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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ਮੋ ਪਤਿ ਆਜ ਗਏ ਉਠ ਕੈ ਹਮ ਢੂੰਢਿ ਰਹੇ ਕਹੂੰਐ ਨਹੀ ਪਾਏ ॥੪੧੦॥

मो पति आज गए उठ कै हम ढूँढि रहे कहूँऐ नही पाए ॥४१०॥

mo pat aaj ge uTh kai ham ddoo(n)dd rahe kahoo(n)aai nahee paae ||410||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

ਤਾਤ ਕਹਿਓ ਹਸਿ ਕੈ ਜਸੁਧਾ ਪਹਿ ਤਾਤ ਲਿਆਵਨ ਕੌ ਹਮ ਜੈ ਹੈ ॥

तात कहिओ हसि कै जसुधा पहि तात लिआवन कौ हम जै है ॥

taat kahio has kai jasudhaa peh taat liaavan kau ham jai hai ||

ਸਾਤ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲ ਸੁ ਸਾਤਹਿ ਜਾਇ ਜਹੀ ਤਹ ਜਾਹੀ ਤੇ ਲਿਯੈ ਹੈ ॥

सात अकास पताल सु सातहि जाइ जही तह जाही ते लियै है ॥

saat akaas pataal su saateh jai jahee teh jaahee te liyai hai ||

ਜੌ ਮਰ ਗਿਓ ਤਉ ਜਾ ਜਮ ਕੇ ਪੁਰਿ ਅਯੁਧ ਲੈ ਕੁਪਿ ਭਾਰਥ ਕੈ ਹੈ ॥

जौ मर गिओ तउ जा जम के पुरि अयुध लै कुपि भारथ कै है ॥

jau mar gio tau jaa jam ke pur ayudh lai kup bhaarath kai hai ||

ਨੰਦ ਕੋ ਆਨਿ ਮਿਲਾਇ ਹਉ ਹਉ ਕਿਹ ਜਾਇ ਰਮੇ ਤਊ ਜਾਨ ਨ ਦੈ ਹੈ ॥੪੧੧॥

नंद को आनि मिलाइ हउ हउ किह जाइ रमे तऊ जान न दै है ॥४११॥

na(n)dh ko aan milai hau hau keh jai rame tuoo jaan na dhai hai ||411||


ਗੋਪ ਪ੍ਰਨਾਮ ਗਏ ਕਰ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹਿ ਤੋ ਹਸਿ ਕੈ ਇਮ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ॥

गोप प्रनाम गए कर कै गृहि तो हसि कै इम कान्रह कहियो है ॥

gop pranaam ge kar kai gireh to has kai im kaanreh kahiyo hai ||

ਗੋਪਨ ਕੇ ਪਤਿ ਕੋ ਮਿਲ ਹੋਂ ਇਹ ਝੂਠ ਨਹੀ ਫੁਨ ਸਤਿ ਲਹਿਯੋ ਹੈ ॥

गोपन के पति को मिल हों इह झूठ नही फुन सति लहियो है ॥

gopan ke pat ko mil ho(n) ieh jhooTh nahee fun sat lahiyo hai ||

ਗੋਪਨ ਕੇ ਮਨ ਕੋ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖ ਬਾਤ ਸੁਨੇ ਹਰਿ ਦੂਰਿ ਬਹਿਓ ਹੈ ॥

गोपन के मन को अति ही दुख बात सुने हरि दूरि बहिओ है ॥

gopan ke man ko at hee dhukh baat sune har dhoor bahio hai ||

ਛਾਡਿ ਅਧੀਰਜ ਦੀਨ ਸਭੋ ਫੁਨਿ ਧੀਰਜ ਕੋ ਮਨ ਗਾਢ ਗਹਿਓ ਹੈ ॥੪੧੨॥

छाडि अधीरज दीन सभो फुनि धीरज को मन गाढ गहिओ है ॥४१२॥

chhaadd adheeraj dheen sabho fun dheeraj ko man gaadd gahio hai ||412||


ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਹਰਿ ਜੀ ਉਠ ਕੈ ਜਲ ਬੀਚ ਧਸਿਓ ਬਰਨੰ ਪਹਿ ਆਯੋ ॥

प्रात भए हरि जी उठ कै जल बीच धसिओ बरनं पहि आयो ॥

praat bhe har jee uTh kai jal beech dhasio barana(n) peh aayo ||

ਆਇ ਕੈ ਠਾਢਿ ਭਯੋ ਜਬ ਹੀ ਨਦੀਆ ਪਤਿ ਪਾਇਨ ਸੋ ਲਪਟਾਯੋ ॥

आइ कै ठाढि भयो जब ही नदीआ पति पाइन सो लपटायो ॥

aai kai Thaadd bhayo jab hee nadheeaa pat pain so lapaTaayo ||

ਭ੍ਰਿਤਨ ਮੋ ਅਜਨੇ ਤੁਮ ਤਾਤ ਅਨਿਓ ਬੰਧ ਕੇ ਕਹਿ ਕੈ ਘਿਘਿਆਯੋ ॥

भृतन मो अजने तुम तात अनिओ बंध के कहि कै घिघिआयो ॥

bhiratan mo ajane tum taat anio ba(n)dh ke keh kai ghighiaayo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਛਿਮਾਪਨ ਦੋਖ ਕਰੋ ਇਹ ਭੇਦ ਹਮੈ ਲਖ ਕੈ ਨਹੀ ਪਾਯੋ ॥੪੧੩॥

कान्रह छिमापन दोख करो इह भेद हमै लख कै नही पायो ॥४१३॥

kaanreh chhimaapan dhokh karo ieh bhedh hamai lakh kai nahee paayo ||413||


ਜਿਨਿ ਰਾਜ ਭਭੀਛਨ ਰੀਝਿ ਦਯੋ ਰਿਸ ਕੈ ਜਿਨਿ ਰਾਵਨ ਖੇਤ ਮਰਿਓ ਹੈ ॥

जिनि राज भभीछन रीझि दयो रिस कै जिनि रावन खेत मरिओ है ॥

jin raaj bhabheechhan reejh dhayo ris kai jin raavan khet mario hai ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਓ ਮੁਰ ਨਾਮ ਅਘਾਸੁਰ ਪੈ ਬਲਿ ਕੋ ਛਲ ਸੋ ਜੁ ਛਲਿਓ ਹੈ ॥

जाहि मरिओ मुर नाम अघासुर पै बलि को छल सो जु छलिओ है ॥

jaeh mario mur naam aghaasur pai bal ko chhal so ju chhalio hai ||

ਜਾਹਿ ਜਲੰਧਰ ਕੀ ਤ੍ਰਿਯ ਕੋ ਤਿਹ ਮੂਰਤਿ ਕੈ ਸਤ ਜਾਹਿ ਟਰਿਯੋ ਹੈ ॥

जाहि जलंधर की तृय को तिह मूरति कै सत जाहि टरियो है ॥

jaeh jala(n)dhar kee tiray ko teh moorat kai sat jaeh Tariyo hai ||

ਧੰਨ ਹੈ ਭਾਗ ਕਿਧੋ ਹਮਰੇ ਤਿਹ ਕੋ ਹਮ ਪੇਖਬਿ ਆਜੁ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥੪੧੪॥

धंन है भाग किधो हमरे तिह को हम पेखबि आजु करिओ है ॥४१४॥

dha(n)n hai bhaag kidho hamare teh ko ham pekhab aaj kario hai ||414||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪਾਇਨ ਪਰ ਕੈ ਬਰਨਿ ਜੂ ਦਯੋ ਨੰਦ ਕਉ ਸਾਥਿ ॥

पाइन पर कै बरनि जू दयो नंद कउ साथि ॥

pain par kai baran joo dhayo na(n)dh kau saath ||

ਕਹਿਯੋ ਭਾਗ ਮੁਹਿ ਧੰਨਿ ਹੈ ਚਲੈ ਪੁਸਤਕਨ ਗਾਥ ॥੪੧੫॥

कहियो भाग मुहि धंनि है चलै पुसतकन गाथ ॥४१५॥

kahiyo bhaag muh dha(n)n hai chalai pusatakan gaath ||415||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਤਾਤ ਕੋ ਸਾਥ ਲਯੋ ਭਗਵਾਨ ਚਲਿਯੋ ਪੁਰ ਕੋ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਭੀਨੋ ॥

तात को साथ लयो भगवान चलियो पुर को मनि आनंद भीनो ॥

taat ko saath layo bhagavaan chaliyo pur ko man aana(n)dh bheeno ||

ਬਾਹਰਿ ਲੋਕ ਮਿਲੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਕਰਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪ੍ਰਣਾਮ ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਮ ਕੀਨੋ ॥

बाहरि लोक मिले बृज के करि कान्रह प्रणाम प्राक्रम कीनो ॥

baahar lok mile biraj ke kar kaanreh pranaam praakram keeno ||

ਪਾਇ ਪਰੇ ਹਰਿ ਕੇ ਬਹੁ ਬਾਰਨ ਦਾਨ ਘਨੋ ਦਿਜ ਲੋਕਨ ਦੀਨੋ ॥

पाइ परे हरि के बहु बारन दान घनो दिज लोकन दीनो ॥

pai pare har ke bahu baaran dhaan ghano dhij lokan dheeno ||

ਆਇ ਮਿਲਾਇ ਦਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਪਤਿ ਸਤਿ ਹਮੈ ਕਰਤਾ ਕਰ ਦੀਨੋ ॥੪੧੬॥

आइ मिलाइ दयो बृज को पति सति हमै करता कर दीनो ॥४१६॥

aai milai dhayo biraj ko pat sat hamai karataa kar dheeno ||416||


ਨੰਦ ਬਾਚ ॥

नंद बाच ॥

na(n)dh baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਾਹਰਿ ਆਨਿ ਕਹਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪਤਿ ਕਾਨਰ ਹੀ ਜਗ ਕੋ ਕਰਤਾ ਰੇ ॥

बाहरि आनि कहियो बृज के पति कानर ही जग को करता रे ॥

baahar aan kahiyo biraj ke pat kaanar hee jag ko karataa re ||

ਰਾਜ ਦਯੋ ਇਨ ਰੀਝਿ ਬਿਭੀਛਨਿ ਰਾਵਨ ਸੇ ਰਿਪੁ ਕੋਟਿਕ ਮਾਰੇ ॥

राज दयो इन रीझि बिभीछनि रावन से रिपु कोटिक मारे ॥

raaj dhayo in reejh bibheechhan raavan se rip koTik maare ||

ਭ੍ਰਿਤਨ ਲੈ ਬਰੁਣੈ ਬੰਧਿਓ ਤਿਹ ਤੇ ਮੁਹਿ ਆਨਿਓ ਹੈ ਯਾਹੀ ਛਡਾ ਰੇ ॥

भृतन लै बरुणै बंधिओ तिह ते मुहि आनिओ है याही छडा रे ॥

bhiratan lai barunai ba(n)dhio teh te muh aanio hai yaahee chhaddaa re ||

ਕੈ ਜਗ ਕੋ ਕਰਤਾ ਸਮਝੋ ਇਹ ਕੋ ਕਰਿ ਕੈ ਸਮਝੋ ਨਹੀ ਬਾਰੇ ॥੪੧੭॥

कै जग को करता समझो इह को करि कै समझो नही बारे ॥४१७॥

kai jag ko karataa samajho ieh ko kar kai samajho nahee baare ||417||


ਗੋਪ ਸਭੋ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਭੀਤਰ ਜਾਨਿ ਹਰੀ ਇਹ ਭੇਦ ਬਿਚਾਰਿਓ ॥

गोप सभो अपुने मन भीतर जानि हरी इह भेद बिचारिओ ॥

gop sabho apune man bheetar jaan haree ieh bhedh bichaario ||

ਦੇਖਹਿ ਜਾਇ ਬੈਕੁੰਠ ਸਭੈ ਹਮ ਪੈ ਇਹ ਕੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰਿਓ ॥

देखहि जाइ बैकुँठ सभै हम पै इह कै इह भाति उचारिओ ॥

dhekheh jai baiku(n)Th sabhai ham pai ieh kai ieh bhaat uchaario ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪੁਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਸਾਰਿਓ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने अपुनै मुख ते इम सारिओ ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne apunai mukh te im saario ||

ਗਿਆਨ ਹ੍ਵੈ ਪਾਰਸੁ ਗੋਪਨ ਲੋਹ ਕੌ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸਭੈ ਕਰਿ ਕੰਚਨ ਡਾਰਿਓ ॥੪੧੮॥

गिआन ह्वै पारसु गोपन लोह कौ कान्रह सभै करि कंचन डारिओ ॥४१८॥

giaan havai paaras gopan loh kau kaanreh sabhai kar ka(n)chan ddaario ||418||


ਜਾਨ ਕੈ ਅੰਤਰਿ ਕੋ ਲਖੀਆ ਜਬ ਰੈਨਿ ਪਰੀ ਤਬ ਹੀ ਪਰਿ ਸੋਏ ॥

जान कै अंतरि को लखीआ जब रैनि परी तब ही परि सोए ॥

jaan kai a(n)tar ko lakheeaa jab rain paree tab hee par soe ||

ਦੂਖ ਜਿਤੇ ਜੁ ਹੁਤੇ ਮਨ ਮੈ ਤਿਤਨੇ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਕੇ ਲੇਵਤ ਖੋਏ ॥

