Pt 8, Chandi Charitar Ukati Bilas,
ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ,
चंडी चरित्र उकति बिलास


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ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

ਭਾਜਿ ਗਇਓ ਮਘਵਾ ਜਿਨ ਕੇ ਡਰ ਬ੍ਰਹਮ ਤੇ ਆਦਿ ਸਭੈ ਭੈ ਭੀਤੇ ॥

भाजि गइओ मघवा जिन के डर ब्रहम ते आदि सभै भै भीते ॥

bhaaj gio maghavaa jin ke ddar braham te aadh sabhai bhai bheete ||

ਤੇਈ ਵੈ ਦੈਤ ਪਰਾਇ ਗਏ ਰਨਿ ਹਾਰ ਨਿਹਾਰ ਭਏ ਬਲੁ ਰੀਤੇ ॥

तेई वै दैत पराइ गए रनि हार निहार भए बलु रीते ॥

teiee vai dhait parai ge ran haar nihaar bhe bal reete ||

ਜੰਬੁਕ ਗ੍ਰਿਝ ਨਿਰਾਸ ਭਏ ਬਨ ਬਾਸ ਗਏ ਜੁਗ ਜਾਮਨ ਬੀਤੇ ॥

जंबुक गृझ निरास भए बन बास गए जुग जामन बीते ॥

ja(n)buk girajh niraas bhe ban baas ge jug jaaman beete ||

ਸੰਤ ਸਹਾਇ ਸਦਾ ਜਗ ਮਾਇ ਸੁ ਸੁੰਭ ਨਿਸੁੰਭ ਬਡੇ ਅਰਿ ਜੀਤੇ ॥੨੨੫॥

संत सहाइ सदा जग माइ सु सुँभ निसुँभ बडे अरि जीते ॥२२५॥

sa(n)t sahai sadhaa jag mai su su(n)bh nisu(n)bh badde ar jeete ||225||


ਦੇਵ ਸਭੈ ਮਿਲਿ ਕੈ ਇਕ ਠਉਰ ਸੁ ਅਛਤ ਕੁੰਕਮ ਚੰਦਨ ਲੀਨੋ ॥

देव सभै मिलि कै इक ठउर सु अछत कुँकम चंदन लीनो ॥

dhev sabhai mil kai ik Thaur su achhat ku(n)kam cha(n)dhan leeno ||

ਤਛਨ ਲਛਨ ਦੈ ਕੈ ਪ੍ਰਦਛਨ ਟੀਕਾ ਸੁ ਚੰਡਿ ਕੇ ਭਾਲ ਮੈ ਦੀਨੋ ॥

तछन लछन दै कै प्रदछन टीका सु चंडि के भाल मै दीनो ॥

tachhan lachhan dhai kai pradhachhan Teekaa su cha(n)dd ke bhaal mai dheeno ||

ਤਾ ਛਬਿ ਕੋ ਉਪਜ੍ਯੋ ਤਹ ਭਾਵ ਇਹੈ ਕਵਿ ਨੇ ਮਨ ਮੈ ਲਖਿ ਲੀਨੋ ॥

ता छबि को उपज्यो तह भाव इहै कवि ने मन मै लखि लीनो ॥

taa chhab ko upajayo teh bhaav ihai kav ne man mai lakh leeno ||

ਮਾਨਹੁ ਚੰਦ ਕੈ ਮੰਡਲ ਮੈ ਸੁਭ ਮੰਗਲ ਆਨਿ ਪ੍ਰਵੇਸਹਿ ਕੀਨੋ ॥੨੨੬॥

मानहु चंद कै मंडल मै सुभ मंगल आनि प्रवेसहि कीनो ॥२२६॥

maanahu cha(n)dh kai ma(n)ddal mai subh ma(n)gal aan praveseh keeno ||226||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਮਿਲਿ ਕੇ ਸੁ ਦੇਵਨ ਬਡਾਈ ਕਰੀ ਕਾਲਿਕਾ ਕੀ ਏਹੋ ਜਗ ਮਾਤ ਤੈ ਤੋ ਕਟਿਓ ਬਡੋ ਪਾਪੁ ਹੈ ॥

मिलि के सु देवन बडाई करी कालिका की एहो जग मात तै तो कटिओ बडो पापु है ॥

mil ke su dhevan baddaiee karee kaalikaa kee eho jag maat tai to kaTio baddo paap hai ||

