat ek nachai ik gavaiaaran taarin ki(n)kan kee dhun baajai ||

ਜਿਉ ਮ੍ਰਿਗ ਰਾਜਤ ਬੀਚ ਮ੍ਰਿਗੀ ਹਰਿ ਤਿਉ ਗਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਬੀਚ ਬਿਰਾਜੈ ॥

जिउ मृग राजत बीच मृगी हरि तिउ गन ग्वारिन बीच बिराजै ॥

jiau mirag raajat beech miragee har tiau gan gavaiaarin beech biraajai ||

ਨਾਚਤ ਸੋਊ ਮਹਾ ਹਿਤ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਪ੍ਰਭਾ ਤਿਨ ਕੀ ਇਮ ਛਾਜੈ ॥

नाचत सोऊ महा हित सो कबि स्याम प्रभा तिन की इम छाजै ॥

naachat souoo mahaa hit so kab sayaam prabhaa tin kee im chhaajai ||

ਗਾਇਬ ਪੇਖਿ ਰਿਸੈ ਗਨ ਗੰਧ੍ਰਬ ਨਾਚਬ ਦੇਖਿ ਬਧੂ ਸੁਰ ਲਾਜੈ ॥੫੩੧॥

गाइब पेखि रिसै गन गंध्रब नाचब देखि बधू सुर लाजै ॥५३१॥

gaib pekh risai gan ga(n)dhrab naachab dhekh badhoo sur laajai ||531||


ਰਸ ਕਾਰਨ ਕੋ ਭਗਵਾਨ ਤਹਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਰਸ ਖੇਲ ਕਰਿਯੋ ॥

रस कारन को भगवान तहा कबि स्याम कहै रस खेल करियो ॥

ras kaaran ko bhagavaan tahaa kab sayaam kahai ras khel kariyo ||

ਮਨ ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਹਰਿ ਜੂ ਇਨ ਪੈ ਜਨੁ ਚੇਟਕ ਮੰਤ੍ਰ ਡਰਿਯੋ ॥

मन यौ उपजी उपमा हरि जू इन पै जनु चेटक मंत्र डरियो ॥

man yau upajee upamaa har joo in pai jan cheTak ma(n)tr ddariyo ||

ਪਿਖ ਕੈ ਜਿਹ ਕੋ ਸੁਰ ਅਛ੍ਰਨ ਕੇ ਗਿਰਿ ਬੀਚ ਲਜਾਇ ਬਪੈ ਸੁ ਧਰਿਯੋ ॥

पिख कै जिह को सुर अछ्रन के गिरि बीच लजाइ बपै सु धरियो ॥

pikh kai jeh ko sur achhran ke gir beech lajai bapai su dhariyo ||

ਗੁਪੀਆ ਸੰਗਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਡੋਲਤ ਹੈ ਇਨ ਕੋ ਮਨੂਆ ਜਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹਰਿਯੋ ॥੫੩੨॥

गुपीआ संगि कान्रह के डोलत है इन को मनूआ जब कान्रह हरियो ॥५३२॥

gupeeaa sa(n)g kaanreh ke ddolat hai in ko manooaa jab kaanreh hariyo ||532||


ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਭ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ਹਰਿ ਕੇ ਸੰਗਿ ਡੋਲਤ ਹੈ ਸਭ ਹੂਈਆ ॥

स्याम कहै सभ ही गुपीआ हरि के संगि डोलत है सभ हूईआ ॥

sayaam kahai sabh hee gupeeaa har ke sa(n)g ddolat hai sabh hooieeaa ||

ਗਾਵਤ ਏਕ ਫਿਰੈ ਇਕ ਨਾਚਤ ਏਕ ਫਿਰੈ ਰਸ ਰੰਗ ਅਕੂਈਆ ॥

गावत एक फिरै इक नाचत एक फिरै रस रंग अकूईआ ॥

gaavat ek firai ik naachat ek firai ras ra(n)g akooieeaa ||

ਏਕ ਕਹੈ ਭਗਵਾਨ ਹਰੀ ਇਕ ਲੈ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਪਰੈ ਗਿਰਿ ਭੂਈਆ ॥

