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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਅਥ ਜਲੰਧਰ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

अथ जलंधर अवतार कथनं ॥

ath jala(n)dhar avataar kathana(n) ||


ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥

sree bhagautee jee sahai ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਵਹੁ ਜੋ ਜਰੀ ਰੁਦ੍ਰ ਕੀ ਦਾਰਾ ॥

वहु जो जरी रुद्र की दारा ॥

vahu jo jaree rudhr kee dhaaraa ||

ਤਿਨਿ ਹਿਮ ਗਿਰਿ ਗ੍ਰਿਹਿ ਲਿਯ ਅਵਤਾਰਾ ॥

तिनि हिम गिरि गृहि लिय अवतारा ॥

tin him gir gireh liy avataaraa ||

ਛੁਟੀ ਬਾਲਤਾ ਜਬ ਸੁਧਿ ਆਈ ॥

छुटी बालता जब सुधि आई ॥

chhuTee baalataa jab sudh aaiee ||

ਬਹੁਰੋ ਮਿਲੀ ਨਾਥ ਕਹੁ ਜਾਈ ॥੧॥

बहुरो मिली नाथ कहु जाई ॥१॥

bahuro milee naath kahu jaiee ||1||


ਜਿਹ ਬਿਧਿ ਮਿਲੀ ਰਾਮ ਸੋ ਸੀਤਾ ॥

जिह बिधि मिली राम सो सीता ॥

jeh bidh milee raam so seetaa ||

ਜੈਸਕ ਚਤੁਰ ਬੇਦ ਤਨ ਗੀਤਾ ॥

जैसक चतुर बेद तन गीता ॥

jaisak chatur bedh tan geetaa ||

ਜੈਸੇ ਮਿਲਤ ਸਿੰਧ ਤਨ ਗੰਗਾ ॥

जैसे मिलत सिंध तन गंगा ॥

jaise milat si(n)dh tan ga(n)gaa ||

ਤਿਯੋ ਮਿਲਿ ਗਈ ਰੁਦ੍ਰ ਕੈ ਸੰਗਾ ॥੨॥

तियो मिलि गई रुद्र कै संगा ॥२॥

tiyo mil giee rudhr kai sa(n)gaa ||2||


ਜਬ ਤਿਹ ਬ੍ਯਾਹਿ ਰੁਦ੍ਰ ਘਰਿ ਆਨਾ ॥

जब तिह ब्याहि रुद्र घरि आना ॥

jab teh bayaeh rudhr ghar aanaa ||

ਨਿਰਖਿ ਜਲੰਧਰ ਤਾਹਿ ਲੁਭਾਨਾ ॥

निरखि जलंधर ताहि लुभाना ॥

nirakh jala(n)dhar taeh lubhaanaa ||

ਦੂਤ ਏਕ ਤਹ ਦੀਯ ਪਠਾਈ ॥

दूत एक तह दीय पठाई ॥

dhoot ek teh dheey paThaiee ||

ਲਿਆਉ ਰੁਦ੍ਰ ਤੇ ਨਾਰਿ ਛਿਨਾਈ ॥੩॥

लिआउ रुद्र ते नारि छिनाई ॥३॥

liaau rudhr te naar chhinaiee ||3||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਜਲੰਧੁਰ ਬਾਚ ॥

जलंधुर बाच ॥

jala(n)dhur baach ||

ਕੈ ਸਿਵ ਨਾਰਿ ਸੀਗਾਰ ਕੈ ਮਮ ਗ੍ਰਿਹ ਦੇਹ ਪਠਾਇ ॥

कै सिव नारि सीगार कै मम गृह देह पठाइ ॥

kai siv naar seegaar kai mam gireh dheh paThai ||

ਨਾਤਰ ਸੂਲ ਸੰਭਾਰ ਕੇ ਸੰਗਿ ਲਰਹੁ ਮੁਰਿ ਆਇ ॥੪॥

नातर सूल संभार के संगि लरहु मुरि आइ ॥४॥

naatar sool sa(n)bhaar ke sa(n)g larahu mur aai ||4||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਕਥਾ ਭਈ ਇਹ ਦਿਸ ਇਹ ਭਾਤਾ ॥

