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200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Bani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ਚੌਬੀਸ ਅਵਤਾਰ ॥

चौबीस अवतार ॥

chauabees avataar ||

ੴ ਸਤਿਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सतिगुरप्रसादि ॥

ikOankaar satiguraprasaadh ||

ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥

sree bhagautee jee sahai ||


ਅਥ ਚਉਬੀਸ ਅਉਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

अथ चउबीस अउतार कथनं ॥

ath chaubees aautaar kathana(n) ||


ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

पातिसाही १० ॥

paatisaahee 10 ||


ਤ੍ਵਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਚੌਪਈ ॥

त्वप्रसादि ॥ चौपई ॥

tavaiprasaadh || chauapiee ||

ਅਬ ਚਉਬੀਸ ਉਚਰੌ ਅਵਤਾਰਾ ॥

अब चउबीस उचरौ अवतारा ॥

ab chaubees ucharau avataaraa ||

ਜਿਹ ਬਿਧਿ ਤਿਨ ਕਾ ਲਖਾ ਅਖਾਰਾ ॥

जिह बिधि तिन का लखा अखारा ॥

jeh bidh tin kaa lakhaa akhaaraa ||

ਸੁਨੀਅਹੁ ਸੰਤ ਸਬੈ ਚਿਤ ਲਾਈ ॥

सुनीअहु संत सबै चित लाई ॥

suneeahu sa(n)t sabai chit laiee ||

ਬਰਨਤ ਸ੍ਯਾਮ ਜਥਾਮਤਿ ਭਾਈ ॥੧॥

बरनत स्याम जथामति भाई ॥१॥

baranat sayaam jathaamat bhaiee ||1||


ਜਬ ਜਬ ਹੋਤਿ ਅਰਿਸਟਿ ਅਪਾਰਾ ॥

जब जब होति अरिसटि अपारा ॥

jab jab hot arisaT apaaraa ||

ਤਬ ਤਬ ਦੇਹ ਧਰਤ ਅਵਤਾਰਾ ॥

तब तब देह धरत अवतारा ॥

tab tab dheh dharat avataaraa ||

ਕਾਲ ਸਬਨ ਕੋ ਪੇਖਿ ਤਮਾਸਾ ॥

काल सबन को पेखि तमासा ॥

kaal saban ko pekh tamaasaa ||

ਅੰਤਹਕਾਲ ਕਰਤ ਹੈ ਨਾਸਾ ॥੨॥

अंतहकाल करत है नासा ॥२॥

a(n)tahakaal karat hai naasaa ||2||


ਕਾਲ ਸਭਨ ਕਾ ਕਰਤ ਪਸਾਰਾ ॥

काल सभन का करत पसारा ॥

kaal sabhan kaa karat pasaaraa ||

ਅੰਤ ਕਾਲਿ ਸੋਈ ਖਾਪਨਿਹਾਰਾ ॥

अंत कालि सोई खापनिहारा ॥

a(n)t kaal soiee khaapanihaaraa ||

ਆਪਨ ਰੂਪ ਅਨੰਤਨ ਧਰਹੀ ॥

आपन रूप अनंतन धरही ॥

aapan roop ana(n)tan dharahee ||

ਆਪਹਿ ਮਧਿ ਲੀਨ ਪੁਨਿ ਕਰਹੀ ॥੩॥

आपहि मधि लीन पुनि करही ॥३॥

aapeh madh leen pun karahee ||3||


ਇਨ ਮਹਿ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਸੁ ਦਸ ਅਵਤਾਰਾ ॥

