Pt 13, Bachitar Natak (P:10),
ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ (ਪਾਤਿਸਾਹੀ 10),
बचित्र नाटक (पातिसाही 10)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


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ਸਹਜਾਦੇ ਕੋ ਆਗਮਨ ਮਦ੍ਰ ਦੇਸ ॥

सहजादे को आगमन मद्र देस ॥

sahajaadhe ko aagaman madhr dhes ||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਇਹ ਬਿਧਿ ਸੋ ਬਧ ਭਯੋ ਜੁਝਾਰਾ ॥

इह बिधि सो बध भयो जुझारा ॥

eeh bidh so badh bhayo jujhaaraa ||

ਆਨ ਬਸੇ ਤਬ ਧਾਮ ਲੁਝਾਰਾ ॥

आन बसे तब धाम लुझारा ॥

aan base tab dhaam lujhaaraa ||

ਤਬ ਅਉਰੰਗ ਮਨ ਮਾਹਿ ਰਿਸਾਵਾ ॥

तब अउरंग मन माहि रिसावा ॥

tab aaura(n)g man maeh risaavaa ||

ਮੱਦ੍ਰ ਦੇਸ ਕੋ ਪੂਤ ਪਠਾਵਾ ॥੧॥

मद्द्र देस को पूत पठावा ॥१॥

ma'dhr dhes ko poot paThaavaa ||1||


ਤਿੱਹ ਆਵਤ ਸਭ ਲੋਕ ਡਰਾਨੇ ॥

तिह्ह आवत सभ लोक डराने ॥

ti'h aavat sabh lok ddaraane ||

ਬਡੇ ਬਡੇ ਗਿਰ ਹੇਰ ਲੁਕਾਨੇ ॥

बडे बडे गिर हेर लुकाने ॥

badde badde gir her lukaane ||

ਹਮਹੂੰ ਲੋਗਨ ਅਧਿਕ ਡਰਾਯੋ ॥

हमहूँ लोगन अधिक डरायो ॥

hamahoo(n) logan adhik ddaraayo ||

ਕਾਲ ਕਰਮ ਕੋ ਮਰਮ ਨ ਪਾਯੋ ॥੨॥

काल करम को मरम न पायो ॥२॥

kaal karam ko maram na paayo ||2||


ਕਿਤਕ ਲੋਕ ਤਜਿ ਸੰਗਿ ਸਿਧਾਰੇ ॥

कितक लोक तजि संगि सिधारे ॥

kitak lok taj sa(n)g sidhaare ||

ਜਾਇ ਬਸੇ ਗਿਰਵਰ ਜਹਿ ਭਾਰੇ ॥

जाइ बसे गिरवर जहि भारे ॥

jai base giravar jeh bhaare ||

ਚਿਤ ਮੂਜੀਯਨ ਕੋ ਅਧਿਕ ਡਰਾਨਾ ॥

चित मूजीयन को अधिक डराना ॥

chit moojeeyan ko adhik ddaraanaa ||

ਤਿਨੈ ਉਬਾਰ ਨ ਅਪਨਾ ਜਾਨਾ ॥੩॥

तिनै उबार न अपना जाना ॥३॥

tinai ubaar na apanaa jaanaa ||3||


ਤਬ ਅਉਰੰਗ ਜੀਅ ਮਾਂਝ ਰਿਸਾਏ ॥

तब अउरंग जीअ माँझ रिसाए ॥

tab aaura(n)g jeea maa(n)jh risaae ||

ਏਕ ਅਹਦੀਆ ਈਹਾਂ ਪਠਾਏ ॥

एक अहदीआ ईहाँ पठाए ॥

ek ahadheeaa ieehaa(n) paThaae ||

ਹਮ ਤੇ ਭਾਜਿ ਬਿਮੁਖ ਜੇ ਗਏ ॥

हम ते भाजि बिमुख जे गए ॥

