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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
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ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰ ॥

कृसनावतार ॥

kirasanaavataar ||

ੴ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ ॥

ੴ वाहिगुरू जी की फतिह ॥

ikOankaar vaahiguroo jee kee fateh ||


ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री अकाल पुरख जी सहाइ ॥

sree akaal purakh jee sahai ||

ਅਥ ਕ੍ਰਿਸਨਾਵਤਾਰ ਇਕੀਸਮੋ ਕਥਨੰ ॥

अथ कृसनावतार इकीसमो कथनं ॥

ath kirasanaavataar ikeesamo kathana(n) ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਅਬ ਬਰਣੋ ਕ੍ਰਿਸਨਾ ਅਵਤਾਰੂ ॥

अब बरणो कृसना अवतारू ॥

ab barano kirasanaa avataaroo ||

ਜੈਸ ਭਾਤਿ ਬਪੁ ਧਰਿਯੋ ਮੁਰਾਰੂ ॥

जैस भाति बपु धरियो मुरारू ॥

jais bhaat bap dhariyo muraaroo ||

ਪਰਮ ਪਾਪ ਤੇ ਭੂਮਿ ਡਰਾਨੀ ॥

परम पाप ते भूमि डरानी ॥

param paap te bhoom ddaraanee ||

ਡਗਮਗਾਤ ਬਿਧ ਤੀਰਿ ਸਿਧਾਨੀ ॥੧॥

डगमगात बिध तीरि सिधानी ॥१॥

ddagamagaat bidh teer sidhaanee ||1||


ਬ੍ਰਹਮਾ ਗਯੋ ਛੀਰ ਨਿਧਿ ਜਹਾ ॥

ब्रहमा गयो छीर निधि जहा ॥

brahamaa gayo chheer nidh jahaa ||

ਕਾਲ ਪੁਰਖ ਇਸਥਿਤ ਥੇ ਤਹਾ ॥

काल पुरख इसथित थे तहा ॥

kaal purakh isathit the tahaa ||

ਕਹਿਯੋ ਬਿਸਨੁ ਕਹੁ ਨਿਕਟਿ ਬੁਲਾਈ ॥

कहियो बिसनु कहु निकटि बुलाई ॥

kahiyo bisan kahu nikaT bulaiee ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਅਵਤਾਰ ਧਰਹੁ ਤੁਮ ਜਾਈ ॥੨॥

कृसन अवतार धरहु तुम जाई ॥२॥

kirasan avataar dharahu tum jaiee ||2||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕਾਲ ਪੁਰਖ ਕੇ ਬਚਨ ਤੇ ਸੰਤਨ ਹੇਤ ਸਹਾਇ ॥

काल पुरख के बचन ते संतन हेत सहाइ ॥

kaal purakh ke bachan te sa(n)tan het sahai ||

ਮਥੁਰਾ ਮੰਡਲ ਕੇ ਬਿਖੈ ਜਨਮੁ ਧਰੋ ਹਰਿ ਰਾਇ ॥੩॥

मथुरा मंडल के बिखै जनमु धरो हरि राइ ॥३॥

mathuraa ma(n)ddal ke bikhai janam dharo har rai ||3||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਜੇ ਜੇ ਕ੍ਰਿਸਨ ਚਰਿਤ੍ਰ ਦਿਖਾਏ ॥

जे जे कृसन चरित्र दिखाए ॥

je je kirasan charitr dhikhaae ||

ਦਸਮ ਬੀਚ ਸਭ ਭਾਖਿ ਸੁਨਾਏ ॥

दसम बीच सभ भाखि सुनाए ॥

dhasam beech sabh bhaakh sunaae ||

ਗ੍ਯਾਰਾ ਸਹਸ ਬਾਨਵੇ ਛੰਦਾ ॥

ग्यारा सहस बानवे छंदा ॥

gayaaraa sahas baanave chha(n)dhaa ||

ਕਹੇ ਦਸਮ ਪੁਰ ਬੈਠਿ ਅਨੰਦਾ ॥੪॥

कहे दसम पुर बैठि अनंदा ॥४॥

kahe dhasam pur baiTh ana(n)dhaa ||4||


ਅਥ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤ ਕਥਨੰ ॥

अथ देवी जू की उसतत कथनं ॥

ath dhevee joo kee usatat kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਹੋਇ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੁਮਰੀ ਹਮ ਪੈ ਤੁ ਸਭੈ ਸਗਨੰ ਗੁਨ ਹੀ ਧਰਿ ਹੋਂ ॥

होइ कृपा तुमरी हम पै तु सभै सगनं गुन ही धरि हों ॥

hoi kirapaa tumaree ham pai ta sabhai sagana(n) gun hee dhar ho(n) ||

ਜੀਅ ਧਾਰਿ ਬਿਚਾਰ ਤਬੈ ਬਰ ਬੁਧਿ ਮਹਾ ਅਗਨੰ ਗੁਨ ਕੋ ਹਰਿ ਹੋਂ ॥

जीअ धारि बिचार तबै बर बुधि महा अगनं गुन को हरि हों ॥

jeea dhaar bichaar tabai bar budh mahaa agana(n) gun ko har ho(n) ||

ਬਿਨੁ ਚੰਡਿ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੁਮਰੀ ਕਬਹੂੰ ਮੁਖ ਤੇ ਨਹੀ ਅਛਰ ਹਉ ਕਰਿ ਹੋਂ ॥

बिनु चंडि कृपा तुमरी कबहूँ मुख ते नही अछर हउ करि हों ॥

bin cha(n)dd kirapaa tumaree kabahoo(n) mukh te nahee achhar hau kar ho(n) ||

ਤੁਮਰੋ ਕਰਿ ਨਾਮੁ ਕਿਧੋ ਤੁਲਹਾ ਜਿਮ ਬਾਕ ਸਮੁੰਦ੍ਰ ਬਿਖੈ ਤਰਿ ਹੋਂ ॥੫॥

तुमरो करि नामु किधो तुलहा जिम बाक समुँद्र बिखै तरि हों ॥५॥

tumaro kar naam kidho tulahaa jim baak samu(n)dhr bikhai tar ho(n) ||5||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਰੇ ਮਨ ਭਜ ਤੂੰ ਸਾਰਦਾ ਅਨਗਨ ਗੁਨ ਹੈ ਜਾਹਿ ॥

रे मन भज तूँ सारदा अनगन गुन है जाहि ॥

re man bhaj too(n) saaradhaa anagan gun hai jaeh ||

ਰਚੌ ਗ੍ਰੰਥ ਇਹ ਭਾਗਵਤ ਜਉ ਵੈ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਾਹਿ ॥੬॥

रचौ ग्रंथ इह भागवत जउ वै कृपा कराहि ॥६॥

rachau gra(n)th ieh bhaagavat jau vai kirapaa karaeh ||6||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਸੰਕਟ ਹਰਨ ਸਭ ਸਿਧਿ ਕੀ ਕਰਨ ਚੰਡ ਤਾਰਨ ਤਰਨ ਅਰੁ ਲੋਚਨ ਬਿਸਾਲ ਹੈ ॥

संकट हरन सभ सिधि की करन चंड तारन तरन अरु लोचन बिसाल है ॥

sa(n)kaT haran sabh sidh kee karan cha(n)dd taaran taran ar lochan bisaal hai ||

ਆਦਿ ਜਾ ਕੈ ਆਹਮ ਹੈ ਅੰਤ ਕੋ ਨ ਪਾਰਾਵਾਰ ਸਰਨਿ ਉਬਾਰਨ ਕਰਨ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲ ਹੈ ॥

आदि जा कै आहम है अंत को न पारावार सरनि उबारन करन प्रतिपाल है ॥

aadh jaa kai aaham hai a(n)t ko na paaraavaar saran ubaaran karan pratipaal hai ||

ਅਸੁਰ ਸੰਘਾਰਨ ਅਨਿਕ ਦੁਖ ਜਾਰਨ ਸੋ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰਨ ਛਡਾਏ ਜਮ ਜਾਲ ਹੈ ॥

असुर संघारन अनिक दुख जारन सो पतित उधारन छडाए जम जाल है ॥

asur sa(n)ghaaran anik dhukh jaaran so patit udhaaran chhaddaae jam jaal hai ||

ਦੇਵੀ ਬਰੁ ਲਾਇਕ ਸੁਬੁਧਿ ਹੂ ਕੀ ਦਾਇਕ ਸੁ ਦੇਹ ਬਰੁ ਪਾਇਕ ਬਨਾਵੈ ਗ੍ਰੰਥ ਹਾਲ ਹੈ ॥੭॥

देवी बरु लाइक सुबुधि हू की दाइक सु देह बरु पाइक बनावै ग्रंथ हाल है ॥७॥

dhevee bar laik subudh hoo kee dhaik su dheh bar paik banaavai gra(n)th haal hai ||7||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅਦ੍ਰ ਸੁਤਾ ਹੂੰ ਕੀ ਜੋ ਤਨਯਾ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਕੀ ਮਰਤਾ ਫੁਨਿ ਜੋਊ ॥

अद्र सुता हूँ की जो तनया महिखासुर की मरता फुनि जोऊ ॥

adhr sutaa hoo(n) kee jo tanayaa mahikhaasur kee marataa fun jouoo ||

ਇੰਦ੍ਰ ਕੋ ਰਾਜਹਿ ਕੀ ਦਵੈਯਾ ਕਰਤਾ ਬਧ ਸੁੰਭ ਨਿਸੁੰਭਹਿ ਦੋਊ ॥

इंद्र को राजहि की दवैया करता बध सुँभ निसुँभहि दोऊ ॥

ei(n)dhr ko raajeh kee dhavaiyaa karataa badh su(n)bh nisu(n)bheh dhouoo ||

ਜੋ ਜਪ ਕੈ ਇਹ ਸੇਵ ਕਰੈ ਬਰੁ ਕੋ ਸੁ ਲਹੈ ਮਨ ਇਛਤ ਸੋਊ ॥

जो जप कै इह सेव करै बरु को सु लहै मन इछत सोऊ ॥

jo jap kai ieh sev karai bar ko su lahai man ichhat souoo ||

ਲੋਕ ਬਿਖੈ ਉਹ ਕੀ ਸਮਤੁਲ ਗਰੀਬ ਨਿਵਾਜ ਨ ਦੂਸਰ ਕੋਊ ॥੮॥

लोक बिखै उह की समतुल गरीब निवाज न दूसर कोऊ ॥८॥

lok bikhai uh kee samatul gareeb nivaaj na dhoosar kouoo ||8||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਦੇਵੀ ਜੂ ਕੀ ਉਸਤਤਿ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री देवी जू की उसतति समापतं ॥

eit sree dhevee joo kee usatat samaapata(n) ||

ਅਥ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਬ੍ਰਹਮਾ ਪਹਿ ਪੁਕਾਰਤ ਭਈ ॥

अथ पृथमी ब्रहमा पहि पुकारत भई ॥

ath pirathamee brahamaa peh pukaarat bhiee ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਦਈਤਨ ਕੇ ਭਰ ਤੇ ਡਰ ਤੇ ਜੁ ਭਈ ਪ੍ਰਿਥਮੀ ਬਹੁ ਭਾਰਹਿੰ ਭਾਰੀ ॥

