P-35 Krishna Avatar (Chaubis Avatar) (hindi punjabi english)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
---

ਜਵਾਲ ਨਿਕਾਸ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਰਿਪੁ ਅਉਰ ਭਯੋ ਤੁਮਰੋ ਮਤਿ ਹੀਨੇ ॥

जवाल निकास कही मुख ते रिपु अउर भयो तुमरो मति हीने ॥

javaal nikaas kahee mukh te rip aaur bhayo tumaro mat heene ||

ਦਾਮਿਨਿ ਸੀ ਲਹਕੈ ਨਭਿ ਮੈ ਡਰ ਕੈ ਫਟਗੇ ਤਿਹ ਸਤ੍ਰਨ ਸੀਨੇ ॥

दामिनि सी लहकै नभि मै डर कै फटगे तिह सत्रन सीने ॥

dhaamin see lahakai nabh mai ddar kai faTage teh satran seene ||

ਮਾਰ ਡਰੈ ਇਹ ਹੂੰ ਹਮ ਹੂੰ ਸਭ ਤ੍ਰਾਸ ਮਨੈ ਅਤਿ ਦੈਤਨ ਕੀਨੇ ॥੭੩॥

मार डरै इह हूँ हम हूँ सभ त्रास मनै अति दैतन कीने ॥७३॥

maar ddarai ieh hoo(n) ham hoo(n) sabh traas manai at dhaitan keene ||73||


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਬਸੁਦੇਵ ਛੋਰਬੋ ॥

अथ देवकी बसुदेव छोरबो ॥

ath dhevakee basudhev chhorabo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਇਹ ਕੀ ਜੁ ਸ੍ਰੋਨਨ ਨਿੰਦਤ ਦੇਵਨ ਕੋ ਘਰਿ ਆਯੋ ॥

बात सुनी इह की जु स्रोनन निंदत देवन को घरि आयो ॥

baat sunee ieh kee ju sronan ni(n)dhat dhevan ko ghar aayo ||

ਝੂਠ ਹਨੇ ਹਮ ਪੈ ਭਗਨੀ ਸੁਤ ਜਾਇ ਕੈ ਪਾਇਨ ਸੀਸ ਨਿਵਾਯੋ ॥

झूठ हने हम पै भगनी सुत जाइ कै पाइन सीस निवायो ॥

jhooTh hane ham pai bhaganee sut jai kai pain sees nivaayo ||

ਗ੍ਯਾਨ ਕਥਾ ਕਰ ਕੈ ਅਤਿ ਹੀ ਬਹੁ ਦੇਵਕੀ ਔ ਬਸੁਦੇਵ ਰਿਝਾਯੋ ॥

ग्यान कथा कर कै अति ही बहु देवकी औ बसुदेव रिझायो ॥

gayaan kathaa kar kai at hee bahu dhevakee aau basudhev rijhaayo ||

ਹ੍ਵੈ ਕੈ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਬੁਲਾਇ ਲੁਹਾਰ ਕੋ ਲੋਹ ਅਉ ਮੋਹ ਕੋ ਫਾਧ ਕਟਾਯੋ ॥੭੪॥

ह्वै कै प्रसंनि बुलाइ लुहार को लोह अउ मोह को फाध कटायो ॥७४॥

havai kai prasa(n)n bulai luhaar ko loh aau moh ko faadh kaTaayo ||74||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਦੇਵਕੀ ਬਸੁਦੇਵ ਕੋ ਛੋਰਬੋ ਬਰਨਨੰ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे देवकी बसुदेव को छोरबो बरननं समापतं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare dhevakee basudhev ko chhorabo baranana(n) samaapata(n) ||


ਕੰਸ ਮੰਤ੍ਰੀਨ ਸੋ ਬਿਚਾਰ ਕਰਤ ਭਯਾ ॥

कंस मंत्रीन सो बिचार करत भया ॥

ka(n)s ma(n)treen so bichaar karat bhayaa ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮੰਤ੍ਰੀ ਸਕਲ ਬੁਲਾਇ ਕੇ ਕੀਨੋ ਕੰਸ ਬਿਚਾਰ ॥

मंत्री सकल बुलाइ के कीनो कंस बिचार ॥

ma(n)tree sakal bulai ke keeno ka(n)s bichaar ||

ਬਾਲਕ ਜੋ ਮਮ ਦੇਸ ਮੈ ਸੋ ਸਭ ਡਾਰੋ ਮਾਰ ॥੭੫॥

बालक जो मम देस मै सो सभ डारो मार ॥७५॥

baalak jo mam dhes mai so sabh ddaaro maar ||75||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਭਾਗਵਤ ਕੀ ਯਹ ਸੁਧ ਕਥਾ ਬਹੁ ਬਾਤ ਭਰੇ ਭਲੀ ਭਾਤਿ ਉਚਾਰੀ ॥

भागवत की यह सुध कथा बहु बात भरे भली भाति उचारी ॥

bhaagavat kee yeh sudh kathaa bahu baat bhare bhalee bhaat uchaaree ||

ਬਾਕੀ ਕਹੋ ਫੁਨਿ ਅਉਰ ਕਥਾ ਕੋ ਸੁਭ ਰੂਪ ਧਰਿਯੋ ਬ੍ਰਿਜ ਮਧਿ ਮੁਰਾਰੀ ॥

बाकी कहो फुनि अउर कथा को सुभ रूप धरियो बृज मधि मुरारी ॥

baakee kaho fun aaur kathaa ko subh roop dhariyo biraj madh muraaree ||

ਦੇਵ ਸਭੈ ਹਰਖੇ ਸੁਨਿ ਭੂਮਹਿ ਅਉਰ ਮਨੈ ਹਰਖੈ ਨਰ ਨਾਰੀ ॥

देव सभै हरखे सुनि भूमहि अउर मनै हरखै नर नारी ॥

dhev sabhai harakhe sun bhoomeh aaur manai harakhai nar naaree ||

ਮੰਗਲ ਹੋਹਿ ਘਰਾ ਘਰ ਮੈ ਉਤਰਿਯੋ ਅਵਤਾਰਨ ਕੋ ਅਵਤਾਰੀ ॥੭੬॥

मंगल होहि घरा घर मै उतरियो अवतारन को अवतारी ॥७६॥

ma(n)gal hoh gharaa ghar mai utariyo avataaran ko avataaree ||76||


ਜਾਗ ਉਠੀ ਜਸੁਧਾ ਜਬ ਹੀ ਪਿਖਿ ਪੁਤ੍ਰਹਿ ਦੇਨ ਲਗੀ ਹੁਨੀਆ ਹੈ ॥

जाग उठी जसुधा जब ही पिखि पुत्रहि देन लगी हुनीआ है ॥

jaag uThee jasudhaa jab hee pikh putreh dhen lagee huneeaa hai ||

ਪੰਡਿਤਨ ਕੋ ਅਰੁ ਗਾਇਨ ਕੋ ਬਹੁ ਦਾਨ ਦੀਓ ਸਭ ਹੀ ਗੁਨੀਆ ਹੈ ॥

पंडितन को अरु गाइन को बहु दान दीओ सभ ही गुनीआ है ॥

pa(n)dditan ko ar gain ko bahu dhaan dheeo sabh hee guneeaa hai ||

ਪੁਤ੍ਰ ਭਯੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬ੍ਰਿਜਭਾਮਿਨ ਓਢ ਕੈ ਲਾਲ ਚਲੀ ਚੁਨੀਆ ਹੈ ॥

पुत्र भयो सुनि कै बृजभामिन ओढ कै लाल चली चुनीआ है ॥

putr bhayo sun kai birajabhaamin odd kai laal chalee chuneeaa hai ||

ਜਿਉ ਮਿਲ ਕੈ ਘਨ ਕੇ ਦਿਨ ਮੈ ਉਡ ਕੈ ਸੁ ਚਲੀ ਜੁ ਮਨੋ ਮੁਨੀਆ ਹੈ ॥੭੭॥

जिउ मिल कै घन के दिन मै उड कै सु चली जु मनो मुनीआ है ॥७७॥

jiau mil kai ghan ke dhin mai udd kai su chalee ju mano muneeaa hai ||77||


ਨੰਦ ਬਾਚ ਕੰਸ ਪ੍ਰਤਿ ॥

नंद बाच कंस प्रति ॥

na(n)dh baach ka(n)s prat ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨੰਦ ਮਹਰ ਲੈ ਭੇਟ ਕੌ ਗਯੋ ਕੰਸ ਕੇ ਪਾਸਿ ॥

नंद महर लै भेट कौ गयो कंस के पासि ॥

na(n)dh mahar lai bheT kau gayo ka(n)s ke paas ||

ਪੁਤ੍ਰ ਭਯੋ ਹਮਰੇ ਗ੍ਰਿਹੈ ਜਾਇ ਕਹੀ ਅਰਦਾਸਿ ॥੭੮॥

पुत्र भयो हमरे गृहै जाइ कही अरदासि ॥७८॥

putr bhayo hamare girahai jai kahee aradhaas ||78||


ਬਸੁਦੇਵ ਬਾਚ ਨੰਦ ਸੋ ॥

बसुदेव बाच नंद सो ॥

basudhev baach na(n)dh so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨੰਦ ਚਲਿਓ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਜਬੈ ਸੁਨੀ ਬਾਤ ਬਸੁਦੇਵ ॥

नंद चलिओ गृह को जबै सुनी बात बसुदेव ॥

na(n)dh chalio gireh ko jabai sunee baat basudhev ||

ਭੈ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ਤੁਮ ਕੋ ਬਡੋ ਸੁਨੋ ਗੋਪ ਪਤਿ ਭੇਵ ॥੭੯॥

भै ह्वै है तुम को बडो सुनो गोप पति भेव ॥७९॥

bhai havai hai tum ko baddo suno gop pat bhev ||79||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਬਕੀ ਸੋ ॥

कंस बाच बकी सो ॥

ka(n)s baach bakee so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੰਸ ਕਹੈ ਬਕੀ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਇਹ ਆਜ ਕਰੋ ਤੁਮ ਕਾਜ ਹਮਾਰੋ ॥

कंस कहै बकी बात सुनो इह आज करो तुम काज हमारो ॥

ka(n)s kahai bakee baat suno ieh aaj karo tum kaaj hamaaro ||

ਬਾਰਕ ਜੇ ਜਨਮੇ ਇਹ ਦੇਸ ਮੈ ਤਾਹਿ ਕੌ ਜਾਇ ਕੈ ਸੀਘ੍ਰ ਸੰਘਾਰੋ ॥

बारक जे जनमे इह देस मै ताहि कौ जाइ कै सीघ्र संघारो ॥

baarak je janame ieh dhes mai taeh kau jai kai seeghr sa(n)ghaaro ||

ਕਾਲ ਵਹੈ ਹਮਰੋ ਕਹੀਐ ਤਿਹ ਤ੍ਰਾਸ ਡਰਿਯੋ ਹੀਅਰਾ ਮਮ ਭਾਰੋ ॥

काल वहै हमरो कहीऐ तिह त्रास डरियो हीअरा मम भारो ॥

kaal vahai hamaro kaheeaai teh traas ddariyo heearaa mam bhaaro ||

ਹਾਲ ਬਿਹਾਲ ਭਯੋ ਤਿਹ ਕਾਲ ਮਨੋ ਤਨ ਮੈ ਜੁ ਡਸਿਓ ਅਹਿ ਕਾਰੋ ॥੮੦॥

हाल बिहाल भयो तिह काल मनो तन मै जु डसिओ अहि कारो ॥८०॥

haal bihaal bhayo teh kaal mano tan mai ju ddasio eh kaaro ||80||


ਪੂਤਨਾ ਬਾਚ ਕੰਸ ਪ੍ਰਤਿ ॥

पूतना बाच कंस प्रति ॥

pootanaa baach ka(n)s prat ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਇਹ ਸੁਨਿ ਕੈ ਤਬ ਪੂਤਨਾ ਕਹੀ ਕੰਸ ਸੋ ਬਾਤ ॥

इह सुनि कै तब पूतना कही कंस सो बात ॥

eeh sun kai tab pootanaa kahee ka(n)s so baat ||

ਬਰਮਾ ਜਾਏ ਸਬ ਹਨੋ ਮਿਟੇ ਤਿਹਾਰੋ ਤਾਤ ॥੮੧॥

बरमा जाए सब हनो मिटे तिहारो तात ॥८१॥

baramaa jaae sab hano miTe tihaaro taat ||81||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੀਸ ਨਿਵਾਇ ਉਠੀ ਤਬ ਬੋਲਿ ਸੁ ਘੋਲਿ ਮਿਠਾ ਲਪਟੌ ਥਨ ਮੈ ॥

