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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਪੰਜਾਬੀ ---
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ਭੰਜਨ ਭਉ ਅਨਭੈ ਭਗਵਾਨ ਸੁ ਦੇਤ ਸਭੈ ਜਨ ਕੋ ਅਰੁ ਲੈ ਰੇ ॥

भंजन भउ अनभै भगवान सु देत सभै जन को अरु लै रे ॥

bha(n)jan bhau anabhai bhagavaan su dhet sabhai jan ko ar lai re ||

ਕਿਉ ਮਘਵਾ ਤੁਮ ਪੂਜਨ ਜਾਤ ਕਰੋ ਤੁਮ ਸੇਵ ਹਿਤੰ ਚਿਤ ਕੈ ਰੇ ॥

किउ मघवा तुम पूजन जात करो तुम सेव हितं चित कै रे ॥

kiau maghavaa tum poojan jaat karo tum sev hita(n) chit kai re ||

ਧ੍ਰਯਾਨ ਧਰੋ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲ ਕੈ ਸਭ ਬਾਤਨ ਕੋ ਤੁਮ ਕੋ ਫਲ ਦੈ ਰੇ ॥੩੩੮॥

ध्रयान धरो सभ ही मिल कै सभ बातन को तुम को फल दै रे ॥३३८॥

dhrayaan dharo sabh hee mil kai sabh baatan ko tum ko fal dhai re ||338||


ਬਾਸਵ ਜਗ੍ਰਯਨ ਕੈ ਬਸਿ ਮੇਘ ਕਿਧੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਇਹ ਬਾਤ ਉਚਾਰੈ ॥

बासव जग्रयन कै बसि मेघ किधो ब्रहमा इह बात उचारै ॥

baasav jagrayan kai bas megh kidho brahamaa ieh baat uchaarai ||

ਲੋਗਨ ਕੇ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਨ ਕੋ ਹਰਿ ਸੂਰਜ ਮੈ ਹੁਇ ਕੈ ਜਲ ਡਾਰੈ ॥

लोगन के प्रतिपारन को हरि सूरज मै हुइ कै जल डारै ॥

logan ke pratipaaran ko har sooraj mai hui kai jal ddaarai ||

ਕਉਤੁਕ ਦੇਖਤ ਜੀਵਨ ਕੋ ਪਿਖਿ ਕਉਤੁਕ ਹ੍ਵੈ ਸਿਵ ਤਾਹਿ ਸੰਘਾਰੈ ॥

कउतुक देखत जीवन को पिखि कउतुक ह्वै सिव ताहि संघारै ॥

kautuk dhekhat jeevan ko pikh kautuk havai siv taeh sa(n)ghaarai ||

ਹੈ ਵਹ ਏਕ ਕਿਧੋ ਸਰਤਾ ਸਮ ਬਾਹਨ ਕੇ ਜਮ ਬਾਹੇ ਬਿਥਾਰੈ ॥੩੩੯॥

है वह एक किधो सरता सम बाहन के जम बाहे बिथारै ॥३३९॥

hai veh ek kidho sarataa sam baahan ke jam baahe bithaarai ||339||


ਪਾਥਰ ਪੈ ਜਲ ਪੈ ਨਗ ਪੈ ਤਰ ਪੈ ਧਰ ਪੈ ਅਰੁ ਅਉਰ ਨਰੀ ਹੈ ॥

पाथर पै जल पै नग पै तर पै धर पै अरु अउर नरी है ॥

paathar pai jal pai nag pai tar pai dhar pai ar aaur naree hai ||

ਦੇਵਨ ਪੈ ਅਰੁ ਦੈਤਨ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਅਉ ਮੁਰਾਰਿ ਹਰੀ ਹੈ ॥

देवन पै अरु दैतन पै कबि स्याम कहै अउ मुरारि हरी है ॥

dhevan pai ar dhaitan pai kab sayaam kahai aau muraar haree hai ||

ਪਛਨ ਪੈ ਮ੍ਰਿਗਰਾਜਨ ਪੈ ਮ੍ਰਿਗ ਕੇ ਗਨ ਪੈ ਫੁਨਿ ਹੋਤ ਖਰੀ ਹੈ ॥

पछन पै मृगराजन पै मृग के गन पै फुनि होत खरी है ॥

pachhan pai miragaraajan pai mirag ke gan pai fun hot kharee hai ||

ਭੇਦ ਕਹਿਯੋ ਇਹ ਬਾਤ ਸਭੈ ਇਨਹੂੰ ਇਹ ਕੀ ਕਹਾ ਪੂਜ ਕਰੀ ਹੈ ॥੩੪੦॥

भेद कहियो इह बात सभै इनहूँ इह की कहा पूज करी है ॥३४०॥

bhedh kahiyo ieh baat sabhai inahoo(n) ieh kee kahaa pooj karee hai ||340||


ਤਬ ਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਹਰਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਨੰਦ ਪੈ ਹਮਰੀ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨਿ ਲਈਯੈ ॥

तब ही हसि कै हरि बात कही नंद पै हमरी बिनती सुनि लईयै ॥

tab hee has kai har baat kahee na(n)dh pai hamaree binatee sun lieeyai ||

ਪੂਜਹੁ ਬਿਪਨ ਕੋ ਮੁਖ ਗਊਅਨ ਪੂਜਨ ਜਾ ਗਿਰਿ ਹੈ ਤਹ ਜਈਯੈ ॥

पूजहु बिपन को मुख गऊअन पूजन जा गिरि है तह जईयै ॥

poojahu bipan ko mukh guooan poojan jaa gir hai teh jieeyai ||

ਗਊਅਨ ਕੋ ਪਯ ਪੀਜਤ ਹੈ ਗਿਰਿ ਕੇ ਚੜ੍ਰਹਿਐ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਪਈਯੈ ॥

गऊअन को पय पीजत है गिरि के चड़्रहिऐ मनि आनंद पईयै ॥

guooan ko pay peejat hai gir ke chaRrahiaai man aana(n)dh pieeyai ||

ਦਾਨ ਦਏ ਤਿਨ ਕੇ ਜਸੁ ਹ੍ਯਾਂ ਪਰਲੋਕ ਗਏ ਜੁ ਦਯੋ ਸੋਊ ਖਈਯੈ ॥੩੪੧॥

दान दए तिन के जसु ह्याँ परलोक गए जु दयो सोऊ खईयै ॥३४१॥

dhaan dhe tin ke jas hayaa(n) paralok ge ju dhayo souoo khieeyai ||341||


ਤਬ ਹੀ ਭਗਵਾਨ ਕਹੀ ਪਿਤ ਸੋ ਇਕ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਤੁ ਕਹੋ ਮਮ ਤੋ ਸੋ ॥

तब ही भगवान कही पित सो इक बात सुनो तु कहो मम तो सो ॥

tab hee bhagavaan kahee pit so ik baat suno ta kaho mam to so ||

ਪੂਜਹੁ ਜਾਇ ਸਬੈ ਗਿਰਿ ਕੌ ਤੁਮ ਇੰਦ੍ਰ ਕਰੈ ਕੁਪਿ ਕਿਆ ਫੁਨਿ ਤੋ ਸੋ ॥

पूजहु जाइ सबै गिरि कौ तुम इंद्र करै कुपि किआ फुनि तो सो ॥

poojahu jai sabai gir kau tum i(n)dhr karai kup kiaa fun to so ||

ਮੋ ਸੋ ਸੁਪੂਤ ਭਯੋ ਤੁਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਮਾਰਿ ਡਰੋ ਮਘਵਾ ਸੰਗਿ ਝੋਸੋ ॥

मो सो सुपूत भयो तुमरे गृहि मारि डरो मघवा संगि झोसो ॥

mo so supoot bhayo tumare gireh maar ddaro maghavaa sa(n)g jhoso ||

ਰਹਸਿ ਕਹੀ ਪਿਤ ਪਾਰਥ ਕੀ ਤਜਿ ਹੈ ਇਹ ਜਾ ਹਮਰੀ ਅਨ ਮੋ ਸੋ ॥੩੪੨॥

रहसि कही पित पारथ की तजि है इह जा हमरी अन मो सो ॥३४२॥

rahas kahee pit paarath kee taj hai ieh jaa hamaree an mo so ||342||


ਤਾਤ ਕੀ ਬਾਤ ਜੁ ਨੰਦ ਸੁਨੀ ਸਭ ਬਾਤ ਭਲੀ ਸਿਰ ਊਪਰ ਬਾਧੀ ॥

तात की बात जु नंद सुनी सभ बात भली सिर ऊपर बाधी ॥

taat kee baat ju na(n)dh sunee sabh baat bhalee sir uoopar baadhee ||

ਬਾਕੋ ਕੀ ਕੈ ਮੁਰਵੀ ਤਨ ਕੈ ਧਨੁ ਤੀਛਨ ਮਤ ਮਹਾ ਸਰ ਸਾਧੀ ॥

बाको की कै मुरवी तन कै धनु तीछन मत महा सर साधी ॥

baako kee kai muravee tan kai dhan teechhan mat mahaa sar saadhee ||

ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਸੁਨਤਿਯੋ ਇਹ ਬਾਤ ਕਬੁਧਿ ਗੀ ਛੂਟਿ ਚਿਰੀ ਜਿਹ ਫਾਧੀ ॥

स्रउनन मै सुनतियो इह बात कबुधि गी छूटि चिरी जिह फाधी ॥

sraunan mai sunatiyo ieh baat kabudh gee chhooT chiree jeh faadhee ||

ਮੋਹਿ ਕੀ ਬਾਰਿਦ ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਗਿਆਨ ਨਿਵਾਰ ਦਈ ਉਮਡੀ ਜਨੁ ਆਂਧੀ ॥੩੪੩॥

मोहि की बारिद ह्वै करि गिआन निवार दई उमडी जनु आँधी ॥३४३॥

moh kee baaridh havai kar giaan nivaar dhiee umaddee jan aa(n)dhee ||343||


ਨੰਦ ਬੁਲਾਇ ਕੈ ਗੋਪ ਲਏ ਹਰਿ ਆਇਸੁ ਮਾਨਿ ਸਿਰ ਊਪਰ ਲੀਆ ॥

नंद बुलाइ कै गोप लए हरि आइसु मानि सिर ऊपर लीआ ॥

na(n)dh bulai kai gop le har aais maan sir uoopar leeaa ||

ਪੂਜਹੁ ਗਊਅਨ ਅਉ ਮੁਖ ਬਿਪਨ ਭਈਅਨ ਸੋ ਇਹ ਆਇਸੁ ਕੀਆ ॥

पूजहु गऊअन अउ मुख बिपन भईअन सो इह आइसु कीआ ॥

poojahu guooan aau mukh bipan bhieean so ieh aais keeaa ||

ਫੇਰਿ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਤਉ ਕਹਿਯੋ ਤੋ ਸੋ ਗ੍ਯਾਨ ਭਲੋ ਮਨ ਮੈ ਸਮਝੀਆ ॥

फेरि कहियो हम तउ कहियो तो सो ग्यान भलो मन मै समझीआ ॥

fer kahiyo ham tau kahiyo to so gayaan bhalo man mai samajheeaa ||

ਚਿਤ ਦਯੋ ਸਭਨੋ ਹਮ ਸੋ ਤਿਹੁ ਲੋਗਨ ਕੋ ਪਤਿ ਚਿਤਨ ਕੀਆ ॥੩੪੪॥

चित दयो सभनो हम सो तिहु लोगन को पति चितन कीआ ॥३४४॥

chit dhayo sabhano ham so tih logan ko pat chitan keeaa ||344||


ਗੋਪ ਚਲੇ ਉਠ ਕੈ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪਤਿ ਕੋ ਫੁਨਿ ਆਇਸੁ ਪਾਈ ॥

गोप चले उठ कै गृह को बृज के पति को फुनि आइसु पाई ॥

gop chale uTh kai gireh ko biraj ke pat ko fun aais paiee ||

ਅਛਤ ਧੂਪ ਪੰਚਾਮ੍ਰਿਤ ਦੀਪਕ ਪੂਜਨ ਕੀ ਸਭ ਭਾਤਿ ਬਨਾਈ ॥

अछत धूप पंचामृत दीपक पूजन की सभ भाति बनाई ॥

achhat dhoop pa(n)chaamirat dheepak poojan kee sabh bhaat banaiee ||

ਲੈ ਕੁਰਬੇ ਅਪਨੈ ਸਭ ਸੰਗਿ ਚਲੇ ਗਿਰਿ ਕੌ ਸਭ ਢੋਲ ਬਜਾਈ ॥

लै कुरबे अपनै सभ संगि चले गिरि कौ सभ ढोल बजाई ॥

lai kurabe apanai sabh sa(n)g chale gir kau sabh ddol bajaiee ||

ਨੰਦ ਚਲਿਯੋ ਜਸੁਧਾਊ ਚਲੀ ਭਗਵਾਨ ਚਲੇ ਮੁਸਲੀ ਸੰਗਿ ਭਾਈ ॥੩੪੫॥

नंद चलियो जसुधाऊ चली भगवान चले मुसली संगि भाई ॥३४५॥

na(n)dh chaliyo jasudhaauoo chalee bhagavaan chale musalee sa(n)g bhaiee ||345||


ਨੰਦ ਚਲਿਯੋ ਕੁਰਬੇ ਸੰਗਿ ਲੈ ਕਰਿ ਤੀਰ ਜਬੈ ਗਿਰਿ ਕੇ ਚਲਿ ਆਯੋ ॥

नंद चलियो कुरबे संगि लै करि तीर जबै गिरि के चलि आयो ॥

na(n)dh chaliyo kurabe sa(n)g lai kar teer jabai gir ke chal aayo ||

ਗਊਅਨ ਘਾਸ ਚਰਾਇਤ ਸੋ ਬਹੁ ਬਿਪਨ ਖੀਰ ਆਹਾਰ ਖਵਾਯੋ ॥

गऊअन घास चराइत सो बहु बिपन खीर आहार खवायो ॥

guooan ghaas charait so bahu bipan kheer aahaar khavaayo ||

ਆਪ ਪਰੋਸਨ ਲਾਗ ਜਦੁਪਤਿ ਗੋਪ ਸਭੈ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

आप परोसन लाग जदुपति गोप सभै मन मै सुख पायो ॥

aap parosan laag jadhupat gop sabhai man mai sukh paayo ||

ਬਾਰ ਚੜਾਇ ਲਏ ਰਥ ਪੈ ਚਲ ਕੈ ਇਹ ਕਉਤਕ ਅਉਰ ਬਨਾਯੋ ॥੩੪੬॥

बार चड़ाइ लए रथ पै चल कै इह कउतक अउर बनायो ॥३४६॥

baar chaRai le rath pai chal kai ieh kautak aaur banaayo ||346||


ਕਉਤਕ ਏਕ ਬਿਚਾਰ ਜਦੁਪਤਿ ਸੂਰਤਿ ਏਕ ਧਰੀ ਗਿਰ ਬਾਕੀ ॥

कउतक एक बिचार जदुपति सूरति एक धरी गिर बाकी ॥

kautak ek bichaar jadhupat soorat ek dharee gir baakee ||

ਸ੍ਰਿੰਗ ਬਨਾਇ ਧਰੀ ਨਗ ਕੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਜਹ ਗਮ੍ਰਯ ਨ ਕਾ ਕੀ ॥