इन महि सृसटि सु दस अवतारा ॥

ein meh sirasaT su dhas avataaraa ||

ਜਿਨ ਮਹਿ ਰਮਿਆ ਰਾਮੁ ਹਮਾਰਾ ॥

जिन महि रमिआ रामु हमारा ॥

jin meh ramiaa raam hamaaraa ||

ਅਨਤ ਚਤੁਰਦਸ ਗਨਿ ਅਵਤਾਰੁ ॥

अनत चतुरदस गनि अवतारु ॥

anat chaturadhas gan avataar ||

ਕਹੋ ਜੁ ਤਿਨ ਤਿਨ ਕੀਏ ਅਖਾਰੁ ॥੪॥

कहो जु तिन तिन कीए अखारु ॥४॥

kaho ju tin tin ke'ee akhaar ||4||


ਕਾਲ ਆਪਨੋ ਨਾਮ ਛਪਾਈ ॥

काल आपनो नाम छपाई ॥

kaal aapano naam chhapaiee ||

ਅਵਰਨ ਕੇ ਸਿਰਿ ਦੇ ਬੁਰਿਆਈ ॥

अवरन के सिरि दे बुरिआई ॥

avaran ke sir dhe buriaaiee ||

ਆਪਨ ਰਹਤ ਨਿਰਾਲਮ ਜਗ ਤੇ ॥

आपन रहत निरालम जग ते ॥

aapan rahat niraalam jag te ||

ਜਾਨ ਲਏ ਜਾ ਨਾਮੈ ਤਬ ਤੇ ॥੫॥

जान लए जा नामै तब ते ॥५॥

jaan le jaa naamai tab te ||5||


ਆਪ ਰਚੇ ਆਪੇ ਕਲ ਘਾਏ ॥

आप रचे आपे कल घाए ॥

aap rache aape kal ghaae ||

ਅਵਰਨ ਕੇ ਦੇ ਮੂੰਡਿ ਹਤਾਏ ॥

अवरन के दे मूँडि हताए ॥

avaran ke dhe moo(n)dd hataae ||

ਆਪ ਨਿਰਾਲਮ ਰਹਾ ਨ ਪਾਯਾ ॥

आप निरालम रहा न पाया ॥

aap niraalam rahaa na paayaa ||

ਤਾ ਤੇ ਨਾਮ ਬਿਅੰਤ ਕਹਾਯਾ ॥੬॥

ता ते नाम बिअंत कहाया ॥६॥

taa te naam bia(n)t kahaayaa ||6||


ਜੋ ਚਉਬੀਸ ਅਵਤਾਰ ਕਹਾਏ ॥

जो चउबीस अवतार कहाए ॥

jo chaubees avataar kahaae ||

ਤਿਨ ਭੀ ਤੁਮ ਪ੍ਰਭ ਤਨਿਕ ਨ ਪਾਏ ॥

तिन भी तुम प्रभ तनिक न पाए ॥

tin bhee tum prabh tanik na paae ||

ਸਭ ਹੀ ਜਗ ਭਰਮੇ ਭਵਰਾਯੰ ॥

सभ ही जग भरमे भवरायं ॥

sabh hee jag bharame bhavaraaya(n) ||

ਤਾ ਤੇ ਨਾਮ ਬਿਅੰਤ ਕਹਾਯੰ ॥੭॥

ता ते नाम बिअंत कहायं ॥७॥

taa te naam bia(n)t kahaaya(n) ||7||


ਸਭ ਹੀ ਛਲਤ ਨ ਆਪ ਛਲਾਯਾ ॥

सभ ही छलत न आप छलाया ॥

sabh hee chhalat na aap chhalaayaa ||

ਤਾ ਤੇ ਛਲੀਆ ਆਪ ਕਹਾਯਾ ॥

ता ते छलीआ आप कहाया ॥

taa te chhaleeaa aap kahaayaa ||

ਸੰਤਨ ਦੁਖੀ ਨਿਰਖਿ ਅਕੁਲਾਵੈ ॥

संतन दुखी निरखि अकुलावै ॥

sa(n)tan dhukhee nirakh akulaavai ||

ਦੀਨ ਬੰਧੁ ਤਾ ਤੇ ਕਹਲਾਵੈ ॥੮॥

दीन बंधु ता ते कहलावै ॥८॥

dheen ba(n)dh taa te kahalaavai ||8||


ਅੰਤਿ ਕਰਤ ਸਭ ਜਗ ਕੋ ਕਾਲਾ ॥

अंति करत सभ जग को काला ॥

a(n)t karat sabh jag ko kaalaa ||

ਨਾਮੁ ਕਾਲ ਤਾ ਤੇ ਜਗ ਡਾਲਾ ॥

नामु काल ता ते जग डाला ॥