सीस निवाइ उठी तब बोलि सु घोलि मिठा लपटौ थन मै ॥

sees nivai uThee tab bol su ghol miThaa lapaTau than mai ||

ਬਾਲ ਜੁ ਪਾਨ ਕਰੇ ਤਜੇ ਪ੍ਰਾਨਨ ਤਾਹਿ ਮਸਾਨ ਕਰੋਂ ਛਿਨ ਮੈ ॥

बाल जु पान करे तजे प्रानन ताहि मसान करों छिन मै ॥

baal ju paan kare taje praanan taeh masaan karo(n) chhin mai ||

ਬੁਧਿ ਤਾਨ ਸੁਜਾਨ ਕਹਿਯੋ ਸਤਿ ਮਾਨ ਸੁ ਆਇ ਹੌਂ ਟੋਰ ਕੈ ਤਾ ਹਨਿ ਮੈ ॥

बुधि तान सुजान कहियो सति मान सु आइ हौं टोर कै ता हनि मै ॥

budh taan sujaan kahiyo sat maan su aai haua(n) Tor kai taa han mai ||

ਨਿਰਭਉ ਨ੍ਰਿਪ ਰਾਜ ਕਰੋ ਨਗਰੀ ਸਗਰੀ ਜਿਨ ਸੋਚ ਕਰੋ ਮਨ ਮੈ ॥੮੨॥

निरभउ नृप राज करो नगरी सगरी जिन सोच करो मन मै ॥८२॥

nirabhau nirap raaj karo nagaree sagaree jin soch karo man mai ||82||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਅਤਿ ਪਾਪਨ ਜਗੰਨਾਥ ਪਰ ਬੀੜਾ ਲੀਯੋ ਉਠਾਇ ॥

अति पापन जगंनाथ पर बीड़ा लीयो उठाइ ॥

at paapan jaga(n)naath par beeRaa leeyo uThai ||

ਕਪਟ ਰੂਪ ਸੋਰਹ ਸਜੇ ਗੋਕੁਲ ਪਹੁੰਚੀ ਜਾਇ ॥੮੩॥

कपट रूप सोरह सजे गोकुल पहुँची जाइ ॥८३॥

kapaT roop soreh saje gokul pahu(n)chee jai ||83||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਜਰ ਨੈਨਿ ਦੀਏ ਮਨ ਮੋਹਤ ਈਗੁਰ ਕੀ ਬਿੰਦੁਰੀ ਜੁ ਬਿਰਾਜੈ ॥

काजर नैनि दीए मन मोहत ईगुर की बिंदुरी जु बिराजै ॥

kaajar nain dhe'ee man mohat ieegur kee bi(n)dhuree ju biraajai ||

ਟਾਡ ਭੁਜਾਨ ਬਨ੍ਰਹੀ ਕਟਿ ਕੇਹਿਰ ਪਾਇਨ ਨੂਪਰ ਕੀ ਧੁਨਿ ਬਾਜੈ ॥

टाड भुजान बन्रही कटि केहिर पाइन नूपर की धुनि बाजै ॥

Taadd bhujaan banrahee kaT kehir pain noopar kee dhun baajai ||

ਹਾਰ ਗਰੇ ਮੁਕਤਾਹਲ ਕੇ ਗਈ ਨੰਦ ਦੁਆਰਹਿ ਕੰਸ ਕੈ ਕਾਜੈ ॥

हार गरे मुकताहल के गई नंद दुआरहि कंस कै काजै ॥

haar gare mukataahal ke giee na(n)dh dhuaareh ka(n)s kai kaajai ||

ਬਾਸ ਸੁਬਾਸ ਬਸੀ ਸਭ ਹੀ ਤਨ ਆਨਨ ਮੈ ਸਸਿ ਕੋਟਿਕ ਲਾਜੈ ॥੮੪॥

बास सुबास बसी सभ ही तन आनन मै ससि कोटिक लाजै ॥८४॥

baas subaas basee sabh hee tan aanan mai sas koTik laajai ||84||


ਜਸੁਧਾ ਬਾਚ ਪੂਤਨਾ ਪ੍ਰਤਿ ॥

जसुधा बाच पूतना प्रति ॥

jasudhaa baach pootanaa prat ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਹੁ ਆਦਰ ਕਰਿ ਪੂਛਿਓ ਜਸੁਮਤਿ ਬਚਨ ਰਸਾਲ ॥

बहु आदर करि पूछिओ जसुमति बचन रसाल ॥

bahu aadhar kar poochhio jasumat bachan rasaal ||

ਆਸਨ ਪੈ ਬੈਠਾਇ ਕੈ ਕਹਿਓ ਬਾਤ ਕਹੁ ਬਾਲ ॥੮੫॥

आसन पै बैठाइ कै कहिओ बात कहु बाल ॥८५॥

aasan pai baiThai kai kahio baat kahu baal ||85||


ਪੂਤਨਾ ਬਾਚ ਜਸੋਧਾ ਸੋ ॥

पूतना बाच जसोधा सो ॥

pootanaa baach jasodhaa so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮਹਰਿ ਤਿਹਾਰੇ ਸੁਤ ਸੁਨਿਓ ਜਨਮਿਓ ਰੂਪ ਅਨੂਪ ॥

महरि तिहारे सुत सुनिओ जनमिओ रूप अनूप ॥

mahar tihaare sut sunio janamio roop anoop ||

ਮੋ ਗੋਦੀ ਦੈ ਦੂਧ ਕੋ ਹੋਵੈ ਸਭ ਕੋ ਭੂਪ ॥੮੬॥

मो गोदी दै दूध को होवै सभ को भूप ॥८६॥

mo godhee dhai dhoodh ko hovai sabh ko bhoop ||86||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗੋਦ ਦਯੋ ਜਸੁਧਾ ਤਬ ਤਾ ਕੇ ਸੁ ਅੰਤ ਸਮੈ ਤਬ ਹੀ ਉਨਿ ਲੀਨੋ ॥

गोद दयो जसुधा तब ता के सु अंत समै तब ही उनि लीनो ॥

godh dhayo jasudhaa tab taa ke su a(n)t samai tab hee un leeno ||

ਭਾਗ ਬਡੇ ਦੁਰ ਬੁਧਨਿ ਕੇ ਭਗਵਾਨਹਿ ਕੌ ਜਿਨਿ ਅਸਥਨ ਦੀਨੋ ॥

भाग बडे दुर बुधनि के भगवानहि कौ जिनि असथन दीनो ॥

bhaag badde dhur budhan ke bhagavaaneh kau jin asathan dheeno ||

ਛੀਰ ਰਕਤ੍ਰ ਸੁ ਤਾਹੀ ਕੇ ਪ੍ਰਾਨ ਸੁ ਐਚ ਲਏ ਮੁਖ ਮੋ ਇਹ ਕੀਨੋ ॥

छीर रकत्र सु ताही के प्रान सु ऐच लए मुख मो इह कीनो ॥

chheer rakatr su taahee ke praan su aaich le mukh mo ieh keeno ||

ਜਿਉ ਗਗੜੀ ਤੁਮਰੀ ਤਨ ਲਾਇ ਕੈ ਤੇਲ ਲਏ ਤੁਚ ਛਾਡ ਕੈ ਪੀਨੋ ॥੮੭॥

जिउ गगड़ी तुमरी तन लाइ कै तेल लए तुच छाड कै पीनो ॥८७॥

jiau gagaRee tumaree tan lai kai tel le tuch chhaadd kai peeno ||87||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪਾਪ ਕਰਿਓ ਬਹੁ ਪੂਤਨਾ ਜਾ ਸੋ ਨਰਕ ਡਰਾਇ ॥

पाप करिओ बहु पूतना जा सो नरक डराइ ॥

paap kario bahu pootanaa jaa so narak ddarai ||

ਅੰਤਿ ਕਹਿਯੋ ਹਰਿ ਛਾਡਿ ਦੈ ਬਸੀ ਬਿਕੁੰਠਹਿ ਜਾਇ ॥੮੮॥

अंति कहियो हरि छाडि दै बसी बिकुँठहि जाइ ॥८८॥

a(n)t kahiyo har chhaadd dhai basee biku(n)Theh jai ||88||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦੇਹਿ ਛਿ ਕੋਸ ਪ੍ਰਮਾਨ ਭਈ ਪੁਖਰਾ ਜਿਮ ਪੇਟ ਮੁਖੋ ਨਲੂਆਰੇ ॥

देहि छि कोस प्रमान भई पुखरा जिम पेट मुखो नलूआरे ॥

dheh chh kos pramaan bhiee pukharaa jim peT mukho nalooaare ||

ਡੰਡ ਦੁਕੂਲ ਭਏ ਤਿਹ ਕੇ ਜਨੁ ਬਾਰ ਸਿਬਾਲ ਤੇ ਸੇਖ ਪੂਆਰੇ ॥

डंड दुकूल भए तिह के जनु बार सिबाल ते सेख पूआरे ॥

dda(n)dd dhukool bhe teh ke jan baar sibaal te sekh pooaare ||

ਸੀਸ ਸੁਮੇਰ ਕੋ ਸ੍ਰਿੰਗ ਭਯੋ ਤਿਹ ਆਖਨ ਮੈ ਪਰਗੇ ਖਡੂਆਰੇ ॥

सीस सुमेर को सृंग भयो तिह आखन मै परगे खडूआरे ॥

sees sumer ko sira(n)g bhayo teh aakhan mai parage khaddooaare ||

ਸਾਹ ਕੇ ਕੋਟ ਮੈ ਤੋਪ ਲਗੀ ਬਿਬ ਗੋਲਨ ਕੇ ਹ੍ਵੈ ਗਲੂਆਰੇ ॥੮੯॥

साह के कोट मै तोप लगी बिब गोलन के ह्वै गलूआरे ॥८९॥

saeh ke koT mai top lagee bib golan ke havai galooaare ||89||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਅਸਥਨ ਮੁਖ ਲੈ ਕ੍ਰਿਸਨ ਤਿਹ ਊਪਰਿ ਸੋਇ ਗਏ ॥

असथन मुख लै कृसन तिह ऊपरि सोइ गए ॥

asathan mukh lai kirasan teh uoopar soi ge ||

ਧਾਇ ਤਬੈ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਕ ਸਭ ਗੋਦ ਉਠਾਇ ਲਏ ॥੯੦॥

धाइ तबै बृज लोक सभ गोद उठाइ लए ॥९०॥

dhai tabai biraj lok sabh godh uThai le ||90||


ਕਾਟਿ ਕਾਟਿ ਤਨ ਏਕਠੋ ਕੀਯੋਬ ਤਾ ਕੋ ਢੇਰ ॥

काटि काटि तन एकठो कीयोब ता को ढेर ॥

kaaT kaaT tan ekaTho keeyob taa ko dder ||

ਦੇ ਈਧਨ ਚਹੁੰ ਓਰ ਤੇ ਬਾਰਤ ਲਗੀ ਨ ਬੇਰ ॥੯੧॥

दे ईधन चहुँ ओर ते बारत लगी न बेर ॥९१॥

dhe ieedhan chahu(n) or te baarat lagee na ber ||91||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜਬ ਹੀ ਨੰਦ ਆਇ ਹੈ ਗੋਕੁਲ ਮੈ ਲਈ ਬਾਸ ਸੁਬਾਸ ਮਹਾ ਬਿਸਮਾਨਿਓ ॥

जब ही नंद आइ है गोकुल मै लई बास सुबास महा बिसमानिओ ॥

jab hee na(n)dh aai hai gokul mai liee baas subaas mahaa bisamaanio ||

ਲੋਕ ਸਬੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੋ ਬਿਰਤਾਤ ਕਹਿਓ ਸੁਨਿ ਕੈ ਮਨ ਮੈ ਡਰ ਪਾਨਿਓ ॥

लोक सबै बृज को बिरतात कहिओ सुनि कै मन मै डर पानिओ ॥

lok sabai biraj ko birataat kahio sun kai man mai ddar paanio ||

ਸਾਚ ਕਹੀ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਮੋ ਪਹਿ ਸੋ ਪਰਤਛਿ ਭਈ ਹਮ ਜਾਨਿਓ ॥

साच कही बसुदेवहि मो पहि सो परतछि भई हम जानिओ ॥

saach kahee basudheveh mo peh so paratachh bhiee ham jaanio ||

ਤਾ ਦਿਨ ਦਾਨ ਅਨੇਕ ਦੀਯੋ ਸਭ ਬਿਪ੍ਰਨ ਬੇਦ ਅਸੀਸ ਬਖਾਨਿਓ ॥੯੨॥

ता दिन दान अनेक दीयो सभ बिप्रन बेद असीस बखानिओ ॥९२॥

taa dhin dhaan anek dheeyo sabh bipran bedh asees bakhaanio ||92||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਾਲ ਰੂਪ ਹ੍ਵੈ ਉਤਰਿਓ ਦਯਾਸਿੰਧੁ ਕਰਤਾਰ ॥

