Pt 2, Bachitar Natak (P:10),
ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ (ਪਾਤਿਸਾਹੀ 10),
बचित्र नाटक (पातिसाही 10)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਕਵਿ ਬੰਸ ਵਰਣਨ ॥

कवि बंस वरणन ॥

kav ba(n)s varanan ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਤੁਮਰੀ ਮਹਿਮਾ ਅਪਰ ਅਪਾਰਾ ॥

तुमरी महिमा अपर अपारा ॥

tumaree mahimaa apar apaaraa ||

ਜਾ ਕਾ ਲਹਿਓ ਨ ਕਿਨਹੂੰ ਪਾਰਾ ॥

जा का लहिओ न किनहूँ पारा ॥

jaa kaa lahio na kinahoo(n) paaraa ||

ਦੇਵ ਦੇਵ ਰਾਜਨ ਕੇ ਰਾਜਾ ॥

देव देव राजन के राजा ॥

dhev dhev raajan ke raajaa ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਗਰੀਬ ਨਿਵਾਜਾ ॥੧॥

दीन दइआल गरीब निवाजा ॥१॥

dheen dhiaal gareeb nivaajaa ||1||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਮੂਕ ਉਚਰੈ ਸਾਸਤ੍ਰ ਖਟ ਪਿੰਗੁ ਗਿਰਨ ਚੜਿ ਜਾਇ ॥

मूक उचरै सासत्र खट पिंगु गिरन चड़ि जाइ ॥

mook ucharai saasatr khaT pi(n)g giran chaR jai ||

ਅੰਧ ਲਖੈ ਬਧਰੋ ਸੁਨੈ ਜੌ ਕਾਲ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਾਇ ॥੨॥

अंध लखै बधरो सुनै जौ काल कृपा कराइ ॥२॥

a(n)dh lakhai badharo sunai jau kaal kirapaa karai ||2||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਕਹਾ ਬੱੁਧਿ ਪ੍ਰਭ ਤੁੱਛ ਹਮਾਰੀ ॥