ਦੈਤਨ ਕੇ ਮਾਰ ਰਾਜ ਦੀਨੋ ਤੈ ਸੁਰੇਸ ਹੂੰ ਕੋ ਬਡੋ ਜਸੁ ਲੀਨੇ ਜਗਿ ਤੇਰੋ ਈ ਪ੍ਰਤਾਪੁ ਹੈ ॥

दैतन के मार राज दीनो तै सुरेस हूँ को बडो जसु लीने जगि तेरो ई प्रतापु है ॥

dhaitan ke maar raaj dheeno tai sures hoo(n) ko baddo jas leene jag tero iee prataap hai ||

ਦੇਤ ਹੈ ਅਸੀਸ ਦਿਜ ਰਾਜ ਰਿਖਿ ਬਾਰਿ ਬਾਰਿ ਤਹਾ ਹੀ ਪੜਿਓ ਹੈ ਬ੍ਰਹਮ ਕਉਚ ਹੂੰ ਕੋ ਜਾਪ ਹੈ ॥

देत है असीस दिज राज रिखि बारि बारि तहा ही पड़िओ है ब्रहम कउच हूँ को जाप है ॥

dhet hai asees dhij raaj rikh baar baar tahaa hee paRio hai braham kauch hoo(n) ko jaap hai ||

ਐਸੇ ਜਸੁ ਪੂਰ ਰਹਿਓ ਚੰਡਿਕਾ ਕੋ ਤੀਨ ਲੋਕਿ ਜੈਸੇ ਧਾਰ ਸਾਗਰ ਮੈ ਗੰਗਾ ਜੀ ਕੋ ਆਪੁ ਹੈ ॥੨੨੭॥

ऐसे जसु पूर रहिओ चंडिका को तीन लोकि जैसे धार सागर मै गंगा जी को आपु है ॥२२७॥

aaise jas poor rahio cha(n)ddikaa ko teen lok jaise dhaar saagar mai ga(n)gaa jee ko aap hai ||227||


