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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ਭੂਭਰ ਬੀਚ ਪਰੇ ਜਲ ਜਿਉ ਤਿਹ ਤੇ ਫੁਨਿ ਹੋਤ ਮਹਾ ਧੁਨਿ ਜੈਸੇ ॥੨੧੦॥

भूभर बीच परे जल जिउ तिह ते फुनि होत महा धुनि जैसे ॥२१०॥

bhoobhar beech pare jal jiau teh te fun hot mahaa dhun jaise ||210||


ਚਕ੍ਰਤ ਹੋਇ ਰਹੇ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਲਕ ਮਾਰ ਲਏ ਹਰਿ ਜੀ ਇਹ ਨਾਗੈ ॥

चक्रत होइ रहे बृज बालक मार लए हरि जी इह नागै ॥

chakrat hoi rahe biraj baalak maar le har jee ieh naagai ||

ਦਛਨ ਤੀਅ ਭੁਜਾ ਗਹਿ ਕੈ ਇਹ ਮਤਿ ਲਗੈ ਦੁਖ ਅਉ ਸੁਖ ਭਾਗੈ ॥

दछन तीअ भुजा गहि कै इह मति लगै दुख अउ सुख भागै ॥

dhachhan teea bhujaa geh kai ieh mat lagai dhukh aau sukh bhaagai ||

ਖੋਜਤ ਖੋਜਤ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਜਨ ਕਉਤਕ ਦੇਖਿ ਲਯੋ ਇਹ ਆਗੈ ॥

खोजत खोजत सभै बृज के जन कउतक देखि लयो इह आगै ॥

khojat khojat sabhai biraj ke jan kautak dhekh layo ieh aagai ||

ਸ੍ਯਾਮਹਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਡੋ ਅਹਿ ਕਾਟਤ ਜਿਉ ਰੁਚ ਕੈ ਨਰ ਖਾਵਤ ਸਾਗੈ ॥੨੧੧॥

स्यामहि स्याम बडो अहि काटत जिउ रुच कै नर खावत सागै ॥२११॥

sayaameh sayaam baddo eh kaaTat jiau ruch kai nar khaavat saagai ||211||


ਰੋਵਨ ਲਾਗ ਜਬੈ ਜਸੁਦਾ ਚੁਪ ਤਾਹਿ ਕਰਾਵਤ ਪੈ ਜੁ ਅਲੀ ਹੈ ॥

रोवन लाग जबै जसुदा चुप ताहि करावत पै जु अली है ॥

rovan laag jabai jasudhaa chup taeh karaavat pai ju alee hai ||

ਦੈਤ ਤ੍ਰਿਨਾਵ੍ਰਤ ਅਉਰ ਬਕੀ ਵ ਬਕਾਸੁਰ ਹਨੇ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਲੀ ਹੈ ॥

दैत तृनाव्रत अउर बकी व बकासुर हने इह कान्रह बली है ॥

dhait tiranaavrat aaur bakee v bakaasur hane ieh kaanreh balee hai ||

ਆਇ ਹੈ ਮਾਰ ਅਬੈ ਇਹ ਸਾਪਹਿ ਬੋਲਿ ਉਠਿਓ ਇਹ ਭਾਤ ਹਲੀ ਹੈ ॥

आइ है मार अबै इह सापहि बोलि उठिओ इह भात हली है ॥

aai hai maar abai ieh saapeh bol uThio ieh bhaat halee hai ||

ਤੋਰ ਡਰੈ ਸਭ ਹੀ ਇਹ ਕੇ ਫਨਿ ਪੈ ਕਰੁਨਾ ਨਿਧਿ ਜੋਰ ਛਲੀ ਹੈ ॥੨੧੨॥

तोर डरै सभ ही इह के फनि पै करुना निधि जोर छली है ॥२१२॥

tor ddarai sabh hee ieh ke fan pai karunaa nidh jor chhalee hai ||212||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ॥

कबियो बाच ॥

kabiyo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਾਨਿ ਦੁਖੀ ਅਪਨ੍ਰਯੋ ਜਨ ਕੌ ਅਪਨੋ ਤਨ ਤਾ ਤੈ ਛਡਾਇ ਲਯੋ ਹੈ ॥

जानि दुखी अपन्रयो जन कौ अपनो तन ता तै छडाइ लयो है ॥

jaan dhukhee apanrayo jan kau apano tan taa tai chhaddai layo hai ||

ਬਕਤ੍ਰ ਬਿਲੋਕ ਬਡੋ ਵਹ ਪੰਨਗ ਪੈ ਮਨ ਭੀਤਰ ਕ੍ਰੁਧ ਭਯੋ ਹੈ ॥

बकत्र बिलोक बडो वह पंनग पै मन भीतर क्रुध भयो है ॥

bakatr bilok baddo veh pa(n)nag pai man bheetar krudh bhayo hai ||

ਸਉ ਫਨ ਕੋ ਸੁ ਫੁਲਾਇ ਉਚਾਇ ਕੈ ਸਾਮੁਹਿ ਤਾਹਿ ਕੇ ਧਾਇ ਗਯੋ ਹੈ ॥

सउ फन को सु फुलाइ उचाइ कै सामुहि ताहि के धाइ गयो है ॥

sau fan ko su fulai uchai kai saamuh taeh ke dhai gayo hai ||

ਕੂਦ ਕੈ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਚਾਇ ਕੈ ਦਾਵਹਿ ਉਪਰਿ ਮਾਥ ਜੁ ਠਾਢੋ ਭਯੋ ਹੈ ॥੨੧੩॥

कूद कै कान्रह बचाइ कै दावहि उपरि माथ जु ठाढो भयो है ॥२१३॥

koodh kai kaanreh bachai kai dhaaveh upar maath ju Thaaddo bhayo hai ||213||


ਕੂਦਤ ਹੈ ਚੜਿ ਸਿਰ ਊਪਰਿ ਸ੍ਰਉਨ ਸੰਬੂਹ ਚਲੈ ਸਿਰ ਤਾ ਤੇ ॥

कूदत है चड़ि सिर ऊपरि स्रउन संबूह चलै सिर ता ते ॥

koodhat hai chaR sir uoopar sraun sa(n)booh chalai sir taa te ||

ਪ੍ਰਾਨ ਲਗੇ ਛੁਟਨੇ ਜਬ ਹੀ ਛਿਨ ਮੈਨ ਗਈ ਉਡ ਕੈ ਮੁਖਰਾ ਤੇ ॥

प्रान लगे छुटने जब ही छिन मैन गई उड कै मुखरा ते ॥

praan lage chhuTane jab hee chhin main giee udd kai mukharaa te ||

ਤਉ ਹਰਿ ਜੀ ਬਲਿ ਕੈ ਤਨ ਕੋ ਸਰ ਤੀਰ ਨਿਕਾਸ ਲਯੋ ਬਹੁ ਭਾਤੇ ॥

तउ हरि जी बलि कै तन को सर तीर निकास लयो बहु भाते ॥

tau har jee bal kai tan ko sar teer nikaas layo bahu bhaate ||

ਜਾਤ ਬਡੋ ਸਰ ਤੀਰ ਬਹਿਯੋ ਰਸਰੇ ਬੰਧ ਖੈਚਤ ਹੈ ਚਹੂੰ ਘਾਤੇ ॥੨੧੪॥

जात बडो सर तीर बहियो रसरे बंध खैचत है चहूँ घाते ॥२१४॥

jaat baddo sar teer bahiyo rasare ba(n)dh khaichat hai chahoo(n) ghaate ||214||


ਕਾਲੀ ਨਾਗ ਕੀ ਤ੍ਰਿਯੋ ਬਾਚ ॥

काली नाग की तृयो बाच ॥

kaalee naag kee tirayo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਤਉ ਤਿਹ ਕੀ ਤ੍ਰਿਯਾ ਸਭ ਹੀ ਸੁਤ ਅੰਜੁਲ ਜੋਰ ਕੈ ਯੌ ਘਿਘਯਾਵੈ ॥

तउ तिह की तृया सभ ही सुत अंजुल जोर कै यौ घिघयावै ॥

tau teh kee tirayaa sabh hee sut a(n)jul jor kai yau ghighayaavai ||

ਰਛ ਕਰੋ ਇਹ ਕੀ ਹਰਿ ਜੀ ਤੁਮ ਪੈ ਬਰੁ ਦਾਨ ਇਹੈ ਹਮ ਪਾਵੈ ॥

रछ करो इह की हरि जी तुम पै बरु दान इहै हम पावै ॥

rachh karo ieh kee har jee tum pai bar dhaan ihai ham paavai ||

ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਦੇਤ ਵਹੈ ਹਮ ਲਿਆਵਤ ਬਿਖ ਦਈ ਵਹ ਹੀ ਹਮ ਲਿਆਵੈ ॥

अंमृत देत वहै हम लिआवत बिख दई वह ही हम लिआवै ॥

a(n)mirat dhet vahai ham liaavat bikh dhiee veh hee ham liaavai ||

ਦੋਸ ਨਹੀ ਹਮਰੇ ਪਤਿ ਕੋ ਕਛੁ ਬਾਤ ਕਹੈ ਅਰੁ ਸੀਸ ਝੁਕਾਵੈ ॥੨੧੫॥

दोस नही हमरे पति को कछु बात कहै अरु सीस झुकावै ॥२१५॥

dhos nahee hamare pat ko kachh baat kahai ar sees jhukaavai ||215||


ਤ੍ਰਾਸ ਬਡੋ ਅਹਿ ਕੇ ਰਿਪੁ ਕੋ ਕਰਿ ਭਾਗਿ ਸਰਾ ਮਧਿ ਆਇ ਛਪੇ ਥੇ ॥

त्रास बडो अहि के रिपु को करि भागि सरा मधि आइ छपे थे ॥

traas baddo eh ke rip ko kar bhaag saraa madh aai chhape the ||

ਗਰਬੁ ਬਡੋ ਹਮਰੇ ਪਤਿ ਮੈ ਅਬ ਜਾਨਿ ਹਮੈ ਹਰਿ ਨਾਹਿ ਜਪੇ ਥੇ ॥

गरबु बडो हमरे पति मै अब जानि हमै हरि नाहि जपे थे ॥

garab baddo hamare pat mai ab jaan hamai har naeh jape the ||

ਹੇ ਜਗ ਕੇ ਪਤਿ ਹੇ ਕਰੁਨਾ ਨਿਧਿ ਤੈ ਦਸ ਰਾਵਨ ਸੀਸ ਕਪੇ ਥੇ ॥

हे जग के पति हे करुना निधि तै दस रावन सीस कपे थे ॥

he jag ke pat he karunaa nidh tai dhas raavan sees kape the ||

ਮੂਰਖ ਬਾਤ ਜਨੀ ਨ ਕਛੂ ਪਰਵਾਰ ਸਨੈ ਹਮ ਇਉ ਹੀ ਖਪੇ ਥੇ ॥੨੧੬॥

मूरख बात जनी न कछू परवार सनै हम इउ ही खपे थे ॥२१६॥

moorakh baat janee na kachhoo paravaar sanai ham iau hee khape the ||216||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ਕਾਲੀ ਸੋ ॥

कान्रह बाच काली सो ॥

kaanreh baach kaalee so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੋਲਿ ਉਠਿਓ ਤਬ ਇਉ ਹਰਿ ਜੀ ਅਬ ਛਾਡਤ ਹਉ ਤੁਮ ਦਛਨਿ ਜਈਯੋ ॥

बोलि उठिओ तब इउ हरि जी अब छाडत हउ तुम दछनि जईयो ॥

bol uThio tab iau har jee ab chhaaddat hau tum dhachhan jieeyo ||

ਰੰਚਕ ਨ ਬਸੀਯੋ ਸਰ ਮੈ ਸਭ ਹੀ ਸੁਤ ਲੈ ਸੰਗ ਬਾਟਹਿ ਪਈਯੋ ॥

रंचक न बसीयो सर मै सभ ही सुत लै संग बाटहि पईयो ॥

ra(n)chak na baseeyo sar mai sabh hee sut lai sa(n)g baaTeh pieeyo ||

ਸੀਘ੍ਰਤਾ ਐਸੀ ਕਰੋ ਤੁਮ ਹੂੰ ਤਿਰੀਆ ਲਈਯੋ ਅਰੁ ਨਾਮੁ ਸੁ ਲਈਯੋ ॥

सीघ्रता ऐसी करो तुम हूँ तिरीआ लईयो अरु नामु सु लईयो ॥

seeghrataa aaisee karo tum hoo(n) tireeaa lieeyo ar naamu su lieeyo ||

ਛੋਡਿ ਦਯੋ ਹਰਿ ਨਾਗ ਬਡੋ ਥਕਿ ਜਾਇ ਕੈ ਮਧਿ ਬਰੇਤਨ ਪਈਯੋ ॥੨੧੭॥

छोडि दयो हरि नाग बडो थकि जाइ कै मधि बरेतन पईयो ॥२१७॥

chhodd dhayo har naag baddo thak jai kai madh baretan pieeyo ||217||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ॥

कबियो बाच ॥

kabiyo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹੇਰਿ ਬਡੋ ਹਰਿ ਭੈ ਵਹ ਪੰਨਗ ਪੈ ਅਪਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਉਠਿ ਭਾਗਾ ॥