कहा बु्ुधि प्रभ तुच्छ हमारी ॥

kahaa ba'udh prabh tu'chh hamaaree ||

ਬਰਨ ਸਕੈ ਮਹਿਮਾ ਜੁ ਤਿਹਾਰੀ ॥

बरन सकै महिमा जु तिहारी ॥

baran sakai mahimaa ju tihaaree ||

ਹਮ ਨ ਸਕਤ ਕਰ ਸਿਫਤ ਤੁਮਾਰੀ ॥

हम न सकत कर सिफत तुमारी ॥

ham na sakat kar sifat tumaaree ||

ਆਪ ਲੇਹੁ ਤੁਮ ਕਥਾ ਸੁਧਾਰੀ ॥੩॥

आप लेहु तुम कथा सुधारी ॥३॥

aap leh tum kathaa sudhaaree ||3||


ਕਹਾ ਲਗੈ ਇਹ ਕੀਟ ਬਖਾਨੈ ॥

कहा लगै इह कीट बखानै ॥

kahaa lagai ieh keeT bakhaanai ||

ਮਹਿਮਾ ਤੋਰ ਤੁਹੀ ਪ੍ਰਭ ਜਾਨੈ ॥

महिमा तोर तुही प्रभ जानै ॥

mahimaa tor tuhee prabh jaanai ||

ਪਿਤਾ ਜਨਮ ਜਿਮ ਪੂਤ ਨ ਪਾਵੈ ॥

पिता जनम जिम पूत न पावै ॥

pitaa janam jim poot na paavai ||

ਕਹਾ ਤਵਨ ਕਾ ਭੇਦ ਬਤਾਵੈ ॥੪॥

कहा तवन का भेद बतावै ॥४॥

kahaa tavan kaa bhedh bataavai ||4||


ਤੁਮਰੀ ਪ੍ਰਭਾ ਤੁਮੈ ਬਨਿ ਆਈ ॥

तुमरी प्रभा तुमै बनि आई ॥

tumaree prabhaa tumai ban aaiee ||

ਅਉਰਨ ਤੇ ਨਹੀ ਜਾਤ ਬਤਾਈ ॥

अउरन ते नही जात बताई ॥

aauran te nahee jaat bataiee ||

ਤੁਮਰੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੁਮ ਹੰੂ ਪ੍ਰਭ ਜਾਨੋ ॥

तुमरी कृपा तुम हंू प्रभ जानो ॥

tumaree kirapaa tum ha(n)oo prabh jaano ||

ਊਚ ਨੀਚ ਕਸ ਸਕਤ ਬਖਾਨੋ ॥੫॥

ऊच नीच कस सकत बखानो ॥५॥

uooch neech kas sakat bakhaano ||5||


ਸੇਸਨਾਗ ਸਿਰ ਸਹਸ ਬਨਾਈ ॥

सेसनाग सिर सहस बनाई ॥

sesanaag sir sahas banaiee ||

ਦ੍ਵੈ ਸਹੰਸ ਰਸਨਾਹੁ ਸੁਹਾਈ ॥

द्वै सहंस रसनाहु सुहाई ॥

dhavai saha(n)s rasanaahu suhaiee ||

ਰਟਤ ਅਬ ਲਗੇ ਨਾਮ ਅਪਾਰਾ ॥

रटत अब लगे नाम अपारा ॥

raTat ab lage naam apaaraa ||

ਤੁਮਰੋ ਤਊ ਨ ਪਾਵਤ ਪਾਰਾ ॥੬॥

तुमरो तऊ न पावत पारा ॥६॥

tumaro tuoo na paavat paaraa ||6||


ਤੁਮਰੀ ਕ੍ਰਿਆ ਕਹਾਂ ਕੋਊ ਕਹੈ ॥

तुमरी कृआ कहाँ कोऊ कहै ॥

tumaree kriaa kahaa(n) kouoo kahai ||

ਸਮਝਤ ਬਾਤ ਉਰਝ ਮਤਿ ਰਹੈ ॥

समझत बात उरझ मति रहै ॥

samajhat baat urajh mat rahai ||

ਸੂਛਮ ਰੂਪ ਨ ਬਰਨਾ ਜਾਈ ॥

सूछम रूप न बरना जाई ॥

soochham roop na baranaa jaiee ||

ਬਿਰਧ ਸਰੂਪਹਿ ਕਹੋ ਬਨਾਈ ॥੭॥

बिरध सरूपहि कहो बनाई ॥७॥

biradh saroopeh kaho banaiee ||7||


ਤੁਮਰੀ ਪ੍ਰੇਮ ਭਗਤਿ ਜਬ ਗਹਿਹੌ ॥

तुमरी प्रेम भगति जब गहिहौ ॥

tumaree prem bhagat jab gahihau ||

ਛੋਰ ਕਥਾ ਸਭ ਹੀ ਤਬ ਕਹਿਹੌ ॥

छोर कथा सभ ही तब कहिहौ ॥

chhor kathaa sabh hee tab kahihau ||

ਅਬ ਮੈ ਕਹੋ ਸੁ ਅਪਨੀ ਕਥਾ ॥

अब मै कहो सु अपनी कथा ॥

ab mai kaho su apanee kathaa ||

ਸੋਢੀ ਬੰਸ ਉਪਜਿਯਾ ਜਥਾ ॥੮॥

सोढी बंस उपजिया जथा ॥८॥

soddee ba(n)s upajiyaa jathaa ||8||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਪ੍ਰਿਥਮ ਕਥਾ ਸੰਛੇਪ ਤੇ ਕਹੋ ਸੁ ਹਿਤੁ ਚਿਤੁ ਲਾਇ ॥

पृथम कथा संछेप ते कहो सु हितु चितु लाइ ॥

piratham kathaa sa(n)chhep te kaho su hit chit lai ||

ਬਹੁਰ ਬਡੋ ਬਿਸਥਾਰ ਕੈ ਕਹਿਹੌ ਸਭੋ ਸੁਨਾਇ ॥੯॥

बहुर बडो बिसथार कै कहिहौ सभो सुनाइ ॥९॥

bahur baddo bisathaar kai kahihau sabho sunai ||9||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਪ੍ਰਿਥਮ ਕਾਲ ਜਬ ਕਰਾ ਪਸਾਰਾ ॥