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

ਦੇਹਿ ਅਸੀਸ ਸਭੈ ਸੁਰ ਨਾਰਿ ਸੁਧਾਰਿ ਕੈ ਆਰਤੀ ਦੀਪ ਜਗਾਇਓ ॥

देहि असीस सभै सुर नारि सुधारि कै आरती दीप जगाइओ ॥

dheh asees sabhai sur naar sudhaar kai aaratee dheep jagaio ||

ਫੂਲ ਸੁਗੰਧ ਸੁਅਛਤ ਦਛਨ ਜਛਨ ਜੀਤ ਕੋ ਗੀਤ ਸੁ ਗਾਇਓ ॥

फूल सुगंध सुअछत दछन जछन जीत को गीत सु गाइओ ॥

fool suga(n)dh suachhat dhachhan jachhan jeet ko geet su gaio ||

ਧੂਪ ਜਗਾਇ ਕੈ ਸੰਖ ਬਜਾਇ ਕੈ ਸੀਸ ਨਿਵਾਇ ਕੈ ਬੈਨ ਸੁਨਾਇਓ ॥

धूप जगाइ कै संख बजाइ कै सीस निवाइ कै बैन सुनाइओ ॥

dhoop jagai kai sa(n)kh bajai kai sees nivai kai bain sunaio ||

ਹੇ ਜਗ ਮਾਇ ਸਦਾ ਸੁਖ ਦਾਇ ਤੈ ਸੁੰਭ ਕੋ ਘਾਇ ਬਡੋ ਜਸੁ ਪਾਇਓ ॥੨੨੮॥

हे जग माइ सदा सुख दाइ तै सुँभ को घाइ बडो जसु पाइओ ॥२२८॥

he jag mai sadhaa sukh dhai tai su(n)bh ko ghai baddo jas paio ||228||


ਸਕ੍ਰਹਿ ਸਾਜਿ ਸਮਾਜ ਦੈ ਚੰਡ ਸੁ ਮੋਦ ਮਹਾ ਮਨ ਮਾਹਿ ਰਈ ਹੈ ॥

सक्रहि साजि समाज दै चंड सु मोद महा मन माहि रई है ॥

sakreh saaj samaaj dhai cha(n)dd su modh mahaa man maeh riee hai ||

ਸੂਰ ਸਸੀ ਨਭਿ ਥਾਪ ਕੈ ਤੇਜੁ ਦੇ ਆਪ ਤਹਾ ਤੇ ਸੁ ਲੋਪ ਭਈ ਹੈ ॥

सूर ससी नभि थाप कै तेजु दे आप तहा ते सु लोप भई है ॥

soor sasee nabh thaap kai tej dhe aap tahaa te su lop bhiee hai ||

ਬੀਚ ਅਕਾਸ ਪ੍ਰਕਾਸ ਬਢਿਓ ਤਿਹ ਕੀ ਉਪਮਾ ਮਨ ਤੇ ਨ ਗਈ ਹੈ ॥

बीच अकास प्रकास बढिओ तिह की उपमा मन ते न गई है ॥

beech akaas prakaas baddio teh kee upamaa man te na giee hai ||

ਧੂਰਿ ਕੈ ਪੂਰ ਮਲੀਨ ਹੁਤੋ ਰਵਿ ਮਾਨਹੁ ਚੰਡਿਕਾ ਓਪ ਦਈ ਹੈ ॥੨੨੯॥

धूरि कै पूर मलीन हुतो रवि मानहु चंडिका ओप दई है ॥२२९॥

dhoor kai poor maleen huto rav maanahu cha(n)ddikaa op dhiee hai ||229||


ਕਬਿਤੁ ॥

कबितु ॥

kabit ||

ਪ੍ਰਥਮ ਮਧੁ ਕੈਟ ਮਦ ਮਥਨ ਮਹਿਖਾਸੁਰੈ ਮਾਨ ਮਰਦਨ ਕਰਨ ਤਰੁਨਿ ਬਰ ਬੰਡਕਾ ॥

प्रथम मधु कैट मद मथन महिखासुरै मान मरदन करन तरुनि बर बंडका ॥

pratham madh kaiT madh mathan mahikhaasurai maan maradhan karan tarun bar ba(n)ddakaa ||

ਧੂਮ੍ਰ ਦ੍ਰਿਗ ਧਰਨਧਰਿ ਧੂਰਿ ਧਾਨੀ ਕਰਨ ਚੰਡ ਅਰੁ ਮੁੰਡ ਕੇ ਮੁੰਡ ਖੰਡ ਖੰਡਕਾ ॥

धूम्र दृग धरनधरि धूरि धानी करन चंड अरु मुँड के मुँड खंड खंडका ॥

dhoomr dhirag dharanadhar dhoor dhaanee karan cha(n)dd ar mu(n)dd ke mu(n)dd kha(n)dd kha(n)ddakaa ||

ਰਕਤ ਬੀਰਜ ਹਰਨ ਰਕਤ ਭਛਨ ਕਰਨ ਦਰਨ ਅਨਸੁੰਭ ਰਨਿ ਰਾਰ ਰਿਸ ਮੰਡਕਾ ॥

रकत बीरज हरन रकत भछन करन दरन अनसुँभ रनि रार रिस मंडका ॥

rakat beeraj haran rakat bhachhan karan dharan anasu(n)bh ran raar ris ma(n)ddakaa ||

ਸੰਭ ਬਲੁ ਧਾਰ ਸੰਘਾਰ ਕਰਵਾਰ ਕਰਿ ਸਕਲ ਖਲੁ ਅਸੁਰ ਦਲੁ ਜੈਤ ਜੈ ਚੰਡਿਕਾ ॥੨੩੦॥

संभ बलु धार संघार करवार करि सकल खलु असुर दलु जैत जै चंडिका ॥२३०॥

sa(n)bh bal dhaar sa(n)ghaar karavaar kar sakal khal asur dhal jait jai cha(n)ddikaa ||230||