दूख जिते जु हुते मन मै तितने हरि नामु के लेवत खोए ॥

dhookh jite ju hute man mai titane har naam ke levat khoe ||

ਆਇ ਗਯੋ ਸੁਪਨਾ ਸਭ ਕੋ ਤਿਹ ਜਾ ਪਿਖਏ ਤ੍ਰੀਯਾ ਨਰ ਦੋਏ ॥

आइ गयो सुपना सभ को तिह जा पिखए त्रीया नर दोए ॥

aai gayo supanaa sabh ko teh jaa pikhe treeyaa nar dhoe ||

ਜਾਇ ਅਨੂਪ ਬਿਰਾਜਤ ਥੀ ਤਿਹ ਜਾ ਸਮ ਜਾ ਫੁਨਿ ਅਉਰ ਨ ਕੋਏ ॥੪੧੯॥

जाइ अनूप बिराजत थी तिह जा सम जा फुनि अउर न कोए ॥४१९॥

jai anoop biraajat thee teh jaa sam jaa fun aaur na koe ||419||


ਸਭ ਗੋਪਿ ਬਿਚਾਰਿ ਕਹਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਇਹ ਬੈਕੁੰਠ ਤੇ ਬ੍ਰਿਜ ਮੋਹਿ ਭਲਾ ਹੈ ॥

सभ गोपि बिचारि कहियो मन मै इह बैकुँठ ते बृज मोहि भला है ॥

sabh gop bichaar kahiyo man mai ieh baiku(n)Th te biraj moh bhalaa hai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਸਮੈ ਲਖੀਐ ਨ ਇਹਾ ਓਹੁ ਜਾ ਪਿਖੀਐ ਭਗਵਾਨ ਖਲਾ ਹੈ ॥

कान्रह समै लखीऐ न इहा ओहु जा पिखीऐ भगवान खला है ॥

kaanreh samai lakheeaai na ihaa oh jaa pikheeaai bhagavaan khalaa hai ||

ਗੋਰਸ ਖਾਤ ਉਹਾ ਹਮ ਤੇ ਮੰਗਿ ਜੋ ਕਰਤਾ ਸਭ ਜੀਵ ਜਲਾ ਹੈ ॥

गोरस खात उहा हम ते मंगि जो करता सभ जीव जला है ॥

goras khaat uhaa ham te ma(n)g jo karataa sabh jeev jalaa hai ||

ਸੋ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਛਾਛਹਿ ਪੀਵਤ ਜਾਹਿ ਰਮੀ ਨਭ ਭੂਮਿ ਕਲਾ ਹੈ ॥੪੨੦॥

सो हमरे गृहि छाछहि पीवत जाहि रमी नभ भूमि कला है ॥४२०॥

so hamare gireh chhaachheh peevat jaeh ramee nabh bhoom kalaa hai ||420||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਨੰਦ ਜੂ ਕੋ ਬਰੁਣ ਪਾਸ ਤੇ ਛੁਡਾਏ ਲਿਆਇ ਬੈਕੁੰਠ ਦਿਖਾਵ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे नंद जू को बरुण पास ते छुडाए लिआइ बैकुँठ दिखाव सभ गोपिन को धिआइ समापतं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare na(n)dh joo ko barun paas te chhuddaae liaai baiku(n)Th dhikhaav sabh gopin ko dhiaai samaapata(n) ||


ਅਥ ਰਾਸਿ ਮੰਡਲ ਲਿਖਯਤੇ ॥

अथ रासि मंडल लिखयते ॥

ath raas ma(n)ddal likhayate ||

ਅਥ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤ ਕਥਨੰ ॥

अथ देवी जू की उसतत कथनं ॥

ath dhevee joo kee usatat kathana(n) ||


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

bhuja(n)g prayaat chha(n)dh ||


ਤੂਹੀ ਅਸਤ੍ਰਣੀ ਸਸਤ੍ਰਣੀ ਆਪ ਰੂਪਾ ॥

तूही असत्रणी ससत्रणी आप रूपा ॥

toohee asatranee sasatranee aap roopaa ||

ਤੂਹੀ ਅੰਬਿਕਾ ਜੰਭ ਹੰਤੀ ਅਨੂਪਾ ॥

तूही अंबिका जंभ हंती अनूपा ॥

toohee a(n)bikaa ja(n)bh ha(n)tee anoopaa ||

ਤੂਹੀ ਅੰਬਿਕਾ ਸੀਤਲਾ ਤੋਤਲਾ ਹੈ ॥

तूही अंबिका सीतला तोतला है ॥

toohee a(n)bikaa seetalaa totalaa hai ||

ਪ੍ਰਿਥਵੀ ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਤੈਹੀ ਕੀਆ ਹੈ ॥੪੨੧॥

पृथवी भूमि अकास तैही कीआ है ॥४२१॥

pirathavee bhoom akaas taihee keeaa hai ||421||


ਤੁਹੀ ਮੁੰਡ ਮਰਦੀ ਕਪਰਦੀ ਭਵਾਨੀ ॥

तुही मुँड मरदी कपरदी भवानी ॥

tuhee mu(n)dd maradhee kaparadhee bhavaanee ||

ਤੁਹੀ ਕਾਲਿਕਾ ਜਾਲਪਾ ਰਾਜਧਾਨੀ ॥

तुही कालिका जालपा राजधानी ॥

tuhee kaalikaa jaalapaa raajadhaanee ||

ਮਹਾ ਜੋਗ ਮਾਇਆ ਤੁਹੀ ਈਸਵਰੀ ਹੈ ॥

महा जोग माइआ तुही ईसवरी है ॥

mahaa jog maiaa tuhee ieesavaree hai ||

ਤੁਹੀ ਤੇਜ ਅਕਾਸ ਥੰਭੋ ਮਹੀ ਹੈ ॥੪੨੨॥

तुही तेज अकास थंभो मही है ॥४२२॥

tuhee tej akaas tha(n)bho mahee hai ||422||


ਤੁਹੀ ਰਿਸਟਣੀ ਪੁਸਟਣੀ ਜੋਗ ਮਾਇਆ ॥

तुही रिसटणी पुसटणी जोग माइआ ॥

tuhee risaTanee pusaTanee jog maiaa ||

ਤੁਹੀ ਮੋਹ ਸੋ ਚਉਦਹੂੰ ਲੋਕ ਛਾਇਆ ॥

तुही मोह सो चउदहूँ लोक छाइआ ॥

tuhee moh so chaudhahoo(n) lok chhaiaa ||

ਤੁਹੀ ਸੁੰਭ ਨੈਸੁੰਭ ਹੰਤੀ ਭਵਾਨੀ ॥

तुही सुँभ नैसुँभ हंती भवानी ॥

tuhee su(n)bh naisu(n)bh ha(n)tee bhavaanee ||

ਤੁਹੀ ਚਉਦਹੂੰ ਲੋਕ ਕੀ ਜੋਤਿ ਜਾਨੀ ॥੪੨੩॥

तुही चउदहूँ लोक की जोति जानी ॥४२३॥

tuhee chaudhahoo(n) lok kee jot jaanee ||423||


ਤੁਹੀ ਰਿਸਟਣੀ ਪੁਸਟਣੀ ਸਸਤ੍ਰਣੀ ਹੈ ॥

तुही रिसटणी पुसटणी ससत्रणी है ॥

tuhee risaTanee pusaTanee sasatranee hai ||

ਤੁਹੀ ਕਸਟਣੀ ਹਰਤਨੀ ਅਸਤ੍ਰਣੀ ਹੈ ॥

तुही कसटणी हरतनी असत्रणी है ॥

tuhee kasaTanee haratanee asatranee hai ||

ਤੁਹੀ ਜੋਗ ਮਾਇਆ ਤੁਹੀ ਬਾਕ ਬਾਨੀ ॥

तुही जोग माइआ तुही बाक बानी ॥

tuhee jog maiaa tuhee baak baanee ||

ਤੁਹੀ ਅੰਬਿਕਾ ਜੰਭਹਾ ਰਾਜਧਾਨੀ ॥੪੨੪॥

तुही अंबिका जंभहा राजधानी ॥४२४॥

tuhee a(n)bikaa ja(n)bhahaa raajadhaanee ||424||


ਮਹਾ ਜੋਗ ਮਾਇਆ ਮਹਾ ਰਾਜਧਾਨੀ ॥

महा जोग माइआ महा राजधानी ॥

mahaa jog maiaa mahaa raajadhaanee ||

ਭਵੀ ਭਾਵਨੀ ਭੂਤ ਭਬਿਅੰ ਭਵਾਨੀ ॥

भवी भावनी भूत भबिअं भवानी ॥

bhavee bhaavanee bhoot bhabia(n) bhavaanee ||

ਚਰੀ ਆਚਰਣੀ ਖੇਚਰਣੀ ਭੂਪਣੀ ਹੈ ॥

चरी आचरणी खेचरणी भूपणी है ॥

charee aacharanee khecharanee bhoopanee hai ||

ਮਹਾ ਬਾਹਣੀ ਆਪਨੀ ਰੂਪਣੀ ਹੈ ॥੪੨੫॥

महा बाहणी आपनी रूपणी है ॥४२५॥

mahaa baahanee aapanee roopanee hai ||425||


ਮਹਾ ਭੈਰਵੀ ਭੂਤਨੇਸਵਰੀ ਭਵਾਨੀ ॥

महा भैरवी भूतनेसवरी भवानी ॥

mahaa bhairavee bhootanesavaree bhavaanee ||

ਭਵੀ ਭਾਵਨੀ ਭਬਿਯੰ ਕਾਲੀ ਕ੍ਰਿਪਾਨੀ ॥

भवी भावनी भबियं काली कृपानी ॥

bhavee bhaavanee bhabiya(n) kaalee kirapaanee ||

ਜਯਾ ਆਜਯਾ ਹਿੰਗੁਲਾ ਪਿੰਗੁਲਾ ਹੈ ॥

जया आजया हिंगुला पिंगुला है ॥

jayaa aajayaa hi(n)gulaa pi(n)gulaa hai ||

ਸਿਵਾ ਸੀਤਲਾ ਮੰਗਲਾ ਤੋਤਲਾ ਹੈ ॥੪੨੬॥

सिवा सीतला मंगला तोतला है ॥४२६॥

sivaa seetalaa ma(n)galaa totalaa hai ||426||


ਤੁਹੀ ਅਛਰਾ ਪਛਰਾ ਬੁਧਿ ਬ੍ਰਿਧਿਆ ॥

तुही अछरा पछरा बुधि बृधिआ ॥

tuhee achharaa pachharaa budh biradhiaa ||

ਤੁਹੀ ਭੈਰਵੀ ਭੂਪਣੀ ਸੁਧ ਸਿਧਿਆ ॥

तुही भैरवी भूपणी सुध सिधिआ ॥

tuhee bhairavee bhoopanee sudh sidhiaa ||

ਮਹਾ ਬਾਹਣੀ ਅਸਤ੍ਰਣੀ ਸਸਤ੍ਰ ਧਾਰੀ ॥

महा बाहणी असत्रणी ससत्र धारी ॥

mahaa baahanee asatranee sasatr dhaaree ||

ਤੁਹੀ ਤੀਰ ਤਰਵਾਰ ਕਾਤੀ ਕਟਾਰੀ ॥੪੨੭॥

तुही तीर तरवार काती कटारी ॥४२७॥

tuhee teer taravaar kaatee kaTaaree ||427||


ਤੁਹੀ ਰਾਜਸੀ ਸਾਤਕੀ ਤਾਮਸੀ ਹੈ ॥

तुही राजसी सातकी तामसी है ॥

tuhee raajasee saatakee taamasee hai ||

ਤੁਹੀ ਬਾਲਕਾ ਬ੍ਰਿਧਣੀ ਅਉ ਜੁਆ ਹੈ ॥

तुही बालका बृधणी अउ जुआ है ॥

tuhee baalakaa biradhanee aau juaa hai ||

ਤੁਹੀ ਦਾਨਵੀ ਦੇਵਣੀ ਜਛਣੀ ਹੈ ॥

तुही दानवी देवणी जछणी है ॥

tuhee dhaanavee dhevanee jachhanee hai ||

ਤੁਹੀ ਕਿੰਨ੍ਰਣੀ ਮਛਣੀ ਕਛਣੀ ਹੈ ॥੪੨੮॥

तुही किंन्रणी मछणी कछणी है ॥४२८॥

tuhee ki(n)nranee machhanee kachhanee hai ||428||


ਤੁਹੀ ਦੇਵਤੇ ਸੇਸਣੀ ਦਾਨੁ ਵੇਸਾ ॥

तुही देवते सेसणी दानु वेसा ॥

tuhee dhevate sesanee dhaan vesaa ||

ਸਰਹਿ ਬ੍ਰਿਸਟਣੀ ਹੈ ਤੁਹੀ ਅਸਤ੍ਰ ਭੇਸਾ ॥

सरहि बृसटणी है तुही असत्र भेसा ॥

sareh birasaTanee hai tuhee asatr bhesaa ||

ਤੁਹੀ ਰਾਜ ਰਾਜੇਸਵਰੀ ਜੋਗ ਮਾਯਾ ॥

तुही राज राजेसवरी जोग माया ॥

tuhee raaj raajesavaree jog maayaa ||

ਮਹਾ ਮੋਹ ਸੋ ਚਉਦਹੂੰ ਲੋਕ ਛਾਯਾ ॥੪੨੯॥

महा मोह सो चउदहूँ लोक छाया ॥४२९॥

mahaa moh so chaudhahoo(n) lok chhaayaa ||429||


ਤੁਹੀ ਬ੍ਰਾਹਮੀ ਬੈਸਨਵੀ ਸ੍ਰੀ ਭਵਾਨੀ ॥

तुही ब्राहमी बैसनवी स्री भवानी ॥

tuhee braahamee baisanavee sree bhavaanee ||

ਤੁਹੀ ਬਾਸਵੀ ਈਸਵਰੀ ਕਾਰਤਿਕਿਆਨੀ ॥

तुही बासवी ईसवरी कारतिकिआनी ॥

tuhee baasavee ieesavaree kaaratikiaanee ||

ਤੁਹੀ ਅੰਬਿਕਾ ਦੁਸਟਹਾ ਮੁੰਡਮਾਲੀ ॥

तुही अंबिका दुसटहा मुँडमाली ॥

tuhee a(n)bikaa dhusaTahaa mu(n)ddamaalee ||

ਤੁਹੀ ਕਸਟ ਹੰਤੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕੈ ਕ੍ਰਿਪਾਨੀ ॥੪੩੦॥