ham te bhaaj bimukh je ge ||

ਤਿਨ ਕੇ ਧਾਮ ਗਿਰਾਵਤ ਭਏ ॥੪॥

तिन के धाम गिरावत भए ॥४॥

tin ke dhaam giraavat bhe ||4||


ਜੇ ਅਪਨੇ ਗੁਰ ਤੇ ਮੁਖ ਫਿਰਹੈਂ ॥

जे अपने गुर ते मुख फिरहैं ॥

je apane gur te mukh firahai(n) ||

ਈਹਾਂ ਊਹਾਂ ਤਿਨ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਗਿਰਿਹੈਂ ॥

ईहाँ ऊहाँ तिन के गृह गिरिहैं ॥

e'eehaa(n) uoohaa(n) tin ke gireh girihai(n) ||

ਇਹਾਂ ਉਪਹਾਸ ਨ ਸੁਰ ਪੁਰ ਬਾਸਾ ॥

इहाँ उपहास न सुर पुर बासा ॥

eihaa(n) upahaas na sur pur baasaa ||

ਸਭ ਬਾਤਨ ਤੇ ਰਹੈ ਨਿਰਾਸਾ ॥੫॥

सभ बातन ते रहै निरासा ॥५॥

sabh baatan te rahai niraasaa ||5||


ਦੂਖ ਭੂਖ ਤਿਨ ਕੋ ਰਹੈ ਲਾਗੀ ॥

दूख भूख तिन को रहै लागी ॥

dhookh bhookh tin ko rahai laagee ||

ਸੰਤ ਸੇਵ ਤੇ ਜੋ ਹੈ ਤਿਆਗੀ ॥

संत सेव ते जो है तिआगी ॥

sa(n)t sev te jo hai tiaagee ||

ਜਗਤ ਬਿਖੈ ਕੋਈ ਕਾਮ ਨ ਸਰਹੀਂ ॥

जगत बिखै कोई काम न सरहीं ॥

jagat bikhai koiee kaam na sarahee(n) ||

ਅੰਤਹਿ ਕੁੰਡ ਨਰਕ ਕੀ ਪਰਹੀਂ ॥੬॥

अंतहि कुँड नरक की परहीं ॥६॥

a(n)teh ku(n)dd narak kee parahee(n) ||6||


ਤਿਨ ਕੋ ਸਦਾ ਜਗਤ ਉਪਹਾਸਾ ॥

तिन को सदा जगत उपहासा ॥

tin ko sadhaa jagat upahaasaa ||

ਅੰਤਹਿ ਕੁੰਡ ਨਰਕ ਕੀ ਬਾਸਾ ॥

अंतहि कुँड नरक की बासा ॥

a(n)teh ku(n)dd narak kee baasaa ||

ਗੁਰ ਪਗ ਤੇ ਜੇ ਬੇਮੁਖ ਸਿਧਾਰੇ ॥

गुर पग ते जे बेमुख सिधारे ॥

gur pag te je bemukh sidhaare ||

ਈਹਾਂ ਊਹਾ ਤਿਨ ਕੇ ਮੁਖ ਕਾਰੇ ॥੭॥

ईहाँ ऊहा तिन के मुख कारे ॥७॥

e'eehaa(n) uoohaa tin ke mukh kaare ||7||


ਪੁਤ੍ਰ ਪਉਤ੍ਰ ਤਿਨ ਕੇ ਨਹੀਂ ਫਰੈਂ ॥

पुत्र पउत्र तिन के नहीं फरैं ॥

putr pautr tin ke nahee(n) farai(n) ||

ਦੁਖ ਦੈ ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਕੋ ਮਰੈਂ ॥

दुख दै मात पिता को मरैं ॥

dhukh dhai maat pitaa ko marai(n) ||

ਗੁਰ ਦੋਖੀ ਸਗ ਕੀ ਮ੍ਰਿਤੁ ਪਾਵੈ ॥

गुर दोखी सग की मृतु पावै ॥

gur dhokhee sag kee mrit paavai ||

ਨਰਕ ਕੁੰਡ ਡਾਰੇ ਪਛੁਤਾਵੈ ॥੮॥