दईतन के भर ते डर ते जु भई पृथमी बहु भारहिं भारी ॥

dhieetan ke bhar te ddar te ju bhiee pirathamee bahu bhaarahi(n) bhaaree ||

ਗਾਇ ਕੋ ਰੂਪੁ ਤਬੈ ਧਰ ਕੈ ਬ੍ਰਹਮਾ ਰਿਖਿ ਪੈ ਚਲਿ ਜਾਇ ਪੁਕਾਰੀ ॥

गाइ को रूपु तबै धर कै ब्रहमा रिखि पै चलि जाइ पुकारी ॥

gai ko roop tabai dhar kai brahamaa rikh pai chal jai pukaaree ||

ਬ੍ਰਹਮ ਕਹਿਯੋ ਤੁਮ ਹੂੰ ਹਮ ਹੂੰ ਮਿਲਿ ਜਾਹਿ ਤਹਾ ਜਹ ਹੈ ਬ੍ਰਤਿਧਾਰੀ ॥

ब्रहम कहियो तुम हूँ हम हूँ मिलि जाहि तहा जह है ब्रतिधारी ॥

braham kahiyo tum hoo(n) ham hoo(n) mil jaeh tahaa jeh hai bratidhaaree ||

ਜਾਇ ਕਰੈ ਬਿਨਤੀ ਤਿਹ ਕੀ ਰਘੁਨਾਥ ਸੁਨੋ ਇਹ ਬਾਤ ਹਮਾਰੀ ॥੯॥

जाइ करै बिनती तिह की रघुनाथ सुनो इह बात हमारी ॥९॥

jai karai binatee teh kee raghunaath suno ieh baat hamaaree ||9||


ਬ੍ਰਹਮ ਕੋ ਅਗ੍ਰ ਸਭੈ ਧਰ ਕੈ ਸੁ ਤਹਾ ਕੋ ਚਲੇ ਤਨ ਕੇ ਤਨੀਆ ॥

ब्रहम को अग्र सभै धर कै सु तहा को चले तन के तनीआ ॥

braham ko agr sabhai dhar kai su tahaa ko chale tan ke taneeaa ||

ਤਬ ਜਾਇ ਪੁਕਾਰ ਕਰੀ ਤਿਹ ਸਾਮੁਹਿ ਰੋਵਤ ਤਾ ਮੁਨਿ ਜ੍ਯੋ ਹਨੀਆ ॥

तब जाइ पुकार करी तिह सामुहि रोवत ता मुनि ज्यो हनीआ ॥

tab jai pukaar karee teh saamuh rovat taa mun jayo haneeaa ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਅਤਿ ਹੀ ਉਪਮਾ ਕਬਿ ਨੇ ਮਨ ਭੀਤਰ ਯੌ ਗਨੀਆ ॥

ता छबि की अति ही उपमा कबि ने मन भीतर यौ गनीआ ॥

taa chhab kee at hee upamaa kab ne man bheetar yau ganeeaa ||

ਜਿਮ ਲੂਟੇ ਤੈ ਅਗ੍ਰਜ ਚਉਧਰੀ ਕੈ ਕੁਟਵਾਰ ਪੈ ਕੂਕਤ ਹੈ ਬਨੀਆ ॥੧੦॥

जिम लूटे तै अग्रज चउधरी कै कुटवार पै कूकत है बनीआ ॥१०॥

jim looTe tai agraj chaudharee kai kuTavaar pai kookat hai baneeaa ||10||


ਲੈ ਬ੍ਰਹਮਾ ਸੁਰ ਸੈਨ ਸਭੈ ਤਹ ਦਉਰਿ ਗਏ ਜਹ ਸਾਗਰ ਭਾਰੀ ॥

लै ब्रहमा सुर सैन सभै तह दउरि गए जह सागर भारी ॥

lai brahamaa sur sain sabhai teh dhaur ge jeh saagar bhaaree ||

ਗਾਇ ਪ੍ਰਨਾਮ ਕਰੋ ਤਿਨ ਕੋ ਅਪੁਨੇ ਲਖਿ ਬਾਰ ਨਿਵਾਰ ਪਖਾਰੀ ॥

गाइ प्रनाम करो तिन को अपुने लखि बार निवार पखारी ॥

gai pranaam karo tin ko apune lakh baar nivaar pakhaaree ||

ਪਾਇ ਪਰੇ ਚਤੁਰਾਨਨ ਤਾਹਿ ਕੇ ਦੇਖਿ ਬਿਮਾਨ ਤਹਾ ਬ੍ਰਤਿਧਾਰੀ ॥

पाइ परे चतुरानन ताहि के देखि बिमान तहा ब्रतिधारी ॥

pai pare chaturaanan taeh ke dhekh bimaan tahaa bratidhaaree ||

ਬ੍ਰਹਮ ਕਹਿਯੋ ਬ੍ਰਹਮਾ ਕਹੁ ਜਾਹੁ ਅਵਤਾਰ ਲੈ ਮੈ ਜਰ ਦੈਤਨ ਮਾਰੀ ॥੧੧॥

ब्रहम कहियो ब्रहमा कहु जाहु अवतार लै मै जर दैतन मारी ॥११॥

braham kahiyo brahamaa kahu jaahu avataar lai mai jar dhaitan maaree ||11||


ਸ੍ਰਉਨਨ ਮੈ ਸੁਨਿ ਬ੍ਰਹਮ ਕੀ ਬਾਤ ਸਬੈ ਮਨ ਦੇਵਨ ਕੇ ਹਰਖਾਨੇ ॥

स्रउनन मै सुनि ब्रहम की बात सबै मन देवन के हरखाने ॥

sraunan mai sun braham kee baat sabai man dhevan ke harakhaane ||

ਕੈ ਕੈ ਪ੍ਰਨਾਮ ਚਲੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਆਪਨ ਲੋਕ ਸਭੈ ਅਪੁਨੇ ਕਰ ਮਾਨੇ ॥

कै कै प्रनाम चले गृहि आपन लोक सभै अपुने कर माने ॥

kai kai pranaam chale gireh aapan lok sabhai apune kar maane ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪੁਨੇ ਮਨ ਮੈ ਪਹਿਚਾਨੇ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने अपुने मन मै पहिचाने ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne apune man mai pahichaane ||

ਗੋਧਨ ਭਾਤਿ ਗਯੋ ਸਭ ਲੋਕ ਮਨੋ ਸੁਰ ਜਾਇ ਬਹੋਰ ਕੈ ਆਨੇ ॥੧੨॥

गोधन भाति गयो सभ लोक मनो सुर जाइ बहोर कै आने ॥१२॥

godhan bhaat gayo sabh lok mano sur jai bahor kai aane ||12||


ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਾਚ ॥

ब्रहमा बाच ॥

brahamaa baach ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਫਿਰਿ ਹਰਿ ਇਹ ਆਗਿਆ ਦਈ ਦੇਵਨ ਸਕਲ ਬੁਲਾਇ ॥

फिरि हरि इह आगिआ दई देवन सकल बुलाइ ॥

fir har ieh aagiaa dhiee dhevan sakal bulai ||

ਜਾਇ ਰੂਪ ਤੁਮ ਹੂੰ ਧਰੋ ਹਉ ਹੂੰ ਧਰਿ ਹੌ ਆਇ ॥੧੩॥

जाइ रूप तुम हूँ धरो हउ हूँ धरि हौ आइ ॥१३॥

jai roop tum hoo(n) dharo hau hoo(n) dhar hau aai ||13||


ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਜਬ ਦੇਵਤਨ ਕੋਟਿ ਪ੍ਰਨਾਮ ਜੁ ਕੀਨ ॥

बात सुनी जब देवतन कोटि प्रनाम जु कीन ॥

baat sunee jab dhevatan koT pranaam ju keen ||

ਆਪ ਸਮੇਤ ਸੁ ਧਾਮੀਐ ਲੀਨੇ ਰੂਪ ਨਵੀਨ ॥੧੪॥

आप समेत सु धामीऐ लीने रूप नवीन ॥१४॥

aap samet su dhaameeaai leene roop naveen ||14||


ਰੂਪ ਧਰੇ ਸਭ ਸੁਰਨ ਯੌ ਭੂਮਿ ਮਾਹਿ ਇਹ ਭਾਇ ॥

रूप धरे सभ सुरन यौ भूमि माहि इह भाइ ॥

roop dhare sabh suran yau bhoom maeh ieh bhai ||

ਅਬ ਲੀਲਾ ਸ੍ਰੀ ਦੇਵਕੀ ਮੁਖ ਤੇ ਕਹੋ ਸੁਨਾਇ ॥੧੫॥

अब लीला स्री देवकी मुख ते कहो सुनाइ ॥१५॥

ab leelaa sree dhevakee mukh te kaho sunai ||15||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਹ੍ਵੈਬੋ ਬਰਨਨੰ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति स्री बिसनु अवतार ह्वैबो बरननं समापतं ॥

eit sree bisan avataar havaibo baranana(n) samaapata(n) ||

ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਜਨਮ ਕਥਨੰ ॥

अथ देवकी को जनम कथनं ॥

ath dhevakee ko janam kathana(n) ||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਕੀ ਕੰਨਿਕਾ ਨਾਮ ਦੇਵਕੀ ਤਾਸ ॥

उग्रसैन की कंनिका नाम देवकी तास ॥

augrasain kee ka(n)nikaa naam dhevakee taas ||

ਸੋਮਵਾਰ ਦਿਨ ਜਠਰ ਤੇ ਕੀਨੋ ਤਾਹਿ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥੧੬॥

सोमवार दिन जठर ते कीनो ताहि प्रकास ॥१६॥

somavaar dhin jaThar te keeno taeh prakaas ||16||


ਇਤਿ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਜਨਮ ਬਰਨਨੰ ਪ੍ਰਿਥਮ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ॥

इति देवकी को जनम बरननं पृथम धिआइ समापतम ॥

eit dhevakee ko janam baranana(n) piratham dhiaai samaapatam ||

ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਬਰੁ ਢੂੰਢਬੋ ਕਥਨੰ ॥

अथ देवकी को बरु ढूँढबो कथनं ॥

ath dhevakee ko bar ddoo(n)ddabo kathana(n) ||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬੈ ਭਈ ਵਹਿ ਕੰਨਿਕਾ ਸੁੰਦਰ ਬਰ ਕੈ ਜੋਗੁ ॥

जबै भई वहि कंनिका सुँदर बर कै जोगु ॥

jabai bhiee veh ka(n)nikaa su(n)dhar bar kai jog ||

ਰਾਜ ਕਹੀ ਬਰ ਕੇ ਨਿਮਿਤ ਢੂੰਢਹੁ ਅਪਨਾ ਲੋਗ ॥੧੭॥

राज कही बर के निमित ढूँढहु अपना लोग ॥१७॥

raaj kahee bar ke nimit ddoo(n)ddahu apanaa log ||17||


ਦੂਤ ਪਠੇ ਤਿਨ ਜਾਇ ਕੈ ਨਿਰਖ੍ਰਯੋ ਹੈ ਬਸੁਦੇਵ ॥

दूत पठे तिन जाइ कै निरख्रयो है बसुदेव ॥

dhoot paThe tin jai kai nirakhrayo hai basudhev ||

ਮਦਨ ਬਦਨ ਸੁਖ ਕੋ ਸਦਨੁ ਲਖੈ ਤਤ ਕੋ ਭੇਵ ॥੧੮॥

मदन बदन सुख को सदनु लखै तत को भेव ॥१८॥

madhan badhan sukh ko sadhan lakhai tat ko bhev ||18||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਦੀਨੋ ਹੈ ਤਿਲਕੁ ਜਾਇ ਭਾਲਿ ਬਸੁਦੇਵ ਜੂ ਕੇ ਡਾਰਿਯੋ ਨਾਰੀਏਰ ਗੋਦ ਮਾਹਿ ਦੈ ਅਸੀਸ ਕੌ ॥

दीनो है तिलकु जाइ भालि बसुदेव जू के डारियो नारीएर गोद माहि दै असीस कौ ॥

dheeno hai tilak jai bhaal basudhev joo ke ddaariyo naare'er godh maeh dhai asees kau ||

ਦੀਨੀ ਹੈ ਬਡਾਈ ਪੈ ਮਿਠਾਈ ਹੂੰ ਤੇ ਮੀਠੀ ਸਭ ਜਨ ਮਨਿ ਭਾਈ ਅਉਰ ਈਸਨ ਕੇ ਈਸ ਕੌ ॥

दीनी है बडाई पै मिठाई हूँ ते मीठी सभ जन मनि भाई अउर ईसन के ईस कौ ॥

dheenee hai baddaiee pai miThaiee hoo(n) te meeThee sabh jan man bhaiee aaur ieesan ke iees kau ||