तुही कसट हंती कृपा कै कृपानी ॥४३०॥

tuhee kasaT ha(n)tee kirapaa kai kirapaanee ||430||


ਤੁਮੀ ਬਰਾਹਣੀ ਹ੍ਵੈ ਹਿਰਨਾਛ ਮਾਰਿਯੋ ॥

तुमी बराहणी ह्वै हिरनाछ मारियो ॥

tumee baraahanee havai hiranaachh maariyo ||

ਹਰੰਨਾਕਸੰ ਸਿੰਘਣੀ ਹ੍ਵੈ ਪਛਾਰਿਯੋ ॥

हरंनाकसं सिंघणी ह्वै पछारियो ॥

hara(n)naakasa(n) si(n)ghanee havai pachhaariyo ||

ਤੁਮੀ ਬਾਵਨੀ ਹ੍ਵੈ ਤਿਨੋ ਲੋਗ ਮਾਪੇ ॥

तुमी बावनी ह्वै तिनो लोग मापे ॥

tumee baavanee havai tino log maape ||

ਤੁਮੀ ਦੇਵ ਦਾਨੋ ਕੀਏ ਜਛ ਥਾਪੇ ॥੪੩੧॥

तुमी देव दानो कीए जछ थापे ॥४३१॥

tumee dhev dhaano ke'ee jachh thaape ||431||


ਤੁਮੀ ਰਾਮ ਹ੍ਵੈ ਕੈ ਦਸਾਗ੍ਰੀਵ ਖੰਡਿਯੋ ॥

तुमी राम ह्वै कै दसाग्रीव खंडियो ॥

tumee raam havai kai dhasaagreev kha(n)ddiyo ||

ਤੁਮੀ ਕ੍ਰਿਸਨ ਹ੍ਵੈ ਕੰਸ ਕੇਸੀ ਬਿਹੰਡਿਯੋ ॥

तुमी कृसन ह्वै कंस केसी बिहंडियो ॥

tumee kirasan havai ka(n)s kesee biha(n)ddiyo ||

ਤੁਮੀ ਜਾਲਪਾ ਹੈ ਬਿੜਾਲਾਛ ਘਾਯੋ ॥

तुमी जालपा है बिड़ालाछ घायो ॥

tumee jaalapaa hai biRaalaachh ghaayo ||

ਤੁਮੀ ਸੁੰਭ ਨੈਸੁੰਭ ਦਾਨੋ ਖਪਾਯੋ ॥੪੩੨॥

तुमी सुँभ नैसुँभ दानो खपायो ॥४३२॥

tumee su(n)bh naisu(n)bh dhaano khapaayo ||432||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਦਾਸ ਜਾਨ ਕਰਿ ਦਾਸ ਪਰਿ ਕੀਜੈ ਕ੍ਰਿਪਾ ਅਪਾਰ ॥

दास जान करि दास परि कीजै कृपा अपार ॥

dhaas jaan kar dhaas par keejai kirapaa apaar ||

ਆਪ ਹਾਥ ਦੈ ਰਾਖ ਮੁਹਿ ਮਨ ਕ੍ਰਮ ਬਚਨ ਬਿਚਾਰਿ ॥੪੩੩॥

आप हाथ दै राख मुहि मन क्रम बचन बिचारि ॥४३३॥

aap haath dhai raakh muh man kram bachan bichaar ||433||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਮੈ ਨ ਗਨੇਸਹਿ ਪ੍ਰਿਥਮ ਮਨਾਊ ॥

मै न गनेसहि पृथम मनाऊ ॥

mai na ganeseh piratham manaauoo ||

ਕਿਸਨ ਬਿਸਨ ਕਬਹੂੰ ਨ ਧਿਆਊ ॥

किसन बिसन कबहूँ न धिआऊ ॥

kisan bisan kabahoo(n) na dhiaauoo ||

ਕਾਨਿ ਸੁਨੇ ਪਹਿਚਾਨ ਨ ਤਿਨ ਸੋ ॥

कानि सुने पहिचान न तिन सो ॥

kaan sune pahichaan na tin so ||

ਲਿਵ ਲਾਗੀ ਮੋਰੀ ਪਗ ਇਨ ਸੋ ॥੪੩੪॥

लिव लागी मोरी पग इन सो ॥४३४॥

liv laagee moree pag in so ||434||


ਮਹਾਕਾਲ ਰਖਵਾਰ ਹਮਾਰੋ ॥

महाकाल रखवार हमारो ॥

mahaakaal rakhavaar hamaaro ||

ਮਹਾ ਲੋਹ ਮੈ ਕਿੰਕਰ ਥਾਰੋ ॥

महा लोह मै किंकर थारो ॥

mahaa loh mai ki(n)kar thaaro ||

ਅਪੁਨਾ ਜਾਨਿ ਕਰੋ ਰਖਵਾਰ ॥

अपुना जानि करो रखवार ॥

apunaa jaan karo rakhavaar ||

ਬਾਹ ਗਹੇ ਕੀ ਲਾਜ ਬਿਚਾਰ ॥੪੩੫॥

बाह गहे की लाज बिचार ॥४३५॥

baeh gahe kee laaj bichaar ||435||


ਅਪੁਨਾ ਜਾਨਿ ਮੁਝੈ ਪ੍ਰਤਿਪਰੀਐ ॥

अपुना जानि मुझै प्रतिपरीऐ ॥

apunaa jaan mujhai pratipareeaai ||

ਚੁਨਿ ਚੁਨਿ ਸਤ੍ਰ ਹਮਾਰੇ ਮਰੀਐ ॥

चुनि चुनि सत्र हमारे मरीऐ ॥

chun chun satr hamaare mareeaai ||

ਦੇਗ ਤੇਗ ਜਗ ਮੈ ਦੋਊ ਚਲੈ ॥

देग तेग जग मै दोऊ चलै ॥

dheg teg jag mai dhouoo chalai ||

ਰਾਖੁ ਆਪਿ ਮੁਹਿ ਅਉਰ ਨ ਦਲੈ ॥੪੩੬॥

राखु आपि मुहि अउर न दलै ॥४३६॥

raakh aap muh aaur na dhalai ||436||


ਤੁਮ ਮਮ ਕਰਹੁ ਸਦਾ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਾ ॥

तुम मम करहु सदा प्रतिपारा ॥

tum mam karahu sadhaa pratipaaraa ||

ਤੁਮ ਸਾਹਿਬ ਮੈ ਦਾਸ ਤਿਹਾਰਾ ॥

तुम साहिब मै दास तिहारा ॥

tum saahib mai dhaas tihaaraa ||

ਜਾਨਿ ਆਪਨਾ ਮੁਝੈ ਨਿਵਾਜ ॥

जानि आपना मुझै निवाज ॥

jaan aapanaa mujhai nivaaj ||

ਆਪਿ ਕਰੋ ਹਮਰੇ ਸਭ ਕਾਜ ॥੪੩੭॥

आपि करो हमरे सभ काज ॥४३७॥

aap karo hamare sabh kaaj ||437||


ਤੁਮ ਹੋ ਸਭ ਰਾਜਨ ਕੇ ਰਾਜਾ ॥

तुम हो सभ राजन के राजा ॥

tum ho sabh raajan ke raajaa ||

ਆਪੇ ਆਪੁ ਗਰੀਬ ਨਿਵਾਜਾ ॥

आपे आपु गरीब निवाजा ॥

aape aap gareeb nivaajaa ||

ਦਾਸ ਜਾਨ ਕਰਿ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਹੁ ਮੁਹਿ ॥

दास जान करि कृपा करहु मुहि ॥

dhaas jaan kar kirapaa karahu muh ||

ਹਾਰਿ ਪਰਾ ਮੈ ਆਨਿ ਦਵਾਰਿ ਤੁਹਿ ॥੪੩੮॥

हारि परा मै आनि दवारि तुहि ॥४३८॥

haar paraa mai aan dhavaar tuh ||438||


ਅਪੁਨਾ ਜਾਨਿ ਕਰੋ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਾ ॥

अपुना जानि करो प्रतिपारा ॥

apunaa jaan karo pratipaaraa ||

ਤੁਮ ਸਾਹਿਬੁ ਮੈ ਕਿੰਕਰ ਥਾਰਾ ॥

तुम साहिबु मै किंकर थारा ॥

tum saahib mai ki(n)kar thaaraa ||

ਦਾਸ ਜਾਨਿ ਕੈ ਹਾਥਿ ਉਬਾਰੋ ॥

दास जानि कै हाथि उबारो ॥

dhaas jaan kai haath ubaaro ||

ਹਮਰੇ ਸਭ ਬੈਰੀਅਨ ਸੰਘਾਰੋ ॥੪੩੯॥

हमरे सभ बैरीअन संघारो ॥४३९॥

hamare sabh baireean sa(n)ghaaro ||439||


ਪ੍ਰਥਮਿ ਧਰੋ ਭਗਵਤ ਕੋ ਧ੍ਯਾਨਾ ॥

प्रथमि धरो भगवत को ध्याना ॥

pratham dharo bhagavat ko dhayaanaa ||

ਬਹੁਰਿ ਕਰੋ ਕਬਿਤਾ ਬਿਧਿ ਨਾਨਾ ॥

बहुरि करो कबिता बिधि नाना ॥

bahur karo kabitaa bidh naanaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਥਾਮਤਿ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਚਾਰੋ ॥

कृसन जथामति चरित्र उचारो ॥

kirasan jathaamat charitr uchaaro ||

ਚੂਕ ਹੋਇ ਕਬਿ ਲੇਹੁ ਸੁਧਾਰੋ ॥੪੪੦॥

चूक होइ कबि लेहु सुधारो ॥४४०॥

chook hoi kab leh sudhaaro ||440||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦੇਵੀ ਉਸਤਤਿ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री देवी उसतति समापतं ॥

eit sree dhevee usatat samaapata(n) ||

ਅਥ ਰਾਸ ਮੰਡਲ ॥

अथ रास मंडल ॥

ath raas ma(n)ddal ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਬ ਆਈ ਹੈ ਕਾਤਿਕ ਕੀ ਰੁਤਿ ਸੀਤਲ ਕਾਨ੍ਰਹ ਤਬੈ ਅਤਿ ਹੀ ਰਸੀਆ ॥