नरक कुँड डारे पछुतावै ॥८॥

narak ku(n)dd ddaare pachhutaavai ||8||


ਬਾਬੇ ਕੇ ਬਾਬਰ ਕੇ ਦੋਊ ॥

बाबे के बाबर के दोऊ ॥

baabe ke baabar ke dhouoo ||

ਆਪ ਕਰੇ ਪਰਮੇਸਰ ਸੋਊ ॥

आप करे परमेसर सोऊ ॥

aap kare paramesar souoo ||

ਦੀਨ ਸਾਹ ਇਨ ਕੋ ਪਹਿਚਾਨੋ ॥

दीन साह इन को पहिचानो ॥

dheen saeh in ko pahichaano ||

ਦੁਨੀ ਪੱਤਿ ਉਨ ਕੌ ਅਨੁਮਾਨੋ ॥੯॥

दुनी पत्ति उन कौ अनुमानो ॥९॥

dhunee pa't un kau anumaano ||9||


ਜੋ ਬਾਬੇ ਕੋ ਦਾਮ ਨ ਦੈਹੈਂ ॥

जो बाबे को दाम न दैहैं ॥

jo baabe ko dhaam na dhaihai(n) ||

ਤਿਨ ਤੇ ਗਹਿ ਬਾਬਰ ਕੇ ਲੈਹੈਂ ॥

तिन ते गहि बाबर के लैहैं ॥

tin te geh baabar ke laihai(n) ||

ਦੈ ਦੈ ਤਿਨ ਕੌ ਬਡੀ ਸਜਾਇ ॥

दै दै तिन कौ बडी सजाइ ॥

dhai dhai tin kau baddee sajai ||

ਪੁਨਿ ਲੈਹੈਂ ਗ੍ਰਿਹ ਲੂਟ ਬਨਾਇ ॥੧੦॥

पुनि लैहैं गृह लूट बनाइ ॥१०॥

pun laihai(n) gireh looT banai ||10||


ਜਬ ਹ੍ਵੈਹੈਂ ਬੇਮੁਖ ਬਿਨਾ ਧਨ ॥

जब ह्वैहैं बेमुख बिना धन ॥

jab havaihai(n) bemukh binaa dhan ||

ਤਬ ਚੜਿਹੈਂ ਸਿਖਨ ਕਹ ਮਾਂਗਨ ॥

तब चड़िहैं सिखन कह माँगन ॥

tab chaRihai(n) sikhan keh maa(n)gan ||

ਜੇ ਜੇ ਸਿਖ ਤਿਨੈ ਧਨ ਦੈਹੈਂ ॥

जे जे सिख तिनै धन दैहैं ॥

je je sikh tinai dhan dhaihai(n) ||

ਲੂਟ ਮਲੇਛ ਤਿਨੂ ਕੌ ਲੈਹੈਂ ॥੧੧॥

लूट मलेछ तिनू कौ लैहैं ॥११॥

looT malechh tinoo kau laihai(n) ||11||


ਜਬ ਹੁਇ ਹੈ ਤਿਨ ਦਰਬ ਬਿਨਾਸਾ ॥

जब हुइ है तिन दरब बिनासा ॥

jab hui hai tin dharab binaasaa ||

ਤਬ ਧਰਿਹੈ ਨਿਜ ਗੁਰ ਕੀ ਆਸਾ ॥

तब धरिहै निज गुर की आसा ॥

tab dharihai nij gur kee aasaa ||

ਜਬ ਤੇ ਗੁਰ ਦਰਸਨ ਕੋ ਐਹੈਂ ॥

जब ते गुर दरसन को ऐहैं ॥

jab te gur dharasan ko aaihai(n) ||

ਤਬ ਤਿਨ ਕੋ ਗੁਰ ਮੁਖ ਨ ਲਗੈਹੈਂ ॥੧੨॥

तब तिन को गुर मुख न लगैहैं ॥१२॥

tab tin ko gur mukh na lagaihai(n) ||12||


ਬਿਦਾ ਬਿਨਾ ਜੈਹੈਂ ਤਬ ਧਾਮੰ ॥

बिदा बिना जैहैं तब धामं ॥

bidhaa binaa jaihai(n) tab dhaama(n) ||

ਸਰਿਹੈ ਕੋਈ ਨ ਤਿਨ ਕੋ ਕਾਮੰ ॥