ਮਨ ਜੁ ਪੈ ਆਈ ਸੋ ਤੋ ਕਹਿ ਕੈ ਸੁਨਾਈ ਤਾ ਕੀ ਸੋਭਾ ਸਭ ਭਾਈ ਮਨ ਮਧ ਘਰਨੀਸ ਕੋ ॥

मन जु पै आई सो तो कहि कै सुनाई ता की सोभा सभ भाई मन मध घरनीस को ॥

man ju pai aaiee so to keh kai sunaiee taa kee sobhaa sabh bhaiee man madh gharanees ko ||

ਸਾਰੇ ਜਗ ਗਾਈ ਜਿਨਿ ਸੋਭਾ ਜਾ ਕੀ ਗਾਈ ਸੋ ਤੋ ਏਕ ਲੋਕ ਕਹਾ ਲੋਕ ਭੇਦੇ ਬੀਸ ਤੀਸ ਕੋ ॥੧੯॥

सारे जग गाई जिनि सोभा जा की गाई सो तो एक लोक कहा लोक भेदे बीस तीस को ॥१९॥

saare jag gaiee jin sobhaa jaa kee gaiee so to ek lok kahaa lok bhedhe bees tees ko ||19||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕੰਸ ਬਾਸਦੇਵੈ ਤਬੈ ਜੋਰਿਓ ਬ੍ਯਾਹ ਸਮਾਜ ॥

कंस बासदेवै तबै जोरिओ ब्याह समाज ॥

ka(n)s baasadhevai tabai jorio bayaeh samaaj ||

ਪ੍ਰਸੰਨ ਭਏ ਸਭ ਧਰਨਿ ਮੈ ਬਾਜਨ ਲਾਗੇ ਬਾਜ ॥੨੦॥

प्रसंन भए सभ धरनि मै बाजन लागे बाज ॥२०॥

prasa(n)n bhe sabh dharan mai baajan laage baaj ||20||


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹ ਕਥਨੰ ॥

अथ देवकी को ब्याह कथनं ॥

ath dhevakee ko bayaeh kathana(n) ||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਸਨਿ ਦਿਜਨ ਕੋ ਧਰ ਕੈ ਤਰਿ ਤਾ ਕੋ ਨਵਾਇ ਲੈ ਜਾਇ ਬੈਠਾਯੋ ॥

आसनि दिजन को धर कै तरि ता को नवाइ लै जाइ बैठायो ॥

aasan dhijan ko dhar kai tar taa ko navai lai jai baiThaayo ||

ਕੁੰਕਮ ਕੋ ਘਸ ਕੈ ਕਰਿ ਪੁਰੋਹਿਤ ਬੇਦਨ ਕੀ ਧੁਨਿ ਸਿਉ ਤਿਹ ਲਾਯੋ ॥

कुँकम को घस कै करि पुरोहित बेदन की धुनि सिउ तिह लायो ॥

ku(n)kam ko ghas kai kar purohit bedhan kee dhun siau teh laayo ||

ਡਾਰਤ ਫੂਲ ਪੰਚਾਮ੍ਰਿਤਿ ਅਛਤ ਮੰਗਲਚਾਰ ਭਇਓ ਮਨ ਭਾਯੋ ॥

डारत फूल पंचामृति अछत मंगलचार भइओ मन भायो ॥

ddaarat fool pa(n)chaamirat achhat ma(n)galachaar bhio man bhaayo ||

ਭਾਟ ਕਲਾਵੰਤ ਅਉਰ ਗੁਨੀ ਸਭ ਲੈ ਬਖਸੀਸ ਮਹਾ ਜਸੁ ਗਾਯੋ ॥੨੧॥

भाट कलावंत अउर गुनी सभ लै बखसीस महा जसु गायो ॥२१॥

bhaaT kalaava(n)t aaur gunee sabh lai bakhasees mahaa jas gaayo ||21||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਰੀਤਿ ਬਰਾਤਿਨ ਦੁਲਹ ਕੀ ਬਾਸੁਦੇਵ ਸਭ ਕੀਨ ॥

रीति बरातिन दुलह की बासुदेव सभ कीन ॥

reet baraatin dhuleh kee baasudhev sabh keen ||

ਤਬੈ ਕਾਜ ਚਲਬੇ ਨਿਮਿਤ ਮਥੁਰਾ ਮੈ ਮਨੁ ਦੀਨ ॥੨੨॥

तबै काज चलबे निमित मथुरा मै मनु दीन ॥२२॥

tabai kaaj chalabe nimit mathuraa mai man dheen ||22||


ਬਾਸਦੇਵ ਕੋ ਆਗਮਨ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਸੁਨਿ ਲੀਨ ॥

बासदेव को आगमन उग्रसैन सुनि लीन ॥

baasadhev ko aagaman ugrasain sun leen ||

ਚਮੂ ਸਬੈ ਚਤੁਰੰਗਨੀ ਭੇਜਿ ਅਗਾਊ ਦੀਨ ॥੨੩॥

चमू सबै चतुरंगनी भेजि अगाऊ दीन ॥२३॥

chamoo sabai chatura(n)ganee bhej agaauoo dheen ||23||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਪਸ ਮੈ ਮਿਲਬੇ ਹਿਤ ਕਉ ਦਲ ਸਾਜ ਚਲੇ ਧੁਜਨੀ ਪਤਿ ਐਸੇ ॥

आपस मै मिलबे हित कउ दल साज चले धुजनी पति ऐसे ॥

aapas mai milabe hit kau dhal saaj chale dhujanee pat aaise ||

ਲਾਲ ਕਰੇ ਪਟ ਪੈ ਡਰ ਕੇਸਰ ਰੰਗ ਭਰੇ ਪ੍ਰਤਿਨਾ ਪਤਿ ਕੈਸੇ ॥

लाल करे पट पै डर केसर रंग भरे प्रतिना पति कैसे ॥

laal kare paT pai ddar kesar ra(n)g bhare pratinaa pat kaise ||

ਰੰਚਕ ਤਾ ਛਬਿ ਢੂੰਢਿ ਲਈ ਕਬਿ ਨੈ ਮਨ ਕੇ ਫੁਨਿ ਭੀਤਰ ਮੈ ਸੇ ॥

रंचक ता छबि ढूँढि लई कबि नै मन के फुनि भीतर मै से ॥

ra(n)chak taa chhab ddoo(n)dd liee kab nai man ke fun bheetar mai se ||

ਦੇਖਨ ਕਉਤਕਿ ਬਿਆਹਹਿ ਕੋ ਨਿਕਸੇ ਇਹੁ ਕੁੰਕੁਮ ਆਨੰਦ ਜੈਸੇ ॥੨੪॥

देखन कउतकि बिआहहि को निकसे इहु कुँकुम आनंद जैसे ॥२४॥

dhekhan kautak biaaheh ko nikase ih ku(n)kum aana(n)dh jaise ||24||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕੰਸ ਅਉਰ ਬਸੁਦੇਵ ਜੂ ਆਪਸਿ ਮੈ ਮਿਲਿ ਅੰਗ ॥

कंस अउर बसुदेव जू आपसि मै मिलि अंग ॥

ka(n)s aaur basudhev joo aapas mai mil a(n)g ||

ਤਬੈ ਬਹੁਰਿ ਦੇਵਨ ਲਗੇ ਗਾਰੀ ਰੰਗਾ ਰੰਗ ॥੨੫॥

तबै बहुरि देवन लगे गारी रंगा रंग ॥२५॥

tabai bahur dhevan lage gaaree ra(n)gaa ra(n)g ||25||


ਸੋਰਠਾ ॥

सोरठा ॥

soraThaa ||

ਦੁੰਦਭਿ ਤਬੈ ਬਜਾਇ ਆਏ ਜੋ ਮਥੁਰਾ ਨਿਕਟਿ ॥

दुँदभि तबै बजाइ आए जो मथुरा निकटि ॥

dhu(n)dhabh tabai bajai aae jo mathuraa nikaT ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਨਿਰਖਾਇ ਹਰਖ ਭਇਓ ਹਰਿਖਾਇ ਕੈ ॥੨੬॥

ता छबि को निरखाइ हरख भइओ हरिखाइ कै ॥२६॥

taa chhab ko nirakhai harakh bhio harikhai kai ||26||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਵਤ ਕੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਰੂਪ ਸਜੇ ਅਪੁਨੇ ਤਨਿ ਨਾਰੀ ॥

आवत को सुनि कै बसुदेवहि रूप सजे अपुने तनि नारी ॥

aavat ko sun kai basudheveh roop saje apune tan naaree ||

ਗਾਵਤ ਗੀਤ ਬਜਾਵਤ ਤਾਲਿ ਦਿਵਾਵਤਿ ਆਵਤ ਨਾਗਰਿ ਗਾਰੀ ॥

गावत गीत बजावत तालि दिवावति आवत नागरि गारी ॥

gaavat geet bajaavat taal dhivaavat aavat naagar gaaree ||

ਕੋਠਨ ਪੈ ਨਿਰਖੈ ਚੜਿ ਤਾਸਨਿ ਤਾ ਛਬਿ ਕੀ ਉਪਮਾ ਜੀਅ ਧਾਰੀ ॥

कोठन पै निरखै चड़ि तासनि ता छबि की उपमा जीअ धारी ॥

koThan pai nirakhai chaR taasan taa chhab kee upamaa jeea dhaaree ||

ਬੈਠਿ ਬਿਵਾਨ ਕੁਟੰਬ ਸਮੇਤ ਸੁ ਦੇਖਤ ਦੇਵਨ ਕੀ ਮਹਤਾਰੀ ॥੨੭॥

बैठि बिवान कुटंब समेत सु देखत देवन की महतारी ॥२७॥

baiTh bivaan kuTa(n)b samet su dhekhat dhevan kee mahataaree ||27||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਆਇਓ ਰਾਜੈ ਮੰਡਲ ਬਨਾਇਓ ਮਨਿ ਮਹਾ ਸੁਖ ਪਾਇਓ ਤਾ ਕੋ ਆਨਨ ਨਿਰਖ ਕੈ ॥

बासुदेव आइओ राजै मंडल बनाइओ मनि महा सुख पाइओ ता को आनन निरख कै ॥

baasudhev aaio raajai ma(n)ddal banaio man mahaa sukh paio taa ko aanan nirakh kai ||

ਸੁਗੰਧਿ ਲਗਾਯੋ ਰਾਗ ਗਾਇਨਨ ਗਾਯੋ ਤਿਸੈ ਬਹੁਤ ਦਿਵਾਯੋ ਬਰ ਲਿਆਯੋ ਜੋ ਪਰਖ ਕੈ ॥

सुगंधि लगायो राग गाइनन गायो तिसै बहुत दिवायो बर लिआयो जो परख कै ॥

suga(n)dh lagaayo raag gainan gaayo tisai bahut dhivaayo bar liaayo jo parakh kai ||

ਛਾਤੀ ਹਾਥ ਲਾਯੋ ਸੀਸ ਨਿਆਯੋ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਤਬੈ ਆਦਰ ਪਠਾਯੋ ਪੂਜ ਮਨ ਮੈ ਹਰਖ ਕੈ ॥

छाती हाथ लायो सीस निआयो उग्रसैन तबै आदर पठायो पूज मन मै हरख कै ॥

chhaatee haath laayo sees niaayo ugrasain tabai aadhar paThaayo pooj man mai harakh kai ||

ਭਯੋ ਜਨੁ ਮੰਗਨ ਨ ਭੂਮਿ ਪਰ ਬਾਦਰ ਸੋ ਰਾਜਾ ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਗਯੋ ਕੰਚਨ ਬਰਖ ਕੈ ॥੨੮॥