जब आई है कातिक की रुति सीतल कान्रह तबै अति ही रसीआ ॥

jab aaiee hai kaatik kee rut seetal kaanreh tabai at hee raseeaa ||

ਸੰਗਿ ਗੋਪਿਨ ਖੇਲ ਬਿਚਾਰ ਕਰਿਓ ਜੁ ਹੁਤੋ ਭਗਵਾਨ ਮਹਾ ਜਸੀਆ ॥

संगि गोपिन खेल बिचार करिओ जु हुतो भगवान महा जसीआ ॥

sa(n)g gopin khel bichaar kario ju huto bhagavaan mahaa jaseeaa ||

ਅਪਵਿਤ੍ਰਨ ਲੋਗਨ ਕੇ ਜਿਹ ਕੇ ਪਗਿ ਲਾਗਤ ਪਾਪ ਸਭੈ ਨਸੀਆ ॥

अपवित्रन लोगन के जिह के पगि लागत पाप सभै नसीआ ॥

apavitran logan ke jeh ke pag laagat paap sabhai naseeaa ||

ਤਿਹ ਕੋ ਸੁਨਿ ਤ੍ਰੀਯਨ ਕੇ ਸੰਗਿ ਖੇਲ ਨਿਵਾਰਹੁ ਕਾਮ ਇਹੈ ਬਸੀਆ ॥੪੪੧॥

तिह को सुनि त्रीयन के संगि खेल निवारहु काम इहै बसीआ ॥४४१॥

teh ko sun treeyan ke sa(n)g khel nivaarahu kaam ihai baseeaa ||441||


ਆਨਨ ਜਾਹਿ ਨਿਸਾਪਤਿ ਸੋ ਦ੍ਰਿਗ ਕੋਮਲ ਹੈ ਕਮਲਾ ਦਲ ਕੈਸੇ ॥

आनन जाहि निसापति सो दृग कोमल है कमला दल कैसे ॥

aanan jaeh nisaapat so dhirag komal hai kamalaa dhal kaise ||

ਹੈ ਭਰੁਟੇ ਧਨੁ ਸੇ ਬਰਨੀ ਸਰ ਦੂਰ ਕਰੈ ਤਨ ਕੇ ਦੁਖਰੈ ਸੇ ॥

है भरुटे धनु से बरनी सर दूर करै तन के दुखरै से ॥

hai bharuTe dhan se baranee sar dhoor karai tan ke dhukharai se ||

ਕਾਮ ਕੀ ਸਾਨ ਕੇ ਸਾਥ ਘਸੇ ਦੁਖ ਸਾਧਨ ਕਟਬੇ ਕਹੁ ਤੈਸੇ ॥

काम की सान के साथ घसे दुख साधन कटबे कहु तैसे ॥

kaam kee saan ke saath ghase dhukh saadhan kaTabe kahu taise ||

ਕਉਲ ਕੇ ਪਤ੍ਰ ਕਿਧੋ ਸਸਿ ਸਾਥ ਲਗੇ ਕਬਿ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਯਾਮ ਅਰੈ ਸੇ ॥੪੪੨॥

कउल के पत्र किधो ससि साथ लगे कबि सुँदर स्याम अरै से ॥४४२॥

kaul ke patr kidho sas saath lage kab su(n)dhar sayaam arai se ||442||


ਬਧਿਕ ਹੈ ਟਟੀਆ ਬਰੁਨੀ ਧਰ ਕੋਰਨ ਕੀ ਦੁਤਿ ਸਾਇਕ ਸਾਧੇ ॥

बधिक है टटीआ बरुनी धर कोरन की दुति साइक साधे ॥

badhik hai TaTeeaa barunee dhar koran kee dhut saik saadhe ||

ਠਾਢੇ ਹੈ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਿਧੋ ਬਨ ਮੈ ਤਨ ਪੈ ਸਿਰ ਪੈ ਅੰਬੁਵਾ ਰੰਗ ਬਾਧੇ ॥

ठाढे है कान्रह किधो बन मै तन पै सिर पै अंबुवा रंग बाधे ॥

Thaadde hai kaanreh kidho ban mai tan pai sir pai a(n)buvaa ra(n)g baadhe ||

ਚਾਲ ਚਲੈ ਹਰੂਏ ਹਰੂਏ ਮਨੋ ਸੀਖ ਦਈ ਇਹ ਬਾਧਕ ਪਾਧੇ ॥

चाल चलै हरूए हरूए मनो सीख दई इह बाधक पाधे ॥

chaal chalai harooe harooe mano seekh dhiee ieh baadhak paadhe ||

ਅਉ ਸਭ ਹੀ ਠਟ ਬਧਕ ਸੇ ਮਨ ਮੋਹਨ ਜਾਲ ਪੀਤੰਬਰ ਕਾਧੇ ॥੪੪੩॥

अउ सभ ही ठट बधक से मन मोहन जाल पीतंबर काधे ॥४४३॥

aau sabh hee ThaT badhak se man mohan jaal peeta(n)bar kaadhe ||443||


ਸੋ ਉਠਿ ਠਾਢਿ ਕਿਧੋ ਬਨ ਮੈ ਜੁਗ ਤੀਸਰ ਮੈ ਪਤਿ ਜੋਊ ਸੀਯਾ ॥

सो उठि ठाढि किधो बन मै जुग तीसर मै पति जोऊ सीया ॥

so uTh Thaadd kidho ban mai jug teesar mai pat jouoo seeyaa ||

ਜਮੁਨਾ ਮਹਿ ਖੇਲ ਕੇ ਕਾਰਨ ਕੌ ਘਸਿ ਚੰਦਨ ਭਾਲ ਮੈ ਟੀਕੋ ਦੀਯਾ ॥

जमुना महि खेल के कारन कौ घसि चंदन भाल मै टीको दीया ॥

jamunaa meh khel ke kaaran kau ghas cha(n)dhan bhaal mai Teeko dheeyaa ||

ਭਿਲਰਾ ਡਰਿ ਨੈਨ ਕੇ ਸੈਨਨ ਕੋ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਮਨ ਚੋਰਿ ਲੀਯਾ ॥

भिलरा डरि नैन के सैनन को सभ गोपिन को मन चोरि लीया ॥

bhilaraa ddar nain ke sainan ko sabh gopin ko man chor leeyaa ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਭਗਵਾਨ ਕਿਧੋ ਰਸ ਕਾਰਨ ਕੋ ਠਗ ਬੇਸ ਕੀਆ ॥੪੪੪॥

कबि स्याम कहै भगवान किधो रस कारन को ठग बेस कीआ ॥४४४॥

kab sayaam kahai bhagavaan kidho ras kaaran ko Thag bes keeaa ||444||


ਦ੍ਰਿਗ ਜਾਹਿ ਮ੍ਰਿਗੀ ਪਤਿ ਕੀ ਸਮ ਹੈ ਮੁਖ ਜਾਹਿ ਨਿਸਾਪਤਿ ਸੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥

दृग जाहि मृगी पति की सम है मुख जाहि निसापति सी छबि पाई ॥

dhirag jaeh miragee pat kee sam hai mukh jaeh nisaapat see chhab paiee ||

ਜਾਹਿ ਕੁਰੰਗਨ ਕੇ ਰਿਪੁ ਸੀ ਕਟਿ ਕੰਚਨ ਸੀ ਤਨ ਨੈ ਛਬਿ ਛਾਈ ॥

जाहि कुरंगन के रिपु सी कटि कंचन सी तन नै छबि छाई ॥

jaeh kura(n)gan ke rip see kaT ka(n)chan see tan nai chhab chhaiee ||

ਪਾਟ ਬਨੇ ਕਦਲੀ ਦਲ ਦ੍ਵੈ ਜੰਘਾ ਪਰ ਤੀਰਨ ਸੀ ਦੁਤਿ ਗਾਈ ॥

पाट बने कदली दल द्वै जंघा पर तीरन सी दुति गाई ॥

paaT bane kadhalee dhal dhavai ja(n)ghaa par teeran see dhut gaiee ||

ਅੰਗ ਪ੍ਰਤੰਗ ਸੁ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਯਾਮ ਕਛੂ ਉਪਮਾ ਕਹੀਐ ਨਹੀ ਜਾਈ ॥੪੪੫॥

अंग प्रतंग सु सुँदर स्याम कछू उपमा कहीऐ नही जाई ॥४४५॥

a(n)g prata(n)g su su(n)dhar sayaam kachhoo upamaa kaheeaai nahee jaiee ||445||


ਮੁਖ ਜਾਹਿ ਨਿਸਾਪਤਿ ਕੀ ਸਮ ਹੈ ਬਨ ਮੈ ਤਿਨ ਗੀਤ ਰਿਝਿਯੋ ਅਰੁ ਗਾਯੋ ॥

मुख जाहि निसापति की सम है बन मै तिन गीत रिझियो अरु गायो ॥

mukh jaeh nisaapat kee sam hai ban mai tin geet rijhiyo ar gaayo ||

ਤਾ ਸੁਰ ਕੋ ਧੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਬ੍ਰਿਜ ਹੂੰ ਕੀ ਤ੍ਰਿਯਾ ਸਭ ਹੀ ਸੁਨਿ ਪਾਯੋ ॥

ता सुर को धुनि स्रउनन मै बृज हूँ की तृया सभ ही सुनि पायो ॥

taa sur ko dhun sraunan mai biraj hoo(n) kee tirayaa sabh hee sun paayo ||

ਧਾਇ ਚਲੀ ਹਰਿ ਕੇ ਮਿਲਬੇ ਕਹੁ ਤਉ ਸਭ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਜਬ ਭਾਯੋ ॥

धाइ चली हरि के मिलबे कहु तउ सभ के मन मै जब भायो ॥

dhai chalee har ke milabe kahu tau sabh ke man mai jab bhaayo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਮਨੋ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਜੁਵਤੀ ਛਲਬੇ ਕਹੁ ਘੰਟਕ ਹੇਰਿ ਬਨਾਯੋ ॥੪੪੬॥

कान्रह मनो मृगनी जुवती छलबे कहु घंटक हेरि बनायो ॥४४६॥

kaanreh mano miraganee juvatee chhalabe kahu gha(n)Tak her banaayo ||446||


ਮੁਰਲੀ ਮੁਖ ਕਾਨਰ ਕੇ ਤਰੂਏ ਤਰੁ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਬਿਧਿ ਖੂਬ ਛਕੀ ॥

मुरली मुख कानर के तरूए तरु स्याम कहै बिधि खूब छकी ॥

muralee mukh kaanar ke tarooe tar sayaam kahai bidh khoob chhakee ||

ਬ੍ਰਿਜ ਭਾਮਿਨ ਆ ਪਹੁਚੀ ਦਵਰੀ ਸੁਧਿ ਹਿਯਾ ਜੁ ਰਹੀ ਨ ਕਛੂ ਮੁਖ ਕੀ ॥

बृज भामिन आ पहुची दवरी सुधि हिया जु रही न कछू मुख की ॥

biraj bhaamin aa pahuchee dhavaree sudh hiyaa ju rahee na kachhoo mukh kee ||

ਮੁਖ ਕੋ ਪਿਖਿ ਰੂਪ ਕੇ ਬਸ੍ਰਯ ਭਈ ਮਤ ਹ੍ਵੈ ਅਤਿ ਹੀ ਕਹਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਕੀ ॥

मुख को पिखि रूप के बस्रय भई मत ह्वै अति ही कहि कान्रह बकी ॥

mukh ko pikh roop ke basray bhiee mat havai at hee keh kaanreh bakee ||

ਇਕ ਝੂਮਿ ਪਰੀ ਇਕ ਗਾਇ ਉਠੀ ਤਨ ਮੈ ਇਕ ਹ੍ਵੈ ਰਹਿਗੀ ਸੁ ਜਕੀ ॥੪੪੭॥

इक झूमि परी इक गाइ उठी तन मै इक ह्वै रहिगी सु जकी ॥४४७॥

eik jhoom paree ik gai uThee tan mai ik havai rahigee su jakee ||447||


ਹਰਿ ਕੀ ਸੁਨਿ ਕੈ ਸੁਰ ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਸਭ ਧਾਇ ਚਲੀ ਬ੍ਰਿਜਭੂਮਿ ਸਖੀ ॥

हरि की सुनि कै सुर स्रउनन मै सभ धाइ चली बृजभूमि सखी ॥

har kee sun kai sur sraunan mai sabh dhai chalee birajabhoom sakhee ||

ਸਭ ਮੈਨ ਕੇ ਹਾਥਿ ਗਈ ਬਧ ਕੈ ਸਭ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਯਾਮ ਕੀ ਪੇਖਿ ਅਖੀ ॥

सभ मैन के हाथि गई बध कै सभ सुँदर स्याम की पेखि अखी ॥

sabh main ke haath giee badh kai sabh su(n)dhar sayaam kee pekh akhee ||

ਨਿਕਰੀ ਗ੍ਰਿਹ ਤੇ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਸਮ ਮਾਨਹੁ ਗੋਪਿਨ ਤੇ ਨਹਿ ਜਾਹਿ ਰਖੀ ॥

निकरी गृह ते मृगनी सम मानहु गोपिन ते नहि जाहि रखी ॥

nikaree gireh te miraganee sam maanahu gopin te neh jaeh rakhee ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਹਰੀ ਪਹਿ ਆਇ ਗਈ ਜਨੁ ਆਇ ਗਈ ਸੁਧਿ ਜਾਨਿ ਸਖੀ ॥੪੪੮॥

इह भाति हरी पहि आइ गई जनु आइ गई सुधि जानि सखी ॥४४८॥

eeh bhaat haree peh aai giee jan aai giee sudh jaan sakhee ||448||


ਗਈ ਆਇ ਦਸੋ ਦਿਸ ਤੇ ਗੁਪੀਆ ਸਭ ਹੀ ਰਸ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਸਾਥ ਪਗੀ ॥

गई आइ दसो दिस ते गुपीआ सभ ही रस कान्रह के साथ पगी ॥

giee aai dhaso dhis te gupeeaa sabh hee ras kaanreh ke saath pagee ||

ਪਿਖ ਕੈ ਮੁਖਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਚੰਦ ਕਲਾ ਸੁ ਚਕੋਰਨ ਸੀ ਮਨ ਮੈ ਉਮਗੀ ॥