बाल रूप ह्वै उतरिओ दयासिंधु करतार ॥

baal roop havai utario dhayaasi(n)dh karataar ||

ਪ੍ਰਿਥਮ ਉਧਾਰੀ ਪੂਤਨਾ ਭੂਮਿ ਉਤਾਰਿਯੋ ਭਾਰੁ ॥੯੩॥

पृथम उधारी पूतना भूमि उतारियो भारु ॥९३॥

piratham udhaaree pootanaa bhoom utaariyo bhaar ||93||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦਸਮ ਸਕੰਧ ਪੁਰਾਣੇ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਪੂਤਨਾ ਬਧਹਿ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥

इति स्री दसम सकंध पुराणे बचित्र नाटक ग्रंथे पूतना बधहि धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥

eit sree dhasam saka(n)dh puraane bachitr naaTak gra(n)the pootanaa badheh dhiaai samaapatam sat subham sat ||


ਅਥ ਨਾਮ ਕਰਣ ਕਥਨੰ ॥

अथ नाम करण कथनं ॥

ath naam karan kathana(n) ||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਗਰਗ ਕੋ ਨਿਕਟਿ ਲੈ ਕਹੀ ਜੁ ਤਾਹਿ ਸੁਨਾਇ ॥

बासुदेव गरग को निकटि लै कही जु ताहि सुनाइ ॥

baasudhev garag ko nikaT lai kahee ju taeh sunai ||

ਗੋਕੁਲ ਨੰਦਹਿ ਕੇ ਭਵਨਿ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰੋ ਤੁਮ ਜਾਇ ॥੯੪॥

गोकुल नंदहि के भवनि कृपा करो तुम जाइ ॥९४॥

gokul na(n)dheh ke bhavan kirapaa karo tum jai ||94||


ਉਤੈ ਤਾਤ ਹਮਰੇ ਤਹਾ ਨਾਮ ਕਰਨ ਕਰਿ ਦੇਹੁ ॥

उतै तात हमरे तहा नाम करन करि देहु ॥

autai taat hamare tahaa naam karan kar dheh ||

ਹਮ ਤੁਮ ਬਿਨੁ ਨਹੀ ਜਾਨਹੀ ਅਉਰ ਸ੍ਰਉਨ ਸੁਨ ਲੇਹੁ ॥੯੫॥

हम तुम बिनु नही जानही अउर स्रउन सुन लेहु ॥९५॥

ham tum bin nahee jaanahee aaur sraun sun leh ||95||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬੇਗ ਚਲਿਯੋ ਦਿਜ ਗੋਕੁਲ ਕੋ ਬਸੁਦੇਵ ਮਹਾਨ ਕਹੀ ਸੋਈ ਮਾਨੀ ॥

बेग चलियो दिज गोकुल को बसुदेव महान कही सोई मानी ॥

beg chaliyo dhij gokul ko basudhev mahaan kahee soiee maanee ||

ਨੰਦ ਕੇ ਧਾਮ ਗਯੋ ਤਬ ਹੀ ਬਹੁ ਆਦਰ ਤਾਹਿ ਕਰਿਯੋ ਨੰਦ ਰਾਨੀ ॥

नंद के धाम गयो तब ही बहु आदर ताहि करियो नंद रानी ॥

na(n)dh ke dhaam gayo tab hee bahu aadhar taeh kariyo na(n)dh raanee ||

ਨਾਮੁ ਸੁ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕਹਿਓ ਇਹ ਕੋ ਕਰਿ ਮਾਨ ਲਈ ਇਹ ਬਾਤ ਬਖਾਨੀ ॥

नामु सु कृसन कहिओ इह को करि मान लई इह बात बखानी ॥

naamu su kirasan kahio ieh ko kar maan liee ieh baat bakhaanee ||

ਲਾਇ ਲਗੰਨ ਨਛਤ੍ਰਨ ਸੋਧਿ ਕਹੀ ਸਮਝਾਇ ਅਕਥ ਕਹਾਨੀ ॥੯੬॥

लाइ लगंन नछत्रन सोधि कही समझाइ अकथ कहानी ॥९६॥

lai laga(n)n nachhatran sodh kahee samajhai akath kahaanee ||96||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਨਾਮ ਤਾ ਕੋ ਧਰਿਯੋ ਗਰਗਹਿ ਮਨੈ ਬਿਚਾਰਿ ॥

कृसन नाम ता को धरियो गरगहि मनै बिचारि ॥

kirasan naam taa ko dhariyo garageh manai bichaar ||

ਸਿਆਮ ਪਲੋਟੈ ਪਾਇ ਜਿਹ ਇਹ ਸਮ ਮਨੋ ਮੁਰਾਰਿ ॥੯੭॥

सिआम पलोटै पाइ जिह इह सम मनो मुरारि ॥९७॥

siaam paloTai pai jeh ieh sam mano muraar ||97||


ਸੁਕਲ ਬਰਨ ਸਤਿਜੁਗਿ ਭਏ ਪੀਤ ਬਰਨ ਤ੍ਰੇਤਾਇ ॥

सुकल बरन सतिजुगि भए पीत बरन त्रेताइ ॥

sukal baran satijug bhe peet baran tretai ||

ਪੀਤ ਬਰਨ ਪਟ ਸਿਆਮ ਤਨ ਨਰ ਨਾਹਨਿ ਕੇ ਨਾਹਿ ॥੯੮॥

पीत बरन पट सिआम तन नर नाहनि के नाहि ॥९८॥

peet baran paT siaam tan nar naahan ke naeh ||98||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅੰਨ੍ਰਯ ਦਯੋ ਗਰਗੈ ਜਬ ਨੰਦਹਿ ਤਉ ਉਠਿ ਕੈ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਆਯੋ ॥

अंन्रय दयो गरगै जब नंदहि तउ उठि कै जमुना तटि आयो ॥

a(n)nray dhayo garagai jab na(n)dheh tau uTh kai jamunaa taT aayo ||

ਨ੍ਰਹਾਇ ਕਟੈ ਕਰਿ ਕੈ ਧੁਤੀਆ ਹਰਿ ਕੋ ਅਰੁ ਦੇਵਨ ਭੋਗ ਲਗਾਯੋ ॥

न्रहाइ कटै करि कै धुतीआ हरि को अरु देवन भोग लगायो ॥

nrahai kaTai kar kai dhuteeaa har ko ar dhevan bhog lagaayo ||

ਆਇ ਗਏ ਨੰਦ ਲਾਲ ਤਬੈ ਕਰ ਸੋ ਗਹਿ ਕੈ ਅਪੁਨੇ ਮੁਖ ਪਾਯੋ ॥

आइ गए नंद लाल तबै कर सो गहि कै अपुने मुख पायो ॥

aai ge na(n)dh laal tabai kar so geh kai apune mukh paayo ||

ਚਕ੍ਰਤ ਹ੍ਵੈ ਗਯੋ ਪੇਖਿ ਤਬੈ ਤਿਹ ਅੰਨ੍ਰਯ ਸਭੈ ਇਨ ਭੀਟਿ ਗਵਾਯੋ ॥੯੯॥

चक्रत ह्वै गयो पेखि तबै तिह अंन्रय सभै इन भीटि गवायो ॥९९॥

chakrat havai gayo pekh tabai teh a(n)nray sabhai in bheeT gavaayo ||99||


ਫੇਰਿ ਬਿਚਾਰ ਕਰਿਯੋ ਮਨ ਮੈ ਇਹ ਤੇ ਨਹਿ ਬਾਲਕ ਪੈ ਹਰਿ ਜੀ ਹੈ ॥

फेरि बिचार करियो मन मै इह ते नहि बालक पै हरि जी है ॥

fer bichaar kariyo man mai ieh te neh baalak pai har jee hai ||

ਮਾਨਸ ਪੰਚ ਭੂ ਆਤਮ ਕੋ ਮਿਲਿ ਕੈ ਤਿਨ ਸੋ ਕਰਤਾ ਸਰਜੀ ਹੈ ॥

मानस पंच भू आतम को मिलि कै तिन सो करता सरजी है ॥

maanas pa(n)ch bhoo aatam ko mil kai tin so karataa sarajee hai ||

ਯਾਦ ਕਰੀ ਮਮਤਾ ਇਹ ਕਾਰਨ ਮਧ ਕੋ ਦੂਰ ਕਰੈ ਕਰਜੀ ਹੈ ॥

याद करी ममता इह कारन मध को दूर करै करजी है ॥

yaadh karee mamataa ieh kaaran madh ko dhoor karai karajee hai ||

ਮੂੰਦ ਲਈ ਤਿਹ ਕੀ ਮਤਿ ਯੌ ਪਟ ਸੌ ਤਨ ਢਾਪਤ ਜਿਉ ਦਰਜੀ ਹੈ ॥੧੦੦॥

मूँद लई तिह की मति यौ पट सौ तन ढापत जिउ दरजी है ॥१००॥

moo(n)dh liee teh kee mat yau paT sau tan ddaapat jiau dharajee hai ||100||


ਨੰਦ ਕੁਮਾਰ ਤ੍ਰਿਬਾਰ ਭਯੋ ਜਬ ਤੋ ਮਨਿ ਬਾਮਨ ਕ੍ਰੋਧ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥

नंद कुमार तृबार भयो जब तो मनि बामन क्रोध करिओ है ॥

na(n)dh kumaar tirabaar bhayo jab to man baaman krodh kario hai ||

ਮਾਤ ਖਿਝੀ ਜਸੁਦਾ ਹਰਿ ਕੋ ਗਹਿ ਕੈ ਉਰ ਆਪਨੇ ਲਾਇ ਧਰਿਓ ਹੈ ॥

मात खिझी जसुदा हरि को गहि कै उर आपने लाइ धरिओ है ॥

maat khijhee jasudhaa har ko geh kai ur aapane lai dhario hai ||

ਬੋਲ ਉਠੇ ਭਗਵਾਨ ਤਬੈ ਇਹ ਦੋਸ ਨ ਹੈ ਮੁਹਿ ਯਾਦ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥

बोल उठे भगवान तबै इह दोस न है मुहि याद करिओ है ॥

bol uThe bhagavaan tabai ieh dhos na hai muh yaadh kario hai ||

ਪੰਡਿਤ ਜਾਨ ਲਈ ਮਨ ਮੈ ਉਠ ਕੈ ਤਿਹ ਕੇ ਤਬ ਪਾਇ ਪਰਿਓ ਹੈ ॥੧੦੧॥

पंडित जान लई मन मै उठ कै तिह के तब पाइ परिओ है ॥१०१॥

pa(n)ddit jaan liee man mai uTh kai teh ke tab pai pario hai ||101||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਨੰਦ ਦਾਨ ਤਾ ਕੌ ਦਯੋ ਕਹ ਲਉ ਕਹੋ ਸੁਨਾਇ ॥

नंद दान ता कौ दयो कह लउ कहो सुनाइ ॥

na(n)dh dhaan taa kau dhayo keh lau kaho sunai ||

ਗਰਗ ਆਪਨੇ ਘਰਿ ਚਲਿਯੋ ਮਹਾ ਪ੍ਰਮੁਦ ਮਨਿ ਪਾਇ ॥੧੦੨॥

गरग आपने घरि चलियो महा प्रमुद मनि पाइ ॥१०२॥

garag aapane ghar chaliyo mahaa pramudh man pai ||102||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਨਾਮਕਰਨ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे नामकरन बरननं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare naamakaran baranana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਾਲਕ ਰੂਪ ਧਰੇ ਹਰਿ ਜੀ ਪਲਨਾ ਪਰ ਝੂਲਤ ਹੈ ਤਬ ਕੈਸੇ ॥

बालक रूप धरे हरि जी पलना पर झूलत है तब कैसे ॥

baalak roop dhare har jee palanaa par jhoolat hai tab kaise ||

ਮਾਤ ਲਡਾਵਤ ਹੈ ਤਿਹ ਕੌ ਔ ਝੁਲਾਵਤ ਹੈ ਕਰਿ ਮੋਹਿਤ ਕੈਸੇ ॥

मात लडावत है तिह कौ औ झुलावत है करि मोहित कैसे ॥

maat laddaavat hai teh kau aau jhulaavat hai kar mohit kaise ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਉਪਮਾ ਅਤਿ ਹੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਮੁਖ ਤੇ ਫੁਨਿ ਐਸੇ ॥