एक कहै भगवान हरी इक लै हरि नामु परै गिरि भूईआ ॥

ek kahai bhagavaan haree ik lai har naam parai gir bhooieeaa ||

ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਪਿਖਿ ਚੁੰਮਕ ਲਾਗੀ ਫਿਰੈ ਤਿਹ ਕੇ ਸੰਗ ਸੂਈਆ ॥੫੩੩॥

यौ उपजी उपमा पिखि चुँमक लागी फिरै तिह के संग सूईआ ॥५३३॥

yau upajee upamaa pikh chu(n)mak laagee firai teh ke sa(n)g sooieeaa ||533||


ਸੰਗ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਧ ਰਾਤਿ ਸਮੈ ॥

संग ग्वारिन कान्रह कही हसि कै कबि स्याम कहै अध राति समै ॥

sa(n)g gavaiaarin kaanreh kahee has kai kab sayaam kahai adh raat samai ||

ਹਮ ਹੂੰ ਤੁਮ ਹੂੰ ਤਜਿ ਕੈ ਸਭ ਖੇਲ ਸਭੈ ਮਿਲ ਕੈ ਹਮ ਧਾਮਿ ਰਮੈ ॥

हम हूँ तुम हूँ तजि कै सभ खेल सभै मिल कै हम धामि रमै ॥

ham hoo(n) tum hoo(n) taj kai sabh khel sabhai mil kai ham dhaam ramai ||

ਹਰਿ ਆਇਸੁ ਮਾਨਿ ਚਲੀ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨੀਯਾ ਕਰਿ ਦੂਰ ਗਮੈ ॥

हरि आइसु मानि चली गृह को सभ ग्वारनीया करि दूर गमै ॥

har aais maan chalee gireh ko sabh gavaiaaraneeyaa kar dhoor gamai ||

ਅਬ ਜਾਇ ਟਿਕੈ ਸਭ ਆਸਨ ਮੈ ਕਰਿ ਕੈ ਸਭ ਪ੍ਰਾਤ ਕੀ ਨੇਹ ਤਮੈ ॥੫੩੪॥

अब जाइ टिकै सभ आसन मै करि कै सभ प्रात की नेह तमै ॥५३४॥

ab jai Tikai sabh aasan mai kar kai sabh praat kee neh tamai ||534||


ਹਰਿ ਸੋ ਅਰੁ ਗੋਪਿਨ ਸੰਗਿ ਕਿਧੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਤਿ ਖੇਲ ਭਯੋ ਹੈ ॥

हरि सो अरु गोपिन संगि किधो कबि स्याम कहै अति खेल भयो है ॥

har so ar gopin sa(n)g kidho kab sayaam kahai at khel bhayo hai ||

ਲੈ ਹਰਿ ਜੀ ਤਿਨ ਕੋ ਸੰਗ ਆਪਨ ਤਿਆਗ ਕੈ ਖੇਲ ਕੋ ਧਾਮਿ ਅਯੋ ਹੈ ॥

लै हरि जी तिन को संग आपन तिआग कै खेल को धामि अयो है ॥

lai har jee tin ko sa(n)g aapan tiaag kai khel ko dhaam ayo hai ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪੁਨੇ ਮਨਿ ਚੀਨ ਲਯੋ ਹੈ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने अपुने मनि चीन लयो है ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne apune man cheen layo hai ||

ਕਾਗਜੀਏ ਰਸ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਸੁ ਮਨੋ ਗਨਤੀ ਕਰਿ ਜੋਰੁ ਦਯੋ ਹੈ ॥੫੩੫॥

कागजीए रस को अति ही सु मनो गनती करि जोरु दयो है ॥५३५॥

kaagaje'ee ras ko at hee su mano ganatee kar jor dhayo hai ||535||


ਅਥ ਕਰਿ ਪਕਰ ਖੇਲਬੋ ਕਥਨੰ ॥

अथ करि पकर खेलबो कथनं ॥

ath kar pakar khelabo kathana(n) ||


ਰਾਸ ਮੰਡਲ ॥

रास मंडल ॥

raas ma(n)ddal ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਹਰਿ ਜੂ ਤਜਿ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹ ਧਾਇ ਗਏ ਉਠਿ ਠਉਰ ਕਹਾ ਕੋ ॥