भयो जनु मंगन न भूमि पर बादर सो राजा उग्रसैन गयो कंचन बरख कै ॥२८॥

bhayo jan ma(n)gan na bhoom par baadhar so raajaa ugrasain gayo ka(n)chan barakh kai ||28||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਉਗ੍ਰਸੈਨ ਤਬ ਕੰਸ ਕੋ ਲਯੋ ਹਜੂਰਿ ਬੁਲਾਇ ॥

उग्रसैन तब कंस को लयो हजूरि बुलाइ ॥

augrasain tab ka(n)s ko layo hajoor bulai ||

ਕਹਿਓ ਸਾਥ ਤੁਮ ਜਾਇ ਕੈ ਦੇਹੁ ਭੰਡਾਰੁ ਖੁਲਾਇ ॥੨੯॥

कहिओ साथ तुम जाइ कै देहु भंडारु खुलाइ ॥२९॥

kahio saath tum jai kai dheh bha(n)ddaar khulai ||29||


ਅਉਰ ਸਮਗਰੀ ਅੰਨ ਕੀ ਲੈ ਜਾ ਤਾ ਕੇ ਪਾਸਿ ॥

अउर समगरी अंन की लै जा ता के पासि ॥

aaur samagaree a(n)n kee lai jaa taa ke paas ||

ਕਰਿ ਪ੍ਰਨਾਮੁ ਤਾ ਕੋ ਤਬੈ ਇਉ ਕਰਿਯੋ ਅਰਦਾਸਿ ॥੩੦॥

करि प्रनामु ता को तबै इउ करियो अरदासि ॥३०॥

kar pranaam taa ko tabai iau kariyo aradhaas ||30||


ਕਾਲ ਰਾਤ੍ਰ ਕੋ ਬ੍ਯਾਹ ਹੈ ਕੰਸਹਿ ਕਹੀ ਸੁਨਾਇ ॥

काल रात्र को ब्याह है कंसहि कही सुनाइ ॥

kaal raatr ko bayaeh hai ka(n)seh kahee sunai ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਪੁਰੋਹਿਤ ਕਹੀ ਭਲੀ ਜੁ ਤੁਮੈ ਸੁਹਾਇ ॥੩੧॥

बासुदेव पुरोहित कही भली जु तुमै सुहाइ ॥३१॥

baasudhev purohit kahee bhalee ju tumai suhai ||31||


ਕੰਸ ਕਹਿਓ ਕਰਿ ਜੋਰਿ ਤਬ ਸਬੈ ਬਾਤ ਕੋ ਭੇਵ ॥

कंस कहिओ करि जोरि तब सबै बात को भेव ॥

ka(n)s kahio kar jor tab sabai baat ko bhev ||

ਸਾਧਿ ਸਾਧਿ ਪੰਡਿਤ ਕਹਿਯੋ ਅਸ ਮਾਨੀ ਬਸੁਦੇਵ ॥੩੨॥

साधि साधि पंडित कहियो अस मानी बसुदेव ॥३२॥

saadh saadh pa(n)ddit kahiyo as maanee basudhev ||32||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਰਾਤਿ ਬਿਤੀਤ ਭਈ ਅਰ ਪ੍ਰਾਤਿ ਭਈ ਫਿਰਿ ਰਾਤਿ ਤਬੈ ਚੜਿ ਆਏ ॥

राति बितीत भई अर प्राति भई फिरि राति तबै चड़ि आए ॥

raat biteet bhiee ar praat bhiee fir raat tabai chaR aae ||

ਛਾਡਿ ਦਏ ਹਥਿ ਫੂਲ ਹਜਾਰ ਦੋ ਊਭੁਚ ਪ੍ਰਯੋਧਰ ਐਸਿ ਫਿਰਾਏ ॥

छाडि दए हथि फूल हजार दो ऊभुच प्रयोधर ऐसि फिराए ॥

chhaadd dhe hath fool hajaar dho uoobhuch prayodhar aais firaae ||

ਅਉਰ ਹਵਾਈ ਚਲੀ ਨਭ ਕੋ ਉਪਮਾ ਤਿਨ ਕੀ ਕਬਿ ਸ੍ਯਾਮ ਸੁਨਾਏ ॥

अउर हवाई चली नभ को उपमा तिन की कबि स्याम सुनाए ॥

aaur havaiee chalee nabh ko upamaa tin kee kab sayaam sunaae ||

ਦੇਖਹਿ ਕਉਤਕ ਦੇਵ ਸਬੈ ਤਿਹ ਤੇ ਮਨੋ ਕਾਗਦ ਕੋਟਿ ਪਠਾਏ ॥੩੩॥

देखहि कउतक देव सबै तिह ते मनो कागद कोटि पठाए ॥३३॥

dhekheh kautak dhev sabai teh te mano kaagadh koT paThaae ||33||


ਲੈ ਬਸੁਦੇਵ ਕੋ ਅਗ੍ਰ ਪੁਰੋਹਿਤ ਕੰਸਹਿ ਕੇ ਚਲਿ ਧਾਮ ਗਏ ਹੈ ॥

लै बसुदेव को अग्र पुरोहित कंसहि के चलि धाम गए है ॥

lai basudhev ko agr purohit ka(n)seh ke chal dhaam ge hai ||

ਆਗੇ ਤੇ ਨਾਰਿ ਭਈ ਇਕ ਲੇਹਿਸ ਗਾਗਰ ਪੰਡਿਤ ਡਾਰਿ ਦਏ ਹੈ ॥

आगे ते नारि भई इक लेहिस गागर पंडित डारि दए है ॥

aage te naar bhiee ik lehis gaagar pa(n)ddit ddaar dhe hai ||

ਡਾਰਿ ਦਏ ਲਡੂਆ ਗਹਿ ਝਾਟਨਿ ਤਾ ਕੋ ਸੋਊ ਵੇ ਤੋ ਭਛ ਗਏ ਹੈ ॥

डारि दए लडूआ गहि झाटनि ता को सोऊ वे तो भछ गए है ॥

ddaar dhe laddooaa geh jhaaTan taa ko souoo ve to bhachh ge hai ||

ਜਾਦਵ ਬੰਸ ਦੁਹੂੰ ਦਿਸ ਤੇ ਸੁਨਿ ਕੈ ਸੁ ਅਨੇਕਿਕ ਹਾਸ ਭਏ ਹੈ ॥੩੪॥

जादव बंस दुहूँ दिस ते सुनि कै सु अनेकिक हास भए है ॥३४॥

jaadhav ba(n)s dhuhoo(n) dhis te sun kai su anekik haas bhe hai ||34||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਗਾਵਤ ਬਜਾਵਤ ਸੁ ਗਾਰਨ ਦਿਵਾਖਤ ਆਵਤ ਸੁਹਾਵਤ ਹੈ ਮੰਦ ਮੰਦ ਗਾਵਤੀ ॥

गावत बजावत सु गारन दिवाखत आवत सुहावत है मंद मंद गावती ॥

gaavat bajaavat su gaaran dhivaakhat aavat suhaavat hai ma(n)dh ma(n)dh gaavatee ||

ਕੇਹਰਿ ਸੀ ਕਟਿ ਅਉ ਕੁਰੰਗਨ ਸੇ ਦ੍ਰਿਗ ਜਾ ਕੇ ਗਜ ਕੈਸੀ ਚਾਲ ਮਨ ਭਾਵਤ ਸੁ ਆਵਤੀ ॥

केहरि सी कटि अउ कुरंगन से दृग जा के गज कैसी चाल मन भावत सु आवती ॥

kehar see kaT aau kura(n)gan se dhirag jaa ke gaj kaisee chaal man bhaavat su aavatee ||

ਮੋਤਿਨ ਕੇ ਚਉਕਿ ਕਰੇ ਲਾਲਨ ਕੇ ਖਾਰੇ ਧਰੇ ਬੈਠੇ ਤਬੈ ਦੋਊ ਦੂਲਹਿ ਦੁਲਹੀ ਸੁਹਾਵਤੀ ॥

मोतिन के चउकि करे लालन के खारे धरे बैठे तबै दोऊ दूलहि दुलही सुहावती ॥

motin ke chauk kare laalan ke khaare dhare baiThe tabai dhouoo dhooleh dhulahee suhaavatee ||

ਬੇਦਨ ਕੀ ਧੁਨਿ ਕੀਨੀ ਬਹੁ ਦਛਨਾ ਦਿਜਨ ਦੀਨੀ ਲੀਨੀ ਸਾਤ ਭਾਵਰੈ ਜੋ ਭਾਵਤੇ ਸੋਭਾਵਤੀ ॥੩੫॥

बेदन की धुनि कीनी बहु दछना दिजन दीनी लीनी सात भावरै जो भावते सोभावती ॥३५॥

bedhan kee dhun keenee bahu dhachhanaa dhijan dheenee leenee saat bhaavarai jo bhaavate sobhaavatee ||35||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਰਾਤਿ ਭਏ ਬਸੁਦੇਵ ਜੂ ਕੀਨੋ ਤਹਾ ਬਿਲਾਸ ॥

राति भए बसुदेव जू कीनो तहा बिलास ॥

raat bhe basudhev joo keeno tahaa bilaas ||

ਪ੍ਰਾਤ ਭਏ ਉਠ ਕੈ ਤਬੈ ਗਇਓ ਸਸੁਰ ਕੇ ਪਾਸਿ ॥੩੬॥

प्रात भए उठ कै तबै गइओ ससुर के पासि ॥३६॥

praat bhe uTh kai tabai gio sasur ke paas ||36||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸਾਜ ਸਮੇਤ ਦਏ ਗਜ ਆਯੁਤ ਸੁ ਅਉਰ ਦਏ ਤ੍ਰਿਗੁਣੀ ਰਥਨਾਰੇ ॥

साज समेत दए गज आयुत सु अउर दए तृगुणी रथनारे ॥

saaj samet dhe gaj aayut su aaur dhe tiragunee rathanaare ||

ਲਛ ਭਟੰ ਦਸ ਲਛ ਤੁਰੰਗਮ ਊਟ ਅਨੇਕ ਭਰੇ ਜਰ ਭਾਰੇ ॥

लछ भटं दस लछ तुरंगम ऊट अनेक भरे जर भारे ॥

lachh bhaTa(n) dhas lachh tura(n)gam uooT anek bhare jar bhaare ||

ਛਤੀਸ ਕੋਟ ਦਏ ਦਲ ਪੈਦਲ ਸੰਗਿ ਕਿਧੋ ਤਿਨ ਕੇ ਰਖਵਾਰੇ ॥

छतीस कोट दए दल पैदल संगि किधो तिन के रखवारे ॥

chhatees koT dhe dhal paidhal sa(n)g kidho tin ke rakhavaare ||

ਕੰਸ ਤਬੈ ਤਿਹ ਰਾਖਨ ਕਉ ਮਨੋ ਆਪ ਭਏ ਰਥ ਕੇ ਹਕਵਾਰੇ ॥੩੭॥

कंस तबै तिह राखन कउ मनो आप भए रथ के हकवारे ॥३७॥

ka(n)s tabai teh raakhan kau mano aap bhe rath ke hakavaare ||37||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕੰਸ ਲਵਾਏ ਜਾਤ ਤਿਨਿ ਸਕਲ ਪ੍ਰਬਲ ਦਲ ਸਾਜਿ ॥

कंस लवाए जात तिनि सकल प्रबल दल साजि ॥

ka(n)s lavaae jaat tin sakal prabal dhal saaj ||

ਆਗੇ ਤੇ ਸ੍ਰਵਨਨ ਸੁਨੀ ਬਿਧ ਕੀ ਅਸੁਭ ਅਵਾਜ ॥੩੮॥

आगे ते स्रवनन सुनी बिध की असुभ अवाज ॥३८॥

aage te sravanan sunee bidh kee asubh avaaj ||38||


ਨਭਿ ਬਾਨੀ ਬਾਚ ਕੰਸ ਸੋ ॥

नभि बानी बाच कंस सो ॥

nabh baanee baach ka(n)s so ||

ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਦੁਖ ਕੋ ਹਰਿਨ ਬਿਧ ਸਿਧਿ ਕੇ ਕਰਨ ਰੂਪ ਮੰਗਲ ਧਰਨ ਐਸੋ ਕਹਿਯੋ ਹੈ ਉਚਾਰ ਕੈ ॥