सरिहै कोई न तिन को कामं ॥

sarihai koiee na tin ko kaama(n) ||

ਗੁਰ ਦਰ ਢੋਈ ਨ ਪ੍ਰਭ ਪੁਰ ਵਾਸਾ ॥

गुर दर ढोई न प्रभ पुर वासा ॥

gur dhar ddoiee na prabh pur vaasaa ||

ਦੁਹੂੰ ਠਉਰ ਤੇ ਰਹੇ ਨਿਰਾਸਾ ॥੧੩॥

दुहूँ ठउर ते रहे निरासा ॥१३॥

dhuhoo(n) Thaur te rahe niraasaa ||13||


ਜੇ ਜੇ ਗੁਰ ਚਰਨਨ ਰਤ ਹ੍ਵੈਹੈਂ ॥

जे जे गुर चरनन रत ह्वैहैं ॥

je je gur charanan rat havaihai(n) ||

ਤਿਨ ਕੋ ਕਸਟ ਨ ਦੇਖਨ ਪੈਹੈਂ ॥

तिन को कसट न देखन पैहैं ॥

tin ko kasaT na dhekhan paihai(n) ||

ਰਿਧ ਸਿਧ ਤਿਨ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਮਾਹੀਂ ॥

रिध सिध तिन के गृह माहीं ॥

ridh sidh tin ke gireh maahee(n) ||

ਪਾਪ ਤਾਪ ਛ੍ਵੈ ਸਕੈ ਨ ਛਾਹੀਂ ॥੧੪॥

पाप ताप छ्वै सकै न छाहीं ॥१४॥

paap taap chhavai sakai na chhaahee(n) ||14||


ਤਿਹ ਮਲੇਛ ਛ੍ਵੈਹੈ ਨਹੀਂ ਛਾਹਾਂ ॥

तिह मलेछ छ्वैहै नहीं छाहाँ ॥

teh malechh chhavaihai nahee(n) chhaahaa(n) ||

ਅਸਟ ਸਿਧ ਹ੍ਵੈ ਹੈ ਘਰਿ ਮਾਹਾਂ ॥

असट सिध ह्वै है घरि माहाँ ॥

asaT sidh havai hai ghar maahaa(n) ||

ਹਾਸ ਕਰਤ ਜੋ ਉਦਮ ਉਠੈਹੈਂ ॥

हास करत जो उदम उठैहैं ॥

haas karat jo udham uThaihai(n) ||

ਨਵੋ ਨਿਧਿ ਤਿਨ ਕੇ ਘਰਿ ਐਹੈਂ ॥੧੫॥

नवो निधि तिन के घरि ऐहैं ॥१५॥

navo nidh tin ke ghar aaihai(n) ||15||


ਮਿਰਜਾ ਬੇਗ ਹੁਤੋ ਤਿਹ ਨਾਮੰ ॥

मिरजा बेग हुतो तिह नामं ॥

mirajaa beg huto teh naama(n) ||

ਜਿਨ ਢਾਹੇ ਬੇਮੁਖਨ ਕੇ ਧਾਮੰ ॥

जिन ढाहे बेमुखन के धामं ॥

jin ddaahe bemukhan ke dhaama(n) ||

ਸਭ ਸਨਮੁਖ ਗੁਰ ਆਪ ਬਚਾਏ ॥

सभ सनमुख गुर आप बचाए ॥

sabh sanamukh gur aap bachaae ||

ਤਿਨ ਕੇ ਬਾਰ ਨ ਬਾਂਕਨ ਪਾਏ ॥੧੬॥

तिन के बार न बाँकन पाए ॥१६॥

tin ke baar na baa(n)kan paae ||16||


ਉਤ ਅਉਰੰਗ ਜੀਅ ਅਧਿਕ ਰਿਸਾਯੋ ॥

उत अउरंग जीअ अधिक रिसायो ॥

aut aaura(n)g jeea adhik risaayo ||

ਚਾਰ ਅਹਦੀਯਨ ਅਉਰ ਪਠਾਯੋ ॥

चार अहदीयन अउर पठायो ॥

chaar ahadheeyan aaur paThaayo ||

ਜੇ ਬੇਮੁਖ ਤਾਂ ਤੇ ਬਚਿ ਆਏ ॥

जे बेमुख ताँ ते बचि आए ॥

