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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਫਿਰ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੈ ਪਤਿ ਊਖਲ ਸੋ ਫੁਨਿ ਦੇਹਿ ਬੰਧਾਈ ॥੧੪੩॥

स्याम कहै फिर कै बृज कै पति ऊखल सो फुनि देहि बंधाई ॥१४३॥

sayaam kahai fir kai biraj kai pat uookhal so fun dheh ba(n)dhaiee ||143||


ਦਉਰਿ ਗਹੇ ਹਰਿ ਜੀ ਜਸੁਦਾ ਜਬ ਬਾਧਿ ਰਹੀ ਰਸੀਆ ਨਹੀ ਮਾਵੈ ॥

दउरि गहे हरि जी जसुदा जब बाधि रही रसीआ नही मावै ॥

dhaur gahe har jee jasudhaa jab baadh rahee raseeaa nahee maavai ||

ਕੈ ਇਕਠੀ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਰਸੀਆ ਸਭ ਜੋਰਿ ਰਹੀ ਕਛੁ ਥਾਹਿ ਨ ਪਾਵੈ ॥

कै इकठी बृज की रसीआ सभ जोरि रही कछु थाहि न पावै ॥

kai ikaThee biraj kee raseeaa sabh jor rahee kachh thaeh na paavai ||

ਫੇਰਿ ਬੰਧਾਇ ਭਏ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪਤਿ ਊਖਲ ਸੋ ਧਰਿ ਊਪਰ ਧਾਵੈ ॥

फेरि बंधाइ भए बृज के पति ऊखल सो धरि ऊपर धावै ॥

fer ba(n)dhai bhe biraj ke pat uookhal so dhar uoopar dhaavai ||

ਸਾਧ ਉਧਾਰਨ ਕੋ ਜੁਮਲਾਰਜੁਨ ਤਾਹਿਾਂ ਨਿਮਿਤ ਕਿਧੋ ਵਹ ਜਾਵੈ ॥੧੪੪॥

साध उधारन को जुमलारजुन ताहिाँ निमित किधो वह जावै ॥१४४॥

saadh udhaaran ko jumalaarajun taahiaa(n) nimit kidho veh jaavai ||144||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਘੀਸਤਿ ਘੀਸਤਿ ਉਖਲਹਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਉਧਾਰਤ ਸਾਧ ॥

घीसति घीसति उखलहि कान्रह उधारत साध ॥

gheesat gheesat ukhaleh kaanreh udhaarat saadh ||

ਨਿਕਟਿ ਤਬੈ ਤਿਨ ਕੇ ਗਏ ਜਾਨਨਹਾਰ ਅਗਾਧ ॥੧੪੫॥

निकटि तबै तिन के गए जाननहार अगाध ॥१४५॥

nikaT tabai tin ke ge jaananahaar agaadh ||145||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਊਖਲ ਕਾਨ੍ਰਹ ਅਰਾਇ ਕਿਧੌ ਬਲ ਕੈ ਤਨ ਕੋ ਤਰੁ ਤੋਰ ਦਏ ਹੈ ॥

ऊखल कान्रह अराइ किधौ बल कै तन को तरु तोर दए है ॥

uookhal kaanreh arai kidhau bal kai tan ko tar tor dhe hai ||

ਤਉ ਨਿਕਸੇ ਤਿਨ ਤੇ ਜੁਮਲਾਰਜਨ ਕੈ ਬਿਨਤੀ ਸੁਰ ਲੋਕ ਗਏ ਹੈ ॥

तउ निकसे तिन ते जुमलारजन कै बिनती सुर लोक गए है ॥

tau nikase tin te jumalaarajan kai binatee sur lok ge hai ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਇਹ ਭਾਤਿ ਭਏ ਹੈ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि के मन मै इह भाति भए है ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ke man mai ieh bhaat bhe hai ||

ਨਾਗਨ ਕੇ ਪੁਰਿ ਤੇ ਮਧੁ ਕੇ ਮਟ ਕੈ ਮਤਿ ਕੀ ਲਜੁ ਐਚ ਲਏ ਹੈ ॥੧੪੬॥

नागन के पुरि ते मधु के मट कै मति की लजु ऐच लए है ॥१४६॥

naagan ke pur te madh ke maT kai mat kee laj aaich le hai ||146||


ਕਉਤਕ ਦੇਖਿ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਜਨ ਜਾਇ ਤਬੈ ਜਸੁਦਾ ਪਹਿ ਆਖੀ ॥

कउतक देखि सभै बृज के जन जाइ तबै जसुदा पहि आखी ॥

kautak dhekh sabhai biraj ke jan jai tabai jasudhaa peh aakhee ||

ਤੋਰ ਦਏ ਤਨ ਕੋ ਬਲ ਕੈ ਤਰ ਭਾਤਿ ਭਲੀ ਹਰਿ ਕੀ ਸੁਭ ਸਾਖੀ ॥

तोर दए तन को बल कै तर भाति भली हरि की सुभ साखी ॥

tor dhe tan ko bal kai tar bhaat bhalee har kee subh saakhee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਉਪਮਾ ਅਤਿ ਹੀ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪੁਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖੀ ॥

ता छबि की उपमा अति ही कबि ने अपुने मुख ते इम भाखी ॥

taa chhab kee upamaa at hee kab ne apune mukh te im bhaakhee ||

ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਭਹਰਾਇ ਤਿਤੈ ਉਡੇ ਜਿਉ ਧਰ ਤੇ ਉਡ ਜਾਤ ਹੈ ਮਾਖੀ ॥੧੪੭॥

फेरि कही भहराइ तितै उडे जिउ धर ते उड जात है माखी ॥१४७॥

fer kahee bhaharai titai udde jiau dhar te udd jaat hai maakhee ||147||


ਦੂਤਨ ਕੇ ਬਧ ਕੋ ਸਿਵ ਮੂਰਤਿ ਹੈ ਨਿਜ ਸੋ ਕਰਤਾ ਸੁਖ ਦਇਯਾ ॥

दूतन के बध को सिव मूरति है निज सो करता सुख दइया ॥

dhootan ke badh ko siv moorat hai nij so karataa sukh dhiyaa ||

ਲੋਗਨ ਕੋ ਬਰਤਾ ਹਰਤਾ ਦੁਖ ਹੈ ਕਰਤਾ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਇਯਾ ॥

लोगन को बरता हरता दुख है करता मुसलीधर भइया ॥

logan ko barataa harataa dhukh hai karataa musaleedhar bhiyaa ||

ਡਾਰ ਦਈ ਮਮਤਾ ਹਰਿ ਜੀ ਤਬ ਬੋਲ ਉਠੀ ਇਹ ਹੈ ਮਮ ਜਾਇਯਾ ॥

डार दई ममता हरि जी तब बोल उठी इह है मम जाइया ॥

ddaar dhiee mamataa har jee tab bol uThee ieh hai mam jaiyaa ||

ਖੇਲ ਬਨਾਇ ਦਯੋ ਹਮ ਕੋ ਬਿਧਿ ਜੋ ਜਨਮ੍ਯੋ ਗ੍ਰਿਹਿ ਪੂਤ ਕਨਇਯਾ ॥੧੪੮॥

खेल बनाइ दयो हम को बिधि जो जनम्यो गृहि पूत कनइया ॥१४८॥

khel banai dhayo ham ko bidh jo janamayo gireh poot kaniyaa ||148||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਤਰੁ ਤੋਰ ਜਮਲਾਰਜਨ ਉਧਾਰਬੋ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे कृसनावतारे तरु तोर जमलारजन उधारबो बरननं ॥

eit sree bachitr naaTake gra(n)the kirasanaavataare tar tor jamalaarajan udhaarabo baranana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਤੋਰਿ ਦਏ ਤਰੁ ਜੋ ਤਿਹ ਹੀ ਤਬ ਗੋਪਨ ਬੂਢਨ ਮੰਤ੍ਰ ਬਿਚਾਰੋ ॥

तोरि दए तरु जो तिह ही तब गोपन बूढन मंत्र बिचारो ॥

tor dhe tar jo teh hee tab gopan booddan ma(n)tr bichaaro ||

ਗੋਕੁਲ ਕੋ ਤਜੀਐ ਚਲੀਐ ਬ੍ਰਿਜ ਹ੍ਵੈ ਈਹਾ ਭਾਵ ਤੇ ਭਾਵਨ ਭਾਰੋ ॥

गोकुल को तजीऐ चलीऐ बृज ह्वै ईहा भाव ते भावन भारो ॥

gokul ko tajeeaai chaleeaai biraj havai ieehaa bhaav te bhaavan bhaaro ||

ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਜਸੁਦਾ ਅਰੁ ਨੰਦਹਿ ਬ੍ਯੋਤ ਭਲੋ ਮਨ ਮਧਿ ਬਿਚਾਰੋ ॥

बात सुनी जसुदा अरु नंदहि ब्योत भलो मन मधि बिचारो ॥

baat sunee jasudhaa ar na(n)dheh bayot bhalo man madh bichaaro ||

ਅਉਰ ਭਲੀ ਇਹ ਤੇ ਨ ਕਛੂ ਜਿਹ ਤੇ ਸੁ ਬਚੇ ਸੁਤ ਸ੍ਯਾਮ ਹਮਾਰੋ ॥੧੪੯॥

अउर भली इह ते न कछू जिह ते सु बचे सुत स्याम हमारो ॥१४९॥

aaur bhalee ieh te na kachhoo jeh te su bache sut sayaam hamaaro ||149||


ਘਾਸਿ ਭਲੋ ਦ੍ਰੁਮ ਛਾਹ ਭਲੀ ਜਮੁਨਾ ਢਿਗ ਹੈ ਨਗ ਹੈ ਤਟਿ ਜਾ ਕੇ ॥

घासि भलो द्रुम छाह भली जमुना ढिग है नग है तटि जा के ॥

ghaas bhalo dhrum chhaeh bhalee jamunaa ddig hai nag hai taT jaa ke ||

ਕੋਟਿ ਝਰੈ ਝਰਨਾ ਤਿਹ ਤੇ ਜਗ ਮੈ ਸਮਤੁਲਿ ਨਹੀ ਕਛੁ ਤਾ ਕੇ ॥

कोटि झरै झरना तिह ते जग मै समतुलि नही कछु ता के ॥

koT jharai jharanaa teh te jag mai samatul nahee kachh taa ke ||

ਬੋਲਤ ਹੈ ਪਿਕ ਕੋਕਿਲ ਮੋਰ ਕਿਧੌ ਘਨ ਮੈ ਚਹੁੰ ਓਰਨ ਵਾ ਕੇ ॥

बोलत है पिक कोकिल मोर किधौ घन मै चहुँ ओरन वा के ॥

bolat hai pik kokil mor kidhau ghan mai chahu(n) oran vaa ke ||

ਬੇਗ ਚਲੋ ਤੁਮ ਗੋਕੁਲ ਕੋ ਤਜਿ ਪੁੰਨ ਹਜਾਰ ਅਬੈ ਤੁਮ ਗਾ ਕੇ ॥੧੫੦॥

बेग चलो तुम गोकुल को तजि पुँन हजार अबै तुम गा के ॥१५०॥

beg chalo tum gokul ko taj pu(n)n hajaar abai tum gaa ke ||150||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨੰਦ ਸਭੈ ਗੋਪਨ ਸਨੈ ਬਾਤ ਕਹੀ ਇਹ ਠਉਰ ॥

नंद सभै गोपन सनै बात कही इह ठउर ॥

na(n)dh sabhai gopan sanai baat kahee ieh Thaur ||

ਤਜਿ ਗੋਕੁਲ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਚਲੇ ਇਹ ਤੇ ਭਲੀ ਨ ਅਉਰ ॥੧੫੧॥

तजि गोकुल बृज को चले इह ते भली न अउर ॥१५१॥

taj gokul biraj ko chale ieh te bhalee na aaur ||151||


ਲਟਪਟ ਬਾਧੇ ਉਠਿ ਚਲੇ ਆਏ ਜਬ ਬ੍ਰਿਜਿ ਹੀਰ ॥

लटपट बाधे उठि चले आए जब बृजि हीर ॥

laTapaT baadhe uTh chale aae jab biraj heer ||

ਦੇਖਿਓ ਅਪਨੇ ਨੈਨ ਭਰਿ ਬਹਿਤੋ ਜਮੁਨਾ ਤੀਰ ॥੧੫੨॥

देखिओ अपने नैन भरि बहितो जमुना तीर ॥१५२॥

dhekhio apane nain bhar bahito jamunaa teer ||152||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਇਸ ਪਾਇ ਕੈ ਨੰਦਹਿ ਕੋ ਸਭ ਗੋਪਨ ਜਾਇ ਭਲੇ ਰਥ ਸਾਜੇ ॥