naam kaal taa te jag ddaalaa ||

ਸਮੈ ਸੰਤ ਪਰ ਹੋਤ ਸਹਾਈ ॥

समै संत पर होत सहाई ॥

samai sa(n)t par hot sahaiee ||

ਤਾ ਤੇ ਸੰਖ੍ਯਾ ਸੰਤ ਸੁਨਾਈ ॥੯॥

ता ते संख्या संत सुनाई ॥९॥

taa te sa(n)khayaa sa(n)t sunaiee ||9||


ਨਿਰਖਿ ਦੀਨ ਪਰ ਹੋਤ ਦਿਆਰਾ ॥

निरखि दीन पर होत दिआरा ॥

nirakh dheen par hot dhiaaraa ||

ਦੀਨ ਬੰਧੁ ਹਮ ਤਬੈ ਬਿਚਾਰਾ ॥

दीन बंधु हम तबै बिचारा ॥

dheen ba(n)dh ham tabai bichaaraa ||

ਸੰਤਨ ਪਰ ਕਰੁਣਾ ਰਸੁ ਢਰਈ ॥

संतन पर करुणा रसु ढरई ॥

sa(n)tan par karunaa ras ddariee ||

ਕਰੁਣਾਨਿਧਿ ਜਗ ਤਬੈ ਉਚਰਈ ॥੧੦॥

करुणानिधि जग तबै उचरई ॥१०॥

karunaanidh jag tabai uchariee ||10||


ਸੰਕਟ ਹਰਤ ਸਾਧਵਨ ਸਦਾ ॥

संकट हरत साधवन सदा ॥

sa(n)kaT harat saadhavan sadhaa ||

ਸੰਕਟ ਹਰਨ ਨਾਮੁ ਭਯੋ ਤਦਾ ॥

संकट हरन नामु भयो तदा ॥

sa(n)kaT haran naam bhayo tadhaa ||

ਦੁਖ ਦਾਹਤ ਸੰਤਨ ਕੇ ਆਯੋ ॥

दुख दाहत संतन के आयो ॥

dhukh dhaahat sa(n)tan ke aayo ||

ਦੁਖਦਾਹਨ ਪ੍ਰਭ ਤਦਿਨ ਕਹਾਯੋ ॥੧੧॥

दुखदाहन प्रभ तदिन कहायो ॥११॥

dhukhadhaahan prabh tadhin kahaayo ||11||


ਰਹਾ ਅਨੰਤ ਅੰਤ ਨਹੀ ਪਾਯੋ ॥

रहा अनंत अंत नही पायो ॥

rahaa ana(n)t a(n)t nahee paayo ||

ਯਾ ਤੇ ਨਾਮੁ ਬਿਅੰਤ ਕਹਾਯੋ ॥

या ते नामु बिअंत कहायो ॥

yaa te naam bia(n)t kahaayo ||

ਜਗ ਮੋ ਰੂਪ ਸਭਨ ਕੈ ਧਰਤਾ ॥

जग मो रूप सभन कै धरता ॥

jag mo roop sabhan kai dharataa ||

ਯਾ ਤੇ ਨਾਮੁ ਬਖਨੀਯਤ ਕਰਤਾ ॥੧੨॥

या ते नामु बखनीयत करता ॥१२॥

yaa te naam bakhaneeyat karataa ||12||


ਕਿਨਹੂੰ ਕਹੂੰ ਨ ਤਾਹਿ ਲਖਾਯੋ ॥

किनहूँ कहूँ न ताहि लखायो ॥

kinahoo(n) kahoo(n) na taeh lakhaayo ||

ਇਹ ਕਰਿ ਨਾਮ ਅਲਖ ਕਹਾਯੋ ॥

इह करि नाम अलख कहायो ॥

eeh kar naam alakh kahaayo ||

ਜੋਨਿ ਜਗਤ ਮੈ ਕਬਹੂੰ ਨ ਆਯਾ ॥

जोनि जगत मै कबहूँ न आया ॥

jon jagat mai kabahoo(n) na aayaa ||

ਯਾ ਤੇ ਸਭੋ ਅਜੋਨ ਬਤਾਯਾ ॥੧੩॥

या ते सभो अजोन बताया ॥१३॥

yaa te sabho ajon bataayaa ||13||


ਬ੍ਰਹਮਾਦਿਕ ਸਬ ਹੀ ਪਚਿ ਹਾਰੇ ॥

ब्रहमादिक सब ही पचि हारे ॥

brahamaadhik sab hee pach haare ||

ਬਿਸਨ ਮਹੇਸਵਰ ਕਉਨ ਬਿਚਾਰੇ ॥

बिसन महेसवर कउन बिचारे ॥

bisan mahesavar kaun bichaare ||

ਚੰਦ ਸੂਰ ਜਿਨਿ ਕਰੇ ਬਿਚਾਰਾ ॥

चंद सूर जिनि करे बिचारा ॥