कथा भई इह दिस इह भाता ॥

kathaa bhiee ieh dhis ieh bhaataa ||

ਅਬ ਕਹੋ ਬਿਸਨ ਤ੍ਰੀਯਾ ਕੀ ਬਾਤਾ ॥

अब कहो बिसन त्रीया की बाता ॥

ab kaho bisan treeyaa kee baataa ||

ਬ੍ਰਿੰਦਾਰਿਕ ਦਿਨ ਏਕ ਪਕਾਏ ॥

बृंदारिक दिन एक पकाए ॥

bira(n)dhaarik dhin ek pakaae ||

ਦੈਤ ਸਭਾ ਤੇ ਬਿਸਨੁ ਬੁਲਾਏ ॥੫॥

दैत सभा ते बिसनु बुलाए ॥५॥

dhait sabhaa te bisan bulaae ||5||


ਆਇ ਗਯੋ ਤਹ ਨਾਰਦ ਰਿਖਿ ਬਰ ॥

आइ गयो तह नारद रिखि बर ॥

aai gayo teh naaradh rikh bar ||

ਬਿਸਨ ਨਾਰਿ ਕੇ ਧਾਮਿ ਛੁਧਾਤੁਰ ॥

बिसन नारि के धामि छुधातुर ॥

bisan naar ke dhaam chhudhaatur ||

ਬੈਗਨ ਨਿਰਖਿ ਅਧਿਕ ਲਲਚਾਯੋ ॥

बैगन निरखि अधिक ललचायो ॥

baigan nirakh adhik lalachaayo ||

ਮਾਗ ਰਹਿਯੋ ਪਰ ਹਾਥਿ ਨ ਆਯੋ ॥੬॥

माग रहियो पर हाथि न आयो ॥६॥

maag rahiyo par haath na aayo ||6||


ਨਾਥ ਹੇਤੁ ਮੈ ਭੋਜ ਪਕਾਯੋ ॥

नाथ हेतु मै भोज पकायो ॥

naath het mai bhoj pakaayo ||

ਮਨੁਛ ਪਠੈ ਕਰ ਬਿਸਨੁ ਬੁਲਾਯੋ ॥

मनुछ पठै कर बिसनु बुलायो ॥

manuchh paThai kar bisan bulaayo ||

ਨਾਰਦ ਖਾਇ ਜੂਠ ਹੋਇ ਜੈ ਹੈ ॥

नारद खाइ जूठ होइ जै है ॥

naaradh khai jooTh hoi jai hai ||

ਪੀਅ ਕੋਪਿਤ ਹਮਰੇ ਪਰ ਹੁਐ ਹੈ ॥੭॥

पीअ कोपित हमरे पर हुऐ है ॥७॥

peea kopit hamare par huaai hai ||7||


ਨਾਰਦ ਬਾਚ ॥

नारद बाच ॥

naaradh baach ||

ਮਾਗ ਥਕਿਯੋ ਮੁਨਿ ਭੋਜ ਨ ਦੀਆ ॥