पृथम काल जब करा पसारा ॥

piratham kaal jab karaa pasaaraa ||

ਓਅੰਕਾਰ ਤੇ ਸ੍ਰਿਸਟ ਉਪਾਰਾ ॥

ओअंकार ते सृसट उपारा ॥

oa(n)kaar te sirasaT upaaraa ||

ਕਾਲਸੈਣ ਪ੍ਰਿਥਮੈ ਭਇਓ ਭੂਪਾ ॥

कालसैण पृथमै भइओ भूपा ॥

kaalasain pirathamai bhio bhoopaa ||

ਅਧਿਕ ਅਤੁਲ ਬਲਿ ਰੂਪ ਅਨੂਪਾ ॥੧੦॥

अधिक अतुल बलि रूप अनूपा ॥१०॥

adhik atul bal roop anoopaa ||10||


ਕਾਲਕੇਤ ਦੂਸਰ ਭੂਅ ਭਯੋ ॥

कालकेत दूसर भूअ भयो ॥

kaalaket dhoosar bhooa bhayo ||

ਕ੍ਰੂਰ ਬਰਸ ਤੀਸਰ ਜਗ ਠਯੋ ॥

क्रूर बरस तीसर जग ठयो ॥

kraoor baras teesar jag Thayo ||

ਕਾਲਧੁਜ ਚਤੁਰਥ ਨ੍ਰਿਪ ਸੋਹੈ ॥

कालधुज चतुरथ नृप सोहै ॥

kaaladhuj chaturath nirap sohai ||

ਜਿਹ ਤੇ ਭਇਓ ਜਗਤ ਸਭ ਕੋ ਹੈ ॥੧੧॥

जिह ते भइओ जगत सभ को है ॥११॥

jeh te bhio jagat sabh ko hai ||11||


ਸਹਸਰਾਛ ਜਾ ਕੇ ਸੁਭ ਸੋਹੈਂ ॥

सहसराछ जा के सुभ सोहैं ॥

sahasaraachh jaa ke subh sohai(n) ||

ਸਹਸ ਪਾਦ ਜਾ ਕੇ ਤਨ ਮੋ ਹੈਂ ॥

सहस पाद जा के तन मो हैं ॥

sahas paadh jaa ke tan mo hai(n) ||

ਸੇਖਨਾਗ ਪਰ ਸੋਇਬੋ ਕਰੈ ॥

सेखनाग पर सोइबो करै ॥

sekhanaag par soibo karai ||

ਜਗ ਤਹਿ ਸੇਖਸਾਇ ਉਚਰੈ ॥੧੨॥

जग तहि सेखसाइ उचरै ॥१२॥

jag teh sekhasai ucharai ||12||


ਏਕ ਸ੍ਰਵਣ ਤੇ ਮੈਲ ਨਿਕਾਰਾ ॥

एक स्रवण ते मैल निकारा ॥

ek sravan te mail nikaaraa ||

ਤਾ ਤੇ ਮਧੁ ਕੀਟਭ ਤਨ ਧਾਰਾ ॥

ता ते मधु कीटभ तन धारा ॥

taa te madh keeTabh tan dhaaraa ||

ਦੁਤੀਯ ਕਾਨ ਤੇ ਮੈਲੁ ਨਿਕਾਰੀ ॥

दुतीय कान ते मैलु निकारी ॥

dhuteey kaan te mail nikaaree ||

ਤਾ ਤੇ ਭਈ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਇਹ ਸਾਰੀ ॥੧੩॥

ता ते भई सृसटि इह सारी ॥१३॥

taa te bhiee sirasaT ieh saaree ||13||


ਤਿਨ ਕੋ ਕਾਲ ਬਹੁਰ ਬਧ ਕਰਾ ॥

तिन को काल बहुर बध करा ॥

tin ko kaal bahur badh karaa ||

ਤਿਨ ਕੋ ਮੇਦ ਸਮੁੰਦ ਮੋ ਪਰਾ ॥

तिन को मेद समुँद मो परा ॥

tin ko medh samu(n)dh mo paraa ||

ਚਿਕਨ ਤਾਸ ਜਲ ਪਰ ਤਿਰ ਰਹੀ ॥