cha(n)dh soor jin kare bichaaraa ||

ਤਾ ਤੇ ਜਨੀਯਤ ਹੈ ਕਰਤਾਰਾ ॥੧੪॥

ता ते जनीयत है करतारा ॥१४॥

taa te janeeyat hai karataaraa ||14||


ਸਦਾ ਅਭੇਖ ਅਭੇਖੀ ਰਹਈ ॥

सदा अभेख अभेखी रहई ॥

sadhaa abhekh abhekhee rahiee ||

ਤਾ ਤੇ ਜਗਤ ਅਭੇਖੀ ਕਹਈ ॥

ता ते जगत अभेखी कहई ॥

taa te jagat abhekhee kahiee ||

ਅਲਖ ਰੂਪ ਕਿਨਹੂੰ ਨਹਿ ਜਾਨਾ ॥

अलख रूप किनहूँ नहि जाना ॥

alakh roop kinahoo(n) neh jaanaa ||

ਤਿਹ ਕਰ ਜਾਤ ਅਲੇਖ ਬਖਾਨਾ ॥੧੫॥

तिह कर जात अलेख बखाना ॥१५॥

teh kar jaat alekh bakhaanaa ||15||


ਰੂਪ ਅਨੂਪ ਸਰੂਪ ਅਪਾਰਾ ॥

रूप अनूप सरूप अपारा ॥

roop anoop saroop apaaraa ||

ਭੇਖ ਅਭੇਖ ਸਭਨ ਤੇ ਨਿਆਰਾ ॥

भेख अभेख सभन ते निआरा ॥

bhekh abhekh sabhan te niaaraa ||

ਦਾਇਕ ਸਭੋ ਅਜਾਚੀ ਸਭ ਤੇ ॥

दाइक सभो अजाची सभ ते ॥

dhaik sabho ajaachee sabh te ||

ਜਾਨ ਲਯੋ ਕਰਤਾ ਹਮ ਤਬ ਤੇ ॥੧੬॥

जान लयो करता हम तब ते ॥१६॥

jaan layo karataa ham tab te ||16||


ਲਗਨ ਸਗਨ ਤੇ ਰਹਤ ਨਿਰਾਲਮ ॥

लगन सगन ते रहत निरालम ॥

lagan sagan te rahat niraalam ||

ਹੈ ਯਹ ਕਥਾ ਜਗਤ ਮੈ ਮਾਲਮ ॥

है यह कथा जगत मै मालम ॥

hai yeh kathaa jagat mai maalam ||

ਜੰਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰ ਤੰਤ੍ਰ ਨ ਰਿਝਾਯਾ ॥

जंत्र मंत्र तंत्र न रिझाया ॥

ja(n)tr ma(n)tr ta(n)tr na rijhaayaa ||

ਭੇਖ ਕਰਤ ਕਿਨਹੂੰ ਨਹਿ ਪਾਯਾ ॥੧੭॥

भेख करत किनहूँ नहि पाया ॥१७॥

bhekh karat kinahoo(n) neh paayaa ||17||


ਜਗ ਆਪਨ ਆਪਨ ਉਰਝਾਨਾ ॥

जग आपन आपन उरझाना ॥

jag aapan aapan urajhaanaa ||

ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਕਾਹੂੰ ਨ ਪਛਾਨਾ ॥

पारब्रहम काहूँ न पछाना ॥

paarabraham kaahoo(n) na pachhaanaa ||

ਇਕ ਮੜੀਅਨ ਕਬਰਨ ਵੇ ਜਾਹੀ ॥

इक मड़ीअन कबरन वे जाही ॥

eik maReean kabaran ve jaahee ||

ਦੁਹੂੰਅਨ ਮੈ ਪਰਮੇਸਰ ਨਾਹੀ ॥੧੮॥

दुहूँअन मै परमेसर नाही ॥१८॥

dhuhoo(n)an mai paramesar naahee ||18||


ਏ ਦੋਊ ਮੋਹ ਬਾਦ ਮੋ ਪਚੇ ॥

ए दोऊ मोह बाद मो पचे ॥

e dhouoo moh baadh mo pache ||

ਤਿਨ ਤੇ ਨਾਥ ਨਿਰਾਲੇ ਬਚੇ ॥

तिन ते नाथ निराले बचे ॥

tin te naath niraale bache ||

ਜਾ ਤੇ ਛੂਟਿ ਗਯੋ ਭ੍ਰਮ ਉਰ ਕਾ ॥

जा ते छूटि गयो भ्रम उर का ॥