पिख कै मुखि कान्रह को चंद कला सु चकोरन सी मन मै उमगी ॥

pikh kai mukh kaanreh ko cha(n)dh kalaa su chakoran see man mai umagee ||

ਹਰਿ ਕੋ ਪੁਨਿ ਸੁਧਿ ਸੁ ਆਨਨ ਪੇਖਿ ਕਿਧੌ ਤਿਨ ਕੀ ਠਗ ਡੀਠ ਲਗੀ ॥

हरि को पुनि सुधि सु आनन पेखि किधौ तिन की ठग डीठ लगी ॥

har ko pun sudh su aanan pekh kidhau tin kee Thag ddeeTh lagee ||

ਭਗਵਾਨ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਭਯੋ ਪਿਖ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਨੋ ਮ੍ਰਿਗ ਦੇਖ ਮ੍ਰਿਗੀ ॥੪੪੯॥

भगवान प्रसंनि भयो पिख कै कबि स्याम मनो मृग देख मृगी ॥४४९॥

bhagavaan prasa(n)n bhayo pikh kai kab sayaam mano mirag dhekh miragee ||449||


ਗੋਪਿਨ ਕੀ ਬਰਜੀ ਨ ਰਹੀ ਸੁਰ ਕਾਨਰ ਕੀ ਸੁਨਬੇ ਕਹੁ ਤ੍ਰਾਘੀ ॥

गोपिन की बरजी न रही सुर कानर की सुनबे कहु त्राघी ॥

gopin kee barajee na rahee sur kaanar kee sunabe kahu traaghee ||

ਨਾਖਿ ਚਲੀ ਅਪਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਇਉ ਜਿਮੁ ਮਤਿ ਜੁਗੀਸ੍ਵਰ ਇੰਦ੍ਰਹਿ ਲਾਘੀ ॥

नाखि चली अपने गृह इउ जिमु मति जुगीस्वर इंद्रहि लाघी ॥

naakh chalee apane gireh iau jim mat jugeesavair i(n)dhreh laaghee ||

ਦੇਖਨ ਕੋ ਮੁਖਿ ਤਾਹਿ ਚਲੀ ਜੋਊ ਕਾਮ ਕਲਾ ਹੂੰ ਕੋ ਹੈ ਫੁਨਿ ਬਾਘੀ ॥

देखन को मुखि ताहि चली जोऊ काम कला हूँ को है फुनि बाघी ॥

dhekhan ko mukh taeh chalee jouoo kaam kalaa hoo(n) ko hai fun baaghee ||

ਡਾਰਿ ਚਲੀ ਸਿਰ ਕੇ ਪਟ ਇਉ ਜਨੁ ਡਾਰਿ ਚਲੀ ਸਭ ਲਾਜ ਬਹਾਘੀ ॥੪੫੦॥

डारि चली सिर के पट इउ जनु डारि चली सभ लाज बहाघी ॥४५०॥

ddaar chalee sir ke paT iau jan ddaar chalee sabh laaj bahaaghee ||450||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੇ ਪਾਸਿ ਗਈ ਜਬ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਲੀਨ ਸੁ ਸੰਙਾ ॥

कान्रह के पासि गई जब ही तब ही सभ गोपिन लीन सु संङा ॥

kaanreh ke paas giee jab hee tab hee sabh gopin leen su sa(n)n(g)aa ||

ਚੀਰ ਪਰੇ ਗਿਰ ਕੈ ਤਨ ਭੂਖਨ ਟੂਟ ਗਈ ਤਿਨ ਹਾਥਨ ਬੰਙਾ ॥

चीर परे गिर कै तन भूखन टूट गई तिन हाथन बंङा ॥

cheer pare gir kai tan bhookhan TooT giee tin haathan ba(n)n(g)aa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰਿ ਸਭੈ ਗੁਪੀਆ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਭਈ ਇਕ ਰੰਙਾ ॥

कान्रह को रूप निहारि सभै गुपीआ कबि स्याम भई इक रंङा ॥

kaanreh ko roop nihaar sabhai gupeeaa kab sayaam bhiee ik ra(n)n(g)aa ||

ਹੋਇ ਗਈ ਤਨਮੈ ਸਭ ਹੀ ਇਕ ਰੰਗ ਮਨੋ ਸਭ ਛੋਡ ਕੈ ਸੰਙਾ ॥੪੫੧॥

होइ गई तनमै सभ ही इक रंग मनो सभ छोड कै संङा ॥४५१॥

hoi giee tanamai sabh hee ik ra(n)g mano sabh chhodd kai sa(n)n(g)aa ||451||


ਗੋਪਿਨ ਭੂਲਿ ਗਈ ਗ੍ਰਿਹ ਕੀ ਸੁਧਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹੀ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਰਾਚੀ ॥

गोपिन भूलि गई गृह की सुधि कान्रह ही के रस भीतर राची ॥

gopin bhool giee gireh kee sudh kaanreh hee ke ras bheetar raachee ||

ਭਉਹ ਭਰੀ ਮਧੁਰੀ ਬਰਨੀ ਸਭ ਹੀ ਸੁ ਢਰੀ ਜਨੁ ਮੈਨ ਕੇ ਸਾਚੀ ॥

भउह भरी मधुरी बरनी सभ ही सु ढरी जनु मैन के साची ॥

bhauh bharee madhuree baranee sabh hee su ddaree jan main ke saachee ||

ਛੋਰ ਦਏ ਰਸ ਅਉਰਨ ਸ੍ਵਾਦ ਭਲੇ ਭਗਵਾਨ ਹੀ ਸੋ ਸਭ ਮਾਚੀ ॥

छोर दए रस अउरन स्वाद भले भगवान ही सो सभ माची ॥

chhor dhe ras aauran savaiaadh bhale bhagavaan hee so sabh maachee ||

ਸੋਭਤ ਤਾ ਤਨ ਮੈ ਹਰਿ ਕੋ ਮਨੋ ਕੰਚਨ ਮੈ ਚੁਨੀਆ ਚੁਨਿ ਖਾਚੀ ॥੪੫੨॥

सोभत ता तन मै हरि को मनो कंचन मै चुनीआ चुनि खाची ॥४५२॥

sobhat taa tan mai har ko mano ka(n)chan mai chuneeaa chun khaachee ||452||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰਿ ਰਹੀ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਜੁ ਹੁਤੀ ਗੁਪੀਆ ਅਤਿ ਹਾਛੀ ॥

कान्रह को रूप निहारि रही बृज मै जु हुती गुपीआ अति हाछी ॥

kaanreh ko roop nihaar rahee biraj mai ju hutee gupeeaa at haachhee ||

ਰਾਜਤ ਜਾਹਿ ਮ੍ਰਿਗੀ ਪਤਿ ਨੈਨ ਬਿਰਾਜਤ ਸੁੰਦਰ ਹੈ ਸਮ ਮਾਛੀ ॥

राजत जाहि मृगी पति नैन बिराजत सुँदर है सम माछी ॥

raajat jaeh miragee pat nain biraajat su(n)dhar hai sam maachhee ||

ਸੋਭਿਤ ਹੈ ਬ੍ਰਿਜ ਮੰਡਲ ਮੈ ਜਨੁ ਖੇਲਬੇ ਕਾਜਿ ਨਟੀ ਇਹ ਕਾਛੀ ॥

सोभित है बृज मंडल मै जनु खेलबे काजि नटी इह काछी ॥

sobhit hai biraj ma(n)ddal mai jan khelabe kaaj naTee ieh kaachhee ||

ਦੇਖਨਿ ਹਾਰ ਕਿਧੌ ਭਗਵਾਨ ਦਿਖਾਵਤ ਭਾਵ ਹਮੈ ਹਿਯਾ ਆਛੀ ॥੪੫੩॥

देखनि हार किधौ भगवान दिखावत भाव हमै हिया आछी ॥४५३॥

dhekhan haar kidhau bhagavaan dhikhaavat bhaav hamai hiyaa aachhee ||453||


ਸੋਹਤ ਹੈ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਦ੍ਰਿਗ ਅੰਜਨ ਆਜੇ ॥

सोहत है सभ गोपिन के कबि स्याम कहै दृग अंजन आजे ॥

sohat hai sabh gopin ke kab sayaam kahai dhirag a(n)jan aaje ||

ਕਉਲਨ ਕੀ ਜਨੁ ਸੁਧਿ ਪ੍ਰਭਾ ਸਰ ਸੁੰਦਰ ਸਾਨ ਕੇ ਊਪਰਿ ਮਾਜੇ ॥

कउलन की जनु सुधि प्रभा सर सुँदर सान के ऊपरि माजे ॥

kaulan kee jan sudh prabhaa sar su(n)dhar saan ke uoopar maaje ||

ਬੈਠਿ ਘਰੀ ਇਕ ਮੈ ਚਤੁਰਾਨਨ ਮੈਨ ਕੇ ਤਾਤ ਬਨੇ ਕਸਿ ਸਾਜੇ ॥

बैठि घरी इक मै चतुरानन मैन के तात बने कसि साजे ॥

baiTh gharee ik mai chaturaanan main ke taat bane kas saaje ||

ਮੋਹਤਿ ਹੈ ਮਨ ਜੋਗਨ ਕੇ ਫੁਨਿ ਜੋਗਨ ਕੇ ਗਨ ਬੀਚ ਕਲਾ ਜੇ ॥੪੫੪॥

मोहति है मन जोगन के फुनि जोगन के गन बीच कला जे ॥४५४॥

mohat hai man jogan ke fun jogan ke gan beech kalaa je ||454||


ਠਾਢਿ ਹੈ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋਊ ਮਹਿ ਗੋਪਿਨ ਜਾਹਿ ਕੋ ਅੰਤ ਮੁਨੀ ਨਹਿ ਬੂਝੇ ॥

ठाढि है कान्रह सोऊ महि गोपिन जाहि को अंत मुनी नहि बूझे ॥

Thaadd hai kaanreh souoo meh gopin jaeh ko a(n)t munee neh boojhe ||

ਕੋਟਿ ਕਰੈ ਉਪਮਾ ਬਹੁ ਬਰਖਨ ਨੈਨਨ ਸੋ ਤਉ ਨੈਕੁ ਨ ਸੂਝੇ ॥

कोटि करै उपमा बहु बरखन नैनन सो तउ नैकु न सूझे ॥

koT karai upamaa bahu barakhan nainan so tau naik na soojhe ||

ਤਾਹੀ ਕੇ ਅੰਤਿ ਲਖੈਬੇ ਕੇ ਕਾਰਨ ਸੂਰ ਘਨੈ ਰਨ ਭੀਤਰ ਜੂਝੇ ॥

ताही के अंति लखैबे के कारन सूर घनै रन भीतर जूझे ॥

taahee ke a(n)t lakhaibe ke kaaran soor ghanai ran bheetar joojhe ||

ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਭਗਵਾਨ ਤ੍ਰੀਆ ਗਨ ਮੈ ਰਸ ਬੈਨ ਅਰੂਝੇ ॥੪੫੫॥

सो बृज भूमि बिखै भगवान त्रीआ गन मै रस बैन अरूझे ॥४५५॥

so biraj bhoom bikhai bhagavaan treeaa gan mai ras bain aroojhe ||455||


ਕਾਨਰ ਕੇ ਨਿਕਟੈ ਜਬ ਹੀ ਸਭ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ਮਿਲਿ ਸੁੰਦਰ ਗਈਯਾ ॥

कानर के निकटै जब ही सभ ही गुपीआ मिलि सुँदर गईया ॥

kaanar ke nikaTai jab hee sabh hee gupeeaa mil su(n)dhar gieeyaa ||

ਸੋ ਹਰਿ ਮਧਿ ਸਸਾਨਨ ਪੇਖਿ ਸਭੈ ਫੁਨਿ ਕੰਦ੍ਰਪ ਬੇਖ ਬਨਈਆ ॥

सो हरि मधि ससानन पेखि सभै फुनि कंद्रप बेख बनईआ ॥

so har madh sasaanan pekh sabhai fun ka(n)dhrap bekh banieeaa ||

ਲੈ ਮੁਰਲੀ ਅਪਨੇ ਕਰਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਿਧੌ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਸਾਥ ਬਜਈਯਾ ॥

लै मुरली अपने करि कान्रह किधौ अति ही हित साथ बजईया ॥

lai muralee apane kar kaanreh kidhau at hee hit saath bajieeyaa ||

ਘੰਟਕ ਹੇਰਕ ਜਿਉ ਪਿਖ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਮੁਹਿ ਜਾਤ ਸੁ ਹੈ ਠਹਰਈਯਾ ॥੪੫੬॥

