Pt 14, Bachitar Natak (P:10),
ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ (ਪਾਤਿਸਾਹੀ 10),
बचित्र नाटक (पातिसाही 10)


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ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਸਰਬ ਕਾਲ ਸਭ ਸਾਧ ਉਬਾਰੇ ॥

सरब काल सभ साध उबारे ॥

sarab kaal sabh saadh ubaare ||

ਦੁਖੁ ਦੈ ਕੈ ਦੋਖੀ ਸਭ ਮਾਰੇ ॥

दुखु दै कै दोखी सभ मारे ॥

dhukh dhai kai dhokhee sabh maare ||

ਅਦਭੁਤਿ ਗਤਿ ਭਗਤਨ ਦਿਖਰਾਈ ॥

अदभुति गति भगतन दिखराई ॥

adhabhut gat bhagatan dhikharaiee ||

ਸਭ ਸੰਕਟ ਤੇ ਲਏ ਬਚਾਈ ॥੧॥

सभ संकट ते लए बचाई ॥१॥

sabh sa(n)kaT te le bachaiee ||1||


ਸਭ ਸੰਕਟ ਤੇ ਸੰਤ ਬਚਾਏ ॥

सभ संकट ते संत बचाए ॥

sabh sa(n)kaT te sa(n)t bachaae ||

ਸਭ ਕੰਟਕ ਕੰਟਕ ਜਿਮ ਘਾਏ ॥

सभ कंटक कंटक जिम घाए ॥

sabh ka(n)Tak ka(n)Tak jim ghaae ||

ਦਾਸ ਜਾਨ ਮੁਹਿ ਕਰੀ ਸਹਾਇ ॥

दास जान मुहि करी सहाइ ॥

dhaas jaan muh karee sahai ||

ਆਪ ਹਾਥੁ ਦੈ ਲਯੋ ਬਚਾਇ ॥੨॥

आप हाथु दै लयो बचाइ ॥२॥

aap haath dhai layo bachai ||2||


ਅਬ ਜੋ ਜੋ ਮੈਂ ਲਖੇ ਤਮਾਸਾ ॥

अब जो जो मैं लखे तमासा ॥

ab jo jo mai(n) lakhe tamaasaa ||

ਸੋ ਸੋ ਕਰੋ ਤੁਮੈ ਅਰਦਾਸਾ ॥

सो सो करो तुमै अरदासा ॥

so so karo tumai aradhaasaa ||

ਜੋ ਪ੍ਰਭ ਕਿਰਪਾ ਕਟਾਛ ਦਿਖੈਹੈ ॥

जो प्रभ किरपा कटाछ दिखैहै ॥

jo prabh kirapaa kaTaachh dhikhaihai ||

ਸੋ ਤਵ ਦਾਸ ਉਚਾਰਤ ਜੈਹੈ ॥੩॥

सो तव दास उचारत जैहै ॥३॥

so tav dhaas uchaarat jaihai ||3||


ਜਿਹ ਜਿਹ ਬਿਧ ਮੈ ਲਖੇ ਤਮਾਸਾ ॥

जिह जिह बिध मै लखे तमासा ॥

jeh jeh bidh mai lakhe tamaasaa ||

ਚਾਹਤ ਤਿਨ ਕੋ ਕੀਯੋ ਪ੍ਰਕਾਸਾ ॥

चाहत तिन को कीयो प्रकासा ॥

chaahat tin ko keeyo prakaasaa ||

ਜੋ ਜੋ ਜਨਮ ਪੂਰਬਲੇ ਹੇਰੇ ॥

जो जो जनम पूरबले हेरे ॥

jo jo janam poorabale here ||

ਕਹਿਹੋ ਸੁ ਪ੍ਰਭੁ ਪਰਾਕ੍ਰਮ ਤੇਰੇ ॥੪॥

कहिहो सु प्रभु पराक्रम तेरे ॥४॥

kahiho su prabh paraakram tere ||4||


ਸਰਬ ਕਾਲ ਹੈ ਪਿਤਾ ਅਪਾਰਾ ॥

सरब काल है पिता अपारा ॥

sarab kaal hai pitaa apaaraa ||

ਦੇਬਿ ਕਾਲਿਕਾ ਮਾਤ ਹਮਾਰਾ ॥

देबि कालिका मात हमारा ॥

dheb kaalikaa maat hamaaraa ||

ਮਨੂਆ ਗੁਰ ਮੁਰਿ ਮਨਸਾ ਮਾਈ ॥

मनूआ गुर मुरि मनसा माई ॥

manooaa gur mur manasaa maiee ||

ਜਿਨਿ ਮੋ ਕੋ ਸੁਭ ਕ੍ਰਿਆ ਪੜ੍ਹਾਈ ॥੫॥

जिनि मो को सुभ कृआ पड़्हाई ॥५॥

jin mo ko subh kriaa paRhaiee ||5||


ਜਬ ਮਨਸਾ ਮਨ ਮਯਾ ਬਿਚਾਰੀ ॥

जब मनसा मन मया बिचारी ॥

jab manasaa man mayaa bichaaree ||

ਗੁਰੁ ਮਨੂਆ ਕਹ ਕਹਿਯੋ ਸੁਧਾਰੀ ॥

गुरु मनूआ कह कहियो सुधारी ॥

gur manooaa keh kahiyo sudhaaree ||

ਜੇ ਜੇ ਚਰਿਤ ਪੁਰਾਤਨ ਲਹੇ ॥

जे जे चरित पुरातन लहे ॥

je je charit puraatan lahe ||

ਤੇ ਤੇ ਅਬ ਚਹੀਅਤ ਹੈ ਕਹੇ ॥੬॥

ते ते अब चहीअत है कहे ॥६॥

te te ab chaheeat hai kahe ||6||


ਸਰਬ ਕਾਲ ਕਰਣਾ ਤਬ ਭਰੇ ॥