हेरि बडो हरि भै वह पंनग पै अपने गृह को उठि भागा ॥

her baddo har bhai veh pa(n)nag pai apane gireh ko uTh bhaagaa ||

ਬਾਰੂ ਕੇ ਮਧਿ ਗਯੋ ਪਰ ਕੈ ਜਨ ਸੋਇ ਰਹਿਯੋ ਸੁਖ ਕੈ ਨਿਸਿ ਜਾਗਾ ॥

बारू के मधि गयो पर कै जन सोइ रहियो सुख कै निसि जागा ॥

baaroo ke madh gayo par kai jan soi rahiyo sukh kai nis jaagaa ||

ਗਰਬ ਗਯੋ ਗਿਰ ਕੈ ਤਿਹ ਕੋ ਰਨ ਕੈ ਹਰਿ ਕੇ ਰਸ ਸੋ ਅਨੁਰਾਗਾ ॥

गरब गयो गिर कै तिह को रन कै हरि के रस सो अनुरागा ॥

garab gayo gir kai teh ko ran kai har ke ras so anuraagaa ||

ਲੇਟ ਰਹਿਓ ਕਰ ਕੇ ਉਪਮਾ ਇਹ ਡਾਰਿ ਚਲੇ ਕਿਰਸਾਨ ਸੁਹਾਗਾ ॥੨੧੮॥

लेट रहिओ कर के उपमा इह डारि चले किरसान सुहागा ॥२१८॥

leT rahio kar ke upamaa ieh ddaar chale kirasaan suhaagaa ||218||


ਸੁਧਿ ਭਈ ਜਬ ਹੀ ਉਹ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਉਠ ਕੈ ਹਰਿ ਪਾਇਨ ਲਾਗਿਓ ॥

सुधि भई जब ही उह को तब ही उठ कै हरि पाइन लागिओ ॥

sudh bhiee jab hee uh ko tab hee uTh kai har pain laagio ||

ਪਉਢਿ ਰਹਿਓ ਥਕ ਕੈ ਸੁਨਿ ਮੋ ਪਤਿ ਪਾਇ ਲਗਿਓ ਜਬ ਹੀ ਫੁਨਿ ਜਾਗਿਓ ॥

पउढि रहिओ थक कै सुनि मो पति पाइ लगिओ जब ही फुनि जागिओ ॥

paudd rahio thak kai sun mo pat pai lagio jab hee fun jaagio ||

ਦੀ ਧਰਿ ਮੋਰਿ ਸੁ ਨੈਕੁ ਬਿਖੈ ਤੁਮ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਤਿਹ ਕੋ ਉਠਿ ਭਾਗਿਓ ॥

दी धरि मोरि सु नैकु बिखै तुम कान्रह कही तिह को उठि भागिओ ॥

dhee dhar mor su naik bikhai tum kaanreh kahee teh ko uTh bhaagio ||

ਦੇਖਿ ਲਤਾ ਤੁਮ ਕਉ ਨ ਬਧੈ ਮਮ ਬਾਹਨ ਮੋ ਰਸ ਮੋ ਅਨੁਰਾਗਿਓ ॥੨੧੯॥

देखि लता तुम कउ न बधै मम बाहन मो रस मो अनुरागिओ ॥२१९॥

dhekh lataa tum kau na badhai mam baahan mo ras mo anuraagio ||219||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਕਾਲੀ ਨਾਗ ਨਿਕਾਰਬੋ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे काली नाग निकारबो बरननं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare kaalee naag nikaarabo baranana(n) ||


ਅਥ ਦਾਨ ਦੀਬੋ ॥

अथ दान दीबो ॥

ath dhaan dheebo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਨਾਗਿ ਬਿਦਾ ਕਰਿ ਕੈ ਗਰੜਧ੍ਵਜ ਆਇ ਮਿਲਿਓ ਅਪੁਨੇ ਪਰਵਾਰੈ ॥

नागि बिदा करि कै गरड़ध्वज आइ मिलिओ अपुने परवारै ॥

naag bidhaa kar kai garaRadhavaij aai milio apune paravaarai ||

ਧਾਇ ਮਿਲਿਓ ਗਰੇ ਤਾਹਿ ਹਲੀ ਅਰੁ ਮਾਤ ਮਿਲੀ ਤਿਹ ਦੂਖ ਨਿਵਾਰੈ ॥

धाइ मिलिओ गरे ताहि हली अरु मात मिली तिह दूख निवारै ॥

dhai milio gare taeh halee ar maat milee teh dhookh nivaarai ||

ਸ੍ਰਿੰਗ ਧਰੇ ਹਰਿ ਧੇਨ ਹਜਾਰ ਤਬੈ ਤਿਹ ਕੇ ਸਿਰ ਊਪਰਿ ਵਾਰੈ ॥

सृंग धरे हरि धेन हजार तबै तिह के सिर ऊपरि वारै ॥

sira(n)g dhare har dhen hajaar tabai teh ke sir uoopar vaarai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਮਨ ਮੋਹ ਬਢਾਇ ਬਹੁ ਪੁੰਨ ਕੈ ਬਾਮਨ ਕੋ ਦੈ ਡਾਰੈ ॥੨੨੦॥

स्याम कहै मन मोह बढाइ बहु पुँन कै बामन को दै डारै ॥२२०॥

sayaam kahai man moh baddai bahu pu(n)n kai baaman ko dhai ddaarai ||220||


ਲਾਲ ਮਨੀ ਅਰੁ ਨਾਗ ਬਡੇ ਨਗ ਦੇਤ ਜਵਾਹਰ ਤੀਛਨ ਘੋਰੇ ॥

लाल मनी अरु नाग बडे नग देत जवाहर तीछन घोरे ॥

laal manee ar naag badde nag dhet javaahar teechhan ghore ||

ਪੁਹਕਰ ਅਉ ਬਿਰਜੇ ਚੁਨਿ ਕੈ ਜਰਬਾਫ ਦਿਵਾਵਤ ਹੈ ਦਿਜ ਜੋਰੇ ॥

पुहकर अउ बिरजे चुनि कै जरबाफ दिवावत है दिज जोरे ॥

puhakar aau biraje chun kai jarabaaf dhivaavat hai dhij jore ||

ਮੋਤਿਨਿ ਹਾਰ ਹੀਰੇ ਅਰੁ ਮਾਨਿਕ ਦੇਵਤ ਹੈ ਭਰਿ ਪਾਨਨ ਬੋਰੇ ॥

मोतिनि हार हीरे अरु मानिक देवत है भरि पानन बोरे ॥

motin haar heere ar maanik dhevat hai bhar paanan bore ||

ਕੰਚਨ ਰੋਕਿਨ ਕੇ ਗਹਨੇ ਗੜਿ ਦੇਤ ਕਹੈ ਸੁ ਬਚੇ ਸੁਤ ਮੋਰੇ ॥੨੨੧॥

कंचन रोकिन के गहने गड़ि देत कहै सु बचे सुत मोरे ॥२२१॥

ka(n)chan rokin ke gahane gaR dhet kahai su bache sut more ||221||


ਅਥ ਦਾਵਾਨਲ ਕਥਨੰ ॥

अथ दावानल कथनं ॥

ath dhaavaanal kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਸਭੇ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਜਨ ਰੈਨ ਪਰੇ ਘਰ ਭੀਤਰਿ ਸੋਏ ॥

होइ प्रसंनि सभे बृज के जन रैन परे घर भीतरि सोए ॥

hoi prasa(n)n sabhe biraj ke jan rain pare ghar bheetar soe ||

ਆਗ ਲਗੀ ਸੁ ਦਿਸਾ ਬਿਦਿਸਾ ਮਧਿ ਜਾਗ ਤਬੈ ਤਿਹ ਤੇ ਡਰਿ ਰੋਏ ॥

आग लगी सु दिसा बिदिसा मधि जाग तबै तिह ते डरि रोए ॥

aag lagee su dhisaa bidhisaa madh jaag tabai teh te ddar roe ||

ਰਛ ਕਰੈ ਹਮਰੀ ਹਰਿ ਜੀ ਇਹ ਚਿਤਿ ਬਿਚਾਰਿ ਤਹਾ ਕਹੁ ਹੋਏ ॥

रछ करै हमरी हरि जी इह चिति बिचारि तहा कहु होए ॥

rachh karai hamaree har jee ieh chit bichaar tahaa kahu hoe ||

ਦ੍ਰਿਗ ਬਾਤ ਕਹੀ ਕਰੁਨਾ ਨਿਧਿ ਮੀਚ ਲਯੋ ਇਤਨੈ ਸੁ ਤਊ ਦੁਖ ਖੋਏ ॥੨੨੨॥

दृग बात कही करुना निधि मीच लयो इतनै सु तऊ दुख खोए ॥२२२॥

dhirag baat kahee karunaa nidh meech layo itanai su tuoo dhukh khoe ||222||


ਮੀਚ ਲਏ ਦ੍ਰਿਗ ਜਉ ਸਭ ਹੀ ਨਰ ਪਾਨ ਕਰਿਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਹਰਿਦੌ ਤਉ ॥

मीच लए दृग जउ सभ ही नर पान करियो हरि जी हरिदौ तउ ॥

meech le dhirag jau sabh hee nar paan kariyo har jee haridhau tau ||

ਦੋਖ ਮਿਟਾਇ ਦਯੋ ਪੁਰ ਕੋ ਸਭ ਹੀ ਜਨ ਕੇ ਮਨ ਕੋ ਹਨਿ ਦਯੋ ਭਉ ॥

दोख मिटाइ दयो पुर को सभ ही जन के मन को हनि दयो भउ ॥

dhokh miTai dhayo pur ko sabh hee jan ke man ko han dhayo bhau ||

ਚਿੰਤ ਕਛੂ ਨਹਿ ਹੈ ਤਿਹ ਕੋ ਜਿਨ ਕੋ ਕਰੁਨਾਨਿਧਿ ਦੂਰ ਕਰੈ ਖਉ ॥

चिंत कछू नहि है तिह को जिन को करुनानिधि दूर करै खउ ॥

chi(n)t kachhoo neh hai teh ko jin ko karunaanidh dhoor karai khau ||

ਦੂਰ ਕਰੀ ਤਪਤਾ ਤਿਹ ਕੀ ਜਨੁ ਡਾਰ ਦਯੋ ਜਲ ਕੋ ਛਲ ਕੈ ਰਉ ॥੨੨੩॥

दूर करी तपता तिह की जनु डार दयो जल को छल कै रउ ॥२२३॥

dhoor karee tapataa teh kee jan ddaar dhayo jal ko chhal kai rau ||223||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਆਖੈ ਮਿਟਵਾਇ ਮਹਾ ਬਪੁ ਕੋ ਬਢਾਇ ਅਤਿ ਸੁਖ ਮਨਿ ਪਾਇ ਆਗਿ ਖਾਇ ਗਯੋ ਸਾਵਰਾ ॥

आखै मिटवाइ महा बपु को बढाइ अति सुख मनि पाइ आगि खाइ गयो सावरा ॥

aakhai miTavai mahaa bap ko baddai at sukh man pai aag khai gayo saavaraa ||

ਲੋਕਨ ਕੀ ਰਛਨ ਕੇ ਕਾਜ ਕਰੁਨਾ ਕੇ ਨਿਧਿ ਮਹਾ ਛਲ ਕਰਿ ਕੈ ਬਚਾਇ ਲਯੋ ਗਾਵਰਾ ॥

लोकन की रछन के काज करुना के निधि महा छल करि कै बचाइ लयो गावरा ॥

lokan kee rachhan ke kaaj karunaa ke nidh mahaa chhal kar kai bachai layo gaavaraa ||

ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਤਿਨ ਕਾਮ ਕਰਿਓ ਦੁਖੁ ਕਰਿ ਤਾ ਕੋ ਫੁਨਿ ਫੈਲ ਰਹਿਓ ਦਸੋ ਦਿਸ ਨਾਵਰਾ ॥

कहै कबि स्याम तिन काम करिओ दुखु करि ता को फुनि फैल रहिओ दसो दिस नावरा ॥

kahai kab sayaam tin kaam kario dhukh kar taa ko fun fail rahio dhaso dhis naavaraa ||

ਦਿਸਟਿ ਬਚਾਇ ਸਾਥ ਦਾਤਨ ਚਬਾਇ ਸੋ ਤੋ ਗਯੋ ਹੈ ਪਚਾਇ ਜੈਸੇ ਖੇਲੇ ਸਾਗ ਬਾਵਰਾ ॥੨੨੪॥

दिसटि बचाइ साथ दातन चबाइ सो तो गयो है पचाइ जैसे खेले साग बावरा ॥२२४॥

dhisaT bachai saath dhaatan chabai so to gayo hai pachai jaise khele saag baavaraa ||224||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਦਾਵਾਨਲ ਤੇ ਬਚੈਬੋ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री कृसनावतारे दावानल ते बचैबो बरननं ॥

eit sree kirasanaavataare dhaavaanal te bachaibo baranana(n) ||


ਅਥ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਹੋਲੀ ਖੇਲਬੋ ॥

अथ गोपिन सो होली खेलबो ॥

ath gopin so holee khelabo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਘ ਬਿਤੀਤ ਭਏ ਰੁਤਿ ਫਾਗੁਨ ਆਇ ਗਈ ਸਭ ਖੇਲਤ ਹੋਰੀ ॥