ता छबि की उपमा अति ही कबि स्याम कही मुख ते फुनि ऐसे ॥

taa chhab kee upamaa at hee kab sayaam kahee mukh te fun aaise ||

ਭੂਮਿ ਦੁਖੀ ਮਨ ਮੈ ਅਤਿ ਹੀ ਜਨੁ ਪਾਲਤ ਹੈ ਰਿਪੁ ਦੈਤਨ ਜੈਸੇ ॥੧੦੩॥

भूमि दुखी मन मै अति ही जनु पालत है रिपु दैतन जैसे ॥१०३॥

bhoom dhukhee man mai at hee jan paalat hai rip dhaitan jaise ||103||


ਭੂਖ ਲਗੀ ਜਬ ਹੀ ਹਰਿ ਕੋ ਤਬ ਪੈ ਜਸੁਧਾ ਥਨ ਕੌ ਤਿਨਿ ਚਾਹਿਯੋ ॥

भूख लगी जब ही हरि को तब पै जसुधा थन कौ तिनि चाहियो ॥

bhookh lagee jab hee har ko tab pai jasudhaa than kau tin chaahiyo ||

ਮਾਤ ਉਠੀ ਨ ਭਯੋ ਮਨ ਕ੍ਰੁਧ ਤਬੈ ਪਗ ਸੋ ਮਹਿ ਗੋਡ ਕੈ ਬਾਹਿਯੋ ॥

मात उठी न भयो मन क्रुध तबै पग सो महि गोड कै बाहियो ॥

maat uThee na bhayo man krudh tabai pag so meh godd kai baahiyo ||

ਤੇਲ ਧਰਿਓ ਅਰੁ ਘੀਉ ਭਰਿਓ ਛੁਟਿ ਭੂਮਿ ਪਰਿਯੋ ਜਸੁ ਸ੍ਯਾਮ ਸਰਾਹਿਯੋ ॥

तेल धरिओ अरु घीउ भरिओ छुटि भूमि परियो जसु स्याम सराहियो ॥

tel dhario ar gheeau bhario chhuT bhoom pariyo jas sayaam saraahiyo ||

ਹੋਤ ਕੁਲਾਹਲ ਮਧ ਪੁਰੀ ਧਰਨੀ ਕੋ ਮਨੋ ਸਭ ਸੋਕ ਸੁ ਲਾਹਿਯੋ ॥੧੦੪॥

होत कुलाहल मध पुरी धरनी को मनो सभ सोक सु लाहियो ॥१०४॥

hot kulaahal madh puree dharanee ko mano sabh sok su laahiyo ||104||


ਧਾਇ ਗਏ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਕ ਸਬੈ ਹਰਿ ਜੀ ਤਿਨ ਅਪਨੇ ਕੰਠ ਲਗਾਏ ॥

धाइ गए बृज लोक सबै हरि जी तिन अपने कंठ लगाए ॥

dhai ge biraj lok sabai har jee tin apane ka(n)Th lagaae ||

ਅਉਰ ਸਭੈ ਬ੍ਰਿਜ ਲੋਕ ਬਧੂ ਮਿਲਿ ਭਾਤਨ ਭਾਤਨ ਮੰਗਲ ਗਾਏ ॥

अउर सभै बृज लोक बधू मिलि भातन भातन मंगल गाए ॥

aaur sabhai biraj lok badhoo mil bhaatan bhaatan ma(n)gal gaae ||

ਭੂਮਿ ਹਲੀ ਨਭ ਯੋ ਇਹ ਕਉਤਕ ਬਾਰਨ ਭੇਦ ਯੌ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਏ ॥

भूमि हली नभ यो इह कउतक बारन भेद यौ भाखि सुनाए ॥

bhoom halee nabh yo ieh kautak baaran bhedh yau bhaakh sunaae ||

ਚਕ੍ਰਤ ਬਾਤ ਭਏ ਸੁਨਿ ਕੈ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨ ਸਾਚ ਨ ਲਾਏ ॥੧੦੫॥

चक्रत बात भए सुनि कै अपने मन मै तिन साच न लाए ॥१०५॥

chakrat baat bhe sun kai apane man mai tin saach na laae ||105||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨਹਿ ਕੇ ਸਿਰ ਸਾਥ ਛੁਹਾਇ ਕੈ ਅਉਰ ਸਭੈ ਤਿਨ ਅੰਗਨ ਕੋ ॥

कानहि के सिर साथ छुहाइ कै अउर सभै तिन अंगन को ॥

kaaneh ke sir saath chhuhai kai aaur sabhai tin a(n)gan ko ||

ਅਰੁ ਲੋਕ ਬੁਲਾਇ ਸਬੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੈ ਬਹੁ ਦਾਨ ਦਯੋ ਤਿਨ ਮੰਗਨ ਕੋ ॥

अरु लोक बुलाइ सबै बृज कै बहु दान दयो तिन मंगन को ॥

ar lok bulai sabai biraj kai bahu dhaan dhayo tin ma(n)gan ko ||

ਅਰੁ ਦਾਨ ਦਯੋ ਸਭ ਹੀ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਕਰ ਕੈ ਪਟ ਰੰਗਨ ਰੰਗਨ ਕੋ ॥

अरु दान दयो सभ ही गृह को कर कै पट रंगन रंगन को ॥

ar dhaan dhayo sabh hee gireh ko kar kai paT ra(n)gan ra(n)gan ko ||

ਇਹ ਸਾਜ ਬਨਾਇ ਦਯੋ ਤਿਨ ਕੋ ਅਰੁ ਅਉਰ ਦਯੋ ਦੁਖ ਭੰਗਨ ਕੋ ॥੧੦੬॥

इह साज बनाइ दयो तिन को अरु अउर दयो दुख भंगन को ॥१०६॥

eeh saaj banai dhayo tin ko ar aaur dhayo dhukh bha(n)gan ko ||106||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਤ੍ਰਿਣਾਵਰਤ ਸੋ ॥

कंस बाच तृणावरत सो ॥

ka(n)s baach tiranaavarat so ||

ਅੜਿਲ ॥

अड़िल ॥

aRil ||

ਜਬੈ ਪੂਤਨਾ ਹਨੀ ਸੁਨੀ ਗੋਕੁਲ ਬਿਖੈ ॥

जबै पूतना हनी सुनी गोकुल बिखै ॥

jabai pootanaa hanee sunee gokul bikhai ||

ਤ੍ਰਿਣਾਵਰਤ ਸੋ ਕਹਿਯੋ ਜਾਹੁ ਤਾ ਕੋ ਤਿਖੈ ॥

तृणावरत सो कहियो जाहु ता को तिखै ॥

tiranaavarat so kahiyo jaahu taa ko tikhai ||

ਨੰਦ ਬਾਲ ਕੋ ਮਾਰੋ ਐਸੇ ਪਟਕਿ ਕੈ ॥

नंद बाल को मारो ऐसे पटकि कै ॥

na(n)dh baal ko maaro aaise paTak kai ||

ਹੋ ਪਾਥਰ ਜਾਣੁ ਚਲਾਈਐ ਕਰ ਸੋ ਝਟਕਿ ਕੈ ॥੧੦੭॥

हो पाथर जाणु चलाईऐ कर सो झटकि कै ॥१०७॥

ho paathar jaan chalaieeaai kar so jhaTak kai ||107||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੰਸਹਿ ਕੈ ਤਸਲੀਮ ਚਲਿਯੋ ਹੈ ਤ੍ਰਿਣਾਵਰਤ ਸੀਘਰ ਦੈ ਗੋਕੁਲ ਆਯੋ ॥

कंसहि कै तसलीम चलियो है तृणावरत सीघर दै गोकुल आयो ॥

ka(n)seh kai tasaleem chaliyo hai tiranaavarat seeghar dhai gokul aayo ||

ਬਉਡਰ ਕੋ ਤਬ ਰੂਪ ਧਰਿਯੋ ਧਰਨੀ ਪਰ ਕੈ ਬਲ ਪਉਨ ਬਹਾਯੋ ॥

बउडर को तब रूप धरियो धरनी पर कै बल पउन बहायो ॥

bauddar ko tab roop dhariyo dharanee par kai bal paun bahaayo ||

ਆਗਮ ਜਾਨ ਕੈ ਭਾਰੀ ਭਯੋ ਹਰਿ ਮਾਰਿ ਤਬੈ ਵਹ ਭੂਮਿ ਪਰਾਯੋ ॥

आगम जान कै भारी भयो हरि मारि तबै वह भूमि परायो ॥

aagam jaan kai bhaaree bhayo har maar tabai veh bhoom paraayo ||

ਪੂਰ ਭਏ ਦ੍ਰਿਗ ਮੂੰਦ ਕੈ ਲੋਕਨ ਲੈ ਹਰਿ ਕੋ ਨਭਿ ਕੇ ਮਗ ਧਾਯੋ ॥੧੦੮॥

पूर भए दृग मूँद कै लोकन लै हरि को नभि के मग धायो ॥१०८॥

poor bhe dhirag moo(n)dh kai lokan lai har ko nabh ke mag dhaayo ||108||


ਜਉ ਹਰਿ ਜੀ ਨਭਿ ਬੀਚ ਗਯੋ ਕਰ ਤਉ ਅਪਨੇ ਬਲ ਕੋ ਤਨ ਚਟਾ ॥

जउ हरि जी नभि बीच गयो कर तउ अपने बल को तन चटा ॥

jau har jee nabh beech gayo kar tau apane bal ko tan chaTaa ||

ਰੂਪ ਭਯਾਨਕ ਕੋ ਧਰਿ ਕੈ ਮਿਲਿ ਜੁਧ ਕਰਿਯੋ ਤਬ ਰਾਛਸ ਫਟਾ ॥

रूप भयानक को धरि कै मिलि जुध करियो तब राछस फटा ॥

roop bhayaanak ko dhar kai mil judh kariyo tab raachhas faTaa ||

ਫੇਰਿ ਸੰਭਾਰ ਦਸੋ ਨਖ ਆਪਨੇ ਕੈ ਕੈ ਤੁਰਾ ਸਿਰ ਸਤ੍ਰ ਕੋ ਕਟਾ ॥

फेरि संभार दसो नख आपने कै कै तुरा सिर सत्र को कटा ॥

fer sa(n)bhaar dhaso nakh aapane kai kai turaa sir satr ko kaTaa ||

ਰੁੰਡ ਗਿਰਿਯੋ ਜਨੁ ਪੇਡਿ ਗਿਰਿਯੋ ਇਮ ਮੁੰਡ ਪਰਿਯੋ ਜਨੁ ਡਾਰ ਤੇ ਖਟਾ ॥੧੦੯॥

रुँड गिरियो जनु पेडि गिरियो इम मुँड परियो जनु डार ते खटा ॥१०९॥

ru(n)dd giriyo jan pedd giriyo im mu(n)dd pariyo jan ddaar te khaTaa ||109||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਤ੍ਰਿਣਾਵਰਤ ਬਧਹ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे तृणावरत बधह समापतम ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare tiranaavarat badheh samaapatam ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਿਨਾ ਜਨ ਗੋਕੁਲ ਕੇ ਬਹੁ ਆਜਿਜ ਹੋਇ ਇਕਤ੍ਰ ਢੂੰਡਾਯੋ ॥

कान्रह बिना जन गोकुल के बहु आजिज होइ इकत्र ढूँडायो ॥

kaanreh binaa jan gokul ke bahu aajij hoi ikatr ddoo(n)ddaayo ||

ਦੁਆਦਸ ਕੋਸ ਪੈ ਜਾਇ ਪਰਿਯੋ ਹੁਤੋ ਖੋਜਤ ਖੋਜਤ ਪੈ ਮਿਲਿ ਪਾਯੋ ॥

दुआदस कोस पै जाइ परियो हुतो खोजत खोजत पै मिलि पायो ॥

dhuaadhas kos pai jai pariyo huto khojat khojat pai mil paayo ||

ਲਾਇ ਲੀਯੋ ਹੀਯ ਸੋ ਸਭ ਹੀ ਤਬ ਹੀ ਮਿਲਿ ਕੈ ਉਨ ਮੰਗਲ ਗਾਯੋ ॥

लाइ लीयो हीय सो सभ ही तब ही मिलि कै उन मंगल गायो ॥

lai leeyo heey so sabh hee tab hee mil kai un ma(n)gal gaayo ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਇਮ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਯੋ ॥੧੧੦॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने मुख ते इम भाखि सुनायो ॥११०॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne mukh te im bhaakh sunaayo ||110||