घंटक हेरक जिउ पिख कै मृगनी मुहि जात सु है ठहरईया ॥४५६॥

gha(n)Tak herak jiau pikh kai miraganee muh jaat su hai Thaharieeyaa ||456||


ਮਾਲਸਿਰੀ ਅਰੁ ਰਾਮਕਲੀ ਸੁਭ ਸਾਰੰਗ ਭਾਵਨ ਸਾਥ ਬਸਾਵੈ ॥

मालसिरी अरु रामकली सुभ सारंग भावन साथ बसावै ॥

maalasiree ar raamakalee subh saara(n)g bhaavan saath basaavai ||

ਜੈਤਸਿਰੀ ਅਰੁ ਸੁਧ ਮਲਾਰ ਬਿਲਾਵਲ ਕੀ ਧੁਨਿ ਕੂਕ ਸੁਨਾਵੈ ॥

जैतसिरी अरु सुध मलार बिलावल की धुनि कूक सुनावै ॥

jaitasiree ar sudh malaar bilaaval kee dhun kook sunaavai ||

ਲੈ ਮੁਰਲੀ ਅਪੁਨੇ ਕਰਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਿਧੌ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਸਾਥ ਬਜਾਵੈ ॥

लै मुरली अपुने करि कान्रह किधौ अति ही हित साथ बजावै ॥

lai muralee apune kar kaanreh kidhau at hee hit saath bajaavai ||

ਪਉਨ ਚਲੈ ਨ ਰਹੈ ਜਮੁਨਾ ਥਿਰ ਮੋਹਿ ਰਹੈ ਧੁਨਿ ਜੋ ਸੁਨਿ ਪਾਵੈ ॥੪੫੭॥

पउन चलै न रहै जमुना थिर मोहि रहै धुनि जो सुनि पावै ॥४५७॥

paun chalai na rahai jamunaa thir moh rahai dhun jo sun paavai ||457||


ਸੁਨ ਕੇ ਮੁਰਲੀ ਧੁਨਿ ਕਾਨਰ ਕੀ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੀ ਸਭ ਸੁਧਿ ਛੁਟੀ ॥

सुन के मुरली धुनि कानर की सभ गोपिन की सभ सुधि छुटी ॥

sun ke muralee dhun kaanar kee sabh gopin kee sabh sudh chhuTee ||

ਸਭ ਛਾਡਿ ਚਲੀ ਅਪਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਕਾਰਜ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹੀ ਕੀ ਧੁਨਿ ਸਾਥ ਜੁਟੀ ॥

सभ छाडि चली अपने गृह कारज कान्रह ही की धुनि साथ जुटी ॥

sabh chhaadd chalee apane gireh kaaraj kaanreh hee kee dhun saath juTee ||

ਠਗਨੀ ਸੁਰ ਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਇਨ ਅੰਤਰ ਕੀ ਸਭ ਮਤਿ ਲੁਟੀ ॥

ठगनी सुर है कबि स्याम कहै इन अंतर की सभ मति लुटी ॥

Thaganee sur hai kab sayaam kahai in a(n)tar kee sabh mat luTee ||

ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਸਮ ਹੈ ਚਲਤ ਯੌ ਇਨ ਕੇ ਮਗ ਲਾਜ ਕੀ ਬੇਲ ਤਰਾਕ ਤੁਟੀ ॥੪੫੮॥

मृगनी सम है चलत यौ इन के मग लाज की बेल तराक तुटी ॥४५८॥

miraganee sam hai chalat yau in ke mag laaj kee bel taraak tuTee ||458||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਰੂਪ ਨਿਹਾਰ ਰਹੀ ਤ੍ਰਿਯਾ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਬਿ ਹੋਇ ਇਕਾਠੀ ॥

कान्रह को रूप निहार रही तृया स्याम कहै कबि होइ इकाठी ॥

kaanreh ko roop nihaar rahee tirayaa sayaam kahai kab hoi ikaaThee ||

ਜਿਉ ਸੁਰ ਕੀ ਧੁਨਿ ਕੌ ਸੁਨ ਕੈ ਮ੍ਰਿਗਨੀ ਚਲਿ ਆਵਤ ਜਾਤ ਨ ਨਾਠੀ ॥

जिउ सुर की धुनि कौ सुन कै मृगनी चलि आवत जात न नाठी ॥

jiau sur kee dhun kau sun kai miraganee chal aavat jaat na naaThee ||

ਮੈਨ ਸੋ ਮਤ ਹ੍ਵੈ ਕੂਦਤ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੁ ਛੋਰਿ ਮਨੋ ਸਭ ਲਾਜ ਕੀ ਗਾਠੀ ॥

मैन सो मत ह्वै कूदत कान्रह सु छोरि मनो सभ लाज की गाठी ॥

main so mat havai koodhat kaanreh su chhor mano sabh laaj kee gaaThee ||

ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਮਨੁ ਯੌ ਚੁਰਿ ਗਯੋ ਜਿਮ ਖੋਰਰ ਪਾਥਰ ਪੈ ਚਰਨਾਠੀ ॥੪੫੯॥

गोपिन को मनु यौ चुरि गयो जिम खोरर पाथर पै चरनाठी ॥४५९॥

gopin ko man yau chur gayo jim khorar paathar pai charanaaThee ||459||


ਹਸਿ ਬਾਤ ਕਰੈ ਹਰਿ ਸੋ ਗੁਪੀਆ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜਿਨ ਭਾਗ ਬਡੇ ॥

हसि बात करै हरि सो गुपीआ कबि स्याम कहै जिन भाग बडे ॥

has baat karai har so gupeeaa kab sayaam kahai jin bhaag badde ||

ਮੋਹਿ ਸਭੈ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਇਨ ਕੋ ਪਿਖ ਕੈ ਹਰਿ ਪਾਪਨ ਜਾਲ ਲਡੇ ॥

मोहि सभै प्रगटियो इन को पिख कै हरि पापन जाल लडे ॥

moh sabhai pragaTiyo in ko pikh kai har paapan jaal ladde ||

ਕ੍ਰਿਸਨੰ ਤਨ ਮਧਿ ਬਧੂ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਮਨ ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਆਤੁਰ ਅਤਿ ਗਡੇ ॥

कृसनं तन मधि बधू बृज की मन ह्वै करि आतुर अति गडे ॥

kirasana(n) tan madh badhoo biraj kee man havai kar aatur at gadde ||

ਸੋਊ ਸਤਿ ਕਿਧੋ ਮਨ ਜਾਹਿ ਗਡੇ ਸੁ ਅਧੰਨਿ ਜਿਨੋ ਮਨ ਹੈ ਅਗਡੇ ॥੪੬੦॥

सोऊ सति किधो मन जाहि गडे सु अधंनि जिनो मन है अगडे ॥४६०॥

souoo sat kidho man jaeh gadde su adha(n)n jino man hai agadde ||460||


ਨੈਨ ਚੁਰਾਇ ਮਹਾ ਸੁਖ ਪਾਇ ਕਛੂ ਮੁਸਕਾਇ ਭਯੋ ਹਰਿ ਠਾਢੋ ॥

नैन चुराइ महा सुख पाइ कछू मुसकाइ भयो हरि ठाढो ॥

nain churai mahaa sukh pai kachhoo musakai bhayo har Thaaddo ||

ਮੋਹਿ ਰਹੀ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਮ ਸਭੈ ਅਤਿ ਹੀ ਤਿਨ ਕੈ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਬਾਢੋ ॥

मोहि रही बृज बाम सभै अति ही तिन कै मनि आनंद बाढो ॥

moh rahee biraj baam sabhai at hee tin kai man aana(n)dh baaddo ||

ਜਾ ਭਗਵਾਨ ਕਿਧੋ ਸੀਯ ਜੀਤ ਕੈ ਮਾਰਿ ਡਰਿਯੋ ਰਿਪੁ ਰਾਵਨ ਗਾਢੋ ॥

जा भगवान किधो सीय जीत कै मारि डरियो रिपु रावन गाढो ॥

jaa bhagavaan kidho seey jeet kai maar ddariyo rip raavan gaaddo ||

ਤਾ ਭਗਵਾਨ ਕਿਧੋ ਮੁਖ ਤੇ ਮੁਕਤਾ ਨੁਕਤਾ ਸਮ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਕਾਢੋ ॥੪੬੧॥

ता भगवान किधो मुख ते मुकता नुकता सम अंमृत काढो ॥४६१॥

taa bhagavaan kidho mukh te mukataa nukataa sam a(n)mirat kaaddo ||461||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ਗੋਪੀ ਪ੍ਰਤਿ ॥

कान्रह जू बाच गोपी प्रति ॥

kaanreh joo baach gopee prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਜੁ ਭਯੋ ਝੜ ਹੈ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਖੇਲਨ ਕੀ ਅਬ ਘਾਤ ਬਣੀ ॥

आजु भयो झड़ है जमुना तटि खेलन की अब घात बणी ॥

aaj bhayo jhaR hai jamunaa taT khelan kee ab ghaat banee ||

ਤਜ ਕੈ ਡਰ ਖੇਲ ਕਰੋ ਹਮ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਹਸਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਅਣੀ ॥

तज कै डर खेल करो हम सो कबि स्याम कहियो हसि कान्रह अणी ॥

taj kai ddar khel karo ham so kab sayaam kahiyo has kaanreh anee ||

ਜੋ ਸੁੰਦਰ ਹੈ ਤੁਮ ਮੈ ਸੋਊ ਖੇਲਹੁ ਖੇਲਹੁ ਨਾਹਿ ਜਣੀ ਰੁ ਕਣੀ ॥

जो सुँदर है तुम मै सोऊ खेलहु खेलहु नाहि जणी रु कणी ॥

jo su(n)dhar hai tum mai souoo khelahu khelahu naeh janee r kanee ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹੈ ਹਸਿ ਕੈ ਰਸ ਬੋਲ ਕਿਧੋ ਹਰਤਾ ਜੋਊ ਮਾਨ ਫਣੀ ॥੪੬੨॥

इह भाति कहै हसि कै रस बोल किधो हरता जोऊ मान फणी ॥४६२॥

eeh bhaat kahai has kai ras bol kidho harataa jouoo maan fanee ||462||


ਹਸਿ ਕੈ ਸੁ ਕਹੀ ਬਤੀਆ ਤਿਨ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਜੋ ਰਸ ਰਾਤੋ ॥

हसि कै सु कही बतीआ तिन सो कबि स्याम कहै हरि जो रस रातो ॥

has kai su kahee bateeaa tin so kab sayaam kahai har jo ras raato ||

ਨੈਨ ਮ੍ਰਿਗੀਪਤਿ ਸੇ ਤਿਹ ਕੇ ਇਮ ਚਾਲ ਚਲੈ ਜਿਮ ਗਈਯਰ ਮਾਤੋ ॥

नैन मृगीपति से तिह के इम चाल चलै जिम गईयर मातो ॥

nain mirageepat se teh ke im chaal chalai jim gieeyar maato ||

ਦੇਖਤ ਮੂਰਤਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੀ ਗੋਪਿਨ ਭੂਲਿ ਗਈ ਗ੍ਰਿਹ ਕੀ ਸੁਧ ਸਾਤੋ ॥

देखत मूरति कान्रह की गोपिन भूलि गई गृह की सुध सातो ॥

dhekhat moorat kaanreh kee gopin bhool giee gireh kee sudh saato ||

ਚੀਰ ਗਏ ਉਡ ਕੈ ਤਨ ਕੈ ਅਰੁ ਟੂਟ ਗਯੋ ਨੈਨ ਤੇ ਲਾਜ ਕੋ ਨਾਤੋ ॥੪੬੩॥

चीर गए उड कै तन कै अरु टूट गयो नैन ते लाज को नातो ॥४६३॥

cheer ge udd kai tan kai ar TooT gayo nain te laaj ko naato ||463||


ਕੁਪਿ ਕੈ ਮਧੁ ਕੈਟਭ ਤਾਨਿ ਮਰੇ ਮੁਰਿ ਦੈਤ ਮਰਿਯੋ ਅਪਨੇ ਜਿਨ ਹਾਥਾ ॥

कुपि कै मधु कैटभ तानि मरे मुरि दैत मरियो अपने जिन हाथा ॥

kup kai madh kaiTabh taan mare mur dhait mariyo apane jin haathaa ||

ਜਾਹਿ ਬਿਭੀਛਨ ਰਾਜ ਦਯੋ ਰਿਸਿ ਰਾਵਨ ਕਾਟ ਦਏ ਜਿਹ ਮਾਥਾ ॥

जाहि बिभीछन राज दयो रिसि रावन काट दए जिह माथा ॥

jaeh bibheechhan raaj dhayo ris raavan kaaT dhe jeh maathaa ||

ਸੋ ਤਿਹ ਕੀ ਤਿਹੂ ਲੋਗਨ ਮਧਿ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਚਲੇ ਜਸ ਗਾਥਾ ॥

सो तिह की तिहू लोगन मधि कहै कबि स्याम चले जस गाथा ॥

so teh kee tihoo logan madh kahai kab sayaam chale jas gaathaa ||

ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਰਸ ਕੈ ਹਿਤ ਖੇਲਤ ਹੈ ਫੁਨਿ ਗੋਪਿਨ ਸਾਥਾ ॥੪੬੪॥