je bemukh taa(n) te bach aae ||

ਤਿਨ ਕੇ ਗ੍ਰਿਹ ਪੁਨਿ ਇਨੈ ਗਿਰਾਏ ॥੧੭॥

तिन के गृह पुनि इनै गिराए ॥१७॥

tin ke gireh pun inai giraae ||17||


ਜੇ ਤਜਿ ਭਜੇ ਹੁਤੇ ਗੁਰ ਆਨਾ ॥

जे तजि भजे हुते गुर आना ॥

je taj bhaje hute gur aanaa ||

ਤਿਨ ਪੁਨਿ ਗੁਰੂ ਅਹਦੀਅਹਿ ਜਾਨਾ ॥

तिन पुनि गुरू अहदीअहि जाना ॥

tin pun guroo ahadhe'eeh jaanaa ||

ਮੂਤ੍ਰ ਡਾਰ ਤਿਨ ਸੀਸ ਮੁੰਡਾਏ ॥

मूत्र डार तिन सीस मुँडाए ॥

mootr ddaar tin sees mu(n)ddaae ||

ਪਾਹੁਰਿ ਜਾਨਿ ਗ੍ਰਿਹਹਿ ਲੈ ਆਏ ॥੧੮॥

पाहुरि जानि गृहहि लै आए ॥१८॥

paahur jaan giraheh lai aae ||18||


ਜੇ ਜੇ ਭਾਜ ਹੁਤੇ ਬਿਨੁ ਆਇਸੁ ॥

जे जे भाज हुते बिनु आइसु ॥

je je bhaaj hute bin aais ||

ਕਹੋ ਅਹਦੀਅਹਿ ਕਿਨੈ ਬਤਾਇਸੁ ॥

कहो अहदीअहि किनै बताइसु ॥

kaho ahadhe'eeh kinai batais ||

ਮੂੰਡ ਮੂੰਡਿ ਕਰਿ ਸਹਿਰ ਫਿਰਾਏ ॥

मूँड मूँडि करि सहिर फिराए ॥

moo(n)dd moo(n)dd kar sahir firaae ||

ਕਾਰ ਭੇਟ ਜਨੁ ਲੈਨ ਸਿਧਾਏ ॥੧੯॥

कार भेट जनु लैन सिधाए ॥१९॥

kaar bheT jan lain sidhaae ||19||


ਪਾਛੇ ਲਾਗਿ ਲਰਿਕਵਾ ਚਲੇ ॥

पाछे लागि लरिकवा चले ॥

paachhe laag larikavaa chale ||

ਜਾਨੁਕ ਸਿੱਖ ਸਖਾ ਹੈਂ ਭਲੇ ॥

जानुक सिक्ख सखा हैं भले ॥

jaanuk si'kh sakhaa hai(n) bhale ||

ਛਿੱਕੇ ਤੋਬਰਾ ਬਦਨ ਚੜਾਏ ॥

छिक्के तोबरा बदन चड़ाए ॥

chhi'ke tobaraa badhan chaRaae ||

ਜਨੁ ਗ੍ਰਿਹ ਖਾਨ ਮਲੀਦਾ ਆਏ ॥੨੦॥

जनु गृह खान मलीदा आए ॥२०॥

jan gireh khaan maleedhaa aae ||20||


ਮਸਤਕ ਸੁਭੇ ਪਨਹੀਯਨ ਘਾਇ ॥

मसतक सुभे पनहीयन घाइ ॥

masatak subhe panaheeyan ghai ||

ਜਨੁ ਕਰਿ ਟੀਕਾ ਦਏ ਬਨਾਇ ॥

जनु करि टीका दए बनाइ ॥

jan kar Teekaa dhe banai ||

ਸੀਸ ਈਟ ਕੇ ਘਾਇ ਕਰੇਹੀ ॥

सीस ईट के घाइ करेही ॥

sees ieeT ke ghai karehee ||

ਜਨੁ ਤਿਨੁ ਭੇਟ ਪੁਰਾਤਨ ਦੇਹੀ ॥੨੧॥

जनु तिनु भेट पुरातन देही ॥२१॥

jan tin bheT puraatan dhehee ||21||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਕਬਹੂੰ ਰਣ ਜੂਝਿਓ ਨਹੀ ਕਛੁ ਦੈ ਜਸੁ ਨਹਿ ਲੀਨ ॥