माग थकियो मुनि भोज न दीआ ॥

maag thakiyo mun bhoj na dheeaa ||

ਅਧਿਕ ਰੋਸੁ ਮੁਨਿ ਬਰਿ ਤਬ ਕੀਆ ॥

अधिक रोसु मुनि बरि तब कीआ ॥

adhik ros mun bar tab keeaa ||

ਬ੍ਰਿੰਦਾ ਨਾਮ ਰਾਛਸੀ ਬਪੁ ਧਰਿ ॥

बृंदा नाम राछसी बपु धरि ॥

bira(n)dhaa naam raachhasee bap dhar ||

ਤ੍ਰੀਆ ਹੁਐ ਬਸੋ ਜਲੰਧਰ ਕੇ ਘਰਿ ॥੮॥

त्रीआ हुऐ बसो जलंधर के घरि ॥८॥

treeaa huaai baso jala(n)dhar ke ghar ||8||


ਦੇ ਕਰ ਸ੍ਰਾਪ ਜਾਤ ਭਯੋ ਰਿਖਿ ਬਰ ॥

दे कर स्राप जात भयो रिखि बर ॥

dhe kar sraap jaat bhayo rikh bar ||

ਆਵਤ ਭਯੋ ਬਿਸਨ ਤਾ ਕੇ ਘਰਿ ॥

आवत भयो बिसन ता के घरि ॥

aavat bhayo bisan taa ke ghar ||

ਸੁਨਤ ਸ੍ਰਾਪ ਅਤਿ ਹੀ ਦੁਖ ਪਾਯੋ ॥

सुनत स्राप अति ही दुख पायो ॥

sunat sraap at hee dhukh paayo ||

ਬਿਹਸ ਬਚਨ ਤ੍ਰੀਯ ਸੰਗਿ ਸੁਨਾਯੋ ॥੯॥

बिहस बचन त्रीय संगि सुनायो ॥९॥

bihas bachan treey sa(n)g sunaayo ||9||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਤ੍ਰੀਯ ਕੀ ਛਾਯਾ ਲੈ ਤਬੈ ਬ੍ਰਿਦਾ ਰਚੀ ਬਨਾਇ ॥

त्रीय की छाया लै तबै बृदा रची बनाइ ॥

treey kee chhaayaa lai tabai biradhaa rachee banai ||

ਧੂਮ੍ਰਕੇਸ ਦਾਨਵ ਸਦਨਿ ਜਨਮ ਧਰਤ ਭਈ ਜਾਇ ॥੧੦॥

धूम्रकेस दानव सदनि जनम धरत भई जाइ ॥१०॥

dhoomrakes dhaanav sadhan janam dharat bhiee jai ||10||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਜੈਸਕ ਰਹਤ ਕਮਲ ਜਲ ਭੀਤਰ ॥