चिकन तास जल पर तिर रही ॥

chikan taas jal par tir rahee ||

ਮੇਧਾ ਨਾਮ ਤਬਹਿ ਤੇ ਕਹੀ ॥੧੪॥

मेधा नाम तबहि ते कही ॥१४॥

medhaa naam tabeh te kahee ||14||


ਸਾਧ ਕਰਮ ਜੇ ਪੁਰਖ ਕਮਾਵੈ ॥

साध करम जे पुरख कमावै ॥

saadh karam je purakh kamaavai ||

ਨਾਮ ਦੇਵਤਾ ਜਗਤ ਕਹਾਵੈ ॥

नाम देवता जगत कहावै ॥

naam dhevataa jagat kahaavai ||

ਕੁਕ੍ਰਿਤ ਕਰਮ ਜੇ ਜਗ ਮੈ ਕਰਹੀਂ ॥

कुकृत करम जे जग मै करहीं ॥

kukirat karam je jag mai karahee(n) ||

ਨਾਮ ਅਸੁਰ ਤਿਨ ਕੋ ਸਭ ਧਰਹੀਂ ॥੧੫॥

नाम असुर तिन को सभ धरहीं ॥१५॥

naam asur tin ko sabh dharahee(n) ||15||


ਬਹੁ ਬਿਥਾਰ ਕਹਾ ਲਗੈ ਬਖਾਨੀਅਤ ॥

बहु बिथार कहा लगै बखानीअत ॥

bahu bithaar kahaa lagai bakhaaneeat ||

ਗ੍ਰੰਥ ਬਢਨ ਤੇ ਅਤਿ ਡਰੁ ਮਾਨੀਅਤ ॥

ग्रंथ बढन ते अति डरु मानीअत ॥

gra(n)th baddan te at ddar maaneeat ||

ਤਿਨ ਤੇ ਹੋਤ ਬਹੁਤ ਨ੍ਰਿਪ ਆਏ ॥

तिन ते होत बहुत नृप आए ॥

tin te hot bahut nirap aae ||

ਦੱਛ ਪ੍ਰਜਾਪਤਿ ਜਿਨ ਉਪਜਾਏ ॥੧੬॥

दच्छ प्रजापति जिन उपजाए ॥१६॥

dha'chh prajaapat jin upajaae ||16||


ਦਸ ਸਹੰਸ੍ਰ ਤਿਹਿ ਗ੍ਰਿਹ ਭਈ ਕੰਨਿਆ ॥

दस सहंस्र तिहि गृह भई कंनिआ ॥

dhas saha(n)sr teh gireh bhiee ka(n)niaa ||

ਜਿਹ ਸਮਾਨ ਕਹ ਲਗੈ ਨ ਅੰਨਿਆ ॥

जिह समान कह लगै न अंनिआ ॥

jeh samaan keh lagai na a(n)niaa ||

ਕਾਲ ਕ੍ਰਿਆ ਐਸੀ ਤਹ ਭਈ ॥

काल कृआ ऐसी तह भई ॥

kaal kriaa aaisee teh bhiee ||

ਤੇ ਸਭ ਬਿਆਹਿ ਨਰੇਸਨ ਦਈ ॥੧੭॥

ते सभ बिआहि नरेसन दई ॥१७॥

te sabh biaaeh naresan dhiee ||17||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਬਨਤਾ ਕਦਰੂ ਦਿਤਿ ਅਦਿਤਿ ਏ ਰਿਖ ਬਰੀ ਬਨਾਇ ॥

बनता कदरू दिति अदिति ए रिख बरी बनाइ ॥

banataa kadharoo dhit adhit e rikh baree banai ||

ਨਾਗ ਨਾਗਰਿਪੁ ਦੇਵ ਸਭ ਦਈਤ ਲਏ ਉਪਜਾਇ ॥੧੮॥

नाग नागरिपु देव सभ दईत लए उपजाइ ॥१८॥

naag naagarip dhev sabh dhieet le upajai ||18||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਤਾ ਤੇ ਸੂਰਜ ਰੂਪ ਕੋ ਧਰਾ ॥