प्रात भए हरि जू तजि कै गृह धाइ गए उठि ठउर कहा को ॥

praat bhe har joo taj kai gireh dhai ge uTh Thaur kahaa ko ||

ਫੂਲ ਰਹੇ ਜਿਹਿ ਫੂਲ ਭਲੀ ਬਿਧਿ ਤੀਰ ਬਹੈ ਜਮੁਨਾ ਸੋ ਤਹਾ ਕੋ ॥

फूल रहे जिहि फूल भली बिधि तीर बहै जमुना सो तहा को ॥

fool rahe jeh fool bhalee bidh teer bahai jamunaa so tahaa ko ||

ਖੇਲਤ ਹੈ ਸੋਊ ਭਾਤਿ ਭਲੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਛੁ ਤ੍ਰਾਸ ਨ ਤਾ ਕੋ ॥

खेलत है सोऊ भाति भली कबि स्याम कहै कछु त्रास न ता को ॥

khelat hai souoo bhaat bhalee kab sayaam kahai kachh traas na taa ko ||

ਸੰਗ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ਮੁਰਲੀ ਸੋਊ ਗਊਅਨ ਕੇ ਮਿਸ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਕੋ ॥੫੩੬॥

संग बजावत है मुरली सोऊ गऊअन के मिस ग्वारनिया को ॥५३६॥

sa(n)g bajaavat hai muralee souoo guooan ke mis gavaiaaraniyaa ko ||536||


ਰਾਸ ਕਥਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸੁਨ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਸੋਊ ਧਾਈ ॥

रास कथा कबि स्याम कहै सुन कै बृखभानु सुता सोऊ धाई ॥

raas kathaa kab sayaam kahai sun kai birakhabhaan sutaa souoo dhaiee ||

ਜਾ ਮੁਖ ਸੁਧ ਨਿਸਾਪਤਿ ਸੋ ਜਿਹ ਕੇ ਤਨ ਕੰਚਨ ਸੀ ਛਬਿ ਛਾਈ ॥

जा मुख सुध निसापति सो जिह के तन कंचन सी छबि छाई ॥

jaa mukh sudh nisaapat so jeh ke tan ka(n)chan see chhab chhaiee ||

ਜਾ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾ ਕਬਿ ਦੇਤ ਸਭੈ ਸੋਊ ਤਾ ਮੈ ਰਜੈ ਬਰਨੀ ਨਹਿ ਜਾਈ ॥

जा की प्रभा कबि देत सभै सोऊ ता मै रजै बरनी नहि जाई ॥

jaa kee prabhaa kab dhet sabhai souoo taa mai rajai baranee neh jaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਸੋਭ ਸੁ ਗੋਪਿਨ ਤੇ ਸੁਨਿ ਕੈ ਤਰੁਨੀ ਹਰਨੀ ਜਿਮ ਧਾਈ ॥੫੩੭॥

स्याम की सोभ सु गोपिन ते सुनि कै तरुनी हरनी जिम धाई ॥५३७॥

sayaam kee sobh su gopin te sun kai tarunee haranee jim dhaiee ||537||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਸੇਤ ਧਰੇ ਸਾਰੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਕੀ ਕੁਮਾਰੀ ਜਸ ਹੀ ਕੀ ਮਨੋ ਬਾਰੀ ਐਸੀ ਰਚੀ ਹੈ ਨ ਕੋ ਦਈ ॥

सेत धरे सारी बृखभानु की कुमारी जस ही की मनो बारी ऐसी रची है न को दई ॥

set dhare saaree birakhabhaan kee kumaaree jas hee kee mano baaree aaisee rachee hai na ko dhiee ||