दुख को हरिन बिध सिधि के करन रूप मंगल धरन ऐसो कहियो है उचार कै ॥

dhukh ko harin bidh sidh ke karan roop ma(n)gal dharan aaiso kahiyo hai uchaar kai ||

ਲੀਏ ਕਹਾ ਜਾਤ ਤੇਰੋ ਕਾਲ ਹੈ ਰੇ ਮੂੜ ਮਤਿ ਆਠਵੋ ਗਰਭ ਯਾ ਕੋ ਤੋ ਕੋ ਡਾਰੈ ਮਾਰਿ ਹੈ ॥

लीए कहा जात तेरो काल है रे मूड़ मति आठवो गरभ या को तो को डारै मारि है ॥

le'ee kahaa jaat tero kaal hai re mooR mat aaThavo garabh yaa ko to ko ddaarai maar hai ||

ਅਚਰਜ ਮਾਨ ਲੀਨੋ ਮਨ ਮੈ ਬਿਚਾਰ ਇਹ ਕਾਢ ਕੈ ਕ੍ਰਿਪਾਨ ਡਾਰੋ ਇਨ ਹੀ ਸੰਘਾਰਿ ਕੈ ॥

अचरज मान लीनो मन मै बिचार इह काढ कै कृपान डारो इन ही संघारि कै ॥

acharaj maan leeno man mai bichaar ieh kaadd kai kirapaan ddaaro in hee sa(n)ghaar kai ||

ਜਾਹਿੰਗੇ ਛਪਾਇ ਕੈ ਸੁ ਜਾਨੀ ਕੰਸ ਮਨ ਮਾਹਿ ਇਹੈ ਬਾਤ ਭਲੀ ਡਾਰੋ ਜਰ ਹੀ ਉਖਾਰਿ ਕੈ ॥੩੯॥

जाहिंगे छपाइ कै सु जानी कंस मन माहि इहै बात भली डारो जर ही उखारि कै ॥३९॥

jaahi(n)ge chhapai kai su jaanee ka(n)s man maeh ihai baat bhalee ddaaro jar hee ukhaar kai ||39||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕੰਸ ਦੋਹੂੰ ਕੇ ਬਧ ਨਮਿਤ ਲੀਨੋ ਖੜਗ ਨਿਕਾਰਿ ॥

कंस दोहूँ के बध नमित लीनो खड़ग निकारि ॥

ka(n)s dhohoo(n) ke badh namit leeno khaRag nikaar ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਅਰੁ ਦੇਵਕੀ ਡਰੇ ਦੋਊ ਨਰ ਨਾਰਿ ॥੪੦॥

बासुदेव अरु देवकी डरे दोऊ नर नारि ॥४०॥

baasudhev ar dhevakee ddare dhouoo nar naar ||40||


ਬਾਸੁਦੇਵ ਬਾਚ ਕੰਸ ਸੋ ॥

बासुदेव बाच कंस सो ॥

baasudhev baach ka(n)s so ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਾਸਦੇਵ ਡਰੁ ਮਾਨ ਕੈ ਤਾ ਸੋ ਕਹੀ ਸੁਨਾਇ ॥

बासदेव डरु मान कै ता सो कही सुनाइ ॥

baasadhev ddar maan kai taa so kahee sunai ||

ਜੋ ਯਾ ਹੀ ਤੇ ਜਨਮ ਹੈ ਮਾਰਹੁ ਤਾਕਹੁ ਰਾਇ ॥੪੧॥

जो या ही ते जनम है मारहु ताकहु राइ ॥४१॥

jo yaa hee te janam hai maarahu taakahu rai ||41||


ਕੰਸ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

कंस बाच मन मै ॥

ka(n)s baach man mai ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪੁਤ੍ਰ ਹੇਤ ਕੇ ਭਾਵ ਸੌ ਮਤਿ ਇਹ ਜਾਇ ਛਪਾਇ ॥

पुत्र हेत के भाव सौ मति इह जाइ छपाइ ॥

putr het ke bhaav sau mat ieh jai chhapai ||

ਬੰਦੀਖਾਨੈ ਦੇਉ ਇਨ ਇਹੈ ਬਿਚਾਰੀ ਰਾਇ ॥੪੨॥

बंदीखानै देउ इन इहै बिचारी राइ ॥४२॥

ba(n)dheekhaanai dheau in ihai bichaaree rai ||42||


ਅਥ ਦੇਵਕੀ ਬਸੁਦੇਵ ਕੈਦ ਕੀਬੋ ॥

अथ देवकी बसुदेव कैद कीबो ॥

ath dhevakee basudhev kaidh keebo ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਡਾਰਿ ਜੰਜੀਰ ਲਏ ਤਿਨ ਪਾਇਨ ਪੈ ਫਿਰਿ ਕੈ ਮਥੁਰਾ ਮਹਿ ਆਯੋ ॥

डारि जंजीर लए तिन पाइन पै फिरि कै मथुरा महि आयो ॥

ddaar ja(n)jeer le tin pain pai fir kai mathuraa meh aayo ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਸਭ ਲੋਗ ਕਥਾ ਅਤਿ ਨਾਮ ਬੁਰੋ ਜਗ ਮੈ ਨਿਕਰਾਯੋ ॥

सो सुनि कै सभ लोग कथा अति नाम बुरो जग मै निकरायो ॥

so sun kai sabh log kathaa at naam buro jag mai nikaraayo ||

ਆਨਿ ਰਖੈ ਗ੍ਰਿਹ ਆਪਨ ਮੈ ਰਖਵਾਰੀ ਕੋ ਸੇਵਕ ਲੋਗ ਬੈਠਾਯੋ ॥

आनि रखै गृह आपन मै रखवारी को सेवक लोग बैठायो ॥

aan rakhai gireh aapan mai rakhavaaree ko sevak log baiThaayo ||

ਆਨਿ ਬਡੇਨ ਕੀ ਛਾਡਿ ਦਈ ਕੁਲ ਭੀਤਰ ਆਪਨੋ ਰਾਹ ਚਲਾਯੋ ॥੪੩॥

आनि बडेन की छाडि दई कुल भीतर आपनो राह चलायो ॥४३॥

aan badden kee chhaadd dhiee kul bheetar aapano raeh chalaayo ||43||


ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਦੋਹਰਾ ॥

कबियो बाच दोहरा ॥

kabiyo baach dhoharaa ||

ਕਿਤਕ ਦਿਵਸ ਬੀਤੇ ਜਬੈ ਕੰਸ ਰਾਜ ਉਤਪਾਤ ॥

कितक दिवस बीते जबै कंस राज उतपात ॥

kitak dhivas beete jabai ka(n)s raaj utapaat ||

ਤਬੈ ਕਥਾ ਅਉਰੈ ਚਲੀ ਕਰਮ ਰੇਖ ਕੀ ਬਾਤ ॥੪੪॥

तबै कथा अउरै चली करम रेख की बात ॥४४॥

tabai kathaa aaurai chalee karam rekh kee baat ||44||


ਪ੍ਰਥਮ ਪੁਤ੍ਰ ਦੇਵਕੀ ਕੇ ਜਨਮ ਕਥਨੰ ॥

प्रथम पुत्र देवकी के जनम कथनं ॥

pratham putr dhevakee ke janam kathana(n) ||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪੁਤ੍ਰ ਭਇਓ ਦੇਵਕੀ ਕੈ ਕੀਰਤਿ ਮਤ ਤਿਹ ਨਾਮੁ ॥

पुत्र भइओ देवकी कै कीरति मत तिह नामु ॥

putr bhio dhevakee kai keerat mat teh naam ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਲੈ ਤਾਹਿ ਕੌ ਗਯੋ ਕੰਸ ਕੈ ਧਾਮ ॥੪੫॥

बासुदेव लै ताहि कौ गयो कंस कै धाम ॥४५॥

baasudhev lai taeh kau gayo ka(n)s kai dhaam ||45||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਲੈ ਕਰਿ ਤਾਤ ਕੋ ਤਾਤ ਚਲਿਯੋ ਜਬ ਹੀ ਨ੍ਰਿਪ ਕੈ ਦਰ ਊਪਰ ਆਇਓ ॥

लै करि तात को तात चलियो जब ही नृप कै दर ऊपर आइओ ॥

lai kar taat ko taat chaliyo jab hee nirap kai dhar uoopar aaio ||

ਜਾਇ ਕਹਿਯੋ ਦਰਵਾਨਨ ਸੋ ਤਿਨ ਬੋਲਿ ਕੈ ਭੀਤਰ ਜਾਇ ਜਨਾਇਓ ॥

जाइ कहियो दरवानन सो तिन बोलि कै भीतर जाइ जनाइओ ॥

jai kahiyo dharavaanan so tin bol kai bheetar jai janaio ||

ਕੰਸ ਕਰੀ ਕਰੁਨਾ ਸਿਸੁ ਦੇਖਿ ਕਹਿਓ ਹਮ ਹੂੰ ਤੁਮ ਕੋ ਬਖਸਾਇਓ ॥

कंस करी करुना सिसु देखि कहिओ हम हूँ तुम को बखसाइओ ॥

ka(n)s karee karunaa sis dhekh kahio ham hoo(n) tum ko bakhasaio ||

ਫੇਰ ਚਲਿਓ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਬਸੁਦੇਵ ਤਊ ਮਨ ਮੈ ਕਛੁ ਨ ਸੁਖੁ ਪਾਇਓ ॥੪੬॥

फेर चलिओ गृह को बसुदेव तऊ मन मै कछु न सुखु पाइओ ॥४६॥

fer chalio gireh ko basudhev tuoo man mai kachh na sukh paio ||46||


ਬਸੁਦੇਵ ਬਾਚ ਮਨ ਮੈ ॥

बसुदेव बाच मन मै ॥

basudhev baach man mai ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਾਸੁਦੇਵ ਮਨ ਆਪਨੇ ਕੀਨੋ ਇਹੈ ਬਿਚਾਰ ॥

बासुदेव मन आपने कीनो इहै बिचार ॥

baasudhev man aapane keeno ihai bichaar ||

ਕੰਸ ਮੂੜ ਦੁਰਮਤਿ ਬਡੋ ਯਾ ਕੌ ਡਰਿ ਹੈ ਮਾਰਿ ॥੪੭॥

कंस मूड़ दुरमति बडो या कौ डरि है मारि ॥४७॥

ka(n)s mooR dhuramat baddo yaa kau ddar hai maar ||47||


ਨਾਰਦ ਰਿਖਿ ਬਾਚ ਕੰਸ ਪ੍ਰਤਿ ॥

नारद रिखि बाच कंस प्रति ॥

naaradh rikh baach ka(n)s prat ||

ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਤਬ ਮੁਨਿ ਆਯੋ ਕੰਸ ਗ੍ਰਿਹਿ ਕਹੀ ਬਾਤ ਸੁਨਿ ਰਾਇ ॥

तब मुनि आयो कंस गृहि कही बात सुनि राइ ॥

tab mun aayo ka(n)s gireh kahee baat sun rai ||

ਅਸਟ ਲੀਕ ਕਰ ਕੈ ਗਨੀ ਦੀਨੋ ਭੇਦ ਬਤਾਇ ॥੪੮॥

असट लीक कर कै गनी दीनो भेद बताइ ॥४८॥

asaT leek kar kai ganee dheeno bhedh batai ||48||


ਅਥ ਭ੍ਰਿਤਨ ਸੌ ਕੰਸ ਬਾਚ ॥

अथ भृतन सौ कंस बाच ॥

ath bhiratan sau ka(n)s baach ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਬਾਤ ਸੁਨੀ ਜਬ ਨਾਰਦ ਕੀ ਇਹ ਤੋ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਮਨ ਮਾਹਿ ਭਈ ਹੈ ॥