ता ते सूरज रूप को धरा ॥

taa te sooraj roop ko dharaa ||

ਜਾ ਤੇ ਬੰਸ ਪ੍ਰਚੁਰ ਰਵਿ ਕਰਾ ॥

जा ते बंस प्रचुर रवि करा ॥

jaa te ba(n)s prachur rav karaa ||

ਜੋ ਤਿਨ ਕੇ ਕਹਿ ਨਾਮ ਸੁਨਾਊ ॥

जो तिन के कहि नाम सुनाऊ ॥

jo tin ke keh naam sunaauoo ||

ਕਥਾ ਬਢਨ ਤੇ ਅਧਿਕ ਡਰਾਊ ॥੧੯॥

कथा बढन ते अधिक डराऊ ॥१९॥

kathaa baddan te adhik ddaraauoo ||19||


ਤਿਨ ਕੇ ਬੰਸ ਬਿਖੈ ਰਘੁ ਭਯੋ ॥

तिन के बंस बिखै रघु भयो ॥

tin ke ba(n)s bikhai ragh bhayo ||

ਰਘੁਬੰਸਹਿ ਜਿਹ ਜਗਹਿ ਚਲਯੋ ॥

रघुबंसहि जिह जगहि चलयो ॥

raghuba(n)seh jeh jageh chalayo ||

ਤਾ ਤੇ ਪੁਤ੍ਰ ਹੋਤ ਭਯੋ ਅਜ ਬਰ ॥

ता ते पुत्र होत भयो अज बर ॥

taa te putr hot bhayo aj bar ||

ਮਹਾ ਰਥੀ ਅਰ ਮਹਾ ਧਨੁਰ ਧਰ ॥੨੦॥

महा रथी अर महा धनुर धर ॥२०॥

mahaa rathee ar mahaa dhanur dhar ||20||


ਜਬ ਤਿਨ ਭੇਸ ਜੋਗ ਕੋ ਲਯੋ ॥

जब तिन भेस जोग को लयो ॥

jab tin bhes jog ko layo ||

ਰਾਜ ਪਾਟ ਦਸਰਥ ਕੋ ਦਯੋ ॥

राज पाट दसरथ को दयो ॥

raaj paaT dhasarath ko dhayo ||

ਹੋਤ ਭਯੋ ਵਹ ਮਹਾ ਧਨੁਰ ਧਰ ॥

होत भयो वह महा धनुर धर ॥

hot bhayo veh mahaa dhanur dhar ||

ਤੀਨ ਤ੍ਰਿਆਨ ਬਰਾ ਜਿਹ ਰੁਚਿ ਕਰ ॥੨੧॥

तीन तृआन बरा जिह रुचि कर ॥२१॥

teen triaan baraa jeh ruch kar ||21||


ਪ੍ਰਿਥਮ ਜਯੋ ਤਿਹ ਰਾਮ ਕੁਮਾਰਾ ॥

पृथम जयो तिह राम कुमारा ॥

piratham jayo teh raam kumaaraa ||

ਭਰਥ ਲੱਛਮਨ ਸਤ੍ਰਬਿਦਾਰਾ ॥

भरथ लच्छमन सत्रबिदारा ॥

bharath la'chhaman satrabidhaaraa ||

ਬਹੁਤ ਕਾਲ ਤਿਨ ਰਾਜ ਕਮਾਯੋ ॥

बहुत काल तिन राज कमायो ॥

bahut kaal tin raaj kamaayo ||

ਕਾਲ ਪਾਇ ਸੁਰਪੁਰਹਿ ਸਿਧਾਯੋ ॥੨੨॥

काल पाइ सुरपुरहि सिधायो ॥२२॥

kaal pai surapureh sidhaayo ||22||


ਸੀਅ ਸੁਤ ਬਹੁਰ ਭਏ ਦੁਇ ਰਾਜਾ ॥

सीअ सुत बहुर भए दुइ राजा ॥

seea sut bahur bhe dhui raajaa ||

ਰਾਜ ਪਾਟ ਉਨਹੀ ਕਉ ਛਾਜਾ ॥

राज पाट उनही कउ छाजा ॥

raaj paaT unahee kau chhaajaa ||

ਮੱਦ੍ਰ ਦੇਸ ਏਸ੍ਵਰਜਾ ਬਰੀ ਜਬ ॥

मद्द्र देस एस्वरजा बरी जब ॥

ma'dhr dhes esavairajaa baree jab ||

ਭਾਂਤਿ ਭਾਂਤਿ ਕੇ ਜੱਗ ਕੀਏ ਤਬ ॥੨੩॥

भाँति भाँति के जग्ग कीए तब ॥२३॥