माघ बितीत भए रुति फागुन आइ गई सभ खेलत होरी ॥

maagh biteet bhe rut faagun aai giee sabh khelat horee ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਬਜਾਵਤ ਤਾਲ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਭਰੂਆ ਮਿਲਿ ਹੋਰੀ ॥

गावत गीत बजावत ताल कहै मुख ते भरूआ मिलि होरी ॥

gaavat geet bajaavat taal kahai mukh te bharooaa mil horee ||

ਡਾਰਤ ਹੈ ਅਲਿਤਾ ਬਨਿਤਾ ਛਟਿਕਾ ਸੰਗਿ ਮਾਰਤ ਬੈਸਨ ਥੋਰੀ ॥

डारत है अलिता बनिता छटिका संगि मारत बैसन थोरी ॥

ddaarat hai alitaa banitaa chhaTikaa sa(n)g maarat baisan thoree ||

ਖੇਲਤ ਸ੍ਯਾਮ ਧਮਾਰ ਅਨੂਪ ਮਹਾ ਮਿਲਿ ਸੁੰਦਰਿ ਸਾਵਲ ਗੋਰੀ ॥੨੨੫॥

खेलत स्याम धमार अनूप महा मिलि सुँदरि सावल गोरी ॥२२५॥

khelat sayaam dhamaar anoop mahaa mil su(n)dhar saaval goree ||225||


ਅੰਤ ਬਸੰਤ ਭਏ ਰੁਤਿ ਗ੍ਰੀਖਮ ਆਇ ਗਈ ਹਰ ਖੇਲ ਮਚਾਇਓ ॥

अंत बसंत भए रुति ग्रीखम आइ गई हर खेल मचाइओ ॥

a(n)t basa(n)t bhe rut greekham aai giee har khel machaio ||

ਆਵਹੁ ਮਿਕ ਦੁਹੂੰ ਦਿਸ ਤੇ ਤੁਮ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਏ ਧਨਠੀ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

आवहु मिक दुहूँ दिस ते तुम कान्रह भए धनठी सुख पायो ॥

aavahu mik dhuhoo(n) dhis te tum kaanreh bhe dhanaThee sukh paayo ||

ਦੈਤ ਪ੍ਰਲੰਬ ਬਡੋ ਕਪਟੀ ਤਬ ਬਾਲਕ ਰੂਪ ਧਰਿਯੋ ਨ ਜਨਾਯੋ ॥

दैत प्रलंब बडो कपटी तब बालक रूप धरियो न जनायो ॥

dhait prala(n)b baddo kapaTee tab baalak roop dhariyo na janaayo ||

ਕੰਧ ਚੜਾਇ ਹਲੀ ਕੋ ਉਡਿਓ ਤਿਨਿ ਮੂਕਨ ਸੋ ਧਰਿ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਯੋ ॥੨੨੬॥

कंध चड़ाइ हली को उडिओ तिनि मूकन सो धरि मारि गिरायो ॥२२६॥

ka(n)dh chaRai halee ko uddio tin mookan so dhar maar giraayo ||226||


ਕੇਸਵ ਰਾਮ ਭਏ ਧਨਠੀ ਮਿਕ ਬਾਲ ਕਏ ਤਬ ਹੀ ਸਭ ਪਿਆਰੇ ॥

केसव राम भए धनठी मिक बाल कए तब ही सभ पिआरे ॥

kesav raam bhe dhanaThee mik baal ke tab hee sabh piaare ||

ਦੈਤ ਮਿਕਿਯੋ ਸੁਤ ਨੰਦਹਿ ਕੇ ਸੰਗਿ ਖੇਲਿ ਜਿਤ੍ਯੋ ਮੁਸਲੀ ਹਰਿ ਹਾਰੇ ॥

दैत मिकियो सुत नंदहि के संगि खेलि जित्यो मुसली हरि हारे ॥

dhait mikiyo sut na(n)dheh ke sa(n)g khel jitayo musalee har haare ||

ਆਵ ਚੜੋ ਨ ਚੜਿਓ ਸੁ ਕਹਿਯੋ ਇਨ ਪੈ ਤਿਹ ਕੇ ਬਪੁ ਕੋ ਪਗ ਧਾਰੇ ॥

आव चड़ो न चड़िओ सु कहियो इन पै तिह के बपु को पग धारे ॥

aav chaRo na chaRio su kahiyo in pai teh ke bap ko pag dhaare ||

ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਇ ਦਯੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਬੀਰ ਬਡੋ ਉਨ ਮੂਕਨ ਮਾਰੇ ॥੨੨੭॥

मारि गिराइ दयो धरनी पर बीर बडो उन मूकन मारे ॥२२७॥

maar girai dhayo dharanee par beer baddo un mookan maare ||227||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਪ੍ਰਲੰਬ ਦੈਤ ਬਧਹਿ ॥

इति स्री बचित्र नाटके कृसनावतारे प्रलंब दैत बधहि ॥

eit sree bachitr naaTake kirasanaavataare prala(n)b dhait badheh ||


ਅਥ ਲੁਕ ਮੀਚਨ ਖੇਲ ਕਥਨੰ ॥

अथ लुक मीचन खेल कथनं ॥

ath luk meechan khel kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਰਿ ਪ੍ਰਲੰਬ ਲਯੋ ਮੁਸਲੀ ਜਬ ਯਾਦ ਕਰੀ ਹਰਿ ਜੀ ਤਬ ਗਾਈ ॥

मारि प्रलंब लयो मुसली जब याद करी हरि जी तब गाई ॥

maar prala(n)b layo musalee jab yaadh karee har jee tab gaiee ||

ਚੂਮਨ ਲਾਗ ਤਬੈ ਬਛਰਾ ਮੁਖ ਧੇਨ ਵਹੈ ਉਨ ਕੀ ਅਰੁ ਮਾਈ ॥

चूमन लाग तबै बछरा मुख धेन वहै उन की अरु माई ॥

chooman laag tabai bachharaa mukh dhen vahai un kee ar maiee ||

ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਤਬੈ ਕਰੁਨਾਨਿਧ ਤਉ ਲੁਕ ਮੀਚਨ ਖੇਲ ਮਚਾਈ ॥

होइ प्रसंन्य तबै करुनानिध तउ लुक मीचन खेल मचाई ॥

hoi prasa(n)nay tabai karunaanidh tau luk meechan khel machaiee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਬਹੁ ਭਾਤਿਨ ਭਾਈ ॥੨੨੮॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि के मन मै बहु भातिन भाई ॥२२८॥

taa chhab kee at hee upamaa kab ke man mai bahu bhaatin bhaiee ||228||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਬੈਠਿ ਕਰਿ ਗ੍ਵਾਰ ਆਖੈ ਮੀਚੈ ਏਕ ਗ੍ਵਾਰ ਹੂੰ ਕੀ ਛੋਰਿ ਦੇਤ ਤਾ ਕੋ ਸੋ ਤੋ ਅਉਰੋ ਗਹੈ ਧਾਇ ਕੈ ॥

बैठि करि ग्वार आखै मीचै एक ग्वार हूँ की छोरि देत ता को सो तो अउरो गहै धाइ कै ॥

baiTh kar gavaiaar aakhai meechai ek gavaiaar hoo(n) kee chhor dhet taa ko so to aauro gahai dhai kai ||

ਆਖੈ ਮੂੰਦਤ ਹੈ ਤਬ ਓਹੀ ਗੋਪ ਹੂੰ ਕੀ ਫੇਰਿ ਜਾ ਕੇ ਤਨ ਕੋ ਜੋ ਛੁਐ ਕਰ ਸਾਥ ਜਾਇ ਕੈ ॥

आखै मूँदत है तब ओही गोप हूँ की फेरि जा के तन को जो छुऐ कर साथ जाइ कै ॥

aakhai moo(n)dhat hai tab ohee gop hoo(n) kee fer jaa ke tan ko jo chhuaai kar saath jai kai ||

ਤਹ ਤੋ ਛਲ ਬਲ ਕੈ ਪਲਾਵੈ ਹਾਥਿ ਆਵੈ ਨਹੀ ਤਉ ਮਿਟਾਵੈ ਆਖੈ ਆਪ ਹੀ ਤੇ ਸੋ ਤੋ ਆਇ ਕੈ ॥

तह तो छल बल कै पलावै हाथि आवै नही तउ मिटावै आखै आप ही ते सो तो आइ कै ॥

teh to chhal bal kai palaavai haath aavai nahee tau miTaavai aakhai aap hee te so to aai kai ||

ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਤਾ ਕੀ ਮਹਿਮਾ ਨ ਲਖੀ ਜਾਇ ਐਸੀ ਭਾਤਿ ਖੇਲੈ ਕਾਨ੍ਰਹ ਮਹਾ ਸੁਖੁ ਪਾਇ ਕੈ ॥੨੨੯॥

कहै कबि स्याम ता की महिमा न लखी जाइ ऐसी भाति खेलै कान्रह महा सुखु पाइ कै ॥२२९॥

kahai kab sayaam taa kee mahimaa na lakhee jai aaisee bhaat khelai kaanreh mahaa sukh pai kai ||229||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅੰਤ ਭਏ ਰੁਤਿ ਗ੍ਰੀਖਮ ਕੀ ਰੁਤਿ ਪਾਵਸ ਆਇ ਗਈ ਸੁਖਦਾਈ ॥

अंत भए रुति ग्रीखम की रुति पावस आइ गई सुखदाई ॥

a(n)t bhe rut greekham kee rut paavas aai giee sukhadhaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਫਿਰੈ ਬਨ ਬੀਥਿਨ ਮੈ ਸੰਗਿ ਲੈ ਬਛਰੇ ਤਿਨ ਕੀ ਅਰੁ ਮਾਈ ॥

कान्रह फिरै बन बीथिन मै संगि लै बछरे तिन की अरु माई ॥

kaanreh firai ban beethin mai sa(n)g lai bachhare tin kee ar maiee ||

ਬੈਠਿ ਤਬੈ ਫਿਰਿ ਮਧ ਗੁਫਾ ਗਿਰਿ ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਸਭੈ ਮਨੁ ਭਾਈ ॥

बैठि तबै फिरि मध गुफा गिरि गावत गीत सभै मनु भाई ॥

baiTh tabai fir madh gufaa gir gaavat geet sabhai man bhaiee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਈ ॥੨੩੦॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि ने मुख ते इम भाखि सुनाई ॥२३०॥

taa chhab kee at hee upamaa kab ne mukh te im bhaakh sunaiee ||230||


ਸੋਰਠਿ ਸਾਰੰਗ ਅਉ ਗੁਜਰੀ ਲਲਤਾ ਅਰੁ ਭੈਰਵ ਦੀਪਕ ਗਾਵੈ ॥

सोरठि सारंग अउ गुजरी ललता अरु भैरव दीपक गावै ॥

soraTh saara(n)g aau gujaree lalataa ar bhairav dheepak gaavai ||

ਟੋਡੀ ਅਉ ਮੇਘ ਮਲ੍ਰਹਾਰ ਅਲਾਪਤ ਗੌਡ ਅਉ ਸੁਧ ਮਲ੍ਰਹਾਰ ਸੁਨਾਵੈ ॥

टोडी अउ मेघ मल्रहार अलापत गौड अउ सुध मल्रहार सुनावै ॥

Toddee aau megh malrahaar alaapat gauadd aau sudh malrahaar sunaavai ||

ਜੈਤਸਰੀ ਅਰੁ ਮਾਲਸਿਰੀ ਅਉ ਪਰਜ ਸੁ ਰਾਗਸਿਰੀ ਠਟ ਪਾਵੈ ॥

जैतसरी अरु मालसिरी अउ परज सु रागसिरी ठट पावै ॥

jaitasaree ar maalasiree aau paraj su raagasiree ThaT paavai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਹਰਿ ਜੀ ਰਿਝ ਕੈ ਮੁਰਲੀ ਸੰਗ ਕੋਟਕ ਰਾਗ ਬਜਾਵੈ ॥੨੩੧॥

स्याम कहै हरि जी रिझ कै मुरली संग कोटक राग बजावै ॥२३१॥

sayaam kahai har jee rijh kai muralee sa(n)g koTak raag bajaavai ||231||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਲਲਤ ਧਨਾਸਰੀ ਬਜਾਵਹਿ ਸੰਗਿ ਬਾਸੁਰੀ ਕਿਦਾਰਾ ਔਰ ਮਾਲਵਾ ਬਿਹਾਗੜਾ ਅਉ ਗੂਜਰੀ ॥

ललत धनासरी बजावहि संगि बासुरी किदारा और मालवा बिहागड़ा अउ गूजरी ॥

lalat dhanaasaree bajaaveh sa(n)g baasuree kidhaaraa aauar maalavaa bihaagaRaa aau goojaree ||

ਮਾਰੂ ਅਉ ਪਰਜ ਔਰ ਕਾਨੜਾ ਕਲਿਆਨ ਸੁਭ ਕੁਕਭ ਬਿਲਾਵਲੁ ਸੁਨੈ ਤੇ ਆਵੈ ਮੂਜਰੀ ॥

मारू अउ परज और कानड़ा कलिआन सुभ कुकभ बिलावलु सुनै ते आवै मूजरी ॥

maaroo aau paraj aauar kaanaRaa kaliaan subh kukabh bilaaval sunai te aavai moojaree ||