सृंग बनाइ धरी नग कै कबि स्याम कहै जह गम्रय न का की ॥

sira(n)g banai dharee nag kai kab sayaam kahai jeh gamray na kaa kee ||

ਭੋਜਨ ਪਾਤ ਪ੍ਰਤਛਿ ਕਿਧੋ ਵਹ ਬਾਤ ਲਖੀ ਨ ਪਰੈ ਕਛੁ ਵਾ ਕੀ ॥

भोजन पात प्रतछि किधो वह बात लखी न परै कछु वा की ॥

bhojan paat pratachh kidho veh baat lakhee na parai kachh vaa kee ||

ਕਉਤਕ ਏਕ ਲਖੈ ਭਗਵਾਨ ਅਉ ਜੋ ਪਿਖਵੈ ਅਟਕੈ ਮਤਿ ਤਾ ਕੀ ॥੩੪੭॥

कउतक एक लखै भगवान अउ जो पिखवै अटकै मति ता की ॥३४७॥

kautak ek lakhai bhagavaan aau jo pikhavai aTakai mat taa kee ||347||


ਤੌ ਭਗਵਾਨ ਤਬੈ ਹਸਿ ਕੈ ਸਮ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਬਾਤ ਤਿਨੈ ਸੰਗਿ ਭਾਖੀ ॥

तौ भगवान तबै हसि कै सम अंमृत बात तिनै संगि भाखी ॥

tau bhagavaan tabai has kai sam a(n)mirat baat tinai sa(n)g bhaakhee ||

ਭੋਜਨ ਖਾਤ ਦਯੋ ਹਮਰੋ ਗਿਰਿ ਲੋਕ ਸਭੈ ਪਿਖਵੋ ਤੁਮ ਆਖੀ ॥

भोजन खात दयो हमरो गिरि लोक सभै पिखवो तुम आखी ॥

bhojan khaat dhayo hamaro gir lok sabhai pikhavo tum aakhee ||

ਹੋਇ ਰਹੇ ਬਿਸਮੈ ਸਭ ਗੋਪ ਸੁਨੀ ਹਰਿ ਕੇ ਮੁਖ ਤੇ ਜਬ ਸਾਖੀ ॥

होइ रहे बिसमै सभ गोप सुनी हरि के मुख ते जब साखी ॥

hoi rahe bisamai sabh gop sunee har ke mukh te jab saakhee ||

ਗਿਆਨ ਜਨਾਵਰ ਕੀ ਲਈ ਬਾਜ ਹ੍ਵੈ ਗਵਾਰਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਦਈ ਜਬ ਚਾਖੀ ॥੩੪੮॥

गिआन जनावर की लई बाज ह्वै गवारन कान्रह दई जब चाखी ॥३४८॥

giaan janaavar kee liee baaj havai gavaaran kaanreh dhiee jab chaakhee ||348||


ਅੰਜੁਲ ਜੋਰਿ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਜਨ ਕੋਟਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੈ ਹਰਿ ਆਗੇ ॥

अंजुल जोरि सभै बृज के जन कोटि प्रनाम करै हरि आगे ॥

a(n)jul jor sabhai biraj ke jan koT pranaam karai har aage ||

ਭੂਲ ਗਈ ਸਭ ਕੋ ਮਘਵਾ ਸੁਧਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹੀ ਕੇ ਰਸ ਭੀਤਰ ਪਾਗੇ ॥

भूल गई सभ को मघवा सुधि कान्रह ही के रस भीतर पागे ॥

bhool giee sabh ko maghavaa sudh kaanreh hee ke ras bheetar paage ||

ਸੋਵਤ ਥੇ ਜੁ ਪਰੇ ਬਿਖ ਮੈ ਸਭ ਧ੍ਯਾਨ ਲਗੇ ਹਰਿ ਕੇ ਜਨ ਜਾਗੇ ॥

सोवत थे जु परे बिख मै सभ ध्यान लगे हरि के जन जागे ॥

sovat the ju pare bikh mai sabh dhayaan lage har ke jan jaage ||

ਅਉਰ ਗਈ ਸੁਧ ਭੂਲ ਸਭੋ ਇਕ ਕਾਨ੍ਰਹ ਹੀ ਕੇ ਰਸ ਮੈ ਅਨੁਰਾਗੇ ॥੩੪੯॥

अउर गई सुध भूल सभो इक कान्रह ही के रस मै अनुरागे ॥३४९॥

aaur giee sudh bhool sabho ik kaanreh hee ke ras mai anuraage ||349||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਸਭ ਕੋ ਹਸਿ ਕੇ ਮਿਲਿ ਧਾਮਿ ਚਲੋ ਜੋਊ ਹੈ ਹਰਤਾ ਅਘ ॥

कान्रह कही सभ को हसि के मिलि धामि चलो जोऊ है हरता अघ ॥

kaanreh kahee sabh ko has ke mil dhaam chalo jouoo hai harataa agh ||

ਨੰਦ ਚਲਿਯੋ ਬਲਭਦ੍ਰ ਚਲਿਯੋ ਜਸੁਧਾ ਊ ਚਲੀ ਨੰਦ ਲਾਲ ਬਿਨਾਨਘ ॥

नंद चलियो बलभद्र चलियो जसुधा ऊ चली नंद लाल बिनानघ ॥

na(n)dh chaliyo balabhadhr chaliyo jasudhaa uoo chalee na(n)dh laal binaanagh ||

ਪੂਜ ਜਬੈ ਇਨਹੂੰ ਨ ਕਰੀ ਤਬ ਹੀ ਕੁਪਿਓ ਇਨ ਪੈ ਧਰਤਾ ਪ੍ਰਘ ॥

पूज जबै इनहूँ न करी तब ही कुपिओ इन पै धरता प्रघ ॥

pooj jabai inahoo(n) na karee tab hee kupio in pai dharataa pragh ||

ਬੇਦਨ ਮਧ ਕਹੀ ਇਨਿ ਭੀਮ ਤੇ ਮਾਰਿ ਡਰਿਯੋ ਛਲ ਸੋ ਪਤਵਾ ਮਘ ॥੩੫੦॥

बेदन मध कही इनि भीम ते मारि डरियो छल सो पतवा मघ ॥३५०॥

bedhan madh kahee in bheem te maar ddariyo chhal so patavaa magh ||350||


ਭੂ ਸੁਤ ਸੋ ਲਰ ਕੈ ਜਿਨ ਹੂੰ ਨਵਸਾਤ ਛੁਡਾਇ ਲਈ ਬਰਮੰਙਾ ॥

भू सुत सो लर कै जिन हूँ नवसात छुडाइ लई बरमंङा ॥

bhoo sut so lar kai jin hoo(n) navasaat chhuddai liee barama(n)n(g)aa ||

ਆਦਿ ਸਤਜੁਗ ਕੇ ਮੁਰ ਕੇ ਗੜ ਤੋਰਿ ਦਏ ਸਭ ਜਿਉ ਕਚ ਬੰਙਾ ॥

आदि सतजुग के मुर के गड़ तोरि दए सभ जिउ कच बंङा ॥

aadh satajug ke mur ke gaR tor dhe sabh jiau kach ba(n)n(g)aa ||

ਹੈ ਕਰਤਾ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੋ ਅਰੁ ਦੇਵਨ ਹਾਰ ਇਹੀ ਜੁਗ ਸੰਙਾ ॥

है करता सभ ही जग को अरु देवन हार इही जुग संङा ॥

hai karataa sabh hee jag ko ar dhevan haar ihee jug sa(n)n(g)aa ||

ਲੋਕਨ ਕੋ ਪਤਿ ਸੋ ਮਤਿ ਮੰਦ ਬਿਬਾਦ ਕਰੈ ਮਘਵਾ ਮਤਿ ਲੰਙਾ ॥੩੫੧॥

लोकन को पति सो मति मंद बिबाद करै मघवा मति लंङा ॥३५१॥

lokan ko pat so mat ma(n)dh bibaadh karai maghavaa mat la(n)n(g)aa ||351||


ਗੋਪਨ ਸੋ ਖਿਝ ਕੈ ਮਘਵਾ ਤਜਿ ਕੈ ਮਨਿ ਆਨੰਦ ਕੋਪ ਰਚੇ ॥

गोपन सो खिझ कै मघवा तजि कै मनि आनंद कोप रचे ॥

gopan so khijh kai maghavaa taj kai man aana(n)dh kop rache ||

ਸੰਗਿ ਮੇਘਨ ਜਾਇ ਕਹੀ ਬਰਖੋ ਬ੍ਰਿਜ ਪੈ ਰਸ ਬੀਰ ਹੀ ਮਧ ਗਚੇ ॥

संगि मेघन जाइ कही बरखो बृज पै रस बीर ही मध गचे ॥

sa(n)g meghan jai kahee barakho biraj pai ras beer hee madh gache ||

ਕਰੀਯੋ ਬਰਖਾ ਇਤਨੀ ਉਨ ਪੈ ਜਿਹ ਤੇ ਫੁਨਿ ਗੋਪ ਨ ਏਕ ਬਚੇ ॥

करीयो बरखा इतनी उन पै जिह ते फुनि गोप न एक बचे ॥

kareeyo barakhaa itanee un pai jeh te fun gop na ek bache ||

ਸਭ ਭੈਨਨ ਭ੍ਰਾਤਨ ਤਾਤਨ ਪਊਤ੍ਰਨ ਤਊਅਨ ਮਾਰਹੁ ਸਾਥ ਚਚੇ ॥੩੫੨॥

सभ भैनन भ्रातन तातन पऊत्रन तऊअन मारहु साथ चचे ॥३५२॥

sabh bhainan bhraatan taatan puootran tuooan maarahu saath chache ||352||


ਆਇਸੁ ਮਾਨਿ ਪੁਰੰਦਰ ਕੋ ਅਪਨੇ ਸਭ ਮੇਘਨ ਕਾਛ ਸੁ ਕਾਛੇ ॥

आइसु मानि पुरंदर को अपने सभ मेघन काछ सु काछे ॥

aais maan pura(n)dhar ko apane sabh meghan kaachh su kaachhe ||

ਧਾਇ ਚਲੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਮਰਬੇ ਕਹੁ ਘੇਰਿ ਦਸੋ ਦਿਸ ਤੇ ਘਨ ਆਛੇ ॥

धाइ चले बृज के मरबे कहु घेरि दसो दिस ते घन आछे ॥

dhai chale biraj ke marabe kahu gher dhaso dhis te ghan aachhe ||

ਕੋਪ ਭਰੇ ਅਰੁ ਬਾਰਿ ਭਰੇ ਬਧਬੇ ਕਉ ਚਲੇ ਚਰੀਆ ਜੋਊ ਬਾਛੇ ॥

कोप भरे अरु बारि भरे बधबे कउ चले चरीआ जोऊ बाछे ॥

kop bhare ar baar bhare badhabe kau chale chareeaa jouoo baachhe ||

ਛਿਪ੍ਰ ਚਲੇ ਕਰਬੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕਾਰਜ ਛੋਡਿ ਚਲੇ ਬਨਿਤਾ ਸੁਤ ਪਾਛੇ ॥੩੫੩॥

छिप्र चले करबे नृप कारज छोडि चले बनिता सुत पाछे ॥३५३॥

chhipr chale karabe nirap kaaraj chhodd chale banitaa sut paachhe ||353||


ਦੈਤ ਸੰਖਾਸੁਰ ਕੇ ਮਰਬੇ ਕਹੁ ਰੂਪੁ ਧਰਿਯੋ ਜਲ ਮੈ ਜਿਨਿ ਮਛਾ ॥

दैत संखासुर के मरबे कहु रूपु धरियो जल मै जिनि मछा ॥

dhait sa(n)khaasur ke marabe kahu roop dhariyo jal mai jin machhaa ||

ਸਿੰਧੁ ਮਥਿਯੋ ਜਬ ਹੀ ਅਸੁਰਾਸੁਰ ਮੇਰੁ ਤਰੈ ਭਯੋ ਕਛਪ ਹਛਾ ॥

सिंधु मथियो जब ही असुरासुर मेरु तरै भयो कछप हछा ॥

si(n)dh mathiyo jab hee asuraasur mer tarai bhayo kachhap hachhaa ||

ਸੋ ਅਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਯੋ ਇਹ ਠਉਰਿ ਚਰਾਵਤ ਹੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਸਭ ਬਛਾ ॥

सो अब कान्रह भयो इह ठउरि चरावत है बृज के सभ बछा ॥

so ab kaanreh bhayo ieh Thaur charaavat hai biraj ke sabh bachhaa ||

ਖੇਲ ਦਿਖਾਵਤ ਹੈ ਜਗ ਕੋ ਇਹ ਹੈ ਕਰਤਾ ਸਭ ਜੀਵਨ ਰਛਾ ॥੩੫੪॥

खेल दिखावत है जग को इह है करता सभ जीवन रछा ॥३५४॥

khel dhikhaavat hai jag ko ieh hai karataa sabh jeevan rachhaa ||354||


ਆਇਸ ਮਾਨਿ ਸਭੈ ਮਘਵਾ ਹਰਿ ਕੇ ਪੁਰ ਘੇਰਿ ਘਨੇ ਘਨ ਗਾਜੈ ॥

आइस मानि सभै मघवा हरि के पुर घेरि घने घन गाजै ॥

aais maan sabhai maghavaa har ke pur gher ghane ghan gaajai ||

ਦਾਮਿਨਿ ਜਿਉ ਗਰਜੈ ਜਨੁ ਰਾਮ ਕੇ ਸਾਮੁਹਿ ਰਾਵਨ ਦੁੰਦਭਿ ਬਾਜੈ ॥

दामिनि जिउ गरजै जनु राम के सामुहि रावन दुँदभि बाजै ॥

dhaamin jiau garajai jan raam ke saamuh raavan dhu(n)dhabh baajai ||

ਸੋ ਧੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਸੁਨਿ ਗੋਪ ਦਸੋ ਦਿਸ ਕੋ ਡਰ ਕੈ ਉਠਿ ਭਾਜੈ ॥

सो धुनि स्रउनन मै सुनि गोप दसो दिस को डर कै उठि भाजै ॥

so dhun sraunan mai sun gop dhaso dhis ko ddar kai uTh bhaajai ||

ਆਇ ਪਰੇ ਹਰਿ ਕੇ ਸਭ ਪਾਇਨ ਆਪਨ ਜੀਵ ਸਹਾਇਕ ਕਾਜੈ ॥੩੫੫॥

आइ परे हरि के सभ पाइन आपन जीव सहाइक काजै ॥३५५॥

aai pare har ke sabh pain aapan jeev sahaik kaajai ||355||


ਮੇਘਨ ਕੋ ਡਰ ਕੈ ਹਰਿ ਸਾਮੁਹਿ ਗੋਪ ਪੁਕਾਰਤ ਹੈ ਦੁਖੁ ਮਾਝਾ ॥

मेघन को डर कै हरि सामुहि गोप पुकारत है दुखु माझा ॥

meghan ko ddar kai har saamuh gop pukaarat hai dhukh maajhaa ||

ਰਛ ਕਰੋ ਹਮਰੀ ਕਰੁਨਾਨਿਧਿ ਬ੍ਰਿਸਟ ਭਈ ਦਿਨ ਅਉ ਸਤ ਸਾਝਾ ॥

रछ करो हमरी करुनानिधि बृसट भई दिन अउ सत साझा ॥

rachh karo hamaree karunaanidh birasaT bhiee dhin aau sat saajhaa ||

ਏਕ ਬਚੀ ਨ ਗਊ ਪੁਰ ਕੀ ਮਰਗੀ ਦੁਧਰੀ ਬਛਰੇ ਅਰੁ ਬਾਝਾ ॥

एक बची न गऊ पुर की मरगी दुधरी बछरे अरु बाझा ॥

ek bachee na guoo pur kee maragee dhudharee bachhare ar baajhaa ||

ਅਗ੍ਰਜ ਸ੍ਯਾਮ ਕੇ ਰੋਵਤ ਇਉ ਜਿਮ ਹੀਰ ਬਿਨਾ ਪਿਖਏ ਪਤਿ ਰਾਝਾ ॥੩੫੬॥

अग्रज स्याम के रोवत इउ जिम हीर बिना पिखए पति राझा ॥३५६॥

agraj sayaam ke rovat iau jim heer binaa pikhe pat raajhaa ||356||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕਾਲੀ ਨਾਥ ਕੇਸੀ ਰਿਪੁ ਕਉਲ ਨੈਨ ਕਉਲ ਨਾਭਿ ਕਮਲਾ ਕੇ ਪਤਿ ਇਹ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨੀਜੀਯੈ ॥

काली नाथ केसी रिपु कउल नैन कउल नाभि कमला के पति इह बिनती सुनीजीयै ॥

kaalee naath kesee rip kaul nain kaul naabh kamalaa ke pat ieh binatee suneejeeyai ||

ਕਾਮ ਰੂਪ ਕੰਸ ਕੇ ਪ੍ਰਹਾਰੀ ਕਾਜਕਾਰੀ ਪ੍ਰਭ ਕਾਮਿਨੀ ਕੇ ਕਾਮ ਕੇ ਨਿਵਾਰੀ ਕਾਮ ਕੀਜੀਯੈ ॥

काम रूप कंस के प्रहारी काजकारी प्रभ कामिनी के काम के निवारी काम कीजीयै ॥

kaam roop ka(n)s ke prahaaree kaajakaaree prabh kaaminee ke kaam ke nivaaree kaam keejeeyai ||

ਕਉਲਾਸਨ ਪਤਿ ਕੁੰਭਕਾਨ ਕੇ ਮਰਈਯਾ ਕਾਲਨੇਮਿ ਕੇ ਬਧਈਯਾ ਐਸੀ ਕੀਜੈ ਜਾ ਤੇ ਜੀਜੀਯੈ ॥

कउलासन पति कुँभकान के मरईया कालनेमि के बधईया ऐसी कीजै जा ते जीजीयै ॥

kaulaasan pat ku(n)bhakaan ke marieeyaa kaalanem ke badhieeyaa aaisee keejai jaa te jeejeeyai ||

ਕਾਰਮਾ ਹਰਨ ਕਾਜ ਸਾਧਨ ਕਰਤ ਤੁਮ ਕ੍ਰਿਪਾਨਿਧਿ ਦਾਸਨ ਅਰਜ ਸੁਨਿ ਲੀਜੀਯੈ ॥੩੫੭॥

कारमा हरन काज साधन करत तुम कृपानिधि दासन अरज सुनि लीजीयै ॥३५७॥

kaaramaa haran kaaj saadhan karat tum kirapaanidh dhaasan araj sun leejeeyai ||357||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੂੰਦਨ ਤੀਰਨ ਸੀ ਸਭ ਹੀ ਕੁਪ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪੁਰ ਪੈ ਜਬ ਪਈਯਾ ॥

बूँदन तीरन सी सभ ही कुप कै बृज के पुर पै जब पईया ॥

boo(n)dhan teeran see sabh hee kup kai biraj ke pur pai jab pieeyaa ||

ਸੋਊ ਸਹੀ ਨ ਗਈ ਕਿਹ ਪੈ ਸਭ ਧਾਮਨ ਬੇਧਿ ਧਰਾ ਲਗਿ ਗਈਯਾ ॥

सोऊ सही न गई किह पै सभ धामन बेधि धरा लगि गईया ॥

souoo sahee na giee keh pai sabh dhaaman bedh dharaa lag gieeyaa ||

ਸੋ ਪਿਖਿ ਗੋਪਨ ਨੈਨਨ ਸੋ ਬਿਨਤੀ ਹਰਿ ਕੇ ਅਗੂਆ ਪਹੁਚਈਯਾ ॥

सो पिखि गोपन नैनन सो बिनती हरि के अगूआ पहुचईया ॥

so pikh gopan nainan so binatee har ke agooaa pahuchieeyaa ||

ਕੋਪ ਭਰਿਯੋ ਹਮ ਪੈ ਮਘਵਾ ਹਮਰੀ ਤੁਮ ਰਛ ਕਰੋ ਉਠਿ ਸਈਯਾ ॥੩੫੮॥

कोप भरियो हम पै मघवा हमरी तुम रछ करो उठि सईया ॥३५८॥

kop bhariyo ham pai maghavaa hamaree tum rachh karo uTh sieeyaa ||358||


ਦੀਸਤ ਹੈ ਨ ਕਹੂੰ ਅਰਣੋਦਿਤ ਘੇਰਿ ਦਸੋ ਦਿਸ ਤੇ ਘਨ ਆਵੈ ॥

दीसत है न कहूँ अरणोदित घेरि दसो दिस ते घन आवै ॥

dheesat hai na kahoo(n) aranodhit gher dhaso dhis te ghan aavai ||

ਕੋਪ ਭਰੇ ਜਨੁ ਕੇਹਰਿ ਗਾਜਤ ਦਾਮਿਨਿ ਦਾਤ ਨਿਕਾਸਿ ਡਰਾਵੈ ॥

कोप भरे जनु केहरि गाजत दामिनि दात निकासि डरावै ॥

kop bhare jan kehar gaajat dhaamin dhaat nikaas ddaraavai ||

ਗੋਪਨ ਜਾਇ ਕਰੀ ਬਿਨਤੀ ਹਰਿ ਪੈ ਸੁਨੀਯੈ ਹਰਿ ਜੋ ਤੁਮ ਭਾਵੈ ॥

गोपन जाइ करी बिनती हरि पै सुनीयै हरि जो तुम भावै ॥

gopan jai karee binatee har pai suneeyai har jo tum bhaavai ||

ਸਿੰਘ ਕੇ ਦੇਖਤ ਸਿੰਘਨ ਸ੍ਰਯਾਰ ਕਹੈ ਕੁਪ ਕੈ ਜਮ ਲੋਕ ਪਠਾਵੈ ॥੩੫੯॥

सिंघ के देखत सिंघन स्रयार कहै कुप कै जम लोक पठावै ॥३५९॥

si(n)gh ke dhekhat si(n)ghan srayaar kahai kup kai jam lok paThaavai ||359||


ਕੋਪ ਭਰੇ ਹਮਰੇ ਪੁਰ ਮੈ ਬਹੁ ਮੇਘਨ ਕੇ ਇਹ ਠਾਟ ਠਟੇ ॥

कोप भरे हमरे पुर मै बहु मेघन के इह ठाट ठटे ॥

kop bhare hamare pur mai bahu meghan ke ieh ThaaT ThaTe ||

ਜਿਹ ਕੋ ਗਜ ਬਾਹਨ ਲੋਕ ਕਹੈ ਜਿਨਿ ਪਬਨ ਕੇ ਪਰ ਕੋਪ ਕਟੇ ॥

जिह को गज बाहन लोक कहै जिनि पबन के पर कोप कटे ॥

jeh ko gaj baahan lok kahai jin paban ke par kop kaTe ||

ਤੁਮ ਹੋ ਕਰਤਾ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੇ ਤੁਮ ਹੀ ਸਿਰ ਰਾਵਨ ਕਾਟਿ ਸਟੇ ॥

तुम हो करता सभ ही जग के तुम ही सिर रावन काटि सटे ॥

tum ho karataa sabh hee jag ke tum hee sir raavan kaaT saTe ||

ਤੁਮ ਸਿਯੋ ਫੁਨਿ ਦੇਖਿਤ ਗੋਪਨ ਕੋ ਘਨ ਘੋਰਿ ਡਰਾਵਤ ਕੋਪ ਲਟੇ ॥੩੬੦॥

तुम सियो फुनि देखित गोपन को घन घोरि डरावत कोप लटे ॥३६०॥

tum siyo fun dhekhit gopan ko ghan ghor ddaraavat kop laTe ||360||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਡੋ ਸੁਨਿ ਲੋਕ ਤੁਮੈ ਫੁਨਿ ਜਾਮ ਸੁ ਜਾਪ ਕਰੈ ਤੁਹ ਆਠੋ ॥

कान्रह बडो सुनि लोक तुमै फुनि जाम सु जाप करै तुह आठो ॥

kaanreh baddo sun lok tumai fun jaam su jaap karai tuh aaTho ||

ਨੀਰ ਹੁਤਾਸਨ ਭੂਮਿ ਧਰਾਧਰ ਥਾਪਿ ਕਰਿਯੋ ਤੁਮ ਹੀ ਪ੍ਰਭ ਕਾਠੋ ॥

नीर हुतासन भूमि धराधर थापि करियो तुम ही प्रभ काठो ॥

neer hutaasan bhoom dharaadhar thaap kariyo tum hee prabh kaaTho ||

ਬੇਦ ਦਏ ਕਰ ਕੈ ਤੁਮ ਹੀ ਜਗ ਮੈ ਛਿਨ ਤਾਤ ਭਯੋ ਜਬ ਘਾਠੋ ॥

बेद दए कर कै तुम ही जग मै छिन तात भयो जब घाठो ॥

bedh dhe kar kai tum hee jag mai chhin taat bhayo jab ghaaTho ||

ਸਿੰਧੁ ਮਥਿਯੋ ਤੁਮ ਹੀ ਤ੍ਰੀਯ ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਦੀਨ ਸੁਰਾਸੁਰ ਅਮ੍ਰਿਤ ਬਾਟੋ ॥੩੬੧॥

सिंधु मथियो तुम ही त्रीय ह्वै करि दीन सुरासुर अमृत बाटो ॥३६१॥

si(n)dh mathiyo tum hee treey havai kar dheen suraasur amirat baaTo ||361||


ਗੋਪਨ ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਬਿਨੁ ਤੈ ਹਮਰੋ ਕੋਊ ਅਉਰ ਨ ਆਡਾ ॥

गोपन फेरि कही मुख ते बिनु तै हमरो कोऊ अउर न आडा ॥

gopan fer kahee mukh te bin tai hamaro kouoo aaur na aaddaa ||

ਮੇਘਨ ਮਾਰਿ ਬਿਥਾਰ ਡਰੋ ਕੁਪਿ ਬਾਲਕ ਮੂਰਤਿ ਜਿਉ ਤੁਮ ਗਾਡਾ ॥

मेघन मारि बिथार डरो कुपि बालक मूरति जिउ तुम गाडा ॥

meghan maar bithaar ddaro kup baalak moorat jiau tum gaaddaa ||

ਮੇਘਨ ਕੋ ਪਿਖਿ ਰੂਪ ਭਯਾਨਕ ਬਹੁਤੁ ਡਰੈ ਫੁਨਿ ਜੀਉ ਅਸਾਡਾ ॥

मेघन को पिखि रूप भयानक बहुतु डरै फुनि जीउ असाडा ॥

meghan ko pikh roop bhayaanak bahut ddarai fun jeeau asaaddaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਅਬੈ ਪੁਸਤੀਨ ਹ੍ਵੈ ਆਪ ਉਤਾਰ ਡਰੋ ਸਭ ਗੋਪਨ ਜਾਡਾ ॥੩੬੨॥

कान्रह अबै पुसतीन ह्वै आप उतार डरो सभ गोपन जाडा ॥३६२॥

kaanreh abai pusateen havai aap utaar ddaro sabh gopan jaaddaa ||362||


ਆਇਸੁ ਪਾਇ ਪੁਰੰਦਰ ਕੋ ਘਨਘੋਰ ਘਟਾ ਚਹੂੰ ਓਰ ਤੇ ਆਵੈ ॥

आइसु पाइ पुरंदर को घनघोर घटा चहूँ ओर ते आवै ॥

aais pai pura(n)dhar ko ghanaghor ghaTaa chahoo(n) or te aavai ||

ਕੈ ਕਰ ਕ੍ਰੁਧ ਕਿਧੋ ਮਨ ਮਧਿ ਬ੍ਰਿਜ ਊਪਰ ਆਨ ਕੈ ਬਹੁ ਬਲ ਪਾਵੈ ॥

कै कर क्रुध किधो मन मधि बृज ऊपर आन कै बहु बल पावै ॥

kai kar krudh kidho man madh biraj uoopar aan kai bahu bal paavai ||

ਅਉ ਅਤਿ ਹੀ ਚਪਲਾ ਚਮਕੈ ਬਹੁ ਬੂੰਦਨ ਤੀਰਨ ਸੀ ਬਰਖਾਵੈ ॥

अउ अति ही चपला चमकै बहु बूँदन तीरन सी बरखावै ॥

aau at hee chapalaa chamakai bahu boo(n)dhan teeran see barakhaavai ||

ਗੋਪ ਕਹੈ ਹਮ ਤੇ ਭਈ ਚੂਕ ਸੁ ਯਾ ਤੇ ਹਮੈ ਗਰਜੈ ਔ ਡਰਾਵੈ ॥੩੬੩॥

गोप कहै हम ते भई चूक सु या ते हमै गरजै औ डरावै ॥३६३॥

gop kahai ham te bhiee chook su yaa te hamai garajai aau ddaraavai ||363||


ਆਜ ਭਯੋ ਉਤਪਾਤ ਬਡੋ ਡਰੁ ਸਮਾਨਿ ਸਭੈ ਹਰਿ ਪਾਸ ਪੁਕਾਰੇ ॥

आज भयो उतपात बडो डरु समानि सभै हरि पास पुकारे ॥

aaj bhayo utapaat baddo ddar samaan sabhai har paas pukaare ||

ਕੋਪ ਕਰਿਯੋ ਹਮ ਪੈ ਮਘਵਾ ਤਿਹ ਤੇ ਬ੍ਰਿਜ ਪੈ ਬਰਖੇ ਘਨ ਭਾਰੇ ॥

कोप करियो हम पै मघवा तिह ते बृज पै बरखे घन भारे ॥

kop kariyo ham pai maghavaa teh te biraj pai barakhe ghan bhaare ||

ਭਛਿ ਭਖਿਯੋ ਇਹ ਕੋ ਤੁਮ ਹੂ ਤਿਹ ਤੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਜਨ ਕੋਪਿ ਸੰਘਾਰੇ ॥

भछि भखियो इह को तुम हू तिह ते बृज के जन कोपि संघारे ॥

bhachh bhakhiyo ieh ko tum hoo teh te biraj ke jan kop sa(n)ghaare ||

ਰਛਕ ਹੋ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੇ ਤੁਮ ਰਛ ਕਰੋ ਹਮਰੀ ਰਖਵਾਰੇ ॥੩੬੪॥

रछक हो सभ ही जग के तुम रछ करो हमरी रखवारे ॥३६४॥

rachhak ho sabh hee jag ke tum rachh karo hamaree rakhavaare ||364||


ਹੋਇ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਅਬੈ ਭਗਵਾਨ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਿ ਕੈ ਇਨ ਕੋ ਤੁਮ ਕਾਢੋ ॥

