P-14 Bishan Vishnu Avatar (Chaubis Avatar) (hindi punjabi english)


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ਅਥ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

अथ बिसनु अवतार कथनं ॥

ath bisan avataar kathana(n) ||


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥

sree bhagautee jee sahai ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਅਬ ਮੈ ਗਨੋ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰਾ ॥

अब मै गनो बिसनु अवतारा ॥

ab mai gano bisan avataaraa ||

ਜੈਸਿਕ ਧਰਿਯੋ ਸਰੂਪ ਮੁਰਾਰਾ ॥

जैसिक धरियो सरूप मुरारा ॥

jaisik dhariyo saroop muraaraa ||

ਬਿਆਕੁਲ ਹੋਤ ਧਰਨਿ ਜਬ ਭਾਰਾ ॥

बिआकुल होत धरनि जब भारा ॥

biaakul hot dharan jab bhaaraa ||

ਕਾਲ ਪੁਰਖੁ ਪਹਿ ਕਰਤ ਪੁਕਾਰਾ ॥੧॥

काल पुरखु पहि करत पुकारा ॥१॥

kaal purakh peh karat pukaaraa ||1||


ਅਸੁਰ ਦੇਵਤਨ ਦੇਤਿ ਭਜਾਈ ॥

असुर देवतन देति भजाई ॥

asur dhevatan dhet bhajaiee ||

ਛੀਨ ਲੇਤ ਭੂਅ ਕੀ ਠਕੁਰਾਈ ॥

छीन लेत भूअ की ठकुराई ॥

chheen let bhooa kee Thakuraiee ||

ਕਰਤ ਪੁਕਾਰ ਧਰਣਿ ਭਰਿ ਭਾਰਾ ॥

करत पुकार धरणि भरि भारा ॥

karat pukaar dharan bhar bhaaraa ||

ਕਾਲ ਪੁਰਖ ਤਬ ਹੋਤ ਕ੍ਰਿਪਾਰਾ ॥੨॥

काल पुरख तब होत कृपारा ॥२॥

kaal purakh tab hot kirapaaraa ||2||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸਬ ਦੇਵਨ ਕੋ ਅੰਸ ਲੈ ਤਤੁ ਆਪਨ ਠਹਰਾਇ ॥

सब देवन को अंस लै ततु आपन ठहराइ ॥

sab dhevan ko a(n)s lai tat aapan Thaharai ||

ਬਿਸਨੁ ਰੂਪ ਧਾਰ ਤਤ ਦਿਨ ਗ੍ਰਿਹਿ ਅਦਿਤ ਕੈ ਆਇ ॥੩॥

बिसनु रूप धार तत दिन गृहि अदित कै आइ ॥३॥

bisan roop dhaar tat dhin gireh adhit kai aai ||3||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਆਨ ਹਰਤ ਪ੍ਰਿਥਵੀ ਕੋ ਭਾਰਾ ॥

आन हरत पृथवी को भारा ॥

aan harat pirathavee ko bhaaraa ||

ਬਹੁ ਬਿਧਿ ਅਸੁਰਨ ਕਰਤ ਸੰਘਾਰਾ ॥

बहु बिधि असुरन करत संघारा ॥

bahu bidh asuran karat sa(n)ghaaraa ||

ਭੂਮਿ ਭਾਰ ਹਰਿ ਸੁਰ ਪੁਰਿ ਜਾਈ ॥

भूमि भार हरि सुर पुरि जाई ॥

bhoom bhaar har sur pur jaiee ||

ਕਾਲ ਪੁਰਖ ਮੋ ਰਹਤ ਸਮਾਈ ॥੪॥

काल पुरख मो रहत समाई ॥४॥

kaal purakh mo rahat samaiee ||4||


ਸਕਲ ਕਥਾ ਜਉ ਛੋਰਿ ਸੁਨਾਊ ॥

सकल कथा जउ छोरि सुनाऊ ॥

sakal kathaa jau chhor sunaauoo ||

ਬਿਸਨ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਹਤ ਸ੍ਰਮ ਪਾਊ ॥

बिसन प्रबंध कहत स्रम पाऊ ॥

bisan praba(n)dh kahat sram paauoo ||

ਤਾ ਤੇ ਥੋਰੀਐ ਕਥਾ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ॥

ता ते थोरीऐ कथा प्रकासी ॥

taa te thoreeaai kathaa prakaasee ||

ਰੋਗ ਸੋਗ ਤੇ ਰਾਖੁ ਅਬਿਨਾਸੀ ॥੫॥

रोग सोग ते राखु अबिनासी ॥५॥

rog sog te raakh abinaasee ||5||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਤੇਰ੍ਰਹਵਾ ਬਿਸਨੁ ਅਵਤਾਰ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤ ॥੧੩॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे तेर्रहवा बिसनु अवतार समापतम सतु सुभम सत ॥१३॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the terrahavaa bisan avataar samaapatam sat subham sat ||13||



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