jaa te chhooT gayo bhram ur kaa ||

ਤਿਹ ਆਗੈ ਹਿੰਦੂ ਕਿਆ ਤੁਰਕਾ ॥੧੯॥

तिह आगै हिंदू किआ तुरका ॥१९॥

teh aagai hi(n)dhoo kiaa turakaa ||19||


ਇਕ ਤਸਬੀ ਇਕ ਮਾਲਾ ਧਰਹੀ ॥

इक तसबी इक माला धरही ॥

eik tasabee ik maalaa dharahee ||

ਏਕ ਕੁਰਾਨ ਪੁਰਾਨ ਉਚਰਹੀ ॥

एक कुरान पुरान उचरही ॥

ek kuraan puraan ucharahee ||

ਕਰਤ ਬਿਰੁਧ ਗਏ ਮਰਿ ਮੂੜਾ ॥

करत बिरुध गए मरि मूड़ा ॥

karat birudh ge mar mooRaa ||

ਪ੍ਰਭ ਕੋ ਰੰਗੁ ਨ ਲਾਗਾ ਗੂੜਾ ॥੨੦॥

प्रभ को रंगु न लागा गूड़ा ॥२०॥

prabh ko ra(n)g na laagaa gooRaa ||20||


ਜੋ ਜੋ ਰੰਗ ਏਕ ਕੇ ਰਾਚੇ ॥

जो जो रंग एक के राचे ॥

jo jo ra(n)g ek ke raache ||

ਤੇ ਤੇ ਲੋਕ ਲਾਜ ਤਜਿ ਨਾਚੇ ॥

ते ते लोक लाज तजि नाचे ॥

te te lok laaj taj naache ||

ਆਦਿ ਪੁਰਖ ਜਿਨਿ ਏਕੁ ਪਛਾਨਾ ॥

आदि पुरख जिनि एकु पछाना ॥

aadh purakh jin ek pachhaanaa ||

ਦੁਤੀਆ ਭਾਵ ਨ ਮਨ ਮਹਿ ਆਨਾ ॥੨੧॥

दुतीआ भाव न मन महि आना ॥२१॥

dhuteeaa bhaav na man meh aanaa ||21||


ਜੋ ਜੋ ਭਾਵ ਦੁਤਿਯ ਮਹਿ ਰਾਚੇ ॥

जो जो भाव दुतिय महि राचे ॥

jo jo bhaav dhutiy meh raache ||

ਤੇ ਤੇ ਮੀਤ ਮਿਲਨ ਤੇ ਬਾਚੇ ॥

ते ते मीत मिलन ते बाचे ॥

te te meet milan te baache ||

ਏਕ ਪੁਰਖ ਜਿਨਿ ਨੈਕੁ ਪਛਾਨਾ ॥

एक पुरख जिनि नैकु पछाना ॥

ek purakh jin naik pachhaanaa ||

ਤਿਨ ਹੀ ਪਰਮ ਤਤ ਕਹ ਜਾਨਾ ॥੨੨॥

तिन ही परम तत कह जाना ॥२२॥

tin hee param tat keh jaanaa ||22||


ਜੋਗੀ ਸੰਨਿਆਸੀ ਹੈ ਜੇਤੇ ॥

जोगी संनिआसी है जेते ॥

jogee sa(n)niaasee hai jete ||

ਮੁੰਡੀਆ ਮੁਸਲਮਾਨ ਗਨ ਕੇਤੇ ॥

मुँडीआ मुसलमान गन केते ॥

mu(n)ddeeaa musalamaan gan kete ||

ਭੇਖ ਧਰੇ ਲੂਟਤ ਸੰਸਾਰਾ ॥

भेख धरे लूटत संसारा ॥

bhekh dhare looTat sa(n)saaraa ||

ਛਪਤ ਸਾਧੁ ਜਿਹ ਨਾਮੁ ਆਧਾਰਾ ॥੨੩॥

छपत साधु जिह नामु आधारा ॥२३॥

chhapat saadh jeh naam aadhaaraa ||23||


ਪੇਟ ਹੇਤੁ ਨਰ ਡਿੰਭੁ ਦਿਖਾਹੀ ॥

पेट हेतु नर डिंभु दिखाही ॥

peT het nar ddi(n)bh dhikhaahee ||

ਡਿੰਭ ਕਰੇ ਬਿਨੁ ਪਈਯਤ ਨਾਹੀ ॥

डिंभ करे बिनु पईयत नाही ॥

ddi(n)bh kare bin pieeyat naahee ||

ਜਿਨ ਨਰ ਏਕ ਪੁਰਖ ਕਹ ਧਿਆਯੋ ॥

जिन नर एक पुरख कह धिआयो ॥

jin nar ek purakh keh dhiaayo ||

ਤਿਨ ਕਰਿ ਡਿੰਭ ਨ ਕਿਸੀ ਦਿਖਾਯੋ ॥੨੪॥