ਰੰਭਾ ਉਰਬਸੀ ਅਉਰ ਸਚੀ ਸੁ ਮਦੋਦਰੀ ਪੈ ਐਸੀ ਪ੍ਰਭਾ ਕਾ ਕੀ ਜਗ ਬੀਚ ਨ ਕਛੂ ਭਈ ॥

रंभा उरबसी अउर सची सु मदोदरी पै ऐसी प्रभा का की जग बीच न कछू भई ॥

ra(n)bhaa urabasee aaur sachee su madhodharee pai aaisee prabhaa kaa kee jag beech na kachhoo bhiee ||

ਮੋਤਿਨ ਕੇ ਹਾਰ ਗਰੇ ਡਾਰਿ ਰੁਚਿ ਸੋ ਸੁਧਾਰ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਪੈ ਚਲੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਰਸ ਕੇ ਲਈ ॥

मोतिन के हार गरे डारि रुचि सो सुधार कान्रह जू पै चली कबि स्याम रस के लई ॥

motin ke haar gare ddaar ruch so sudhaar kaanreh joo pai chalee kab sayaam ras ke liee ||

ਸੇਤੈ ਸਾਜ ਸਾਜਿ ਚਲੀ ਸਾਵਰੇ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕਾਜ ਚਾਦਨੀ ਮੈ ਰਾਧਾ ਮਾਨੋ ਚਾਦਨੀ ਸੀ ਹ੍ਵੈ ਗਈ ॥੫੩੮॥

सेतै साज साजि चली सावरे की प्रीति काज चादनी मै राधा मानो चादनी सी ह्वै गई ॥५३८॥

setai saaj saaj chalee saavare kee preet kaaj chaadhanee mai raadhaa maano chaadhanee see havai giee ||538||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅੰਜਨ ਆਡਿ ਸੁ ਧਾਰ ਭਲੇ ਪਟ ਭੂਖਨ ਅੰਗ ਸੁ ਧਾਰ ਚਲੀ ॥

अंजन आडि सु धार भले पट भूखन अंग सु धार चली ॥

a(n)jan aadd su dhaar bhale paT bhookhan a(n)g su dhaar chalee ||

ਜਨੁ ਦੂਸਰ ਚੰਦ੍ਰਕਲਾ ਪ੍ਰਗਟੀ ਜਨੁ ਰਾਜਤ ਕੰਜ ਕੀ ਸੇਤ ਕਲੀ ॥

जनु दूसर चंद्रकला प्रगटी जनु राजत कंज की सेत कली ॥

jan dhoosar cha(n)dhrakalaa pragaTee jan raajat ka(n)j kee set kalee ||

ਹਰਿ ਕੇ ਪਗ ਭੇਟਨ ਕਾਜ ਚਲੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸੰਗ ਰਾਧੇ ਅਲੀ ॥

हरि के पग भेटन काज चली कबि स्याम कहै संग राधे अली ॥

har ke pag bheTan kaaj chalee kab sayaam kahai sa(n)g raadhe alee ||

ਜਨੁ ਜੋਤਿ ਤ੍ਰਿਯਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਤੇ ਇਹ ਚੰਦ ਕੀ ਚਾਦਨੀ ਬਾਲੀ ਭਲੀ ॥੫੩੯॥

जनु जोति तृयन ग्वारिन ते इह चंद की चादनी बाली भली ॥५३९॥

jan jot tirayan gavaiaarin te ieh cha(n)dh kee chaadhanee baalee bhalee ||539||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ਪ੍ਰੀਤਿ ਬਢੀ ਤਿਹ ਕੀ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਨਹਿ ਨੈਕੁ ਘਟੀ ਹੈ ॥