होइ कृपाल अबै भगवान कृपा करि कै इन को तुम काढो ॥

hoi kirapaal abai bhagavaan kirapaa kar kai in ko tum kaaddo ||

ਕੋਪ ਕਰਿਯੋ ਹਮ ਪੈ ਮਘਵਾ ਦਿਨ ਸਾਤ ਇਹਾ ਬਰਖਿਯੋ ਘਨ ਗਾਢੋ ॥

कोप करियो हम पै मघवा दिन सात इहा बरखियो घन गाढो ॥

kop kariyo ham pai maghavaa dhin saat ihaa barakhiyo ghan gaaddo ||

ਭ੍ਰਾਤ ਬਲੀ ਇਨਿ ਰਛਨ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਕਰਿ ਕੋਪ ਭਯੋ ਉਠਿ ਠਾਢੋ ॥

भ्रात बली इनि रछन को तब ही करि कोप भयो उठि ठाढो ॥

bhraat balee in rachhan ko tab hee kar kop bhayo uTh Thaaddo ||

ਜੀਵ ਗਯੋ ਘਟ ਮੇਘਨ ਕੋ ਸਭ ਗੋਪਨ ਕੇ ਮਨ ਆਨੰਦ ਬਾਢੋ ॥੩੬੫॥

जीव गयो घट मेघन को सभ गोपन के मन आनंद बाढो ॥३६५॥

jeev gayo ghaT meghan ko sabh gopan ke man aana(n)dh baaddo ||365||


ਗੋਪਨ ਕੀ ਸੁਨ ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਹਰਿ ਗੋਪ ਸਭੈ ਅਪਨੇ ਕਰਿ ਜਾਣੇ ॥

गोपन की सुन कै बिनती हरि गोप सभै अपने करि जाणे ॥

gopan kee sun kai binatee har gop sabhai apane kar jaane ||

ਮੇਘਨ ਕੇ ਬਧਬੇ ਕਹੁ ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਲਿਯੋ ਉਠਿ ਕੈ ਕਰਤਾ ਜੋਊ ਤਾਣੇ ॥

मेघन के बधबे कहु कान्रह चलियो उठि कै करता जोऊ ताणे ॥

meghan ke badhabe kahu kaanreh chaliyo uTh kai karataa jouoo taane ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੇ ਜਸ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਪਹਿਚਾਣੇ ॥

ता छबि के जस उच महा कबि ने अपने मन मै पहिचाणे ॥

taa chhab ke jas uch mahaa kab ne apane man mai pahichaane ||

ਇਉ ਚਲ ਗਯੋ ਜਿਮ ਸਿੰਘ ਮ੍ਰਿਗੀ ਪਿਖਿ ਆਇ ਹੈ ਜਾਨ ਕਿਧੋ ਮੂਹਿ ਡਾਣੇ ॥੩੬੬॥

इउ चल गयो जिम सिंघ मृगी पिखि आइ है जान किधो मूहि डाणे ॥३६६॥

eiau chal gayo jim si(n)gh miragee pikh aai hai jaan kidho mooh ddaane ||366||


ਮੇਘਨ ਕੇ ਬਧ ਕਾਜ ਚਲਿਯੋ ਭਗਵਾਨ ਕਿਧੋ ਰਸ ਭੀਤਰ ਰਤਾ ॥

मेघन के बध काज चलियो भगवान किधो रस भीतर रता ॥

meghan ke badh kaaj chaliyo bhagavaan kidho ras bheetar rataa ||

ਰਾਮ ਭਯੋ ਜੁਗ ਤੀਸਰ ਮਧਿ ਮਰਿਯੋ ਤਿਨ ਰਾਵਨ ਕੈ ਰਨ ਅਤਾ ॥

राम भयो जुग तीसर मधि मरियो तिन रावन कै रन अता ॥

raam bhayo jug teesar madh mariyo tin raavan kai ran ataa ||

ਅਉਧ ਕੇ ਬੀਚ ਬਧੂ ਬਰਬੇ ਕਹੁ ਕੋਪ ਕੈ ਬੈਲ ਨਥੇ ਜਿਹ ਸਤਾ ॥

अउध के बीच बधू बरबे कहु कोप कै बैल नथे जिह सता ॥

aaudh ke beech badhoo barabe kahu kop kai bail nathe jeh sataa ||

ਗੋਪਨ ਗੋਧਨ ਰਛਨ ਕਾਜ ਤੁਰਿਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਗਜ ਜਿਉ ਮਦ ਮਤਾ ॥੩੬੭॥

गोपन गोधन रछन काज तुरियो तिह को गज जिउ मद मता ॥३६७॥

gopan godhan rachhan kaaj turiyo teh ko gaj jiau madh mataa ||367||


ਕਰਬੇ ਕਹੁ ਰਛ ਸੁ ਗੋਪਨ ਕੀ ਬਰ ਪੂਟ ਲਯੋ ਨਗ ਕੋ ਪਹਿ ਹਥਾ ॥

करबे कहु रछ सु गोपन की बर पूट लयो नग को पहि हथा ॥

karabe kahu rachh su gopan kee bar pooT layo nag ko peh hathaa ||

ਤਨ ਕੋ ਨ ਕਰਿਯੋ ਬਲ ਰੰਚਕ ਤਾਹ ਕਰਿਯੋ ਜੁ ਹੁਤੋ ਕਰ ਬੀਚ ਜਥਾ ॥

तन को न करियो बल रंचक ताह करियो जु हुतो कर बीच जथा ॥

tan ko na kariyo bal ra(n)chak taeh kariyo ju huto kar beech jathaa ||

ਨ ਚਲੀ ਤਿਨ ਕੀ ਕਿਛੁ ਗੋਪਨ ਪੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਗਜ ਜਾਹਿ ਰਥਾ ॥

न चली तिन की किछु गोपन पै कबि स्याम कहै गज जाहि रथा ॥

n chalee tin kee kichh gopan pai kab sayaam kahai gaj jaeh rathaa ||

ਮੁਖਿ ਨ੍ਯਾਇ ਖਿਸਾਇ ਚਲਿਯੋ ਗ੍ਰਿਹ ਪੈ ਇਹ ਬੀਚ ਚਲੀ ਜਗ ਕੇ ਸੁ ਕਥਾ ॥੩੬੮॥

मुखि न्याइ खिसाइ चलियो गृह पै इह बीच चली जग के सु कथा ॥३६८॥

mukh nayai khisai chaliyo gireh pai ieh beech chalee jag ke su kathaa ||368||


ਨੰਦ ਕੋ ਨੰਦ ਬਡੋ ਸੁਖ ਕੰਦ ਰਿਪੁ ਆਰ ਸੁਰੰਦ ਸਬੁਧਿ ਬਿਸਾਰਦ ॥

नंद को नंद बडो सुख कंद रिपु आर सुरंद सबुधि बिसारद ॥

na(n)dh ko na(n)dh baddo sukh ka(n)dh rip aar sura(n)dh sabudh bisaaradh ||

ਆਨਨ ਚੰਦ ਪ੍ਰਭਾ ਕਹੁ ਮੰਦ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਜਪੈ ਜਿਹ ਨਾਰਦ ॥

आनन चंद प्रभा कहु मंद कहै कबि स्याम जपै जिह नारद ॥

aanan cha(n)dh prabhaa kahu ma(n)dh kahai kab sayaam japai jeh naaradh ||

ਤਾ ਗਿਰਿ ਕੋਪ ਉਠਾਇ ਲਯੋ ਜੋਊ ਸਾਧਨ ਕੋ ਹਰਤਾ ਦੁਖ ਦਾਰਦ ॥

ता गिरि कोप उठाइ लयो जोऊ साधन को हरता दुख दारद ॥

taa gir kop uThai layo jouoo saadhan ko harataa dhukh dhaaradh ||

ਮੇਘ ਪਰੇ ਉਪਰਿਯੋ ਨ ਕਛੂ ਪਛਤਾਇ ਗਏ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਉਠਿ ਬਾਰਦ ॥੩੬੯॥

मेघ परे उपरियो न कछू पछताइ गए गृह को उठि बारद ॥३६९॥

megh pare upariyo na kachhoo pachhatai ge gireh ko uTh baaradh ||369||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਉਪਾਰਿ ਲਯੋ ਕਰ ਮੋ ਗਿਰਿ ਏਕ ਪਰੀ ਨਹੀ ਬੂੰਦ ਸੁ ਪਾਨੀ ॥

कान्रह उपारि लयो कर मो गिरि एक परी नही बूँद सु पानी ॥

kaanreh upaar layo kar mo gir ek paree nahee boo(n)dh su paanee ||

ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਮੁਖ ਤੇ ਹਰਿ ਕੋ ਮਘਵਾ ਜੁ ਭਯੋ ਮੁਹਿ ਸਾਨੀ ॥

फेरि कही हसि कै मुख ते हरि को मघवा जु भयो मुहि सानी ॥

fer kahee has kai mukh te har ko maghavaa ju bhayo muh saanee ||

ਮਾਰਿ ਡਰਿਯੋ ਮੁਰ ਮੈ ਮਧੁ ਕੀਟਭ ਮਾਰਿਯੋ ਹਮੈ ਮਘਵਾ ਪਤਿ ਮਾਨੀ ॥

मारि डरियो मुर मै मधु कीटभ मारियो हमै मघवा पति मानी ॥

maar ddariyo mur mai madh keeTabh maariyo hamai maghavaa pat maanee ||

ਗੋਪਨ ਮੈ ਭਗਵਾਨ ਕਹੀ ਸੋਊ ਫੈਲ ਪਰੀ ਜਗ ਬੀਚ ਕਹਾਨੀ ॥੩੭੦॥

गोपन मै भगवान कही सोऊ फैल परी जग बीच कहानी ॥३७०॥

gopan mai bhagavaan kahee souoo fail paree jag beech kahaanee ||370||


ਗੋਪਨ ਕੀ ਕਰਬੇ ਕਹੁ ਰਛ ਸਤਕ੍ਰਿਤ ਪੈ ਹਰਿ ਜੀ ਜਬ ਕੋਪੇ ॥

गोपन की करबे कहु रछ सतकृत पै हरि जी जब कोपे ॥

gopan kee karabe kahu rachh satakirat pai har jee jab kope ||

ਇਉ ਗਿਰਿ ਕੇ ਤਰਿ ਭਯੋ ਉਠਿ ਠਾਢਿ ਮਨੋ ਰੁਪ ਕੈ ਪਗ ਕੇਹਰਿ ਰੋਪੇ ॥

इउ गिरि के तरि भयो उठि ठाढि मनो रुप कै पग केहरि रोपे ॥

eiau gir ke tar bhayo uTh Thaadd mano rup kai pag kehar rope ||

ਜਿਉ ਜੁਗ ਅੰਤ ਮੈ ਅੰਤਕ ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਜੀਵਨ ਕੇ ਸਭ ਕੇ ਉਰਿ ਘੋਪੇ ॥

जिउ जुग अंत मै अंतक ह्वै करि जीवन के सभ के उरि घोपे ॥

jiau jug a(n)t mai a(n)tak havai kar jeevan ke sabh ke ur ghope ||

ਜਿਉ ਜਨ ਕੋ ਮਨ ਹੋਤ ਹੈ ਲੋਪ ਤਿਸੀ ਬਿਧਿ ਮੇਘ ਭਏ ਸਭ ਲੋਪੇ ॥੩੭੧॥

जिउ जन को मन होत है लोप तिसी बिधि मेघ भए सभ लोपे ॥३७१॥

jiau jan ko man hot hai lop tisee bidh megh bhe sabh lope ||371||


ਹੋਇ ਸਤਕ੍ਰਿਤ ਊਪਰ ਕੋਪ ਸੁ ਰਾਖ ਲਈ ਸਭ ਗੋਪ ਦਫਾ ॥

होइ सतकृत ऊपर कोप सु राख लई सभ गोप दफा ॥

hoi satakirat uoopar kop su raakh liee sabh gop dhafaa ||

ਤਿਨਿ ਮੇਘ ਬਿਦਾਰ ਦਏ ਛਿਨ ਮੈ ਜਿਨਿ ਦੈਤ ਕਰੇ ਸਭ ਏਕ ਗਫਾ ॥

तिनि मेघ बिदार दए छिन मै जिनि दैत करे सभ एक गफा ॥

tin megh bidhaar dhe chhin mai jin dhait kare sabh ek gafaa ||

ਕਰਿ ਕਉਤੁਕ ਪੈ ਰਿਪੁ ਟਾਰ ਦਏ ਬਿਨੁ ਹੀ ਧਰਏ ਸਰ ਸ੍ਯਾਮ ਜਫਾ ॥

करि कउतुक पै रिपु टार दए बिनु ही धरए सर स्याम जफा ॥

kar kautuk pai rip Taar dhe bin hee dhare sar sayaam jafaa ||

ਸਭ ਗੋਪਨ ਕੀ ਕਰਬੈ ਕਹੁ ਰਛ ਸੁ ਸਕ੍ਰਨ ਲੀਨ ਲਪੇਟ ਸਫਾ ॥੩੭੨॥

सभ गोपन की करबै कहु रछ सु सक्रन लीन लपेट सफा ॥३७२॥

sabh gopan kee karabai kahu rachh su sakran leen lapeT safaa ||372||


ਜੁ ਲਈ ਸਭ ਮੇਘ ਲਪੇਟ ਸਫਾ ਅਰੁ ਲੀਨੋ ਹੈ ਪਬ ਉਪਾਰ ਜਬੈ ॥

जु लई सभ मेघ लपेट सफा अरु लीनो है पब उपार जबै ॥

j liee sabh megh lapeT safaa ar leeno hai pab upaar jabai ||

ਇਹ ਰੰਚਕ ਸੋ ਇਹ ਹੈ ਗਰੂਓ ਗਿਰਿ ਚਿੰਤ ਕਰੀ ਮਨਿ ਬੀਚ ਸਬੈ ॥

इह रंचक सो इह है गरूओ गिरि चिंत करी मनि बीच सबै ॥

eeh ra(n)chak so ieh hai garooo gir chi(n)t karee man beech sabai ||

ਇਹ ਦੈਤਨ ਕੋ ਮਰਤਾ ਕਰਤਾ ਸੁਖ ਹੈ ਦਿਵਿਯਾ ਜੀਯ ਦਾਨ ਅਬੈ ॥

इह दैतन को मरता करता सुख है दिविया जीय दान अबै ॥

eeh dhaitan ko marataa karataa sukh hai dhiviyaa jeey dhaan abai ||

ਇਹ ਕੋ ਤੁਮ ਧ੍ਯਾਨ ਧਰੋ ਸਭ ਹੀ ਨਹਿ ਧ੍ਯਾਨ ਧਰੋ ਤੁਮ ਅਉਰ ਕਬੈ ॥੩੭੩॥

इह को तुम ध्यान धरो सभ ही नहि ध्यान धरो तुम अउर कबै ॥३७३॥

eeh ko tum dhayaan dharo sabh hee neh dhayaan dharo tum aaur kabai ||373||


ਸਭ ਮੇਘ ਗਏ ਘਟ ਕੇ ਜਬ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਹਰਖੇ ਫੁਨਿ ਗੋਪ ਸਭੈ ॥

सभ मेघ गए घट के जब ही तब ही हरखे फुनि गोप सभै ॥

sabh megh ge ghaT ke jab hee tab hee harakhe fun gop sabhai ||

ਇਹ ਭਾਤਿ ਲਗੇ ਕਹਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਭਗਵਾਨ ਦਯੋ ਹਮ ਦਾਨ ਅਭੈ ॥