जैसक रहत कमल जल भीतर ॥

jaisak rahat kamal jal bheetar ||

ਪੁਨਿ ਨ੍ਰਿਪ ਬਸੀ ਜਲੰਧਰ ਕੇ ਘਰਿ ॥

पुनि नृप बसी जलंधर के घरि ॥

pun nirap basee jala(n)dhar ke ghar ||

ਤਿਹ ਨਿਮਿਤ ਜਲੰਧਰ ਅਵਤਾਰਾ ॥

तिह निमित जलंधर अवतारा ॥

teh nimit jala(n)dhar avataaraa ||

ਧਰ ਹੈ ਰੂਪ ਅਨੂਪ ਮੁਰਾਰਾ ॥੧੧॥

धर है रूप अनूप मुरारा ॥११॥

dhar hai roop anoop muraaraa ||11||


ਕਥਾ ਐਸ ਇਹ ਦਿਸ ਮੋ ਭਈ ॥

कथा ऐस इह दिस मो भई ॥

kathaa aais ieh dhis mo bhiee ||

ਅਬ ਚਲਿ ਬਾਤ ਰੁਦ੍ਰ ਪਰ ਗਈ ॥

अब चलि बात रुद्र पर गई ॥

ab chal baat rudhr par giee ||

ਮਾਗੀ ਨਾਰਿ ਨ ਦੀਨੀ ਰੁਦ੍ਰਾ ॥

मागी नारि न दीनी रुद्रा ॥

maagee naar na dheenee rudhraa ||

ਤਾ ਤੇ ਕੋਪ ਅਸੁਰ ਪਤਿ ਛੁਦ੍ਰਾ ॥੧੨॥

ता ते कोप असुर पति छुद्रा ॥१२॥

taa te kop asur pat chhudhraa ||12||


ਬਜੇ ਢੋਲ ਨਫੀਰਿ ਨਗਾਰੇ ॥

बजे ढोल नफीरि नगारे ॥

baje ddol nafeer nagaare ||

ਦੁਹੂੰ ਦਿਸਾ ਡਮਰੂ ਡਮਕਾਰੇ ॥

दुहूँ दिसा डमरू डमकारे ॥

dhuhoo(n) dhisaa ddamaroo ddamakaare ||

ਮਾਚਤ ਭਯੋ ਲੋਹ ਬਿਕਰਾਰਾ ॥

माचत भयो लोह बिकरारा ॥

maachat bhayo loh bikaraaraa ||

ਝਮਕਤ ਖਗ ਅਦਗ ਅਪਾਰਾ ॥੧੩॥

झमकत खग अदग अपारा ॥१३॥

jhamakat khag adhag apaaraa ||13||


ਗਿਰਿ ਗਿਰਿ ਪਰਤ ਸੁਭਟ ਰਣ ਮਾਹੀ ॥

गिरि गिरि परत सुभट रण माही ॥

gir gir parat subhaT ran maahee ||

ਧੁਕ ਧੁਕ ਉਠਤ ਮਸਾਣ ਤਹਾਹੀ ॥

धुक धुक उठत मसाण तहाही ॥

dhuk dhuk uThat masaan tahaahee ||

ਗਜੀ ਰਥੀ ਬਾਜੀ ਪੈਦਲ ਰਣਿ ॥

गजी रथी बाजी पैदल रणि ॥

gajee rathee baajee paidhal ran ||

ਜੂਝਿ ਗਿਰੇ ਰਣ ਕੀ ਛਿਤਿ ਅਨਗਣ ॥੧੪॥

जूझि गिरे रण की छिति अनगण ॥१४॥

joojh gire ran kee chhit anagan ||14||


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

तोटक छंद ॥

toTak chha(n)dh ||


ਬਿਰਚੇ ਰਣਬੀਰ ਸੁਧੀਰ ਕ੍ਰੁਧੰ ॥

बिरचे रणबीर सुधीर क्रुधं ॥

birache ranabeer sudheer krudha(n) ||

ਮਚਿਯੋ ਤਿਹ ਦਾਰੁਣ ਭੂਮਿ ਜੁਧੰ ॥

मचियो तिह दारुण भूमि जुधं ॥

machiyo teh dhaarun bhoom judha(n) ||

ਹਹਰੰਤ ਹਯੰ ਗਰਜੰਤ ਗਜੰ ॥

हहरंत हयं गरजंत गजं ॥

hahara(n)t haya(n) garaja(n)t gaja(n) ||

ਸੁਣਿ ਕੈ ਧੁਨਿ ਸਾਵਣ ਮੇਘ ਲਜੰ ॥੧੫॥

सुणि कै धुनि सावण मेघ लजं ॥१५॥

sun kai dhun saavan megh laja(n) ||15||


ਬਰਖੈ ਰਣਿ ਬਾਣ ਕਮਾਣ ਖਗੰ ॥

बरखै रणि बाण कमाण खगं ॥

barakhai ran baan kamaan khaga(n) ||

ਤਹ ਘੋਰ ਭਯਾਨਕ ਜੁਧ ਜਗੰ ॥

तह घोर भयानक जुध जगं ॥

teh ghor bhayaanak judh jaga(n) ||

ਗਿਰ ਜਾਤ ਭਟੰ ਹਹਰੰਤ ਹਠੀ ॥

गिर जात भटं हहरंत हठी ॥

gir jaat bhaTa(n) hahara(n)t haThee ||

ਉਮਗੀ ਰਿਪੁ ਸੈਨ ਕੀਏ ਇਕਠੀ ॥੧੬॥

उमगी रिपु सैन कीए इकठी ॥१६॥

aumagee rip sain ke'ee ikaThee ||16||


ਚਹੂੰ ਓਰ ਘਿਰਿਯੋ ਸਰ ਸੋਧਿ ਸਿਵੰ ॥

चहूँ ओर घिरियो सर सोधि सिवं ॥

chahoo(n) or ghiriyo sar sodh siva(n) ||

ਕਰਿ ਕੋਪ ਘਨੋ ਅਸੁਰਾਰ ਇਵੰ ॥

करि कोप घनो असुरार इवं ॥

kar kop ghano asuraar iva(n) ||

ਦੁਹੂੰ ਓਰਨ ਤੇ ਇਮ ਬਾਣ ਬਹੇ ॥

दुहूँ ओरन ते इम बाण बहे ॥

dhuhoo(n) oran te im baan bahe ||

ਨਭ ਅਉਰ ਧਰਾ ਦੋਊ ਛਾਇ ਰਹੇ ॥੧੭॥

नभ अउर धरा दोऊ छाइ रहे ॥१७॥

nabh aaur dharaa dhouoo chhai rahe ||17||


ਗਿਰਗੇ ਤਹ ਟੋਪਨ ਟੂਕ ਘਨੇ ॥

गिरगे तह टोपन टूक घने ॥

girage teh Topan Took ghane ||

ਰਹਗੇ ਜਨੁ ਕਿੰਸਕ ਸ੍ਰੋਣ ਸਨੇ ॥

रहगे जनु किंसक स्रोण सने ॥

rahage jan ki(n)sak sron sane ||

ਰਣ ਹੇਰਿ ਅਗੰਮ ਅਨੂਪ ਹਰੰ ॥

रण हेरि अगंम अनूप हरं ॥

ran her aga(n)m anoop hara(n) ||

ਜੀਯ ਮੋ ਇਹ ਭਾਤਿ ਬਿਚਾਰ ਕਰੰ ॥੧੮॥

जीय मो इह भाति बिचार करं ॥१८॥

jeey mo ieh bhaat bichaar kara(n) ||18||


ਜੀਯ ਮੋ ਸਿਵ ਦੇਖਿ ਰਹਾ ਚਕ ਕੈ ॥

जीय मो सिव देखि रहा चक कै ॥

jeey mo siv dhekh rahaa chak kai ||

ਦਲ ਦੈਤਨ ਮਧਿ ਪਰਾ ਹਕ ਕੈ ॥

दल दैतन मधि परा हक कै ॥

dhal dhaitan madh paraa hak kai ||

ਰਣਿ ਸੂਲ ਸੰਭਾਰਿ ਪ੍ਰਹਾਰ ਕਰੰ ॥

रणि सूल संभारि प्रहार करं ॥

ran sool sa(n)bhaar prahaar kara(n) ||

ਸੁਣ ਕੇ ਧੁਨਿ ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਡਰੰ ॥੧੯॥

सुण के धुनि देव अदेव डरं ॥१९॥

sun ke dhun dhev adhev ddara(n) ||19||


ਜੀਯ ਮੋ ਸਿਵ ਧ੍ਯਾਨ ਧਰਾ ਜਬ ਹੀ ॥

जीय मो सिव ध्यान धरा जब ही ॥

jeey mo siv dhayaan dharaa jab hee ||

ਕਲਿ ਕਾਲ ਪ੍ਰਸੰਨਿ ਭਏ ਤਬ ਹੀ ॥

कलि काल प्रसंनि भए तब ही ॥

kal kaal prasa(n)n bhe tab hee ||

ਕਹਿਯੋ ਬਿਸਨ ਜਲੰਧਰ ਰੂਪ ਧਰੋ ॥

कहियो बिसन जलंधर रूप धरो ॥

kahiyo bisan jala(n)dhar roop dharo ||

ਪੁਨਿ ਜਾਇ ਰਿਪੇਸ ਕੋ ਨਾਸ ਕਰੋ ॥੨੦॥

पुनि जाइ रिपेस को नास करो ॥२०॥

pun jai ripes ko naas karo ||20||


ਭੁਜੰਗ ਪ੍ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

bhuja(n)g prayaat chha(n)dh ||


ਦਈ ਕਾਲ ਆਗਿਆ ਧਰਿਯੋ ਬਿਸਨ ਰੂਪੰ ॥

दई काल आगिआ धरियो बिसन रूपं ॥

dhiee kaal aagiaa dhariyo bisan roopa(n) ||

ਸਜੇ ਸਾਜ ਸਰਬੰ ਬਨਿਯੋ ਜਾਨ ਭੂਪੰ ॥

सजे साज सरबं बनियो जान भूपं ॥

saje saaj saraba(n) baniyo jaan bhoopa(n) ||

ਕਰਿਯੋ ਨਾਥ ਯੋ ਆਪ ਨਾਰੰ ਉਧਾਰੰ ॥

करियो नाथ यो आप नारं उधारं ॥

kariyo naath yo aap naara(n) udhaara(n) ||

ਤ੍ਰਿਯਾ ਰਾਜ ਬ੍ਰਿੰਦਾ ਸਤੀ ਸਤ ਟਾਰੰ ॥੨੧॥

तृया राज बृंदा सती सत टारं ॥२१॥

tirayaa raaj bira(n)dhaa satee sat Taara(n) ||21||


ਤਜਿਯੋ ਦੇਹਿ ਦੈਤੰ ਭਈ ਬਿਸਨੁ ਨਾਰੰ ॥

तजियो देहि दैतं भई बिसनु नारं ॥

tajiyo dheh dhaita(n) bhiee bisan naara(n) ||

ਧਰਿਯੋ ਦੁਆਦਸਮੋ ਬਿਸਨੁ ਦਈਤਾਵਤਾਰੰ ॥

धरियो दुआदसमो बिसनु दईतावतारं ॥

dhariyo dhuaadhasamo bisan dhieetaavataara(n) ||

ਪੁਨਰ ਜੁਧੁ ਸਜਿਯੋ ਗਹੇ ਸਸਤ੍ਰ ਪਾਣੰ ॥

पुनर जुधु सजियो गहे ससत्र पाणं ॥

punar judh sajiyo gahe sasatr paana(n) ||

ਗਿਰੇ ਭੂਮਿ ਮੋ ਸੂਰ ਸੋਭੇ ਬਿਮਾਣੰ ॥੨੨॥

गिरे भूमि मो सूर सोभे बिमाणं ॥२२॥

gire bhoom mo soor sobhe bimaana(n) ||22||


ਮਿਟਿਯੋ ਸਤਿ ਨਾਰੰ ਕਟਿਯੋ ਸੈਨ ਸਰਬੰ ॥

मिटियो सति नारं कटियो सैन सरबं ॥

miTiyo sat naara(n) kaTiyo sain saraba(n) ||

ਮਿਟਿਯੋ ਭੂਪ ਜਾਲੰਧਰੰ ਦੇਹ ਗਰਬੰ ॥

मिटियो भूप जालंधरं देह गरबं ॥

miTiyo bhoop jaala(n)dhara(n) dheh garaba(n) ||

ਪੁਨਰ ਜੁਧ ਸਜਿਯੋ ਹਠੇ ਤੇਜ ਹੀਣੰ ॥

पुनर जुध सजियो हठे तेज हीणं ॥

punar judh sajiyo haThe tej heena(n) ||

ਭਜੇ ਛਾਡ ਕੈ ਸੰਗ ਸਾਥੀ ਅਧੀਣੰ ॥੨੩॥

भजे छाड कै संग साथी अधीणं ॥२३॥

bhaje chhaadd kai sa(n)g saathee adheena(n) ||23||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਦੁਹੂੰ ਜੁਧੁ ਕੀਨਾ ਰਣ ਮਾਹੀ ॥

दुहूँ जुधु कीना रण माही ॥

dhuhoo(n) judh keenaa ran maahee ||

ਤੀਸਰ ਅਵਰੁ ਤਹਾ ਕੋ ਨਾਹੀ ॥

तीसर अवरु तहा को नाही ॥

teesar avar tahaa ko naahee ||

ਕੇਤਕ ਮਾਸ ਮਚਿਯੋ ਤਹ ਜੁਧਾ ॥

केतक मास मचियो तह जुधा ॥

ketak maas machiyo teh judhaa ||

ਜਾਲੰਧਰ ਹੁਐ ਸਿਵ ਪੁਰ ਕ੍ਰੁਧਾ ॥੨੪॥

जालंधर हुऐ सिव पुर क्रुधा ॥२४॥

jaala(n)dhar huaai siv pur krudhaa ||24||


ਤਬ ਸਿਵ ਧਿਆਨ ਸਕਤਿ ਕੌ ਧਰਾ ॥

तब सिव धिआन सकति कौ धरा ॥

tab siv dhiaan sakat kau dharaa ||

ਤਾ ਤੇ ਸਕਤਿ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰ ਕਰਾ ॥

ता ते सकति कृपा कर करा ॥

taa te sakat kirapaa kar karaa ||

ਤਾ ਤੇ ਭਯੋ ਰੁਦ੍ਰ ਬਲਵਾਨਾ ॥

ता ते भयो रुद्र बलवाना ॥

taa te bhayo rudhr balavaanaa ||

ਮੰਡਿਯੋ ਜੁਧੁ ਬਹੁਰਿ ਬਿਧਿ ਨਾਨਾ ॥੨੫॥

मंडियो जुधु बहुरि बिधि नाना ॥२५॥

ma(n)ddiyo judh bahur bidh naanaa ||25||


ਉਤ ਹਰਿ ਲਯੋ ਨਾਰਿ ਰਿਪ ਸਤ ਹਰਿ ॥

उत हरि लयो नारि रिप सत हरि ॥

aut har layo naar rip sat har ||

ਇਤ ਸਿਵ ਭਯੋ ਤੇਜ ਦੇਬੀ ਕਰਿ ॥

इत सिव भयो तेज देबी करि ॥

eit siv bhayo tej dhebee kar ||

ਛਿਨ ਮੋ ਕੀਯੋ ਅਸੁਰ ਕੋ ਨਾਸਾ ॥

छिन मो कीयो असुर को नासा ॥

chhin mo keeyo asur ko naasaa ||

ਨਿਰਖਿ ਰੀਝ ਭਟ ਰਹੇ ਤਮਾਸਾ ॥੨੬॥

निरखि रीझ भट रहे तमासा ॥२६॥

nirakh reejh bhaT rahe tamaasaa ||26||


ਜਲੰਧਰੀ ਤਾ ਦਿਨ ਤੇ ਨਾਮਾ ॥

जलंधरी ता दिन ते नामा ॥

jala(n)dharee taa dhin te naamaa ||

ਜਪਹੁ ਚੰਡਿਕਾ ਕੋ ਸਬ ਜਾਮਾ ॥

जपहु चंडिका को सब जामा ॥

japahu cha(n)ddikaa ko sab jaamaa ||

ਤਾ ਤੇ ਹੋਤ ਪਵਿਤ੍ਰ ਸਰੀਰਾ ॥

ता ते होत पवित्र सरीरा ॥

taa te hot pavitr sareeraa ||

ਜਿਮ ਨ੍ਹਾਏ ਜਲ ਗੰਗ ਗਹੀਰਾ ॥੨੭॥

जिम न्हाए जल गंग गहीरा ॥२७॥

jim nhaae jal ga(n)g gaheeraa ||27||


ਤਾ ਤੇ ਕਹੀ ਨ ਰੁਦ੍ਰ ਕਹਾਨੀ ॥

ता ते कही न रुद्र कहानी ॥

taa te kahee na rudhr kahaanee ||

ਗ੍ਰੰਥ ਬਢਨ ਕੀ ਚਿੰਤ ਪਛਾਨੀ ॥

ग्रंथ बढन की चिंत पछानी ॥

gra(n)th baddan kee chi(n)t pachhaanee ||

ਤਾ ਤੇ ਕਥਾ ਥੋਰਿ ਹੀ ਭਾਸੀ ॥

ता ते कथा थोरि ही भासी ॥

taa te kathaa thor hee bhaasee ||

ਨਿਰਖਿ ਭੂਲਿ ਕਬਿ ਕਰੋ ਨ ਹਾਸੀ ॥੨੮॥

निरखि भूलि कबि करो न हासी ॥२८॥

nirakh bhool kab karo na haasee ||28||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਜਲੰਧਰ ਅਵਤਾਰ ਬਾਰ੍ਰਹਵਾ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੧੨॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे जलंधर अवतार बार्रहवा समापतम सतु सुभम सतु ॥१२॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the jala(n)dhar avataar baarrahavaa samaapatam sat subham sat ||12||



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