कान्रह सो प्रीति बढी तिह की मन मै अति ही नहि नैकु घटी है ॥

kaanreh so preet baddee teh kee man mai at hee neh naik ghaTee hai ||

ਰੂਪ ਸਚੀ ਅਰੁ ਪੈ ਰਤਿ ਤੈ ਮਨ ਤ੍ਰੀਯਨ ਤੇ ਨਹਿ ਨੈਕੁ ਲਟੀ ਹੈ ॥

रूप सची अरु पै रति तै मन त्रीयन ते नहि नैकु लटी है ॥

roop sachee ar pai rat tai man treeyan te neh naik laTee hai ||

ਰਾਸ ਮੈ ਖੇਲਨਿ ਕਾਜ ਚਲੀ ਸਜਿ ਸਾਜਿ ਸਭੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨਟੀ ਹੈ ॥

रास मै खेलनि काज चली सजि साजि सभै कबि स्याम नटी है ॥

raas mai khelan kaaj chalee saj saaj sabhai kab sayaam naTee hai ||

ਸੁੰਦਰ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੈ ਘਨ ਮੈ ਮਨੋ ਰਾਧਿਕਾ ਚੰਦ੍ਰਕਲਾ ਪ੍ਰਗਟੀ ਹੈ ॥੫੪੦॥

सुँदर ग्वारिन कै घन मै मनो राधिका चंद्रकला प्रगटी है ॥५४०॥

su(n)dhar gavaiaarin kai ghan mai mano raadhikaa cha(n)dhrakalaa pragaTee hai ||540||


ਬ੍ਰਹਮਾ ਪਿਖਿ ਕੈ ਜਿਹ ਰੀਝ ਰਹਿਓ ਜਿਹ ਕੋ ਦਿਖ ਕੈ ਸਿਵ ਧ੍ਯਾਨ ਛੁਟਾ ਹੈ ॥

ब्रहमा पिखि कै जिह रीझ रहिओ जिह को दिख कै सिव ध्यान छुटा है ॥

brahamaa pikh kai jeh reejh rahio jeh ko dhikh kai siv dhayaan chhuTaa hai ||

ਜਾ ਨਿਰਖੇ ਰਤਿ ਰੀਝ ਰਹੀ ਰਤਿ ਕੇ ਪਤਿ ਕੋ ਪਿਖਿ ਮਾਨ ਟੁਟਾ ਹੈ ॥

जा निरखे रति रीझ रही रति के पति को पिखि मान टुटा है ॥

jaa nirakhe rat reejh rahee rat ke pat ko pikh maan TuTaa hai ||

ਕੋਕਿਲ ਕੰਠ ਚੁਰਾਇ ਲੀਯੋ ਜਿਨਿ ਭਾਵਨ ਕੋ ਸਭ ਭਾਵ ਲੁਟਾ ਹੈ ॥

कोकिल कंठ चुराइ लीयो जिनि भावन को सभ भाव लुटा है ॥

kokil ka(n)Th churai leeyo jin bhaavan ko sabh bhaav luTaa hai ||

ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੇ ਘਨ ਬੀਚ ਬਿਰਾਜਤ ਰਾਧਿਕਾ ਮਾਨਹੁ ਬਿਜੁ ਛਟਾ ਹੈ ॥੫੪੧॥

ग्वारिन के घन बीच बिराजत राधिका मानहु बिजु छटा है ॥५४१॥

gavaiaarin ke ghan beech biraajat raadhikaa maanahu bij chhaTaa hai ||541||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਪੂਜਨ ਪਾਇ ਚਲੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਸਭ ਸਾਜ ਸਜੈ ॥

कान्रह के पूजन पाइ चली बृखभानु सुता सभ साज सजै ॥

kaanreh ke poojan pai chalee birakhabhaan sutaa sabh saaj sajai ||

ਜਿਹ ਕੋ ਪਿਖ ਕੈ ਮਨਿ ਮੋਹਿ ਰਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਦੁਤਿ ਸੀਸ ਰਜੈ ॥