bhaa(n)t bhaa(n)t ke ja'g ke'ee tab ||23||


ਤਹੀ ਤਿਨੈ ਬਾਧੇ ਦੁਇ ਪੁਰਵਾ ॥

तही तिनै बाधे दुइ पुरवा ॥

tahee tinai baadhe dhui puravaa ||

ਏਕ ਕਸੂਰ ਦੁਤੀਯ ਲਹੁਰਵਾ ॥

एक कसूर दुतीय लहुरवा ॥

ek kasoor dhuteey lahuravaa ||

ਅਧਿਕ ਪੁਰੀ ਤੇ ਦੋਊ ਬਿਰਾਜੀ ॥

अधिक पुरी ते दोऊ बिराजी ॥

adhik puree te dhouoo biraajee ||

ਨਿਰਖ ਲੰਕ ਅਮਰਾਵਤਿ ਲਾਜੀ ॥੨੪॥

निरख लंक अमरावति लाजी ॥२४॥

nirakh la(n)k amaraavat laajee ||24||


ਬਹੁਤ ਕਾਲ ਤਿਨ ਰਾਜੁ ਕਮਾਯੋ ॥

बहुत काल तिन राजु कमायो ॥

bahut kaal tin raaj kamaayo ||

ਜਾਲ ਕਾਲ ਤੇ ਅੰਤ ਫਸਾਯੋ ॥

जाल काल ते अंत फसायो ॥

jaal kaal te a(n)t fasaayo ||

ਤਿਨ ਕੇ ਪੁੱਤ੍ਰ ਪੌਤ੍ਰ ਜੇ ਵਏ ॥

तिन के पुत्त्र पौत्र जे वए ॥

tin ke pu'tr pauatr je ve ||

ਰਾਜ ਕਰਤ ਇਹ ਜਗ ਕੋ ਭਏ ॥੨੫॥

राज करत इह जग को भए ॥२५॥

raaj karat ieh jag ko bhe ||25||


ਕਹਾ ਲਗੇ ਤੇ ਬਰਨ ਸੁਨਾਊਂ ॥

कहा लगे ते बरन सुनाऊं ॥

kahaa lage te baran sunaauoo(n) ||

ਤਿਨ ਕੇ ਨਾਮ ਨ ਸੰਖ੍ਯਾ ਪਾਊਂ ॥

तिन के नाम न संख्या पाऊं ॥

tin ke naam na sa(n)khayaa paauoo(n) ||

ਹੋਤ ਚਹੂੰ ਜੁਗ ਮੈਂ ਜੇ ਆਏ ॥

होत चहूँ जुग मैं जे आए ॥

hot chahoo(n) jug mai(n) je aae ||

ਤਿਨ ਕੇ ਨਾਮ ਨ ਜਾਤ ਗਨਾਏ ॥੨੬॥

तिन के नाम न जात गनाए ॥२६॥

tin ke naam na jaat ganaae ||26||


ਜੌ ਅਬ ਤਉ ਕਿਰਪਾ ਬਲ ਪਾਊਂ ॥

जौ अब तउ किरपा बल पाऊं ॥

jau ab tau kirapaa bal paauoo(n) ||

ਨਾਮ ਜਥਾ ਮਤਿ ਭਾਖ ਸੁਨਾਊਂ ॥

नाम जथा मति भाख सुनाऊं ॥

naam jathaa mat bhaakh sunaauoo(n) ||

ਕਾਲਕੇਤੁ ਅਰ ਕਾਲਰਾਇ ਭਨ ॥

कालकेतु अर कालराइ भन ॥

kaalaket ar kaalarai bhan ||

ਜਿਨ ਤੇ ਭਏ ਪੁਤ੍ਰ ਘਰ ਅਨਗਨ ॥੨੭॥

जिन ते भए पुत्र घर अनगन ॥२७॥

jin te bhe putr ghar anagan ||27||


ਕਾਲਕੇਤ ਭਯੋ ਬਲੀ ਅਪਾਰਾ ॥

कालकेत भयो बली अपारा ॥

kaalaket bhayo balee apaaraa ||

ਕਾਲਰਾਇ ਜਿਨਿ ਨਗਰ ਨਿਕਾਰਾ ॥

कालराइ जिनि नगर निकारा ॥

kaalarai jin nagar nikaaraa ||

ਭਾਜ ਸਨੌਢ ਦੇਸ ਤੇ ਗਏ ॥

भाज सनौढ देस ते गए ॥

bhaaj sanauadd dhes te ge ||

ਤਹੀ ਭੂਪਜਾ ਬਿਆਹਤ ਭਏ ॥੨੮॥