आइस पाइ कै नंदहि को सभ गोपन जाइ भले रथ साजे ॥

aais pai kai na(n)dheh ko sabh gopan jai bhale rath saaje ||

ਬੈਠਿ ਸਭੈ ਤਿਨ ਪੈ ਤਿਰੀਆ ਸੰਗਿ ਗਾਵਤ ਜਾਤ ਬਜਾਵਤ ਬਾਜੇ ॥

बैठि सभै तिन पै तिरीआ संगि गावत जात बजावत बाजे ॥

baiTh sabhai tin pai tireeaa sa(n)g gaavat jaat bajaavat baaje ||

ਹੇਮ ਕੋ ਦਾਨੁ ਕਰੈ ਜੁ ਦੋਊ ਹਰਿ ਗੋਦ ਲਏ ਜਸੁਦਾ ਇਮ ਰਾਜੈ ॥

हेम को दानु करै जु दोऊ हरि गोद लए जसुदा इम राजै ॥

hem ko dhaan karai ju dhouoo har godh le jasudhaa im raajai ||

ਕੈਧਉ ਸੈਲ ਸੁਤਾ ਗਿਰਿ ਭੀਤਰ ਊਚ ਮਨੋ ਮਨਿ ਨੀਲ ਬਿਰਾਜੈ ॥੧੫੩॥

कैधउ सैल सुता गिरि भीतर ऊच मनो मनि नील बिराजै ॥१५३॥

kaidhau sail sutaa gir bheetar uooch mano man neel biraajai ||153||


ਗੋਪ ਗਏ ਤਜਿ ਗੋਕੁਲ ਕੋ ਬ੍ਰਿਜ ਆਪਨੇ ਆਪਨੇ ਡੇਰਨ ਆਏ ॥

गोप गए तजि गोकुल को बृज आपने आपने डेरन आए ॥

gop ge taj gokul ko biraj aapane aapane dderan aae ||

ਡਾਰ ਦਈ ਲਸੀਆ ਅਰੁ ਅਛਤ ਬਾਹਰਿ ਭੀਤਰਿ ਧੂਪ ਜਗਾਏ ॥

डार दई लसीआ अरु अछत बाहरि भीतरि धूप जगाए ॥

ddaar dhiee laseeaa ar achhat baahar bheetar dhoop jagaae ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਊਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਏ ॥

ता छबि को जसु ऊच महा कबि नै मुख ते इम भाखि सुनाए ॥

taa chhab ko jas uooch mahaa kab nai mukh te im bhaakh sunaae ||

ਰਾਜ ਬਿਭੀਛਨ ਦੈ ਕਿਧੌ ਲੰਕ ਕੋ ਰਾਮ ਜੀ ਧਾਮ ਪਵਿਤ੍ਰ ਕਰਾਏ ॥੧੫੪॥

राज बिभीछन दै किधौ लंक को राम जी धाम पवित्र कराए ॥१५४॥

raaj bibheechhan dhai kidhau la(n)k ko raam jee dhaam pavitr karaae ||154||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਗੋਪ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਪੁਰ ਬਿਖੈ ਬੈਠੇ ਹਰਖ ਬਢਾਇ ॥

गोप सभै बृज पुर बिखै बैठे हरख बढाइ ॥

gop sabhai biraj pur bikhai baiThe harakh baddai ||

ਅਬ ਮੈ ਲੀਲਾ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕੀ ਮੁਖ ਤੇ ਕਹੋ ਸੁਨਾਇ ॥੧੫੫॥

अब मै लीला कृसन की मुख ते कहो सुनाइ ॥१५५॥

ab mai leelaa kirasan kee mukh te kaho sunai ||155||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸਾਤ ਬਿਤੀਤ ਭਏ ਜਬ ਸਾਲ ਲਗੇ ਤਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਰਾਵਨ ਗਊਆ ॥

सात बितीत भए जब साल लगे तब कान्रह चरावन गऊआ ॥

saat biteet bhe jab saal lage tab kaanreh charaavan guooaa ||

ਪਾਤ ਬਜਾਵਤ ਔ ਮੁਰਲੀ ਮਿਲਿ ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਸਭੈ ਲਰਕਊਆ ॥

पात बजावत औ मुरली मिलि गावत गीत सभै लरकऊआ ॥

paat bajaavat aau muralee mil gaavat geet sabhai larakuooaa ||

ਗੋਪਨ ਲੈ ਗ੍ਰਿਹ ਆਵਤ ਧਾਵਤ ਤਾੜਤ ਹੈ ਸਭ ਕੋ ਮਨ ਭਊਆ ॥

गोपन लै गृह आवत धावत ताड़त है सभ को मन भऊआ ॥

gopan lai gireh aavat dhaavat taaRat hai sabh ko man bhuooaa ||

ਦੂਧ ਪਿਆਵਤ ਹੈ ਜਸੁਦਾ ਰਿਝ ਕੈ ਹਰਿ ਖੇਲ ਕਰੈ ਜੁ ਨਚਊਆ ॥੧੫੬॥

दूध पिआवत है जसुदा रिझ कै हरि खेल करै जु नचऊआ ॥१५६॥

dhoodh piaavat hai jasudhaa rijh kai har khel karai ju nachuooaa ||156||


ਰੂਖ ਗਏ ਗਿਰ ਕੈ ਧਸਿ ਕੈ ਸੰਗਿ ਦੈਤ ਚਲਾਇ ਦਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਜੋ ॥

रूख गए गिर कै धसि कै संगि दैत चलाइ दयो हरि जी जो ॥

rookh ge gir kai dhas kai sa(n)g dhait chalai dhayo har jee jo ||

ਫੂਲ ਗਿਰੇ ਨਭ ਮੰਡਲ ਤੇ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਕਬਿ ਨੈ ਸੁ ਕਰੀ ਜੋ ॥

फूल गिरे नभ मंडल ते उपमा तिह की कबि नै सु करी जो ॥

fool gire nabh ma(n)ddal te upamaa teh kee kab nai su karee jo ||

ਧਨਿ ਹੀ ਧਨਿ ਭਯੋ ਤਿਹੂੰ ਲੋਕਨਿ ਭੂਮਿ ਕੋ ਭਾਰੁ ਅਬੈ ਘਟ ਕੀਜੋ ॥

धनि ही धनि भयो तिहूँ लोकनि भूमि को भारु अबै घट कीजो ॥

dhan hee dhan bhayo tihoo(n) lokan bhoom ko bhaar abai ghaT keejo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਥਾ ਸੁ ਕਹੀ ਇਸ ਕੀ ਚਿਤ ਦੈ ਕਬਿ ਪੈ ਇਹ ਕੋ ਜੁ ਸੁਨੀਜੋ ॥੧੫੭॥

स्याम कथा सु कही इस की चित दै कबि पै इह को जु सुनीजो ॥१५७॥

sayaam kathaa su kahee is kee chit dhai kab pai ieh ko ju suneejo ||157||


ਕਉਤਕਿ ਦੇਖਿ ਸਭੇ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਲਕ ਡੇਰਨ ਡੇਰਨ ਜਾਇ ਕਹੀ ਹੈ ॥

कउतकि देखि सभे बृज बालक डेरन डेरन जाइ कही है ॥

kautak dhekh sabhe biraj baalak dderan dderan jai kahee hai ||

ਦਾਨੋ ਕੀ ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਜਸੁਦਾ ਗਰਿ ਆਨੰਦ ਕੇ ਮਧਿ ਬਾਤ ਡਹੀ ਹੈ ॥

दानो की बात सुनी जसुदा गरि आनंद के मधि बात डही है ॥

dhaano kee baat sunee jasudhaa gar aana(n)dh ke madh baat ddahee hai ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਸਰਤਾ ਜਿਉ ਕਹੀ ਹੈ ॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि ने मुख ते सरता जिउ कही है ॥

taa chhab kee at hee upamaa kab ne mukh te sarataa jiau kahee hai ||

ਫੈਲਿ ਪਰਿਯੋ ਸੁ ਦਸੋ ਦਿਸ ਕੌ ਗਨਤੀ ਮਨ ਕੀ ਇਹ ਮਧਿ ਬਹੀ ਹੈ ॥੧੫੮॥

फैलि परियो सु दसो दिस कौ गनती मन की इह मधि बही है ॥१५८॥

fail pariyo su dhaso dhis kau ganatee man kee ieh madh bahee hai ||158||


ਅਥ ਬਕੀ ਦੈਤ ਕੋ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ बकी दैत को बध कथनं ॥

ath bakee dhait ko badh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੈਤ ਹਨ੍ਯੋ ਸੁਨ ਕੈ ਨ੍ਰਿਪ ਸ੍ਰਉਨਨਿ ਬਾਤ ਕਹੀ ਬਕ ਕੋ ਸੁਨਿ ਲਈਯੈ ॥

दैत हन्यो सुन कै नृप स्रउननि बात कही बक को सुनि लईयै ॥

dhait hanayo sun kai nirap sraunan baat kahee bak ko sun lieeyai ||

ਹੋਇ ਤਯਾਰ ਅਬੈ ਤੁਮ ਤੋ ਤਜਿ ਕੈ ਮਥੁਰਾ ਬ੍ਰਿਜ ਮੰਡਲਿ ਜਈਯੈ ॥

होइ तयार अबै तुम तो तजि कै मथुरा बृज मंडलि जईयै ॥

hoi tayaar abai tum to taj kai mathuraa biraj ma(n)ddal jieeyai ||

ਕੈ ਤਸਲੀਮ ਚਲਿਯੋ ਤਹ ਕੌ ਚਬਿ ਡਾਰਤ ਹੋ ਮੁਸਲੀਧਰ ਭਈਯੈ ॥

कै तसलीम चलियो तह कौ चबि डारत हो मुसलीधर भईयै ॥

kai tasaleem chaliyo teh kau chab ddaarat ho musaleedhar bhieeyai ||

ਕੰਸ ਕਹੀ ਹਸਿ ਕੈ ਉਹਿ ਕੋ ਸੁਨਿ ਰੇ ਉਹਿ ਕੋ ਛਲ ਸੋ ਹਨਿ ਦਈਯੈ ॥੧੫੯॥

कंस कही हसि कै उहि को सुनि रे उहि को छल सो हनि दईयै ॥१५९॥

ka(n)s kahee has kai uh ko sun re uh ko chhal so han dhieeyai ||159||


ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਬਛਰੇ ਸੰਗ ਲੈ ਕਰਿ ਬੀਚ ਗਏ ਬਨ ਕੈ ਗਿਰਧਾਰੀ ॥

प्रात भए बछरे संग लै करि बीच गए बन कै गिरधारी ॥

praat bhe bachhare sa(n)g lai kar beech ge ban kai giradhaaree ||

ਫੇਰਿ ਗਏ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਪੈ ਬਛਰੇ ਜਲ ਸੁਧ ਅਚੈ ਨਹਿ ਖਾਰੀ ॥

फेरि गए जमुना तटि पै बछरे जल सुध अचै नहि खारी ॥

fer ge jamunaa taT pai bachhare jal sudh achai neh khaaree ||

ਆਇ ਗਯੋ ਉਤ ਦੈਤ ਬਕਾਸੁਰ ਦੇਖਨ ਮਹਿਾਂ ਭਯਾਨਕ ਭਾਰੀ ॥

आइ गयो उत दैत बकासुर देखन महिाँ भयानक भारी ॥

aai gayo ut dhait bakaasur dhekhan mahiaa(n) bhayaanak bhaaree ||

ਲੀਲ ਲਏ ਸਭ ਹ੍ਵੈ ਬਗੁਲਾ ਫਿਰਿ ਛੋਰਿ ਗਏ ਹਰਿ ਜੋਰ ਗਜਾਰੀ ॥੧੬੦॥

लील लए सभ ह्वै बगुला फिरि छोरि गए हरि जोर गजारी ॥१६०॥

leel le sabh havai bagulaa fir chhor ge har jor gajaaree ||160||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਅਗਨਿ ਰੂਪ ਤਬ ਕ੍ਰਿਸਨ ਧਰਿ ਕੰਠਿ ਦਯੋ ਤਿਹ ਜਾਲ ॥

अगनि रूप तब कृसन धरि कंठि दयो तिह जाल ॥

agan roop tab kirasan dhar ka(n)Th dhayo teh jaal ||

ਗਹਿ ਸੁ ਮੁਕਤਿ ਠਾਨਤ ਭਯੋ ਉਗਲ ਡਰਿਯੋ ਤਤਕਾਲ ॥੧੬੧॥

गहि सु मुकति ठानत भयो उगल डरियो ततकाल ॥१६१॥

geh su mukat Thaanat bhayo ugal ddariyo tatakaal ||161||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਚੋਟ ਕਰੀ ਉਨ ਜੋ ਇਹ ਪੈ ਇਨ ਤੇ ਬਲ ਕੈ ਉਹਿ ਚੋਚ ਗਹੀ ਹੈ ॥

चोट करी उन जो इह पै इन ते बल कै उहि चोच गही है ॥

choT karee un jo ieh pai in te bal kai uh choch gahee hai ||

ਚੀਰ ਦਈ ਬਲ ਕੈ ਤਨ ਕੋ ਸਰਤਾ ਇਕ ਸ੍ਰਉਨਤ ਸਾਥ ਬਹੀ ਹੈ ॥

चीर दई बल कै तन को सरता इक स्रउनत साथ बही है ॥

cheer dhiee bal kai tan ko sarataa ik sraunat saath bahee hai ||

ਅਉਰ ਕਹਾ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਸੁ ਕਹੀ ਜੁ ਕਛੁ ਮਨ ਮਧਿ ਲਹੀ ਹੈ ॥