जिह को पिख कै मनि मोहि रहै कबि स्याम कहै दुति सीस रजै ॥

jeh ko pikh kai man moh rahai kab sayaam kahai dhut sees rajai ||

ਜਿਨ ਅੰਗ ਪ੍ਰਭਾ ਕਬਿ ਦੇਤ ਸਭੈ ਸੋਊ ਅੰਗ ਧਰੇ ਤ੍ਰਿਯ ਰਾਜ ਛਜੈ ॥

जिन अंग प्रभा कबि देत सभै सोऊ अंग धरे तृय राज छजै ॥

jin a(n)g prabhaa kab dhet sabhai souoo a(n)g dhare tiray raaj chhajai ||

ਜਿਹ ਕੋ ਪਿਖਿ ਕੰਦ੍ਰਪ ਰੀਝ ਰਹੈ ਜਿਹ ਕੋ ਦਿਖਿ ਚਾਦਨੀ ਚੰਦ ਲਜੈ ॥੫੪੨॥

जिह को पिखि कंद्रप रीझ रहै जिह को दिखि चादनी चंद लजै ॥५४२॥

jeh ko pikh ka(n)dhrap reejh rahai jeh ko dhikh chaadhanee cha(n)dh lajai ||542||


ਸਿਤ ਸੁੰਦਰੁ ਸਾਜ ਸਭੈ ਸਜਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਨੀ ॥

सित सुँदरु साज सभै सजि कै बृखभान सुता इह भाति बनी ॥

sit su(n)dhar saaj sabhai saj kai birakhabhaan sutaa ieh bhaat banee ||

ਮੁਖ ਰਾਜਤ ਸੁਧ ਨਿਸਾਪਤਿ ਸੋ ਜਿਹ ਮੈ ਅਤਿ ਚਾਦਨੀ ਰੂਪ ਘਨੀ ॥

मुख राजत सुध निसापति सो जिह मै अति चादनी रूप घनी ॥

mukh raajat sudh nisaapat so jeh mai at chaadhanee roop ghanee ||

ਰਸ ਕੋ ਕਰਿ ਰਾਧਿਕਾ ਕੋਪ ਚਲੀ ਮਨੋ ਸਾਜ ਸੋ ਸਾਜ ਕੈ ਮੈਨ ਅਨੀ ॥

रस को करि राधिका कोप चली मनो साज सो साज कै मैन अनी ॥

ras ko kar raadhikaa kop chalee mano saaj so saaj kai main anee ||

ਤਿਹ ਪੇਖਿ ਭਏ ਭਗਵਾਨ ਖੁਸੀ ਸੋਊ ਤ੍ਰੀਯਨ ਤੇ ਤ੍ਰਿਯ ਰਾਜ ਗਨੀ ॥੫੪੩॥

तिह पेखि भए भगवान खुसी सोऊ त्रीयन ते तृय राज गनी ॥५४३॥

teh pekh bhe bhagavaan khusee souoo treeyan te tiray raaj ganee ||543||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ॥

राधे बाच गोपिन सो ॥

raadhe baach gopin so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਹਰਿ ਪੇਖਿ ਹਸੀ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਸੰਗ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੈ ॥

बृखभानु सुता हरि पेखि हसी इह भाति कहियो संग ग्वारिन कै ॥

birakhabhaan sutaa har pekh hasee ieh bhaat kahiyo sa(n)g gavaiaarin kai ||

ਸਮ ਦਾਰਿਮ ਦਾਤ ਨਿਕਾਸ ਕਿਧੋ ਸਮ ਚੰਦ ਮੁਖੀ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਰਨ ਕੈ ॥

सम दारिम दात निकास किधो सम चंद मुखी बृज बारन कै ॥

sam dhaarim dhaat nikaas kidho sam cha(n)dh mukhee biraj baaran kai ||

ਹਮ ਅਉ ਹਰਿ ਜੀ ਅਤਿ ਹੋਡ ਪਰੀ ਰਸ ਹੀ ਕੇ ਸੁ ਬੀਚ ਮਹਾ ਰਨ ਕੈ ॥

हम अउ हरि जी अति होड परी रस ही के सु बीच महा रन कै ॥

ham aau har jee at hodd paree ras hee ke su beech mahaa ran kai ||

ਤਜਿ ਕੇ ਸਭ ਸੰਕਿ ਨਿਸੰਕ ਭਿਰੋ ਸੰਗ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਹਸਿ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੈ ॥੫੪੪॥