इह भाति लगे कहने मुख ते भगवान दयो हम दान अभै ॥

eeh bhaat lage kahane mukh te bhagavaan dhayo ham dhaan abhai ||

ਮਘਵਾ ਜੁ ਕਰੀ ਕੁਪਿ ਦਉਰ ਹਮੂ ਪਰ ਸੋ ਤਿਹ ਕੋ ਨਹੀ ਬੇਰ ਲਭੈ ॥

मघवा जु करी कुपि दउर हमू पर सो तिह को नही बेर लभै ॥

maghavaa ju karee kup dhaur hamoo par so teh ko nahee ber labhai ||

ਅਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪ੍ਰਤਾਪ ਤੇ ਹੈ ਘਟ ਬਾਦਰ ਏਕ ਨ ਦੀਸਤ ਬੀਚ ਨਭੈ ॥੩੭੪॥

अब कान्रह प्रताप ते है घट बादर एक न दीसत बीच नभै ॥३७४॥

ab kaanreh prataap te hai ghaT baadhar ek na dheesat beech nabhai ||374||


ਗੋਪ ਕਹੈ ਸਭ ਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਲੀ ਬਰ ਹੈ ਬਲ ਮੈ ॥

गोप कहै सभ ही मुख ते इह कान्रह बली बर है बल मै ॥

gop kahai sabh hee mukh te ieh kaanreh balee bar hai bal mai ||

ਜਿਨਿ ਕੂਦਿ ਕਿਲੇ ਸਤ ਮੋਰ ਮਰਿਯੋ ਜਿਨਿ ਜੁਧ ਸੰਖਾਸੁਰ ਸੋ ਜਲ ਮੈ ॥

जिनि कूदि किले सत मोर मरियो जिनि जुध संखासुर सो जल मै ॥

jin koodh kile sat mor mariyo jin judh sa(n)khaasur so jal mai ||

ਇਹ ਹੈ ਕਰਤਾ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੋ ਅਰੁ ਫੈਲ ਰਹਿਯੋ ਜਲ ਅਉ ਥਲ ਮੈ ॥

इह है करता सभ ही जग को अरु फैल रहियो जल अउ थल मै ॥

eeh hai karataa sabh hee jag ko ar fail rahiyo jal aau thal mai ||

ਸੋਊ ਆਇ ਪ੍ਰਤਛਿ ਭਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਜੋਊ ਜੋਗ ਜੁਤੋ ਰਹੈ ਓਝਲ ਮੈ ॥੩੭੫॥

सोऊ आइ प्रतछि भयो बृज मै जोऊ जोग जुतो रहै ओझल मै ॥३७५॥

souoo aai pratachh bhayo biraj mai jouoo jog juto rahai ojhal mai ||375||


ਮੋਰ ਮਰਿਯੋ ਜਿਨਿ ਕੂਦ ਕਿਲੈ ਸਤ ਸੰਧਿ ਜਰਾ ਜਿਹ ਸੈਨ ਮਰੀ ॥

मोर मरियो जिनि कूद किलै सत संधि जरा जिह सैन मरी ॥

mor mariyo jin koodh kilai sat sa(n)dh jaraa jeh sain maree ||

ਨਰਾਕਸੁਰ ਜਾਹਿ ਕਰਿਯੋ ਰਕਸੀ ਬਿਰਥੀ ਗਜ ਕੀ ਜਿਹ ਰਛ ਕਰੀ ॥

नराकसुर जाहि करियो रकसी बिरथी गज की जिह रछ करी ॥

naraakasur jaeh kariyo rakasee birathee gaj kee jeh rachh karee ||

ਜਿਹ ਰਾਖਿ ਲਈ ਪਤਿ ਪੈ ਦ੍ਰੁਪਤੀ ਸਿਲ ਜਾ ਲਗਤਿਉ ਪਗ ਪਾਰਿ ਪਰੀ ॥

जिह राखि लई पति पै द्रुपती सिल जा लगतिउ पग पारि परी ॥

jeh raakh liee pat pai dhrupatee sil jaa lagatiau pag paar paree ||

ਅਤਿ ਕੋਪਤ ਮੇਘਨ ਅਉ ਮਘਵਾ ਇਹ ਰਾਖ ਲਈ ਨੰਦ ਲਾਲਿ ਧਰੀ ॥੩੭੬॥

अति कोपत मेघन अउ मघवा इह राख लई नंद लालि धरी ॥३७६॥

at kopat meghan aau maghavaa ieh raakh liee na(n)dh laal dharee ||376||


ਮਘਵਾ ਜਿਹ ਫੇਰਿ ਦਈ ਪ੍ਰਤਨਾ ਜਿਹ ਦੈਤੁ ਮਰੇ ਇਹ ਕਾਨ ਬਲੀ ॥

मघवा जिह फेरि दई प्रतना जिह दैतु मरे इह कान बली ॥

maghavaa jeh fer dhiee pratanaa jeh dhait mare ieh kaan balee ||

ਜਿਹ ਕੋ ਜਨ ਨਾਮ ਜਪੈ ਮਨ ਮੈ ਜਿਹ ਕੋ ਫੁਨਿ ਭ੍ਰਾਤ ਹੈ ਬੀਰ ਹਲੀ ॥

जिह को जन नाम जपै मन मै जिह को फुनि भ्रात है बीर हली ॥

jeh ko jan naam japai man mai jeh ko fun bhraat hai beer halee ||

ਜਿਹ ਤੇ ਸਭ ਗੋਪਨ ਕੀ ਬਿਪਤਾ ਹਰਿ ਕੇ ਕੁਪ ਤੇ ਛਿਨ ਮਾਹਿ ਟਲੀ ॥

जिह ते सभ गोपन की बिपता हरि के कुप ते छिन माहि टली ॥

jeh te sabh gopan kee bipataa har ke kup te chhin maeh Talee ||

ਤਿਹ ਕੋ ਲਖ ਕੈ ਉਪਮਾ ਭਗਵਾਨ ਕਰੈ ਜਿਹ ਕੀ ਸੁਤ ਕਉਲ ਕਲੀ ॥੩੭੭॥

तिह को लख कै उपमा भगवान करै जिह की सुत कउल कली ॥३७७॥

teh ko lakh kai upamaa bhagavaan karai jeh kee sut kaul kalee ||377||


ਕਾਨ ਉਪਾਰ ਲਯੋ ਗਰੂਓ ਗਿਰਿ ਧਾਮਿ ਖਿਸਾਇ ਗਯੋ ਮਘਵਾ ॥

कान उपार लयो गरूओ गिरि धामि खिसाइ गयो मघवा ॥

kaan upaar layo garooo gir dhaam khisai gayo maghavaa ||

ਸੋ ਉਪਜਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਜੋਊ ਤੀਸਰ ਜੁਗ ਭਯੋ ਰਘੁਵਾ ॥

सो उपजियो बृज भूमि बिखै जोऊ तीसर जुग भयो रघुवा ॥

so upajiyo biraj bhoom bikhai jouoo teesar jug bhayo raghuvaa ||

ਅਬ ਕਉਤੁਕਿ ਲੋਕ ਦਿਖਾਵਨ ਕੋ ਜਗ ਮੈ ਫੁਨਿ ਰੂਪ ਧਰਿਯੋ ਲਘੁਵਾ ॥

अब कउतुकि लोक दिखावन को जग मै फुनि रूप धरियो लघुवा ॥

ab kautuk lok dhikhaavan ko jag mai fun roop dhariyo laghuvaa ||

ਥਨ ਐਚ ਹਨੀ ਛਿਨ ਮੈ ਪੁਤਨਾ ਹਰਿ ਨਾਮ ਕੇ ਲੇਤ ਹਰੇ ਅਘਵਾ ॥੩੭੮॥

थन ऐच हनी छिन मै पुतना हरि नाम के लेत हरे अघवा ॥३७८॥

than aaich hanee chhin mai putanaa har naam ke let hare aghavaa ||378||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਲੀ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਜਿਨਿ ਗੋਪਨ ਕੇ ਦੁਖ ਕਾਟਿ ਸਟੇ ॥

कान्रह बली प्रगटियो बृज मै जिनि गोपन के दुख काटि सटे ॥

kaanreh balee pragaTiyo biraj mai jin gopan ke dhukh kaaT saTe ||

ਸੁਖ ਸਾਧਨ ਕੇ ਪ੍ਰਗਟੇ ਤਬ ਹੀ ਦੁਖ ਦੈਤਨ ਕੇ ਸੁਨਿ ਨਾਮੁ ਘਟੇ ॥

सुख साधन के प्रगटे तब ही दुख दैतन के सुनि नामु घटे ॥

sukh saadhan ke pragaTe tab hee dhukh dhaitan ke sun naam ghaTe ||

ਇਹ ਹੈ ਕਰਤਾ ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਕੋ ਬਲਿ ਕੋ ਅਰੁ ਇੰਦ੍ਰਹਿ ਲੋਕ ਬਟੇ ॥

इह है करता सभ ही जग को बलि को अरु इंद्रहि लोक बटे ॥

eeh hai karataa sabh hee jag ko bal ko ar i(n)dhreh lok baTe ||

ਤਿਹ ਨਾਮ ਕੇ ਲੇਤ ਕਿਧੋ ਮੁਖ ਤੇ ਲਟ ਜਾਤ ਸਭੈ ਤਨ ਦੋਖ ਲਟੇ ॥੩੭੯॥

तिह नाम के लेत किधो मुख ते लट जात सभै तन दोख लटे ॥३७९॥

teh naam ke let kidho mukh te laT jaat sabhai tan dhokh laTe ||379||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਲੀ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਪੁਤਨਾ ਜਿਨਿ ਮਾਰਿ ਡਰੀ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਪਠੀ ॥

कान्रह बली प्रगटियो पुतना जिनि मारि डरी नृप कंस पठी ॥

kaanreh balee pragaTiyo putanaa jin maar ddaree nirap ka(n)s paThee ||

ਇਨ ਹੀ ਰਿਪੁ ਮਾਰਿ ਡਰਿਯੋ ਸੁ ਤ੍ਰਿਨਾਵ੍ਰਤ ਪੈ ਜਨਿ ਸੋ ਇਹ ਥਿਤ ਛਠੀ ॥

इन ही रिपु मारि डरियो सु तृनाव्रत पै जनि सो इह थित छठी ॥

ein hee rip maar ddariyo su tiranaavrat pai jan so ieh thit chhaThee ||

ਸਭ ਜਾਪੁ ਜਪੈ ਇਹ ਕੋ ਮਨ ਮੈ ਸਭ ਗੋਪ ਕਹੈ ਇਹ ਅਤਿ ਹਠੀ ॥

सभ जापु जपै इह को मन मै सभ गोप कहै इह अति हठी ॥

sabh jaap japai ieh ko man mai sabh gop kahai ieh at haThee ||

ਅਤਿ ਹੀ ਪ੍ਰਤਿਨਾ ਫੁਨਿ ਮੇਘਨ ਕੀ ਇਨਹੂ ਕਰਿ ਦੀ ਛਿਨ ਮਾਹਿ ਮਠੀ ॥੩੮੦॥

अति ही प्रतिना फुनि मेघन की इनहू करि दी छिन माहि मठी ॥३८०॥

at hee pratinaa fun meghan kee inahoo kar dhee chhin maeh maThee ||380||


ਗੋਪ ਕਹੈ ਇਹ ਸਾਧਨ ਕੇ ਦੁਖ ਦੂਰਿ ਕਰੈ ਮਨ ਮਾਹਿ ਗਡੈ ॥

गोप कहै इह साधन के दुख दूरि करै मन माहि गडै ॥

gop kahai ieh saadhan ke dhukh dhoor karai man maeh gaddai ||

ਇਹ ਹੈ ਬਲਵਾਨ ਬਡੋ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਸੋਊ ਕੋ ਇਹ ਸੋ ਛਿਨ ਆਇ ਅਡੈ ॥

इह है बलवान बडो प्रगटियो सोऊ को इह सो छिन आइ अडै ॥

eeh hai balavaan baddo pragaTiyo souoo ko ieh so chhin aai addai ||

ਸਭ ਲੋਕ ਕਹੈ ਫੁਨਿ ਜਾਪਤ ਯਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਭਗਵਾਨ ਬਡੈ ॥

सभ लोक कहै फुनि जापत या कबि स्याम कहै भगवान बडै ॥

sabh lok kahai fun jaapat yaa kab sayaam kahai bhagavaan baddai ||

ਤਿਨ ਮੋਛ ਲਹੀ ਛਿਨ ਮੈ ਇਹ ਤੇ ਜਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਜਰਰਾ ਕੁ ਜਡੈ ॥੩੮੧॥

तिन मोछ लही छिन मै इह ते जिन के मन मै जररा कु जडै ॥३८१॥

tin mochh lahee chhin mai ieh te jin ke man mai jararaa k jaddai ||381||


ਮੇਘ ਗਏ ਪਛੁਤਾਇ ਗ੍ਰਿਹੰ ਕਹੁ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਮਨ ਆਨੰਦ ਬਾਢੇ ॥

मेघ गए पछुताइ गृहं कहु गोपिन को मन आनंद बाढे ॥

megh ge pachhutai giraha(n) kahu gopin ko man aana(n)dh baadde ||

ਹ੍ਵੈ ਇਕਠੇ ਸੁ ਚਲੇ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਸਭ ਆਇ ਭਏ ਗ੍ਰਿਹ ਭੀਤਰ ਠਾਢੇ ॥

ह्वै इकठे सु चले गृह को सभ आइ भए गृह भीतर ठाढे ॥

havai ikaThe su chale gireh ko sabh aai bhe gireh bheetar Thaadde ||

ਆਇ ਲਗੇ ਕਹਿਨੇ ਤ੍ਰੀਯ ਸੋ ਇਨ ਹੀ ਛਿਨ ਮੈ ਮਘਵਾ ਕੁਪਿ ਕਾਢੇ ॥

आइ लगे कहिने त्रीय सो इन ही छिन मै मघवा कुपि काढे ॥

aai lage kahine treey so in hee chhin mai maghavaa kup kaadde ||

ਸਤਿ ਲਹਿਯੋ ਭਗਵਾਨ ਹਮੈ ਇਨ ਹੀ ਹਮਰੇ ਸਭ ਹੀ ਦੁਖ ਕਾਢੇ ॥੩੮੨॥

सति लहियो भगवान हमै इन ही हमरे सभ ही दुख काढे ॥३८२॥

sat lahiyo bhagavaan hamai in hee hamare sabh hee dhukh kaadde ||382||


ਕੋਪ ਭਰੇ ਪਤਿ ਲੋਕਹ ਕੇ ਦਲ ਆਬ ਰਖੇ ਠਟਿ ਸਾਜ ਅਣੇ ॥

कोप भरे पति लोकह के दल आब रखे ठटि साज अणे ॥

kop bhare pat lokeh ke dhal aab rakhe ThaT saaj ane ||

ਭਗਵਾਨ ਜੂ ਠਾਢ ਭਯੋ ਕਰਿ ਲੈ ਗਿਰਿ ਪੈ ਕਰਿ ਕੈ ਕੁਛ ਹੂੰ ਨ ਗਣੇ ॥

भगवान जू ठाढ भयो करि लै गिरि पै करि कै कुछ हूँ न गणे ॥

bhagavaan joo Thaadd bhayo kar lai gir pai kar kai kuchh hoo(n) na gane ||

ਅਤਿ ਤਾ ਛਬਿ ਕੇ ਜਸ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਿਧੌ ਇਹ ਭਾਤਿ ਭਣੇ ॥