सो बृज भूमि बिखै रस कै हित खेलत है फुनि गोपिन साथा ॥४६४॥

so biraj bhoom bikhai ras kai hit khelat hai fun gopin saathaa ||464||


ਹਸਿ ਕੈ ਹਰਿ ਜੂ ਬ੍ਰਿਜ ਮੰਡਲ ਮੈ ਸੰਗ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਇਕ ਹੋਡ ਬਦੀ ॥

हसि कै हरि जू बृज मंडल मै संग गोपिन के इक होड बदी ॥

has kai har joo biraj ma(n)ddal mai sa(n)g gopin ke ik hodd badhee ||

ਸਭ ਧਾਇ ਪਰੈ ਹਮਹੂੰ ਤੁਮਹੂੰ ਇਹ ਭਾਤਿ ਕਹਿਯੋ ਮਿਲਿ ਬੀਚ ਨਦੀ ॥

सभ धाइ परै हमहूँ तुमहूँ इह भाति कहियो मिलि बीच नदी ॥

sabh dhai parai hamahoo(n) tumahoo(n) ieh bhaat kahiyo mil beech nadhee ||

ਜਬ ਜਾਇ ਪਰੇ ਜਮੁਨਾ ਜਲ ਮੈ ਸੰਗ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਭਗਵਾਨ ਜਦੀ ॥

जब जाइ परे जमुना जल मै संग गोपिन के भगवान जदी ॥

jab jai pare jamunaa jal mai sa(n)g gopin ke bhagavaan jadhee ||

ਤਬ ਲੈ ਚੁਭਕੀ ਹਰਿ ਜੀ ਤ੍ਰਿਯ ਕੋ ਸੁ ਲਯੋ ਮੁਖ ਚੂਮ ਕਿਧੋ ਸੋ ਤਦੀ ॥੪੬੫॥

तब लै चुभकी हरि जी तृय को सु लयो मुख चूम किधो सो तदी ॥४६५॥

tab lai chubhakee har jee tiray ko su layo mukh choom kidho so tadhee ||465||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान्रह जू सो ॥

gopee baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਿਲ ਕੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਯਾਮ ਸੋ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਹਸਿ ਬਾਤ ਪ੍ਰਬੀਨਨ ॥

मिल कै सभ ग्वारिन सुँदर स्याम सो स्याम कही हसि बात प्रबीनन ॥

mil kai sabh gavaiaarin su(n)dhar sayaam so sayaam kahee has baat prabeenan ||

ਰਾਜਤ ਜਾਹਿ ਮ੍ਰਿਗੀਪਤਿ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਛਾਜਤ ਚੰਚਲਤਾ ਸਮ ਮੀਨਨ ॥

राजत जाहि मृगीपति से दृग छाजत चंचलता सम मीनन ॥

raajat jaeh mirageepat se dhirag chhaajat cha(n)chalataa sam meenan ||

ਕੰਚਨ ਸੇ ਤਨ ਕਉਲ ਮੁਖੀ ਰਸ ਆਤੁਰ ਹੈ ਕਹਿਯੋ ਰਛਕ ਦੀਨਨ ॥

कंचन से तन कउल मुखी रस आतुर है कहियो रछक दीनन ॥

ka(n)chan se tan kaul mukhee ras aatur hai kahiyo rachhak dheenan ||

ਨੇਹੁ ਬਢਾਇ ਮਹਾ ਸੁਖੁ ਪਾਇ ਕਹਿਯੋ ਸਿਰਿ ਨਿਆਇ ਕੈ ਭਾਤਿ ਅਧੀਨਨ ॥੪੬੬॥

नेहु बढाइ महा सुखु पाइ कहियो सिरि निआइ कै भाति अधीनन ॥४६६॥

neh baddai mahaa sukh pai kahiyo sir niaai kai bhaat adheenan ||466||


ਅਤਿ ਹ੍ਵੈ ਰਿਝਵੰਤ ਕਹਿਓ ਗੁਪੀਆ ਜੁਗ ਤੀਸਰ ਮੈ ਪਤਿ ਭਯੋ ਜੁ ਕਪੀ ॥

अति ह्वै रिझवंत कहिओ गुपीआ जुग तीसर मै पति भयो जु कपी ॥

at havai rijhava(n)t kahio gupeeaa jug teesar mai pat bhayo ju kapee ||

ਜਿਨਿ ਰਾਵਨ ਖੇਤਿ ਮਰਿਓ ਕੁਪ ਕੈ ਜਿਹ ਰੀਝਿ ਬਿਭੀਛਨ ਲੰਕ ਥਪੀ ॥

जिनि रावन खेति मरिओ कुप कै जिह रीझि बिभीछन लंक थपी ॥

jin raavan khet mario kup kai jeh reejh bibheechhan la(n)k thapee ||

ਜਿਹ ਕੀ ਜਗ ਬੀਚ ਪ੍ਰਸਿਧ ਕਲਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਛੁ ਨਾਹਿ ਛਪੀ ॥

जिह की जग बीच प्रसिध कला कबि स्याम कहै कछु नाहि छपी ॥

jeh kee jag beech prasidh kalaa kab sayaam kahai kachh naeh chhapee ||

ਤਿਹ ਸੰਗ ਕਰੈ ਰਸ ਕੀ ਚਰਚਾ ਜਿਨ ਹੂੰ ਤਿਰੀਯਾ ਫੁਨਿ ਚੰਡਿ ਜਪੀ ॥੪੬੭॥

तिह संग करै रस की चरचा जिन हूँ तिरीया फुनि चंडि जपी ॥४६७॥

teh sa(n)g karai ras kee charachaa jin hoo(n) tireeyaa fun cha(n)dd japee ||467||


ਜਉ ਰਸ ਬਾਤ ਕਹੀ ਗੁਪੀਆ ਤਬ ਹੀ ਹਰਿ ਜਵਾਬ ਦਯੋ ਤਿਨ ਸਾਫੀ ॥

जउ रस बात कही गुपीआ तब ही हरि जवाब दयो तिन साफी ॥

jau ras baat kahee gupeeaa tab hee har javaab dhayo tin saafee ||

ਆਈ ਹੋ ਛੋਡਿ ਸਭੈ ਪਤਿ ਕੋ ਤੁਮ ਹੋਇ ਤੁਮੈ ਨ ਮਰੇ ਫੁਨਿ ਮਾਫੀ ॥

आई हो छोडि सभै पति को तुम होइ तुमै न मरे फुनि माफी ॥

aaiee ho chhodd sabhai pat ko tum hoi tumai na mare fun maafee ||

ਹਉ ਤੁਮ ਸੋ ਨਹਿ ਹੇਤ ਕਰੋ ਤੁਮ ਕਾਹੇ ਕਉ ਬਾਮ ਕਰੋ ਰਸ ਲਾਫੀ ॥

हउ तुम सो नहि हेत करो तुम काहे कउ बाम करो रस लाफी ॥

hau tum so neh het karo tum kaahe kau baam karo ras laafee ||

ਇਉ ਕਹਿ ਕੈ ਹਰਿ ਮੋਨ ਭਜੀ ਸੁ ਬਜਾਇ ਉਠਿਯੋ ਮੁਰਲੀ ਮਹਿ ਕਾਫੀ ॥੪੬੮॥

इउ कहि कै हरि मोन भजी सु बजाइ उठियो मुरली महि काफी ॥४६८॥

eiau keh kai har mon bhajee su bajai uThiyo muralee meh kaafee ||468||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ਗੋਪੀ ਸੋਂ ॥

कान्रह बाच गोपी सों ॥

kaanreh baach gopee so(n) ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸਭ ਸੁੰਦਰ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਦਯੋ ਹਰਿ ਕੈ ਹਰਿ ਜਵਾਬ ਜਬੈ ॥

सभ सुँदर गोपिन सो कबि स्याम दयो हरि कै हरि जवाब जबै ॥

sabh su(n)dhar gopin so kab sayaam dhayo har kai har javaab jabai ||

ਨ ਗਈ ਹਰਿ ਮਾਨ ਕਹਿਯੋ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਪ੍ਰਭ ਮੋਹਿ ਰਹੀ ਮੁਖਿ ਦੇਖ ਸਬੈ ॥

न गई हरि मान कहियो गृह को प्रभ मोहि रही मुखि देख सबै ॥

n giee har maan kahiyo gireh ko prabh moh rahee mukh dhekh sabai ||

ਕ੍ਰਿਸਨੰ ਕਰਿ ਲੈ ਅਪਨੇ ਮੁਰਲੀ ਸੁ ਬਜਾਇ ਉਠਿਓ ਜੁਤ ਰਾਗ ਤਬੈ ॥

कृसनं करि लै अपने मुरली सु बजाइ उठिओ जुत राग तबै ॥

kirasana(n) kar lai apane muralee su bajai uThio jut raag tabai ||

ਮਨੋ ਘਾਇਲ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਬ੍ਰਣ ਮੈ ਭਗਵਾਨ ਡਰਿਯੋ ਜਨੁ ਲੋਨ ਅਬੈ ॥੪੬੯॥

मनो घाइल गोपिन के ब्रण मै भगवान डरियो जनु लोन अबै ॥४६९॥

mano ghail gopin ke bran mai bhagavaan ddariyo jan lon abai ||469||


ਜਿਉ ਮ੍ਰਿਗ ਬੀਚ ਮ੍ਰਿਗੀ ਪਿਖੀਐ ਹਰਿ ਤਿਉ ਗਨ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਕੇ ਮਧਿ ਸੋਭੈ ॥

जिउ मृग बीच मृगी पिखीऐ हरि तिउ गन ग्वारिन के मधि सोभै ॥

jiau mirag beech miragee pikheeaai har tiau gan gavaiaarin ke madh sobhai ||

ਦੇਖਿ ਜਿਸੈ ਰਿਪੁ ਰੀਝ ਰਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਨਹੀ ਮਨ ਭੀਤਰ ਛੋਭੈ ॥

देखि जिसै रिपु रीझ रहै कबि स्याम नही मन भीतर छोभै ॥

dhekh jisai rip reejh rahai kab sayaam nahee man bheetar chhobhai ||

ਦੇਖਿ ਜਿਸੈ ਮ੍ਰਿਗ ਧਾਵਤ ਆਵਤ ਚਿਤ ਕਰੈ ਨ ਹਮੈ ਫੁਨਿ ਕੋ ਭੈ ॥

देखि जिसै मृग धावत आवत चित करै न हमै फुनि को भै ॥

dhekh jisai mirag dhaavat aavat chit karai na hamai fun ko bhai ||

ਸੋ ਬਨ ਬੀਚ ਬਿਰਾਜਤ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੋਊ ਪਿਖਵੈ ਤਿਹ ਕੋ ਮਨੁ ਲੋਭੈ ॥੪੭੦॥

सो बन बीच बिराजत कान्रह जोऊ पिखवै तिह को मनु लोभै ॥४७०॥

so ban beech biraajat kaanreh jouoo pikhavai teh ko man lobhai ||470||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान्रह जू सो ॥

gopee baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੋਊ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਬੋਲਿ ਉਠੀ ਹਰਿ ਸੋ ਬਚਨਾ ਜਿਨ ਕੇ ਸਮ ਸੁਧ ਅਮੀ ॥

सोऊ ग्वारिन बोलि उठी हरि सो बचना जिन के सम सुध अमी ॥

souoo gavaiaarin bol uThee har so bachanaa jin ke sam sudh amee ||

ਤਿਹ ਸਾਥ ਲਗੀ ਚਰਚਾ ਕਰਨੇ ਹਰਤਾ ਮਨ ਸਾਧਨ ਸੁਧਿ ਗਮੀ ॥

तिह साथ लगी चरचा करने हरता मन साधन सुधि गमी ॥

teh saath lagee charachaa karane harataa man saadhan sudh gamee ||

ਤਜ ਕੈ ਅਪੁਨੇ ਭਰਤਾ ਹਮਰੀ ਮਤਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਊਪਰਿ ਤੋਹਿ ਰਮੀ ॥

तज कै अपुने भरता हमरी मति कान्रह जू ऊपरि तोहि रमी ॥

taj kai apune bharataa hamaree mat kaanreh joo uoopar toh ramee ||

ਅਤਿ ਹੀ ਤਨ ਕਾਮ ਕਰਾ ਉਪਜੀ ਤੁਮ ਕੋ ਪਿਖਏ ਨਹਿ ਜਾਤ ਛਮੀ ॥੪੭੧॥

अति ही तन काम करा उपजी तुम को पिखए नहि जात छमी ॥४७१॥

at hee tan kaam karaa upajee tum ko pikhe neh jaat chhamee ||471||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ॥

कबियो बाच ॥

kabiyo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਭਗਵਾਨਿ ਲਖੀ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਇਹ ਗ੍ਵਾਰਨਿ ਮੋ ਪਿਖਿ ਮੈਨ ਭਰੀ ॥