बात सुनी जब नारद की इह तो नृप के मन माहि भई है ॥

baat sunee jab naaradh kee ieh to nirap ke man maeh bhiee hai ||

ਮਾਰਹੁ ਜਾਇ ਇਸੈ ਅਬ ਹੀ ਕਰਿ ਭ੍ਰਿਤਨ ਨੈਨ ਕੀ ਸੈਨ ਦਈ ਹੈ ॥

मारहु जाइ इसै अब ही करि भृतन नैन की सैन दई है ॥

maarahu jai isai ab hee kar bhiratan nain kee sain dhiee hai ||

ਦਉਰਿ ਗਏ ਤਿਹ ਆਇਸੁ ਮਾਨ ਕੈ ਬਾਤ ਇਹੈ ਚਲਿ ਲੋਗ ਗਈ ਹੈ ॥

दउरि गए तिह आइसु मान कै बात इहै चलि लोग गई है ॥

dhaur ge teh aais maan kai baat ihai chal log giee hai ||

ਪਾਥਰ ਪੈ ਹਨਿ ਕੈ ਘਨ ਜਿਉ ਬਪੁ ਜੀਵਹਿ ਤੇ ਕਰਿ ਭਿੰਨ ਲਈ ਹੈ ॥੪੯॥

पाथर पै हनि कै घन जिउ बपु जीवहि ते करि भिंन लई है ॥४९॥

paathar pai han kai ghan jiau bap jeeveh te kar bhi(n)n liee hai ||49||


ਪ੍ਰਿਥਮ ਪੁਤ੍ਰ ਬਧਹਿ ॥

पृथम पुत्र बधहि ॥

piratham putr badheh ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਅਉਰ ਭਯੋ ਸੁਤ ਜੋ ਤਿਹ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹਿ ਤਉ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਮਹਾ ਮਤਿ ਹੀਨੋ ॥

अउर भयो सुत जो तिह के गृहि तउ नृप कंस महा मति हीनो ॥

aaur bhayo sut jo teh ke gireh tau nirap ka(n)s mahaa mat heeno ||

ਸੇਵਕ ਭੇਜ ਦਏ ਤਿਨ ਲਿਆਇ ਕੈ ਪਾਥਰ ਪੈ ਹਨਿ ਕੈ ਫੁਨਿ ਦੀਨੋ ॥

सेवक भेज दए तिन लिआइ कै पाथर पै हनि कै फुनि दीनो ॥

sevak bhej dhe tin liaai kai paathar pai han kai fun dheeno ||

ਸੋਰ ਪਰਿਯੋ ਸਬ ਹੀ ਪੁਰ ਮੈ ਕਬਿ ਨੈ ਤਿਹ ਕੋ ਜਸੁ ਇਉ ਲਖਿ ਲੀਨੋ ॥

सोर परियो सब ही पुर मै कबि नै तिह को जसु इउ लखि लीनो ॥

sor pariyo sab hee pur mai kab nai teh ko jas iau lakh leeno ||

ਇੰਦ੍ਰ ਮੂਓ ਸੁਨਿ ਕੈ ਰਨ ਮੈ ਮਿਲ ਕੈ ਸੁਰ ਮੰਡਲ ਰੋਦਨ ਕੀਨੋ ॥੫੦॥

इंद्र मूओ सुनि कै रन मै मिल कै सुर मंडल रोदन कीनो ॥५०॥

ei(n)dhr mooo sun kai ran mai mil kai sur ma(n)ddal rodhan keeno ||50||


ਅਉਰ ਭਯੋ ਸੁਤ ਜੋ ਤਿਹ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਨਾਮ ਧਰਿਓ ਤਿਹ ਕੋ ਤਿਨ ਹੂੰ ਜੈ ॥

अउर भयो सुत जो तिह के गृह नाम धरिओ तिह को तिन हूँ जै ॥

aaur bhayo sut jo teh ke gireh naam dhario teh ko tin hoo(n) jai ||

ਮਾਰ ਦਯੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸ ਸੁ ਪਾਥਰ ਪੈ ਹਨਿ ਡਾਰਿਓ ਖੂੰਜੈ ॥

मार दयो सुनि कै नृप कंस सु पाथर पै हनि डारिओ खूँजै ॥

maar dhayo sun kai nirap ka(n)s su paathar pai han ddaario khoo(n)jai ||

ਸੀਸ ਕੇ ਬਾਰ ਉਖਾਰਤ ਦੇਵਕੀ ਰੋਦਨ ਚੋਰਨ ਤੈ ਘਰਿ ਗੂੰਜੈ ॥

सीस के बार उखारत देवकी रोदन चोरन तै घरि गूँजै ॥

sees ke baar ukhaarat dhevakee rodhan choran tai ghar goo(n)jai ||

ਜਿਉ ਰੁਤਿ ਅੰਤੁ ਬਸੰਤ ਸਮੈ ਨਭਿ ਕੋ ਜਿਮ ਜਾਤ ਪੁਕਾਰਤ ਕੂੰਜੈ ॥੫੧॥

जिउ रुति अंतु बसंत समै नभि को जिम जात पुकारत कूँजै ॥५१॥

jiau rut a(n)t basa(n)t samai nabh ko jim jaat pukaarat koo(n)jai ||51||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਚਉਥੋ ਪੁਤ੍ਰ ਭਇਓ ਸੋ ਭੀ ਕੰਸ ਮਾਰ ਦਇਓ ਤਿਹ ਸੋਕ ਬੜਵਾ ਕੀ ਲਾਟੈ ਮਨ ਮੈ ਜਗਤ ਹੈ ॥

चउथो पुत्र भइओ सो भी कंस मार दइओ तिह सोक बड़वा की लाटै मन मै जगत है ॥

chautho putr bhio so bhee ka(n)s maar dhio teh sok baRavaa kee laaTai man mai jagat hai ||

ਪਰੀ ਹੈਗੀ ਦਾਸੀ ਮਹਾ ਮੋਹ ਹੂੰ ਕੀ ਫਾਸੀ ਬੀਚ ਗਈ ਮਿਟ ਸੋਭਾ ਪੈ ਉਦਾਸੀ ਹੀ ਪਗਤ ਹੈ ॥

परी हैगी दासी महा मोह हूँ की फासी बीच गई मिट सोभा पै उदासी ही पगत है ॥

paree haigee dhaasee mahaa moh hoo(n) kee faasee beech giee miT sobhaa pai udhaasee hee pagat hai ||

ਕੈਧੋ ਤੁਮ ਨਾਥ ਹ੍ਵੈ ਸਨਾਥ ਹਮ ਹੂੰ ਪੈ ਹੂੰਜੈ ਪਤਿ ਕੀ ਨ ਗਤਿ ਔਰ ਤਨ ਕੀ ਨ ਗਤਿ ਹੈ ॥

कैधो तुम नाथ ह्वै सनाथ हम हूँ पै हूँजै पति की न गति और तन की न गति है ॥

kaidho tum naath havai sanaath ham hoo(n) pai hoo(n)jai pat kee na gat aauar tan kee na gat hai ||

ਭਈ ਉਪਹਾਸੀ ਦੇਹ ਪੂਤਨ ਬਿਨਾਸੀ ਅਬਿਨਾਸੀ ਤੇਰੀ ਹਾਸੀ ਨ ਹਮੈ ਗਾਸੀ ਸੀ ਲਗਤ ਹੈ ॥੫੨॥

भई उपहासी देह पूतन बिनासी अबिनासी तेरी हासी न हमै गासी सी लगत है ॥५२॥

bhiee upahaasee dheh pootan binaasee abinaasee teree haasee na hamai gaasee see lagat hai ||52||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਪਾਚਵੋ ਪੁਤ੍ਰ ਭਯੋ ਸੁਨਿ ਕੰਸ ਸੁ ਪਾਥਰ ਸੋ ਹਨਿ ਮਾਰਿ ਦਯੋ ਹੈ ॥

पाचवो पुत्र भयो सुनि कंस सु पाथर सो हनि मारि दयो है ॥

paachavo putr bhayo sun ka(n)s su paathar so han maar dhayo hai ||

ਸ੍ਵਾਸ ਗਯੋ ਨਭਿ ਕੇ ਮਗ ਮੈ ਤਨ ਤਾ ਕੋ ਕਿਧੌ ਜਮੁਨਾ ਮੈ ਗਯੋ ਹੈ ॥

स्वास गयो नभि के मग मै तन ता को किधौ जमुना मै गयो है ॥

savaiaas gayo nabh ke mag mai tan taa ko kidhau jamunaa mai gayo hai ||

ਸੋ ਸੁਨਿ ਕੈ ਪੁਨਿ ਸ੍ਰੋਨਨ ਦੇਵਕੀ ਸੋਕ ਸੋ ਸਾਸ ਉਸਾਸ ਲਯੋ ਹੈ ॥

सो सुनि कै पुनि स्रोनन देवकी सोक सो सास उसास लयो है ॥

so sun kai pun sronan dhevakee sok so saas usaas layo hai ||

ਮੋਹ ਭਯੋ ਅਤਿ ਤਾ ਦਿਨ ਮੈ ਮਨੋ ਯਾਹੀ ਤੇ ਮੋਹ ਪ੍ਰਕਾਸ ਭਯੋ ਹੈ ॥੫੩॥

मोह भयो अति ता दिन मै मनो याही ते मोह प्रकास भयो है ॥५३॥

moh bhayo at taa dhin mai mano yaahee te moh prakaas bhayo hai ||53||


ਦੇਵਕੀ ਬੇਨਤੀ ਬਾਚ ॥

देवकी बेनती बाच ॥

dhevakee benatee baach ||

ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਪੁਤ੍ਰ ਭਇਓ ਛਠੋ ਬੰਸ ਸੋ ਭੀ ਮਾਰਿ ਡਾਰਿਓ ਕੰਸ ਦੇਵਕੀ ਪੁਕਾਰੀ ਨਾਥ ਬਾਤ ਸੁਨਿ ਲੀਜੀਐ ॥

पुत्र भइओ छठो बंस सो भी मारि डारिओ कंस देवकी पुकारी नाथ बात सुनि लीजीऐ ॥

putr bhio chhaTho ba(n)s so bhee maar ddaario ka(n)s dhevakee pukaaree naath baat sun leejeeaai ||

ਕੀਜੀਐ ਅਨਾਥ ਨ ਸਨਾਥ ਮੇਰੇ ਦੀਨਾਨਾਥ ਹਮੈ ਮਾਰ ਦੀਜੀਐ ਕਿ ਯਾ ਕੋ ਮਾਰ ਦੀਜੀਐ ॥

कीजीऐ अनाथ न सनाथ मेरे दीनानाथ हमै मार दीजीऐ कि या को मार दीजीऐ ॥

keejeeaai anaath na sanaath mere dheenaanaath hamai maar dheejeeaai k yaa ko maar dheejeeaai ||

ਕੰਸ ਬਡੋ ਪਾਪੀ ਜਾ ਕੋ ਲੋਭ ਭਯੋ ਜਾਪੀ ਸੋਈ ਕੀਜੀਐ ਹਮਾਰੀ ਦਸਾ ਜਾ ਤੇ ਸੁਖੀ ਜੀਜੀਐ ॥

कंस बडो पापी जा को लोभ भयो जापी सोई कीजीऐ हमारी दसा जा ते सुखी जीजीऐ ॥

ka(n)s baddo paapee jaa ko lobh bhayo jaapee soiee keejeeaai hamaaree dhasaa jaa te sukhee jeejeeaai ||

ਸ੍ਰੋਨਨ ਮੈ ਸੁਨਿ ਅਸਵਾਰੀ ਗਜ ਵਾਰੀ ਕਰੋ ਲਾਈਐ ਨ ਢੀਲ ਅਬ ਦੋ ਮੈ ਏਕ ਕੀਜੀਐ ॥੫੪॥

स्रोनन मै सुनि असवारी गज वारी करो लाईऐ न ढील अब दो मै एक कीजीऐ ॥५४॥

sronan mai sun asavaaree gaj vaaree karo laieeaai na ddeel ab dho mai ek keejeeaai ||54||