कबहूँ रण जूझिओ नही कछु दै जसु नहि लीन ॥

kabahoo(n) ran joojhio nahee kachh dhai jas neh leen ||

ਗਾਂਵ ਬਸਤ ਜਾਨਿਯੋ ਨਹੀ ਜਮ ਸੋ ਕਿਨ ਕਹਿ ਦੀਨ ॥੨੨॥

गाँव बसत जानियो नही जम सो किन कहि दीन ॥२२॥

gaa(n)v basat jaaniyo nahee jam so kin keh dheen ||22||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||

ਇਹ ਬਿਧਿ ਤਿਨੋ ਭਯੋ ਉਪਹਾਸਾ ॥

इह बिधि तिनो भयो उपहासा ॥

eeh bidh tino bhayo upahaasaa ||

ਸਭ ਸੰਤਨ ਮਿਲਿ ਲਖਿਓ ਤਮਾਸਾ ॥

सभ संतन मिलि लखिओ तमासा ॥

sabh sa(n)tan mil lakhio tamaasaa ||

ਸੰਤਨ ਕਸਟ ਨ ਦੇਖਨ ਪਾਯੋ ॥

संतन कसट न देखन पायो ॥

sa(n)tan kasaT na dhekhan paayo ||

ਆਪ ਹਾਥ ਦੈ ਨਾਥ ਬਚਾਯੋ ॥੨੩॥

आप हाथ दै नाथ बचायो ॥२३॥

aap haath dhai naath bachaayo ||23||


ਚਾਰਣੀ ॥ ਦੋਹਰਾ ॥

चारणी ॥ दोहरा ॥

chaaranee || dhoharaa ||

ਜਿਸ ਨੋ ਸਾਜਨ ਰਾਖਸੀ ਦੁਸਮਨ ਕਵਨ ਬਿਚਾਰ ॥

जिस नो साजन राखसी दुसमन कवन बिचार ॥

jis no saajan raakhasee dhusaman kavan bichaar ||

ਛ੍ਵੈ ਨ ਸਕੈ ਤਿਹ ਛਾਹਿ ਕੌ ਨਿਹਫਲ ਜਾਇ ਗਵਾਰ ॥੨੪॥

छ्वै न सकै तिह छाहि कौ निहफल जाइ गवार ॥२४॥

chhavai na sakai teh chhaeh kau nihafal jai gavaar ||24||


ਜੋ ਸਾਧੂ ਸਰਣੀ ਪਰੇ ਤਿਨ ਕੇ ਕਵਨ ਬਿਚਾਰ ॥

जो साधू सरणी परे तिन के कवन बिचार ॥

jo saadhoo saranee pare tin ke kavan bichaar ||

ਦੰਤ ਜੀਭ ਜਿਮ ਰਾਖਿ ਹੈ ਦੁਸਟ ਅਰਿਸਟ ਸੰਘਾਰ ॥੨੫॥

दंत जीभ जिम राखि है दुसट अरिसट संघार ॥२५॥

dha(n)t jeebh jim raakh hai dhusaT arisaT sa(n)ghaar ||25||


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕ ਗ੍ਰੰਥੇ ਸ਼ਾਹਜ਼ਾਦੇ ਵ ਅਹਿਦੀਆ ਗਮਨ ਬਰਨਨੰ ਨਾਮ ਤ੍ਰੌਦਸਮੋ ਧਿਆਇ ਸਮਾਪਤ ਮਸਤੁ ਸੁਭ ਮਸਤੁ ॥੧੩॥ਅਫਜੂ॥੪੬੦॥

इति स्री बचित्र नाटक ग्रंथे शाहज़ादे व अहिदीआ गमन बरननं नाम त्रौदसमो धिआइ समापत मसतु सुभ मसतु ॥१३॥अफजू॥४६०॥

eit sree bachitr naaTak gra(n)the shaahazaadhe v ahidheeaa gaman baranana(n) naam trauadhasamo dhiaai samaapat masat subh masat ||13||afajoo||460||



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