अउर कहा उपमा तिह की सु कही जु कछु मन मधि लही है ॥

aaur kahaa upamaa teh kee su kahee ju kachh man madh lahee hai ||

ਜੋਤਿ ਰਲੀ ਤਿਹ ਮੈ ਇਮ ਜਿਉ ਦਿਨ ਮੈ ਦੁਤਿ ਦੀਪ ਸਮਾਇ ਰਹੀ ਹੈ ॥੧੬੨॥

जोति रली तिह मै इम जिउ दिन मै दुति दीप समाइ रही है ॥१६२॥

jot ralee teh mai im jiau dhin mai dhut dheep samai rahee hai ||162||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਜਬੈ ਦੈਤ ਆਯੋ ਮਹਾ ਮੁਖਿ ਚਵਰਾਯੋ ਜਬ ਜਾਨਿ ਹਰਿ ਪਾਯੋ ਮਨ ਕੀਨੋ ਵਾ ਕੇ ਨਾਸ ਕੋ ॥

जबै दैत आयो महा मुखि चवरायो जब जानि हरि पायो मन कीनो वा के नास को ॥

jabai dhait aayo mahaa mukh chavaraayo jab jaan har paayo man keeno vaa ke naas ko ||

ਸਿੰਧ ਸੁਤਾ ਪਤਿ ਨੈ ਉਖਾਰ ਡਾਰੀ ਚੋਚ ਵਾ ਕੀ ਬਲੀ ਮਾਰ ਡਾਰਿਯੋ ਮਹਾਬਲੀ ਨਾਮ ਜਾਸ ਕੋ ॥

सिंध सुता पति नै उखार डारी चोच वा की बली मार डारियो महाबली नाम जास को ॥

si(n)dh sutaa pat nai ukhaar ddaaree choch vaa kee balee maar ddaariyo mahaabalee naam jaas ko ||

ਭੂਮਿ ਗਿਰ ਪਰਿਯੋ ਹ੍ਵੈ ਦੁਟੂਕ ਮਹਾ ਮੁਖਿ ਵਾ ਕੋ ਤਾਕੀ ਛਬਿ ਕਹਿਬੇ ਕੋ ਭਯੋ ਮਨ ਦਾਸ ਕੋ ॥

भूमि गिर परियो ह्वै दुटूक महा मुखि वा को ताकी छबि कहिबे को भयो मन दास को ॥

bhoom gir pariyo havai dhuTook mahaa mukh vaa ko taakee chhab kahibe ko bhayo man dhaas ko ||

ਖੇਲਬੇ ਕੇ ਕਾਜ ਬਨ ਬੀਚ ਗਏ ਬਾਲਕ ਜਿਉ ਲੈ ਕੈ ਕਰ ਮਧਿ ਚੀਰ ਡਾਰੈ ਲਾਬੇ ਘਾਸ ਕੋ ॥੧੬੩॥

खेलबे के काज बन बीच गए बालक जिउ लै कै कर मधि चीर डारै लाबे घास को ॥१६३॥

khelabe ke kaaj ban beech ge baalak jiau lai kai kar madh cheer ddaarai laabe ghaas ko ||163||


ਇਤਿ ਬਕਾਸੁਰ ਦੈਤ ਬਧਹਿ ॥

इति बकासुर दैत बधहि ॥

eit bakaasur dhait badheh ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੰਗ ਲਏ ਬਛੁਰੇ ਅਰੁ ਗੋਪ ਸੁ ਸਾਝਿ ਪਰੀ ਹਰਿ ਡੇਰਨ ਆਏ ॥

संग लए बछुरे अरु गोप सु साझि परी हरि डेरन आए ॥

sa(n)g le bachhure ar gop su saajh paree har dderan aae ||

ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਮਹਾ ਮਨ ਮੈ ਮਨ ਭਾਵਤ ਗੀਤ ਸਭੋ ਮਿਲਿ ਗਾਏ ॥

होइ प्रसंनि महा मन मै मन भावत गीत सभो मिलि गाए ॥

hoi prasa(n)n mahaa man mai man bhaavat geet sabho mil gaae ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਨਾਏ ॥

ता छबि को जस उच महा कबि नै मुख ते इह भाति बनाए ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab nai mukh te ieh bhaat banaae ||

ਦੇਵਨ ਦੇਵ ਹਨ੍ਯੋ ਧਰ ਪੈ ਛਲਿ ਕੈ ਤਰਿ ਅਉਰਨ ਕੋ ਜੁ ਸੁਨਾਏ ॥੧੬੪॥

देवन देव हन्यो धर पै छलि कै तरि अउरन को जु सुनाए ॥१६४॥

dhevan dhev hanayo dhar pai chhal kai tar aauran ko ju sunaae ||164||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੁ ਬਾਚ ਗੋਪਨ ਪ੍ਰਤਿ ॥

कान्रह जु बाच गोपन प्रति ॥

kaanreh ju baach gopan prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫੇਰਿ ਕਹੀ ਇਹ ਗੋਪਨ ਕਉ ਫੁਨਿ ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਸਭ ਹੀ ਮਿਲਿ ਜਾਵੈ ॥

फेरि कही इह गोपन कउ फुनि प्रात भए सभ ही मिलि जावै ॥

fer kahee ieh gopan kau fun praat bhe sabh hee mil jaavai ||

ਅੰਨੁ ਅਚੌ ਅਪਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮੋ ਜਿਨਿ ਮਧਿ ਮਹਾਬਨ ਕੇ ਮਿਲਿ ਖਾਵੈ ॥

अंनु अचौ अपने गृह मो जिनि मधि महाबन के मिलि खावै ॥

a(n)n achau apane gireh mo jin madh mahaaban ke mil khaavai ||

ਬੀਚ ਤਰੈ ਹਮ ਪੈ ਜਮੁਨਾ ਮਨ ਭਾਵਤ ਗੀਤ ਸਭੈ ਮਿਲਿ ਗਾਵੈ ॥

बीच तरै हम पै जमुना मन भावत गीत सभै मिलि गावै ॥

beech tarai ham pai jamunaa man bhaavat geet sabhai mil gaavai ||

ਨਾਚਹਿਗੇ ਅਰੁ ਕੂਦਹਿਗੇ ਗਹਿ ਕੈ ਕਰ ਮੈ ਮੁਰਲੀ ਸੁ ਬਜਾਵੈ ॥੧੬੫॥

नाचहिगे अरु कूदहिगे गहि कै कर मै मुरली सु बजावै ॥१६५॥

naachahige ar koodhahige geh kai kar mai muralee su bajaavai ||165||


ਮਾਨ ਲਯੋ ਸਭਨੋ ਵਹ ਗੋਪਨ ਪ੍ਰਾਤ ਭਈ ਜਬ ਰੈਨਿ ਬਿਹਾਨੀ ॥

मान लयो सभनो वह गोपन प्रात भई जब रैनि बिहानी ॥

maan layo sabhano veh gopan praat bhiee jab rain bihaanee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਜਾਇ ਉਠਿਓ ਮੁਰਲੀ ਸਭ ਜਾਗ ਉਠੇ ਤਬ ਗਾਇ ਛਿਰਾਨੀ ॥

कान्रह बजाइ उठिओ मुरली सभ जाग उठे तब गाइ छिरानी ॥

kaanreh bajai uThio muralee sabh jaag uThe tab gai chhiraanee ||

ਏਕ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ਦ੍ਰੁਮ ਪਾਤ ਕਿਧੋ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਸਿਆਮ ਪਿਰਾਨੀ ॥

एक बजावत है द्रुम पात किधो उपमा कबि सिआम पिरानी ॥

ek bajaavat hai dhrum paat kidho upamaa kab siaam piraanee ||

ਕਉਤੁਕ ਦੇਖਿ ਮਹਾ ਇਨ ਕੋ ਪੁਰਹੂਤ ਬਧੂ ਸੁਰ ਲੋਕਿ ਖਿਸਾਨੀ ॥੧੬੬॥

कउतुक देखि महा इन को पुरहूत बधू सुर लोकि खिसानी ॥१६६॥

kautuk dhekh mahaa in ko purahoot badhoo sur lok khisaanee ||166||


ਗੇਰੀ ਕੇ ਚਿਤ੍ਰ ਲਗਾਇ ਤਨੈ ਸਿਰ ਪੰਖ ਧਰਿਯੋ ਭਗਵਾਨ ਕਲਾਪੀ ॥

गेरी के चित्र लगाइ तनै सिर पंख धरियो भगवान कलापी ॥

geree ke chitr lagai tanai sir pa(n)kh dhariyo bhagavaan kalaapee ||

ਲਾਇ ਤਨੈ ਹਰਿ ਤਾ ਮੁਰਲੀ ਮੁਖਿ ਲੋਕ ਭਯੋ ਜਿਹ ਕੋ ਸਭ ਜਾਪੀ ॥

लाइ तनै हरि ता मुरली मुखि लोक भयो जिह को सभ जापी ॥

lai tanai har taa muralee mukh lok bhayo jeh ko sabh jaapee ||

ਫੂਲ ਗੁਛੇ ਸਿਰਿ ਖੋਸ ਲਏ ਤਰਿ ਰੂਖ ਖਰੋ ਧਰਨੀ ਜਿਨਿ ਥਾਪੀ ॥

फूल गुछे सिरि खोस लए तरि रूख खरो धरनी जिनि थापी ॥

fool guchhe sir khos le tar rookh kharo dharanee jin thaapee ||

ਖੇਲਿ ਦਿਖਾਵਤ ਹੈ ਜਗ ਕੌ ਅਰੁ ਕੋਊ ਨਹੀ ਹੁਇ ਆਪ ਹੀ ਆਪੀ ॥੧੬੭॥

खेलि दिखावत है जग कौ अरु कोऊ नही हुइ आप ही आपी ॥१६७॥

khel dhikhaavat hai jag kau ar kouoo nahee hui aap hee aapee ||167||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਮੰਤ੍ਰੀਅਨ ਸੋ ॥

कंस बाच मंत्रीअन सो ॥

ka(n)s baach ma(n)treean so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬ ਬਕ ਲੈ ਹਰਿ ਜੀ ਹਨਿਓ ਕੰਸ ਸੁਨ੍ਯੋ ਤਬ ਸ੍ਰਉਨਿ ॥

जब बक लै हरि जी हनिओ कंस सुन्यो तब स्रउनि ॥

jab bak lai har jee hanio ka(n)s sunayo tab sraun ||

ਕਰਿ ਇਕਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰਹਿ ਕਹਿਓ ਤਹਾ ਭੇਜੀਏ ਕਉਨ ॥੧੬੮॥

करि इकत्र मंत्रहि कहिओ तहा भेजीए कउन ॥१६८॥

kar ikatr ma(n)treh kahio tahaa bheje'ee kaun ||168||


ਮੰਤ੍ਰੀ ਬਾਚ ਕੰਸ ਪ੍ਰਤਿ ॥

मंत्री बाच कंस प्रति ॥

ma(n)tree baach ka(n)s prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੈਠਿ ਬਿਚਾਰ ਕਰਿਯੋ ਨ੍ਰਿਪ ਮੰਤ੍ਰਿਨਿ ਦੈਤ ਅਘਾਸੁਰ ਕੋ ਕਹੁ ਜਾਵੈ ॥

बैठि बिचार करियो नृप मंतृनि दैत अघासुर को कहु जावै ॥

baiTh bichaar kariyo nirap ma(n)tiran dhait aghaasur ko kahu jaavai ||

ਮਾਰਗੁ ਰੋਕ ਰਹੈ ਤਿਨ ਕੋ ਧਰਿ ਪੰਨਗ ਰੂਪ ਮਹਾ ਮੁਖ ਬਾਵੈ ॥

मारगु रोक रहै तिन को धरि पंनग रूप महा मुख बावै ॥

maarag rok rahai tin ko dhar pa(n)nag roop mahaa mukh baavai ||

ਆਇ ਪਰੈ ਹਰਿ ਜੀ ਜਬ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰ ਸਨੈ ਚਬਿ ਜਾਵੈ ॥

आइ परै हरि जी जब ही तब ही सभ ग्वार सनै चबि जावै ॥

aai parai har jee jab hee tab hee sabh gavaiaar sanai chab jaavai ||

ਆਇ ਹੈ ਖਾਇ ਤਿਨੈ ਸੁਨਿ ਕੰਸ ਕਿ ਨਾਤੁਰ ਆਪਨੋ ਜੀਉ ਗਵਾਵੈ ॥੧੬੯॥

आइ है खाइ तिनै सुनि कंस कि नातुर आपनो जीउ गवावै ॥१६९॥

aai hai khai tinai sun ka(n)s k naatur aapano jeeau gavaavai ||169||


ਅਥ ਅਘਾਸੁਰ ਦੈਤ ਆਗਮਨ ॥

अथ अघासुर दैत आगमन ॥

ath aghaasur dhait aagaman ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਾਹਿ ਕਹਿਯੋ ਅਘ ਕੰਸਿ ਗਯੋ ਤਹ ਪੰਨਗ ਰੂਪ ਮਹਾ ਧਰਿ ਆਯੋ ॥

जाहि कहियो अघ कंसि गयो तह पंनग रूप महा धरि आयो ॥

jaeh kahiyo agh ka(n)s gayo teh pa(n)nag roop mahaa dhar aayo ||

ਭ੍ਰਾਤ ਹਨ੍ਯੋ ਭਗਨੀ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਧ ਕੇ ਮਨਿ ਕ੍ਰੁਧ ਤਹਾ ਕਹੁ ਧਾਯੋ ॥