ਭੈਰਵ ਪਲਾਸੀ ਭੀਮ ਦੀਪਕ ਸੁ ਗਉਰੀ ਨਟ ਠਾਢੋ ਦ੍ਰੁਮ ਛਾਇ ਮੈ ਸੁ ਗਾਵੈ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪੂਜਰੀ ॥

भैरव पलासी भीम दीपक सु गउरी नट ठाढो द्रुम छाइ मै सु गावै कान्रह पूजरी ॥

bhairav palaasee bheem dheepak su gauree naT Thaaddo dhrum chhai mai su gaavai kaanreh poojaree ||

ਤਾ ਤੇ ਗ੍ਰਿਹ ਤਿਆਗਿ ਤਾ ਕੀ ਸੁਨਿ ਧੁਨਿ ਸ੍ਰੋਨਨ ਮੈ ਮ੍ਰਿਗਨੈਨੀ ਫਿਰਤ ਸੁ ਬਨਿ ਬਨਿ ਊਜਰੀ ॥੨੩੨॥

ता ते गृह तिआगि ता की सुनि धुनि स्रोनन मै मृगनैनी फिरत सु बनि बनि ऊजरी ॥२३२॥

taa te gireh tiaag taa kee sun dhun sronan mai miraganainee firat su ban ban uoojaree ||232||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੀਤ ਭਈ ਰੁਤਿ ਕਾਤਿਕ ਕੀ ਮੁਨਿ ਦੇਵ ਚੜਿਓ ਜਲ ਹ੍ਵੈ ਗਯੋ ਥੋਰੋ ॥

सीत भई रुति कातिक की मुनि देव चड़िओ जल ह्वै गयो थोरो ॥

seet bhiee rut kaatik kee mun dhev chaRio jal havai gayo thoro ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਨੀਰੇ ਕੇ ਫੂਲ ਧਰੇ ਅਰੁ ਗਾਵਤ ਬੇਨ ਬਜਾਵਤ ਭੋਰੋ ॥

कान्रह कनीरे के फूल धरे अरु गावत बेन बजावत भोरो ॥

kaanreh kaneere ke fool dhare ar gaavat ben bajaavat bhoro ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਿਧੋ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਮਨ ਮਧਿ ਬਿਚਾਰੁ ਕਬਿਤੁ ਸੁ ਜੋਰੋ ॥

स्याम किधो उपमा तिह की मन मधि बिचारु कबितु सु जोरो ॥

sayaam kidho upamaa teh kee man madh bichaar kabitu su joro ||

ਮੈਨ ਉਠਿਯੋ ਜਗਿ ਕੈ ਤਿਨ ਕੈ ਤਨਿ ਲੇਤ ਹੈ ਪੇਚ ਮਨੋ ਅਹਿ ਤੋਰੋ ॥੨੩੩॥

मैन उठियो जगि कै तिन कै तनि लेत है पेच मनो अहि तोरो ॥२३३॥

main uThiyo jag kai tin kai tan let hai pech mano eh toro ||233||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ॥

गोपी बाच ॥

gopee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੋਲਤ ਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਸਭ ਗਵਾਰਿਨ ਪੁੰਨਿ ਕਰਿਓ ਇਨ ਹੂੰ ਅਤਿ ਮਾਈ ॥

बोलत है मुख ते सभ गवारिन पुँनि करिओ इन हूँ अति माई ॥

bolat hai mukh te sabh gavaarin pu(n)n kario in hoo(n) at maiee ||

ਜਗ੍ਯ ਕਰਿਯੋ ਕਿ ਕਰਿਯੋ ਤਪ ਤੀਰਥ ਗੰਧ੍ਰਬ ਤੇ ਇਨ ਕੈ ਸਿਛ ਪਾਈ ॥

जग्य करियो कि करियो तप तीरथ गंध्रब ते इन कै सिछ पाई ॥

jagay kariyo k kariyo tap teerath ga(n)dhrab te in kai sichh paiee ||

ਕੈ ਕਿ ਪੜੀ ਸਿਤਬਾਨਹੁ ਤੇ ਕਿ ਕਿਧੋ ਚਤੁਰਾਨਨਿ ਆਪ ਬਨਾਈ ॥

कै कि पड़ी सितबानहु ते कि किधो चतुराननि आप बनाई ॥

kai k paRee sitabaanahu te k kidho chaturaanan aap banaiee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਇਹ ਤੇ ਹਰਿ ਓਠਨ ਸਾਥ ਲਗਾਈ ॥੨੩੪॥

स्याम कहै उपमा तिह की इह ते हरि ओठन साथ लगाई ॥२३४॥

sayaam kahai upamaa teh kee ieh te har oThan saath lagaiee ||234||


ਸੁਤ ਨੰਦ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ਮੁਰਲੀ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਗਨੋ ॥

सुत नंद बजावत है मुरली उपमा तिह की कबि स्याम गनो ॥

sut na(n)dh bajaavat hai muralee upamaa teh kee kab sayaam gano ||

ਤਿਹ ਕੀ ਧੁਨਿ ਕੋ ਸੁਨਿ ਮੋਹ ਰਹੇ ਮੁਨਿ ਰੀਝਤ ਹੈ ਸੁ ਜਨੋ ਰੁ ਕਨੋ ॥

तिह की धुनि को सुनि मोह रहे मुनि रीझत है सु जनो रु कनो ॥

teh kee dhun ko sun moh rahe mun reejhat hai su jano r kano ||

ਤਨ ਕਾਮ ਭਰੀ ਗੁਪੀਆ ਸਭ ਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਨ ਜਵਾਬ ਭਨੋ ॥

तन काम भरी गुपीआ सभ ही मुख ते इह भातन जवाब भनो ॥

tan kaam bharee gupeeaa sabh hee mukh te ieh bhaatan javaab bhano ||

ਮੁਖ ਕਾਨ੍ਰਹ ਗੁਲਾਬ ਕੋ ਫੂਲ ਭਯੋ ਇਹ ਨਾਲਿ ਗੁਲਾਬ ਚੁਆਤ ਮਨੋ ॥੨੩੫॥

मुख कान्रह गुलाब को फूल भयो इह नालि गुलाब चुआत मनो ॥२३५॥

mukh kaanreh gulaab ko fool bhayo ieh naal gulaab chuaat mano ||235||


ਮੋਹਿ ਰਹੇ ਸੁਨਿ ਕੈ ਧੁਨਿ ਕੌ ਮ੍ਰਿਗ ਮੋਹਿ ਪਸਾਰ ਗੇ ਖਗ ਪੈ ਪਖਾ ॥

मोहि रहे सुनि कै धुनि कौ मृग मोहि पसार गे खग पै पखा ॥

moh rahe sun kai dhun kau mirag moh pasaar ge khag pai pakhaa ||

ਨੀਰ ਬਹਿਓ ਜਮੁਨਾ ਉਲਟੋ ਪਿਖਿ ਕੈ ਤਿਹ ਕੋ ਨਰ ਖੋਲ ਰੇ ਚਖਾ ॥

नीर बहिओ जमुना उलटो पिखि कै तिह को नर खोल रे चखा ॥

neer bahio jamunaa ulaTo pikh kai teh ko nar khol re chakhaa ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਨ ਕੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਛੁਰਾ ਮੁਖ ਸੋ ਕਛੁ ਨ ਚੁਗੈ ਕਖਾ ॥

स्याम कहै तिन को सुनि कै बछुरा मुख सो कछु न चुगै कखा ॥

sayaam kahai tin ko sun kai bachhuraa mukh so kachh na chugai kakhaa ||

ਛੋਡਿ ਚਲੀ ਪਤਨੀ ਅਪਨੇ ਪਤਿ ਤਾਰਕ ਹ੍ਵੈ ਜਿਮ ਡਾਰਤ ਲਖਾ ॥੨੩੬॥

छोडि चली पतनी अपने पति तारक ह्वै जिम डारत लखा ॥२३६॥

chhodd chalee patanee apane pat taarak havai jim ddaarat lakhaa ||236||


ਕੋਕਿਲ ਕੀਰ ਕੁਰੰਗਨ ਕੇਹਰਿ ਮੈਨ ਰਹਿਯੋ ਹ੍ਵੈ ਕੈ ਮਤਵਾਰੋ ॥

कोकिल कीर कुरंगन केहरि मैन रहियो ह्वै कै मतवारो ॥

kokil keer kura(n)gan kehar main rahiyo havai kai matavaaro ||

ਰੀਝ ਰਹੇ ਸਭ ਹੀ ਪੁਰ ਕੇ ਜਨ ਆਨਨ ਪੈ ਇਹ ਤੈ ਸਸਿ ਹਾਰੋ ॥

रीझ रहे सभ ही पुर के जन आनन पै इह तै ससि हारो ॥

reejh rahe sabh hee pur ke jan aanan pai ieh tai sas haaro ||

ਅਉ ਇਹ ਕੀ ਮੁਰਲੀ ਜੁ ਬਜੈ ਤਿਹ ਊਪਰਿ ਰਾਗ ਸਭੈ ਫੁਨਿ ਵਾਰੋ ॥

अउ इह की मुरली जु बजै तिह ऊपरि राग सभै फुनि वारो ॥

aau ieh kee muralee ju bajai teh uoopar raag sabhai fun vaaro ||

ਨਾਰਦ ਜਾਤ ਥਕੈ ਇਹ ਤੈ ਬੰਸੁਰੀ ਜੁ ਬਜਾਵਤ ਕਾਨਰ ਕਾਰੋ ॥੨੩੭॥

नारद जात थकै इह तै बंसुरी जु बजावत कानर कारो ॥२३७॥

naaradh jaat thakai ieh tai ba(n)suree ju bajaavat kaanar kaaro ||237||


ਲੋਚਨ ਹੈ ਮ੍ਰਿਗ ਕੇ ਕਟਿ ਕੇਹਰਿ ਨਾਕ ਕਿਧੋ ਸੁਕ ਸੋ ਤਿਹ ਕੋ ਹੈ ॥

लोचन है मृग के कटि केहरि नाक किधो सुक सो तिह को है ॥

lochan hai mirag ke kaT kehar naak kidho suk so teh ko hai ||

ਗ੍ਰੀਵ ਕਪੋਤ ਸੀ ਹੈ ਤਿਹ ਕੀ ਅਧਰਾ ਪੀਆ ਸੇ ਹਰਿ ਮੂਰਤਿ ਜੋ ਹੈ ॥

ग्रीव कपोत सी है तिह की अधरा पीआ से हरि मूरति जो है ॥

greev kapot see hai teh kee adharaa peeaa se har moorat jo hai ||

ਕੋਕਿਲ ਅਉ ਪਿਕ ਸੇ ਬਚਨਾਮ੍ਰਿਤ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸੁੰਦਰ ਸੋਹੈ ॥

कोकिल अउ पिक से बचनामृत स्याम कहै कबि सुँदर सोहै ॥

kokil aau pik se bachanaamirat sayaam kahai kab su(n)dhar sohai ||

ਪੈ ਇਹ ਤੇ ਲਜ ਕੈ ਅਬ ਬੋਲਤ ਮੂਰਤਿ ਲੈਨ ਕਰੈ ਖਗ ਰੋਹੈ ॥੨੩੮॥

पै इह ते लज कै अब बोलत मूरति लैन करै खग रोहै ॥२३८॥

pai ieh te laj kai ab bolat moorat lain karai khag rohai ||238||


ਫੂਲ ਗੁਲਾਬ ਨ ਲੇਤ ਹੈ ਤਾਬ ਸਹਾਬ ਕੋ ਆਬ ਹ੍ਵੈ ਦੇਖਿ ਖਿਸਾਨੋ ॥

फूल गुलाब न लेत है ताब सहाब को आब ह्वै देखि खिसानो ॥

fool gulaab na let hai taab sahaab ko aab havai dhekh khisaano ||

ਪੈ ਕਮਲਾ ਦਲ ਨਰਗਸ ਕੋ ਗੁਲ ਲਜਤ ਹ੍ਵੈ ਫੁਨਿ ਦੇਖਤ ਤਾਨੋ ॥

पै कमला दल नरगस को गुल लजत ह्वै फुनि देखत तानो ॥

pai kamalaa dhal naragas ko gul lajat havai fun dhekhat taano ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਿਧੋ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਬਰਤਾ ਗਨਿ ਕੈ ਕਬਿਤਾ ਇਹ ਠਾਨੋ ॥

स्याम किधो अपुने मन मै बरता गनि कै कबिता इह ठानो ॥

sayaam kidho apune man mai barataa gan kai kabitaa ieh Thaano ||

ਦੇਖਨ ਕੋ ਇਨ ਕੇ ਸਮ ਪੂਰਬ ਪਛਮ ਡੋਲੈ ਲਹੈ ਨਹਿ ਆਨੋ ॥੨੩੯॥

देखन को इन के सम पूरब पछम डोलै लहै नहि आनो ॥२३९॥

dhekhan ko in ke sam poorab pachham ddolai lahai neh aano ||239||


ਮੰਘਰ ਮੈ ਸਭ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ਮਿਲਿ ਪੂਜਤ ਚੰਡਿ ਪਤੇ ਹਰਿ ਕਾਜੈ ॥