अति ता छबि के जस उच महा कबि स्याम किधौ इह भाति भणे ॥

at taa chhab ke jas uch mahaa kab sayaam kidhau ieh bhaat bhane ||

ਜਿਮੁ ਬੀਰ ਬਡੋ ਕਰਿ ਸਿਪਰ ਲੈ ਕਛੁ ਕੈ ਨ ਗਨੇ ਪੁਨਿ ਤੀਰ ਘਣੇ ॥੩੮੩॥

जिमु बीर बडो करि सिपर लै कछु कै न गने पुनि तीर घणे ॥३८३॥

jim beer baddo kar sipar lai kachh kai na gane pun teer ghane ||383||


ਗੋਪ ਕਹੈ ਇਹ ਸਾਧਨ ਕੋ ਦੁਖ ਦੂਰ ਕਰੈ ਮਨ ਮਾਹਿ ਗਡੈ ॥

गोप कहै इह साधन को दुख दूर करै मन माहि गडै ॥

gop kahai ieh saadhan ko dhukh dhoor karai man maeh gaddai ||

ਇਹ ਹੈ ਬਲਵਾਨ ਬਡੋ ਪ੍ਰਗਟਿਓ ਸੋਊ ਕੋ ਇਹ ਸੋ ਛਿਨ ਆਇ ਅਡੈ ॥

इह है बलवान बडो प्रगटिओ सोऊ को इह सो छिन आइ अडै ॥

eeh hai balavaan baddo pragaTio souoo ko ieh so chhin aai addai ||

ਸਭ ਲੋਗ ਕਹੈ ਫੁਨਿ ਖਾਪਤ ਯਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਭਗਵਾਨ ਬਡੈ ॥

सभ लोग कहै फुनि खापत या कबि स्याम कहै भगवान बडै ॥

sabh log kahai fun khaapat yaa kab sayaam kahai bhagavaan baddai ||

ਤਿਹ ਮੋਛ ਲਹੀ ਛਿਨ ਮੈ ਇਹ ਤੇ ਜਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਜਰਰਾ ਕੁ ਜਡੈ ॥੩੮੪॥

तिह मोछ लही छिन मै इह ते जिन के मन मै जररा कु जडै ॥३८४॥

teh mochh lahee chhin mai ieh te jin ke man mai jararaa k jaddai ||384||


ਕਰਿ ਕੋਪ ਨਿਵਾਰ ਦਏ ਮਘਵਾ ਦਲ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਬਡੇ ਬਲਬੀਰ ਬ੍ਰਤੀ ॥

करि कोप निवार दए मघवा दल कान्रह्रह बडे बलबीर ब्रती ॥

kar kop nivaar dhe maghavaa dhal kaanrahreh badde balabeer bratee ||

ਜਿਮ ਕੋਪਿ ਜਲੰਧਰਿ ਈਸਿ ਮਰਿਯੋ ਜਿਮ ਚੰਡਿ ਚਮੁੰਡਹਿ ਸੈਨ ਹਤੀ ॥

जिम कोपि जलंधरि ईसि मरियो जिम चंडि चमुँडहि सैन हती ॥

jim kop jala(n)dhar iees mariyo jim cha(n)dd chamu(n)ddeh sain hatee ||

ਪਛੁਤਾਇ ਗਯੋ ਮਘਵਾ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਨ ਰਹੀ ਤਿਹ ਕੀ ਪਤਿ ਏਕ ਰਤੀ ॥

पछुताइ गयो मघवा गृह को न रही तिह की पति एक रती ॥

pachhutai gayo maghavaa gireh ko na rahee teh kee pat ek ratee ||

ਇਕ ਮੇਘ ਬਿਦਾਰ ਦਏ ਹਰਿ ਜੀ ਜਿਮ ਮੋਹਿ ਨਿਵਾਰਤ ਕੋਪਿ ਜਤੀ ॥੩੮੫॥

इक मेघ बिदार दए हरि जी जिम मोहि निवारत कोपि जती ॥३८५॥

eik megh bidhaar dhe har jee jim moh nivaarat kop jatee ||385||


ਕੁਪ ਕੈ ਤਿਨਿ ਮੇਘ ਬਿਦਾਰ ਦਏ ਜਿਨਿ ਰਾਖ ਲਯੋ ਜਲ ਭੀਤਰ ਹਾਥੀ ॥

कुप कै तिनि मेघ बिदार दए जिनि राख लयो जल भीतर हाथी ॥

kup kai tin megh bidhaar dhe jin raakh layo jal bheetar haathee ||

ਜਾਹਿ ਸਿਲਾ ਲਗਿ ਪਾਇ ਤਰੀ ਜਿਹ ਰਾਖਿ ਲਈ ਦ੍ਰੁਪਤੀ ਸੁ ਅਨਾਥੀ ॥

जाहि सिला लगि पाइ तरी जिह राखि लई द्रुपती सु अनाथी ॥

jaeh silaa lag pai taree jeh raakh liee dhrupatee su anaathee ||

ਬੈਰ ਕਰੈ ਜੋਊ ਪੈ ਇਹ ਸੋ ਸਭ ਗੋਪ ਕਹੈ ਇਹ ਤਾਹਿ ਅਸਾਥੀ ॥

बैर करै जोऊ पै इह सो सभ गोप कहै इह ताहि असाथी ॥

bair karai jouoo pai ieh so sabh gop kahai ieh taeh asaathee ||

ਜੋ ਹਿਤ ਸੋ ਚਿਤ ਕੈ ਇਹ ਕੀ ਫੁਨਿ ਸੇਵ ਕਰੈ ਤਿਹ ਕੋ ਇਹ ਸਾਥੀ ॥੩੮੬॥

जो हित सो चित कै इह की फुनि सेव करै तिह को इह साथी ॥३८६॥

jo hit so chit kai ieh kee fun sev karai teh ko ieh saathee ||386||


ਮੇਘਨ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਕ੍ਰਿਸਨੰ ਦਲ ਖਾਤਿਰ ਊਪਰਿ ਨ ਕਛੂ ਆਂਦਾ ॥

मेघन को तब ही कृसनं दल खातिर ऊपरि न कछू आँदा ॥

meghan ko tab hee kirasana(n) dhal khaatir uoopar na kachhoo aa(n)dhaa ||

ਕੋਪ ਕਰਿਯੋ ਅਤਿ ਹੀ ਮਘਵਾ ਨ ਚਲਿਯੋ ਤਿਹ ਸੋ ਕਛੁ ਤਾਹਿ ਬਸਾਦਾ ॥

कोप करियो अति ही मघवा न चलियो तिह सो कछु ताहि बसादा ॥

kop kariyo at hee maghavaa na chaliyo teh so kachh taeh basaadhaa ||

ਜੋਰ ਚਲੈ ਕਿਹ ਕੋ ਤਿਹ ਸੋ ਕਹਿ ਹੈ ਸਭ ਹੀ ਜਿਸ ਕੋ ਜਗੁ ਬਾਦਾ ॥

जोर चलै किह को तिह सो कहि है सभ ही जिस को जगु बादा ॥

jor chalai keh ko teh so keh hai sabh hee jis ko jag baadhaa ||

ਮੂੰਡ ਨਿਵਾਇ ਮਨੈ ਦੁਖ ਪਾਇ ਗਯੋ ਮਘਵਾ ਉਠਿ ਧਾਮਿ ਖਿਸਾਦਾ ॥੩੮੭॥

मूँड निवाइ मनै दुख पाइ गयो मघवा उठि धामि खिसादा ॥३८७॥

moo(n)dd nivai manai dhukh pai gayo maghavaa uTh dhaam khisaadhaa ||387||


ਸਕ੍ਰ ਗਯੋ ਪਛੁਤਾਹਿ ਗ੍ਰਿਹੰ ਕਹੁ ਫੋਰ ਦਈ ਜਬ ਕਾਨ੍ਰਹਿ ਅਨੀ ॥

सक्र गयो पछुताहि गृहं कहु फोर दई जब कान्रहि अनी ॥

sakr gayo pachhutaeh giraha(n) kahu for dhiee jab kaanreh anee ||

ਬਰਖਾ ਕਰਿ ਕੋਪ ਕਰੀ ਬ੍ਰਿਜ ਪੈ ਸੁ ਕਛੂ ਹਰਿ ਕੈ ਨਹਿ ਏਕ ਗਨੀ ॥

बरखा करि कोप करी बृज पै सु कछू हरि कै नहि एक गनी ॥

barakhaa kar kop karee biraj pai su kachhoo har kai neh ek ganee ||

ਫੁਨਿ ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਿਧੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਭਨੀ ॥

फुनि ता छबि की अति ही उपमा कबि स्याम किधो इह भाति भनी ॥

fun taa chhab kee at hee upamaa kab sayaam kidho ieh bhaat bhanee ||

ਪਛਤਾਇ ਗਯੋ ਪਤਿ ਲੋਕਨ ਕੋ ਜਿਮ ਲੂਟ ਲਯੋ ਅਹਿ ਸੀਸ ਮਨੀ ॥੩੮੮॥

पछताइ गयो पति लोकन को जिम लूट लयो अहि सीस मनी ॥३८८॥

pachhatai gayo pat lokan ko jim looT layo eh sees manee ||388||


ਜਾਹਿ ਨ ਜਾਨਤ ਭੇਦ ਮੁਨੀ ਮਨਿ ਭਾ ਇਹ ਜਾਪਨ ਕੋ ਇਹ ਜਾਪੀ ॥

जाहि न जानत भेद मुनी मनि भा इह जापन को इह जापी ॥

jaeh na jaanat bhedh munee man bhaa ieh jaapan ko ieh jaapee ||

ਰਾਜ ਦਯੋ ਇਨ ਹੀ ਬਲਿ ਕੋ ਇਨ ਹੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਧਰਾ ਸਭ ਥਾਪੀ ॥

राज दयो इन ही बलि को इन ही कबि स्याम धरा सभ थापी ॥

raaj dhayo in hee bal ko in hee kab sayaam dharaa sabh thaapee ||

ਮਾਰਤ ਹੈ ਦਿਨ ਥੋਰਨ ਮੈ ਰਿਪੁ ਗੋਪ ਕਹੈ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ੍ਰਹ ਪ੍ਰਤਾਪੀ ॥

मारत है दिन थोरन मै रिपु गोप कहै इह कान्रह्रह प्रतापी ॥

maarat hai dhin thoran mai rip gop kahai ieh kaanrahreh prataapee ||

ਕਾਰਨ ਯਾਹਿ ਧਰੀ ਇਹ ਮੂਰਤਿ ਮਾਰਨ ਕੋ ਜਗ ਕੇ ਸਭ ਪਾਪੀ ॥੩੮੯॥

कारन याहि धरी इह मूरति मारन को जग के सभ पापी ॥३८९॥

kaaran yaeh dharee ieh moorat maaran ko jag ke sabh paapee ||389||


ਕਰਿ ਕੈ ਜਿਹ ਸੋ ਛਲ ਪੈ ਚਤੁਰਾਨਨ ਚੋਰਿ ਲਏ ਸਭ ਗੋਪ ਦਫਾ ॥

करि कै जिह सो छल पै चतुरानन चोरि लए सभ गोप दफा ॥

kar kai jeh so chhal pai chaturaanan chor le sabh gop dhafaa ||

ਤਿਨ ਕਉਤਕ ਦੇਖਨ ਕਾਰਨ ਕੋ ਫੁਨਿ ਰਾਖਿ ਰਹਿਓ ਵਹ ਬੀਚ ਖਫਾ ॥

तिन कउतक देखन कारन को फुनि राखि रहिओ वह बीच खफा ॥

tin kautak dhekhan kaaran ko fun raakh rahio veh beech khafaa ||

ਕਾਨ ਬਿਨਾ ਕੁਪਏ ਉਹ ਸੋ ਸੁ ਕਰੇ ਬਿਨ ਹੀ ਸਰ ਦੀਨ ਜਫਾ ॥

कान बिना कुपए उह सो सु करे बिन ही सर दीन जफा ॥

kaan binaa kupe uh so su kare bin hee sar dheen jafaa ||

ਛਿਨ ਮਧਿ ਬਨਾਇ ਲਏ ਬਛਰੇ ਸਭ ਗੋਪਨ ਕੀ ਉਨ ਹੀ ਸੀ ਸਫਾ ॥੩੯੦॥

छिन मधि बनाइ लए बछरे सभ गोपन की उन ही सी सफा ॥३९०॥

chhin madh banai le bachhare sabh gopan kee un hee see safaa ||390||


ਕਾਨ ਉਪਾਰਿ ਧਰਿਓ ਕਰ ਪੈ ਗਿਰਿ ਤਾ ਤਰਿ ਗੋਪ ਨਿਕਾਰਿ ਸਬੈ ॥

कान उपारि धरिओ कर पै गिरि ता तरि गोप निकारि सबै ॥

kaan upaar dhario kar pai gir taa tar gop nikaar sabai ||

ਬਕਈ ਬਕ ਅਉਰ ਗਡਾਸੁਰ ਤ੍ਰਿਨਾਵ੍ਰਤ ਬੀਰ ਬਧੇ ਛਿਨ ਬੀਚ ਤਬੈ ॥

बकई बक अउर गडासुर तृनाव्रत बीर बधे छिन बीच तबै ॥

bakiee bak aaur gaddaasur tiranaavrat beer badhe chhin beech tabai ||

ਜਿਨ ਕਾਲੀ ਕੋ ਨਾਥ ਲਯੋ ਛਿਨ ਭੀਤਰ ਧਿਆਨ ਨ ਛਾਡਹੁ ਵਾਹਿ ਕਬੈ ॥

जिन काली को नाथ लयो छिन भीतर धिआन न छाडहु वाहि कबै ॥

jin kaalee ko naath layo chhin bheetar dhiaan na chhaaddahu vaeh kabai ||

ਸਭ ਸੰਤ ਸੁਨੀ ਸੁਭ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਥਾ ਇਕ ਅਉਰ ਕਥਾ ਸੁਨਿ ਲੇਹੁ ਅਬੈ ॥੩੯੧॥

सभ संत सुनी सुभ कान्रह कथा इक अउर कथा सुनि लेहु अबै ॥३९१॥

sabh sa(n)t sunee subh kaanreh kathaa ik aaur kathaa sun leh abai ||391||


ਗੋਪ ਬਾਚ ਨੰਦ ਜੂ ਸੋ ॥

गोप बाच नंद जू सो ॥

gop baach na(n)dh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਨੰਦ ਕੇ ਅਗ੍ਰਜ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪਰਾਕ੍ਰਮ ਗੋਪਨ ਜਾਇ ਕਹਿਯੋ ਸੁ ਸਬੈ ॥

नंद के अग्रज कान्रह पराक्रम गोपन जाइ कहियो सु सबै ॥

na(n)dh ke agraj kaanreh paraakram gopan jai kahiyo su sabai ||

ਦੈਤ ਅਘਾਸੁਰ ਅਉਰ ਤ੍ਰਿਨਾਵ੍ਰਤ ਯਾਹਿ ਬਧਿਯੋ ਉਡਿ ਬੀਚ ਨਭੈ ॥

दैत अघासुर अउर तृनाव्रत याहि बधियो उडि बीच नभै ॥

dhait aghaasur aaur tiranaavrat yaeh badhiyo udd beech nabhai ||

ਫੁਨਿ ਮਾਰਿ ਡਰੀ ਬਕਈ ਸਭ ਗੋਪਨ ਦਾਨ ਦਯੋ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਅਭੈ ॥