ਦੈਤ ਕੋ ਰੂਪ ਭਯਾਨਕ ਦੇਖ ਕੈ ਗੋਪ ਸਭੌ ਮਨ ਮੈ ਡਰੁ ਕੀਆ ॥

दैत को रूप भयानक देख कै गोप सभौ मन मै डरु कीआ ॥

dhait ko roop bhayaanak dhekh kai gop sabhau man mai ddar keeaa ||

ਮਾਨਸ ਕੀ ਕਹ ਹੈ ਗਨਤੀ ਸੁਰ ਰਾਜਹਿ ਕੋ ਪਿਖਿ ਫਾਟਤ ਹੀਆ ॥

मानस की कह है गनती सुर राजहि को पिखि फाटत हीआ ॥

maanas kee keh hai ganatee sur raajeh ko pikh faaTat heeaa ||

ਐਸੋ ਮਹਾ ਬਿਕਰਾਲ ਸਰੂਪ ਤਿਸੈ ਹਰਿ ਨੇ ਛਿਨ ਮੈ ਹਨਿ ਲੀਆ ॥

ऐसो महा बिकराल सरूप तिसै हरि ने छिन मै हनि लीआ ॥

aaiso mahaa bikaraal saroop tisai har ne chhin mai han leeaa ||

ਆਇ ਸੁਨਿਓ ਅਪੁਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮੈ ਤਿਹ ਕੋ ਬਿਰਤਾਤ ਸਭੈ ਕਹਿ ਦੀਆ ॥੧੧੧॥

आइ सुनिओ अपुने गृह मै तिह को बिरतात सभै कहि दीआ ॥१११॥

aai sunio apune gireh mai teh ko birataat sabhai keh dheeaa ||111||


ਦੈ ਬਹੁ ਬਿਪਨ ਕੋ ਤਬ ਦਾਨ ਸੁ ਖੇਲਤ ਹੈ ਸੁਤ ਸੋ ਫੁਨਿ ਮਾਈ ॥

दै बहु बिपन को तब दान सु खेलत है सुत सो फुनि माई ॥

dhai bahu bipan ko tab dhaan su khelat hai sut so fun maiee ||

ਅੰਗੁਲ ਕੈ ਮੁਖ ਸਾਮੁਹਿ ਹੋਤ ਹੀ ਲੇਤ ਭਲੇ ਹਰਿ ਜੀ ਮੁਸਕਾਈ ॥

अंगुल कै मुख सामुहि होत ही लेत भले हरि जी मुसकाई ॥

a(n)gul kai mukh saamuh hot hee let bhale har jee musakaiee ||

ਆਨੰਦ ਹੋਤ ਮਹਾ ਜਸੁਦਾ ਮਨਿ ਅਉਰ ਕਹਾ ਕਹੋ ਤੋਹਿ ਬਡਾਈ ॥

आनंद होत महा जसुदा मनि अउर कहा कहो तोहि बडाई ॥

aana(n)dh hot mahaa jasudhaa man aaur kahaa kaho toh baddaiee ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਉਪਮਾ ਅਤਿ ਪੈ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨ ਮੈ ਤਨ ਤੇ ਅਤਿ ਭਾਈ ॥੧੧੨॥

ता छबि की उपमा अति पै कबि के मन मै तन ते अति भाई ॥११२॥

taa chhab kee upamaa at pai kab ke man mai tan te at bhaiee ||112||


ਅਥ ਸਾਰੀ ਬਿਸ੍ਵ ਮੁਖ ਮੋ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜੀ ਜਸੋਧਾ ਕੋ ਦਿਖਾਈ ॥

अथ सारी बिस्व मुख मो कृसन जी जसोधा को दिखाई ॥

ath saaree bisavai mukh mo kirasan jee jasodhaa ko dhikhaiee ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੋਹਿ ਬਢਾਇ ਮਹਾ ਮਨ ਮੈ ਹਰਿ ਕੌ ਲਗੀ ਫੇਰਿ ਖਿਲਾਵਨ ਮਾਈ ॥

मोहि बढाइ महा मन मै हरि कौ लगी फेरि खिलावन माई ॥

moh baddai mahaa man mai har kau lagee fer khilaavan maiee ||

ਤਉ ਹਰਿ ਜੀ ਮਨ ਮਧ ਬਿਚਾਰਿ ਸਿਤਾਬ ਲਈ ਮੁਖਿ ਮਾਹਿ ਜੰਭਾਈ ॥

तउ हरि जी मन मध बिचारि सिताब लई मुखि माहि जंभाई ॥

tau har jee man madh bichaar sitaab liee mukh maeh ja(n)bhaiee ||

ਚਕ੍ਰਤ ਹੋਇ ਰਹੀ ਜਸੁਧਾ ਮਨ ਮਧਿ ਭਈ ਤਿਹ ਕੇ ਦੁਚਿਤਾਈ ॥

चक्रत होइ रही जसुधा मन मधि भई तिह के दुचिताई ॥

chakrat hoi rahee jasudhaa man madh bhiee teh ke dhuchitaiee ||

ਮਾਇ ਸੁ ਢਾਪਿ ਲਈ ਤਬ ਹੀ ਸਭ ਬਿਸਨ ਮਯਾ ਤਿਨ ਜੋ ਲਖਿ ਪਾਈ ॥੧੧੩॥

माइ सु ढापि लई तब ही सभ बिसन मया तिन जो लखि पाई ॥११३॥

mai su ddaap liee tab hee sabh bisan mayaa tin jo lakh paiee ||113||


ਕਾਨ੍ਰਹ ਚਲੇ ਘੁੰਟੂਆ ਘਰ ਭੀਤਰ ਮਾਤ ਕਰੈ ਉਪਮਾ ਤਿਹ ਚੰਗੀ ॥

कान्रह चले घुँटूआ घर भीतर मात करै उपमा तिह चंगी ॥

kaanreh chale ghu(n)Tooaa ghar bheetar maat karai upamaa teh cha(n)gee ||

ਲਾਲਨ ਕੀ ਮਨਿ ਲਾਲ ਕਿਧੌ ਨੰਦ ਧੇਨ ਸਭੈ ਤਿਹ ਕੇ ਸਭ ਸੰਗੀ ॥

लालन की मनि लाल किधौ नंद धेन सभै तिह के सभ संगी ॥

laalan kee man laal kidhau na(n)dh dhen sabhai teh ke sabh sa(n)gee ||

ਲਾਲ ਭਈ ਜਸੁਦਾ ਪਿਖਿ ਪੁਤ੍ਰਹਿੰ ਜਿਉ ਘਨਿ ਮੈ ਚਮਕੈ ਦੁਤਿ ਰੰਗੀ ॥

लाल भई जसुदा पिखि पुत्रहिं जिउ घनि मै चमकै दुति रंगी ॥

laal bhiee jasudhaa pikh putrahi(n) jiau ghan mai chamakai dhut ra(n)gee ||

ਕਿਉ ਨਹਿ ਹੋਵੈ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਸੁ ਮਾਤ ਭਯੋ ਜਿਨ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਤਾਤ ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ॥੧੧੪॥

किउ नहि होवै प्रसंन्य सु मात भयो जिन के गृहि तात तृभंगी ॥११४॥

kiau neh hovai prasa(n)nay su maat bhayo jin ke gireh taat tirabha(n)gee ||114||


ਰਾਹਿ ਸਿਖਾਵਨ ਕਾਜ ਗਡੀਹਰਿ ਗੋਪ ਮਨੋ ਮਿਲ ਕੈ ਸੁ ਬਨਾਯੋ ॥

राहि सिखावन काज गडीहरि गोप मनो मिल कै सु बनायो ॥

raeh sikhaavan kaaj gaddeehar gop mano mil kai su banaayo ||

ਕਾਨਹਿ ਕੋ ਤਿਹ ਉਪਰ ਬਿਠਾਇ ਕੈ ਆਪਨੇ ਆਙਨ ਬੀਚ ਧਵਾਯੋ ॥

कानहि को तिह उपर बिठाइ कै आपने आङन बीच धवायो ॥

kaaneh ko teh upar biThai kai aapane aan(g)n beech dhavaayo ||

ਫੇਰਿ ਉਠਾਇ ਲਯੋ ਜਸੁਦਾ ਉਰ ਮੋ ਗਹਿ ਕੈ ਪਯ ਪਾਨ ਕਰਾਯੋ ॥

फेरि उठाइ लयो जसुदा उर मो गहि कै पय पान करायो ॥

fer uThai layo jasudhaa ur mo geh kai pay paan karaayo ||

ਸੋਇ ਰਹੇ ਹਰਿ ਜੀ ਤਬ ਹੀ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਸੁਖ ਪਾਯੋ ॥੧੧੫॥

सोइ रहे हरि जी तब ही कबि ने अपुने मन मै सुख पायो ॥११५॥

soi rahe har jee tab hee kab ne apune man mai sukh paayo ||115||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬ ਹੀ ਨਿੰਦ੍ਰਾ ਛੁਟ ਗਈ ਹਰੀ ਉਠੇ ਤਤਕਾਲ ॥

जब ही निंद्रा छुट गई हरी उठे ततकाल ॥

jab hee ni(n)dhraa chhuT giee haree uThe tatakaal ||

ਖੇਲ ਖਿਲਾਵਨ ਸੋ ਕਰਿਯੋ ਲੋਚਨ ਜਾਹਿ ਬਿਸਾਲ ॥੧੧੬॥

खेल खिलावन सो करियो लोचन जाहि बिसाल ॥११६॥

khel khilaavan so kariyo lochan jaeh bisaal ||116||


ਇਸੀ ਭਾਤਿ ਸੋ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜੀ ਖੇਲ ਕਰੇ ਬ੍ਰਿਜ ਮਾਹਿ ॥

इसी भाति सो कृसन जी खेल करे बृज माहि ॥

eisee bhaat so kirasan jee khel kare biraj maeh ||

ਅਬ ਪਗ ਚਲਤਿਯੋ ਕੀ ਕਥਾ ਕਹੋਂ ਸੁਨੋ ਨਰ ਨਾਹਿ ॥੧੧੭॥

अब पग चलतियो की कथा कहों सुनो नर नाहि ॥११७॥

ab pag chalatiyo kee kathaa kaho(n) suno nar naeh ||117||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸਾਲ ਬਿਤੀਤ ਭਯੋ ਜਬ ਹੀ ਤਬ ਕਾਨ੍ਰਹ ਭਯੋ ਬਲ ਕੈ ਪਗ ਮੈ ॥

साल बितीत भयो जब ही तब कान्रह भयो बल कै पग मै ॥

saal biteet bhayo jab hee tab kaanreh bhayo bal kai pag mai ||

ਜਸੁ ਮਾਤ ਪ੍ਰਸੰਨ੍ਯ ਭਈ ਮਨ ਮੈ ਪਿਖਿ ਧਾਵਤ ਪੁਤ੍ਰਹਿ ਕੋ ਮਗ ਮੈ ॥

जसु मात प्रसंन्य भई मन मै पिखि धावत पुत्रहि को मग मै ॥

jas maat prasa(n)nay bhiee man mai pikh dhaavat putreh ko mag mai ||

ਬਾਤ ਕਰੀ ਇਹ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਪ੍ਰਭਾ ਫੈਲ ਰਹੀ ਸੁ ਸਭੈ ਜਗ ਮੈ ॥

बात करी इह गोपिन सो प्रभा फैल रही सु सभै जग मै ॥

baat karee ieh gopin so prabhaa fail rahee su sabhai jag mai ||

ਜਨੁ ਸੁੰਦਰਤਾ ਅਤਿ ਮਾਨੁਖ ਕੋ ਸਬ ਧਾਇ ਧਸੀ ਹਰਿ ਕੈ ਨਗ ਮੈ ॥੧੧੮॥

जनु सुँदरता अति मानुख को सब धाइ धसी हरि कै नग मै ॥११८॥

jan su(n)dharataa at maanukh ko sab dhai dhasee har kai nag mai ||118||


ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਮਿਲ ਕੈ ਹਰਿ ਜੀ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਖੇਲ ਮਚਾਵਤ ਹੈ ॥

गोपिन सो मिल कै हरि जी जमुना तटि खेल मचावत है ॥

gopin so mil kai har jee jamunaa taT khel machaavat hai ||

ਜਿਮ ਬੋਲਤ ਹੈ ਖਗ ਬੋਲਤ ਹੈ ਜਿਮ ਧਾਵਤ ਹੈ ਤਿਮ ਧਾਵਤ ਹੈ ॥

जिम बोलत है खग बोलत है जिम धावत है तिम धावत है ॥

jim bolat hai khag bolat hai jim dhaavat hai tim dhaavat hai ||

ਫਿਰਿ ਬੈਠਿ ਬਰੇਤਨ ਮਧ ਮਨੋ ਹਰਿ ਸੋ ਵਹ ਤਾਲ ਬਜਾਵਤ ਹੈ ॥

फिरि बैठि बरेतन मध मनो हरि सो वह ताल बजावत है ॥

fir baiTh baretan madh mano har so veh taal bajaavat hai ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਨ ਕੀ ਉਪਮਾ ਸੁਭ ਗੀਤ ਭਲੇ ਮੁਖ ਗਾਵਤ ਹੈ ॥੧੧੯॥