तही भूपजा बिआहत भए ॥२८॥

tahee bhoopajaa biaahat bhe ||28||


ਤਿਹ ਤੇ ਪੁਤ੍ਰ ਭਯੋ ਜੋ ਧਾਮਾ ॥

तिह ते पुत्र भयो जो धामा ॥

teh te putr bhayo jo dhaamaa ||

ਸੋਢੀਰਾਇ ਧਰਾ ਤਿਹਿ ਨਾਮਾ ॥

सोढीराइ धरा तिहि नामा ॥

soddeerai dharaa teh naamaa ||

ਵੰਸ ਸਨੌਢ ਤਾ ਦਿਨ ਤੇ ਥੀਆ ॥

वंस सनौढ ता दिन ते थीआ ॥

va(n)s sanauadd taa dhin te theeaa ||

ਪਰਮ ਪਵਿਤ੍ਰ ਪੁਰਖ ਜੂ ਕੀਆ ॥੨੯॥

परम पवित्र पुरख जू कीआ ॥२९॥

param pavitr purakh joo keeaa ||29||


ਤਾਂ ਤੇ ਪੁਤ੍ਰ ਪੌਤ੍ਰ ਹੋਇ ਆਏ ॥

ताँ ते पुत्र पौत्र होइ आए ॥

taa(n) te putr pauatr hoi aae ||

ਤੇ ਸੋਢੀ ਸਭ ਜਗਤ ਕਹਾਏ ॥

ते सोढी सभ जगत कहाए ॥

te soddee sabh jagat kahaae ||

ਜਗ ਮੈ ਅਧਿਕ ਸੁ ਭਏ ਪ੍ਰਸਿੱਧਾ ॥

जग मै अधिक सु भए प्रसिद्धा ॥

jag mai adhik su bhe prasi'dhaa ||

ਦਿਨ ਦਿਨ ਤਿਨ ਕੇ ਧਨ ਕੀ ਬ੍ਰਿੱਧਾ ॥੩੦॥

दिन दिन तिन के धन की बृद्धा ॥३०॥

dhin dhin tin ke dhan kee bira'dhaa ||30||


ਰਾਜ ਕਰਤ ਭਏ ਬਿਬਿਧ ਪ੍ਰਕਾਰਾ ॥

राज करत भए बिबिध प्रकारा ॥

raaj karat bhe bibidh prakaaraa ||

ਦੇਸ ਦੇਸ ਕੇ ਜੀਤ ਨ੍ਰਿਪਾਰਾ ॥

देस देस के जीत नृपारा ॥

dhes dhes ke jeet nirapaaraa ||

ਜਹਾਂ ਤਹਾਂ ਤਿਹ ਧਰਮ ਚਲਾਯੋ ॥

जहाँ तहाँ तिह धरम चलायो ॥

jahaa(n) tahaa(n) teh dharam chalaayo ||

ਅੱਤ੍ਰ ਪੱਤ੍ਰ ਕਹ ਸੀਸ ਢੁਰਾਯੋ ॥੩੧॥

अत्त्र पत्त्र कह सीस ढुरायो ॥३१॥

a'tr pa'tr keh sees dduraayo ||31||


ਰਾਜਸੂਅ ਬਹੁ ਬਾਰਨ ਕੀਏ ॥

राजसूअ बहु बारन कीए ॥

raajasooa bahu baaran ke'ee ||

ਜੀਤ ਜੀਤ ਦੇਸੇਸ੍ਵਰ ਲੀਏ ॥

जीत जीत देसेस्वर लीए ॥

jeet jeet dhesesavair le'ee ||

ਬਾਜਮੇਧ ਬਹੁ ਬਾਰਨ ਕਰੇ ॥

बाजमेध बहु बारन करे ॥

baajamedh bahu baaran kare ||

ਸਕਲ ਕਲੂਖ ਨਿਜ ਕੁਲ ਕੇ ਹਰੇ ॥੩੨॥

सकल कलूख निज कुल के हरे ॥३२॥

sakal kalookh nij kul ke hare ||32||


ਬਹੁਤ ਬੰਸ ਮੈ ਬਢੋ ਬਿਖਾਧਾ ॥

बहुत बंस मै बढो बिखाधा ॥

bahut ba(n)s mai baddo bikhaadhaa ||

ਮੇਟ ਨ ਸਕਾ ਕੋਊ ਤਿਹ ਸਾਧਾ ॥

मेट न सका कोऊ तिह साधा ॥

meT na sakaa kouoo teh saadhaa ||

ਬਿਚਰੇ ਬੀਰ ਬਨੈਤ ਅਖੰਡਲ ॥

बिचरे बीर बनैत अखंडल ॥