तिन करि डिंभ न किसी दिखायो ॥२४॥

tin kar ddi(n)bh na kisee dhikhaayo ||24||


ਡਿੰਭ ਕਰੇ ਬਿਨੁ ਹਾਥਿ ਨ ਆਵੈ ॥

डिंभ करे बिनु हाथि न आवै ॥

ddi(n)bh kare bin haath na aavai ||

ਕੋਊ ਨ ਕਾਹੂੰ ਸੀਸ ਨਿਵਾਵੈ ॥

कोऊ न काहूँ सीस निवावै ॥

kouoo na kaahoo(n) sees nivaavai ||

ਜੋ ਇਹੁ ਪੇਟ ਨ ਕਾਹੂੰ ਹੋਤਾ ॥

जो इहु पेट न काहूँ होता ॥

jo ih peT na kaahoo(n) hotaa ||

ਰਾਵ ਰੰਕ ਕਾਹੂੰ ਕੋ ਕਹਤਾ ॥੨੫॥

राव रंक काहूँ को कहता ॥२५॥

raav ra(n)k kaahoo(n) ko kahataa ||25||


ਜਿਨ ਪ੍ਰਭੁ ਏਕ ਵਹੈ ਠਹਰਾਯੋ ॥

जिन प्रभु एक वहै ठहरायो ॥

jin prabh ek vahai Thaharaayo ||

ਤਿਨ ਕਰ ਡਿੰਭ ਨ ਕਿਸੂ ਦਿਖਾਯੋ ॥

तिन कर डिंभ न किसू दिखायो ॥

tin kar ddi(n)bh na kisoo dhikhaayo ||

ਸੀਸ ਦੀਯੋ ਉਨ ਸਿਰਰ ਨ ਦੀਨਾ ॥

सीस दीयो उन सिरर न दीना ॥

sees dheeyo un sirar na dheenaa ||

ਰੰਚ ਸਮਾਨ ਦੇਹ ਕਰਿ ਚੀਨਾ ॥੨੬॥

रंच समान देह करि चीना ॥२६॥

ra(n)ch samaan dheh kar cheenaa ||26||


ਕਾਨ ਛੇਦ ਜੋਗੀ ਕਹਵਾਯੋ ॥

कान छेद जोगी कहवायो ॥

kaan chhedh jogee kahavaayo ||

ਅਤਿ ਪ੍ਰਪੰਚ ਕਰ ਬਨਹਿ ਸਿਧਾਯੋ ॥

अति प्रपंच कर बनहि सिधायो ॥

at prapa(n)ch kar baneh sidhaayo ||

ਏਕ ਨਾਮੁ ਕੋ ਤਤੁ ਨ ਲਯੋ ॥

एक नामु को ततु न लयो ॥

ek naam ko tat na layo ||

ਬਨ ਕੋ ਭਯੋ ਨ ਗ੍ਰਿਹ ਕੋ ਭਯੋ ॥੨੭॥

बन को भयो न गृह को भयो ॥२७॥

ban ko bhayo na gireh ko bhayo ||27||


ਕਹਾ ਲਗੈ ਕਬਿ ਕਥੈ ਬਿਚਾਰਾ ॥

कहा लगै कबि कथै बिचारा ॥

kahaa lagai kab kathai bichaaraa ||

ਰਸਨਾ ਏਕ ਨ ਪਇਯਤ ਪਾਰਾ ॥

रसना एक न पइयत पारा ॥

rasanaa ek na piyat paaraa ||

ਜਿਹਬਾ ਕੋਟਿ ਕੋਟਿ ਕੋਊ ਧਰੈ ॥

जिहबा कोटि कोटि कोऊ धरै ॥

jihabaa koT koT kouoo dharai ||

ਗੁਣ ਸਮੁੰਦ੍ਰ ਤ੍ਵ ਪਾਰ ਨ ਪਰੈ ॥੨੮॥

गुण समुँद्र त्व पार न परै ॥२८॥

gun samu(n)dhr tavai paar na parai ||28||


ਪ੍ਰਥਮ ਕਾਲ ਸਭ ਜਗ ਕੋ ਤਾਤਾ ॥

प्रथम काल सभ जग को ताता ॥

pratham kaal sabh jag ko taataa ||

ਤਾ ਤੇ ਭਯੋ ਤੇਜ ਬਿਖ੍ਯਾਤਾ ॥

ता ते भयो तेज बिख्याता ॥

taa te bhayo tej bikhayaataa ||

ਸੋਈ ਭਵਾਨੀ ਨਾਮੁ ਕਹਾਈ ॥

सोई भवानी नामु कहाई ॥

soiee bhavaanee naam kahaiee ||

ਜਿਨਿ ਸਿਗਰੀ ਯਹ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਉਪਾਈ ॥੨੯॥