कबि स्याम कहै तिन की उपमा सुभ गीत भले मुख गावत है ॥११९॥

kab sayaam kahai tin kee upamaa subh geet bhale mukh gaavat hai ||119||


ਕੁੰਜਨ ਮੈ ਜਮੁਨਾ ਤਟਿ ਪੈ ਮਿਲਿ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਹਰਿ ਖੇਲਤ ਹੈ ॥

कुँजन मै जमुना तटि पै मिलि गोपिन सो हरि खेलत है ॥

ku(n)jan mai jamunaa taT pai mil gopin so har khelat hai ||

ਤਰਿ ਕੈ ਤਬ ਹੀ ਸਿਗਰੀ ਜਮੁਨਾ ਹਟਿ ਮਧਿ ਬਰੇਤਨ ਪੇਲਤ ਹੈ ॥

तरि कै तब ही सिगरी जमुना हटि मधि बरेतन पेलत है ॥

tar kai tab hee sigaree jamunaa haT madh baretan pelat hai ||

ਫਿਰਿ ਕੂਦਤ ਹੈ ਜੁ ਮਨੋ ਨਟ ਜਿਉ ਜਲ ਕੋ ਹਿਰਦੇ ਸੰਗਿ ਰੇਲਤ ਹੈ ॥

फिरि कूदत है जु मनो नट जिउ जल को हिरदे संगि रेलत है ॥

fir koodhat hai ju mano naT jiau jal ko hiradhe sa(n)g relat hai ||

ਫਿਰਿ ਹ੍ਵੈ ਹੁਡੂਆ ਲਰਕੇ ਦੁਹੂੰ ਓਰ ਤੇ ਆਪਸਿ ਮੈ ਸਿਰ ਮੇਲਤ ਹੈ ॥੧੨੦॥

फिरि ह्वै हुडूआ लरके दुहूँ ओर ते आपसि मै सिर मेलत है ॥१२०॥

fir havai huddooaa larake dhuhoo(n) or te aapas mai sir melat hai ||120||


ਆਇ ਜਬੈ ਹਰਿ ਜੀ ਗ੍ਰਿਹਿ ਆਪਨੇ ਖਾਇ ਕੈ ਭੋਜਨ ਖੇਲਨ ਲਾਗੇ ॥

आइ जबै हरि जी गृहि आपने खाइ कै भोजन खेलन लागे ॥

aai jabai har jee gireh aapane khai kai bhojan khelan laage ||

ਮਾਤ ਕਹੈ ਨ ਰਹੈ ਘਰਿ ਭੀਤਰਿ ਬਾਹਰਿ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਉਠਿ ਭਾਗੇ ॥

मात कहै न रहै घरि भीतरि बाहरि को तब ही उठि भागे ॥

maat kahai na rahai ghar bheetar baahar ko tab hee uTh bhaage ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਨ ਕੀ ਉਪਮਾ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪਤਿ ਬੀਥਿਨ ਮੈ ਅਨੁਰਾਗੇ ॥

स्याम कहै तिन की उपमा बृज के पति बीथिन मै अनुरागे ॥

sayaam kahai tin kee upamaa biraj ke pat beethin mai anuraage ||

ਖੇਲ ਮਚਾਇ ਦਯੋ ਲੁਕ ਮੀਚਨ ਗੋਪ ਸਭੈ ਤਿਹ ਕੇ ਰਸਿ ਪਾਗੇ ॥੧੨੧॥

खेल मचाइ दयो लुक मीचन गोप सभै तिह के रसि पागे ॥१२१॥

khel machai dhayo luk meechan gop sabhai teh ke ras paage ||121||


ਖੇਲਤ ਹੈ ਜਮੁਨਾ ਤਟ ਪੈ ਮਨ ਆਨੰਦ ਕੈ ਹਰਿ ਬਾਰਨ ਸੋ ॥

खेलत है जमुना तट पै मन आनंद कै हरि बारन सो ॥

khelat hai jamunaa taT pai man aana(n)dh kai har baaran so ||

ਚੜਿ ਰੂਖ ਚਲਾਵਤ ਸੋਟ ਕਿਧੋ ਸੋਊ ਧਾਇ ਕੈ ਲਿਆਵੈ ਗੁਆਰਨ ਕੋ ॥

चड़ि रूख चलावत सोट किधो सोऊ धाइ कै लिआवै गुआरन को ॥

chaR rookh chalaavat soT kidho souoo dhai kai liaavai guaaran ko ||

ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਲਖੀ ਤਿਨ ਕੀ ਉਪਮਾ ਮਨੋ ਮਧਿ ਅਨੰਤ ਅਪਾਰਨ ਸੋ ॥

कबि स्याम लखी तिन की उपमा मनो मधि अनंत अपारन सो ॥

kab sayaam lakhee tin kee upamaa mano madh ana(n)t apaaran so ||

ਬਲ ਜਾਤ ਸਬੈ ਮੁਨਿ ਦੇਖਨ ਕੌ ਕਰਿ ਕੈ ਬਹੁ ਜੋਗ ਹਜਾਰਨ ਸੋ ॥੧੨੨॥

बल जात सबै मुनि देखन कौ करि कै बहु जोग हजारन सो ॥१२२॥

bal jaat sabai mun dhekhan kau kar kai bahu jog hajaaran so ||122||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਖੇਲਬੋ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे गोपिन सो खेलबो बरननं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare gopin so khelabo baranana(n) ||


ਅਥ ਮਾਖਨ ਚੁਰਾਇ ਖੈਬੋ ਕਥਨੰ ॥

अथ माखन चुराइ खैबो कथनं ॥

ath maakhan churai khaibo kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਖੇਲਨ ਕੇ ਮਿਸ ਪੈ ਹਰਿ ਜੀ ਘਰਿ ਭੀਤਰ ਪੈਠਿ ਕੈ ਮਾਖਨ ਖਾਵੈ ॥

खेलन के मिस पै हरि जी घरि भीतर पैठि कै माखन खावै ॥

khelan ke mis pai har jee ghar bheetar paiTh kai maakhan khaavai ||

ਨੈਨਨ ਸੈਨ ਤਬੈ ਕਰਿ ਕੈ ਸਭ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਤਬ ਹੀ ਸੁ ਖੁਲਾਵੈ ॥

नैनन सैन तबै करि कै सभ गोपिन को तब ही सु खुलावै ॥

nainan sain tabai kar kai sabh gopin ko tab hee su khulaavai ||

ਬਾਕੀ ਬਚਿਯੋ ਅਪਨੇ ਕਰਿ ਲੈ ਕਰਿ ਬਾਨਰ ਕੇ ਮੁਖ ਭੀਤਰਿ ਪਾਵੈ ॥

बाकी बचियो अपने करि लै करि बानर के मुख भीतरि पावै ॥

baakee bachiyo apane kar lai kar baanar ke mukh bheetar paavai ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਹ ਕੀ ਉਪਮਾ ਇਹ ਕੈ ਬਿਧਿ ਗੋਪਿਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਖਿਝਾਵੈ ॥੧੨੩॥

स्याम कहै तिह की उपमा इह कै बिधि गोपिन कान्रह खिझावै ॥१२३॥

sayaam kahai teh kee upamaa ieh kai bidh gopin kaanreh khijhaavai ||123||


ਖਾਇ ਗਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਜਬ ਮਾਖਨ ਤਉ ਗੁਪੀਆ ਸਭ ਜਾਇ ਪੁਕਾਰੀ ॥

खाइ गयो हरि जी जब माखन तउ गुपीआ सभ जाइ पुकारी ॥

khai gayo har jee jab maakhan tau gupeeaa sabh jai pukaaree ||

ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਪਤਿ ਕੀ ਪਤਨੀ ਤੁਮ ਡਾਰ ਦਈ ਦਧਿ ਕੀ ਸਭ ਖਾਰੀ ॥

बात सुनो पति की पतनी तुम डार दई दधि की सभ खारी ॥

baat suno pat kee patanee tum ddaar dhiee dhadh kee sabh khaaree ||

ਕਾਨਹਿ ਕੇ ਡਰ ਤੇ ਹਮ ਚੋਰ ਕੈ ਰਾਖਤ ਹੈ ਚੜਿ ਊਚ ਅਟਾਰੀ ॥

कानहि के डर ते हम चोर कै राखत है चड़ि ऊच अटारी ॥

kaaneh ke ddar te ham chor kai raakhat hai chaR uooch aTaaree ||

ਊਖਲ ਕੋ ਧਰਿ ਕੈ ਮਨਹਾ ਪਰ ਖਾਤ ਹੈ ਲੰਗਰ ਦੈ ਕਰਿ ਗਾਰੀ ॥੧੨੪॥

ऊखल को धरि कै मनहा पर खात है लंगर दै करि गारी ॥१२४॥

uookhal ko dhar kai manahaa par khaat hai la(n)gar dhai kar gaaree ||124||


ਹੋਤ ਨਹੀ ਜਿਹ ਕੇ ਘਰ ਮੈ ਦਧਿ ਦੈ ਕਰਿ ਗਾਰਨ ਸੋਰ ਕਰੈ ਹੈ ॥

होत नही जिह के घर मै दधि दै करि गारन सोर करै है ॥

hot nahee jeh ke ghar mai dhadh dhai kar gaaran sor karai hai ||

ਜੋ ਲਰਕਾ ਜਨਿ ਕੈ ਖਿਝ ਹੈ ਜਨ ਤੋ ਮਿਲਿ ਸੋਟਨ ਸਾਥ ਮਰੈ ਹੈ ॥

जो लरका जनि कै खिझ है जन तो मिलि सोटन साथ मरै है ॥

jo larakaa jan kai khijh hai jan to mil soTan saath marai hai ||

ਆਇ ਪਰੈ ਜੁ ਤ੍ਰੀਆ ਤਿਹ ਪੈ ਸਿਰ ਕੇ ਤਿਹ ਬਾਰ ਉਖਾਰ ਡਰੈ ਹੈ ॥

आइ परै जु त्रीआ तिह पै सिर के तिह बार उखार डरै है ॥

aai parai ju treeaa teh pai sir ke teh baar ukhaar ddarai hai ||

ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਜਸੁਦਾ ਸੁਤ ਕੀ ਸੁ ਬਿਨਾ ਉਤਪਾਤ ਨ ਕਾਨ੍ਰਹ ਟਰੈ ਹੈ ॥੧੨੫॥

बात सुनो जसुदा सुत की सु बिना उतपात न कान्रह टरै है ॥१२५॥

baat suno jasudhaa sut kee su binaa utapaat na kaanreh Tarai hai ||125||


ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਜਬ ਗੋਪਿਨ ਕੀ ਜਸੁਦਾ ਤਬ ਹੀ ਮਨ ਮਾਹਿ ਖਿਝੀ ਹੈ ॥

बात सुनी जब गोपिन की जसुदा तब ही मन माहि खिझी है ॥

baat sunee jab gopin kee jasudhaa tab hee man maeh khijhee hai ||

ਆਇ ਗਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਤਬ ਹੀ ਪਿਖਿ ਪੁਤ੍ਰਹਿ ਕੌ ਮਨ ਮਾਹਿ ਰਿਝੀ ਹੈ ॥