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

ਦੇਹ ਸਿਵਾ ਬਰੁ ਮੋਹਿ ਇਹੈ ਸੁਭ ਕਰਮਨ ਤੇ ਕਬਹੂੰ ਨ ਟਰੋ ॥

देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूँ न टरो ॥

dheh sivaa bar moh ihai subh karaman te kabahoo(n) na Taro ||

ਨ ਡਰੋ ਅਰਿ ਸੋ ਜਬ ਜਾਇ ਲਰੋ ਨਿਸਚੈ ਕਰਿ ਅਪੁਨੀ ਜੀਤ ਕਰੋ ॥

न डरो अरि सो जब जाइ लरो निसचै करि अपुनी जीत करो ॥

n ddaro ar so jab jai laro nisachai kar apunee jeet karo ||

ਅਰੁ ਸਿਖ ਹੌ ਆਪਨੇ ਹੀ ਮਨ ਕੋ ਇਹ ਲਾਲਚ ਹਉ ਗੁਨ ਤਉ ਉਚਰੋ ॥

अरु सिख हौ आपने ही मन को इह लालच हउ गुन तउ उचरो ॥

ar sikh hau aapane hee man ko ieh laalach hau gun tau ucharo ||

ਜਬ ਆਵ ਕੀ ਅਉਧ ਨਿਦਾਨ ਬਨੈ ਅਤਿ ਹੀ ਰਨ ਮੈ ਤਬ ਜੂਝ ਮਰੋ ॥੨੩੧॥

जब आव की अउध निदान बनै अति ही रन मै तब जूझ मरो ॥२३१॥

jab aav kee aaudh nidhaan banai at hee ran mai tab joojh maro ||231||


ਚੰਡਿ ਚਰਿਤ੍ਰ ਕਵਿਤਨ ਮੈ ਬਰਨਿਓ ਸਭ ਹੀ ਰਸ ਰੁਦ੍ਰਮਈ ਹੈ ॥

चंडि चरित्र कवितन मै बरनिओ सभ ही रस रुद्रमई है ॥

cha(n)dd charitr kavitan mai baranio sabh hee ras rudhramiee hai ||

ਏਕ ਤੇ ਏਕ ਰਸਾਲ ਭਇਓ ਨਖ ਤੇ ਸਿਖ ਲਉ ਉਪਮਾ ਸੁ ਨਈ ਹੈ ॥

एक ते एक रसाल भइओ नख ते सिख लउ उपमा सु नई है ॥

ek te ek rasaal bhio nakh te sikh lau upamaa su niee hai ||

ਕਉਤਕ ਹੇਤੁ ਕਰੀ ਕਵਿ ਨੇ ਸਤਿਸਯ ਕੀ ਕਥਾ ਇਹ ਪੂਰੀ ਭਈ ਹੈ ॥

कउतक हेतु करी कवि ने सतिसय की कथा इह पूरी भई है ॥

kautak het karee kav ne satisay kee kathaa ieh pooree bhiee hai ||

ਜਾਹਿ ਨਮਿਤ ਪੜੈ ਸੁਨਿ ਹੈ ਨਰ ਸੋ ਨਿਸਚੈ ਕਰਿ ਤਾਹਿ ਦਈ ਹੈ ॥੨੩੨॥

जाहि नमित पड़ै सुनि है नर सो निसचै करि ताहि दई है ॥२३२॥

jaeh namit paRai sun hai nar so nisachai kar taeh dhiee hai ||232||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਗ੍ਰੰਥ ਸਤਿ ਸਇਆ ਕੋ ਕਰਿਓ ਜਾ ਸਮ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਇ ॥

ग्रंथ सति सइआ को करिओ जा सम अवरु न कोइ ॥

gra(n)th sat siaa ko kario jaa sam avar na koi ||

ਜਿਹ ਨਮਿਤ ਕਵਿ ਨੇ ਕਹਿਓ ਸੁ ਦੇਹ ਚੰਡਿਕਾ ਸੋਇ ॥੨੩੩॥

जिह नमित कवि ने कहिओ सु देह चंडिका सोइ ॥२३३॥

jeh namit kav ne kahio su dheh cha(n)ddikaa soi ||233||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਮਾਰਕੰਡੇ ਪੁਰਾਨੇ ਸ੍ਰੀ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰੇ ਉਕਤਿ ਬਿਲਾਸ ਦੇਵ ਸੁਰੇਸ ਸਹਿਤ ਜੈਕਾਰ ਸਬਦ ਕਰਾ ਅਸਟਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੮॥

इति स्री मारकंडे पुराने स्री चंडी चरित्रे उकति बिलास देव सुरेस सहित जैकार सबद करा असटमो धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥८॥

eit sree maaraka(n)dde puraane sree cha(n)ddee charitre ukat bilaas dhev sures sahit jaikaar sabadh karaa asaTamo dhiaai samaapatam sat subham sat ||8||



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