सरब काल करणा तब भरे ॥

sarab kaal karanaa tab bhare ||

ਸੇਵਕ ਜਾਨਿ ਦਯਾ ਰਸ ਢਰੇ ॥

सेवक जानि दया रस ढरे ॥

sevak jaan dhayaa ras ddare ||

ਜੋ ਜੋ ਜਨਮ ਪੁਰਬਲੋ ਭਯੋ ॥

जो जो जनम पुरबलो भयो ॥

jo jo janam purabalo bhayo ||

ਸੋ ਸੋ ਸਭ ਸਿਮਰਣ ਕਰ ਦਯੋ ॥੭॥

सो सो सभ सिमरण कर दयो ॥७॥

so so sabh simaran kar dhayo ||7||


ਮੋ ਕੌ ਇਤੀ ਹੁਤੀ ਕਹ ਸੁੱਧੰ ॥

मो कौ इती हुती कह सुद्धं ॥

mo kau itee hutee keh su'dha(n) ||

ਜਸ ਪ੍ਰਭ ਦਈ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਿ ਬੁੱਧੰ ॥

जस प्रभ दई कृपा करि बुद्धं ॥

jas prabh dhiee kirapaa kar bu'dha(n) ||

ਸਰਬ ਕਾਲ ਤਬ ਭਏ ਦਇਆਲਾ ॥

सरब काल तब भए दइआला ॥

sarab kaal tab bhe dhiaalaa ||

ਲੋਹ ਰਛ ਹਮ ਕੋ ਸਬ ਕਾਲਾ ॥੮॥

लोह रछ हम को सब काला ॥८॥

loh rachh ham ko sab kaalaa ||8||


ਸਰਬ ਕਾਲ ਰੱਛਾ ਸਬ ਕਾਲ ॥

सरब काल रच्छा सब काल ॥

sarab kaal ra'chhaa sab kaal ||

ਲੋਹ ਰੱਛ ਸਰਬਦਾ ਬਿਸਾਲ ॥

लोह रच्छ सरबदा बिसाल ॥

loh ra'chh sarabadhaa bisaal ||

ਢੀਠ ਭਯੋ ਤਵ ਕ੍ਰਿਪਾ ਲਖਾਈ ॥

ढीठ भयो तव कृपा लखाई ॥

ddeeTh bhayo tav kirapaa lakhaiee ||

ਐਂਡੋ ਫਿਰੇ ਸਭਨ ਭਯੋ ਰਾਈ ॥੯॥

ऐंडो फिरे सभन भयो राई ॥९॥

aai(n)ddo fire sabhan bhayo raiee ||9||


ਜਿਹ ਜਿਹ ਬਿਧ ਜਨਮਨ ਸੁਧਿ ਆਈ ॥

जिह जिह बिध जनमन सुधि आई ॥

jeh jeh bidh janaman sudh aaiee ||

ਤਿਮ ਤਿਮ ਕਹੇ ਗਿਰੰਥ ਬਨਾਈ ॥

तिम तिम कहे गिरंथ बनाई ॥

tim tim kahe gira(n)th banaiee ||

ਪ੍ਰਥਮੇ ਸਤਿਜੁਗ ਜਿਹ ਬਿਧਿ ਲਹਾ ॥

प्रथमे सतिजुग जिह बिधि लहा ॥

prathame satijug jeh bidh lahaa ||

ਪ੍ਰਥਮੇ ਦੇਬਿ ਚਰਿਤ੍ਰ ਕੋ ਕਹਾ ॥੧੦॥

प्रथमे देबि चरित्र को कहा ॥१०॥

prathame dheb charitr ko kahaa ||10||


ਪਹਿਲੇ ਚੰਡੀ ਚਰਿਤ੍ਰ ਬਨਾਯੋ ॥

पहिले चंडी चरित्र बनायो ॥

pahile cha(n)ddee charitr banaayo ||

ਨਖ ਸਿਖ ਤੇ ਕ੍ਰਮ ਭਾਖ ਸੁਨਾਯੋ ॥

नख सिख ते क्रम भाख सुनायो ॥

nakh sikh te kram bhaakh sunaayo ||

ਛੋਰ ਕਥਾ ਤਬ ਪ੍ਰਥਮ ਸੁਨਾਈ ॥

छोर कथा तब प्रथम सुनाई ॥

chhor kathaa tab pratham sunaiee ||

ਅਬ ਚਾਹਤ ਫਿਰਿ ਕਰੋਂ ਬਡਾਈ ॥੧੧॥

अब चाहत फिरि करों बडाई ॥११॥

ab chaahat fir karo(n) baddaiee ||11||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸਰਬ ਕਾਲ ਕੀ ਬੇਨਤੀ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਚੌਦਸਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤ ਮਸਤੁ ਸੁਭ ਮਸਤੁ ॥੧੪॥ਅਫਜੂ॥੪੭੧॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे सरब काल की बेनती बरननं नाम चौदसमो धिआइ समापत मसतु सुभ मसतु ॥१४॥अफजू॥४७१॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the sarab kaal kee benatee baranana(n) naam chauadhasamo dhiaai samaapat masat subh masat ||14||afajoo||471||



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