आइ गयो हरि जी तब ही पिखि पुत्रहि कौ मन माहि रिझी है ॥

aai gayo har jee tab hee pikh putreh kau man maeh rijhee hai ||

ਬੋਲ ਉਠੇ ਨੰਦ ਲਾਲ ਤਬੈ ਇਹ ਗਵਾਰ ਖਿਝਾਵਨ ਮੋਹਿ ਗਿਝੀ ਹੈ ॥

बोल उठे नंद लाल तबै इह गवार खिझावन मोहि गिझी है ॥

bol uThe na(n)dh laal tabai ieh gavaar khijhaavan moh gijhee hai ||

ਮਾਤ ਕਹਾ ਦਧਿ ਦੋਸੁ ਲਗਾਵਤ ਮਾਰ ਬਿਨਾ ਇਹ ਨਾਹਿ ਸਿਝੀ ਹੈ ॥੧੨੬॥

मात कहा दधि दोसु लगावत मार बिना इह नाहि सिझी है ॥१२६॥

maat kahaa dhadh dhos lagaavat maar binaa ieh naeh sijhee hai ||126||


ਮਾਤ ਕਹਿਯੋ ਅਪਨੇ ਸੁਤ ਕੋ ਕਹੁ ਕਿਉ ਕਰਿ ਤੋਹਿ ਖਿਝਾਵਤ ਗੋਪੀ ॥

मात कहियो अपने सुत को कहु किउ करि तोहि खिझावत गोपी ॥

maat kahiyo apane sut ko kahu kiau kar toh khijhaavat gopee ||

ਮਾਤ ਸੌ ਬਾਤ ਕਹੀ ਸੁਤ ਯੌ ਕਰਿ ਸੋ ਗਹਿ ਭਾਗਤ ਹੈ ਮੁਹਿ ਟੋਪੀ ॥

मात सौ बात कही सुत यौ करि सो गहि भागत है मुहि टोपी ॥

maat sau baat kahee sut yau kar so geh bhaagat hai muh Topee ||

ਡਾਰ ਕੈ ਨਾਸ ਬਿਖੈ ਅੰਗੁਰੀ ਸਿਰਿ ਮਾਰਤ ਹੈ ਮੁਝ ਕੋ ਵਹ ਥੋਪੀ ॥

डार कै नास बिखै अंगुरी सिरि मारत है मुझ को वह थोपी ॥

ddaar kai naas bikhai a(n)guree sir maarat hai mujh ko veh thopee ||

ਨਾਕ ਘਸਾਇ ਹਸਾਇ ਉਨੈ ਫਿਰਿ ਲੇਤ ਤਬੈ ਵਹ ਦੇਤ ਹੈ ਟੋਪੀ ॥੧੨੭॥

नाक घसाइ हसाइ उनै फिरि लेत तबै वह देत है टोपी ॥१२७॥

naak ghasai hasai unai fir let tabai veh dhet hai Topee ||127||


ਜਸੁਧਾ ਬਾਚ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ॥

जसुधा बाच गोपिन सो ॥

jasudhaa baach gopin so ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਤ ਖਿਝੀ ਉਨ ਗੋਪਿਨ ਕੋ ਤੁਮ ਕਿਉ ਸੁਤ ਮੋਹਿ ਖਿਝਾਵਤ ਹਉ ਰੀ ॥

मात खिझी उन गोपिन को तुम किउ सुत मोहि खिझावत हउ री ॥

maat khijhee un gopin ko tum kiau sut moh khijhaavat hau ree ||

ਬੋਲਤ ਹੋ ਅਪਨੇ ਮੁਖ ਤੇ ਹਮਰੇ ਧਨ ਹੈ ਦਧਿ ਦਾਮ ਸੁ ਗਉ ਰੀ ॥

बोलत हो अपने मुख ते हमरे धन है दधि दाम सु गउ री ॥

bolat ho apane mukh te hamare dhan hai dhadh dhaam su gau ree ||

ਮੂੜ ਅਹੀਰ ਨ ਜਾਨਤ ਹੈ ਬਢਿ ਬੋਲਤ ਹੋ ਸੁ ਰਹੋ ਤੁਮ ਠਉ ਰੀ ॥

मूड़ अहीर न जानत है बढि बोलत हो सु रहो तुम ठउ री ॥

mooR aheer na jaanat hai badd bolat ho su raho tum Thau ree ||

ਕਾਨਹਿ ਸਾਧ ਬਿਨਾ ਅਪਰਾਧਹਿ ਬੋਲਹਿਾਂਗੀ ਜੁ ਭਈ ਕਛੁ ਬਉਰੀ ॥੧੨੮॥

कानहि साध बिना अपराधहि बोलहिाँगी जु भई कछु बउरी ॥१२८॥

kaaneh saadh binaa aparaadheh bolahiaa(n)gee ju bhiee kachh bauree ||128||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਿਨਤੀ ਕੈ ਜਸੁਦਾ ਤਬੈ ਦੋਊ ਦਏ ਮਿਲਾਇ ॥

बिनती कै जसुदा तबै दोऊ दए मिलाइ ॥

binatee kai jasudhaa tabai dhouoo dhe milai ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਬਿਗਾਰੈ ਸੇਰ ਦਧਿ ਲੇਹੁ ਮਨ ਕੁ ਤੁਮ ਆਇ ॥੧੨੯॥

कान्रह बिगारै सेर दधि लेहु मन कु तुम आइ ॥१२९॥

kaanreh bigaarai ser dhadh leh man k tum aai ||129||


ਗੋਪੀ ਬਾਚ ਜਸੋਧਾ ਸੋ ॥

गोपी बाच जसोधा सो ॥

gopee baach jasodhaa so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਤਬ ਗੋਪੀ ਮਿਲਿ ਯੋ ਕਹੀ ਮੋਹਨ ਜੀਵੈ ਤੋਹਿ ॥

तब गोपी मिलि यो कही मोहन जीवै तोहि ॥

tab gopee mil yo kahee mohan jeevai toh ||

ਯਾਹਿ ਦੇਹਿ ਹਮ ਖਾਨ ਦਧਿ ਸਭ ਮਨਿ ਕਰੈ ਨ ਕ੍ਰੋਹਿ ॥੧੩੦॥

याहि देहि हम खान दधि सभ मनि करै न क्रोहि ॥१३०॥

yaeh dheh ham khaan dhadh sabh man karai na kroh ||130||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਮਾਖਨ ਚੁਰੈਬੋ ਬਰਨਨੰ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे माखन चुरैबो बरननं ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare maakhan churaibo baranana(n) ||


ਅਥ ਜਸੁਧਾ ਕੋ ਬਿਸਵ ਸਾਰੀ ਮੁਖ ਪਸਾਰਿ ਦਿਖੈਬੋ ॥

अथ जसुधा को बिसव सारी मुख पसारि दिखैबो ॥

ath jasudhaa ko bisav saaree mukh pasaar dhikhaibo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਗੋਪੀ ਗਈ ਅਪੁਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮੈ ਤਬ ਤੇ ਹਰਿ ਜੀ ਇਕ ਖੇਲ ਮਚਾਈ ॥

गोपी गई अपुने गृह मै तब ते हरि जी इक खेल मचाई ॥

gopee giee apune gireh mai tab te har jee ik khel machaiee ||

ਸੰਗਿ ਲਯੋ ਅਪੁਨੇ ਮੁਸਲੀ ਧਰ ਦੇਖਤ ਤਾ ਮਿਟੀਆ ਇਨ ਖਾਈ ॥

संगि लयो अपुने मुसली धर देखत ता मिटीआ इन खाई ॥

sa(n)g layo apune musalee dhar dhekhat taa miTeeaa in khaiee ||

ਭੋਜਨ ਖਾਨਹਿ ਕੋ ਤਜਿ ਖੇਲੈ ਸੁ ਗੁਵਾਰ ਚਲੇ ਘਰ ਕੋ ਸਭ ਧਾਈ ॥

भोजन खानहि को तजि खेलै सु गुवार चले घर को सभ धाई ॥

bhojan khaaneh ko taj khelai su guvaar chale ghar ko sabh dhaiee ||

ਜਾਇ ਹਲੀ ਸੁ ਕਹਿਓ ਜਸੁਧਾ ਪਹਿ ਬਾਤ ਵਹੈ ਤਿਨ ਖੋਲਿ ਸੁਨਾਈ ॥੧੩੧॥

जाइ हली सु कहिओ जसुधा पहि बात वहै तिन खोलि सुनाई ॥१३१॥

jai halee su kahio jasudhaa peh baat vahai tin khol sunaiee ||131||


ਮਾਤ ਗਹਿਯੋ ਰਿਸ ਕੈ ਸੁਤ ਕੋ ਤਬ ਲੈ ਛਿਟੀਆ ਤਨ ਤਾਹਿ ਪ੍ਰਹਾਰਿਯੋ ॥

मात गहियो रिस कै सुत को तब लै छिटीआ तन ताहि प्रहारियो ॥

maat gahiyo ris kai sut ko tab lai chhiTeeaa tan taeh prahaariyo ||

ਤਉ ਮਨ ਮਧਿ ਡਰਿਯੋ ਹਰਿ ਜੀ ਜਸੁਧਾ ਜਸੁਧਾ ਕਰਿ ਕੈ ਜੁ ਪੁਕਾਰਿਯੋ ॥

तउ मन मधि डरियो हरि जी जसुधा जसुधा करि कै जु पुकारियो ॥

tau man madh ddariyo har jee jasudhaa jasudhaa kar kai ju pukaariyo ||

ਦੇਖਹੁ ਆਇ ਸਬੈ ਮੁਹਿ ਕੋ ਮੁਖ ਮਾਤ ਕਹਿਯੋ ਤਬ ਤਾਤ ਪਸਾਰਿਯੋ ॥

देखहु आइ सबै मुहि को मुख मात कहियो तब तात पसारियो ॥

dhekhahu aai sabai muh ko mukh maat kahiyo tab taat pasaariyo ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਨ ਆਨਨ ਮੈ ਸਭ ਹੀ ਧਰ ਮੂਰਤਿ ਬਿਸਵ ਦਿਖਾਰਿਯੋ ॥੧੩੨॥

स्याम कहै तिन आनन मै सभ ही धर मूरति बिसव दिखारियो ॥१३२॥

sayaam kahai tin aanan mai sabh hee dhar moorat bisav dhikhaariyo ||132||


ਸਿੰਧੁ ਧਰਾਧਰ ਅਉ ਧਰਨੀ ਸਭ ਥਾ ਬਲਿ ਕੋ ਪੁਰਿ ਅਉ ਪੁਰਿ ਨਾਗਨਿ ॥

सिंधु धराधर अउ धरनी सभ था बलि को पुरि अउ पुरि नागनि ॥

si(n)dh dharaadhar aau dharanee sabh thaa bal ko pur aau pur naagan ||

ਅਉਰ ਸਭੈ ਨਿਰਖੇ ਤਿਹ ਮੈ ਪੁਰ ਬੇਦ ਪੜੈ ਬ੍ਰਹਮਾ ਗਨਿਤਾ ਗਨਿ ॥

अउर सभै निरखे तिह मै पुर बेद पड़ै ब्रहमा गनिता गनि ॥

aaur sabhai nirakhe teh mai pur bedh paRai brahamaa ganitaa gan ||

ਰਿਧਿ ਅਉ ਸਿਧਿ ਅਉ ਆਪਨੇ ਦੇਖ ਕੈ ਜਾਨਿ ਅਭੇਵ ਲਗੀ ਪਗ ਲਾਗਨ ॥

रिधि अउ सिधि अउ आपने देख कै जानि अभेव लगी पग लागन ॥

ridh aau sidh aau aapane dhekh kai jaan abhev lagee pag laagan ||

ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੈ ਤਿਨ ਚੱਛਨ ਸੋ ਸਭ ਦੇਖ ਲਯੋ ਜੁ ਬਡੀ ਬਡਿਭਾਗਨਿ ॥੧੩੩॥

स्याम कहै तिन चच्छन सो सभ देख लयो जु बडी बडिभागनि ॥१३३॥

sayaam kahai tin cha'chhan so sabh dhekh layo ju baddee baddibhaagan ||133||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜੇਰਜ ਸੇਤਜ ਉਤਭੁਜਾ ਦੇਖੇ ਤਿਨ ਤਿਹ ਜਾਇ ॥

जेरज सेतज उतभुजा देखे तिन तिह जाइ ॥

jeraj setaj utabhujaa dhekhe tin teh jai ||

ਪੁਤ੍ਰ ਭਾਵ ਕੋ ਦੂਰ ਕਰਿ ਪਾਇਨ ਲਾਗੀ ਧਾਇ ॥੧੩੪॥

पुत्र भाव को दूर करि पाइन लागी धाइ ॥१३४॥

putr bhaav ko dhoor kar pain laagee dhai ||134||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰੇ ਮਾਤ ਜਸੁਦਾ ਕਉ ਮੁਖ ਪਸਾਰਿ ਬਿਸ੍ਵ ਰੂਪ ਦਿਖੈਬੋ ॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे कृसनावतारे मात जसुदा कउ मुख पसारि बिस्व रूप दिखैबो ॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the kirasanaavataare maat jasudhaa kau mukh pasaar bisavai roop dhikhaibo ||


ਅਥ ਤਰੁ ਤੋਰਿ ਜੁਮਲਾਰਜੁਨ ਤਾਰਬੋ ॥

अथ तरु तोरि जुमलारजुन तारबो ॥

ath tar tor jumalaarajun taarabo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਫੇਰਿ ਉਠੀ ਜਸੁਦਾ ਪਰਿ ਪਾਇਨ ਤਾ ਕੀ ਕਰੀ ਬਹੁ ਭਾਤ ਬਡਾਈ ॥