bichare beer banait akha(n)ddal ||

ਗਹਿ ਗਹਿ ਚਲੇ ਭਿਰਨ ਰਨ ਮੰਡਲ ॥੩੩॥

गहि गहि चले भिरन रन मंडल ॥३३॥

geh geh chale bhiran ran ma(n)ddal ||33||


ਧਨ ਅਰ ਭੂਮਿ ਪੁਰਾਤਨ ਬੈਰਾ ॥

धन अर भूमि पुरातन बैरा ॥

dhan ar bhoom puraatan bairaa ||

ਜਿਨ ਕਾ ਮੂਆ ਕਰਤ ਜਗ ਘੇਰਾ ॥

जिन का मूआ करत जग घेरा ॥

jin kaa mooaa karat jag gheraa ||

ਮੋਹ ਬਾਦ ਅਹੰਕਾਰ ਪਸਾਰਾ ॥

मोह बाद अहंकार पसारा ॥

moh baadh aha(n)kaar pasaaraa ||

ਕਾਮ ਕ੍ਰੋਧ ਜੀਤਾ ਜਗ ਸਾਰਾ ॥੩੪॥

काम क्रोध जीता जग सारा ॥३४॥

kaam krodh jeetaa jag saaraa ||34||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਧੰਨਿ ਧੰਨਿ ਧਨ ਕੋ ਭਾਖੀਐ ਜਾ ਕਾ ਜਗਤੁ ਗੁਲਾਮੁ ॥

धंनि धंनि धन को भाखीऐ जा का जगतु गुलामु ॥

dha(n)n dha(n)n dhan ko bhaakheeaai jaa kaa jagat gulaam ||

ਸਭ ਨਿਰਖਤ ਯਾ ਕੌ ਫਿਰੈ ਸਭ ਚਲ ਕਰਤ ਸਲਾਮ ॥੩੫॥

सभ निरखत या कौ फिरै सभ चल करत सलाम ॥३५॥

sabh nirakhat yaa kau firai sabh chal karat salaam ||35||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਕਾਲ ਨ ਕੋਊ ਕਰਨ ਸੁਮਾਰਾ ॥

काल न कोऊ करन सुमारा ॥

kaal na kouoo karan sumaaraa ||

ਬੈਰ ਬਾਦ ਅਹੰਕਾਰ ਪਸਾਰਾ ॥

बैर बाद अहंकार पसारा ॥

bair baadh aha(n)kaar pasaaraa ||

ਲੋਭ ਮੂਲ ਇਹਿ ਜਗ ਕੋ ਹੂਆ ॥

लोभ मूल इहि जग को हूआ ॥

lobh mool ieh jag ko hooaa ||

ਜਾ ਸੋ ਚਾਹਤ ਸਭੈ ਕੋ ਮੂਆ ॥੩੬॥

जा सो चाहत सभै को मूआ ॥३६॥

jaa so chaahat sabhai ko mooaa ||36||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸੁਭ ਬੰਸ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਦੁਤੀਆ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤ ਮਸਤੁ ਸੁਭ ਮਸਤੁ ॥੨॥ਅਫਜੂ॥੧੩੭॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सुभ बंस बरननं नाम दुतीआ धिआइ समापत मसतु सुभ मसतु ॥२॥अफजू॥१३७॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the subh ba(n)s baranana(n) naam dhuteeaa dhiaai samaapat masat subh masat ||2||afajoo||137||



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