मंघर मै सभ ही गुपीआ मिलि पूजत चंडि पते हरि काजै ॥

ma(n)ghar mai sabh hee gupeeaa mil poojat cha(n)dd pate har kaajai ||

ਪ੍ਰਾਤ ਸਮੇ ਜਮੁਨਾ ਮਧਿ ਨ੍ਰਹਾਵਤ ਦੇਖਿ ਤਿਨੈ ਜਲਜੰ ਮੁਖ ਲਾਜੈ ॥

प्रात समे जमुना मधि न्रहावत देखि तिनै जलजं मुख लाजै ॥

praat same jamunaa madh nrahaavat dhekh tinai jalaja(n) mukh laajai ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਬਿਲਾਵਲ ਮੈ ਜੁਰਿ ਬਾਹਨਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਥਾ ਇਹ ਸਾਜੈ ॥

गावत गीत बिलावल मै जुरि बाहनि स्याम कथा इह साजै ॥

gaavat geet bilaaval mai jur baahan sayaam kathaa ieh saajai ||

ਅੰਗਿ ਅਨੰਗ ਬਢਿਓ ਤਿਨ ਕੇ ਪਿਖ ਕੈ ਜਿਹ ਲਾਜ ਕੋ ਭਾਜਨ ਭਾਜੈ ॥੨੪੦॥

अंगि अनंग बढिओ तिन के पिख कै जिह लाज को भाजन भाजै ॥२४०॥

a(n)g ana(n)g baddio tin ke pikh kai jeh laaj ko bhaajan bhaajai ||240||


ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਬਿਲਾਵਲ ਮੈ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲਿ ਗੋਪਿਨ ਉਜਲ ਕਾਰੀ ॥

गावत गीत बिलावल मै सभ ही मिलि गोपिन उजल कारी ॥

gaavat geet bilaaval mai sabh hee mil gopin ujal kaaree ||

ਕਾਨਰ ਕੋ ਭਰਤਾ ਕਰਬੇ ਕਹੁ ਬਾਛਤ ਹੈ ਪਤਲੀ ਅਰੁ ਭਾਰੀ ॥

कानर को भरता करबे कहु बाछत है पतली अरु भारी ॥

kaanar ko bharataa karabe kahu baachhat hai patalee ar bhaaree ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਰੈ ਤਿਨ ਕੇ ਮੁਖ ਕੌ ਪਿਖਿ ਜੋਤਿ ਕਲਾ ਸਸਿ ਕੀ ਫੁਨਿ ਹਾਰੀ ॥

स्याम करै तिन के मुख कौ पिखि जोति कला ससि की फुनि हारी ॥

sayaam karai tin ke mukh kau pikh jot kalaa sas kee fun haaree ||

ਨ੍ਰਹਾਵਤ ਹੈ ਜਮੁਨਾ ਜਲ ਮੈ ਜਨੁ ਫੂਲ ਰਹੀ ਗ੍ਰਿਹ ਮੈ ਫੁਲਵਾਰੀ ॥੨੪੧॥

न्रहावत है जमुना जल मै जनु फूल रही गृह मै फुलवारी ॥२४१॥

nrahaavat hai jamunaa jal mai jan fool rahee gireh mai fulavaaree ||241||


ਨ੍ਰਹਾਵਤ ਹੈ ਗੁਪੀਆ ਜਲ ਮੈ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਫੁਨਿ ਹਉਲ ਨ ਕੋ ॥

न्रहावत है गुपीआ जल मै तिन के मन मै फुनि हउल न को ॥

nrahaavat hai gupeeaa jal mai tin ke man mai fun haul na ko ||

ਗੁਨ ਗਾਵਤ ਤਾਲ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ਤਿਹ ਜਾਇ ਕਿਧੌ ਇਕ ਠਉਲਨ ਕੋ ॥

गुन गावत ताल बजावत है तिह जाइ किधौ इक ठउलन को ॥

gun gaavat taal bajaavat hai teh jai kidhau ik Thaulan ko ||

ਮੁਖਿ ਤੇ ਉਚਰੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਸਭੈ ਇਤਨੋ ਸੁਖ ਨ ਹਰਿ ਧਉਲਨ ਕੋ ॥

मुखि ते उचरै इह भाति सभै इतनो सुख न हरि धउलन को ॥

mukh te ucharai ieh bhaat sabhai itano sukh na har dhaulan ko ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਅਤਿ ਸਹੀ ਇਕ ਬਨਿਓ ਸਰ ਸੁੰਦਰ ਕਉਲਨ ਕੋ ॥੨੪੨॥

कबि स्याम बिराजत है अति सही इक बनिओ सर सुँदर कउलन को ॥२४२॥

kab sayaam biraajat hai at sahee ik banio sar su(n)dhar kaulan ko ||242||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਦੇਵੀ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच देवी जू सो ॥

gopee baach dhevee joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਲੈ ਅਪੁਨੇ ਕਰ ਜੋ ਮਿਟੀਆ ਤਿਹ ਥਾਪ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਜੁ ਭਵਾਨੀ ॥

लै अपुने कर जो मिटीआ तिह थाप कहै मुख ते जु भवानी ॥

lai apune kar jo miTeeaa teh thaap kahai mukh te ju bhavaanee ||

ਪਾਇ ਪਰੈ ਤਿਹ ਕੇ ਹਿਤ ਸੋ ਕਰਿ ਕੋਟਿ ਪ੍ਰਨਾਮੁ ਕਹੈ ਇਹ ਬਾਨੀ ॥

पाइ परै तिह के हित सो करि कोटि प्रनामु कहै इह बानी ॥

pai parai teh ke hit so kar koT pranaam kahai ieh baanee ||

ਪੂਜਤ ਹੈ ਇਹ ਤੇ ਹਮ ਤੋ ਤੁਮ ਦੇਹੁ ਵਹੈ ਜੀਅ ਮੈ ਹਮ ਠਾਨੀ ॥

पूजत है इह ते हम तो तुम देहु वहै जीअ मै हम ठानी ॥

poojat hai ieh te ham to tum dheh vahai jeea mai ham Thaanee ||

ਹ੍ਵੈ ਹਮਰੋ ਭਰਤਾ ਹਰਿ ਜੀ ਮੁਖਿ ਸੁੰਦਰਿ ਹੈ ਜਿਹ ਕੋ ਸਸਿ ਸਾਨੀ ॥੨੪੩॥

ह्वै हमरो भरता हरि जी मुखि सुँदरि है जिह को ससि सानी ॥२४३॥

havai hamaro bharataa har jee mukh su(n)dhar hai jeh ko sas saanee ||243||


ਭਾਲਿ ਲਗਾਵਤ ਕੇਸਰ ਅਛਤ ਚੰਦਨ ਲਾਵਤ ਹੈ ਸਿਤ ਕੈ ॥

भालि लगावत केसर अछत चंदन लावत है सित कै ॥

bhaal lagaavat kesar achhat cha(n)dhan laavat hai sit kai ||

ਫੁਨਿ ਡਾਰਤ ਫੂਲ ਉਡਾਵਤ ਹੈ ਮਖੀਆ ਤਿਹ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਹਿਤ ਕੈ ॥

फुनि डारत फूल उडावत है मखीआ तिह की अति ही हित कै ॥

fun ddaarat fool uddaavat hai makheeaa teh kee at hee hit kai ||

ਪਟ ਧੂਪ ਪਚਾਮ੍ਰਿਤ ਦਛਨਾ ਪਾਨ ਪ੍ਰਦਛਨਾ ਦੇਤ ਮਹਾ ਚਿਤ ਕੈ ॥

पट धूप पचामृत दछना पान प्रदछना देत महा चित कै ॥

paT dhoop pachaamirat dhachhanaa paan pradhachhanaa dhet mahaa chit kai ||

ਬਰਬੇ ਕਹੁ ਕਾਨ੍ਰਹ ਉਪਾਉ ਕਰੈ ਮਿਤ ਹੋ ਸੋਊ ਤਾਤ ਕਿਧੌ ਕਿਤ ਕੈ ॥੨੪੪॥

बरबे कहु कान्रह उपाउ करै मित हो सोऊ तात किधौ कित कै ॥२४४॥

barabe kahu kaanreh upaau karai mit ho souoo taat kidhau kit kai ||244||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਦੇਵੀ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच देवी जू सो ॥

gopee baach dhevee joo so ||

ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਦੈਤਨ ਸੰਘਾਰਨੀ ਪਤਿਤ ਲੋਕ ਤਾਰਨੀ ਸੁ ਸੰਕਟ ਨਿਵਾਰਨੀ ਕਿ ਐਸੀ ਤੂੰ ਸਕਤਿ ਹੈ ॥

दैतन संघारनी पतित लोक तारनी सु संकट निवारनी कि ऐसी तूँ सकति है ॥

dhaitan sa(n)ghaaranee patit lok taaranee su sa(n)kaT nivaaranee k aaisee too(n) sakat hai ||

ਬੇਦਨ ਉਧਾਰਨੀ ਸੁਰੇਾਂਦ੍ਰ ਰਾਜ ਕਾਰਨੀ ਪੈ ਗਉਰਜਾ ਕੀ ਜਾਗੈ ਜੋਤਿ ਅਉਰ ਜਾਨ ਕਤ ਹੈ ॥

बेदन उधारनी सुरेाँद्र राज कारनी पै गउरजा की जागै जोति अउर जान कत है ॥

bedhan udhaaranee sureaa(n)dhr raaj kaaranee pai gaurajaa kee jaagai jot aaur jaan kat hai ||

ਧੂਅ ਮੈ ਨ ਧਰਾ ਮੈ ਨ ਧਿਆਨ ਧਾਰੀ ਮੈ ਪੈ ਕਛੂ ਜੈਸੇ ਤੇਰੇ ਜੋਤਿ ਬੀਚ ਆਨਨ ਛਕਤਿ ਹੈ ॥

धूअ मै न धरा मै न धिआन धारी मै पै कछू जैसे तेरे जोति बीच आनन छकति है ॥

dhooa mai na dharaa mai na dhiaan dhaaree mai pai kachhoo jaise tere jot beech aanan chhakat hai ||

ਦਿਨਸ ਦਿਨੇਸ ਮੈ ਦਿਵਾਨ ਮੈ ਸੁਰੇਸ ਮੈ ਸੁਪਤ ਮਹੇਸ ਜੋਤਿ ਤੇਰੀ ਐ ਜਗਤਿ ਹੈ ॥੨੪੫॥

दिनस दिनेस मै दिवान मै सुरेस मै सुपत महेस जोति तेरी ऐ जगति है ॥२४५॥

dhinas dhines mai dhivaan mai sures mai supat mahes jot teree aai jagat hai ||245||


ਬਿਨਤੀ ਕਰਤ ਸਭ ਗੋਪੀ ਕਰਿ ਜੋਰਿ ਜੋਰਿ ਸੁਨਿ ਲੇਹੁ ਬਿਨਤੀ ਹਮਾਰੀ ਇਹ ਚੰਡਿਕਾ ॥

बिनती करत सभ गोपी करि जोरि जोरि सुनि लेहु बिनती हमारी इह चंडिका ॥

binatee karat sabh gopee kar jor jor sun leh binatee hamaaree ieh cha(n)ddikaa ||

ਸੁਰ ਤੈ ਉਬਾਰੇ ਕੋਟਿ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰੇ ਚੰਡ ਮੁੰਡ ਮੁੰਡ ਡਾਰੇ ਸੁੰਭ ਨਿਸੁੰਭ ਕੀ ਖੰਡਿਕਾ ॥

सुर तै उबारे कोटि पतित उधारे चंड मुँड मुँड डारे सुँभ निसुँभ की खंडिका ॥

sur tai ubaare koT patit udhaare cha(n)dd mu(n)dd mu(n)dd ddaare su(n)bh nisu(n)bh kee kha(n)ddikaa ||

ਦੀਜੈ ਮਾਗਿਯੋ ਦਾਨ ਹ੍ਵੈ ਪ੍ਰਤਛ ਕਹੈ ਮੇਰੀ ਮਾਈ ਪੂਜੇ ਹਮ ਤੁਮੈ ਨਾਹੀ ਪੁਜੈ ਸੁਤ ਗੰਡਕਾ ॥

दीजै मागियो दान ह्वै प्रतछ कहै मेरी माई पूजे हम तुमै नाही पुजै सुत गंडका ॥

dheejai maagiyo dhaan havai pratachh kahai meree maiee pooje ham tumai naahee pujai sut ga(n)ddakaa ||

ਹ੍ਵੈ ਕਰਿ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਤਾ ਕੋ ਕਹਿਓ ਸੀਘ੍ਰ ਮਾਨ ਦੀਨੋ ਵਹੈ ਬਰ ਦਾਨ ਫੁਨਿ ਰਾਨਿਨ ਕੀ ਮੰਡਿਕਾ ॥੨੪੬॥