तजि के सभ संकि निसंक भिरो संग ऐसे कहियो हसि ग्वारिन कै ॥५४४॥

taj ke sabh sa(n)k nisa(n)k bhiro sa(n)g aaise kahiyo has gavaiaarin kai ||544||


ਹਸਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਸੰਗ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਜਈ ॥

हसि बात कही संग गोपिन के कबि स्याम कहै बृखभानु जई ॥

has baat kahee sa(n)g gopin ke kab sayaam kahai birakhabhaan jiee ||

ਮਨੋ ਆਪ ਹੀ ਤੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਸੁ ਰਚੀ ਰੁਚਿ ਸੋ ਇਹ ਰੂਪ ਅਨੂਪ ਮਈ ॥

मनो आप ही ते ब्रहमा सु रची रुचि सो इह रूप अनूप मई ॥

mano aap hee te brahamaa su rachee ruch so ieh roop anoop miee ||

ਹਰਿ ਕੋ ਪਿਖਿ ਕੈ ਨਿਹੁਰਾਇ ਗਈ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਕਬਿ ਭਾਖ ਦਈ ॥

हरि को पिखि कै निहुराइ गई उपमा तिह की कबि भाख दई ॥

har ko pikh kai nihurai giee upamaa teh kee kab bhaakh dhiee ||

ਮਨੋ ਜੋਬਨ ਭਾਰ ਸਹਿਯੋ ਨ ਗਯੋ ਤਿਹ ਤੇ ਬ੍ਰਿਜ ਭਾਮਿਨਿ ਨੀਚਿ ਭਈ ॥੫੪੫॥

मनो जोबन भार सहियो न गयो तिह ते बृज भामिनि नीचि भई ॥५४५॥

mano joban bhaar sahiyo na gayo teh te biraj bhaamin neech bhiee ||545||


ਸਭ ਹੀ ਮਿਲਿ ਰਾਸ ਕੋ ਖੇਲ ਕਰੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਨਿਯਾ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਤੇ ॥

सभ ही मिलि रास को खेल करै सभ ग्वारनिया अति ही हित ते ॥

sabh hee mil raas ko khel karai sabh gavaiaaraniyaa at hee hit te ||

ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਸੁਭ ਸਾਜ ਸਜੇ ਸੁ ਬਿਰਾਜਤ ਸਾਜ ਸਭੈ ਸਿਤ ਤੇ ॥

बृखभानु सुता सुभ साज सजे सु बिराजत साज सभै सित ते ॥

birakhabhaan sutaa subh saaj saje su biraajat saaj sabhai sit te ||

ਫੁਨਿ ਊਚ ਪ੍ਰਭਾ ਅਤਿ ਹੀ ਤਿਨ ਕੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਚਾਰ ਕਹੀ ਚਿਤ ਤੇ ॥

फुनि ऊच प्रभा अति ही तिन की कबि स्याम बिचार कही चित ते ॥

fun uooch prabhaa at hee tin kee kab sayaam bichaar kahee chit te ||

ਉਤ ਤੇ ਘਨਸ੍ਯਾਮ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਹਰਿ ਰਾਧਿਕਾ ਬਿਦੁਲਤਾ ਇਤ ਤੇ ॥੫੪੬॥

उत ते घनस्याम बिराजत है हरि राधिका बिदुलता इत ते ॥५४६॥

aut te ghanasayaam biraajat hai har raadhikaa bidhulataa it te ||546||


ਬ੍ਰਿਖਭਾਨੁ ਸੁਤਾ ਤਹਿ ਖੇਲਤ ਰਾਸਿ ਸੁ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਸਖੀਯਾ ਸੰਗ ਲੈ ॥

बृखभानु सुता तहि खेलत रासि सु स्याम कहै सखीया संग लै ॥

birakhabhaan sutaa teh khelat raas su sayaam kahai sakheeyaa sa(n)g lai ||

ਉਤ ਚੰਦ੍ਰ ਭਗਾ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੋ ਤਨ ਚੰਦਨ ਕੇ ਸੰਗ ਲੇਪਹਿ ਕੈ ॥