फेरि उठी जसुदा परि पाइन ता की करी बहु भात बडाई ॥

fer uThee jasudhaa par pain taa kee karee bahu bhaat baddaiee ||

ਹੇ ਜਗ ਕੇ ਪਤਿ ਹੇ ਕਰੁਨਾ ਨਿਧਿ ਹੋਇ ਅਜਾਨ ਕਹਿਓ ਮਮ ਮਾਈ ॥

हे जग के पति हे करुना निधि होइ अजान कहिओ मम माई ॥

he jag ke pat he karunaa nidh hoi ajaan kahio mam maiee ||

ਸਾਰੇ ਛਿਮੋ ਹਮਰੋ ਤੁਮ ਅਉਗਨ ਹੁਇ ਮਤਿਮੰਦਿ ਕਰੀ ਜੁ ਢਿਠਾਈ ॥

सारे छिमो हमरो तुम अउगन हुइ मतिमंदि करी जु ढिठाई ॥

saare chhimo hamaro tum aaugan hui matima(n)dh karee ju ddiThaiee ||

ਮੀਟ ਲਯੋ ਮੁਖ ਤਉ ਹਰਿ ਜੀ ਤਿਹ ਪੈ ਮਮਤਾ ਡਰਿ ਬਾਤ ਛਿਪਾਈ ॥੧੩੫॥

मीट लयो मुख तउ हरि जी तिह पै ममता डरि बात छिपाई ॥१३५॥

meeT layo mukh tau har jee teh pai mamataa ddar baat chhipaiee ||135||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕਰੁਨਾ ਕੈ ਜਸੁਧਾ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ਇਮ ਗੋਪਿਨ ਸੋ ਖੇਲਬੇ ਕੇ ਕਾਜ ਤੋਰਿ ਲਿਆਏ ਗੋਪ ਬਨ ਸੌ ॥

करुना कै जसुधा कहियो है इम गोपिन सो खेलबे के काज तोरि लिआए गोप बन सौ ॥

karunaa kai jasudhaa kahiyo hai im gopin so khelabe ke kaaj tor liaae gop ban sau ||

ਬਾਰਕੋ ਕੇ ਕਹੇ ਕਰਿ ਕ੍ਰੋਧ ਮਨ ਆਪਨੇ ਮੈ ਸ੍ਯਾਮ ਕੋ ਪ੍ਰਹਾਰ ਤਨ ਲਾਗੀ ਛੂਛਕਨ ਸੌ ॥

बारको के कहे करि क्रोध मन आपने मै स्याम को प्रहार तन लागी छूछकन सौ ॥

baarako ke kahe kar krodh man aapane mai sayaam ko prahaar tan laagee chhoochhakan sau ||

ਦੇਖਿ ਦੇਖਿ ਲਾਸਨ ਕੌ ਰੋਵੈ ਸੁਤ ਰੋਵੈ ਮਾਤ ਕਹੈ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਮਹਾ ਮੋਹਿ ਕਰਿ ਮਨ ਸੌ ॥

देखि देखि लासन कौ रोवै सुत रोवै मात कहै कबि स्याम महा मोहि करि मन सौ ॥

dhekh dhekh laasan kau rovai sut rovai maat kahai kab sayaam mahaa moh kar man sau ||

ਰਾਮ ਰਾਮ ਕਹਿ ਸਭੋ ਮਾਰਬੇ ਕੀ ਕਹਾ ਚਲੀ ਸਾਮੁਹੇ ਨ ਬੋਲੀਐ ਰੀ ਐਸੇ ਸਾਧੁ ਜਨ ਸੌ ॥੧੩੬॥

राम राम कहि सभो मारबे की कहा चली सामुहे न बोलीऐ री ऐसे साधु जन सौ ॥१३६॥

raam raam keh sabho maarabe kee kahaa chalee saamuhe na boleeaai ree aaise saadh jan sau ||136||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਖੀਰ ਬਿਲੋਵਨ ਕੌ ਉਠੀ ਜਸੁਦਾ ਹਰਿ ਕੀ ਮਾਇ ॥

खीर बिलोवन कौ उठी जसुदा हरि की माइ ॥

kheer bilovan kau uThee jasudhaa har kee mai ||

ਮੁਖ ਤੇ ਗਾਵੈ ਪੂਤ ਗੁਨ ਮਹਿਮਾ ਕਹੀ ਨ ਜਾਇ ॥੧੩੭॥

मुख ते गावै पूत गुन महिमा कही न जाइ ॥१३७॥

mukh te gaavai poot gun mahimaa kahee na jai ||137||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਏਕ ਸਮੈ ਜਸੁਧਾ ਸੰਗਿ ਗੋਪਿਨ ਖੀਰ ਮਥੇ ਕਰਿ ਲੈ ਕੈ ਮਧਾਨੀ ॥

एक समै जसुधा संगि गोपिन खीर मथे करि लै कै मधानी ॥

ek samai jasudhaa sa(n)g gopin kheer mathe kar lai kai madhaanee ||

ਊਪਰ ਕੋ ਕਟਿ ਸੌ ਕਸਿ ਕੈ ਪਟਰੋ ਮਨ ਮੈ ਹਰਿ ਜੋਤਿ ਸਮਾਨੀ ॥

ऊपर को कटि सौ कसि कै पटरो मन मै हरि जोति समानी ॥

uoopar ko kaT sau kas kai paTaro man mai har jot samaanee ||

ਘੰਟਕਾ ਛੁਦ੍ਰ ਕਸੀ ਤਿਹ ਊਪਰਿ ਸ੍ਯਾਮ ਕਹੀ ਤਿਹ ਕੀ ਜੁ ਕਹਾਨੀ ॥

घंटका छुद्र कसी तिह ऊपरि स्याम कही तिह की जु कहानी ॥

gha(n)Takaa chhudhr kasee teh uoopar sayaam kahee teh kee ju kahaanee ||

ਦਾਨ ਔ ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਮ ਕੀ ਸੁਧਿ ਕੈ ਮੁਖ ਤੈ ਹਰਿ ਕੀ ਸੁਭ ਗਾਵਤ ਬਾਨੀ ॥੧੩੮॥

दान औ प्राक्रम की सुधि कै मुख तै हरि की सुभ गावत बानी ॥१३८॥

dhaan aau praakram kee sudh kai mukh tai har kee subh gaavat baanee ||138||


ਖੀਰ ਭਰਿਯੋ ਜਬ ਹੀ ਤਿਹ ਕੋ ਕੁਚਿ ਤਉ ਹਰਿ ਜੀ ਤਬ ਹੀ ਫੁਨਿ ਜਾਗੇ ॥

खीर भरियो जब ही तिह को कुचि तउ हरि जी तब ही फुनि जागे ॥

kheer bhariyo jab hee teh ko kuch tau har jee tab hee fun jaage ||

ਪਯ ਸੁ ਪਿਆਵਹੁ ਹੇ ਜਸੁਦਾ ਪ੍ਰਭੁ ਜੀ ਇਹ ਹੀ ਰਸਿ ਮੈ ਅਨੁਰਾਗੇ ॥

पय सु पिआवहु हे जसुदा प्रभु जी इह ही रसि मै अनुरागे ॥

pay su piaavahu he jasudhaa prabh jee ieh hee ras mai anuraage ||

ਦੂਧ ਫਟਿਯੋ ਹੁਇ ਬਾਸਨ ਤੇ ਤਬ ਧਾਇ ਚਲੀ ਇਹ ਰੋਵਨ ਲਾਗੇ ॥

दूध फटियो हुइ बासन ते तब धाइ चली इह रोवन लागे ॥

dhoodh faTiyo hui baasan te tab dhai chalee ieh rovan laage ||

ਕ੍ਰੋਧ ਕਰਿਓ ਮਨ ਮੈ ਬ੍ਰਿਜ ਕੇ ਪਤਿ ਪੈ ਘਰਿ ਤੇ ਉਠਿ ਬਾਹਰਿ ਭਾਗੇ ॥੧੩੯॥

क्रोध करिओ मन मै बृज के पति पै घरि ते उठि बाहरि भागे ॥१३९॥

krodh kario man mai biraj ke pat pai ghar te uTh baahar bhaage ||139||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰੋਧ ਭਰੇ ਹਰਿ ਜੀ ਮਨੈ ਘਰਿ ਤੇ ਬਾਹਰਿ ਜਾਇ ॥

क्रोध भरे हरि जी मनै घरि ते बाहरि जाइ ॥

krodh bhare har jee manai ghar te baahar jai ||

ਸੰਗ ਸਖਾ ਲੈ ਕਪਿ ਸਭੈ ਆਏ ਸੈਨ ਬਨਾਇ ॥੧੪੦॥

संग सखा लै कपि सभै आए सैन बनाइ ॥१४०॥

sa(n)g sakhaa lai kap sabhai aae sain banai ||140||


ਪਾਥਰ ਕੋ ਗਹਿ ਕੈ ਕਰੈ ਦੀਨੋ ਮਟੁ ਸੁ ਭਗਾਇ ॥

पाथर को गहि कै करै दीनो मटु सु भगाइ ॥

paathar ko geh kai karai dheeno maTu su bhagai ||

ਖੀਰ ਦਸੋ ਦਿਸ ਬਹਿ ਚਲਿਯੋ ਅਉ ਪੀਨੋ ਹਰਿ ਧਾਇ ॥੧੪੧॥

खीर दसो दिस बहि चलियो अउ पीनो हरि धाइ ॥१४१॥

kheer dhaso dhis beh chaliyo aau peeno har dhai ||141||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੈਨ ਬਨਾਇ ਭਲੋ ਹਰਿ ਜੀ ਜਸੁਦਾ ਦਧਿ ਕੋ ਮਿਲਿ ਲੂਟਨ ਲਾਏ ॥

सैन बनाइ भलो हरि जी जसुदा दधि को मिलि लूटन लाए ॥

sain banai bhalo har jee jasudhaa dhadh ko mil looTan laae ||

ਹਾਥਨ ਮੈ ਗਹਿ ਕੈ ਸਭ ਬਾਸਨ ਕੈ ਬਲ ਕੋ ਚਹੂੰ ਓਰਿ ਬਗਾਏ ॥

हाथन मै गहि कै सभ बासन कै बल को चहूँ ओरि बगाए ॥

haathan mai geh kai sabh baasan kai bal ko chahoo(n) or bagaae ||

ਫੂਟ ਗਏ ਵਹ ਫੈਲ ਪਰਿਓ ਦਧਿ ਭਾਵ ਇਹੈ ਕਬਿ ਕੇ ਮਨਿ ਆਏ ॥

फूट गए वह फैल परिओ दधि भाव इहै कबि के मनि आए ॥

fooT ge veh fail pario dhadh bhaav ihai kab ke man aae ||

ਕੰਸ ਕੋ ਮੀਝ ਨਿਕਾਰਨ ਕੋ ਅਗੂਆ ਜਨੁ ਆਗਮ ਕਾਨ੍ਰਹ ਜਨਾਏ ॥੧੪੨॥

कंस को मीझ निकारन को अगूआ जनु आगम कान्रह जनाए ॥१४२॥

ka(n)s ko meejh nikaaran ko agooaa jan aagam kaanreh janaae ||142||


ਫੋਰ ਦਏ ਤਿਨ ਜੋ ਸਭ ਬਾਸਨ ਕ੍ਰੋਧ ਭਰੀ ਜਸੁਦਾ ਤਬ ਧਾਈ ॥

फोर दए तिन जो सभ बासन क्रोध भरी जसुदा तब धाई ॥

for dhe tin jo sabh baasan krodh bharee jasudhaa tab dhaiee ||

ਫਾਧਿ ਚੜੇ ਕਪਿ ਰੂਖਨ ਰੂਖਨ ਗ੍ਵਾਰਨ ਗ੍ਵਾਰਨ ਸੈਨ ਭਗਾਈ ॥

फाधि चड़े कपि रूखन रूखन ग्वारन ग्वारन सैन भगाई ॥

faadh chaRe kap rookhan rookhan gavaiaaran gavaiaaran sain bhagaiee ||

ਦਉਰਤ ਦਉਰਿ ਤਬੈ ਹਰਿ ਜੀ ਬਸੁਧਾ ਪਰਿ ਆਪਨੀ ਮਾਤ ਹਰਾਈ ॥

दउरत दउरि तबै हरि जी बसुधा परि आपनी मात हराई ॥

dhaurat dhaur tabai har jee basudhaa par aapanee maat haraiee ||


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE