P-18 Dhanvantari Avatar (Chaubis Avatar) (hindi punjabi english)


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ਅਥ ਧਨੰਤਰ ਬੈਦ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

अथ धनंतर बैद अवतार कथनं ॥

ath dhana(n)tar baidh avataar kathana(n) ||


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥

sree bhagautee jee sahai ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਸਭ ਧਨਵੰਤ ਭਏ ਜਗ ਲੋਗਾ ॥

सभ धनवंत भए जग लोगा ॥

sabh dhanava(n)t bhe jag logaa ||

ਏਕ ਨ ਰਹਾ ਤਿਨੋ ਤਨ ਸੋਗਾ ॥

एक न रहा तिनो तन सोगा ॥

ek na rahaa tino tan sogaa ||

ਭਾਤਿ ਭਾਤਿ ਭੱਛਤ ਪਕਵਾਨਾ ॥

भाति भाति भच्छत पकवाना ॥

bhaat bhaat bha'chhat pakavaanaa ||

ਉਪਜਤ ਰੋਗ ਦੇਹ ਤਿਨ ਨਾਨਾ ॥੧॥

उपजत रोग देह तिन नाना ॥१॥

aupajat rog dheh tin naanaa ||1||


ਰੋਗਾਕੁਲ ਸਭ ਹੀ ਭਏ ਲੋਗਾ ॥

रोगाकुल सभ ही भए लोगा ॥

rogaakul sabh hee bhe logaa ||

ਉਪਜਾ ਅਧਿਕ ਪ੍ਰਜਾ ਕੋ ਸੋਗਾ ॥

उपजा अधिक प्रजा को सोगा ॥

aupajaa adhik prajaa ko sogaa ||

ਪਰਮ ਪੁਰਖ ਕੀ ਕਰੀ ਬਡਾਈ ॥

परम पुरख की करी बडाई ॥

param purakh kee karee baddaiee ||

ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰੀ ਤਿਨ ਪਰ ਹਰਿ ਰਾਈ ॥੨॥

कृपा करी तिन पर हरि राई ॥२॥

kirapaa karee tin par har raiee ||2||


ਬਿਸਨ ਚੰਦ ਕੋ ਕਹਾ ਬੁਲਾਈ ॥

बिसन चंद को कहा बुलाई ॥

bisan cha(n)dh ko kahaa bulaiee ||

ਧਰ ਅਵਤਾਰ ਧਨੰਤਰ ਜਾਈ ॥

धर अवतार धनंतर जाई ॥

dhar avataar dhana(n)tar jaiee ||

ਆਯੁਰਬੇਦ ਕੋ ਕਰੋ ਪ੍ਰਕਾਸਾ ॥

आयुरबेद को करो प्रकासा ॥

aayurabedh ko karo prakaasaa ||

ਰੋਗ ਪ੍ਰਜਾ ਕੋ ਕਰਿਯਹੁ ਨਾਸਾ ॥੩॥

रोग प्रजा को करियहु नासा ॥३॥

rog prajaa ko kariyahu naasaa ||3||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਤਾ ਤੇ ਦੇਵ ਇਕਤ੍ਰ ਹੁਐ ਮਥਯੋ ਸਮੁੰਦ੍ਰਹਿ ਜਾਇ ॥

ता ते देव इकत्र हुऐ मथयो समुँद्रहि जाइ ॥

taa te dhev ikatr huaai mathayo samu(n)dhreh jai ||

ਰੋਗ ਬਿਨਾਸਨ ਪ੍ਰਜਾ ਹਿਤ ਕਢਯੋ ਧਨੰਤਰ ਰਾਇ ॥੪॥

रोग बिनासन प्रजा हित कढयो धनंतर राइ ॥४॥

rog binaasan prajaa hit kaddayo dhana(n)tar rai ||4||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਆਯੁਰਬੇਦ ਤਿਨ ਕੀਯੋ ਪ੍ਰਕਾਸਾ ॥

आयुरबेद तिन कीयो प्रकासा ॥

aayurabedh tin keeyo prakaasaa ||

ਜਗ ਕੇ ਰੋਗ ਕਰੇ ਸਬ ਨਾਸਾ ॥

जग के रोग करे सब नासा ॥

jag ke rog kare sab naasaa ||

ਬਈਦ ਸਾਸਤ੍ਰ ਕਹੁ ਪ੍ਰਗਟ ਦਿਖਾਵਾ ॥

बईद सासत्र कहु प्रगट दिखावा ॥

bieedh saasatr kahu pragaT dhikhaavaa ||

ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਅਉਖਧੀ ਬਤਾਵਾ ॥੫॥

भिंन भिंन अउखधी बतावा ॥५॥

bhi(n)n bhi(n)n aaukhadhee bataavaa ||5||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਰੋਗ ਰਹਤ ਕਰ ਅਉਖਧੀ ਸਭ ਹੀ ਕਰਿਯੋ ਜਹਾਨ ॥

रोग रहत कर अउखधी सभ ही करियो जहान ॥

rog rahat kar aaukhadhee sabh hee kariyo jahaan ||

ਕਾਲ ਪਾਇ ਤੱਛਕ ਹਨਿਯੋ ਸੁਰ ਪੁਰ ਕੀਯੋ ਪਯਾਨ ॥੬॥

काल पाइ तच्छक हनियो सुर पुर कीयो पयान ॥६॥

kaal pai ta'chhak haniyo sur pur keeyo payaan ||6||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਧਨੰਤ੍ਰ ਅਵਤਾਰ ਸਤਾਰਵਾ ॥੧੭॥ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥

इति स्री बचित्र नाटके धनंत्र अवतार सतारवा ॥१७॥ सुभम सत ॥

eit sree bachitr naaTake dhana(n)tr avataar sataaravaa ||17|| subham sat ||



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