फुनि मारि डरी बकई सभ गोपन दान दयो इह कान्रह अभै ॥

fun maar ddaree bakiee sabh gopan dhaan dhayo ieh kaanreh abhai ||

ਸੁਨੀਐ ਪਤਿ ਕੋਟਿ ਉਪਾਵ ਕਰੋ ਕੋਊ ਪੈ ਇਹ ਸੋ ਸੁਤ ਨਾਹਿ ਲਭੈ ॥੩੯੨॥

सुनीऐ पति कोटि उपाव करो कोऊ पै इह सो सुत नाहि लभै ॥३९२॥

suneeaai pat koT upaav karo kouoo pai ieh so sut naeh labhai ||392||


ਗੋਪਨ ਕੀ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨੀਐ ਪਤਿ ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਇਹ ਕੋ ਰਣਗਾਮੀ ॥

गोपन की बिनती सुनीऐ पति धिआन धरै इह को रणगामी ॥

gopan kee binatee suneeaai pat dhiaan dharai ieh ko ranagaamee ||

ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਇਹ ਕੋ ਮੁਨਿ ਈਸਰ ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਇਹ ਕਾਇਰ ਕਾਮੀ ॥

धिआन धरै इह को मुनि ईसर धिआन धरै इह काइर कामी ॥

dhiaan dharai ieh ko mun ieesar dhiaan dharai ieh kair kaamee ||

ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਇਹ ਕੋ ਸੁ ਤ੍ਰਿਯਾ ਸਭ ਧਿਆਨ ਧਰੈ ਇਹ ਦੇਖਨ ਬਾਮੀ ॥

धिआन धरै इह को सु तृया सभ धिआन धरै इह देखन बामी ॥

dhiaan dharai ieh ko su tirayaa sabh dhiaan dharai ieh dhekhan baamee ||

ਸਤਿ ਲਖਿਯੋ ਹਮ ਕੈ ਕਰਤਾ ਜਗ ਸਤਿ ਕਹਿਯੋ ਮਤ ਕੈ ਨਹਿ ਖਾਮੀ ॥੩੯੩॥

सति लखियो हम कै करता जग सति कहियो मत कै नहि खामी ॥३९३॥

sat lakhiyo ham kai karataa jag sat kahiyo mat kai neh khaamee ||393||


ਹੈ ਭਗਵਾਨ ਬਲੀ ਪ੍ਰਗਟਿਯੋ ਸਭ ਗੋਪ ਕਹੈ ਪੁਤਨਾ ਇਨ ਮਾਰੀ ॥

है भगवान बली प्रगटियो सभ गोप कहै पुतना इन मारी ॥

hai bhagavaan balee pragaTiyo sabh gop kahai putanaa in maaree ||

ਰਾਜ ਬਿਭੀਛਨ ਯਾਹਿ ਦਯੋ ਇਨ ਹੀ ਕੁਪਿ ਰਾਵਨ ਦੈਤ ਸੰਘਾਰੀ ॥

राज बिभीछन याहि दयो इन ही कुपि रावन दैत संघारी ॥

raaj bibheechhan yaeh dhayo in hee kup raavan dhait sa(n)ghaaree ||

ਰਛ ਕਰੀ ਪ੍ਰਲਾਦਹਿ ਕੀ ਇਨ ਹੀ ਹਰਨਾਖਸ ਕੀ ਉਰ ਫਾਰੀ ॥

रछ करी प्रलादहि की इन ही हरनाखस की उर फारी ॥

rachh karee pralaadheh kee in hee haranaakhas kee ur faaree ||

ਨੰਦ ਸੁਨੋ ਪਤਿ ਲੋਕਨ ਕੈ ਇਨ ਹੀ ਹਮਰੀ ਅਬ ਦੇਹ ਉਬਾਰੀ ॥੩੯੪॥

नंद सुनो पति लोकन कै इन ही हमरी अब देह उबारी ॥३९४॥

na(n)dh suno pat lokan kai in hee hamaree ab dheh ubaaree ||394||


ਹੈ ਸਭ ਲੋਗਨ ਕੋ ਕਰਤਾ ਬ੍ਰਿਜ ਭੀਤਰ ਹੈ ਕਰਤਾ ਇਹ ਲੀਲਾ ॥

है सभ लोगन को करता बृज भीतर है करता इह लीला ॥

hai sabh logan ko karataa biraj bheetar hai karataa ieh leelaa ||

ਸਿਖ੍ਯਨ ਕੋ ਬਰਤਾ ਹਰਿ ਹੈ ਇਹ ਸਾਧਨ ਕੋ ਹਰਤਾ ਤਨ ਹੀਲਾ ॥

सिख्यन को बरता हरि है इह साधन को हरता तन हीला ॥

sikhayan ko barataa har hai ieh saadhan ko harataa tan heelaa ||

ਰਾਖ ਲਈ ਇਨ ਹੀ ਸੀਅ ਕੀ ਪਤਿ ਰਾਖਿ ਲਈ ਤ੍ਰਿਯ ਪਾਰਥ ਸੀਲਾ ॥

राख लई इन ही सीअ की पति राखि लई तृय पारथ सीला ॥

raakh liee in hee seea kee pat raakh liee tiray paarath seelaa ||

ਗੋਪ ਕਹੈ ਪਤਿ ਸੋ ਸੁਨੀਐ ਇਹ ਹੈ ਕ੍ਰਿਸਨੰ ਬਰ ਬੀਰ ਹਠੀਲਾ ॥੩੯੫॥

गोप कहै पति सो सुनीऐ इह है कृसनं बर बीर हठीला ॥३९५॥

gop kahai pat so suneeaai ieh hai kirasana(n) bar beer haTheelaa ||395||


ਦਿਨ ਬੀਤ ਗਏ ਚਕਏ ਗਿਰਿ ਕੇ ਹਰਿ ਜੀ ਬਛਰੇ ਸੰਗ ਲੈ ਬਨਿ ਜਾਵੈ ॥

दिन बीत गए चकए गिरि के हरि जी बछरे संग लै बनि जावै ॥

dhin beet ge chake gir ke har jee bachhare sa(n)g lai ban jaavai ||

ਜਿਉ ਧਰ ਮੂਰਤਿ ਘਾਸੁ ਚੁਗੈ ਭਗਵਾਨ ਮਹਾ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਵੈ ॥

जिउ धर मूरति घासु चुगै भगवान महा मन मै सुख पावै ॥

jiau dhar moorat ghaas chugai bhagavaan mahaa man mai sukh paavai ||

ਲੈ ਮੁਰਲੀ ਅਪੁਨੇ ਕਰ ਮੈ ਕਰਿ ਭਾਵ ਘਨੇ ਹਿਤ ਸਾਥ ਬਜਾਵੈ ॥

लै मुरली अपुने कर मै करि भाव घने हित साथ बजावै ॥

lai muralee apune kar mai kar bhaav ghane hit saath bajaavai ||

ਮੋਹਿ ਰਹੈ ਜੁ ਸੁਨੈ ਪਤਨੀ ਸੁਰ ਮੋਹਿ ਰਹੈ ਧੁਨਿ ਜੋ ਸੁਨਿ ਪਾਵੈ ॥੩੯੬॥

मोहि रहै जु सुनै पतनी सुर मोहि रहै धुनि जो सुनि पावै ॥३९६॥

moh rahai ju sunai patanee sur moh rahai dhun jo sun paavai ||396||


ਕੁਪ ਕੈ ਜਿਨਿ ਬਾਲਿ ਮਰਿਓ ਛਿਨ ਮੈ ਅਰੁ ਰਾਵਨ ਕੀ ਜਿਨਿ ਸੈਨ ਮਰੀ ਹੈ ॥

कुप कै जिनि बालि मरिओ छिन मै अरु रावन की जिनि सैन मरी है ॥

kup kai jin baal mario chhin mai ar raavan kee jin sain maree hai ||

ਜਾਹਿ ਬਿਭੀਛਨ ਰਾਜ ਦਯੋ ਛਿਨ ਮੈ ਜਿਹ ਕੀ ਤਿਹ ਲੰਕ ਕਰੀ ਹੈ ॥

जाहि बिभीछन राज दयो छिन मै जिह की तिह लंक करी है ॥

jaeh bibheechhan raaj dhayo chhin mai jeh kee teh la(n)k karee hai ||

ਮੁਰ ਮਾਰਿ ਦਯੋ ਘਟਿਕਾਨ ਕਰੀ ਰਿਪੁ ਜਾ ਸੀਅ ਕੀ ਜੀਯ ਪੀਰ ਹਰੀ ਹੈ ॥

मुर मारि दयो घटिकान करी रिपु जा सीअ की जीय पीर हरी है ॥

mur maar dhayo ghaTikaan karee rip jaa seea kee jeey peer haree hai ||

ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਭਗਵਾਨ ਸੁ ਗਊਅਨ ਕੈ ਮਿਸ ਖੇਲ ਕਰੀ ਹੈ ॥੩੯੭॥

सो बृज भूमि बिखै भगवान सु गऊअन कै मिस खेल करी है ॥३९७॥

so biraj bhoom bikhai bhagavaan su guooan kai mis khel karee hai ||397||


ਜਾਹਿ ਸਹੰਸ੍ਰ ਫਨੀ ਤਨ ਊਪਰਿ ਸੋਇ ਕਰੀ ਜਲ ਭੀਤਰ ਕ੍ਰੀੜਾ ॥

जाहि सहंस्र फनी तन ऊपरि सोइ करी जल भीतर क्रीड़ा ॥

jaeh saha(n)sr fanee tan uoopar soi karee jal bheetar kreeRaa ||

ਜਾਹਿ ਬਿਭੀਛਨ ਰਾਜ ਦਯੋ ਅਰੁ ਜਾਹਿ ਦਈ ਕੁਪਿ ਰਾਵਨ ਪੀੜਾ ॥

जाहि बिभीछन राज दयो अरु जाहि दई कुपि रावन पीड़ा ॥

jaeh bibheechhan raaj dhayo ar jaeh dhiee kup raavan peeRaa ||

ਜਾਹਿ ਦਯੋ ਕਰ ਕੈ ਜਗ ਭੀਤਰ ਜੀਵ ਚਰਾਚਰ ਅਉ ਗਜ ਕੀੜਾ ॥

जाहि दयो कर कै जग भीतर जीव चराचर अउ गज कीड़ा ॥

jaeh dhayo kar kai jag bheetar jeev charaachar aau gaj keeRaa ||

ਖੇਲਤ ਸੋ ਬ੍ਰਿਜ ਭੂਮਿ ਬਿਖੈ ਜਿਨਿ ਕੀਲ ਸੁਰਾਸੁਰ ਬੀਚ ਝਗੀੜਾ ॥੩੯੮॥

खेलत सो बृज भूमि बिखै जिनि कील सुरासुर बीच झगीड़ा ॥३९८॥

khelat so biraj bhoom bikhai jin keel suraasur beech jhageeRaa ||398||


ਬੀਰ ਬਡੇ ਦੁਰਜੋਧਨ ਆਦਿਕ ਜਾਹਿ ਮਰਾਇ ਡਰੇ ਰਨਿ ਛਤ੍ਰੀ ॥

बीर बडे दुरजोधन आदिक जाहि मराइ डरे रनि छत्री ॥

beer badde dhurajodhan aadhik jaeh marai ddare ran chhatree ||

ਜਾਹਿ ਮਰਿਯੋ ਸਿਸੁਪਾਲ ਰਿਸੈ ਕਰਿ ਰਾਜਨ ਮੈ ਕ੍ਰਿਸਨੰ ਬਰ ਅਤ੍ਰੀ ॥

जाहि मरियो सिसुपाल रिसै करि राजन मै कृसनं बर अत्री ॥

jaeh mariyo sisupaal risai kar raajan mai kirasana(n) bar atree ||

ਖੇਲਤ ਹੈ ਸੋਊ ਗਊਅਨ ਮੈ ਜੋਊ ਹੈ ਜਗ ਕੋ ਕਰਤਾ ਬਧ ਸਤ੍ਰੀ ॥

खेलत है सोऊ गऊअन मै जोऊ है जग को करता बध सत्री ॥

khelat hai souoo guooan mai jouoo hai jag ko karataa badh satree ||

ਆਗਿ ਸੋ ਧੂਮ੍ਰ ਲਪੇਟਤ ਜਿਉ ਫੁਨਿ ਗੋਪ ਕਹਾਵਤ ਹੈ ਇਹ ਛਤ੍ਰੀ ॥੩੯੯॥

आगि सो धूम्र लपेटत जिउ फुनि गोप कहावत है इह छत्री ॥३९९॥

aag so dhoomr lapeTat jiau fun gop kahaavat hai ieh chhatree ||399||


ਕਰ ਜੁਧ ਮਰੇ ਇਕਲੇ ਮਧੁ ਕੀਟਭ ਰਾਜੁ ਸਤਕ੍ਰਿਤ ਕੋ ਜਿਹ ਦੀਆ ॥

कर जुध मरे इकले मधु कीटभ राजु सतकृत को जिह दीआ ॥

kar judh mare ikale madh keeTabh raaj satakirat ko jeh dheeaa ||

ਕੁੰਭਕਰਨ ਮਰਿਯੋ ਜਿਨਿ ਹੈ ਅਰੁ ਰਾਵਨ ਕੋ ਛਿਨ ਮੈ ਬਧ ਕੀਆ ॥

कुँभकरन मरियो जिनि है अरु रावन को छिन मै बध कीआ ॥

ku(n)bhakaran mariyo jin hai ar raavan ko chhin mai badh keeaa ||

ਰਾਜੁ ਬਿਭੀਛਨ ਦੇ ਕਰਿ ਆਨੰਦ ਅਉਧਿ ਚਲਿਯੋ ਸੰਗਿ ਲੈ ਕਰਿ ਸੀਆ ॥

राजु बिभीछन दे करि आनंद अउधि चलियो संगि लै करि सीआ ॥

raaj bibheechhan dhe kar aana(n)dh aaudh chaliyo sa(n)g lai kar seeaa ||

ਪਾਪਨ ਕੇ ਬਧ ਕਾਰਨ ਸੋ ਅਵਤਾਰ ਬਿਖੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਅਬ ਲੀਆ ॥੪੦੦॥

पापन के बध कारन सो अवतार बिखै बृज के अब लीआ ॥४००॥

paapan ke badh kaaran so avataar bikhai biraj ke ab leeaa ||400||


ਜੋ ਉਪਮਾ ਹਰਿ ਕੀ ਕਰੀ ਗੋਪਨ ਤਉ ਪਤਿ ਗੋਪਨ ਬਾਤ ਕਹੀ ਹੈ ॥

जो उपमा हरि की करी गोपन तउ पति गोपन बात कही है ॥

jo upamaa har kee karee gopan tau pat gopan baat kahee hai ||

ਜੋ ਇਹ ਕੋ ਬਲੁ ਆਇ ਕਹਿਯੋ ਗਰਗੈ ਹਮ ਸੋ ਸੋਊ ਬਾਤ ਸਹੀ ਹੈ ॥

जो इह को बलु आइ कहियो गरगै हम सो सोऊ बात सही है ॥

jo ieh ko bal aai kahiyo garagai ham so souoo baat sahee hai ||

ਪੂਤੁ ਕਹਿਯੋ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਕੋ ਦਿਜ ਤਾਹਿ ਮਿਲਿਯੋ ਫੁਨਿ ਮਾਨਿ ਇਹੀ ਹੈ ॥