ਇਤਿ ਛਠਵੋਂ ਪੁਤ੍ਰ ਬਧਹ ॥

इति छठवों पुत्र बधह ॥

eit chhaThavo(n) putr badheh ||

ਅਥ ਬਲਭਦ੍ਰ ਜਨਮ ॥

अथ बलभद्र जनम ॥

ath balabhadhr janam ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਜੋ ਬਲਭਦ੍ਰ ਭਯੋ ਗਰਭਾਤਰ ਤੌ ਦੁਹੰ ਬੈਠਿ ਕੈ ਮੰਤ੍ਰ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥

जो बलभद्र भयो गरभातर तौ दुहं बैठि कै मंत्र करिओ है ॥

jo balabhadhr bhayo garabhaatar tau dhuha(n) baiTh kai ma(n)tr kario hai ||

ਤਾ ਹੀ ਤੇ ਮੰਤ੍ਰ ਕੇ ਜੋਰ ਸੋ ਕਾਢਿ ਕੈ ਰੋਹਿਨੀ ਕੇ ਉਰ ਬੀਚ ਧਰਿਓ ਹੈ ॥

ता ही ते मंत्र के जोर सो काढि कै रोहिनी के उर बीच धरिओ है ॥

taa hee te ma(n)tr ke jor so kaadd kai rohinee ke ur beech dhario hai ||

ਕੰਸ ਕਦਾਚ ਹਨੇ ਸਿਸੁ ਕੋ ਤਿਹ ਤੇ ਮਨ ਮੈ ਬਸੁਦੇਵ ਡਰਿਓ ਹੈ ॥

कंस कदाच हने सिसु को तिह ते मन मै बसुदेव डरिओ है ॥

ka(n)s kadhaach hane sis ko teh te man mai basudhev ddario hai ||

ਸੇਖ ਮਨੋ ਜਗ ਦੇਖਨ ਕੋ ਜਗ ਭੀਤਰ ਰੂਪ ਨਵੀਨ ਕਰਿਓ ਹੈ ॥੫੫॥

सेख मनो जग देखन को जग भीतर रूप नवीन करिओ है ॥५५॥

sekh mano jag dhekhan ko jag bheetar roop naveen kario hai ||55||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਕ੍ਰਿਸਨ ਕਰਿ ਸਾਧ ਦੋ ਬਿਸਨੁ ਕਿਸਨ ਪਤਿ ਜਾਸੁ ॥

कृसन कृसन करि साध दो बिसनु किसन पति जासु ॥

kirasan kirasan kar saadh dho bisan kisan pat jaas ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਬਿਸ੍ਵ ਤਰਬੇ ਨਿਮਿਤ ਤਨ ਮੈ ਕਰਿਯੋ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥੫੬॥

कृसन बिस्व तरबे निमित तन मै करियो प्रकास ॥५६॥

kirasan bisavai tarabe nimit tan mai kariyo prakaas ||56||


ਅਥ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਨਮ ॥

अथ कृसन जनम ॥

ath kirasan janam ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਸੰਖ ਗਦਾ ਕਰਿ ਅਉਰ ਤ੍ਰਿਸੂਲ ਧਰੇ ਤਨਿ ਕਉਚ ਬਡੇ ਬਡਭਾਗੀ ॥

संख गदा करि अउर तृसूल धरे तनि कउच बडे बडभागी ॥

sa(n)kh gadhaa kar aaur tirasool dhare tan kauch badde baddabhaagee ||

ਨੰਦ ਗਹੈ ਕਰਿ ਸਾਰੰਗ ਸਾਰੰਗ ਪੀਤ ਧਰੈ ਪਟ ਪੈ ਅਨੁਰਾਗੀ ॥

नंद गहै करि सारंग सारंग पीत धरै पट पै अनुरागी ॥

na(n)dh gahai kar saara(n)g saara(n)g peet dharai paT pai anuraagee ||

ਸੋਈ ਹੁਤੀ ਜਨਮਿਉ ਇਹ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਕੈ ਡਰਪੈ ਮਨ ਮੈ ਉਠਿ ਜਾਗੀ ॥

सोई हुती जनमिउ इह के गृह कै डरपै मन मै उठि जागी ॥

soiee hutee janamiau ieh ke gireh kai ddarapai man mai uTh jaagee ||

ਦੇਵਕੀ ਪੁਤ੍ਰ ਨ ਜਾਨਿਯੋ ਲਖਿਓ ਹਰਿ ਕੈ ਕੈ ਪ੍ਰਨਾਮ ਸੁ ਪਾਇਨ ਲਾਗੀ ॥੫੭॥

देवकी पुत्र न जानियो लखिओ हरि कै कै प्रनाम सु पाइन लागी ॥५७॥

dhevakee putr na jaaniyo lakhio har kai kai pranaam su pain laagee ||57||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਲਖਿਓ ਦੇਵਕੀ ਹਰਿ ਮਨੈ ਲਖਿਓ ਨ ਕਰਿ ਕਰਿ ਤਾਤ ॥

लखिओ देवकी हरि मनै लखिओ न करि करि तात ॥

lakhio dhevakee har manai lakhio na kar kar taat ||

ਲਖਿਓ ਜਾਨ ਕਰਿ ਮੋਹਿ ਕੀ ਤਾਨੀ ਤਾਨਿ ਕਨਾਤ ॥੫੮॥

लखिओ जान करि मोहि की तानी तानि कनात ॥५८॥

lakhio jaan kar moh kee taanee taan kanaat ||58||


ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਨਮ ਜਬ ਹੀ ਭਇਓ ਦੇਵਨ ਭਇਓ ਹੁਲਾਸ ॥

कृसन जनम जब ही भइओ देवन भइओ हुलास ॥

kirasan janam jab hee bhio dhevan bhio hulaas ||

ਸਤ੍ਰ ਸਬੈ ਅਬ ਨਾਸ ਹੋਹਿੰ ਹਮ ਕੋ ਹੋਇ ਬਿਲਾਸ ॥੫੯॥

सत्र सबै अब नास होहिं हम को होइ बिलास ॥५९॥

satr sabai ab naas hohi(n) ham ko hoi bilaas ||59||


ਆਨੰਦ ਸੋ ਸਬ ਦੇਵਤਨ ਸੁਮਨ ਦੀਨ ਬਰਖਾਇ ॥

आनंद सो सब देवतन सुमन दीन बरखाइ ॥

aana(n)dh so sab dhevatan suman dheen barakhai ||

ਸੋਕ ਹਰਨ ਦੁਸਟਨ ਦਲਨ ਪ੍ਰਗਟੇ ਜਗ ਮੋ ਆਇ ॥੬੦॥

सोक हरन दुसटन दलन प्रगटे जग मो आइ ॥६०॥

sok haran dhusaTan dhalan pragaTe jag mo aai ||60||


ਜੈ ਜੈ ਕਾਰ ਭਯੋ ਜਬੈ ਸੁਨੀ ਦੇਵਕੀ ਕਾਨਿ ॥

जै जै कार भयो जबै सुनी देवकी कानि ॥

jai jai kaar bhayo jabai sunee dhevakee kaan ||

ਤ੍ਰਾਸਤਿ ਹੁਇ ਮਨ ਮੈ ਕਹਿਯੋ ਸੋਰ ਕਰੈ ਕੋ ਆਨਿ ॥੬੧॥

त्रासति हुइ मन मै कहियो सोर करै को आनि ॥६१॥

traasat hui man mai kahiyo sor karai ko aan ||61||


ਬਾਸੁਦੇਵ ਅਰੁ ਦੇਵਕੀ ਮੰਤ੍ਰ ਕਰੈ ਮਨ ਮਾਹਿ ॥

बासुदेव अरु देवकी मंत्र करै मन माहि ॥

baasudhev ar dhevakee ma(n)tr karai man maeh ||

ਕੰਸ ਕਸਾਈ ਜਾਨ ਕੈ ਹੀਐ ਅਧਿਕ ਡਰਪਾਹਿ ॥੬੨॥

कंस कसाई जान कै हीऐ अधिक डरपाहि ॥६२॥

ka(n)s kasaiee jaan kai heeaai adhik ddarapaeh ||62||


ਇਤਿ ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਨਮ ਬਰਨਨੰ ਸਮਾਪਤੰ ॥

इति कृसन जनम बरननं समापतं ॥

eit kirasan janam baranana(n) samaapata(n) ||

ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮੰਤ੍ਰ ਬਿਚਾਰ ਕਰਿਓ ਦੁਹਹੂੰ ਮਿਲਿ ਮਾਰਿ ਡਰੈ ਇਹ ਕੋ ਮਤਿ ਰਾਜਾ ॥

मंत्र बिचार करिओ दुहहूँ मिलि मारि डरै इह को मति राजा ॥

ma(n)tr bichaar kario dhuhahoo(n) mil maar ddarai ieh ko mat raajaa ||

ਨੰਦਹਿ ਕੇ ਘਰਿ ਆਇ ਹਉ ਡਾਰਿ ਕੈ ਠਾਟ ਇਹੀ ਮਨ ਮੈ ਤਿਨ ਸਾਜਾ ॥

नंदहि के घरि आइ हउ डारि कै ठाट इही मन मै तिन साजा ॥

na(n)dheh ke ghar aai hau ddaar kai ThaaT ihee man mai tin saajaa ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕਹਿਓ ਮਨ ਮੈ ਨ ਡਰੋ ਤੁਮ ਜਾਹੁ ਨਿਸੰਕ ਬਜਾਵਤ ਬਾਜਾ ॥

कान्रह कहिओ मन मै न डरो तुम जाहु निसंक बजावत बाजा ॥

kaanreh kahio man mai na ddaro tum jaahu nisa(n)k bajaavat baajaa ||

ਮਾਯਾ ਕੀ ਖੈਂਚਿ ਕਨਾਤ ਲਈ ਧਰ ਬਾਲਕ ਸਊਰਭ ਆਪਿ ਬਿਰਾਜਾ ॥੬੩॥

माया की खैंचि कनात लई धर बालक सऊरभ आपि बिराजा ॥६३॥

maayaa kee khai(n)ch kanaat liee dhar baalak suoorabh aap biraajaa ||63||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਬੈ ਤਿਨ ਗ੍ਰਿਹਿ ਭਯੋ ਬਾਸੁਦੇਵ ਇਹ ਕੀਨ ॥

कृसन जबै तिन गृहि भयो बासुदेव इह कीन ॥

kirasan jabai tin gireh bhayo baasudhev ieh keen ||

ਦਸ ਹਜਾਰ ਗਾਈ ਭਲੀ ਮਨੈ ਮਨਸਿ ਕਰਿ ਦੀਨ ॥੬੪॥

दस हजार गाई भली मनै मनसि करि दीन ॥६४॥

dhas hajaar gaiee bhalee manai manas kar dheen ||64||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਛੂਟਿ ਕਿਵਾਰ ਗਏ ਘਰਿ ਕੇ ਦਰਿ ਕੇ ਨ੍ਰਿਪ ਕੇ ਬਰ ਕੇ ਚਲਤੇ ॥