भ्रात हन्यो भगनी सुनि कै बध के मनि क्रुध तहा कहु धायो ॥

bhraat hanayo bhaganee sun kai badh ke man krudh tahaa kahu dhaayo ||

ਬੈਠਿ ਰਹਿਓ ਤਿਨ ਕੈ ਮਗ ਮੈ ਹਰਿ ਕੇ ਬਧ ਕਾਜ ਮਹਾ ਮੁਖ ਬਾਯੋ ॥

बैठि रहिओ तिन कै मग मै हरि के बध काज महा मुख बायो ॥

baiTh rahio tin kai mag mai har ke badh kaaj mahaa mukh baayo ||

ਦੇਖਤ ਤਾਹਿੰ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਲਕ ਖੇਲ ਕਹਾ ਮਨ ਮੈ ਲਖਿ ਪਾਯੋ ॥੧੭੦॥

देखत ताहिं सभै बृज बालक खेल कहा मन मै लखि पायो ॥१७०॥

dhekhat taahi(n) sabhai biraj baalak khel kahaa man mai lakh paayo ||170||


ਸਭ ਗੋਪਨ ਬਾਚ ਆਪਸਿ ਮੈ ॥

सभ गोपन बाच आपसि मै ॥

sabh gopan baach aapas mai ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੋਊ ਕਹੈ ਗਿਰਿ ਮਧਿ ਗੁਫਾ ਇਹ ਕੋਊ ਇਕਤ੍ਰ ਕਹੈ ਅੰਧਿਆਰੋ ॥

कोऊ कहै गिरि मधि गुफा इह कोऊ इकत्र कहै अंधिआरो ॥

kouoo kahai gir madh gufaa ieh kouoo ikatr kahai a(n)dhiaaro ||

ਬਾਲਕ ਕੋਊ ਕਹੈ ਇਹ ਰਾਛਸ ਕੋਊ ਕਹੈ ਇਹ ਪੰਨਗ ਭਾਰੋ ॥

बालक कोऊ कहै इह राछस कोऊ कहै इह पंनग भारो ॥

baalak kouoo kahai ieh raachhas kouoo kahai ieh pa(n)nag bhaaro ||

ਜਾਇ ਕਹੈ ਇਕ ਨਾਹਿ ਕਹੈ ਇਕ ਬਿਓਤ ਇਹੀ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨ ਧਾਰੋ ॥

जाइ कहै इक नाहि कहै इक बिओत इही मन मै तिन धारो ॥

jai kahai ik naeh kahai ik biot ihee man mai tin dhaaro ||

ਏਕ ਕਹੈ ਚਲੋ ਭਉ ਨ ਕਛੂ ਸੁ ਬਚਾਵ ਕਰੇ ਘਨਸ੍ਯਾਮ ਹਮਾਰੋ ॥੧੭੧॥

एक कहै चलो भउ न कछू सु बचाव करे घनस्याम हमारो ॥१७१॥

ek kahai chalo bhau na kachhoo su bachaav kare ghanasayaam hamaaro ||171||


ਹੇਰਿ ਹਰੈ ਤਿਹ ਮਧਿ ਧਸੇ ਮੁਖ ਨ ਉਨਿ ਰਾਛਸ ਮੀਚ ਲਯੋ ਹੈ ॥

हेरि हरै तिह मधि धसे मुख न उनि राछस मीच लयो है ॥

her harai teh madh dhase mukh na un raachhas meech layo hai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਜੂ ਆਵੈ ਜਬੈ ਮਮ ਮੀਟ ਹੋ ਬਿਓਤ ਇਹੀ ਮਨ ਮਧਿ ਕਯੋ ਹੈ ॥

स्याम जू आवै जबै मम मीट हो बिओत इही मन मधि कयो है ॥

sayaam joo aavai jabai mam meeT ho biot ihee man madh kayo hai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਗਏ ਤਬ ਮੀਟ ਲਯੋ ਮੁਖ ਦੇਵਨ ਤੋ ਹਹਕਾਰੁ ਭਯੋ ਹੈ ॥

कान्रह गए तब मीट लयो मुख देवन तो हहकारु भयो है ॥

kaanreh ge tab meeT layo mukh dhevan to hahakaar bhayo hai ||

ਜੀਵਨ ਮੂਰਿ ਹੁਤੀ ਹਮਰੀ ਅਬ ਸੋਊ ਅਘਾਸੁਰ ਚਾਬਿ ਗਯੋ ਹੈ ॥੧੭੨॥

जीवन मूरि हुती हमरी अब सोऊ अघासुर चाबि गयो है ॥१७२॥

jeevan moor hutee hamaree ab souoo aghaasur chaab gayo hai ||172||


ਦੇਹਿ ਬਢਾਇ ਬਡੋ ਹਰਿ ਜੀ ਮੁਖ ਰੋਕ ਲਯੋ ਉਹ ਰਾਛਸ ਹੀ ਕੋ ॥

देहि बढाइ बडो हरि जी मुख रोक लयो उह राछस ही को ॥

dheh baddai baddo har jee mukh rok layo uh raachhas hee ko ||

ਰੋਕ ਲਏ ਸਭ ਹੀ ਕਰਿ ਕੈ ਬਲੁ ਸਾਸ ਬਢਿਯੋ ਤਬ ਹੀ ਉਹ ਜੀ ਕੋ ॥

रोक लए सभ ही करि कै बलु सास बढियो तब ही उह जी को ॥

rok le sabh hee kar kai bal saas baddiyo tab hee uh jee ko ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਿਦਾਰ ਦਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਸਿਰ ਪ੍ਰਾਨ ਭਯੋ ਬਿਨੁ ਭ੍ਰਾਤ ਬਕੀ ਕੋ ॥

कान्रह बिदार दयो तिह को सिर प्रान भयो बिनु भ्रात बकी को ॥

kaanreh bidhaar dhayo teh ko sir praan bhayo bin bhraat bakee ko ||

ਗੂਦ ਪਰਿਓ ਤਿਹ ਕੋ ਇਮ ਜਿਉ ਸਵਦਾਗਰ ਕੋ ਟੂਟਿ ਗਯੋ ਮਟੁ ਘੀ ਕੋ ॥੧੭੩॥

गूद परिओ तिह को इम जिउ सवदागर को टूटि गयो मटु घी को ॥१७३॥

goodh pario teh ko im jiau savadhaagar ko TooT gayo maT ghee ko ||173||


ਰਾਹ ਭਯੋ ਤਬ ਹੀ ਨਿਕਸੇ ਹਰਿ ਗਵਾਰ ਸਭੈ ਨਿਕਸੇ ਤਿਹ ਨਾਰੇ ॥

राह भयो तब ही निकसे हरि गवार सभै निकसे तिह नारे ॥

raeh bhayo tab hee nikase har gavaar sabhai nikase teh naare ||

ਦੇਵ ਤਬੈ ਹਰਖੇ ਮਨ ਮੈ ਪਿਖਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਚਿਓ ਹਰਿ ਪੰਨਗ ਭਾਰੇ ॥

देव तबै हरखे मन मै पिखि कान्रह बचिओ हरि पंनग भारे ॥

dhev tabai harakhe man mai pikh kaanreh bachio har pa(n)nag bhaare ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਸਬੈ ਗਣ ਗੰਧ੍ਰਬ ਬ੍ਰਹਮ ਸਭੋ ਮੁਖ ਬੇਦ ਉਚਾਰੇ ॥

गावत गीत सबै गण गंध्रब ब्रहम सभो मुख बेद उचारे ॥

gaavat geet sabai gan ga(n)dhrab braham sabho mukh bedh uchaare ||

ਆਨੰਦ ਸ੍ਯਾਮ ਭਯੋ ਮਨ ਮੈ ਨਗ ਰਛਕ ਜੀਤਿ ਚਲੇ ਘਰਿ ਭਾਰੇ ॥੧੭੪॥

आनंद स्याम भयो मन मै नग रछक जीति चले घरि भारे ॥१७४॥

aana(n)dh sayaam bhayo man mai nag rachhak jeet chale ghar bhaare ||174||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਢਿਯੋ ਸਿਰਿ ਕੇ ਮਗਿ ਹ੍ਵੈ ਨ ਕਢਿਯੋ ਮੁਖ ਕੇ ਮਗੁ ਜੋਰ ਅੜੀ ਕੇ ॥

कान्रह कढियो सिरि के मगि ह्वै न कढियो मुख के मगु जोर अड़ी के ॥

kaanreh kaddiyo sir ke mag havai na kaddiyo mukh ke mag jor aRee ke ||

ਸ੍ਰਉਨ ਭਰਿਯੋ ਇਮ ਠਾਢਿ ਭਯੋ ਪਹਰੇ ਪਟ ਜਿਉ ਮੁਨਿ ਸ੍ਰਿੰਗਮੜੀ ਕੇ ॥

स्रउन भरियो इम ठाढि भयो पहरे पट जिउ मुनि सृंगमड़ी के ॥

sraun bhariyo im Thaadd bhayo pahare paT jiau mun sira(n)gamaRee ke ||

ਏਕ ਕਹੀ ਇਹ ਕੀ ਉਪਮਾ ਫੁਨਿ ਅਉ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮਧਿ ਬੜੀ ਕੇ ॥

एक कही इह की उपमा फुनि अउ कबि के मन मधि बड़ी के ॥

ek kahee ieh kee upamaa fun aau kab ke man madh baRee ke ||

ਢੋਵਤ ਈਟ ਗੁਆਰ ਸਨੈ ਹਰਿ ਦਉਰਿ ਚੜੇ ਜਨੁ ਸੀਸ ਗੜੀ ਕੇ ॥੧੭੫॥

ढोवत ईट गुआर सनै हरि दउरि चड़े जनु सीस गड़ी के ॥१७५॥

ddovat ieeT guaar sanai har dhaur chaRe jan sees gaRee ke ||175||


ਇਤਿ ਅਘਾਸੁਰ ਦੈਤ ਬਧਹਿ ॥

इति अघासुर दैत बधहि ॥

eit aghaasur dhait badheh ||

ਅਥ ਬਛਰੇ ਗਵਾਰ ਬ੍ਰਹਮਾ ਚੁਰੈਬੋ ਕਥਨੰ ॥

अथ बछरे गवार ब्रहमा चुरैबो कथनं ॥

ath bachhare gavaar brahamaa churaibo kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਾਛਸ ਮਾਰਿ ਗਏ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਜਾਇ ਸਭੋ ਮਿਲਿ ਅੰਨ ਮੰਗਾਯੋ ॥

राछस मारि गए जमुना तटि जाइ सभो मिलि अंन मंगायो ॥

raachhas maar ge jamunaa taT jai sabho mil a(n)n ma(n)gaayo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਪ੍ਰਵਾਰ ਪਰਿਓ ਮੁਰਲੀ ਕਟਿ ਖੋਸ ਲਈ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

कान्रह प्रवार परिओ मुरली कटि खोस लई मन मै सुख पायो ॥

kaanreh pravaar pario muralee kaT khos liee man mai sukh paayo ||

ਕੈ ਛਮਕਾ ਬਰਖੈ ਛਟਕਾ ਕਰ ਬਾਮ ਹੂੰ ਸੋ ਸਭ ਹੂੰ ਵਹ ਖਾਯੋ ॥

कै छमका बरखै छटका कर बाम हूँ सो सभ हूँ वह खायो ॥

kai chhamakaa barakhai chhaTakaa kar baam hoo(n) so sabh hoo(n) veh khaayo ||

ਮੀਠ ਲਗੇ ਤਿਹ ਕੀ ਉਪਮਾ ਕਰ ਕੈ ਗਤਿ ਕੈ ਹਰਿ ਕੇ ਮੁਖ ਪਾਯੋ ॥੧੭੬॥

मीठ लगे तिह की उपमा कर कै गति कै हरि के मुख पायो ॥१७६॥

meeTh lage teh kee upamaa kar kai gat kai har ke mukh paayo ||176||


ਕੋਊ ਡਰੈ ਹਰਿ ਕੇ ਮੁਖਿ ਗ੍ਰਾਸ ਠਗਾਇ ਕੋਊ ਅਪਣੇ ਮੁਖਿ ਡਾਰੇ ॥

कोऊ डरै हरि के मुखि ग्रास ठगाइ कोऊ अपणे मुखि डारे ॥

kouoo ddarai har ke mukh graas Thagai kouoo apane mukh ddaare ||

ਹੋਇ ਗਏ ਤਨਮੈ ਕਛੁ ਨਾਮਕ ਖੇਲ ਕਰੋ ਸੰਗਿ ਕਾਨ੍ਰਹਰ ਕਾਰੇ ॥

होइ गए तनमै कछु नामक खेल करो संगि कान्रहर कारे ॥

hoi ge tanamai kachh naamak khel karo sa(n)g kaanrahar kaare ||

ਤਾ ਛਿਨ ਲੈ ਬਛਰੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਇਕਠੇ ਕਰਿ ਕੈ ਸੁ ਕੁਟੀ ਮਧਿ ਡਾਰੇ ॥

ता छिन लै बछरे ब्रहमा इकठे करि कै सु कुटी मधि डारे ॥

taa chhin lai bachhare brahamaa ikaThe kar kai su kuTee madh ddaare ||

ਢੂੰਢਿ ਫਿਰੇ ਨ ਲਹੇ ਸੁ ਕਰੈ ਬਛਰੇ ਅਰੁ ਗ੍ਵਾਰ ਨਏ ਕਰਤਾਰੇ ॥੧੭੭॥

ढूँढि फिरे न लहे सु करै बछरे अरु ग्वार नए करतारे ॥१७७॥

ddoo(n)dd fire na lahe su karai bachhare ar gavaiaar ne karataare ||177||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬੈ ਹਰੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਇਹੈ ਤਬ ਹਰਿ ਜੀ ਤਤਕਾਲੁ ॥

जबै हरे ब्रहमा इहै तब हरि जी ततकालु ॥

jabai hare brahamaa ihai tab har jee tatakaal ||

ਕਿਧੋ ਬਨਾਏ ਛਿਨਕੁ ਮੈ ਬਛਰੇ ਸੰਗਿ ਗਵਾਲ ॥੧੭੮॥

किधो बनाए छिनकु मै बछरे संगि गवाल ॥१७८॥

kidho banaae chhinak mai bachhare sa(n)g gavaal ||178||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰੂਪ ਉਹੀ ਪਟ ਕੇ ਰੰਗ ਹੈ ਵਹ ਰੰਗ ਵਹੈ ਸਬ ਹੀ ਬਛਰਾ ਕੋ ॥

रूप उही पट के रंग है वह रंग वहै सब ही बछरा को ॥

roop uhee paT ke ra(n)g hai veh ra(n)g vahai sab hee bachharaa ko ||

ਸਾਝਿ ਪਰੀ ਸੋ ਗਏ ਹਰਿ ਜੀ ਗ੍ਰਹਿ ਕੋਈ ਲਖੈ ਇਤਨੋ ਬਲ ਕਾ ਕੋ ॥

साझि परी सो गए हरि जी ग्रहि कोई लखै इतनो बल का को ॥

saajh paree so ge har jee greh koiee lakhai itano bal kaa ko ||

ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਸੁ ਲਖੇ ਨ ਲਖੇ ਇਕ ਆਦਿ ਕੋ ਨਾਮੁ ਮਨੀ ਮਨ ਜਾ ਕੋ ॥

मात पिता सु लखे न लखे इक आदि को नामु मनी मन जा को ॥

maat pitaa su lakhe na lakhe ik aadh ko naam manee man jaa ko ||

ਬਾਤ ਇਹੀ ਸਮਝੀ ਮਨ ਮੈ ਇਹ ਹੈ ਅਬ ਖੇਲ ਸਮਾਪਤਿ ਵਾ ਕੋ ॥੧੭੯॥

बात इही समझी मन मै इह है अब खेल समापति वा को ॥१७९॥

baat ihee samajhee man mai ieh hai ab khel samaapat vaa ko ||179||


ਚੂਮ ਲਯੋ ਜਸੁਦਾ ਸੁਤ ਕੋ ਸਿਰ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਜਾਇ ਉਠੇ ਮੁਰਲੀ ਤੋ ॥

चूम लयो जसुदा सुत को सिर कान्रह बजाइ उठे मुरली तो ॥

choom layo jasudhaa sut ko sir kaanreh bajai uThe muralee to ||

ਬਾਲ ਲਖੇ ਅਪੁਨੋ ਨ ਕਿਨੀ ਜਨ ਗੋ ਦਵਰੀ ਤਿਹ ਸੋ ਹਿਤ ਕੀਤੋ ॥

बाल लखे अपुनो न किनी जन गो दवरी तिह सो हित कीतो ॥

baal lakhe apuno na kinee jan go dhavaree teh so hit keeto ||

ਹੋਤ ਕੁਲਾਹਲ ਪੈ ਬ੍ਰਿਜ ਮੈ ਨਹਿ ਹੋਤ ਇਤੇ ਸੁ ਕਹੂੰ ਕਿਮ ਬੀਤੋ ॥

होत कुलाहल पै बृज मै नहि होत इते सु कहूँ किम बीतो ॥

hot kulaahal pai biraj mai neh hot ite su kahoo(n) kim beeto ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਸਨੇ ਹਰਿ ਗ੍ਵਾਰਨ ਲੇਹ ਬਲਾਇ ਬਧੁ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀਤੋ ॥੧੮੦॥

गावत गीत सने हरि ग्वारन लेह बलाइ बधु बृज कीतो ॥१८०॥

gaavat geet sane har gavaiaaran leh balai badh biraj keeto ||180||


ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਹਰਿ ਜੀ ਉਠ ਕੈ ਬਨ ਬੀਚ ਗਏ ਸੰਗ ਲੈ ਕਰ ਬਛੇ ॥

प्रात भए हरि जी उठ कै बन बीच गए संग लै कर बछे ॥

praat bhe har jee uTh kai ban beech ge sa(n)g lai kar bachhe ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਫਿਰਾਵਤ ਹੈ ਛਟਕਾ ਗਹਿ ਗਵਾਰ ਸਭੈ ਕਰਿ ਹਛੇ ॥

गावत गीत फिरावत है छटका गहि गवार सभै करि हछे ॥

gaavat geet firaavat hai chhaTakaa geh gavaar sabhai kar hachhe ||

ਖੇਲਤ ਖੇਲਤ ਨੰਦ ਕੋ ਨੰਦ ਸੁ ਆਪ ਹੀ ਤੇ ਗਿਰਿ ਕੋ ਉਠਿ ਗਛੇ ॥

खेलत खेलत नंद को नंद सु आप ही ते गिरि को उठि गछे ॥

khelat khelat na(n)dh ko na(n)dh su aap hee te gir ko uTh gachhe ||

ਕੋਊ ਕਹੈ ਇਹ ਖੇਦ ਗਹੈ ਹਮ ਕੋਊ ਕਹੈ ਇਹ ਨਾਹਨਿ ਨਛੇ ॥੧੮੧॥

कोऊ कहै इह खेद गहै हम कोऊ कहै इह नाहनि नछे ॥१८१॥

kouoo kahai ieh khedh gahai ham kouoo kahai ieh naahan nachhe ||181||


ਹੋਇ ਇਕਤ੍ਰ ਸਨੈ ਹਰਿ ਗ੍ਵਾਰਨ ਲੈ ਅਪੁਨੇ ਸੰਗਿ ਪੈ ਸਭ ਗਾਈ ॥

होइ इकत्र सनै हरि ग्वारन लै अपुने संगि पै सभ गाई ॥

hoi ikatr sanai har gavaiaaran lai apune sa(n)g pai sabh gaiee ||

ਦੇਖਿ ਤਿਨੈ ਗਿਰਿ ਕੇ ਸਿਰ ਤੇ ਮਨ ਮੋਹਿ ਬਢਾਇ ਸਭੈ ਉਠਿ ਧਾਈ ॥

देखि तिनै गिरि के सिर ते मन मोहि बढाइ सभै उठि धाई ॥

dhekh tinai gir ke sir te man moh baddai sabhai uTh dhaiee ||

ਗੋਪ ਗਏ ਤਿਨ ਪੈ ਚਲ ਕੈ ਜਬ ਜਾਤ ਪਿਖੀ ਤਿਨ ਨੈਨਨ ਮਾਈ ॥

गोप गए तिन पै चल कै जब जात पिखी तिन नैनन माई ॥

gop ge tin pai chal kai jab jaat pikhee tin nainan maiee ||

ਰੋਹ ਭਰੇ ਸੁ ਖਰੇ ਨ ਟਰੇ ਸੁਤ ਨੰਦਹਿ ਕੇ ਕਹੁ ਬਾਤ ਸੁਨਾਈ ॥੧੮੨॥

रोह भरे सु खरे न टरे सुत नंदहि के कहु बात सुनाई ॥१८२॥

roh bhare su khare na Tare sut na(n)dheh ke kahu baat sunaiee ||182||


ਨੰਦ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਪ੍ਰਤਿ ॥

नंद बाच कान्रह प्रति ॥

na(n)dh baach kaanreh prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਿਉ ਸੁਤ ਗਊਅਨ ਲਿਆਇ ਇਹਾ ਇਹ ਤੈ ਹਮਰੋ ਸਭ ਹੀ ਦਧਿ ਖੋਯੋ ॥

किउ सुत गऊअन लिआइ इहा इह तै हमरो सभ ही दधि खोयो ॥

kiau sut guooan liaai ihaa ieh tai hamaro sabh hee dhadh khoyo ||

ਚੂੰਘ ਗਏ ਬਛਰਾ ਇਨ ਕੇ ਇਹ ਤੇ ਹਮਰੇ ਮਨ ਮੈ ਭ੍ਰਮ ਹੋਯੋ ॥

चूँघ गए बछरा इन के इह ते हमरे मन मै भ्रम होयो ॥

choo(n)gh ge bachharaa in ke ieh te hamare man mai bhram hoyo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਫਰੇਬ ਕਰਿਯੋ ਤਿਨ ਸੋ ਮਨ ਮੋਹ ਮਹਾ ਤਿਨ ਕੇ ਜੁ ਕਰੋਯੋ ॥

कान्रह फरेब करियो तिन सो मन मोह महा तिन के जु करोयो ॥

kaanreh fareb kariyo tin so man moh mahaa tin ke ju karoyo ||

ਬਾਰਿ ਭਯੋ ਤਤ ਕ੍ਰੋਧ ਮਨੋ ਤਿਹ ਮੈ ਜਲ ਸੀਤਲ ਮੋਹ ਸਮੋਯੋ ॥੧੮੩॥

बारि भयो तत क्रोध मनो तिह मै जल सीतल मोह समोयो ॥१८३॥

baar bhayo tat krodh mano teh mai jal seetal moh samoyo ||183||


ਮੋਹਿ ਬਢਿਯੋ ਤਿਨ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਨਹਿ ਛੋਡਿ ਸਕੈ ਅਪਨੇ ਸੁਤ ਕੋਊ ॥

मोहि बढियो तिन के मन मै नहि छोडि सकै अपने सुत कोऊ ॥

moh baddiyo tin ke man mai neh chhodd sakai apane sut kouoo ||

ਗਊਅਨ ਛੋਡਿ ਸਕੈ ਬਛਰੇ ਇਤਨੋ ਮਨ ਮੋਹ ਕਰੈ ਤਬ ਸੋਊ ॥

गऊअन छोडि सकै बछरे इतनो मन मोह करै तब सोऊ ॥

guooan chhodd sakai bachhare itano man moh karai tab souoo ||

ਪੈ ਗਰੂਏ ਗ੍ਰਿਹਿ ਗੇ ਸੰਗਿ ਲੈ ਤਿਨ ਚਉਕਿ ਹਲੀ ਇਹਿ ਬਾਤ ਲਖੋਊ ॥

पै गरूए गृहि गे संगि लै तिन चउकि हली इहि बात लखोऊ ॥

pai garooe gireh ge sa(n)g lai tin chauk halee ieh baat lakhouoo ||

ਦੇਵ ਡਰੀ ਮਮਤਾ ਇਨ ਪੈ ਕਿ ਚਰਿਤ੍ਰ ਕਿਧੋ ਹਰਿ ਕੋ ਇਹ ਹੋਊ ॥੧੮੪॥

देव डरी ममता इन पै कि चरित्र किधो हरि को इह होऊ ॥१८४॥

dhev ddaree mamataa in pai k charitr kidho har ko ieh houoo ||184||


ਸਾਲ ਬਿਤੀਤ ਭਇਓ ਜਬ ਹੀ ਹਰਿ ਜੀ ਬਨ ਬੀਚ ਗਏ ਦਿਨ ਕਉਨੈ ॥

साल बितीत भइओ जब ही हरि जी बन बीच गए दिन कउनै ॥

saal biteet bhio jab hee har jee ban beech ge dhin kaunai ||

ਦੇਖਨ ਕਉਤਕ ਕੌ ਚਤੁਰਾਨਨ ਸੀਘ੍ਰ ਭਯੋ ਤਿਹ ਕੋ ਉਠਿ ਗਉਨੈ ॥

देखन कउतक कौ चतुरानन सीघ्र भयो तिह को उठि गउनै ॥

dhekhan kautak kau chaturaanan seeghr bhayo teh ko uTh gaunai ||

ਗ੍ਵਾਰ ਵਹੈ ਬਛੁਰੇ ਸੰਗਿ ਹੈ ਵਹ ਚਕ੍ਰਿਤ ਜਾਇ ਗਇਓ ਹੁਇ ਤਉਨੈ ॥

ग्वार वहै बछुरे संगि है वह चकृत जाइ गइओ हुइ तउनै ॥

gavaiaar vahai bachhure sa(n)g hai veh chakirat jai gio hui taunai ||

ਦੇਖਿ ਤਿਨੈ ਡਰ ਕੈ ਪਰਿ ਪਾਇਨ ਆਇ ਕੈ ਆਨੰਦ ਦੁੰਦਭਿ ਛਉਨੈ ॥੧੮੫॥

देखि तिनै डर कै परि पाइन आइ कै आनंद दुँदभि छउनै ॥१८५॥

dhekh tinai ddar kai par pain aai kai aana(n)dh dhu(n)dhabh chhaunai ||185||


ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਪ੍ਰਤਿ ॥

ब्रहमा बाच कान्रह जू प्रति ॥

brahamaa baach kaanreh joo prat ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹੇ ਕਰੁਣਾ ਨਿਧਿ ਹੇ ਜਗ ਕੇ ਪਤਿ ਅਚੁਤ ਹੇ ਬਿਨਤੀ ਸੁਨ ਲੀਜੈ ॥

हे करुणा निधि हे जग के पति अचुत हे बिनती सुन लीजै ॥

he karunaa nidh he jag ke pat achut he binatee sun leejai ||

ਚੂਕ ਭਈ ਹਮ ਤੇ ਤੁਮਰੀ ਤਿਹ ਤੇ ਅਪਰਾਧ ਛਿਮਾਪਨ ਕੀਜੈ ॥

चूक भई हम ते तुमरी तिह ते अपराध छिमापन कीजै ॥

chook bhiee ham te tumaree teh te aparaadh chhimaapan keejai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਇਹ ਬਾਤ ਛਿਮੀ ਹਮ ਨ ਬਿਖ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਛਾਡਿ ਕੈ ਪੀਜੈ ॥

कान्रह कही इह बात छिमी हम न बिख अंमृत छाडि कै पीजै ॥

kaanreh kahee ieh baat chhimee ham na bikh a(n)mirat chhaadd kai peejai ||

ਲਿਆਉ ਕਹਿਓਨ ਲਿਆਇ ਹੋਂ ਜਾਹ ਸਿਤਾਬ ਅਈਯੋ ਨਹੀ ਢੀਲ ਕਰੀਜੈ ॥੧੮੬॥

लिआउ कहिओन लिआइ हों जाह सिताब अईयो नही ढील करीजै ॥१८६॥

liaau kahion liaai ho(n) jaeh sitaab ieeyo nahee ddeel kareejai ||186||


ਲੈ ਬਛਰੈ ਬ੍ਰਹਮਾ ਤਬ ਹੀ ਛਿਨ ਮੈ ਚਲ ਕੈ ਹਰਿ ਜੀ ਪਹਿ ਆਯੋ ॥

लै बछरै ब्रहमा तब ही छिन मै चल कै हरि जी पहि आयो ॥

lai bachharai brahamaa tab hee chhin mai chal kai har jee peh aayo ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਮਿਲੇ ਜਬ ਹੀ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰ ਤਬੈ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨ ਹੰਰ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥

कान्रह मिले जब ही सभ ग्वार तबै मन मै तिन हंर सुख पायो ॥

kaanreh mile jab hee sabh gavaiaar tabai man mai tin ha(n)r sukh paayo ||

ਲੋਪ ਭਯੋ ਸੰਗਿ ਕੇ ਬਛਰੇ ਤਬ ਭੇਦ ਕਿਨੀ ਲਖਿ ਜਾਨ ਨ ਪਾਯੋ ॥

लोप भयो संगि के बछरे तब भेद किनी लखि जान न पायो ॥

lop bhayo sa(n)g ke bachhare tab bhedh kinee lakh jaan na paayo ||

ਬਾਲ ਬੁਝੀ ਨ ਕਿਨੀ ਉਠਿ ਬੋਲਿ ਸੁ ਲਿਆਉ ਵਹੈ ਹਮ ਜੋ ਮਿਲਿ ਖਾਯੋ ॥੧੮੭॥

बाल बुझी न किनी उठि बोलि सु लिआउ वहै हम जो मिलि खायो ॥१८७॥

baal bujhee na kinee uTh bol su liaau vahai ham jo mil khaayo ||187||


ਹੋਇ ਇਕਤ੍ਰ ਕਿਧੋ ਬ੍ਰਿਜ ਬਾਲਕ ਅੰਨ ਅਚਿਯੋ ਸਭਨੋ ਜੁ ਪੁਰਾਨੋ ॥

होइ इकत्र किधो बृज बालक अंन अचियो सभनो जु पुरानो ॥

hoi ikatr kidho biraj baalak a(n)n achiyo sabhano ju puraano ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹੀ ਹਮ ਨਾਗ ਹਨ੍ਯੋ ਹਰਿ ਕੋ ਇਹ ਖੇਲ ਕਿਨੀ ਨਹਿ ਜਾਨੋ ॥

कान्रह कही हम नाग हन्यो हरि को इह खेल किनी नहि जानो ॥

kaanreh kahee ham naag hanayo har ko ieh khel kinee neh jaano ||

ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨ ਮਹਾ ਮਨ ਮੈ ਗਰੜਾਧੁਜ ਕੋ ਕਰਿ ਰਛਕ ਮਾਨੋ ॥

होइ प्रसंन महा मन मै गरड़ाधुज को करि रछक मानो ॥

hoi prasa(n)n mahaa man mai garaRaadhuj ko kar rachhak maano ||

ਦਾਨ ਦਯੋ ਹਮ ਕੋ ਜੀਅ ਕੋ ਇਹ ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਪਹਿ ਜਾਇ ਬਖਾਨੋ ॥੧੮੮॥

दान दयो हम को जीअ को इह मात पिता पहि जाइ बखानो ॥१८८॥

dhaan dhayo ham ko jeea ko ieh maat pitaa peh jai bakhaano ||188||


ਇਤਿ ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਛਰੇ ਆਨ ਪਾਇ ਪਰਾ ॥

इति ब्रहमा बछरे आन पाइ परा ॥

eit brahamaa bachhare aan pai paraa ||

ਅਥ ਧੇਨਕ ਦੈਤ ਬਧ ਕਥਨੰ ॥

अथ धेनक दैत बध कथनं ॥

ath dhenak dhait badh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਾਰਹ ਸਾਲ ਬਿਤੀਤ ਭਏ ਤੁ ਲਗੇ ਤਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਰਾਵਨ ਗਾਈ ॥

बारह साल बितीत भए तु लगे तब कान्रह चरावन गाई ॥

baareh saal biteet bhe ta lage tab kaanreh charaavan gaiee ||

ਸੁੰਦਰ ਰੂਪ ਬਨਿਯੋ ਇਹ ਕੋ ਕਹ ਕੈ ਇਹ ਤਾਹਿ ਸਰਾਹਤ ਦਾਈ ॥

सुँदर रूप बनियो इह को कह कै इह ताहि सराहत दाई ॥

su(n)dhar roop baniyo ieh ko keh kai ieh taeh saraahat dhaiee ||

ਗ੍ਵਾਰ ਸਨੈ ਬਨ ਬੀਚ ਫਿਰੈ ਕਬਿ ਨੈ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਲਖਿ ਪਾਈ ॥

ग्वार सनै बन बीच फिरै कबि नै उपमा तिह की लखि पाई ॥

gavaiaar sanai ban beech firai kab nai upamaa teh kee lakh paiee ||

ਕੰਸਹਿ ਕੇ ਬਧ ਕੇ ਹਿਤ ਕੋ ਜਨੁ ਬਾਲ ਚਮੂੰ ਭਗਵਾਨਿ ਬਨਾਈ ॥੧੮੯॥

कंसहि के बध के हित को जनु बाल चमूँ भगवानि बनाई ॥१८९॥

ka(n)seh ke badh ke hit ko jan baal chamoo(n) bhagavaan banaiee ||189||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕਮਲ ਸੋ ਆਨਨ ਕੁਰੰਗ ਤਾ ਕੇ ਬਾਕੇ ਨੈਨ ਕਟਿ ਸਮ ਕੇਹਰਿ ਮ੍ਰਿਨਾਲ ਬਾਹੈ ਐਨ ਹੈ ॥

कमल सो आनन कुरंग ता के बाके नैन कटि सम केहरि मृनाल बाहै ऐन है ॥

kamal so aanan kura(n)g taa ke baake nain kaT sam kehar miranaal baahai aain hai ||

ਕੋਕਿਲ ਸੋ ਕੰਠ ਕੀਰ ਨਾਸਕਾ ਧਨੁਖ ਭਉ ਹੈ ਬਾਨੀ ਸੁਰ ਸਰ ਜਾਹਿ ਲਾਗੈ ਨਹਿ ਚੈਨ ਹੈ ॥

कोकिल सो कंठ कीर नासका धनुख भउ है बानी सुर सर जाहि लागै नहि चैन है ॥

kokil so ka(n)Th keer naasakaa dhanukh bhau hai baanee sur sar jaeh laagai neh chain hai ||

ਤ੍ਰੀਅਨਿ ਕੋ ਮੋਹਤਿ ਫਿਰਤਿ ਗ੍ਰਾਮ ਆਸ ਪਾਸ ਬ੍ਰਿਹਨ ਕੇ ਦਾਹਬੇ ਕੋ ਜੈਸੇ ਪਤਿ ਰੈਨ ਹੈ ॥

त्रीअनि को मोहति फिरति ग्राम आस पास बृहन के दाहबे को जैसे पति रैन है ॥

treean ko mohat firat graam aas paas birahan ke dhaahabe ko jaise pat rain hai ||

ਪੁਨਿ ਮੰਦਿ ਮਤਿ ਲੋਕ ਕਛੁ ਜਾਨਤ ਨ ਭੇਦ ਯਾ ਕੋ ਏਤੇ ਪਰ ਕਹੈ ਚਰਵਾਰੋ ਸ੍ਯਾਮ ਧੇਨ ਹੈ ॥੧੯੦॥

पुनि मंदि मति लोक कछु जानत न भेद या को एते पर कहै चरवारो स्याम धेन है ॥१९०॥

pun ma(n)dh mat lok kachh jaanat na bhedh yaa ko ete par kahai charavaaro sayaam dhen hai ||190||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਸੋ ॥

गोपी बाच कान्रह जू सो ॥

gopee baach kaanreh joo so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹੋਇ ਇਕਤ੍ਰ ਬਧੂ ਬ੍ਰਿਜ ਕੀ ਸਭ ਬਾਤ ਕਹੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਸ੍ਯਾਮੈ ॥

होइ इकत्र बधू बृज की सभ बात कहै मुख ते इह स्यामै ॥

hoi ikatr badhoo biraj kee sabh baat kahai mukh te ieh sayaamai ||

ਆਨਨ ਚੰਦ ਬਨੇ ਮ੍ਰਿਗ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਰਾਤਿ ਦਿਨਾ ਬਸਤੋ ਸੁ ਹਿਯਾ ਮੈ ॥

आनन चंद बने मृग से दृग राति दिना बसतो सु हिया मै ॥

aanan cha(n)dh bane mirag se dhirag raat dhinaa basato su hiyaa mai ||

ਬਾਤ ਨਹੀ ਅਰਿ ਪੈ ਇਹ ਕੀ ਬਿਰਤਾਤ ਲਖਿਯੋ ਹਮ ਜਾਨ ਜੀਯਾ ਮੈ ॥

बात नही अरि पै इह की बिरतात लखियो हम जान जीया मै ॥

baat nahee ar pai ieh kee birataat lakhiyo ham jaan jeeyaa mai ||

ਕੈ ਡਰਪੈ ਹਰ ਕੇ ਹਰਿ ਕੋ ਛਪਿ ਮੈਨ ਰਹਿਯੋ ਅਬ ਲਉ ਤਨ ਯਾ ਮੈ ॥੧੯੧॥

कै डरपै हर के हरि को छपि मैन रहियो अब लउ तन या मै ॥१९१॥

kai ddarapai har ke har ko chhap main rahiyo ab lau tan yaa mai ||191||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਜੂ ਬਾਚ ॥

कान्रह जू बाच ॥

kaanreh joo baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੰਗ ਹਲੀ ਹਰਿ ਜੀ ਸਭ ਗ੍ਵਾਰ ਕਹੀ ਸਭ ਤੀਰ ਸੁਨੋ ਇਹ ਭਈਯਾ ॥

संग हली हरि जी सभ ग्वार कही सभ तीर सुनो इह भईया ॥

sa(n)g halee har jee sabh gavaiaar kahee sabh teer suno ieh bhieeyaa ||

ਰੂਪ ਧਰੋ ਅਵਤਾਰਨ ਕੋ ਤੁਮ ਬਾਤ ਇਹੈ ਗਤਿ ਕੀ ਸੁਰ ਗਈਯਾ ॥

रूप धरो अवतारन को तुम बात इहै गति की सुर गईया ॥

roop dharo avataaran ko tum baat ihai gat kee sur gieeyaa ||

ਨ ਹਮਰੋ ਅਬ ਕੋ ਇਹ ਰੂਪ ਸਬੈ ਜਗ ਮੈ ਕਿਨਹੂੰ ਲਖ ਪਈਯਾ ॥

न हमरो अब को इह रूप सबै जग मै किनहूँ लख पईया ॥

n hamaro ab ko ieh roop sabai jag mai kinahoo(n) lakh pieeyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹਿਯੋ ਹਮ ਖੇਲ ਕਰੈ ਜੋਊ ਹੋਇ ਭਲੋ ਮਨ ਕੋ ਪਰਚਈਯਾ ॥੧੯੨॥

कान्रह कहियो हम खेल करै जोऊ होइ भलो मन को परचईया ॥१९२॥

kaanreh kahiyo ham khel karai jouoo hoi bhalo man ko parachieeyaa ||192||


ਤਾਲ ਭਲੇ ਤਿਹ ਠਉਰ ਬਿਖੈ ਸਭ ਹੀ ਜਨ ਕੇ ਮਨ ਕੇ ਸੁਖਦਾਈ ॥

ताल भले तिह ठउर बिखै सभ ही जन के मन के सुखदाई ॥

taal bhale teh Thaur bikhai sabh hee jan ke man ke sukhadhaiee ||

ਸੇਤ ਸਰੋਵਰ ਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਤਿਨ ਮੈ ਸਰਮਾ ਸਸਿ ਸੀ ਦਮਕਾਈ ॥

सेत सरोवर है अति ही तिन मै सरमा ससि सी दमकाई ॥

set sarovar hai at hee tin mai saramaa sas see dhamakaiee ||

ਮਧਿ ਬਰੇਤਨ ਕੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਈ ॥

मधि बरेतन की उपमा कबि नै मुख ते इम भाखि सुनाई ॥

madh baretan kee upamaa kab nai mukh te im bhaakh sunaiee ||

ਲੋਚਨ ਸਉ ਕਰਿ ਕੈ ਬਸੁਧਾ ਹਰਿ ਕੇ ਇਹ ਕਉਤਕ ਦੇਖਨਿ ਆਈ ॥੧੯੩॥

लोचन सउ करि कै बसुधा हरि के इह कउतक देखनि आई ॥१९३॥

lochan sau kar kai basudhaa har ke ieh kautak dhekhan aaiee ||193||


ਰੂਪ ਬਿਰਾਜਤ ਹੈ ਅਤਿ ਹੀ ਜਿਨ ਕੋ ਪਿਖ ਕੈ ਮਨ ਆਨੰਦ ਬਾਢੇ ॥

रूप बिराजत है अति ही जिन को पिख कै मन आनंद बाढे ॥

roop biraajat hai at hee jin ko pikh kai man aana(n)dh baadde ||

ਖੇਲਤ ਕਾਨ੍ਰਹ ਫਿਰੈ ਤਿਹ ਜਾਇ ਬਨੈ ਜਿਹ ਠਉਰ ਬਡੇ ਸਰ ਗਾਢੇ ॥

खेलत कान्रह फिरै तिह जाइ बनै जिह ठउर बडे सर गाढे ॥

khelat kaanreh firai teh jai banai jeh Thaur badde sar gaadde ||

ਗਵਾਲ ਹਲੀ ਹਰਿ ਕੇ ਸੰਗ ਰਾਜਤ ਦੇਖਿ ਦੁਖੀ ਮਨ ਕੋ ਦੁਖ ਕਾਢੇ ॥

गवाल हली हरि के संग राजत देखि दुखी मन को दुख काढे ॥

gavaal halee har ke sa(n)g raajat dhekh dhukhee man ko dhukh kaadde ||

ਕਉਤੁਕ ਦੇਖਿ ਧਰਾ ਹਰਖੀ ਤਿਹ ਤੇ ਤਰੁ ਰੋਮ ਭਏ ਤਨਿ ਠਾਢੇ ॥੧੯੪॥

कउतुक देखि धरा हरखी तिह ते तरु रोम भए तनि ठाढे ॥१९४॥

kautuk dhekh dharaa harakhee teh te tar rom bhe tan Thaadde ||194||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਤਰੈ ਤਰੁ ਕੇ ਮੁਰਲੀ ਸੁ ਬਜਾਇ ਉਠਿਯੋ ਤਨ ਕੋ ਕਰਿ ਐਡਾ ॥

कान्रह तरै तरु के मुरली सु बजाइ उठियो तन को करि ऐडा ॥

kaanreh tarai tar ke muralee su bajai uThiyo tan ko kar aaiddaa ||

ਮੋਹ ਰਹੀ ਜਮੁਨਾ ਖਗ ਅਉ ਹਰਿ ਜਛ ਸਭੈ ਅਰਨਾ ਅਰੁ ਗੈਡਾ ॥

मोह रही जमुना खग अउ हरि जछ सभै अरना अरु गैडा ॥

moh rahee jamunaa khag aau har jachh sabhai aranaa ar gaiddaa ||

ਪੰਡਿਤ ਮੋਹਿ ਰਹੇ ਸੁਨ ਕੈ ਅਰੁ ਮੋਹਿ ਗਏ ਸੁਨ ਕੈ ਜਨ ਜੈਡਾ ॥

पंडित मोहि रहे सुन कै अरु मोहि गए सुन कै जन जैडा ॥

pa(n)ddit moh rahe sun kai ar moh ge sun kai jan jaiddaa ||

ਬਾਤ ਕਹੀ ਕਬਿ ਨੈ ਮੁਖ ਤੇ ਮੁਰਲੀ ਇਹ ਨਾਹਿਨ ਰਾਗਨ ਪੈਡਾ ॥੧੯੫॥

बात कही कबि नै मुख ते मुरली इह नाहिन रागन पैडा ॥१९५॥

baat kahee kab nai mukh te muralee ieh naahin raagan paiddaa ||195||


ਆਨਨ ਦੇਖਿ ਧਰਾ ਹਰਿ ਕੋ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਲਲਚਾਨੀ ॥

आनन देखि धरा हरि को अपने मन मै अति ही ललचानी ॥

aanan dhekh dharaa har ko apane man mai at hee lalachaanee ||

ਸੁੰਦਰ ਰੂਪ ਬਨਿਯੋ ਇਹ ਕੋ ਤਿਹ ਤੇ ਪ੍ਰਿਤਮਾ ਅਤਿ ਤੇ ਅਤਿ ਭਾਨੀ ॥

सुँदर रूप बनियो इह को तिह ते पृतमा अति ते अति भानी ॥

su(n)dhar roop baniyo ieh ko teh te piratamaa at te at bhaanee ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਕੀ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਫੁਨਿ ਜੋ ਪਹਿਚਾਨੀ ॥

स्याम कही उपमा तिह की अपुने मन मै फुनि जो पहिचानी ॥

sayaam kahee upamaa teh kee apune man mai fun jo pahichaanee ||

ਰੰਗਨ ਕੇ ਪਟ ਲੈ ਤਨ ਪੈ ਜੁ ਮਨੋ ਇਹ ਕੀ ਹੁਇਬੇ ਪਟਰਾਨੀ ॥੧੯੬॥

रंगन के पट लै तन पै जु मनो इह की हुइबे पटरानी ॥१९६॥

ra(n)gan ke paT lai tan pai ju mano ieh kee huibe paTaraanee ||196||


ਗੋਪ ਬਾਚ ॥

गोप बाच ॥

gop baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗ੍ਵਾਰ ਕਹੀ ਬਿਨਤੀ ਹਰਿ ਪੈ ਇਕ ਤਾਲ ਬਡੋ ਤਿਹ ਪੈ ਫਲ ਹਛੇ ॥

ग्वार कही बिनती हरि पै इक ताल बडो तिह पै फल हछे ॥

gavaiaar kahee binatee har pai ik taal baddo teh pai fal hachhe ||

ਲਾਇਕ ਹੈ ਤੁਮਰੇ ਮੁਖ ਕੀ ਕਰੂਆ ਜਹ ਦਾਖ ਦਸੋ ਦਿਸ ਗੁਛੇ ॥

लाइक है तुमरे मुख की करूआ जह दाख दसो दिस गुछे ॥

laik hai tumare mukh kee karooaa jeh dhaakh dhaso dhis guchhe ||

ਧੇਨੁਕ ਦੈਤ ਬਡੋ ਤਿਹ ਜਾਇ ਕਿਧੋ ਹਨਿ ਲੋਗਨ ਕੇ ਉਨ ਰਛੇ ॥

धेनुक दैत बडो तिह जाइ किधो हनि लोगन के उन रछे ॥

dhenuk dhait baddo teh jai kidho han logan ke un rachhe ||

ਪੁਤ੍ਰ ਮਨੋ ਮਧਰੇਾਂਦ ਪ੍ਰਭਾਤਿ ਤਿਨੈ ਉਠਿ ਪ੍ਰਾਤ ਸਮੈ ਵਹ ਭਛੇ ॥੧੯੭॥

पुत्र मनो मधरेाँद प्रभाति तिनै उठि प्रात समै वह भछे ॥१९७॥

putr mano madhareaa(n)dh prabhaat tinai uTh praat samai veh bhachhe ||197||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਾਚ ॥

कान्रह बाच ॥

kaanreh baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਾਇ ਕਹੀ ਤਿਨ ਕੋ ਹਰਿ ਜੀ ਜਹ ਤਾਲ ਵਹੈ ਅਰੁ ਹੈ ਫਲ ਨੀਕੇ ॥

जाइ कही तिन को हरि जी जह ताल वहै अरु है फल नीके ॥

jai kahee tin ko har jee jeh taal vahai ar hai fal neeke ||

ਬੋਲਿ ਉਠਿਓ ਮੁਖ ਤੇ ਮੁਸਲੀ ਸੁ ਤੋ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਕੇ ਨਹਿ ਹੈ ਫੁਨਿ ਫੀਕੇ ॥

बोलि उठिओ मुख ते मुसली सु तो अंमृत के नहि है फुनि फीके ॥

bol uThio mukh te musalee su to a(n)mirat ke neh hai fun feeke ||

ਮਾਰ ਹੈ ਦੈਤ ਤਹਾ ਚਲ ਕੈ ਜਿਹ ਤੇ ਸੁਰ ਜਾਹਿ ਨਭੈ ਦੁਖ ਜੀ ਕੇ ॥

मार है दैत तहा चल कै जिह ते सुर जाहि नभै दुख जी के ॥

maar hai dhait tahaa chal kai jeh te sur jaeh nabhai dhukh jee ke ||

ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਚਲੇ ਤਹ ਕੋ ਮਿਲਿ ਸੰਖ ਬਜਾਇ ਸਭੈ ਮੁਰਲੀ ਕੇ ॥੧੯੮॥

होइ प्रसंनि चले तह को मिलि संख बजाइ सभै मुरली के ॥१९८॥

hoi prasa(n)n chale teh ko mil sa(n)kh bajai sabhai muralee ke ||198||


ਹੋਇ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਤਹਾ ਹਰਿ ਜੀ ਜੁ ਗਏ ਮਿਲ ਕੈ ਤਟ ਪੈ ਸਰ ਭਾਰੇ ॥

होइ प्रसंनि तहा हरि जी जु गए मिल कै तट पै सर भारे ॥

hoi prasa(n)n tahaa har jee ju ge mil kai taT pai sar bhaare ||

ਕੈ ਬਲ ਤੋ ਮੁਸਲੀ ਤਨ ਕੋ ਤਰੁ ਤੇ ਫਰ ਬੂੰਦਨ ਜਿਉ ਧਰਿ ਡਾਰੇ ॥

कै बल तो मुसली तन को तरु ते फर बूँदन जिउ धरि डारे ॥

kai bal to musalee tan ko tar te far boo(n)dhan jiau dhar ddaare ||

ਧੇਨਕ ਕ੍ਰੋਧ ਮਹਾ ਕਰ ਕੈ ਦੋਊ ਪਾਇ ਹ੍ਰਿਦੇ ਤਿਹ ਸਾਥ ਪ੍ਰਹਾਰੇ ॥

धेनक क्रोध महा कर कै दोऊ पाइ हृदे तिह साथ प्रहारे ॥

dhenak krodh mahaa kar kai dhouoo pai hiradhe teh saath prahaare ||

ਗੋਡਨ ਤੇ ਗਹਿ ਫੈਕ ਦਯੋ ਹਰਿ ਜਿਉ ਸਿਰ ਤੇ ਗਹਿ ਕੂਕਰ ਮਾਰੇ ॥੧੯੯॥

गोडन ते गहि फैक दयो हरि जिउ सिर ते गहि कूकर मारे ॥१९९॥

goddan te geh faik dhayo har jiau sir te geh kookar maare ||199||


ਕ੍ਰੋਧ ਭਈ ਧੁਜਨੀ ਤਿਹ ਕੀ ਪਤਿ ਜਾਨ ਹਤਿਓ ਇਨ ਊਪਰਿ ਆਈ ॥

क्रोध भई धुजनी तिह की पति जान हतिओ इन ऊपरि आई ॥

krodh bhiee dhujanee teh kee pat jaan hatio in uoopar aaiee ||

ਗਾਇ ਕੋ ਰੂਪ ਧਰਿਓ ਸਭ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਖੁਰ ਸੋ ਧਰਿ ਧੂਰਿ ਉਚਾਈ ॥

गाइ को रूप धरिओ सभ ही तब ही खुर सो धरि धूरि उचाई ॥

gai ko roop dhario sabh hee tab hee khur so dhar dhoor uchaiee ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਹਲੀ ਬਲਿ ਕੈ ਤਬ ਹੀ ਚਤੁਰੰਗ ਦਸੋ ਦਿਸ ਬੀਚ ਬਗਾਈ ॥

कान्रह हली बलि कै तब ही चतुरंग दसो दिस बीच बगाई ॥

kaanreh halee bal kai tab hee chatura(n)g dhaso dhis beech bagaiee ||

ਲੈ ਕਿਰਸਾਨ ਮਨੋ ਤੰਗੁਲੀ ਖਲ ਦਾਨਨ ਜ੍ਯੋ ਨਭ ਬੀਚਿ ਉਡਾਈ ॥੨੦੦॥

लै किरसान मनो तंगुली खल दानन ज्यो नभ बीचि उडाई ॥२००॥

lai kirasaan mano ta(n)gulee khal dhaanan jayo nabh beech uddaiee ||200||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਿਕੰਧੇ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਧੇਨਕ ਦੈਤ ਬਧਹਿ ॥

इति स्री दसम सिकंधे पुराणे बचित्र नाटक कृसनावतारे धेनक दैत बधहि ॥

eit sree dhasam sika(n)dhe puraane bachitr naaTak kirasanaavataare dhenak dhait badheh ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੈਤ ਹਨ੍ਯੋ ਚਤੁਰੰਗ ਚਮੂੰ ਸੁਨਿ ਦੇਵ ਕਰੈ ਮਿਲਿ ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਡਾਈ ॥

दैत हन्यो चतुरंग चमूँ सुनि देव करै मिलि कान्रह बडाई ॥

dhait hanayo chatura(n)g chamoo(n) sun dhev karai mil kaanreh baddaiee ||

ਭਛ ਸਭੈ ਫਲ ਗਵਾਰ ਚਲੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਧੂਰ ਪਰੀ ਮੁਖ ਪੈ ਛਬਿ ਛਾਈ ॥

भछ सभै फल गवार चले गृहि धूर परी मुख पै छबि छाई ॥

bhachh sabhai fal gavaar chale gireh dhoor paree mukh pai chhab chhaiee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਉਪਮਾ ਅਤਿ ਹੀ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਣਾਈ ॥

ता छबि की उपमा अति ही कबि ने मुख ते इम भाखि सुणाई ॥

taa chhab kee upamaa at hee kab ne mukh te im bhaakh sunaiee ||

ਧਾਵਤ ਘੋਰਨ ਕੀ ਪਗ ਕੀ ਰਜ ਛਾਇ ਲਏ ਰਵਿ ਸੀ ਛਬਿ ਪਾਈ ॥੨੦੧॥

धावत घोरन की पग की रज छाइ लए रवि सी छबि पाई ॥२०१॥

dhaavat ghoran kee pag kee raj chhai le rav see chhab paiee ||201||


ਸੈਨ ਸਨੈ ਹਨਿ ਦੈਤ ਗਯੋ ਗ੍ਰਿਹਿ ਗੋਪ ਗਏ ਗੁਪੀਆ ਸਭ ਆਈ ॥

सैन सनै हनि दैत गयो गृहि गोप गए गुपीआ सभ आई ॥

sain sanai han dhait gayo gireh gop ge gupeeaa sabh aaiee ||

ਮਾਤ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਭਈ ਮਨ ਮੈ ਤਿਹ ਕੀ ਜੁ ਕਰੈ ਬਹੁ ਭਾਤਿ ਬਡਾਈ ॥

मात प्रसंनि भई मन मै तिह की जु करै बहु भाति बडाई ॥

maat prasa(n)n bhiee man mai teh kee ju karai bahu bhaat baddaiee ||

ਚਾਵਰ ਦੂਧ ਕਰਿਯੋ ਖਾਹਿਬੇ ਕਹੁ ਖਾਇ ਬਹੂ ਤਿਹ ਦੇਹ ਬਧਾਈ ॥

चावर दूध करियो खाहिबे कहु खाइ बहू तिह देह बधाई ॥

chaavar dhoodh kariyo khaahibe kahu khai bahoo teh dheh badhaiee ||

ਹੋਇ ਬਡੀ ਤੁਮਰੀ ਚੁਟੀਆ ਇਹ ਤੇ ਫੁਨਿ ਬਾਤ ਸਭੈ ਮਿਲਿ ਚਾਈ ॥੨੦੨॥

होइ बडी तुमरी चुटीआ इह ते फुनि बात सभै मिलि चाई ॥२०२॥

hoi baddee tumaree chuTeeaa ieh te fun baat sabhai mil chaiee ||202||


ਭੋਜਨ ਕੈ ਟਿਕ ਗੇ ਹਰਿ ਜੀ ਪਲਕਾ ਪਰ ਅਉਰ ਕਰੈ ਜੁ ਕਹਾਨੀ ॥

भोजन कै टिक गे हरि जी पलका पर अउर करै जु कहानी ॥

bhojan kai Tik ge har jee palakaa par aaur karai ju kahaanee ||

ਰਾਜ ਗਯੋ ਤਰਨੋ ਮਗੁ ਰੈਨ ਲਹਿਯੋ ਸੁ ਲਗਿਯੋ ਵਹ ਪੀਅਨ ਪਾਨੀ ॥

राज गयो तरनो मगु रैन लहियो सु लगियो वह पीअन पानी ॥

raaj gayo tarano mag rain lahiyo su lagiyo veh peean paanee ||

ਰਾਤਿ ਪਰੀ ਤਬ ਹੀ ਭਰਿਭੈ ਤਿਨ ਸ੍ਰਉਨ ਸੁਨੀ ਅਪਨੇ ਇਹ ਬਾਨੀ ॥

राति परी तब ही भरिभै तिन स्रउन सुनी अपने इह बानी ॥

raat paree tab hee bharibhai tin sraun sunee apane ieh baanee ||

ਜਾਹੁ ਕਹਿਯੋ ਤਿਨ ਤਉ ਹਰਿ ਗਯੋ ਗ੍ਰਿਹ ਜਾਇ ਮਿਲਿਯੋ ਅਪਨੀ ਪਟਰਾਨੀ ॥੨੦੩॥

जाहु कहियो तिन तउ हरि गयो गृह जाइ मिलियो अपनी पटरानी ॥२०३॥

jaahu kahiyo tin tau har gayo gireh jai miliyo apanee paTaraanee ||203||


ਸੋਇ ਗਏ ਹਰਿ ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਫਿਰਿ ਲੈ ਬਛਰੇ ਬਨ ਗੇ ਗਿਰਧਾਰੀ ॥

सोइ गए हरि प्रात भए फिरि लै बछरे बन गे गिरधारी ॥

soi ge har praat bhe fir lai bachhare ban ge giradhaaree ||

ਮਧਿ ਭਏ ਰਵਿ ਕੇ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਧਾਇ ਗਏ ਜਹ ਥੋ ਸਰ ਭਾਰੀ ॥

मधि भए रवि के जमुना तटि धाइ गए जह थो सर भारी ॥

madh bhe rav ke jamunaa taT dhai ge jeh tho sar bhaaree ||

ਗੋ ਬਛਰੇ ਅਰੁ ਗੋਪ ਸਭੈ ਗਿਰਗੇ ਸਭ ਪ੍ਰਾਨ ਡਸੇ ਜਬ ਕਾਰੀ ॥

गो बछरे अरु गोप सभै गिरगे सभ प्रान डसे जब कारी ॥

go bachhare ar gop sabhai girage sabh praan ddase jab kaaree ||

ਧਾਇ ਕਹਿਯੋ ਮੁਸਲੀ ਪ੍ਰਭ ਪੈ ਸਭ ਸੈਨ ਸਖਾ ਤੁਮਰੀ ਹਰਿ ਮਾਰੀ ॥੨੦੪॥

धाइ कहियो मुसली प्रभ पै सभ सैन सखा तुमरी हरि मारी ॥२०४॥

dhai kahiyo musalee prabh pai sabh sain sakhaa tumaree har maaree ||204||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਪਾ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਚਿਤਵੀ ਤਿਨੈ ਜੀਵ ਉਠੇ ਤਤਕਾਲ ॥

कृपा दृसटि चितवी तिनै जीव उठे ततकाल ॥

kirapaa dhirasaT chitavee tinai jeev uThe tatakaal ||

ਗਊ ਸਭੈ ਅਰੁ ਸੁਤ ਤਿਨੈ ਅਉ ਫੁਨਿ ਸਭੈ ਗੁਪਾਲ ॥੨੦੫॥

गऊ सभै अरु सुत तिनै अउ फुनि सभै गुपाल ॥२०५॥

guoo sabhai ar sut tinai aau fun sabhai gupaal ||205||


ਉਠਿ ਪਾਇਨ ਲਾਗੇ ਤਬੈ ਕਰਹਿੰ ਬਡਾਈ ਸੋਇ ॥

उठि पाइन लागे तबै करहिं बडाई सोइ ॥

auTh pain laage tabai karahi(n) baddaiee soi ||

ਜੀਅ ਦਾਨ ਹਮ ਕੋ ਦਯੋ ਇਹ ਤੇ ਬਡੋ ਨ ਕੋਇ ॥੨੦੬॥

जीअ दान हम को दयो इह ते बडो न कोइ ॥२०६॥

jeea dhaan ham ko dhayo ieh te baddo na koi ||206||


ਅਥ ਕਾਲੀ ਨਾਗ ਨਾਥਬੋ ॥

अथ काली नाग नाथबो ॥

ath kaalee naag naathabo ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਗੋਪ ਜਾਨ ਕੈ ਆਪਨੇ ਕੀਨੇ ਮਨੈ ਬਿਚਾਰ ॥

गोप जान कै आपने कीने मनै बिचार ॥

gop jaan kai aapane keene manai bichaar ||

ਦੁਸਟ ਨਾਗ ਸਰ ਮੈ ਬਸੇ ਤਾ ਕੋ ਲੇਉ ਨਿਕਾਰ ॥੨੦੭॥

दुसट नाग सर मै बसे ता को लेउ निकार ॥२०७॥

dhusaT naag sar mai base taa ko leau nikaar ||207||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਊਚ ਕਦੰਮਹਿ ਕੋ ਤਰੁ ਥੋ ਤਿਹ ਪੈ ਚੜਿ ਕੈ ਹਰਿ ਕੂਦ ਪਰਿਓ ॥

ऊच कदंमहि को तरु थो तिह पै चड़ि कै हरि कूद परिओ ॥

uooch kadha(n)meh ko tar tho teh pai chaR kai har koodh pario ||

ਤਿਨ ਸੰਕ ਕਰੀ ਮਨ ਮੈ ਨ ਕਛੂ ਫੁਨਿ ਧੀਰਜ ਗਾਢ ਧਰਿਯੋ ਨ ਟਰਿਓ ॥

तिन संक करी मन मै न कछू फुनि धीरज गाढ धरियो न टरिओ ॥

tin sa(n)k karee man mai na kachhoo fun dheeraj gaadd dhariyo na Tario ||

ਮਨੁਖੋਸਤ ਲੌ ਜਲ ਉਚ ਭਯੋ ਨਿਕਸਿਯੋ ਤਬ ਨਾਗ ਬਡੋ ਨ ਡਰਿਯੋ ॥

मनुखोसत लौ जल उच भयो निकसियो तब नाग बडो न डरियो ॥

manukhosat lau jal uch bhayo nikasiyo tab naag baddo na ddariyo ||

ਪਟ ਪੀਤ ਧਰੇ ਤਨ ਪੈ ਨਰ ਦੇਖਿ ਮਹਾ ਬਲਿ ਕੈ ਤਿਨ ਜੁਧ ਕਰਿਯੋ ॥੨੦੮॥

पट पीत धरे तन पै नर देखि महा बलि कै तिन जुध करियो ॥२०८॥

paT peet dhare tan pai nar dhekh mahaa bal kai tin judh kariyo ||208||


ਬਾਧ ਲਯੋ ਹਰਿ ਕੋ ਤਨ ਸੋ ਕਰ ਕ੍ਰੁਧ ਕਿਧੋ ਤਿਹ ਕੋ ਤਨ ਕਾਟੇ ॥

बाध लयो हरि को तन सो कर क्रुध किधो तिह को तन काटे ॥

baadh layo har ko tan so kar krudh kidho teh ko tan kaaTe ||

ਢੀਲੋ ਰਹਿਯੋ ਹੁਇ ਪੈ ਹਰਿ ਜੀ ਪਿਖਿ ਯਾ ਰਨ ਕੇ ਹੀਯਰੇ ਫੁਨਿ ਫਾਟੇ ॥

ढीलो रहियो हुइ पै हरि जी पिखि या रन के हीयरे फुनि फाटे ॥

ddeelo rahiyo hui pai har jee pikh yaa ran ke heeyare fun faaTe ||

ਰੋਵਤ ਆਵਤ ਹੈ ਪਤਨੀ ਬ੍ਰਿਜ ਠੋਕਤ ਮੂੰਡ ਉਖਾਰਤ ਝਾਟੇ ॥

रोवत आवत है पतनी बृज ठोकत मूँड उखारत झाटे ॥

rovat aavat hai patanee biraj Thokat moo(n)dd ukhaarat jhaaTe ||

ਆਇ ਹੈ ਮਾਰ ਉਸੈ ਨਹੀ ਰੋਵਹੁ ਨੰਦ ਇਹੈ ਕਹਿ ਕੈ ਇਨ ਡਾਟੇ ॥੨੦੯॥

आइ है मार उसै नही रोवहु नंद इहै कहि कै इन डाटे ॥२०९॥

aai hai maar usai nahee rovahu na(n)dh ihai keh kai in ddaaTe ||209||


ਕਾਨ੍ਰਹਿ ਲਪੇਟ ਬਡੋ ਵਹ ਪੰਨਗ ਫੂਕਤ ਹੈ ਕਰਿ ਕ੍ਰੁਧਹਿ ਕੈਸੇ ॥

कान्रहि लपेट बडो वह पंनग फूकत है करि क्रुधहि कैसे ॥

kaanreh lapeT baddo veh pa(n)nag fookat hai kar krudheh kaise ||

ਜਿਉ ਧਨ ਪਾਤ੍ਰ ਗਏ ਧਨ ਤੇ ਅਤਿ ਝੂਰਤ ਲੇਤ ਉਸਾਸਨ ਤੈਸੇ ॥

जिउ धन पात्र गए धन ते अति झूरत लेत उसासन तैसे ॥

jiau dhan paatr ge dhan te at jhoorat let usaasan taise ||

ਬੋਲਤ ਜਿਉ ਧਮੀਆ ਹਰਿ ਮੈ ਸੁਰ ਕੈ ਮਧਿ ਸਵਾਸ ਭਰੇ ਵਹ ਐਸੇ ॥

बोलत जिउ धमीआ हरि मै सुर कै मधि सवास भरे वह ऐसे ॥

bolat jiau dhameeaa har mai sur kai madh savaas bhare veh aaise ||


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