भगवानि लखी अपुने मन मै इह ग्वारनि मो पिखि मैन भरी ॥

bhagavaan lakhee apune man mai ieh gavaiaaran mo pikh main bharee ||

ਤਬ ਹੀ ਤਜਿ ਸੰਕ ਸਭੈ ਮਨ ਕੀ ਤਿਨ ਕੇ ਸੰਗਿ ਮਾਨੁਖ ਕੇਲ ਕਰੀ ॥

तब ही तजि संक सभै मन की तिन के संगि मानुख केल करी ॥

tab hee taj sa(n)k sabhai man kee tin ke sa(n)g maanukh kel karee ||

ਹਰਿ ਜੀ ਕਰਿ ਖੇਲ ਕਿਧੌ ਇਨ ਸੋ ਜਨੁ ਕਾਮ ਜਰੀ ਇਹ ਕੀਨ ਜਰੀ ॥

हरि जी करि खेल किधौ इन सो जनु काम जरी इह कीन जरी ॥

har jee kar khel kidhau in so jan kaam jaree ieh keen jaree ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਪਿਖਵੋ ਤੁਮ ਕੌਤੁਕ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹਰਿਯੋ ਕਿ ਹਰੀ ਸੁ ਹਰੀ ॥੪੭੨॥

कबि स्याम कहै पिखवो तुम कौतुक कान्रह हरियो कि हरी सु हरी ॥४७२॥

kab sayaam kahai pikhavo tum kauatuk kaanreh hariyo k haree su haree ||472||


ਜੋ ਜੁਗ ਤੀਸਰ ਮੂਰਤਿ ਰਾਮ ਧਰੀ ਜਿਹ ਅਉਰ ਕਰਿਯੋ ਅਤਿ ਸੀਲਾ ॥

जो जुग तीसर मूरति राम धरी जिह अउर करियो अति सीला ॥

jo jug teesar moorat raam dharee jeh aaur kariyo at seelaa ||

ਸਤ੍ਰਨ ਕੋ ਸੁ ਸੰਘਾਰਿ ਕਹੈ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਕ ਸਾਧਨ ਕੋ ਹਰਿ ਹੀਲਾ ॥

सत्रन को सु संघारि कहै प्रतिपारक साधन को हरि हीला ॥

satran ko su sa(n)ghaar kahai pratipaarak saadhan ko har heelaa ||

ਦਵਾਪਰ ਮੋ ਸੋਊ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਯੋ ਮਰੀਯਾ ਅਰਿ ਕੋ ਧਰੀਯਾ ਪਟ ਪੀਲਾ ॥

दवापर मो सोऊ कान्रह भयो मरीया अरि को धरीया पट पीला ॥

dhavaapar mo souoo kaanreh bhayo mareeyaa ar ko dhareeyaa paT peelaa ||

ਸੋ ਹਰਿ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਹਸਿ ਗੋਪਿਨ ਸਾਥ ਕਰੈ ਰਸ ਲੀਲਾ ॥੪੭੩॥

सो हरि भूमि बिखै बृज की हसि गोपिन साथ करै रस लीला ॥४७३॥

so har bhoom bikhai biraj kee has gopin saath karai ras leelaa ||473||


ਮਾਲਸਿਰੀ ਅਰੁ ਰਾਮਕਲੀ ਸੁਭ ਸਾਰੰਗ ਭਾਵਨ ਸਾਥ ਬਜਾਵੈ ॥

मालसिरी अरु रामकली सुभ सारंग भावन साथ बजावै ॥

maalasiree ar raamakalee subh saara(n)g bhaavan saath bajaavai ||

ਜੈਤਸਿਰੀ ਅਰੁ ਸੁਧ ਮਲ੍ਰਹਾਰ ਬਿਲਾਵਲ ਕੀ ਧੁਨਿ ਕੂਕਿ ਸੁਨਾਵੈ ॥

जैतसिरी अरु सुध मल्रहार बिलावल की धुनि कूकि सुनावै ॥

jaitasiree ar sudh malrahaar bilaaval kee dhun kook sunaavai ||

ਲੈ ਮੁਰਲੀ ਅਪੁਨੇ ਕਰਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਿਧੋ ਅਤਿ ਭਾਵਨ ਸਾਥ ਬਜਾਵੈ ॥

लै मुरली अपुने करि कान्रह किधो अति भावन साथ बजावै ॥

lai muralee apune kar kaanreh kidho at bhaavan saath bajaavai ||

ਪਉਨ ਚਲੈ ਨ ਰਹੈ ਜਮੁਨਾ ਥਿਰ ਮੋਹਿ ਰਹੈ ਧੁਨਿ ਜੋ ਸੁਨਿ ਪਾਵੈ ॥੪੭੪॥

पउन चलै न रहै जमुना थिर मोहि रहै धुनि जो सुनि पावै ॥४७४॥

paun chalai na rahai jamunaa thir moh rahai dhun jo sun paavai ||474||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ਸੁਰ ਸੋ ਫੁਨਿ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਜੋਊ ਭਾਵੈ ॥

कान्रह बजावत है सुर सो फुनि गोपिन के मन मै जोऊ भावै ॥

kaanreh bajaavat hai sur so fun gopin ke man mai jouoo bhaavai ||

ਰਾਮਕਲੀ ਅਰੁ ਸੁਧ ਮਲ੍ਰਹਾਰ ਬਿਲਾਵਲ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਠਟ ਪਾਵੈ ॥

रामकली अरु सुध मल्रहार बिलावल की अति ही ठट पावै ॥

raamakalee ar sudh malrahaar bilaaval kee at hee ThaT paavai ||

ਰੀਝਿ ਰਹੈ ਸੁ ਸੁਰੀ ਅਸੁਰੀ ਮ੍ਰਿਗ ਛਾਡਿ ਮ੍ਰਿਗੀ ਬਨ ਕੀ ਚਲਿ ਆਵੈ ॥

रीझि रहै सु सुरी असुरी मृग छाडि मृगी बन की चलि आवै ॥

reejh rahai su suree asuree mirag chhaadd miragee ban kee chal aavai ||

ਸੋ ਮੁਰਲੀ ਮਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਪ੍ਰਬੀਨ ਮਨੋ ਕਰਿ ਰਾਗਨ ਰੂਪ ਦਿਖਾਵੈ ॥੪੭੫॥

सो मुरली महि स्याम प्रबीन मनो करि रागन रूप दिखावै ॥४७५॥

so muralee meh sayaam prabeen mano kar raagan roop dhikhaavai ||475||


ਸੁਨ ਕੈ ਮੁਰਲੀ ਧੁਨਿ ਕਾਨਰ ਕੀ ਮਨ ਮੈ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰਿਨ ਰੀਝਿ ਰਹੀ ਹੈ ॥

सुन कै मुरली धुनि कानर की मन मै सभ ग्वारिन रीझि रही है ॥

sun kai muralee dhun kaanar kee man mai sabh gavaiaarin reejh rahee hai ||

ਜੋ ਗ੍ਰਿਹ ਲੋਗਨ ਬਾਤ ਕਹੀ ਤਿਨ ਹੂੰ ਫੁਨਿ ਊਪਰਿ ਸੀਸ ਸਹੀ ਹੈ ॥

जो गृह लोगन बात कही तिन हूँ फुनि ऊपरि सीस सही है ॥

jo gireh logan baat kahee tin hoo(n) fun uoopar sees sahee hai ||

ਸਾਮੁਹਿ ਧਾਇ ਚਲੀ ਹਰਿ ਕੇ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਹੈ ॥

सामुहि धाइ चली हरि के उपमा तिह की कबि स्याम कही है ॥

saamuh dhai chalee har ke upamaa teh kee kab sayaam kahee hai ||

ਮਾਨਹੁ ਪੇਖਿ ਸਮਸਨ ਕੇ ਮੁਖ ਧਾਇ ਚਲੀ ਮਿਲਿ ਜੂਥ ਅਹੀ ਹੈ ॥੪੭੬॥

मानहु पेखि समसन के मुख धाइ चली मिलि जूथ अही है ॥४७६॥

maanahu pekh samasan ke mukh dhai chalee mil jooth ahee hai ||476||


ਜਿਨਿ ਰੀਝਿ ਬਿਭੀਛਨ ਰਾਜੁ ਦਯੋ ਕੁਪ ਕੈ ਦਸ ਸੀਸ ਦਈ ਜਿਨਿ ਪੀੜਾ ॥

जिनि रीझि बिभीछन राजु दयो कुप कै दस सीस दई जिनि पीड़ा ॥

jin reejh bibheechhan raaj dhayo kup kai dhas sees dhiee jin peeRaa ||

ਮਾਰੁਤ ਹ੍ਵੈ ਦਲ ਦੈਤਨ ਕੋ ਛਿਨ ਮੈ ਘਨ ਸੋ ਕਰ ਦੀਨ ਉਝੀੜਾ ॥

मारुत ह्वै दल दैतन को छिन मै घन सो कर दीन उझीड़ा ॥

maarut havai dhal dhaitan ko chhin mai ghan so kar dheen ujheeRaa ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਯੋ ਮੁਰ ਨਾਮ ਮਹਾ ਸੁਰ ਆਪਨ ਹੀ ਲੰਘਿ ਮਾਰਗੁ ਭੀੜਾ ॥

जाहि मरियो मुर नाम महा सुर आपन ही लंघि मारगु भीड़ा ॥

jaeh mariyo mur naam mahaa sur aapan hee la(n)gh maarag bheeRaa ||

ਸੋ ਫੁਨਿ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਸੰਗਿ ਗੋਪਿਨ ਕੈ ਸੁ ਕਰੈ ਰਸ ਕ੍ਰੀੜਾ ॥੪੭੭॥

सो फुनि भूमि बिखै बृज की संगि गोपिन कै सु करै रस क्रीड़ा ॥४७७॥

so fun bhoom bikhai biraj kee sa(n)g gopin kai su karai ras kreeRaa ||477||


ਖੇਲਤ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋਊ ਤਿਨ ਸੋ ਜਿਹ ਕੀ ਸੁ ਕਰੈ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਜਾਤ੍ਰਾ ॥

खेलत कान्रह सोऊ तिन सो जिह की सु करै सभ ही जग जात्रा ॥

khelat kaanreh souoo tin so jeh kee su karai sabh hee jag jaatraa ||

ਸੋ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੋ ਪਤਿ ਹੈ ਤਿਨ ਜੀਵਨ ਕੇ ਬਲ ਕੀ ਪਰ ਮਾਤ੍ਰਾ ॥

सो सभ ही जग को पति है तिन जीवन के बल की पर मात्रा ॥

so sabh hee jag ko pat hai tin jeevan ke bal kee par maatraa ||

ਰਾਮ ਹ੍ਵੈ ਰਾਵਨ ਸੋ ਜਿਨ ਹੂੰ ਕੁਪਿ ਜੁਧ ਕਰਿਯੋ ਕਰਿ ਕੈ ਪ੍ਰਮ ਛਾਤ੍ਰਾ ॥

राम ह्वै रावन सो जिन हूँ कुपि जुध करियो करि कै प्रम छात्रा ॥

raam havai raavan so jin hoo(n) kup judh kariyo kar kai pram chhaatraa ||

ਸੋ ਹਰਿ ਬੀਚ ਅਹੀਰਿਨ ਕੇ ਕਰਿਬੇ ਕਹੁ ਕਉਤੁਕ ਕੀਨ ਸੁ ਨਾਤ੍ਰਾ ॥੪੭੮॥

सो हरि बीच अहीरिन के करिबे कहु कउतुक कीन सु नात्रा ॥४७८॥

so har beech aheerin ke karibe kahu kautuk keen su naatraa ||478||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬੈ ਕ੍ਰਿਸਨ ਸੰਗ ਗੋਪੀਅਨ ਕਰੀ ਮਾਨੁਖੀ ਬਾਨ ॥

जबै कृसन संग गोपीअन करी मानुखी बान ॥

jabai kirasan sa(n)g gopeean karee maanukhee baan ||

ਸਭ ਗੋਪੀ ਤਬ ਯੌ ਲਖਿਯੋ ਭਯੋ ਬਸ੍ਰਯ ਭਗਵਾਨ ॥੪੭੯॥

सभ गोपी तब यौ लखियो भयो बस्रय भगवान ॥४७९॥

sabh gopee tab yau lakhiyo bhayo basray bhagavaan ||479||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਤਬੈ ਸੰਗ ਗੋਪਿਨ ਕੇ ਤਬ ਹੀ ਫੁਨਿ ਅੰਤ੍ਰ ਧਿਆਨ ਹ੍ਵੈ ਗਈਯਾ ॥

कान्रह तबै संग गोपिन के तब ही फुनि अंत्र धिआन ह्वै गईया ॥

kaanreh tabai sa(n)g gopin ke tab hee fun a(n)tr dhiaan havai gieeyaa ||

ਖੇ ਕਹ ਗਯੋ ਧਰਨੀ ਧਸਿ ਗਯੋ ਕਿਧੋ ਮਧਿ ਰਹਿਯੋ ਸਮਝਿਯੋ ਨਹੀ ਪਈਯਾ ॥

खे कह गयो धरनी धसि गयो किधो मधि रहियो समझियो नही पईया ॥

khe keh gayo dharanee dhas gayo kidho madh rahiyo samajhiyo nahee pieeyaa ||


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