उत चंद्र भगा सभ ग्वारिन को तन चंदन के संग लेपहि कै ॥

aut cha(n)dhr bhagaa sabh gavaiaarin ko tan cha(n)dhan ke sa(n)g lepeh kai ||

ਜਿਨ ਕੇ ਮ੍ਰਿਗ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਸੁੰਦਰ ਰਾਜਤ ਛਾਜਤ ਗਾਮਨਿ ਪੈ ਜਿਨ ਗੈ ॥

जिन के मृग से दृग सुँदर राजत छाजत गामनि पै जिन गै ॥

jin ke mirag se dhirag su(n)dhar raajat chhaajat gaaman pai jin gai ||

ਮਨਿ ਯੌ ਉਪਜੀ ਉਪਮਾ ਨਹਿ ਚੰਦ ਕੀ ਚਾਦਨੀ ਜੋਬਨ ਵਾਰਨ ਮੈ ॥੫੪੭॥

मनि यौ उपजी उपमा नहि चंद की चादनी जोबन वारन मै ॥५४७॥

man yau upajee upamaa neh cha(n)dh kee chaadhanee joban vaaran mai ||547||


ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਬਾਚ ਰਾਧੇ ਪ੍ਰਤਿ ॥

चंद्रभगा बाच राधे प्रति ॥

cha(n)dhrabhagaa baach raadhe prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਤੀਯਾ ਫੁਨਿ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੀ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਸੋ ॥

बतीया फुनि चंद्रभगा मुख ते इह भाति कही बृखभान सुता सो ॥

bateeyaa fun cha(n)dhrabhagaa mukh te ieh bhaat kahee birakhabhaan sutaa so ||

ਆਵਹੁ ਖੇਲ ਕਰੇ ਹਰਿ ਸੋ ਹਮ ਨਾਹਕ ਖੇਲ ਕਰੋ ਤੁਮ ਕਾ ਸੋ ॥

आवहु खेल करे हरि सो हम नाहक खेल करो तुम का सो ॥

aavahu khel kare har so ham naahak khel karo tum kaa so ||

ਤਾ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਉਪਜੀ ਹੈ ਜੋਊ ਅਪਨੇ ਮਨੂਆ ਸੋ ॥

ता की प्रभा कबि स्याम कहै उपजी है जोऊ अपने मनूआ सो ॥

taa kee prabhaa kab sayaam kahai upajee hai jouoo apane manooaa so ||

ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਜੋਤਿ ਤਰਈਯਨ ਕੀ ਛਪਗੀ ਦੁਤਿ ਰਾਧਿਕਾ ਚੰਦ੍ਰਕਲਾ ਸੋ ॥੫੪੮॥

ग्वारिन जोति तरईयन की छपगी दुति राधिका चंद्रकला सो ॥५४८॥

gavaiaarin jot tarieeyan kee chhapagee dhut raadhikaa cha(n)dhrakalaa so ||548||


ਰਾਧੇ ਬਾਚ ॥

राधे बाच ॥

raadhe baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੁਨਿ ਚੰਦ੍ਰਭਗਾ ਕੀ ਸਭੈ ਬਤੀਯਾ ਬ੍ਰਿਖਭਾਨ ਸੁਤਾ ਤਬ ਐਸੇ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ॥

सुनि चंद्रभगा की सभै बतीया बृखभान सुता तब ऐसे कहियो है ॥

sun cha(n)dhrabhagaa kee sabhai bateeyaa birakhabhaan sutaa tab aaise kahiyo hai ||

ਯਾਹੀ ਕੇ ਹੇਤ ਸੁਨੋ ਸਜਨੀ ਹਮ ਲੋਕਨ ਕੋ ਉਪਹਾਸ ਸਹਿਯੋ ਹੈ ॥

याही के हेत सुनो सजनी हम लोकन को उपहास सहियो है ॥

yaahee ke het suno sajanee ham lokan ko upahaas sahiyo hai ||


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