पूतु कहियो बसुदेवहि को दिज ताहि मिलियो फुनि मानि इही है ॥

poot kahiyo basudheveh ko dhij taeh miliyo fun maan ihee hai ||

ਜੋ ਇਹ ਕੋ ਫੁਨਿ ਮਾਰਨ ਆਯੋ ਸੁ ਤਾਹੀ ਕੀ ਦੇਹ ਗਈ ਨ ਰਹੀ ਹੈ ॥੪੦੧॥

जो इह को फुनि मारन आयो सु ताही की देह गई न रही है ॥४०१॥

jo ieh ko fun maaran aayo su taahee kee dheh giee na rahee hai ||401||


ਅਥ ਇੰਦ੍ਰ ਆਇ ਦਰਸਨ ਕੀਆ ਅਰੁ ਬੇਨਤੀ ਕਰਤ ਭਯਾ ॥

अथ इंद्र आइ दरसन कीआ अरु बेनती करत भया ॥

ath i(n)dhr aai dharasan keeaa ar benatee karat bhayaa ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦਿਨ ਏਕ ਗਏ ਬਨ ਕੋ ਹਰਿ ਜੀ ਮਘਵਾ ਤਜਿ ਮਾਨ ਹਰੀ ਪਹਿ ਆਯੋ ॥

दिन एक गए बन को हरि जी मघवा तजि मान हरी पहि आयो ॥

dhin ek ge ban ko har jee maghavaa taj maan haree peh aayo ||

ਪਾਪਨ ਕੇ ਬਖਸਾਵਨ ਕੋ ਹਰਿ ਕੇ ਤਰਿ ਪਾਇਨ ਸੀਸ ਨਿਵਾਯੋ ॥

पापन के बखसावन को हरि के तरि पाइन सीस निवायो ॥

paapan ke bakhasaavan ko har ke tar pain sees nivaayo ||

ਅਉਰ ਕਰੀ ਬਿਨਤੀ ਹਰਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਤਿਹ ਤੋ ਭਗਵਾਨ ਰਿਝਾਯੋ ॥

अउर करी बिनती हरि की अति ही तिह तो भगवान रिझायो ॥

aaur karee binatee har kee at hee teh to bhagavaan rijhaayo ||

ਚੂਕ ਭਈ ਹਮ ਤੇ ਕਹਿਯੋ ਸਕ੍ਰ ਸੁ ਕੈ ਹਰਿ ਜੀ ਤੁਮ ਕੌ ਨਹਿ ਪਾਯੋ ॥੪੦੨॥

चूक भई हम ते कहियो सक्र सु कै हरि जी तुम कौ नहि पायो ॥४०२॥

chook bhiee ham te kahiyo sakr su kai har jee tum kau neh paayo ||402||


ਤੂ ਜਗ ਕੋ ਕਰਤਾ ਕਰੁਨਾਨਿਧਿ ਤੂ ਸਭ ਲੋਗਨ ਕੋ ਕਰਤਾ ਹੈ ॥

तू जग को करता करुनानिधि तू सभ लोगन को करता है ॥

too jag ko karataa karunaanidh too sabh logan ko karataa hai ||

ਤੂ ਮੁਰ ਕੋ ਮਰੀਯਾ ਰਿਪੁ ਰਾਵਨ ਭੂਰਿਸਿਲਾ ਤ੍ਰੀਯਾ ਕੋ ਭਰਤਾ ਹੈ ॥

तू मुर को मरीया रिपु रावन भूरिसिला त्रीया को भरता है ॥

too mur ko mareeyaa rip raavan bhoorisilaa treeyaa ko bharataa hai ||

ਤੂ ਸਭ ਦੇਵਨ ਕੋ ਪਤਿ ਹੈ ਅਰੁ ਸਾਧਨ ਕੇ ਦੁਖ ਕੋ ਹਰਤਾ ਹੈ ॥

तू सभ देवन को पति है अरु साधन के दुख को हरता है ॥

too sabh dhevan ko pat hai ar saadhan ke dhukh ko harataa hai ||

ਜੋ ਤੁਮਰੀ ਕਛੁ ਭੂਲ ਕਰੈ ਤਿਹ ਕੇ ਫੁਨਿ ਤੂ ਤਨ ਕੋ ਮਰਤਾ ਹੈ ॥੪੦੩॥

जो तुमरी कछु भूल करै तिह के फुनि तू तन को मरता है ॥४०३॥

jo tumaree kachh bhool karai teh ke fun too tan ko marataa hai ||403||


ਸੁਨਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸਤਕ੍ਰਿਤ ਕੀ ਉਪਮਾ ਤਬ ਕਾਮ ਸੁ ਧੇਨ ਗਊ ਚਲਿ ਆਈ ॥

सुनि कान्रह सतकृत की उपमा तब काम सु धेन गऊ चलि आई ॥

sun kaanreh satakirat kee upamaa tab kaam su dhen guoo chal aaiee ||

ਆਇ ਕਰੀ ਉਪਮਾ ਹਰਿ ਕੀ ਬਹੁ ਭਾਤਿਨ ਸੋ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਡਾਈ ॥

आइ करी उपमा हरि की बहु भातिन सो कबि स्याम बडाई ॥

aai karee upamaa har kee bahu bhaatin so kab sayaam baddaiee ||

ਗਾਵਤ ਹੀ ਗੁਨ ਕਾਨਰ ਕੇ ਇਕ ਕਿੰਕਰ ਆਇ ਗਈ ਹਰਿ ਪਾਈ ॥

गावत ही गुन कानर के इक किंकर आइ गई हरि पाई ॥

gaavat hee gun kaanar ke ik ki(n)kar aai giee har paiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਰੋ ਉਪਮਾ ਕਹਿਯੋ ਪਤਿ ਸੋ ਉਪਮਾ ਬਹੁ ਭਾਤਿਨ ਭਾਈ ॥੪੦੪॥

स्याम करो उपमा कहियो पति सो उपमा बहु भातिन भाई ॥४०४॥

sayaam karo upamaa kahiyo pat so upamaa bahu bhaatin bhaiee ||404||


ਕਾਨਰ ਕੇ ਪਗ ਪੂਜਨ ਕੋ ਸਭ ਦੇਵਪੁਰੀ ਤਜਿ ਕੈ ਸੁਰ ਆਏ ॥

कानर के पग पूजन को सभ देवपुरी तजि कै सुर आए ॥

kaanar ke pag poojan ko sabh dhevapuree taj kai sur aae ||

ਪਾਇ ਪਰੇ ਇਕ ਪੂਜਤ ਭੇ ਇਕ ਨਾਚ ਉਠੇ ਇਕ ਮੰਗਲ ਗਾਏ ॥

पाइ परे इक पूजत भे इक नाच उठे इक मंगल गाए ॥

pai pare ik poojat bhe ik naach uThe ik ma(n)gal gaae ||

ਸੇਵ ਕਰੈ ਹਰਿ ਕੀ ਹਿਤ ਕੈ ਕਰਿ ਆਵਤ ਕੇਸਰ ਧੂਪ ਜਗਾਏ ॥

सेव करै हरि की हित कै करि आवत केसर धूप जगाए ॥

sev karai har kee hit kai kar aavat kesar dhoop jagaae ||

ਦੈਤਨ ਕੋ ਬਧ ਕੈ ਭਗਵਾਨ ਮਨੋ ਜਗ ਮੈ ਸੁਰ ਫੇਰਿ ਬਸਾਏ ॥੪੦੫॥

दैतन को बध कै भगवान मनो जग मै सुर फेरि बसाए ॥४०५॥

dhaitan ko badh kai bhagavaan mano jag mai sur fer basaae ||405||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਦੇਵ ਸਕ੍ਰ ਆਦਿਕ ਸਭੈ ਸਭ ਤਜਿ ਕੈ ਮਨਿ ਮਾਨ ॥

देव सक्र आदिक सभै सभ तजि कै मनि मान ॥

dhev sakr aadhik sabhai sabh taj kai man maan ||

ਹ੍ਵੈ ਇਕਤ੍ਰ ਕਰਨੈ ਲਗੇ ਕ੍ਰਿਸਨ ਉਸਤਤੀ ਬਾਨਿ ॥੪੦੬॥

ह्वै इकत्र करनै लगे कृसन उसतती बानि ॥४०६॥

havai ikatr karanai lage kirasan usatatee baan ||406||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਪ੍ਰੇਮ ਭਰੇ ਲਾਜ ਕੇ ਜਹਾਜ ਦੋਊ ਦੇਖੀਅਤ ਬਾਰਿ ਭਰੇ ਅਭ੍ਰਨ ਕੀ ਆਭਾ ਕੋ ਧਰਤ ਹੈ ॥

प्रेम भरे लाज के जहाज दोऊ देखीअत बारि भरे अभ्रन की आभा को धरत है ॥

prem bhare laaj ke jahaaj dhouoo dhekheeat baar bhare abhran kee aabhaa ko dharat hai ||

ਸੀਲ ਕੇ ਹੈ ਸਿੰਧੁ ਗੁਨ ਸਾਗਰ ਉਜਾਗਰ ਕੇ ਨਾਗਰ ਨਵਲ ਨੈਨ ਦੋਖਨ ਹਰਤ ਹੈ ॥

सील के है सिंधु गुन सागर उजागर के नागर नवल नैन दोखन हरत है ॥

seel ke hai si(n)dh gun saagar ujaagar ke naagar naval nain dhokhan harat hai ||

ਸਤ੍ਰਨ ਸੰਘਾਰੀ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਅਵਤਾਰੀ ਜੂ ਕੇ ਸਾਧਨ ਕੋ ਦੇਹ ਦੂਖ ਦੂਰ ਕੋ ਕਰਤ ਹੈ ॥

सत्रन संघारी इह कान्रह अवतारी जू के साधन को देह दूख दूर को करत है ॥

satran sa(n)ghaaree ieh kaanreh avataaree joo ke saadhan ko dheh dhookh dhoor ko karat hai ||

ਮਿਤ੍ਰ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਕ ਏ ਜਗ ਕੇ ਉਧਾਰਕ ਹੈ ਦੇਖ ਕੈ ਦੁਸਟ ਜਿਹ ਜੀਯ ਤੇ ਜਰਤ ਹੈ ॥੪੦੭॥

मित्र प्रतिपारक ए जग के उधारक है देख कै दुसट जिह जीय ते जरत है ॥४०७॥

mitr pratipaarak e jag ke udhaarak hai dhekh kai dhusaT jeh jeey te jarat hai ||407||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਸੀਸ ਨਿਵਾਇ ਸਭੈ ਸੁਰ ਆਇਸੁ ਲੈ ਚਲ ਧਾਮਿ ਗਏ ਹੈ ॥

कान्रह को सीस निवाइ सभै सुर आइसु लै चल धामि गए है ॥

kaanreh ko sees nivai sabhai sur aais lai chal dhaam ge hai ||

ਗੋਬਿੰਦ ਨਾਮ ਧਰਿਯੋ ਹਰਿ ਕੋ ਇਹ ਤੈ ਮਨ ਆਨੰਦ ਯਾਦ ਭਏ ਹੈ ॥

गोबिंद नाम धरियो हरि को इह तै मन आनंद याद भए है ॥

gobi(n)dh naam dhariyo har ko ieh tai man aana(n)dh yaadh bhe hai ||

ਰਾਤਿ ਪਰੇ ਚਲਿ ਕੈ ਭਗਵਾਨ ਸੁ ਡੇਰਨਿ ਆਪਨ ਬੀਚ ਅਏ ਹੈ ॥

राति परे चलि कै भगवान सु डेरनि आपन बीच अए है ॥

raat pare chal kai bhagavaan su dderan aapan beech ae hai ||

ਪ੍ਰਾਤਿ ਭਏ ਜਗ ਕੇ ਦਿਖਬੇ ਕਹੁ ਕੀਨ ਸੁ ਸੁੰਦਰ ਖੇਲ ਨਏ ਹੈ ॥੪੦੮॥

प्राति भए जग के दिखबे कहु कीन सु सुँदर खेल नए है ॥४०८॥

praat bhe jag ke dhikhabe kahu keen su su(n)dhar khel ne hai ||408||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਇੰਦ੍ਰ ਭੂਲ ਬਖਸਾਵਨ ਨਾਮ ਬਰਨਨੰ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे इंद्र भूल बखसावन नाम बरननं धिआइ समापतम ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare i(n)dhr bhool bakhasaavan naam baranana(n) dhiaai samaapatam ||


ਅਥ ਨੰਦ ਕੋ ਬਰੁਨ ਬਾਧ ਕਰਿ ਲੈ ਗਏ ॥

अथ नंद को बरुन बाध करि लै गए ॥

ath na(n)dh ko barun baadh kar lai ge ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਨਿਸਿ ਏਕ ਦ੍ਵਾਦਸਿ ਕੇ ਹਰਿ ਤਾਤ ਚਲਿਯੋ ਜਮੁਨਾ ਮਹਿ ਨ੍ਰਹਾਵਨ ਕਾਜੈ ॥

निसि एक द्वादसि के हरि तात चलियो जमुना महि न्रहावन काजै ॥

nis ek dhavaiaadhas ke har taat chaliyo jamunaa meh nrahaavan kaajai ||

ਆਹਿ ਪਰਿਓ ਜਲ ਮੈ ਬਰੁਨੰ ਗਜ ਕੋਪਿ ਗਹਿਯੋ ਸਭ ਜੋਰਿ ਸਮਾਜੈ ॥

आहि परिओ जल मै बरुनं गज कोपि गहियो सभ जोरि समाजै ॥

aaeh pario jal mai baruna(n) gaj kop gahiyo sabh jor samaajai ||

ਬਾਧ ਚਲੇ ਸੰਗਿ ਲੈ ਬਰੁਨੰ ਪਹਿ ਕਾਨਰ ਕੇ ਬਿਨੁ ਹੀ ਕੁਪਿ ਗਾਜੈ ॥

बाध चले संगि लै बरुनं पहि कानर के बिनु ही कुपि गाजै ॥

baadh chale sa(n)g lai baruna(n) peh kaanar ke bin hee kup gaajai ||

ਜਾਇ ਕੈ ਠਾਢਿ ਕਰਿਓ ਜਬ ਹੀ ਪਹਿਚਾਨ ਲਯੋ ਦਰੀਆਵਨ ਰਾਜੈ ॥੪੦੯॥

जाइ कै ठाढि करिओ जब ही पहिचान लयो दरीआवन राजै ॥४०९॥

jai kai Thaadd kario jab hee pahichaan layo dhareeaavan raajai ||409||


ਨੰਦ ਬਿਨਾ ਪੁਰਿ ਸੁੰਨ ਭਯੋ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲ ਕੈ ਹਰਿ ਜੀ ਪਹਿ ਆਏ ॥

नंद बिना पुरि सुँन भयो सभ ही मिल कै हरि जी पहि आए ॥

na(n)dh binaa pur su(n)n bhayo sabh hee mil kai har jee peh aae ||

ਆਇ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੇ ਪਰ ਪਾਇਨ ਨੰਦ ਤ੍ਰਿਯਾਦਿਕ ਤੇ ਘਿਘਿਆਏ ॥

आइ प्रनाम करे पर पाइन नंद तृयादिक ते घिघिआए ॥

aai pranaam kare par pain na(n)dh tirayaadhik te ghighiaae ||

ਕੈ ਬਹੁ ਭਾਤਨ ਸੋ ਬਿਨਤੀ ਕਰਿ ਕੈ ਭਗਵਾਨ ਕੋ ਆਇ ਰਿਝਾਏ ॥

कै बहु भातन सो बिनती करि कै भगवान को आइ रिझाए ॥

kai bahu bhaatan so binatee kar kai bhagavaan ko aai rijhaae ||


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