ह्वै करि प्रसंन्य ता को कहिओ सीघ्र मान दीनो वहै बर दान फुनि रानिन की मंडिका ॥२४६॥

havai kar prasa(n)nay taa ko kahio seeghr maan dheeno vahai bar dhaan fun raanin kee ma(n)ddikaa ||246||


ਦੇਵੀ ਜੀ ਬਾਚ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ॥

देवी जी बाच गोपिन सो ॥

dhevee jee baach gopin so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹ੍ਵੈ ਭਰਤਾ ਅਬ ਸੋ ਤੁਮਰੋ ਹਰਿ ਦਾਨ ਇਹੇ ਦੁਰਗਾ ਤਿਨ ਦੀਨਾ ॥

ह्वै भरता अब सो तुमरो हरि दान इहे दुरगा तिन दीना ॥

havai bharataa ab so tumaro har dhaan ihe dhuragaa tin dheenaa ||

ਸੋ ਧੁਨਿ ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਸੁਨ ਕੈ ਤਿਨ ਕੋਟਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਤਬੈ ਉਠਿ ਕੀਨਾ ॥

सो धुनि स्रउनन मै सुन कै तिन कोटि प्रनाम तबै उठि कीना ॥

so dhun sraunan mai sun kai tin koT pranaam tabai uTh keenaa ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਫੁਨਿ ਚੀਨਾ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने अपने मन मै फुनि चीना ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne apane man mai fun cheenaa ||

ਹੈ ਇਨ ਕੋ ਮਨੁ ਕਾਨਰ ਮੈ ਅਉ ਜੋ ਪੈ ਰਸ ਕਾਨਰ ਕੇ ਸੰਗਿ ਭੀਨਾ ॥੨੪੭॥

है इन को मनु कानर मै अउ जो पै रस कानर के संगि भीना ॥२४७॥

hai in ko man kaanar mai aau jo pai ras kaanar ke sa(n)g bheenaa ||247||


ਪਾਇ ਪਰੀ ਤਿਹ ਕੇ ਤਬ ਹੀ ਸਭ ਭਾਤਿ ਕਰੀ ਬਹੁ ਤਾਹਿ ਬਡਾਈ ॥

पाइ परी तिह के तब ही सभ भाति करी बहु ताहि बडाई ॥

pai paree teh ke tab hee sabh bhaat karee bahu taeh baddaiee ||

ਹੈ ਜਗ ਕੀ ਕਰਤਾ ਹਰਤਾ ਦੁਖ ਹੈ ਸਭ ਤੂ ਗਨ ਗੰਧ੍ਰਬ ਮਾਈ ॥

है जग की करता हरता दुख है सभ तू गन गंध्रब माई ॥

hai jag kee karataa harataa dhukh hai sabh too gan ga(n)dhrab maiee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਈ ॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि ने मुख ते इम भाखि सुनाई ॥

taa chhab kee at hee upamaa kab ne mukh te im bhaakh sunaiee ||

ਲਾਲ ਭਈ ਤਬ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ਫੁਨਿ ਬਾਤ ਜਬੈ ਮਨ ਬਾਛਤ ਪਾਈ ॥੨੪੮॥

लाल भई तब ही गुपीआ फुनि बात जबै मन बाछत पाई ॥२४८॥

laal bhiee tab hee gupeeaa fun baat jabai man baachhat paiee ||248||


ਲੈ ਬਰਦਾਨ ਸਭੈ ਗੁਪੀਆ ਅਤਿ ਆਨੰਦ ਕੈ ਮਨਿ ਡੇਰਨ ਆਈ ॥

लै बरदान सभै गुपीआ अति आनंद कै मनि डेरन आई ॥

lai baradhaan sabhai gupeeaa at aana(n)dh kai man dderan aaiee ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਸਭੈ ਮਿਲ ਕੈ ਇਕ ਹ੍ਵੈ ਕੈ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਸੁ ਦੇਤ ਬਧਾਈ ॥

गावत गीत सभै मिल कै इक ह्वै कै प्रसंन्य सु देत बधाई ॥

gaavat geet sabhai mil kai ik havai kai prasa(n)nay su dhet badhaiee ||

ਪਾਤਨ ਸਾਥ ਖਰੀ ਤਿਨ ਕੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਗਾਈ ॥

पातन साथ खरी तिन की उपमा कबि ने मुख ते इम गाई ॥

paatan saath kharee tin kee upamaa kab ne mukh te im gaiee ||

ਮਾਨਹੁ ਪਾਇ ਨਿਸਾਪਤਿ ਕੋ ਸਰ ਮਧਿ ਖਿਰੀ ਕਵੀਆ ਧੁਰ ਤਾਈ ॥੨੪੯॥

मानहु पाइ निसापति को सर मधि खिरी कवीआ धुर ताई ॥२४९॥

maanahu pai nisaapat ko sar madh khiree kaveeaa dhur taiee ||249||


ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਜਮਨਾ ਜਲ ਮੈ ਮਿਲਿ ਧਾਇ ਗਈ ਸਭ ਹੀ ਗੁਪੀਆ ॥

प्रात भए जमना जल मै मिलि धाइ गई सभ ही गुपीआ ॥

praat bhe jamanaa jal mai mil dhai giee sabh hee gupeeaa ||

ਮਿਲਿ ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਚਲੀ ਤਿਹ ਜਾ ਕਰਿ ਆਨੰਦ ਭਾਮਿਨ ਮੈ ਕੁਪੀਆ ॥

मिलि गावत गीत चली तिह जा करि आनंद भामिन मै कुपीआ ॥

mil gaavat geet chalee teh jaa kar aana(n)dh bhaamin mai kupeeaa ||

ਤਬ ਹੀ ਫੁਨਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਲੇ ਤਿਹ ਜਾ ਜਮੁਨਾ ਜਲ ਕੋ ਫੁਨਿ ਜਾ ਜੁ ਪੀਆ ॥

तब ही फुनि कान्रह चले तिह जा जमुना जल को फुनि जा जु पीआ ॥

tab hee fun kaanreh chale teh jaa jamunaa jal ko fun jaa ju peeaa ||

ਸੋਊ ਦੇਖਿ ਤਬੈ ਭਗਵਾਨ ਕਹੇ ਨਹਿ ਬੋਲਹੁ ਰੀ ਕਰਿ ਹੋ ਚੁਪੀਆ ॥੨੫੦॥

सोऊ देखि तबै भगवान कहे नहि बोलहु री करि हो चुपीआ ॥२५०॥

souoo dhekh tabai bhagavaan kahe neh bolahu ree kar ho chupeeaa ||250||


ਅਥ ਚੀਰ ਚਰਨ ਕਥਨੰ ॥

अथ चीर चरन कथनं ॥

ath cheer charan kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਨ੍ਰਹਾਵਨਿ ਲਾਗਿ ਜਬੈ ਗੁਪੀਆ ਤਬ ਲੈ ਪਟ ਕਾਨ ਚਰਿਯੋ ਤਰੁ ਊਪੈ ॥

न्रहावनि लागि जबै गुपीआ तब लै पट कान चरियो तरु ऊपै ॥

nrahaavan laag jabai gupeeaa tab lai paT kaan chariyo tar uoopai ||

ਤਉ ਮੁਸਕਯਾਨ ਲਗੀ ਮਧਿ ਆਪਨ ਕੋਇ ਪੁਕਾਰ ਕਰੇ ਹਰਿ ਜੂ ਪੈ ॥

तउ मुसकयान लगी मधि आपन कोइ पुकार करे हरि जू पै ॥

tau musakayaan lagee madh aapan koi pukaar kare har joo pai ||

ਚੀਰ ਹਰੇ ਹਮਰੇ ਛਲ ਸੋ ਤੁਮ ਸੋ ਠਗ ਨਾਹਿ ਕਿਧੋ ਕੋਊ ਭੂ ਪੈ ॥

चीर हरे हमरे छल सो तुम सो ठग नाहि किधो कोऊ भू पै ॥

cheer hare hamare chhal so tum so Thag naeh kidho kouoo bhoo pai ||

ਹਾਥਨ ਸਾਥ ਸੁ ਸਾਰੀ ਹਰੀ ਦ੍ਰਿਗ ਸਾਥ ਹਰੋ ਹਮਰੋ ਤੁਮ ਰੂਪੈ ॥੨੫੧॥

हाथन साथ सु सारी हरी दृग साथ हरो हमरो तुम रूपै ॥२५१॥

haathan saath su saaree haree dhirag saath haro hamaro tum roopai ||251||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान जू सो ॥

gopee baach kaan joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹਿਯੋ ਮੁਖ ਤੇ ਗੁਪੀਆ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸਿਖੇ ਤੁਮ ਬਾਤ ਭਲੀ ਹੈ ॥

स्याम कहियो मुख ते गुपीआ इह कान्रह सिखे तुम बात भली है ॥

sayaam kahiyo mukh te gupeeaa ieh kaanreh sikhe tum baat bhalee hai ||

ਨੰਦ ਕੀ ਓਰ ਪਿਖੋ ਤੁਮ ਹੂੰ ਦਿਖੋ ਭ੍ਰਾਤ ਕੀ ਓਰ ਕਿ ਨਾਮ ਹਲੀ ਹੈ ॥

नंद की ओर पिखो तुम हूँ दिखो भ्रात की ओर कि नाम हली है ॥

na(n)dh kee or pikho tum hoo(n) dhikho bhraat kee or k naam halee hai ||

ਚੀਰ ਹਰੇ ਹਮਰੇ ਛਲ ਸੋ ਸੁਨਿ ਮਾਰਿ ਡਰੈ ਤੁਹਿ ਕੰਸ ਬਲੀ ਹੈ ॥

चीर हरे हमरे छल सो सुनि मारि डरै तुहि कंस बली है ॥

cheer hare hamare chhal so sun maar ddarai tuh ka(n)s balee hai ||

ਕੋ ਮਰ ਹੈ ਹਮ ਕੋ ਤੁਮਰੋ ਨ੍ਰਿਪ ਤੋਰ ਡਰੈ ਜਿਮ ਕਉਲ ਕਲੀ ਹੈ ॥੨੫੨॥

को मर है हम को तुमरो नृप तोर डरै जिम कउल कली है ॥२५२॥

ko mar hai ham ko tumaro nirap tor ddarai jim kaul kalee hai ||252||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ਗੋਪੀ ਸੋ ॥

कान्रह बाच गोपी सो ॥

kaanreh baach gopee so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਤਿਨ ਕੋ ਇਹ ਬਾਤ ਨ ਦਿਓ ਪਟ ਹਉ ਨਿਕਰਿਯੋ ਬਿਨੁ ਤੋ ਕੋ ॥

कान्रह कही तिन को इह बात न दिओ पट हउ निकरियो बिनु तो को ॥

kaanreh kahee tin ko ieh baat na dhio paT hau nikariyo bin to ko ||

ਕਿਉ ਜਲ ਬੀਚ ਰਹੀ ਛਪ ਕੈ ਤਨ ਕਾਹਿ ਕਟਾਵਤ ਹੋ ਪਹਿ ਜੋਕੋ ॥

किउ जल बीच रही छप कै तन काहि कटावत हो पहि जोको ॥

kiau jal beech rahee chhap kai tan kaeh kaTaavat ho peh joko ||

ਨਾਮ ਬਤਾਵਤ ਹੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੋ ਤਿਹ ਕੋ ਫੁਨਿ ਨਾਹਿ ਕਛੂ ਡਰੁ ਮੋ ਕੋ ॥

नाम बतावत हो नृप को तिह को फुनि नाहि कछू डरु मो को ॥

naam bataavat ho nirap ko teh ko fun naeh kachhoo ddar mo ko ||

ਕੇਸਨ ਤੇ ਗਹਿ ਕੈ ਤਪ ਕੀ ਅਗਨੀ ਮਧਿ ਈਧਨ ਜਿਉ ਉਹਿ ਝੋਕੋ ॥੨੫੩॥

केसन ते गहि कै तप की अगनी मधि ईधन जिउ उहि झोको ॥२५३॥

kesan te geh kai tap kee aganee madh ieedhan jiau uh jhoko ||253||


ਰੂਖਿ ਚਰੇ ਹਰਿ ਜੀ ਰਿਝ ਕੈ ਮੁਖ ਤੇ ਜਬ ਬਾਤ ਕਹੀ ਇਹ ਤਾ ਸੋ ॥

रूखि चरे हरि जी रिझ कै मुख ते जब बात कही इह ता सो ॥

rookh chare har jee rijh kai mukh te jab baat kahee ieh taa so ||

ਤਉ ਰਿਸਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਉਨ ਹੂੰ ਇਹ ਜਾਇ ਕਹੈ ਤੁਹਿ ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਸੋ ॥

तउ रिसि बात कही उन हूँ इह जाइ कहै तुहि मात पिता सो ॥

tau ris baat kahee un hoo(n) ieh jai kahai tuh maat pitaa so ||

ਜਾਇ ਕਹੋ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਮਨ ਹੈ ਤੁਮਰੋ ਕਹਬੇ ਕਹੁ ਜਾ ਸੋ ॥

जाइ कहो इह कान्रह कही मन है तुमरो कहबे कहु जा सो ॥

jai kaho ieh kaanreh kahee man hai tumaro kahabe kahu jaa so ||

ਜੋ ਸੁਨਿ ਕੋਊ ਕਹੈ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਤੋ ਹਮ ਹੂੰ ਸਮਝੈ ਫੁਨਿ ਵਾ ਸੋ ॥੨੫੪॥