जिनि सिगरी यह सृसटि उपाई ॥२९॥

jin sigaree yeh sirasaT upaiee ||29||


ਪ੍ਰਿਥਮੇ ਓਅੰਕਾਰ ਤਿਨਿ ਕਹਾ ॥

पृथमे ओअंकार तिनि कहा ॥

pirathame oa(n)kaar tin kahaa ||

ਸੋ ਧੁਨਿ ਪੂਰ ਜਗਤ ਮੋ ਰਹਾ ॥

सो धुनि पूर जगत मो रहा ॥

so dhun poor jagat mo rahaa ||

ਤਾ ਤੇ ਜਗਤ ਭਯੋ ਬਿਸਥਾਰਾ ॥

ता ते जगत भयो बिसथारा ॥

taa te jagat bhayo bisathaaraa ||

ਪੁਰਖੁ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਤਿ ਜਬ ਦੁਹੂ ਬਿਚਾਰਾ ॥੩੦॥

पुरखु प्रकृति जब दुहू बिचारा ॥३०॥

purakh prakirat jab dhuhoo bichaaraa ||30||


ਜਗਤ ਭਯੋ ਤਾ ਤੇ ਸਭ ਜਨੀਯਤ ॥

जगत भयो ता ते सभ जनीयत ॥

jagat bhayo taa te sabh janeeyat ||

ਚਾਰ ਖਾਨਿ ਕਰਿ ਪ੍ਰਗਟ ਬਖਨੀਯਤ ॥

चार खानि करि प्रगट बखनीयत ॥

chaar khaan kar pragaT bakhaneeyat ||

ਸਕਤਿ ਇਤੀ ਨਹੀ ਬਰਨ ਸੁਨਾਊ ॥

सकति इती नही बरन सुनाऊ ॥

sakat itee nahee baran sunaauoo ||

ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਕਰਿ ਨਾਮ ਬਤਾਉ ॥੩੧॥

भिंन भिंन करि नाम बताउ ॥३१॥

bhi(n)n bhi(n)n kar naam bataau ||31||


ਬਲੀ ਅਬਲੀ ਦੋਊ ਉਪਜਾਏ ॥

बली अबली दोऊ उपजाए ॥

balee abalee dhouoo upajaae ||

ਊਚ ਨੀਚ ਕਰਿ ਭਿੰਨ ਦਿਖਾਏ ॥

ऊच नीच करि भिंन दिखाए ॥

uooch neech kar bhi(n)n dhikhaae ||

ਬਪੁ ਧਰਿ ਕਾਲ ਬਲੀ ਬਲਵਾਨਾ ॥

बपु धरि काल बली बलवाना ॥

bap dhar kaal balee balavaanaa ||

ਆਪਹਿ ਰੂਪ ਧਰਤ ਭਯੋ ਨਾਨਾ ॥੩੨॥

आपहि रूप धरत भयो नाना ॥३२॥

aapeh roop dharat bhayo naanaa ||32||


ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਜਿਮੁ ਦੇਹ ਧਰਾਏ ॥

भिंन भिंन जिमु देह धराए ॥

bhi(n)n bhi(n)n jim dheh dharaae ||

ਤਿਮੁ ਤਿਮੁ ਕਰ ਅਵਤਾਰ ਕਹਾਏ ॥

तिमु तिमु कर अवतार कहाए ॥

tim tim kar avataar kahaae ||

ਪਰਮ ਰੂਪ ਜੋ ਏਕ ਕਹਾਯੋ ॥

परम रूप जो एक कहायो ॥

param roop jo ek kahaayo ||

ਅੰਤਿ ਸਭੋ ਤਿਹ ਮਧਿ ਮਿਲਾਯੋ ॥੩੩॥

अंति सभो तिह मधि मिलायो ॥३३॥

a(n)t sabho teh madh milaayo ||33||


ਜਿਤਿਕ ਜਗਤਿ ਕੈ ਜੀਵ ਬਖਾਨੋ ॥

जितिक जगति कै जीव बखानो ॥

jitik jagat kai jeev bakhaano ||

ਏਕ ਜੋਤਿ ਸਭ ਹੀ ਮਹਿ ਜਾਨੋ ॥

एक जोति सभ ही महि जानो ॥

ek jot sabh hee meh jaano ||

ਕਾਲ ਰੂਪ ਭਗਵਾਨ ਭਨੈਬੋ ॥

काल रूप भगवान भनैबो ॥