छूटि किवार गए घरि के दरि के नृप के बर के चलते ॥

chhooT kivaar ge ghar ke dhar ke nirap ke bar ke chalate ||

ਹਰਖੇ ਸਰਖੇ ਬਸੁਦੇਵਹਿ ਕੇ ਪਗ ਜਾਇ ਛੁਹਿਓ ਜਮਨਾ ਜਲ ਤੇ ॥

हरखे सरखे बसुदेवहि के पग जाइ छुहिओ जमना जल ते ॥

harakhe sarakhe basudheveh ke pag jai chhuhio jamanaa jal te ||

ਹਰਿ ਦੇਖਨ ਕੌ ਹਰਿ ਅਉ ਬਢ ਕੇ ਹਰਿ ਦਉਰ ਗਏ ਤਨ ਕੇ ਬਲ ਤੇ ॥

हरि देखन कौ हरि अउ बढ के हरि दउर गए तन के बल ते ॥

har dhekhan kau har aau badd ke har dhaur ge tan ke bal te ||

ਕਾਜ ਇਹੀ ਕਹਿ ਦੋਊ ਗਏ ਜੁ ਖਿਝੈ ਬਹੁ ਪਾਪਨ ਕੀ ਮਲ ਤੇ ॥੬੫॥

काज इही कहि दोऊ गए जु खिझै बहु पापन की मल ते ॥६५॥

kaaj ihee keh dhouoo ge ju khijhai bahu paapan kee mal te ||65||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕ੍ਰਿਸਨ ਜਬੈ ਚੜਤੀ ਕਰੀ ਫੇਰਿਓ ਮਾਯਾ ਜਾਲ ॥

कृसन जबै चड़ती करी फेरिओ माया जाल ॥

kirasan jabai chaRatee karee ferio maayaa jaal ||

ਅਸੁਰ ਜਿਤੇ ਚਉਕੀ ਹੁਤੇ ਸੋਇ ਗਏ ਤਤਕਾਲ ॥੬੬॥

असुर जिते चउकी हुते सोइ गए ततकाल ॥६६॥

asur jite chaukee hute soi ge tatakaal ||66||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਕੰਸਹਿ ਕੇ ਡਰ ਤੇ ਬਸੁਦੇਵ ਸੁ ਪਾਇ ਜਬੈ ਜਮੁਨਾ ਮਧਿ ਠਾਨੋ ॥

कंसहि के डर ते बसुदेव सु पाइ जबै जमुना मधि ठानो ॥

ka(n)seh ke ddar te basudhev su pai jabai jamunaa madh Thaano ||

ਮਾਨ ਕੈ ਪ੍ਰੀਤਿ ਪੁਰਾਤਨ ਕੋ ਜਲ ਪਾਇਨ ਭੇਟਨ ਕਾਜ ਉਠਾਨੋ ॥

मान कै प्रीति पुरातन को जल पाइन भेटन काज उठानो ॥

maan kai preet puraatan ko jal pain bheTan kaaj uThaano ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਜਸੁ ਉਚ ਮਹਾ ਕਬਿ ਨੇ ਅਪਨੇ ਮਨ ਮੈ ਪਹਿਚਾਨੋ ॥

ता छबि को जसु उच महा कबि ने अपने मन मै पहिचानो ॥

taa chhab ko jas uch mahaa kab ne apane man mai pahichaano ||

ਕਾਨ੍ਰਹ ਕੋ ਜਾਨ ਕਿਧੋ ਪਤਿ ਹੈ ਇਹ ਕੈ ਜਮੁਨਾ ਤਿਹ ਭੇਟਤ ਮਾਨੋ ॥੬੭॥

कान्रह को जान किधो पति है इह कै जमुना तिह भेटत मानो ॥६७॥

kaanreh ko jaan kidho pat hai ieh kai jamunaa teh bheTat maano ||67||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਬੈ ਜਸੋਦਾ ਸੁਇ ਗਈ ਮਾਯਾ ਕੀਯੋ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥

जबै जसोदा सुइ गई माया कीयो प्रकास ॥

jabai jasodhaa sui giee maayaa keeyo prakaas ||

ਡਾਰਿ ਕ੍ਰਿਸਨ ਤਿਹ ਪੈ ਸੁਤਾ ਲੀਨੀ ਹੈ ਕਰਿ ਤਾਸ ॥੬੮॥

डारि कृसन तिह पै सुता लीनी है करि तास ॥६८॥

ddaar kirasan teh pai sutaa leenee hai kar taas ||68||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਮਾਯਾ ਕੋ ਲੈ ਕਰ ਮੈ ਬਸੁਦੇਵ ਸੁ ਸੀਘ੍ਰ ਚਲਿਯੋ ਅਪੁਨੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮਾਹੀ ॥

माया को लै कर मै बसुदेव सु सीघ्र चलियो अपुने गृह माही ॥

maayaa ko lai kar mai basudhev su seeghr chaliyo apune gireh maahee ||

ਸੋਇ ਗਏ ਪਰ ਦੁਆਰ ਸਬੈ ਘਰ ਬਾਹਰਿ ਭੀਤਰਿ ਕੀ ਸੁਧਿ ਨਾਹੀ ॥

सोइ गए पर दुआर सबै घर बाहरि भीतरि की सुधि नाही ॥

soi ge par dhuaar sabai ghar baahar bheetar kee sudh naahee ||

ਦੇਵਕੀ ਤੀਰ ਗਯੋ ਜਬ ਹੀ ਸਭ ਤੇ ਮਿਲਗੇ ਪਟ ਆਪਸਿ ਮਾਹੀ ॥

देवकी तीर गयो जब ही सभ ते मिलगे पट आपसि माही ॥

dhevakee teer gayo jab hee sabh te milage paT aapas maahee ||

ਬਾਲਿ ਉਠੀ ਜਬ ਰੋਦਨ ਕੈ ਜਗ ਕੈ ਸੁਧਿ ਜਾਇ ਕਰੀ ਨਰ ਨਾਹੀ ॥੬੯॥

बालि उठी जब रोदन कै जग कै सुधि जाइ करी नर नाही ॥६९॥

baal uThee jab rodhan kai jag kai sudh jai karee nar naahee ||69||


ਰੋਇ ਉਠੀ ਵਹ ਬਾਲਿ ਜਬੈ ਤਬ ਸ੍ਰੋਨਨ ਮੈ ਸੁਨਿ ਲੀ ਧੁਨਿ ਹੋਰੈ ॥

रोइ उठी वह बालि जबै तब स्रोनन मै सुनि ली धुनि होरै ॥

roi uThee veh baal jabai tab sronan mai sun lee dhun horai ||

ਧਾਇ ਗਏ ਨ੍ਰਿਪ ਕੰਸਹ ਕੇ ਘਰਿ ਜਾਇ ਕਹਿਯੋ ਜਨਮਿਯੋ ਰਿਪੁ ਤੋਰੈ ॥

धाइ गए नृप कंसह के घरि जाइ कहियो जनमियो रिपु तोरै ॥

dhai ge nirap ka(n)seh ke ghar jai kahiyo janamiyo rip torai ||

ਲੈ ਕੇ ਕ੍ਰਿਪਾਨ ਗਯੋ ਤਿਹ ਕੇ ਚਲਿ ਜਾਇ ਗਹੀ ਕਰ ਤੈ ਕਰਿ ਜੋਰੈ ॥

लै के कृपान गयो तिह के चलि जाइ गही कर तै करि जोरै ॥

lai ke kirapaan gayo teh ke chal jai gahee kar tai kar jorai ||

ਦੇਖਹੁ ਬਾਤ ਮਹਾ ਜੜ ਕੀ ਅਬ ਆਦਿਕ ਕੇ ਬਿਖ ਚਾਬਤ ਭੋਰੈ ॥੭੦॥

देखहु बात महा जड़ की अब आदिक के बिख चाबत भोरै ॥७०॥

dhekhahu baat mahaa jaR kee ab aadhik ke bikh chaabat bhorai ||70||


ਲਾਇ ਰਹੀ ਉਰ ਸੋ ਤਿਹ ਕੋ ਮੁਖ ਤੇ ਕਹਿਯੋ ਬਾਤ ਸੁਨੋ ਮਤਵਾਰੇ ॥

लाइ रही उर सो तिह को मुख ते कहियो बात सुनो मतवारे ॥

lai rahee ur so teh ko mukh te kahiyo baat suno matavaare ||

ਪੁਤ੍ਰ ਹਨੇ ਮਮ ਪਾਵਕ ਸੇ ਛਠ ਹੀ ਤੁਮ ਪਾਥਰ ਪੈ ਹਨਿ ਡਾਰੇ ॥

पुत्र हने मम पावक से छठ ही तुम पाथर पै हनि डारे ॥

putr hane mam paavak se chhaTh hee tum paathar pai han ddaare ||

ਛੀਨ ਕੈ ਕੰਸ ਕਹਿਯੋ ਮੁਖ ਤੇ ਇਹ ਭੀ ਪਟਕੇ ਇਹ ਕੈ ਅਬ ਨਾਰੇ ॥

छीन कै कंस कहियो मुख ते इह भी पटके इह कै अब नारे ॥

chheen kai ka(n)s kahiyo mukh te ieh bhee paTake ieh kai ab naare ||

ਦਾਮਿਨੀ ਹ੍ਵੈ ਲਹਕੀ ਨਭ ਮੈ ਜਬ ਰਾਖ ਲਈ ਵਹ ਰਾਖਨਹਾਰੇ ॥੭੧॥

दामिनी ह्वै लहकी नभ मै जब राख लई वह राखनहारे ॥७१॥

dhaaminee havai lahakee nabh mai jab raakh liee veh raakhanahaare ||71||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਕੈ ਕੈ ਕ੍ਰੋਧ ਮਨਿ ਕਰਿ ਬ੍ਯੋਤ ਵਾ ਕੇ ਮਾਰਬੇ ਕੀ ਚਾਕਰਨ ਕਹਿਓ ਮਾਰ ਡਾਰੋ ਨ੍ਰਿਪ ਬਾਤ ਹੈ ॥

कै कै क्रोध मनि करि ब्योत वा के मारबे की चाकरन कहिओ मार डारो नृप बात है ॥

kai kai krodh man kar bayot vaa ke maarabe kee chaakaran kahio maar ddaaro nirap baat hai ||

ਕਰ ਮੋ ਉਠਾਇ ਕੈ ਬਨਾਇ ਭਾਰੇ ਪਾਥਰ ਪੈ ਰਾਜ ਕਾਜ ਰਾਖਬੇ ਕੋ ਕਛੁ ਨਹੀ ਪਾਤ ਹੈ ॥

कर मो उठाइ कै बनाइ भारे पाथर पै राज काज राखबे को कछु नही पात है ॥

kar mo uThai kai banai bhaare paathar pai raaj kaaj raakhabe ko kachh nahee paat hai ||

ਆਪਨੋ ਸੋ ਬਲ ਕਰਿ ਰਾਖੈ ਇਹ ਭਲੀ ਭਾਤ ਸ੍ਵਛੰਦ ਬੰਦ ਕੈ ਕੈ ਛੂਟ ਇਹ ਜਾਤ ਹੈ ॥

आपनो सो बल करि राखै इह भली भात स्वछंद बंद कै कै छूट इह जात है ॥

aapano so bal kar raakhai ieh bhalee bhaat savaichha(n)dh ba(n)dh kai kai chhooT ieh jaat hai ||

ਮਾਯਾ ਕੋ ਬਢਾਇ ਕੈ ਸੁ ਸਭਨ ਸੁਨਾਇ ਕੈ ਸੁ ਐਸੇ ਉਡੀ ਬਾਰਾ ਜੈਸੇ ਪਾਰਾ ਉਡਿ ਜਾਤ ਹੈ ॥੭੨॥

माया को बढाइ कै सु सभन सुनाइ कै सु ऐसे उडी बारा जैसे पारा उडि जात है ॥७२॥

maayaa ko baddai kai su sabhan sunai kai su aaise uddee baaraa jaise paaraa udd jaat hai ||72||


ਸਵੈਯਾ ॥

सवैया ॥

savaiyaa ||

ਆਠ ਭੁਜਾ ਕਰਿ ਕੈ ਅਪਨੀ ਸਭਨੋ ਕਰ ਮੈ ਬਰ ਆਯੁਧ ਲੀਨੇ ॥

आठ भुजा करि कै अपनी सभनो कर मै बर आयुध लीने ॥

aaTh bhujaa kar kai apanee sabhano kar mai bar aayudh leene ||


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