जो सुनि कोऊ कहै हम को इह तो हम हूँ समझै फुनि वा सो ॥२५४॥

jo sun kouoo kahai ham ko ieh to ham hoo(n) samajhai fun vaa so ||254||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੇਉ ਬਿਨਾ ਨਿਕਰੈ ਨਹਿ ਚੀਰ ਕਹਿਯੋ ਹਸਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੁਨੋ ਤੁਮ ਪਿਆਰੀ ॥

देउ बिना निकरै नहि चीर कहियो हसि कान्रह सुनो तुम पिआरी ॥

dheau binaa nikarai neh cheer kahiyo has kaanreh suno tum piaaree ||

ਸੀਤ ਸਹੋ ਜਲ ਮੈ ਤੁਮ ਨਾਹਕ ਬਾਹਰਿ ਆਵਹੋ ਗੋਰੀ ਅਉ ਕਾਰੀ ॥

सीत सहो जल मै तुम नाहक बाहरि आवहो गोरी अउ कारी ॥

seet saho jal mai tum naahak baahar aavaho goree aau kaaree ||

ਦੇ ਅਪੁਨੇ ਅਗੂਆ ਪਿਛੂਆ ਕਰ ਬਾਰਿ ਤਜੋ ਪਤਲੀ ਅਰੁ ਭਾਰੀ ॥

दे अपुने अगूआ पिछूआ कर बारि तजो पतली अरु भारी ॥

dhe apune agooaa pichhooaa kar baar tajo patalee ar bhaaree ||

ਯੌ ਨਹਿ ਦੇਉ ਕਹਿਓ ਹਰਿ ਜੀ ਤਸਲੀਮ ਕਰੋ ਕਰ ਜੋਰਿ ਹਮਾਰੀ ॥੨੫੫॥

यौ नहि देउ कहिओ हरि जी तसलीम करो कर जोरि हमारी ॥२५५॥

yau neh dheau kahio har jee tasaleem karo kar jor hamaaree ||255||


ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਹਰਿ ਜੀ ਤਿਨ ਸੋ ਰਿਝ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਤੁਮ ਮੇਰੀ ॥

फेरि कही हरि जी तिन सो रिझ कै इह बात सुनो तुम मेरी ॥

fer kahee har jee tin so rijh kai ieh baat suno tum meree ||

ਜੋਰਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੋ ਹਮਰੋ ਕਰ ਲਾਜ ਕੀ ਕਾਟਿ ਸਭੈ ਤੁਮ ਬੇਰੀ ॥

जोरि प्रनाम करो हमरो कर लाज की काटि सभै तुम बेरी ॥

jor pranaam karo hamaro kar laaj kee kaaT sabhai tum beree ||

ਬਾਰ ਹੀ ਬਾਰ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮ ਸੋ ਮੁਹਿ ਮਾਨਹੁ ਸੀਘ੍ਰ ਕਿਧੋ ਇਹ ਹੇ ਰੀ ॥

बार ही बार कहियो तुम सो मुहि मानहु सीघ्र किधो इह हे री ॥

baar hee baar kahiyo tum so muh maanahu seeghr kidho ieh he ree ||

ਨਾਤੁਰ ਜਾਇ ਕਹੋ ਸਭ ਹੀ ਪਹਿ ਸਉਹ ਲਗੈ ਫੁਨਿ ਠਾਕੁਰ ਕੇਰੀ ॥੨੫੬॥

नातुर जाइ कहो सभ ही पहि सउह लगै फुनि ठाकुर केरी ॥२५६॥

naatur jai kaho sabh hee peh sauh lagai fun Thaakur keree ||256||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान्रह सो ॥

gopee baach kaanreh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜੋ ਤੁਮ ਜਾਇ ਕਹੋ ਤਿਨ ਹੀ ਪਹਿ ਤੋ ਹਮ ਬਾਤ ਬਨਾਵਹਿ ਐਸੇ ॥

जो तुम जाइ कहो तिन ही पहि तो हम बात बनावहि ऐसे ॥

jo tum jai kaho tin hee peh to ham baat banaaveh aaise ||

ਚੀਰ ਹਰੇ ਹਮਰੇ ਹਰਿ ਜੀ ਦਈ ਬਾਰਿ ਤੇ ਨਿਆਰੀ ਕਢੈ ਹਮ ਕੈਸੇ ॥

चीर हरे हमरे हरि जी दई बारि ते निआरी कढै हम कैसे ॥

cheer hare hamare har jee dhiee baar te niaaree kaddai ham kaise ||

ਭੇਦ ਕਹੈ ਸਭ ਹੀ ਜਸੁਧਾ ਪਹਿ ਤੋਹਿ ਕਰੈ ਸਰਮਿੰਦਤ ਵੈਸੇ ॥

भेद कहै सभ ही जसुधा पहि तोहि करै सरमिंदत वैसे ॥

bhedh kahai sabh hee jasudhaa peh toh karai sarami(n)dhat vaise ||

ਜਿਉ ਨਰ ਕੋ ਗਹਿ ਕੈ ਤਿਰੀਯਾ ਹੂੰ ਸੁ ਮਾਰਤ ਲਾਤਨ ਮੂਕਨ ਜੈਸੇ ॥੨੫੭॥

जिउ नर को गहि कै तिरीया हूँ सु मारत लातन मूकन जैसे ॥२५७॥

jiau nar ko geh kai tireeyaa hoo(n) su maarat laatan mookan jaise ||257||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਾਤ ਕਹੀ ਤਬ ਇਹ ਹਰੀ ਕਾਹਿ ਬੰਧਾਵਤ ਮੋਹਿ ॥

बात कही तब इह हरी काहि बंधावत मोहि ॥

baat kahee tab ieh haree kaeh ba(n)dhaavat moh ||

ਨਮਸਕਾਰ ਜੋ ਨ ਕਰੋ ਮੋਹਿ ਦੁਹਾਈ ਤੋਹਿ ॥੨੫੮॥

नमसकार जो न करो मोहि दुहाई तोहि ॥२५८॥

namasakaar jo na karo moh dhuhaiee toh ||258||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ॥

गोपी बाच ॥

gopee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਹਿ ਖਿਝਾਵਤ ਹੋ ਹਮ ਕੋ ਅਰੁ ਦੇਤ ਕਹਾ ਜਦੁਰਾਇ ਦੁਹਾਈ ॥

काहि खिझावत हो हम को अरु देत कहा जदुराइ दुहाई ॥

kaeh khijhaavat ho ham ko ar dhet kahaa jadhurai dhuhaiee ||

ਜਾ ਬਿਧਿ ਕਾਰਨ ਬਾਤ ਬਨਾਵਤ ਸੋ ਬਿਧਿ ਹਮ ਹੂੰ ਲਖਿ ਪਾਈ ॥

जा बिधि कारन बात बनावत सो बिधि हम हूँ लखि पाई ॥

jaa bidh kaaran baat banaavat so bidh ham hoo(n) lakh paiee ||

ਭੇਦ ਕਰੋ ਹਮ ਸੋ ਤੁਮ ਨਾਹਕ ਬਾਤ ਇਹੈ ਮਨ ਮੈ ਤੁਹਿ ਆਈ ॥

भेद करो हम सो तुम नाहक बात इहै मन मै तुहि आई ॥

bhedh karo ham so tum naahak baat ihai man mai tuh aaiee ||

ਸਉਹ ਲਗੈ ਹਮ ਠਾਕੁਰ ਕੀ ਜੁ ਰਹੈ ਤੁਮਰੀ ਬਿਨੁ ਮਾਤ ਸੁਨਾਈ ॥੨੫੯॥

सउह लगै हम ठाकुर की जु रहै तुमरी बिनु मात सुनाई ॥२५९॥

sauh lagai ham Thaakur kee ju rahai tumaree bin maat sunaiee ||259||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ਗੁਪੀਆ ਸੋ ॥

कान्रह बाच गुपीआ सो ॥

kaanreh baach gupeeaa so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾ ਸੁਨਿ ਹੈ ਤਬ ਕਾ ਕਰਿ ਹੈ ਹਮਰੋ ਸੁਨਿ ਲੇਹੁ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਨਾਰੀ ॥

मा सुनि है तब का करि है हमरो सुनि लेहु सभै बृज नारी ॥

maa sun hai tab kaa kar hai hamaro sun leh sabhai biraj naaree ||

ਬਾਤ ਕਹੀ ਤੁਮ ਮੂੜਨ ਕੀ ਹਮ ਜਾਨਤ ਹੈ ਤੁਮ ਹੋ ਸਭ ਬਾਰੀ ॥

बात कही तुम मूड़न की हम जानत है तुम हो सभ बारी ॥

baat kahee tum mooRan kee ham jaanat hai tum ho sabh baaree ||

ਸੀਖਤ ਹੋ ਰਸ ਰੀਤਿ ਅਬੈ ਇਹ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਤੁਮ ਹੋ ਮੁਹਿ ਪਿਆਰੀ ॥

सीखत हो रस रीति अबै इह कान्रह कही तुम हो मुहि पिआरी ॥

seekhat ho ras reet abai ieh kaanreh kahee tum ho muh piaaree ||

ਖੇਲਨ ਕਾਰਨ ਕੋ ਹਮ ਹੂੰ ਜੁ ਹਰੀ ਛਲ ਕੈ ਤੁਮ ਸੁੰਦਰ ਸਾਰੀ ॥੨੬੦॥

खेलन कारन को हम हूँ जु हरी छल कै तुम सुँदर सारी ॥२६०॥

khelan kaaran ko ham hoo(n) ju haree chhal kai tum su(n)dhar saaree ||260||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ॥

गोपी बाच ॥

gopee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਗੋਪਿਨ ਬਾਤ ਇਸੀ ਮਨੁ ਏ ਪਟ ਦੈਹੋ ॥

फेरि कही मुख ते इम गोपिन बात इसी मनु ए पट दैहो ॥

fer kahee mukh te im gopin baat isee man e paT dhaiho ||

ਸਉਹ ਕਰੋ ਮੁਸਲੀਧਰ ਕੀ ਜਸੁਧਾ ਨੰਦ ਕੀ ਹਮ ਕੋ ਡਰ ਕੈਹੋ ॥

सउह करो मुसलीधर की जसुधा नंद की हम को डर कैहो ॥

sauh karo musaleedhar kee jasudhaa na(n)dh kee ham ko ddar kaiho ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਿਚਾਰਿ ਪਿਖੋ ਮਨ ਮੈ ਇਨ ਬਾਤਨ ਤੇ ਤੁਮ ਨ ਕਿਛੁ ਪੈਹੋ ॥

कान्रह बिचारि पिखो मन मै इन बातन ते तुम न किछु पैहो ॥

kaanreh bichaar pikho man mai in baatan te tum na kichh paiho ||

ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਜਲ ਮੈ ਹਮ ਕੋ ਇਹ ਦੇਹਿ ਅਸੀਸ ਸਭੈ ਤੁਹਿ ਜੈਹੋ ॥੨੬੧॥

देहु कहियो जल मै हम को इह देहि असीस सभै तुहि जैहो ॥२६१॥

dheh kahiyo jal mai ham ko ieh dheh asees sabhai tuh jaiho ||261||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ॥

गोपी बाच ॥

gopee baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਮਿਲਿ ਗੋਪਨ ਨੇਹ ਲਗੈ ਹਰਿ ਜੀ ਨਹਿ ਜੋਰੀ ॥

फेरि कही मुख ते मिलि गोपन नेह लगै हरि जी नहि जोरी ॥

fer kahee mukh te mil gopan neh lagai har jee neh joree ||

ਨੈਨਨ ਸਾਥ ਲਗੈ ਸੋਊ ਨੇਹੁ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਸਾਵਲ ਗੋਰੀ ॥

नैनन साथ लगै सोऊ नेहु कहै मुख ते इह सावल गोरी ॥

nainan saath lagai souoo neh kahai mukh te ieh saaval goree ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਇਹ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਰਸ ਰੀਤਿ ਕਹੋ ਮਮ ਹੋਰੀ ॥

कान्रह कही हसि कै इह बात सुनो रस रीति कहो मम होरी ॥

kaanreh kahee has kai ieh baat suno ras reet kaho mam horee ||

ਆਖਨ ਸਾਥ ਲਗੈ ਟਕਵਾ ਫੁਨਿ ਹਾਥਨ ਸਾਥ ਲਗੈ ਸੁਭ ਸੋਰੀ ॥੨੬੨॥

आखन साथ लगै टकवा फुनि हाथन साथ लगै सुभ सोरी ॥२६२॥

aakhan saath lagai Takavaa fun haathan saath lagai subh soree ||262||


ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਮੁਖਿ ਤੇ ਗੁਪੀਆ ਹਮਰੇ ਪਟ ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਨੰਦ ਲਾਲਾ ॥

फेरि कही मुखि ते गुपीआ हमरे पट देहु कहियो नंद लाला ॥

fer kahee mukh te gupeeaa hamare paT dheh kahiyo na(n)dh laalaa ||

ਫੇਰਿ ਇਸਨਾਨ ਕਰੈ ਨ ਇਹਾ ਕਹਿ ਹੈ ਹਮਿ ਲੋਗਨ ਆਛਨ ਬਾਲਾ ॥

फेरि इसनान करै न इहा कहि है हमि लोगन आछन बाला ॥

fer isanaan karai na ihaa keh hai ham logan aachhan baalaa ||

ਜੋਰਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੋ ਹਮ ਕੋ ਕਰ ਬਾਹਰ ਹ੍ਵੈ ਜਲ ਤੇ ਤਤਕਾਲਾ ॥

जोरि प्रनाम करो हम को कर बाहर ह्वै जल ते ततकाला ॥

jor pranaam karo ham ko kar baahar havai jal te tatakaalaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਮੁਖਿ ਤੈ ਕਰਿ ਹੋ ਨਹੀ ਢੀਲ ਦੇਉ ਪਟ ਹਾਲਾ ॥੨੬੩॥

कान्रह कही हसि कै मुखि तै करि हो नही ढील देउ पट हाला ॥२६३॥

kaanreh kahee has kai mukh tai kar ho nahee ddeel dheau paT haalaa ||263||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮੰਤ੍ਰ ਸਭਨ ਮਿਲਿ ਇਹ ਕਰਿਯੋ ਜਲ ਕੋ ਤਜਿ ਸਭ ਨਾਰਿ ॥

मंत्र सभन मिलि इह करियो जल को तजि सभ नारि ॥

ma(n)tr sabhan mil ieh kariyo jal ko taj sabh naar ||

ਕਾਨਰ ਕੀ ਬਿਨਤੀ ਕਰੋ ਕੀਨੋ ਇਹੈ ਬਿਚਾਰ ॥੨੬੪॥

कानर की बिनती करो कीनो इहै बिचार ॥२६४॥

kaanar kee binatee karo keeno ihai bichaar ||264||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੈ ਅਗੂਆ ਪਿਛੂਆ ਅਪੁਨੇ ਕਰ ਪੈ ਸਭ ਹੀ ਜਲ ਤਿਆਗਿ ਖਰੀ ਹੈ ॥

दै अगूआ पिछूआ अपुने कर पै सभ ही जल तिआगि खरी है ॥

dhai agooaa pichhooaa apune kar pai sabh hee jal tiaag kharee hai ||

ਕਾਨ ਕੇ ਪਾਇ ਪਰੀ ਬਹੁ ਬਾਰਨ ਅਉ ਬਿਨਤੀ ਬਹੁ ਭਾਤਿ ਕਰੀ ਹੈ ॥

कान के पाइ परी बहु बारन अउ बिनती बहु भाति करी है ॥

kaan ke pai paree bahu baaran aau binatee bahu bhaat karee hai ||

ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਹਮਰੀ ਸਰ੍ਰਹੀਆ ਤੁਮ ਜੋ ਕਰਿ ਕੈ ਛਲ ਸਾਥ ਹਰੀ ਹੈ ॥

देहु कहियो हमरी सर्रहीआ तुम जो करि कै छल साथ हरी है ॥

dheh kahiyo hamaree sarraheeaa tum jo kar kai chhal saath haree hai ||

ਜੇ ਕਹਿ ਹੋ ਮਨਿ ਹੈ ਹਮ ਸੋ ਅਤਿ ਹੀ ਸਭ ਸੀਤਹਿ ਸਾਥ ਠਰੀ ਹੈ ॥੨੬੫॥

जे कहि हो मनि है हम सो अति ही सभ सीतहि साथ ठरी है ॥२६५॥

je keh ho man hai ham so at hee sabh seeteh saath Tharee hai ||265||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਹਸਿ ਬਾਤ ਤਿਨੈ ਕਹਿ ਹੈ ਹਮ ਜੋ ਤੁਮ ਸੋ ਮਨ ਹੋ ॥

कान्रह कही हसि बात तिनै कहि है हम जो तुम सो मन हो ॥

kaanreh kahee has baat tinai keh hai ham jo tum so man ho ||

ਸਭ ਹੀ ਮੁਖ ਚੂਮਨ ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਚੁਮ ਹੈ ਹਮ ਹੂੰ ਤੁਮ ਹੂੰ ਗਨਿ ਹੋ ॥

सभ ही मुख चूमन देहु कहियो चुम है हम हूँ तुम हूँ गनि हो ॥

sabh hee mukh chooman dheh kahiyo chum hai ham hoo(n) tum hoo(n) gan ho ||

ਅਰੁ ਤੋਰਨ ਦੇਹੁ ਕਹਿਯੋ ਸਭ ਹੀ ਕੁਚ ਨਾਤਰ ਹਉ ਤੁਮ ਕੋ ਹਨਿ ਹੋ ॥

अरु तोरन देहु कहियो सभ ही कुच नातर हउ तुम को हनि हो ॥

ar toran dheh kahiyo sabh hee kuch naatar hau tum ko han ho ||

ਤਬ ਹੀ ਪਟ ਦੇਉ ਸਭੈ ਤੁਮਰੇ ਇਹ ਝੂਠ ਨਹੀ ਸਤਿ ਕੈ ਜਨਿ ਹੋ ॥੨੬੬॥

तब ही पट देउ सभै तुमरे इह झूठ नही सति कै जनि हो ॥२६६॥

tab hee paT dheau sabhai tumare ieh jhooTh nahee sat kai jan ho ||266||


ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਹਰਿ ਜੀ ਸੁਨਿ ਰੀ ਇਕ ਬਾਤ ਕਹੋ ਸੰਗ ਤੇਰੇ ॥

फेरि कही मुख ते हरि जी सुनि री इक बात कहो संग तेरे ॥

fer kahee mukh te har jee sun ree ik baat kaho sa(n)g tere ||

ਜੋਰਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੋ ਕਰ ਸੋ ਤੁਮ ਕਾਮ ਕਰਾ ਉਪਜੀ ਜੀਅ ਮੇਰੇ ॥

जोरि प्रनाम करो कर सो तुम काम करा उपजी जीअ मेरे ॥

jor pranaam karo kar so tum kaam karaa upajee jeea mere ||

ਤੌ ਹਮ ਬਾਤ ਕਹੀ ਤੁਮ ਸੋ ਜਬ ਘਾਤ ਬਨੀ ਸੁਭ ਠਉਰ ਅਕੇਰੇ ॥

तौ हम बात कही तुम सो जब घात बनी सुभ ठउर अकेरे ॥

tau ham baat kahee tum so jab ghaat banee subh Thaur akere ||

ਦਾਨ ਲਹੈ ਜੀਅ ਕੋ ਹਮ ਹੂੰ ਹਸਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਤੁਮਰੋ ਤਨ ਹੇਰੇ ॥੨੬੭॥

दान लहै जीअ को हम हूँ हसि कान्रह कही तुमरो तन हेरे ॥२६७॥

dhaan lahai jeea ko ham hoo(n) has kaanreh kahee tumaro tan here ||267||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਜਬੈ ਗੋਪੀ ਸਭੈ ਦੇਖਿਯੋ ਨੈਨ ਨਚਾਤ ॥

कान्रह जबै गोपी सभै देखियो नैन नचात ॥

kaanreh jabai gopee sabhai dhekhiyo nain nachaat ||

ਹ੍ਵੈ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਕਹਨੇ ਲਗੀ ਸਭੈ ਸੁਧਾ ਸੀ ਬਾਤ ॥੨੬੮॥

ह्वै प्रसंनि कहने लगी सभै सुधा सी बात ॥२६८॥

havai prasa(n)n kahane lagee sabhai sudhaa see baat ||268||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान्रह सो ॥

gopee baach kaanreh so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਹਿਕ੍ਰਮ ਥੋਰੀ ਤੁਮੈ ਖੇਲਹੁ ਨ ਅਪਨੋ ਘਰ ਕਾਹੋ ॥

कान्रह बहिक्रम थोरी तुमै खेलहु न अपनो घर काहो ॥

kaanreh bahikram thoree tumai khelahu na apano ghar kaaho ||

ਨੰਦ ਸੁਨੈ ਜਸੁਧਾ ਤਪਤੈ ਤਿਹ ਤੇ ਤੁਮ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਏ ਹਰਕਾ ਹੋ ॥

नंद सुनै जसुधा तपतै तिह ते तुम कान्रह भए हरका हो ॥

na(n)dh sunai jasudhaa tapatai teh te tum kaanreh bhe harakaa ho ||

ਨੇਹੁੰ ਲਗੈ ਨਹ ਜੋਰ ਭਏ ਤੁਮ ਨੇਹੁ ਲਗਾਵਤ ਹੋ ਬਰ ਕਾਹੋ ॥

नेहुँ लगै नह जोर भए तुम नेहु लगावत हो बर काहो ॥

nehu(n) lagai neh jor bhe tum neh lagaavat ho bar kaaho ||

ਲੇਹੁ ਕਹਾ ਇਨ ਬਾਤਨ ਤੇ ਰਸ ਜਾਨਤ ਕਾ ਅਜਹੂੰ ਲਰਕਾ ਹੋ ॥੨੬੯॥

लेहु कहा इन बातन ते रस जानत का अजहूँ लरका हो ॥२६९॥

leh kahaa in baatan te ras jaanat kaa ajahoo(n) larakaa ho ||269||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕਮਲ ਸੇ ਆਨਨ ਕੁਰੰਗਨ ਸੇ ਨੇਤ੍ਰਨ ਸੋ ਤਨ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾ ਮੈ ਸਾਰੇ ਭਾਵਨ ਸੋ ਭਰੀਆ ॥

कमल से आनन कुरंगन से नेत्रन सो तन की प्रभा मै सारे भावन सो भरीआ ॥

kamal se aanan kura(n)gan se netran so tan kee prabhaa mai saare bhaavan so bhareeaa ||

ਰਾਜਤ ਹੈ ਗੁਪੀਆ ਪ੍ਰਸੰਨ ਭਈ ਐਸੀ ਭਾਤਿ ਚੰਦ੍ਰਮਾ ਚਰ੍ਰਹੈ ਤੇ ਜਿਉ ਬਿਰਾਜੈ ਸੇਤ ਹਰੀਆ ॥

राजत है गुपीआ प्रसंन भई ऐसी भाति चंद्रमा चर्रहै ते जिउ बिराजै सेत हरीआ ॥

raajat hai gupeeaa prasa(n)n bhiee aaisee bhaat cha(n)dhramaa charrahai te jiau biraajai set hareeaa ||

ਰਸ ਹੀ ਕੀ ਬਾਤੈ ਰਸ ਰੀਤਿ ਹੀ ਕੇ ਪ੍ਰੇਮ ਹੂੰ ਮੈ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸਾਥ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਕੇ ਖਰੀਆ ॥

रस ही की बातै रस रीति ही के प्रेम हूँ मै कहै कबि स्याम साथ कान्रह जू के खरीआ ॥

ras hee kee baatai ras reet hee ke prem hoo(n) mai kahai kab sayaam saath kaanreh joo ke khareeaa ||

ਮਦਨ ਕੇ ਹਾਰਨ ਬਨਾਇਬੇ ਕੇ ਕਾਜ ਮਾਨੋ ਹਿਤ ਕੈ ਪਰੋਵਤ ਹੈ ਮੋਤਿਨ ਕੀ ਲਰੀਆ ॥੨੭੦॥

मदन के हारन बनाइबे के काज मानो हित कै परोवत है मोतिन की लरीआ ॥२७०॥

madhan ke haaran banaibe ke kaaj maano hit kai parovat hai motin kee lareeaa ||270||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਹੇ ਕੋ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਕਾਮ ਕੇ ਬਾਨ ਲਗਾਵਤ ਹੋ ਤਨ ਕੇ ਧਨੁ ਭਉਹੈ ॥

काहे को कान्रह जू काम के बान लगावत हो तन के धनु भउहै ॥

kaahe ko kaanreh joo kaam ke baan lagaavat ho tan ke dhan bhauhai ||

ਕਾਹੇ ਕਉ ਨੇਹੁ ਲਗਾਵਤ ਹੋ ਮੁਸਕਾਵਤ ਹੋ ਚਲਿ ਆਵਤ ਸਉਹੈ ॥

काहे कउ नेहु लगावत हो मुसकावत हो चलि आवत सउहै ॥

kaahe kau neh lagaavat ho musakaavat ho chal aavat sauhai ||

ਕਾਹੇ ਕਉ ਪਾਗ ਧਰੋ ਤਿਰਛੀ ਅਰੁ ਕਾਹੇ ਭਰੋ ਤਿਰਛੀ ਤੁਮ ਗਉਹੈ ॥

काहे कउ पाग धरो तिरछी अरु काहे भरो तिरछी तुम गउहै ॥

kaahe kau paag dharo tirachhee ar kaahe bharo tirachhee tum gauhai ||

ਕਾਹੇ ਰਿਝਾਵਤ ਹੌ ਮਨ ਭਾਵਤ ਆਹਿ ਦਿਵਵਾਤ ਹੈ ਹਮ ਸਉਹੈ ॥੨੭੧॥

काहे रिझावत हौ मन भावत आहि दिववात है हम सउहै ॥२७१॥

kaahe rijhaavat hau man bhaavat aaeh dhivavaat hai ham sauhai ||271||



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