kaal roop bhagavaan bhanaibo ||

ਤਾ ਮਹਿ ਲੀਨ ਜਗਤਿ ਸਭ ਹ੍ਵੈਬੋ ॥੩੪॥

ता महि लीन जगति सभ ह्वैबो ॥३४॥

taa meh leen jagat sabh havaibo ||34||


ਜੋ ਕਿਛੁ ਦਿਸਟਿ ਅਗੋਚਰ ਆਵਤ ॥

जो किछु दिसटि अगोचर आवत ॥

jo kichh dhisaT agochar aavat ||

ਤਾ ਕਹੁ ਮਨ ਮਾਯਾ ਠਹਰਾਵਤ ॥

ता कहु मन माया ठहरावत ॥

taa kahu man maayaa Thaharaavat ||

ਏਕਹਿ ਆਪ ਸਭਨ ਮੋ ਬਿਆਪਾ ॥

एकहि आप सभन मो बिआपा ॥

ekeh aap sabhan mo biaapaa ||

ਸਭ ਕੋਈ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਕਰ ਥਾਪਾ ॥੩੫॥

सभ कोई भिंन भिंन कर थापा ॥३५॥

sabh koiee bhi(n)n bhi(n)n kar thaapaa ||35||


ਸਭ ਹੀ ਮਹਿ ਰਮ ਰਹਿਯੋ ਅਲੇਖਾ ॥

सभ ही महि रम रहियो अलेखा ॥

sabh hee meh ram rahiyo alekhaa ||

ਮਾਗਤ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਤੇ ਲੇਖਾ ॥

मागत भिंन भिंन ते लेखा ॥

maagat bhi(n)n bhi(n)n te lekhaa ||

ਜਿਨ ਨਰ ਏਕ ਵਹੈ ਠਹਰਾਯੋ ॥

जिन नर एक वहै ठहरायो ॥

jin nar ek vahai Thaharaayo ||

ਤਿਨ ਹੀ ਪਰਮ ਤਤੁ ਕਹੁ ਪਾਯੋ ॥੩੬॥

तिन ही परम ततु कहु पायो ॥३६॥

tin hee param tat kahu paayo ||36||


ਏਕਹ ਰੂਪ ਅਨੂਪ ਸਰੂਪਾ ॥

एकह रूप अनूप सरूपा ॥

ekeh roop anoop saroopaa ||

ਰੰਕ ਭਯੋ ਰਾਵ ਕਹੂੰ ਭੂਪਾ ॥

रंक भयो राव कहूँ भूपा ॥

ra(n)k bhayo raav kahoo(n) bhoopaa ||

ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਸਭਹਨ ਉਰਝਾਯੋ ॥

भिंन भिंन सभहन उरझायो ॥

bhi(n)n bhi(n)n sabhahan urajhaayo ||

ਸਭ ਤੇ ਜੁਦੋ ਨ ਕਿਨਹੁੰ ਪਾਯੋ ॥੩੭॥

सभ ते जुदो न किनहुँ पायो ॥३७॥

sabh te judho na kinahu(n) paayo ||37||


ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਸਭਹੂੰ ਉਪਜਾਯੋ ॥

भिंन भिंन सभहूँ उपजायो ॥

bhi(n)n bhi(n)n sabhahoo(n) upajaayo ||

ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਕਰਿ ਤਿਨੋ ਖਪਾਯੋ ॥

भिंन भिंन करि तिनो खपायो ॥

bhi(n)n bhi(n)n kar tino khapaayo ||

ਆਪ ਕਿਸੂ ਕੋ ਦੋਸ ਨ ਲੀਨਾ ॥

आप किसू को दोस न लीना ॥

aap kisoo ko dhos na leenaa ||

ਅਉਰਨ ਸਿਰ ਬੁਰਿਆਈ ਦੀਨਾ ॥੩੮॥

अउरन सिर बुरिआई दीना ॥३८॥

aauran sir buriaaiee dheenaa ||38||



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